अगर तुम्हारे पास सिर्फ ₹1000 हैं और तुम सोच रहे हो इससे जिंदगी का क्या ही बदलेगा तो यह वीडियो तुम्हारी सोच तोड़ने के लिए है। मैं तुम्हें कोई ट्रेडिंग टिप क्रिप्टो शॉर्टकट या ओवरनाइट स्कीम नहीं बताऊंगा। यह लेजेंड ऑफ फाइनेंसिम है। यहां सिर्फ रियल पैसा, रियल प्रोसेस, रियल रिजल्ट्स सिखाए जाते हैं। आज का सवाल सिंपल है। 100,000 से 10,000 कैसे बनते हैं? और 90% लोग क्यों फेल हो जाते हैं? पार्ट एक। सबसे बड़ी गलती ₹1000 को कम समझना। भारत में एक बात लगभग हर घर में बोली जाती है। पहले पैसा आ जाए फिर कुछ शुरू
करेंगे। यह बात सुनने में बिल्कुल सामान्य लगती है। लेकिन असल में यही सोच लोगों को जिंदगी भर वहीं का वहीं खड़ा रखती है। सच यह है कि पैसा कम होने से कोई आदमी गरीब नहीं होता। गरीब वह होता है जो छोटे पैसों के साथ सोचना बंद कर देता है। ₹1000 कम नहीं होता। समस्या पैसा नहीं होती। समस्या होती है समझ और सोच। जब किसी के हाथ में ₹1000 आते हैं तो वहां से दो रास्ते निकलते हैं। एक आदमी के दिमाग में आता है इससे क्या ही हो जाएगा? चलो खर्च कर देते हैं। दूसरा आदमी सोचता
है इस ₹1000 को काम पर कैसे लगाया जाए? यहीं पर फर्क पड़ता है। यहीं से भविष्य तय होता है। जो आदमी ₹1000 को सिर्फ खर्च करने की चीज समझता है, वह आगे जाकर ₹10,000 को भी खर्च करेगा। ₹1 लाख को भी उड़ा देगा। क्योंकि समस्या पैसा नहीं होती। समस्या होती है आदत। दुनिया के सबसे सफल लोगों में से एक वारेन बफेट। कभी यह नहीं देखते थे कि उनके पास पैसा कितना कम है या कितना ज्यादा। वे हमेशा यह देखते थे कि जो पैसा उनके पास है उसके साथ वे कौन सा सही फैसला ले रहे हैं।
उन्होंने एक बहुत गहरी बात कही थी। उनका कहना था कि आज जो लोग सुकून और आराम में जी रहे हैं वे इसलिए नहीं क्योंकि उनके पास अचानक बहुत पैसा आ गया बल्कि इसलिए क्योंकि उन्होंने काफी पहले छोटी चीजों को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया था। भारत में ज्यादातर लोग पैसा आने का इंतजार करते रहते हैं। लेकिन पैसा संभालना कभी सीखते ही नहीं। और जब किसी तरह पैसा आ भी जाता है तो वह पैसा ज्यादा दिन टिक नहीं पाता। आपने खुद देखा होगा किसी को अचानक पैसा मिलता है और कुछ सालों के बाद फिर वही
पुरानी हालत हो जाती है। इसका कारण बदकिस्मती नहीं होता। इसका कारण होता है अनुशासन की कमी और सोच की कमी। जब आप ₹1000 को बीच पूंजी की तरह देखना शुरू करते हो तो आपका दिमाग धीरे हो जाता है। आप जल्दी में फैसले नहीं लेते। आप सोच समझ कर निर्णय करते हो। आप अपने आप से पूछते हो इस पैसे से मैं कौन सा काम शुरू कर सकता हूं? इस पैसे से मैं कौन सी कौशल सीख सकता हूं? इस पैसे से मेरी आय का रास्ता कैसे खुल सकता है? और यहीं से सिस्टम बनना शुरू होता है। लेजेंड
