एक आदमी जो सुरक्षात्मक कपड़े पहने हुए हैं। बर्फीली तूफानी जमीन पर चल रहा है। चारों तरफ नजर डालते ही दिखाई देता है। चारों ओर जमी हुई लाशें हैं। एक रहस्यमई बर्फीले तूफान ने पूरी दुनिया की आधे से ज्यादा आबादी को मिटा दिया है और यह तो बस पृथ्वी पर एक रहस्यमई जाति के पहले हमले की शुरुआत थी। जो लोग बच गए हैं, उन्हें अब और भी भयावह चुनौतियों का सामना करना होगा। आप देख रहे हैं 2025 में रिलीज हुई नई आपदा थ्रिलर फिल्म इटरनल डिस्टेंस। कुछ लड़कियां नाव में सवार होकर समंदर में छुट्टियां मना रही
थी। जैसे ही उन्होंने जश्न मनाने के लिए जाम उठाया, अचानक पीछे की समुद्री लकीर अंधेरे में डूब गई और फिर आकाश से एक हरी रोशनी तेजी से नीचे गिरने लगी। लड़कियां इससे पहले कभी ऐसे दृश्य नहीं देखी थी। वह हैरान थी कि सामने क्या आ रहा है। तभी अचानक समुद्र की लहरें तेज हो गई। उनमें से एक लड़की जहाज चलाने दौड़ी लेकिन पाया कि सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण फेल हो चुके थे। तभी बाहर की दो साथी लड़कियां अचानक जमीन पर गिर पड़ी। बच गई लड़की डर के मारे कांपने लगी। वह खिड़की से देखती है एक बर्फ
का टुकड़ा आसमान से नीचे गिरता है। दृश्य बदलता है। अर्जेंटीना के एक शहर में लोग बिजली विभाग के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। बिजली 3 दिन से बंद है और लोग अब बेहद गुस्से में हैं। पुलिस भी कुछ नहीं कर पा रही। सिर्फ ट्रैफिक को मोड़ रही है। गाड़ी में बैठे हुए जुवान सिर्फ मुस्कुराकर सिर हिलाते हैं। असल में वह अपने दोस्त की पार्टी में जा रहे थे। लेकिन अब रास्ता बदलना पड़ेगा। जब वह एक और चौराहे से गुजरते हैं तो देखते हैं बहुत सारी फायर ब्रिगेड की गाड़ियां जा रही हैं। इससे उन्हें कुछ
अनहोनी की आशंका होती है। दोस्त के घर पहुंचने पर पता चलता है कि शहर की एक पावर सबस्टेशन में आग लग गई है। खास बात यह है कि वहां के पास एक एसबेस्टस एसबेस्टस फैक्ट्री भी है और यह चीज जलने पर जहरीली गैस छोड़ती है। इसी वजह से इतनी सारी फायर ट्रक भेजी गई थी। अब जब उनका संदेह दूर हो गया तो जवान अपने दोस्तों के साथ पोकर खेलने बैठ जाते हैं। टेबल पर चारों दोस्त 30 साल पुराने यार हैं। एक दूसरे को बहुत अच्छे से जानते हैं। सिर्फ वही नौजवान जो बीच में ग्रुप में
शामिल हुआ था। कुछ असहज लग रहा था। वह इधर-उधर देखता फिर रहा था और उसे घर के मालिक का छुपा हुआ गैस मास्क भी मिल गया। जब सब दोस्त खेल में मस्त थे, तभी अचानक ऊपर की लाइट बंद हो गई। किसी ने सोचा भी नहीं था कि यहां भी बिजली चली जाएगी। लेकिन इससे भी अजीब बात अभी बाकी थी। सभी लोगों के मोबाइल अपने आप बंद हो गए। बाहर से रह-रह कर तेज धमाकों की आवाजें भी आ रही थी। तभी घर की मालकिन नीचे भागती हुई आई। उसने खिड़की से देखा कि गैराज का चौकीदार जमीन
