तो आदाब नमस्कार गुड इवनिंग स अकाल एक बार फिर आप तमाम लोग का स्वागत है कम तक की कहानी के इस एपिसोड में उम्मीद है पूरी फैमिली अच्छी होगी अपना और अपनों का ख्याल रख रही होगी 1500 से ज्यादा कहानिया आपको सुना चुका हूं हो सकता है कुछ पुनर्जन्म की भी कहानी सुनाई हो लेकिन मुझे लगता है आज जो कहानी में आपको सुनाने जा रहा हूं आप में से मालूम नहीं कितने ने सुनी होगी लेकिन मैंने कम से कम ऐसी कहानी नहीं सुनी यह वह कहानी है जिसको जब समझा रिसर्च किया इसके पीछे तमाम खोज
रहा था बहुत सारी स्टडी करनी पड़ी तो उस कहानी को जानते हुए और जब मैं कहानी में डूब रहा था मैं खुद डर रहा था और डर के साथ एक क्यूरिसिटी थी आगे क्या ऐसा कैसे क्या यह मुमकिन है क्या ऐसा हो सकता है लेकिन ऐसा हुआ और इसलिए मैं कह रहा हूं ऐसा हुआ कि अमेरिका वर्जीनिया यूनिवर्सिटी नामी ग्रामी यूनिवर्सिटी वहां के साइंटिस्ट तक जो पुनर्जन्म के एक्सपर्ट्स हैं उन तक को इस एक स्टोरी के लिए इंडिया आना पड़ा और उन्होंने आकर यहां पूरा रिसर्च किया फैक्ट ढूंढे और फिर उन्होंने भी कहा कि यह
पुनर्जन्म की ही कहानी है शायद दुनिया में इकलौती पुनर्जन्म की यह कहानी है जिसको इसके एक्सपर्ट्स ने एक तरह से सर्टिफिकेट दिया कि इसमें कोई झोल नहीं है इसमें कोई गलत नहीं है पहले कहानी फिर आपको फैक्ट्स उत्तर प्रदेश में एक जगह है इटावा आप लोग जानते होंगे बहुत नामी जगह है इसी इटावा के एक गांव में एक परिवार रहा करता था एक ठाकुर का परिवार इस परिवार में तीन लोग थे जो गरीब लोग थे पति पत्नी और उनकी एक बेटी लेकिन जिस गांव में यह रहते थे उस गांव का नाम है शरीफ पुरा शरीफ
पुरा 70 की बात कर रहा हूं मैं बल्कि 70 की इस देश में उस वक्त गांव में इतना विकास नहीं हुआ था ना वहां बिजली थी ना पानी ना सड़कें ना अस्पताल ना डॉक्टर ना कॉलेज ना स्कूल बेहद पिछड़ा हुआ यह इलाका और इसी इलाके में एक ठाकुर गरीब परिवार उसमें एक लड़की का जन्म होता है और उसकी पैदाइश हुई 1968 में घरवालों ने नाम रखा सुमित्र गांव में कोई रोजगार भी नहीं था इसलिए इस गांव के जितने भी मर्द थे वह कामकाज के सिलसिले में इस गांव से दूर बड़े-बड़े शहरों में पहुंच जाते सुमित्रा
के पिता भी दिल्ली में आकर मजदूरी और बाकी छोटे मोटे काम कर रहे थे लेकिन सुमित्रा भी कुछ साल की हुई उसकी मां की मौत हो गई बाप नौकरी और घर चलाने के लिए घर से दूर मां का सहाया सर से उठ चुका एक दूर के कजन ने जिनकी उम्र भी ज्यादा थी अब उन्होंने सुमित्रा को पालना पोचना शुरू किया सुमित्रा धीरे-धीरे बड़ी हुई बचपन से ही एक तरह से उसको अकेलापन मिला मजबूरी में बाप दूर रहा मां का साया छिन चुका था और कोई था नहीं भाई बहन तो अपने उस ताऊ के घर में
व पली बढ़ी और अकेलापन हमेशा अपने आपको खालीपन उसके अंदर एक महसूस होता रहा जब सिर्फ वो 13 साल की हुई तभी घर वालों ने उसकी शादी कर दी और शादी एक जगदीश सिंह नाम के शख्स की जगदीश भी छोटे मोटे काम किया करता था और काम के सिलसिले में अक्सर वह भी उस गांव से बाहर रहता तो पति भी कुछ वक्त के लिए साथ रहा सुमित्रा के लेकिन फिर घर चलाना था इसलिए वह शहर में नौकरी करने लगा शादी होने के बावजूद एक तरह से सुमित्रा के अंदर फिर वही अकेलापन फिर वही उदासी आसपास
कोई नहीं जैसे बचपन में मां बाप करीब नहीं रहे शादी के बाद पति घर चलाने के लिए वो सुमित्रा से प्यार करता था लेकिन मजबूरी थी सबका पेट पालना था सुमित्रा के साथ ससुर भी थे वह साथ रहते थे लेकिन उनके साथ वो उतनी घुली मिली नहीं थी तो इसी तरह से जिंदगी चलती रही लेकिन पहली बार 1984 में दिसंबर में सुमित्रा ने एक बेटे को जन्म दिया जब उसने बेटे को जन्म दिया उसके बाद पहली बार उसे लगा कि अपने आप तक की पूरी जिंदगी में शायद उसका कोई एक साथी आया उसके साथ जिसके
साथ वो बात कर सकती है जिसके साथ वो हंस सकती है बोल सकती है वो उसका अपना बेटा बेटे की पैदाइश के बाद अब सुमित्रा बहुत खुश थी दिन भर अपने बेटे को सीने से लगाकर रखती थी जब वोह खाना बना रही होती या फिर पानी लेने के लिए बाहर जा रही होती उन पलों को छोड़ दे तो जब भी उसके दोनों हाथ खाली होते थे उन दोनों हाथ का सिर्फ एक काम था और वो था अपने उस बेटे को अपने सीने से अपने कलेजे से लगाकर रखना क्योंकि उसे लगा था कि इस दुनिया में
उससे बेटे से बढ़कर उसके लिए कोई खुशी नहीं आई पाच महीने का उसका बेटा हो चुका था पाच महीने के बाद एक रोज सुमित्रा गांव के बाह जैसे मैंने कहा पानी था नहीं एक कुआ था जहां से तमाम लोग पानी भरा करते थे तो दोपहर के बाद उसने अपना बर्तन उठाया और कुए से पानी भरने के लिए जो उसका रूटीन का काम था वह पहुंचती है जब वो पानी भरने जाती थी तब भी अपने बेटे को अपने साथ ले जाती थी और जब वो पानी कुए में रस्सी डालकर खींचती उस वक्त बेटे को वहीं पर
