दोस्तों एक लड़का पढ़ लिखकर कुछ बड़ा बनना चाहता था लेकिन अफसोस कि उसके पास पढ़ाई के पैसे थे नहीं फिर भी वह एक कॉलेज में एडमिशन ले लेता है और यह सोचता है कि कहीं पार्ट टाइम जॉब कर लूंगा तो मेरे खर्चे निकल आएंगे और यही सोचकर वह महाराष्ट्र के जिले से मुंबई पहुंचता है सीए की तैयारी करने के लिए लेकिन वहां पर वह एडमिशन तो ले लेता है उसे मन का जॉब नहीं मिलता है इधर-उधर बहुत परेशान होता है और एक दिन उसे लग रहा था कि अब पढ़ाई छोड़कर उसे गांव वापस जाना पड़ेगा
यही सब सोचकर वह पार्क में बैठा अपनी किस्मत पर रो रहा था तभी उसके पास एक खूबसूरत महिला आती है जिसकी उम्र करीब 50 साल की होती है वह उससे कहती है कि क्या तुम मेरे घर में नौकरी करोगे लड़का उसे देखता है कुछ सोचता है लेकिन अब व भी मजबूर था वह कहता है कि क्या काम करना है वह कहती है कि काम करने वाले काम के बारे में नहीं पूछते बस उन्हें पैसों से मतलब होता है लड़का मजबूर था कहता है कि ठीक है बिना सोचे समझे वह हां कर देता है और उसके
बाद एक दिन जब उस महिला के घर जाता है तो दोस्तों उसके साथ फिर कुछ ऐसा होता है कि एक बहुत इंटरेस्टिंग कहानी है आइए जानते हैं पूरी कहानी इस वीडियो में लेकिन वीडियो में आगे बढ़ने से पहले बस वही रिक्वेस्ट वीडियो को लाइक कर दीजिए चैनल को भी सब्सक्राइब कर लीजिए ताकि मेरा हौसला बढ़ता रहे दोस्तों यह कहानी है महाराष्ट्र के जालना जिले की एक लड़का जिसका नाम सुधीर होता है वह अपने दोस्तों के साथ सीए की पढ़ाई करने के लिए जालना जिले से मुंबई पहुंच जाता है अब उसके जो दोस्त थे उनके पास
पैसों की कमी थी नहीं लेकिन जो सुधीर था वह गरीब था माता-पिता ने कहा था कि हमने तुम्हें बीकॉम तक पढ़ा दिया अब तुम चाहो तो कहीं नौकरी कर लो वरना अगर तुम्हें आगे की पढ़ाई करनी है तो अपने दम पर करो हम तुम्हें नहीं पढ़ा सकते क्योंकि उसकी फैमिली बहुत गरीब होती है उनकी भी मजबूरी थी तो इसीलिए जो सुधीर था वह अपने दोस्तों के साथ मुंबई चला जाता है यह सोचता है कि चलो कहीं भी कोई काम कर लूंगा मेरे पढ़ाई के खर्चे निकल आएंगे अब दोस्तों वहां पर जाता हुआ एडमिशन तो ले
लेता है कोचिंग में लेकिन जिस टाइप का वह जॉब ढूंढ रहा था उसे व मिलता नहीं है कहीं पर फुल टाइम जॉब मिल रहा था कहीं पर दो-चार घंटे की अगर जॉब मिल भी रही थी तो उसमें इतने कम पैसे मिल रहे थे कि जिसका कोई हिसाब नहीं था इसीलिए दोस्तों वह जो है अ कुछ दिन इधर-उधर नौकरी के चक्कर में भटकता है इधर अपनी पढ़ाई भी करता है बहुत परेशान हो जाता है जब पाछ महीने बीत जाते हैं हर तरह से वो परेशान हो जाता है राशन वाले का उधार फोन में रिचार्ज नहीं और
कमरे का किराया भी बाकी तो इसीलिए व बहुत परेशान हो जाता है एक दिन एक पार्क में बेंच पर बैठा था और यही सब सोचकर वो रोने लगता है कि मैं क्या सोच कर आया था और मेरे साथ क्या हो रहा है कहीं ऐसा तो नहीं मुझे घर जाना पड़े या फिर पढ़ाई लिखाई छोड़कर यहीं पर कोई दूसरा काम करना पड़े जो कि 10 12 हज 000 की नौकरी करना पड़े लेकिन दोस्तों यह सब सोचते सोचते वह रोने लगता है हालात से मजबूर हो जाता है और उसी के कुछ दूरी पर कुछ महिलाएं थी जिनकी
