आप सभी को प्रेमा अवतार दिवस की बधाई हो हरि ओम ओम ओम ओम ओम कृष्णा कृष्ण कृष्ण गोविंद गोविंद गोपाला ओ ओ ओ ओ क्योंकि आज दिवस ही ऐसा है भगवान कृष्ण जीवन मा ज्यारे जुओ त्यारे विघ्न बाधा संघर्ष पण हय जो तो आहा आत्म रस्ती रसवा ने शीतल श्री कृष्ण का जीवन मनुष्य मात्र की परम उन्नति का एक चीता जागता संदेश देने वाला साकार होता है उपनिषद को श्रुति कहा जाता है और श्री कृष्ण के वचनों को स्मृति कहा जाता है गीता श्रुति नहीं है गीता स्मृति है इस स्मृति में श्री कृष्ण का दिव्य
अनुभव है ऐसा नहीं कि श्री कृष्ण ग्वाल वालों के बीच नाचते रहे बंसी बजाते रहे खाते रहे खिलाते रहे नहीं नहीं श्री कृष्ण के जीवन में तो समस्याओं की लंबी कतार है विघ्न बाधा शत्रु और आपदाओं की लंबी कतार है लंबी शायद धरती पर किसी व्यक्ति के जीवन में इतने विघ्न बाधाएं हो अपने बेटे पूते भी विरुद्ध और अपने होते हो पते बेटे पोते लड़के मर जाए ऐसा अगर किसी के जीवन में देखा देखे तो श्री कृष्ण के जीवन अपने जन्म के निमित्त मां-बाप जेल में पड़ जाए ऐसा श्री कृष्ण के जीवन में निमित हुआ
अष्टमी को प्रकट हुए और चौदस को हलाहल लेकर पिलाने वाली पूतना आ जाए ऐसा श्री कृष्ण के जीवन में देखने को मिल धन का सूर बका सूर छटका सूर न जाने कितने कितने जानलेवा असुर और जान लेवी वारदातें श्री कृष्ण के जीवन में हुई और ऐसा भी नहीं कि श्री कृष्ण के हर समय जीत हुई 18वीं बार जब उसने चढ़ाई की शत्रु ने तो श्री कृष्ण और बलराम को नंगे पैर भाग जाना पड़ा जीवन में जीत ही जीत रहे ऐसा कोई जरूरी नहीं जीवन में हार रहे ऐसा कोई जरूरी नहीं लेकिन जीवन में जीवनदाता का
ज्ञान रहे यह बहुत जरूरी है जीवनदाता का अगर ज्ञान है तो कैसी भी समस्या है आप उसका फायदा उठाते हुए अपने श्री कृष्ण पद में प्रतिष्ठित हो सकते हैं कृष्ण पद क्या है कर् सती आकर्षी जो कषित आकर्षित आदित आनंदित कर दे वह कृष्ण पद है उसी को बोलते आत्म पद व्यास जी ने श्रीमद् भागवत में प्रथम स्कंध में प्रारंभ में मंगलाचरण बड़ा खूब गहराई से पारदर्शिता का प्रत्यक्ष दर्शन कराने वाला मंगलाचरण क्या है आप बोलना यह मंगलाचरण मंगल होता है सच्चिदानंद रूपाय सच्चिदानंद रूपाय विश्व उत्पत्ति आदि हे तवे विश्व उत्पत्ति आवे ताप त्रय विनाशाय
ताप विनाशाय श्री कृष्णाय वयम नम श्री कृष्णाय वयम जो सत है शरीर सत नहीं है पहले नहीं था बाद में नहीं रहेगा दुख सुख और दुनिया सत नहीं है पहले नहीं थी बाद में नहीं रहेगी लेकिन जो पहले था अब है बाद में रहेगा वह परमात्मा सत है वह सत स्वरूप परमात्मा चेतन है जगत की उत्पत्ति स्थिति और प्रलय का कारण है उस परमात्मा को हम नमस्कार करते हैं क्यों नमस्कार करते हैं बोले ताप प्रय विनाशाय श्री कृष्णाय वयम नुमा इन त्रि ताप को नष्ट करने के लिए हम भगवान श्री कृष्ण को नमस्कार करते त्रता
कौन से हैं आदि दैविक ताप अर्थात मन में अशांति हो दुख हो एयर कंडीशन है लेकिन चित में शांति नहीं आदि देविक ताप अध्यात्म ताप है काम धंधे में इधर उधर में गड़बड़ है तबीयत में आदि आदि भौतिक ताप बरसाद अति हो रहा है बाढ़ आ रही है या सूखा हो रहा है और प्रकृतिक प्रकोप है आदि देविक ताप है तो कभी आदि देविक ताप आते कभी आदि भौतिक ताप आते तो कभी मानसिक ताप से लोग तपते रहते हैं इन तीनों ताप से छूटने के लिए हम भगवान को प्रणाम करते हैं कैसे भगवान है जो
सत रूप है चेतन रूप है आनंद रूप है सृष्टि की उत्पत्ति स्थिति और परले के कारण है उनको नमस्कार करते हैं सच्चिदानंद रूपा आया सत चित और आनंद वो सत चित आनंद हर प्राणी का अपना आत्मा है केवल श्री कृष्ण भगवान का नाम लेते तो भागवत के प्रेमियों के लिए ही वह भगवान अथवा भागवत होता राम जी का हम स्वागत करते या गणेश जी का नाम लेकर स्वागत करते तो उन उन के भक्तों को रुचि होती लेकिन यहां स्वागत में क्या सच्चिदानंद जो सब प्राणियों का सत्य स्वभाव है शरीर मिट जाता है फिर भी जो
