[संगीत] सेमी कंडक्टर इलेक्ट्रॉनिक्स जो अगला चैप्टर है उसका नाम है सेमीकंडक्टर इलेक्ट्रॉनिक्स सबसे पहले तो सेमीकंडक्टर का मतलब क्या होता है तो नेचर में कुछ ऐसे मटेरियल होते हैं जो कि कंडक्टर और इंसुलेटर इन दोनों के बीच की कैटेगरी में आते हैं मतलब उनमें कंडक्टर वाली प्रॉपर्टी भी होती है मतलब करंट फ्लो हो भी सकता है और जो नॉन कंडक्टर्स है या जिनको इंसुलेटर्स बोला जाता है नॉन कंडक्टर्स मतलब जिनमें करंट फ्लो नहीं होता जैसे वुड प्लास्टिक ये क्या होते हैं नॉन कंडक्टर्स होते हैं तो सेमीकंडक्टर्स का मतलब यह है कि ऐसे मटेरियल जिनमें कंडक्टर
वाली प्रॉपर्टी भी होंगी और इंसुलेटर वाली प्रॉपर्टी भी होंगी उनको हम क्या बोलेंगे उनको हम बोलेंगे सेमीकंडक्टर क्योंकि उनमें हाफ प्रॉपर्टी कंडक्टर वाली है और हाफ प्रॉपर्टी इंसुलेटर वाली है इसलिए उसका नाम क्या रखा सेमीकंडक्टर रखा कौन-कौन से मटेरियल इस कैटेगरी में आते हैं तो कार्बन हो गया सिलिकॉन हो गया जर्मेनियम हो गया यह सब किसकी कैटेगरी में आते हैं सेमीकंडक्टर मैटेरियल्स की कैटेगरी में आते हैं ठीक है और इनकी खास बात यह है कि एक प्रॉपर वोल्टेज या प्रॉपर व टेंपरेचर के ऊपर ये कंडक्टर की तरह बिहेव कर सकते हैं और किसी और टेंपरेचर
या वोल्टेज के ऊपर ये इंसुलेटर की तरह भी बिहेव कर सकते हैं तो ये दोनों प्रॉपर्टीज इनके अंदर होंगी कौन-कौन सी कंडक्टर और इंसुलेटर वाली कंडक्टर्स आप जानते ही हो जितनी भी मेटल्स है वो कंडक्टर होती हैं उनमें हमेशा करंट फ्लो होता रहता है अगर आप किसी भी बैटरी या वोल्टेज सोर्स से उनको कनेक्ट करोगे तो हमेशा करंट फ्लो होगा और जो इंसुलेटर्स हैं उनको आप किसी भी बैटरी या वोल्टेज सोर्स के अक्रॉस कनेक्ट कर दो उसमें कभी भी करंट फ्लो नहीं होगा तो इंसुलेटर की प्रॉपर्टी क्या है करंट फ्लो नहीं होने देना और कंडक्टर
की प्रॉपर्टी क्या है हमेशा करंट फ्लो होने देना जब भी उसको बैटरी या वोल्टेज सोर्स के अक्रॉस कनेक्ट किया जाएगा लेकिन जो सेमीकंडक्टर्स हैं उनकी अलग खास बात है वह करंट फ्लो होने दे भी सकते हैं और नहीं भी दे सकते वो डिपेंड करेगा कि किस तरीके से कितना वोल्टेज उनके अक्रॉस लगाया गया है और कितने टेंपरेचर पर उनको रखा गया है फ एक एग्जांपल अगर जीरो केल्विन टेंपरेचर पे किसी भी सेमीकंडक्टर मटेरियल को रखा जाता है तो व एक इंसुलेटर की तरह काम करता है किसकी तरह काम करेगा इंसुलेटर उसमें करंट फ्लो होगा ही
नहीं कितने टेंपरेचर पे 0 केल्विन टेंपरेचर पे तो हम ये बोल सकते हैं कि 0 केल्विन टेंपरेचर पे एक सेमीकंडक्टर मटेरियल एक परफेक्ट इंसुलेटर की तरह काम करता है मतलब इंसुलेटिंग प्रॉपर्टी शो करेगा इंसुलेटर की तरह वो काम कर रहा होगा ठीक है जी दिखने में कुछ इस टाइप के होते हैं ये सिलिकॉन इस टाइप का सा होता है जर्मेनियम इस टाइप का सा होता है तो ये कुछ सेमीकंडक्टर मैटेरियल्स के एग्जांपल है कार्बन सिलिकॉन जर्मेनियम मोस्टली हम क्या यूज करते हैं सिलिकॉन यूज करते हैं इसके पीछे भी एक रीजन है देखो नेचर में सबसे
ज्यादा जो अवेलेबल है वह है सिलिकॉन अच्छा कार्बन भी काफी सारा अवेलेबल है लेकिन इसको हम यूज नहीं करते हैं सेमीकंडक्टर मैटेरियल्स की खास बात ये होती है कि उनमें जो आउटर मस्ट ऑर्बिट होता है उसमें चार इलेक्ट्रॉन होते हैं जैसे कार्बन का जो आउटर मोस्ट ऑर्बिट है वो सेकंड ऑर्बिट होगा और उसके अंदर चार इलेक्ट्रॉन होंगे सिलिकॉन का आउटर मोस्ट ऑर्बिट थर्ड थर्ड ऑर्बिट होगा जिसमें चार इलेक्ट्रॉन होंगे और जर्मेनियम का आउटर मस्ट ऑर्बिट फोर्थ ऑर्बिट होगा जिसके अंदर चार इलेक्ट्रॉन होंगे न्यूक्लियस से जितना दूर होता जाएगा इलेक्ट्रॉन उतना ही उसके ऊपर न्यूक्लियस का
अट्रैक्शन फोर्स कम होता जाएगा तो अगर मैं आपको बोलूं कि कौन से वाले एलिमेंट से कौन से वाले एलिमेंट के आउटर मोस्ट ऑर्बिट से इलेक्ट्रॉन को निकालना इजी है तो जिसमें इलेक्ट्रॉन न्यूक्लियस से सबसे ज्यादा दूर है किसमें सबसे ज्यादा दूर होगा जर्मेनियम के अंदर जैसे कार्बन में सिक्स इलेक्ट्रॉन होते हैं तो ये इस तरीके से फिल होते हैं 1 s2 2s 2 2 प2 यह तो कार्बन की बात हो गई अगर मैं सिलिकन की बात करूं तो उसमें इस तरीके से फिल होंगे सिलिकन में 1 s2 22 2p 6 3s 2 3 प2 ठीक
है आउटर मोस्ट ऑर्बिट कौन सा हो गया थर्ड ऑर्बिट हो गया इसमें और जर्मेनियम के अंदर किस तरीके से फिल होंगे जर्मेनियम के अंदर होंगे 1 s2 2s 2 2p 6 3s 2 3p 6 3d 3d 10 और उसके बाद में आएगा 4s 2 4 प2 ये आया समझ में तो ये इलेक्ट्रॉनिक सीक्वेंस हमने लिखा है कार्बन सिलिकॉन और जर्मेनियम का अब आप इजली देख के ये बता सकते हो कि जो कार्बन है उसमें आउटर मोस्ट ऑर्बिट कौन सा है सेकंड ऑर्बिट है ना आउटर मोस्ट ऑर्बिट मतलब कहां तक इलेक्ट्रॉन है सेकंड ऑर्बिट तक है
तो ये आउटर मोस्ट ऑर्बिट हुआ ठीक है सिलिकन में आउटर मोस्ट ऑर्बिट कौन सा होगा थर्ड ऑर्बिट होगा और जर्मेनियम में आउटर मोस्ट ऑर्बिट कौन सा होगा फोर्थ ऑर्बिट होगा ये चीज समझ में आई क्या अब कौन से वाले ऑर्बिट से इलेक्ट्रॉन को निकालना सबसे इजी होगा फोर्थ ऑर्बिट से सबसे दूर जो होगा ना न्यूक्लियस से जितना दूर होगा इलेक्ट्रॉन उतना ही उसको कम एनर्जी देकर निकाला जा सकता है तो कहने का मतलब ये हुआ कि जर्मेनियम से जर्मेनियम के आउटर मोस्ट ऑर्बिट से इलेक्ट्रॉन को निकालना इजी है और अगर इलेक्ट्रॉन आउटर मस्ट ऑर्बिट से
फ्री हो जाएगा तो जो मटेरियल है वह एज ए कंडक्टर काम कर पाएगा क्योंकि इसमें एक फ्री इलेक्ट्रॉन डेवलप हो जाएगा है ना ऐसे बहुत सारे एटम्स होंगे उनमें बहुत सारे फ्री इलेक्ट्रॉन डेवलप हो जाएंगे और इजली वो मटेरियल कंडक्टर की तरह बिहेव कर पाएगा कंडक्टर मतलब वो वाले मटेरियल जिनमें चार्ज या करंट फ्लो हो सकता है तो हमने यह देखा कि जर्मेनियम सबसे बेस्ट एक तरह से सेमीकंडक्टर मटेरियल हुआ जिसमें आउटर मस्ट ऑर्बिट से इलेक्ट्रॉन को इजली निकाला जा सकता है और इसको एज ए कंडक्टर हम कन्वर्ट कर सकते हैं ठीक है लो टेंपरेचर
पे यानी कि जीरो केल्विन टेंपरेचर पे ये सारे के सारे किसकी तरह काम करेंगे एक इंसुलेटिंग मटेरियल की तरह काम करेंगे इंसुलेटर की तरह काम करेंगे लेकिन जैसे-जैसे टेंपरेचर बढ़ाओ ग तो हीट की फॉर्म में एनर्जी मिलने से क्या होगा जो आउटर मोस्ट ऑर्बिट की इलेक्ट्रॉन है वो फ्री होना स्टार्ट हो जाएंगे और फ्री होंगे तो जो मटेरियल है वो एक कंडक्टर की तरह काम करने लग जाएगा ठीक है तो सबसे बेस्ट तो कौन है जर्मेनियम लेकिन ये लेकिन नेचर में ये कम अवेलेबल है जर्मेनियम उतना अवेलेबल नहीं है नेचर में तो इसको हम यूज
नहीं कर पाएंगे कम है तो भाई इसकी कॉस्ट ज्यादा होगी कॉस्ट ज्यादा होगी तो हम जो डिवाइसेज वगैरह बनाएंगे इससे वह भी कॉस्टली होंगे हर कोई उसको अफोर्ड नहीं कर पाएगा इसलिए हम इसको यूज नहीं करेंगे फिर सिलिकॉन नेचर के अंदर बहुत सारा अवेलेबल है है ना इसी को हम यूज करेंगे कार्बन को इसलिए यूज नहीं करते क्योंकि ये बहुत सारा अवेलेबल तो है लेकिन इसमें आउटर मोस्ट ऑर्बिट कौन सा है सेकंड ऑर्बिट और सेकंड ऑर्बिट से इलेक्ट्रॉन को निकालने के लिए ज्यादा एनर्जी देनी पड़ेगी मतलब ये ज्यादा वोल्टेज पे काम करने वाले डिवाइस बनेंगे
इससे मतलब ज्यादा वोल्टेज देना पड़ेगा एनर्जी ज्यादा खर्च होगी उसमें तो यह अच्छा नहीं अपने लिए तो अपने लिए बेस्ट कौन सा हुआ सिलिकन हुआ तो सिलिकन को हम यूज करते हैं जितने भी सेमीकंडक्टर डिवाइसेज होते हैं मोस्टली उनको सिलिकन से ही बनाया जाता है ठीक है बाकी सेमीकंडक्टर मटेरियल की मेन प्रॉपर्टी आपको समझ में आ गई क्या यह कंडक्टर और इंसुलेटर दोनों की तरफ बिहेव कर सकते हैं वो डिपेंड करेगा सिचुएशन के ऊपर वोल्टेज के ऊपर या टेंपरेचर के ऊपर कि ये किसकी तरह बिहेव कर रहे होंगे ठीक है ये इनकी खास बात है
ठीक फिर एक थ्योरी है जिसको हम बोलते हैं एनर्जी बैंड थ्योरी ये हम यूज करते हैं किसी भी सेमीकंडक्टर मटेरियल के बिहेवियर को समझने के लिए या कोई भी मटेरियल होता है ना नेचर के अंदर तीन कैटेगरी में हम मैटेरियल्स को डिवाइड करते हैं कंडक्टर इंसुलेटर और सेमीकंडक्टर तो इन तीनों का जो बिहेवियर है उसको समझने के लिए कि ये किस तरीके से काम करेंगे तो इसके लिए हम एक थ्योरी यूज करेंगे उस थ्योरी का नाम क्या है एनर्जी बैंड थ्योरी ठीक है अब यह एनर्जी बैंड थ्योरी क्या है इसको ध्यान से समझना आप यहां
पर मैं एक ग्राफ ड्र कर रहा हूं समझाने के लिए एक्स एक्सिस के ऊपर हम इंटर एटम स्पेस ले रहे हैं इंटर एटॉमिक स्पेस का मतलब है एटम्स के बीच का स्पेस कितना है वह हम एक्स एक्सिस के ऊपर प्लॉट कर रहे हैं तो एक्स एक्सिस प क्या है इंटर एटॉमिक डिस्टेंस या स्पेस ठीक है इंटर एटॉमिक डिस्टेंस का मतलब है एटम्स के बीच का डिस्टेंस ठीक है यह हमने एक्स एक्सिस पर लिया है और वा एक्सिस के ऊपर ले रहे हैं हम लोग एनर्जी को ठीक है वा एक्सिस पर हमने किसको लिया है एनर्जी
को एक्स एक्सिस पर हम किसको ले रहे हैं इंटर एटॉमिक सेंस को ले रहे हैं ठीक है अब मान लो आपने कोई भी सिलिकन या जर्मेनियम का पीस लिया है ना कोई भी सेमीकंडक्टर मटेरियल का एक पीस लेंगे मान लो कि एक सेमीकंडक्टर मटेरियल ले लिया आपने ये अब इसके अंदर बहुत सारे एटम्स होंगे छोटे-छोटे बहुत सारे एटम्स होंगे मान लो इसके अंदर n नंबर ऑफ एटम्स है कितने एटम्स है n नंबर ऑफ एटम्स है जो कि अगर ये सॉलिड है भाई सेमीकंडक्टर मटेरियल सॉलिड ही होते हैं तो उनमें एटम्स काफी क्लोज होते हैं काफी
पासपास होंगे लेकिन जोब वो पासपास आ रहे होंगे तो उनमें जो अलग अलग ऑर्बिट में इलेक्ट्रॉन चक्कर लगा रहे हैं उन ऑर्बिट के जो एनर्जी लेवल्स हैं या उन ऑर्बिट में इलेक्ट्रॉन की जो टोटल एनर्जी है वो इन एटम्स के बिल्कुल पासपास आने की वजह से अफेक्ट होगी क्यों होगी वो समझाता हूं देखो मान लो कि ये दो एटम्स हैं एक यहां पे है एक यहां पे ये काफी दूर-दूर है अब इस एटम के अंदर भी न्यूक्लियस के चारों तरफ इलेक्ट्रॉन चक्कर लगा रहे हैं इस एटम के अंदर भी न्यूक्लियस के चारों तरफ चक्कर लगा
रहे हैं इलेक्ट्रॉन ठीक है अब इलेक्ट्रॉन की जो टोटल एनर्जी होती है वो दो टाइप की एनर्जी से मिलके बनती है कौन कौन सी एनर्जी होती है काइनेटिक एनर्जी होती है एक तो उसके पास और दूसरी एनर्जी कौन सी होती है पोटेंशियल एनर्जी इलेक्ट्रॉन के पास में ऑर्बिट के अंदर दो टाइप की एनर्जी होती है कौन-कौन सी एक तो काइनेटिक एनर्जी जो उसकी स्पीड की वजह से होती है और एक होती है पोटेंशियल एनर्जी क्योंकि वो न्यूक्लियस के न्यूक्लियस में जो पॉजिटिव चार्ज है उसकी वजह से जो इलेक्ट्रिक फील्ड प्रोड्यूस होगा चारों तरफ उस इलेक्ट्रिक
फील्ड में इलेक्ट्रॉन चक्कर लगा रहा होता है इसलिए उसकी कुछ पोटेंशियल एनर्जी भी बनती है ठीक है तो दो टाइप की एनर्जी होगी उसके पास और इन दोनों का जो टोटल होगा वो टोटल एनर्जी ऑफ द इलेक्ट्रॉन बोली जाएगी अलग-अलग ऑर्बिट के अंदर इलेक्ट्रॉन की एनर्जी अलग-अलग होती है जैसे मैं सिलिकॉन का एग्जांपल ले लेता हूं ठीक है मान लो मैंने सिलिकन लिया है सिलिकन के अंदर इलेक्ट्रॉन किस तरीके से फील है 1 s2 2s 2 2p 6 3 ए2 और 3 प2 तो आउटर मोस्ट ऑर्बिट कौन सा हुआ थर्ड ऑर्बिट हुआ यहां पर मैं
उसको यह जो अलग-अलग ऑर्बिट के एनर्जी लेवल्स है उनको मैं यहां पर ड्र करके आपको बता रहा हूं यह मान लो कि जो फर्स्ट ऑर्बिट का ए ऑर्बिट है उसका एनर्जी लेवल है दो इलेक्ट्रॉन जो फर्स्ट ऑर्बिट के ए सब ऑर्बिट के अंदर हैं उनकी एनर्जी इतनी है फिर जैसे-जैसे ऑर्बिट का नंबर बढ़ेगा एनर्जी इलेक्ट्रॉन की बढ़ती जाती है ये आपको पता है ये हमने एटम वाले चैप्टर में डिटेल में पढ़ा था जैसे-जैसे ऑर्बिट का नंबर बढ़ेगा जो इलेक्ट्रॉन है उसकी एनर्जी बढ़ती जाएगी ठीक है तो ये 1 s2 जो फर्स्ट ऑर्बिट का ए सब
ऑर्बिट है उसमें इलेक्ट्रॉन की एनर्जी हो गई फिर ये आ गया 2s 2 यानी कि सेकंड ऑर्बिट का ए सब ऑर्बिट है उसमें एनर्जी इतनी होगी फिर ये आ गया 2 p6 मतलब यह जो सेकंड ऑर्बिट का पी सब ऑर्बिट है जिसमें छह इलेक्ट्रॉन होंगे उन सबकी एनर्जी इतनी होगी ठीक है फिर आएगा 3 ए2 और 3 प2 यह जो थर्ड ऑर्बिट का एस सब ऑर्बिट है उसकी एनर्जी इतनी होगी और जो प सब ऑर्बिट है उसकी एनर्जी इतनी होगी तो ये अलग-अलग जो ऑर्बिट है उनमें इलेक्ट्रॉन की एनर्जी को हमने यहां पर रिप्रेजेंट किया
है ठीक है जब तक एटम्स दूर दूर होंगे तो इजली हम यह बता पाएंगे कि अगर थर्ड ऑर्बिट का इलेक्ट्रॉन है ए सब ऑर्बिट का तो उसकी एनर्जी इतनी होगी और पी सब ऑर्बिट का इलेक्ट्रॉन है थर्ड ऑर्बिट में तो उसकी एनर्जी इतनी होगी लेकिन अगर एटम्स पासपास आएंगे तो जो आउटर मोस्ट ऑर्बिट के इलेक्ट्रॉन होते हैं उनकी एनर्जी उससे अफेक्ट होती है रीजन क्योंकि जितना ये एटम्स एक दूसरे के करीब आएंगे इसके इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन और इसके इलेक्ट्रॉन प्रोटॉन भी एक दूसरे के पास आ रहे होंगे और उसकी वजह से जो इलेक्ट्रॉन बाहर चक्कर लगा
रहे हैं न्यूक्लियस के चारों तरफ उनकी जो पोटेंशियल एनर्जी है जो चार्जेस के कॉन्फिन पर डिपेंड करती है कि चार्जेस किस तरीके से इसके चारों तरफ रखे गए हैं उसके ऊपर डिपेंड करती है पहले तो न्यूक्लियस के चारों तरफ यह चक्कर लगा रहा था एटम पास आएंगे तो उनके न्यूक्लियस भी पास आएंगे तो उससे क्या होगा दोनों जो एटम्स है उनके आउटर मोस्ट ऑर्बिट के जो इलेक्ट्रॉन है उनकी एनर्जी इसकी वजह से क्या होगी अफेक्ट होगी और उसकी वजह से जो आउटर मोस्ट ऑर्बिट का जो एनर्जी लेवल है व भी यहां पर चेंज होता जाएगा
अब यह जो आपने पीस लिया है सिलिकॉन का जिसमें n नंबर ऑफ एटम्स हैं और n नंबर ऑफ एटम्स के अंदर आउटर मस्ट ऑर्बिट में कितने इलेक्ट्रॉन हैं तो एक जो एटम है उसके आउटर मस्ट ऑर्बिट पे चार इलेक्ट्रॉन है देखो दो तो ये हो गए ए सब ऑर्बिट के और दो हो गए p सब ऑर्बिट के चार हैं एक एटम के अंदर चार इलेक्ट्रॉन है आउटर मोस्ट ऑर्बिट में तो n एटम्स के अंदर कितने होंगे 4n इलेक्ट्रॉन होंगे अब उनकी जो एनर्जी है वो सबकी थोड़ी-थोड़ी चेंज होगी जब एटम्स पासपास आएंगे जब तक ये
दूर-दूर हैं तक कोई परेशानी नहीं है मान लो कि पहले इनके बीच में एटम्स के बीच का डिस्टेंस है काफी ज्यादा इसको मैं डिस्टेंस को मैं सपोज करो ए बोल देता हूं ए डिस्टेंस है जो कि काफी ज्यादा है फिर जैसे जैसे ये एटम पास आएंगे ये डिस्टेंस कम होती जाएगी तो एक्स एक्सिस पर हमने किसको लिया इंटर एटॉमिक डिस्टेंस को इसको हम कम होते हुए दिखाएंगे तो जैसे-जैसे एटम्स पास आएंगे तो एक पर्टिकुलर डिस्टेंस तक तो इनके एनर्जी लेवल अफेक्ट नहीं होते एनर्जी लेवल कौन से अफेक्ट होंगे आउटर मोस्ट ऑर्बिट वाले क्योंकि अंदर वाले
ट के जो इलेक्ट्रॉन है वो इतना एक दूसरे के पास नहीं आएंगे सबसे ज्यादा पास कौन से आएंगे इसके आउटर मोस्ट ऑर्बिट के इलेक्ट्रॉन और इसके आउटर मोस्ट ऑर्बिट के इलेक्ट्रॉन यह सबसे ज्यादा पास आएंगे एक दूसरे के तो उनकी एनर्जी अफेक्ट होगी ना इसलिए आउटर मस्ट ऑर्बिट के इलेक्ट्रॉन की जो एनर्जी लेवल है उन्हीं को हम ऑब्जर्व कर रहे हैं उन्हीं को हम यहां पर कंसीडर कर रहे हैं जो इनर ऑर्बिट है उनकी एनर्जी अफेक्ट नहीं होती है उनमें इलेक्ट्रॉन की एनर्जी सेम रहेगी तो इसको छोड़ दो बस यह जो आउटर मोस्ट ऑर्बिट है
इस परे फोकस करना है हमको हमने एटम्स के बीच का डिस्टेंस कम करना चालू किया कम करते जा रहे हैं कम करते जा रहे हैं हम किसी बी डिस्टेंस तक पहुंचे बी डिस्टेंस तक हमने देखा कि आउटर मस्ट ऑर्बिट के जो इलेक्ट्रॉन है उनकी एनर्जी फिक्स है लेकिन जैसे ही इस डिस्टेंस से आप और ज्यादा करीब लेके आओगे एटम्स को तो क्या होगा जो इलेक्ट्रॉन की एनर्जी है वह कम ज्यादा होने लग जाएगी तो यह जो एक लेवल है यह कई लेवल्स में डिवाइड हो जाएगा ऐसे कई लेवल्स में डिवाइड होने का मतलब क्या है
जैसे किसी एक एटम के अंदर ए सब ऑर्बिट में इलेक्ट्रॉन है उसकी एनर्जी इतनी है ठीक है तो किसी दूसरे एटम में जो ए सब ऑर्बिट होगा थर्ड ऑर्बिट का जो एस सब ऑर्बिट होगा उसमें इलेक्ट्रॉन की एनर्जी इससे थोड़ी सी ज्यादा होगी और किसी दूसरे एटम के अंदर उसी थर्ड ऑर्बिट के ए सब ऑर्बिट में इलेक्ट्रॉन की एनर्जी थोड़ी सी कम हो जाएगी क्यों ऐसा क्यों हो रहा है क्योंकि एटम्स पास आ रहे हैं इसकी वजह से आउटर मस्ट ऑर्बिट के जो एनर्जी लेवल्स हैं वो अफेक्ट होना चालू हो गए उनमें इलेक्ट्रॉन की एनर्जी
कम ज्यादा होनी चालू हो गई किसी इलेक्ट्रॉन की एनर्जी थोड़ी सी बढ़ गई किसी इलेक्ट्रॉन की एनर्जी थोड़ी सी कम हो गई तो जो एक ही लेवल था ना उसको मैंने कई लेवल्स में डिवाइड करके दिखाया यहां पे कि एनर्जी इतनी भी हो सकती है किसी इलेक्ट्रॉन की इतनी भी हो सकती है इतनी भी हो सकती है मतलब ये नहीं रहेगी फिक्स नहीं रहेगी थोड़ा ऊपर नीचे हो जाएगी और यहां पे जो पी सब ऑर्बिट में जो दो इलेक्ट्रॉन चक्कर लगा रहे हैं अलग-अलग एटम्स के अंदर उनकी एनर्जी भी अब इतनी नहीं रहेगी उससे थोड़ी
ऊपर या नीचे हो जाएगी मतलब थोड़ा कम ज्यादा हो जाएगी यहां पे थोड़ी वैल्यू चेंज होगी कहने का मतलब इतना ही है ठीक है फिर हम एटम्स को अगर और ज्यादा पास लेके आते हैं मान लो हम लेके आ रहे हैं किसी सी डिस्टेंस के ऊपर तो अब क्या होगा यह जो एनर्जी लेवल्स है ये और ज्यादा स्प्लिट हो जाएंगे मतलब किसी इलेक्ट्रॉन की एनर्जी इतनी हो जाएगी है ना ऐसे इस वाले ऑर्बिट के जो इलेक्ट्रॉन है उनकी एनर्जी इतनी ज्यादा वेरी कर रही है किसी इलेक्ट्रॉन की तो इतनी बढ़ गई किसी की इतनी कम
हो गई और इस ऑर्बिट के जो इलेक्ट्रॉन है उनकी एनर्जी भी इस तरीके से वेरी कर रही है तो यह भी यहां पर अफेक्ट हो रही है तो ये देखो यहां पर ये आपस में मिक्स हो गए एक तरह से इसमें हम यह नहीं बता पाएंगे कि कौन सा इलेक्ट्रॉन कौन सी ऑर्बिट का है हो सकता है कि ए सब ए सब ऑर्बिट का एक इलेक्ट्रॉन हो उसकी एनर्जी इतनी हो जाए और प सब ऑर्बिट का एक इलेक्ट्रॉन हो उसकी एनर्जी इतनी हो जाए तो हम ये जो एनर्जी लेवल्स यहां पे दिखा रहे हैं ना
