नमस्कार दोस्तों चाहे समय कितना भी कठिन क्यों ना हो हर परिस्थिति में मुस्कुराना और खुश रहना एक ऐसी अद्भुत कला है जिसे अगर आपने सीख लिया तो कोई भी मुश्किल आपको हरा नहीं सकती जीवन में हम सभी किसी ना किसी मुश्किल से गुजरते हैं जब जीवन की समस्याएं हमें घेर लेती हैं तो हम उनका हल ढूंढने के लिए इधर-उधर भागते हैं कभी किसी से उम्मीद लगाते हैं कि वह हमारी मदद करेगा तो कभी कि जादुई समाधान की तलाश में रहते हैं लेकिन जब यह उम्मीदें टूट जाती हैं तो हमारे चेहरे से मुस्कान गायब हो जाती
है और जो थोड़ी बहुत खुशियां बची होती हैं वह भी धीरे-धीरे हमसे दूर चली जाती हैं आज हम आपको ऐसी तरकीबें बताएंगे जो आपकी खोई हुई खुशियों को वापस लाने में मदद करेंगी तो चलिए इस प्रेरणादायक कहानी की शुरुआत करते हैं बहुत समय पहले की बात है एक नगर में सबल नाम का एक गरीब व्यक्ति रहता था सबल का परिवार छोटा था उसकी पत्नी एक नवजात बच्चा और उसके बुजुर्ग माता-पिता सबल की आर्थिक स्थिति बहुत ही दयनीय थी घर का खर्च चलाना उसके लिए बहुत कठिन हो गया था वह रोज मजदूरी के लिए निकलता लेकिन
कभी उसे काम मिलता और कभी नहीं सबल पहले से ही बहुत परेशान था और तभी एक दिन उसकी मां की तबीयत अचानक बहुत खराब हो गई इस संकट ने उसकी मुश्किलें और बढ़ा दी सबल को यह समझ आ गया कि उसकी परेशानी का असली कारण क्या है उसके पास अपनी मां के इलाज के लिए भी पैसे नहीं थे यह बात उसके दिल में घर कर गई कि अगर उसे खुश रहना है और अपने जीवन को सही तरीके से जीना है तो पैसे की बहुत जरूरत है सबल ने ठान लिया कि वह किसी भी तरह जल्द
से जल्द अमीर बनेगा और खूब सारा पैसा कमाए उसकी एक ही धुन थी ज्यादा से ज्यादा पैसे कमाने का तरीका ढूंढना वह इस उम्मीद में इधर-उधर भटकता रहा कि उसे कोई ऐसा काम मिल जाए जिससे उसकी किस्मत बदल जाए उसने कई तरह के कामों की तलाश की लेकिन उसे ऐसा कोई काम नहीं मिला जिससे वह जल्दी अमीर बन सके और अपनी परेशानियों से छुटकारा पा सके लेकिन क्या सिर्फ पैसा कमाने से खुशी मिल सकती है क्या सिर्फ अमीर बनने से जीवन की सारी समस्याएं हल हो जाती हैं इसी सवाल का जवाब हमारी यह कहानी देगी
जिसे सुनकर आप ना सिर्फ प्रेरित होंगे बल्कि खुश रहना और मुश्किलों का सामना करना भी सीखेंगे एक दिन सबल बेहद निराश होकर जंगल के रास्ते से घर लौट रहा था चलते चलते उसने देखा कि एक व्यक्ति एक महिला को लूट रहा है वह आदमी उस महिला से जबरदस्ती उसका सारा धन छीन रहा था यह दृश्य देखकर सबल वहीं खड़ा रह गया जैसे उसके पैरों में जड़ें जम गई हो उसकी नजरें उस लुटेरे पर टिकी रही जो बुरी तरह उस महिला के स्वर्ण आभूषण छीन रहा था सबल के मन में अचानक एक ख्याल आया अगर मैं
भी ऐसा ही करूं तो मेरे पास भी बहुत सारा धन हो जाएगा मैं भी जल्द ही अमीर बन जाऊंगा यह सोचकर सभल बहुत खुश हो गया और उसने निर्णय लिया कि वह भी यही रास्ता अपनाए अगले ही दिन से उसने इस योजना पर काम करना शुरू कर दिया सभल जंगल के रास्ते से आने जाने वाले यात्रियों को लूटने लगा कुछ ही समय में उसने काफी धन इकट्ठा कर लिया उसका जीवन अब पूरी तरह बदलने लगा पहले जहां वह दो वक्त की रोटी के लिए दिन रात कड़ी मेहनत करता था अब वह आराम से रहने लगा
उसने अपने लिए एक बड़ा और सुंदर घर बनवाया नए और महंगे कपड़े पहनने लगा और स्वादिष्ट खाना खाने लगा जो चीजें पहले उसकी पहुंच से दूर थी वे अब उसके पास थी यह सब देखकर सबल खुद को बहुत खुश महसूस करने लगा आखिरकार उसने वह सब पा लिया था जिसकी उसे हमेशा से चाहत थी लेकिन समय बीतने के साथ साथ उसकी जिंदगी में अजीब बदलाव आने लगे जितनी तेजी से उसने धन कमाया था उतनी ही तेजी से उसके घर में कलह और झगड़े शुरू हो गए उसकी मां और पत्नी के बीच छोटी-छोटी बातों को लेकर
