झाल [संगीत] कि अ कि पेशवर की मधुरता के बिना जीवन में जो कुछ भी मिलता है फिर भी के अंदर से सूख की शांति की भूख भूख में आदमी शराब पीता है पान मसाले खाता है दुराचार करता है ना जाने क्या क्या करता है केवल रस के लिए का रस तीन प्रकार से आता है जो कर्म रस ए प्रेम रस और ज्ञान 10 कि अगर कर्म शास्त्र के अनुकूल करता है और कमाता खासतौर खिलाता है तो कर्म रस भी मिलता है अ है लेकिन कर्म में अगर सावधानी नहीं है तो वह कर्म रस नीरस हो
जाता है फिर शराब से रस लेगा ई है जुआ से रोष लेगा दुराचार से रस लेगा मारपीट से रस लेगा है झूठी दवाइयों से रस लेगा किसी को तंग करने से रस लेगा इसी की निंदा करने सुनने से मजा लेगा है तो कर्म रश प्रेम रस और सच्चिदानंद रोष है कर दो कि आपकी तपस्या का तो मैं धन्यवाद करता हूं और सुबह 9:30 होकर बैठ गए होंगे कोई 9:00 आए हाथ ऊपर करो फोन 9:00 के बैठ यार तू पर करो फोन देख लो ना थी लाओ तो 9:00 हाजिर हो गए तो कितने बजे घर से
चले थे लेकिन यह कर्म भगवती रस में ले आइए यह कर्म रिसर्च चार रस लेने के लिए आ गया अगर फिल्म के लिए या और कि सीता कर देना दिन के लिए या डिलीवरी के भाव से पहुंचे होते तो यह रस देर-सवेर वीर रस में गिरा देता लेकिन यह रस परमरस में ले जाएगा इसको बोलते आने का क्रम प्रसिद्ध हुआ आपका अ इस क्रम में अगर आश्चर्य ईश्वर का है महत्व इश्वर का है कि उद्देश्य ईश्वर का है तो आपका कर्म कर्म योग हो जाएगा पत्नी बच्चे परिवार के साथ जीते हुए अगर आश्रय ऊंचा है
जैसे उद्देश्य है बद्रीनाथ और आश्चर्य भगवान का है उद्देश्य भगवान है तो रास्ते में अवांतर साधन कोई भी आएगा बॉस गाड़ी कार धर्मशाला नाश्ता भोजन उपवास जो भी है कि वो सब गौण हो जाएगा अब हैं तो एक महान संकल्प को पूरा करने के लिए अवांतर संकल्प मुझे बड़ी बिल्डिंग बनानी है बड़ा आश्रम बना है बड़ा मॉल या फैक्ट्री बनाना है तो बड़ा हो गया उद्देश्य फिर सीमेंट कहां से आएगा आर्किटेक्ट कौन होगा कौन सा फर्नीचर कहां से का यह सब अवांतर संकल्प है कि एक तत्कालीन संकल्प होते हैं और एक महासंकल्प होता है जैसे
भूख लगी है क्या खाएंगे क्या बनाएंगे किधर जाएंगे तत्कालीन संकल्प हो गया प्यास लगी यह फिगर कैसे पिएंगे गाड़ी में जाना है कि जब बैटिंग यह कहा जाए कि तत्कालीन संकल्प लेकिन तत्कालीन संकल्पों को इतना महत्व न दें कि महान संकल्पम भूल जाए 9 महीने मां के गर्भ में लटके महान संकल्प पूरा करने का अवसर मिला और महंत संकल्प भूलकर तत्कालीन संकल्प को इतना महत्व दिया के महंत संकल्प का पता ही नहीं है है तो फिर इंसान की बदबख्ती अंदाज से बाहर है कमबख्त खुदा होकर बनता नजर होता है तो खुद चैतन्य बुद्धि में चीन
में सत्ता पूरा रही है लहरा रही है जैसे पानी के सरोवर में पानी से बनी बर्फ के टुकड़े 13 उतरा ऐसे सच्चिदानंद परब्रह्म परमात्मा में हमारी बुद्धि और वृहत या रहे उत्तरार्ध और हमको परमात्मा की सुख का पता नहीं परमात्मा के होने का पता नहीं वर्मा आत्मा का रस मिलता नहीं फिर ना के द्वारा स्लो सुगंधा पर फिल्मकार विकार पैदा करें जी हां के द्वारा रस लेते-लेते अधिक आओ बीमार हो कहां मिनी के द्वारा रस लेते-लेते कामी को तुच्छ प्राणी बन जाओ और फिर जन्म और मरो और एक बूंद बन जाओ खरगोश बन जाओ कबूतर
बन जाओ बकरा बन जाओ अगर इन इंद्रियों का त्वचा संकल्पों को तत्कालीन संकल्पों को महत्व दिया और क्षणिक सुख लिया और महान संकल्प का सत्संग के द्वारा पता न चला तो मनुष्यता से गिरते-गिरते राजा अंतर्गत किरकेट हो गया था ए राजा अज कर हो गया अब है और भी कई राजे-महाराजे और मनुष्य प्रेरित होकर भटकते हैं कि तत्कालीन संकल्प में जो सुख बुद्धि है जो महत्त्वबुद्धि है और जो पूर्ण बुद्धि है वह भ्रष्ट बुद्धाय कि भ्रष्ट होने वाला शरीर और भ्रष्ट होने वाली वस्तुओं को जो सबूत मांगता है उसकी बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है है
और जो परमात्मा को सच मानता है बुद्धि बदलती है फिर भी जो नहीं बदलता शरीर मरता फिर भी जो नहीं मरता है मन की वृत्तियां बदलती फिर भी जो नहीं बदलता है ऐसे परमात्मा को जो सख्त मानते हैं तो जो शत्रुता है वह चेतन भी होता है और जो चेतन होता है वह आनंद स्वरूप होता है ज्ञान स्वरूप होता है मुक्त होता है निराकार होता निराकार के बिना साकार रह नहीं सकता लेकिन को साकार के बिना निराकर रहता है कि वास्तव में आप इतने जो सब दिख रहे हैं साकार दिख रहे लेकिन आप साकार नहीं
है दिखने भर को है कि अगर आप साकार होते तो मरते समय शरीर को ले जाते हैं क्यों मरते समय दिखते हमारे बाप-दादा ताऊ जो भी मर गए तो साकार होते तो देखते साकार नहीं थे इसलिए नहीं दिखे कि किसी को बोलो नहीं तो मैं अपनी पोल बता दूं मॉर्निंग किसी मेहमान को भगवान श्री कृष्ण कृष्ण कुछ बोलना नहीं बापू ऐसे थे जो पहनाकर नहीं आ अ कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेव उद्देश्य तो मक्खन लेकिन और ढककर थोड़ी चांदी की छोटी सी थी उसमें मिश्री कटोरे में भगवान तो तो भगवान को भोग
लगा हो तो अब स्कूल हो गया तो कृष्ण की गीता की मृत्यु हो गई और गीता का ज्ञान मेरे जीवन का यह उद्देश्य भगवान फिर खाओ रोना [संगीत] शुरू कर दो 9th मे व शरणं गच्छ दो तमेव शरणं गच्छ सर्वभावेन भारत आरंभ की नवभारत प्रसादात् परम शांति को खतरा खुद परम शांति एवं प्राण प्रतिष्ठा स्वरूपों का वर्णन प्राचीन शास्त्रों तुम सर्व प्रकार से मेरी शरण शरण मतलब कहां है है जो गुरु अर्जुन के बाग़ डोर लिए हैं घोड़ागाड़ी रथ संभाल रहे हैं वह नहीं मेरी शरण अर्थात जहां से मैं इस पूरी तो होता है उस
अंतर्यामी ईश्वर की तमेव शरणं गच्छ सर्वभावेन भारत स्वभाव से आप जो कुछ करते हैं उसमें आप का भाव होना चाहिए हमें तो भगवत्सुख चाहिए हमें तो भगवत ज्ञान चाहिए तो भगवत प्रकाश चाहिए और शरीर छूटने के बाद नहीं सर्विस छोटे उसके पहले भगवत मुलाकात चाहिए यह आसरे कुशवाहा आधा झाड़ू लगाना शबरी भीलन के भोजन बनाना हो जाएगा और हंसना भी बंदगी हो लेकिन उद्देश्य है अपने पति को पैरों को राजी करने का नहीं पति और बेटों के भीतर जो ठाकुर जी वैसे ने महाराज को प्रसन्न हो जाएं और पति और बेटों का स्वास्थ्य बड़े अरे
