दोस्तों संसद के 20 दिन मानसून सत्र के 20 दिन बड़े तूफानी थे गुजरात लॉबी के लिए। लेकिन यह 20 दिन किसी तरह से मोदी [संगीत] शाह ने गुजार लिए। लेकिन असली इम्तिहान द बिगेस्ट टेस्ट मोदी और शाह का अब आने वाला है। और अगर इस इम्तिहान में मोदी फेल हो गए तो बहुत जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं कि फिर मोदी की कुर्सी को कोई बचा नहीं सकता। और दोस्तों ये जो इम्तिहान है ये 6 महीने बाद आने जा रहा है। सिर्फ 6 महीने बाद सिक्स मंथ्स लेटर ओनली सिक्स मंथ्स और इम्तिहान है देश के
सबसे बड़े सूबे का चुनाव यूपी का चुनाव और अगर यह मोदी के हाथ से निकला, बीजेपी के हाथ से निकला तो फिर दिल्ली दरबार में क्या होने जा रहा है? यह फिर आप भी जानते हैं, [संगीत] मोदी शाह भी जानते हैं। अब दोस्तों, यूपी चुनाव के बारे में मैं कोई भविष्यवाणी नहीं कर रहा हूं। बल्कि यह बीजेपी का अपना असेसमेंट है। आरएसएस की अपनी रिपोर्ट है कि यूपी का जो चुनाव है फंसता चला जा रहा है। फंसता चला जा रहा है। और यह जो सच्चाई है मोदी को भी मालूम है। लखनऊ में योगी जी [संगीत]
को भी मालूम है। और सच्चाई यह है कि पिछले कुछ महीनों में कुछ इस तरह का घटनाक्रम रहा है कि बीजेपी चारों तरफ से मुसीबत में घिरती ही चली गई। अयोध्या से लेकर इथेनॉल तक और जजी के प्रदर्शन से लेकर बांकीपुर और दतिया के चुनाव तक बीजेपी गिरती चली जा रही है। और इसमें जो सबसे प्रमुख कारण है वो यह है कि बीजेपी का जो सवर्ण वोटर है, बीजेपी का जो बेस वोटर है उत्तर प्रदेश में वो खिसक रहा है। तो एक तरफ राम मंदिर में चंदा चोरी का मुद्दा जिसमें बीजेपी और आरएसएस पूरी तरह
से इनवॉल्व थी। मोदी एक शब्द नहीं बोल पाए और संसद के पूरे सत्र में सिर्फ दो [संगीत] ही मुद्दे थे। राम मंदिर की चंदा चोरी, अमित शाह और मोदी का गायब रहना, जेजी पर जो गोली चली, लाठी चली उस पर एक शब्द नहीं बोलना। लेकिन तीन और कारण हैं और ये कारण और भी ज्यादा गंभीर है जो इंपैक्ट करने जा रहे हैं। [संगीत] उत्तर प्रदेश के चुनाव का। नंबर एक कारण है कि पेट्रोल में जिस तरह से इथेनॉल मिलाया गया है जो मिडिल क्लास है जो बीजेपी का शहरी वोटर है वो सड़कों [संगीत] पर उतरा
हुआ है और ये कह सकते हैं कि ये ऐसी दुखती रग है कि मुझे अंदर के कुछ लोग बता रहे थे कि शायद आने वाले कुछ महीनों में एथेनॉल को लेकर कोई पॉलिसी स्टेटमेंट मोदी सरकार [संगीत] से आएगा। यानी मिडिल क्लास पहली बार सड़कों पर उतरी और इसी कड़ी से जुड़ा एक और कारण बीजेपी के कोर वोट को लेकर कि दतिया यानी मध्य प्रदेश में जो उपचुनाव हुए बांकीपुर [संगीत] पटना में बिहार में जो उपचुनाव हुए जिसमें प्रशांत किशोर जीते वहां 37% 37% सम वोटर था जो शिफ्ट हुआ है। मैं यह नहीं कह रहा हूं
कि 37 का 37 शिफ्ट हो गया। लेकिन 37% सवर्ण वोटर वाले सीट पर बीजेपी बुरी तरह हारी और दतिया जो एमपी की सीट है वहां भी जो संकेत मिल [संगीत] रहे हैं कि सवर्ण वोटरों का एक बड़ा चंक कांग्रेस की तरफ शिफ्ट किया। कांग्रेस की तरफ शिफ्ट किया और इससे भी बड़ा एक कारण जिससे नींद हिली हुई है योगी से लेकर मोदी तक की वो है उत्तर प्रदेश में [संगीत] ब्राह्मण वोटरों की भारी नाराजगी। अब जो ब्राह्मण वोटर है उत्तर प्रदेश में एक बड़ा चंक है। 7 से 9% बताया जाता है। हालांकि अभी कास्ट सेंसर्स
