बिस्मिल्लाह र रहमान रहीम अस्सलाम वालेकुम नाजरीन नाजरीन जब कयामत की तमाम छोटी और बड़ी निशानियां पूरी हो जाएंगी तो कयामत आना शुरू हो जाएगी कयामत की इब्तिदा नफक सूर से होगी जिसके बारे में इमाम उल अंबिया जनाबे मोहम्मद रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वालि वसल्लम ने इरशाद फरमाया अल्लाह ताला के चार मुकर्रर फरिश्तों में से हजरत इराल अलैहि सलाम सूर मुंह में लिए अपनी पेशानी झुकाए कान अल्लाह ताला के हुक्म पर लगाए हुए हैं जैसे ही अल्लाह ताला हुक्म देंगे वो सूर फूंकना शुरू कर देंगे और कयामत का आगाज हो जाएगा मुस्लिम शरीफ की हदीस के मुताबिक
यह जुम्मा का दिन होगा लोग अपने-अपने कामों में मशगूल होंगे अचानक मशरिक को मगरिब के तमाम लोग एक लंबी आवाज सुनेंगे जो आहिस्ता आहिस्ता ऊंची होती जाएगी उस और सख्ती की वजह से लोगों में इस्तरा और बेचैनी फैलने शुरू हो जाएगी जब सूर की आवाज बिजली की कड़क की तरह शिद्दत इख्तियार कर जाएगी तब लोग मरना शुरू हो जाएंगे जो आदमी जहां होगा वहीं गिर पड़ेगा जैसे-जैसे सूरे इसरा फील बुलंद होती चली जाएगी वैसे-वैसे निजाम कायनात दरम बर्म होना शुरू हो जाएगा जमीन आंधी में हिचकोले खाने वाली किंडी की तरह जलजल की जद में आ
जाएगी पहाड़ गर्द गुबार बनकर उड़ने लगेंगे समुंदरों में आग भड़क उठेगी आसमान फट जाएगा सूरज चांद और सितारे बेनूर हो जाएंगे तमाम जीरू मखलूक इंसान जिन और फरिश्ते फना हो जाएंगे हत्ता के मलकल मौत भी अपनी रूह अल्लाह ताला के हवाले कर देंगे हर जानदार और गैर जानदार चीज फना हो जाएगी बस सिर्फ एक अल्लाह वहद ला शरीक की जात जुल जलाल वल इकराम बाकी र जाएगी और अल्लाह सुभान ताला का यह इरशाद मुबारिक पूरा हो जाएगा कु महान रल जलाल ल इराम हर चीज जो इस जमीन पर है फना होने वाली है और सिर्फ
तेरे रब्ब जुल जलाल ल इकराम की जात ही बाकी रहने वाली है जब हर चीज फना हो जाएगी तो अल्लाह सुभान ताला ऐलान फरमाएंगे नल जबार नल मुत म मुलक दुनिया में जब्बार बनने वाले कहां है दुनिया में मुतकब्बीर सन्नाटे के बाद अल्लाह सुभान व ताला खुद ही उस सवाल का जवाब इरशाद फरमाएंगे लिलाहिल वाहिद कहार आज के रोज बादशाहत सिर्फ अल्लाह वाहिद और कहार की है मुस्लिम शरीफ की हदीस के अल्फाज यूं है अनल मलिकन जारल मुत मैं हूं बादशाह कहां है दुनिया के जब्बार और मुतकब्बीर मुद्दत जिसका इल्म अल्लाह सुभान व ताला को
है सुकून और सन्नाटे में गुजर जाएगी फिर जब अल्लाह ताला चाहेंगे नए सिरे से आसमान जमीन और फरिश्तों को पैदा फरमाएंगे नई जमीन में इमारतों दरख्तों पहाड़ों और समंदर का नामो निशान तक नहीं होगा बल्कि वह सफेद हम वार और चटय मैदान होगी जो अपने रब के नूर से ू ूब रोशन होगी इंसानों को दोबारा पैदा करने के लिए आसमान से एक बारिश नाजिल होगी जिसके नतीजे में हर इंसान की रीड की हड्डी से पूरा इंसानी ढांचा तैयार हो जाएगा और उस पर गोश्त पोस्त भी चढ़ा दिया जाएगा उसके बाद जनाबे इसरा फील अलैहि सलाम
को दूसरी मर्तबा सूर फूंकने का हुक्म दिया जाएगा और तमाम इंसान नंगे पांव नंगे बदन और बे खतना उठ खड़े होंगे जिस तरह मां के पेट से पैदा हुए थे और अल्लाह ताला का यह फरमान भी पूरा हो जाएगा कि तुम लोग फर्दन फर्दन हमारे पास हाजिर होगे जिस तरह हमने पहली मर्तबा तुम्हें पैदा किया था सबसे पहले इमाम उल अंबिया जनाबे मोहम्मद रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वा आलि वसल्लम अपनी कब्र अनवर से उठेंगे फिर हजरत ईसा अला नबीना अलैहि सलाम और दीगर अंबिया कराम शोहदा सुलहा फजला और अहले ईमान उठेंगे फिर फसाक फुज्जर और फिर