नहीं मिटता जिसकी सत्ता से बुद्धि में ज्ञान आता है वो चेतन स्वभाव और जिसकी सत्ता से चित्त में आनंद आता है सुख आता है वो आनंद स्वभाव प्राणी मात्र का जो आत्मा बन बैठा है एक ही आकाश करोड़ों घड़ों का आत्मा है करोड़ों मठों का आत्मा है करोड़ों मेघों का आत्मा है एकही महाकाश ऐसे ही सच्चिदानंद परमात्मा आकाश का और सूर्य का चंदा का और ऋषि मुनियों का सभी का जो आत्मा है ऐसे सच्चिदानंद स्वरूप परमात्मा को हम नमस्कार करते क्यों नमस्कार करते ताप प्रय विनाशाय आदि देवी आदि भौतिक अध्यात्म यह ताप संसार तापे तपता
नाम सार के त्रता में तपने वालों के लिए योगो परम औषध भगवत योग भगवत ज्ञान भगवत ध्यान परम औषध है धन मिलने से ताप नहीं मिटते पद मिलने से ताप नहीं मिटते सत्ता मिलने से ताप नहीं मिटते सत्ता ना चली जाए और ताप बढ़ते और कई विरोधियों का ताप बढ़ता है लेकिन भगवान का ज्ञान मिल जाने पर त्रता से पार अपने आत्मा का वैभव प्राप्त होता है कुछ वर्ष पहले की घटना है ऐसा नहीं कि सदियां पहले पंजाब में पटियाला रियासत का अमरगढ़ असवा उसमें एक ब्राह्मण रहता बचपन से ही टांगे तो थी नहीं हाथ
के बल से हाथ में खड़ाऊ रख के हाथ के बल से शरीर को घसीट घसीट के ले जाना पड़ता था टांगे बिना जैसे कोई बख मंगे चलते हैं ना कमर रगड़ रगड़ के सुबह बजे से चले तो रात्रि के सात बजे तक एक माइल चल ले तो बहुत हो गया ऐसा ब्राह्मण उसने सुना था कि भगवान जगत के नाथ है और उन्हीं की पुरी है उड़ीसा में जगन्नाथ पुरी ब्राह्मण ने ठान लिया कि मुझे जगन्नाथ भगवान का दर्शन करना है कुटुं ने ने बोला कि तुम कैसे जा सकते हो दिन भर में एक माइल चलना
तुम्हारे लिए असंभव सा है तो जगन्नाथ जी का मंदिर जगन्नाथ जी का स्थान कितना दूर है बोले मनुष्य जीवन में मैं जगन्नाथ जी का दर्शन किए बिना नहीं रहूंगा समझाने वालों ने अपना नख चोटी का र लगाया लेकिन जब नहीं माने तो कुटुं ने रास्ते में खर्चे का थोड़ा बहुत पैसा दे दिया वह जमाना ट्रेनों का विकास नहीं हुआ था गाड़ियां अभी शुरू नहीं हुई थी हुई थी तो प्रयोगात्मक 18511 में एकाधिक 30 किलोमीटर चले ऐसी गाड़ी प्रयोगात्मक शुरू हुई थी 18511 और 1800 80 के 85 और 90 के बाद रेल चलन हुआ ये उससे
कुछ दिन पहले की बात है कुछ वर्ष पहले की रेल की व्यवस्था नहीं थी वो ब्राह्मण चलते चलते अपने को घसीटते घसीटते एकाद गांव पार किया दो दिन की यात्रा ने उन्हें थका दिया लोत पोत होकर पड़े रहे पेड़ के नीचे संध्या का समय था एक अज गैबी अनजान व्यक्ति के रूप में वह सच्चिदानंद प्रकट हो गए अनजान व्यक्ति के रूप में तुम यहां पड़े हो कहां जा रहे हो बोले मैं भगवान जगन्नाथ जी का दर्शन करने जा रहा हूं उसको पता ही नहीं कि मैं जगन्नाथ जी से बात कर रहा हूं अनजान व्यक्ति के
रूप में आए थे जगन्नाथ जी तुम कौन जाति के हो कहां रहते हो अनजान व्यक्ति बोला जिससे सब जाना जाता है वह अनजान हा बो जरा जनाथ बधु जना जिसे मन जाना जाता है बुद्धि जानी जाती है सुख और दुख जाना जाता है अपना और पराया जाना जाता है सब बदल जाता है फिर भी जो नहीं बदलता वो सदा जानने की सत्ता देने वाला अनजान होकर प्रकट होता है कहां रहते हो कौन जाति के हो बोले पटियाला रियासत का अमर घट कस्बा है वहां रहता हूं ब्राह्मण जाति का हूं सब कुछ जानने वाला अनजान होकर
कहता है अरे ब्राह्मण देवता मानो कोई जनता ना हो लो अरे ब्राह्मण देवता तुम जरा तो सोचो कहां तो भगवान जगन्नाथ का मंदिर और कहां तुम्हारा पटियाला का एक छोटा सा कस्बा अमरगढ़ एक कैसा दोसा हस लौट जाओ लौट जाओ पैर तो है नहीं कमर को रगड़ रगड़ के घसीट घसीट के कितने जन्मों में पहुंचो बोले हे मार्ग के मित्र हे अनजान पथिक उसको भी पता नहीं कि सबको जानने वाला पथिक होकर आया है हे अनजान पथिक आप मेरा उत्साह भंग मत करिए एक बार मैंने जो ठान लिया है और अच्छे काम करने के लिए