रोज बहस होने लगी पहले जो मामूली बातें थी वे अब बड़े झगड़ों का कारण बनने लगी घर का माहौल बिगड़ता जा रहा था सभल अब समझने लगा था कि पैसा तो उसके पास आ गया लेकिन सच्ची खुशी गायब हो गई घर के झगड़े उसे अंदर से खा रहे थे वह सोचने लगा क्या सिर्फ धन से जीवन में सुख और शांति मिल सकती है हमारे जीवन में भी ऐसा ही होता है हम भी छोटी-छोटी बातों को लेकर लड़ने और झगड़ने लगते हैं इससे यह स्पष्ट होता है कि हम कितने असंवेदनशील और अचेत हो चुके हैं हम
अपने जीवन को सचेत और जागरूक होकर नहीं जीते बल्कि अपनी भावनाओं और इच्छाओं के गुलाम बन जाते हैं अगर हम जागरूक होकर जीवन जिए तो हमें यह एहसास होगा कि जीवन बहुत छोटा है और इसे खुश रहकर जीना चाहिए हम सभी अपने जीवन में खुशियों की तलाश करते रहते हैं लेकिन दुखी मन से खुशी कहां मिलती है और जो व्यक्ति पहले से ही दुखी है वह दूसरों को खुशियां दे भी कैसे सकता है सबल अब यह समझने लगा था कि सच्ची खुशी धन दौलत से नहीं बल्कि सच्चे संतोष और प्रेम से मिलती है ठीक इसी
प्रकार सबल के जीवन से भी खुशियां धीरे-धीरे गायब होने लगी थी वह अपने परिवार को समझाते समझाते थक गया था हर बार वह उनसे कहता इन छोटी-छोटी बातों में आखिर क्या रखा है इन बेकार की बातों के लिए झगड़ने से आपको क्या मिलेगा लेकिन उसकी बात कोई समझने को तैयार नहीं था एक दिन सुबह-सुबह उसकी मां और पत्नी के बीच अचानक फिर से झगड़ा हो गया दोनों इतनी जोर-जोर से बहस करने लगी कि घर का माहौल और भी बिगड़ गया यह देख सबल बहुत दुखी हो गया वह क्रोध में आ कर घर से बाहर निकल
गया चलते चलते वह सोचने लगा आखिर मैंने यह सब क्यों किया मैंने किसके लिए इतनी मेहनत की जिन लोगों के लिए मैंने यह सब कुछ किया आज वही लोग घर में लड़ते हैं झगड़ते हैं सबल ने खुद से सवाल किया जो धन दौलत मैंने इकट्ठी की उसका क्या फायदा अगर इस पैसे से मुझे और मेरे परिवार को सुकून और खुशियां नहीं मिल रही हैं तो इसका कोई मतलब नहीं इससे तो मैं पहले ज्यादा खुश था जब मेरे पास कुछ नहीं था कम से कम तब मेरा परिवार तो शांत और खुश रहता था यह सब सोचकर
सबल ने ठान लिया कि अब वह कभी किसी को नहीं लूटेगा उसने यह कसम खाई कि अब वह लूटपाट के काम को हमेशा के लिए छोड़ देगा उसने तुरंत ही अपने फैसले पर अमल किया और लूटपाट का धंधा छोड़ दिया अब सबल अपने घर पर बैठा रहता लेकिन धीरे-धीरे उसकी जमा पूंजी खत्म होने लगी उसके पास जितना धन इकट्ठा था वह भी धीरे-धीरे खत्म हो रहा था हालत इतनी खराब हो गई कि उसे अपने घर का सामान भी बेचना पड़ा सबल का जीवन फिर से उसी गरीबी की ओर लौटने लगा जहां से उसने शुरुआत की
थी लेकिन इस बार एक अंतर था सबल का मन अब शांत था क्योंकि उसने गलत रास्ता छोड़ दिया था हालांकि उसके घर की स्थिति बिगड़ती जा रही थी लेकिन सबल को कहीं ना कहीं यह विश्वास था कि समय के साथ सब कुछ ठीक हो जाएगा परिवार के अन्य सदस सस्य अब एक दूसरे पर दोष मड़ने लगे थे हर कोई दूसरे को जिम्मेदार ठहरा यह सब तेरी वजह से हो रहा है अगर तूने ऐसा नहीं किया होता तो आज हम इस हालत में नहीं होते घर में हर दिन ताने और इल्जाम का द्वार चलता ऐसा लगता