किसी के पास नहीं है। लेकिन उन्नाव से लेकर देवरिया तकरीबन ऐसी 135 सीटें हैं जहां ब्राह्मण वोटर निर्णायक है विधानसभा में। और ये जो वोटर है इसकी जो नाराजगी है इस सतह पर दिख रही साफ दिख रही है और शायद इसीलिए अखिलेश यादव को कहना पड़ा कि ये जो पीडीए है [संगीत] इस पीडीए का जो पीडी है इसका मतलब पंडित है। यानी कहीं ना कहीं बीजेपी अंदर से हिली हुई है। और मैं अभी राजस्थान के करणी आंदोलन का सवर्ण आंदोलन का तो जिक्र ही नहीं कर रहा हूं। जहां 1 लाख प्रदर्शनकारियों में जिसमें ब्राह्मण, [संगीत]
वैश्य और करणी सेना के ठाकुर थे उन पे लाठी चार्ज हुई। एक की मौत भी हो गई। मैं उस विषय पे जा ही नहीं रहा हूं। कुल मिलाकर मैं यह कह रहा हूं कि एक तरफ कोर वोट खिसक रहा है। दूसरी तरफ 50% जेन अल्फा और जेनजी ये जो वोटर है बड़ी संख्या में जो वोटर हैं वो पूरी तरह से नाराज हैं। एथनॉल का जो मामला है मिडिल क्लास नाराज है और दूसरी तरफ राम मंदिर की जो चंदा चोरी है उसने आहत कर दिया है बीजेपी के अपने वोटरों को। अब दोस्तों यह तो बात थी
उन घटनाओं की उन इवेंट्स की जिसने बीजेपी की इमेज को बीजेपी के वोट बैंक को डेंट किया चोट किया है। लेकिन अगर आप चुनावी आंकड़ों की बात करते हैं। स्टैटिस्टिक्स की अगर हम बात करते हैं तो सबसे ताजा चुनाव जो बड़ा चुनाव यूपी में हुआ वो लोकसभा का चुनाव था 2024 का। उससे पहले 2022 में विधानसभा का चुनाव था। अगर हम 2024 के इस चुनाव को देखते हैं, लोकसभा के चुनाव को देखते हैं, 2 साल पहले का चुनाव है [नाक से की जाने वाली आवाज़] तो इस चुनाव में सपा और कांग्रेस का पलड़ा भारी दिखा
और बीजेपी की यह हाल फिलहाल की वर्स्ट एवर परफॉर्मेंस थी। अगर आप आंकड़े देखें 2024 के 80 सीटें थी। इसमें बीजेपी को 33 सीटें मिली। मोदी जी अमित शाह 75 सीटों की बात कर रहे थे कि 80 में 75 सीट जीतेंगे। जीते कितने? आधे से भी कम। 33. सबसे डिसपॉइंटिंग रिजल्ट रहा। बीजेपी 33. अगर आप समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के आंकड़े देखते हैं, तो समाजवादी पार्टी ने सारे रिकॉर्ड तोड़े। 37 सीटें अखिलेश ने जीती। कांग्रेस ने छह कुल मिलाकर 43 43 सीटें इंडिया अलायंस के खाते में गई हैं। तो सीधे-सीधे मैं कहूं कि 80 में
से आधी से ज्यादा सीटें आधी से ज्यादा सीटें अखिलेश यादव और राहुल गांधी ने जीत ली। और अगर इनको आप ट्रांसलेट करते हैं असेंबली सीट्स में विधानसभा में तो तकरीबन 220 220 सीट्स पर इस वक्त कागज पे ऑन पेपर पड़ा किसका भारी है? इंडिया अलायंस का अखिलेश यादव का और राहुल गांधी का। अब दोस्तों अगर इन आंकड़ों को आप देखिए और फिर घटनाक्रम को देखिए जो इवेंट्स हुए हैं। कुल मिलाकर आप कह सकते हैं कि बीजेपी के हालात उत्तर प्रदेश में बहुत खराब हैं। और यह बात योगी समझ रहे हैं, मोदी समझ रहे हैं। इसीलिए
योगी 2 दिन पहले एक बहुत बड़ी स्कीम लेकर आए। एक ऐसी स्कीम जो हिंदुस्तान ने कभी देखी नहीं होगी। मतलब अभी तक हम चुनाव में जो स्कीम्स लाते थे फ्री बीस की पैसा देने की कोई ₹5,000 देता था, कोई ₹7,000 दे रहा था कोई सरकार। कोई ₹10,000 योगी जी ₹5,000 देने जा रहे हैं। जी हां। और मैं नहीं कह रहा हूं। अभी हाल में ही उनकी मीटिंग हुई। इस मीटिंग में तय हुआ है कि महिला वोटरों पर पैसे की बरसात होने जा रही है। यूपी विधानसभा चुनाव से पहले योगी सरकार महिलाओं को ₹500 की आर्थिक
