यह कहानी एक ऐसी लड़की की है जो रोज शाम दाता दरबार पर फूल और तस्बीह बेचने जाती थी उस रोज भी वह अपना सामान समेटकर घर जाने की तैयारी कर रही थी कि अचानक एक नौजवान उसके सामने आकर खड़ा हो गया लड़की पहले तो घबरा गई लेकिन फिर उसने हिम्मत करके पूछा दरबार तो बंद हो चुका है आपको फूल किस लिए चाहिए लड़के ने जवाब दिया मेरा तो यही वक्त होता है दरबार पर आने का मैं इसी वक्त हाजरी देने आता हूं लड़की को यह बात अजीब लगी क्योंकि उसने पहले कभी इस वक्त उस लड़के
को नहीं देखा था मगर वह जितनी जल्दी हो सके घर पहुंचना चाहती थी इसीलिए ज्यादा सवाल नहीं किए लड़के ने फूलों की कीमत देने की कोशिश की लेकिन लड़की ने पैसे लेने से मना कर दिया और वहां से जल्दी-जल्दी निकल पड़ी रास्ते में अंधेरा गिरने लगा था और लड़की को अचानक एहसास हुआ कि जैसे कोई उसके साथ चल रहा हो उसने इधर-उधर देखा मगर वहां कोई नहीं था तभी अजीब सी गहरी आवाज आई अपना हिजाब ठीक करो लड़की ठिठक गई मगर आसपास कोई नजर नहीं आया उसने घबराकर जल्दी से हिजाब संभाला और तेजी से घर
की तरफ बढ़ गई घर पहुंचते ही उसने दरवाजा जोर से खटखटाया अम्मा ने दरवाजा खोला और लड़की का उतरा हुआ चेहरा देखकर घबरा गई क्या हुआ इतनी घबराई हुई क्यों हो मगर लड़की ने कुछ नहीं बताया उसे पता था कि अगर उसने सच्चाई बताई तो अम्मा उसे फिर से काम पर नहीं जाने देंगी उसने बस इतना कहा अम्मा तुम ही कहती हो कि मगरिब के बाद घर लौट आना चाहिए उस रात लड़की को एक अजीब सपना आया एक धुंधला सा चेहरा गुस्से से भरी आंखें और वही आवाज आज के बाद तुम्हारे सर से हिजाब ना
उतरे डर के मारे उसकी नींद खुल गई और तभी आजान की आवाज आई लड़की ने राहत की सांस ली और वजू करने चली गई नमाज के दौरान उसे एक मीठी सी खुशबू महसूस हुई जब ने अम्मा से पूछा तो उन्होंने कहा मुझे तो कोई खुशबू नहीं आ रही सुबह जब लड़की दरबार पर पहुंची तो वहां का माहौल कुछ अजीब था आमतौर पर वहां भीड़ लगी रहती थी मगर आज वीरानी थी फिर अचानक भीड़ उमड़ पड़ी और लड़की की दुकान पर इतने ग्राहक आ गए कि उसका सारा सामान चंद मिनटों में बिक गया मगर फिर वही
नौजवान उसके सामने खड़ा था कुछ फूल मिल सकते हैं लड़की ने कहा आज तो सारा सामान बिक चुका है लड़का हल्की मुस्कान के साथ बोला एक बार देख तो लीजिए शायद मेरे लिए कुछ बचा हो लड़की ने अचरज से खाली जगह की तरफ देखा जहां उसका सारा सामान बिक चुका था मगर जब उसने फिर देखा तो पूरा सामान चों का त्यों रखा था उसके रोंगटे खड़े हो गए यह कैसे मुमकिन था लड़का मुस्कुराया और कहा अब तो फूल दे देंगी ना लड़की ने चुपचाप फूल निकालकर उसे दी जाते जाते लड़के ने एक बात और कही
हर बात पर परेशान मत हो जाया करो और तुम्हारी अम्मा जहां शादी करने का कह रही हैं वहीं कर लो तुम्हारे लिए बेहतर होगा लड़की सन्न खड़ी उसे जाते हुए देखती रही यह शख्स आखिर कौन था वह इतना कहकर वहां से चला गया लेकिन वह लड़की सुन अपनी जगह पर खड़ी रह गई उसके जहन में बस यही सवाल घूम रहा था कि आखिर उसे यह कैसे मालूम हुआ कि आज उसके रिश्ते वाले आ रहे हैं उसने अपने जहन से इस बात को झटक हुए अपना सामान उठाया और घर की तरफ बढ़ने लगी रास्ते भर उसके