पर गिर पड़ा है। मालिक बाहर जाकर देखने की तैयारी कर रहा था। लेकिन जुवान को कुछ अजीब लगा। खिड़की के बाहर सफेद कण तैर रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे बर्फ गिर रही हो। पर अभी तो गर्मी का मौसम है। मकान मालिक को अचानक याद आया हाल ही की एक खबर। कहीं यह उसी पावर स्टेशन की आग से फैला एसबेस्टस की राख तो नहीं। शायद चौकीदार की मौत भी इसी जहरीले पदार्थ के कारण हुई हो। अब कोई भी बाहर जाकर मदद करने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। तभी एक कार बेकाबू होकर रास्ते के किनारे
टकरा गई। अब सभी के मन में अनहोनी की आशंका भर गई। वे अपने परिवार से बात करने की कोशिश करने लगे। मगर अफसोस सभी मोबाइल बंद थे। यहां तक कि लैंडलाइन भी काम नहीं कर रही थी। अच्छा हुआ कि मकान मालिक ने थोड़ी समझदारी दिखाई। उसने सबको कहा कि दरवाजे खिड़कियां अच्छे से बंद कर दो ताकि जहरीले कण अंदर ना घुस पाएं। जवान ने हाथ खिड़की पर रखा। बाहर की ठंड सीधा उसकी हथेली को चीरती चली गई। वास्तव में बाहर बर्फ गिर रही थी। उन सब ने अपनी जिंदगी में ऐसा मौसम कभी नहीं देखा था।
गर्मियों में बर्फ गिरना ही हैरानी की बात थी। लेकिन यह बर्फ जहरीली भी थी। सफेद बालों वाला बूढ़ा आदमी और भी ज्यादा घबरा गया। उसे अपने परिवार की चिंता सताने लगी। उसने एक जैकेट उठाई। सिर पर ओढ़ ली और सबकी मना करने के बावजूद वह बाहर निकल गया। सभी लोग खिड़की की ओर चिंता में देखने लगे और देखा कि वह बूढ़ा बस कुछ कदम ही चला था कि अचानक गिर पड़ा। जहरीली बर्फ की ताकत का सभी ने अपनी आंखों से अनुभव किया। अब सब पूरी तरह घबरा गए थे। काफी देर बाद जाकर वे इस आपदा
को स्वीकार कर पाए। धीरे-धीरे पूरा शहर सफेद झर जैसी बर्फ में ढकता चला गया। इसमें कोई शक नहीं था कि जो लोग सड़कों पर घूम रहे थे, वे सभी मारे गए। अचानक नीचे से लगातार खटखटाने की आवाज आने लगी। सब लोग तेल का दिया लेकर नीचे जांच करने गए। पता चला कि कोई दरवाजे के बाहर मदद की गुहार लगा रहा था। घर के मालिक ने बताया कि यह दरवाजा सीधे गैराज की ओर खुलता है जिसका आमतौर पर इस्तेमाल नहीं होता यहां तक कि चाबी भी नहीं मिल रही थी। सभी ने मिलकर विचार किया और आखिरकार
फैसला हुआ कि ताला तोड़कर उस व्यक्ति को बचाया जाए। जो लड़की अंदर आई वह एक डिलीवरी गर्ल थी। उसकी साइकिल खराब हो गई थी और वह उसे गैराज में ठीक करके निकलने ही वाली थी। तभी उसने देखा कि गैराज का चौकीदार जहरीले गड्ढे में गिरा पड़ा है। जुवान ने यह सुना तो उसका मन कुछ बेचैन हो उठा। वह लकड़ी के दरवाजे से बाहर निकला और एक छोटी गली पार करके पार्किंग लॉट में पहुंचा। जवान की कार ज्यादा दूर नहीं खड़ी थी, लेकिन कार की चाबी सुरक्षा कक्ष में रह गई थी। बीच में एक हिस्सा ऐसा