था कि खुशियां उनके घर से हमेशा के लिए विदा ले चुकी हैं बहुत दिनों तक हालात ऐसे ही बने रहे जब कुछ भी ठीक नहीं हुआ तो सबल और ज्यादा परेशान हो गया वह दो पल सुकून और खुशी की तलाश में घर से बाहर निकल पड़ा चलते चलते उसके मन में अनगिनत विचार आने लगे वह सोचने लगा क्या जीवन का मतलब सिर्फ पैसा है क्या सच्ची खुशी सिर्फ धन दौलत से मिलती है इन सवालों का जवाब खोजते हुए सबल अपनी पुरानी गलतियों पर सोचने लगा और उसे एहसास होने लगा कि सच्ची खुशी ना तो धन
में है और ना ही ऐशो आराम में बल्कि जीवन को सच्चे मन से जीने और अपने प्रियजनों के साथ शांति से रहने में है सबल ने सोचा कि अगर वह घर से कुछ समय के लिए दूर रहेगा तो शायद उसकी खोई हुई खुशियां वापस आ जाएंगी और उसे मानसिक शांति भी मिलेगी इसी सोच के साथ वह कुछ दिनों के लिए अपने घर से दूर चला गया शुरू में उसे अच्छा लगा मन को शांति मिली और लगा कि यही सही निर्णय था पर कुछ समय बाद अचानक उसका दिल फिर से भारी हो गया वह फिर से
दुख और चिंता में डूब गया और उसके मन में तरह-तरह के विचार आने लगे एक दिन वह एक पेड़ के नीचे बैठा सोच रहा था अब काफी समय हो गया है मुझे लगता है कि घर पर अब सब कुछ ठीक हो गया होगा शायद मेरी मां पिताजी और पत्नी मेरी चिंता कर रहे होंगे वे मुझे खोज रहे होंगे और सोच रहे होंगे कि मैं कहां हूं मुझे लगता है कि अब सबको अपनी गलती का एहसास हो गया होगा अब मुझे वापस घर चले जाना चाहिए यह सोचकर सबल घर की ओर चल पड़ा जैसे ही वह
अपने घर के करीब पहुंचा उसे फिर से घर के अंदर से झगड़े की आवाजें सुनाई देने लगी उसकी मां पिताजी और पत्नी आपस में बहस कर रहे थे वे एक दूसरे पर इल्जाम लगा रहे थे तू ही उसकी परेशानी का कारण है तेरे कारण ही वह घर छोड़कर गया है सब एक दूसरे पर दोष डाल रहे थे लेकिन किसी को भी इस बात की चिंता नहीं थी कि सबल कहां है या वह कैसा है उन्हें बस यह चिंता थी कि वह घर क्यों छोड़कर गया और किसकी गलती से ऐसा हुआ सबल का दिल टूट गया
उसे ऐसा लगा जैसे उसकी सारी उम्मीदें खत्म हो गई हो वह भीतर से पूरी तरह से टूट चुका था तभी उसकी नजर अपने छोटे बच्चे पर पड़ी जो वहां अपने नन्हे नन्हे पैरों से इधर-उधर भाग रहा था खेल रहा था और हंस रहा था वह घर का एकमात्र सदस्य था जो बिना किसी चिंता के खुश था उसे घर के झगड़ों से कोई फर्क नहीं पड़ता था क्योंकि वह अभी बहुत छोटा था अपने बच्चे को इस तरह से मासूमियत और खुशी में देखकर सबल का दिल पिघल गया उसकी आंखों में आंसू आ गए उसने सोचा मैं
इतने दिनों से अपने बेटे से दूर हूं कम से कम एक बार उसे गले तो लगा लूं मेरे दिल की बेचैनी कुछ कम हो जाएगी परंतु फिर उसने खुद को किसी तरह संभाला और अपनी भावनाओं को दबा लिया वह चुपचाप वहां से वापस चला गया लेकिन उसके मन में यह ठान लिया कि अब वह तभी घर लौटेगा जब उसे सच में सच्ची खुशी मिलेगी वह जानता था कि घर का माहौल अभी भी वैसा ही है और जब तक सबके दिलों में बदलाव नहीं आएगा तब तक कोई शांति या खुशी नहीं मिलेगी सबल खुशी की तलाश
में इधर-उधर भटकता रहा पर उसे कहीं भी सुकून या खुशी नहीं मिली एक दिन उसने महात्मा बुद्ध के बारे में सुना लोगों ने बताया कि महात्मा बुद्ध सभी के प्रश्नों का उत्तर देते हैं और उनकी समस्याओं का समाधान करते हैं यह सुनकर सबल के मन में आशा की एक किरण जाग उठी उसे पहले भी महात्मा बुद्ध के बारे में बहुत कुछ सुनने को मिला था और वह जानता था कि बुद्ध कभी किसी को निराश नहीं करते सबल ने तय किया कि वह महात्मा बुद्ध से अवश्य मिलेगा और अपनी समस्या उनके सामने रखेगा अगले दिन ही