ऑफ फाइनेंस पर हम एक बात बिल्कुल साफ रखते हैं। जो आदमी ₹1000 को सम्मान नहीं देता वह ₹10,000 के लिए भी तैयार नहीं होता। यहां हम सपने नहीं बेचते। यहां हम शॉर्टकट नहीं दिखाते। यहां हम यह समझाते हैं कि छोटा पैसा भी अगर सही जगह लगाया जाए तो आगे जाकर बड़ा पैसा बन सकता है। इस भाग का एक सरल सा मतलब समझ लो। ₹1000 तुम्हारी जिंदगी तुरंत नहीं बदलता। लेकिन ₹1000 के साथ लिया गया फैसला तुम्हारी पूरी जिंदगी की दिशा बदल सकता है। अगला भाग यह दिखाएगा कि ₹1000 को व्यावहारिक रूप से कैसे उपयोग किया
जाता है ताकि वह सिर्फ खर्च ना हो बल्कि धीरे-धीरे ₹10,000 के सफर की शुरुआत बन जाए। यह लेजेंड ऑफ फाइनेंस है। यहां हम पैसा नहीं सोच को मजबूत बनाते हैं। पार्ट दो ₹1000 को काम पर कैसे लगाया जाता है? अब तक एक बात क्लियर हो चुकी है। ₹1000 कम पैसा नहीं होता। कम होती है डायरेक्शन। अब असली सवाल यह है जब ₹1000 हाथ में हो तो आदमी करे क्या? यहीं पर ज्यादातर लोग गलती कर देते हैं। सबसे पहले यह समझ लो ₹1000 का काम यह नहीं होता कि वह तुम्हें तुरंत अमीर बना दे। ₹1000 का
काम होता है तुम्हें पैसा कमाने की सोच सिखाना। लेकिन ज्यादातर लोग ₹1000 से सीधा ₹10,000 का सपना देख लेते हैं। इसी वजह से कभी ट्रेडिंग टिप्स के चक्कर में पड़ते हैं। कभी क्रिप्टो के सपने देखते हैं। कभी किसी गारंटी वाले के पीछे भागते हैं। और जब पैसा डूब जाता है तो बोलते हैं यार कुछ काम ही नहीं करता। सच यह है काम सब करता है। बस सबके लिए नहीं करता। पैसा तब मिलता है जब तुम किसी का काम आसान बना दो। दुनिया का रूल सिंपल है। जो आदमी दूसरों की प्रॉब्लम सॉल्व करता है, उसी के
पास पैसा जाता है। अगर तुम्हारी इनकम कम है, तो इसका मतलब यह नहीं कि तुम मेहनती नहीं हो। इसका मतलब सिर्फ इतना है कि तुम अभी तक किसी प्रॉब्लम का सॉल्यूशन नहीं बन पाए हो। ₹1000 का यूज यहीं होता है। यह पैसा तुम्हें यह मौका देता है कि तुम सीख सको कि लोगों को दिक्कत किस बात की है और मैं उनकी मदद कैसे कर सकता हूं। ज्यादा लोग पैसा उड़ाते हैं सीखते नहीं। सच बोलूं? इंडिया में पैसा खर्च करना सबको आता है। सीखना बहुत कम लोगों को आता है। ₹1000 से तुम यह सीख सकते हो।
कैसे बात की जाती है? कैसे काम दिखाया जाता है? कैसे भरोसा बनाया जाता है? और भरोसा ही आगे जाकर पैसा बनाता है। एक रियल सिचुएशन सोचो। सोचो एक स्टूडेंट है जिसके पास ₹1000 हैं। अगर वह पैसा सिर्फ खाना रिचार्ज घूमने में उड़ा देता है तो कुछ दिन में पैसा खत्म और जिंदगी वही की वही। लेकिन अगर वही स्टूडेंट यह सोचे कि मुझे ऐसा काम सीखना है जो लोगों के काम आए तो गेम बदल जाता है। इंटरनेट चालू होता है। फ्री चीजें देखी जाती है। प्रैक्टिस शुरू होती है। गलतियां होती है, सीख होती है। पहला काम
