कल्पना कीजिए आज आप काम पर नहीं गए कल भी नहीं गए अगले महीने भी नहीं गए फिर भी आपके बैंक खाते में पैसा आता रहा सुनने में अच्छा लगता है है ना लेकिन सच्चाई यह है कि ज्यादातर लोग एक महीने काम ना करें तो उनकी आय भी रुक जाती है क्यों क्योंकि उन्होंने कमाना तो सीखा है लेकिन पैसे से पैसा बनाना नहीं सीखा यही वजह है कि दो लोग एक जैसी कमाई करने के बाद भी कुछ सालों में बिल्कुल अलग जिंदगी जी रहे होते हैं एक आज भी पैसों के लिए काम कर रहा होता है
और दूसरा अपने पैसों से काम करवा रहा होता है। आखिर दोनों के बीच ऐसा क्या फर्क है? यही वह सोच है जिसने वारेन बफेट को दुनिया के सबसे सफल निवेशकों में से एक बनाया [संगीत] और आज की इस वीडियो में हम उसी सोच को समझेंगे। नमस्कार दोस्तों, स्वागत है आपका बुक वेस्टर में। ज्यादातर लोग मानते हैं कि अमीर बनने के लिए बड़ी सैलरी, बड़ा बिजनेस या बहुत ज्यादा किस्मत चाहिए। लेकिन वारेन बफेट की कहानी कुछ और ही कहती है। वह हमें सिखाते हैं कि दौलत सिर्फ कमाई से नहीं बनती। दौलत बनती है सही फैसलों से,
सही आदतों से और सबसे महत्वपूर्ण, सही सोच से। आज की इस ऑन बुक समरी में हम समझेंगे कि पैसे से पैसा कैसे बनाया जाता है। एसेट्स आखिर क्यों इतने महत्वपूर्ण हैं। कंपाउंडिंग को दुनिया का आठवां अजूबा क्यों कहा जाता है? और कैसे एक आम इंसान छोटी-छोटी शुरुआत करके भी अपने भविष्य को आर्थिक रूप से मजबूत बना सकता है। ध्यान रखिए यह वीडियो रातोंरात अमीर बनने की कोई कहानी नहीं है। यह उन सिद्धांतों की बात है जो दशकों पहले भी काम करते थे। आज भी काम करते हैं और आने वाले वर्षों में भी काम करते रहेंगे।
इसीलिए इस वीडियो को अंत तक जरूर देखिए क्योंकि हो सकता है आज आपको पैसे कमाने का नहीं बल्कि पैसा बनाने का असली तरीका समझ आ जाए और अगर आपको फाइनेंस, निवेश और मनी माइंडसेट से जुड़ी ऐसी ही ऑडियो बुक समरी पसंद आती हैं तो वीडियो को लाइक जरूर कीजिए। चैनल को सब्सक्राइब कीजिए और बेल आइकन दबाना मत भूलिए। तो चलिए शुरू करते हैं। कल्पना कीजिए कि आपके पास दो बीज हैं। पहला बीज आप आज ही खा लेते हैं और दूसरा बीज आप जमीन में बो देते हैं। कुछ समय बाद पहला बीज हमेशा के लिए खत्म
हो जाएगा। लेकिन दूसरा बीज एक पेड़ बन सकता है जो सालों तक फल देता रहेगा। दोस्तों, पैसा भी बिल्कुल ऐसा ही होता है। आप अपनी पूरी कमाई को आज खर्च कर सकते हैं या फिर उसका एक हिस्सा ऐसे बीज की तरह लगा सकते हैं जो भविष्य में आपके लिए और पैसा पैदा करें। यही सोच वारेन बफेट को बाकी लोगों से अलग बनाती है। वह पैसों को खर्च करने की चीज नहीं बल्कि काम पर लगाने की चीज मानते हैं। और शायद यही कारण है कि दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शामिल होने के बावजूद उनकी सोच
आज भी [संगीत] एक साधारण इंसान जैसी दिखाई देती है। लेकिन यहां एक सवाल उठता है क्या वारेन बफेट हमेशा से अमीर थे? क्या उनके पास शुरुआत से ही करोड़ों रुपए थे? नहीं। असल में वारेन बफेट की सबसे बड़ी ताकत पैसा नहीं थी। उनकी सबसे बड़ी ताकत थी सही समय पर सही सोच विकसित करना। बहुत कम लोग जानते हैं कि बचपन में ही वारेन बफेट को पैसों के बारे में एक बात समझ आ गई थी। उन्होंने देखा कि अधिकांश लोग अपनी पूरी जिंदगी काम करते हैं। लेकिन बहुत कम लोग अपने पैसे को काम पर लगाते हैं।
यहीं से उन्होंने एक आदत विकसित की। जब भी उनके हाथ में पैसा आता वे सिर्फ यह नहीं सोचते थे कि इससे क्या खरीदा जा सकता है। वे यह सोचते थे कि इससे भविष्य में कितना पैसा बनाया जा सकता है। ध्यान दीजिए। यहीं पर अमीर और गरीब सोच के बीच सबसे बड़ा अंतर पैदा होता है। एक व्यक्ति पैसे को खर्च करने का अवसर समझता है और दूसरा व्यक्ति पैसे को अवसर बनाने का साधन समझता है। मान लीजिए आपको आज ₹10,000 मिलते हैं। ज्यादातर लोग तुरंत सोचेंगे इससे क्या खरीदूं? लेकिन वारेन बफेट की सोच कुछ अलग होगी।
वे सोचेंगे मैं ऐसा क्या खरीद सकता हूं जो भविष्य में मुझे और पैसा कमा कर दे। पहली नजर में यह अंतर बहुत छोटा लगता है। लेकिन यही छोटा सा अंतर 10 साल, 20 साल और 30 साल बाद बहुत बड़ा परिणाम पैदा करता है। क्योंकि जिंदगी में अमीर बनने वाले ज्यादातर लोग कोई जादू [संगीत] नहीं करते। वे सिर्फ एक काम बार-बार करते हैं। वे अपनी कमाई का एक हिस्सा ऐसी चीजों में लगाते हैं जो उनके लिए लगातार काम करती रहे। और यहीं पर हमें एक बहुत महत्वपूर्ण शब्द समझना होगा। एसेट। हो सकता है आपने यह शब्द