उम्र 40 से 50 साल की उम्र की थी वह जो है वहां पर एक पार्टी करती हैं जो कि महिलाएं आपस में कर रही थी तो जब उनकी पार्टी खत्म हो जाती है तो वहां से वह महिलाएं उठकर अपने अपने घरों को जाने लगती हैं और तभी एक महिला जिसका नाम निर्मला होता है वह उसके बगल से गुजरती है तो उसके कानों में सुधीर के रोने की आवाज आती है व सीसक ससक कर रो रहा था अपना सिर पूरी तरीके से झुकाए हुए था वह नहीं देखता उसके अगल-बगल कौन आ जा रहा है बस वह
तो बस रोए जा रहा था जब निर्मला के कानों में इसकी आवाज पड़ती है तो वह ठिठक जाती हैं और उसके बाद उसके पास जाती हैं और उसके कंधे पर हाथ रखकर पूछती हैं कि क्या हुआ आखिर तुम क्यों रो रहे हो जैसे वह सुनता है चौक करर निर्मला को देखने लगता है आंसू अपने पोचता है सुधीर कहता है कि ऐसी कोई बात नहीं है लेकिन वह देखती हैं कि यह काम करने वाला भी लड़का लग नहीं रहा है और यह क्यों रो रहा है देखने में अच्छा खासा है हैंडसम सा स्मार्ट सा था वोह
पूछती है क्या बात है आखिर तुम बताओ अपनी परेशानी बताओ क्या पता मैं तुम्हारी कुछ मदद ही कर दूं तो अपनी पूरी कहानी बताता है कि मैं ऐसे ऐसे पढ़ाई करने के लिए आया था लेकिन अब मैं इतना मजबूर हो चुका हूं कि लगता है कि मुझे अब गांव वापस जाना पड़ेगा अब इतने में जो निर्मला थी वह कहती है कि ठीक है अगर तुम नौकरी ढूंढ रहे हो तो क्या तुम हमारे जैसी महिलाओं के घर में नौकरी कर सकते हो तो वह सोच में पड़ जाता है और चेहरा देखने लगता है निर्मला का तो
वह कहती है कि घबराओ नहीं तुम्हारे पढ़ाई में जितने पैसे लगने हैं वह तुम्हें पैसा मिल जाएगा ज्यादा मेहनत का काम नहीं है बस एक दो घंटे का काम है और वह तुम्हें करना पड़ेगा दोस्तों जो सुधीर था वो हालात से मजबूर था ही वह जो है हां कर देता है उसके बाद निर्मला मुस्कुराती है और अपने पर से ₹2000000 तो कुछ होने वाला था नहीं उसे तत्काल में कम से कम 15-2 हज चाहिए थे अपनी हालत कुछ सुधारने के लिए तो वह जो है अपने कमरे पर जाता है कभी वो फोन नंबर देखता है
कभी वो पैसे देखता है कभी उस महिला का चेहरा देखता है सोचता है कि पता नहीं क्या होगा कौन सा काम होगा फिर वह फोन करता है और कहता है कि काम पर कब से आना है निर्मला उधर से कहती है ठीक है और तुम अभी आ जाओ और उसके बाद उसे एक एड्रेस बताती हैं कहती हैं इस एड्रेस पर पहुंच जाओ और उसके बाद जब सुधीर जाता है तो एक बहुत ही अच्छा अलीशान सा वो घर होता है जैसे उस घर की कुंडी को नौक करता है कुछ देर बाद दरवाजा खुलता तो एक अलग