मदद देने की योजना बना रही है। तो दोस्तों एक तरफ एक मेगा स्कीम बहुत बड़ी स्कीम जो हिंदुस्तान ने कभी देखी नहीं। ₹50 ₹ज़ महिलाओं को देने की जो बात हो रही है। हालांकि सारा ब्रेकअप बाद में सामने आएगा कि एक्चुअल स्कीम क्या है लेकिन रूपरेखा उसकी प्लानिंग तैयारी हो चुकी है। इसके अलावा बाकी तगड़म भी हैं। वोटर लिस्ट का तिगड़ मशीनों का मैनेजमेंट का छापों का पैसे का वो सब तो रहेगा लेकिन मैं कह रहा हूं कि हर तिगड़म के बावजूद जो इस वक्त यूपी में फीडबैक आ रही है। जिले जिले से फीडबैक। मैं
मिसाल के तौर पर गोरखपुर की बात करता हूं। जो योगी जी मुख्यमंत्री का गढ़ है गोरखपुर उस गोरखपुर में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पहुंचती हैं और योगी के सामने वहां के विश्वविद्यालयों में छात्रों की क्या स्थिति है पोल खोल देती हैं तो भ्रष्टाचार सिर्फ ऐसा नहीं है लखनऊ के आसपास है या बनारस में गोरखपुर कौन बता रहा है कौन पोल खोल रहा है मैं नहीं गवर्नर आनंदीबेन मोदी जी की खास आनंदीबेन वो पोल खोल रही है और यह स्थिति आपको हर जगह दिखेगी। बुंदेलखंड में भ्रष्टाचार है। भ्रष्टाचार इस वक्त अगर आप रोहेलखंड देखें, बरेली,
मुरादाबाद, रामपुर, सहारनपुर या आगे आप मेरठ बढ़ जाइए, गाजियाबाद बढ़ जाइए। रोज कोई ना कोई भ्रष्टाचार की खबर आ रही है। भले ही उसे गोदी मीडिया ना बताए। विपक्ष तो बता रहा है ना। उत्तर प्रदेश की सरकार अभी तक की सबसे करप्ट गवर्नमेंट मानी जाएगी। किसी भी दिन अखबार उठा करके देख लें आप। लेकिन दोस्तों, आते हैं असली सवाल पे। बिग क्वेश्चन और बिग क्वेश्चन क्या है? बिग क्वेश्चन जो मैंने शुरू में कहा था कि अगर इन सब तगड़मों के बावजूद जो हालात हैं जमीन पर अगर वाकई मशीनों का कोई बड़ा खेल नहीं होता है
तो जो हालात हैं वो ऐसा जाहिर कर रहे हैं कि मोदी जी और योगी जी चाहे एड़ी चोटी का जोर लगा दें उत्तर प्रदेश को जितनातना आसान नहीं है इस बार और अगर उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा सूबा मोदी जी के हाथ से निकला तो फिर आगे क्या होने जा रहा है लखनऊ की बात नहीं कर रहा हूं दिल्ली दरबार की बात कर रहा हूं फिर मोदी जी के लिए 2000 2029 तक का जो सफर है उनका जो कार्यकाल है वो पूरा कर पाएंगे या 2027 में जब ये रिजल्ट आएंगे मार्च में उसके बाद
2028 भी है क्या 28 तक टिक पाएंगे 2029 तक टिक पाएंगे क्या मोदी जी 2029 तक फिर सरकार चला पाएंगे और ये प्रश्न इसलिए इंपॉर्टेंट हो जाता है क्योंकि बीजेपी की एक बड़ी लॉबी जो गुजरात लॉबी के खिलाफ है वो इसी वक्त का इंतजार कर रही है इसी वक्त का इंतजार इस पर भी बात करेंगे यानी बगावत भी कहीं ना कहीं है। लेकिन कुल मिलाकर कुल मिलाकर अगर मिस्टर मोदी के हाथ से यूपी जाता है फिर अगला नंबर योगी छोड़िए मिस्टर मोदी का है। बड़ा सवाल है और आज इस सवाल पर मैंने एक ऐसे शख्स
को बुलाया है जो पिछले 50 वर्षों से जबरदस्त रिपोर्टिंग कर रहे हैं। हिंदुस्तान में बड़ा नाम कमाया उन्होंने। उत्तर प्रदेश के जावेद अंसारी इंडिया टुडे ग्रुप में रहे। द हिंदू जैसे अखबार में रहे, पॉलिटिकल एडिटर रहे, कई चैनल्स में रहे। आज जावेद अंसारी साहब को सुनिए। धीरे-धीरे बोलते हैं। लेकिन जो बोलते हैं उसमें गहराई होती है, सच्चाई होती है। तो वो साथ में होंगे। प्रोफेसर अखिल स्वामी 1975 में जयप्रकाश नारायण का जो मूवमेंट था उसमें शामिल थे वो। इमरजेंसी के टाइम में। आज भी सक्रिय हैं पूरी तरह से। काफी फीडबैक रहती है। जेजी एक बहुत