अलग-अलग बहुत छोटे-छोटे ये दो लेवल थे ये बहुत सारे एनर्जी लेवल्स में यहां पे स्प्लिट हो गए एक तरह से डिवाइड हो गए इसको ऐसे बोलते हैं कि ये एक ही एनर्जी लेवल कई लेवल्स में यहां पे डिवाइड हो जाता है क्योंकि इलेक्ट्रॉन की एनर्जी चेंज हो रही है फिर अगर आप और डिस्टेंस को कम करोगे मान लो सॉलिड के अंदर किसी डी डिस्टेंस के ऊपर एटम्स रहते हैं यह जो सॉलिड है इसके अंदर जो एटम्स है मान लो इतना पासपास है वो तो इनके बीच का जो डिस्टेंस है मान लो कितना है d के
बराबर है तो उस डी डिस्टेंस के ऊपर क्या होगा ये जो एनर्जी लेवल्स है ये दो ग्रुप्स में डिवाइड हो जाएंगे एक ग्रुप ये बन जाएगा एक ग्रुप ये बन जाएगा ऐसे दो ग्रुप बन गए ठीक है अब ये जो दो ग्रुप्स है इनका हम एक अलग-अलग नाम रखेंगे ये वाले जो ग्रुप्स हैं ये वो वाले ग्रुप्स है जिनमें इलेक्ट्रॉन रहेंगे इनकी एनर्जी कम रहेगी और अगर किसी इलेक्ट्रॉन को बाय चांस एनर्जी मिल जाती है एक्सटर्नली एनर्जी मिलने के बाद में एनर्जी बढ़ जाएगी तो वो इस ग्रुप के अंदर आ जाएगा एक तरह से तो
पहले जब तक कोई भी इलेक्ट्रॉन किसी ऑर्बिट में चक्कर लगा रहा है तब तक उसकी जो एनर्जी है वो इस रेंज में रहेगी यहां से लेके यहां तक कुछ हो सकती है लेकिन जैसे ही एनर्जी मिलेगी तो एनर्जी बढ़ जाएगी और एनर्जी बढ़ने से वो इस ग्रुप के अंदर चला जाएगा तो ये जो दोनों ग्रुप्स है इनका एक अलग-अलग नाम रखेंगे हम लोग जो नीचे वाला ग्रुप है इसका नाम होता है वैलेंसी बैंड और ये वाला जो ग्रुप है इसका नाम होता है कंडक्शन बैंड इसको मैं यहां पे दिखा देता हूं ये नीचे वाला जो
लेवल मैंने दिखा रखा है यहां पे एनर्जी लेवल्स दिखा रखे हैं बहुत सारे यह ग्रुप बन गया और इसको हम बोलेंगे वैलेंसी बैंड क्या बोलेंगे इसको वैलेंसी बैंड और जो ऊपर वाला ग्रुप है जो ऊपर वाला ग्रुप है उसमें मतलब जितने भी इलेक्ट्रॉन होंगे उनकी एनर्जी ज्यादा होनी चाहिए तो इस ग्रुप को हम बोलेंगे कंडक्शन बैंड ठीक है वैलेंसी मेंट का मतलब है वो वाले इलेक्ट्रॉन जो एटम के आउटर मस्ट ऑर्बिट में चक्कर लगा रहे हैं लेकिन अभी तक वह एटम से फ्री नहीं हुए हैं तो उनकी एनर्जी क्या रहेगी कम रहेगी तो वह इस
रेंज में होगी कुछ ठीक है इसलिए इसका नाम रख दिया वैलेंसी बैंड और अगर एनर्जी मिल जाती है किसी इलेक्ट्रॉन को तो वो फ्री हो जाएगा और जो फ्री इलेक्ट्रॉन है उसकी एनर्जी हमेशा ऑर्बिट में चक्कर लगाने वाले इलेक्ट्रॉन से ज्यादा होगी तो कितनी ज्यादा होगी तो ये गैप दिखा रखा है इनके बीच में कि इतनी ज्यादा होगी तो ये इस रेंज में कुछ आएगा तो इस ग्रुप को हमने एक अलग नाम दे दिया इसको हमने क्या बोला कंडक्शन बैंड बोल दिया अब मैं इसको यहां पे दिखा देता हूं थोड़ा सा डायग्राम में इस तरीके
से हम डायग्राम बनाकर बताते हैं इसको ठीक है यह यहां पर हम एक गैप दिखा रहे हैं और यह जो गैप है यह जो आपको एक डिफरेंस यहां पर नजर आ रहा है दोनों जो एनर्जी ग्रुप्स है उनके बीच में इसको हम बोलते हैं एनर्जी गैप जीजी जीजी का मतलब क्या है यहां पे एनर्जी गेव ठीक है आया समझ में कहने का मतलब क्या है कि जब भी किसी सॉलिड का फॉर्मेशन होता है और उसमें एटम्स पास पास आते हैं तो उन एटम्स के आउटर मोस्ट ऑर्बिट के इलेक्ट्रॉन की एनर्जी अफेक्ट होती है उससे और
उससे क्या होगा उनकी एनर्जी थोड़ी बहुत चेंज होती जाएगी और चेंज होने से जो एनर्जी लेवल्स हैं वो कई लेवल्स में पहले तो स्प्लिट हो जाएंगे फिर दो ग्रुप्स बन जाएंगे और दो ग्रुप बनेंगे कब जब वो सॉलिड के अंदर ये पासपास आ चुके होंगे एटम की एटम एक दूसरे के पासपास आ चुके हैं सॉलिड का फॉर्मेशन हो चुका है देखो गैस के अंदर तो एटम्स काफी दूर होते हैं लिक्विड के अंदर थोड़ा पास आते हैं और सॉलिड में और ज्यादा पास आते हैं तो जब वो इतना पासपास आ चुके होंगे किसी डी डिस्टेंस प
आ चुके होंगे सॉलिड के अंदर एटम्स तो उस कंडीशन में जो एनर्जी लेवल्स है वो दो ग्रुप्स में डिवाइड हो जाते हैं और उनको बोला जाता है वैलेंसी बैंड और कंडक्शन बैंड और इन एनर्जी लेवल्स के बीच में जो डिफरेंस आपको दिखाई दे रहा है इसमें कोई भी एनर्जी लेवल नहीं होगा मतलब किसी भी इलेक्ट्रॉन की एनर्जी या तो इतनी होगी या फिर अगर उसको एनर्जी मिल रही है कहीं बाहर से तो वो सीधी इस ग्रुप के अंदर कोई एनर्जी लेवल के बराबर होगी बीच में नहीं हो सकती यहां पे म मतलब यहां से सीधा
यहां पर जंप होगा ये एक गैप यहां पे क्रिएट हो गया जिसका नाम क्या रखा है हमने एनर्जी गैप रखा हुआ है अब जो अलग-अलग टाइप के मैटेरियल्स होते हैं जैसे सॉलिड सॉलिड के अंदर तीन टाइप के मटेरियल आते हैं कंडक्टर इंसुलेटर सेमीकंडक्टर तो इन तीनों के अंदर ये जो एनर्जी गप है ये अलग-अलग होगा किसी मटेरियल में ये बहुत कम होगा किसी में ज्यादा होगा किसी में होगा ही नहीं उसके अकॉर्डिंग हम उन मैटेरियल्स को अलग-अलग कैटेगरी में रखेंगे ठीक है अब हम ये कैसे कैटेगरी इज करेंगे कि कौन सा मटेरियल कंडक्टर होगा कौन
सा सेमीकंडक्टर होगा और कौन सा इंसुलेटर होगा तो वोह इस एनर्जी बैंड गैप से डिसाइड होगा यह जो एनर्जी गैप है इससे वो चीज डिसाइड होगी कि जो मटेरियल है वह किसकी तरह बिहेव करेगा अब जो एनर्जी गैप है वह अलग-अलग टाइप के मैटेरियल्स में अलग-अलग होता है जैसे अगर हम मेटल्स की बात करें या कंडक्टर्स की बात करें तो मेटल्स के अंदर या कंडक्टर्स के अंदर क्या होगा जो वैलेंसी बैंड है और जो कंडक्शन बैंड है वो ओवरलैप कर जाते हैं जैसे देखो यह यहां से लेके यहां तक यह पूरा वैलेंसी ब और यहां
से लेके यहां तक यह हो गया कंडक्शन बैंड और दोनों इस रीजन में क्या कर रहे हैं ओवरलैप कर रहे हैं समझ में आया क्या यह तो है मान लो कंडक्शन बैंड यह है वैलेंसी बैंड और दोनों ओवरलैप कर गए तो जो ओवरलैप वाला रीजन है वो यहां पर दिखाया हुआ है इसका मतलब वैलेंसी बैंड में अगर कोई इलेक्ट्रॉन है तो वह कंडक्शन बैंड में भी काउंट होगा क्योंकि ओवरलैप कर रहे हैं ना ये ओवरलैप कर रहे हैं तो यहां पर कोई इलेक्ट्रॉन है मान लो वैलेंसी बैंड में तो वो किसम काउंट होगा कंडक्शन बैंड
में भी काउंट होगा और अगर कंडक्शन बैंड में इलेक्ट्रॉन होंगे इसका मतलब वो मटेरियल एज ए कंडक्टर बिहेव कर पाएगा व फ्री इलेक्ट्रॉन अगर किसी भी मटेरियल में अवेलेबल होते हैं तो वो क्या कर सकता है कंडक्शन कर सकता है उसमें चार्ज या करंट फ्लो हो सकता है तो कंडक्टर्स की खास बात ये होती है या मेटल्स की खास बात य होती है कि इसमें वैलेंसी बैंड और कंडक्शन बैंड ओवरलैप करते हैं इसलिए जो वैलेंसी बैंड के इलेक्ट्रॉन हैं वो कंडक्शन बैंड भी में भी काउंट होते हैं जिसका मतलब यह है कि हमेशा उन मैटेरियल्स
के अंदर आपको फ्री इलेक्ट्रॉन मिलेंगे किसी भी टेंपरेचर पे आप देखो कंडक्टर्स के अंदर या मेटल्स के अंदर हमेशा फ्री इलेक्ट्रॉन अवेलेबल होते हैं अगर कंडक्शन बैंड में इलेक्ट्रॉन होंगे ना तभी वो मटेरियल कंडक्टर की तरह काम कर पाएगा अब वैलेंसी बैंड में तो इलेक्ट्रॉन है ही यहां पे लेकिन वैलेंसी बैंड और कंडक्शन बैंड ओवरलैप कर गए इसका मतलब इनके बीच में जो एनर्जी गैप है वो क्या हो गया जीरो हो गया तो वैलेंसी बैंड का कोई भी इलेक्ट्रॉन इजली कंडक्शन बैंड में चला जाएगा एनर्जी गैप है ही नहीं ना एनर्जी लेने की जरूरत ही
नहीं है उसको इजली वो कंडक्शन बेंड में चला जाएगा और इसलिए वो इजली कंडक्शन कर पाएगा तो जो मेटल्स हैं उनके अंदर एनर्जी बैंड गप कितना होगा जीरो ये याद रखना आपको इस पे क्वेश्चन पूछा जाता है कि जो मेटल्स हैं या जो कंडक्टर्स हैं उनके अंदर एनर्जी बैंड गैप कितना होगा तो ये एनर्जी बैंड गैप कितना होगा बताओ जीरो होगा सेकंड जो कैटेगरी है वो है सेमीकंडक्टर सेमीकंडक्टर्स के अंदर ये जो एनर्जी बैंड गैप है ये हमेशा 3 इलेक्ट्रॉन वोल्ट से कम होगा कितना होगा थ इलेक्ट्रॉन वोल्ट से कम होगा जैसे मैं एग्जांपल देता
हूं अगर सिलिकॉन की बात की जाए तो उसके लिए जो एनर्जी बैंड गैप है यह बराबर होता है 1.1 इलेक्ट्रॉन वोल्ट के ठीक है और अगर जर्मेनियम की बात की जाए तो यह एनर्जी बैंड गैप होता है 0.7 इलेक्ट्रॉन वोल्ट के तो देखो ये दोनों ही वैल्यूज 3 इलेक्ट्रॉन वोल्ट से कम है तो जितने भी सेमीकंडक्टर मैटेरियल्स होते हैं उनके अंदर एनर्जी बैंड गैप होता तो है लेकिन वह काफी कम होता है ्र इलेक्ट्रॉन वोल्ट से कम कम रहेगा और इसकी वजह से वैलेंसी बैंड में अगर कोई भी इलेक्ट्रॉन है तो वह इजली एनर्जी एब्जॉर्ब
करके एनर्जी लेके कौन से बैंड में जा सकता है यहां पे कंडक्शन बैंड में जा सकता है इस तरीके से वह वैलेंसी बैंड से कंडक्शन बैंड में जंप कर पाता है ठीक है तो हम यह बोल सकते हैं कि जो सेमीकंडक्टर्स हैं अगर उनमें थोड़ी भी एनर्जी अगर इलेक्ट्रॉन को मिल जाती है तो वो इजली कंडक्शन बैंड में चले जाते हैं और इसकी वजह से व एज ए कंडक्टर काम कर पाते हैं कोई भी मटेरियल तभी कंडक्टर की तरह काम कर पाएगा जब उसके कंडक्शन बैंड में फ्री इलेक्ट्रॉन होंगे अगर इलेक्ट्रॉन फ्री नहीं है वैलेंसी
बैंड में इलेक्ट्रॉन होने का मतलब है कि इलेक्ट्रॉन अभी ऑर्बिट के अंदर चर लगा रहे हैं उनको एनर्जी मिलेगी तब वो फ्री होंगे और कौन से बैंड में काउंट होंगे कंडक्शन बैंड में तो कंडक्शन बैंड में इलेक्ट्रॉन होने चाहिए तभी वो कंडक्टर की तरह काम कर पाएगा ठीक है तीसरी जो कैटेगरी है वो है इंसुलेटर अब इनके अंदर ये जो गैप है ये काफी ज्यादा होता है यह जो एनर्जी बैंड गैप है यह ्र इलेक्ट्रॉन वोल्ट से भी ज्यादा होगा किससे ज्यादा होगा ्र इलेक्ट्रॉन वोल्ट से ज्यादा है और ये इतना ज्यादा होगा कि कभी
भी इलेक्ट्रॉन वैलेंसी बैंड का कोई भी इलेक्ट्रॉन एनर्जी एब्जॉर्ब करके कंडक्शन बैंड में जा ही नहीं पाएगा जैसे वुड है लकड़ी है लकड़ी को आप या लकड़ी की कोई भी एक पीस को आप किसी भी बैटरी के अक्रॉस कनेक्ट कर दो और कितना भी वोल्टेज उसके अक्रॉस लगा दो कभी भी उसमें से करंट फ्लो नहीं होगा क्यों क्योंकि उसके वैलेंसी बैंड में इलेक्ट्रॉन हैं लेकिन वो कंडक्शन बैंड में नहीं जा पा रहे क्योंकि उसके लिए काफी ज्यादा एनर्जी बैंड गैप आ गया और ये एनर्जी बैंड गैप ज्यादा होने की वजह से 3 इलेक्ट्रॉन वोल्ट से
ज्यादा होने की वजह से अगर इलेक्ट्रॉन फ्री नहीं हो पाएंगे कंडक्शन बैंड में जा ही नहीं पाएंगे तो जो मटेरियल है वो कभी भी कंडक्शन कर नहीं पाएगा तो जैसे प्लास्टिक हो गया ग्लास हो गया वुड हो गई इनके अंदर इसीलिए करंट फ्लो नहीं होता इसीलिए इंसुलेटर की तरह काम करते हैं ये ठीक है तो ये बात समझ में आई क्या अब इसके ऊपर क्वेश्चन बनेगा जो एनर्जी बैंड थ्योरी मैंने अभी आपको बताई थी वो आपको नहीं पूछी जाती एग्जाम में आपको उसके ऊपर क्वेश्चन ये पूछा जाएगा कि एनर्जी बैंड थ्योरी यूज करके यह बताओ
कि कंडक्टर इंसुलेटर और सेमीकंडक्टर ये तीन डिफरेंट टाइप के मटेरियल अलग-अलग क्यों है इनमें क्या डिफरेंस है तो इनमें डिफरेंस क्या बताओगे कि यह तीनों इसलिए डिफरेंट है क्योंकि तीनों में एनर्जी बैंड गैप अलग-अलग है वैलेंसी बैंड और कंडक्शन बैंड के बीच में जो एनर्जी बैंड गैप है वो क्या है तीनों में अलग-अलग है जो कंडक्टर्स हैं उनके अंदर एनर्जी बैंड गैप जीरो होता है जो सेमीकंडक्टर्स हैं उनके अंदर एनर्जी बैंड गैप 3 इलेक्ट्रॉन वोल्ट से कम होगा ये दोनों वैल्यूज आपको याद भी करनी है सिलिकन के लिए एनर्जी बैंड गैप कितना 1.1 इलेक्ट्रॉन वोल्ट
जर्मेनियम के लिए कितना है 0.7 इलेक्ट्रॉन वोल्ट है ना यह याद कर लेना और जो इंसुलेटर्स है उनके अंदर एनर्जी बैंड गैप 3 इलेक्ट्रॉन वोल्ट से ज्यादा होगा ठीक है इसलिए किसकी तरह काम करेगा इंसुलेटर की तरह क्योंकि कोई भी इलेक्ट्रॉन वैलेंसी बैंड से एनर्जी एब्जॉर्ब करके कंडक्शन बैंड में नहीं जा पाएगा यह गैप काफी ज्यादा है इस वजह से तो यह हमेशा मतलब इंसुलेटर की तरह काम करेगा मतलब इसमें कभी भी करंट फ्लो नहीं हो पाएगा आया समझ में ठीक है तो यह है एनर्जी बैंड थ्योरी यह डायग्राम भी पूछे जा सते कि एनर्जी
लेवल डायग्राम बताओ किसके लिए कंडक्टर इंसुलेटर और सेमीकंडक्टर के लिए तो यह वाले डायग्राम बना के एनर्जी बैंड गैप आपको लिखना है उसके नीचे कि इसमें एनर्जी बैंड गैप जीरो है इसमें ्र इलेक्ट्रॉन वोल्ट से कम है और इसमें ्र इलेक्ट्रॉन वोल्ट से ज्यादा है बस इतना सा बनाना है बना सकते हैं इजी है एकदम ठीक है नेक्स्ट टॉपिक है इंट्रिसिक सेमीकंडक्टर इंट्रिसिक का मतलब होता है प्योर इंट्रिसिक का मतलब क्या है प्योर तो प्योर सेमीकंडक्टर की बात हो रही है जैसे एक जर्मेनियम का पीस लिया आपने अब उस पर सारे के सारे एटम्स किसके
हैं जर्मेनियम के हैं तो उसको हम बोलेंगे इंट्रिसिक सेमीकंडक्टर इंट्रिसिक सेमीकंडक्टर का मतलब क्या है प्योर सेमीकंडक्टर मतलब उसमें और कोई एटम नहीं होने चाहिए अगर जर्मेनियम लिया है तो प्योर जर्मेनियम होना चाहिए अगर सिलिकॉन लिया है तो प्योर सिलिकॉन होना चाहिए तो उसको हम बोलते हैं इंट्रिसिक सेमीकंडक्टर क्या बोलेंगे उसको इंट्रिसिक सेमीकंडक्टर ठीक है अब यह मान लो जर्मेनियम का पीस है और इसमें बहुत सारे जर्मेनियम के एटम यहां पर हमने शो किए हुए हैं जर्मेनियम का जो आउटर मोस्ट ऑर्बिट होता है फोर्थ ऑर्बिट होता है और उसके अंदर चार इलेक्ट्रॉन होते हैं उन
चार इलेक्ट्रॉन को मैं य दिखा देता हूं पहले कोई भी सेमीकंडक्टर मटेरियल हो चाहे सिलिकन हो जर्मेनियम हो आउटर मोस्ट ऑर्बिट में हमेशा चार इलेक्ट्रॉन आपको इनमें दिखाई देंगे लेकिन कोई भी एटम तभी जाके स्टेबल रहता है जब उसके आउटर मस्ट ऑर्बिट में एट इलेक्ट्रॉन हो हर एक जर्मेनियम एटम के पास में कितने इलेक्ट्रॉन है चार हैं तो ये चार इलेक्ट्रॉन और लेने की कोशिश करेगा इधर-उधर से लेकिन सारे के सारे जर्मेनियम एटम्स यही कर रहे होंगे इन सबके पास ही चार-चार इलेक्ट्रॉन की कमी है तो यह तो होगा नहीं कि इस जर्मेनियम एटम को
यह वाला जर्मेनियम एटम अपना इलेक्ट्रॉन दे देगा क्योंकि यह भी चाह रहा है कि इसके पास भी चार इलेक्ट्रॉन और आ जाए यह भी चाह रहा है कि चार इलेक्ट्रॉन और आ जाए कहीं से है ना ये भी चाह रहा है कि चार इलेक्ट्रॉन और आ जाए तो सबकी कंडीशन यही है कि सब चार इलेक्ट्रॉन और लाने की कोशिश कर रहे हैं कहीं ना कहीं से चार तो है इनके पास में और चार और अगर कहीं से आ जाए तो इनका ऑक्टलरी भी जर्मेनियम एटम एक दूसरे को इलेक्ट्रॉन देगा नहीं लेकिन एक काम हो सकता
है यहां पे यहां पे पार्टनरशिप हो सकती है शेयरिंग हो सकती है ठीक है कैसे होगी शेयरिंग यह वाला जो जर्मेनियम एटम है ये अपने आसपास वाले चार जर्मेनियम एटम्स के साथ में कोवलेंको वोलेंट बॉन्ड होता है ये शेयरिंग वाला बॉन्ड होता है इसमें इलेक्ट्रॉन की शेयरिंग हो होती है ठीक है ऐसे ही ये वाला जर्मेनियम एटम अपने आसपास वाले चार जर्मेनियम एटम्स के साथ में कोवलेंको कोवलेंको वजह से इसके आउटर मस्ट ऑर्बिट में अब एट इलेक्ट्रॉन हो जाएंगे एट इलेक्ट्रॉन कैसे होंगे जैसे ये वाला जर्मेनियम एटम है इसके पास चार इलेक्ट्रॉन तो खुद के
हैं और चार किसने पार्टनरशिप कर र तो टोटल एट हो गए मतलब तो इसका मतलब यह है कि हर एक जो जर्मेनियम एटम है अब उसके आउटर मस्ट ऑर्बिट में एट इलेक्ट्रॉन काउंट होंगे चार खुद के और चार पार्टनरशिप वाले हो गए तो इस तरीके से अब ह हर जो जर्मेनियम एटम होगा वह क्या होगा स्टेबल कंडीशन में आ जाएगा ठीक है अच्छा अब यह जो जर्मेनियम एटम है इसमें अभी कोई भी फ्री इलेक्ट्रॉन अवेलेबल नहीं है मान लो ये जीरो केल्विन टेंपरेचर पर रखा हुआ है और जीरो केल्विन टेंपरेचर लोएस्ट टेंपरेचर होता है इसके
ऊपर किसी भी इलेक्ट्रॉन को एनर्जी नहीं मिली है और एनर्जी नहीं मिली है तो कोई भी इलेक्ट्रॉन यहां पर फ्री नहीं हुआ और अगर इसमें कोई भी फ्री इलेक्ट्रॉन अवेलेबल नहीं है तो यह किसकी तरह काम करेगा इंसुलेटर की तरह काम करेगा इसका मतलब जीरो केल्विन टेंपरेचर पे एक इंट्रिसिक सेमीकंडक्टर किसकी तरह काम करता है एक परफेक्ट इंसुलेटर की तरह काम करता है तो यह पहला पॉइंट याद रखना है यह एग्जाम में पूछते हैं कि जीरो केल्विन टेंपरेचर पे जो सेमीकंडक्टर मैटेरियल्स है वो किसकी तरह बिहेव करते हैं तो वो बिहेव करेंगे एक परफेक्ट इंसुलेटर
की तरह ठीक है एक इंट्रिसिक सेमीकंडक्टर जीरो केल्विन टेंपरेचर पर एक परफेक्ट इंसुलेटर की तरह काम करेगा यह याद रखना है ठीक अब मान लो कि आपने इसको गर्म करना चालू किया और इसको हीट की फॉर्म में एनर्जी दे रहे हो क्या कर रहे हो हीट की फॉर्म में इसको एनर्जी दे रहे हो मान लो इस इलेक्ट्रॉन को एनर्जी मिली इस इलेक्ट्रॉन को एनर्जी दी हमने एनर्जी मिलने से क्या होगा यह जो इलेक्ट्रॉन है ये यहां से फ्री हो जाएगा ये यहां से ऑर्बिट से बाहर निकल जाएगा तो हमको क्या मिल गया एक फ्री इलेक्ट्रॉन
मिल गया अब क्योंकि यह इलेक्ट्रॉन पहले यहां पर था और यहां से यह बॉन्ड तोड़ के बाहर आया है तो यहां पे खाली स्पेस क्रिएट हो गया खाली जगह बन गई ना यहां पे इलेक्ट्रॉन था पहले यहां से य उठ के बाहर चला गया तो यह कौन है यहां पे यह है प्री इलेक्ट्रॉन और क्योंकि यहां पर खाली जगह क्रिएट हो गई तो उस खाली जगह का भी एक नाम होगा जैसे ही ये इलेक्ट्रॉन यहां से निकल के आएगा तो इस जर्मेनियम एटम के ऊपर पॉजिटिव चार्ज आ जाएगा क्योंकि कोई भी एटम अगर इलेक्ट्रॉन को
लूज करता है तो उसके ऊपर हमेशा पॉजिटिव चार्ज आता है तो जैसे ही इलेक्ट्रॉन निकल के बाहर जाएगा यहां पर क्या आएगा इस एटम के ऊपर पॉजिटिव चार्ज आएगा उस पॉजिटिव चार्ज को हम यहां पे जो खाली स्पेस बनेगा वहां पे अज्यू कर लेंगे यहां पे हम क्या एज्यूम करेंगे खाली स्पेस और उस खाली स्पेस को हम बोलेंगे होल ये जो मैंने ओ से यहां पे डिनोट किया है ये क्या चीज है यहां पे इसको होल बोलते हैं होल मतलब एक पोरली चार्ज पार्टिकल ये एज्यूम किया जाता है सेमीकंडक्टर मैटेरियल्स के नेचर को या उनके