पास में लिटा देती करीब अप्रैल की बात है 1985 दिसंबर में बेटा पैदा हुआ था 1984 में एक रोज वह शाम को कुएं से पानी निकाल रही थी और पानी लेने के बाद अब वह वापस घर की तरफ लौट रही है हाथ में उसके पानी का बर्तन है और एक हाथ से उसने अपने बेटे को पाच महीने के सीने से लगाकर चली जा रही है गांव के और भी लोग पानी भर भर कर अपने अपने घरों की तरफ बढ़ रहे हैं तभी अचानक पता नहीं क्या हुआ लोगों की कानों में एक चीख की आवाज सुनाई
दी उन्होंने देखा जब पलट कर तो देखा कि सुमित्रा अपनी जगह पर जा रही थी और व अचानक रुक गई और व वहीं पर एक मूर्ति एक स्टैचू की तरह खड़ी हो गई है बच्चा उसका जो पानी का सामान था वह नीचे उसके हाथ से छूट गया बेटा एक हाथ से उसके सीने में है उसने दबा रखा है और दूसरा हाथ उसका आसमान की तरफ उठा हुआ है और उसकी उंगलियां जो है व पीछे की तरफ मुड़ी हुई है आंखें उसकी जो दीदा आंख वो चारों तरफ राउंड सर्किल में घूम रहा है तेज तेज आवाज
में वह अपने दांतों से दांतों को बजा रही है और बीच-बीच में एक जोर जोर से सांस ले रही है जब लोगों ने देखा और कुछ औरतें वहां पर करीब पहुंची तो उसका उस लिया को देखकर सुमित्रा के वो सब घबरा गए डर गए कई ने आवाज दी सुमित्रा लेकिन वो कहीं से भी होशो हवास में नहीं और वो लोग डरे सहमे दूरी बनाकर उससे खड़े हुए किसी की हिम्मत भी नहीं हो रही उसके स् रूप को देखकर अच्छा गांव गाव में डायन भूत प्रेत ये सारी चीजें बड़ी मानी जाती है तो औरत घबरा गई
उन्हें लगा कुछ मर्द भी वहां प्र सुन कर आ गए लेकिन उन्होंने जब सुमित्रा का य रूप देखा उसके हाथ एकदम टाइट और ऊपर की तरफ उठे हुए हैं उंगलिया पीछे की तरफ मुड़ी हुई है आंखों का दीदा घूम रहा है और वो कटकट दांत बजा पर अपने एक बच्चे को जो है एक हाथ से उसने पकड़ रखा अच्छा उसने अपने बच्चों को इतनी जोर से झगड़ा क्या बच्चा रोने लगा बच्चे की रोने की आवाज उधर उसके दांत के टकटाक चू की तरह उसका खड़ा होना पानी का बर्तन नीचे लोग आवाज दे रहे हैं लेकिन
करीब नहीं जा रहे हैं करीब 5च मिनट तक यह सीन चलता रहा पाच मिनट के बाद अचानक सुमित्रा का हाथ नीचे गिरा और उसने देखा उसका बच्चा रो रहा है उसने फौरन उसको चुप राना शुरू किया फिर उसने देखा बर्तन पानी तो गिर गया उसने उठाया जब पलती है तो देखती है कि भीड़ लगी हुई गाव सब उसकी तरफ देख रहे उसे कुछ समझ में नहीं आ उसने पूछा क्या हुआ क्यों मेरी तरफ देख रहे हो किसी की बोलने की हिम्मत नहीं बोले कुछ नहीं कुछ नहीं ऐसे ही अब सुमित्रा को लग रहा है कि
कुछ तो हुआ है लेकिन यह बता नहीं रहे और फिर उसे लगा कि उसे कुछ याद ही नहीं क्या हुआ पर बच्चा उसका रो रहा है वापस वो पानी भरती और तेजी से अपने घर की तरफ चली जाती घर पने के बाद उसे एहसास है कि वहां पर कुछ हुआ लेकिन लोग मुझे बता नहीं रहे फिर उसे लगा क्या पता कुछ हुआ उसके बाद वह रात पूरी ठीक से गुजरी अगले दो तीन दिन गुजरे एक रोज व किचन में खाना बना रही थी सास ससुर घर पर थे पति काम के सिलसिले में गांव से बाहर
शहर में खाना बनाते बनाते अचानक सास के कानों में आवाज आई कुछ कटक नहीं की और जोर जोर से किसी की सांस लेने की वो इधर उधर देखते हुए किचन में पहुंची घर का ही एक हिस्सा था रसोई घर के बाहर दहलीज के तो जब व गई तो सास देखकर घबरा गई जो सुमित्रा थी वह सेम जो चार पाच दिन पहले हुआ था इस बार उसके दोनों हाथ ऊपर थे क्योंकि बेटा अंदर सो रहा था और हाथ ऊपर उंगलियां पीछे की तरफ मुड़ी हुई आंखों के दीद घूम रहे हैं दांत कटक नहीं की आवाज बीच
में जोर-जोर से सांस लेने की आवाज सास ने उसका यह रूप देखा वह घबरा गई वह जोर-जोर से उसको आवाज देने लगी वह किसी की नहीं सुन रही है और करीब 10 मिनट तक यह सिलसिला चलता रहा और उसने किसी की आवाज तब तक वोह ससुर भी आ गए सब बोलने लगे कुछ पड़ोसी आ गए लेकिन उसने किसी को सुना ही नहीं वह अपने होश में ही नहीं थी करीब 10 12 15 मिनट बीते अचानक उसके हाथ नीचे गिरे नॉर्मल उसके उसने देखा चारों तरफ साथ ससुर है ये उसने अपने घूंघट वट डाले वापस ससुर
और के सामने वो डाला करती थी पूछा क्या हुआ आप लोग मुझे क्यों देख रहे हो अब सब एक दूसरे को तो सास ने पूछा कि तुमने अभी क्या कुछ हुआ था उसने कहा नहीं मैं तो खाना बना रही हूं सास ने भी कुछ नहीं बोला जो रूप देखा था उससे वह भी डरी हुई थी उसके बाद वह गई अपने फिर बच्चे को देखा बच्चे को गोद उठाया पाच दिन में ये दूसरी बार था लेकिन इसके बाद अब घर वालों ने उसके प को इफॉर्म किया पति भी आया तो उन्होंने कहा ऐसे ऐसे है लेकिन