पहले भी सुना हो, लेकिन सच यह है कि अधिकांश लोग एसेट को सही तरीके से समझते ही नहीं हैं। कई लोग सोचते हैं कि महंगी कार एक एसेट है। बड़ा घर एक एसेट है। महंगी चीजें एसेट है। लेकिन क्या सच में ऐसा है? अगर कोई चीज आपकी जेब से लगातार पैसा निकाल रही है, तो क्या उसे एसेट कहा जा सकता है? यही वह जगह है जहां ज्यादातर लोग गलती करते हैं और यही गलती उन्हें सालों तक आर्थिक रूप से पीछे रखती है। तो आखिर एसेट होता क्या है और क्यों वारेन बफेट अपनी जिंदगी का इतना
बड़ा हिस्सा एसेट्स बनाने और खरीदने में लगाते हैं? इसे समझने के लिए एक बहुत ही सरल उदाहरण लेते हैं। मान लीजिए दो लोगों के पास ₹1 एक लाख हैं। पहला व्यक्ति उस पैसे से एक महंगी बाइक खरीद लेता है। बाइक खरीदने के बाद उसे पेट्रोल भरवाना होगा। [संगीत] सर्विस करवानी होगी। मेंटेनेंस का खर्च उठाना होगा और समय के साथ उसकी कीमत भी कम होती जाएगी। अब दूसरी तरफ एक दूसरा व्यक्ति है। वह उसी ₹1 लाख को ऐसी जगह लगाता है जहां से उसे नियमित रूप से कुछ आय मिलने लगे। शायद कोई छोटा निवेश शायद कोई
ऐसा व्यवसाय या कोई ऐसी संपत्ति जो समय के साथ उसकी जेब में पैसा डालती रहे। अब सोचिए 5 साल बाद इन दोनों में से कौन ज्यादा मजबूत स्थिति में होगा। यही वह अंतर है जिसे वारेन बफेट बहुत जल्दी समझ गए थे। वह जानते थे कि अमीर बनने का रास्ता ज्यादा कमाने से नहीं बल्कि ज्यादा एसेट्स बनाने से निकलता है। क्योंकि एसेट्स आपके लिए तब भी काम करते हैं जब आप काम नहीं कर रहे होते और यही बात ज्यादातर लोग समझ नहीं पाते। वे अपनी पूरी ऊर्जा आय बढ़ाने में लगा देते हैं। लेकिन एसेट्स बढ़ाने पर
ध्यान ही नहीं देते। ध्यान से सोचिए। अगर आपकी सैलरी कल से दोगुनी हो जाए लेकिन आपके खर्चे भी दोगुने हो जाए तो क्या आप वास्तव में अमीर बन गए? शायद नहीं। क्योंकि अमीरी सिर्फ कमाई का नाम नहीं है। अमीरी उस अंतर का नाम है [संगीत] जो आपकी कमाई और आपके खर्चों के बीच बचता है। और उससे भी महत्वपूर्ण आप उस बचे हुए पैसे का क्या करते हैं। यहीं पर अधिकांश लोग एक ऐसी गलती करते हैं जो उन्हें वर्षों तक पीछे रखती है। जैसे ही उनकी आय बढ़ती है, उनकी जीवन शैली भी बढ़ जाती है। नया
फोन, नई गाड़ी, महंगे रेस्टोरेंट, बड़े-बड़े खर्च और देखते ही देखते बढ़ी हुई कमाई भी गायब हो जाती है। इसे ही लाइफस्टाइल इनफ्लेशन कहा जाता है और यह चुपचाप लोगों की संपत्ति बनाने की क्षमता को खत्म कर देता है। वारेन बफेट का तरीका बिल्कुल अलग था। जब उनकी आय बढ़ी, उन्होंने पहले अपने एसेट्स बढ़ाए। उन्होंने अपने पैसे को नए पैसे पैदा करने में लगाया। यही कारण है कि समय उनके पक्ष में काम करता गया। अब यहां एक बहुत रोचक बात है। दुनिया के अधिकांश लोग पैसे को देखकर सोचते हैं। मैं इससे क्या खरीद सकता हूं? लेकिन
वारेन बफेट पैसे को देखकर सोचते हैं। मैं इससे कितने और रुपए पैदा कर सकता हूं। पहली सोच [संगीत] उपभोक्ता की सोच है। दूसरी सोच निवेशक की सोच है। [संगीत] और इन दोनों सोच के परिणाम जमीन आसमान जितने अलग होते हैं। मान लीजिए आपके पास एक मुर्गी है जो हर दिन एक अंडा देती है। अगर आप सिर्फ अंडा खाकर खुश हो जाएं तो आपको एक दिन का फायदा मिलेगा। लेकिन अगर आप उस मुर्गी की देखभाल करें तो वह लंबे समय तक अंडे देती रहेगी। वारेन बफेट हमेशा मुर्गी खरीदने पर ध्यान देते हैं। सिर्फ अंडा खाने पर
नहीं। यानी वे उस स्रोत पर ध्यान देते हैं जो लगातार आय पैदा करता है और यही सोच उन्हें अलग बनाती है। लेकिन दोस्तों यहां एक और रहस्य छिपा हुआ है। सिर्फ एसेट खरीद लेना ही काफी नहीं होता क्योंकि दुनिया में लाखों लोग निवेश करते हैं। फिर भी बहुत कम लोग वारेन बफेट जैसी सफलता हासिल कर पाते हैं। तो आखिर ऐसा क्या है जो एक साधारण निवेशक और वारेन बफेट के बीच इतना बड़ा अंतर पैदा करता है? इसका जवाब है धैर्य और शायद यही वह गुण है जिसे आधुनिक दुनिया सबसे ज्यादा नजरअंदाज करती है। आज हर
कोई जल्दी परिणाम चाहता है। जल्दी पैसा, जल्दी सफलता, जल्दी अमीरी। लेकिन वारेन बफेट की सोच बिल्कुल उल्टी है। वे जानते हैं कि दौलत रातों-रात नहीं बनती। दौलत धीरे-धीरे बनती है और फिर अचानक बहुत बड़ी दिखाई देने लगती है। यहीं से शुरू होती है वह शक्ति जिसे वारेन बफेट अपनी सबसे बड़ी दोस्त मानते हैं। कंपाउंडिंग की शक्ति और जब आप कंपाउंडिंग को सच में समझ लेते हैं तो पैसों को देखने का आपका पूरा नजरिया बदल सकता है। क्योंकि कंपाउंडिंग सिर्फ पैसों का नियम नहीं है। यह जीवन का भी नियम है। छोटे-छोटे प्रयास जब लगातार किए जाते