कुफा और मुशरिकीन कब्रों से काफिर मुशरिक फास और फाजिल लोग अपने-अपने आमाल के मुताबिक उठेंगे कोई अंधा कोई बहरा कोई लंगड़ा कोई चटी की शक्ल में और कोई सर के बल उठेगा काफिर उस गैर मुत वक्के जिंदगी के मनाजिर देखकर शदीद खौफ और दहशत की कैफियत में मुब्तला होंगे आंखें पत्थर आई होंगी दिल कांप रहे होंगे कलेजे मुंह को आए होंगे कोई गम गुसार और मददगार नहीं होगा ना ही कोई किसी दूसरे की तरफ देखने या ध्यान देने वाला होगा अहले ईमान भी अपने-अपने ईमान और आमाल के मुताबिक कब्रों से उठेंगे शहीद अपनी शहादत के
ताजा बहते हुए खून के साथ उठेगा हालत एहराम में फौत होने वाला हाजी तलबिया पुकारते हुए उठ लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैक लब्बैक ला शरीक लक लब्बैक इनल हमद वमत लवल मुल्क ला शरीक लक अहले ईमान के लिए दोबारा जिंदगी खिलाफ तवको नहीं होगी लिहाजा उन पर खौफ और दहशत की वह कैफियत तारी नहीं होगी जो कुफर और मुशरिकीन पर होगी कब्रों से उठते ही हर इंसान पर दो फरिश्ते मुकर्रर कर दिए जाएंगे जो उसे मैदान हशर में पहुंचा देंगे याद रहे कि मुल्क शाम का इलाका मैदान हशर होगा लोगों को अपनी-अपनी कब्रों से उठकर वहीं पहुंचना
होगा कुफ में से जो लोग अपनी कब्रों से अंधे उठेंगे वह ठोकर खाते गिरते पड़ते वहां पहुंचेंगे जो लोग चुटियों के जिस्म में उठेंगे वह लोगों के पांव तले रोंदे और कुचले जा रहे होंगे और जो लोग सर के बल उठेंगे वह इंतिहा जिल्लत और रुसवाई के साथ यह सफर तय करेंगे बाज काफिरों को आग हांक कर मैदान हशर में ले जाएगी काफिर जहां कहीं थक हार कर रुकेंगे आग भी रुक जाएगी और जहां चलेंगे आग भी उनके साथ चलना शुरू कर देगी अहले ईमान भी अपने अपने अकाय और आमाल के मुताबिक मैदान हशर में
पहुंचेंगे बाज लोग पैदल पहुंचेंगे बाज लोग ऊंटों पर सवार होंगे किसी ऊंट पर एक किसी ऊंट पर दो किसी पर पर चार हत्ता कि 101 आदमी भी एक ऊंट पर सवार होंगे सारी मखलूक चुपचाप दम साधे एक ही सिमत रवा दवा होगी किसी को ऊंची सांस लेने की भी मजाल नहीं होगी हर आदमी को एहसास होगा कि आज इम्तिहान जिंदगी का नतीजा निकलने वाला है जब सारी मखलूक मैदान हशर में पहुंच जाएगी तो ऐलान किया जाएगा वता मुजरिम मुजम आज के रोज तुम नेक लोगों से अलग हो जाओ सब लोग अलग-अलग गिरोहों में तकसीम कर
दिए जाएंगे सूरज की परस्तिश करने वालों का गिरो सितारों की परस्तिश करने वालों का गिरो आग की परस्तिश करने वालों का गिरो बुतों की परस्तिश करने वालों का गिरो कब्रों की परस्तिश करने वालों का गिरो मुनाफिक का गिरो मुर्तंड़क और दूसरी तरफ ईमानदार को उनके अकाय और आमाल के मुताबिक अलग-अलग गिरोहों में तकसीम किया जाएगा मैदान हशर में लोग नंगे पांव और नंगे बदन होंगे सूरज एक मील के फासले पर आग बरसा रहा होगा जमीन दहक रही होगी जिस्म सूरज की आग में जल रहे होंगे जमीन पर पांव रखने मुश्किल होंगे दूर-दूर तक कहीं साया
नजर नहीं आएगा लोग अपने अपने अकाय और आमाल के मुताबिक पसीने में शराब पूर होंगे किसी को टखनों तक किसी को पिंडली तक किसी को घुटनों तक किसी को जानओशिया खा रहे होंगे भूख और प्यास की शिद्दत से लोगों का बुरा हाल होगा भूख प्यास और शदीद गर्मी की हालत में लोग 5 हज साल तक खड़े रहेंगे और तंग आकर अल्लाह ताला से दुआ करेंगे या अल्लाह हमें इस मुसीबत से निजात दिला ख्वा जहन्नुम में भेज दे याद रहे आज सूरज का हमारी जमीन से फासला 9 करोड़ 30 लाख मील है इसके बावजूद जून और
जुलाई में जमीन इस कदर गर्म हो जाती है कि एक मिनट के लिए इस पर नंगे पांव खड़े होना नामुमकिन होता है गौर फरमाइए उस रोज क्या हाल होगा जिस रोज जमीन का दर्जा हरारत आज के मुकाबले में 9 करोड़ दर्जे ज्यादा होगा लाचार होकर लोग हजरत आदम अला नबीना अलैहि सलाम की खिदमत में हाजिर होंगे और अर्ज करेंगे अल्लाह ताला ने आपको अपने हाथ से बनाया और अपनी रूह फूकी फरिश्तों से सजदा करवाया जन्नत में जगह दी आज हमारे लिए सिफारिश कर दें कि अल्लाह ताला हिसाब किताब शुरू करके हमें हशर की तकलीफ से