फिर कुछ दिन बीता वो ठीक नॉर्मल थी एक रोज फिर यही हरकत अचानक उसके हाथ ऊपर उंगलियां पीछे आंखें नाच रही है दात कटक रहे हैं तेज तेज आवाज आ रही है पति देखा पहली बार इस रूप में अपनी पत्नी को व भी घबरा गया अब यह हुआ कि नहीं कुछ है तो क्या करें गांव में वैद है हॉस्पिटल डॉक्टर कुछ था नहीं और बिल्कुल फिट सुमित्रा कोई बीमारी नहीं कुछ नहीं तो गांव के व जी को बुलाया गया और कहा गया कि य हरकत है अब तक यह बात गांव के लोगों से भी पता
चल चुकी थी कि कुएं पर हुआ उसके बाद हुआ तो बीच-बीच में अ ये हुआ कि दौरा पड़ रहा है तमाम बातें हो रही है कोई साया है भूत प्रेत है डायन है इसी तरह की होती है वैद आया ओझा को दिखाया वैद ने पूरा चेक किया उसने कहा ये बिल्कुल ठीक है कुछ नहीं ऐसा वैद चला गया लेकिन यह सिलसिला अगले पाच महीने तक चलता रहा अगले पाच महीने तक बीच में कभी भी सुमित्रा को इसी तरह का दौरा पड़ता और वो अपने आप में सब कुछ भूल जाती और उसे कुछ याद ही नहीं
रहता अब पति ने भी उधर शहर जाना छोड़ दिया क्योंकि पत्नी है सास ससुर ने कहा भाई देखो हालात ठीक नहीं है क्या पता कुछ हो जाए इधर यह भी डर है कि कैसी कभी किसी ऐसे हालात में वो बच्चे को कुछ ना कर दे तो अब दिल पर पत्थर रखकर सुमित्रा ने अपने बच्चे से भी थोड़ी सी दूरी बनानी शुरू कर दी द कि कभी ऐसा ना हो कि मैं उस रूप में चली जाऊं और बच्चे को ही अपने नुकसान पहुंचा दूं तोब ज्यादातर बच्चे सास के पास रहते म अपनी दादी के पास और
यह सारा सिलसिला चलता रहा धीरे-धीरे वक्त बीता 16 जुलाई 1985 की तारीख आ गई 16 जुलाई 1985 को अपने घर पर सुमित्रा मौजूद थी दोपहर का वक्त था सबने खाना खा लिया था सुमित्रा अपने बेटे के पास उसको गोद में लेकर खेल रही थी फिर उसने अपने बेटे को नीचे रखा उसने कहा कि थोड़ा सुस्ता ले उमस और गर्मी का माहौल भी था लेकिन तभी दोपहर अचानक फिर से व उसी रूप में आ गई उसके दोनों हाथ आसमान की तरफ एक ही लक्षण होते थे उसके उंगलिया पीछे की तरफ आंखें जो दीदा है व घूम
रहा है दांत कटकट रही है जोर जोर से सांसे ले रही है और कुछ बोलने की कोशिश कर रही है बोल नहीं पा रही है पति और सास ससुर अब तक पड़ोसी और सब इन सब को पता था कि इस कुछ होता है इससे लेकिन यह था किसी को नुकसान नहीं पहुंचा रही है तो बहुत सारे लोग थे तमाशबीन भी थे कुछ डरे समय बच्चों को लोग डराने लगे थे देख सुमित्रा के पास भेज देंगे तुझे बदमाशी मत कर तो ये सब चल रहा था 16 1985 को जब यह हुआ तो उस दिन पहली बार
एक अजीब चीज हुई सुमित्रा उसी रूप में थी दांत कटकड़ रही है सांसे ले रही है और त तक वो बीच में कुछ बोलती थी किसी को समझ में नहीं आता था लेकिन उस दिन उसने एक लाइन बोली और जब वो लाइन बोली तो जिसने भी सुना वहीं पर सब सहम कर रह गए उसने कहा ठीक तीन दिन के बाद आज से मैं मर जाऊंगी 16 जुलाई 1985 दोपहर का वक्त और उसने पहली बार ये कहा और चकि उस रूप में देखकर सारे लोग मौजूद थे कुछ पड़ोसी थे सास ससुर पति तब उसने एक लाइन
कही कि बस आज से ठीक तीन दिन के बाद मेरी मौत और यह कहते फिर व अपने नॉर्मल रूप में आ गई बिल्कुल वही सुमित्रा जो एक अच्छी मां पति की सेवा करने वाली सास ससुर के साथ ठीक से बात करने वाली खाना बनाने वाली अब जब उसने बोला तो हर एक घर वाले सारे सहम गए कि यह क्या बोल रही है 16 जुलाई यानी कि 19 मई इसका लास्ट डे होगा कोई ऐसा कैसे कह सकता अपने मौत की भविष्यवाणी पूरा घर परेशान अब पति ने सुमित्रा से पूछा कि तुम्हें याद है कि तुम जो
यह सब जिस दौरे में जो मैं पढ़ता उसमें क्या तुमको उस कोई भी चीज याद है बोली नहीं मुझे कुछ याद नहीं है तो उसने कहा तुमने कुछ लाइन कही थी तुम्हें याद है उसने कहा नहीं याद है तो उसने कहा मैंने क्या कहा था उसने कहा तुमने पति की मजबूरी थी उसने बोल दिया उसने कहा तुमने यह कहा कि ठीक तीन दिन के बाद तुम मर जाओगी तो उसने कहा क्या बक रहे हो उसने कहा हां अब सुमित्रा के दिमाग में यह बात बैठ गई उसे लगा यह क्या है लेकिन अगले तीन दिन तक
16 17 18 व बिल्कुल नॉर्मल रही अब 19 मई बल्कि 19 जुलाई 1985 की तारीख आ गई यह वही डेट थी जो सुमित्रा ने अपनी मौत के लिए चुनी थी जब उस दौरे में थी और वह बोल रही थी 19 जुलाई 1985 सुबह हुई दोपहर सुमित्रा बिल्कुल ठीक बट उसने उस दिन भी यही किया कि वो अपने बच्चे से खुद को दूर रखती थी जब कुछ लोग उसके आसपास हो तो बच्चे को प्यार करती सीने से लगाती बाकी उसकी दादी के पास ही होती 19 को सुमित्रा ने एक चीज यह किया कि उसने कहा मैं