बड़ा रोल प्ले करने जा रही है उत्तर प्रदेश में। आधे वोटर 50% वोटर इस वक्त जजी हैं और जेन अल्फा है क्योंकि जेन अल्फा में 2029 तक कई ऐसे बच्चे होंगे जो 18 बरस के हो जाएंगे। जजी क्या करेगी? प्रोफेसर साहब से पूछा है प्रोफेसर साहब नरेंद्र मोदी और अमित शाह या यूं कहूं नरेंद्र मोदी अमित शाह योगी और बीजेपी और मोहन भागवत अगर उत्तर प्रदेश इनके हाथ से निकला 5 महीने बाद तो आपको क्या लगता है उल्टी गिनती काउंट डाउन शुरू हो जाएगा गुजरात लॉबी का देखिए दीपक जी ये जो उत्तर प्रदेश का चुनाव
5 महीने के बाद होना है विपक्ष के लिए भी प्रतिष्ठा का प्रश्न है और भारतीय जनता पार्टी के लिए भी प्रतिष्ठा का प्रश्न है और यही आज के तारीख में केंद्र बिंदु बना है क्योंकि अयोध्या भी यही है। राम जन्मभूमि के अंदर जो चोरी का मसला हुआ है वो भी यही हुआ है और जिस प्रकार से उत्तर प्रदेश के अंदर छात्रों का आंदोलन भी शुरू हो गया है। लेकिन यह लड़ाई जो उत्तर प्रदेश की है आपने देखा यह धनबल और जनल के बीच की है। देखिए योगी आदिनाथ ने भी शुरुआत कर दी है। इतने पैसे
बांटेंगे उतने पैसे बांटेंगे। अखिलेश यादव ने भी तैयारी कर ली है। तो उत्तर प्रदेश के चुनाव से बिल्कुल क्लियर हो जाएगा कि 2029 के पहले या 2029 के चुनाव के बाद मोदी जी रहेंगे कहां रहेंगे? अपोजिशन में लीडर अपोजिशन बनेंगे या सत्ता में रहेंगे। लेकिन यह बात बिल्कुल पक्की है कि उत्तर प्रदेश के लिए अखिलेश यादव और राहुल गांधी भी कसर नहीं छोड़ेंगे और इसके लिए भारतीय जनता पार्टी लेकिन योगी आदिनाथ और अमित शाह आपस की जो अदावत है और बहुत सारी चीजें हैं। ब्राह्मण नाराज हैं। फिर अब राजपूत भी नाराज हो गए। बृजभूषण शरण
सिंह के बारे में भी सुन रहे हैं। वो अखिलेश यादव से समझौता करने के लिए तैयार हैं। लेकिन योगी आदिनाथ भी पहले पैसे बांट देंगे महिलाओं में 20,000 500 उसके बाद इलेक्शन के बाद वापस ले लेंगे। लेकिन दोनों तरफ से इतनी तगड़ी तैयारी है। मेरे ख्याल से उत्तर प्रदेश लिटमस टेस्ट है और इससे पता चल जाएगा कि भारत की राजनीति क्या लेकिन छात्र आंदोलन जसी और जन अल्फा का आंदोलन भी उत्तर प्रदेश में तेजी पकड़ता जा रहा है। डीएम लोग जा रहे हैं। बच्चों की आवाज सुन रहे हैं। उनकी बातें मान रहे हैं। सड़क बनवा
रहे हैं। टीचर्स को अपॉइंट कर रहे हैं। उनके ट्रांसफर रोक रहे हैं। तो अब देखिए तैयारी पूरी दोनों तरफ से है। लेकिन उत्तर प्रदेश निर्णय लेगा। निर्णायक होगा कि इसके बाद की राजनीति कैसी होगी। जावेद साहब जो प्रोफेसर साहब ने कहा कि कांटे की टक्कर है इदर वे इधर भी कोई जीत सकता है उधर भी कोई जीत सकता है यानी बहुत क्लोज फाइट है मान लीजिए इस क्लोज फाइट में कांटे की टक्कर में बीजेपी के हाथ से उत्तर प्रदेश निकल गया तो क्या आपको लगता है दिल्ली दरबार हिल जाएगा मोदी की गद्दी हिल जाएगी सिंहासन