हैं तो समय के साथ बहुत बड़े परिणाम देते हैं। इसे एक आसान उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आपने एक पेड़ लगाया। पहले साल वह बहुत छोटा दिखाई देगा। दूसरे साल भी शायद कोई खास फर्क ना दिखे। तीसरे साल भी आपको लगेगा कि इसकी रफ्तार बहुत धीमी है। लेकिन अगर आप उसे पानी देते रहें, उसकी देखभाल करते रहें तो कुछ वर्षों बाद वही छोटा सा पौधा एक विशाल पेड़ बन सकता है। पैसों के साथ भी बिल्कुल यही होता है। शुरुआत में परिणाम छोटे दिखाई देते हैं। इतने छोटे कि कई लोग बीच रास्ते में हार मान
लेते हैं। उन्हें लगता है कि कुछ हो ही नहीं रहा। लेकिन वारेन बफेट जानते थे कि असली जादू शुरुआत में नहीं अंत में दिखाई देता है। यही कारण है कि उन्होंने जल्दी अमीर बनने की कोशिश [संगीत] नहीं की। उन्होंने अपने पैसे को समय दिया और समय ने उनके पैसे को बढ़ा दिया। सोचिए अगर आप हर महीने सिर्फ थोड़ा सा पैसा बचाकर उसे सही जगह लगाते रहें और उसे वर्षों तक बढ़ने का मौका दें तो परिणाम आपकी कल्पना से कहीं बड़े हो सकते हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़] लेकिन यहां एक समस्या है। ज्यादातर लोग कंपाउंडिंग
को समझते तो हैं लेकिन उस पर भरोसा नहीं कर पाते। क्यों? क्योंकि हम ऐसे परिणाम चाहते हैं जो तुरंत दिखाई दें। हम एक बीज बोते हैं और अगले दिन फल ढूंढने लगते हैं। हम निवेश शुरू करते हैं [संगीत] और कुछ महीनों बाद ही बड़े परिणाम की उम्मीद करने लगते हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़] लेकिन प्रकृति का नियम अलग है। पहले धैर्य फिर विकास और उसके बाद परिणाम। वारेन बफेट ने इसी नियम को स्वीकार किया। उन्होंने समझ लिया कि पैसा कमाने का सबसे तेज तरीका अक्सर सबसे धीमा दिखाई देता है। यही कारण है कि उन्होंने
अपना अधिकांश जीवन इंतजार करते हुए बिताया। लेकिन यह इंतजार खाली नहीं था। [संगीत] यह समझदारी से किया गया इंतजार था क्योंकि वे जानते थे कि समय उनका दुश्मन नहीं उनका साथी है। अब जरा अपनी जिंदगी के बारे में सोचिए। कितनी बार आपने किसी चीज की शुरुआत की लेकिन सिर्फ इसलिए छोड़ दी क्योंकि परिणाम जल्दी नहीं मिले। शायद कोई नई आदत, शायद कोई व्यवसाय, शायद कोई निवेश या शायद कोई सपना। यहीं पर अधिकांश लोग पीछे रह जाते हैं। वे शुरुआत तो करते हैं लेकिन टिक नहीं पाते और वारेन बफेट की सबसे बड़ी ताकत यही थी। उन्होंने
टिके रहना सीखा। उन्होंने भावनाओं से ज्यादा सिद्धांतों पर भरोसा किया और यही कारण है कि समय के साथ उनका फायदा बढ़ता गया। लेकिन दोस्तों, यहां एक और दिलचस्प बात है। वारेन बफेट सिर्फ यह [संगीत] नहीं देखते थे कि कोई चीज पैसा कमा सकती है या नहीं। वे यह भी देखते थे कि वह चीज समझ में आती है या नहीं। सुनने में यह बात साधारण लग सकती है। लेकिन इसमें बहुत गहरी सीख छिपी हुई है। आज बहुत से लोग सिर्फ इसलिए निवेश कर देते हैं क्योंकि दूसरे लोग कर रहे हैं। किसी ने कहा यह [संगीत] शेयर
बढ़ेगा तो खरीद लिया। किसी ने कहा यह बिजनेस शानदार है तो पैसा लगा दिया। लेकिन बफेट ऐसा कभी नहीं करते। वे कहते हैं जिस चीज को आप समझते नहीं उसमें पैसा मत लगाइए। क्योंकि जब आप किसी चीज को समझते नहीं तो डर जल्दी पैदा होता है और डर अक्सर गलत फैसले करवाता है। [संगीत] यही कारण है कि बाजार गिरते ही बहुत से लोग घबरा जाते हैं। वे नुकसान के डर से अपने निवेश बेच देते हैं और बाद में पछताते हैं। लेकिन वारेन बफेट का नजरिया अलग है। वे बाजार को अपने भावनाओं से नहीं अपने ज्ञान
से देखते हैं। वे जानते हैं कि अच्छी चीजें समय के साथ अपनी कीमत साबित करती हैं और इसलिए वे भीड़ का पीछा नहीं करते। वे सोचते [संगीत] हैं, समझते हैं, फिर फैसला लेते हैं और यही आदत उन्हें बाकी लोगों से अलग बनाती है। अब सवाल यह है अगर हमें भी अपने पैसे से पैसा बनाना है तो क्या सिर्फ निवेश करना काफी है? या फिर हमें अपनी सोच में भी कुछ बदलाव करने होंगे? क्योंकि सच्चाई यह है कि पैसा कमाने से पहले इंसान अपनी सोच से अमीर बनता है और बफेट की पूरी यात्रा हमें यही सिखाती