सबल ने अपनी यात्रा प्रारंभ कर दी वह लंबी दूरी तय करता हुआ महात्मा बुद्ध के आश्रम तक जा पहुंचा जब उसने महात्मा बुद्ध के दर्शन किए तो उसके मन में एक उम्मीद जागी कि शायद अब उसकी समस्या का समाधान हो जाएगा सभल ने बुद्ध के चरणों में झुककर कहा हे बुद्ध मैंने सुना है कि आप सभी की समस्याओं का समाधान करते हैं और किसी को भी खाली हाथ नहीं लौटते मेरे जीवन में बहुत परेशानियां हैं मैं अपने परिवार के लिए खुशी की तलाश में भटक रहा हूं लेकिन मुझे अब तक खुशी का कोई पता नहीं
चला मैं अपने घर की समस्याओं से बहुत परेशान हूं वहां हर दिन झगड़े होते हैं और खुशी का कोई नामो निशान नहीं है क्या आप मुझे बता सकते हैं कि सच्ची खुशी कहां मिलती है महात्मा बुद्ध ने सबल की बातें ध्यानपूर्वक सुनी और थोड़ी देर के बाद बोले भंते मेरी भी एक चीज खो गई है अगर तुम उसे खोजने में मेरी मदद करोगे तो मैं तुम्हें वह खुशी खोजने में मदद करूंगा जिसकी तुम्हें तलाश है सबल ने तुरंत उत्तर दिया हे बुद्ध कृपया बताइए वह कौन सी चीज है मैं उसे अवश्य ढूंढ लाऊंगा महात्मा बुद्ध
ने मुस्कुराते हुए कहा एक छोटे से बच्चे ने मुझे एक छोटा सा सफेद पत्थर भेंट किया था वह पत्थर उस बच्चे के लिए बहुत प्रिय था और उसने अपनी सबसे प्यारी चीज मुझे दी थी वह पत्थर मेरे लिए भी बहुत कीमती था लेकिन मेरी अज्ञानता के कारण वह खो गया सबल ने महात्मा बुद्ध से पूछा बुद्ध आपने वह पत्थर आखिरी बार कहां देखा था महात्मा बुद्ध ने उत्तर दिया मैंने उसे आखिरी बार उस पेड़ के नीचे देखा था जहां मैं ध्यान कर रहा था उसके बाद ना जाने वह पत्थर कहां खो गया सबल ने तुरंत
वह पेड़ खोजने के लिए दौड़ लगा दी उसने सोचा कि अगर वह उस पेड़ के नीचे उस सफेद पत्थर को ढूंढ लेगा तो शायद उसे भी अपनी समस्या का समाधान मिल जाएगा जब वह पेड़ के पास पहुंचा और पत्थर को ढूंढने की कोशिश कर रहा था तभी महात्मा बुद्ध ने उसे रोकते हुए कहा भंते भले ही मैंने वह पत्थर उस पेड़ के नीचे खोया था लेकिन तुम्हें वह पत्थर वहां नहीं ढूंढना है तुम्हें उस पत्थर को इस पूरी दुनिया में कहीं भी खोजने जाना है और हां याद रखना वह पत्थर छोटा सा सफेद रंग का
है और उस पर खुशी लिखा हुआ है जब वह पत्थर तुम्हें मिल जाए तो उसे मेरे पास ले आना सभल बुद्ध की बात सुनकर हैरान था लेकिन उसने बुद्ध का आ देश मानने का निश्चय किया वह सोचने लगा कि आखिर यह सफेद पत्थर जिस पर खुशी लिखा है उसे कहां मिलेगा महात्मा बुद्ध ने उसे उस सफर पर भेजा जो सिर्फ एक पत्थर की नहीं बल्कि सच्ची खुशी की खोज का प्रतीक था सबल महात्मा बुद्ध की बात मानकर उस पेड़ के नीचे नहीं गया बल्कि आसपास की जगहों पर वह सफेद पत्थर ढूंढने लगा उसने पूरा गांव
छान मारा हर जगह तलाश की लेकिन उसे कुछ भी नहीं मिला धीरे-धीरे पूरा दिन बीत गया और वह थक हारकर फिर से उसी पेड़ के पास पहुंचा जहां महात्मा बुद्ध ने उसे पत्थर खोने की बात कही थी सभल सोचने लगा बुद्ध ने तो कहा था कि पत्थर उस पेड़ के नीचे खो गया है लेकिन फिर उन्होंने कहा कि उसे वहां नहीं ढूंढना है यह बात समझ में नहीं आती अगर पत्थर वहीं खोया है तो उसे कहीं और कैसे ढूंढा जा सकता है आखिरकार हार मानकर सबल महात्मा बुद्ध के पास वापस लौट आया वह बुद्ध के
सामने आकर बोला हे बुद्ध आप मुझसे कैसी अजीब बात कह रहे हैं जो चीज जहां खोई है उसे अगर मैं वहां नहीं ढूंढूं तो उसे कैसे पा सकता हूं आप कहते हैं कि उस पत्थर को दुनिया भर में खोजो लेकिन अगर वह यहां खोया है तो मुझे उसे यहीं ढूंढना चाहिए कहीं और ढूंढने का क्या मतलब महात्मा बुद्ध ने सबल की बात बड़े धैर्य से सुनी और फिर मुस्कुराते हुए बोले तो तुम कहना है कि वह पत्थर दुनिया भर में कहीं नहीं मिल सकता सभल ने उत्तर दिया हां बिल्कुल अगर वह पत्थर यहां खोया है