जवाब कर्म करते और उसका फल अपने शरीर को मजा दिलाने के लिए और अहम पोछने के लिए करते हैं तो कर्म बात का आश्चर्य उद्देश्य तो छोड़ जाता है लेकिन कर्म करते हैं और उसका फल और अपने शरीर के हवाई नहीं अपने शरीर का ऐड नहीं सामने वाले का हितों और काम हमारा हो आज हमारे ही तासु कोई काम तो हमारा हो जाए और हिट उसका हो जाए हमारा काम किया कि हमारा आशय उदेश्वर और हित सामने वाले का हो जाए अब मैं आता हूं सत्संग करता हूं तो आपका ही सोच सोच कर ही बोलता
हूं वह रोता हूं एकांत में तभी भी आपका ही सोचता हूं या तो अपना काम करता हूं भगवत रस दो हैं तो कुछ हमार मेरा काम हो भगवत मस्ती और ही तो तुम्हारा हो तो शिविरा Jio SIM भी राजी क्या करेगा काजी मैं भी राजी हूं आप भी राज्य हैं आपका ही तो सोचने से मेरा और अधिक खिलता है है और आपको भी लाभ होता है अगर मेरा उद्देश्य होता आपको पता कर मैं अपना फायदा करूं तो मुझे इतनी बुद्धि इतना योग इतनी आत्मशक्ति नहीं आ सकती हैं तो मुर्दे को प्रभु देता है कपड़ा लकड़ा
आग जिंदा न चिंता करे उसके बड़े भक्त भोले के है दूसरे की भलाई सोचेंगे तो खाएंगे क्या अरे भाई टूटी-फूटी साइकिल भी काम आती है ना तो उसको भी ही अब वहां पानी टायर-ट्यूब यह मिलता है मोपेड को भी ऑयल मिलता है तुम्हारे स्कूटर को भी खुराक मिल जाता है पुराना स्कूटर भी काम में आता है तो उसको खुराक मिल जाता है अगर तुम लोगों के काम आ गए तो क्या भगवान तुमको भूखा रखेगा अरे हम लोगों के इतने काम नहीं आते और सब कुछ मिलता पढ़ा-पढ़ाया फैंक देते नदी में भगवान का भजन करते हैं
फिर इसका आंसर है काले फेंक दिया फिर भी खिलाने वाला आ गया अपना कान पकड़कर टमाटर ठोकर के भगवान का आश्रय लिया और फिर यह फल-फूल हाथ में रखेंगे दिया नदी में जिसको गरज होगी आयेगा सृष्टिकर्त्ता खुद लायेगा का यह हमारी मोहब्बत का कोई और अंदाज है हमें उस पर नाज है तो उसे हम अभी तो नाराज हो गए ना मौत हो गई ना तो आप पक्का कर लो आंच गांठ बांध लो रूमाल में हाथों कपड़े में बस हमारे जीवन का आश्रय भगवान होगा और कि महामहिम लव पर पहले गांठ हमारा श्रद्धा कपूर जी जो
कुछ करेंगे फिर भगवान में डूब जाएंगे जो कुछ कर्म करेंगे भगवान की प्रीति के लिए जो कुछ प्राप्तव्य है भगवान का सुख जो कुछ ज्ञातव्य है भगवान का ज्ञान जो कुछ कर्तव्य है भगवान के लिए पति के लिए रोटी बनाते लेकिन भगवान उनमें है और उनका स्वास्थय बढ़िया रे ऐसा नहीं कि मैं उनको वर्ष करूं और बंदर की नहीं नचाऊं मिस्टर को उद्देश्य नहीं यह मिर्च इसको अपने कपड़े दिलाऊं आरोप भोग्या बनाकर कमर तोड़ प्रोग्राम करूं तो आप का आश्रय काम है कोई बोलते हैं इस चीज माफी में चीज मैसेज मैं बोलता हूं झूठी बात
बाबूजी रियल इस मिक्सचर को बिलकुल मिर्ची का उद्देश्य होता है सेक्स की ही विशेषता से पसंद करते लेकिन यहां आश्रय धर्म होता है धर्म पत्नी और पति में कितना भारत के संस्कृति का उद्देश्य ऊंचा है कन्या लक्ष्मी रूठ पावर नारायण रूपा ऐसा करके वह विवाह किया जाता है वो बोले बार को घोड़े पर क्यों बिठाते भोले घोड़े पर इसलिए बिठाते के बेटा देख हाशमी उद्देश्य भगवान का तो ठीक नहीं तो फिर इस मायाजाल से भाग इसलिए घोड़े पर बिठाते के भाग सके तो भाग नहीं तो उधर शपथ भाग सके तो भाग अतुल जैन सहित और
ए फैंसी चुटकुला सुना दो जी हां गोरखनाथ बोलते हैं हंसिबा खेलिबा लोग लगी है वो हंसी वो खेलिबा धरिबा ध्यान हंसते खेलते थे कि उद्देश्य आश्रय हूं चाहे तो हंसते-खेलते भगवत ध्यान हंसिबा खेलिबा धरिबा ध्यान अहनिसि कथिबा ब्रह्म ज्ञान खावें पीवें न करें मन अभंगा खाए थे लेकिन किसी में आसक्त न मन फसने ना दे मिल गया तो ठीक है तो ठीक गांठ बांध कर इसको ऐसा चाहिए जैसा ही चाहिए तो रंगीन चाहिए और कमरा और तू चाहिए तू चाहिए अरे कितना पैसा मिला झूठ जो कभी नहीं छूटा उसको उसको तो अपना मानकर प्यार करो
काम बन जाएगा कितनी सुंदर ले ले ले ले ले एक दिन बाद पति जो आश्रय भगवान का लेना सब्सक्राइब कर लेना चाहिए अगर यह बिल्कुल पक यह बात है क्योंकि वह हितैषी परमात्मा चाहता है कि तुम शाश्वत आत्मा हो मेरे हो नश्वर संसार मुझे नहीं इसलिए वहां कुछ ना कुछ प्रॉब्लम कर देता है भगवत्प्राप्ति का उद्देश्य बना लो भगवत आश्रय लेते हैं लेकिन इनकम टैक्स से बजाओ भगवत आश्रय लेते हैं कि सामने वाले की टांग टूट तरह की पत्नी पति मिले भगवत ऑस्ट्रेलिया लेकिन भगवत्प्रीति नहीं तो यह चीज मिलेगी फिर भी रोते रहे हैं है
इसीलिए भगवत आज से और भगवत्प्रीति इन दोनों हो जाए तो जीवन में द्वंद शांत होते जाएंगे का निर्माण मुंह आयोजित संगत दर्शन अध्यात्म नित्य विनियोग तक राम मंदिर मुद्दा सुख दुख संग व्यक्ति मुड़ मुड़ पद्मावत अव्यय पद करना है है और कोई भी पद्धति अव्यई नहीं है भगवत पद के सिवा किसी भी पद पर आप बैठो 5 साल दर साल 15 साल रिटायरमेंट 20 साल प्रतिशत इस साल 40 साल पचास-साठ साल बुड्ढे हो गए हटाए गए लेकिन आत्मा पद निराकार नारायण का भव्य कि मृतक भाषी थे सूर्य वह सूर्य का प्रकाश नहीं होता है न
शिकवा न पावक अ है ना चांद और अग्नि का भी प्रकाश नहीं बोलता है कि यदि गतवान् निवर्तंते जाने के बाद फिर मां के घर में हौंडा नहीं लगना पड़ता धाम पर मम्मों को मेरा परमधाम तुम्हारे साथ नहीं है कि शरीर तुम रख नहीं सकते और मुझे तुम छोड़ नहीं सकते हैं जिसको तुम छोड़ नहीं सकते उसका उद्देश्य और प्रीति कर दो मैं हाथ जोड़कर प्रार्थना करता हूं झोली फैलाकर आप चाहिए मांगता हूं दक्षिण आप उद्देश्य आश्रय भगवत्सुख कर लो भगवत कृपा कर लो भगवत्प्राप्ति कर दो है आपका तो मंगल होगा आपका दर्शन करने वाले
