अस्सलाम वालेकुम मेरा नाम रमशास्त्री [संगीत] रियल लाइफ स्टोरी ऑफ प्रोफेट आदम अल [संगीत] सलाम सूर बकरा में अल्लाह ने आदम अल सलाम का जिक्र किया है जब अल्लाह ने इंसान की मखलूक को पैदा करने का इरादा किया तो अल्लाह ने फरिश्तों से फरमाया मैं जमीन में अपना एक खलीफा बनाने वाला हूं फरिश्तों को लगा कि शायद उनकी इबादत में कोई कमी रह गई है इसलिए अल्लाह ने नई मखलूक बनाने का इरादा किया है फरिश्तों ने जिनो जैसी दूसरी मखलूक भी देखी थी जो ज्यादा अकल नहीं रखते थे और खू रेजी करते थे फरिश्तों ने अल्लाह
से कहा ऐ अल्लाह हम तेरी तस्बीह हमद और पाकी बयान करते हैं क्या तू ऐसी मखलूक पैदा करेगा जो जमीन में फसाद करेगी और खून खराबा करेगी इसके जवाब में अल्लाह ने फरमाया जो मैं जानता हूं वह तुम नहीं जानते फरिश्तों ने आपस में कहा कि अल्लाह ताला जो भी मखलूक पैदा करे वह हमसे ज्यादा इल्म नहीं रख सकती फिर अल्लाह ने आदम अल सलाम को इल्म से नवाजा और उन्हें कुछ चीजों के नाम सिखा दिए फिर अल्लाह ने आदम अल सलाम को फरिश्तों के सामने पेश किया और फरिश्तों से फरमाया कि तुम बताओ इन
चीजों के नाम अगर तुम सच्चे हो फरिश्तों ने कहा कि हम उतना ही इल्म जानते हैं जितना तूने हमें सिखाया है उसके सिवा हमें कुछ नहीं मालूम फिर अल्लाह ताला ने फरमाया ऐ आदम तुम बता दो इनको चीजों के नाम फिर जब आदम ने उन चीजों के नाम बता दिए तो अल्लाह ने फरिश्तों से फरमाया कि मैं ना कहता था कि मैं आसमानों और जमीन की पोशीदा चीजों को जानता हूं फिर अल्लाह ने फरिश्तों से फरमाया कि तुम आदम को सजदा करो तो वह सब सजदे में गिर पड़े मगर शैतान ने सजदा नहीं किया अल्लाह
ने फरमाया कि ऐ इब्लीस तुझे क्या हुआ कि तू सजदा करने वालों के साथ शरीक ना हुआ शैतान ने तकब्बल में कहा कि मैं ऐसा नहीं हूं कि इंसान को सजदा करूं जिसे तूने खनखन हुए सड़े हुए गारे की मिट्टी से बनाया है मैं उससे बेहतर हूं तूने मुझे आग से पैदा किया और उसे मिट्टी से पैदा किया है अल्लाह ने शैतान से फरमाया यहां से निकल जा तू मरदूड है और तुझ पर कयामत के दिन तक लानत बरसेगी शैतान ने कहा मुझे कयामत तक मोहलत दे अल्लाह ने फरमाया कि तुझको मोहलत है शैतान ने
अल्लाह से कहा कि तू तूने मुझे गुमराह किया है मैं कसम खाता हूं कि मैं इंसान की सीधी राह पर बैठूंगा फिर मैं उन पर हमला करूंगा उनके आगे से भी पीछे से भी दाएं से भी और बाएं से भी और उनमें से अक्सर को तू शुक्र गुजार नहीं पाएगा अल्लाह ने फरमाया तू यहां से निकल जा जलील खार जो उनमें से तेरा कहना मानेगा तो मैं जरूर तुम सबसे जहन्नुम को भर दूंगा बेशक मेरे खास बंदों पर तेरा जरा का नहीं चलेगा जन्नत की सारी नेमतों के बावजूद आदम अल सलाम जन्नत में अकेला महसूस