कानों में एक ही आवाज गूंजती रही जाफरान जिन जाफरान जिन जब जब यह नाम पुकारो गी तुम्हारी मदद हो जाया करेगी एक अजीब सा खौफ उसके वजूद पर तारी था वह समझ नहीं पा रही थी कि यह सब क्या माजरा है आखिर यह जाफरान जिन कौन है उसे इस पर तज भी हो रहा था मगर डर उसके जहन पर हावी था वह जल्दी से घर पहुंची घर पहुंचते ही देखा कि मेहमान आए हुए अम्मा ने उसे आवाज दी मेहमान आ चुके हैं जल्दी से कपड़े बदल करर आ जाओ मेहमानों की खबर सुनते ही वह सब
कुछ भूल गई वह कमरे में गई और जल्दी से कपड़े बदलने लगी जब वह मेहमानों के सामने आई तो नजरें झुकी हुई थी तभी एक औरत की आवाज आई यह तो बहुत खूबसूरत है उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई वह औरत फिर बोली जाफरान मैं फातिमा कैसी लगी जाफरान यह नाम सुनते ही प्रतिमा के दिमाग में जैसे बिजली कड़की उसने झटके से नजरें उठाई और सामने देखा तो हैरत से उसकी आंखें फटी की फटी रह गई वही लड़का जो हर रोज मगरिब के वक्त दुकान पर सामान लेने आता था उसके सामने बैठा था वह
स्तब्ध रह गई उसकी जुबान से अचानक निकल पड़ा अम्मा यह तो वही लड़का है अम्मा और मेहमान हैरत से उसकी ओर देखने लगे अम्मा ने हैरानी से पूछा कौन लड़का फातिमा फातिमा कुछ कहने पा उसकी धड़कने तेज हो गई थी वह अपने मन को समझाने की कोशिश कर रही थी कि यह वही शख्स कैसे हो सकता है यह वही था जिसने कल रात उसे कहा था हर बात पर परेशान मत हुआ करो और जहां अम्मा कह रही है वहां शादी कर लो जाफरान हल्के से मुस्कुराया और बोला फातिमा अब तो तुम मुझे पहचान ही गई
हो उसकी इस बात पर फातिमा का खून जैसे जम गया उसने किसी तरह खुद को संभाला और बोलने की कोशिश की तुम तुम कौन हो जाफरान ने उसकी आंखों में गहराई से देखा और कहा मैं वह हूं जो तुम्हारी हर पुकार पर तुम्हारे साथ होगा जैसा कि मैंने कहा था जब भी तुम जाफरान जिन पुकारो गी तुम्हारी मदद हो जाया करेगी फातिमा की सांसें तेज हो गई उसके हाथ पैर ठंडे पड़ गए उसे अब समझ आ रहा था कि पिछले कुछ दिनों से उसके साथ जो भी हो रहा था वह कोई आम बात नहीं थी
वह सोचने लगी क्या यह इंसान है भी या नहीं अम्मा और बाकी घर वाले कुछ समझ नहीं पा रहे थे उन्होंने इसे एक आम रिश्ता समझा था लेकिन फातिमा की हालत देखकर अम्मा ने धीरे से पूछा बेटी क्या हुआ तुम इतनी घबराई हुई क्यों हो फातिमा ने जवाब देने के लिए मुंह खोला मगर शब्द गले में अटक गए उसकी आंखें जाफरान पर टिकी हुई थी जो अब भी उसी रहस्यमई मुस्कान के साथ उसे देख रहा था उस लड़के की मां तुरंत बोली बेटा तुम किसी और की बात तो नहीं कर रही क्या तुम्हें कोई और
पसंद है उसने घबराकर झट से सिर हिला दिया ना नहीं ऐसी कोई बात नहीं उस औरत ने मुस्कुरा कर कहा तो ठीक है हम आज ही शादी की तारीख पक्की कर देते हैं हमें जल्द से जल्द शादी करनी है हमारा एक ही बेटा है और हमें उसकी शादी का बहुत अरमान है अम्मा भी मुस्कुरा द मेरी भी बेटी सबसे बड़ी है मैं भी उसकी शादी के लिए बहुत सोच रही थी लेकिन उस लड़की के दिमाग में अब भी वही आवाजें गूंज रही थी जाफरान जिन उसका दिल कह रहा था कि यह कोई मामूली बात नहीं
लेकिन आखिर यह माजरा क्या था वह समझ नहीं पा रही थी और अजीब सी कशमकश में थी उसे ख्याल आया कि क्यों ना वह अपने रब से मदद मांगे लेकिन इस वक्त घर में सब जाग रहे थे उसने फैसला किया कि तहज्जुद के वक्त दुआ करेगी सुबह जब उसकी आंख खुली तो वह उसी कमरे में चली गई जहां कोई आता जाता नहीं था अम्मा ने वहां घर का गैर जरूरी सामान रखा हुआ था उसने चीजें हटाकर थोड़ी सी जगह बनाई ताकि वहां नमाज पढ़ सके तहज्जुद की नमाज अदा करते वक्त उसे ऐसा महसूस हुआ कि