ऐसा कोई काम नहीं करूंगी जिससे मेरी मौत हो सके उसने कहा मैं ऊंचाई पर नहीं जाऊंगी कि फिसल जाऊ मैं आज खाना नहीं बनाऊंगी चूल्हे के करीब नहीं जाऊंगी कि आग ना लग जाए मैं आज जंगल की तरफ नहीं जाऊंगी मैं आज कुए पर पानी नहीं भरने जाऊंगी कि कुए में ना गिर जाऊ मतलब ऐसी चीज जो एक इंसान अपने उसमें कर सकता है कि इन इन वज से हम मर सकते हैं उन सारी चीजों से उसने कहा कि तुम मैं दूरी बनाऊंगी और उसके पति ने भी यही बात उससे कही धीरे धीरे दोपहर से
शाम हो गई सुमित्रा बिल्कुल ठीक घर वालों को अब लगा कि चलो कुछ घंटे की बात है और यह जो उसने कहा था तीन दिन पहले यह गलत साबित होगा घर के अंदर है सुमित्रा क्योंकि हर तरफ से वो बचर कुछ नहीं चाहती ऐसा करे कि जिससे कोई एक्सीडेंट हो हादसा और उसकी मौत हो जाए आराम कर रही है कोई खाना वाना नहीं बनाना बाहर नहीं जाना शाम हो गई शाम हो गई उसे कुछ घुटन सी महसूस हुई उसे लगा कि बहुत है कमरे के अंदर चलो बाहर नहीं जाना दरवाजे पर खड़े होकर थोड़ी ठंडी
हवा ले लेते क्यक शाम की हवा भी आनी शुरू हो गई थी अब वो दरवाजे पर खड़ी हो गई इत्तफाक से उसकी एक दोस्त वहां से गुजर रही थी उसने उसको आवाज दी उसने कहा कहां जा रही हो कैसे दोस्त को इसके बारे में पता था और यह भी पता था ये तीसरे दिन की कहानी अब वो उससे बात करने लगी दरवाजे के बाहर निकली अब वो जाकर करीब बात कर रही और दोनों हस हस कर बात कर रहे हैं उससे पूछ रही खैरिया तुम अब ठीक हो तुम्हें क्या हो जाता तुम तो बिल्कुल हट्टी
कट्टी हो और वो कह रही है सब पता नहीं ऐसी है मैं बिल्कुल ठीक हूं मेरे बेटे के आने के बाद से मैं बहुत खुश हूं और पूरी बात कर रही है और बात करते करते अचानक एकदम वही खड़े खड़े वह यूंही खड़ी रहती और उसके मुंह से आवाज बंद उसके दोनों हाथ ऊपर की तरफ गए और इस बार उसने कुछ नहीं किया ना दात कट कटाए ना उंगलियां पीछे की ना नजरें घुमाई बस खड़ी हो गई अब उसकी सहेली उससे बात किए जा रही वह जवाब नहीं दे रही उसने उसको हिलाया और व चट्टान
की तरह बिल्कुल जैसे कोई स्टैचू नहीं होता मूर्ति वो वैसे वही अपनी जगह टिकी हुई है मत धक्का देने पर भी व आगे पीछे गिर नहीं रही उसने दो तीन बार पहले हल्के से फिर जोर से उससे पूछा सुमित्रा सुमित्रा कोई जवाब नहीं दिया उस दोस्त को मालूम था इस तीन दिन की भविष्यवाणी वाली बात अब वह बदहवास चीखती है जोर-जोर से रोने लगती है उसके चीखने और रोने की आवाज सुनकर तमाम पड़ोसी और घर के अंदर से सुमित्रा का पति सास ससुर सब बाहर आते हैं अब तक उन्हें यह लगा था कि शायद शाम
हो गई भविष्यवाणी गलत हो गई लेकिन जब उसके दोस्त को रोते चीखते देखते वो आते हैं तो देखते हैं सुमित्रा खड़ी हुई है लेकिन नॉर्मल है उसके हाथ पीछे नहीं आंखें ठीक है लेकिन आंखें खुली हुई है अब वो उसको हिला डला रहे हैं लेकिन वो कुछ नहीं कुछ बोल ही नहीं रही बदहवास भागकर कोई वैद को लेकर आता है वैद आता है अब सुमित्रा को बड़ी मुश्किल से लिटाया जाता है वैद उसके नफ्स टलता है दिल का की धड़कन देखता है आंखें देखता है और थोड़ी देर के बाद कहता है कि अब सुमित्रा जिंदा
नहीं है ये मर चुकी है सुमित्रा ने जो भविष्यवाणी की थी वह सच में तीसरे दिन सही साबित हुआ 19 जुलाई 1985 16 जुलाई को उसने कहा था मैं तीन दिन बाद मर जाऊंगी और 19 जुलाई 1985 को मर गई घर में रोना पीटना मत गया पूरे गांव को उसकी भविष्यवाणी के बारे में पता था जिसने भी सुना सुमित्रा के घर के बाहर लोगों की भीड़ जमा होनी शुरू हो गई वैर ने डिक्लेयर कर दिया अब जितने बच्चे थे गांव के मा माओं ने उनके घर वालों ने कहा कोई बाहर नहीं निकलेगा लोग डरे हुए
थे सुमित्रा के उस बदले हुए रूप को देखकर फिर उसके कहने के हिसाब से और डरे हुए थे कि कहीं अब बाकी किसी घर पर कोई आफत मुसीबत ना आ जाए बच्चों को सबने घर में रखा सुमित्रा के घर के बाहर शोक जताने वालों की भीड़ लग गई अब इसके बाद यह हुआ कि ज्यादा देर तक शब को घर में नहीं रखेंगे उस जमाने में जो गांव के पिछड़ेपन का आलम था अस्पताल स्कूल सड़क बिजली पानी के साथ-साथ शमशान घाट भी नहीं था गांव की किसी खुली जगह पर खुद लकड़ियां इकट्ठी करो एक पंडित को
बुलाओ सारी रस में मंत्र उच्चार के बीच खुद गांव वाले अंतिम संस्कार कर देते थे तो कुछ लोग गए उन्होंने लकड़िया मकड़िया जुटाने शुरू की जहां पर अमूमन गांव के लोगों का अंतिम संस्कार होता था औरतों को बुलाया गया क्योंकि सुमित्रा महिला थी अब उसका हिंदू रीति रिवाज के हिसाब से उसका श्रृंगार करना शुरू किया गया उसको तेल लगाना शुरू किया गया उस गांव की प्रथा थी सुमित्रा की बॉडी जमीन पर है श्रृंगार चल रहा है तेल वेल लगाए जा रहे हैं आधा दर्जन से ज्यादा महिलाएं इस काम में लगी हुई है एक लाश का