था जहां छत टूटी हुई थी और वहां से बर्फ गिर रही थी। घर के मालिक ने उसे मना किया कि इतनी जोखिम मत उठाओ। लेकिन जुवान को उस डिलीवरी गर्ल की बात याद आई। उसने टोपी और रेनकोट पहन रखा था। इसका मतलब यह था कि जब तक बर्फ सीधे त्वचा से ना टकराए तब तक खतरा नहीं है। जुवान भी अपने परिवार की चिंता कर रहा था। इसलिए उसने जोखिम लेने का फैसला किया। सभी के सहयोग से एक ट्रक को सुरक्षा कक्ष के दरवाजे तक धकेला गया। ड्राइविंग सीट पर बैठे जुवान ने एक लोहे की सीढ़ी
बाहर निकाली। उसने प्लास्टिक बैग से अपना सिर ढका और सीढ़ी के सहारे सुरक्षा कक्ष में प्रवेश कर गया। जुवान ने अपनी और अपने दोस्तों की सभी चाबियां निकाल ली। सबने राहत की सांस ली। आखिरकार इतनी बड़ी आपदा में कोई भी किसी और के घर में आश्रय लेना नहीं चाहता था। लेकिन जब जुवान ने चाबी लगाकर कार स्टार्ट करनी चाही तो कार में कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई। अब जाकर सबको समझ आया कि बिजली गुल होना और मोबाइल बंद होना कोई इत्तेफाक नहीं था। जरूर शहर पर एक बड़ी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक पल्स ईएमपी का हमला हुआ था जिससे सभी
इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसें फेल हो गई। अब स्थिति पहले से भी ज्यादा गंभीर लग रही थी क्योंकि ऐसी तबाही या तो सूर्य तूफान से हो सकती है या फिर परमाणु बम के विस्फोट से। तभी मकान मालिक ने देखा कि सामने वाले घर की लाइट जल रही है। एक बूढ़ा आदमी खिड़की के पास खड़ा था। उसे बहुत चिंता थी कि कहीं सामने वाला खिड़की ना खोल दे। इसलिए वह यथासंभव संकेत देने लगा ताकि उन्हें चेतावनी दे सके। लेकिन उसकी यह हरकत सामने वाले की जिज्ञासा भड़का बैठी। बूढ़े आदमी ने झट से खिड़की खोल दी। कुछ ही देर में
उसकी पत्नी भी वहां देखने आ गई। नतीजा यह हुआ कि पति-पत्नी दोनों ही उड़ती हुई बर्फ की बूंदों के बीच तुरंत जमीन पर ढेर हो गए। अब जब आसमान थोड़ा-थोड़ा उजाला होने लगा, जुवान का चेहरा और ज्यादा गंभीर होता जा रहा था क्योंकि उसकी बेटी को सुबह दौड़ने की आदत थी। यह सोचते ही जुवान ने तुरंत घर लौटने का निश्चय किया। उसके सारे दोस्त उसे मौत के मुंह में जाने नहीं देना चाहते थे। लेकिन जब उन्होंने जुवान का दृढ़ निश्चय देखा तो मकान मालिक ने उसे एक सुरक्षा सूट बनाने की ठानी। घर में पहले से
ही वाटरप्रूफ सूट और गैस मास्क मौजूद थे। सब ने मिलकर जल्दी-जल्दी उसे पूरे उपकरण पहनाए। यह सुनिश्चित करते हुए कि उसकी 1 इंच त्वचा भी खुली ना रह जाए। जुआ ने मास्क को पहन कर देखा। वह आसानी से सांस ले पा रहा था। इसलिए वह बैग टांगा और बाहर की ओर बढ़ गया। सभी लोगों की उम्मीद भरी निगाहों के बीच जवान ने गहरी सांस ली और बर्फ से ढकी जमीन पर कदम रखा। बर्फ के फाहे धीरे-धीरे आसमान से गिरते रहे। लेकिन ऐसा लगता था कि वे उस पर कोई असर नहीं कर रहे थे। लगता है