ही महिला जिसका नाम कोमल होता है वह दरवाजा खोलती है कोमल की उम्र करीब 40 साल की होती है जैसे व दरवाजा खोलती हैं उसको अंदर बुलाती हैं और वह कहता है कि मुझे किसी ने भेजा है वह बोलती हां मुझे पता है आप अंदर आ जाओ वह अंदर जाता है उसके बाद सोफे पर बैठने का इशारा करती हैं कहती बताइए आप क्या लेंगे कुछ चाय पानी तो बोलता है नहीं कुछ नहीं बस जिस काम के लिए मुझे किसी काम के लिए बुलाया गया था तो काम बताइए क्या काम करना है तो कोमल कहती है
कि काम भी बता दिया जाएगा लेकिन आप पहले कुछ खा पी लो कहता नहीं फिलहाल मुझे प्यास नहीं है भूख भी नहीं है मुझे कुछ खाना पना नहीं है अब वो असमंजस में था कि वह महिला तो यहां पर है नहीं यह कोई दूसरी महिला है उसके बाद कुछ देर वो बैठा रहा तभी एक बूढ़ी औरत भी घर में से निकलती है और उसके बाद एक और कमरे से एक लड़की जिसकी उम्र करीब 25526 साल की होती है उस लड़की का नाम निशा होता है वह भी निकलती है उसके बाद जो कोमल थी उसके पास
जाती है खुसर फसर करने लगती है और दोनों जो है ध्यान से इसको देखती हैं यह जो है उनकी बातों को समझने का प्रयास करता है कि क्या होने वाला है फिर वह कहती हैं कि ठीक है और तुम्हें जो है कोई खास काम नहीं करना है यह समझ लो इस घर में हम सिर्फ तीन ही लोग हैं एक यह है मेरी सास है एक मैं हूं और एक यह मेरी ननद है और इसका नाम निशा है तो तुम्हें काम करना है कि हम इस घर से बाहर जा नहीं सकते क्योंकि बाहर जाने पर हमारे
जान का खतरा है इसीलिए तुम जो है हमारी जितनी भी जरूरतें हैं वह सारी तुम पूरी करोगे जितना भी सामान हमको लगने वाला है खाने पीने कपड़े तक का हर एक चीज वह तुम बाहर से मार्केट से खरीद कर ला सकते हो क्या इसके लिए तुम्हें हम पैसा देंगे और जो तुम्हारा मेहनताना है वह देंगे अब वो सोच में पड़ जाता है वह कहता है क्यों आप लोगों के साथ और कोई नहीं नहीं है तो कहती है कि नहीं देखो मैं जो हूं विधवा हूं मेरे ससुर भी नहीं है यह मेरी सास है और मेरी
ननद जो है उसकी अभी शादी नहीं हुई है तो हम घर से बाहर जाते ही नहीं है हमारे जान को खतरा है अब सुधीर जो है चौक जाता है पूछता है आखिर किससे खतरा है क्या बात कर रही हैं आप तो कहती कोई बात नहीं आप भी समझ जाएंगे लेकिन फिलहाल वो एक लिस्ट बनाकर देती है कहती है कि अगर आपको काम करना है तो जाइए सामान लेकर मार्केट से आ जाइए और उसमें बहुत सारे समान थे जैसे वह घर से निकलता है और उसके बाद यही सोच रहा था कि यह कौन सा काम है
यार और क्यों नहीं यह बाहर जाएंगे तैसे ही चार लोग आकर उसका रास्ता रोक लेते हैं और उसके बाद कहते हैं हां भाई कहां जा रहा है व बोलता है भाई सामान लेने जा रहा हूं तो बोलते हैं कि जिस घर में तू आया है आइंदा लौटकर उस घर में मत जाना वरना हमसे बुरा कोई नहीं होगा वह बोलता है भाई क्यों आप ऐसी बात कर रहे हैं मैं तो बस नौकरी करने आया हूं और आप आपकी मेरे से क्या दुश्मनी है वो कहते हैं कि दुश्मनी तुझसे नहीं है दुश्मनी किसी से नहीं है हम