श्रृंगार हो रहा है क्योंकि वो सुहागन थी इसके बाद श्रृंगार करते करते 45 मिनट हो चुका था अब इन सारी चीजों को और सुमित्रा की मौत के बाद यह था कि अब बस अंतिम संस्कार कर दो क्योंकि एक डर खौफ दहशत थी पूरे गांव में तो जितनी जल्दी इसकी मतलब अंतिम संस्कार करेंगे हो सकता उसकी आत्मा को सुकून मिले तो इसीलिए उसके अंतिम संस्कार की आनंद फानंद में तैयारी हो गई और इधर उधर चिता सज रही है इधर लाश को सजाया जा रहा है तभी अचानक जिस कमरे में लाश रखी थी एक औरत की बड़ी
तेजी से चीख की आवाज सुनाई दी और वो बधा आवास चीखते हुए घर के बाहर भागी बाहर सारे लोग शोक जताने के लिए खड़े थे बहुत सारी महिलाएं भी थी घर छोटा था बहुत सारी एक साथ नहीं जा सकती थी इसी बीच में एक दूसरी महिला चीखते हुए घर से बाहर निकली फिर तीसरी निकली अब जब ऐसा हुआ तो बाहर बदहवास लोगों ने पूछा क्या हुआ तो पहली महिला जो निकली थी बाहर उसने अपने आप पर काबू पाया और उसने कहा कि अचानक सुमित्रा ने अपनी आंखें खोली थी और उसकी आंखें उसी तरह से उसकी
दीदा जो है व चारों तरफ घूम रहा है लोगों ने कहा तेरा वहम होगा तब तक दूसरी बोली नहीं मैं उसका श्रृंगार कर रही थी और उसका दिल जोर से धड़क रहा है तीसरी ने कहा कि वह अपने दांत को कटकट रही है अब जब यह सुना तो सारे लोग भागे वैद जी को बुलाया गया वैद जी अंदर आए अब उन्होंने दोबारा सुमित्रा के नफ्स टोले दिल की धड़कन टटोली और उसके बाद घर वालों से कहा कि मातम मत मनाओ सुमित्रा जिंदा है यह चमत्कार हो गया थोड़ी देर बस उन्होंने कहा कि थोड़ा सा और
इसको भी परेशान मत करो वैद जी की खबर सुनकर सुमित्रा का पति खुशी से रोने लगा घर वाले खुश पूरा मोहल्ला खुश थोड़ी देर के बाद अब सुमित्रा की इधर हालत यह है कि जब वो होश में आई तो उसने पाया कि वो लेटी हुई है बहुत सारी औरतें उसको तेल लगा रही है वो अचानक घबरा कर उठी उसने कहा क्या है क्या कर रहे हो तुम हमारे साथ सबने किसी ने बताया नहीं उसने कहा कुछ नहीं बस ऐसे ही उसने कहा नहीं नहीं हटो और आप लोग हो कौन इतनी देर में अब वैद जी
चले गए बाहर खड़े हुए पति जो खुशी में रो रहा था बवास अंदर आया सुमित्रा सुमित्रा करके चीखते हुए और आकर सुमित्रा को गले लगा लिया जैसे उसने गले लगाया सुमित्रा ने उसकी तरफ देखा अपने पति को देखते ही उसने एक जोर का धक्का मारा और पति को किनारे किया कहा आप कौन इस तरह से आप क्यों मुझे गले लगा रहे हो मैं आपको नहीं जानती हूं और आप पराई स्त्री के साथ ऐसा नहीं कर सकते हो पति यह सुनकर बवास यह क्या कह रही है सास ससुर को बुलाया उसने कहा मां पिताजी ये देखो
ये क्या बोल रही है तो उसने कहा ये तुम्हारे साथ ससुर उसने कहा ये दोनों कौन है मैं नहीं जानती तमाम औरतें थ बोली ये तुम्हारी जो दोस्त जिसके साथ बात करते करते उसने दम तोड़ा था बोली इसको भी मैं नहीं जानती हूं अब सब थोड़ी देर के बाद जब उसने कहा ये तुम्हारा बेटा जो तुमको जान से ज्यादा प्यारा है उसने कहा मैं इसको भी नहीं जानती हूं सबको लगा कि जो मां हमेशा अपने सीने से लगाकर रखती थी अचानक अपने बेटे तक को अपनाने से मना कर रही है और पहचान नहीं रही है
कुछ गड़बड़ है वैद जी को बुलाया गया कहा कि वो जिंदा तो हो गई लेकिन किसी को पहचान नहीं रही वैद जी ने उसको फिर से चेक किया उन्होंने कहा एक काम करो थोड़ा सब्र रखो शायद शौक लगा हो या पता नहीं कुछ है करिश्मा है चमत्कार हुआ थोड़ा इसे वक्त दो और इससे दूर रहो अब यह कहकर चले गए वैद जी अगला दिन आया सुमित्रा बिल्कुल ठीक ठाक लेकिन ना वो अपने बच्चे की तरफ देख रही ना उसे गोद में उठा रही है ना ससुर को पहचान रही है ना पति को पहचान रही है
ना पड़ोसियों को पहचान रही है और किसी को भी अपने करीब आने नहीं घर वाले इंतजार कर रहे हैं कि शायद यह भी एक उसके दौरे का एक्सटेंशन होगा दिमाग पर असर हुआ होगा धीरे धीरे वक्त बीतेगा तो वह ठीक हो जाएगी करते करते इस आलम में तीन महीने बीत गए 19 जुलाई को 45 मिनट की मौत हुई थी सुमित्रा की अगस्त सितंबर अक्टूबर आ गया तीन महीने बीत गए 1985 20 अक्टूबर इस तीन महीने के दौरान सुमित्रा ने किसी को भी नहीं पहचाना तमाम कोशिश घर वालों ने कर ली ना अपने पति को कभी
अपने करीब आने दिया उसने कहा पराय मर्द हो ना सास ससुर को वो दर्जा दिया ना पड़ोसियों को दोस्तों को किसी को नहीं जब अपने बेटे को उसने एक बार भी गले नहीं लगाया लेकिन एक काम वो करती थी वो एक लेटर लिखती थी और लेटर लिखकर उसको वो करती और अपने पति को कहती कि इसको पोस्ट कर दो पति अनपढ लेकिन घर वाले य हैरान थे कि सुमित्रा ने तो पढ़ाई की नहीं थोड़ी बहुत उसके जो ताऊ थे उन्होंने पढ़ाया था लेकिन फिर भी यह लिख रही है कुछ पर उन्हें लगा कि कुछ होगा