तो उसे यहां ही मिलना चाहिए और दुनिया में कहीं भी उसे ढूंढने का कोई फायदा नहीं है महात्मा बुद्ध ने धीरे से कहा ठीक है अब जाओ और उस पेड़ के नीचे ही उस पत्थर को ढूंढो सबल ने बुद्ध की बात मान ली और वापस उस पेड़ के नीचे गया थोड़ी ही देर में उसे वहां वह छोटा सा सफेद पत्थर मिल गया जिसे महात्मा बुद्ध ने खो दिया था पत्थर पाकर सबल बहुत खुश हुआ और वह दौड़ते हुए महात्मा बुद्ध के पास आया उसने वह पत्थर बुद्ध को देते हुए कहा हे बुद्ध लीजिए मैंने आपका
पत्थर खोज लिया अब जैसा कि आपने कहा था आप मेरी खुशियां ढूंढकर मुझे दीजिए महात्मा बुद्ध मुस्कुराते हुए सबल से बोले भंते मैं कब से तुम्हें तुम्हारी खोई हुई खुशियां लौटाने का प्रयास कर रहा हूं जो चीज जहां खोई है उसे वहीं ढूंढना होगा अगर हम उसे पूरी दुनिया में ढूंढेंगे तो वह कहीं नहीं मिलेगी हमें वहीं जाना पड़ेगा जहां हमने उसे खोया है और यही कारण है कि तुम इतने लंबे समय से अपनी खुशियों को ढूंढने में असफल हो रहे हो क्योंकि तुमने उन्हें किसी और जगह खो दिया है और अब उन्हें किसी और
जगह ढूंढ रहे हो ऐसे में तुम्हें वह खुशी कैसे मिल सकती है सबल बुद्ध की बातों को सुनकर आश्चर्य चकित हो गया उसने उत्सुकता से पूछा हे बुद्ध आप क्या कहना चाहते हैं क्या आप यह कहना चाहते हैं कि मैंने अपनी खुशियां कहीं और खोई हैं अगर ऐसा है तो कृपया मुझे बताइए मैंने अपनी खुशियां कहां खोई हैं मुझे क्यों नहीं पता कि वह कहां पर है महात्मा बुद्ध ने सबल की बातों को ध्यान से सुना फिर उन्होंने धीरे से अपना स्थान छोड़ा और सबल का हाथ पकड़कर उसे एक छोटे पेड़ के पास ले गए
पेड़ की ओर इशारा करते हुए बुद्ध बोले भंते सोचो अगर मैं इस पेड़ के सारे तनों को काट दूं तो क्या यह पेड़ फिर से बड़ा नहीं होगा सबल थोड़ी देर सोचने के बाद बोला हे बुद्ध पेड़ क्यों नहीं बड़ा होगा इसकी शाखाएं अभी भी सही सलामत हैं अगर इसे पानी और खाद दी जाएगी तो यह पेड़ फिर से बढ़ेगा और उसकी शाखाएं फिर से लौट आएंगी बुद्ध ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया तो इसका अर्थ क्या हुआ अगर मैं इस पेड़ की कुछ शाखाओं को काट दूं तो क्या यह पेड़ फिर से विकसित नहीं होगा
क्या इसकी शाखाएं फिर से नहीं निकलेंगी सभल ने बुद्ध की बात का जवाब देते हुए कहा नहीं नहीं बुद्ध ऐसा बिल्कुल नहीं होगा बल्कि इसकी शाखाएं एक बार फिर से उग आएंगी और यह पेड़ फिर से बढ़ने लगेगा पेड़ की शक्ति उसकी शाखाओं में नहीं बल्कि उसकी जड़ों में होती है महात्मा बुद्ध ने गहरी नजरों से सबल को देखा और कहा तो मैं क्या करूं क्या मैं इस पेड़ के मुख्य तने को ही काट दूं क्या ऐसा करने से यह पेड़ समाप्त हो जाएगा सबल ने बुद्ध की बात सुनकर जवाब दिया हे बुद्ध आप कैसी
बातें कर रहे हैं आप तो इतने ज्ञानी हैं फिर भी इतनी छोटी सी बात कैसे नहीं समझ पा रहे अगर आपने इसके मुख्य तने को भी काट दिया तब भी यह पेड़ खत्म नहीं होगा तने के कटने के बाद भी उसकी जड़े मजबूत हैं और वही जड़े इसे फिर से नया जीवन देंगी जहां से तना कटा होगा वहां से फिर से नई शाखाएं उगने लगेंगी हां इसमें समय जरूर लगेगा लेकिन यह पेड़ फिर से बढ़ेगा और अपने पुराने स्वरूप को पा लेगा बुद्ध ने गहरी सांस ली और गंभीरता से कहा तो भंते फिर मैं क्या