है। आगे हम उन मानसिक आदतों को समझेंगे जिन्होंने एक साधारण लड़के को दुनिया के सबसे सफल निवेशकों में से एक बना [संगीत] दिया। और अगर ध्यान से देखा जाए तो बफेट की असली सफलता शेयर बाजार से नहीं आई। उनकी असली सफलता उनकी सोच से आई। क्योंकि शेयर बाजार में लाखों लोग निवेश करते हैं, लेकिन सभी बफेट नहीं बनते। फर्क पैसों में नहीं, फर्क मानसिकता में होता है। उदाहरण के लिए मान लीजिए दो लोग एक ही अवसर देखते हैं। पहला व्यक्ति सोचता है, इससे मैं कितनी जल्दी पैसा कमा सकता हूं? दूसरा व्यक्ति सोचता है। क्या यह
अवसर अगले 10 या 20 साल तक मेरे लिए मूल्य पैदा करेगा? यहीं से दोनों की दिशा अलग हो जाती है। पहला व्यक्ति तेजी से दौड़ने की कोशिश करता है। दूसरा व्यक्ति लंबी दूरी तय करने की तैयारी करता है। और दिलचस्प बात यह है कि जीवन में अक्सर वही व्यक्ति आगे निकलता है। जो लंबी दूरी के लिए तैयार होता है। बफेट हमेशा लंबी अवधि की सोच रखते थे। वे किसी भी फैसले से पहले खुद से एक सवाल पूछते थे। क्या मैं इस चीज को अगले 10 साल तक अपने पास रखना चाहूंगा? अगर जवाब नहीं होता तो
वे उसमें अपना पैसा भी नहीं लगाते। सोचिए अगर हम अपने रोजमर्रा के फैसलों में भी यही सिद्धांत अपनाने लगे तो हमारी जिंदगी कितनी बदल सकती है। क्योंकि अधिकांश लोग आज के आराम के लिए कल की आजादी बेच देते हैं। लेकिन अमीर लोग आज थोड़ा त्याग करके कल की आजादी खरीदते हैं। यही वजह है कि आर्थिक स्वतंत्रता अचानक नहीं मिलती। उसे धीरे-धीरे बनाया जाता है। एक सही फैसला, फिर दूसरा सही फैसला, फिर तीसरा सही फैसला और वर्षों बाद वही फैसले मिलकर एक मजबूत [संगीत] वित्तीय जीवन बनाते हैं। अब यहां एक ऐसी बात आती है जिसे बहुत
कम लोग समझते हैं। ज्यादातर लोग सोचते हैं कि अमीर बनने के लिए बड़ी शुरुआत करनी पड़ती है। लेकिन बफेट की सोच इसके बिल्कुल विपरीत है। वे कहते हैं कि शुरुआत का आकार महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण है शुरुआत करना। क्योंकि जो व्यक्ति छोटी रकम को संभाल नहीं सकता वह बड़ी रकम को भी लंबे समय तक संभाल नहीं पाएगा। मान लीजिए किसी व्यक्ति को आज ₹1 करोड़ मिल जाए। क्या वह तुरंत अमीर सोच वाला इंसान बन जाएगा? जरूरी नहीं। अगर उसकी आदतें वहीं पुरानी हैं। अगर उसके फैसले वहीं पुराने हैं। अगर उसका नजरिया वहीं पुराना है तो
बहुत संभव है कि कुछ वर्षों बाद वह फिर वहीं पहुंच जाए जहां से उसने शुरुआत की थी। इसीलिए बफेट पहले आदतों पर ध्यान देते हैं फिर पैसों पर। क्योंकि आदतें भविष्य का निर्माण करती हैं और यही बात हमें एक महत्वपूर्ण सीख देती है। यदि आप सच में पैसे से पैसा बनाना चाहते हैं तो सबसे पहले अपनी वित्तीय आदतों को मजबूत करना होगा। हर बार जब पैसा आपके हाथ में आए तो उसे पूरा खर्च करने से पहले खुद से एक सवाल पूछिए। क्या इसका कुछ हिस्सा मेरे भविष्य के लिए काम कर सकता है? शायद शुरुआत में
जवाब बहुत छोटा होगा। शायद सिर्फ ₹100, शायद सिर्फ ₹500। लेकिन याद रखिए कंपाउंडिंग को रकम से ज्यादा आदत पसंद होती है। वह उन लोगों को पुरस्कृत करती है जो लगातार सही काम करते रहते हैं और यहीं पर अधिकांश लोग हार मान जाते हैं। वे सोचते हैं इतने छोटे पैसे से क्या होगा? लेकिन यही सोच उन्हें शुरुआत करने से रोक देती है। जबकि बफेट जानते थे कि बड़े परिणाम हमेशा छोटी शुरुआत से पैदा होते हैं। एक विशाल इमारत भी पहली ईंट से शुरू होती है। एक विशाल पेड़ भी एक छोटे बीज से शुरू होता है और
बड़ी संपत्ति भी एक छोटे निवेश से शुरू होती है। लेकिन दोस्तों यहां एक और खतरा है [संगीत] जो लोगों को अमीर बनने से रोकता है और वह है दूसरों को प्रभावित करने की आदत। बहुत से लोग पैसा कम इसलिए नहीं खर्च करते क्योंकि उन्हें जरूरत होती है। वे पैसा इसलिए खर्च करते हैं क्योंकि वे दूसरों को दिखाना चाहते हैं कि उनके पास पैसा है। महंगी घड़ी, महंगी गाड़ी, महंगे ब्रांड और धीरे-धीरे उनकी आय का बड़ा हिस्सा दिखावे में खर्च हो जाता है। लेकिन बफेट की जिंदगी को देखिए। दुनिया के सबसे [गला साफ़ करने की आवाज़]
अमीर लोगों में शामिल होने के बावजूद उन्होंने हमेशा सादगी को महत्व दिया। क्यों? क्योंकि वे जानते थे कि अमीर दिखना और अमीर होना दो बिल्कुल अलग बातें हैं। अमीर दिखने के लिए खर्च करना पड़ता है। लेकिन अमीर बनने के लिए निवेश करना पड़ता है। और अक्सर दोनों रास्ते एक दूसरे के विपरीत दिशा में जाते हैं। यही कारण है कि कुछ लोग बाहर से बहुत सफल दिखाई देते हैं। लेकिन अंदर से आर्थिक दबाव में जी रहे होते हैं। जबकि कुछ लोग साधारण दिखाई देते हैं। लेकिन उनकी वित्तीय नींव बहुत मजबूत होती है। अब सवाल यह है