इंसान को हजम कर जाते हैं बस यही समझ ले अगर तू लौट के गया और फिर वहां से निकलेगा तो फिर तू सही सलामत नहीं बचेगा तेरे साथ कुछ भी हो सकता है इसीलिए बस तू बस इतना समझ कि तुझे उस घर में वापस नहीं जाना है अब वोह दोस्तों कहता है ठीक है भाई साहब मैं नहीं जाऊंगा उसके बाद वो लोग चले जाते हैं कहते हैं कि ध्यान रखना जाना मत वह आगे चला जाता है अब वह सोचता है कि क्या करूं जो उसे पैसे मिले थे सामान मिले थे वह जो है सोचता है
मैं जाऊं कि ना जाऊं यह सामान लू या ना लूं फिर वह जो है कोमल को फोन करता है कहता है कि ऐसी ऐसी बात है और कुछ लोग ऐसे मिले थे ऐसा कह रहे हैं तो फिर मेरे समझ में नहीं आ रहा मैं क्या करूं अब कोमल जब उसकी बात सुनती है तो रोने लगती है कहती है ठीक है भैया जैसे आप की मर्जी आप वैसा करें और सबको अपनी जान प्यारी है हमारा क्या है और कौन किसी का इस दुनिया में है कोई बात नहीं तुम अगर जाना चाहो तो जा सकते हो अब
सुधीर कहता है लेकिन बात क्या है कुछ बात अब बताइए आप लोग क्या आखिर परेशानी है तो कोमल जो है वैसे ही रोती है कहती है कि बात कुछ नहीं है बस यही है कि वो लोग मेरा जो यह हमारा मकान है इसे हड़पना चाहते हैं भू माफिया है गुंडे हैं बदमाश हैं उनका कोई कुछ कर नहीं सकता और जैसे ही मेरे पति की मौत हुई मेरे ससुर की मौत हुई दोनों एक ही दिन जो है दोनों लोगों की मौत हो जाती है और उसके बाद जो है यह लोग यह सोचते हैं कि हम लोगों
को यहां से डरा धमका कर किसी तरीके से भगा दें और इनका मकान जो है 10-20 लाख देकर हड़प ले अपने नाम करवा लें इसीलिए यह जो है धमकी देते हैं और ऐसे ही कमजोर लोगों को ये लोग धमकी देते हैं जिनका कोई नहीं होता तो यही बात है और कोई बात नहीं है कोई बात नहीं अगर तुम नहीं आना चाहो तो मत आओ अब दोस्तों सुधीर सोचता है कि यार ऐसा भी होता है इस दुनिया में कि इस तरीके से लोग लोगों को परेशान करते हैं अब कुछ भी हो एक बार तो मैं उस
घर में जाऊंगा ही जाऊंगा अब वो सामान लेता है और उसके बाद धीरे-धीरे करके इधर-उधर करके वो चला जाता है उस घर में फिर वापस चला जाता है और जैसे उसको यह लोग देखती हैं खुश हो जाती हैं कि चलो कम से कम यह आ गया और वह भी जाते हुए डर रहा था कि कहीं वह लोग फिर रास्ते में ना मिल जाए लेकिन शायद उन लोगों को यह अंदाजा नहीं था कि वह लौट कर आएगा इसीलिए शायद वह नहीं आए होंगे वहां पर जाता है तो फिर कहता है कि मैं तो आ गया लेकिन
मुझे बहुत डर लग रहा था तो पूछता है कि आखिर आपके लोगों के साथ क्या हुआ था आपके जो पति थे और जो आपके ससुर थे कैसे उनकी मौत हुई तो कहती है ऐसा कुछ नहीं वो लोग शिमला जा रहे थे किसी काम से और खाई में उनकी कार गिर गई तो इसीलिए उनकी मौत हो गई थी और जैसे ही उनकी मौत हुई तो यह लोग हमारे पीछे पड़ गए अब दोस्तों बातों ही बातों में जो है अब रात हो जाती है अब वह कहता है कि मुझे जाना है तो मैं जाऊं कैसे कोमल कहती