करते थे फिर अल्लाह ने ह्वा अल सलाम को बनाया ताकि आदम अल सलाम उनसे सुकून पा सके अल्लाह ने फरमाया ऐ आदम तुम और तुम्हारी बीवी जन्नत में रहो फिर जिस जगह से चाहो तुम दोनों खाओ लेकिन उस दरख्त के पास मत जाना वरना तुम जालिमों में से हो जाओगे फिर शैतान ने उन दोनों के दिल में वसवसे डाला और कह ने लगा तुम्हारे रब ने तुम दोनों को इस दरख्त से इसलिए मना किया था कि तुम कहीं फरिश्ते ना बन जाओ या कहीं हमेशा जिंदा रहने वालों में ना हो जाओ और शैतान ने कसमें
तक खा ली कि वह उनका खैर खुआ है पस मरदूर ने धोखा देकर उनको दरख्त की तरफ खींच ही लिया जब हजरत आदम और हव्वा अल सलाम ने दरख्त के फल को खा लिया तो उनके सतर की चीजें खुल गई और वह दरख्तों के पत्तों को तोड़ तोड़कर अपने ऊपर चिपकाने लगे लगे और सतर छुपाने लगे फिर अल्लाह ने उनको पुकारा और फरमाया क्या मैं तुम दोनों को इस दरख्त से मना ना कर चुका था और यह ना कह चुका था कि शैतान तुम्हारा खुला दुश्मन है हजरत आदम और हवा अल सलाम ने कहा कि
ऐ हमारे रब हमने अपने ऊपर जुल्म किया और अगर आप हमें ना बख्श और हम पर रहम ना फरमाएंगे तो फिर हम तो जरूर तबाह हो जाएंगे अल्लाह ने फरमाया कि तुम सब जन्नत से नीचे उतर जाओ अब से तुम एक दूसरे के दुश्मन हो और तुम्हारे लिए जमीन पर रहने की जगह है और एक मुद्दत तक नफा हासिल करना अब तुमको वहीं जिंदगी गुजारनी है और वहीं मरना है और वहीं फिर से पैदा होना है दुनिया में आने के बाद आदम अल सलाम ने अल्लाह से 40 साल तक माफी मांगी फिर अल्लाह ने आदम
अल सलाम पर रहम खाके उन्हें माफ कर दिया और फरमाया कि तुम और तुम तुम्हारी औलाद दुनिया में रहो और यह बात याद रखो कि जब मेरी तरफ से कोई नबी हिदायत लेकर तुम्हारे पास आए तो तुम उसका कहना मानना और जो लोग मेरे नबियों की बात को नहीं मानेंगे और हमारी आयतों को झुठला जाएंगे वह दोजख में जाएंगे और हमेशा उसी में रहेंगे फिर हजरत आदम और हव्वा अल सलाम दुनिया में रहने लगे उन्हीं से इंसानों की नस्ल शुरू हुई आदम अल सलाम तकरीबन 900 साल जिंदा रहकर वफात पा गए कुरान के इस वाकए
से हमें यह हिदायत मिलती है कि जब शैतान ने गलती की तो उसने माफी मांगने की बजाय तकब्बल किया और अल्लाह को ही अपनी गुमराही का इल्जाम दिया पर जब आदम अल सलाम से गलती हुई तो उन्होंने अपनी गलती मानी और फौरन तौबा करी और तब तक माफी मांगते रहे जब तक अल्लाह को राजी ना कर लिया आदम अल सलाम की सुन्नत यह है कि जब इंसान से गलती हो जाए तो वह अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगे और अपने रब को मना ले बेशक अल्लाह बहुत माफ करने वाला बड़ा मेहरबान है तो यह
था आदम अल सलाम का बेहतरीन वाकया आप नेक्स्ट कौन से प्रॉफिट की स्टोरी सुनना चाहते हैं प्लीज कमेंट करके बताइए अगर आपको प्रॉफिट सीरीज में इंटरेस्ट है तो प्लीज मेरे चैनल को सब्सक्राइब कर लीजिए दिस इज मी रम श सुल्तान साइनिंग ऑफ