शायद बिना पैसों के हो, दूसरा थोड़े पैसों में, तीसरा थोड़ा बेटर रेट पर और धीरे-धीरे ₹1000 अपना काम करना शुरू कर देता है। यहीं पर लोग इंपेशेंट हो जाते हैं। आज के टाइम में सबको तुरंत रिजल्ट चाहिए। आज सीखो। कल पैसा चाहिए। पर पैसा जल्दी से नहीं सही तरीके से आता है। जो आदमी प्रोसेस को टाइम देता है वो धीरे चलता है पर आगे निकल जाता है। जो आदमी शॉर्टकट ढूंढता रहता है वो थोड़ा तेज भागता है पर जल्दी थक जाता है। ₹1000 असल में क्या है यह समझो। ₹1000 तुम्हारी जेब का पैसा नहीं है।
₹1000 तुम्हारी ट्रेनिंग का खर्चा है। इस ट्रेनिंग में तुम सीखते हो। कैसे ना सुनने की आदत डालनी है। कैसे गलतियों से घबराना नहीं है। कैसे खुद पर भरोसा रखना है। जो आदमी यह सीख लेता है, उसके लिए ₹10,000 सिर्फ एक नंबर रह जाता है। ₹10,000 का रास्ता तब खुलता है, जब तुम एक ही काम बार-बार करते हो, रोज थोड़ा बेहतर करते हो। रोज थोड़ा सुधार लाते हो। एक बार का पैसा लक हो सकता है लेकिन बार-बार आने वाला पैसा सिस्टम होता है और सिस्टम वही बनाता है जो रुकता नहीं। यहीं पर ज्यादातर लोग हार मान
लेते हैं। जैसे ही थोड़ा पैसा आता है, सीखना बंद हो जाता है। लगता है सब आ गया और वही गलती पैसा रोक देती है। पैसा वही रुकता है जहां ग्रोथ रुक जाती है। भाग दो का साफ मैसेज। ₹1000 से ₹10,000 किसी एक दिन का खेल नहीं है। यह रोज के फैसलों का रिजल्ट है। आज तुम ₹1000 को किस नजर से देखते हो? यह डिसाइड करेगा कल तुम ₹100 के लायक बनोगे या नहीं। पार्ट तीन जब पैसा आना शुरू हो जाए तब वारेन बफेट के रूल याद रखना अब मान लो तुमने थोड़ा पैसा कमा लिया। 200
से शुरू हुआ 1000 बना और अब 10,000 भी दिखने लगा। यहीं पर दुनिया के ज्यादातर लोग सबसे बड़ी गलती कर देते हैं। और यहीं पर वारेन बफेट का सोचना बहुत काम आता है। वारेन बफेट का पहला रूल सबसे पहले पैसा बचाना सीखो। इसका मतलब यह नहीं कि पैसा कहीं छुपा कर रख दो। इसका मतलब यह है जो पैसा आया है, उसे बिना सोचे समझे बर्बाद मत करो। इंडिया में जैसे ही पैसा आता है, लोग लाइफस्ट बढ़ा देते हैं। नया फोन, महंगा खाना, शो ऑफ, वारेन बफेट के हिसाब से जब तक इनकम स्टेबल ना हो, जब
तक फ्यूचर सिक्योर ना हो, तब तक पैसा बचाना सबसे बड़ी समझदारी होती है। वारेन बफेट का दूसरा रूल। ऐसा काम मत करो जो तुम समझते ही नहीं। यह रूल बहुत लोग इग्नोर कर देते हैं। कोई बोले ट्रेडिंग कर लो, कोई बोले क्रिप्टो ले लो, कोई बोले स्कीम है और लोग बिना समझे पैसा डाल देते हैं। वारेन बफेट हमेशा कहते हैं जो चीज तुम समझते नहीं उसमें पैसा डालना सबसे बड़ा रिस्क होता है। इसलिए जब पैसा आना शुरू हो सिर्फ वही काम करो जिसका प्रोसेस तुम्हें क्लियर हो। वारेन बफेट का तीसरा रूल जल्दी अमीर बनने का
