मैं एक खूबसूरत लड़की हूं मैं पढ़ाई में हमेशा फर्स्ट आई थी और खूबसूरत इतनी कि सब लोग मुझे देखते थे एक दिन मैं कहीं जा रही थी तो मुझे रास्ते में एक हैंडसम लड़का मिला उसे देखते ही मैं अपना दिल दे बैठी धीरे-धीरे मैंने उससे बात करनी शुरू कर दी अब हम दोनों बहुत ही फ्रेंडली हो चुके थे फिर हम दोनों ने एक दिन कहीं बाहर मिलने का प्लान बनाया मेरा नाम पूजा है और मैं 20 साल की हूं डॉट और मैं बहुत अच्छे घर ने से हूं मेरी मां टीचर है और मेरे पिताजी की
मेडिकल शॉप है हमारे घर की आर्थिक हालत बहुत अच्छी थी घर में किसी भी चीज की कोई कमी नहीं थी सब कुछ अच्छे से चल रहा था आज मैं आपको अपनी कहानी बताना चाहती हूं यह कहानी एक सच्ची कहानी है जो मेरा निजी अनुभव भी है इस कहानी में मैं आपको बताऊंगी कि हमने कैसे यह चार महीने पहले की बात है मैं बस से जा रही थी तभी बस रुकी और एक हैंडसम लड़का बस में चढ़ा उसे देखकर मेरे दिमाग में हलचल होने लगी वह बहुत ही हैंडसम था अचानक बस रुकी और मेरे बगल में
बैठी महिला उतरने लगी वह लड़का मेरे बगल में बैठ गया थोड़ी देर बाद वह मुझसे बात करने लगा उसने मुझे अपना नाम सचिन बताया मैं बहुत खुश थी कि फाइनली आज मुझे किसी लड़के से बात करने का मौका मिला क्योंकि पहले मैंने कभी भी किसी लड़की के साथ बात नहीं की थी इसलिए थोड़ी शर्म भी आ रही थी बात करते वक्त उसकी बातों से ऐसा लग रहा था कि वह बहुत ही अच्छे घर से है उसके बात करने का तरीका बहुत अच्छा था मैं उसे दिल ही दिल में पसंद करने लगी सफर के दौरान हमने
खूब बातें की फिर मेरा स्टॉप आ गया और मुझे उतरना था लेकिन सचिन मेरे दिमाग से नहीं निकल रहा था मैं पूरी रात उसके बारे में ही सोचती रही फिर एक महीने बाद एक दिन मैं बाजार गई थी तभी पीछे से किसी ने आवाज लगाई मैंने पलट कर देखा तो वह सचिन ही था मैं बहुत खुश थी फिर हमने साथ में खाना खाया उसने मेरा नंबर मांगा तो मैंने बिना रुके उसे अपना नंबर दे दिया उस दिन के बाद से हम रोज फोन पर बातें करने लगे कभी-कभी रात के एक या दो बज जाते ऐसे
ही दो महीना बीत गया मुझे उससे बात करना अच्छा लगता था क्योंकि मैं उससे प्यार करने लगी थी फिर एक दिन हमने मिलने का फैसला किया मैं बहुत खुश थी मैंने जींस टॉप पहना उसमें मैं बहुत सुंदर लग रही थी ब्लैक कलर का टॉप पहना ब्लैक कलर का टॉप मैंने इसीलिए पहना क्योंकि मेरा रंग गोरा था ब्लैक टॉप उस पर खूब जजता फिर मैंने उसे फोन किया कि मैं तैयार हो गई हूं वह सामने से बोला तुम रोड पर आ जाओ और मैं रोड पर आ गई फिर मैंने अपने सामने एक बाइक आते देखी तो
वह सचिन था मैं सचिन की ओर देखकर स्माइल की उसने मुझे बाइक पर बैठाया और पूछा कहां जा ना है मैंने कहा जहां जाना है चलो फिर हम एक रेस्टोरेंट में गए जहां पहले से ही तैयारियां पूरी थी क्योंकि सचिन ने खाने पीने का अरेंजमेंट पहले से करवा दिया था उसने मुझे जूस दिया और खुद भी पीने लगा हमने इधर-उधर की बहुत सारी बातें की उसने अपने घर परिवार के बारे में बताया फिर उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझसे कहने लगा कि मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं प्लीज मुझे मत छोड़ना लेकिन पता नहीं