यकीनन डोलने लगेगा और 2029 के में फिर सर्वाइवल निहायत ही मुश्किल हो जाएगा। अगर आप 2024 का भी इलेक्शन का रिजल्ट देखें तो सिर्फ चंद सीटों का अगर 18 सीट या 20 सीट और इंडिया अलायंस को मिल गई होती तो मामला खेल खत्म था। आज भारत का प्रधानमंत्री कोई और होता और कल लाल किले से वो झंडा कोई और फहरा रहा होता। तो यह उत्तर प्रदेश का इलेक्शन इनकी वजूद के लिए लड़ाई है। इसलिए यह सारे अंत तंत्र पैसा हुवा सारा इस्तेमाल करेंगे। लेकिन देखिए मेरा जो थोड़ा बहुत तजुर्बा है वो यही कहता है जब
जनता मूड बना लेती है। जब आवाम अपना मुख मुंह मोड़ लेती है तो फिर बड़ा मुश्किल होता है। फिर सारे दुनिया की चीज की ताकत आप लगा दीजिए। अल्टीमेटली चाहे इलेक्शन कमीशन चाहे या ना चाहे अब मीडिया कोपरेट करे या ना करे जुडिशरी से कोई राहत मिले या ना मिले लेकिन जब जनता मूड बना लेती है तो निहायती मुश्किल होती है फिर कुछ भी हो सकता है ये हमने देखा था अभी जो जंतरमंतर में हुआ और अब और जो हम देख रहे दो महत्वपूर्ण मुद्दे विपक्ष के हाथ में है एक जो बच्चों के साथ दुर्व्यवहार
हुआ उनकी पिटाई आई हुई लड़कियों के साथ जो बदतमीजी बेहूदगी हुई और दूसरा यह चंदा चोरी हमारे आपके गृह प्रदेश में यह घर घर में ये एक इशू है घरघर पे हर नुकड़ पे हर चाय खाने पे इसकी चर्चा हो रही है लड़ाई भयंकर होगी संघर्ष महावीरचन होगा और अगर हाथ से फिसल गया तो फिर तो आप देखिएगा 2029 में क्या हाथ से हाथ से फिसल गया संघर्ष भीषण है। जावेद साहब कह रहे हैं संघर्ष भीषण है। वह व्यक्ति जो उत्तर प्रदेश की राजनीति पर जिनका 40 45 साल का शोध है रिसर्च है वो कह
रहे हैं कि संघर्ष भीषण है और अगर कांटे की टक्कर में मुकाबला पलटा मोदी के हाथ से यूपी निकला तो फिर सिंहासन डोल सकता है। प्रोफेसर साहब एक चीज मैं आपसे पूछना चाहूंगा। थे थोड़ा आप ही का सब्जेक्ट है क्योंकि आप उत्तर प्रदेश से हैं और 1975 में जयप्रकाश नारायण का मूवमेंट हुआ था इमरजेंसी में उसका आप झंडा लेके चल रहे थे और हमारा सौभाग्य है कि आज भी आप राजनीति में उतने ही सक्रिय मैं एक चीज जानना चाह रहा था कि उत्तर प्रदेश का जो ब्राह्मण है बड़ा डिसाइसिव वोट लोग कहते हैं कि 8
9% वहां पर पंडित है। पंडित योगी से नाराज है। पंडित बीजेपी का वोटर है ब्राह्मण। क्या आपको लग रहा है कि जिस तरह से अखिलेश यादव ने कहा कि ये जो पीडीए है इसका मतलब पीडीए का मतलब पीडीए पीडी मतलब पंडित और उन्होंने हवन भी कराया जनेश्वर मिश्रा के नाम पे। क्या पंडित खिसक रहा है पंडित दरक रहा है कांग्रेस की तरफ समाजवादी पार्टी की तरफ और अगर पंडित खिसका तो क्या बीजेपी की नीव खिसकेगी? बीजेपी बहुत नुकसान में जा सकती है। सिर्फ राजपूत बनिया नहीं बचा पाएंगे। देखिए दीपक जी ब्राह्मणों की एक आदत होती
है और उनके कैरेक्टर के अंदर होता है। उन्हें सम्मान की भूख होती है। उन्हें सम्मान चाहिए। आपको पता ही होगा चाणक्य जब नंद वंश के राजा के यहां गए थे और उनका अपमान हुआ था। अष्टावक्र का अपमान हुआ था। उसका क्या प्रतिफल हुआ था। तो देखिए आज उत्तर प्रदेश के अंदर क्योंकि योगी आदित्यनाथ ने ब्राह्मणों के साथ इतना अपमान किया है। रोज कहीं कत्ल हो जाता है। कहीं मर्डर हो जाता है। कहीं हरिशंकर तिवारी के बेटे विजय शंकर तिवारी के यहां इनकम टैक्स की रेड हो जाती है। राजपूत विधायक मीटिंग करते हैं। उनप कोई आपत्ति