प्रेशर मत लो। इंडिया में यूथ पर सबसे बड़ा प्रेशर यह होता है कि जल्दी सक्सेसफुल बनना है। वारेन बफेट का मानना है पैसा धीरे बनता है लेकिन स्ट्रांग बनता है। जो आदमी जल्दी पैसा बनाना चाहता है वह गलत डिसीजन ले लेता है और गलत डिसीजन सारा पैसा ले डूबता है। वारेन बफेट का चौथा रूल अपने आप पर इन्वेस्ट करना कभी बंद मत करो। वारेन बफेट ने खुद कहा है कि सबसे बेस्ट इन्वेस्टमेंट खुद पर की जाने वाली इन्वेस्टमेंट होती है। मतलब सीखना बंद मत करो। स्किल अपग्रेड बंद मत करो। चाहे कितना भी पैसा आ जाए
अगर तुम बेटर नहीं बन रहे तो पैसा रुक जाएगा। वारेन बफेट का पांचवा रूल। पैसा सिर्फ पैसा नहीं होता। वह जिम्मेदारी होता है। जो लोग पैसा को सिर्फ एंजॉय करने की चीज समझते हैं, उनके पास पैसा टिकता नहीं। और जो लोग पैसा को जिम्मेदारी समझते हैं उनके पास पैसा ग्रो करता है। जिम्मेदारी का मतलब सोच समझकर खर्च और सोच समझकर इन्वेस्ट। अब इन रूल्स को अपनी जिंदगी से जोड़कर देखो। जब भी पैसा [संगीत] आए खुद से तीन सवाल पूछना। क्या मैं इस पैसों को समझ के यूज कर रहा हूं? क्या यह पैसा मुझे आगे बढ़ा
रहा है? या सिर्फ आज का शो ऑफ बन रहा है। अगर जवाब क्लियर है तो तुम सही रास्ते पर हो। पार्ट तीन का हार्ड ट्रुथ। पैसा कमाना मुश्किल नहीं है। मुश्किल है पैसा आने के बाद भी जमीन से जुड़े रहना। वारेन बफेट जैसे लोग इसलिए सक्सेसफुल होते हैं क्योंकि वह पैसा आने के बाद भी बेसिक रूल्स नहीं तोड़ते। पार्ट तीन का फाइनल मैसेज 1000 से 10,000 तक का सफर सिर्फ शुरुआत है। असल गेम तब शुरू होता है जब पैसा आने लगता है और तुम्हें डिसाइड करना [संगीत] होता है कि तुम उसे संभाल पाओगे या नहीं।
अगर तुमने वारेन बफेट के यह सिंपल रूल्स समझ लिए और फॉलो कर लिए तो पैसा तुमसे भागेगा नहीं। अगला और लास्ट पार्ट यह दिखाएगा कि कैसे इसी सोच को फॉलो करके लॉन्ग टर्म में स्ट्रांग और स्टेबल इनकम बनाई जाती है। पार्ट चार लॉन ग टर्म गेम पैसा कैसे [संगीत] टिकता है और बढ़ता है। अब यहां तक आते-आते तुम एक बात समझ चुके हो। 1000 से 10,000 का सफर किसी एक ट्रिक का रिजल्ट नहीं होता। यह छोटे डेली डिसीजंस का नतीजा होता है। अब असली सवाल यह नहीं है कि पैसा कैसे बना? असली सवाल यह है
कि पैसा आगे भी आता रहेगा या नहीं? यहीं पर लॉन गेटम सोच का गेम शुरू होता है। सबसे पहली बात जो समझनी होती है, ज्यादातर लोग पैसा बनाना सीख लेते हैं, लेकिन ज्यादा लोग पैसा जीना सीख जाते हैं। जैसे ही पैसा आता है, जिंदगी उसके अराउंड घूमने लगती है। और जब जिंदगी पैसा के अराउंड घूमती है तो पैसा कंट्रोल करना शुरू कर देता है। लॉन गटर्म में पैसा सिर्फ उनके पास रहता है जो पैसा को अपना बॉस नहीं बनने देते। लॉ ऑन गटर्म में सिर्फ एक चीज काम करती है। कंसिस्टेंसी मोटिवेशन का लाइफ छोटा होता