एक बार ठान ले तो फिर उसका उत्साह कोई कितना भी भंग करे उसे पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए पार्वती को सप्त ऋषियों ने समझाया कि शिवजी भांग वाले हैं सर्प वाले हैं मुंडो की माला वाले हैं भभूत रमाने वाले हैं संशा में रहने वाले हैं इससे विष्णु बड़े प्रभावशाली हैं हम तुम्हारा विष्णु जी के साथ विवाह कर देंगे तो सप्त ऋषियों का अनादर ना हो इसलिए पार्वती ने हाथ जोड़कर कह दिया क्या अब मेरे को तो गुरु नारद जी ने कहा है शिव जी महादेव है और मैंने ठान लिया कि महादेव को वंगी आपकी जो
भी बात है उसको मैं असत तो नहीं बोलती हूं लेकिन मेरा हृदय का जो निर्णय है कृपा करके सुनिए कोटि जन्म लगी रगर हमारी इस जन्म में नहीं तो दूसरे हजार जन्म नहीं तो लाख जन्म लाख जन्म में भी यह काम नहीं हुआ तो मैं करोड़ जन्म लेकर भी यही काम पूरा करू कोटि जन्म लगी रगर हमारी र तो शंभु न तो रह कुमारी सप्त ऋषियों ने जाकर शिव जी को कहा शिव जी मंद मंद मुस्कुराए परीक्षा में पास हो गए एक पर्वतीय व्यक्ति के यहां जन्मी एक कन्या जब अपना संकल्प पकड़ लेती तो जगदंबा
मां पार्वती बन जाती तो मैं तो मर दू पैर नहीं है तो क्या है वो अनजान व्यक्ति प्रसन्न हुआ अनजान कौन था तुम्हारा बाप जय राम जी की और जो अनजान व्यक्ति दिख रहा था वह तुम्हारा हमारा सबका ताऊ और बाप और महात्मा और परमात्मा था बोले तो तुमने इतना ठान लिया है आप तुम मानते नहीं तो समझो तुम्हें जगन्नाथ भगवान का यहां दर्शन हो जाए तो बोले मुझे कोई हरकत नहीं है कहीं भी हो जाए दर्शन भगवान होना चाहिए वो अनजान व्यक्ति देखते देख देखते साक्षात जगन्नाथ जी के रूप में दर्शन दे [प्रशंसा] दिया
और भगवान के प्राग का प्रभाव रोम रोम पुलकित हो गया आंखें हटती नहीं चित्त संकल्प विकल्प रहित हो गया बड़ा मधुमय अनुभव प्रसादे सर्व दुखा नाम हानि रस्य प जाते प्रसन्न चेत सोयास पर विष उस भगवत प्रसाद के दर्शन में उनकी बुद्धि बड़ी निर्मल हो गई देखते रह गए भगवान को पाए हुए संत के दर्शन से भी बुद्धि निर्मल मन निर्मल आंखें निर्मल वातावरण निर्मल हो जाता है तो भगवान के दर्शन की तो बात ही कर बोले बस ब्राह्मण हो गए दर्शन बोले महाराज अब अंतर्धान मत होयो आपका दर्शन मुझे तो हुआ लेकिन गांव के
लोग इसी हालत में जाऊंगा तो मेरी बात मानेंगे कैसे या तो आप चलिए या तो आप ऐसा कुछ प्रयोग करिए ताकि गांव के लोगों को संदेह ना रहे कि मैंने आपके दर्शन किए हैं उसका प्रमाण पत्र वो मांगेंगे अरे बोले प्रमाण पत्र ये ले उसके पैर पर पैर रखा जैसे कुजा कुरूपा थी कुबड़े बना दिया ऐसे ये टांगे को बड़ी टेढ़ी टांगे टूटी फूटी पैर पर पैर रखा ठोड़ी को दिया झटका और सुंदर पुरुष होकर वो ब्राह्मण प्रकट हो गया उसी समय दिखा जाओ अब तो विश्वास करेंगे सभी लोग दो दिन के बाद ब्राह्मण तो
दो दिन में दो मील चलके आया व तो दौड़ता दौड़ता एक घंटे में दो मील पार करके पहुंचा गांव वालो में अरे तू गया था तो एकदम मोहताज और आया तो इतना यह पैर बैर सब कहां से आ बोले जगन्नाथ जी भगवान के दर्शन हुए ऐसे तो हम नहीं मानते लेकिन ऐसा किसी मनुष्य की अथवा किसी अस्पताल की या डॉक्टर के लेबोरेटरी के या किसी की ताकत नहीं है उस समय तो ऐसे ऑपरेशन भी नहीं होते कोई नई टांगे डाल दे ऐसा उस समय विकास भी नहीं था आज भी उस व्यक्ति के शरीर से जन्मे
हुए पुत्र पौत्र तुम्हे दिखाई देंगे वहा तो भगवान का अस्तित्व और उनका सर्व सामर्थ्य त्व और भक्त वत्सल और दृढ़ निश्चय वाले के मनोरथ पूर्ण करने के लिए कभी भी कहीं भी किसी रूप में भी परमात्मा अपनी करुणा वरुणा प्रकट कर दे उनके लिए सहज है जयपुर के पास 42 किलोमीटर की पर लदाना गांव उस समय वह लदाना रियासत थी छोटे मोटे राजाओं की रियासत होती थ राजा बैठा था और एक मुसलमान कर्मचारी ने राजा को जो ही प्रणाम किया तो उसके गले की माला तुलसी की बाहर निकल आई अरे यह माला कौन सी पहरी