उसके साथ कोई और भी इबादत कर रहा है जब वह कुरानी आयतें पढ़ रही थी तो कोई और भी उसके साथ-साथ उन्हें दोहरा रहा था वह खौफ जदा थी लेकिन उसने नमाज नहीं तोड़ी उसके दिल को इतना तो यकीन था कि जो भी यह वजूद है नेक रूह है वरना वह उसके साथ इबादत ना कर रहा होता उसने जल्दी से नमाज पूरी की और दुआ के लिए हाथ उठाए तभी उसे एक धीमी सरगोशी सुनाई दी अपनी दुआ लंबी कर लो और अपने लिए बेहतरी मांगो तुम्हें वहीं मिलेगा जो तुम चाहोगी उसे उस आवाज से अजीब
सा सुकून मिल रहा था उसके दिल को चैन आ रहा था ऐसा लग रहा था कि वह हमेशा इसी आवाज को सुनती रहे उसने अपनी दुआ लंबी कर ली अपने नसीब की बेहतरी मांगी हर वह चीज मांगी जिसकी वह ख्वाहिश कर सकती थी उसे यकीन हो रहा था कि उसकी हर दुआ कबूल हो जाएगी फिर उसने दुआ में यह भी मांगा अगर जाफरान मेरे हक में बेहतर है तो मुझे मिल जाए लेकिन बार-बार जाफरान जिन की आवाजें उसके कानों में गूंज रही थी वह सोच ही रही थी कि आखिर यह सब क्या है तभी उसने
अपना चेहरा हाथ से पूछा और जैसे ही पीछे मुड़ी उसके होश उड़ गए उसके ठीक पीछे जाफरान खड़ा था उसके मुंह से एक चीख निकल गई तो तुम इस वक्त यहां जाफरान मुस्कुराया मैं अंधेरे में ही आता हूं मुझे अंधेरा बहुत पसंद है और तुम इतनी हैरान क्यों हो रही हो तुम्हें तो अब हमेशा के लिए मेरे पास आना है मेरा पूरा घर अंधेरे में डूबा रहता है तुम वहां कैसे रहोगी उसकी बातें अजीब और रहस्यमई थी वो लड़की कुछ समझ नहीं पा रही थी उसने कांपते हुए कहा तुमसे मुझे खौफ महसूस हो रहा है
तुम यहां आए कैसे दरवाजा तो बाहर से बंद था जाफरान हल्का सा हंसा जिन्हो को दरवाजे खोलने की जरूरत नहीं होती वह लड़की सन्न रह गई उसने ना में सिर हिलाया नहीं यह मुमकिन नहीं क्या मतलब है तुम्हारी बात का तुम एक जिन हो नहीं मैं एक जिन से शादी नहीं कर सकती जाफरान ने गहरी नजरों से उसे देखा अभी तो तुम्हें सुकून महसूस हो रहा था अब मैंने सच बता दिया तो तुम डरने लगी मुझसे खौफ मत खाओ मैं तुम्हें कोई नुकसान पहुंचाने नहीं आया बल्कि तुम तो मुझे बहुत पसंद हो तुम्हारा यह हिजाब
जो हर वक्त तुम्हारे सर पर रहता है मुझे उससे इश्क है उस लड़की के रोंगटे खड़े हो गए हमारा रिश्ता आसमान पर तय हो चुका है तुम्हें मुझसे शादी करनी ही होगी वह घबराकर तेजी से कमरे से बाहर भागी उसके होश उड़े हुए थे भागते हुए वह अम्मा से टकरा गई अम्मा घबरा गई क्या हुआ कहां भाग रही हो वह कांपती हुई बोली अम्मा कमरे में जाफरान जाफरान वहां है अम्मा ने हैरानी से कहा तुम्हारा दिमाग तो ठीक है जाफरान वहां कैसे आ सकता है तुम कैसी बहकी बहकी बातें कर रही हो उसने ने कांपते
हुए कहा अम्मा वह इंसान नहीं है वह वह जिन्न है उसने खुद बताया इतना सुनते ही अम्मा के चेहरे का रंग बदल गया उन्होंने गुस्से में उसे एक थप्पड़ रसीद कर दिया और कहा तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है क्या बकवास कर रही हो तुम होश में भी हो अम्मा के थप्पड़ की गूंज अभी भी उसके कानों में थी उसकी आंखों में आंसू थे मगर वह चुप थी जिस मां ने उसे हमेशा प्यार दिया आज वही उसकी बात पर यकीन करने को तैयार नहीं थी उसका दिल भारी हो गया था वह चुपचाप कमरे से बाहर