या यह भी हो सकता है एक दौरे का पाठ हो अपने आप को कुछ और सोच रही हो पति अपनी पत्नी से बेहद प्यार करता था व उसके कहने के हिसाब से गांव के बाहर एक वो जो पोस्ट ऑफिस बल्के जो लेटर बॉक्स होता है वो उसमें लेटर डाल देता तीन महीने तक ये लेटर डालने का सिलसिला चलता रहा तीन महीने के बाद 19 जुलाई 1985 को सुमित्रा ने 45 मिनट के लिए दम तोड़ा था 20 अक्टूबर 1985 की तारीख आई अचानक एक शख्स सुमित्रा के घर पहुंचता है इसी शरीफ पुरा गांव में और वो
शख्स घर पहुंचते ही पहले तो गांव में जाता है और गांव में जाने के बाद वह पूछता है कि यहां पर क्या कोई ऐसी महिला है जो जिसका बर्ताव बड़ा अलग है जो कभी-कभी कुछ भूल जाती है या उसको दौरा पड़ता है इस तरह की कोई चीजें उसके अंदर है तो लोग कहते हैं कि या इसको म ये कैसे अच्छा यह गांव में चर्चा का विषय था तो यह था कि शायद गांव से बाहर भी कई लोग कमाने मने के लिए जाते हैं तो किसी ने बताया होगा तो उसने कहा आपको कैसे पता उसने कहा
छोड़िए आप मुझे बताइए है कि नहीं तो फिर सुमित्रा का पति बाहर आया उसने कहा जी है लेकिन आप कौन हम आपको जानते नहीं है उसने कहा मेरा नाम राम सिहा त्रिपाठी है मैं इटावा से आया हूं इस गांव से करीब 80 किलोमीटर दूर एक अपने गांव का नाम उन्होंने बताया उसका नाम था डिबिया आपु यह शरीफ पुरा था जहां सुमित्रा रहती थी और यह राम तिया त्रिपाठी डीविया पुर से आए थे जो 80 किलोमीटर दूर है इस गांव से तो उन्होने कहा मेरा नाम राम सिया त्रिपाठी है मैं एक लेक्चरर हूं कॉलेज में और
मुझे इसलिए यहां आना पड़ा है कि पिछले तीन महीन से मुझे कुछ लेटर मिल रहे थे और उस लेटर को मैंने शुरू में नजरअंदाज किया लेकिन अब फिर मुझे लगा कि चलो एक बार चलकर देख लेते हैं दूरी ज्यादा नहीं थी एक दिन बर्बाद होगा लेकिन मैं सिर्फ चला आया इसलिए कि वो लेटर जो भी भेज रही है एक बार उससे मिल लो तो उन्होने कहा कौन आपको लेटर भेज रहा है तो उन्होने कहा कि वही तो मैं आपसे मिलने आया हूं कि आपके घर में कोई ऐसी महिला है जो बदलती है जिसको दौरे पड़ते
हैं कुछ होता है तो फिर उसने पूछा दोबारा उसके साथ ससुर कि आपका नाम बताइए तो उन्होने कहा मेरा नाम राम सिया त्रिपाठी जब इस बार उन्होंने अपना नाम बताया तो अंदर सुमित्रा बैठी हुई थी और उसके कानों में यह नाम पड़ ग जैसे नाम सुना वह बवास कमरे से बाहर भागते हुए आती है और राम सिया त्रिपाठी को देखते ही गले लगा लेती है अब जितने भी लोग खड़े हु सब बदहवास खुद राम सिया त्रिपाठी पीछे हटते हैं और उसको छुड़ाने की कोशिश करते हैं लेकिन वह इतनी तेजी से गले लगाकर और रो रही
है कि किसी को कुछ समझ में नहीं आया बड़ी मुश्किल से राम से त्रिपाठी ने सुमित्रा को खुद से अलग किया और बोला आप कौन है मैं आपको नहीं जानता सुमित्रा पहली बार बोलती है आप मेरे पापा है और लेटर मैं ही भेज रही थी अब जब ये सुना तो राम सया त्रिपाठी को लगा कि यह क्या है तो उन्होंने कहा कि नहीं मेरी बेटी तो तुम्हारी जैसी है नहीं उसने कहा पापा मैं आपकी ही बेटी हूं और मैं सुमित्रा नहीं हूं मैं आपकी शिवा हूं शिवाराम सिया त्रिपाठी की बेटी का नाम था उसने कहा
कि मैं शिया त्रिपाठी शिवा त्रिपाठी आपकी बेटी अब राम सिया त्रिपाठी कमरे में बैठ गए सुमित्रा के घर वालों को पति को कुछ समझ में नहीं आ रहा पड़ोसियों का जमावड़ा लग गया अब यह हुआ कि आगे क्या राम सिया त्रिपाटी अपने साथ एक ब्रीफ केस लेकर आए थे बैठे और सुमित्रा जो अपने आप को अब सेवा कह रही थी उसको बिठाया बोला अच्छा तो तुमने वो लेटर लिखा बोला जी मैंने लिखा उसने कहा आप पापा मेरी हैंडराइटिंग नहीं पहचानते हो अब राम सिया त्रिपाटी ने हैंडराइटिंग जब सोचा उनकी बेटी का तो उन्हे लगा कुछ
चीजों को छोड़ दे तो ू बह वैसी हैंडराइटिंग है फिर उन्होने कहा ठीक है अगर तुम शिवा हो तो चलो मैं कुछ दिखाता हूं तुम मुझे बताओ वो अपने ब्रीफ केस में एक एल्बम लेकर आए थे उस एल्बम में कुल 15 तस्वीरें थी और यह एल्बम उनकी बेटी शिवा त्रिपाठी की शादी का एल्बम था उन्होंने एल्बम खोला और बोला बताओ यह कौन-कौन है राम सिया त्रिपाटी तो सामने बैठे थे वोह भी एल्बम थे उसने कहा आप मेरे पापा है एक लेडी को देखकर उसने कहा कि यह मेरी मां है एक को देखकर कहा यह मेरा
भाई है एक को देखकर उसने कहा कि यह छेदी लाल है मेरा पति दो बच्चों की तस्वीर को देखकर उसने कहा कि यह दोनों मेरे बच्चे रिंकू और टिंकू यह मेरी सास यह मेरे ससुर यह मेरा देवर है और फिर एक महिला की तस्वीर पर आकर उसने उंगली रखी और चुप हो गई राम सिया त्रिपाटी ने कहा तुम सबका सही सही बता रही हो यह आखरी तस्वीर है इस पर क्यों चुप हो गई घबराई वो उंगली रखे हुई है बता नहीं रही उन्होंने कहा बताओ बताओ बड़ी मुश्किल से फिर लरज हुए दरे सहमे अंदाज में