को भी मंगल मैं सुख मिलेगा आपकी वाणी सुनने वाले को तीर्थ करने का फल होगा यज्ञ करने का फल होगा और उसके पितरों को तारने का फल हो जाएगा आप इतने महान बन जाओगे कल यह तो बातें अपने जीवन में या बिल्कुल पक्की बात है कि आप भाषाएं उद्देश्य ज्यों-ज्यों घना करोगे बुद्धि आपकी भगवान में प्रतिष्ठित हो फिर आपको बाहर के ग्रंथ पढ़ते विद्या हासिल करने की जरूरत नहीं है बाहर की टॉनिक पकाकर स्वास्थ्य बढ़ाने की जरूरत नहीं है और बाहर का मित्रों का मंडलों का सब का सहयोग लेकर आप आगे सफल हो उसकी जरूरत
नहीं परम मित्र के साथ आपका भाई में तालमेल है स्वास्थ्य भी आएगा ज्ञान भी आएगा और प्रसन्नता के लिए आपको स्मोक करने की जरूरत नहीं है उन्नत में से दूर है रेलगाड़ी से नहीं निकलते वक्त कि वाइन पीने की जरूरत नहीं है प्रसन्नता के लिए पत्नी के मांस को यहां पति को नोचने की जरूरत नहीं है ऐसे ही प्रसन्नता मिलेगी और और आश्चर्य उद्देश्य ऊंचा करने से ज्ञान के लिए पोथियों की जरूरत नहीं पड़ती है के स्वास्थ्य के लिए टॉनिक की जरूरत नहीं पड़ती और मैं आपको सच बताता हूं प्रसन्नता के लिए दुनिया के विषय
विकारों की जरूरत नहीं पड़ती आप जहां जाएं वहीं प्रसन्नता और मोज वहीं माधुर्य बिल्कुल मौज ही मौज हो जाएगी ॐ नमों भगवते शुद्धि एवं [संगीत] ओम नमो भगवते वासुदेवाय वासुदेवाय लुटेरे वायर प्रीति देवा गणपति देवा माधुर्य देवा महादेवा माधुर्य और सब के दिल में उस परमात्मा का नाम है वह सुझाव है झाल झाल यह बिल्कुल ट्यूबवेल आज छुट्टी लाए हुए इसके संकल्प महत्वपूर्ण थे अब वह कैसे मैं बयान करो मेरी ताकत नहीं है कि एक आसाराम नहीं है कि आसाराम के हजार जीव ऐसे हजार आसाराम मिलकर भी अ कि भगवान शंख की महिमा का पूरा
वर्णन नहीं कर सकते हैं है ऐसे हो तुम्हारे बाप हर तुम उसी की पुत्रियों पुत्र हो फिर को कम करने में बड़ा आनंद प्रीति करो फिर देखो भजन भजन है तुम्हारा इतना जाओगी तीर्थों में झालें चा आत्मा फिर तो आप बाहर कर दिए जाओगे तब स्कर्ट है है तो तुलसी दास की पत्नी की कि रत्नावली कहती हाड़-मांस की दे हमारा तांबे इतनी प्रीति को मैं तो आपसे प्रभु का लेकिन प्रीति इस साल मार्च में एकाग्रित हो हाड़-मांस खरीद यह माता में इतनी प्रीति ना तेरा तोते की चोंच जैसा जरा ऊंचा करके दिखा दूं तो क्या
गंदगी भरे लिस्ट दांत अनार की कली जैसे विरोधी तथा मरे हुए व्यक्ति आर्थिक की बदबू देखने छुक बहुत पति के अंदर विकारों तो पत्नी को एक दिन ब्रश करके देख लो इस प्रकार की सुंदरता से यह अगर वह कनेक्शन अधिक तो फिर जितनी प्रेग्नेंट ही विष्णु बढ़ जाएगा इसीलिए बोलते जल्दी करो जल्दी करो श्मशान में ले जाओ फिर हड्डियां भी घर में नहीं आने देंगे खुद के पैसों से मकान बना है लेकिन आपकी अ मकान में रखना शुभ मानी जाएगी चाहे माय हो जाए भाई हो ऐसा है बिना वासुदेव की सत्ता स्फूर्ति आ मैं तो
बाहर के भगवान को देखने के लिए बाहर का प्रकाश उचित है अच्छा है समझती प्रकाश शाह लेकिन व्यष्टि और समष्टि प्रकाश को प्रकाशित करने वाला वासुदेव का प्रकाश बुद्धि में दब जाता है तो चिन्मय भगवान बन जाते साकार सगुण भगवान मंदिर जाकर भगवान सगुण-साकार बाहर दिखते हैं लेकिन सगुण जिनमें भगवान् बदले में डिप पिछले गणपति दादा मोरिया वालों को भी इतना-इतना शाबाश धन्यवाद और माताजी के मानने वालों को भी धन्यवाद शिवजी को मानने वालों को भी धन्यवाद कृपया झूलेलाल नाचने वालों को धन्यवाद और मिट्टी के शिवजी को ओम शुभेच्या त्यौहार क्योंकि हो कि हर से
मिट्टी के भगवान दिखते हैं लेकिन जमालपुर के बैठेंगे तो बुद्धि में चिन्मय भगवान का रस पाएगा चिन्मय वासुदेव शिव का प्रसाद मिलेगा उस प्रसाद से बुद्धि पुष्प होगी प्रसाद मिश्र और धोखा नाम हानि रक्षकों प्रजायते कितना भी दुखी आदमी पूजा करके चुप बैठे तो ऐसा दुख रहेगा क्या ऐसी चिंता रहेगी क्या कि आप कीर्तन करते हैं तो मैं भी दुखी और कीर्तन के माहौल में आ गए थे ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय बम बम बम ओम नमः
शिवाय बम बम भोले नमः शिवाय शिवाय शिवाय शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] शिवाय भगवान देवनारायण भगवान का या तो बुद्धि में भगवत रसायन [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] आश्रय संगीत का अभी लेकिन भगवत आसरे की मुख्य अ ए प्रीटी म्यूजिक में ही प्रति प्रभु कै [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] बानी नहिं भी बोलोगे तबीयत बुद्धि में उसका रस आएगा है [संगीत] शो मोर को [संगीत] [प्रशंसा] रोककर पोस्ट में आश्रय लरिका है प्रीति सेक्स में विवेक रॉय दवाई हो जाए हर यहां फ्रेंड क्यों देखा है का आश्रय म्यूजिक
का भी है लेकिन म्यूजिक का श्रेय गांव है प्रभु का नाम का आश्रय विषय शिव का राम का नाम [संगीत] का आश्रय शुद्ध है और प्रीति परमात्मा से इसलिए डॉक्टर ब्राह्मण को यह सत्य अनुभव में आया कि रॉक और पॉप म्यूजिक से जीवनशक्ति का ह्रास होता है लेकिन भारत के कीर्तन पद्धति से जीवनशक्ति का विकास होता है ना वह शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय भगवान बॉब नमः शिवाय बम बम बम ओम नमः शिवा शिवा शिवा शिवा ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय बम बम बम ओम नमः शिवाय बम बम बम ओम नमः शिवाय ओम [संगीत] कि प्रभु तेरी जय हो 12 बासुदेव तेरी एड्रेस मिल गए मेरे लाला रे गोविंदा रे गोपाला जी आप मेरे अच्छे ताकत बेरिकेड सवा मेरे माधवा मेरे दीन दयालु दीनबंधु दीनानाथ आप मेरी दादी तुम्हारे हात में [प्रशंसा] कि फायरिंग में हो गए थे कर दो कि बाहर के प्रकाश में दिखने वाली केविन और बाहर का यह फंडा नॉन हो गया चीन में भाव सूर्य के वासुदेव का रसायन है कि [प्रशंसा] थै हैं [संगीत] जानने देगा अ कि
अ कर दो हुआ है मधु महल अब से प्रेम मेज़ ए ज्ञानस्वरूप आ आ हुआ है आनंद रूपा हे गुरूपा फेस्टिवल रूपा लुट लुट लो [प्रशंसा] कि [संगीत] प्रभु माधव होल है [संगीत] हुआ है कि [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] यह बात शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय बम बम बम ओम नमः शिवाय बम बम बम ॐ नम शिवाय आदि नामों मार्गियों रवि प्यारे दोस्तों मेरे जी ओम वासुदेवाय ओम गुरुदेव हरिओम ओं र भुजियों प्यार जो मेरे जियो गणेश पिओगे राम जी ओम श्याम जी ओं युटुब डोरेमोन बहुत-बहुत अ मैं पक्का तरह