यह खुद से बनाया गया सुरक्षा सूट वाकई प्रभावी था। बस सड़कों पर जो भयावह दृश्य थे, उन्होंने जुवान की कल्पना से परे असर किया। वह लगभग हर एक कदम पर एक लाश देख रहा था। पूरा शहर मानो एक विशाल कब्रगाह में तब्दील हो चुका था। जुवान के भीतर से एक अजीब सा डर उठने लगा। कौन जाने इस आपदा में कितने लोगों ने अपनी जान गवाई क्योंकि यह बहुत ही अचानक आई थी। जो भी उस समय बाहर था उसे भागने का मौका तक नहीं मिला। हवा का तापमान लगातार गिरता जा रहा था। जुवान के शरीर में
असहजता महसूस होने लगी। उसे लगातार ऐसा लग रहा था कि कोई पीछे से उसका पीछा कर रहा है। उसने थोड़ी देर दौड़ लगाई ताकि शरीर का तापमान बढ़ सके। तब जाकर वह ठंड की वजह से हो रही मानसिक भ्रांति से उभर पाया। जवान ने नक्शा निकाला और शॉर्टकट से अपनी बेटी के घर की ओर जाने की तैयारी की। स्टेशन के पीछे के हॉल को पार करने के बाद वह रेलवे ट्रैक पर चलने लगा। लेकिन अगले ही पल सामने जो दृश्य था, उससे जुवान के रोंगटे खड़े हो गए। एक ट्रेन पटरी के बीचोंबीच रुकी हुई थी
और उसके चारों ओर यात्रियों की लाशें पड़ी थी। संभवतः जब ट्रेन स्टेशन पहुंचने ही वाली थी, उसी समय यह जहरीली बर्फ गिरी होगी। जुवान दांत भीते हुए आगे बढ़ता रहा। अचानक एक डिब्बे से कुछ आवाज आई। सोचा भी नहीं था कि अंदर कई जीवित लोग छिपे हुए थे। उन्होंने जब जुवान को पास आते देखा तो समझे कि शायद कोई दमकल कर्मी उन्हें बचाने आया है। आखिरकार वे लोग पिछले 6 घंटे से वहां फंसे हुए थे। ना तो उन्हें कुछ खाने को मिला ना ही एक घूंट पानी नसीब हुआ। जवान ने लाचारी में सिर हिलाया। वह
अकेले दम पर इन सभी को बचा नहीं सकता था। वह बस अपना बैग खोला और उसमें से एक बड़ी बोतल मिनरल वाटर निकाल कर दे दी। अब आगे उनकी जान बचेगी या नहीं यह सिर्फ उनके भाग्य पर निर्भर था। रेल की पटरी पार करने के बाद जवान बहुत जल्दी अपनी पत्नी के घर के नीचे पहुंच गया क्योंकि दोनों सालों से अलग रह रहे थे। बेटी हमेशा पत्नी के साथ ही रहती थी। सीढ़ियों की तरफ बढ़ते हुए जवान ने अपना सुरक्षा मास्क उतार दिया। सीढ़ियों पर लगातार पानी बहता दिख रहा था। कुछ बचे हुए लोग दरवाजे
पर खड़े शायद ताला तोड़ने की कोशिश कर रहे थे। जब जुवान उस मंजिल पर पहुंचा जहां पत्नी रहती थी तो देखा कुछ लोग दरवाजे पर खड़े प्रार्थना कर रहे हैं। उसने उन पर ध्यान नहीं दिया और सीधा घर के अंदर चला गया। कई कमरों में खोजबीन करने के बावजूद पत्नी और बेटी दोनों ही घर पर नहीं थी। जवान के मन में घबराहट की लहर दौड़ गई। उसी समय ड्राइंग रूम के बाहर से कुछ हलचल सुनाई दी। उसे लगा कि घर में चोर घुस आया है। लेकिन पूछताछ करने पर पता चला कि उसकी पत्नी ने ही
किसी को दवा लेने भेजा था। जुवान की नजर नीचे गई। उसके हाथ की पीठ पर कपड़ों से चिकन ब्लड लग गया था। वह समझा कि शायद अब उसकी मौत निश्चित है। लेकिन तभी उसकी पत्नी सबको चीरते हुए आगे आई। उसने सारे गैर जरूरी लोगों को घर से बाहर कर दिया। तब जाकर बेटी की खबर दी। पता चला कि वह पिछली रात किसी सहेली के घर गई थी और अभी तक वापस नहीं आई है। यह सुनकर जुवान गुस्से से पागल होने लगा। लेकिन इससे भी बुरी बात यह थी कि पत्नी को अपनी बेटी की दोस्त का
