कभी सोचा [संगीत] है कि जो इंसान दिन रात एक करके पसीना बहाकर कपड़े सीता है या गाड़ियों के पंक्चर [संगीत] जोड़ता है वो जिंदगी भर सिर्फ कमाने में ही क्यों रह जाता है? हमारे आसपास ऐसे [संगीत] लाखों लोग हैं जिनका हुनर कमाल का है। कोई लोहे को पिघलाकर आकार दे देता है तो कोई ईंट पत्थर जोड़कर आलीशान [संगीत] मकान खड़ा कर देता है। कमाई भी रोज होती है। लेकिन साल खत्म होते-होते उनकी तिजोरी में कुछ नहीं बचता। वहीं दूसरी तरफ सिर्फ 5% लोग ऐसे हैं जो चाहे कम कमाए या [संगीत] ज्यादा उनकी दौलत हर साल
बढ़ती चली जाती है। आखिर ऐसा क्या है जो यह 5% [संगीत] लोग समझ चुके हैं और बाकी के 95% लोग अपनी पूरी जिंदगी की मेहनत एक अदृश्य छेद में बहा रहे हैं? आज इसी सीक्रेट को बहुत आसान शब्दों में खोलेंगे। अगर पहली बार आए हो तो भाई मानकर चैनल को अभी सब्सक्राइब कर लो। पैसे कमाना एक अलग कला है और पैसे को रोक कर उसे अपने लिए काम पर लगाना बिल्कुल अलग खेल है। हम में से ज्यादातर लोग पहली कला में माहिर हैं। आप चाहे जूते [संगीत] बनाते हो, वेल्डिंग करते हो या किसी दुकान पर
बैठते हो। आप अपने काम के पक्के [संगीत] उस्ताद हैं। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि आपकी इस मेहनत की कमाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा आपके अपने ही हाथों से रोज लीक हो रहा है? इसे कहते [संगीत] हैं द वेल्थ लीक। एक ऐसा छुपा हुआ छेद जिसके बारे में कोई स्कूल या कॉलेज नहीं सिखाता। आज हम इस वीडियो में किसी रटी रटाई किताब की बात नहीं करेंगे बल्कि उस कड़वे सच को सामने लाएंगे जो आपकी जेब को चुपके से खाली कर रहा है। वीडियो के अंत [संगीत] तक आप खुद अपनी कमियों को पकड़ लेंगे।
चलिए एक सच्ची कहानी से समझते हैं। हमारी एक [संगीत] भाई हैं सतीश जो लोहे की वेल्डिंग का काम करते हैं। उनके हाथ में ऐसा जादू है कि वह साधारण लोहे को भी एक खूबसूरत गेट या खिड़की में बदल देते हैं। सतीश भाई हर महीने अच्छा खासा कमा लेते हैं। उनका काम कभी मंदा नहीं होता क्योंकि समाज को उनकी स्किल की हमेशा जरूरत रहती है। लोग सोचते हैं कि सतीश बहुत पैसे बना रहा है। अब तो यह अमीर हो जाएगा। खुद सतीश को भी यही लगता था कि जब तक हाथ चलते रहेंगे, पैसा आता रहेगा और
जिंदगी शानदार चलेगी। लेकिन एक दिन अचानक उनके पैर में चोट लग गई और डॉक्टर ने उन्हें 2 महीने का कड़ा आराम बता दिया। अब दुकान बंद [संगीत] थी यानी वेल्डिंग की मशीन शांत थी। पहले हफ्ते तो सब ठीक रहा। लेकिन दूसरे हफ्ते से सतीश के माथे पर चिंता की लकीरें आने लगी। घर के खर्च, बच्चों की स्कूल फीस और रोज का राशन वैसी ही रफ्तार से आ रहे [संगीत] थे। लेकिन जो पैसा रोज दुकान से घर आता था वह पूरी तरह बंद हो चुका था। सतीश ने महसूस किया कि पिछले 5 सालों में उन्होंने जितनी