से चेहरा धो है चीन में आ की शादी बहुत थिक में से चीन में जाना इसी का नाम है उन्नति है कि सचिन मैं में से आधी बहुत थिक में पुलिस ने इसका नाम है अवनति पतंग है कि स्थल में से सूख में जाना है इसका नाम है उठान सुख में से पुल में उलझना इसका नाम है पतन कि पानी का वाष्पीभूत ओं कर ऊपर चढ़ना यह है शुद्ध करोड़ रुपए से नीचे गिरकर घटनाओं में जाना है इसका है अश्वटिक का है तो वेद में आया है कि मनुष्य तू आलस छोड़ दो का प्रमाण झूठ
है ए फर फर क्वेश्चन अ कि आगे बढ़ है यजुर्वेद में भी आया है ऋग्वेद में भी है है और ऐसा ऊपर उठ कि जहां कसरत और चित्र अलग ना रहे हैं है जो सत्य है वही चेतै और फिर चित्र में फिकर आनंद तुझे आने नहीं तो बाहर आनंद के लिए भटककर भिखारी मत है यजुर्वेद का सूत सप्तम और मंत्र 72 मां है ज्योतिष हम दिवम यह पुनीत भावना तेजस शाह उद्देश्य उधर हम कि हे साधक तो अपने सुंदर पंखों से उड़ने वाला उन्नति करने वाला और गौरवशाली सत्य है तू पृथ्वी की पीठ पर बैठना
आ अपनी ज्योति से अंतरिक्ष को भर दे अपने प्रकाश से तू ढूंढ लो को ऊपर उठा दे अपने तेज से दिशाओं को सुदृढ़ कर दे दो हुआ है ज्योतिष परमात्मा की शक्ति से संपन्न है तू उद्धमी बंधु-बांधव आगामी मत यार मत बनना पलायनवादी मत बना तू गौरवशाली क्योंकि में अनंत शक्तियां छुट्टियां हैं हुआ है कि महत्त्वबुद्धि जिसमें होती है उसका आशय होता है का महत्व है भगवान बद्रीनाथ की यात्रा का है को महत्व दिया भगवान विष्णु मैं तो मैं Badrinath जाऊंगा मां तो बुद्धि है शिव में तो मैं केदारनाथ जाऊं तो का महत्व है माता
जी मैं तो फिर मैं माता जी के मंदिर में जाऊंगा तो हैं तो आपके जीवन में महत्व बुद्धि जिधर के बनेगी गुण कर्म है अथवा गणोश व भले ही आप कितने भी लोहा श्वेत ऐसे बिलों लेकिन जहां महत्व है वह सारे आश्चर्य उधर समय लोगे आपके महत्व दी थी सत्संग में आपके मन की सोच विचार के कैसे पहुंचे द्वारिका फिर आपने रेलवे का उपयोग किया कार का उपयोग किया दोस्त का उपयोग किया टेलीफोन का उपयोग किया यह सब आश्रय लिए लेकिन आश्चर्य भी उस महत्व के लिए तो सारे आश्रय आपके भक्ति में हो गए अगर
महत्त्वबुद्धि शराबखाने में है अथवा दुराचार में है तो जो भी आप आश्रय लेते हैं वह सारा चिंतन आपका व हो जाता है इस बात को आप बिल्कुल मान लोगे पक्की बात है है तो आप पप के आसरे और महत्व आश्रम नौकरी का लेते हैं पत्नी की सेवा का लेते पति की सेवा का लेते लेकिन महत्व शिवजी का भगवान का किसी भगवान का मानते तो सारे आसरे उधर को मोड़ जाएंगे तो है तो संसार में अगर आप कोई आश्रय ले तेरा शुक्र द्वेष का तो आपका राग और द्वेष बढ़ता जाएगा आ आ कि मेरा कोई शत्रु
है और मैं रह को तंग करता है तो अगर भगवान का महत्व नहीं है मेरे जीवन में तो मैं न जाने क्या-क्या नीच आश्रय लेकर भी शत्रु को मिटाने में लगे लूंगा कि अगर मेरे जीवन में भगवान का आशय है तो मेरे से वह नीच कर्म नहीं हो सके अगर होते हैं तो भगवान का आश्रय इतना जोरदार नहीं है डिमांड है है तो आप अपने जीवन में भगवत आज शहर का विकास हो और भगवत आश्चर्य का रस मिले इसलिए पूजा-पाठ उपासना होती है कि हर जनम टीजर भगवतदास से के हो जाएं यह संभव नहीं संस्कार
मिलते हैं सिंधी के कुल में जन्म लेगा तो झूलेलाल भगवान करने मित्र बनकर भगवतदास रहेगा पंजाबी में होगा तो गुरुद्वारे और कोई कृष्णा राम अधिकार तो यह आते अगर ऊंचा जाएंगे तो धीरे-धीरे हमारी क्रिया-कलाप चिन्ह हो जाएगी मैंने ऑस्ट्रेलिया ऑस्ट्रेलिया गणपति का आश्रय लिया कोई भगवान समय तो मेरे आंख बहुत अधिक प्रभावशाली व्यक्ति भी लुट करके शांत बैठे तो उस समय आंख बंद हो गांव से हम भी तरह की मूर्ति भी तरह गांव में पड़ेगी और आंख बंद करके बैठे जब करेंगे अध्ययन करें तो हमारी बुद्धि में जो सुख कि वह बहुत थिक आश्रय लेकर
हम परमार्थिक आश्रम में चिन्ह मैं आश्रम में पहुंच जाएंगे और एक बार चिन्ह मैं आश्चर्य का रस मिला तो हजार-हजार इग्नोर बुध हाय और हजार-हजार श्रद्धा तोड़ने का व्यवहार आए फिर भी चीन में आश्रय जिनका खुल गया वह भगवान का आश्रय छोड़ नहीं सकता गुरु का सत्संग छोड़ नहीं सकता अध्यात्मिक उन्नति छोड़ नहीं सकता था क्योंकि चीन महात्व है शुरू में तो भले अधि भौतिका आस्ट्रेलिया राग-द्वेष में जी रहे तो रात राघव वाली चीजें लाएं मूर्ति में रख रखा लेकिन मूर्ति का राजचिह्न एमएलए हम डाउन करते समय बाहर की मूर्ति नहीं फिर भी अध्ययन-अध्याय लगता
है आनंद होता है शांति मिलती है मैं इसी प्रकार गुरू मंत्र लिया अगर मंत्र लिया और जब किया तो पहले तो आस्ट्रेलिया कान में जब गुरु मंत्र सब्सक्राइब कि आपको चीन में सुख मिलता है तो रात वाला सुख दुख देता है वाहन भी आपको जाता है लेकिन यह दुख और सुख में समान अधिकार करता है इसलिए मंत्र दीक्षा की बड़ी महिमा है कि शबरी भीलन एक तो भील जाति और फिर बेइज्जती में भी कुरूप शिरोमणि सब बढ़ जाती है और ऐश्वर्या की कन्या मतंग ऋषि के आश्रम में आ गई कितनी महान बन गई दुनिया जानती
श्री राम जी सब्सक्राइब करें कि आज मैंने मेरी मां कलियुग लुटेरे और कुछ और है कि क्या था इसने मतंग ऋषि के सत्संग का आश्रय लिया लकड़ियां चुन कर आरती मतंग ऋषि की सेवा का आश्रय लिया है है तो ऊंचा आश्रम को उच्च पद पर पहुंचा देता और नीचा फील हमको दुर्गति में ले जाता है है तो हमने कोई भी आस्ट्रेलिया पूरा घर देश से ऊपर होने के लिए भगवान की भक्ति व राग और द्वेष से पार होने के लिए भगवत्सेवा राग और द्वेष से तो हम पढ़ते रहते भगवन नाम राग-द्वेष से ऊपर उठने के