बिहेवियर को समझने के के लिए तो यहां से जैसे ही इलेक्ट्रॉन निकल के गया यहां पर क्या क्रिएट हो गया एक होल क्रिएट हो गया एक खाली जगह क्रिएट हो गई जिसके ऊपर कौन सा चार्ज है पॉजिटिव क्योंकि यह वाला जो एटम है ये इलेक्ट्रॉन लूज करेगा तो इसके ऊपर पॉजिटिव चार्ज आएगा वो पॉजिटिव चार्ज हमने इस खाली जगह पे एज्यूम किया हुआ है ठीक है ऐसे और भी बॉन्ड टूटेंगे क्योंकि आप इस मटेरियल को गर्म करोगे तो हीट की फॉर्म में जिस जिस इलेक्ट्रॉन को एनर्जी मिलती जाएगी वो फ्री होने की कोशिश करेगा तो
यहां पे और भी बॉन्ड टूटते हैं अब मान लो कि ये खाली जगह है यहां पे और यहां से एनर्जी मिलने से यह इलेक्ट्रॉन फ्री हो गया इस इलेक्ट्रॉन को क्या मिली यहां पे एनर्जी मिली और यह इलेक्ट्रॉन यहां से फ्री हो गया अब क्योंकि यहां पे खाली जगह है तो ये इलेक्ट्रॉन वहां पर जाके घूमते घूमते वापस से बॉन्ड बना लेता है तो यह इलेक्ट्रॉन यहां से निकला यहां से निकला और कहां पे चला गया ऐसे घूमते घूमते इस होल के पास चला गया और यहां पे ये वापस से र कॉमिनेशन हो गया पहले
होल क्रिएट हो गया था जब इलेक्ट्रॉन निकल गया था जब वापस आ गया तो वापस बॉन्ड बन जाएगा लेकिन जैसे ही इलेक्ट्रॉन इधर निकल के जाएगा तो होल इसकी जगह क्रिएट हो जाएगा यहां पे क्रिएट होगा ना होल क्योंकि यहां पे खाली स्पेस बन गया तो आप एक चीज नोटिस करो यहां वाला बॉन्ड तो कंप्लीट हो गया लेकिन यहां पर होल क्रिएट हो गया तो हम इसको ऐसे भी समझ सकते हैं कि पहले होल यहां पे था बाद में यहां पे चला गया ऐसे ही मान लो कि यह वाला जो होल है इसको फिल करने
के लिए यह इलेक्ट्रॉन निकल के यहां पे आ जाता है एनर्जी मिलने से ये इलेक्ट्रॉन फ्री हुआ और यह यहां पे आ गया तो होल इसकी जगह चला जाएगा तो एक चीज नोटिस करो कि जिस डायरेक्शन में इलेक्ट्रॉन चल रहा है होल उसके अपोजिट डायरेक्शन में मूव कर रहा है इलेक्ट्रॉन अगर इधर चल के जाएगा तो होल इसके अपोजिट डायरेक्शन में इधर आ जाएगा अगर इलेक्ट्रॉन इधर आएगा नीचे तो होल उसकी जगह ऊपर चला जाएगा समझ में आया तो जिस डायरेक्शन में इलेक्ट्रॉन चलते हैं सेमीकंडक्टर मटेरियल के अंदर जिस डायरेक्शन में फ्री इलेक्ट्रॉन चलेंगे हमेशा
होल उसके अपोजिट डायरेक्शन में मूव करता हुआ दिखाई देगा आपको ठीक है तो होल का जो मोशन है वो हमेशा इलेक्ट्रॉन के मोशन के अपोजिट डायरेक्शन में होता है ठीक अच्छा एक चीज और बताओ मान लो कि नॉर्मल टेंपरेचर पर हम बात कर रहे हैं नॉर्मल टेंपरेचर के ऊपर मान लो हीट की फॉर्म में एनर्जी मिलने से यहां से 10 बॉन्ड टूट गए और 10 बॉन्ड टूटने से कितने इलेक्ट्रॉन फ्री हो गए 10 इलेक्ट्रॉन फ्री होंगे और 10 अगर इलेक्ट्रॉन फ्री होंगे तो 10 खाली स्पेस भी बनेंगे उनको हम क्या बोलेंगे होल बोलेंगे तो 10
होल भी क्रिएट होंगे इसका मतलब इंट्रिसिक सेमीकंडक्टर के अंदर इंट्रिसिक सेमीकंडक्टर के अंदर हीट की फॉर्म में एनर्जी मिलने से जितने इलेक्ट्रॉन फ्री होते हैं उतने ही होल भी क्रिएट होते हैं इसका मतलब दोनों का नंबर क्या होता है बराबर होता है नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन और नंबर ऑफ होल्स ये इंट्रिसिक सेमीकंडक्टर में क्या होंगे इक्वल होंगे बराबर होंगे ये बात समझ में आ गई क्या इंट्रिसिक सेमीकंडक्टर में नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन और नंबर ऑफ होल्स क्या होते हैं हमेशा इक्वल होते हैं ठीक है और जीरो केल्विन टेंपरेचर पे एक इंट्रिसिक सेमीकंडक्टर एक परफेक्ट इंसुलेटर की तरह
काम करता है यह भी याद रखना है ठीक है है साथ में इनका एनर्जी लेवल डायग्राम भी देखो यह है वैलेंसी बैंड और इन वैलेंसी बैंड और यह है कंडक्शन बैंड दोनों के बीच में जो गैप है उसको बोलते हैं एनर्जी गैप सिलिकन के लिए एनर्जी गैप कितना होगा सिलिकन के लिए एनर्जी गैप याद रखेंगे 0 प सॉरी 1.1 इलेक्ट्रॉन वोल्ट के बराबर होगा और जर्मेनियम के लिए यह जो एनर्जी गैप है यह बराबर होगा 0.7 इलेक्ट्रॉन वोल्ट के बराबर तो सिलिकन के अंदर जो एनर्जी बैंड गैप है वो बराबर होता है 1.1 इलेक्ट्रॉन वोल्ट
और जर्मेनियम के अंदर एनर्जी बैंड गैप होता है 0.7 इलेक्ट्रॉन वोल्ट ये जो वैलेंसी बैंड है इसके अंदर बहुत सारे इलेक्ट्रॉन रहेंगे लेकिन अगर किसी भी इलेक्ट्रॉन को एनर्जी दे देते हो आप बाहर से मान लो इस इलेक्ट्रॉन को एनर्जी मिली तो ये इलेक्ट्रॉन यहां से फ्री होके ऊपर चला जाएगा कौन से बैंड में कंडक्शन बैंड में और यहां पे क्या क्रिएट हो जाएगा एक होल क्रिएट हो जाएगा ऐसे ही किसी दूसरे इलेक्ट्रॉन को एनर्जी मिलेगी तो वो भी फ्री होके कंडक्शन बैड में चला जाएगा और यहां पे क्या क्रिएट होगा होल तो होल हमेशा
कहां पर रहेंगे वैलेंसी बैंड में रहेंगे होल कभी भी कंडक्शन बैंड में नहीं जाएगा होल तो तब क्रिएट होगा ना जब कोई इलेक्ट्रॉन फ्री होगा तो एनर्जी मिलने से एनर्जी मिलने से अगर कोई भी इलेक्ट्रॉन फ्री हो रहा है तो व कौन से बैंड में जा रहा है कंडक्शन बैंड में ठीक है और होल कहां पे क्रिएट हो रहा है वैलेंसी बैंड में तो याद रखना है कि होल हमेशा वैलेंसी बैंड में क्रिएट होंगे और इलेक्ट्रॉन हमेशा फ्री इलेक्ट्रॉन हमेशा कंडक्शन बैंड में आपको मिलेंगे ये वाले जो इलेक्ट्रॉन है क्या ये फ्री इलेक्ट्रॉन नहीं है
नहीं ये वाले जो इलेक्ट्रॉन यहां पे दिखा रखे हैं ना डॉट से ये फ्री इलेक्ट्रॉन नहीं है ये तो वो वाले इलेक्ट्रॉन है जो ऑर्बिट के अंदर चक्कर लगा रहे हैं उनको एनर्जी मिलेगी तब वो फ्री होके किसम जाएंगे कंडक्शन बैंड में जाएंगे इस तरीके से आपको याद रखना है तो इंट्रिसिक सेमीकंडक्टर के बारे में समझ में आई सारी चीजें अब ये वाला जो सेमीकंडक्टर है ये टेंपरेचर के ऊपर डिपेंडेंट है एक तरह से क्यों है डिपेंडेंट क्योंकि जब तक आप इसका टेंपरेचर एक नॉर्मल टेंपरेचर नहीं रखोगे तब तक इसमें कुछ इलेक्ट्रॉन फ्री नहीं हो
पाएंगे भा हीट की फॉर्म में इलेक्ट्रॉन को एनर्जी मिलेगी तब जाकर वो फ्री होंगे है ना और तब उसमें इलेक्ट्रॉन और होल जनरेट होंगे तब जाकर वह कंडक्शन कर पाएगा और वह जो डिवाइस है वो प्रॉपर्ली काम कर पाएगा लेकिन अगर आपने इसको लो टेंपरेचर पर रखा इंट्रिसिक सेमीकंडक्टर को तो इसके अंदर बहुत ही कम चार्ज के एरियर डेवलप होंगे इलेक्ट्रॉन और होल बहुत कम रहेंगे और उसकी वजह से यह प्रॉपर्ली काम नहीं कर पाएगा तो यहां पर एक लिमिटेशन आ गई कि जो इंट्रिसिक सेमीकंडक्टर इसको एक प्रॉपर टेंपरेचर पे आपको रखना पड़ेगा तभी इसके
अंदर कुछ इलेक्ट्रॉन और होल फ्री हो पाएंगे और यह जो मटेरियल है यह कंडक्टर की तरह बिहेव कर पाएगा या इससे बने हुए डिवाइसेज प्रॉपर्ली काम कर पाएंगे नहीं तो काम ही नहीं करेगा डिवाइस क्योंकि जब तक इलेक्ट्रॉन होल नहीं होंगे तब तक ये इंसुलेटर की तरह ही काम करता रहेगा तो यह तो काम ही नहीं किया ना डिवाइस तो हमको क्या करना पड़ेगा कोई ऐसा तरीका लगाना पड़ेगा जिससे हम इसके अंदर नॉर्मल टेंपरेचर पे भी बहुत सारे फ्री इलेक्ट्रॉन या होल डेवलप कर पाएं तो तो उसके लिए हम इसमें इंप्योरिटी मिलाते हैं ठीक है
क्या करते हैं इसमें इंप्योरिटी इंप्योरिटी मतलब हर कुछ नहीं मिलाना है कुछ प्रॉपर एलिमेंट्स मिलाएंगे ठीक अब कौन-कौन से एलिमेंट्स मिलाते हैं उस प्रोसेस का नाम क्या होता है वह देखते हैं तो यह जो इंप्योरिटी मिलाने वाली प्रोसेस है इसको हम बोलते हैं डोपिंग क्या बोलते हैं इसको डोपिंग अगर किसी भी इंट्रिसिक सेमीकंडक्टर में आप इंप्योरिटी मिला रहे हो तो उस प्रोसेस का नाम क्या रखा जाएगा डोपिंग डोपिंग कई तरीके से कर सकते हैं जैसे आपको सिलिकन में कुछ इंप्योरिटी एटम मिलाने हैं तो आप सिलिकॉन को पिघला लो उस इंप्योरिटी जो भी आपको मिलानी है
उस एलिमेंट को भी पिघला लो दोनों को आपस में मिक्स कर दो ये एक तरीका हो सकता है डोपिंग का या एक काम ये कर सकते हो कि आप सिलिकन का एक पीस ले लो और जो इंप्योरिटी एटम उसके अंदर एंटर करवाने हैं उन इंप्योरिटी एटम्स की काइनेटिक एनर्जी बढ़ा के उसकी तरफ भेजो तो वो उसके अंदर जाके धस जाएंगे एब्जॉर्ब हो जाएंगे तो उससे भी इंप्योरिटी है वो मिक्स की जा सकती है किसी प्योर इंट्रिसिक सेमीकंडक्टर के अंदर यह भी आप कर सकते हो ठीक है पहला तरीका क्या बताया दोनों को पिघला के मिला
दो आपस में सिलिकन को जो भी इंप्योरिटी एलिमेंट मिलाना है उसको पिघला आपस में मिला दो दूसरा क्या बताया कि आपके पास में एक सिलिकन का पीस होगा और उसकी तरफ आप इंप्योरिटी एटम्स को फास्ट इंप्योरिटी एटम्स को भेजो वो उसके अंदर जा टकरा के अब्जॉर्ब हो जाएंगे तो ये भी एक तरीका हो सकता है इरिटी मिलाने का एक ये भी कर सकते हो कि एक सिलिकन का पीस लो उसके ऊपर जिस एलिमेंट की आपको मिसिंग उसी ि उस वाली पिगल के अब्जॉर्ब हो जाएगी सिलिकॉन के अंदर यह भी आप कर सकते हो तो ऐसे
बहुत सारे तरीके होते हैं तो डोपिंग के तरीके आपको एग्जाम में नहीं पूछते हैं आपको डोपिंग का मतलब पता होना चाहिए कि डोपिंग का मतलब क्या होता है तो डोपिंग का मतलब क्या है डोपिंग का सिंपल सा मतलब है इंप्योरिटी मिक्स करना अगर आप किसी भी प्योर सेमीकंडक्टर के अंदर या इंट्रिसिक सेमीकंडक्टर के अंदर इंप्योरिटी मिलाते हो तो उसी का नाम क्या होगा डोपिंग होगा ठीक है अब डोपिंग करने के बाद में जो सेमीकंडक्टर बनेगा उसको हम बोलते हैं एक्सटिन सिक सेमीकंडक्टर एक्सटिन सिक का मतलब क्या है इंपोर सेमीकंडक्टर आपने क्या किया इसमें इंप्योरिटी मिला
दी तो प्योर सेमीकंडक्टर में यानी कि इंट्रिसिक सेमीकंडक्टर में अगर आप इंप्योरिटी मिलाते हो तब जो सेमीकंडक्टर बनेगा उसका नाम रखा जाएगा एक्सटिन सिक सेमीकंडक्टर ठीक है अब यह जो एक्सटेंस सेमीकंडक्टर है यह दो टाइप के होते हैं एक होता है ए टाइप सेमीकंडक्टर और दूसरा होता है पी टाइप सेमीकंडक्टर अब इनका नाम ऐसा क्यों रखा हुआ है इनमें क्या खास बात होगी वो देखते हैं सबसे पहले हम बात कर रहे हैं एन टाइप सेमीकंडक्टर की किसकी बात कर रहे हैं एन टाइप सेमीकंडक्टर की देखो एन टाइप सेमीकंडक्टर बनाने के लिए जो प्योर सेमीकंडक्टर मटेरियल
होता है जैसे जर्मेनियम है उसके अंदर आपको पेंटावेलेंट इंप्योरिटी मिलानी पड़ेगी यह क्या चीज होती है तो पीरियोडिक टेबल में एक कॉलम होता है उसमें कुछ एलिमेंट्स है ये देखो नाइट्रोजन फास्फोरस आर्सेनिक एंड टी मनी विस्मित आपकी जो पीरियोडिक टेबल होती है ना केमिस्ट्री के अंदर आपने पढ़ा होगा उसमें एक कॉलम होता है जिसमें यह एलिमेंट्स आते हैं नाइट्रोजन फास्फोरस आर्सेनिक एंटीमनी बिस्म और इनको बोला जाता है पेंटावेलेंट इंप्योरिटी क्योंकि इन एटम्स की खास बात य होती है जैसे मान लो आर्सेनिक है तो इसकी खास बात ये होगी कि इसके आउटर मोस्ट ऑर्बिट में पांच
इलेक्ट्रॉन होंगे कितने इलेक्ट्रॉन होंगे पांच इसलिए इसको बोलते हैं पेंटावेलेंट इंप्योरिटी अब यह नाम आपको याद रखने पड़ेंगे क्योंकि इनमें से कोई भी एलिमेंट का नाम देके आपको पूछ सकता है कि हम प्योर सेमीकंडक्टर में ये एलिमेंट मिलाएंगे तो कौन से टाइप का सेमीकंडक्टर बनेगा तो अगर आप पेंटावेलेंट इंप्योरिटी मिलाते हो जिसमें जो एटम का आउटर मोस्ट ऑर्बिट है अगर उसमें पांच इलेक्ट्रॉन है इसलिए इसको पेंटा पेंटा मतलब फाइव होता है तो पेंटावेलेंट इंप्योरिटी मिलाने से क्या होगा यहां पे एक्स्ट्रा इलेक्ट्रॉन मिलेंगे कैसे मिलेंगे वो समझना जैसे आपने आर्सेनिक मिलाया प्योर सेमीकंडक्टर में हम क्या
मिला रहे हैं आर्सेनिक अब इससे क्या फर्क पड़ेगा वो देखो ये जितने भी जर्मेनियम एटम्स हैं इनके पास तो आउटर मोस्ट ऑर्बिट में कितने इलेक्ट्रॉन हैं चार इलेक्ट्रोंस लेकिन जो आर्सेनिक की इंप्योरिटी आपने मिला रखी है यहां पे ये आर्सेनिक एटम है तो इसके आउटर मस्ट ऑर्बिट में कितने इलेक्ट्रॉन हैं इसमें है पांच तो ये क्या करेगा अपने आसपास वाले चार जर्मेनियम एटम्स के साथ में तो कोवलेंको एटम है इसको भी तो अपने आउटर मोस्ट ऑर्बिट में एट इलेक्ट्रॉन कंप्लीट करने हैं जैसे इन जर्मेनियम एटम्स को करने हैं तो ये आर्सेनिक एटम क्या करेगा अपने
आसपास वाले चार जर्मेनियम एटम्स के साथ में बनाएगा कोवलेंको पास में एक्स्ट्रा है यह उसको डोनेट कर देगा यह उसको फ्री कर देगा एक तरह से और वो जो इलेक्ट्रॉन है वो फ्री होके एज ए फ्री इलेक्ट्रॉन इस मटेरियल के अंदर घूमता रहेगा तो हर एक इंप्योरिटी एटम क्या प्रोवाइड कर रहा है हमको एक फ्री इलेक्ट्रॉन प्रोवाइड करवा रहा है यहां पे ठीक है बाकी जो जर्मेनियम एटम्स है ये अपने आसपास वाले जर्मेनियम एटम्स के साथ में या अगर कोई आर्सेनिक एटम है तो उसके साथ में कोवलेंको बना लेंगे और इस तरीके से ये पूरा
पूरा जो क्रिस्टल होगा स्टेबल कंडीशन में रहेगा और यह जितने भी आप इंप्योरिटी एटम इसमें मिलाओ जैसे आर्सेनिक मिलाया है तो अगर आपने 50 आर्सेनिक के एटम्स इसमें मिला दोगे तो 50 आर्सेनिक के एटम्स क्या करेंगे 50 इलेक्ट्रॉन डोनेट करेंगे इसलिए इसका एक और नाम है डोनर इंप्योरिटी भी बोलते हैं इसको यह जो है ना पेंटावेलेंट इंप्योरिटी इसी का दूसरा नाम क्या है डोनर इंप्योरिटी क्यों क्योंकि ये इलेक्ट्रॉन को डोनेट करने का काम कर रहा है इसलिए इसका नाम क्या रख दिया डोनर इंप्योरिटी रख दिया ठीक है तो जो डोनर इंप्योरिटी है उसमें ये वाले
एलिमेंट्स काउंट होंगे जो इलेक्ट्रॉन को डोनेट करेंगे ठीक है नाम याद कर लेना सारे नाइट्रोजन फास्फोरस आर्सेनिक एंटीमनी बसमत इनमें से कोई ना कोई आप एलिमेंट मिलाओ ग इसमें ठीक है अब मान लो कि आपने 50 आर्सेनिक के एटम्स इसमें मिला दिए तो कितने आपको एक्स्ट्रा इलेक्ट्रॉन मिल गए नॉर्मल कंडीशन से 50 एक्स्ट्रा इलेक्ट्रॉन मिल गए ना मान लो कि इसके अंदर 50 इलेक्ट्रॉन आपको एक्स्ट्रा मिल गए ठीक है अच्छा मान लो नॉर्मल टेंपरेचर के ऊपर आपने इसको रखा खा हुआ है तो उसमें 10 बॉन्ड भी टूट गए हीट की फॉर्म में एनर्जी मिलने से
10 बॉन्ड टूट गए जिससे 10 इलेक्ट्रॉन और फ्री हो गए तो 10 इलेक्ट्रॉन और आ गए अपने पास साथ में 10 होल भी क्रिएट होंगे है ना 10 बॉन्ड टूटेंगे तो 10 इलेक्ट्रॉन और 10 होल ये भी क्रिएट होंगे यहां पे ठीक है अब टोटल नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन कितने यहां पे 60 हो गए और टोटल नंबर ऑफ होल्स कितने यहां पे 10 दोनों में से ज्यादा कौन सा है इलेक्ट्रॉन ज्यादा है तो इलेक्ट्रॉन को इसमें बोला जाता है मेजोरिटी चार्ज कैरियर क्या बोला जाता है मेजॉरिटी चार्ज कैरियर तो जो ए टाइप सेमीकंडक्टर है इसको एन
टाइप सेमीकंडक्टर इसलिए बोलते हैं क्योंकि इसमें बहुत सारे एक्स्ट्रा फ्री इलेक्ट्रॉन होते हैं जिनके ऊपर नेगेटिव चार्ज होता है और नेगेटिव चार्ज को बताने के लिए यहां पे n का सिंबल यूज किया जाता है n मतलब नेगेटिव तो ये नेगेटिव टाइप एक तरह से सेमीकंडक्टर बोला जाता है वैसे इसपे नेगेटिव चार्ज नहीं होगा आप ये मत समझना कि सेमीकंडक्टर पर नेगेटिव चार्ज आ जाएगा ऐसा नहीं है क्योंकि जो आर्सेनिक एटम है वो तो इलेक्ट्रिकली न्यूट्रल है वो तो एक इलेक्ट्रॉन डोनेट कर रहा है तो इसके ऊपर पॉजिटिव चार्ज भी आएगा यहां पे इस इलेक्ट्रॉन इस
आर्सेनिक एटम के ऊपर क्या आएगा पॉजिटिव चार्ज ये आयन में कन्वर्ट हो जाएगा पॉजिटिव आयन में तो अगर ये इसके ऊपर पॉजिटिव चार्ज आएगा तो वो इस इलेक्ट्रॉन के नेगेटिव चार्ज से कैंसिल हो जाएगा तो ओवरऑल तो चार्ज जीरो ही बनेगा सेमीकंडक्टर जो होते हैं ना उन परे कोई चार्ज नहीं होता ठीक तो यहां पे हमने क्या देखा कि जो इलेक्ट्रॉन है वो ज्यादा है और होल की कंपैरिजन में इसलिए इलेक्ट्रॉन को बोला जाएगा मेजोरिटी चार्ज कैरियर और हो होल्स को बोला जाएगा इसमें माइनॉरिटी चार्ज कैरियर्स ठीक है इसमें इलेक्ट्रॉन ज्यादा होते हैं होल कम
होते हैं अब इसका जो एनर्जी लेवल डायग्राम है वो भी बनाते हैं देखो यह है वैलेंसी बैंड ऊपर है कंडक्शन बैंड ठीक और यह जो वैलेंसी बैंड है उसकी एनर्जी इतनी होगी जो कंडक्शन बैंड है उसकी एनर्जी इतनी होगी इनके बीच में एक गैप होगा जिसको हम क्या बोलते हैं एनर्जी बैंड गैप बोलते हैं ठीक है अब क्योंकि इंप्योरिटी एटम्स यहां पर क्या करते जा रहे हैं जो इंप्योरिटी एटम्स मिला रहे हो वो क्या क्या कर रहे हैं एक्स्ट्रा इलेक्ट्रॉन प्रोवाइड कर रहे हैं यहां पे तो वो जो फ्री इलेक्ट्रॉन है वो कहां पर रहेंगे
वो कंडक्शन बैंड में रहेंगे और उनकी एनर्जी कंडक्शन बेंड के जो इलेक्ट्रॉन है उनके आसपास रहेगी तो यहां पर एक एनर्जी लेवल और दिखाना पड़ता है अपन को और उसको हम बोलते हैं डोनर एनर्जी लेवल जो इस कंडक्शन बैंड के जस्ट नीचे होगा यहां पे यहां पर एक लेवल दिखाएंगे और इसको बोलते हैं डोनर एनर्जी लेवल जो डोनर एटम्स है उनके जो फ्री इलेक्ट्रॉन है उनका एनर्जी लेवल हमने यहां पर दिखाया हुआ है और यह इससे थोड़ा ही नीचे होता है मतलब यह 0.045 इलेक्ट्रॉन वोल्ट करीब-करीब इतना डिफरेंस होगा इनके बीच में यह जो कंडक्शन
बैंड की इलेक्ट्रॉन है और जो डोनर एनर्जी लेवल है है ना इनके बीच में गैप कितना है 0.045 इलेक्ट्रॉन वोल्ट का गैप होगा करीब-करीब इतना गैप होता है तो ये चीज याद रखनी है कि जब भी आपको एनर्जी लेवल डायग्राम पूछे किसका एन टाइप सेमीकंडक्टर का तो उसमें ये एक एनर्जी लेवल और शो करते हैं बीच में जो कंडक्शन बैंड के ज्यादा करीब होगा क्योंकि फ्री इलेक्ट्रॉन कहां पे रहते हैं कंडक्शन बैंड में है ना जो भी इलेक्ट्रॉन फ्री होंगे वो कहां पर रहेंगे कंडक्शन बैंड में रहेंगे तो कंडक्शन बैंड के जो इलेक्ट्रॉन हैं उनका