सुमित्रा कहती है यह मेरी ननद और इसी ननद ने मुझे सर पर पत्थर मारकर 19 जुलाई 1985 को मेरा कत्ल किया था जैसे ही उसने बोला और यह तस्वीरें सारी कंप्लीट हुई राम सिया त्रिपाटी खड़े हुए शिवा को जोर से गले लगाया और रोना शुरू कर दिया उन्होने कहा तुमने एक एक लाइन सच ग अब राम सिहा त्रिपाठी जब चुप हुए इधर कुछ समझ में नहीं आ रहा सुमित्रा के घर वालों किय सुमित्रा है यह शिवा है यह राम सिया त्रिपाठी कौन है उसकी शादी पहले हो चुकी है दो बेटे हैं फिर यह पति कहां
से आए य सब क्या है कुछ माजरा समझ में नहीं आ रहा तब राम सिया त्रिपाठी ने कहानी सुनाई उसने कहा 24 अक्टूबर 1962 को 24 अक्टूबर 1962 को शिवा मेरी बेटी का मेरे घर में जन्म हुआ था मोहल्ला था डिबिया आपु यही आपके इटावा में और वहां से शरीफा जो बात बताया आपको बल्कि शरीफा पुर पूरा 80 किलोमीटर की दूरी पर है पर ये दोनों परिवार एक दूसरे को नहीं जानते शिवा एक ब्राह्मण फैमिली से थी और सुमित्रा एक ठाकुर परिवार में जन्म लिया था ये खुद एक कॉलेज में लेक्चरर थे घर में पढ़ाई
का माहौल था उस जमाने में उन्होंने शिवा को ग्रेजुएशन कराया कॉलेज में पढ़ी जब शिवा 18 साल की हो गई तब 1980 में शिवा की शादी छेदीलाल नाम के एक नौजवान से कर दी गई शादी के कुछ साल के बाद अगले पा साल के अंदर अंदर शिवा को दो बेटे हुए रिंकू और टिंकू लेकिन बेटे होने के बावजूद शिवा की शादीशुदा जिंदगी कामयाब नहीं थी वजह यह थी दो एक उस घर में यानी कि छेरी लाल के घर में जहा यह शादी हुई थी उनका कोई भी पूरा परिवार खानदान में शिवा जितना पढ़ा लिखा कोई
नहीं था शिवा ग्रेजुएट थी कॉलेज की और वहां सब बवी पास थे तो एक तो उनके अंदर एक कॉम्लेक्स था कि उनकी जो बहू है व पूरे खानदान में सबसे पढ़ी लिखी है दूसरा उन्हें लगता था कि उसके पता पति जो पिता है वह लेक्चरर है बहुत पैसे हैं तो व डरी के लिए भी तंग करते थे और अक्सर ननद भी घर पर रहती थी लड़ाई झगड़ा चलता रहता था जुलाई 1985 को अचानक जो शिवा है उसके एक दूर के अंकल ने आकर घर पर खबर दी कि शिवा ने खुदकुशी कर ली उसकी बॉडी रेलवे
ट्रैक पर मिली बवास घर वाले भागे उस वक्त राम सिया धर पाटी शहर से बाहर थे कहीं और थे दूर थे वहां जाकर जब देखा गया तो देखा गया कि रेलवे ट्रक के दोनों बीच में शिवा की बॉडी रखी हुई है पाट ट्रेन से कटा नहीं है हा उसके सर पर किसी वजनी चीज के चोट का निशान है ससुराल वालों ने यही कहा कि उसने एक झगड़ा हुआ था घर में आमतौर पर झगड़ा होता उसके बाद उसने जाकर खुदकुशी करली लाश वह दौर था उस वक्त इतनी सारी चीजें सोशल मीडिया मीडिया था नहीं आनन फानन
में लाश घर पहुंचा और शिवा के पिता राम सियाराम का इंतजार किए बिना ससुराल वालों ने अंतिम संस्कार कर दिया य 18 जुलाई की बात है जो डेथ हुई थी 18 जुलाई 1985 और इधर उस गांव से 80 किलोमीटर दूर सुमित्रा ने अपनी मौत की भविष्यवाणी 19 जुलाई की की थी 24 घंटे का फर्क था 80 किलोमीटर के अंदर दो मौत होनी थी तो इधर पोस्टमॉर्टम कर दिया बाद में अब घरवालों को शक हुआ उन्होंने अपनी तरफ से तफ्तीश की तो पता चला कि 18 जुलाई को ससुराल वाले रात के अंधेरे में किसी को उठाकर
रेलवे ट्रैक पर ले जाते हुए देखे गए इसी के बाद ससुराल वालों के खिलाफ कंप्लेन किया गया शिवा के ससुर और हस्बैंड को पुलिस ने गिरफ्तार किया लेकिन कोई सबूत था नहीं अंतिम संस्कार हो चुका था मौत रेलवे ट्रैक पर हुई थी या फिर सर पर वजनी चीज से इसका खुलासा हो नहीं सकता था तो बाद में सबूतों के अभाव में पति और ससुर को जमानत मिल गई जो सास और नन थी व दोनों फरार हो गई थी बाद में पुलिस जब दोनों को जमानत मिल गया तो उन्हे भी लगा कि वो केस में मिल
जाएगा दोनों वापस आ गई उ पुलिस ने पकड़ा उन दोनों को भी फिर बाद में जमानत मिल दोनों रिहा हो यह पूरी कहानी अब राम सिया त्रिपाठी वहां बैठकर सुना रहे अब अजीब सी कहानी सामने थी कि एक शिवा त्रिपाठी जो सेम डे मरी और दूसरी तरफ सुमित्रा जिसने अपनी मौत की भविष्यवाणी तीन दिन पहले कर दी उसकी मौत भी 24 घंटे बाद हुई थी शिवा की और सुमित्रा कभी पढ़ी लिखी नहीं इंग्लिश में लेटर भेज रही कभी वह ठीक से मतलब हिंदी पूरा नहीं बोल पाती थी व अपने गांव की जो भाषा भाषा होती
यूपी की उस भाषा में बात किया करती थी लेकिन अपने पापा के साथ व फराटे दार बेस्ट हिंदी इंग्लिश में बात कर रही है अब जब यह सारी चीज हो गई तो फिर य हुआ कि पापा मैं आपके साथ जाऊंगी पापा उसको अपने साथ लाए वह अपने दोनों बेटों से मिली फिर उसे ख्याल आया कि उसके ससुराल ने तो उस पर जुल्म किया था मारा पीटा था उसको तो एक तर से कत्ल ही कर दिया था उसका तो पति से भी अब कोई रिश्ता था नहीं क्योंकि पति जिंदा था लेकिन उसके बावजूद उसे लगा कि