लिए हम भगवत कथा कि अब भगवत कथा काम ने आस्ट्रेलिया भगवत नाम का आश्रय लिया भगवान के देवी कार्य संत के दैवी कार्यों में जुड़ने का हमने आस्ट्रेलिया व हमारा उत्तमाशा संयुक्तम चिन्मय सुख में चिन्मय ज्ञान में जिन में आत्मा में हमको पहुंचा देगा का या तो कि यह होता है करो है तो कर्म से आप नीच गति को भी जा सकते और कर्म से आप उत्तम महापुरुष भी बन सकते और भगवान के सखा भी बन सकते भगवान के इस नहीं बन सकते हैं भगवान के मित्र बन सके भगवान के बाप बन सकते हैं भगवान
की मां बन सके भगवान के गुरुद्वारा गुरु बन सकते ऐसा कर्म का विधान है आप चाहे तो के बिछड़े हैं जो प्यारे से दर ब दर भटकते फिरते हैं जो भगवत्सुख से भगवत सामर्थ्य से भगवत ज्ञान से बिछड़े हुए इधर उधर भटकते न जाने किस-किस योनी में कहां-कहां पूंछ हिलाते न जाने किस-किस की गुलामी करते थे जो एक मिश्रण जाता है उस वह निहाल हो जाता है कि शरण छोड़कर अनेकों की शरण में जाता है वह बेहाल हो जाता है विकारों के सिर और शराब की शरण व्यसनों की शरण बेईमानी की शरण ली कोर्ट की
शरण कितनी शरण लेकर रस लेना चाहता है लेकिन जीवन नीरस रहता है एक वासुदेव की समय लेता है तो रस मैं जीवन खुद का तो होता है दूसरों के लिए भी रखा जाता हो जाता है थोड़ी भी समझ होगी तो इस बात को मान लोगे आप तुरंत अगर थोड़ी भी आपका यह थोड़ी भी पुण्य है तो यह आपके अनुभव की बात कि यह सरकार रस नहीं लेना जानता है ईश्वर की शरण नहीं जाता शरण क्या बात कोई मूर्ति के पैर पकड़े हैं यहां किसी मंदिर में जाकर ठाकुर जी के पैर पकड़े शरण का मतलब है
जहां से आपका मैं इस पुनीत होता है भगत आश्रय लेकर उस माइक को भगवान में अथात् मैं के ऊपर जो कर्तृत्व भोक्तृत्व सांवरे सॉन्ग यह भरते हैं वे प्रत्यक्ष रोजगार आप उस में गहरे उतरते हैं में एक बार तुकाराम महाराज ने कहा कि भगवान आप तो बोलते समय मेरी शरण आ जाओ लेकिन आपकी श्रम कहां है कैश यादों में तुम मिर्च घाघरा पांडुरंगा वित्तला तुम मिश्रण को एकनाथ जी को लगा कि भगवान तुम्हारी शरण मा लेकिन जटाधारी बन जाएं तो आपकी शरण है कि मुंडन कराने से आपकी शरण हूं मंदिर में बैठने की शरण हो
अथवा सीताराम सीताराम नमः शिवाय की चादर ओढ़ने की नियुक्ति की शरण में कि एक नाथ महाराज कुछ दिन हे भगवान से प्रश्न करते करते बैठे बैठे बैठे के अंदर से प्रेरणा हुई कि यह जहां से पूर्ण उठता है मैं उसी में ईशांत और ना ही मेरी शान है मैं अपना देखा हम छोड़ना पार्षद रमेश को स्वीकार करना यह मेरी शरण फिर तुकाराम महाराज को प्रश्न उठाकर जगत में सब प्रकार से सुखी कौन पूर्ण रूप से कौन है पत्नी मिलने से भी पूर्ण सुखी नहीं है पद त्यागने से भी सुखी नहीं ब्रह्मचारी रहने से पूरे सूखी
नहीं रावण ने पूरे सूखी हुई जगत में सर्वप्रकार सुकून तुम्हें तुम खोज मिडल से पूछते-पूछते झुक गए जिससे थे उसी के निकट हो गए प्रख्यात लेखक दृष्टि ज्ञान अधूरा अपनी दृष्टि में भगवत ज्ञान और सारा भाप विलास है [संगीत] कि वह आदमी सुखी रहता है है तो यह बात तो उनके हृदय में आई लेकिन बीता मैं यह बात एक नेता ने पुष्टि कर दी है और बहू नाम जन्मनामंते ज्ञानवान्मां प्रपद्यते वासुदेवा समिति सम महात्मा सुदूर नमक अंदर से तो यह आया लेकिन कथा में सुना तो दूसरे दूर कुछ दिन के बाद सत्संग यह बात आ
गई तो अपना अनुभव जो शर्मा स्वर्णा है अपना जो स्पंदन है अपनी जो अंतर्प्रेरणा है वह शास्त्र और संत सम्मत हो गई तुकाराम महाराज तृप्ति का अनुभव करने तुकाराम महाराज को जब दिशा में जाकर ठाकुरजी को उन्होंने दिया ठाकुर जी से छेड़खानी की मोहब्बत जोर पकड़ती ने ठाकुरजी से शरारत कर लेती प्रेम जोर पकड़ने से करते करते हैं है तो जब दीक्षा मिली तो तुकाराम चलेगा भगवान के मंदिर में हर भगवान को उलाहना दिया माया पांडुरंगा तक मिट्टी जाणार आहे तुम चोटी गुर्दे लिए तुम पवित्र मंत्र मध्यक्रम मंत्र इस गुरुदेव दया मतलब ठाकुर जी तुम्हारी
चोटी चोटी दोस्तों अब तुम कहां जाओगे तो मैं मिलो ना मिलो मैं तुम्हारे नाम रूपी चोटी इस प्रकार से गुनगुना मजा लेते हैं लेकिन उभरे Lovely का निबंध किसी की बुराई नहीं बनता तो इसी प्रकार से आपके मन में भगवत भाव बनता जाए इन था धान भाव अहंभाव मिट जाए और भगवत गांव की संख्या बढ़ती ने नारदजी को श्राप के कई विडियो से ज्यादा नहीं रह सकते लेकिन द्वारा किया जाता है है तो कहीं भी गए हैं फिर से द्वारिका कहीं भी गए द्वारे का पिंजरा बन जाओ खबर ले जाओ फिर आए द्वारका जा जरा
बद्री विशाल खबर ले फिर द्वारका जरा मथुरा घूम लिया फिर द्वारका जाने की जगह पास लेकिन आने की जगह 150 मार्क एक तरफ आप लोग भी कुछ करते फिर अपने मन को भगवान में ले आओ में भगवान की प्रतिष्ठा और भगवान के महत्व की स्मृति में और वकील साहब आपने बहुत बढ़िया कर दिया है मुझे उम्मीद नहीं ठीक है इतना बड़ा पेश और आप जीत लोगे मलें हैं ठीक है भगवान की दया से सब कुछ लोग तो सुनाने के लिए कहते हैं कुछ लुटेरे उनकी बुद्धि में भगवान की प्रतिष्ठा आज मन इतना अभिमान हो गया
कि नर्स की जो assistant बोलते थे लड़का लड़का होगा या लड़की करें भगवान की इस जीत को मैंने बोला था मगर इतना तो स्वाद और विफलता तो उद्देश्यहीन पुष्टि का उद्देश्य है एक अहम का आश्रय भगवता श्रेणी में कि भगवत आश्चर्य होगा तो सफलता भगवान की कृपा से विफलता हमारा प्रमाद या प्रारंभ लापरवाह है कि यशोदा यहां भी सफलता और सुख एवं मंगलमय देखें भगवान को यशोदा यशोदा आदि से भगवान लिपट जाति आपकी बुद्धि में भगवान का महत्व रखता भगवत शरण वास्तव में सबका आश्रयदाता भगवत सप्ताह है है लेकिन जो मानते हुए उसे विशेष भगवान
की प्रीति मिलती है भगवान का ज्ञान मिलता है भगवान का शाहरुख मत नहीं मानते हैं उसको सामान्य रूप से मिलता है जैसे सूर्य का प्रकाश हमको सामान्य मिलता है लेकिन हम विशेष इंस्ट्रूमेंट लगाते हैं सोलर लगाते कुछ लगाते तो सूर्य का विशेष प्रकाश मिलता है ऐसे भगवत आश्रय लेना मतलब भगवत्कृपा के लिए सोलर लगाना और सोलर जितना हमारा हाफ इंच उतना भगवत कृपा है कि वह जमाना था सोलर सिस्टम से जहां संपित्त ऐसा आता है एक हजार माइल की गति से वहां से भाग सकते थे थे में लिखा है ग्रंथो में अ कि भरद्वाज न्यूज़