भी मोटी [संगीत] कमाई की थी वो सब कहां गायब हो गई। वो पैसा किसी बड़े एसेट में नहीं बदला था बल्कि छोटी-छोटी [संगीत] गैर जरूरी चीजों और दिखावे में बह गया था। यह सिर्फ सतीश की कहानी नहीं है। यह भारत के हर उस हुनरमंद इंसान की कहानी है [संगीत] जो सोचता है कि उसकी शारीरिक मेहनत हमेशा उसका साथ देगी। यहां पे आता है सबसे बड़ा कड़वा सच। [संगीत] कमानी बड़ी होना, अमीर होने की गारंटी नहीं है। हम लोग अक्सर सोचते हैं कि जिसकी दुकान अच्छी चल रही है या जिसका हुनर ज्यादा बिक रहा है वो
अमीर है। पर असलियत में अमीरी इस बात से तय नहीं होती कि आपके पास आ कितना रहा है। बल्कि इस बात से तय होती है कि आपके पास टिक कितना रहा है। 95% [संगीत] लोग इसी धोखे में जीते हैं। वे सोचते हैं कि अगले महीने ज्यादा काम कर लेंगे, ज्यादा आर्डर ले [संगीत] लेंगे तो सब ठीक हो जाएगा। लेकिन जैसे ही कमाई बढ़ती है उनके खर्चों के छेद और बड़े हो जाते हैं। पानी चाहे जितनी रफ्तार से घड़े में डालो अगर नीचे छेद है तो घड़ा कभी नहीं भरेगा। अब आपको एक [संगीत] ऐसी बात बताता
हूं जो आपको चौंका देगी। कई बार एक छोटा काम करने वाला इंसान जैसे हमारे पड़ोस के हरी काका जो सिर्फ सब्जी की रेडी लगाते हैं। वो उस इंसान से ज्यादा आर्थिक रूप से सुरक्षित होते हैं जो बड़ी दुकान चलाकर लाखों कमा रहा है। क्यों? क्योंकि हरी काका को पैसे की सही कीमत और उसकी साइकोलॉजी पता है। वे दिखावे के जाल में नहीं फंसते। 95% लोग अपनी मेहनत का पैसा उन चीजों को खरीदने में बर्बाद कर देते हैं जिनकी उन्हें सच में जरूरत नहीं होती। सिर्फ उन लोगों को प्रभावित करने के लिए जिन्हें [संगीत] वे पसंद
भी नहीं करते। क्या आपने भी कभी ऐसा कोई खर्च किया है? नीचे कमेंट में [संगीत] ईमानदारी से बताइए। आइए एक अनोखी तुलना करते हैं। मान लीजिए दो [संगीत] भाई हैं अमित और विकास। अमित कपड़े सीने का काम सीखकर अपनी दुकान खोलता [संगीत] है और अच्छी कमाई करते ही सबसे पहले एक महंगी चमचमाती बाइक खरीदता है जिसकी उसे असल में उतनी जरूरत नहीं थी। वहीं विकास जो राजमस्त्री का काम करता है वो हर महीने अपनी कमाई से सोने का एक छोटा सिक्का या जमीन का एक छोटा टुकड़ा खरीदने में पैसा लगाता है। 5 साल बाद अमित
[संगीत] की बाइक की कीमत आधी रह जाती है और उसका मेंटेनेंस खर्च बढ़ जाता है। जबकि विकास का वो छोटा [संगीत] सा निवेश एक बड़ी ताकत बन जाता है। बाइक एक लायबिलिटी थी और जमीन या सोना एक एसेट था। 95% लोग लायबिलिटी को ही एसेट समझ बैठते हैं। इसको एक बहुत मजेदार उदाहरण से समझिए। हमारी कमाई एक बाल्टी में पानी भरने जैसी है। 95% [संगीत] लोग अपनी बाल्टी के नीचे एक छलनी लगाकर रखते हैं। वे जितनी मेहनत से पानी भरते हैं, उतनी ही तेजी से वह नीचे से गिर जाता है। वहीं 5% [संगीत] लोग सबसे