करूं आखिरकार इस पेड़ को समाप्त करने का सही तरीका क्या है तुम ही बताओ तुम ही मेरा मार्गदर्शन करो सबल ने बुद्ध की ओर देखकर कहा बुद्ध इस पेड़ की जड़ें धरती के भीतर बहुत गहरी हैं यही जड़ें इसे जीवन देती हैं जब तक इन जड़ों को खत्म नहीं किया जाएगा तब तक यह पेड़ हमेशा फिर से उगता रहेगा इसकी शाखाओं को काटना या तने को हटाना सिर्फ अस्थाई समाधान है असली समाधान तब मिलेगा जब इसकी जड़ को समाप्त किया जाएगा जड़ ही यह तय करती है कि पेड़ का आकार कैसा होगा उसकी मजबूती कितनी
होगी और वह ऊपर से कैसे दिखाई देगा सबल की आवाज सुन ते ही महात्मा बुद्ध मुस्कुरा उठे और बड़े शांत स्वर में बोले भंते तुमने बिल्कुल सही कहा जिस प्रकार इस पेड़ की जड़ें धरती के भीतर गहराई तक फैली हुई हैं उसी प्रकार मनुष्य की असली जड़ें भी उसके भीतर होती हैं अगर कोई व्यक्ति बाहर से किसी भावना को महसूस नहीं कर पा रहा तो इसका अर्थ यह है कि उसकी जड़ों में कोई कमी है ठीक उसी प्रकार जिस तरह तुम अपनी खुशियों को बाहर ढूंढ रहे हो पर वह तुम्हें नहीं मिल रही और कैसे
मिलेंगी क्योंकि वह खुशियां तो तुम्हारे भीतर ही छिपी हैं जब तक तुम अपने भीतर से खुश नहीं होगे तब तक बाहर की कोई भी चीज तुम्हें सच्चा आनंद नहीं दे सकती महात्मा बुद्ध की इन गहरी बातों को सुनकर सबल ने पूछा हे बुद्ध आप सत्य कह रहे हैं लेकिन कभी-कभी बाहरी परिस्थितियां हमारे हालात और बाहरी वातावरण हमारी खुशियां हमसे छीन लेते हैं ऐसे में हम क्या करें हम बाहर की चीजों से कैसे प्रभावित ना हो बुद्ध ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया भंते यह सब तुम्हारा भ्रम है ध्यान से इस पेड़ को देखो क्या तुमने कभी
ध्यान दिया है कि एक समय ऐसा भी आता है जब इस पेड़ के सारे पत्ते गिर जाते हैं पेड़ सूना हो जाता है बिल्कुल वीरान लेकिन फिर एक समय आता है जब इसी पेड़ पर हरे भरे नए पत्ते उगने लगते हैं यह चक्र निरंतर चलता रहता है हर मौसम बदलता है पर पेड़ अपनी जड़ों की वजह से हम खड़ा रहता है इसका मतलब यह है कि बाहर की स्थितियां केवल अस्थाई होती हैं वे केवल थोड़े समय के लिए बदलती हैं लेकिन वे कभी भी भीतर की शक्ति को जो असली खुशी का स्रोत है उसे दबा
नहीं सकती बुद्ध ने फिर कहा सच्ची खुशी तुम्हारे भीतर ही बसी है चाहे बाहर कितनी ही कठिनाइयां क्यों ना हो चाहे हालात कितने भी प्रतिकूल क्यों ना हो चाहे तुम्हारे जीवन में कितना भी दुख आ जाए तु तुम फिर भी अपनी खुशी ढूंढ सकते हो यह बाहरी चीजों में नहीं बल्कि तुम्हारे भीतर की स्थाई शक्ति में होती है सभल ने बुद्ध की बातें ध्यान से सुनी और उसकी आंखों में नए विचारों की चमक दिखाई दी बुद्ध ने आगे कहा तुम्हारे चारों ओर खुशियां ही खुशियां फैली हैं फर्क सिर्फ इतना है कि तुम उन्हें कहां देख
रहे हो अगर तुम बाहर ढूंढ रहे हो तो निराशा हाथ लगेगी लेकिन अगर तुम अपने भीतर झा कोगे अपनी आत्मा की गहराई में जा आओगे तो तुम्हें वही खुशी मिलेगी जिसे तुम इतने समय से खोज रहे हो सबल ने महात्मा बुद्ध की बातें ध्यान से सुनी और फिर गंभीर स्वर में पूछा हे बुद्ध आप जो कह रहे हैं वह बिल्कुल सत्य है पर मैं अपनी आत्मा में खुशी कैसे ढूंढ सकता हूं मुझे तो अपने भीतर उतरना आता ही नहीं बुद्ध ने मुस्कुराते हुए कहा भंते जब तुम किसी को लड़ते या झगड़ते हुए देखते हो तो