की खोज की थी कि अंशुबोधिनी ग्रंथ में आता है मैं तो अभी जो सोलर सिस्टम है यह विकास हुआ ऐसे कई बार विकास हुए फिर विनाश में विकास हुए विनाश में आए तो विकाश नस विकास अविनाशी प्रकृति की उछलकूद होती रहती लेकिन अविनाशी का अनुभव नहीं हुआ तभी तक इन उठ अपने खाते रहते अविनाशी का अनुभव हुआ तो बस हो गए पार गुरुत्वाकर्षण के नियम के नीचे होते तो चढ़ो-उतरो तैयार आकर्षक गुरुत्वाकर्षण से पार गए तो फिर कि ऐसे आपका मन बुद्धि प्रकृति के आकर्षण में है तो चढ़-उतर नीच योनियों में भटकना सुखी दुखी होना
अगर भगवान से आकर्षित हों तो धीरे-धीरे भगवत्सुख भगवत ज्ञान भगवतानंद नेतृत्व पर उत्तर दिखेंगी लेकिन अंदर से शक्तियों चलते-फिरते हरेराम-हरेराम राम-राम हरे-हरे गर्भ में पल के लिए [संगीत] सब्सक्राइब करके चिंतन करके पांच करने की जरूरत चलते-फिरते नौकरानी से बेटा-बेटी चालू कर दो कि हरे राम हरे राम राम और हरे राम हरे राम राम राम हरे कृष्णा हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम
राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे ॐ भ्रं जो कि दोस्तों से व्यथित होकर ब्रह्माजी के पास में कि लोग तो आटा-दाल कपड़ा लगता मकान दुकान बनाने में इतने ऊंचे कि पता ही नहीं कि जीवन का उद्देश्य जीवन का रस रस जाता है और कभी भूल जाते हैं तो फिर शादी में जाते हैं तो वहां तीर्थों में भी चाट-पकौड़े समोसे यह वह आदमी और फिर यह भगवान बड़ा वृद्धश्रवा यह कर मनुष्य जीवन है से चला जाता है उन्हें जूलर्स के नाथ चारों तरफ कलयुग ने और कल जो कि भाई धर्म ने
चारों तरफ पैर पसारे कहीं तो आस्था और आस्था है तो सच्ची प्रीति यह सूख उद्देश्यों चाबी आदमी डुबाकर थक रहीं और जीवन नष्ट हो जाता है और कई लोगों को तो पता भी नहीं कि जीवन तथा साक्षात्कार करने के लिए मनुष्य शरीर में पैसे कमाना और करके मर जाना और यह कोई जीवन का उद्देश्य यह तो बैठोगी तबाह कर रहा है तो आप पैसा बेटे-बेटियों की डिमांड है के प्रति सामग्री अतिभावुक बेटे-बेटियों के विकास में रुकावट तो कोई तो अतिभार थी सामग्री देर कोई अति से गरीबी में तबाह हो रहे कोई अति धन और सुविधा
में खबरें तो कोई अतिरिक्त सुविधाओं में खबरें हर कोई मध्यमवर्गीय तो कई तीर्थ व्रत मिल जाते तो वहीं समोसे पकोड़े में और इधर-उधर पर उसने उलझ रहे हैं कि नारद जी का हृदय द्रवित हो गया ब्रह्मा जी ने अपने कमंडलु में से जल लिया तीन आचमन समाधि लगाए हैं है इंद्रियां मन में मन बुद्धि में बुड्डीज बदतमीजी ब्रह्म तो मेरा गाए जा उ सारी सत्ता और ज्ञान हो यहां से सृष्टियों पैदा हो पर लीन हो जाती उस पर में प्रतिष्ठित हो गए ब्रह्माजी की आंखों में चमक आ यह बात सच है हुआ है को उपदेश
दिया और वह प्लेस बन गया कलीम अलग तारणोपनिषद कलियुग के दोषों को कलयुग के मैल को कली संतरण उपनिषद बनी नारदजी को उपदेश दिया है कि हर बोले फिर आम आदमी सूख देश में तो बोले बस हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे मुलाकात विधि इस मंत्र जपने की विधि क्या बोले ना विधि कोई भी चलते-फिरते उठते-बैठते खाते-पीते जैसा भी अव्वल तो चलता तो बच्चों को गले है श्री राम राधे राधे कृष्ण कृष्ण कृष्ण राधे गोविंद माधवाच्युत ऑपरेशन लो हंस रहा हूं चालू हो गया उद्देश्य भगवत शांति
होगी क्या करते हैं है तो कभी कीर्तन से चलते-फिरते गुनगुनाते कभी किताब पढ़ते कभी शास्त्र पढ़ते कभी जीवाणु लगाते कभी त्राटक करते अभी सत्संग में आते कुल मिलाकर अलग-अलग में काम करते-करते जैसे व्यापार-धंधा करने वाला अलग-अलग सिस्टम करते हुए भी दिनभर उद्देश उसका पैसा कमाना होता है ऐसे उद्देश्य आपका भगवत्प्राप्ति कर दीजिए बस हो गया ना वो तो बेचारा आप वासुदेव को व्यवसायों बसे हुए खाली प्रभाव जैसे लकड़ी में आग छुट्टियां प्रकाश छुपाए लकड़ी लिए तुम्हारे अंदर वासुदेव का सामर्थ्य और रस छुपा अब वार जो भी लेते हैं फिर भी तस सोचो लेना-देना हाथों में
पैरों ने आंखों ने इंद्र ने किया उसको सत्ता मन के फुरने से आए मन के फुरने बुद्धि के निर्णय के अनुसार बुद्धि में कौन है कौन है वह दिखाओ प्रेरक संघ का प्रकाशक अ तो यहां से मैं उठती वह कौन है मैं कौन हूं कि मैं मैं इस पूरी तो होता है मैं मर जाऊं तो सूखी रहा हूं तुम मरने के बाद भी मैं तो हूं तो वह मैं कौन हूं आज मेरे बेटे का ख्याल करना मेरी पत्नी का ख्याल करना मुझे अब नहीं जीना में यह चला मैं मर जाऊं तो सूखी हूं तो मैं
कौन हूं तो मैं ऐसा बनो तो यों तो बिगड़ जाएगा मिलना बिछड़ना लेकिन मैं तो मैं का अभाव नहीं होता और वह सदा रहता गजरा घृणा है लेकिन उसे तो सिद्ध होगा यह नर्क और स्वर्ग है लेकिन मेरे अस्तित्व न रहने पाएगा तो अपनी मां को खोज लूंगा मैं परमात्मा ही है वहीं वासुदेव मैं तुम्हारा पापा मेरा डिवाइस कहां खो जाते हो गहरे पानी पैठ मैं बोरी डूब अंधेरी रहित किनारे अपने मैं को जो दूध आप उस मुझको मैं उसको जानता हूं आप से बच निकले चिंता भी आप उससे जुड़े नहीं चिंता क्यों उसका उपयोग
करो और उससे रास्ता बच कर निकले क्रोध आया मैं क्रोध को देखता आपको से बचने आप भयभीत हो मैं देखता हूं आप तो मंगल होगा लाभ लिया आपकी वाणी और आपकी नजर पड़ेगी उनके पास और आप अगर कोई पापी से पापी आदमी का मुद्दा भी आपकी नजर पड़ गई तो उसकी दुर्गति और सद्गति होने लगेगी ऐसा मैं अमर रहे मधुमय है ब्रह्म ज्ञानी की दृष्टि से अमृत वर्षा जी कि ब्रह्म ज्ञानी का दर्शन व भ्रमज्ञानी कीमत कोण मखाने ना-नुकर ब्रह्मज्ञानी की गत ब्रह्मज्ञानी ब्रह्म का ज्ञान ब्रम्हज्ञानी ब्रह्म गिआनी का कथिआ न धर्मज्ञानी सब अधिकतम पर
को सबस्क्राइब ब्रह्म परमात्मा उसमें अपनी मां को मिला हुआ है जैसे लहर सागर से मिली सूर्यकिरण सूर्य की खबर है सरोवर की अंजलि सरोवर का लक्ष्मण सरोवर की खबरें ऐसे आपकी मैं वासुदेव की खबर है कि वासुदेव सर्वमिति स महात्मा आंसू लवर यह सत्संग का पुण्य आपको कितना होता है यह कोई दुनिया की तराजू तौल नहीं सकती ब्रह्माजी तराज़ू बनाया तो उनकी तरह जो टूटे बिना रह नहीं सकती है सा यह सत्संग का फल ब्रह्मज्ञान का सत्संग में तमता सर्वतीर्थ मुझसे सारे तीर्थो में नहा लिया दाणा सेओ रा दाणा उसके द्वारा श्रद्धालुओं ने स्वयं उसके