पता ही नहीं पता था। जुवान ने जबरदस्ती खुद को शांत किया। अभी शिकायत करने का वक्त नहीं था। उसने तय किया कि वह अब सीधा बेटी के स्कूल जाएगा। वहां स्कूल में यकीनन सभी छात्रों का पता मौजूद होगा। जुवान ने जैसे ही दरवाजा खोला देखा कि बाहर बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी जमा थे। असल में उसके जहरीली बर्फ से बचने की बात फैल चुकी थी। कुछ लोगों का अनुमान था कि जुवान के पास कोई विशेष इम्यूनिटी है। जुवान ने समझाया कि वह सिर्फ एक गैस मास्क का इस्तेमाल कर रहा है और वह बर्फ जो शरीर
पर गिरती है वह जहर खो देती है। उसी वक्त एक गंजा आदमी सामने आया और मास्क देने की मांग करने लगा क्योंकि इस इमारत में एक व्यक्ति ने निराश होकर बातब में आत्महत्या कर ली थी जिससे पूरी बिल्डिंग का साफ पानी लगभग खत्म हो गया। अब यह सब लोग उम्मीद लगाए बैठे थे कि जुवान का मास्क उन्हें बाहर जाकर सुपर मार्केट से पानी लाने में मदद करेगा। जुवान ने झूठा वादा किया लेकिन बैग से एक पिस्तौल निकाल ली। क्या मजाक है? वह तो इस मास्क की मदद से अपनी बेटी को ढूंढना चाहता है। मगर उसे
क्या पता था कि वह गंजा आदमी भी कोई साधारण शख्स नहीं था। उसने ना जाने कहां से एक पिस्तौल निकाल ली और नीचे की ओर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। जुवान मजबूरन जवाबी हमला करता है। हालांकि दोनों का निशाना बेहद खराब था। फिर वह अपनी पत्नी को लेकर एक फ्लैट में घुस गया और दरवाजे को अलमारी से जाम कर दिया। जुवान ने पत्नी से कहा कि वह जल रोधक कपड़े खोजे। उसी वक्त बालकनी से नीचे की कार देखकर उसके दिमाग में एक योजना आई। जब पत्नी ने वाटरप्रूफ जैकेट पहन ली तो जवान ने गैस मास्क
उसके सिर पर पहना दिया। अब दो में से सिर्फ एक ही बच सकता था। जवान ने पत्नी से कहा कि वह पहले जाकर बेटी को ढूंढे। पत्नी खिड़की से कूदकर सीधा कार की छत पर आ गिरी और सफलतापूर्वक बिल्डिंग से बाहर निकल गई। बिल्डिंग के बाहर वह गंजा आदमी अब भी अंदर आने की फिराक में था। जवान बीच-बीच में कुछ फायर करता जिससे वे सब सिर भी ना उठा पाते। मगर वह गंजा आदमी भी कम चालाक नहीं था। उसे अंदाजा हो गया कि जुवान की गोलियां खत्म हो चुकी हैं। तभी उसने भीड़ को साथ लेकर
जबरदस्ती भीतर घुसना शुरू किया। लेकिन जुवान तैयार था। उसने बाएं हाथ में एक प्लास्टिक बैग लिया और दाहिने हाथ में एक लकड़ी की कुर्सी उठा ली। भीड़ की हैरान आंखों के सामने उसने जोर से बालकनी का शीशा तोड़ दिया। गंजा आदमी और उसके लोग तुरंत डर के मारे भाग खड़े हुए और जुवान प्लास्टिक बैग की सुरक्षा में उसे जहरीली बर्फ का कोई नुकसान नहीं हुआ। उसने तुरंत बैग उठाया और बिना देरी किए नीचे कूद पड़ी। तेज भागदौड़ के कारण उसकी सांसे उखड़ने लगी। जवान को लग रहा था जैसे सांस लेना मुश्किल होता जा रहा है।