है कि अगर तुम रुकना चाहो तो यहीं रुक जाओ जब सुबह होगी तब चले जाना लेकिन उसे सुबह का भी अंजाम पता था कि अगर वो जाएगा तो उसके साथ क्या हो सकता है फिलहाल वो कहता है कि कहीं वो लोग अगर घर में आ गए मुझे ढूंढते ढूंढते तो क्या होगा तो वो कहती है आप इतना क्यों डर रहे हो हम तो रोज इसी डर में जीते हैं लेकिन फिलहाल हमने अपने पैसों से सीसीटीवी वगैरह लगवा रखे हैं उन लोगों को पता है इसीलिए व मेरे घर तक तो नहीं आते लेकिन हम घर के
बाहर जाते भी नहीं है कभी और इसी डर से नहीं जाते हैं वह कहता है कि पुलिस वगैरह कंप्लेन करना चाहिए तो वो कहती हैं कि हम पुलिस में क्या जाएं हमारे घर के पहले ही दो लोगों की मौत हो चुकी है हम तीनों अकेले हैं और जो मेरे बच्चे हैं दोस्तों जो कोमल थी उसके दो बच्चे भी होते हैं वोह किसी रिश्तेदार के यहां उसने भेज रखा था कहती है कि यहां भी यहां तक भी डर लगा रहता है कि हमारे जो बच्चे रिश्तेदार में हैं कई उनके साथ यह लोग कुछ ना कर दें
इसीलिए जो है हम कभी पुलिस वालों के पास जाते ही नहीं है हमें जो है बहुत डर लगता है अब दोस्तों सुधीर कुछ देर पहले जान ही चुका था कि डर क्या चीज होती है आसानी से समझ जाता है उनका दुख और दर्द कि हां शायद इसी वजह से ये लोग बाहर नहीं गए होंगे कंप्लेन नहीं किए होंगे कहता है कितने दिनों से ये चल रहा है तो लोग कहती हैं 1 साल हो गया एक साल से यही सब ये लोग कर रहे हैं अब दोस्तों रात का खाना बनता है सारे लोग बैठकर खाना खाते
हैं लेकिन बाते हुई बातों में उसे एक बहुत काम की चीज पता चलती है और यह बात यह थी कि जो लड़की थी जो निशा थी वह एक सीए थी सीए की पढ़ाई वो कर चुकी थी उसका कंप्लीट हो चुका था और जैसे उसकी पढ़ाई कंप्लीट हुई थी वैसे ही उसके भाई और पिता की मौत हो गई थी इसीलिए व नौकरी वगैरह कर नहीं पाई और घर में डर के मारे उन लोगों की वजह से घर से बाहर भी नहीं निकलती थी तो घर में रहती थी अब जब निशा सुनती है कि जो सुधीर है
व सीए की पढ़ाई करने के लिए ही आया था मुंबई में जालना जिले से तो वह बहुत खुश होती है कहती है कि ठीक है मुझे पता है किस तरीके से पढ़ाई की जाती है मैंने तो कर रखा है तो मैं तुम्हारी पूरी मदद करूंगी तुम्हें जो भी कुछ है मैं तुम्हें बता भी दिया करूंगी और बहुत अच्छा लगा कि तुम पढ़ाई के लिए कुछ भी कर सकते हो पढ़ाई के लिए तुम नौकरी ढूंढ रहे हो अपने गांव से यहां तक चले आए तो मुझे पता है और ऐसे लोग मुझे अच्छे लगते हैं अब सुधीर
भी मन ही मन सोचता है कि अब चाहे जो भी हो जाए मेरे साथ अब मुझे जो है इनकी नौकरी करनी ही करनी है इनके घर से तो जाना ही नहीं है वो कहता है जो भी होगा वो होने दो अब दोस्तों उस रात जो है वो सारे लोग बातें करते रहते हैं लेकिन जो डर था वह उनके ऊपर हावी था तो मन ही मन सुधीर सोचता है कि अगर मैं यहां से गया तो पक्का व मेरा काम तमाम कर देंगे दोस्तों उसके बाद जो है वह अपने दोस्त को फोन लगाता है जो उसका दोस्त