निकली और अपने काम में लग गई मगर उसके जहन में बस एक ही सवाल था आखिर जाफरान चाहता क्या है वह कौन था और सबसे ज्यादा तकलीफ उसे इस बात की थी कि अम्मा ने उसकी एक भी बात पर यकीन नहीं किया अभी वह इन्हीं ख्यालों में गुम थी कि अचानक किसी ने उसके सामने चंद हजार रुपए रख दिए उसने हैरत से उन पैसों को देखा और जैसे ही नजर उठाई उसका गुस्सा सातव आसमान पर पहुंच गया सामने कोई और नहीं बल्कि वही था जाफरान वह गुस्से से खड़ी हुई और झटके से उसका गिरेबान पकड़
लिया तुम चाहते क्या हो तुम हो कौन चले जाओ यहां से आइंदा के बाद मुझे अपनी शक्ल भी मत दिखाना मगर जाफरान उसकी बात पर सिर्फ मुस्कुरा दिया उसकी आंखों में अजीब सी चमक थी जैसे वह हर चीज पहले से जानता हो सोच लो तुम्हारी अम्मा तो मुझसे ही तुम्हारी शादी करना चाहती है और हां एक बात और आइंदा के बाद उनसे कुछ कहने की जरूरत नहीं है वरना जिस तरह आज उन्होंने मेरे इशारे पर तुम्हारे साथ रवैया इख्तियार किया वैसे ही वह आइंदा भी करेंगी मैं उनकी आंखों पर पट्टी ही ऐसी बांध दूंगा कि
उन्हें कुछ दिखाई ही नहीं देगा उसके लहजे में नरमी थी मगर शब्दों में एक अजीब सा डर समाया हुआ था फातिमा के पैरों तले जैसे जमीन खिसक गई तुमने तुमने मेरी अम्मा को कुछ किया है उसकी आवाज कांप गई थी जाफरान ने उसकी आंखों में झांका और हल्की के साथ कहा तुम्हारी अम्मा सिर्फ तुम्हारी मां नहीं है वह मेरी भी मां है बस अब तुम्हें यह मान लेना चाहिए कि तुम्हारा और मेरा रिश्ता पहले से ही तय था तुम्हारे इंकार करने से कुछ बदलने वाला नहीं है फातिमा यह बात जितनी जल्दी समझ जाओगी उतना ही
बेहतर होगा फातिमा का जिस्म कांप उठा उसका दिल कर रहा था कि वह भाग जाए मगर उसके पैरों में जैसे जंजीरें बंद गई थी तुम एक जिन हो मैं तुमसे शादी नहीं कर सकती मैं तुम्हारे साथ नहीं सकती इस बार जाफरान ने लंबी सांस ली और एक कदम आगे बढ़कर उसके करीब आ गया मैंने तुमसे पूछा था कि तुम्हें मेरी मदद चाहिए या नहीं तुम्हें जब भी जरूरत होगी मैं तुम्हारे पास आ जाऊंगा उसकी आवाज कानों में गूंजने लगी वही शब्द वही लहजा जो पहली बार उसने सुना था फातिमा को महसूस हुआ जैसे उसकी दुनिया
अचानक बदल गई हो उसके सामने कोई आम इंसान नहीं था बल्कि एक ऐसा वजूद था जो उसकी सोच से परे था उसने उससे पूछा मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है तुम मेरे साथ यह सब क्यों कर रहे हो तुम चाहते क्या हो उस झिन ने जवाब दिया मैं तुम्हें चाहता हूं मैं तुमसे शादी करना चाहता हूं कितनी बार बताऊं लड़की ने स्पष्ट रूप से कहा तुम एक झन्नत जान चुकी हूं इसके बावजूद भी तुम्हें इतना यकीन क्यों है कि मैं तुमसे ही शादी करूंगी मैं तुमसे किसी भी सूरत में शादी नहीं करूंगी और तुम यह बात
आज ही लिख लो साफरान जो कि वह झिन था गहरी नजरों से उसे देखते हुए बोला मुझसे शर्त मत लगाना और मेरी अना को ललकारना मत वरना तुम खुद मजबूर हो जाओगी यह कहने पर कि तुम्हें मुझसे ही शादी करनी है लड़की की आंखों में आंसू आ गए उसकी बातें उसे तकलीफ दे रही थी उसने गुस्से में कहा तुम यहां से चले जाओ जब मैं ही तुमसे शादी करने के लिए राजी नहीं हूं तो तुम क्यों जिद्द कर रहे हो मैं तुम्हारे साथ कभी खुश नहीं रह सकती मैं एक आम इंसान हूं और एक इंसान