कुछ ही कदम चले थे कि वह बर्फ में गिर पड़ा। अधमुंदी चेतना में उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे वह किसी और ही जगह पहुंच गया हो। फिर जब वह दोबारा होश में आया तो खुद को एक कार के अंदर पाया। बगल में कुछ लोग थे जो सुरक्षा सूट पहने हुए थे। जब उन लोगों ने मास्क उतारे तो पता चला कि वे उसकी पत्नी और कुछ पुराने दोस्त थे। अजीब संयोग था। सुबह जब जुवान निकल चुका था तो उसके कुछ दोस्त आराम करने की तैयारी कर रहे थे। घर की महिला चाय बनाने के लिए नल का
पानी लेने जा रही थी। लेकिन उसके पति ने उसे तुरंत रोक दिया। कौन जानता है कि नल का पानी जहरीली बर्फ से दूषित है या नहीं। सुरक्षा के लिहाज से उन्हें सिर्फ बोतल बंद पानी ही पीना चाहिए। मगर घर में उसका स्टॉक सीमित था। ज्यादा से ज्यादा कुछ ही दिन के लिए। सबको पूरा भरोसा था कि जुवान समय पर लौट आएगा। वह सुरक्षा सूट पहनकर स्टोर से सामान ला सकता है। मानना पड़ेगा घर के मालिक की सुरक्षा चेतना गजब की थी। खाली बैठने से अच्छा उसने सारे दरवाजे और खिड़कियां मजबूत कर डाली। आखिरकार इस दुनिया
में अब कैसे-कैसे लोग हो सकते हैं। वह डिलीवरी बॉय जब उसके हथियारों को देख रहा था तो मन में उन्हें छूने का ख्याल आया। लेकिन घर के मालिक का चेहरा जैसे किसी चोर को देख लिया हो। डिलीवरी बॉय अब एक पल भी वहां रुकना नहीं चाहता था। उसने हेलमेट पहनकर वहां से निकलने का फैसला किया। घर का मालिक फावाली जल्दी से उसे रोकने आ गया। वह बस सतर्क इंसान था। किसी को मरते हुए देखना नहीं चाहता था। फवाली ने तय किया कि वह उस डिलीवरी बॉय की साइकिल ठीक कर देगा। शायद उससे वह सुरक्षित घर
पहुंच जाए। साइकिल ठीक करते हुए फावाली को एक हैरानी हुई। साइकिल की लाइट अब भी जल रही थी। जब उसने खोल कर देखा तो पता चला कि खराब तो बस एलईडी लाइट थी। पुरानी व्फ फिलामेंट वाली बत्ती अब भी काम कर सकती थी। फावाली के दिमाग में एक साहसी विचार आया। उसने एक ग्रामोफोन को बैटरी से जोड़ दिया तार के जरिए। थोड़ी ही देर में एक मधुर संगीत की आवाज गूंजने लगी। तभी फावाली को एहसास हुआ कि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक अटैक सिर्फ इंटीग्रेटेड सर्किट पर असर करता है। जबकि पुराने जमाने के उपकरण अब भी काम कर सकते
हैं। सौभाग्य से उसके पास एक पुरानी कार भी थी। कार स्टार्ट होते ही वे तुरंत फायर स्टेशन पहुंचे। वहां सभी को एक-एक सुरक्षा सूट मुहैया कराया गया। इसी दौरान दूर से गोलियों की आवाज सुनाई दी। हवाली को लगा शायद जुवान किसी मुसीबत में फंस गया है। जैसे ही वे एक मोड़ पर पहुंचे उन्हें जुवान की पत्नी मिल गई और इसी तरह वे सभी मिलकर बेहोश पड़े जुवान को सुरक्षित बाहर निकाल लाए। जब पूरा दल बंद पड़ी सड़कों को पार कर रहा था तो किसी ने ध्यान नहीं दिया कि आसमान से कुछ आग के गोले नीचे
गिर रहे थे। क्या कोई नई आपदा अब फिर से आने वाली है? अगर आप भी इसका जवाब जानना चाहते हैं तो जुड़े रहिए। मिलते हैं अगली कड़ी में।