जो उसका सुमित्रा का जो पति था पति शरीफ था उसे मानता था बेशक गरीब था लेकिन उसे प्यार करता था जगदीश सिंह उसने कहा कि बेशक मेरा पुनर्जन्म हुआ है मेरे दो बच्चे हैं उसने उन दोनों बच्चों को अपना लिया रिंकु जो उसके बेटे थे शिवा के सुमित्रा ने उसने कहा यही मेरे बेटे हैं और अपने उस गरीब पति को भी उसने कहा यही मेरा पति है और अपने उस बेटे को जिसको पांच महीने तक सीने से लगाकर भागती थी उस बेटे को भी पति बेटे और अपने पुनर्जन्म के पहले के दो बेटे इनके साथ
फिर व आकर उसी गांव में रहने लगे और उस पति के साथ बड़ी अच्छी खुशहाल जिंदगी उसने गुजारी उधर दो दो परिवार भी था वह सब भी खुश गांव के लोग भी खुश लेकिन यह कहानी फिर उस वक्त मीडिया में आई अखबारों में आई जब यह आई अमेरिका की वर्जीनिया यूनिवर्सिटी से पुनर्जन्म के जो एक्सपर्ट है सारे फैक्ट्स फाइंडिंग और चीज देखते उनकी पूरी टीम आई जो इंडिया में उस वक्त काम कर रहे थे वो टीम पहुंची इटावा में इन लोगों ने बड़ी छोटी-छोटी चीजों की के फैक्ट्स की चेकिंग की इंटरव्यू किया दोनों परिवार का
गांव के लोगों का वो सारे डॉक्युमेंट्स निकाले शिवा की मौत का सुमित्रा के जन्म शादी का तस्वीरें निकाली दोनों के अलग-अलग हालांकि उसके गांव की तस्वीरें कम थी लेकिन जो भी मिली वो वो सारी चीजें हैंडराइटिंग मिलाया क्वेश्चन किया उससे से अलग-अलग दोनों परिवारों के उस जन्म और इस जन्म का टाइमिंग मिलाई और फिर वर्जिनिया यूनिवर्सिटी ने डिक्लेयर किया और इंडिया के जो एक रिसर्च इसके ऊपर काम करते हैं कि दुनिया का इकलौता और शायद पहला ऐसा पुनर्जन्म का केस है जो सच्चा है फैक्ट्स के बेस पर यह केस यह साबित करता है कि सुमित्रा
का पुनर्जन्म शिवा के तौर पर हुआ था तो ये पुनर्जन्म की कहानियां बहुत आती है लेकिन य इकलौता केस है जिसको प्रूफ एक तरह से प्रूफ किया गया कि यह सच है तो अब सुमित्रा या यह कहे कि शिवा अपने पहले पति मब जो सुमित्रा का पति था उसके साथ रहने लगी तीन बेटे धीरे-धीरे वक्त बीता सब कुछ अच्छा चला 1998 85 में यह हुआ था उसके करीब 13 साल बाद अचानक एक रोज बीमारी से सुमित्रा या यू कहे कि शिवा की मौत हो और सुमित्रा या शिवा की मौत के एक दो साल के बाद
उसके पति जगदीश सिंह की भी मौत हो बच्चे आज भी है परिवार आज भी है और यह कहानी आज भी और यह वह कहानी है जो दुनिया में इकलौती ऐसी कहानी है जिसके पुनर्जन्म की सच्चाई पर मोह तो यह थी आज की कहानी मुझे लगता है कि इस कहानी पर आप लोग अपनी राय जरूर दीजिएगा क्योंकि जब मैंने इस पर रिसर्च किया तो मैं खुद हर कदम पर हैरान था कि ऐसा कैसे हो सकता है लेकिन जब इतने सारे फैक्ट्स है तो इसको झुलाया नहीं जा सकता तो आज की कहानी में इतना ही लेकिन कहानी
खत्म करूं उससे पहले भाही अपना सिलसिला आज उषा कामले जी इनकी 6वी सालगिरा है यानी कि 60 यर 60 साल की आज हो चुकी है तो उषा जी हैप्पी बर्थडे और मेरी यही दोआ है ऊपर वाला आप को हमेशा लंबी उम्र दे सेहत दे आप हमेशा अच्छी रहे आपका परिवार अच्छा रहे और यह भेजा है शंकर कामले उनके बेटे हैं और रेणुका जी इसके अलावा शुभंकर और अश्वत यह दोनों पोते हैं साथ ही सोनल शर्मा इनका भी आज जन्मदिन है तो हैप्पी बर्थडे सोनल और यह हिमांशु सिंह ने भेजा है रीता मेंडोजा इनका भी आज
जन्म दिन है तो हैप्पी बर्थडे रीता दी और यह लंदन से हैं थैंक यू सो मच आपके इस मेल के लिए अता गोस्वामी का भी आज बतान साथी शकील खान इनका भी आज जन्मदिन है य रियाद में है तो हैप्पी बर्थडे शकील दीपक सेन गुप्ता बल्क दीपक सान गुले थैंक यू सो मच आपके मेल के लिए सुमेर राठौड़ थैंक यू सो मच आपके मेल के लिए हर्शल ठक्कर थैंक यू और यह सरे से हैं और आपके इस प्यार के लिए साथी मुबीन खान थैंक यू सो मच सागर भाले राव थैंक यू सो मचने कहानी की
फरमाइश है इसके अलावा सईद चौधरी कमाल है सईद चौधरी साहब ने ये एक मेल लिखा कि क्या आप मुंबई में है क्योंकि उन्होंने मुझे कहा कि मैंने सपने में देखा कि आप मुंबई आए हुए हैं तो अगर आप मुंबई में है तो मुझसे मिल लीजिए या क्या आप मुंबई आने वाले हैं तो सयद चौधरी साहब मैं दिल्ली में हूं आप रात को लगता है कहानी देख के सुन सकते हैं तो कई लोग लोगों के रात के मैं सपने में आ जाता हूं उसकी शायद एक वजह यही है कि आखरी चीज जो होती है वो आप
मेरी आवाज सुनते हैं और कहानी सुनकर सो जाते हैं तो कहते हैं जो आखिरी चीज होती है वो सपने में जरूर लेकिन वैसे कभी मुंबई आऊंगा तो सद भाई आपसे जरूर मिलूंगा तो आज की कहानी में इतना ही अब आपसे मुलाकात होगी कल रात 900 बजे किसी नई कहानी के साथ तब तक अपना और अपनों का ख्याल रखिएगा थैंक यू वेरी मच