के साथ ही शादी करना चाहती हूं यह सुनकर जिन्न आग बबूला हो गया उसने लड़की का हाथ पकड़ लिया और बोला मुझे बस 2 मिनट लगेंगे तुम्हें यहां से लेकर जाने में फिर तुम बैठी रहना अपनी मनमर्जियां करती हुई मैं तुम्हें नहीं रोकूंगा लेकिन तुम मेरी दुनिया में चली जाओगी मेरी बस्ती में जहां पर मेरा राज चलता है वहां तुम मेरे हाथों की कठपुतली बनकर रह जाओगी लड़की डर से कांप गई उसने गिड़गिड़ा हुए कहा नहीं तुम मुझे कुछ मत करना मैं जैसा कहोगे वैसा ही करूंगी जिन उसकी बात पर मुस्कुराने लगा और बोला तुम्हें
मुझसे डरने की जरूरत नहीं है तुम तो बेवकूफ हो एक तुम ही तो हो जो मेरे दिल पर राज करती हो तुम चाहो तो मुझसे कुछ भी करवा सकती हो मगर प्यार और मोहब्बत से लेकिन अगर जिद्द करोगी तो याद रखना मैं तुमसे ज्यादा जिद्दी हूं लड़की ने सिर हिलाया और कहा ठीक है मैं आज के बाद तुमसे जिद नहीं करूंगी मगर तुम मुझे कहीं मत लेकर जाना मैं अपनी मां के पास रहना चाहती हूं उनकी सेवा करना चाहती हूं मेरे सिर से मेरे पिता का साया उठ चुका है मेरी मां अकेली है खुदा के
लिए तुम ऐसा मत करो जिन्न कुछ पल चुप रहा फिर बोला ठीक है लेकिन शादी तो तुम्हें करनी ही पड़ेगी और तुम शादी मेरे साथ ही करोगी अगर तुमने किसी और के बारे में सोचा या अपनी मां से किसी और का जिक्र किया तो फिर मैं तुम्हारी एक भी नहीं सुनूंगा इतना कहकर वह अचानक धुएं की तरह गायब हो गया लड़की वही खड़ी थरथरा रही थी वह सोच रही थी कि अब वह क्या करे किससे मदद मांगे क्या मल अंगनी ठीक कह रही थी क्या उसे वाकई दाता दरबार पर चादर चढ़ाने चाहिए लेकिन उसकी मदद
करने वाला तो सिर्फ अल्लाह था उसने तय किया कि वह अपने रब के अलावा किसी और से मदद नहीं मांगेगी यही सोचकर उसने अपना सामान बांधा और घर की ओर चल पड़ी मगर ना जाने क्यों घर जाने का मन नहीं कर रहा था रास्ते में एक सुंदर बाग था जिसे वह हमेशा दूर से ही देखती थी मगर आज उसे वहां जाने की इच्छा हुई वह बाग में दाखिल हुई वहां के फूल बेहद खूबसूरत थे जैसे इस दुनिया से बाहर के हो उसने सोचा कि इससे पहले कभी उसकी नजर इन फूलों पर क्यों नहीं पड़ी थी
वहां कोई माली भी नहीं था फिर यह फूल यहां आए कहां से हल्की हल्की हवा चल रही थी ठंड बढ़ रही थी और धुंद भी पड़ने लगी थी उसने सोचा कि कुछ देर यहां सुकून से बैठा जाए उ महसूस हुआ कि इस जगह जैसा सुकून उसने कहीं नहीं पाया तभी वहां एक बुजुर्ग आए और आराम से बैठ गए उनका चेहरा इस कदर रोशन था कि लड़की की आंखें उनकी ओर देखते ही चमक उठी वह हैरान थी कि किसी आम इंसान के चेहरे पर इतना नूर कैसे हो सकता है वक्त तेजी से गुजर रहा था और
उसे पता भी नहीं चला कि शाम कब हो गई अचानक उन बुजुर्ग ने उसकी ओर देखा और मुस्कुराते हुए बोले बेटी तुम कौन हो तुम तो बहुत खूबसूरत हो ऐसा लगता है जैसे परिस्तान की शहजादी हो किसी दूसरी दुनिया से आई हो लड़की मुस्कुरा पड़ी और बोली मैं भी यही सोच रही थी कि शायद आप भी किसी दूसरी दुनिया से हैं बुजुर्ग हंसते हुए बोले तुमने बिल्कुल सही पहचाना तुम में वह ताकतें मौजूद हैं जो दूसरी दुनिया से आए लोगों को पहचान सकती हैं मैं भी रब की ही मखलूक हूं और मैं यहां अपने बेटे