अगर हमें दिखावे के बजाय वास्तविक संपत्ति बनानी है। अगर हमें अपने पैसे को अपने लिए काम पर लगाना है। अगर हमें बफेट जैसी सोच विकसित करनी है तो हमें अपने पैसों को किन सिद्धांतों के आधार पर संभालना चाहिए? यहीं से शुरू होते हैं वे व्यावहारिक नियम जिन्हें अपनाकर कोई भी व्यक्ति धीरे-धीरे अपनी वित्तीय स्थिति को बदल सकता है। सबसे पहला नियम है अपने पैसे को एक कर्मचारी की तरह देखना। सुनने में यह बात थोड़ी अजीब लग सकती है। लेकिन जरा सोचिए अगर आपके पास 100 कर्मचारी हो और वे सभी आपके लिए काम कर रहे हो
तो क्या आप चाहेंगे कि वे पूरे दिन खाली बैठे रहे? बिल्कुल नहीं। आप चाहेंगे कि हर कर्मचारी कुछ ना कुछ मूल्य पैदा करें। बफेट पैसों को भी इसी नजरिए से देखते हैं। उनके लिए हर रुपया एक छोटा कर्मचारी है। [संगीत] जिसका काम है और रुपए पैदा करना। लेकिन अधिकांश लोग क्या करते हैं? जैसे ही पैसा उनके हाथ में आता है, वे उसे खर्च करके नौकरी से निकाल देते हैं और फिर अगले महीने नए पैसे का इंतजार करते हैं। यहीं पर सोच का अंतर पैदा होता है। अमीर लोग अपने पैसों को काम पर लगाते हैं। गरीब
और मध्यम वर्ग के बहुत से लोग अपने पैसों को खर्च करने में लगा देते हैं। अब इसका मतलब यह नहीं कि आपको जिंदगी का आनंद नहीं लेना चाहिए। बिल्कुल लेना चाहिए। लेकिन अंतर प्राथमिकता का है। पहले एसेट्स, फिर विलासिता, पहले भविष्य, फिर वर्तमान की अतिरिक्त इच्छाएं। बफेट ने यही रास्ता चुना और समय के साथ उनके पैसों की सेना बढ़ती चली गई। अब कल्पना कीजिए अगर आपके पास 100 कर्मचारी हो और हर कर्मचारी अपने साथ एक नया कर्मचारी लेकर आए फिर वे दोनों मिलकर दो और लेकर आई तो कुछ समय बाद आपकी टीम कितनी बड़ी हो
जाएगी यही कंपाउंडिंग है और यही कारण है कि वारेन बफेट समय को इतना महत्व देते हैं। लेकिन दोस्तों समय तभी आपका साथी बनता है जब आप उसे मौका देते हैं। आज बहुत से लोग निवेश तो शुरू करते हैं, लेकिन कुछ महीनों बाद ही परिणाम ना देखकर निराश हो जाते हैं। वे बीच रास्ते में दिशा बदल देते हैं। फिर कोई नया तरीका खोजते हैं। फिर कोई नया अवसर, फिर कोई नई योजना और इसी चक्कर में साल गुजर जाते हैं। लेकिन बफेट हमें एक अलग रास्ता दिखाते हैं। वे कहते हैं कि सफलता का रहस्य हमेशा नई चीजें
खोजने में नहीं बल्कि सही चीजों पर लंबे समय तक टिके रहने में है। अब यहां एक महत्वपूर्ण सवाल आता है। अगर एसेट्स इतने जरूरी हैं तो आखिर एसेट्स हो क्या सकते हैं? क्योंकि बहुत से लोग सोचते हैं कि एसेट्स का मतलब सिर्फ करोड़ों की प्रॉपर्टी [संगीत] या बड़े-बड़े बिजनेस होते हैं। लेकिन सच्चाई इससे अलग है। एसेट वह है जो समय के साथ आपकी जेब में पैसा डालता है। यह कोई निवेश हो सकता है। यह कोई व्यवसाय हो सकता है। यह कोई कौशल भी हो सकता है जो आपकी आय बढ़ाने की क्षमता को मजबूत करें। ध्यान
दीजिए। यह बात बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि बफेट सिर्फ पैसों में निवेश नहीं करते थे। वे ज्ञान में भी निवेश करते थे और शायद यही उनका सबसे बड़ा एसेट था। कहा जाता है कि वे अपने दिन का बड़ा हिस्सा पढ़ने में बिताते थे। क्यों? क्योंकि वे जानते थे कि ज्ञान भी कंपाउंड होता है। आज सीखी गई एक छोटी सी [संगीत] बात कल एक बेहतर फैसला बन सकती है और एक बेहतर फैसला भविष्य में लाखों रुपए का अंतर पैदा कर सकता है। इसीलिए अगर आप पैसे से पैसा बनाना चाहते हैं तो सिर्फ अपने बैंक खाते में निवेश
मत कीजिए। अपने दिमाग में भी निवेश कीजिए। किताबें पढ़िए। नई चीजें सीखिए। अपने कौशल को बेहतर बनाइए। क्योंकि सबसे अच्छा निवेश अक्सर वही होता है जो आप खुद पर करते हैं। और यही कारण है [गला साफ़ करने की आवाज़] कि बफेट कहते हैं कि आपकी कमाई की सबसे बड़ी क्षमता आपके भीतर छिपी होती है। लेकिन दोस्तों यहीं पर एक और समस्या आती है। लोग जानते हैं कि उन्हें सीखना चाहिए। वे जानते हैं कि उन्हें निवेश करना चाहिए। वे जानते हैं कि उन्हें एसेट्स बनाने चाहिए। फिर भी वे शुरुआत नहीं करते। क्यों? क्योंकि वे सही समय