जो एनर्जी लेवल होता है यह वाला उसी के आसपास इस डोनर एनर्जी लेवल को दिखाना होता है तो यह भी एक बार क्वेश्चन पूछा हुआ है कि जो डोनर एनर्जी लेवल है वो किसके ज्यादा करीब होगा वैलेंसी बैंड के या कंडक्शन बैंड के कंडक्शन बैंड के ज्यादा करीब होगा यह भी याद रखना एकदम बीचोबीच मत बना देना इसको कहीं बीच में बना दो या इसके ज्यादा करीब बना दो वो गलत डायग्राम है हमेशा डोनर एनर्जी लेवल को दिखाया जाएगा कंडक्शन बैंड के जस्ट नीचे ठीक है तो एन टाइप सेमीकंडक्टर बनाने के लिए क्या करना है
आपको पेंटावेलेंट इंप्योरिटी मिलानी है पेंटावेलेंट इंप्योरिटी कौन-कौन सी होती है नाइट्रोजन फास्फोरस आर्सेनिक एंटीमनी विस्मित और इसको मिलाने से क्या होगा एक्स्ट्रा इलेक्ट्रॉन ये एटम्स प्रोवाइड करेंगे है ना इसलिए इनको डोनर इंप्योरिटी भी बोला जाता है है ना ये सारे पॉइंट याद रखने हैं और नॉर्मल टेंपरेचर पे क्योंकि खूब सारे इलेक्ट्रॉन इनके अंदर फ्री इलेक्ट्रॉन अवेलेबल होते हैं इसलिए ये अच्छे से कंडक्शन कर पाते हैं तो इंट्रिसिक सेमीकंडक्टर से ये बेटर हो गए फिर इसमें जो डोनर एनर्जी लेवल है उसको कहां पर दिखाना है उसको कंडक्शन बैंड के जस्ट नीचे दिखाना है 0.045 इलेक्ट्रॉन वोल्ट
के डिफरेंस पे और यह क्या चीज यहां पे बता रखी है यह है नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन ज्यादा होंगे नंबर ऑफ होल्स से एन टाइप सेमीकंडक्टर के अंदर इसका मतलब इलेक्ट्रॉन को हम इसमें बोलेंगे मेजोरिटी चार्ज कैरियर और होल्स को हम इसमें बोलेंगे माइनॉरिटी चार्ज कैरियर्स यह बातें आपको ध्यान रखनी है इसमें आया समझ में क्लियर है एकदम ठीक है नेक्स्ट है इसके अंदर एक्सटेंस सेमीकंडक्टर का दूसरा टाइप जो कि होता है पी टाइप सेमीकंडक्टर कौन सा सेमीकंडक्टर पी टाइप सेमीकंडक्टर इसको पॉजिटिव टाइप सेमीकंडक्टर बोलते हैं एक तरह से शॉर्ट में इसको पी टाइप सेमीकंडक्टर बोलेंगे
अब यह कब बनेगा जब आप किसी भी प्योर सिलिकॉन के अंदर या जर्मेनियम के अंदर यानी कि इंट्रिसिक सेमीकंडक्टर के अंदर अगर आप ट्राई वेलेंट इंप्योरिटी मिला दोगे अगर आप ट्राई वेलेंट इंप्योरिटी मिलाते हो हो तो उस कंडीशन में जो सेमीकंडक्टर बनता है उसको हम बोलते हैं पी टाइप सेमीकंडक्टर अब ये ट्राई वेलेंट इंप्योरिटी कौन सी होती है कौन सी इंप्योरिटी मिलानी है ट्रावटॉक इंप्योरिटी में कौन-कौन से एलिमेंट्स आएंगे इसमें एलिमेंट आते हैं बोरनन एलुमिनियम गैलियम इंडियम थैलियम ठीक है ये वाले एलिमेंट्स अगर आप मिलाते हो किसमें प्योर सेमीकंडक्टर में तो जो सेमीकंडक्टर मटेरियल बनेगा
उसको हम बोलेंगे पी टाइप सेमी कंडक्टर ऐसा क्यों देखो ये जितने भी एलिमेंट्स हैं इनकी खास बात ये होती है कि इनके आउटर मोस्ट ऑर्बिट में तीन इलेक्ट्रॉन होते हैं कितने इलेक्ट्रॉन होंगे जैसे मान लो कि एलुमिनियम लिया आपने तो इसके आउटर मस्ट ऑर्बिट में तीन इलेक्ट्रॉन पाए जाएंगे इसलिए इसको ट्रावटॉक आउटर मोस्ट ऑर्बिट में तीन इलेक्ट्रॉन पाए जाएंगे उनको हम बोलेंगे ट्रा लेंट इंप्योरिटी ठीक है जी अब मान लो कि आपने यह जो प्योर जर्मेनियम का एक पीस था इसके अंदर कुछ एलुमिनियम एटम मिला दिए अब इससे क्या फर्क पड़ेगा व समझते हैं यह
जो एलुमिनियम एटम है इसके आउटर मस्ट ऑर्बिट में कितने इलेक्ट्रॉन है तीन इलेक्ट्रॉन है जबकि जो सेमीकंडक्टर एलिमेंट होते हैं जैसे सेमीकंडक्टर मटेरियल होते हैं सिलिकन या जर्मेनियम उनकी खास बात यह होती है कि उनके आउटर मस्ट ऑर्बिट में चार इलेक्ट्रॉन होते हैं कितने इलेक्ट्रॉन होंगे चार इलेक्ट्रॉन होंगे यह जो जर्मेनियम के एटम्स हैं इन सारे एटम्स के बीच में इन सारे एटम्स के आउटर मोस्ट ऑर्बिट के अंदर फोर इलेक्ट्रॉन पाए जाएंगे ठीक है अब कोई भी एटम तभी स्टेबल रहता है जब उसके आउटर मस्ट ऑर्बिट में एट इलेक्ट्रॉन हो तो हर एक जो जर्मेनियम
एटम है वह क्या करेगा अपने आसपास वाले चार एटम के साथ में कोवलेंको करेगा जैसे यह वाला एलुमिनियम एटम है यह भी यही कोशिश कर रहा होगा कि इसके आउटर मोस्ट ऑर्बिट में एट इलेक्ट्रॉन हो जाए और ये जो जर्मेनियम एटम्स है ये भी यही काम कर रहे होंगे तो जैसे ये एलुमिनियम एटम है ये क्या करेगा अपने आसपास वाले तीन जर्मेनियम एटम के साथ में तो कोवलेंको पास कमी रह गई तो ये जो फोर्थ बॉन्ड है ये कंप्लीट नहीं बनेगा यहां पे खाली जगह रह गई और इस खाली जगह को ही हम क्या बोलते
हैं होल बोलते हैं तो यहां पे एक होल क्रिएट हो गया बाकी जो जर्मेनियम एटम्स है ये अपने आसपास वाले चार जर्मेनियम एटम्स के साथ में कोवलेंको बना लेंगे और स्टेबल हो जाएंगे लेकिन ये जो एलुमिनियम एटम है यह इसके पास एक इलेक्ट्रॉन की कमी होने से यह एक बॉन्ड कंप्लीट नहीं कर पाया बाकी तीन बॉन्ड इसने कंप्लीट कर लिए तो यहां पर खाली जगह बन गई और इस खाली जगह का नाम भी हमने क्या दिया यहां पे होल नाम दिया इसको तो आप देख रहे हो कि जितने भी इंप्योरिटी एटम इसके अंदर आप मिलाते
जाओगे जितने भी इंप्योरिटी एटम आप प्योर सेमीकंडक्टर के अंदर मिलाते जाओगे उतने ही होल क्रिएट होते जाएंगे अगर आप जैसे ये ट्राइवल इंप्योरिटी है इस ट्राइट पटी के अगर मान लो 50 एटम इसके अंदर मिला देते हो तो हर एक एटम क्या करेगा एक होल क्रिएट करेगा क्या क्रिएट करेगा एक होल क्रिएट करेगा तो यहां पे 50 अगर इंप्योरिटी एटम मिलाए हैं तो 50 होल क्रिएट हो जाएंगे क्या क्रिएट होंगे 50 होल यहां पे क्रिएट हो जाएंगे अब मान लो कि नॉर्मल टेंपरेचर की हम बात करते हैं और नॉर्मल टेंपरेचर पे इस सेमीकंडक्टर मटेरियल के
अंदर कुछ बॉन्ड टूट गए कुछ बॉन्ड टूटने से क्या होगा इलेक्ट्रॉन और होल पेयर में जनरेट होंगे जैसे मान लो कि इस इलेक्ट्रॉन को एनर्जी मिली हीट की फॉर्म में नॉर्मल टेंपरेचर पे तो ये इलेक्ट्रॉन यहां से फ्री हो जाएगा और इसकी जगह क्या क्रिएट होगा एक होल क्रिएट हो जाएगा तो यहां पे कुछ होल तो पहले से ही थे और कुछ इलेक्ट्रॉन होल पेयर और जनरेट होंगे मान लो इसके अंदर 50 इंप्योरिटी एटम मिलाए थे तो 50 होल क्रिएट हो गए यहां पे साथ में मान लो 10 बॉन्ड टूट गए नॉर्मल टेंपरेचर के ऊपर
जिसकी वजह से 10 इलेक्ट्रॉन और 10 होल और क्रिएट हो गए यहां पे ठीक है अब ये जो 10 इलेक्ट्रॉन और 10 होल है ये तो टेंपरेचर की वजह से जनरेट हो रहे हैं यहां पे लेकिन ये वाले जो 50 होल है ये तो इंप्योरिटी मिलाने से जनरेट हुए अब इसके अंदर अगर टोटल देखा जाए तो नंबर ऑफ होल्स कितने हैं 60 नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन कितने हैं 10 तो यहां पे जो मेजोरिटी चार्ज कैरियर होगा जिसकी वजह से यहां पे इस मटेरियल के अंदर करंट फ्लो होगा वो होगा होल्स क्योंकि इसमें ज्यादा नंबर में कौन
है होल्स ज्यादा है यहां पे इलेक्ट्रॉन की कंपैरिजन में तो हम बोलेंगे कि जो p टाइप सेमीकंडक्टर है उसके अंदर नंबर ऑफ होल्स ज्यादा होते हैं नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन की कंपेरिजन में ये एक मेजर डिफरेंस है यहां पे जो एन टाइप सेमीकंडक्टर हमने पहले पढ़ा था उसके अंदर क्या होता है नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन ज्यादा होते हैं और नंबर ऑफ होल्स कम होते हैं नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन क्या होते हैं ज्यादा होते हैं फ्री इलेक्ट्रॉन ज्यादा होते हैं तो मेजॉरिटी चार्ज के रियर किसको माना जाता है इलेक्ट्रॉन को और इलेक्ट्रॉन के ऊपर नेगेटिव चार्ज होता है इसलिए
उस सेमीकंडक्टर को हम बोलते हैं ए टाइप सेमीकंडक्टर जबकि यहां पे आप क्या देख रहे हो यहां पे हर एक इंप्योरिटी एटम कुछ एक्स्ट्रा होल क्रिएट कर रहा है और होल के ऊपर पॉजिटिव चार्ज हम कंसीडर करते हैं अब क्योंकि यहां पर मेजोरिटी चार्ज कैरियर कौन है होल है इसलिए होल के ऊपर पॉजिटिव चार्ज होने की वजह से इसको बोला जाएगा पॉजिटिव टाइप सेमीकंडक्टर या फिर पी टाइप सेमीकंडक्टर ठीक है यह बात इंपॉर्टेंट है यहां पर ध्यान रखनी है कि जो पी टाइप सेमीकंडक्टर है उसके अंदर क्या होगा मेजोरिटी चार्ज कैरियर कौन होगा होल और
इलेक्ट्रॉन क्या होंगे माइनॉरिटी चार्ज कैरियर जो नंबर में कम है उनको क्या बोलते हैं माइनॉरिटी चार्ज कैरियर जो नंबर में ज्यादा होते हैं उनको क्या बोलते हैं मेजोरिटी चार्ज कैरियर्स ठीक है इतनी बात क्लियर है एकदम एक चीज और देख के बताओ कि यहां पर जो हर एक इंप्योरिटी एटम है यह इस मटेरियल से इलेक्ट्रॉन लेने की कोशिश करेगा इलेक्ट्रॉन देने की कोशिश करेगा यह जो एल्युमिनियम है यह इस मटेरियल से इलेक्ट्रॉन लेने की कोशिश करेगा या इलेक्ट्रॉन देने की कोशिश करेगा सोच के बताओ देखो यहां पे जो एलुमिनियम एटम है वोह क्या क्रिएट कर
रहा है एक होल क्रिएट कर रहा है और होल की टेंडेंसी होती है हमेशा इलेक्ट्रॉन को लेने की यानी कि यह जो एलुमिनियम एटम है क्योंकि इसकी पास एक इलेक्ट्रॉन की यहां पर कमी है अगर ये इलेक्ट्रॉन यहां पर आ जाता तो इसके आउटर मोस्ट ऑर्बिट में एट इलेक्ट्रॉन कंप्लीट हो जाते और यह इसका ऑक्टेल कंप्लीट होने से यह स्टेबल कंडीशन में आ जाता लेकिन अभी यह स्टेबल नहीं है इसको एक इलेक्ट्रॉन और चाहिए तो यह कहीं से भी एक इलेक्ट्रॉन लेने की कोशिश करेगा इसलिए हम इसको एक्सेप्टर इंप्योरिटी भी बोलते हैं इस ट्राइवल इंप्योरिटी
का दूसरा नाम क्या है एक्सेप्टर इंप्योरिटी क्या बोलेंगे इसको एक्सेप्टर इंप्योरिटी बोलेंगे ठीक है अब इसके एनर्जी लेवल को यहां पे दिखाएंगे देखो ये यहां पे हमने दिखाया हुआ है वैलेंसी बैंड और ये यहां पे दिखाया हुआ है कंडक्शन बैंड और इनके बीच में जो गैप होता है उसको हम बोलते हैं एनर्जी बैंड गप क्या बोलेंगे इसको एनर्जी बैड गप बोलेंगे ठीक है जी अब आपने ये जो इंप्योरिटी एटम मिलाए हैं जिनको हम एक्सेप्टर इंप्योरिटी भी बोल रहे हैं इसका भी एक एनर्जी लेवल यहां पे शो करेंगे देखो आपको याद रखना है कि जो इलेक्ट्रॉन
है फ्री इलेक्ट्रॉन वो हमेशा कंडक्शन बैंड में रहते हैं और जब भी इलेक्ट्रॉन फ्री होके वैलेंसी बैंड से कंडक्शन बैंड में जाता है तो अपने पीछे एक होल क्रिएट करता है वो जैसे ये कुछ इलेक्ट्रॉन है वैलेंसी बैंड के अंदर मान लो किसी इलेक्ट्रॉन को एनर्जी मिली और ये किसमें चला गया कंडक्शन बैंड में चला गया तो ये इलेक्ट्रॉन जब यहां पे जाएगा तो इसकी जगह क्या क्रिएट हो जाएगा यहां पे होल क्रिएट होगा तो होल हमेशा कहां पे दिखेंगे आपको वैलेंसी बैंड के अंदर दिखेंगे और फ्री इलेक्ट्रॉन हमेशा किसमें दिखेंगे आपको कंडक्शन बैंड में
दिखेंगे ये चीज याद रखनी है फ्री इलेक्ट्रॉन हमेशा कहां पे होंगे कंडक्शन बैंड में और होल्स कहां पे होंगे हमेशा वैलेंसी बैंड में यहां पे ये जो इंप्योरिटी एटम्स है ये क्या क्रिएट कर रहे हैं यहां पे होल्स क्रिएट कर रहे हैं इंप्योरिटी एटम्स क्या क्रिएट कर रहे हैं यहां पे होल्स क्रिएट कर रहे हैं और होल्स कहां पे रहते हैं वैलेंसी बैंड में रहते हैं तो हम इन होल्स का एक एनर्जी लेवल यहां पे शो करेंगे या जो एक्सेप्टर इंप्योरिटी आपने मिलाई है ट्रावटॉक के पास में ही क्यों क्योंकि यहां पे हर एक इंप्योरिटी
एटम क्या क्रिएट कर रहा है एक होल क्रिएट कर रहा है और होल का जो एनर्जी लेवल है वो वैलेंसी बैंड की जो एनर्जी होगी उसके आसपास कुछ होगा इसलिए यहां पे दिखाएंगे तो इसको बोलते हैं एक्सेप्टर एनर्जी लेवल और ये जो वैलेंसी बैंड है और जो एक्सेप्टर एनर्जी लेवल है इनके बीच में ये जो गैप है ये करीब-करीब 0.01 इलेक्ट्रॉन वोल्ट से लेके 0.045 इलेक्ट्रॉन वोल्ट के आसपास होता है ठीक है यहां तक ये एनर्जी बैंड गप ये या एनर्जी का गैप हो सकता है ठीक है तो यह कौन सा लेवल यहां पर दिखाया
हमने एक्सेप्टर एनर्जी लेवल कई बार तो ये क्वेश्चन पूछा हुआ है बोर्ड एग्जाम के अंदर कि जो एक्सेप्टर एनर्जी लेवल है वो कौन से वाले बैंड के ज्यादा पास होगा तो ये हमेशा वैलेंसी बैंड के ज्यादा पास होता है और कंडक्शन बैंड से दूर होता है जबकि एन टाइप सेमीकंडक्टर के अंदर हमने ये देखा था कि जो एन टाइप सेमीकंडक्टर है उसमें हर एक इंप्योरिटी एटम एक इलेक्ट्रॉन डोनेट करता है सेमीकंडक्टर मटेरियल के अंदर इसलिए उसको डोनर इंप्योरिटी भी बोलते हैं और वो जो नर एनर्जी लेवल है वह हमेशा दिखाया जाता है कंडक्शन बैंड के
पास में तो ये इनमें डिफरेंस है जो आपको याद रखना है जो एन टाइप सेमीकंडक्टर है उसके अंदर जो डोनर एनर्जी लेवल होगा वह हमेशा कंडक्शन बैंड के पास होगा और कंडक्शन बैंड के जस्ट नीचे होगा मतलब और कितना दूर होगा इससे जो गैप होगा वो होगा 0.045 इलेक्ट्रॉन वोल्ट के बराबर और जब आप प टाइप सेमीकंडक्टर को पढ़ते हो तो इसमें हमको यह पता है कि जब इंप्योरिटी मिलाएंगे तो यह होल क्रिएट करेगा और ल क्रिएट करेगा तो इसकी इलेक्ट्रॉन को लेने की टेंडेंसी रहेगी हमेशा इसलिए इसको एक्सेप्टर इंप्योरिटी भी बोलते हैं और इसका
जो एनर्जी लेवल है वो हमेशा वैलेंसी बैंड के जस्ट ऊपर दिखाया जाता है ठीक है ये इसका कारण होता है ठीक है तो ये हो गया अपना प टाइप सेमीकंडक्टर ठीक आया समझ में देख लो इसमें अगर कोई भी डाउट है तो इसके बाद में नेक्स्ट है फिर इंट्रिसिक और एक्सटेंस सेमीकंडक्टर में कंपेरिजन मतलब इनमें क्या डिफरेंस है ये हम स्टडी करेंगे अब जो इंट्रिसिक सेमीकंडक्टर है और जो एक्सटेंस सेमीकंडक्टर है इनमें क्या-क्या मेन मेन डिफरेंसेस है देखो जो इंट्रिसिक सेमीकंडक्टर है यह एक प्योर सेमीकंडक्टर होता है क्या होता है प्योर सेमीकंडक्टर जैसे प्योर सिलिकन
का एक पीस ले लिया आपने या प्योर जर्मेनियम का एक पीस ले लिया तो उसको हम बोलेंगे इंट्रस इंट्रिसिक सेमीकंडक्टर क्या बोलेंगे उसको इंट्रिसिक सेमीकंडक्टर बोलेंगे लेकिन अगर आप उस प्योर सेमीकंडक्टर में कुछ इंप्योरिटी मिला देते हो कौन स टाइप की या तो ट्राई वेलेंट या पेंटावेलेंट तो उस कंडीशन में वह एक्सटिन सिक सेमीकंडक्टर बन जाएगा तो यह क्या है एक्स्ट्रिसिक सेमीकंडक्टर इंपोर है इंपोर सेमीकंडक्टर होता है य यह क्या होगा इंपोर होगा और इसमें अगर आप प टाइप सेमीकंडक्टर बनाना चाहते हो कौन सा सेमीकंडक्टर पी टाइप तो इसके लिए आपको इंप्योरिटी मिलानी पड़ेगी बोरनन
मिनियम गैलियम इंडियम लियम वाले एलिमेंट्स मिलाने पड़ेंगे इनको हम बोलते हैं ट्रावटॉक संक् बनाना चाहते हो जो एक्सटेंस सेमीकंडक्टर है उसके दो टाइप होते हैं पी टाइप और एन टाइप तो अगर आपको एन टाइप सेमीकंडक्टर बनाना है तो इसके लिए आपको इंप्योरिटी मिलानी पड़ेगी नाइट्रोजन फास्फोरस आर्सेनिक एंटीमनी और बि स्मिथ यह वाली इंप्योरिटी मिलानी पड़ेगी इसको हम पेंटावेलेंट इंप्योरिटी बोलते हैं ठीक है तो इस तरीके से होगा अब ये जो इंट्रिसिक सेमीकंडक्टर है इसकी कंडक्टिविटी कम होती है लो कंडक्टिविटी होती है ऐसा क्यों क्योंकि जो इंट्रिसिक सेमीकंडक्टर है उसमें बहुत कम चार्ज कैरियर्स होते हैं
इलेक्ट्रॉन और होल बहुत कम होते हैं क्योंकि जब नॉर्मल टेंपरेचर प आप इनको देखोगे तो कुछ बॉन्ड टूटेंगे जिनकी वजह से कुछ इलेक्ट्रॉन और कुछ होल आपको मिलेंगे तो इसलिए इनकी जो कंडक्टिविटी है वो क्या रहेगी लो रहेगी जबकि अगर आप एक्स्ट्रिसिक सेमीकंडक्टर को देखते हो तो क्योंकि इसमें आप इंप्योरिटी एटम मिलाते हो और हर एक इंप्योरिटी एटम या तो इलेक्ट्रॉन प्रोवाइड करवाएगा या होल प्रोवाइड करवाएगा तो इसमें चार्ज कैरियर्स का नंबर बढ़ जाता है जिससे इनकी कंडक्टिविटी बढ़ जाएगी तो हाई कंडक्टिविटी ठीक है इसके अलावा एक पॉइंट यह भी याद रखना है कि जो
इंट्रिसिक सेमीकंडक्टर है ये टेंपरेचर के ऊपर डिपेंड करता है टेंपरेचर अगर आप 0 केल्विन रखोगे तो जो इंट्रिसिक सेमीकंडक्टर है वो इंसुलेटर की तरह काम करेगा ये कंडक्शन करेगा ही नहीं तो ये क्या है टेंपरेचर डिपेंडेंट है ये ठीक है टेंपरेचर डिपेंडेंट है जबकि जो एक्सेंस सेमीकंडक्टर होता है यह टेंपरेचर के ऊपर डिपेंड नहीं करता क्यों क्योंकि इसमें हम जब इंप्योरिटी एटम मिला देते हैं तो ये एक्स्ट्रा इलेक्ट्रॉन और होल प्रोवाइड करवा देते हैं जिस जिसकी वजह से इनके अंदर हमेशा कंडक्शन हो सकता है टेंपरेचर के ऊपर ये डिपेंड नहीं रहेंगे तो यह हम बोल
सकते हैं डज नॉट डिपेंड ऑन टेंपरेचर कौन टेंपरेचर के ऊपर डिपेंड नहीं करेगा यह जो एक्सटेंस सेमीकंडक्टर है ये टेंपरेचर के ऊपर डिपेंड नहीं कर करेगा जबकि जो इंट्रिसिक सेमीकंडक्टर है यह हमेशा टेंपरेचर के ऊपर डिपेंड करता है इसके अलावा एक डिफरेंस यह भी याद रखना है कि जो इंट्रिसिक सेमीकंडक्टर है इसके अंदर नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन और नंबर ऑफ होल्स हमेशा बराबर होते हैं जब भी इंट्रिसिक सेमीकंडक्टर के अंदर कुछ बॉन्ड टूटते हैं तो जितने इलेक्ट्रॉन फ्री होते हैं उतने ही होल क्रिएट होते हैं तो नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन और नंबर ऑफ होल्स इसके अंदर क्या
दिखेंगे आपको बराबर दिखेंगे जबकि जो एक्सटेंस सेमीकंडक्टर है इसमें हमने देखा था कि अगर हम पी टाइप से पी टाइप सेमीकंडक्टर की बात करें कौन सा वाला पी टाइप सेमीकंडक्टर तो इसको पी टाइप सेमीकंडक्टर इसलिए बोला जाता है क्योंकि इसमें पॉजिटिव टाइप के चार्ज के रियर ज्यादा होते हैं यानी कि होल ज्यादा होते हैं नंबर ऑफ होल क्या होंगे ज्यादा और नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन क्या होंगे कंपैरेटिव कम होंगे तो नंबर ऑफ होल्स ज्यादा होने से इनको मेजोरिटी चार्ज केरियर बोला जाएगा पी टाइप सेमीकंडक्टर में और इलेक्ट्रॉन को बोला जाएगा माइनॉरिटी चार्ज कैरियर जबकि एन टाइप
सेमीकंडक्टर अगर आपने बनाया हुआ है तो उसके अंदर क्या होगा इसके अंदर नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन ज्यादा होंगे और नंबर ऑफ होल्स कम रहेंगे ठीक है कौन ज्यादा होगा इसके अंदर नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन ज्यादा होंगे इसलिए इसको क्योंकि इलेक्ट्रॉन पर नेगेटिव चार्ज होता है इसलिए इसको ए टाइप सेमीकंडक्टर बोला जाता है तो मेजोरिटी चार्ज कैरियर कौन होगा ए टाइप सेमीकंडक्टर में फी इलेक्ट्रॉन और माइनॉरिटी चार्ज कैरियर कौन होगा होल्स होंगे ठीक है ये चीज समझ में आई क्या तो ये सारे पॉइंट्स आपको याद करने हैं ये मेन मेन डिफरेंसेस है इंट्रिसिक और एक्सटेंस सेमीकंडक्टर के अंदर