निजात दे दे हजरत आदम अला नबीना अलैहि सलाम फरमाएंगे आज मेरा रब इस कदर गुस्से में है कि इससे पहले कभी हुआ ना आइंदा होगा मुझसे जन्नत में अल्लाह ताला की नाफरमानी हो गई थी जिसकी वजह से मुझे अपनी जान की फिक्र है लिहाजा मैं सिफारिश नहीं कर सकता तुम लोग नूह के पास चले जाओ लोग हजरत नूह अलैहि सलाम की खिदमत में हाजिर होंगे और अपना मुद्दा बयान करेंगे हजरत नूह अलैहि सलाम भी यही कहेंगे कि आज मेरा रब इतने गुस्से में है कि इससे पहले कभी इतना गुस्से में नहीं था और ना इसके
बाद आएगा मैंने दुनिया में अपनी कौम के लिए बददुआ की थी जिसके नतीजे में वह हलाक हो गई आज मुझे अपनी जान की फिक्र है मैं सिफारिश नहीं कर सकता तुम लोग इब्राहिम खलीलुल्लाह अलैहि सलाम के पास चले जाओ वह सिफारिश करेंगे लोग अल्लाह के पैगंबर जद्दे रसूल हजरत इब्राहिम खलीलुल्लाह अलैहि सलाम की की खिदमत में हाजिर होंगे और अर्ज करेंगे आप अल्लाह के नबी और उसके खलील हैं अपने रब के हुजूर सिफारिश कर दें आप देख रहे हैं हमारी क्या हालत हो रही है हजरत इब्राहीम अलैहि सलाम भी वही बात फरमाएंगे जो हजरत आदम
और हजरत नूह अलैहि सलाम ने कही थी आज मेरा रब इस कदर नाराज है कि इससे पहले कभी इतना नाराज नहीं हुआ ना इसके बाद होगा मैंने दुनिया में तीन झूठ बोले थे जिसकी वजह से आज मुझे अपनी जान की फिक्र है कहीं अल्लाह ताला बाज पुस ना करें लिहाजा तुम लोग मूसा के पास चले जाओ लोग मूसा कलीम उल्लाह अलैहि सलाम की खिदमत में हाजिर होंगे और अर्ज करेंगे अल्लाह ताला ने आपसे हम कलाम होकर सारे लोगों पर आपको फजीलत दी आप देख रहे हैं हमारी क्या हालत हो रही है आप अपने रब के
हुजूर सिफारिश कर दें हजरत मूसा अला नबीना अलैहि सलाम फरमाएंगे आज तो मेरा रब इस कदर गुस्से में है है कि इससे पहले कभी नाना हुआ और ना बाद में होगा मैंने दुनिया में एक आदमी को कत्ल किया था जिसकी वजह से मुझे अपनी जान की फिक्र है लिहाजा मैं सिफारिश नहीं कर सकता तुम लोग ईसा के पास चले जाओ लोग अल्लाह के पैगंबर हजरत ईसा रू उल्लाह अलैहि सलाम की खिदमत में हाजिर होंगे और अर्ज करेंगे आप अल्लाह के रसूल हैं और उसका फरमान है कि अल्लाह की रूह है आप देख रहे हैं हमारी
क्या हालत हो रही है अपने रब से हमारे लिए सिफारिश कर दें हजरत ईसा रूला अलैहि सलाम भी वही जवाब देंगे कि आज मेरा रब इस कदर गुस्से में है कि इससे पहले कभी ना हुआ और ना आइंदा होगा तुम लोग मोहम्मद इब्ने अब्दुल्लाह अल तही तो व सना की खिदमत में हाजिर हो जाओ वह तुम्हारी सिफारिश करेंगे लोग सैयद उल अंबिया रहमतुल आलमीन शफी उल मुस्लिमीन की खिदमत में हाजिर होंगे और अर्ज करेंगे आप अल्लाह के रसूल और खाति उल अंबिया हैं अल्लाह ने आपके अगले पिछले सारे गुनाह माफ फरमा दिए हैं आप देख
रहे हैं हमारी क्या हालत हो रही है अपने रब के हुजूर सिफारिश कर दीजिए कि वह हमारे हिसाब किताब का आगाज फरमाए रसूल रहमत सल्लल्लाहु अलैहि वालि वसल्लम फरमाएंगे हां आज के रोज सिफारिश के लायक मैं ही हूं चुनांचे आप सल्लल्लाहु अलैहि वालि वसल्लम को मैदान हशर से शिफा के बुलंद तरीन मकाम मकाम महमूद पर पहुंचा दिया जाएगा जो जन्नत में अर्शे इलाही के नीचे होगा वहां पहुंचकर आप सल्लल्लाहु अलैहि वालि वसल्लम अपने रब के हुजूर सजदा में गिर पड़ेंगे और अल्लाह ताला की हमद सना बयान करेंगे फिर जब अल्लाह ताला का गुस्सा कम होगा
तो खालिक कायनात इरशाद फरमाए ऐ मोहम्मद सर उठाओ और सवाल करो दिए जाओगे सिफारिश करो कबूल की जाएगी यही शिफा कुबरा होगी शिफा कुबरा की मंजूरी के बाद रसूल अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वालि वसल्लम मकाम महमूद से मैदान हशर में वापस तशरीफ लाएंगे उसके बाद हक ताला फरिश्तों की मयत में मैदान हशर में नुजूल अजला फरमाएंगे फरिश्ते जमीन के दूर नजदीक किनारों पर सफ बस्ता खड़े होंगे आठ फरिश्तों ने अल्लाह ताला का अर्श थाम रखा होगा अदालत इलाही कायम हो जाएगी मलायका अंबिया औलिया और सलाहा को बतौर गवाह तलब कर लिया जाएगा फरिश्तों को हुक्म होगा