तुम्हें कैसा महसूस होता है सबल ने तुरंत उत्तर दिया हे बुध मुझे बहुत बुरा लगता है मेरा मन करता है कि मैं वहां से दूर चला जाऊं क्योंकि झगड़े और लड़ाई से मेरे मन को शांति नहीं मिलती महात्मा बुद्ध ने फिर से एक प्रश्न किया अच्छा जब तुम किसी को प्रेम भरी बातें करते हुए देखते हो तब तुम्हें कैसा महसूस होता है सबल ने मुस्कान के साथ जवाब दिया ऐसा लगता है मानो स्वर्ग यही धरती पर है प्रेम भरी बातें सुनकर मेरा मन शांत हो जाता है और मुझे गहरी खुशी का एहसास होता है बुद्ध
ने सिर हिलाते हुए कहा भंते यही कारण है कि तुम्हारे अंतर मन में बदलाव आ रहा है तुम्हारे मन की स्थिति बाहर की चीजों से प्रभावित हो रही है यदि तुम सच में अपने भीतर की खुशी को खोजना चाहते हो तो तुम्हें बाहरी चीजों से अपना संबंध तोड़ना होगा ध्यान करो अपने मन को भीतर की ओर मोड़ो जब तुम बाहर की चीजों को छोड़ोगे और भीतर की यात्रा करोगे तभी तुम्हें असली शांति और सच्ची खुशी मिलेगी बुद्ध ने फिर कहा बाहर की परिस्थितियों का असर तुम पर तब तक रहेगा जब तक तुम उनसे जुड़ाव महसूस
करोगे यदि तुम्हें बाहर की चीजों से सहायता लेनी है तो ऐसे लोगों की संगत करो जो तुम्हें ध्यान में आत्म चिंतन में मदद कर सके जो तुम्हें तुम्हारे भीतर झांकने और शांति पाने में सहयोग करें अच्छे विचारों और अच्छे लोगों की संगत का महत्व समझो भूतकाल की घटनाओं को छोड़ दो अब समय आ गया है कि तुम अपने मन को स्थिर करो और अपने भीतर की शक्ति को पहचानो महात्मा बुद्ध की यह बातें सुनकर सबल को जैसे अपने जीवन की दिशा मिल गई उसने बुद्ध की हर बात को पूरी तरह से मानने का निश्चय किया
उसने ध्यान की साधना शुरू की और कुछ ही दिनों में उसके मन में बदलाव दिखने लगे वह अपने चारों ओर खुशियों का अनुभव करने लगा धीरे-धीरे समय बीतता गया और सबल ने अपने जीवन में गहरी शांति और संतोष को महसूस करना शुरू कर दिया अब वह पहले से भी ज्यादा खुश और संतुलित महसूस कर रहा था अब जब सबल ने भीतर की खुशी को पा लिया उसने सोचा यह खुशी केवल मेरे लिए नहीं है मैं इसे अपने घर अपने परिवार और अपने प्रियजनों तक भी पहुंचाना चाहता हूं इसलिए उसने महात्मा बुद्ध से आशीर्वाद लिया और
फिर से एक नई यात्रा पर निकल पड़ा इस बार अपनी नई खुशी को सांझा करने के उद्देश्य से अब जब सब घर की ओर लौट रहा था उसके मन में ना कोई चिंता थी और ना ही कोई डर वह हर पल खुश और मस्त था उसकी आत्मा अब शांति से भरी हुई थी उसे अपने घर की याद आ रही थी अपने बेटे के नन्हे नन्हे कदमों की याद जब वह उसके साथ खेलता था वह सोच रहा था घर पहुंचते ही अपने बेटे को गले लगा लूंगा उसे सारा प्यार दूंगा और हमारा घर खुशियों से भर
जाएगा इस खुशी में खोया हुआ वह तेजी से आगे बढ़ रहा था जैसे ही सबल नगर की सीमा में प्रवेश करता है अचानक एक व्यक्ति उसे पहचान लेता है यह वही व्यक्ति था जिसने पहले सबल के साथ लूटपाट की थी और उस घटना के दौरान उसके साथी की मृत्यु हो गई थी उस व्यक्ति ने तुरंत ही सबल को पकड़ लिया और उसे राजा के सामने ले गया राजा ने सबल से उसके अपराधों के बारे में पूछा तो सबल ने बिना किसी झिझक या डर के अपने सारे अपराध स्वीकार कर लिए उसने बताया कि उसने पहले
कैसे गलतियां की थी लेकिन अब वह बदल गया था राजा ने सबल की सच्चाई सुनी और तुरंत ही उसे फांसी की सजा सुना दी सबल को फांसी पर लटकाने का आदेश दिया गया जब उसकी आखिरी इच्छा पूछी गई तो सबल ने शांत मन से कहा हे राजा मेरी बस एक अंतिम इच्छा है मुझे अपने बेटे से एक बार मिलने दीजिए मैं उसे एक बार गले लगाना चाहता हूं उसके बाद ही मैं मृत्यु को खुशी खुशी गले लगा सकूंगा राजा ने उसकी अंतिम इच्छा को मा लिया और सबल के घर पर संदेश भिजवा दिया गया कुछ