है। डिसिप्लिन का लाइफ लंबा होता है। जो आदमी सिर्फ मूड के हिसाब से काम करता है, उसकी इनकम भी मूड के हिसाब से होती है। और जो आदमी बिना मूड देखे रोज थोड़ा काम करता है। उसकी इनकम धीरे-धीरे स्टेबल हो जाती है। लॉन्ग टर्म पैसा रोज के बोरिंग काम से बनता है। किसी एक एक्साइटिंग दिन से नहीं। यहीं पर लोग एक और बड़ी गलती करते हैं। वह अपनी ग्रोथ को दूसरों से कंपेयर करने लगते हैं। किसी ने ज्यादा कमा लिया। किसी का रिजल्ट जल्दी आ गया। किसी की स्टोरी ज्यादा चमक रही है और अपना प्रोसेस
छोड़कर दूसरों का प्रोसेस कॉपी करने लगते हैं। यहीं से फोकस टूट जाता है और जहां फोकस टूटता है वहां पैसा भी धीरे-धीरे रुक जाता है। दुनिया के सबसे स्टेबल पैसा बनाने वालों की एक आदत होती है। चाहे वह छोटा काम करें या बड़ा बिजनेस। वह अपने काम को समझते हैं। इसी वजह से वारेन बफेट हमेशा एक बात पर ज्यादा जोर देते हैं। वह कहते हैं कि पैसा तब तक सेफ रहता है जब तक तुम्हें पता हो कि तुम क्या कर रहे हो और क्यों कर रहे हो। इसका मतलब यह है कि अंधा भरोसा, अंधी उम्मीद
लॉन्ग टर्म में काम नहीं करती। लॉन गटर्म सक्सेस का एक सिंपल रूल। जो काम आज पैसा दे रहा है जरूरी नहीं कल भी दे। इसलिए स्मार्ट आदमी एक ही जगह रुकता नहीं। वह सीखता [संगीत] रहता है। अपने काम को इंप्रूव करता रहता है। नए ऑप्शंस के लिए खुद को रेडी रखता है। इसका मतलब यह नहीं कि रोज नया काम शुरू करो। इसका मतलब यह है कि एक काम में बेटर होते जाओ और समझ बढ़ाते जाओ। पैसा और जिंदगी के बीच बैलेंस जरूरी है। बहुत लोग पैसा के पीछे इतना भाग जाते हैं कि जिंदगी [संगीत] पीछे
रह जाती है और कुछ लोग जिंदगी के नाम पर पैसा का फ्यूचर खराब कर देते हैं। लॉन गटर्म गेम इन दोनों के बीच का रास्ता है। काम भी चलता रहे, सीखना भी चलता रहे और जिंदगी भी कंट्रोल में रहे। एक बात जो हर व्यूअर को याद रखनी चाहिए। तुम्हारा गोल सिर्फ 10,000 कमाना नहीं होना चाहिए। तुम्हारा गोल होना चाहिए कि तुम ऐसा आदमी बन जाओ जो हर महीने 10,000 कमा सकता हो। अमाउंट से ज्यादा इंपॉर्टेंट बनने वाला इंसान होता है। अगर आदमी स्ट्रांग है तो पैसा अपने आप फॉलो करता है। पार्ट चार का फाइनल मैसेज
1000 से शुरू हुआ सफर 10,000 तक पहुंच सकता है और 10,000 से आगे भी जा सकता है। पर सिर्फ उनके लिए जो जल्दी हार नहीं मानते [संगीत] जो डेली काम से भागते नहीं और जो पैसा आने के बाद भी जमीन से जुड़े रहते हैं। पैसा उन्हीं के पास टिकता है जो पैसा को समझते हैं और पैसा उन्हीं के पास बढ़ता है जो खुद को रोज थोड़ा बेटर बनाते हैं। अगर तुमने यह चार पार्ट्स समझ लिए तो समझ लो तुम सिर्फ पैसा कमाने का तरीका नहीं बल्कि पैसा संभालने की सोच सीख चुके हो। यहीं से रियल