मैंने उसे क्यों मना कर दिया मैंने सचिन से कहा कि मैं तुमसे प्यार नहीं करती हूं मैं सिर्फ तुम्हारी अच्छी दोस्त हूं और तुम्हें अपना एक अच्छा दोस्त मानती हूं लेकिन पता नहीं क्यों वहां मैंने अपने प्यार का इजहार नहीं किया जबकि मैं उससे बहुत प्यार करती थी लेकिन पता नहीं मैं उसे उस टाइम क्यों नहीं बोल पाई अपनी सारी भावनाएं अपने मन में दबाकर रख ली जबकि मैं उसे बहुत प्यार करती थी मैं वहां से सीधा अपने घर आ गई और उसके बारे में सोचकर रोने लगी मुझे यह सोचकर बहुत दुख हुआ कि मैंने
उसका कितना दिल दुखा दिया है उसको कितना बुरा लगा होगा मेरी बातों से सोच सोच कर अपने आप पर गुस्सा आ रहा था उसका गलती ही क्या थी यही कि वह मुझसे प्यार करता है प्यार तो मैं भी उससे करती हूं लेकिन मैं कहने से क्यों इतना डरती हूं मैं अपने प्यार का इजहार कैसे करूं कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था मैं बहुत ज्यादा बेचैन थी सोच सोच कर कि मैंने ने सचिन का कितना दिल दुखा दिया वह क्या सोच रहा होगा मेरे बारे में भले ही मैं उस दिन भाग गई थी पर
मुझे बहुत बेचैनी हो रही थी मैं मन ही मन खुद को कोस रही थी कि वहां से जाने की क्या जरूरत थी अगर मैं सचिन के साथ उस दिन ना जाती तो इन सब बातों की नौबत ना आती और ऊपर से सचिन का चेहरा मेरी आंखों से हट ही नहीं रहा था मुझे सोच सोच कर रोना आ रहा था कि सचिन ने मुझसे अपने प्यार का इजहार किया और मैंने उसे रिजेक्ट कर दिया लेकिन मैंने उसे रिजेक्ट नहीं किया था सिर्फ मैं उससे बोलने से डर रही थी दिमाग में एक अजीब तरह का डर था
मैं पूरी रात सो नहीं पाई और बस करवट बदलती रही फिर किसी तरह रात गुजरी और सुबह उठी तो देखा कि सचिन ने मैसेज किया था उसमें लिखा था मुझे माफ कर दो पूजा प्लीज मुझसे बात करो मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं मैं वादा करता हूं कि आज के बाद मैं तुम्हें कोई बात नहीं कहूंगा लेकिन प्लीज मुझसे बात करो मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता प्लीज मुझसे बात करो ऐसे चुप रहने से कुछ नहीं होगा देखो मुझे गलत मत समझना एक बार बात कर लो मैसेज पढ़कर मेरी आंखें भर आई मेरा मन हुआ
कि दौड़कर उसके पास चली जाऊ मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ था कि मैंने ऐसा करके सचिन का दिल दुखा दिया है लेकिन मैं समझ नहीं पा रही थी कि किस मुंह से उसके पास जाऊं अब क्या सोचेगा मेरे बारे में एक दिन मैंने तय किया कि आज मैं उसे प्रपोज करूंगी मैंने बहुत मुश्किल से अपने आप को तैयार किया पता नहीं मन में किस बात का डर था फिर शाम को मैंने उसे फोन किया मैं तुमसे मिलने आ रही हूं यह बात सुनकर वह बहुत खुश हुआ मैं उससे मिलने गई हम एक रेस्टोरेंट में
मिले जैसे ही उसने मुझे देखा वह मुझे देखता ही रह गया उस दिन मैंने सलवार और सूट पहना हुआ था जिसमें मैं बहुत ही सुंदर लग रही थी जब मैं उसके पास गई तो वह मुझे देखता ही रह गया सचिन ने मुझे कहा कि पूजा तुम बहुत सुंदर लग रही हो यह रूप मैंने तुम्हारा पहले कभी नहीं देखा फिर मैं उसके पास गई और बोली क्या देख रहे हो वह थोड़ा शर्मा गया और मुझे देखकर वह बहुत ही खुश हुआ अब वह भी शायद समझ चुका था कि मैं भी उससे प्यार करती हूं और शायद
वह भी यह बात समझ गया था उसकी आंखों में आंसू आ गए थे मैंने उसकी आंखों के आंसू साफ किया सचिन बहुत ही इमोशनल हो चुका था मेरे लिए तो बहुत ही गर्व की बात थी कि इतना प्यार करने वाला लड़का मुझे मिला फिर हम दोनों अंदर गए और हम ने वहां खाना खाया मैं फिर से घबरा रही थी कि पता नहीं हमारी यह बात शादी तक पहुंच पाएगी या नहीं क्योंकि मैं अपने प्यार को अपनी शादी का रूप देना चाहती थी वह एकदम से चुप हो गया मैंने उससे पूछा सचिन क्या बात है उसने