तुलसी की दिखाई दे जी अन दता तू हिंदू कब बना अन दता मैं हिंदू तो नहीं बनाऊ लेकिन ू धर्म की महिमा का मुझे दर्शन हुआ है अनदाज मैं खुदा की कसम खाकर कहता हूं कि मैं लदाना से अपने ननिहाल गांव में जा रहा था सूरज ढलने को था अध रास्ते उस समय मिट्टी के रास्ते थे जैसे अभी भी किसानों के गाढ़ा मार्ग होता है ना बैलगाड़ी के रास्ते मुझे दो एक भयंकर काले छाया पुरुष दिखे जिसे हिंदू लोग यमदूत बोलते हैं राजा साहब मैं अपने गफ्फार बेटे की कसम खाकर बोलता हूं उस डरावने पुरुषों
को देखकर मैं जरा सिम गया उन्होंने कहा तेरी मौत नहीं है हम दूसरे काम के लिए आए हैं अभी सामने से बैलगाड़ी भगाता हुआ किसान आएगा और ये जो खड्डा दिख रहा है ना गाढा मार्ग में उसमें उसका बैलगाड़ी का पहिया जर्क खाएगा और बैलों के सिर पर जो घुसली बोलते हैं जो भी बोलते हैं लक्कड़ वो टूट जाएगा इसमें एक बैल ज्यादा उद्दंड है उसको हम प्रेरित करेंगे हम सूक्ष्म रूप में किसी के अंदर घुस के भी उसको प्रेरित कर देते हैं प्रेरित करेंगे और वो छोरा उन बैलों को रोकेगा बैल उस बश में
नहीं रहेंगे उसे धक्का मारते हुए उसके पेट में सिं घुसे देगा बैल हम इसका प्राण लेकर चले जाएंगे सामान्य व्यक्ति की मृत्यु का निमित्त कुछ ना कुछ हम लोग बना लेते जैसा नियति होती है मैंने हाथा जोड़ी की के हे यमराज के कर्मठ दूतों मैं आपको हाथ जोड़ता हूं अगर रहमत इस पेड़ के पीछे चुप कर इस इसरार का दीदार करूं बोले कोई बात नहीं देखना कोई बात नहीं देख लेना मैं छुपा रहा और वो बैलगाड़ी आई आई आई और जैसा यमदू तों ने बताया ऐसे बैलगाड़ी का पहिया उस खड्डे में जर काया ससरी टूटी
और बैल उदंड हुए और किसान के लड़के को जो बेलगाड़ी भगा के आ रहा था युवक उसको उदंड उछलकर ने सिंगड़ भोक दिया पेट में और वह मर गया मैं नजदीक गया छाया पुरुषों के पास मैंने कहा इसका जीवात्मा कैसा है उन्होंने कहा यह जीवात्मा हमारे हाथ से चला गया उसकी मृत्यु थी और नर्क में ले जाना था य यम पाश में बांधना था लेकिन जहां उसकी मृत्यु हुई वहां तुलसी का पौधा पड़ा था तुलसी के पौधे के आगे किसी की मृत्यु होती है तुलसी के लकड़ी से बनी माला पहने हुए व्यक्ति के जीवन में
अथवा तुलसी की मिट्टी हो तुलसी की मंजरी हो तुलसी के पत्ते हो तुलसी की माला हो तुलसी की लकड़ी हो वहां पर नर्क में जाने वाले जीव भी दुर्गति से बच जाते ये संविधान के अनुसार व हमारी पकड़ में नहीं आया उसकी ऊंची गति हो गई जहां पना अन दता लदाना नरेश खुदा करे खूब जियो मैं अपने बेटे की कसम खाकर कहता हूं मुझे भरोसा हो गया कि तुलसी माता के दो पत्ते डालकर जो ठाकुर जी को भोग लगाते हिंदू और साधु संत तुलसी की माला पहनने की जो बात करते हैं इसमें बड़े गुण है
मरने के बाद दोजक मिलेगा कि बस्त मिलेगा पता नहीं दोजक नरक को बोलते हैं बस्त स्वर्ग को बोलते हैं और हमारे मजहब में लिखा है कि मरने समय कबर में गाड़ दिए जाते हैं और जब कयामत होती है तो मोहम्मद साहब जिसकी सिफारिश करते हैं उसे बस्त मिलता है और बस्त में हूरे होती है अप्सराएं शराब के च में होते हैं राजा साहब एक औरत के अलावा दुनियादारी की दो चार हूरे मिल जाए तो आदमी की क्या दुर्दशा होती है और शराब के चश्मे और हूरे मिलेगी तो बस्त भी हमारा क्या भला कर लेगा अब
बस्त जाऊं या दोजक जाऊं यह तो मुझे कोई भरोसा नहीं था लेकिन कम से कम यह तुलसी की माला पहनी है तुम्हारे भगवान विष्णु के लोक में जाने की तो परम मिल गई महाराज मैंने अपना धर्म मजहब तो नहीं बदला केवल तुलसी की माला पहनी मैं आपको बताऊं तुलसी की माला के विषय में शास्त्रों में कहा है इसमें चुंबकीय प्रभाव है और आपके शरीर का रक्त प्रवाह अच्छी तरह से चलता है य हाई बीपी लो बीपी उन्ही लोगों को होती है जो रुद्राक्ष और तुलसी के प्रभाव से अनजाने मुझे फलसी जहरी मलेरिया हो गया था