नहीं होती। ब्राह्मण विधायक कर लेते हैं तो उनको नोटिस मिल जाती है। तो ब्राह्मण देखिए उनके पास कोई विकल्प नहीं है आज के तारीख में। या तो वो भारतीय जनता पार्टी को वोट देंगे या भारतीय जनता पार्टी को अगर वोट नहीं देंगे तो इंडिया अलायंस में जाएंगे। अच्छा उनके साथ अब एक समस्या और भी है क्योंकि ये ऐसा वोटर है जो इनफ्लुएंस करता है जो एक प्रकार से ओपिनियन बनाता है। अच्छा एक चीज को दीपक जी और इग्नोर मत कीजिए एक्स फैक्टर क्या है इलेक्शन का? 2027 के इलेक्शन में और 2029 में एक्स फैक्टर क्या
है? एक्स फैक्टर है जैन अल्फा और जैन जैन जी। इस जैन जी को जैन अल्फा को हिंदू मुसलमान से कोई लेना देना नहीं। इनको आज के तारीख में अगर आप देखें उत्तर प्रदेश में बिहार में मध्य प्रदेश में 12 13 साल की बच्चियां और मुझे खुशी होती है को एजुकेशन में लड़कियां लीडरशिप ले रही है। डीएम साहब खड़े होके चुप होकर बच्चियों की बात सुन रहे हैं और बच्चियां सुना रही है। इसका मतलब ये है ये जो जनरेशन है ये जो एक्स फैक्टर है ये एक्स फैक्टर अपने मां-बाप को भी कसम खिला के भेजेगा कि
जो सत्ता में बैठा था जिसने हमारी एजुकेशनल सिस्टम को खराब कर दिया था। हमारे टॉयलेट्स नहीं थे। टीचर्स क्लास में नहीं आते थे। तो देखिए यह जो एक्स फैक्टर है जो 30% वोटर फर्स्ट टाइम वोट करेगा यह बहुत बड़ा फैक्टर होगा और क्योंकि उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है तो उसका दंड इनके क्रोध का दंड उसको भुगतना पड़ेगा। जहांजहां डबल इंजन की सरकारी दंड भुतेगी। आप कह रहे हैं पंडित खिसक गया 9% उधर यादव सबसे बड़ी जो जाति है कास्ट है उत्तर प्रदेश वो अखिलेश के साथ है पूरी की पूरी। मुस्लिम 20
21% है वो सब है। दलित सब है। तो क्या जमानत जप्त कराने जा रहे हैं योगी जी की आप क्या? आप तो ऐसा बता रहे हैं। मुझे तो लग रहा है कि योगी की जमानत जप्त हो जाएगी। इतने में तो सभी जब चले गए तो बीजेपी के पास बचा क्या? भाई ओबीसी सारा का सारा अखिलेश के साथ यादव है, कुर्मी है। उधर आप कह रहे हैं कि साहब मुस्लिम भी है, पंडित भी हैं और आप कह रहे हैं एक्स फैक्टर 30% आपने यूथ भी दे दिया। तो स्वामी साहब क्या मानू? योगी की जमानत जप्त हो
जाएगी क्या? दीपक जी अगर ईमानदारी से चुनाव हो जाए और ज्ञानेश कुमार गुप्ता कोई मैजिकल हैंड ना चला दें तो आप यह समझिए 50 सीटें भारतीय जनता पार्टी को नहीं मिलेंग और आज अगर पूरे हिंदुस्तान का चुनाव हो जाए लोकसभा का दो सीटों पे जहां से भारतीय जनता पार्टी शुरू हुई थी वहीं पहुंच जाएंगे अभी तक तो चलिए राजपूत वोटों पे भारतीय जनता पार्टी ने बड़ी तवज्जो दी उत्तर प्रदेश के अंदर बृजभूषण शरण सिंह अगर अखिलेश यादव से समझौता करने की बात कर रहे हैं देखिए आज की तारीख में इनके पास वोटर ही नहीं है
वोट बैंक ही नहीं है और राम जन्मभूमि में चोरी का जो मुद्दा है वो सनातन धर्म मानने वालों को और हिंदुओं के ऊपर इतना बड़ा प्रभाव रखता है। कोई भी हिंदू यह मान सकता है कि अब सनातन को माने या ना माने मूर्ति पूजा करें या ना करें लेकिन मूर्ति पूजा करने वाले मूर्ति और मंदिर की चोरी कर ले इससे बड़ा कोई पाप नहीं हो सकता। भाई स्वामी साहब प्रोफेसर साहब आज डराने के मूड में आए हैं। आप आज डरा के मानेंगे आप। अह सोने नहीं देंगे आप योगी जी और मोदी जी को। भाई जावेद