की माफी मांगने आया हूं लड़की चौक गई बुजुर्ग आगे बोले मैं श जिन्नात हूं अपनी बस्ती का राजा जब मैं अपनी बस्ती के लोगों को तकलीफ में नहीं देख सकता तो तुम तो फिर इंसानों की बस्ती से हो और मेरे बेटे की पसंद भी हो मैं जानता हूं कि उसने तुम्हें बहुत तंग किया है लेकिन उसने यह सब अनजाने में किया मैंने उसकी बहुत डांट लगाई है मगर अब मैं तुमसे भी माफी मांगने आया हूं मेरे बेटे को माफ कर दो बेटी बुजुर्ग ने गहरी सांस ली और बोले अगर तुम उसे माफ नहीं करोगी तो
मुझे मजबूरन उसे अपनी बस्ती से निकालना होगा हमारे यहां ऐसा कोई भी नहीं रह सकता जो इंसानों को डराए हम तो प्यार और मोहब्बत बांटने वाले हैं अगर हमारी बस्ती में कोई ऐसा करता है तो उसे बहुत सख्त सजा मिलती है बताओ बेटी क्या तुम उसे माफ कर दोगी इसे यूं समझो कि तुम्हारा बाप तुमसे कुछ मांग रहा है बुजुर्ग की बातें सुनकर लड़की की आंखों में आंसू आ गए शाहे जिन्नात आगे बोले अगर तुम शादी के लिए हां कर दोगी तो हमारी बस्ती का बड़ा मसला हल हो जाएगा हमारी बस्ती में एक नेक इंसान
की जरूरत है क्योंकि हमारी बस्ती पर एक बददुआ है और सिर्फ एक इंसान ही हमें इससे निकाल सकता है बुजुर्ग ने उससे कहा अगर एक इंसान की शादी किसी जिन्न ज्यादे से हो जाए तभी हमारी बस्ती बददुआ से पाक हो सकती है बताओ बेटी क्या तुम मेरे बेटे से शादी करोगी क्या तुम हमें इस बददुआ से निकालो गी लड़की यह सुनकर सन्न रह गई उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह इतनी बड़ी जिम्मेदारी कैसे उठा पाएगी वह बोली मैं इस काबिल नहीं हूं और ना ही इतनी बड़ी जिम्मेदारी उठा सकती हूं मैं यह सब
कैसे करूंगी बुजुर्ग ने गहरी सांस ली और कहा खुदा ने तुम में वह ताकतें रखी हैं जिससे तुम इस जिम्मेदारी को उठा सकती हो और हमें इस मुश्किल से निकाल सकती हो क्या तुम नहीं चाहोगी कि जब तुम दुनिया में आई हो तो किसी की मदद करके जाओ यह तुम्हारी भी नेकी होगी और हमारी भी मदद हो जाएगी हमें तुम्हारी जरूरत है और मैं जानता हूं कि तुम हमारी जरूरत को पूरा करोगी बोलो बेटी करोगी ना बुजुर्ग की इल्तजा ने लड़ के दिल पर असर किया वह खुद हैरान थी कि उसे उस पर क्यों तरस
आने लगा बिना सोचे समझे उसके मुंह से निकल गया हां मैं तुम्हारी मदद करने के लिए तैयार हूं जैसे ही उसने यह शब्द कहे उसे महसूस हुआ कि वह किसी ट्रांस जैसी स्थिति में थी उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि उसने यह फैसला कैसे कर लिया ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने उससे यह अल्फाज कलवा दिए हो तभी अचानक उसकी आंखें बंद हो गई और जब उसने फिर से आंखें खोली तो वह बुजुर्ग वहां से गायब हो चुके थे उसने इधर-उधर देखा लेकिन अब वह खूबसूरत बाग जहां वह बैठी थी अचानक गायब
हो गया था वह जगह अब सुनसान लगने लगी थी तभी एक औरत पास आई और कहने लगी लड़की तुम कौन हो इतनी खूबसूरत होकर कचरे के ढेर में क्यों बैठी हुई हो लड़की ने हैरानी से उसकी तरफ देखा उसे यकीन नहीं हुआ कि वह क्या कह रही थी कचरे का ढेर लड़की ने खुद से सवाल किया यह तो अभी तक एक सुंदर बागीचा था मगर जब उसने दोबारा इधर-उधर देखा तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गई वहां वाकई कचरे का ढेर था अब उसे उस बदबू का एहसास होने लगा था जिससे पहले वह अनजान