पहले अपनी बाल्टी के तले को मजबूत करते हैं। वे जानते हैं कि अगर बाल्टी लीक नहीं होगी, तो धीरे-धीरे ही सही एक दिन बाल्टी पूरी भर जाएगी। पैसा बचाना और उसे सही जगह रखना [संगीत] कोई कंजूसी नहीं है बल्कि अपनी मेहनत का सम्मान करना है। जब आप दिन [संगीत] में 12 घंटे काम करके पैसा कमाते हैं तो उसे बिना सोचे समझे उड़ा देना अपनी ही रातों की नींद को बर्बाद करने [संगीत] जैसा है। तो यह 5% लोग ऐसा क्या सोचते हैं जो बाकी लोग नहीं सोच पाते? [संगीत] इनका सबसे बड़ा माइंडसेट शिफ्ट यह होता है
कि वे पैसे को खर्च करने की ताकत के रूप में नहीं देखते बल्कि समय और आजादी खरीदने के [संगीत] टूल के रूप में देखते हैं। जब एक आम इंसान के पास पैसे आते हैं तो वह सोचता है कि मैं इससे क्या खरीद सकता हूं। लेकिन जब एक समझदार [संगीत] 5% वाले इंसान के पास पैसा आता है तो वह सोचता है कि मैं इस पैसे को कहां लगाऊं ताकि [संगीत] मुझे भविष्य में काम ना करना पड़े और यह पैसा मेरे लिए कमा कर दे। वे जानते हैं कि असली अमीरी [संगीत] महंगे कपड़ों या बड़ी गाड़ियों में
नहीं बल्कि मन की शांति में होती है। सबसे बड़ी भूल तब होती है [संगीत] जब हम दूसरों की देखादेखी करने लगते हैं। पड़ोस वाले शर्मा जी ने नया टीवी लिया तो हम भी कर्ज लेकर या अपनी जमा पूंजी निकालकर बड़ा टीवी [संगीत] ले आते हैं। हम यह नहीं देखते कि शर्मा जी की वित्तीय स्थिति क्या है। इस अंधी दौड़ [संगीत] में सबसे ज्यादा नुकसान हमारे हुनरमंद भाइयों का होता है। वे अपनी कला से जो पूंजी खड़ी कर सकते थे, उसे समाज के डर [संगीत] से दूसरों को दिखाने में गवा देते हैं। याद रखिए लोग आपके
महंगे [संगीत] फोन को देखकर दो दिन तारीफ करेंगे। लेकिन जब संकट आएगा तो [संगीत] कोई हाथ थामने नहीं आएगा। आपकी असली ताकत आपकी वह बचत होगी जो आपने चुपचाप जोड़ी है। अब एक ऐसी बात जो सुनने में अजीब लगेगी। ज्यादा कमाई होना कई बार ज्यादा खतरनाक साबित होता है। जब किसी इंसान की कमाई अचानक बढ़ती है। मान लीजिए किसी प्लंबर भाई को एक बहुत बड़ा कॉन्ट्रैक्ट मिल गया [संगीत] और मोटी रकम आई। अगर उसके पास फाइनेंशियल डिसिप्लिन नहीं है तो वह तुरंत अपने लाइफ स्टाइल को बढ़ा देगा। वो बड़ा घर किराए पर ले लेगा। महंगे
शौक पाल लेगा। लेकिन हुनर और बाजार का नियम है कि काम हमेशा एक जैसा नहीं रहता। जब काम [संगीत] थोड़ा धीमा होगा तब बढ़े हुए खर्चों को संभालना नामुमकिन हो जाएगा। इसलिए कमाई बढ़ने [संगीत] पर अपने खर्चों को तुरंत मत बढ़ाइए बल्कि अपनी सेविंग्स की रफ्तार को दो गुना कर दीजिए। मैंने अपने आसपास के परिवारों में [संगीत] एक बहुत ही व्यावहारिक बात देखी है। जिस घर में महिलाएं घर के बजट को संभालती हैं और छोटे-छोटे पैसों का हिसाब रखती हैं, वहां मुसीबत के समय हमेशा एक बड़ा फंड तैयार मिलता है। पैसा कभी भी एक दिन
में नहीं बनता। रोज की चाय के पैसे [संगीत] बचाना, फिजूल के रिचार्ज से बचना और बाजार जाते समय लिस्ट बनाकर जाना यह बहुत छोटी बातें लगती हैं। लेकिन यही वो छोटे-छोटे [संगीत] कदम है जो आपकी बाल्टी के छेदों को बंद करते हैं। जो इंसान एक एक रुपए की कदर नहीं कर सकता उसे कुबेर का खजाना भी [संगीत] मिल जाए तो वह उसे खाली कर देगा। इसके पीछे की छिपी हुई साइकोलॉजी को समझिए। जब हम बहुत मेहनत का काम करते हैं जैसे धूप में मकान बनाना या भारी वेल्डिंग करना तो हमारा दिमाग थकावट के बाद इनाम