ही समय बाद सबल का परिवार उसका बेटा लेकर वहां पहुंच गया उसके परिवार के लोग रो रहे थे उनकी आंखों में दुख और पीड़ा थी लेकिन सबल के चेहरे पर शांति और संतोष था उसने अपने बेटे को देखा और उसे तुरंत ही अपनी बाहों में भर लिया उसने अपने बेटे को गले लगाया उसे चूमा और प्यार भरे शब्दों में कहा पुत्र अब तुम ही हो जिसे परिवार का ख्याल रखना है तुम्हें सबका ध्यान रखना होगा सबल ने बेटे को गले लगाए हुए अपनी सारी ममता और प्यार उसे दे दिया उसके मन में कोई अफसोस नहीं
था केवल एक गहरी शांति और संतुष्टि थी कि उसने अपने जीवन की सच्ची खुशी पा ली थी अब वह मृत्यु को भी खुशी से स्वीकार करने के लिए तैयार था तभी वह बच्चा आंखों में आंसू लिए अपने पिता से कहता है पिताजी आप कहां थे मैं आपको कितने दिनों से से ढूंढ रहा था मैं हर दिन आपका इंतजार करता था लेकिन आप मुझसे मिलने कभी नहीं आए अब जब आप आए हैं तो मैं आपको कहीं जाने नहीं दूंगा अपने पुत्र के यह भावुक शब्द सुनकर सबल की आंखों में भी आंसू छलक आए उसने अपने बेटे
को कसकर गले लगाया और स्नेह से उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा पुत्र मैं जानता हूं कि तुम्हें मेरी बहुत याद आई और मुझे भी तुम्हारी कमी बहुत खली लेकिन जीवन में एक सच्चाई है हम सभी को कभी ना कभी बिछड़ना पड़ता है पर यह मत भूलना कि हमारी खुशियां हमेशा हमारे साथ रहती हैं चाहे हम कहीं भी हो सबल ने अपने परिवार की ओर देखा और कहा जिंदगी बहुत छोटी है लेकिन इसमें खुशियां ही खुशियां भरी हैं हमें इसे दुख और झगड़ों में बर्बाद नहीं करना चाहिए जीवन के हर पल को खुशी से
जीना चाहिए क्योंकि यह पल दोबारा नहीं आएंगे छोटी-छोटी बातों पर झगड़ने और परेशान होने से हम कभी आगे नहीं बढ़ सकते जीवन तो बहता हुआ पानी है जो वापस लौटकर नहीं आता उसने अपने परिवार को समझाते हुए कहा जब तक हम जिंदा हैं हमें हर पल को संजीदगी से खुशी से जीना चाहिए क्योंकि जो समय बीत जाता है वह फिर लौटकर कभी नहीं आता छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा और लड़ाई करना व्यर्थ है हमें प्रेम और समझदारी से जीवन को सुंदर बनाना चाहिए सभल की बातें सुनते ही परिवार के सद सयो की आंखें नम हो गई
लेकिन इसी दौरान राजा के आदेश पर सैनिक आए और सबल को पकड़कर फांसी के तख्ते की ओर ले गए परिवार असहाय था वे लोग चिल्लाते रोते हुए उसे जाते देख रहे थे सबल के जाते-जाते भी उसकी मुस्कान बरकरार थी उसने अपने आखिरी शब्दों में कहा जीवन में लड़ाई झगड़ों से कुछ नहीं मिलेगा बल्कि सच्ची खुशी आपसी प्रेम और समझ से ही मिलेगी दुखों में खोए बिना हमें हर पल का आनंद लेना चाहिए क्योंकि यह पल फिर से नहीं आएंगे सबल के निधन के बाद उसके परिवार को यह गहराई से समझ में आ गया कि उन्होंने
कितनी गलतियां की थी अब उन्हें यह बात अच्छे से समझ में आ चुकी थी कि जीवन का सच्चा आनंद क्या है दोस्तों यह कहानी हमें यही सिखाती है कि हम सब बहुत भाग्यशाली हैं कि हमें यह अनमोल जीवन मिला है पर हम अक्सर इसे छोटी-छोटी बातों में उलझ करर बर्बाद कर देते हैं हमें सोचना चाहिए कि जो समय बीत गया वह फिर कभी लौटकर नहीं आएगा इसलिए हर पल को खुशी से जियो अपने परिवार और अपनों के साथ मिलजुलकर जियो जब भी मन में किसी के प्रति ईर्ष्या या गुस्से का भाव आए तो अपने आप
से कहो मैं कितना भाग्यशाली हूं कि मुझे यह अनमोल जीवन मिला है और मैं इसे यूं ही बर्बाद नहीं करूंगा आशा है कि आपको आज की यह कहानी पसंद आई होगी अगर हां तो हमारे चैनल बोध को सब्सक्राइब करना ना भूले आप सभी का धन्यवाद