और खड़े पैर अच्छे अच्छे डॉक्टर गुजरात में फर्स्ट आए एमडी में ऐसे दिन में कई बार बीपी मापते थे एक बार भी नहीं उनको हाथ लगा के लो बीपी है या हाई बीपी नॉर्मल नॉर्मल नॉर्मल दिल्ली का एक कोई भक्त डॉक्टर था उसको शौक लग गया व कैल्शियम मापना है बापू आपकी उम्र ग मैं क्या मेरे सब ठीक है बोले इजाजत दोय बहुत बार कहता मैं क अच्छा ले लेना तो मशीन ले आया उसमें हमने पैर रखा देख के दंग रह गया कि बापू जी आपका कैल्शियम तो एक पॉइंट प्लस है 25 वर्ष के युवक
का जितना होता है ऐसा है आपके अंदर कैल्शियम मैं क्या और तुमको क्या चेक करना है बोले जरा सा बी बीपी चेक कर लो मैंने कहा छोड़ो बोले बापू जी आए हैं साधन मैंने कहा कर ले व अपनी दवाइयां भी बनाता है और कई फार्मेस हों को अपनी दवाइया बेचता भी है मैं कहा लो देख लो भाई कैसा चाहिए बीपी बोले नॉर्मल चाहिए मैं कहा ले ले नॉर्मल हां बोले बिल्कुल ठीक है नर्मल मैं क्या हाय बीपी चाहिए तो मेरे सामने चकित सा मैं कहा ले हाय ले ले दिया तो बहुत आ 240 ओ बाबू
जी मैं क्या कैसा लो चाहिए ले लो 90 से भी कम ये कोई बीमारी नहीं है लो थिंकिंग करो तो लो बीपी हाय और अशांति की थिंकिंग करो तो हाई बीपी और नम तो नॉर्मल ये कोई बीमारी है क्या लेकिन आपके मन पर भगवत सत्ता का प्रभाव नहीं है आपके मन में तुच्छ मशीनों का प्रभाव है इसलिए ना जाने कितने कितने इलाज करने के बाद भी बीमार और बुड्ढे हो जाते और हमें तो भगवत सत्ता का महिमा है हम इतना परिश्रम करते समय भी 71 साल के जवान के जवान दिखते हैं दिने दिने नवम नवम
दिने दिने नवम नवम नमामि नंद नंदनम तो भगवान कृष्ण के जीवन में दिने दिने नवम नवम है आपके जीवन में भी जैसे सूर्य नित्य नवीन चंदा नित्य नवीन ऐसे श्री कृष्ण भी नित्य नवीन सुख में रहते हैं फिर चाहे कंस की मुसीबत आए चाहे जरास आए चाहे सब राजा मिलकर उल्टे होकर लटक जाए लेकिन कृष्ण की बंसी बजती रहे कुटुंबी चाहे कुछ के कुछ छोरे लोफर जैसा व्यवहार करें लेकिन कृष्ण का आग्रह नहीं कि मेरे बेटे मेरे कहने में ही चले दुराग्रह दुख देता है अपनी तरफ से प्रयत्न करे लेकिन वास्तव में स्वपना है उसको
जानने वाला चैतन्य अपना है इसका प्रत्यक्ष दर्शन करना हो तो श्री कृष्ण का श्री विग्रह है और श्री कृष्ण की गीता है और श्री कृष्ण का लीलामृत है ऐसा मत समझना कि श्री कृष्ण के जीवन में रसिया गीत थे बंसी थी और नाच थे नृत्य थे रसिया गीत और बंसी वाले कृष्ण के जीवन में ज्ञान की गंभीरता थी योग की ऊंचाई थी कर्म की निष्ठा थी और नैश्कर्मया आते हैं औरों को तो मनाना पड़ता है यह हमें मनाने को चले आते हैं औरों को तो निराकार है की साकार है समझने के लिए कसरत करनी पड़ती
है दु भुज के चतुर्भुजी है खोज लगानी पड़ती लेकिन यह द्विभ्ग्योर भी ईश्वर को निराकार मानते हैं लेकिन हिंदू धर्म का रसमय साहित्य कहता है कि तुम साकार हो तो ईश्वर को केवल निराकार मानोगे तो तुम्हारे जीवन में प्रेम रस नहीं आएगा जब तुम साकार हो तो उसको भी साकार मनो जिसकी सत्ता से साकार शरीर है वह भी साकार होकर अवतरित हो जाए और हुआ हिंदू धर्म ने परमात्मा को साकार रूप में प्रकट किया दुनिया के और मजहब ने ईश्वर को साकार रूप में प्रकट नहीं किया लेकिन हिंदू धर्म ने ईश्वर को साकार रूप में
भी प्रकट किया ईश्वर को अपना सखा बनाकर दिखा दिया ईश्वर को अपना मित्र बनाकर दिखा दिया श्री कृष्ण ब्रज में गौ चराने जाते हैं गो शब्द इंद्रियों के लिए भी काम आता है और गौ माता के लिए 109 शब्द बनते हैं श्री कृष्ण का जीवन कैसा अद्भुत है धर्म ग्रंथ एक होता है श्रुति और दूसरा होता है स्मृति उपनिषद श्रुति है लेकिन गीता ब्रह्म सूरत ब्रह्म सूत्र में और आचार्यों ने माना कि गीता श्रुति नहीं है गीता स्मृति है स्मृति माना श्रुति के द्वारा जो अनुभूतियों का रस है जो अनुभव है उसकी स्मृति श्री कृष्ण
अनुभव के बड़े धनी है और गीता श्री कृष्ण के अनुभव की पोथी है रसिया गीत गाने वाले और नृत्य सीखने और सिखाने वाले श्री कृष्ण के जीवन में देखो तो दुखों की विघ्नों की मुसीबतों की लंबी कतार है सामान्य आदमी हो तो जीवन भर रो रो के मर जाए और फिर भी उसका रोना कम ना हो और दोबारा जन्मे और उसी जन्म का रुदन चालू करें इतनी लंबी विघ्न बाधाओं की कतार है श्री कृष्ण के जीवन में ब्रज में गौ चराते थे गाय तो अपने आप चर रही है कृष्ण बोलते अपने को भी कुछ करना