कि वह लोगों में उनके नाम आमाल तकसीम कर दें अहले ईमान को सामने से और दाएं हाथ में नाम आमाल दिया जाएगा और कुफा मुशरिकीन को पुश्तैनी सारी जिंदगी पेश हो जाएगी भूले बिसरे माजी की सारी यादें ताजा हो जाएंगी अहले ईमान के रोशन चेहरे कुछ और भी रोशन और तरोताजा हो जाएंगे और वह खुशी खुशी दूसरों को अपना आमाल नामा दिखाएंगे और कहेंगे हा उक किताबिया लोगों आओ मेरा नामा आमाल पढ़ो कुफा मुशरिकीन के चेहरों की सियाई में और भी कुछ इजाफा हो जाएगा जिल्लत उनके चेहरों पर छा जाएगी हसरतो निदा मत से वह
अपने हाथों को चबाए और कहेंगे काश मैं अपना नामा आमाल ना देखता याल तनी लम उत किताबिया मैं अपना नामा आमाल ना देखता मुझे अपना नाम आमाल ना दिया जाता वलम अद मा हि साबिया और काश मैं ना जानता कि मेरा हिसाब क्या है कुफा मुशरिकीन बार-बार अपने नामा आमाल को देखें और ताज्जुब से कहेंगे कि यह कैसा अजीबो गरीब नामा आमाल है जिसमें हर छोटा बड़ा अमल लिखा हुआ मौजूद है या वलता मालीहा दल किताबी लायर सरला कबीत इलाहा हाय हमारी कम बख्ती यह नामा आमाल कैसा है कोई छोटे से छोटा या बड़े से
बड़ा अमल ऐसा नहीं जो इसमें शामिल ना हो आमाल नामों की तकसीम के बाद सवालो जवाब का सिलसिला शुरू होगा अल्लाह सुभान व ताला जिस जिस से चाहेंगे बगैर किसी तर्जुमा के बराह रास्त सवाल करेंगे सबसे पहले मुशरिक से पूछा जाएगा कि उन्होंने शिर्क क्यों किया मुशरिक इंकार कर देंगे और अल्लाह ताला की कसम खाकर कहेंगे हमने तो कभी शिर्क नहीं किया वल्ला रब्बना मा कुन्ना मुशरिकीन अल्लाह ताला किरामन कातिब को गवाही के लिए बुलाएंगे वह मुशरिक के शिर्क की गवाही देंगे लेकिन मुशरिक फिर इंकार कर देंगे शिर्क से भरपूर किरामन कातिब का तैयार किया
हुआ नामा आमाल उनके सामने रख दिया जाएगा मुशरिक उससे भी इंकार कर देंगे फिर उस दौर के अंबिया उलमा और औलिया को गवाही के लिए बुलाया जाएगा तो वह उनके शिर्क की गवाही देंगे लेकिन मुशरिक उससे भी इंकार कर देंगे फिर कब्र या मिजार की वह जगह जहां शिर्क किया जाता था गवाही के लिए लाई जाएगी वो भी मुशरिक के शिर्क की गवाही देगी लेकिन मुशरिक उसका भी इंकार कर देंगे और अल्लाह ताला से मुखातिब होकर कहेंगे या अल्लाह क्या तूने अपने बंदों को जुल्म से पनाह नहीं दी अल्लाह ताला इरशाद फरमाएंगे हां मैंने अपने
बंदों को जुल्म से पनाह दी है मुशरिक कहेंगे आज हम अपनी जात के इलावा किसी दूसरे की गवाही को तस्लीम नहीं करेंगे अल्लाह ताला उनकी जबान पर मोर लगा दे और उनके आजा को बोलने का हुक्म देंगे तब मुशरिक के आजा गवाही देंगे कि हां वाकई यह शिर्क करते थे और यूं उन पर जहन्नुम वाजिब हो जाएगी मुशरिक अपने आजा को लान तान करेंगे कि हम तो तुम्हें जहन्नुम से बचाने की कोशिश कर रहे थे जवाब में आजा कहेंगे जिस अल्लाह ने तुम्हें कुवत गोया अता फरमाई है उसने हमें बोलने का हुक्म दिया था हम
कैसे इंकार कर सकते थे एक मुनाफिक से ताला सवाल करेंगे क्या मैंने तुझे दुनिया में इज्जत हुकूमत एहलो अयाल और माल दौलत नहीं दिया था वह अर्ज करेगा क्यों नहीं या अल्लाह सब कुछ दिया था अल्लाह ताला दूसरा सवाल पूछेंगे क्या तुझे यकीन था कि कयामत आएगी और अल्लाह ताला के सामने जवाब देही होगी मुनाफिक कहेगा हां या रब मुझे यकीन था मैंने तेरा कलमा पढ़ा तेरी किताब पर ईमान लाया तेरे रसूल पर ईमान लाया नमाज पढ़ी रोजे रखे जकात दी मुनाफिक अपनी तारीफें करने में पूरा जोर बयान सर्फ कर देगा अल्लाह ताला इरशाद फरमाएंगे