जर्नी शुरू होती है और जो यहां टिक गया वह आगे भी टिक जाता है। पार्ट पांच अब भी अगर कुछ नहीं बदला तो प्रॉब्लम पैसा नहीं तुम हो। यहां तक पहुंचने के बाद अगर तुम अभी भी यह सोच रहे हो कि कोई इजजी तरीका होता तो मैं भी कर लेता तो सीधी बात है तुम अभी रेडी नहीं हो। और यह बात बुरा सुनने के लिए नहीं समझने के लिए है। इंडिया में ज्यादातर लोग एक ही गलती रिपीट करते हैं। वह कहते हैं मुझे बस एक आईडिया मिल जाए। सच यह है आईडिया की कमी नहीं है।
एग्जीक्यूशन की हिम्मत की कमी है। इंडिया में लोग दूसरों के रिजल्ट्स कॉपी करना चाहते हैं। पर दूसरों का रूटीन फॉलो नहीं करना चाहते। रिजल्ट रूटीन से आता है। इंस्पिरेशन से नहीं। तुम्हारी लाइफों में पैसा इसलिए नहीं बढ़ रहा क्योंकि तुम हर चीज हाफ हार्टेड करते हो। थोड़ा काम, थोड़ा फोकस, थोड़ी कंसिस्टेंसी और फिर एक्सपेक्ट करते हो कि रिजल्ट फल मिले। दुनिया ऐसा काम नहीं करती। [संगीत] एक और कड़वा सच। तुम जितना टाइम सोचने में लगा रहे हो, कोई और उतना ही टाइम करने में लगा रहा है। और जब तुम दोनों मिलोगे, डिफरेंस सिर्फ पैसा का
नहीं होगा। डिफरेंस माइंडसेट का होगा। पैसा उनके पास जाता है जो वेट नहीं करते। वेट करना आसान होता है। एक्शन लेना मुश्किल। इसलिए ज्यादातर लोग वेट ही करते रह जाते हैं। परफेक्ट टाइम का वेट, परफेक्ट प्लान का वेट, [संगीत] परफेक्ट कॉन्फिडेंस का वेट और जो वेट करता है वो पीछे रह जाता है। अब एक सिंपल क्वेश्चन बिना ड्रामा के अगर कल सुबह उठकर तुम अपना फोन साइड में रख दो, और सिर्फ 2 घंटे अपनी स्किल पर काम करो, तो क्या तुम कर पाओगे? अगर जवाब हां है तो तुम्हें कोई रोक नहीं सकता। अगर जवाब नहीं
है तो तुम्हें कोई मोटिवेट भी नहीं कर सकता। पैसा सिर्फ एक्शन का रिस्पांस है। पैसा कोई रिवॉर्ड नहीं है जो मेहनत देखकर मिल जाए। [संगीत] पैसा एक रिएक्शन है। तुम्हारे काम का काम रियल होगा तो पैसा रियल आएगा। काम सिर्फ बातों का होगा तो रिजल्ट भी सिर्फ बातें रहेंगे। पाठ छह का फाइनल ट्रुथ तुम्हारी जिंदगी कल बेटर नहीं होगी अगर तुम आज कुछ अलग नहीं करोगे और अलग करना का मतलब कोई बड़ा रिस्क लेना नहीं होता अलग करना का मतलब होता है रोज वही काम करना जो तुम अवॉइड कर रहे हो सच यह है तुम्हारी
लाइफ तुम्हारी ही जिम्मेदारी है ना गवर्नमेंट बदलेगी तुम्हें ना सिस्टम बचा लेगा तुम्हें ना कोई गुरु उठाकर अमीर बना देगा तुम्हें जो तुम खुद नहीं करोगे वह कोई और नहीं करेगा और अगर तुम यह सच आज नहीं समझ पाए तो याद रखना कल भी कुछ नहीं बदलेगा। पाठ छह बड़े लोग अलग क्यों होते हैं? पैसा नहीं सोच अलग होती है। यहां एक बात क्लियर कर देते हैं। बड़े लोग कोई अलग प्लनेट से नहीं आते। उनके पास भी 24 घंटे होते हैं। उनके पास भी शुरुआत में कंफ्यूजन होती है। फर्क सिर्फ एक जगह होता है। वह