द्वारा सांय यह लक्षण अमन ब्रह्म विचार इस सीरम प्रत्येक क्षण के लिए भी उस ब्रह्म परमात्मा के विचार में आपका मन टिक गया तो आप इतना पुण्य होता है और एक होता है कर्म कर्म अगर उद्धो के आसरे और प्रीति ऊंची है तो वह कर्म आपको ऊंचे से मिलाते आप कर्म करते हुए उसका फल अब घर अपने तरफ खींचते तो आपको विकसित होगा आपको बाय होगा आपके दुश्मन बनेंगे और दुश्मन आपको प्राप्त कर देंगे अगर आप कर्म करते अबे सत्संग करने क कर्म कर रहा हूं और इस सत्संग में इतने लाखो आदमी आ रहे हैं
अगर मेरे को पैसे मिल जाए मेरे को यह हो जाए तो कर्म का फल मैं अपने तरफ़ खींच लूंगा तो मैं भयभीत हो जाऊंगा और मेरी धीरे-धीरे मेज़ आदत बिगड़ जाएगी मैं शराबी हो जाऊंगा कब हो जाऊंगा जुआरी हो जाऊंगा न जाने क्या-क्या हूं अगर मेरे कर्म का फल समाज रूपी देवता में बांटता हूं तो वासुदेव ने स्वीकार कर लिया क्योंकि समाज रूपी देवता मे वासुदेव भाषा है मैं आगे बढ़ता है जाऊंगा बढ़ता है जाऊंगा मुझे द मेहनत नहीं करनी पड़ती है हैं तो आपके कर्ण का उद्देश्य अगर आप अपने तरफ खींचते हैं फल पीड़ित
ने भी बुध्दिमान और कितने भी आयोजक संयोजक डायरैक्टर यह व हो जाइए आखिर बुढापे में आप थक जाएंगे आर जाएंगे इस संसार से विदा हो जाएंगे अगर आप अपने कर्मों के फल को शेयर और पॉइंट कर देते हैं में बहुजन हिताय बहुजन सुखाय तो आपके कर्म में चार चांद लगने लग जाएंगे चाहिए फिर आप तीन बड़े हो साथ एक भी नहीं पढ़े हो आप ईश्वर और उन कर्म कर दीजिए जरूरी नहीं यही तो यह मेरा नहीं है तो 1110 ने यही तो किया और क्या है अपने कर्मों का फल अपने तरफ मत दृष्ठि मेरे को
पद मिले मेरे को मैंने पिताजी की चंपी करता था तो मेरे को पुण्य मिलेगा पिता जी की संपत्ति मिले ऐसा मैंने कभी नहीं सोचा मैंने गुरुजी के दैवी कार्यों में अ तन-मन-धन को रगड़ा मेरे को गुरु जी की कोई धर्मशाला या कोई आश्रम या ट्रस्ट मिले मैंने कप बींस कम कतई नहीं सोचा जिन्होंने सोचा वह तो विफल हो गया और मैंने नहीं सोचा तो मेरे तो कदम-कदम पर सफलता चरण चूम रही है बिल्कुल पक्की बात आप कर्म तो करिए लेकिन कर्म का फल अपने व्यक्तित्व की तरफ लाई इश्वर के तरफ भेज दीजिए कि आप इस
शब्द से मिल जाएंगे और व्यक्ति के तरफ अपने व्यक्तित्व के तरह लायक कर्म कर फल को भोगने के लिए पीछे व्यक्ति में लंकापति रावण में हिरण्यकशिपु अंत क्या होगा तो आप गर्म कर अश्लील ह है उसमें आशय है और प्रीति ईश्वर की शपथ ली है कि मैंने मकान बनाने का सोच लिया है तो यह मुख्य उद्देश्यों अब गुण कर्म है सीमेंट कहां से आएगा इंच या जाएगी फर्नीचर कहां से आ गया यह गुण कर्म उसके साथ जुड़ गए उद्देश मेरा मकान है बाकी गुण ऐसे उद्देश्य भगवत शांति पाली उद्देश्य मुक्ति रख लीजिए उद्देश्य परमात्मा को
पाने का रस लीजिए आपके छोटे-छोटे कर्म भी उसी प्रकार के उन्हें है थे रियल उद्देश्य मत रखें इस शरीर का वृक्ष बनकर दुनिया में नाम करो यहीं निर्देश है अरे शरीर जन्म नहीं था कोई नाम नहीं था और बाद में भी कोई नाम नहीं रहेगा बहामास के शरीर का नाम पे मेरा नाम है यह भ्रम मिटा दो तुम्हारा कोई नाम नहीं तुम निराकार हो नाम साकार कहीं रखा हुआ है मेरा नाम हो जाए मुझे यह मिल जाए लेकिन यह टिकेगा कब तक और नाम तो झूठा आशु मलिक की जगह पर अर्जुनराम रख देते तो मैं
अपने वजन मानता है मोहन महेंद्र मोहन मानता बुरा रख दिया तो मैं अपने को बुरा मानता था उस समय बहुत गोरे गोरे थे भुरभुरा घृतम् जाकर फिर भगवान भगवान मानते 10 साल की उम्र में 11 साल की उम्र में कुछ ऐसा बोल देते हैं और यह बात हो जाती तो किसी माई के दो बेटे जेल में गए और माई आई मत्था टेकने बोलो मेज़बान गया आ जाएंगे भगवानगढ़ बैठ जल्दी आए तो भाई आई और पहले अगर मेरे को तो पता भी नहीं जिसने बुलेट मैंने इज माय टैबलेट छुड़वाया पूजा तो मैं मरता एक दिन अधिक
बोले भगवन बोले सुख पावे सिर्फ रघुनाथ जी तो तुमने भी तो उद्देश दूसरे और प्रीति भगवान के साथ करो मैं भगवान के के नाम से भगवान के आज आपको हाथ जोड़कर बोलता हूं तो कर्म में आपका उद्देश्य है पूछा रख दो कदम रखेगा मेरे को रहा है मैं बोलता हूं तो रास आ रहा है और आप सुनने को आते तो भी रस आता है रुकते तो भी रहा है यह कर्म है उद्देश हो जाए तो है तो कर्म धनिया रस है कि अगर धर्म और मर्यादा जुड़ती तो कर्म जनरस यह आता है अभी आप बैठे
हैं यह भी तो कर्म ही है अभी जो सुन रहे यह भी तो हर कर्म है यह कर्म जनरस समरस मिल रहा है इसे भविष्य उज्जवल अगर मैं ना बोलूं और दुनिया ना बोले तो भी होगा क्योंकि कर्म का सिद्धांत तो कर्म में रस लाना है तो आप शेयर उद्देश्य ऊंचा कर दीजिए ऐसे ही कि भाव में रस लाना है आपको रस चाहिए बिल्कुल पक्की बात अब भी पीते तो मजे के लिए दारू भी तो मज़े के लिए रोक और पॉप म्यूजिक खेलते तो भी मजे के लिए लड़ाई भी करते तो भूख मिटाकर सुखी होने
के लिए तलाक भी दे देते तो सुखी होने के लिए रस के लिए और शादी भी करते तो रस के लिए सर्विस भी करते तो रस के लिए और सर्विस छोड़कर दूसरी जगह अटेंड करते तो भी रस के लिए सूप पी ली लेकिन कर्म मैं आज से ऊंचा कर दीजिए उद्देश्यों जाकर डीजे कर्म रास आएगा ऐसे भाव में प्रेम मिला दीजिए भावना का रासायनिक जिस वस्तु के प्रति प्रेम होता है उसे आपको रास आएगा यह फूल हैं बहुत अच्छे बढ़िया है यह मेरे मन में प्रेम होगा तो मेरे को राशि के प्रति रोग ना को
देख आनंद मुसलमान को घटाओ अभी गंगा भएको द्वारा यह क्या कर रहा है कहां पर तूने भले गंगा जी के सद्गुण से उसके शरीर में शीतलता है लेकिन प्रदेश में रास नहीं आएगा क्या ख्याल है तेरा नाराज हो जाएगा तो आप अपने जीवन में प्रेम का प्रसाद डाल दीजिए तो फिर वह क्रम में रस आने लगेगा का यह मेरे सामने कोई आमलेट ले आया दारू ले आया और मेरा उसके प्रति प्रेम नहीं है तो मेरे को देखकर नाराज हो लेकिन जिसने आमलेट में दारू में अपना प्रेम भंडार रखा है लीजिए खाली अरे दोस्त संभोग मेरे