अच्छा जरा ठहरो हम कुछ और गवा लाते हैं मुनाफिक अपने दिल में सोचेगा कि मैं तो मुसलमानों के साथ मिलकर नमाज रोजा करता रहा आज मेरे खिलाफ गवाही कौन देगा अल्लाह ताला उसके मुंह पर मोर लगा देंगे और उसकी रान को बोलने का हुक्म देंगे चुनांचे उसकी रान उसके बदन का गोश्त उसके बदन की हड्डियां और उसके जिस्म का रुआ रुआ उसके नि पाक की गवाही देगा कि एक तरफ तो यह नमाज रोजा करता रहा और दूसरी तरफ कुफ फार से दोस्ती पर नाजा था और उनके मफा दत का तहफ्फुज करता रहा मुसलमानों को धोखा
देता रहा और उनसे गद्दारी करता रहा अल्लाह ताला उस पर सख्त गजब नाक होंगे और उस पर जहन्नुम वाजिब हो जाएगी अहले ईमान से सवाल और जवाब का अंदाज बिल्कुल मुख्तलिफ होगा एक मोमिन आदमी को अल्लाह ताला अपने करीब बुलाकर उस पर अपना दामन रहमत डाल देंगे और सवाल करेंगे तूने फुला गुनाह किया था तूने फलां गुनाह किया था मोमिन अर्ज करेगा हां या अल्लाह किया था अल्लाह ताला उसके एक-एक गुनाह के बारे में सवाल करेंगे और वह इकरार करता चला जाएगा और सोचेगा कि अब तो वह जरूर हलाक हो जाएगा आखिर में अल्लाह ताला
इरशाद फरमाएंगे मैंने तेरे गुनाहों पर दुनिया में भी पर्दा डाला हुआ था और आज भी पर्दा डाल रहा हूं और उसे जन्नत में भेज दिया जाएगा अफराद के इलावा अंबिया और रुसूल की तकज करने वाली अकवाले जवाब होंगे कौम नूह से सवाल होगा तुमने पैगंबर की तकज क्यों की और वह हजरत नूह अलैहि सलाम और उनकी दावत का इंकार करेंगे अल्लाह ताला हजरत नूह अलैहि सलाम से फरमाएंगे नूह अपने हक में गवाही लाओ हजरत नूह अलैहि सलाम अर्ज करेंगे मेरी गवाही उम्मते मोहम्मदिया है चुनांचे उम्मते मोहम्मदिया के उलमा औलिया और सुलहा हाजिर की किए जाएंगे
और वो गवाही देंगे कि हां नूह पैगंबर बनाकर भेजे गए थे और उन्होंने 950 साल तक हक रिसालत अदा किया कौम नूह कहेगी तुम तो हमारे जमाने में मौजूद ही नहीं थे तुम ये गवाही कैसे दे रहे हो इस पर रसूल अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वा आलि वसल्लम को लाया जाएगा और वह अपनी उम्मत की सदाकत की गवाही देंगे कि मेरी उम्मत ने कुरान मजीद की रूह से बिल्कुल सच्ची गवाही दी है रसूल अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वालि वसल्लम की उस गवाही के बाद कौम नूह लाजवाब हो जाएगी और मुजरिम करार पाकर जहन्नुम में डाल दी जाएगी
ऐसा ही मामला कौम हद कौम सालेह कौम शइब कौम लूत और दूसरे अंबिया की अकवाबा काफिर बारगाह इलाही में दरखास्त करेंगे ऐ हमारे रब हमने सब कुछ देख और सुन लिया बस एक दफा हमें दुनिया में वापस भेज दे हम जरूर नेक अमल करेंगे इरशाद होगा यह मुमकिन नहीं अब तो तुम्हें अपने करतूतों का हमेशा हमेशा के लिए मजा चखना होगा कुफर दूसरी दरखास्त यह करेंगे या अल्लाह हमारी गुमराही के जिम्मेदार हमारे पेशवा और लीडर हैं उन्हें हमारी निस्बत दोरा अजाब दिया जाए इरशाद होगा तुम्हारा यह उजर भी काबिले समात नहीं गुमराह होने वालों को
गुमराह होने का अजाब दिया जाएगा और गुमराह करने वालों को गुमराह करने का अजाब दिया जाएगा अपनी अपनी जगह तुम दोनों ही मुजरिम हो दोनों को अपने अपने किए की सजा मिलेगी हशर में इस किस्म के सवाल और जवाब के अलावा दीगर आमाल का हिसाब किताब भी होगा हुकूक उल्ला में से नमाज का हिसाब सबसे पहले होगा जो आदमी नमाज के हिसाब में कामयाब रहा इंशाल्लाह बाकी आमाल में भी कामयाब रहेगा और जो नमाज के हिसाब में नाकाम रहा वह बाकी आमाल में भी नाकाम रहेगा इरशाद नबवी सल्लल्लाहु अलैहि वालि वसल्लम है नमाज जन्नत की
कुंजी है हुकूक उल इबाद में से सबसे पहले कत्ल का हिसाब लिया जाएगा उसके बाद दूसरे आमाल का मकतूल को कातिल से मजलूम को जालिम से मजबूर को जाबिर से महकूटा फरमाए का मैं बादशाह हूं और हुकूक दिलवाने वाला हूं आज कोई जहन्नुम उस वक्त तक जहन्नुम में नहीं जा सकता जब तक किसी जन्नती को उसका हक ना दिलवा दूं और कोई जन्नती उस वक्त तक जन्नत में नहीं जा सकता जब तक किसी जहन्नुम को उसका हक ना दिलवा दूं छोटे से छोटे जुल्म और मामूली से मामूली ज्यादती का हक भी अल्लाह ताला हकदार को