फैसले कैसे लेते हैं? बड़े लोग तुरंत डिसीजन नहीं लेते पर क्लियर डिसीजन लेते हैं। ज्यादातर लोग क्या करते [संगीत] हैं? थोड़ा पैसा आया। तुरंत कुछ नया ट्राई कर लिया। बड़े लोग क्या करते हैं? पहले समझते हैं फिर मूव करते हैं और फिर उस मूव को टाइम देते हैं। इसी वजह से वारेन बफेट हमेशा धीरे चलते दिखे पर उनका पैसा तेज बढ़ता [संगीत] गया। उन्होंने कभी हर नए ट्रेंड के पीछे भागना जरूरी नहीं समझा। बड़े लोग शो ऑफ से ज्यादा प्रोसेस पर फोकस करते हैं। छोटे लोगों को रिजल्ट दिखाना होता है। बड़े लोगों को सिस्टम बनाना
होता है। इसलिए तुम देखोगे जो लोग रियल पैसा बनाते हैं, वह ज्यादा बोलते नहीं, ज्यादा दिखाते नहीं, वह बस रोज अपना काम करते रहते हैं। बड़े लोग पैसा कमाने से पहले खुद को स्ट्रांग बनाते हैं। यह बात ज्यादा लोग मिस कर देते हैं। बड़े लोग पहले यह सोचते हैं मैं कौन सा आदमी बन रहा हूं। ज्यादातर लोग यह सोचते रहते हैं मुझे कितना पैसा मिल जाए। जब आदमी स्ट्रांग होता है तो पैसा उसके लेवल तक आता है। जब आदमी वीक होता है तो पैसा आया भी तो टिकता नहीं। बड़े लोग लॉस से डरते नहीं पर
बेवकूफी से डरते हैं। उनके लिए लॉस लर्निंग होता है। पर बिना समझे किया गया रिस्क उनके लिए डेंजर होता है। इसलिए वह वही काम करते हैं जिसे वह समझ सकते हैं और जो समझ में नहीं आता उसमें वह नो बोल देते हैं। चाहे दुनिया कुछ भी बोले। पार्ट सात का सिंपल मैसेज बड़े लोगों को कॉपी करने का मतलब उनके कपड़े, उनके गैजेट्स, उनके कोट्स कॉपी करना नहीं होता। उनकी सोच कॉपी करनी होती है। धीरे [संगीत] चलना, क्लियर रहना और रोज थोड़ा बेटर बनना। हो सकता है तुम आज बड़े लोगों के लेवल पर ना हो। पर
अगर तुमने उन जैसी सोच अपना ली तो वहां पहुंचना सिर्फ टाइम का सवाल है। बड़े लोग इसलिए बड़े नहीं होते क्योंकि उनके पास ज्यादा पैसा होता है। बड़े लोग इसलिए बड़े होते हैं क्योंकि वह छोटी चीजों को सीरियसली लेते हैं। पार्ट सात यहां तक आने के बाद भी अगर कुछ नहीं बदला [संगीत] तो समझ लो प्रॉब्लम कहां है। कॉरियर कॉरियर कॉरियर कॉरियर कॉरियर कॉरियर कॉरियर कॉरियर कॉरियर कॉरियर कॉरियर कॉरियर कॉरियर कॉरियर कॉरियर अगर तुमने यहां तक पूरा सुना है पूरा समझा है और फिर भी तुम सोच रहे हो ठीक है देखते हैं तो एक बात