चाहिए प्रेम की बोली का नाम गीत और प्रेम की चाल का नाम नृत्य जीवन केवल हापा धापी करने के लिए नहीं है जीवन विश्रांति के लिए भी है नृत्य के लिए भी है गीत के लिए भी है आहात के लिए भी है आनंद के लिए भी है विश्रांति के लिए भी और विश्रांति के मूल को जानकर मुक्त होने के लिए जीवन सर्वांगी विकास होना चाहिए श्री कृष्ण के जीवन में वह भी है ग्वाल बोलों के बीच अपने को कुछ करना चाहिए क्या करें बो जो बढ़िया काम हो वो करो तो बोले बढ़िया काम तो भाई
गई तो चर रही है एक गोप ने कहा कि यह जो है ना नृत्य बहुत बढ़िया जानते हैं अरे तुम मुझे नृत्य सिखाओ ग भैया अरे बोले ऐसे कोई नद सिखाया जाता है क्या चेला बनो तब हां बोले मेरे बा तू मेरा गुरु मैं तेरा चेला चला चली का मेला सिखा मुझे नृत्य चेला बनने में भी देर नहीं करते श्री कृष्ण चेला है तो पूरे चेले हैं गुरु है तो पूरे गुरु हैं मित्र है तो पूरे मित्र है सखा है तो पूरे सखा है सुहृद है तो पूरे सुहृद है और युद्ध कौशल में भी पूरा
अर्जुन तवा हदय दौर बलम दे युधिष्ठिर हारेंगे कि जीतेंगे उसकी परवाह मत कर तुम्हें राज्य मिलेगा कि स्वर्ग मिलेगा उसकी परवा मत करो अभी कर्तव्य कर्म करके देव बराबर बान कृष्ण ने डायलॉग बनाए नहीं दिए नहीं लेकिन श्री कृष्ण का जीवन तो ऐसा ही मुस्कुराकर गम का जहर पीना आ गया अरे जन्मते भांजे के पीछे पूरा राज और राज सत्ता कंस लग गया तभी भी कृष्ण ने कभी नहीं कहा कि मेरा मामा कंस मेरे पीछे पड़ा है मैं तो मर गया रे हाय रे कभी नहीं किया 17 17 बार जरास को धूली चटा करर भेजा
लेकिन 18वीं बार जरास एकाग्र होकर कुछ तत्परता से आए तो श्री कृष्ण को बलराम के सहित भाग जाना पड़ा गोपियों के आगे नाचना पड़े तो इतने वैभव के धनी नाचने में संकोच नहीं करते और भागना पड़ा तो नंगे पैर कृष्ण भागे बलराम चलो जान बचाए जरा सं इस बार बहुत विकृत होकर आया है अपन जूझ तो और भी लोग मरेंगे उनके भी अपने भी चलो भाग चलो जान बचाओ भागे तो ऐसे भागे की पैर में चप्पल नहीं पग त्राण नहीं और ऋषि मुनियों के आश्रम में चुपके से सत्संगी के वेश में रोटी पाते रहे और
सत्संग करते रहे और सेवा करते रहे जय राम जी बोलना पड़ेगा इसीलिए तुम कभी ऐसा ना सोचना कि हाय रे हाय हॉस्पिटल छूट गई आश्रम में रहना पड़ता है झाड़ू लगाना पड़ता है तुम्हारे ताऊ के ताऊ बाप के बाप कृष्ण ने भी किया है तो आपको करने में क्या फर्क पड़ता है नारायण हरि नारायण हरि ओम नमो भगवते वासुदेवाय वासुदेवाय वासुदेवाय कृष्ण देवाय कृष्ण देवाय मधुमय देवाय मधुमय देवाय अब वो देव दुनिया को चलाता है लेकिन बापू के द्वारा खुद चलने को राजी है अभी रिमोट कंट्रोल से वो देव मटकिया फोड़ने लगेगा और कोई बड़े
आदमी को ऐसा ऑर्डर में चलाए तो चिल्लाए कि मेरा अपमान करते हो तुम्हारे हाथ रोक दूंगा पैर रोक दूंगा मैं ईश्वर हूं लेकिन इस देव को ऐसा कोई खतरा नहीं है मैं ईश्वर हूं तो एक शरीर में नहीं हूं बापू के शरीर में भी हूं और बेटों के शरीर में भी हूं मेरा ही सब स्वरूप है कितना स्वतंत्रता देने वाला देव है आनंद भयो जय कन्हैया लाल की आनंद घरे आनंद भयो जय कन्हैया लाल की आनंद उमंग भयो जय कन्हैया लाल की अरे आनंद य मांग भयो जय कन्हैया लाल की जय कन्हैया लाल की हाथ
घोड़ा पाल की जय कन्हैया लाल की हाथ घोड़ा पाल की जय कन्हैया लाल की हाथी घोड़ा पाल की जय कन्हैया लाल की जय कन्हैया लाल की मारी मट्टी भोड़ी रे पेला नंदलाल मारी मट्टी भोड़ी रे पहला नंदलाल पला नंदलाल पहला नंदलाल पला नंदलाल बेला नंदलाल बेला नंदलाल हो बेला नंदलाल बेला नंदलाल हो बेला नंदलाल मारी मटकी भोड़ी रे बेला नंदलाल मारी मटकी फोड़ी रे पेला नंदलाल ना गोरा गोरा गाल ना वा पड़िया वाल ना गोरा गोरा गाल ना वा कड़िया वाल ये तो महंगी बानो लाल बेला नंदलाल ये तो महंगी बानो लाल बेला नंदलाल बेला