दिलवाकर छोड़ेंगे अगर किसी ने पीलू की टहनी के बराबर किसी का हक गस किया होगा या किसी की बेइज्जती की होगी तो अल्लाह ताला उसका बदला भी दिलवाए अगर किसी ने किसी जानवर पर जुल्म किया और ज्यादती की होगी तो उस जानवर का बदला भी अल्लाह ताला लेकर छोड़ेंगे हत्ता कि अगर किसी जानवर ने किसी जानवर पर जुल्म किया होगा तो उन जानवरों को भी एक दूसरे से हुकूक दिलवाने के लिए जिंदा किया जाएगा और मजलूम जानवर को जालिम जानवर से बदला दिलवाया जाएगा उसके बाद उन्हें दोबारा मरने का हुक्म दिया जाएगा बदला या हुकूक
की अदायगी नेकियों के साथ होगी जालिम ने मजलूम पर जितना जुल्म किया होगा उसके बराबर उसकी नेक नेकियां लेकर मजलूम को दी जाएंगी अगर जालिम के नाम आमाल में नेकियां नहीं होंगी तो फिर मजलूम के गुनाह जालिम के सर पर डाल दिए जाएंगे हुकूक लेने और देने के बाद तमाम इंसानों के नामा आमाल अपनी आखिरी शक्ल में वजन होने के लिए तैयार हो जाएंगे और अतमा मेंे हुज्जत के लिए मीजान कायम किया जाएगा मीजान में जिन लोगों की नेकियों का पलड़ा भारी होगा वह कामयाब करार पाएंगे और जन्नत में जाएंगे और जिनकी बुराइयों के पलड़े
भारी होंगे वो जहन्नुम में जाएंगे बाज लोगों के मीजान में एक नेकी की ज्यादती या एक नेकी की कमी उनके जन्नती या जहन्नुम होने का फैसला कर देगी और कहा जाता है कि हर शख्स के आमाल तुलने पर एक फरिश्ता ऐलान करेगा कि फुला इब्ने फुला कामयाब हुआ या फुला इब्ने फुला नाकाम हुआ लोगों के नामा आमाल का वजन उनके ईमान और अकीदा के मुताबिक होगा कुफर मुशरिकीन मु दन और मुनाफिकन के ढेरों नेक आमाल का वजन जर्रा बराबर नहीं होगा जबकि एक मोमिन आदमी के नाम आमाल में 999 गुनाहों से भरे हुए रजिस्टर होंगे
अल्लाह ताला के सवालों के जवाब में वह अपने गुनाहों का तरा करेगा अल्लाह ताला फरमाएंगे इसके आमाल मीजान में तोले जाएं नेकियों के पलड़े में एक छोटा सा कागज रख दिया जाएगा जिस पर कलमा तौहीद लिखा होगा वही कलमा ए तौहीद उसके गुनाहों से भर 999 रजिस्टों पर भारी हो जाएगा और वह जन्नत में चला जाएगा मीजान इन तीन जगहों में से एक है जिसके बारे में अल्लाह ताला के रसूल इमाम उल अंबिया जनाबे मोहम्मद रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वालि वसल्लम ने इरशाद फरमाया कि वहां कोई आदमी किसी दूसरे आदमी को याद नहीं करेगा ना उसकी
मदद करेगा ना उसके काम आएगा अगर किसी आदमी की एक नेकी मीजान में कम हो गई तो सारे मैदान हशर में कोई भी उसे एक नेकी देने के लिए तैयार नहीं होगा ना बेटा ना बेटी ना बीवी ना कोई दोस्त ना कोई पीरो मुर्शिद ना कोई रिश्तेदार बल्कि सब एक दूसरे से दूर भागेंगे सबसे आखरी और मुश्किल तरीन मरहला सिरात का होगा हर आदमी को पुल सिरात से ही गुजर कर जन्नत में जाना होगा पुल सिरात बाल से बारीक और तलवार की धार से ज्यादा तेज होगा जिसे जहन्नुम के ऊपर रखा रखा जाएगा और लोगों
को उससे गुजरने का हुक्म दिया जाएगा गुजरने से पहले पूरे मैदान हशर में हर तरफ मुकम्मल तारीख और अंधेरा छा जाएगा हर आदमी को उसके अकीदा और आमाल के मुताबिक सिरात से गुजरने के लिए नूर दिया जाएगा अहले ईमान को दो नूर की मसले दी जाएंगी बाज को एक मछल दी जाएगी बाज लोगों को टिमटिमाते चिराग की रोशनी दी जाएगी हत्ता कि सबसे कम दर्जा उस शख्स का होगा जिसके पांव के अंगूठे पर रोशनी होगी अहले ईमान पुल सरात से गुजरते हुए अल्लाह ताला से दुआ मांगेंगे रब्बना अतम लना नरना व फिर लना इनका अला