एक बार मेरी तरफ देखा और बिना कुछ कहे चला गया उसकी आंखों में कुछ नमी थी पता नहीं सचिन को क्या हो गया था मैं एकदम उदास हो गई मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था मैं उसकी खामोशी को समझ नहीं पा रही थी कि वह इतना उदास क्यों हो गया है मैं यही सोच सोच कर पागल हो रही थी आखिर क्या बात हो गई है अभी तक तो बिल्कुल ठीक था एकदम से उसको क्या हो गया सचिन ने ना कुछ खाया और ना कुछ पिया ऐसे ही सब खाने पीने का सामान छोड़कर वह
वहां से चला गया पता नहीं उसके मन में क्या आया लेकिन रो-रो कर मेरा बुरा हाल हो रहा था सचिन के दिमाग में अगर कोई बात थी तो उसे मुझे बोलना चाहिए था अब मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि वह ऐसा क्यों कर रहा है अब मैं क्या करूं सब कुछ मेरे हाथ से फिसल रहा था मैंने सचिन के दोस्तों से पूछा तो पता चला कि उसके घरवालों ने उसे मुझसे दूर रहने को कहा है क्योंकि मेरी और उसकी हैसियत अलग-अलग है मैं अमीर घराने से हूं और वह थोड़ा गरीब है ऊपर से
हम दोनों अलग-अलग जाति के हैं इसलिए उसके घरवालों ने उसे मना किया है मेरे दिमाग में तो पहले कि यह बात थी कि शायद मेरे घर वाले भी मेरे रिश्ते से खुश नहीं होंगे लेकिन मामला यहां तो उल्टा ही है मुझे और मेरे घर वालों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता उन्हें तो बस एक पढ़ा लिखा और समझदार दामाद चाहिए जो उनकी बेटी को खुश रख सके और मुझे लगता है कि सचिन मेरे लिए सबसे अच्छा पति साबित होगा यह जानने के बाद मैं सीधा सचिन के घर गई पहले तो वह चौक गए और बोले
आप यहां कैसे लेकिन फिर उन्होंने मेरा हालचाल पूछा मैं समय बर्बाद नहीं करना चाहती थी इसलिए मैंने सीधे उनसे कहा कि मैं उनके बेटे से प्यार करती हूं और उससे शादी करना चाहती हूं इस पर वह हैरान हो गए उन्होंने मुझे अपनी मुश्किलें बताई मैंने उन्हें समझाया और आखिरकार वह मान गए अब सचिन की बारी थी मैंने उससे बात करने के लिए अपने घर बुला लिया क्योंकि मेरे घर वाले किसी की शादी में गए हुए थे और शाम से पहले लौटने वाले नहीं थे इसलिए बात मेरे घर में अच्छे से हो पाती मैंने तय कर
लिया था कि आज तो मुझे उससे बात करनी ही पड़ेगी मैंने उसे फोन किया वह मेरा फोन उठा नहीं रहा था मैं बार-बार उसे कॉल करती रही लेकिन मेरे नंबर से उसने फोन नहीं उठाया फिर मैं अपने दूसरे नंबर से उसे फोन किया वह नंबर उसके पास नहीं था जब उसने फोन उठाया तो मैंने उससे कहा कि फोन काटने से पहले मेरी एक बात ध्यान से सुन लो आज तुम मेरे घर आना मुझे तुमसे बहुत जरूरी बात करनी है पहले तो उसने मना किया लेकिन फिर मेरे जोर देने पर मान गया मैंने कहा अगर आज
तुमने मेरी बात नहीं मानी तो मैं आज के बाद तुम्हें कभी भी फोन नहीं करूंगी और ना ही तुम्हें अपनी शक्ल दिखाऊंगी फिर सचिन बोला कि मैं रात को आऊंगा क्योंकि दिन में उसका कॉलेज टाइम होता था और शाम का कोचिंग का टाइम होता था और रात का टाइम फ्री होता था तो बोला कि तब आकर बात करूंगा वह करीब 9:00 बजे आया मैं उसका इंतजार कर रही थी फिर मैं उसकी पसंद का खाना बनाया जो कि देखकर बहुत खुश हुआ कि मैंने उसकी पसंद का खाना बनाया है मैं सचिन को देखकर बहुत खुश हुई
