ये है ड्रेक पैसेज दुनिया का सबसे खतरनाक समुद्री रास्ता जिसे हजारों साल से इंसान अवॉइड करते आए हैं बहुत से लोगों के ख्याल में पनामा कनाल बनाने का मेन पर्पस यह था कि अमेरिका की ईस्टर्न कोस्ट को छोटे रूट से साउथ अमेरिका और बाकी दुनिया से कनेक्ट किया जा सके और यह बात ठीक भी है मगर यह कैनाल बनाने की सिर्फ यही एक वजह नहीं थी पनामा कनाल बनाने की एक और बहुत बड़ी वजह यह भी थी कि सारे समुद्री जहाज अंटार्कटिका और केप हॉर्न के दरमियान इस 620 मील के एरिया को अवॉइड करना चाहते
थे ये वो पॉइंट है जहां पैसिफिक अटलांटिक और सदर्न ओशन आपस में मिलते हैं लेकिन इस एरिया को ड्रेक पैसेज क्यों कहते हैं और आखिर यहां पर ऐसा होता क्या है जिसकी वजह से आज भी यहां से गुजरना मौत के मुंह से गुजरने जैसा है यह जवाब जानने के लिए हमें जाना पड़ेगा 15वीं सदी में जब फ्रांसिस ड्रेक नाम का एक समुद्री डाकू पूरे अटलांटिक ओशन में खौफ की की अलामत बना हुआ था ये वो टाइम था जब ब्रिटिश और स्पेनिश अंपायर्स दुनिया का कंट्रोल लेने की कोशिश में थे फ्रांसिस कोई आम पायरेट नहीं था
बल्कि उसे ब्रिटिश एंपायर की डायरेक्ट सपोर्ट हासिल थी और इसी सपोर्ट पर वो ब्रिटिश एंपायर के लिए अफ्रीकन शहरों पर अटैक करता उन्हें लूटता और उनके लोगों को गुलाम बनाकर ब्रिटेन ले जाता ब्रिटिश एंपायर फ्रांसिस से बहुत खुश थी और इसीलिए उसने फैसला किया कि साउथ अमेरिका में स्पेनिश एंपायर के कंट्रोल को तोड़ने के लिए फ्रांसिस को भेजा जाए प्लान यह था कि फ्रांसिस साउथ अमेरिका की ईस्टर्न कोस्टलाइन पर मौजूद शहरों और गांव को कंकर करता हुआ स्ट्रेट ऑफ मैगलन में घुसेगा और फिर साउथ अमेरिका की वेस्टर्न कोस्टलाइन पर मौजूद विलेजेस को अटैक करके ब्रिटिश
कंट्रोल में शामिल करता जाएगा इस दौरान वह जितने भी शहरों को लूटना चाहे लूट सकता है ब्रिटिश एंपायर का सिर्फ इंटरेस्ट यह था कि साउथ अमेरिका के सारी कोस्टलाइन ब्रिटिश के कंट्रोल में आ जाए ड्रेक दिसंबर 1577 में 200 लोगों के साथ पांच शिप्स पर इस सफर पर निकला अप्रैल में वो अर्जेंटीना तक पहुंचा ही था कि उसके लोगों में फूट पड़ गई और ड्रेक ने यह फूट डालने वाले अपने तकरीबन 40 साथियों को अर्जेंटीना में फांसी दे दी और अपनी दो शिप्स को वहीं छोड़ के बाकी तीन शिप्स पर अपना सफर फिर से कंटिन्यू
किया वो ये स्ट्रेट क्रॉस करके पैसिफिक ओशन में पहुंचा ही था कि जबरदस्त तूफान आ गया और ये तीनों शिप्स एक दूसरे से बिछड़ गई एक शिप के लोगों ने समझा कि शायद ड्रेक मर गया है और वो वापस इंग्लैंड चले गए दूसरी शिप तूफान में बिछड़कर ड्रेक पैसेज में आई और यहां पर गायब हो गई ड्रेक इसी शिप का पीछा करते हुए ड्रेक पैसेज के किनारे तक आया मगर यहां पर समुंदर के तेवर देखकर वह समझ गया कि आगे जाने का मतलब सिर्फ मौत है उस जमाने में कोई नहीं जानता था कि इस पॉइंट
से आगे क्या है क्योंकि उस वक्त आज की तरह का वर्ल्ड मैप नहीं बनाया गया था ड्रेक ने अपनी शिप वापस मोड़ी और दोबारा साउथ अमेरिका की वेस्टर्न कोस्ट की तरफ बढ़ गया और फिर फिर वेस्टर्न कोस्टलाइन पर लूट मार करके सैन फ्रांसिस्को जाकर रुका वो दोबारा ब्रिटेन वापस नहीं जा सका क्योंकि वो डर गया था कि अगर वापस जाते हुए वो फिर गलती से इस एरिया में फंस गया तो शायद जिंदा ना बच सके इसीलिए इस एरिया का नाम ड्रेक पैसेज रखा गया क्योंकि समुंदर के इस हिस्से में उससे पहले कोई और शिप लेकर