नंदलाल हो बेला नंद लाल बेला नंदलाल हो बेला नंदलाल मारी मटकी भोड़ी रे बेला नंदलाल मारी मटकी फोड़ी रे बेला [प्रशंसा] नंदलाल हे असाड चरम मेघ मल हारम बनी बहार जल दारम डूर डकम मयुर पुकार डििया तारमर लही संभार प्यास पारम नंद कुमारमंगलम [संगीत] गड़ाव गिरधारी रे जी रे गोकड़ा वो गिरधारी गुरु जीी ना हो गुरु जी ना जय हो गुरु जी ना गुण लारे गाऊ के पछ ना चरण पखार गुरुजी ना गुण लगाऊ के पछि ना चरण पख [संगीत] ड़ी ड़ी आवे रे ड़ी ड़ी आवे मारो कुवर कन्हैया दौड़ी जोड़ी आवे रे दौड़ी जोड़ी
आवे मारो कुवर कन्हैया कुवर कन्हैया माता यशोदा नो यो कुवर कन्हैया माता यशोदा न यो कुवर कनयो माता महंगी बानो यो कुवर कन्हैया माता महंगी बानो छ परी सभा मा साध को बुलावे परी सभा मा साध को बुलावे दर्शन देवा आवे रे दर्शन देवा आवे मारो कुवर कन्हैया दर्शन देवा आवे रे दर्शन देवा आवे मारो कुवर कन्हैया कुवर कन्हैया माता मेंगी बानो सयो कुवर कनयो मातावान यो दौड़ी दौड़ी आवे रे दौड़ी ड़ी आवे मारो कुवर कन्हैया ड़ी जोड़ी आवे रे ड़ी जोड़ी आवे मारो कुवर [संगीत] कन्हैया निज बजन बाला रूप रसाला करी बेहाला बनवाला बनवाला
जागी तन ज्वाला विपत विशाला दन दयाला नंदलाला आए नहीं आला कृष्ण कृपाला वंसी बाला बनवारी बनवारी जाकर सुख गरी मित्र मुरारी गए विषारी गिरधारी रे रे गए वि सारी गिरधारी मारी मटकी भोड़ी रे फेला नंदलाल मारी भट्टी फोड़ी रे पला नंदलाल पला नंदलाल हो बेला नंदलाल बेला नंदलाल हो बेला नंदलाल मारी मटी ड़ी रे पला नंदलाल मारी मटकी पोड़ी रे पला नंदलाल शरद पूनमनी रात तो रमवा गती रात शरद पम की रात तो रमवा ग रा मारो पकड़ी ली दो हाथ पला नंदलाल मारो पकड़ी ली दो हाथ बेला नंदलाल नंदलाल हो बेला नंदलाल बेला नंदलाल
हो बेला नंदलाल मारी मटकी फोड़ी रे पला नंदलाल मारी मट्टी फोड़ी रे पला [संगीत] नंदलाल पूनमनी रात जवी बीजी कोई रात नहीं भक्तो नी नात जवी बीजी कोई नाथ नहीं संतो निवास केवी बजी कोई बात नहीं मायानी लात जवी बीज कोई लात नहीं मायानी लात जवी बीज कोई लात नहीं राधे राधे राधे राधे राधे गोकुल मा गोविंद राधे राधे राधे राधे राधे राधे गोकुल मां गोविंद रागे वालो वालो वालो मन लागे गोकुल मा गोविंद राधे वालो वालो वालो मन लागे गोकुल मां गोविंद राधे सूरत शहर मा हो सूरत शहर मा आवो मारो वालो सूरत शहर
मा आवो मारो वालो आनंद शांति नो लावो खजानो आनंद शांति लायो खजानो माखन रावे मारो वालो गोकुल मा गोविंद राधे मान रावे मारो रालो गोकुल मा गोविंद राधे राधे राधे राधे राधे राधे गोकुल मा गोविंद राधे राधे राधे राधे राधे राधे गोकुल मा गोविंद राधे अरे वालो वालो वालो मने लागे गोकुल मा गोविंद राधे लो वालो वालो मन लागे गोकुल मा गोविंद राधे [संगीत] तापी किनारे बैठो मारो वालो तापी किनारे बैठो मारो वालो भक्तो ना रुदिया मा बैठो मारो वालो भक्तो ना रुदिया मा बैठो मारो बालो कीर्तन करावे मारो वालो गोकुल मा गोविंद राधे कीर्तन
करावे मारो वालो गोकुल मां गोविंद राधे राधे राधे राधे राधे राधे गोकुल मां गोविंद राधे राधे राधे राधे राधे राधे गोकुल मां गोविंद राधे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे हरे रामा हरे रामा रामा रामा हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे हरे कृष्णा हरे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हरे हरे [संगीत] हे कोई कांडा बन कोई गैला बन कोई गंगा गोदावरी मा ना हवा मा ना हवा मा कोई खावा मा कोई पीवा मा कोई गुरुजी ना गुण ला गावा मरे जी रे गुरुजी ना गुण ला गावा मा गुरु जी ना जय
हो गुरु जी ना जय हो गुरु जी ना गुण लारे गाऊ के पछ ना चरण पड़ो गुरुजी ना गुण लागा आऊ के पछि ना चरण [संगीत] पख हे दान रे जोबान तारो जोश रे जवानी तारी सगड़ वही रही जासे रे जासे जासे रे जासे गुरु न वचन धर हरि न भजन कर तारो तो बेड़ो पार था से रे था से रे जी रे ार तो बेड़ो पार था रे था गुरु जीना जय हो गुरु जी नाय हो गुरु जी ना गुण लारे गाऊ के पछ ना चरण पखा गुरुजी ना गुण ला गाऊ प ना चरण