यह डिफरेंस आपको एग्जाम में पूछे जाते हैं तो ये इंपॉर्टेंट है काफी ठीक है आगे बढ़ते हैं नेक्स्ट है फिर एन टाइप सेमीकंडक्टर और पी टाइप सेमीकंडक्टर में डिफरेंस अब इनमें क्या डिफरेंस है इनको हम कंपेयर करेंगे आपस में देखो पहला है इसके अंदर एन टाइप सेमीकंडक्टर एन टाइप सेमीकंडक्टर बनाने के लिए आपको जो इंप्योरिटी मिलानी पड़ेगी एन टाइप सेमीकंडक्टर के लिए हमको पेंटावेलेंट इंप्योरिटी मिलानी पड़ती है इसमें एलिमेंट आते हैं नाइट्रोजन फास्फोरस आर्सेनिक एंटीमनी और बि स्मित अगर ये वाली इंप्योरिटी आप मिलाते हो तो जो सेमीकंडक्टर बनेगा उसको हम बोलेंगे एन टाइप सेमीकंडक्टर ठीक
है और इसका एक और नाम है इंप्योरिटी का पेंटावेलेंट इंप्योरिटी ठीक है इसी तरीके से अगर आपको एं टाइप सेमीकंडक्टर बनाना है तो कौन सी इंप्योरिटी मिलानी पड़ेगी इंप्योरिटी एटम कौन से होंगे इसमें इंप्योरिटी एटम होंगे बोरनन गैलियम इंडियम थैलियम ठीक है ये वाले एलिमेंट्स हम मिलाएंगे और इन इंप्योरिटी एटम्स को हम बोलते हैं ट्राइव इंप्योरिटी कौन सी इंप्योरिटी मिलाई हमने ट्राइव इंप्योरिटी मिलाई है ठीक है तो ये एक मेजर डिफरेंस हो गया कि एन टाइप सेमीकंडक्टर बनाने के लिए आपको पेंटावेलेंट इंप्योरिटी मिलानी पड़ेगी ठीक है और अगर आपको पी टाइप सेमीकंडक्टर बनाना है तो
उसमें ट्राई वेलेंट इंप्योरिटी मिलानी पड़ती है दूसरा डिफरेंस यह है कि एन टाइप सेमीकंडक्टर के अंदर जो नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन होते हैं वो ज्यादा होते हैं नंबर ऑफ होल्स के कंपैरिजन में कौन ज्यादा होगा इसके अंदर नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन ज्यादा होंगे नंबर ऑफ होल्स की कंपैरिजन में जबकि पी टाइप सेमीकंडक्टर के अंदर अगर आप देखोगे तो नंबर ऑफ होल्स इसके अंदर ज्यादा होते हैं नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन की कंपैरिजन में ठीक है तो आप ये बता सकते हो कि अगर एन टाइप सेमीकंडक्टर है तो उसमें मेजॉरिटी चार्ज कै रियर कौन होगा फ्री इलेक्ट्रॉन होंगे जबकि अगर
पी टाइप सेमीकंडक्टर है तो इसके अंदर मेजोरिटी चार्ज कैरियर कौन होगा होल्स होंगे याद रखना है ये ठीक है तीसरा इंपॉर्टेंट पॉइंट अगर इन दोनों को आपस में कंपेयर किया जाए तो इन दोनों में से कंडक्टिविटी किसकी ज्यादा होगी तो इसमें मेजोरिटी चार्ज कैरियर कौन है फ्री इलेक्ट्रॉन इसमें मेजोरिटी चार्ज कैरियर कौन है होल्स अब इलेक्ट्रॉन और होल में से जो मूवमेंट करने की एबिलिटी होती है वो इलेक्ट्रॉन की ज्यादा होती है इलेक्ट्रॉन फ्रीली कहीं भी मूव कर सकते हैं जबकि होल हमेशा किसी ना किसी बॉन्ड के अंदर क्रिएट होते जब कोई इलेक्ट्रॉन बॉन्ड तोड़
के बाहर भाग जाता है तो उसकी जगह एक होल क्रिएट होता है तो होल कहां पे क्रिएट होंगे हमेशा किसी ना किसी बॉन्ड के अंदर क्रिएट होंगे होल हमेशा किसी ना किसी बॉन्ड के अंदर क्रिएट होंगे इसका मतलब ये है कि होल के ऊपर एक बाउंड है कि वो किसी ना किसी होल में क्रिएट होगा और होल मतलब बॉन्ड टू बॉन्ड ही वो होल मूव कर पाएगा इलेक्ट्रॉन की तरह वो फ्रीली रैंडम मूव नहीं कर सकते तो अगर मूवमेंट करने की एबिलिटी देखी जाए दोनों में से तो किसकी ज्यादा है मूवमेंट करने की एबिलिटी होल्स
की कम है और इलेक्ट्रॉन की ज्यादा है इलेक्ट्रॉन की मोबिलिटी ज्यादा है होल की कंपैरिजन में क्यों है ज्यादा क्योंकि इलेक्ट्रॉन फ्रीली कहीं भी मूव कर सकते हैं और होल के ऊपर बाउंड होने की वजह से वो बंड टू बॉन्ड ही मूव कर पाते हैं अब मोबिलिटी यानी कि म मूवमेंट करने की जो एबिलिटी है वो जिस चार्ज पार्टिकल की ज्यादा होगी वह अच्छे से कंडक्शन कर पाएगा इसलिए कंडक्टिविटी बढ़ जाएगी तो एन टाइप सेमीकंडक्टर में क्योंकि फ्री इलेक्ट्रॉन ज्यादा होते हैं मेजोरिटी चार्ज कैरियर कौन है फ्री इलेक्ट्रॉन इन्हीं की वजह से कंडक्शन होगा तो
इनकी कंडक्टिविटी ज्यादा होगी है ना जो एन टाइप सेमीकंडक्टर है इसकी कंडक्टिविटी क्या होती है ज्यादा होती है यह हम कंपेयर कर रहे हैं पी टाइप सेमीकंडक्टर से उसके हिसाब से बता रहे हैं ठीक है जो पी टाइप सेमीकंडक्टर है उसमें मेजोरिटी चार्ज कैरियर होल है और होल की मोबिलिटी कम होने से इसकी कंडक्टिविटी क्या रहेगी कम रहेगी ठीक है आया समझ में तो इसकी कंडक्टिविटी क्या होती है कम होती है तो ये मेजर डिफरेंस है किसके अंदर ए टाइप सेमीकंडक्टर और पी टाइप सेमीकंडक्टर के अंदर एक डिफरेंस इनमें यह भी हम बता सकते हैं
कि जो एन टाइप सेमीकंडक्टर है उसमें हम एक डोनर एनर्जी लेवल शो करते हैं जो हमेशा कंडक्शन बैंड के जस्ट नीचे होता है इसमें क्या होगा डोनर एनर्जी लेवल होगा जो हमेशा कहां पर ड्रॉ किया जाएगा जस्ट बिलो द कंडक्शन बैंड और जो पी टाइप सेमीकंडक्टर है उसके अंदर आप देखोगे कि उसके अंदर एक एक्सेप्टर एनर्जी लेवल होगा जो हमेशा कहां पर ड्र किया जाएगा जस्ट अबोव द वैलेंसी बैंड एक्सेप्टर एनर्जी लेवल होगा इसके अंदर जो हमेशा कहां पर ड्र करना है जस्ट अबो द वैलेंसी बैंड ठीक है तो ये बेसिक डिफरेंस आपको सारे याद
कर लेने हैं इंपॉर्टेंट है अच्छे से याद कर लेना देख लो इनमें कोई भी डाउट है तो बता दो इसके बाद में नेक्स्ट है फिर पीएन जंक्शन अब हम यह देखेंगे कि अगर हम एक पी टाइम मटेरियल को एन टाइम मटेरियल से जॉइन कर देते हैं तब क्या एक्टिविटी होती है अगर आप एक पी टाइम मटेरियल को एन टाइम मटेरियल से जॉइन कर देते हो तो इसको क्या बोला जाएगा पीएन जंक्शन या इसका एक और नाम होता है पीएन जंक्शन डायोड ये एक डिवाइस बन जाएगा जिसका नाम होगा पीएन जंक्शन डायोड तो देखते हैं क्या
एक्टिविटी होगी यहां पे मान लो कि यह कोई पी टाइप मटेरियल है और ये क्या है एन टाइप मटेरियल है और दोनों को हम एटॉमिक लेवल प जॉइन कर रहे हैं यहां पे जो पी टाइप मटेरियल है इसके अंदर मेजोरिटी चार्ज कैरियर कौन होते हैं मेजोरिटी चार्ज कैरियर इसके अंदर होते हैं होल्स जबकि एंटाई मटेरियल के अंदर जो मेजोरिटी चार्ज कैरियर है वो होते हैं फ्री इलेक्ट्रॉन अब आपने क्या किया इन दोनों मैटेरियल्स को आपस में जॉइन किया ठीक है तो ये वाली जो लाइन है जहां पर ये जुड़े हैं इसको हम बोलते हैं जंक्शन
क्या बोलेंगे इसको ज फंक्शन बोलेंगे ठीक है अच्छा यहां पे कुछ माइनॉरिटी चार्ज कैरियर भी होंगे उनको भी दिखा देते हैं पी टाइप मटेरियल के अंदर माइनॉरिटी चार्ज कैरियर कौन होंगे फ्री इलेक्ट्रॉन तो यहां पे कुछ फ्री इलेक्ट्रॉन भी घूम रहे होंगे और जो एंटाई मटेरियल है उसके अंदर माइनॉरिटी चार्ज के रियर कौन होते हैं होल्स होते हैं तो इसके अंदर कुछ होल्स भी घूम रहे होंगे ठीक है पे टाइप मटेरियल में मेजॉरिटी चार्ज केरियर होगा होल और इलेक्ट्रॉन क्या रहेंगे माइनॉरिटी चार्ज कैरियर ए टाइप सेमीकंडक्टर के अंदर मेजॉरिटी चार्ज कैरियर कौन है फ्री इलेक्ट्रॉन
और होल्स क्या है यहां पे माइनॉरिटी चार्ज कैरियर से अब आपने इन दोनों को आपस में जॉइन किया अब जॉइन करते ही क्या प्रोसेस होगी ध्यान से समझना उसको देखो यहां पे क्या है इलेक्ट्रॉन मेजॉरिटी में है बहुत सारे फ्री इलेक्ट्रॉन है यहां पे और यहां पे क्या है बहुत सारे होल्स हैं होल्स का मतलब है इलेक्ट्रॉन की कमी है ठीक है अब जैसे ही आप इन दोनों मैटेरियल्स को आपस में जॉइन करोगे तो यह जो इलेक्ट्रॉन है ये इधर आके इन होल्स के साथ में रिकंबाइन होना स्टार्ट हो जाता है इस प्रोसेस को हम
बोलते हैं र कॉमिनेशन जब कोई भी बॉन्ड टूटता है तो इलेक्ट्रॉन फ्री होता है और उसकी जगह जहां से इलेक्ट्रॉन फ्री हुआ है वहां पर क्या क्रिएट होता है होल क्रिएट होता है अगर वापस से इलेक्ट्रॉन आके उस होल के साथ में बॉन्ड बना लेता है तो इलेक्ट्रॉन भी गायब हो जाएगा होल भी गायब हो जाएगा मतलब ना तो फ्री इलेक्ट्रॉन रहेगा ना ही होल रहेगा तो ये वो वाली प्रोसेस है जिसमें ये इलेक्ट्रॉन जो फ्री इलेक्ट्रॉन इधर घूम रहे थे वो इधर आके इन होल्स के साथ में वापस से बॉन्ड बना रहे हैं और
इस प्रोसेस में क्या होगा यहां पे ये इधर से इलेक्ट्रॉन गायब होते जाएंगे क्योंकि ये र कॉमिनेशन कर रहे हैं और इधर से क्योंकि यहां पे इलेक्ट्रॉन की कमी थी वह पूरी होती जा रही है तो होल भी गायब होते जाएंगे ठीक है तो यहां पे क्या होगा यह जो जंक्शन है ये वाली जो लाइन है इसको हम क्या बोलते हैं जंक्शन तो इसके इधर वाले जो इलेक्ट्रॉन है जब ये होल के साथ में कंबाइन होंगे तो इधर क्योंकि ये एटम्स ये एटम्स इलेक्ट्रॉन को लूज कर रहे हैं भा ये जो फ्री इलेक्ट्रॉन है ये
किसी ना किसी एटम से फ्री होंगे तो उन एटम्स के ऊपर कौन सा चार्ज आता जाएगा पॉजिटिव अब क्योंकि इधर वाले इलेक्ट्रॉन इधर जाके होल के साथ में कंबाइन हो रहे हैं तो जो एटम इन इलेक्ट्रॉन को लूज कर रहा है उनके ऊपर कौन सा चार्ज आएगा पॉजिटिव चार्ज आएगा जब भी कोई एटम इलेक्ट्रॉन लूज़ करता है तो उसके ऊपर हमेशा पॉजिटिव चार्ज आता है तो यहां पे यह इलेक्ट्रॉन इधर से गायब होते जाएंगे यह इलेक्ट्रॉन यहां से गायब और इधर से यह होल गायब इधर इलेक्ट्रॉन इधर जाएंगे तो इन एटम्स के ऊपर आता जाएगा
कौन सा चार्ज आएगा बताओ इनके ऊपर आएगा पॉजिटिव चार्ज क्योंकि इलेक्ट्रॉन को लूज़ करते जा रहे हैं इस तरीके से इधर पॉजिटिव चार्ज आएगा और इधर यह वाले जो एटम्स होंगे जिनमें होल क्रिएट हुए हुए हैं वो इलेक्ट्रॉन को एक्सेप्ट कर रहे हैं तो वो एटम जब इलेक्ट्रॉन को एक्सेप्ट करेंगे तो उनके ऊपर कौन सा चार्ज आएगा नेगेटिव चार्ज आएगा तो इधर वाली सरफेस के ऊपर यानी कि जंक्शन के दूसरी साइड में कौन इकट्ठे होते जाएंगे इधर इकट्ठे होते जाएंगे आयस है ना क्योंकि ये इलेक्ट्रॉन गेन कर रहे हैं ये वाले एटम्स इलेक्ट्रॉन गेन कर
रहे हैं इलेक्ट्रॉन इधर से आके इधर होल के साथ में रिकंबाइन होंगे तो जो एटम इलेक्ट्रॉन को लूज कर रहा है उसके ऊपर पॉजिटिव चार्ज आता जा रहा है और जो एटम्स इलेक्ट्रॉन को गेन कर रहे हैं उनके ऊपर नेगेटिव चार्ज आता जा रहा है और ये यहां पे एक पॉजिटिव और नेगेटिव चार्ज की लेयर क्रिएट होती जा रही है ठीक है अच्छा अब यहां पे ये जो मेजॉरिटी चार्ज कैरियर हैं इलेक्ट्रॉन ये किधर मूव कर रहे हैं ये n टाइप सेमीकंडक्टर से p टाइप सेमीकंडक्टर की तरफ आ रहे हैं और जिस भी डायरेक्शन में
इलेक्ट्रॉन चलता है हमको पता है कि उसके अपोजिट डायरेक्शन में हम करंट को एज्यूम करते हैं इलेक्ट्रॉन पे नेगेटिव चार्ज होता है इसलिए जिस भी डायरेक्शन में इलेक्ट्रॉन चलेगा उसके अपोजिट डायरेक्शन में हम करंट को एज्यूम करेंगे तो यहां पे मैं एक करंट को ड्रॉ करके बता रहा हूं ये करंट को मैंने यहां पे दिखाया एक तरह से ये जो करंट है इसको बोला जाता है डिफ्यूजन करंट क्या बोलेंगे इसको डिफ्यूजन करंट डिफ्यूजन करंट कौन सा करंट होता है जो इलेक्ट्रॉन के होल के साथ में डिफ्यूज होने की वजह से प्रोड्यूस होता है उसको बोलते
हैं डिफ्यूजन करंट तो जैसे ही यहां पे ये र कॉमिनेशन स्टार्ट होगा फ्री इलेक्ट्रॉन इधर आके होल्स के साथ में रिकंबाइन होना स्टार्ट होंगे तो यहां पे क्या होना स्टार्ट हो गया डिफ्यूजन होना स्टार्ट हो गया तो उसकी वजह से इन इलेक्ट के मोशन की वजह से जो करंट यहां पर प्रोड्यूस हो रहा है उसका नाम हमने क्या रख दिया डिफ्यूजन करंट नाम रख दिया अब जैसे-जैसे इधर पॉजिटिव आयस की लेयर बनती जाएगी ये इधर वाले माइनॉरिटी चार्ज कैरियर यानी कि इलेक्ट्रॉन को अपनी तरफ खींचे गी ये जो माइनोट चार्ज के रियर हैं ये इस
पॉजिटिव जो लेयर है आयस की इसकी तरफ अट्रैक्ट होंगे और इसी तरीके से इधर नेगेटिव आयस की एक लेयर बनती जा रही है तो ये नेगेटिव आयस की लेयर क्या करेगी ये इन होल्स को जिनके ऊपर पॉजिटिव चार्ज हम एज्यूम करते हैं है इन होल्स को अपनी तरफ अट्रैक्ट करेगी तो यहां पे इन माइनॉरिटी चार्ज कैरियर्स का भी एक मूवमेंट स्टार्ट हो जाएगा इलेक्ट्रॉन इधर आने की कोशिश करेंगे और होल्स इधर जाने की कोशिश करेंगे ठीक है इलेक्ट्रॉन इधर क्यों आ रहे हैं क्योंकि ये पॉजिटिव आयस की लेयर इनको अट्रैक्ट कर रही है और होल
इधर जाने की कोशिश क्यों कर रहे हैं क्योंकि ये नेगेटिव आयस की लेयर इनको अपनी तरफ अट्रैक्ट कर रही है तो इसकी वजह से क्या होगा यहां पे जंक्शन के दोनों साइड में ये जो माइनॉरिटी चार्ज केरियर है ये भी मूव करना स्टार्ट कर देंगे इनकी वजह से भी एक करंट फ्लो होगा इनकी वजह से भी क्या होगा एक करंट फ्लो होगा उस करंट को हम बोलेंगे ड्रिफ्ट करंट यह जो ड्रिफ्ट करंट है ये इन माइनॉरिटी चार्ज कैरियर की वजह से प्रोड्यूस हो रहा है अब ये जो इलेक्ट्रॉन है ये इधर जा रहे हैं ये
जो माइनॉरिटी चार्ज कैरियर है ना इलेक्ट्रॉन ये इधर जा रहे हैं तो करंट इसके अपोजिट डायरेक्शन में हमको एज्यूम करना होगा तो ये जो मैं करंट यहां पे दिखा रहा हूं इसको हम क्या बोलेंगे ड्रिफ्ट करंट बोलेंगे कौन सा करंट है ये इसका नाम है ड्रिफ्ट करंट ड्रिफ्ट करंट किसकी वजह से होगा हमेशा माइनॉरिटी चार्ज कैरियर की वजह से होगा लिख भी देता हूं मैं इसको इधर देखो ड्रिफ्ट करंट होता है ड्यू टू माइनॉरिटी चार्ज कैरियर्स ठीक है और जो डिफ्यूजन करंट है वो हमेशा मेजोरिटी चार्ज कैरियर की वजह से होगा इनके इन इलेक्ट्रॉन के
इधर जाने की वजह से डिफ्यूज होने की वजह से होगा ड्यू टू मेजॉरिटी चार्ज कैरियर्स ठीक है ये आया समझ में डिफ्यूजन करंट का अगर आपको सोर्स पूछा जाए ये पूछा जा सकता है एग्जाम में कि डिफ्यूजन करंट कौन से वाले चार्ज कैरियर की वजह से प्रोड्यूस होता है तो मेजोरिटी चार्ज कैरियर की वजह से और ड्रिफ्ट करंट किसकी वजह से होता है हमेशा माइनॉरिटी चार्ज के रियर की वजह से बनता है ठीक है अब यहां पर अगर आप ध्यान से देखोगे तो इधर पॉजिटिव आयस की एक लेयर बन गई इधर नेगेटिव आयस की लेयर
बन गई अब ये जो नेगेटिव आयस की लेयर है ये आने वाले इलेक्ट्रॉन को रिपेल करना चालू कर देगी जब इलेक्ट्रॉन इधर आना चाहेंगे होल के साथ में रिकंबाइन होने के लिए तो यह टिव आयस की लेयर क्या करेगी उनको रिपेल करेगी और इधर यह जो पॉजिटिव आयस की लेयर है ये इधर जो मेजोरिटी चार्ज के रियर होल इनको रिपेल करना चालू कर देगी तो शुरुआत में तो क्या होता है कि एकदम से डिफ्यूजन होता है यहां पे इलेक्ट्रॉन इधर जाते हैं और होल के साथ में रिकंबाइन होना स्टार्ट हो जाते हैं तो शुरुआत में
डिफ्यूजन करंट बहुत ज्यादा होता है और जैसे-जैसे ये आयस की लेयर क्रिएट होते जाती है वैसे डिफ्यूजन करंट की रेट कम हो जाती है क्योंकि इधर से जो इलेक्ट्रॉन इधर जाने की कोशिश करेंगे उनको ये नेगेटिव आयस क्या करेंगे रिपेल करना चालू कर देंगे तो शुरुआत में डिफ्यूजन करंट क्या है बहुत ज्यादा है ठीक है और यह जो ड्रिफ्ट करंट है यह कम है ड्रिफ्ट करंट कम क्यों है क्योंकि शुरुआत में जब तक यह लेयर नहीं बनेगी तब तक इलेक्ट्रॉन और होल्स जाने की कोशिश नहीं करेंगे भा माइनॉरिटी चार्ज कै रियर को तो ये पॉजिटिव
और नेगेटिव आयस की जो लेयर्स है यही खींच रही है अपनी तरफ इन्हीं की वजह से य मूवमेंट हो रहा है तो डिफ्यूजन करंट तो यहां पर शुरुआत में क्या होगा ज्यादा और ड्रिफ्ट करंट जो माइनॉरिटी चार्ज कैरियर की वजह से होगा वोह काफी कम रहेगा शुरुआत में लेकिन जैसे-जैसे टाइम बीतेगा डिफ्यूजन की रेट कम होती जाएगी टाइम के साथ में तो डिफ्यूजन करंट कम और जैसे-जैसे आयस क्रिएट होते जाएंगे वैसे-वैसे ड्रिफ्ट करंट बढ़ता जाएगा तो एक पॉइंट ऐसा आएगा जहां पर दोनों बराबर हो जाएंगे जहां पर डिफ्यूजन करंट और ड्रिफ्ट करंट आपस में बराबर
हो जाते हैं उसके बाद में यहां पे ना तो कोई मेजॉरिटी चार्ज कैरियर इधर से इधर आ पाता है और ना ही कोई माइनॉरिटी चार्ज कैरियर इधर से इधर जा पाता है मतलब ये चार्ज कैरियर्स का जो मूवमेंट है इधर से इधर जाना इधर से इधर आना ये बंद हो जाएगा कब बंद होगा जब डिफ्यूजन करंट और ड्रिफ्ट करंट आपस में बराबर होक कैंसिल हो जाएंगे उसके बाद में यहां पे ना तो कोई मेजोरिटी चार्ज कैरियर इधर जाके होल के साथ में डिफ्यूज हो पाएगा ना ही कोई माइनॉरिटी चार्ज कैरियर इधर जाके कोई ड्रिफ्ट करंट
प्रोड्यूस कर पाएगा ये दोनों आपस में कैंसिल हो गए दोनों करंट आपस में कैंसिल हो जाते हैं और उस कंडीशन में यहां पे परमानेंटली आयस की एक लेयर क्रिएट हो जाती है जिसको हम बोलेंगे डिप्लेन लेयर यह जो लेयर बन गई इसका नाम क्या है इस लेयर का नाम होता है डिप्लेन लेयर यह जो लेयर बनी ना यह इतनी इतनी लेयर बन गई यहां पर इसका नाम क्या है डिप्लेन लेयर इसको बोला जाएगा तो डिप्लेन लेयर वो रीजन है जंक्शन के दोनों साइड में जहां पर सिर्फ आयस प्रेजेंट होते हैं जहां पर कोई भी चार्ज
कैरियर नहीं होगा ना तो इधर इलेक्ट्रॉन रहेंगे ना ही होल्स रहेंगे इस रीजन के अंदर कोई भी चार्ज कैरियर नहीं है तो इसको हमने क्या दे दिया नाम डिप्लेन लेयर नाम दे दिया साथ ही एक चीज और नोटिस करो यहां पे यहां पे ये जो नेगेटिव आयस की लेयर है ये एक नेगेटिव पोटेंशियल क्रिएट करेगी और इधर जो पॉजिटिव आयस की लेयर है वह एक पॉजिटिव पोटेंशियल क्रिएट करेगी तो यहां पे कुछ नेगेटिव पोटेंशियल आएगा इधर कुछ पॉजिटिव पोटेंशियल आएगा और इन दोनों लेयर्स की वजह से एक पोटेंशियल डिफरेंस यहां पर क्रिएट होगा जिसको मैं
एक बैटरी से यहां पर दिखा रहा हूं एक पोटेंशियल डिफरेंस यहां पे क्रिएट होगा जिसको हमने यहां पर प्लस माइनस करके एक बैटरी से दिखाया हुआ है तो यह जो पोटेंशियल डिफरेंस यहां पे क्रिएट होगा इन नेगेटिव और पॉजिटिव आयस वजह से इसको हम बोलते हैं बैरियर पोटेंशियल क्या बोलेंगे इसको बैरियर पोटेंशियल अगर आप सिलिकन बेस मटेरियल यूज करते हो और उसमें अगर आप ट्राई वले या पेंटावेलेंट इंप्योरिटी मिलाकर ये पीएन जंक्शन बनाते हो इस तरीके से अगर आप इस जंक्शन को बनाने के लिए य इस मटेरियल को पी टाइप और ए टाइप को बनाने