का इंतजार करते रहते हैं। वे सोचते हैं जब ज्यादा पैसा होगा तब निवेश करूंगा। [संगीत] जब आय बढ़ेगी तब बचत करूंगा। जब परिस्थितियां बेहतर होंगी तब शुरुआत करूंगा। लेकिन वारेन बफेट की सोच अलग है। वे जानते हैं कि सही समय कभी अपने आप नहीं आता। सही समय को बनाना पड़ता है। अगर किसान बारिश का इंतजार करते-करते बीज ही ना बोए तो फसल कभी नहीं उगेगी। उसी तरह अगर कोई व्यक्ति सही समय के इंतजार में शुरुआत ही ना करें तो उसकी आर्थिक यात्रा भी आगे नहीं बढ़ेगी। यही वजह है कि अमीर लोग परफेक्ट मौके का इंतजार
नहीं करते। वे उपलब्ध मौके का उपयोग करते हैं। छोटी शुरुआत करते हैं। गलतियों से सीखते हैं और धीरे-धीरे आगे बढ़ते जाते हैं। अब जरा खुद से एक सवाल पूछिए। अगर आप आज से 5 साल बाद अपने जीवन को देखें तो क्या आप चाहते हैं कि आपकी आर्थिक स्थिति आज जैसी ही रहे शायद नहीं। तो फिर सवाल यह नहीं है कि भविष्य बदलेगा या नहीं? सवाल यह है कि आप आज ऐसा क्या कर रहे हैं जो उस भविष्य को बेहतर बनाएगा और यहीं पर बफेट की अगली सीख सामने आती है। एक ऐसी सीख जिसे समझने के
बाद आप पैसों को लेकर लिए जाने वाले अपने लगभग हर फैसले को नए नजरिए से देखना शुरू कर देंगे। वारेन बफेट की अगली सीख है जोखिम को समझो उससे [संगीत] डरो मत। दिलचस्प बात यह है कि ज्यादातर लोग जोखिम को गलत तरीके से समझते हैं। वे सोचते हैं कि जोखिम का मतलब है पैसा खो देना। [संगीत] लेकिन बफेट के अनुसार असली जोखिम किसी चीज की कीमत का ऊपर नीचे होना नहीं है। असली जोखिम है। बिना समझे फैसला लेना। मान लीजिए दो लोग एक ही निवेश करते हैं। पहले व्यक्ति ने सिर्फ किसी की सलाह सुनकर पैसा
लगाया। उसे यह भी नहीं पता कि वह किस चीज में निवेश कर रहा है। दूसरे व्यक्ति ने समय लिया, सीखा, समझा और फिर फैसला लिया। अब अगर बाजार में गिरावट आती है तो सबसे पहले कौन घबराएगा। जाहिर है पहला व्यक्ति क्योंकि उसे पता ही नहीं कि उसके पैसे के साथ क्या हो रहा है। यही कारण है कि ज्ञान डर को कम करता है और अज्ञानता डर को बढ़ाती है। वारेन बफेट हमेशा कहते हैं कि जब आप किसी चीज को अच्छी तरह समझ लेते हैं [संगीत] तो आपके फैसले मजबूत हो जाते हैं और मजबूत फैसले लंबे
समय में मजबूत परिणाम पैदा करते हैं। लेकिन दोस्तों यहां एक ऐसी बात है जो शायद आपको हैरान कर दे। दुनिया के सबसे सफल निवेशकों में शामिल होने के बावजूद वारेन बफेट हर अवसर के पीछे नहीं भागते। जी हां, वे बहुत सारे अवसरों को जानबूझकर [संगीत] छोड़ देते हैं। क्यों? क्योंकि उन्हें पता है कि हर अवसर आपके लिए नहीं होता। आज की दुनिया में सबसे बड़ी समस्या अवसरों की कमी नहीं है बल्कि अवसरों की अधिकता है। हर दिन कोई ना कोई कह रहा है यह खरीद लो। उसमें निवेश कर लो। यह मौका हाथ से मत जाने
दो। जल्दी करो वरना देर हो जाएगी और इसी जल्दबाजी में लोग गलत फैसले ले बैठते हैं। लेकिन वारेन बफेट का सिद्धांत अलग है। वे कहते हैं ना कहना भी एक निवेश कौशल है। इसका मतलब है कि आपको हर मौके पर कूदने की जरूरत नहीं। आपको सिर्फ सही मौके का इंतजार करना है और जब सही मौका मिले तब पूरे विश्वास के साथ कदम उठाना है। सोचिए अगर एक बल्लेबाज क्रिकेट मैच में हर गेंद पर बड़ा शॉट मारने की कोशिश करें तो क्या होगा? संभावना है कि वह जल्दी आउट हो जाएगा। लेकिन एक समझदार बल्लेबाज सही गेंद
का इंतजार करता है और फिर पूरा फायदा उठाता है। बफेट भी पैसों के मामले में यही करते हैं। वे धैर्य रखते हैं। [गला साफ़ करने की आवाज़] वे इंतजार करते हैं और जब उन्हें सही अवसर दिखाई देता है तब वे कार्रवाई करते हैं। यही कारण है कि उनका ध्यान मात्रा पर नहीं गुणवत्ता पर होता है और यही सीख हमारे जीवन में भी लागू होती है। हर चीज खरीदने की जरूरत नहीं। हर निवेश करने की जरूरत नहीं। हर ट्रेंड का हिस्सा बनने की जरूरत नहीं। कई बार सबसे अच्छा फैसला कोई फैसला ना लेना होता है। अब
यहां एक और गहरी बात समझिए। बफेट कभी भी केवल पैसा कमाने के लिए पैसा नहीं कमाते। [संगीत] उनका लक्ष्य स्वतंत्रता है। वित्तीय स्वतंत्रता यानी ऐसी स्थिति जहां आपके फैसले सिर्फ [संगीत] पैसों की मजबूरी से तय ना हो। कल्पना कीजिए अगर आपको हर सुबह सिर्फ इसलिए काम पर ना जाना पड़े क्योंकि बिल भरने हैं तो आपकी जिंदगी कितनी अलग होगी। अगर आपके पास विकल्प हो, अगर आपके पास समय हो, अगर आपके पास आर्थिक सुरक्षा हो तो आपके फैसले कितने बदल जाएंगे, यही असली दौलत है और यही वह चीज है जिसके पीछे वारेन बफेट हमेशा रहे। उनके