जिगरी जान ही लाइक थिस कि चाहे कैसी भी उसने प्रेम डाल रखा है ना कम लाइट में दारू में सिगरेट ने जिसने अपना प्रेम मुडेला है उसको वहां से रास आएगा फिर बने विनाश के तरफ अपने जाने की निशु में रास्तों आएगा ना तो आप जहां प्रेम डालते हैं वहां से भी रस आता है आपका आश्चर्य उद्देश्यों चाहता हो तभी रह सकता है तीसरा होता ज्ञानस्वरूप आत्म उसी ज्ञान स्वरूप आत्मा के रस से ही सारा दुनिया किसी ने किसी ढंग से रस की झलके पार लेकिन रस के मूल को नहीं जानता इसलिए भटक जाता है
सारा जहां अ है तो ज्ञान स्वरूप परमात्मा कर रस प्रेमस्वरूप से जगत का व्यवहार का पूजा का रस और कर्म के उद्देश्य ऊंचे होने से कर्म जनरस अगर मिलेगा तो आप शराब-कबाब में नहीं जाएंगे कर्म व उद्देश्यों जाऊंगा था और आप रस ओवर हिस सर्वेंट्स वानरों रस स्वरूप व ईश्वर परमात्मा के साथ देर-सवेर आकार है है जन्म-मरण के चक्कर से छूटने क्योंकि ना के द्वारा रस मिलता है अगर वह आदत बन गई जीप के द्वारा रस मिलता है वहीं आदत बन गई सैलरी के द्वारा रस मिलता है यह आदत बन गई तो दूसरे नंबर पर
बनना पड़ेगा से सुनो बकरा बनना पड़ेगा कबूतर खरगोश बनना पड़ेगा जिन शहरों में से ज्यादा कर सकते सब्सक्राइब करें अगर आप सब्सक्राइब लग गया तो शरीर में तो यह सारे मनुष्य उम्र कई जन्मों में भटकना रस का उद्गम स्थान चिन्ह अगर आ गया तो दो कि आप खाएंगे रसवाला भोजन करेंगे रस का उपयोग करेंगे लेकिन रस का उपभोग करके ज्यादा नहीं खायेंगे पति पत्नी का व्यवहार करेंगे बच्चे को जन्म देंगे लेकिन बार-बार वह हमारा करके पत्नी की आपत्ति की उम्र या नहीं घटेंगे हो की प्रॉब्लम नमो भगवते वासुदेवाय ॐ नमो भगवते वासुदेवाय वासुदेवाय ॐ रीति-रिवाजों
भक्ति रामायण शांति माधुरी पध गुरुदेव गुरु जी गुरु जी के प्रति आदर था उद्देश्यों को देख कर दो है सच्ची बोलता अब यह लाखों लोगों के सामने और करोड़ों लोग सुनेंगे सुनाएंगे यात्रियों के सेट चल रही मूवी चल रही है एक एसिड तो करोड़ों करोड़ों लोग सुनेंगे लेकिन मेरा गुरुजी का साकार विग्रह अगर यह आप भी इधर कई प्रकट हो जाते हैं आते दिखते तो मैं क्या करूंगा जैसे दिशा में एक बार में सत्संग करा था वृषभ का दरवाज़ा था हल्का और लोग चप्पल उतारकर दरवाजे के बाहर उस चमड़े की चप्पल क्यों समय 14038 साल
पहले प्लास्टिक गणित और चमड़े के जूते देहात वनों के ओर चेहरा करके बोल है ऐसे जूते चप्पल और लगातार गुरुजी आ रहे थे उसी ग्राफ पर यह तो मैं दौड़ा और हो गया तो गुरुजी ने कहा यह क्या करता मैं क्या मुझे वह चरण देखते हैं यह अमेजॉन सोया हूं चमड़े के जूते हैं वह मेरे को नहीं मेरे को तो गुरुदेव के चरणों में कि मुझे यहां देवर इस बात का मैं बयान करके अपने को भाग्यशाली मानता हूं मैं अपने में हीनता का अनुभव नहीं करता हूं चमड़े के गंदे जूतों पर मैं लेट मैं आप
मेरा सौभाग्य था गुरु जी के चरणों में तो पहुंचा मेरा प्रणाम मैं सत्संग के मंच पर था और गुरुजी 11 पधारे थे मुझे पता नहीं था कि गुरुजी इधर इस ढंग से आ जाए तो है तो मेरा गुरु के प्रति आदर था प्रेम था है और मेरे गुरु जी के बीच कई लोगों ने अपने नंबर बढ़ाने के लिए क्या-क्या खाई खोदी कभी-कभी मैं उन्हीं में थोड़ा-बहुत फैसला लेकिन हमारे पवित्र अभाव ने हर गुरु जी की कृपा ने बनाए रखा बनाए रखा रवि तक चमक रहा है गुरुदेव का प्रशांत अ हुआ है कि टीचर कृपा बिना
गुरु नहीं शुक्र की कृपा हुई तब समर्थ गुरु में श्रद्धा टिकती ईश्वर की कृपा हुई तब सच्चे गुरु को सच्चा गुरु मानने में आदमी लगता है अगर अपने को कर्म करें और ईश्वर अंतर्यामी नाराज हो जाएं तो सच्चे गुरु में अरशद ना हो जाएगी और सच्चे गुरु के खिलाफ में झंडा उठाकर चल पड़ेगी अगर अपने कर्म हीन हो गए उद्देश्यहीन हो गया तो गुरु में श्रद्धा नहीं टिकने देगा इश्वर अगर अपने कर्म ऊंचे हैं तो सच्चे गुरु में श्रद्धा लगाए बिना ईश्वर छोड़ेगा ने अतिशय कृपा बिन गुरु नहीं गुरु बिना नहीं ज्ञान ज्ञान बिना आत्मा
नहीं गावहिं वेद पुरान मेरे कर्म ईश्वर को भोग मेरा अनुष्ठान ईश्वर को गया तो अंदर से अंतर्यामी ईश्वर के प्रति मैं मिलूंगा बार होता है मैं जब अनुष्ठान करता हूं और मेरी माल है पूरी नहीं होती तो रात का एक बज़ जाता भले पूरी करने के बाद ही सोता और जवानी थी सोता तो ऐश्वर्या के महाराज पता ही नहीं चले और जंगल के जानवर मेरे पैरों को खुद जहर खा जाते हैं और सुबह चमड़ा उतरा हुआ मिलता पैरों के तलवे चाटते हुए छछूंदर गुफा में थे और मानते जाते समय कहां है 9th मे नदी पर
नहाने जाता तो पैरों के तलुवे पर हम मांस खुला तो कितनी पीड़ा होती लेकिन उस समय उद्देश्य ईश्वरप्राप्ति की तरफ में एक महात्मा को मुझे अ तू मेरे पर उनको दया आ गई यह विचार देखो ऐसा वे वह अपने पास ले गए भोजन भोजन कराए हो गया तो उद्देश्य ऊंचा है तो कठिनाई कोई महत्व नहीं रखते उद्देश से ईश्वर को पाने का है तो इश्वर कैसी बुद्धि प्रणाम करते बार-बार मे शिव मंदिर में जल चढ़ाने के बाद ही कुछ जल लेता था या पानी से धो लेता है है तो जब मंदिर में जाता तो पार्वती
जी के श्री विग्रह चित्र अथवा शिवजी के श्री विग्रह फल फूल फल कुछ गिर पड़ते तो यह शुभ माना जाता है अब देव मंदिर में देवता से कुछ गिरता है तो समझो आप पर देवता प्रसन्न तुम्हें जाता और कई बार ऐसा होता तो प्रॉब्लम था लेकिन हर जगह पर क्लिक करता हूं और दो पीपल को नियुक्त करते हैं है तो भगवान कहते हैं कि तुम मेरे लिए कर्म करो कर्म का रस पाने के लिए मत कर्म गुरु ग्रंथ फोन मत करना कुर्वन् मत पर मोहम्मद भक्तस संघर्ष जीता निर्भय रथ सर्वभूतेषु यह समिति पांडवा जो मेरे
लिए ही कर्म करने वाला मेरे ही परायण और मेरा ही भक्त है तथा सर्वथा आसक्ति रहित और प्राणिमात्र के साथ निर्भर है वह भक्त मेरे को प्राप्त हो जाता है मुझे पा लेता है मुझे वासुदेव के साथ एकाकार हो जाता है [संगीत]