के लिए अगर आपने सिलिकन बेस मटेरियल यूज किया है तो उस कंडीशन में सिलिकन के लिए फॉर सिलिकन जो बैरियर पोटेंशियल होगा ब वो बराबर होगा 0.7 वोल्ट के बराबर मतलब ये जो पोटेंशियल डिफरेंस यहां पे क्रिएट हो रहा है ये कितना होगा 0.7 वोल्ट के बराबर होगा किसके लिए जब आप सिलिकॉन बेस मटेरियल यूज करोगे लेकिन अगर आपने जर्मेनियम बेस मटेरियल यूज किया है जिसमें आपने ट्राइव या पेंटावेलेंट इंप्योरिटी मिला के ये प टाइप या एन टाइप मटेरियल बनाया हुआ है अगर आपने जर्मेनियम बेस मटेरियल यूज किया है तो उस कंडीशन में जो बैरियर
पोटेंशियल क्रिएट होगा वो 0 प 3 वोल्ट के बराबर होगा ये दोनों डाटा याद करने हैं कि बैरियर पोटेंशियल सिलिकॉन के अंदर कितना होता है 0.7 वोल्ट के बराबर और जर्मेनियम के अंदर कितना होगा 0.3 वोल्ट के बराबर होगा क्या बोलते हैं इसको बैरियर पोटेंशियल बोलते हैं ठीक है इसको मैं एक ग्राफ के थ्रू भी बता देता हूं आपको यह देखो बैरियर पोटेंशियल किस तरीके से बढ़ रहा है यहां पे ये इधर नेगेटिव आयस की लेयर है इधर नेगेटिव पोटेंशियल होगा इधर पॉजिटिव आयस की लेयर है तो इधर पॉजिटिव पोटेंशियल होगा तो अगर आप लेफ्ट
से राइट की तरफ आते हो तो पोटेंशियल इंक्रीज होगा नेगेटिव से पॉजिटिव हो रहा है ना तो बढ़ रहा है मतलब नेगेटिव से पॉजिटिव वैल्यू हो रही है इसका मतलब इंक्रीज हो रहा है तो यहां पे इसको इस तरीके से दिखाया जाता है कि लेफ्ट से राइट आने पे जो बैरियर पोटेंशियल है वो बढ़ता जाएगा और जब आप नेगेटिव आयस की लेयर के इस वाले सिरे पे आ जाओगे इधर से चलना स्टार्ट किया हमने इधर आ गए तो इधर से इधर आएंगे तो पोटेंशियल बढ़ेगा तो इसको बढ़ते हुए दिखाया हमने ये यहां पे हम जो
एकदम लास्ट किनारा है पॉजिटिव आयस की लेयर का वहां पे आ गए तो यहां पे एक डिफरेंस क्रिएट हो गया इन दोनों सिरों के बीच में पोटेंशियल डिफरेंस का जिसको हम क्या बोलते हैं बैरियर पोटेंशियल तो इसको इस तरीके से डायग्राम में दिखाया जाता है वा एक्सिस में हमने क्या लिया है यहां पे पोटेंशियल और एक्स एक्सिस पे क्या लिया है हमने डिस्टेंस ली है ठीक है और यह यहां से लेके यहां तक की जो डिस्टेंस है यही होती है डिप्लेन लेयर ठीक है अब यह जो डिवाइस यहां पर बन गया इस डिवाइस का भी
एक नाम है जब आप प टाइप मटेरियल को एन टाइप मट से जॉइन करते हो तो इससे एक डिवाइस बन जाता है जिसको हम बोलते हैं पीएन जंक्शन डायोड जिसका सर्किट सिंबल ये होता है देखो पीएन जंक्शन डायोड का यह सर्किट सिंबल है यह वाला सिरा प यह वाला सिरा ए और यह जो डिवाइस बन गया इसका नाम क्या रख दिया बताओ इसका नाम रखा हमने पीएन जंक्शन डायोड ठीक है क्या बोलेंगे इसको पीएन जंक्शन डायोड ठीक है ये खास बातें इसके बारे में ध्यान रखनी है कि जब भी एक प टाइम मटेरियल को एंड
टाइम मटेरियल से जॉइन करते हैं तो शुरुआत में क्या होता है एक लार्ज डिफ्यूजन करंट फ्लो होता है और ड्रिफ्ट करंट शुरुआत में कम होता है लेकिन जैसे-जैसे टाइम बीतता है ये आयस की लेयर बनती जाती है तो डिफ्यूजन करंट कम होने लग जाएगा और ड्रिफ्ट करंट बढ़ने लग जाएगा डिफ्यूजन करंट मेजॉरिटी चार्ज के रियर की वजह से होता है और ड्रिफ्ट करंट हमेशा माइनॉरिटी चार्ज के रियर की वजह से होता है अब जब ये दोनों आपस में बराबर हो जाएंगे करंट तो क्योंकि एक दूसरे के अपोजिट डायरेक्शन में है तो एक दूसरे को कैंसिल
कर देंगे और जब ये परफेक्टली एक दूसरे को कैंसिल कर देते हैं तो हम बोलते हैं कि यहां पे जो जंक्शन है उसके दोनों साइड में एक डिप्लेन लेयर का फॉर्मेशन हो गया ये जो डिप्लेन लेयर है इसकी विड्थ अगर आपको पूछे जाए कि ये किस चीज पर डिपेंड करती है तो याद रखना है कि इसकी विड्थ डिपेंड करेगी डोपिंग के लेवल के ऊपर जो विड्थ ऑफ द डिप्लेन लेयर है इसको मैं लिख देता हूं कहीं पे इधर लिखूंगा मैं ये जो डिप्लेन लेयर की विड्थ है वो किन चीजों प डिपेंड करती है तो वो
डिपेंड करती है डोपिंग के लेवल के ऊपर जितना ज्यादा आप डोपिंग करोगे डिप्लेन लेयर की विड्थ उतनी ही कम रहेगी तो इधर लिख देते हैं इसको विड्थ ऑफ डिप्लेन लेयर ये इन्वर्सली प्रोपोर्शनल होती है किसके डोपिंग के डोपिंग के इन्वर्सली प्रोपोर्शनल होगी मतलब अगर आप डोपिंग ज्यादा करोगे तो उस साइड में डिप्ले लेयर की विड्थ हमेशा कम रहेगी सपोज करो आपने इधर ज्यादा डोपिंग कर रखी है इधर कम डोपिंग कर रखी है तो इधर ज्यादा डोपिंग है तो ये विड्थ कम रहेगी इधर कम डोपिंग है तो विड्थ थोड़ी ज्यादा होगी जंक्शन के इधर थोड़ी ज्यादा
दूरी तक रहेगी ये जो डिप्लेन लेयर है और इधर कम दूरी तक रहेगी मतलब डिप्लेन लेयर की विड्थ किस चीज पर डिपेंड कर रही है कि आपने कितनी इसमें डोपिंग कर रखी है उसके ऊपर डिपेंड करेगी और डोपिंग के इन्वर्सली प्रोपोर्शनल होगी जितना ज्यादा आप डोपिंग करोगे विड्थ ऑफ द डिप्लेन लेयर उतनी ही कम रहेगी और जितनी ज्यादा आप डोपिंग करोगे उतना ही ज्यादा बैरियर पोटेंशियल यहां पे क्रिएट होगा यह भी याद रखना है ये जो बैरियर पोटेंशियल ये किस चीज की वजह से क्रिएट हो रहा है ये नेगेटिव और पॉजिटिव आयस की लेयर की
वजह से क्रिएट हो रहा है जितने ज्यादा आयस की लेयर इधर बनेगी उतना ही ज्यादा पोटेंशियल डिफरेंस यहां पे क्रिएट होता जाएगा तो जितना ज्यादा आप डोपिंग करोगे ना उतना ही ज्यादा आयस की लेयर बनेगी और उसकी वजह से उतना ही ज्यादा पोटेंशियल डिफरेंस यहां पे क्रिएट होगा तो बैरियर पोटेंशियल की जो वैल्यू है वो डिपेंड करती है डोपिंग के ऊपर और डोपिंग के डायरेक्टली प्रोपोर्शनल होती है बैरियर पोटेंशियल की वैल्यू किस पर डिपेंड करेगी डोपिंग के ऊपर और डोपिंग के डायरेक्टली प्रोपोर्शनल होगी जितना ज्यादा डोपिंग उतना ज्यादा बैरियर पोटेंशियल और डिप्लेन लेयर की जो
थ है वो किस पर डिपेंड करेगी डोपिंग के ऊपर डिपेंड करेगी लेकिन इसके इन्वर्सली प्रोपोर्शनल होगी जितना ज्यादा आप डोपिंग करोगे उतना ही डिप्ले लेयर की विड्थ कम होती जाएगी तो विड्थ तो इन्वर्सली प्रोपोर्शनल टू डोपिंग रहेगी और बैरियर पोटेंशियल डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू डोपिंग रहेगा ठीक है यह बात समझ में आई क्या ठीक है देख लो इसमें कोई भी डाउट है तो इंपॉर्टेंट है यह तो इस तरीके से एक जंक्शन का फॉर्मेशन होता है एक डिप्लेन लेयर का फॉर्मेशन होता है यहां पर नेक्स्ट टॉपिक है बाय सिंग ऑफ ए पीएन जंक्शन मतलब अब हम ये
स्टडी करेंगे कि एक पीएन जंक्शन को हम किस तरीके से वोल्टेज देंगे वोल्टेज देने को बोलते हैं बायिस दो अलग-अलग कंडीशन होती है पहले होती है फॉरवर्ड बायिस होती है रिवर्स बायिफ बायसिल है अगर आप बैटरी के पॉजिटिव टर्मिनल को पीएन जंक्शन के पी साइड से कनेक्ट करते हो पॉजिटिव टर्मिनल को पी से कनेक्ट करना है ठीक है और नेगेटिव टर्मिनल ऑफ द बैटरी को आपको n से कनेक्ट करना है तो उसको हम बोलेंगे फॉरवर्ड बाइस सिंग जैसे यहां पे हमने एक प ए जंक्शन दिखा रखा है यह प टाइप मटेरियल है सपोज ये ए
टाइप मटेरियल है और एक बैटरी से इसको हमने कनेक्ट किया हुआ है और बैटरी से कैसे कनेक्ट किया तो बैटरी का जो पॉजिटिव टर्मिनल है उसको हम कनेक्ट करेंगे p से और जो नेगेटिव टर्मिनल है उसको हम कनेक्ट करेंगे n से अा बीच में करंट को मेजर करने के लिए हमने एक मिलीमीटर भी लगा रखा है क्या लगा रखा है बीच में मिलीमीटर और कितना वोल्टेज हम इसको दे रहे हैं जंक्शन को उसको मेजर करने के लिए हम यहां पे वोल्टमीटर भी लगा देंगे ठीक है तो वोल्टमीटर का काम है यहां पे कितना वोल्टेज दिया
जा रहा है उसको मेजर करना और ये जो बैटरी है ये एक वेरिएबल वोल्टेज सोर्स होता है वेरिएबल वोल्टेज सोर्स का मतलब है इसका वोल्टेज आप कम ज्यादा भी कर सकते हो ठीक है तो ये जो बायंग है इसमें देखो हमने p को बैटरी के पॉजिटिव टर्मिनल से कनेक्ट किया है और n को बैटरी के नेगेटिव टर्मिनल से कनेक्ट किया है इसको हम क्या बोलेंगे फॉरवर्ड बायसिल p को पॉजिटिव से और n को नेगेटिव से कनेक्ट करने को ही क्या बोलते हैं फॉरवर्ड बाइस सिंग ठीक है फिर एक ग्राफ भी ड्र करेंगे कि कितना वोल्टेज
देने प कितना करंट सर्किट में मिल रहा है यह हम ग्राफ भी ड्रॉ करके देखेंगे तो इसको हम बोलते हैं वोल्टेज और करंट इनके बीच में ग्राफ और या इसका एक और नाम होता है वी आई कैरेक्टरिस्टिक वी आई कैरेक्टरिस्टिक का मतलब है वोल्टेज और करंट के बीच में आपको एक ग्राफ ड्र करके देखना है और इस पीएन जंक्शन का जिसको हम डायोड भी बोलते हैं पीएन जंक्शन का दूसरा नाम क्या है डायोड इसका बिहेवियर हम समझेंगे यहां पे ये किस तरीके से काम करता है यह जो पी टाइप मटेरियल है इसमें बहुत सारे क्या
रहेंगे होल्स रहेंगे क्योंकि इसमें मेजोरिटी चार्ज कैरियर कौन होता है होल और जो एन टाइ मैटेरियल है इसके अंदर क्या होंगे बहुत सारे इलेक्ट्रॉन रहेंगे क्योंकि इसके अंदर मेजोरिटी चार्ज कै रियर कौन होता है इसके अंदर होते हैं फ्री इलेक्ट्रोंस ठीक है साथ ही जो पी साइड है उधर नेगेटिव आयस की एक लेयर होगी नेगेटिव आयस की एक लेयर बनेगी और एन साइड में पॉजिटिव आयस की एक लेयर बन जाएगी इस लेयर को हम बोलते हैं इस कंप्लीट लेयर को यहां से लेके यहां तक जिसमें ये आयस प्रेजेंट है इसको हम क्या बोलते हैं डिप्लेन
लेयर ये वाली जो लेयर है ना इसको हम बोलते हैं डिप्लीशन लेयर और इन नेगेटिव और पॉजिटिव आयस की वजह से यहां पे जंक्शन के दोनों साइड में ये जो आयस की लेयर्स है ये क्या करती है एक पोटेंशियल डिफरेंस क्रिएट करती हैं जिसको हम क्या बोलते हैं बैरियर पोटेंशियल बोलते हैं क्या बोलते हैं उसको बैरियर पोटेंशियल जिसको हम v ब से डिनोट कर रहे हैं अगर हमने सिलिकन बेस मटेरियल यूज किया है इस डायोड को बनाने के लिए अगर हम सिलिकन बेस मटेरियल यूज़ कर रहे हैं और उसके अंदर एक साइड में हमने सपोज
करो ट्रावटॉक क्टर बन गया एक साइड में हमने पेंटावेलेंट इंप्योरिटी मिला दी तो वो n टाइप सेमीकंडक्टर बन गया है ना इस तरीके से अगर हमने डेवलप किया है बेस मटेरियल कौन यूज़ किया है सिलिकॉन तो उस कंडीशन में ये जो बैरियर पोटेंशियल है ये होगा 0.7 वोल्ट के बराबर ये याद रखना है ठीक है अगर आप सिलिकन यूज करते हो तो इसके लिए जो बैरियर पोटेंशियल क्रिएट होगा जंक्शन के दोनों साइड में जो पोटेंशियल डिफरेंस होगा एक तरह से वो बराबर होगा 0.7 वोल्ट के बराबर ठीक है अब यह ग्राफ ड्र करते हैं देखो
ग्राफ कैसे ड्र करना ध्यान से समझना क्या-क्या एक्टिविटी होगी फॉरवर्ड बाइस सिंग के अंदर यह समझेंगे सबसे पहले मान लो कि यहां पर जीरो वोल्टेज आपने सप्लाई में दे रखा है अगर आप इनपुट वोल्टेज कितना दोगे जीरो यहां पर जीरो वोल्टेज लगाया हमने है ना तो जीरो वोल्टेज लगाएंगे तो यहां पर सर्किट में आपको कोई भी करंट देखने को नहीं मिलेगा क्योंकि जो बैरियर पोटेंशियल है उसका काम यही होता है कि जो इलेन है इधर मेजोरिटी चार्ज के रियर कौन है इलेक्ट्रॉन और इधर कौन है होल्स तो ना तो यह इलेक्ट्रॉन को इधर जाने देगा
जंक्शन को क्रॉस करके कौन बैरियर पोटेंशियल और ना होल्स को इधर आने देगा यह काम किसका है रोकने का काम किसका है इस बैरियर पोटेंशियल का यही काम है ठीक है तो जीरो वोल्टेज अप्लाई करेंगे तो कोई भी इलेक्ट्रॉन या होल मूव नहीं कर पाएगा फिर जैसे जैसे आप इस वोल्टेज को बढ़ाओ जैसे जैसे हम इस वोल्टेज को इंक्रीज करेंगे आप एक चीज नोटिस करो कि यह जो बैरियर पोटेंशियल है जिसको हमने प्लस माइनस ऐसे दिखाया हुआ है एक बैटरी के थ्रू इसका नेगेटिव टर्मिनल देखो यहां पे बैटरी के एक्सटर्नल बैटरी जो हमने कनेक्ट की
हुई है उसके पॉजिटिव टर्मिनल से कनेक्टेड है और इस बैरियर पोटेंशियल का जो पॉजिटिव साइड है वो किससे कनेक्टेड है इस एक्सटर्नल बैटरी के नेगेटिव टर्मिनल से कनेक्टेड है मतलब उल्टा कनेक्टेड है नेगेटिव किससे कनेक्ट हुआ पॉजिटिव से ये बैरियर पोटेंशियल की मैं बात कर रहा हूं नेगेटिव किससे कनेक्ट हुआ पॉजिटिव से और पॉजिटिव किससे कनेक्ट हुआ नेगेटिव से इसका मतलब ये उल्टा कनेक्टेड है उल्टा कनेक्टेड है तो जैसे-जैसे इस वोल्टेज को बढ़ाओ ग यह इस बैरियर पोटेंशियल को कम करने का काम करेगा उल्टा कनेक्ट हो गया ना उल्टा कनेक्ट हो गया तो जैसे-जैसे इस
वोल्टेज को बढ़ाओ ग यह इसको कैंसिल करने का काम करेगा इस मतलब यह जैसे-जैसे वोल्टेज बढ़ाएंगे ना तो इस बैरियर पोटेंशियल को यह कम करने की कोशिश कर रहा है ओवर कम करने की कोशिश करेगा लेकिन यह कितना है यहां पे 0.7 वोल्ट के बराबर है बैरियर पोटेंशियल तो जब तक आप 0.7 वोल्ट वोल्टेज नहीं लगाओगे तब तक तो यह खत्म होगा नहीं ठीक है और तब तक आपको सर्किट में कोई भी करंट नहीं मिलेगा तो उसको मैं यहां दिखा देता हूं जब तक आप 0.7 वोल्ट तक वोल्टेज को इंक्रीज नहीं करोगे मान लो ये
0.7 वोल्ट है अगर इतना वोल्टेज आपने इंक्रीज नहीं किया है तो आपको सर्किट में करंट क्या मिलेगा ऑलमोस्ट जीरो मिलेगा ऐसे जीरो करंट मिलेगा आया समझ में फिर हम वोल्टेज को बढ़ाते जाएंगे बढ़ाते जाएंगे और देखते जाएंगे कि सर्किट में करंट कितना है तो करंट को हम कंटीन्यूअसली ऑ र् करते रहेंगे यहां से वोल्टेज की रीडिंग लेते रहेंगे यहां से करंट को मेजर करते रहेंगे और एक टेबल बनाएंगे उसमें सारा डाटा लिखते रहेंगे कि इतने वोल्टेज प इतना करंट मिला इतने वोल्टेज प इतना करंट मिला ये हम ग्राफ बनाने के लिए ऐसा करेंगे तो 0.7
वोल्टेज तक मतलब 0.7 वोल्ट तक जब तक आप इस बैरियर पोटेंशियल को कैंसिल नहीं कर देते तब तक सर्किट में आपको कोई भी करंट नहीं मिलेगा लेकिन जैसे ही आप इस बैरियर पोटेंशियल को ओवरकम कर देते हो है ना जैसे आपने 0.8 वोल्ट यहां पे लगा दिया तो 0.7 वोल्ट तो इसको कैंसिल करने में यूज हो गया बाकी कितना बच गया 0.1 वोल्ट अब उसकी वजह से सर्किट में करंट फ्लो होगा कैसे उसको समझना वो प्रोसेस समझना जैसे जैसे आप यह बैटरी का वोल्टेज बढ़ाते जा रहे हो तो देखो प साइड यह वाला जो पी
साइड है ये इस बैटरी के पॉजिटिव टर्मिनल से कनेक्टेड है तो ये पॉजिटिव रहेगा और ये वाला जो साइड है ये एन साइड ये बैटरी के नेगेटिव टर्मिनल से कनेक्टेड है तो ये रहेगा नेगेटिव अब ये जो पॉजिटिव साइड है ये क्या करेगी होल्स को रिपेल करना ने का काम करेगी होल्स के ऊपर पॉजिटिव चार्ज है उसको रिपेल करने का काम कौन कर रहा है ये पॉजिटिव साइड और ये इधर जो नेगेटिव साइड है ये क्या करेगी इलेक्ट्रॉन को रिपेल करने की कोशिश करेगी तो इलेक्ट्रॉन और होल दोनों ही जंक्शन की तरफ जा रहे हैं
इलेक्ट्रॉन और होल दोनों किसकी तरफ जा रहे हैं जंक्शन की तरफ और इसको क्रॉस करने की कोशिश कर रहे हैं ठीक है लेकिन जब तक यह बैरियर यहां पे प्रेजेंट है बैरियर यहां पर मौजूद है तब तक यह क्या करेगा इन इलेक्ट्रॉन को या होल्स को इस जंक्शन को क्रॉस नहीं करने देगा लेकिन जैसे ही आपने 0 7 वोल्ट अप्लाई करके इस जंक्शन को कैंसिल बैरियर पोटेंशियल को कैंसिल कर दिया तो यह जो बैरियर पोटेंशियल ये खत्म हो गया और इसकी वजह से जो करंट का या होल्स का या सॉरी इलेक्ट्रॉन का या होल्स का
जो फ्लो रुक रहा था वो अब रुक नहीं पाएगा तो अब क्या होगा कि अगर आप थोड़ा सा भी वोल्टेज 0.7 वोल्ट से थोड़ा भी वोल्टेज बढ़ा दोगे तो एकदम से यहां पे करंट इंक्रीज होना स्टार्ट हो जाएगा क्योंकि पहले तो यह बैरियर पोटेंशियल रोक रहा था उनको लेकिन अब रोकने वाला कोई नहीं है क्योंकि आपने उससे ज्यादा वोल्टेज यहां पे लगा दिया जैसे 0.8 वोल्ट लगा दिया फिर और बढ़ा देंगे 0 प जैसे 9 वोल्ट लगा दिया फिर 1 वोल्ट लगा दिया इस तरीके से वोल्टेज बढ़ाते जाओगे तो वोल्टेज बढ़ाने के साथ-साथ क्या होगा
इधर से इलेक्ट्रॉन पे लगने वाला जो फोर्स है वोह बढ़ेगा इधर से जो होल्स है उनके ऊपर लगने वाला फर्स बढ़ेगा और ये जंक्शन क्रॉस करके मूवमेंट स्टार्ट कर देंगे तो जब तक आपने 0.7 वोल्ट नहीं लगाया था तब तक तो करंट फ्लो हुआ नहीं लेकिन जैसे ही ये वोल्टेज अप्लाई कर दिया अब क्या होगा एकदम से करंट इंक्रीज चीज होना स्टार्ट हो जाएगा यहां पे ठीक है अब यह जो ग्राफ है यह ओम्स लो के अकॉर्डिंग नहीं बनता आप ध्यान रखना ओम्स लो ये होता है कि वोल्टेज बढ़ाएंगे तो करंट बढ़ेगा डायरेक्टली प्रोपोर्शनल होते
हैं दोनों लेकिन क्या यहां पे वोल्टेज और करंट डायरेक्टली प्रोपोर्शनल है नहीं जी जब आपने वोल्टेज बढ़ाया तो शुरुआत में तो करंट बढ़ा ही नहीं फिर एकदम से बढ़ गया ठीक है तो यहां पे ये जो ओम् स्लो है जो डायोड है या जो पीएन जंक्शन है वो ओम्स लो को फॉलो नहीं करता है इसलिए हम इसको नॉन ओहमिक डिवाइस भी बोलते हैं ये भी आप याद रखो तो इसका ग्राफ ऐसा बनेगा तो इसको हम क्या बोलते हैं फॉरवर्ड बायसिन बोलते हैं है ना फॉरवर्ड बाय सिंग का मतलब है p को बैटरी के पॉजिटिव टर्मिनल
से और एन साइड को बैटरी के नेगेटिव टर्मिनल से कनेक्ट करके वोल्टेज देना इसको हम बोलेंगे फॉरवर्ड बायिंक का ग्राफ आपको मिलेगा अगर आप सिलिकॉन की बजाय आप यूज करते जर्मेनियम तो इसके लिए ग्राफ किस टाइप का बनता तो जर्मेनियम के लिए बैरियर पोटेंशियल कितना होता है बताओ 0.3 वोल्ट के बराबर होता है तो 0.3 तक तो करंट फ्लो होता नहीं फिर एकदम से इंक्रीज हो जाता तो यह वाला जो ग्राफ है यह जर्मेनियम के लिए बनता इस तरीके से ग्राफ बनेंगे अलग-अलग जो ग्राफ बनते हैं ना वो अलग-अलग मैटेरियल्स के लिए हैं अगर आप
बेस मटेरियल यूज करते हो सिलिकन तो इस टाइप का ग्राफ बनेगा शेप तो एक जैसी दिखेगी लेकिन ये वोल्टेज की वैल्यू अलग-अलग होंगी इनके लिए जो सिलिकॉन है उसके लिए बैरियर पोटेंशियल कितना होता है 0.7 वोल्ट तो इसके बाद में करंट बढ़ना स्टार्ट होगा और जर्मेनियम के लिए बैरियर पोटेंशियल होता है 0.3 वोल्ट तो इसके बाद में ही करंट इंक्रीज होना स्टार्ट हो हो जाएगा ठीक है अच्छा इसको सर्किट को अगर आप सिर्फ सर्किट सिंबल यूज करके बनाना चाहो अगर पी टाइप एं टाइ मटेरियल नहीं दिखाना चाहो सिर्फ प ए जंक्शन डायोड को दिखाना चाहो