[संगीत] पकार बागुन प्रभतम बेल बलित ललितम कोपिला कोपला गावत रस गीतम वसंत बजीत धन दर सतम दुख दला पहली कर प्रीतम करत करीत नाथ अदम नहीं सारी नहीं सारी राधे प्यारी मैं बलिहारी गोकुल आव गिरधारी रे रे गोकुल आव गिरधारी गुरु जीी ना जय हो गुरुजी ना जय हो गुरुजी ना गुण ला गाऊ के पछ ना चरण पकार [संगीत] हे रिद्धि दे सिद्धि दे अष्ट नव निधि दे वंस में वृद्धि दे वाप पानी वाप पानी हृदय में ज्ञान दे चित में जान दे अभय वरदान दे शंभु रानी हे दुख को दूर कर सुख भरपूर कर
आ से पुराण कर दास जानी सजन सोहित दे कुटुंब से प्रीत दे जंग में जीत दे मां भवानी रे जीरे जंग में जीत दे मां भवानी दुनिया यानी पानि सानी डोर जवानी तारी जवानी जवानी कर ना जानी ब छानी कर जानी मा वानी रा मन मानी नहीं जवानी विनानी नर अभिमानी अभिमानी रे नर जनी नावन रानी गया ज्ञानी संत ज्ञानी रे जीरे जनी संत ज्ञानी [संगीत] जय हो वे तेरी जय होवे तेरी जय होवे तेरी जय होवे जय होवे तेरी जय होवे तेरी जय होवे तेरी जय होवे जय होवे तेरी जय होवे तेरी जय होवे
तेरी जय होवे जय होवे तेरी जय होवे तेरी जय होवे तेरी जय होवे अरे सदगुरु दीन दयाल तुम्हारी जय होवे सदगुरु दीन दयाल तुम्हारी की जय होवे अरे भक्तो के भगवान तुम्हारी जय होवे अरे भक्तों के भगवान तुम्हारी जय होवे जय होवे तेरी जय होवे तेरी जय होवे तेरी जय होवे जय होवे तेरी जय होवे तेरी जय होवे तेरी जय होवे अरे महंगी बाके लाल तु री जय होवे बहंगी बाके लाल तुम्हारी जय होवे चोरी चोरी माखन खाई गयो रे यशोदा के ललनवा चोरी चोरी माखन खाई गयो रे यशोदा के ललनवा ओरे ललनवा हारे ललनवा
ओरे ललनवा हा रे ललनवा ओरे ललनवा हा रे ललनवा ओरे ललनवा हा रे ललनवा चोरी चोरी माखन खाई गयो रे महंगी बाके ललनवा चोरी चोरी माखन खाई गयो रे मंगी बा के ललनवा तो पवने पीव रे हरिरस पीवा देवो मारे न तो पवने पीव रायो रे हरिरस पीवा देवरा गुरुजी पायो रे हरि रस पीवा देवो से मारा गुरुजी पायो रे हरि रस पीवा देव हरि हरि करदा शरी बा पी दो हरि हरी करता शमरी भाई पी दो हरि हरि करता शमरी भाई पी दो हरी हरी करता शनी पा पी लेते बोर ना खादा रे हरि
रस पीवा देव ले ठते बोर ना खाता रे हरि रस पीवा जेव तो धड़ की धोने जाद सयो रे हरि रस पीवा मैं तो थोड़ो पार चढयो रे हरि रस पीवा जेवो मारा गुरुजी पायो रे हरि रस पीवा देव से मारा गुरुजी पायो रे हरि रस पीवा देवो जी ब्राह्मी स्थिति प्राप्त कर कार्य रहे ना शेष कार रहे ना शेष मोह कभी ना टक सके इच्छा नहीं लवलेश ीरे जीरे इच्छा नहीं [संगीत] लवलेश गुरु बिन ज्ञान न उप देने गुरु बिन मिटे न भेद गुरु बिन मिटे न भेद गुरु बिन संशय ना मिटे जय जय
जय गुरुदेव अरे रे भाई जय जय जय गुरुदेव हे इस कृपा बिन गुरु नहीं गुरु बिना नहीं ज्ञान गुरु बिना नहीं ज्ञान ज्ञान बिना आत्मा नहीं गा वही वेद पुराण जी रे धीरे गा वही वेद पुराण गुरुजी जी वो हजारों साल तुमने वंदन बरम बर गुरुजी जियो हजारों साल तुमने वंदन बारंबार हे द्वार तमारे जो कोई आवे खाली हाथ न जाए द्वार तुम्हारे जो कोई आए ली हाथ ना जाए साई तरा चरण कमल मा आनंद आनंद खाए साई तमारा चरण कमल मा आनंद आनंद खाए साधु संतो सुर नर मुनिवर गुण लत मारा गाए साधु संतो
सुनर मुनिवर गुण लमारा गा गुरु जी जियो हजारों साल तमने वंदन बरम बर गुरु जी जियो हजारों साल तुमने वंदन वारंवार विठ्ठल विठ्ठल विठ्ठला हरि ओम विठ्ठला विठ्ठल विठ्ठल विठ्ठला हरि ओम विठ्ठला कोण कोण विठला हरि ओम विठ्ठला कोण कोण विठ्ठला हरि ओम विठ्ठला विठ्ठला हरि ओम विठ्ठला य विठ्ठला हरि ओम विठ्ठला विठ्ठल विठ्ठल विठ्ठला हरि ओम विठ्ठला विठ्ठल विठ्ठल विठ्ठला हरि ओम विठ्ठला विठ्ठल विठ्ठल विठ्ठला हरि ओम विठ्ठला विठ्ठल विठ्ठल विठ्ठला हरि ओम विठ्ठला विठ्ठल विठ्ठल विठ्ठला हरि ओम विठ्ठला [संगीत]