थी वह घबराकर वहां से उठी और जल्दी-जल्दी अपने कपड़े झाड़ने लगी उसे खुद से घिन महसूस होने लगी कि वह इस गंदगी में क्यों बैठ गई थी वह भागते हुए घर पहुंची और बिना कुछ बोले सीधे वॉशरूम में चली गई उसकी मां परेशान हो पीछे पीछे आई और दरवाजे के बाहर खड़ी होकर पूछने लगी फातिमा क्या हुआ तुम्हारी तबीयत तो ठीक है आज से पहले तो तुमने कभी ऐसा रवैया नहीं रखा आते ही वॉशरूम में क्यों घुस गई हो सब ठीक तो है ना लड़की वॉशरूम के अंदर रो रही थी उसने ऊंची आवाज में कहा
कुछ ठीक नहीं है अम्मा मुझे लग रहा है कि मैं पागल हो जाऊंगी मुझे समझ नहीं आ रहा कि मेरे साथ यह सब क्या हो रहा है ऐसा लगता है जैसे मैं कोई डरावना ख्वाब देख रही हूं अम्मा घबरा गई उन्होंने कहा बाहर आओ फातिमा पूरी बात बताओ लड़की बाहर आई और रोते-रोते अम्मा को सारी दास्तान सुना दी अम्मा सर पकड़कर बैठ गई और कांपती आवाज में बोली यह क्या हो रहा है हमारे साथ लड़की ने कहा अम्मा मैं खुद नहीं जानती मैं तो बहुत परेशान हूं मुझे लगता है कि हमें किसी पीर बाबा के
पास जाना चाहिए अम्मा ने हामी भरी और बोली चलो हम दादा दरबार पर चलते हैं वहां किसी मलंग से पूछ लेंगे कि आखिर तुम्हारे साथ क्या माजरा है मगर लड़की ने जल्दी से मना कर दिया नहीं अम्मा मुझे वहां नहीं जाना ना जाने क्यों वह लोग मुझे ठीक नहीं लगते अम्मा हैरानी से बोली तुम्हारा दिमाग तो ठीक है वह सब रब के नेक और इबादत गुजार बंधे थे लड़की ने फिर कहा अम्मा जो भी हो मैं वहां नहीं जाऊंगी मैं अपने रब से मदद मांगना चाहती हूं जब वही अता करने वाला है तो फिर मुझे
किसी और के पास क्यों जाना अम्मा ने गहरी सांस ली और पूछा तो फिर तुम क्या चाहती हो लड़की ने जवाब दिया अम्मा हम किसी मौलवी साहब के पास चलते हैं उनसे कोई वजीफा पूछ लेते हैं या कोई कुरानी आयत जिससे मेरी मदद हो सके अम्मा ने उसकी बात मान ली और कहा ठीक है हम पास की मस्जिद के मौलवी साहब के पास चलते हैं अगली सुबह लड़की और उसकी अम्मा पास की मस्जिद के मौलवी साहब के पास जाने के लिए निकल पड़ी उन्हें उम्मीद थी कि शायद अब इस परेशानी का कोई हल मिल जाएगा
लेकिन क्या वाकई उनकी परेशानी खत्म होने वाली थी जब उसने अपने हालात इमाम साहब को बताए तो वे भी गहरी सोच में पड़ गए उन्होंने कुछ देर तक चुप रहकर सोचा फिर बोले तुम लोग जुमेरात की रात मेरे पास आओ मैं देखता हूं कि इस मामले में क्या किया जा सकता है फातिमा ने घर आकर अपनी अम्मा से कहा कि वह कुछ दिन तक काम पर नहीं जाएगी अम्मा ने हामी भर ली और कहा कोई बात नहीं हो सकता है कि ज्यादा काम की वजह से तेरा दिमाग थक गया हो इसीलिए तुझे मुझे यह सब
महसूस हो रहा हो फातिमा ने भी यही सोचा कि शायद यही वजह होगी इसलिए वह अगले कुछ दिन घर पर ही रही न वह कहीं गई और ना ही अम्मा ने उसे जाने दिया आखिरकार जुमेरात की रात आ गई फातिमा अपनी अम्मा के साथ फिर से इमाम साहब के पास गई उन्होंने बैठने का इशारा किया और कहा मुझे तुमसे कुछ जरूरी बातें करनी है फिर वे गंभीर स्वर में बोले क्या तुम कभी किसी दरबार वगैरह गई हो फातिमा ने हां में सिर हिलाया और कहा हां मैं दाता दरबार के बाहर तस्बीह और फूल बेजती हूं