लेकिन उसके चेहरे पर अभी वही मायूसी छाई हुई थी पता नहीं सचिन को क्या हो गया था बहुत ही अलग सा बर्ताव करने लग गया था मैं बिल्कुल भी समझ नहीं पा रही थी कि उसको क्या हो गया है वह ना ही बात कर रहा था और ना ही कुछ बोल रहा था फिर हमने खाना खाया उसे मेरा बनाया हुआ खाना बहुत पसंद आया और बोला कि पूजा मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि तुम इतना अच्छा खाना बना लेती हो मैं हंसकर बोली हां क्यों नहीं इतना तो टाइम पास कर ही लेती हूं खाना
बनाने में मैंने उससे कहा सचिन मैं तुमसे एक बात बोलना चाहती हूं सचिन ने कहा हां बोलो पूजा क्या बात है मैं तुमसे प्यार करती हूं लेकिन मैं तुम्हें बता नहीं पा रही थी पूजा प्यार तो मैं भी तुमसे बहुत करता हूं लेकिन यह हो नहीं सकता क्योंकि मैं बहुत गरीब परिवार से हूं और मैं तुम्हारे लायक भी नहीं हूं मेरे मां-बाप बहुत गरीब है वह खेतों में मजदूरी का काम करते हैं घर में दो वक्त की रोटी जुटाना बहुत मुश्किल है और तुम्हारे घर वाले मुझसे क्यों तुम्हारा रिश्ता करेंगे मैं तुम्हें देही क्या सकता
हूं मैं बोली सचिन ऐसी बातें क्यों बोलते हो मुझे दौलत वाले से शादी नहीं करनी है मुझे सिर्फ अच्छे दिल वाले से शादी करनी है जो मुझे सुख रख सके वह सब गुण मैं तुम में देखती हूं सचिन मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती इसलिए स्पेशल मैंने तुम्हें अपने घर बुलाया है कि मैं शांति से तुम्हारे साथ बात कर सकूं सचिन बोला पूजा यह बिल्कुल भी पॉसिबल नहीं है मैं तुम्हें कुछ भी नहीं दे पाऊंगा हमारे सर पर तुमको पता है ना कितना कर्जा है जब मेरी बहन की शादी हुई थी तो हमने 7 लाख
का कर्ज लिया था मुझे और बाबूजी को पहले वह कृष को उतरना है मैं पहले शादी के बारे में नहीं सोच सकता और पढ़ लिखकर मुझे अपने मां-बाप को सपोर्ट करना है पता है उन्होंने कितनी मुश्किल से मुझे पढ़ाया दिखाया है अगर मैं उनका सहारा ना बन सका तो इतनी पढ़ाई लिखाई करने का भी क्या फायदा है मैं बोली सचिन हम दोनों मिलकर उनका सपोर्ट करेंगे लेकिन तुम मेरी बात मान जाओ क्योंकि मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती और मुझे यह भी पता है कि तुम भी मेरे बिना नहीं रह सकते अब से फालतू का
नाटक करना बंद करो और मैं जो बोल रही हूं उस पर ध्यान दो सचिन चलो हम मंदिर में जाकर शादी कर लेते हैं सचिन बोला नहीं पूजा पहले मुझे बाबा का कृष उतरना है फिर मैं अपने बारे में सोचूंगा लेकिन फिलहाल मेरे दिमाग में अभी अपने लिए कोई ख्याल नहीं है मुझे पहले अपनी जिम्मेदारियां निभानी है मैं बोली कोई बात नहीं तुम जब तक कहो मैं तुम्हारा इंतजार करने के लिए तैयार हूं फिर उसने अपनी पढ़ाई पूरी होने के बाद नौकरी की तलाश शुरू कर दी फाइनली उसको एक अच्छी नौकरी मिल गई और उसकी सैलरी
भी काफी अच्छी थी न साल नौकरी करने के बाद उसने अपने बाबा का सारा कर्ज चुका दिया अब बारी थी हम दोनों के प्यार को शादी का नाम देने की पूरे न साल बाद सचिन का फोन आया और बोला पूजा मैं तुमसे शादी करने के लिए तैयार हूं यह सुनकर मैं बहुत ही खुश हुई फाइनली मेरे मन की मुराद पूरी हुई सचिन अपने मां-बाप के साथ मेरे घर आया रिश्ते की बात करने और मेरे मां-बाप ने यह रिश्ता कबूल कर लिया क्योंकि उनकी फाइनली कंडीशन बहुत अच्छी हो चुकी थी दो महीने के बाद हमारी शादी
तय हुई फाइनली आज शादी का दिन भी आ गया और शादी बहुत ही अच्छे तरीके से संपन्न हुई मैं सचिन के साथ बहुत खुश हूं मैंने सचिन के साथ अपनी जो खुशी देखी थी वह मुझे बहुत ज्यादा इंतजार करने के बाद मिली दोस्तों कहानी पसंद आई तो लाइक शेयर और चैनल को सब्सक्राइब जरूर करें फिर मिलेंगे एक नई और दिलचस्प कहानी में धन्यवाद