क्लियर है तुम्हें नॉलेज की कमी नहीं है तुम्हें डिसीजन की कमी है ज्यादातर लोग यहीं फेल होते हैं उन्हें उन्हें लगता है सिर्फ सुन लेने से कुछ बदल जाएगा। पर सच यह है जो सिर्फ सुनता है वो सिर्फ थोड़ा समझदार बनता है और जो डिसाइड करता है वो अपनी जिंदगी बदलता है। डिसीजन बिना एक्शन के सिर्फ एक झूठ होता है जो हम खुद को बोलते हैं। इंडियन ऑडियंस का सबसे बड़ा इल्लुजन मैं रेडी हो जाऊंगा। फिर शुरू करूंगा। सच यह है कोई भी कभी रेडी नहीं होता। जो लोग आज कुछ कर रहे हैं, वह भी
कंफ्यूज्ड थे, डरे हुए थे, अनश्योर थे। फर्क सिर्फ इतना था उन्होंने कंफ्यूजन के बावजूद काम शुरू कर दिया। बड़े लोग एक सिंपल बात फॉलो करते हैं। वो अपनी जिंदगी को एक्सक्यूसेस के हवाले नहीं छोड़ते। इसी वजह से वारेन बाफेट जैसे लोग जिंदगी भर एक ही बेसिक रूल फॉलो करते रहे। जो समझ में आए उसी पर काम करो। बाकी सब इग्नोर करो। इसलिए वह ट्रेंड के पीछे नहीं भागे और ट्रेंड उनके पीछे चला। तुम्हारी जिंदगी का असली टर्निंग पॉइंट। तुम्हारी लाइफ तब नहीं बदलेगी [संगीत] जब तुम पैसा कमा लोगे। तुम्हारी लाइफ असर्स तब बदलेगी जब तुम
यह डिसाइड कर लोगे कि मैं एक्सक्यूसेस के साथ नहीं जिऊंगा। उस दिन तुम्हारा फोकस बदलेगा। उस दिन तुम्हारी आदतें बदलेंगी और उसके बाद पैसा बदलेगा। यह बात कड़वी [संगीत] है पर जरूरी है। अगर तुम रोज अपनी रियलिटी से भाग रहे हो तो पैसा तुमसे आगे भागता रहेगा। और अगर तुम रोज अपनी रियलिटी का सामना कर रहे हो तो पैसा धीरे-धीरे तुम्हारे पीछे आना शुरू करेगा। पार्ट आठ का फाइनल मैसेज तुम स्पेशल नहीं हो। तुम चोजन नहीं हो। तुम लकी भी नहीं हो। और यही तुम्हारी ताकत है। क्योंकि जो आदमी अपने आप को नॉर्मल मानता है,
वह काम करता है। और जो आदमी खुद को स्पेशल समझता है, वह सिर्फ इंतजार करता है। अगर तुमने आज इंतजार छोड़ दिया, तो समझ लो तुम ऑलरेडी गेम में आ गए हो। और अगर तुम आज भी सिर्फ सुनकर बंद कर दोगे तो सच याद रखना जिंदगी भी तुम्हें सिर्फ देखकर आगे निकल जाएगी। सच यह है यह वीडियो तुम्हारी जिंदगी नहीं बदलने वाला। तुम्हारी जिंदगी तब बदलेगी जब यह वीडियो बंद होने के बाद तुम कुछ अलग करोगे। अगर तुम यह सोच कर जा रहे हो अच्छा था। देखते हैं तो याद रखना देखने वालों के लिए जिंदगी
कभी नहीं बदलती। और अगर तुमने आज सिर्फ एक डिसीजन ले लिया कि एक्सक्यूसेस खत्म, डेली काम शुरू और इजी रास्ता [संगीत] छोड़कर सही रास्ता पकड़ना है तो समझ लो तुम ऑलरेडी भीड़ से अलग हो चुके हो। पैसा बातों से नहीं बनता। पैसा रोज की डिसिप्लिन से बनता है। जो आदमी आज एक्शन लेता है, वही आदमी कल ऑप्शन रखता है। बाकी लोग सिर्फ वीडियोस देखते रह जाते हैं। यह लेजेंड ऑफ फाइनेंस है। यहां सच बोला जाता है, डिसीजन तुम पर छोड़ा जाता है। मिलते हैं अगले वीडियो में। तब तक अपना ख्याल रखो और याद रखना। सिर्फ
सोचने से कुछ नहीं बदलता, करने से बदलता है। धन्यवाद।