तो आप ये भी सर्किट बना सकते हो ये p साइड है डायोड का ये n साइड है आपने क्या किया यहां पे फॉरवर्ड बायस मतलब p को बैटरी के पॉजिटिव टर्मिनल से कनेक्ट करना है और n साइड को बैटरी के नेगेटिव टर्मिनल से कनेक्ट करना है ठीक है इस तरीके से दिखाना है फिर बीच में क्या लगाएंगे यहां पे अमीटर लगा देंगे मिलीमीटर मिलीमीटर मतलब मिली एंपियर में यह करंट को मेजर करके बता सकता है यहां पर एक वोल्ट मटर लगा देंगे ताकि कितना वोल्टेज हम अप्लाई कर रहे हैं उसको हम मेजर कर पाएं ठीक
है यह वेरिएबल वोल्टेज सोर्स हो गया तो इस तरीके से ये काम करेगा और अगर सिलिकन बेस मटेरियल यूज किया है तो हम यहां पे नीचे लिखेंगे 0.7 वोल्ट यह क्या है इसका बैरियर पोटेंशियल है 0.7 वोल्ट इस तरीके से दिखाते हैं ठीक है आया समझ में तो यह फॉरवर्ड बिंग का मतलब हुआ इसमें हम क्या करेंगे जो p है उसको पॉजिटिव टर्मिनल से और n को नेगेटिव टर्मिनल से कनेक्ट करके वोल्टेज देंगे तो एक पर्टिकुलर वोल्टेज के बाद में करंट इंक्रीज होना स्टार्ट हो जाता है है ना यह जो वोल्टेज है यह कितना होगा
तो यह हमेशा बैरियर पोटेंशियल के बराबर होगा जिसके बाद में करंट इंक्रीज होगा ठीक अब जैसे हमने फॉरवर्ड बायस को समझाया फॉरवर्ड बसिंग को समझाया इसी तरीके से हम समझेंगे अब रिवर्स बासिंगर वर्स बिंग में क्या करना है ये जो पीएन जंक्शन होगा इसको हम बैटरी के जो टर्मिनल्स है उनके अक्रॉस इस तरीके से कनेक्ट करेंगे कि पी साइड को हम बैटरी के नेगेटिव टर्मिनल से कनेक्ट कर रहे होंगे और एन साइड को हम बैटरी के पॉजिटिव टर्मिनल से कनेक्ट कर रहे होंगे इस तरीके से कनेक्ट करना है तो इसको हम बोलते हैं रिवर्स पाइसिंग
उल्टा कनेक्ट कर दिया ना प को नेगेटिव से और n को पॉजिटिव से है ना इस तरीके से कनेक्ट करना है फिर यहां पर लगा देंगे माइक्रोमीटर इस बार माइक्रोमीटर लगाया है क्योंकि रिवर्स वाइस सिंग में एक माइनर सा करंट होगा जिसको हम माइक्रो एंपर में मेजर करेंगे इसलिए इसको माइक्रोमीटर से मेजर किया जाता है फिर यहां पे क्या लगाना है यहां पे लगा देना है एक वोल्ट मटर जो वोल्टेज की रीडिंग लेगा कि कितना वोल्टेज हम यहां पे अप्लाई कर रहे हैं प साइड में बहुत सारे होल्स रहेंगे क्योंकि मेजॉरिटी चार्ज कैरियर कौन होता
है पी साइड में होल्स होते हैं और n साइड में रहेंगे बहुत सारे प्री इलेक्ट्रॉन साथ में माइनॉरिटी चार्ज कैरियर्स को भी दिखा देते हैं p साइड में माइनॉरिटी चार्ज कैरियर होंगे इलेक्ट्रॉन और n साइड में माइनॉरिटी चार्ज कैरियर कौन होंगे होल्स होंगे ठीक है फिर प साइड में एक नेगेटिव आयस की लेयर भी होती है है ना और n साइड में एक पॉजिटिव आयस की लेयर होती इस तरीके से इस लेयर का नाम क्या होता है डिप्लेन लेयर इस लेयर को हम बोलेंगे यहां से यहां तक की लेयर को डिप्लेन लेयर फिर यहां पर
बेरियर पोटेंशियल को हम दिखा देते हैं यह प्लस माइनस और बैरियर पोटेंशियल अगर मैं सिलिकन यूज कर रहा हूं सपोज करो तो यह होगा 0.7 वोल्ट के बराबर ठीक है तो यह कौन सी बायंग है यहां पे रिवर्स पाइसिंग रिवर्स बाइस क्यों बोला क्योंकि देखो p को नेगेटिव से कनेक्ट किया और n को पॉजिटिव से कनेक्ट किया है इसलिए इसको हम बोलते हैं रिवर्स बाइजिंग ठीक है इसका ग्राफ भी बनाएंगे इसके लिए भी वोल्टेज और करंट के बीच में आपको ग्राफ बनाना है करंट को मैं यहां पे नेगेटिव और वोल्टेज को भी मैं नेगेटिव में
शो कर रहा हूं ऐसे क्यों क्योंकि रिवर्स वासिंग कर रहे हैं उल्टा कनेक्ट कर रहे हैं ना इसलिए वोल्टेज को भी नेगेटिव दिखाया और इससे जो करंट फ्लो होगा सर्किट में उसको भी हम नेगेटिव सिंबल के साथ में दिखाएंगे तो ये जो ग्राफ है ये इस तरीके से बनेगा यहां पे ठीक है अब सबसे पहले क्या करना है यहां पर यह जो बैटरी है इसका वोल्टेज इंक्रीज करना स्टार्ट करना है आपको जैसे-जैसे वोल्टेज इंक्रीज करोगे आप ध्यान से देख के बताओ क्या यह वोल्टेज इस बैरियर पोटेंशियल को अपोज करेगा या सपोज सपोर्ट करेगा देख के
बताओ कि यह जो अप्लाइड वोल्टेज है क्या यह इस बैरियर पोटेंशियल को अपोज करेगा या इसको सपोर्ट कर रहा होगा कैसे पता चलेगा यह देखो इस बैरियर पोटेंशियल का नेगेटिव वाला साइड देखो ये किससे कनेक्ट हुआ है इधर जाके नेगेटिव से और पॉजिटिव वाला साइड देखो किससे कनेक्ट हुआ जाके पॉजिटिव से तो यह तो इसमें ऐड हो रहा होगा सेम तरीके से कनेक्ट हो ग ना पॉजिटिव पॉजिटिव से नेगेटिव नेगेटिव से तो बैरियर पोटेंशियल अभी हम किसकी बात कर रहे हैं बैरियर पोटेंशियल की बात करें इसको अप्लाइड वोल्टेज क्या करेगा सपोर्ट करेगा अगर आप यह
वोल्टेज की वैल्यू अगर यहां पर बढ़ाते जाओगे ना तो ये वोल्टेज जिसमें ऐड होता जाएगा ऐसा मान लो ये इसको इंक्रीज करने का काम करेगा तो यहां पर तो पहले करंट फ्लो नहीं हो रहा था जब आप कोई भी वोल्टेज नहीं देते हो जीरो वोल्टेज के ऊपर आप देखते हो कि यहां पर कोई भी करंट नहीं मिलेगा सर्किट में तो अगर आप यह वोल्टेज इंक्रीज करोगे तो यह तो बैरियर को इंक्रीज करेगा बैरियर का काम क्या होता है इलेक्ट्रॉन का या होल्स का फ्लो रोकना एक तरह से तो ये तो और ज्यादा रोकेगा यहां पे
इसका मतलब सर्किट में करंट आपको नहीं मिलेगा ठीक है ये इसको एक और तरीके से भी समझ सकते हो देखो यहां पे p को हमने बैटरी के नेगेटिव टर्मिनल से कनेक्ट किया है तो ये वाली साइड हो गई नेगेटिव और n को हमने बैटरी के पॉजिटिव ट से कनेक्ट किया तो ये वाली साइड हो गई पॉजिटिव ठीक है सिंपल एकदम अब नेगेटिव जो चार्ज है वो क्या करेगा होल्स को अपनी तरफ अट्रैक्ट करेगा होल्स को अपनी तरफ अट्रैक्ट करेगा क्योंकि होल्स के ऊपर कौन सा चार्ज है पॉजिटिव और ये जो पॉजिटिव साइड है एक तरह
से ये इन इलेक्ट्रॉन को अपनी तरफ अट्रैक्ट करेगी तो इलेक्ट्रॉन इधर जाने की कोशिश करेंगे जंक्शन से दूर और होल इधर जाने की कोशिश करेंगे जंक्शन से दूर तो मतलब इलेक्ट्रॉन और होल्स दोनों ही जंक्शन से दूर जाने की कोशिश कर रहे हैं इसको क्रॉस करने की कोशिश कर रहे हैं फॉरवर्ड बसिंग में तो क्या था इधर से इलेक्ट्रॉन और उधर से होल दोनों ही जंक्शन को क्रॉस करने की कोशिश करते हैं लेकिन यहां तो यह दूर जाने की कोशिश कर रहे हैं पॉजिटिव टर्मिनल इलेक्ट्रॉन को अपनी तरफ खींचेगा और यह नेगेटिव टर्मिनल इन होल्स
को अपनी तरफ अट्रैक्ट करेगा जिसकी वजह से यह दोनों ही टाइप के चार्ज कैरियर जंक्शन से दूर होते जाएंगे मतलब जंक्शन क्रॉस नहीं करेंगे और अगर जंक्शन क्रॉस नहीं करेंगे इधर से उधर नहीं जाएंगे तो करंट फ्लो नहीं होगा इसका मतलब सर्किट में करंट क्या मिलेगा जीरो अब आप इस वोल्टेज को बढ़ाते जा रहे हो कंटीन्यूअसली बढ़ाते जा रहे हो तो यहां पर एक एक्टिविटी और हो रही है साथ-साथ यह जैसे जैसे वोल्टेज बढ़ेगा यह वाली साइड ज्यादा ज्यादा और ज्यादा नेगेटिव होती जाएगी और यह वाली साइड और ज्यादा पॉजिटिव होती जाएगी अब यहां पर
कुछ माइनॉरिटी चार्ज कैरियर भी है दोनों साइड में प साइड में माइनॉरिटी चार्ज कैरियर कौन है यह कुछ इलेक्ट्रॉन है जो यहां पर घूम रहे हैं इन इलेक्ट्रॉन को यह नेगेटिव टर्मिनल क्या कर रहा होगा रिपेल कर रहा होगा और इधर से इन होल्स तो यह पॉजिटिव टर्मिनल क्या कर रहा होगा रिपेल कर रहा होगा तो ये जो माइनॉरिटी चार्ज केरियर है कौन इधर तो इलेक्ट्रॉन और इधर होल यह जंक्शन की तरफ जाने की कोशिश कर रहे हैं देख रहे हो आप ये इधर से रिपेल होक जंक्शन की तरफ जाएंगे माइनोटी चार्ज कैरियर होल और
इधर ये जो इलेक्ट्रॉन हैं यह भी इस नेगेटिव टर्मिनल से रिपेल हो के जंक्शन की तरफ जाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन शुरुआत में क्या होगा जब आप ये वोल्टेज इंक्रीज करोगे तो इनके ऊपर ये जो धक्का लग रहा है जो फर्स लग रहा है इस पॉजिटिव और नेगेटिव साइड की वजह से ये बहुत कम रहेगा शुरुआत में लेकिन जैसे-जैसे वोल्टेज बढ़ाओ ग ये फर्स बढ़ता जाएगा एक पॉइंट ऐसा आएगा जहां पे ये फोर्स इतना ज्यादा बढ़ जाएगा कि ये जो माइनॉरिटी चार्ज कैरियर है ये जंक्शन को क्रॉस करके एकदम से करंट फ्लो करना
स्टार्ट कर देंगे और उस टाइम पे जो डायोड है अपना ये जो पीएन जंक्शन है ये जल के खराब हो जाएगा आप ये मानो कि कोई भी सेमीकंडक्टर डिवाइस होता है चाहे वो डायोड हो या और भी जो आईसी वगैरह जितने भी छोटे-छोटे डिवाइस होते हैं ये सब पांच 5 वोल्ट के आसपास काम करते हैं 5 वोल्ट तक यह वोल्टेज को सहन कर सकते हैं तो अगर आप 5 वोल्ट से ज्यादा वोल्टेज अप्लाई करोगे तब जाकर इसका ब्रेक डाउन होगा मतलब यह खराब हो जाएगा तो वो वोल्टेज करीब करीब 8 वोल्ट के आसपास होगा 8
वोल्ट या इससे ज्यादा होगा तब जाके ये मतलब डायोड जल के खराब हो जाएगा तो जैसे जैसे आप वोल्टेज को बढ़ा रहे हो ना नेगेटिव में मतलब नेगेटिव बताने का मतलब क्या है कि यहां पर इसको रिवर्स बाइस किया हुआ है और इस वोल्टेज को हम इंक्रीज कर रहे हैं तो जैसे जैसे वोल्टेज इंक्रीज करोगे शुरुआत में तो करंट जीरो ही रहेगा एक वोल्टेज कैसा आएगा मान लो कि 8 वोल्ट मतलब इस बैटरी का वोल्टेज जब आप 8 वोल्ट कर दोगे जो कि इस डायोड की जो कैपेसिटी है वोल्टेज को सहन करने की उससे ज्यादा
है तो क्या होगा एकदम से इसका ब्रेक डाउन हो जाएगा और एकदम से करंट फ्लो होगा लार्ज करंट फ्लो होगा किसकी वजह से माइनॉरिटी चार्ज कैरियर की वजह से ये जो माइनॉरिटी चार्ज कैरियर्स हैं ये एकदम से करंट फ्लो करेंगे और इसको जला के खराब कर देंगे तो जब हमको ये पता ही है कि 8 वोल्ट पे ये खराब हो जाएगा तो हम 8 वोल्ट तो कभी देंगे ही नहीं इसको जला के खराब थोड़ी करना है इसको हम 8 वोल्ट से कम कम वोल्टेज ही देंगे और अगर इससे कम वोल्टेज दोगे तो सर्किट में करंट
क्या रहेगा ऑलमोस्ट जीरो करंट आपको ऑलमोस्ट जीरो मिलेगा इसका मतलब रिवर्स बायस कंडीशन में क्या एक डायोड से करंट फ्लो हो पाता है नहीं क्यों नहीं हो पाता क्योंकि हम 8 वोल्ट तो इसको देंगे नहीं पहली बात तो ये क्योंकि स्पे जल जाता है खराब हो जाता है तो इससे कम कम वोल्टेज ही देंगे पाछ वोल्ट तक मैक्सिमम तब तक ये काम करेगा नहीं तो इसमें रिवर्स वाय कंडीशन में करंट फ्लो होगा ही नहीं इसके अंदर तो इससे हमको एक बात यह समझ में आई कि जो डायोड होता है या पीएन जंक्शन होता है वो
सिर्फ फॉरवर्ड बायस कंडीशन में ही करंट फ्लो होने देता है ठीक है अगर इसको रिवर्स बायस कंडीशन में आपने कनेक्ट कर दिया तो यह करंट फ्लो नहीं होने देगा जैसे इसका सर्किट डायग्राम यह बनाएंगे जैसे यह पी ए जंक्शन डायोड है रिवर्स वाइस में क्या करना है पी साइड को बैटरी के नेगेटिव टर्मिनल से और एन साइड को बैटरी के पॉजिटिव टर्मिनल से कनेक्ट करना है बीच में क्या लगा देंगे माइक्रो करंट को मेजर करने के लिए और यह लगा दिया यहां पर वोल्ट मटर ठीक और यह हो गया वेरिएबल वोल्टेज सोर्स इसका वोल्टेज हम
कम ज्यादा कर सकते हैं तो आप यह सर्किट सिंबल लगा के बना के इसको बता सकते हो कि पी साइड को हमने बैटरी के नेगेटिव टर्मिनल से कनेक्ट किया और एन साइड को हमने बैटरी के पॉजिटिव टर्मिनल से कनेक्ट किया है तो यह रिवर्स वाइज कंडीशन में है और रिवर्स वाइज कंडीशन में इसमें से करंट फ्लो नहीं होगा तो यह जो डायोड है या पीएन जंक्शन है ये एक यूनि डायरेक्ट ल डिवाइस होता है क्या होता है यूनिडायरेक्शनल डिवाइस यूनिडायरेक्शनल का मतलब समझते हो क्या यूनिडायरेक्शनल का मतलब है सिर्फ एक ही डायरेक्शन में इसमें से
करंट फ्लो होगा और वो किधर होगा जब आप इसको फॉरवर्ड बायस कनेक्ट करोगे और फॉरवर्ड बसिंग में किधर से किधर करंट फ्लो होता है p से n की तरफ जा रहा होता है जो करंट होता है ना सर्किट में मैं दिखा देता हूं डायग्राम जो करंट होगा यह बैटरी का पॉजिटिव टर्मिनल है ये नेगेटिव है और फॉरवर्ड बाय इस कंडीशन में जब आप इस बैरियर पोटेंशियल को कैंसिल कर चुके होंगे तो करंट किधर से किधर जा रहा होगा इस p से पॉजिटिव टर्मिनल से और नेगेटिव टर्मिनल की तरफ इस तरीके से सर्किट में करंट फ्लो
हो रहा होगा ठीक है तो करंट की डायरेक्शन क्या है यहां पे ध्यान से देख के बताओ p से n की तरफ जा रहा है ना करंट इसमें अगर बताओगे तो प से n की तरफ इधर होगा करंट फॉरवर्ड बायस कंडीशन में डायोड में से जो करंट फ्लो होता है या पीएन जंक्शन में से जो करंट फ्लो होता है वो हमेशा प साइड से ए साइड की तरफ फ्लो होगा ठीक है इस तरीके से करंट फ्लो होगा और जब आप इसको रिवर्स बायस में कनेक्ट कर रहे हो तो क्या इसमें रिवर्स बायस में पॉजिटिव टर्मिनल
से नेगेटिव टर्मिनल की तरफ फ्लो होता है करंट बैटरी के तो इधर से करंट इधर जाने की कोशिश करेगा तो क्या ये इसको फ्लो होने देगा नहीं जी ये इसको फ्लो नहीं होने देगा मतलब n से p साइड की तरफ करंट फ्लो नहीं होता इसके अंदर तो डायोड के लिए इसीलिए इसको यूनिडायरेक्शनल डिवाइस बोला जाता है कौन सा डिवाइस यूनिडायरेक्शनल क्योंकि ये सिर्फ एक ही डायरेक्शन में करंट को फ्लो होने देता है और वो डायरेक्शन आपको याद रखनी है कौन सी डायरेक्शन होगी वो वो होगी प से ए की तरफ मतलब इसमें प से ए
की तरफ ही करंट फ्लो होगा कभी भी n से प की तरफ रिवर्स उसमें करंट फ्लो नहीं होगा इसलिए इसका नाम है यूनिडायरेक्शनल डिवाइस आया समझ में तो यह काफी इंपॉर्टेंट है फॉरवर्ड बाइस सिंग और रिवर्स बसिंग यह बहुत बार एग्जाम में पूछते हैं तो स्टार लगा लेना वेरी इंपॉर्टेंट यह ग्राफ वगैरह भी आपको याद करने हैं ठीक है आया समझ में कोई भी डाउट है तो बता दो इसमें इसके बाद में नेक्स्ट है फिर पीएन डायोड एज अ रेक्टिफायर नेक्स्ट टॉपिक क्या है पीएन जंक्शन डायोड एज ए रेक्टिफायर देखो रेक्टिफायर एक सर्किट होता है
जिसको हम यूज करते हैं जब हमें एसी को डीसी में कन्वर्ट करना होता है तब इस सर्किट को यूज किया जाता है यह जो रेक्टिफायर सर्किट है इसका काम क्या है एसी को डीसी में कन्वर्ट करने में हेल्प करना दो-तीन सर्किट होते हैं उनसे फिर एसी पूरे तरीके से डीसी में कन्वर्ट होती है तो उसमें जो पहला जो डिवाइस यूज करते हैं वो होता है रेक्टिफायर सर्किट इसके बाद में एक फिल्टर सर्किट यूज करते हैं फिर एक वोल्टेज रेगुलेटर की तरह एक जनर डायोड को यूज़ करते हैं फिर हमें एकदम प्रॉपर डीसी मिलती है लेकिन
अगर मैं रेक्टिफायर को मोटे तौर पर डिफाइन करूं तो इसका काम होता है एसी को डीसी में कन्वर्ट करना एक तरह से या उसमें हेल्प करना मतलब इसमें इनपुट क्या दिया जाएगा एसी और आउटपुट क्या मिलेगा डीसी प्रॉपर तरीके से डीसी नहीं मिलेगा मैं आपको बता देता हूं एकदम डिश नहीं मिलेगा क्योंकि इसमें आगे और भी सर्किट मिलेंगे उसमें फिल्टर सर्किट और जनर डायोड तरीके से यूज़ करके प्रॉपर डीसी हम ऑब्टेन करेंगे लेकिन मोटे तौर पे यही बोला जाता है कि रेक्टिफायर का काम क्या होता है एसी को डीसी में कन्वर्ट करना अब ये दो
टाइप के होते हैं जो रेक्टिफायर सर्किट है ना ये दो टाइप के होते हैं पहला है इसके अंदर हाफ वेव रेक्टिफायर और दूसरा क्या होगा फुल वेव रेक्टिफायर पहला हम अभी डिस्कस कर रहे हैं हाफ वेव रेक्टिफायर हाफ वेव रेक्टिफायर इसलिए बोलते हैं क्योंकि ये जो एसी इनपुट इसको दिया जाता है उसका हाफ पोर्शन ये रेक्टिफाई कर पाता है और हाफ पोर्शन को ये रिमूव कर देता है इसलिए इसका का नाम होता है हाफ वेव रेक्टिफायर जैसे जो एसी वेव फॉर्म है वो कुछ इस तरीके से होती है यह क्या है ये इनपुट एसी वोल्टेज
है और जो आउटपुट आपको मिलेगा उसके लिए हम वेब फॉर्म यहां पर ड्र करके बताएंगे इसका पहले एक बार फंक्शन समझ लेते हैं कि ये किस तरीके से काम करेगा उसके बाद में इसको वेब फॉर्म को ड्र करेंगे तो यह तो इनपुट वोल्टेज है जो आपने दिया है यहां पे इनपुट वोल्टेज कैसा दिया हमने एसी इनपुट वोल्टेज दिया है जो कंटीन्यूअसली चेंज हो रहा होगा ठीक है अच्छा यहां पे ये क्या चीज कनेक्टेड है यहां पे इसको हम बोलते हैं डायोड ये जो सर्किट सिंबल है ये डायोड का सर्किट सिंबल होता है मतलब यहां पे
हमने एक डायोड कनेक्ट किया है या डायोड यूज किया है ये यहां पे एक लोड रेजिस्टेंस है जिसके अक्रॉस हम आउटपुट वोल्टेज को मेजर करेंगे ठीक है और यह क्या चीज है यहां पे ये देख के बताओ ये क्या चीज कनेक्ट करी है तो ये होता है ट्रांसफार्मर ये जो सर्किट सिंबल है यह ट्रांसफार्मर का सर्किट सिंबल होता है यह जो डिवाइस यहां पर यूज किया जा रहा है यह क्या चीज है यहां पे ट्रांसफार्मर यह क्यों यूज किया देखो घर पर जो अपने सप्लाई आती है वो 220 वोल्ट के आसपास आती है अब डायोड
या कोई भी सेमीकंडक्टर डिवाइस हो ये तो 5 वोल्ट के आसपास ही काम करेगा तो 220 वोल्ट अगर डायरेक्टली इसको आपने दे दिया तो ये तो जल के खराब हो जाएगा फॉरवर्ड बसिंग कंडीशन में अगर आपने डायोड को या रिवर्स बसिंग कंडीशन हो अगर डायोड को मतलब कि पाछ वोल्ट से ज्यादा वोल्टेज दे दिया जाता है तो ये जल के खराब हो जाते हैं तो आपको कम वोल्टेज देना है इसको को आपके घर पे जो सप्लाई आ रही है वो तो 220 वोल्ट आ रही है तो उसको कम करना पड़ेगा तो कम करने के लिए
फिर हम यहां पे एक ट्रांसफार्मर यूज करेंगे तो यह वोल्टेज को कम करने का काम करेगा इसलिए इसका नाम क्या रखा जाएगा स्टेप डाउन ट्रांसफॉर्मर कौन सा ट्रांसफॉर्मर यूज करेंगे स्टेप डाउन ट्रांसफॉर्मर जिसका काम होता है वोल्टेज को कम करना स्टेप डाउन का काम होता है वोल्टेज को कम करना और स्टेप अप ट्रांसफॉर्मर का काम होता है वोल्टेज को बढ़ाना ठीक है तो एक क्वेश्चन तो इसपे यही बन बन जाता है छोटा सा रेक्टिफायर की कि जो इसमें ट्रांसफार्मर यूज किया जाता है वो कौन से टाइप का ट्रांसफॉर्मर होता है तो होता है स्टेप डाउन