नहीं आया था या आया भी हो तो वो शायद जिंदा नहीं बचा था कि वापस जाकर किसी को कुछ बता सके ड्रेक ने अपने करीबी साथियों को बताया था कि उसे लग ता है कि समंदर के उस पार शायद कोई दूसरी दुनिया है या कोई ऐसा जजीरा है जहां पर इससे पहले कोई नहीं जा सका ड्रेक असल में जिसे आइलैंड समझ रहा था वो अंटार्कटिका था हजारों साल से इंसानों का मानना था कि यहां पर कोई कॉन्टिनेंट जरूर है एसिएंट ग्रीक्स इसे टेरा ऑस्ट्रेलिस इनकॉग्निता मतलब द अननोन सदर्न लैंड कहते थे लेकिन किसी ने भी
अपनी आंख से इसे नहीं देखा था 177th सेंचुरी में ब्रिटिश एक्सप्लोरर कैप्टन कुक इसी सदर्न कॉन्टिनेंट की खोज में निकला वो वो यह सारा अटलांटिक ओशन क्रॉस करके साउथ ओशन में घुस गया मगर उसे अंटार्कटिका नजर नहीं आया और वापस आते हुए उसकी शिप इसी ड्रेक पैसेज में फंस गई और वो बहुत ही मुश्किल से वहां से जान बचाकर निकला कैप्टन कुक दोबारा कभी इस समुंदर में नहीं गया हालांकि ये वो कैप्टन कुक था जो उस वक्त का सबसे बड़ा एक्सप्लोरर माना जाता था इसी कैप्टन कुक ने न्यूजीलैंड को डिस्कवर किया था और इस स्टोरी
को हम इस वीडियो में कवर कर चुके हैं कैप्टन कुक ने अपने जर्नल में लिखा था कि इस सदर्न कॉन्टिनेंट को डिस्कवर करने का रिस्क इतना बड़ा है कि शायद ही कोई इंसान इधर तक आए जहां तक मैं आया हूं अब यहां पर आपके जहन में सवाल होगा कि आखिर यह ड्रेक पैसेज इतना डेंजरस क्यों है दुनिया में और जगहों पर भी तो ओश आपस में मिलते हैं तो फिर यहां पर ऐसा क्या है असल में ड्रेक पैसेज वो पॉइंट है जहां पर अंटार्कटिका के ठंडे और अटलांटिक और पैसिफिक के गर्म पानी के ओशियस आपस
में मिलते हैं और इस मिलाप के नतीजे में पानी का फ्लो 200 मिलियन क्यूबिक यार्ड्स पर सेकंड हो जाता है यह फ्लो कितना होता है इसे इस एग्जांपल से समझें कि अमेजन रिवर दुनिया का सबसे पावरफुल दरिया है और उसका फ्लो ड्रेक पैसेज के फ्लो से 600 टाइम्स कम है इस तेज फ्लो की वजह से यहां समुंदर की लहरें 60 से 80 फीट तक चली जाती हैं जो किसी भी समुद्री जहाज के लिए बहुत खतरनाक है गर्म और ठंडे पानी के मिलाप से इस एरिया में बहुत से साइक्लोंस भी आते हैं और फिर अंटार्कटिका से
आने वाले पानी की वजह से यहां का टेंपरेचर -5 डिग्री तक गिर जाता है और फिर यह पॉइंट दुनिया के रिमोट तरीन एरियाज में से है नीचे अंटार्कटिका है जहां कोई रहता नहीं और ऊपर खतरनाक समुंदर है तो अगर आपकी शिप को यहां कोई हादसा हो जाए तो इसका मतलब है कि यू आर ऑन योर ओन इन्हीं खतरा को देखते हुए 17वीं सदी में कैप्टन कुक ने दुनिया को वर्न किया कि सदर्न कॉन्टिनेंट को डिस्कवर करने का ख्याल जहन से निकाल दो मगर इंसान की फितरत है कि उसे जिस चीज से खबरदार किया जाए वो