साहब जरा आप रोशनी डालिए। प्रोफ़ेसर साहब ने तो मतलब ऐसा आंकड़ा दे दिया कि मतलब सुनके किसी को लगेगा एक तरफफ़ा मुकाबले कह रहे हैं पंडित भी खिसक रहा है। ये कह रहे हैं कि साहब जैन जी जो है वो भी खिसक रही है। क्या वाकई पंडित खिसक रहा है। वाकई पंडित नाराज है। क्या उसमें से छिटक के पीडीए का मतलब क्या? वाकई पंडित है पीडीए मतलब? यह देखिए यह ऐसी चीज है इसको आप पिछड़ा भी है, पंडित भी है, दलित भी है और अल्पसंख्यक भी है। मुस्लिम भी है। देखिए जावेद भाई बचा क्या? मैं
ये कह रहा हूं। नहीं नहीं देखिए देखिए इतना जल्दी उसप किसी निष्कर्ष पर मत पहुंच जाइए। ऑन पेपर अभी भी एनडीए अलायंस बीजेपी अलायंस ज्यादा स्ट्रांग है। ऑन पेपर ऐसा कह देना कि सारे दलित टूट के इधर आ गए। ऐसा नहीं पिछले इलेक्शन में भी बीजेपी को ज्यादा दलित वोट मिले थे। लेकिन जो सबसे बड़ी सेंध लगी है हिंदुस्तान की 50स 51 फीसदी आबादी बिलो द एज ऑफ़ 35 है 35 37 और बिलो है जिसमें से 50 करोड़ जैन जी है और 20 करोड़ जैन जैन अल्फा है जो जैन अल्फा है जो ऊन9 में वोट
देने लायक हो जाएगा तो जिनके कमर पे और जिनके पीछे पीछे डंडे बरसे गए हैं जो जो फिलहाल उनका मूड है प्रोफेसर साहब बिल्कुल सही कह रहे हैं। आज के दिन अगर इलेक्शन हो तो इनको बिल्कुल आटे और दाल का भाव पता चल जाएगा। लड़ाई अभी भी बहुत कठिन है। ये देखिए इन्होंने सारे अंततंत्र जो इलेक्शन में एक अहम भूमिका निभा सकते हैं उस पे कंट्रोल इनका अभी भी है। जो एक कंट्रोल जिस पे ये खो रहे हैं जिस चीज पे वो है जो सबसे वाइटल एस्पेक्ट है वो वो वोटर पे है। हिंदू नाराज है
जो आस्था वाले जो जो बिल्कुल इनके लिए कहते थे कि हम ₹00 लीटर देंगे पेट्रोल का दाम देंगे लेकिन हम इनको वोट करेंगे। उनकी भी आस्था को ठेस पहुंची और ये जो बच्चे हैं इनको ये जेंडर न्यूट्रल है धर्म न्यूट्रल है। इनको कोई लेना देना नहीं इन चीजों से। इसलिए इसीलिए नींद हराम है। इसीलिए पार्लियामेंट नहीं आ पा रहे हैं। जो पार्लियामेंट में तार ठोकते थे, सीना ठोक ठोक के बातें करते थे। अब वो सामने इसलिए नहीं आ रहे हैं कि क्या कहेंगे? कैसे जस्टिफाई करेंगे? एक बड़ा आंकड़ा जावेद साहब दे रहे हैं। बहुत ही
सीनियर पिटिकल एडिटर हैं इस देश के। ये कह रहे हैं कि अ जो जनरेशन जी है यानी जनरेशन जेन जी जिसे हम कहते हैं और जनरेशन अल्फा जेन अल्फा ये दोनों जो बच्चे हैं यानी 2012 के बाद जो पैदा हुए हैं और 1997 के बाद जो पैदा हुए हैं ये बच्चे इस वक्त 50% के लगभग हैं। तो आधा वोट इनके पास है और 2029 तक जैन अल्फा जो 2012 के बाद बच्चे पैदा हुए उसमें से कई बच्चे 18 साल के होंगे। यह इनका दावा है। ऐसी स्थिति में यह सब मिलाके यह सब मिलाके 70 72
करोड़ वोट होगा। 150 करोड़ हिंदुस्तानियों में 70 72 करोड़ हो जाएंगे। आप सोच लीजिए। ठीक है। मान लिया कि 2010-11 के बाद जो बच्चे पैदा हुए या 1997 के बाद जो बच्चे पैदा हुए बहुत से उसमें क्वालीफाई करेंगे और यह जाति और धर्म से बिल्कुल ऊपर है। यह मानते नहीं ना कास्ट को मानते हैं ना रिलीजन। उस मनभेद मतभेद से ऊपर है। एक चीज मैं आखिरी में पूछना चाहूंगा। चलिए मान लिया आप दोनों एक्सपर्ट का मैंने आंकड़ा मान लिया कि भाई मोदी गिर गए। क्या आपको लगता है स्वामी जी अगर मोदी का सिंहासन डोलता है