मांगता है। हमें लगता है कि मैंने आज इतनी कठिन मेहनत की है [संगीत] तो मैं कुछ अच्छा खाने या कुछ नया खरीदने का हकदार हूं। इस थकावट वाली [संगीत] मानसिकता का फायदा बड़ी-बड़ी कंपनियां उठाती हैं। वे आपको ऐसे विज्ञापन दिखाती [संगीत] हैं जो आपकी इस भावना को ट्रिगर करते हैं। 5% लोग इस मानसिक खेल को [संगीत] समझ जाते हैं। वे अपनी थकावट का इलाज पैसे खर्च करके नहीं बल्कि आराम करके और परिवार के साथ [संगीत] समय बिताकर करते हैं। एक बात हमेशा याद रखिए आपका हुनर ही आपकी सबसे बड़ी पूंजी है। चाहे आप कपड़े सिलते
हो, जूते बनाते हो या कोई भी छोटा बड़ा काम करते हो, आप किसी से कम नहीं है। कौशल की ताकत सबसे [संगीत] बड़ी होती है क्योंकि इसे आपसे कोई छीन नहीं सकता। लेकिन इस पूंजी का सही [संगीत] इस्तेमाल तब तक नहीं होगा जब तक आप इसे सिर्फ रोज की रोटी का जरिया मानेंगे। इसे एक सीढ़ी की तरह देखिए। आज जो हुनर आपको कमा कर दे रहा है उसी की बदौलत आपको कल के लिए एक सुरक्षित भविष्य का निर्माण करना है। 5% लोग अपने हुनर को एक बिजनेस की तरह देखते हैं ना कि सिर्फ एक रोज
के काम की तरह। तो अब सवाल उठता है कि भाई हम इस दलदल से बाहर कैसे निकले? हम कैसे अपनी बाल्टी के सारे [संगीत] छेद बंद करके उस 5% वाले क्लब में शामिल हो। इसके लिए मैं आपको कोई बहुत कठिन फार्मूला नहीं बताऊंगा। हम तीन बहुत ही व्यावहारिक और आसान कदमों की [संगीत] बात करेंगे। जिन्हें भारत का कोई भी इंसान चाहे वो कितना भी कमाता हो आज से ही शुरू कर सकता है। इन तीन स्टेप्स को अगर आपने अगले [संगीत] 6 महीने तक पूरी ईमानदारी से फॉलो कर लिया तो मैं गारंटी देता हूं कि आपकी
आर्थिक [संगीत] स्थिति पूरी तरह बदल जाएगी और आपके मन से पैसे का डर हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। पहला कदम है कमाई [संगीत] का पहला हिस्सा आपका अपना है। जैसे ही आपके पास आपके काम का पैसा आए चाहे वह [संगीत] रोज का हो या हफ्ते का उसका सीधा 20% हिस्सा अलग निकालकर एक ऐसी जगह रख दीजिए जहां से आप उसे आसानी से निकाल ना सके। इसे भूल जाइए कि यह पैसा आपके पास था। ज्यादातर लोग क्या करते हैं? वे पहले सब जगह खर्च करते हैं और [संगीत] जो बचता है उसे बचाने की सोचते हैं।
पर सच तो यह है कि कभी कुछ बचता ही नहीं। इसलिए नियम बदलिए। [संगीत] पहले बचत फिर खर्च। यह 20% आपकी मेहनत का वो टैक्स है जो आप अपने खुद के सुनहरे भविष्य को दे रहे हैं। दूसरा कदम है आपातकालीन [संगीत] कवच या इमरजेंसी फंड बनाना। जैसा कि हमने सतीश भाई की कहानी में देखा बीमारी या चोट कभी पूछ कर नहीं आती। आपके पास [संगीत] कम से कम इतना पैसा अलग होना चाहिए जिससे आपके घर का खर्च 3 से 6 महीने [संगीत] तक बिना किसी कमाई के आराम से चल सके। इस पैसे को कभी भी