कुली कदीर ऐ हमारे परवरदिगार हमारा नूर आखिर दम तक कायम रहे हमें बख्श दे बेशक तू हर चीज पर कादिर है बाज अहले ईमान बिजली की तेजी के साथ पुल सरात उबू करेंगे बाज हवा की तेजी के साथ बाज तेज रूह घोड़ों की रफ्तार से और बाज ऊंटों की रफ्तार से उबू करेंगे बाज लोग दौड़ते हुए बाज लोग आम चाल से और बाज सुस्त रूह होंगे बाज गिरते पड़ते ठोकरें खाते और जख्मी होते उबू करेंगे पुल सिरात के दोनों तरफ खुद का कुंडे यानी हुक्स लगे होंगे जो अल्लाह ताला के हुक्म के मुताबिक बाज लोगों
के चलने में सिर्फ रुकावट डालेंगे बाज लोगों को पुल के ऊपर ही बार-बार गिराते रहेंगे बा लोगों को सिर्फ जख्मी करेंगे और बाज को खींच कर जहन्नुम में डाल देंगे कुछ लोग चंद कदम ही चलेंगे तो उन्हें जहन्नुम में गिरा दिया जाएगा बाज लोग कुछ फासला तय कर लेंगे तो जहन्नुम में गिरा दिए जाएंगे बाज लोग निस्फ फासला तय करने के बाद गिराए जाएंगे बाज सिरात उबू करने के करीब होंगे तो गिरा दिए जाएंगे इंसान के आमाल लिहा सिरात पर ना सिर्फ नूर मया करेंगे बल्कि इंसान की हिफाजत भी करेंगे और कहा जाता है कि
कुर्बानी के जानवर सवारियों का काम देंगे सिरात से गुजरने का मंजर इस कदर होलनांठे [संगीत] गी बाद में दीगर अं और उनकी उम्मत उबू करेंगी सिरात उबू करने के बाद तमाम अहले ईमान पुल सिरात के आखरी हिस्से में रोक लिए जाएंगे और जिन मुसलमानों के दरमियान कोई गलतफहमी या गिला शिकवा गुस्सा या नाराजगी होगी वह दूर की जाएगी जब सारे अहले ईमान मुकम्मल तौर पर पाक और साफ हो जाएंगे तब उन्हें जन्नत में दाखिल होने की इजाजत दी जाएगी नबी करीम रफ रहीम इमाम उल अंबिया जनाबे मोहम्मद रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वा आलि वसल्लम जन्नत के
दरवाजे पर तशरीफ लाएंगे दरवाजा खुलेगा आप अपनी उम्मत समेत जन्नत में कदम रंजालकर लाहिंग आप अपनी उम्मत का हाल दरयाफ्त फरमाएंगे जब आपको मालूम होगा कि बेशुमार उम्मती जहन्नुम में हैं तो आप अल्लाह के हुजूर सजदा में गिर पड़ेंगे अल्लाह ताला की हमद सना करके सिफारिश की इजाजत तलब करेंगे तवील मुद्दत सजदा में गुजारने के बाद हुक्म होगा ऐ मोहम्मद जाओ आपकी उम्मत में से जिनके दिल में जाओ के दाने के बराबर ईमान है उन्हें जहन्नुम से निकालकर जन्नत में दाखिल कर दो रसूल करीम सल्लल्लाहु अलैहि वालि वसल्लम फरिश्तों को लेकर अपनी उम्मत के बरगुजार
अफराद के साथ जहन्नुम के किनारे तक जाएंगे और फरमाएंगे अपने-अपने आइज्जा और अकार और अपनी-अपनी जान पहचान के अफराद की निशानी बताओ ताकि फरिश्ते उन्हें निकाल लाएं चुनांचे ऐसे लोग जिनके दिल में जौ के दाने के बराबर ईमान होगा जहन्नुम से निकालकर जन्नत में ले जाएंगे उस वक्त आप सल्लल्लाहु अलैहि वालि वसल्लम की उम्मत अहले जन्नत का एक चौथाई होगी आपकी सिफारिश देखकर दीगर अंबिया कराम भी अपनी-अपनी उम्म तों की सिफारिश करेंगे उम्मते मोहम्मदिया के शोहदा उलमा औलिया और सुलहा को भी शिफा की इजाजत दी जाएगी और वह भी अपने अपने आइजा अ काब और
जान पह जान के लोगों की सिफारिश करके उन्हें जहन्नुम से निकलवा करर जन्नत में ले जाएंगे रसूल करीम सल्लल्लाहु अलैहि वा आलि वसल्लम जन्नत में वापस पहुंचकर फिर उम्मत के बारे में सवाल करेंगे अब मेरी उम्मत में से कितने आदमी जहन्नुम में बाकी हैं आपको बताया जाएगा कि अभी तो हजार तादाद में लोग जहन्नुम में हैं आप फिर सिफारिश के लिए सजदा में गिर पड़ेंगे इने शिफा मिलेगा कि आप की उम्मत के वो अफराद जिनके दिल दिल में चटी या राई के बराबर ईमान है उन्हें भी निकाल लाओ आप हसबे साबिक उम्मत के उलमा औलिया
सोलहा को साथ लेकर जहन्नुम के किनारे पहुंचेंगे और राई के बराबर ईमान वालों को जहन्नुम से निकालकर जन्नत में ले जाएंगे तब आपकी उम्मत अहले जन्नत की एक तिहाई हो जाएगी आप फिर अस्तगफार फरमाएंगे मेरी उम्मत के कितने अफराद अभी जहन्नुम में है आपको बताया जाएगा अभी तो हजारों उम्मती जहन्नुम में आप इजन शिफा के लिए फिर सजद रेज हो जाएंगे अल्लाह ताला की हमद सना करेंगे आपको फिर इजन शिफा मिलेगा कि चटी या राई से कम दर्जा के ईमान वालों को भी जहन्नुम से निकाल लाओ इने शिफा मिलने पर आप फिर फरिश्तों की मयत