इमाम साहब गहरी सांस लेकर बोले यही वजह है वहां से एक झन्शियन हिलाकर [संगीत] कहा हां अक्सर ऐसा होता है खास तौर पर जब मैं दरबार से वापस आती हूं इमाम साहब ने सिर झुकाया और कहा तब तो यकीनन वह तुम्हारे साथ ही आता है लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है मैं तुम्हें एक अमल बताता हूं जिसे तुम्हें सात दिन तक करना होगा फातिमा ने बिना किसी झिंझक के हामी भर ली इमाम साहब ने उसे सूरज जिन का वजीफा बताया जो सुबह तहज्जुद के वक्त करना था हालांकि तहज्जुद के वक्त फातिमा को अजीब सा खौफ
महसूस होता था उसे लगता था कि कोई उसके साथ खड़ा होकर इबादत कर रहा है लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और जैसे तैसे सात दिन तक यह वजीफा किया आखिरी दिन जब उसने वजीफा पूरा किया तो उसे महसूस हुआ कि उसके कंधों से कोई भारी बोझ उतर गया हो उसे अजीब सा सुकून महसूस हुआ जैसे किसी ने उसकी तकलीफ छीन ली हो वह फौरन इमाम साहब के पास गई और बताया मौलवी साहब मैंने सात दिन का वजीफा पूरा कर लिया है इमाम साहब मुस्कुराए और बोले अब सात दिन तक सूरह रहमान की तिलावत करो अपने
पास एक पानी का गिलास रखना जब सूरह रहमान मुकम्मल हो जाए तो तीन बार दिल में मोहब्बत के साथ अल्लाह कहना और फिर उस पानी को पी लेना इंशा अल्लाह इसके बाद तुम्हें कोई असरात नहीं होंगे फातिमा ने ऐसा ही किया सातवें दिन जब वह सोई तो उसे ख्वाब में जाफरान नाम का एक झन्नत आया उसने नरमी से कहा अच्छा होता अगर तुम मेरी दुनिया में मेरे साथ आ जाती लेकिन कोई बात नहीं हमारा रिश्ता हमेशा रहेगा तुम जब भी मुझे दिल से याद करोगी मैं तुम्हारे आसपास ही रहूंगा मैं जानता हूं कि तुम मुझसे
डरती हो लेकिन घबराओ मत मैं तुम्हें कभी नुकसान नहीं पहुंचा ंगा यह मेरा तुमसे वादा है फातिमा ख्वाब में ही सिहर गई जाफरान ने आगे कहा तुम्हारी पाकीजा तुम्हारी इबादत यही वजह थी कि मैं तुमसे मोहब्बत करने लगा तुम्हारे जिस्म से नहीं बल्कि तुम्हारी रूह से इसीलिए मैं तुम्हें आसानी से छोड़कर जा रहा हूं लेकिन अगर कभी तुम्हें मेरी जरूरत महसूस हो तो मुझे मोहब्बत से याद करना फिर वह धीमे स्वर में बोला स्टोर रूम में खिड़की के पास एक खूबसूरत माला रखी है अगर तुम चाहती हो कि मैं तुम्हारे पास आया करूं तो उस
माला को अपने गले में डाल लेना और जब भी मुझे याद करना हो उसे हाथ में पकड़ लेना मैं तुम्हारे पास चला आऊंगा फातिमा घबराकर उठ गई उसने तुरंत अम्मा को जगाया और सारी बात बताई अम्मा भी चौक गई और बोली चलो इमाम साहब से पूछते हैं कि यह सब क्या है जब वे इमाम साहब के पास पहुंची तो उन्होंने फातिमा की पूरी बात सुनी और गंभीरता से बोले वह कोई बुरी रूह नहीं थी बल्कि नेक जिन्नात में से था इसीलिए उसने तुम्हें नुकसान नहीं पहुंचाया बल्कि तुम्हारी मदद का रास्ता भी दिखा गया अगर कभी
तुम्हें उसकी जरूरत महसूस हो तो उसे याद कर सकती हो वह तुम्हारी मदद के लिए जरूर आएगा फिर उन्होंने एक और बात कही अगर तुम चाहती हो कि तुम्हारा और उसका रिश्ता नेक राह पर बना रहे तो हर जुमेरात को उसी स्टोर रूम में बैठकर सूरज जिन की तिलावत कर लिया करो इससे ना सिर्फ तुम्हारी मदद होगी बल्कि उसकी भी फातिमा अब समझ चुकी थी कि उसकी जिंदगी में जो कुछ भी हुआ वह कोई बुरा ख्वाब नहीं था बल्कि एक सच्चाई थी और अब उसे अपनी इबादत और अल्लाह की रहमत पर पूरा यकीन था