लिए पैसा अंतिम लक्ष्य नहीं था। पैसा एक साधन था। एक ऐसा साधन जो उन्हें और अधिक स्वतंत्रता दे सके। लेकिन दुर्भाग्य से अधिकांश लोग इस बात को उल्टा समझ लेते हैं। वे पैसे को ही अंतिम लक्ष्य बना लेते हैं और फिर पूरी जिंदगी उसी के पीछे भागते रहते हैं। जबकि वारेन बफेट हमें सिखाते हैं कि पैसा आपके लिए काम करना चाहिए। आपको पूरी जिंदगी पैसे के पीछे नहीं भागना चाहिए। और यही कारण है कि वे एसेट्स पर इतना जोर देते हैं क्योंकि एसेट्स आपको सिर्फ आय नहीं देते। वे आपको विकल्प देते हैं। वे आपको समय
देते हैं। वे आपको सुरक्षा देते हैं। और सबसे महत्वपूर्ण वे आपको स्वतंत्रता देते हैं। अब जरा एक पल के लिए रुक कर सोचिए। अगर आज से अगले 10 वर्षों तक आप लगातार अपनी कमाई का एक हिस्सा बचाएं। उसे सीखने में लगाएं। उसे एसेट्स में लगाएं और धैर्य के साथ उसे बढ़ने दें। तो आपकी जिंदगी कितनी अलग हो सकती है। शायद अभी आपको इसका जवाब ना दिखे। लेकिन वारेन बफेट की पूरी कहानी इसी जवाब का प्रमाण है क्योंकि उन्होंने हमें एक बहुत सरल लेकिन शक्तिशाली सत्य सिखाया है। दौलत अचानक नहीं बनती। दौलत रोज लिए गए छोटे-छोटे
सही फैसलों का परिणाम होती है और यही छोटे फैसले समय के साथ मिलकर असाधारण परिणाम पैदा करते हैं। अब सवाल यह है अगर हमें आज से ही बफेट की तरह सोचना शुरू करना हो तो कौन सी ऐसी आदतें हैं जिन्हें हम अपनी जिंदगी में तुरंत लागू कर सकते हैं। यही वह हिस्सा है जहां सिद्धांत व्यवहार में बदलते हैं और जहां से आपकी वास्तविक आर्थिक यात्रा शुरू होती है और यहीं से आपकी वास्तविक आर्थिक यात्रा शुरू होती है क्योंकि ज्ञान तभी मूल्यवान होता है जब वह व्यवहार में दिखाई दे। अगर आपने इस वीडियो में बताई गई
हर बात समझ ली लेकिन अपनी जिंदगी में कुछ भी नहीं बदला तो आने वाले वर्षों में भी परिणाम वही रहेंगे जो आज हैं। वारेन बफेट की सबसे बड़ी खासियत सिर्फ यह नहीं थी कि वे जानते थे क्या करना है। उनकी सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वे जो सही था उसे लगातार करते रहे और यही आदत उन्हें असाधारण बनाती है। तो आइए अब उन कुछ सरल आदतों को समझते हैं [गला साफ़ करने की आवाज़] जो वारेन बफेट की सोच का आधार है। पहली आदत अपनी कमाई का एक हिस्सा हमेशा अपने भविष्य के लिए बचाना। ध्यान
दीजिए। मैंने बची हुई कमाई बचाने को नहीं कहा। मैंने कमाई का हिस्सा बचाने को कहा। क्योंकि ज्यादातर लोग पहले खर्च करते हैं और फिर जो बच जाए उसे बचाने की कोशिश करते हैं। लेकिन महीने के अंत तक अक्सर [संगीत] कुछ बचता ही नहीं। वारेन बफेट की सोच इसके विपरीत है। वे कहते हैं पहले खुद को भुगतान करो। यानी जैसे ही पैसा आए उसका एक हिस्सा भविष्य के लिए अलग कर दो। फिर बाकी पैसे से अपने खर्च पूरे करो। [संगीत] यह सुनने में छोटा बदलाव लगता है। लेकिन यही छोटा बदलाव वर्षों में बहुत बड़ा अंतर पैदा
करता है। दूसरी आदत अपनी आय बढ़ाने से ज्यादा अपनी क्षमता बढ़ाने पर ध्यान दो। बहुत से लोग सिर्फ यह सोचते हैं कि अधिक पैसा कैसे कमाया जाए। लेकिन वारेन बफेट यह सोचते हैं कि खुद को इतना मूल्यवान कैसे बनाया जाए कि आय अपने आप बढ़े। अगर आपके कौशल बेहतर होते हैं, अगर आपका ज्ञान बढ़ता है, अगर आपकी समझ गरी होती है, तो आपकी कमाई की क्षमता भी बढ़ती है। यही कारण है कि खुद पर किया गया निवेश अक्सर सबसे अधिक रिटर्न देता है। एक किताब, [संगीत] एक नई स्किल, एक नया ज्ञान शायद आज छोटा लगे।
लेकिन भविष्य में वही आपकी आय को कई गुना बढ़ा सकता है। तीसरी आदत भावनाओं से नहीं सिद्धांतों से फैसले लेना। यह आदत आसान नहीं है क्योंकि इंसान भावनात्मक प्राणी है। जब बाजार ऊपर जाता है तो लालच बढ़ता है। जब बाजार नीचे आता है तो डर बढ़ता है। लेकिन बफेट ने अपनी भावनाओं को अपने फैसलों का मालिक नहीं बनने दिया। वे जानते थे कि भावनाएं अस्थाई होती हैं। लेकिन सिद्धांत लंबे समय तक साथ रहते हैं और यही कारण है कि वे भीड़ के साथ बहने के बजाय अपनी समझ के आधार पर निर्णय लेते थे। अब दोस्तों
यहां एक ऐसा सवाल आता है जिसे शायद हर व्यक्ति को खुद से पूछना चाहिए। अगर वारेन बफेट की सारी संपत्ति आज उनसे ले ली जाए तो क्या वे फिर से अमीर बन सकते हैं? पहली नजर में यह सवाल अजीब लग सकता है। [संगीत] लेकिन इसका जवाब बहुत महत्वपूर्ण है। मेरा मानना है हां, वे फिर से संपत्ति बना सकते हैं। क्यों? क्योंकि उनकी असली दौलत उनके बैंक खाते में नहीं है। उनकी असली दौलत उनकी सोच में है। उनकी आदतों में है। उनके निर्णय लेने की क्षमता में है। उनकी धैर्य रखने की शक्ति में है। और यही