में अपनी उम्मत के उलमा फजला और औलिया सलाहा के साथ जहन्नुम के किनारे पहुंचेंगे और उम्मत के उन अफराद को भी जहन्नुम से निकलवाए जिनके दिल में राई से भी कम दर्जा का ईमान होगा तब आपकी उम्मत अहले जन्नत की निस्फ तादाद के बराबर हो जाएगी चौथी मर्तबा फिर रसूल अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वा आलि वसल्लम उन लोगों के लिए इजन शफात तलब करेंगे जिन्होंने सारी जिंदगी में सिर्फ एक बार ला इलाहा इल्लल्लाह पढ़ा होगा अल्लाह ताला इरशाद फरमाएंगे मेरी इज्जत अजमत जलाल और किबरिया की कसम जिसने ला इलाह इल्लल्लाह कहा है उसे मैं खुद जहन्नुम
से निकालू चुनांचे आखिर में अल्लाह ताला खुद उन लोगों को जहन्नुम से निकालकर जन्नत में दाखिल फरमाएंगे जिन्होंने ला इलाहा इल्लल्लाह कहा होगा जन्नती लोग उस आखरी गिरोह को उतका उ रहमान यानी रहमान के आजाद करदा कहकर पुकारेंगे शिफा का सिलसिला जब मुकम्मल हो जाएगा और तमाम अहले जन्नत जन्नत में दाखिल हो जाएंगे तब अहले जन्नत में अपनी औलाद और अजीजो अकारिक से मिलने का तज उस पैदा होगा और वह उनके मिलने और उन्हें देखने की ख्वाहिश का इजहार करेंगे इरशाद बारी ताला होगा कि औलाद को उनके वालदैन के साथ मिला दिया जाए चुनांचे तमाम
अहले जन्नत के एहलो अयाल को एक जगह इकट्ठा कर दिया जाएगा अहले जन्नत के जन्नत में आबाद हो जाने के बाद और अहले जहन्नुम के जहन्नुम में पहुंचने के बाद सबको आवाज दी जाएगी ऐ अहले जन्नत जन्नत के किनारे पर आ जाओ ऐ अहले जहन्नुम जहन्नुम के किनारे पर आ जाओ दोनों फरीक जब किनारों पर पहुंचेंगे एक सफेद मेंडा लाया जाएगा जिसके बारे में सवाल किया जाएगा ऐ अहले जन्नत ऐ अहले जहन्नुम बताओ यह कौन है कहेंगे या अल्लाह यह मौत है उसके बाद अल्लाह ताला उस मेंढे को जिबाह करने का हुक्म देंगे मेंढे को
जिबाह करने के बाद ऐलान कर दिया जाएगा ऐ जन्नत वालों तुम्हारे लिए हमेशा हमेशा के लिए जन्नत है तुम्हें कभी मौत नहीं आएगी और ऐ जहन्नुम वालों तुम्हारे लिए हमेशा हमेशा की जहन्नुम है तुम्हें भी कभी मौत नहीं आएगी यह सुनकर जन्नती लोग इस कदर खुश होंगे कि अगर खुशी से मरना मुमकिन होता तो जन्नती लोग खुशी से मर जाते जहन्नुम यह ऐलान सुनकर इस कदर मगम होंगे कि अगर गम से मरना मुमकिन होता तो जहन्नुम लोग गम से मर जाते आखिरत के शदीद मसाइल व आला के मुकाबले में दुनिया के मसाइल व आला ना
सिर्फ आरजी बल्कि बहुत ही कमतर दर्जे के हैं आखिरत की लाजवा और अब्दी नेमतों के मुकाबले में दुनिया की नेमतें बिल्कुल आरजी और कमतर दर्जे की है पस अकलमंद लोग वही हैं जो ना तो दुनिया के मसाइल से घबराकर अल्लाह और उसके रसूल की नाफरमानी में पड़े और ना ही दुनिया की रंगीनियों के फरेब में मुब्तला होकर अल्लाह और उसके रसूल को नाराज कर बैठे बल्कि दोनों हाल तों में उनकी निगाह आखिरत के आने वाले मराल पर रहे हुजूर नबीए करीम सल्लल्लाहु अलैहि वालि वसल्लम से दरयाफ्त किया गया या रसूल अल्लाह मोमिनो में सबसे ज्यादा
अकलमंद कौन है आपने इरशाद फरमा फरमाया जो मौत को ज्यादा याद करता हो और जो मौत के बाद आने वाले वक्त के लिए अच्छी तरह तैयारी करता हो वह सबसे ज्यादा अकलमंद है नाजरीन आखिर में इस बात की वजाहत जरूरी है कि नफक ऊला से लेकर जन्नत या जहन्नुम में दाखिल होने तक के तमाम वाक्यात और मराल की तरतीब का ठीक-ठीक तायन करना बहुत मुश्किल है इसी उम्मीद के साथ इजाजत दीजिए कि आपको हमारी वीडियो पसंद आई होगी अल्लाह रब्बुल इज्जत के हुजूर दुआ है कि परवरदिगार आलम हमें आखिरत की तैयारी करने की तौफीक अता
फरमाए देखते रहिए इंफो ट आदिल अल्लाह रब्बुल इज्जत आपका हामी और नासिर हो