किसी रिस्की जगह या शेयर मार्केट में मत लगाइए। इसे बिल्कुल सुरक्षित बैंक अकाउंट या घर के किसी सुरक्षित कोने में रखिए। जब आपके पास यह कवच होता है तो आपका आत्मविश्वास [संगीत] बढ़ जाता है और आप किसी भी संकट का सामना बिना किसी के सामने हाथ [संगीत] फैलाए कर सकते हैं। तीसरा कदम है पैसे से पैसा बनाना सीखें। जब आपका इमरजेंसी फंड बन जाए [संगीत] तो बची हुई बचत को ऐसी जगह लगाएं जहां उसकी कीमत समय के साथ बढ़े। अगर आप बहुत ज्यादा [संगीत] पढ़े लिखे नहीं हैं या मार्केट की समझ नहीं है तो भी
आप सुरक्षित सरकारी [संगीत] योजनाओं, डाकघर की योजनाओं या सोने और जमीन जैसी पारंपरिक चीजों में धीरे-धीरे निवेश कर सकते हैं। मुख्य बात यह है कि पैसा आलसी बनकर बैंक में ना पड़ा [संगीत] रहे बल्कि उसे भी काम पर लगाइए। जैसे एक छोटा सा बीज सही देखभाल से एक दिन बड़ा पेड़ बन जाता है। वैसे ही आपका छोटा सा निवेश आपकी आने [संगीत] वाली पीढ़ी का सहारा बनता है। एक बहुत गहरी बात जो मैंने जीवन में सीखी है। असली दौलत हमेशा अदृश्य होती है। जो गाड़ियां, जो महंगे फोन और जो दिखावा लोग सड़कों पर करते हैं,
वो अक्सर उनकी अमीरी नहीं बल्कि उनके [संगीत] ऊपर चढ़े कर्ज की कहानी बयां करते हैं। असली अमीर इंसान वो है जिसके बैंक बैलेंस [संगीत] और इन्वेस्टमेंट उसे रात को सुकून की नींद देते हैं। उसे समाज को साबित करने की कोई जरूरत नहीं होती कि वह अमीर है। जब आप इस मानसिक आजादी को पा लेते हैं तो आप दुनिया के सबसे अमीर इंसान बन जाते हैं। अपनी कला [संगीत] पर भरोसा रखिए। अपनी मेहनत का सम्मान कीजिए और दिखावे की इस जाल को हमेशा के [संगीत] लिए तोड़ दीजिए। आज से ही यह कसम खाइए कि आप अपनी
बाल्टी के छेदों [संगीत] को बंद करेंगे। आपकी मेहनत का एक रुपया कीमती है। इसे किसी के दिखावे [संगीत] में या फालतू के खर्चों में बहने मत दीजिए। 5% वाले क्लब में आना कोई जादुई खेल नहीं है। यह सिर्फ आपके आज के फैसलों और आपके कड़े अनुशासन का नतीजा है। मुझे पूरा [संगीत] विश्वास है कि हमारी जितनी भी हुनरमंद भाई बहन इस वीडियो को देख रही हैं, वे आज से ही [संगीत] अपनी वित्तीय यात्रा को एक नई और सही दिशा देंगे। अपने हुनर को सिर्फ आजीविका मत बनाइए। इसे अपनी ताकत बनाइए। तो भाई आपको क्या लगता
है [संगीत] आपकी बाल्टी में सबसे बड़ा लीग कौन सा है? दिखावी का खर्च या बिना बजट की प्लानिंग? [संगीत] नीचे कमेंट बॉक्स में अपने भाई के साथ जरूर शेयर करें। मैं हर एक कमेंट का जवाब खुद दूंगा। और हां, आप इस जानकारी से भरी वीडियो को भारत के किस गांव या शहर से देख रही हैं। नीचे [संगीत] कमेंट में लिखना बिल्कुल मत भूलिएगा ताकि मुझे पता चले कि मेरा यह परिवार कहां-कहां तक फैला है। वीडियो अच्छा लगा हो तो लाइक। वीडियो अच्छा लगा हो तो लाइक करें और अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें। मिलते
हैं अगले एक और शानदार वीडियो में। तब तक के लिए अपना ख्याल रखिए। जय हिंद।