उत्तर प्रदेश हाथ से निकलता है तो नायडू बाबू जैसे लोग नीतीश कुमार जैसे लोग जो इनका साथ दे रहे हैं या ममता की जो नई पार्टी बनी है जिसमें तीन मुस्लिम सांसद हैं। क्या यह भी फिर पुनर्विचार करेंगे मोदी जी के को समर्थन दें या ना दें? दीपक जी अगर यह जैन जी और जैन अल्फा का ये आंदोलन चलता रहा और उनकी जो विरोध है वो बढ़ता रहा आप छोड़ दीजिए चंद्रबाबू नायडू को भारतीय जनता पार्टी भी दो पार्ट में डिवाइड हो जाएगी और एक चीज को इग्नोर मत कीजिए जैन अल्फा और जजी जो है
हमारे घर में है आपके घर में है जावेद साहब के घर में है और यह हमें इन्फ्लुएंस करते हैं जब घर में आकर कहेंगे बाबा जी तुम बड़ा भारतीय जनता पार्टी को वोट देते थे अगर तुमने हमारी लाठी का बदला नहीं लिया तो तुमसे बात नहीं करेंगे हम अपने से जितना ज्यादा प्यार करते हैं उतने ज्यादा अपने ये जन अल्फा और जन जी से करते हैं। यह हमें इनफ्लुएंस करेंगे। यह हमारे वोट डलवाएंगे। बाप से भी डलवाएंगे और मां से भी डलवाएंगे। इस फैक्टर को इस एक्स फैक्टर को इग्नोर मत कीजिए। ये छोटे-छोटे बच्चे जो
आज तक इतने ज्यादा डिसीसिव नहीं थे। किसी इलेक्शन में नहीं थे। कभी उन्होंने इस प्रकार का विरोध नहीं किया। अब उनकी जो जागृति है वो एजुकेशन सिस्टम पे है। पेपर लीक पे है। अपने भविष्य पे है और वो इन्फ्लुएंस करेंगे इलेक्शन को। आप मान के चलिए उत्तर प्रदेश में यही एक्स फैक्टर भारतीय जनता पार्टी को धूल जटा देगा। एक लास्ट सवाल एक मिनट से भी कम वक्त है। जावेद साहब क्या आपको लगता है आप तो अलायंस पॉलिटिक्स देख रहे हैं। नायडू को भी जानते हैं 1990 से पर्सनली आप जानते हैं उनको। क्या नायडू पर भी
प्रेशर आएगा? अगर मोदी यूपी हारते हैं, बीजेपी की हालत खराब होती है, पब्लिक अगेंस्ट होती है। जजी अगेंस्ट होता है। नायडू बाबू एक इंपॉर्टेंट फैक्टर है। क्या नायडू बाबू भी फिर पुनर्विचार कर सकते हैं? कुछ सोच सकते हैं अलायंस के बारे में? जहां यह जाहिर हो गया कि मोदी जी के पैर तले जमीन खिसक रही है। नायडू बाबू हो या नीतीश बाबू हो या कोई भी बाबू हो या कोई भी दीदी हो सब पुनर्चार करेंगे और सब पीछा छुड़ाएंगे। नायडू पहले यूपीए में थे। जब उन्होंने देखा कि हार गए तो मोदी जी के साथ एनडीए
में एनडीए में आ गए। तो ये सब लोग इनका सबका इतिहास है। हर आदमी किसी ने अपना जन्मजनम का साथ थोड़ी लिखवा लिया है। वहां ठीक समझ गया। जावेद साहब कह रहे हैं कि कोई पट्टा लिखा के नहीं आया है। जो एनडीए से यूपीए और यूपीए से एनडीए इस तरह से नाव बदलते। स्विच ऑन या स्विच ऑन करते। इस तरह के लोग उसमें नीतीश भी हैं, नायडू भी हैं। हवा का रुख देखकर यह भी पासा पलटेंगे। ये भी भागेंगे वहां से और नायडू बाबू ऐसा कर चुके हैं। यानी कुल मिलाकर स्थितियां जो हैं वो विषम
हो जाएंगी। विकट हो जाएंगी नरेंद्र मोदी और अमित शाह के लिए अगर उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य हाथ में निकलता है तो एक डिसाइसिव बैटल एक बहुत निर्णायक युद्ध हमको मानसून सत्र के बाद जो दिखेगा जहां पब्लिक आप कह सकते हैं एक रिफरेंडम है पब्लिक को आप सीधे-सीधे उसका रिएक्शन देख सकते हैं वो उत्तर प्रदेश का चुनाव है और हमारे दोनों एक्सपर्ट कह रहे हैं यूपी हाथ से गया तो सिंहासन भी हाथ से जा सकता है। 29 पहुंचतेपहुंचते मोदी को बहुत सी दुश्वारियों का सामना करना पड़ेगा। 29 के बाद क्या हो वो मोदी
भूल जाए। बहुत-बहुत शुक्रिया जावे साहब आप इस प्रोग्राम में आए और प्रोफेसर साहब आपके बहुत-बहुत शुक्रिया।