उसकी खोज जरूर लगाता है और ऐसा ही हुआ 20th सेंचुरी के आते ही हर तरफ एक्सप्लोरेशंस और डिस्कवरीज का क्रेज हो गया सब एक्सप्लोरर की नजरें अब साउथ पोल पर थी 1914 में मशहूर ब्रिटिश एक्सप्लोरर अर्नेस्ट शकल न ने अंटार्कटिका को एक्सप्लोर करने का इरादा किया अटलांटिक ओशन को क्रॉस करते हुए वह जब इसी ड्रेक पैसेज के पास पहुंचा तो समुंदर की लहरों ने उसकी शिप को इधर बर्फ के ग्लेशियर्स में धकेल दिया और उसकी शिप मुकम्मल तबाह हो गई अर्नेस्ट ने अपने कुछ साथियों को इधर बर्फ पर उतारा और बाकी पांच साथियों को लेकर
एक छोटी सी लाइफ बोट में करीब ही किसी आइलैंड की तलाश में निकला ताकि कहीं से हेल्प ले सके एक महीना समुंदर में भटकने के बाद आखिरकार अर्नेस्ट साउथ जॉर्जिया आइलैंड पहुंच गया मगर इस एक महीने में उसने जो कुछ एक्सपीरियंस किया उसको उसने कुछ ऐसे लिखा कि दिस इज द वर्स्ट एंड मोस्ट डेंजरस पार्ट ऑफ आवर वर्ल्ड्स ओशनस और मेरा इस आइलैंड तक पहुंचना किसी मिरेकल से कम नहीं है अर्नेस्ट ने यह भी कहा कि अंटार्कटिका इज द लास्ट ग्रेट जर्नी लेफ्ट टू मैन अगले तीन महीनों में तीन अटेम्प्ट्स करके अर्नेस्ट के बाकी साथियों
को बचा लिया गया और मिरेकल असली इस पूरे एक्सपेडिन में कोई भी आदमी जान से नहीं गया इसी तरह अप्रैल 2012 में एक ब्राजीलियन बिजनेसमैन ज्वा लारा अपनी लग्जरी क्रूज शिप पर चार लोगों के साथ एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म करने के लिए यहां से गुजर रहा था कि अचानक यहां तूफान आ गया और 100 फीट ऊंची लहरों ने इस शिप को उठाकर अंटार्कटिका की बर्फ में फेंक दिया लकिली शिप का रेडियो काम कर रहा था और उन्होंने फौरन चिली को रेस्क्यू अपील भेजी मगर मौसम इतना खराब था कि चिली की रेस्क्यू टीम को यहां पहुंचते-पहुंचते चार
दिन लग गए और बड़ी ही मुश्किल से सबको बचाया गया पिछले 10 सालों में यहां ऐसे बहुत से वाक्यात हो चुके हैं गो के अब मॉडर्न समुद्री जहाजों के आने से पुराने वक्त जैसे एक्सीडेंट्स कम हो गए हैं मगर अभी भी सारे समुद्री जहाज यहां से गुजरने से कतराते हैं और वो ड्रेक पैसेज के बजाय स्ट्रेट ऑफ मैगलन के तंग रास्ते से गुजरना ज्यादा प्रेफर करते हैं हालांकि स्ट्रेट ऑफ मैगलन में भी मौसम बहुत अनप्री फॉग आ जाती है कभी तेज हवाएं चलने लगती हैं और मौसम बहुत ठंडा हो जाता है मगर स्टिल ड्रेक पैसेज
के मुकाबले में ये रूट फिर भी सेफ है पनामा कनाल के आने से पहले सारी कमर्शियल शिप्स इस रूट से वेस्टर्न साउथ अमेरिका और नॉर्थ अमेरिका जाती थी फिर पैरामा कनाल के आने के बाद यह रूट तकरीबन वीरान हो गया है लेकिन एक बार फिर इस रूट पर समुद्री जहाजों की भीड़ लगने वाली है क्योंकि पनामा कनाल खतरे में है पनामा कनाल के फ्यूचर को किस चीज ने खतरे में डाला है इस पर हमने यह वीडियो बनाई है ड्रेक पैसेज हमारी दुनिया के नो गो एरियाज में से एक है लेकिन यह गैप हमारी दुनिया के
लिए बहुत जरूरी भी है क्योंकि अंटार्कटिका की बर्फ जब पिघलती है तो सारा पानी यहीं से दुनिया के बाकी समुद्रों में जाता है यह ड्रेक पैसेज एक एग्जांपल भी है कि हमारी टेक्नोलॉजी जितनी भी महान हो जाए नेचर के सामने हम आज भी उतने ही बेबस हैं जितने हजारों साल पहले थे अगर आपको यह वीडियो अच्छी लगी है तो चैनल को सब्सक्राइब जरूर कर लें आपके लिए तो शायद यह छोटी सी चीज हो मगर हमें इससे बहुत मोटिवेशन मिलती है मिलते हैं नेक्स्ट वीडियो में एक और इंटरेस्टिंग टॉपिक के साथ अपना ख्याल रखें अल्लाह हाफिज