वह बात है जिसे हमें समझना चाहिए। क्योंकि पैसा खोया जा सकता है। लेकिन सही सोच अगर एक बार विकसित हो जाए तो वह बार-बार नई संपत्ति बना सकती है। इसीलिए इस पूरी वीडियो का सबसे बड़ा संदेश सिर्फ निवेश नहीं है। सिर्फ एसेट्स नहीं है। सिर्फ कंपाउंडिंग नहीं है। सबसे बड़ा संदेश है अपनी सोच को बदलना। क्योंकि जब सोच बदलती है तो फैसले बदलते हैं। जब फैसले बदलते हैं तो आदतें बदलती हैं और जब आदतें बदलती हैं तो भविष्य बदल जाता है। आज से कई साल बाद लोग आपकी आय नहीं देखेंगे। लोग आपके बैंक स्टेटमेंट नहीं
देखेंगे। वे सिर्फ आपके परिणाम देखेंगे और वे परिणाम इस बात पर निर्भर करेंगे कि आपने आज कौन से फैसले लिए। क्या आपने हर कमाए हुए रुपए को खर्च कर दिया या उसके कुछ हिस्से को अपने लिए काम पर लगाया? क्या आपने तत्काल खुशी चुनी या लंबे समय की स्वतंत्रता? क्या आपने दिखावा चुना या संपत्ति निर्माण? यही वे सवाल हैं जो आपकी वित्तीय दिशा तय करेंगे। और शायद यही कारण है कि वारेन बफेट की सीख आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी [संगीत] दशकों पहले थी। क्योंकि तकनीक बदल सकती है, बाजार बदल सकते हैं, दुनिया बदल
सकती है। लेकिन धन बनाने के मूल सिद्धांत नहीं बदलते। आज भी एसेट्स महत्वपूर्ण है। आज भी धैर्य महत्वपूर्ण है। आज भी कंपाउंडिंग महत्वपूर्ण है। और आज भी सही सोच सबसे महत्वपूर्ण है। तो दोस्तों, अगर आप सच में पैसे से पैसा बनाना सीखना चाहते हैं, तो आज ही शुरुआत कीजिए। छोटी शुरुआत लेकिन शुरुआत जरूर कीजिए क्योंकि भविष्य में आर्थिक रूप से मजबूत बनने वाले लोग वे नहीं होंगे जो सिर्फ इंतजार करते रहे बल्कि वे होंगे जिन्होंने सही समय का इंतजार करने के बजाय आज पहला कदम उठाया और याद रखिए पैसा कमाना एक कौशल है लेकिन पैसे
से पैसा बनाना एक मानसिकता [संगीत] है और शायद यही वह बात है जिसे हमें हमेशा याद रखना चाहिए। दुनिया में ऐसे लाखों लोग हैं जो अच्छी कमाई करते हैं लेकिन आर्थिक रूप से स्वतंत्र नहीं है और दूसरी तरफ ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने धीरे-धीरे अपने पैसों को अपने लिए काम करना सिखाया और समय के साथ अपनी जिंदगी बदल दी। दोनों के बीच सबसे बड़ा अंतर किस्मत नहीं था। सबसे बड़ा अंतर सोच का था। वारेन बफेट की कहानी हमें यही सिखाती है कि दौलत केवल पैसों से नहीं बनती। दौलत बनती है सही आदतों से, सही फैसलों
से, धैर्य से और सबसे बढ़कर उस सोच से जो हर रुपए को सिर्फ खर्च करने की चीज नहीं बल्कि भविष्य बनाने का अवसर मानती है। तो आज की इस वीडियो से अगर आपको सिर्फ एक बात याद रखनी हो तो वह यह होनी चाहिए। हर बार जब पैसा आपके हाथ में आए, खुद से एक सवाल जरूर पूछिए। क्या इस पैसे का कुछ हिस्सा मेरे भविष्य के लिए काम कर सकता है? क्योंकि यही छोटा सा सवाल धीरे-धीरे आपकी पूरी वित्तीय जिंदगी बदल सकता है। हो सकता है शुरुआत छोटी हो। हो सकता है परिणाम तुरंत दिखाई ना दें।
हो सकता है रास्ता लंबा लगे। लेकिन याद रखिए एक बीज को पेड़ बनने में समय लगता है और संपत्ति को दौलत बनने में भी। इसलिए जल्दबाजी मत कीजिए। सीखते रहिए। अपने ऊपर निवेश करते रहिए। एसेट्स बनाते रहिए और अपने पैसों को धीरे-धीरे अपने लिए काम करना सिखाइए। क्योंकि जिस दिन आपका पैसा आपके लिए काम करना शुरू कर देगा, उस दिन से आपकी आर्थिक यात्रा एक नए स्तर पर पहुंच जाएगी। और दोस्तों, अगर आपको आज की यह ऑडियो बुक समरी पसंद आई हो और आपने इसमें कुछ नया सीखा हो, तो वीडियो को लाइक जरूर कीजिए। कमेंट
करके बताइए कि इस वीडियो की कौन सी सीख आपको सबसे ज्यादा पसंद आई और आप आज से कौन सी आदत अपनी जिंदगी में लागू करने वाले हैं। अगर आप फाइनेंस, निवेश, मनी माइंडसेट और दुनिया की बेहतरीन किताबों की ऐसी ही आसान और दमदार ऑडियो बुक समरी देखना चाहते हैं तो बुक वेस्टर को सब्सक्राइब करना बिल्कुल मत भूलिए। बेल आइकन दबा दीजिए ताकि आने वाली कोई भी वीडियो आपसे मिस ना हो। मैं आपसे फिर मिलूंगा एक नई किताब, एक नई सोच और एक नई सीख के साथ। तब तक याद रखिए अमीर लोग पैसों के लिए काम
नहीं करते। वे अपने पैसों को अपने लिए काम करना सिखाते हैं। [संगीत]