था उसके एक जानकार थे जिनका जो भाई था वह आईपीएस ऑफिसर होते हैं वह महाराष्ट्र कैडर के ही होते हैं और मुंबई में ही उनकी कहीं पर तैनाती थी तो वह उनसे मदद मांगता है कहता है कि हमारी मदद कर दीजिए जो परिवार है इस तरीके से परेशान है और मेरी भी जान को खतरा है दोस्त कहता है कि यार क्यों नहीं मदद करेंगे अभी मैं जो है भाई से बात करता हूं और फिर वह है उनसे बात करता है अब दोस्तों जैसे उनकी परेशानी उन ऑफिसर तक पहुंचती है वह तुरंत एक्शन में आते हैं
और उसके बाद वहां के संबंधित थाने पर सूचना भिजवा हैं और फिर जो है वह पूरा प्लान बनाते हैं कि कैसे-कैसे क्या करना है दो दिन का समय मांगते हैं और दो दिन के अंदर-अंदर फिर जब पूरी तरीके से प्लानिंग हो जाती है फिर वह सुधीर से कहते हैं ठीक है तुम घर से बाहर निकलो जैसे व घर से बाहर निकलता है तैसे ही दोस्तों यह पांच छह लोग तैयार ही थे उसके लिए वह उसके ऊपर हमला कर देते हैं लेकिन पूछ पीछे से जो है पुलिस भी तैनात थी सिविल ड्रेस में वह उनको दबोच
लेती है और उसके बाद फिर उनके आकाओं तक पहुंचती है और फिर दोस्तों उनके ऊपर हत्या का प्रयास जान से मारने की धमकी महिलाओं को उत्पीड़न तमाम तरीके का जितनी भी धाराएं बन सकती थी 1015 साल का कम से कम उन लोगों का इंतजाम कर देते हैं और तब जाकर कोमल को निशा को और उन जो बूढ़ी माता थी उनको छुटकारा मिलता है भगवान ने तो उनका बिगाड़ी रखा था लेकिन वह इंसान थे या क्या थे राक्षस थे क्या थे जो कि उनके पीछे लगे हुए थे फिलहाल दोस्तों अगर सुधीर नहीं मौके पर होता तो
ना जाने उनके साथ क्या हो सकता था अभी तक कुछ कहा नहीं जा सकता ता क्योंकि और भी कुछ लड़कों को उन्होंने काम पर इसी तरीके से रखा था अपनी सखी सहेलियों से फोन करते थे मदद मांगते थे तो लोग किसी तरीके से किसी को वहां पर भेजते थे लेकिन जो कोई बाहर जाता था वह फिर वापस घर में आता ही नहीं था वहीं से व भाग जाता था लेकिन सुधीर था कि दोस्तों जो कि पढ़ाई के लिए एकदम प्रतिबद्ध था कि चाहे जो हो जाए मैं जो है यह काम करके ही रहूंगा दोस्तों उसके
बाद जब माफिया लोग जेल चले गए तो निशा जो है अपनी नौकरी शुरू कर ती है और उसके पिता जो थे वह भी एक सीए थे उनका अच्छा काम था बढ़िया उनकी नौकरी थी लेकिन फिलहाल उनकी मौत के बाद परिवार बेसहारा था उसके बाद दोस्तों सुधीर के रूप में एक नया सहारा उस घर को मिलता है फिलहाल वह परिवार उसकी मदद करता रहा उसने अपनी पढ़ाई आगे पूरी करी क्योंकि निशा जो है नौकरी करती थी तो उसने जो है बोला कि मैं तुम्हारी पूरी मदद करूंगी और आगे दोस्तों व भी उसका भी सीए में सिलेक्शन
हुआ उसकी पढ़ाई पूरी हुई आज वह भी नौकरी कर रहा है तो दोस्तों यह रही कहानी आपको कैसी लगी कमेंट करके जरूर बताएं कहानी अच्छी लगी हो तो वीडियो को लाइक नहीं किया तो लाइक कर दीजिए चैनल को सब्सक्राइब कर लीजिए इस प्रकार की कहानियों के लिए फिर मिलेंगे अगले वीडियो में तब तक के लिए जय हिंद