ट्रांसफॉर्मर ठीक है ये इसका सर्किट सिंबल है तो मान लो कि यहां पे 220 वोल्ट हमने इसको इनपुट में दिया तो ये उसको पाच या 6 वोल्ट के आसपास कर देगा मतलब वोल्टेज को डाउन कर देगा कम कर देगा तो वोल्टेज को कम करके यहां पे हम इस सर्किट को दे सकते हैं अब मान लो कि यहां पे जो इनपुट वोल्टेज है ये जो इनपुट आपने दिया है इसको इसका पॉजिटिव हाफ साइकिल यहां पे इनपुट में दिया जा रहा है अगर आप पॉजिटिव हाफ साइकिल इनपुट में दोगे तो ये वाला सिरा प्लस रहेगा ये वाला
सिरा माइनस रहेगा लेकिन अगर नेगेटिव हाफ साइकिल इनपुट में आएगा इस सर्किट के लिए तो उल्टा हो जाएगा ये माइनस हो जाएगा और ये क्या हो जाएगा प्लस ये ध्यान रखना है तो अभी हम क्या दे रहे हैं यहां पे इनपुट में पॉजिटिव हाफ साइकिल दे रहे हैं ये पॉजिटिव हाफ साइकिल में क्या होगा ये वाला सिरा प्लस ये वाला सिरा माइनस अब ये जो डायोड है इसका ये वाला सिरा p बोला जाता है ये वाला सिरा n बोला जाता है अब देख के बताओ कि ये जो डायोड है क्या ये फॉरवर्ड बायस है या
रिवर्स बायस है जब यहां पे एसी का पॉजिटिव हाफ साइकिल हम कंसीडर कर रहे हैं मतलब ऊपर वाले सिरे को पॉजिटिव और नीचे वाले सिरे को नेगेटिव कंसीडर कर रहे हैं तो बताओ क्या ये डायोड फॉरवर्ड बायस है या रिवर्स बायस है देख के बताओ फॉरवर्ड बायस या रिवर्स बायस कैसे पता चलेगा तो प साइड पॉजिटिव से कनेक्टेड है और ए साइड किससे कनेक्ट हुई है नेगेटिव से इसका मतलब ये फॉरवर्ड बायस है और फॉरवर्ड बायस में तो डायोड काम करता ही है तो ये डायोड काम करेगा और इसमें से सर्किट में से करंट फ्लो
होगा और करंट की वजह से इस रेजिस्टेंस के अक्रॉस कुछ पोटेंशियल डिफरेंस भी आएगा जो कि अपना आउटपुट होगा और एक चीज और कि जैसे-जैसे ये इनपुट जो वोल्टेज है इसका पॉजिटिव हाफ साइकिल देखो इसमें वोल्टेज बढ़ रहा होगा तो वैसे-वैसे यहां पे सर्किट में करंट भी बढ़ रहा होगा और इस रेजिस्टेंस के अक्रॉस वोल्टेज डिफरेंस या पोटेंशियल डिफरेंस भी बढ़ रहा होगा और जब ये वोल्टेज कम होके जीरो हो जाएगा इस पॉइंट पे तो सर्किट के अंदर करंट भी कम होक जीरो हो जाएगा मतलब रेजिस्टेंस r ए के अक्रॉस जो आउटपुट वोल्टेज है यह
भी जीरो हो जाएगा इसका मतलब जैसे-जैसे इनपुट वोल्टेज चेंज हो रहा है वैसे-वैसे जो आउटपुट वोल्टेज है वो चेंज होता रहेगा तो जैसा इनपुट ये जो इनपुट यह पॉजिटिव हाफ साइकिल है वैसा का वैसा ही आपको आउटपुट पॉजिटिव हाफ साइकिल मिलेगा मतलब आउटपुट भी वैसा ही मिलेगा कहने का मतलब यही है कि जैसा इनपुट दिया है वैसा का वैसा आपको आउटपुट मिल गया यहां पे पॉजिटिव हाफ साइकिल के दौरान अब मान लो कि आपने यहां पर नेगेटिव हाफ साइकिल इनपुट में दिया तो अब क्या हो जाएगा ये वाला सिरा हो गया नेगेटिव और यह वाला
सिरा क्या हो गया पॉजिटिव हो गया ये वाला सिरा क्या हो गया नेगेटिव ये वाला सिरा क्या हो गया पॉजिटिव अगर ये नेगेटिव है ये पॉजिटिव है तो क्या होगा अगर ये नेगेटिव और ये पॉजिटिव है तो अब ये जो डायोड है इसको देखो p नेगेटिव से कनेक्ट हो गया ना और n किससे कनेक्ट हो गया पॉजिटिव से तो ये तो रिवर्स बायस हो गया और रिवर्स बायस कंडीशन में क्या डायोड से करंट फ्लो होता है नहीं जी इसमें से करंट फ्लो नहीं होगा इसका मतलब डायोड काम करेगा ही नहीं ये करंट को फ्लो ही
नहीं होने देगा सर्किट में और करंट फ्लो नहीं होगा तो इस रेजिस्टेंस के अक्रॉस जो पोटेंशियल डिफरेंस है वो क्या रहेगा जीरो इसका मतलब आउटपुट जीरो मिलेगा आपको तो इसको हम ग्राफ के अंदर इस तरीके से दिखाएंगे जीरो वाली लाइन ये है फिर वापस पॉजिटिव हाफ साइकिल आ जाएगा क्योंकि एसी में पॉजिटिव और नेगेटिव हाफ साइकिल ये बार-बार रिपीट होते रहते हैं तो जैसे ही पॉजिटिव हाफ साइकिल आएगा वापस से डायोड क्या हो जाएगा फॉरवर्ड बायस फॉरवर्ड बायस में ये आउटपुट देगा तो जैसा इनपुट दिया है वैसे ही आउटपुट आपको मिल जाएगा फिर नेगेटिव हाफ
साइकिल आएगा यह वापस उसको उड़ा देगा तो आप देख रहे हो कि जो आउटपुट है उसमें सिर्फ पॉजिटिव हाफ साइकिल ही आपको देखने को मिलेगा यह नेगेटिव हाफ साइकिल को कंप्लीट रिमूव करता जा रहा है कौन से वाले पोर्शन को रिमूव कर देगा नेगेटिव वाले पोर्शन को रिमूव कर देगा अब आप बोलोगे सर जो रेक्टिफायर है उसका काम होता है एसी को डीसी में कन्वर्ट करना अब ये डीसी में तो कन्वर्ट हुआ ही नहीं तो पूरे तरीके से डीसी में कन्वर्ट नहीं हुआ है लेकिन इसमें डीसी वाली एक प्रॉपर्टी आ गई अब डीसी क्या होता
है यूनिडायरेक्शनल करंट होता है डायरेक्ट करंट या डीसी क्या होता है यूनिडायरेक्शनल करंट होता है यानी कि उसकी डायरेक्शन बार-बार चेंज नहीं होती है यहां पर देखो यह जो वोल्टेज है ये सिर्फ पॉजिटिव साइड में ही आपको मिल रहा है नेगेटिव वाली साइड में मिल रहा है क्या नहीं इसका मतलब इसकी डायरेक्शन चेंज होगी क्या नहीं जी इसकी डायरेक्शन चेंज नहीं होगी इसका मतलब यहां पर जो आउटपुट वोल्टेज है वह डायरेक्शन चेंज नहीं कर रहा है इसमें नेगेटिव वाला हाफ साइकिल रिमूव हो गया ना इसका मतलब अपोजिट डायरेक्शन में करंट फ्लो होगा ही नहीं या
तो फ्लो होगा तो एक ही डायरेक्शन में होगा या फिर नहीं होगा नेगेटिव वाली साइड में करंट नहीं जाएगा उल्टा करंट नहीं होगा इसलिए हम बोलेंगे कि इसमें डीसी वाली एक प्रॉपर्टी आ गई तो वैसे तो ये अभी पूरे तरीके से डीसी नहीं है अभी भी इसमें डीसी और एसी दोनों की प्रॉपर्टीज है जैसे अल्टरनेटिंग करंट चेंज हो रहा है ना पहले बढ़ रहा है फिर कम हो रहा है वैसे ये भी बढ़ रहा है कम हो रहा है लेकिन जैसे डीसी क्या होता है डायरेक्शन चेंज नहीं करता वैसे ये भी डायरेक्शन चेंज नहीं कर
रहा तो इसको हम बोलेंगे कि ये ए ् ये हाफ वेव रेक्टिफायर का काम है हाफ वेव रेक्टिफायर का काम यही होता है कि हाफ वेव को रेक्टिफाई करके आउटपुट में देना और हाफ पोर्शन को रिमूव कर देना ठीक है इसकी जो एफिशिएंसी है वो काफी कम होती है एफिशिएंसी को हम ईटा के सिंबल से रिप्रेजेंट करते हैं और इसकी एफिशिएंसी होती है 40.6 पर के आसपास एफिशिएंसी कितनी होगी इसकी 40.6 पर के आसपास देखो जितना भी इसको इनपुट में वोल्टेज दिया उसका हाफ पोर्शन तो इसने रिमूव ही कर दिया पहली बात तो तो 50
पर तो वैसे ही रिमूव हो गया 50 पर एफिशिएंसी तो वैसे ही कम हो गई क्योंकि आधा ही आउटपुट दे पा रहा है यह जितना भी इसको इनपुट वोल्टेज दोगे उसका आधा ही दे पाएगा आधा पोर्शन तो रिमूव कर देगा यह वो आउटपुट में मिलेगा ही नहीं हमको और बाकी जो आधा बचा है % उसमें भी नॉइस या हीट की फॉर्म में कुछ लॉसेस होंगे जिसकी वजह से एफिशिएंसी सिर्फ और सिर्फ कितनी आएगी 40.6 पर के आसपास आती है तो जो हाफ वेव रेक्टिफायर होंगे याद रखना इनकी एफिशिएंसी कितनी होती है 30.6 पर के बराबर
होगी तो ये बहुत अच्छा रेक्टिफायर सर्किट नहीं है एक तरह से क्योंकि इसमें एफिशिएंसी कम आ रही है एफिशिएंसी कम जिस डिवाइस की होती है ना वो अच्छा डिवाइस नहीं माना जाता है एफिशिएंसी ज्यादा होनी चाहिए जो आइडियल डिवाइसेज होते हैं उनकी एफिशिएंसी होती है 100% आईडीएल की बात कर रहे हैं अब ये आइडियल तो नहीं है लेकिन फिर भी इसकी एफिशिएंसी काफी कम है इसलिए हम इसको यूज नहीं करते हैं हम दूसरा वाला जो सर्किट अभी पढ़ेंगे जिसको हम बोलते हैं या दूसरा वाला जो रेक्टिफायर हम पढ़ेंगे जिसको हम बोलेंगे फुल वेव रेक्टिफायर वो
हम यूज करते हैं आया समझ में ठीक है छोटे क्वेश्चन क्या बनते हैं इसके ऊपर इसमें ट्रांसफॉर्मर कौन सा यूज किया जाता है तो स्टेप डाउन ट्रांसफॉर्मर यूज करते हैं इसकी एफिशिएंसी कितनी होती है 40.6 पर के आसपास होती है ये इसमें छोटे क्वेश्चन बनेंगे ठीक है यह भी पूछा जा सकता है कि इसमें कितने डायोड यूज करते हैं तो एक ही डायोड यूज करते हैं ठीक है कितने डायोड यूज करेंगे इसके अंदर एक ही डायोड यूज करेंगे ठीक य इस पर बनने वाले छोटे क्वेश्चन हो गए अब हम देखते हैं कि जो फुल वेव
रेक्टिफायर है वो किस तरीके से काम करेगा अब हम क्या देखेंगे फुल वेव रेक्टिफायर जो फुल वेव रेक्टिफायर है देखो उसमें दो डायोड यूज़ करते हैं ये जो सर्किट सिंबल यहां पे दिखा रखा है ये किसका सर्किट सिंबल है डायोड का ये है डायोड d1 ये है डायोड d2 फिर यहां पे एक रेजिस्टेंस लगा रखा है जिसको हम बोलते हैं लोड रेजिस्टेंस जिसका काम होता है आउटपुट वोल्टेज देना या आउटपुट देना एक तरह से यहां पे ये क्या चीज लगी हुई है ये वही स्टेप डाउन ट्रांसफॉर्मर है लेकिन यह थोड़ा सा डिफरेंट टाइप का स्टेप
डाउन ट्रांसफॉर्मर है क्या डिफरेंट है इसके अंदर इसमें देखो यह जो इसको हम बोलते हैं प्राइमरी कॉइल यह है इसके अंदर सेकेंडरी कॉइल यह जो सेकेंडरी कॉइल है इसके बीच में एक टर्मिनल कनेक्ट करके हमने बाहर निकाला हुआ है तो इसको हम बोलते हैं सेंटर टेप ट्रांसफॉर्मर है तो यह स्टेप डाउन टाइप का ही कौन सा है स्टेप डाउन ट्रांसफॉर्मर य लेकिन कौन से टाइप का है सेंटर टेप स्टेप डाउन ट्रांसफॉर्मर ठीक है और इसमें दो डायोड यूज की जा रही है फिर यहां पे बाकी जो मेन मेन जो काम है वो तो वैसे ही
है जैसे इनपुट में हम इसको एक हाई वोल्टेज देंगे 220 वोल्ट जो अपने घर पे सप्लाई आती है फिर ये जो ट्रांसफार्मर है यह क्या करेगा उसको लो वोल्टेज में कन्वर्ट करेगा लो वोल्टेज में कन्वर्ट होगा तो यहां पे हमको जो आउटपुट है इस ट्रांसफॉर्मर का वहां पे हमको लो वोल्टेज मिल रहा होगा ये वोल्टेज करीब-करीब 56 वोल्ट के आसपास होगा तो यह काम कौन कर रहा है वोल्टेज को कम करने का ये सेंटर टैप स्टेप डाउन ट्रांसफॉर्मर यह काम कर रहा है ठीक है अब मान लो यहां पर यह जो स्टेप डाउन ट्रांसफॉर्मर है
इसने क्या किया 220 वोल्ट को जो इनपुट दिया था हमने उसको कम कर दिया यहां पर ठीक है यहां पर कम कर दिया अब यहां पर यह है इनपुट वेव फॉर्म य इनपुट वोल्टेज यहां पर दिखा रहे हैं हम लोग यह पॉजिटिव हाफ साइकिल य नेगेटिव फिर पॉजिटिव और यहां पर आउटपुट वोल्टेज मिलेगा जो हम इस वाले पोर्शन में नीचे वाले ग्राफ में ड्र करेंगे सबसे पहले क्या करना है यहां प पॉजिटिव हाफ साइकिल कंसीडर करना है इसकी वर्किंग बता रहा हूं कैसे काम करेगा सबसे पहले पॉजिटिव हाफ साइकिल यहां पर इनपुट में जाएगा तो
यह वाला सिरा हो जाएगा पॉजिटिव और ये वाला सिरा हो जाएगा नेगेटिव ये वाला सिरा क्या हो गया पॉजिटिव ये वाला सिरा क्या हो गया नेगेटिव हो गया ठीक है अब ध्यान से देख के बताओ कि कौन सा डायोड यहां पर फॉरवर्ड बायस है और कौन सा डायोड यहां पे रिवर्स बायस है डायोड के लिए यह वाला साइड प होगा येय n होगा इसमें भी ये प होगा और ये होगा n तो देख के बताओ कौन सा डायोड यहां पर फॉरवर्ड बा कौन सा रिवर्स बायस है या दोनों ही फॉरवर्ड बायस है या दोनों ही
रिवर्स बायस है देख के बताओ कैसे चेक करना है प अगर पॉजिटिव से कनेक्ट हो गया तो वो फॉरवर्ड बायस है अगर प नेगेटिव से कनेक्ट हो गया तो रिवर्स बायस है डायोड d1 को देखो इसका प पॉजिटिव से कनेक्टेड है और डायोड d2 को देखो इसका प नेगेटिव से कनेक्टेड है इसका मतलब यह तो हो गया रिवर्स बायस और ये हो गया फॉरवर्ड बायस तो अभी यह क्या है रिवर्स बायस है और यह क्या है फॉरवर्ड बायस कौन सा ऊपर वाला डायोड ठीक है तो ये तो है फॉरवर्ड बायस और ये क्या है यहां
पे रिवर्स बायस है इतनी बात क्लियर है क्या ठीक अब ये वाला डायोड तो काम करेगा क्योंकि फॉरवर्ड बायस कंडीशन में डायोड में से करंट फ्लो होता है तो इसमें कोई दिक्कत नहीं है और किधर से किधर करंट फ्लो होगा p से n की तरफ जाएगा ऐसे करंट ऐसे घूम के वापस आएगा नीचे क्यों नहीं जा रहा क्योंकि ये वाला डायोड क्या है रिवर्स बायस और रिवर्स बायस कंडीशन में डायोड में से करंट फ्लो नहीं होता इसलिए नीचे वाला जो ये सर्किट है इसमें करंट नहीं जाएगा तो करंट इधर से जाएगा इधर से होता हुआ
इधर जाएगा फिर इधर से होता हुआ इधर और इधर से होता हुआ वापस इधर आ जाएगा तो यह करंट की डायरेक्शन रहेगी ठीक है तो आउटपुट आपको मिलेगा इस आउट ये जो लोड रेजिस्टेंस है इसके क्रॉस और जैसे इनपुट दे रहे हैं वैसे ही आउटपुट मिलेगा तो यह वे फॉर्म यहां पर मैं ड्र कर देता हूं कौन सा डायोड काम कर रहा है अभी डायोड d1 काम कर रहा है ठीक है अब मान लो कि यहां पे जो इनपुट वोल्टेज है उसका नेगेटिव हाफ साइकिल इनपुट में आया तो ये वाला सिरा क्या हो जाएगा नेगेटिव
और ये वाला सिरा क्या हो जाएगा पॉजिटिव पोलटी रिवर्स हो जाएगी अब अब ये नेगेटिव हो गया ये प्लस हो गया है ना अच्छा ये नेगेटिव है तो इस डायोड को देखो इसका प अब नेगेटिव से कनेक्ट हो गया तो ये क्या हो गया अब ये हो गया रिवर्स बायस क्या हो गया ये रिवर्स बायस और यह प पॉजिटिव से कनेक्ट हो गया इसका मतलब ी हो गया यह वाला डायोड हो गया फॉरवर्ड बायस जब पॉजिटिव हाफ साइकिल इनपुट में आया था तो ऊपर वाला डायोड फॉरवर्ड बायस था और नीचे वाला डायोड रिवर्स बस था
लेकिन जैसे नेगेटिव हाफ साइकिल आया पोलैरिटी रिवर्स हो गई तो यहां पे ऊपर वाला जो डायोड है वो तो हो गया रिवर्स बस और नीचे वाला डायोड क्या हो चुका है फॉरवर्ड बायस हो चुका है इससे क्या फर्क पड़ेगा अब नीचे वाला डायोड काम करेगा ऊपर वाला नहीं करेगा तो अब सर्किट में जो करंट फ्लो होगा वो p से n की तरफ जा रहा होगा इधर जाएगा पहले करंट फिर ऊपर जाएगा फिर इधर से इधर आ जाएगा और फिर वापस घूम के आ जाएगा इस तरीके से सर्किट में करंट फ्लो होगा ठीक और आपको आउटपुट
भी मिलेगा अब ऊपर वाला जो सर्किट है क्या वो अभी काम कर रहा होगा नहीं क्योंकि ये रिवर्स बायस है तो ये ऊपर वाला सर्किट है ये काम नहीं कर रहा अब सिर्फ सेकंड वाला नीचे वाला हाफ पोर्शन है सर्किट का ये काम कर रहा है तो एट ए टाइम ये जो सर्किट है इसका हाफ पोर्शन ही काम कर पाएगा जब पॉजिटिव हाफ साइकिल इनपुट में देंगे तो ऊपर वाला जो पोर्शन है यानी कि डायोड d1 काम कर रहा होगा तो ऊपर वाला पोर्शन काम कर रहा होगा सर्किट का और जब नेगेटिव हाफ साइकिल इनपुट
में आएगा तो इस सर्किट का जो लोअर पोर्शन है ये वाला यानी कि डायोड d2 वाला यह वाला पोर्शन काम कर रहा होगा लेकिन एक चीज नोटिस करो पहले जब डायोड d1 काम कर रहा था तो सर्किट में करंट किधर था ऐसे राइट से लेफ्ट की तरफ जा रहा था इस रेजिस्टेंस के थ्रू और जब नीचे वाला सर्किट काम कर रहा है तब भी करंट किधर जा रहा है राइट से लेफ्ट की तरफ जा रहा है क्या करंट की डायरेक्शन चेंज हुई क्या यहां पे नहीं इनपुट में तो वोल्टेज चेंज हो रहा है पहले पॉजिटिव
हाफ साइकिल था तब करंट इधर जा रहा था जब नेगेटिव हाफ साइकिल है तो इनपुट तो चेंज हो रहा है लेकिन क्या उसके अकॉर्डिंग आउटपुट करंट की डायरेक्शन चेंज हुई क्या नहीं जब नेगेटिव हाफ साइकिल है तब भी करंट इधर से इधर ही जा रहा है मतलब जब पॉजिटिव हाफ साइकिल इनपुट में आया तब भी करंट इधर से इधर गया इस रेजिस्टेंस के थ्रू और जब नेगेटिव हाफ साइकिल इनपुट में आया तब भी करंट इधर से इधर गया मतलब दोनों ही सिचुएशन में करंट की डायरेक्शन क्या है सेम है क्या करंट की डायरेक्शन यहां पे
बदल रही है नहीं जी करंट की डायरेक्शन नहीं बदल रही और अगर करंट की डायरेक्शन नहीं बदल रही इसका मतलब जो आउट आउटपुट है वो उसी डायरेक्शन में मिलेगा जिधर पहले मिल रहा था जैसे पॉजिटिव हाफ साइकिल के दौरान आपको आउटपुट ऐसा मिला तो नेगेटिव हाफ साइकल का आउटपुट भी ऐसा ही मिलेगा सेम डायरेक्शन में ये नेगेटिव में क्यों नहीं गया क्योंकि वहां पे डायरेक्शन चेंज नहीं हो रही है आउटपुट करंट देखो एक ही डायरेक्शन में है पहले केस में और दूसरे केस में रेजिस्टेंस आए में से करंट एक ही डायरेक्शन में फ्लो हो रहा
है इसलिए ऐसा नहीं होगा अभी डायोड d2 काम कर रहा होगा फिर वापस पॉजिटिव हाफ साइकिल आएगा तो डायोड d1 काम करेगा और यह वाला आउटपुट मिलेगा फिर जब नेगेटिव हाफ साइकिल आएगा तो डायोड d2 काम कर रहा होगा वो भी आपको पॉजिटिव वाली साइड में ही मिलेगा नेगेटिव हाफ साइकिल इसमें आएगा ही मतलब नेगेटिव हाफ साइकिल नेगेटिव वाली साइड में नहीं आएगा वो पॉजिटिव साइड में कन्वर्ट होके आपको मिलेगा आया समझ में इसका मतलब यह है कि यहां पर जो पूरी की पूरी वेव फॉर्म है पॉजिटिव और नेगेटिव हाफ साइकिल दोनों वो आपको आउटपुट
में मिल रहे हैं है ना इसीलिए इसका नाम क्या है इसका नाम होता है फुल वेव रेक्टिफायर क्या बोलते हैं इसको फुल वेव रेक्टिफायर क्योंकि ये पू पूरी की पूरी वेव को आउटपुट में दे पाता है इसलिए इसका नाम रख दिया फुल वेव रेक्टिफायर इसकी जो एफिशिएंसी है जिसको हम ईटा से रिप्रेजेंट करेंगे यह हाफ वेव रेक्टिफायर से डबल होती है तो ये होगी 81.2 पर के बराबर एफिशिएंसी ऑफ द फुल वेव रेक्टिफायर कितनी होती है 81.2 पर के बराबर होती है तो यह जो फुल वेव रेक्टिफायर है ये एक तरह से ज्यादा एफिशिएंट है
जो इनपुट वोल्टेज इसको दिया जाएगा उसका 81.2 परसेंट पोर्शन एक तरह से आउटपुट में आपको दे देगा बाकी कहां चला गया तो बाकी हीट या नोइज की फॉर्म में जो लॉस हुआ उसके अंदर चला गया लेकिन ये हाफ वेव रेक्टिफायर से काफी बेटर है छोटे क्वेश्चंस क्या बन सकते हैं इसके ऊपर पहला क्वेश्चन कि इसमें जो ट्रांसफॉर्मर है वो कौन से टाइप का होता है तो वो होता है सेंटर टेप स्टेप डाउन ट्रांसफॉर्मर दूसरा छोटा क्वेश्चन क्या बनेगा कि इसमें कितने डायोड यूज होते हैं दो डायोड यूज करेंगे तीसरा क्वेश्चन कि इसकी एफिशिएंसी कितनी होती
है 81.2 पर के बराबर होती है तो यह इसके मेजर यूज है है ना और इसका जो आउटपुट है वो प्रॉपर तरीके से एकदम डीसी भी नहीं दिखेगा आपको तो इससे कंफ्यूज मत होना लेकिन ये डीसी की तरह हो गया है यूनि डायरेक्शनल हो गया ना इसलिए हम इसको डीसी के जैसा बोल रहे हैं कि एसी को डीसी में कन्वर्ट करना हो तो हम उसके लिए रेक्टिफायर सर्किट यूज करते हैं आया समझ में क्लियर एकदम कोई भी डाउट है तो बता दो ठीक है