दोस्तों क्या आप जानते हो कि फुटबॉल के दिग्गज प्लेयर क्रिस्टियानो रोनाल्डो या फिर क्रिकेट के गॉड सचिन तेंदुलकर या फिर बास्केटबॉल के गॉडफादर माइकल जॉर्डन जैसे प्लेयर्स में एक बात कॉमन है और वो है राइट वैल्यूज और प्रिंसिपल्स को फॉलो करना सोचने वाली बात तो यह है कि आप भी कुछ वैल्यूज और प्रिंसिपल्स के बेसिस पे ही लाइफ जी रहे हो लेकिन आप उन प्लेयर्स की तरह अपनी फील्ड में ग्रेट क्यों नहीं बन पा रहे हो वो इसलिए क्योंकि आप जो वैल्यूज और प्रिंसिपल्स फॉलो कर रहे हो वो आपके हैं ही नहीं बल्कि वो तो
किसी दूसरे के हैं जाने-अनजाने में हमारे पेरेंट्स फ्रेंड्स और सोसाइटी ने हमारे माइंड में यूजलेस वैल्यूज और प्रिंसिपल्स को बचपन से इंस्टॉल करके रखा है और यही आपकी एवरेज लाइफ की वजह बन चुके हैं लेकिन ग्रेट लोग जानते हैं कि लाइफ कैसे वर्क करती है और इसलिए उनकी वैल्यूज लाइफ के प्रिंसिपल्स के साथ मैच करती हैं और उनको लाइफ में वोह सब मिलता है जो वह चाहते हैं अब आपके मन में भी यह बात जरूर आ रही होगी कि वो कौन से लाइफ प्रिंसिपल्स हैं जिन्हें फॉलो करने से कोई भी अपने फील्ड का बादशाह बन
सकता है तो आज आप इस वीडियो में एंड्रू मैथ्यूस की बुक हाउ लाइफ वर्क्स है जानोगे कि आखिर लाइफ कैसे काम करती है और वह सात लाइफ प्रिंसिपल्स भी देखोगे जो आपको अनस्टॉपेबल बना देंगे इन सात प्रिंसिपल्स में से सेकंड फिफ्थ और सेवंथ प्रिंसिपल एकदम खास है जिसको आप किसी भी कीमत पर मिस नहीं कर सकते यहां तक कि सेवंथ लाइफ प्रिंसिपल आपके सबसे बड़े मिथ को तोड़ेगा इसके साथ ही वीडियो के एंड में आप जानोगे कि सारे प्रिंसिपल्स में एक चीज कॉमन है जिके बिना यह सब प्रिंसिपल्स पानी कम चाय है तो चलो एक-एक
करके सेवन लाइफ प्रिंसिपल्स को देखते हैं एक लाइफ कैन नॉट बी कंट्रोल्ड सो लेट लाइफ प्ले इट्स गेम अब देखो दुनिया में सिर्फ दो टाइप्स के लोग रहते हैं पहले वो जिन्हें दूसरे कंट्रोल करते हैं और दूसरे वोह जो अपनी लाइफ का कंट्रोल अपने हाथों में रख रख रहे होते हैं और अपनी लाइफ को अपने अकॉर्डिंग जीते हैं पहली कैटेगरी वाले लोग तो वैसे भी फेल होते रहते हैं लेकिन कभी-कभी दूसरी कैटेगरी वाले लोग भी फेल हो जाते हैं जैसे एक बार चाणक्य बुरी तरह से फेल हुए थे दरअसल बात यह थी कि चाणक्य और
उनके स्टूडेंट चंद्रगुप्त मौर्य ने मिलकर सिकंदर को हरा दिया था और उसके बाद जब वह मगध जो कि आज का पटना है इस पर फूल प्रूफ प्लान के साथ अटैक किया था तो उन्हें हार का सामना करना पड़ा था चाणक्य भले ही पावरफुल थे लेकिन लाइफ के इस प्रिंसिपल को भूल गए थे कि लाइफ को पूरी तरह से कंट्रोल नहीं किया जा सकता आप अपने एफर्ट्स कर सकते हो लेकिन रिजल्ट आना ना आना आपके हाथों में नहीं होता और लाइफ अपने अकॉर्डिंग रिजल्ट देती है गीता में भी यही कहा गया है कि कर्म करो फल
की चिंता मत करो इस लाइफ प्रिंसिपल को हाईलाइट करने के लिए ऑथर बुक में जैक का एग्जांपल देते हैं जैक एक इंजीनियर था और अगले महीने कैसे भी करके उसे रूम चेंज करना था वरना वह बेघर हो जाता कम समय होने की वजह से वह काफी प्रेशर में आ गया था उसने बेसबर होकर रूम ऑफि एजेंसी से कांटेक्ट किया लेकिन बात नहीं बनी कुछ समय तक एफर्ट्स करने के बाद उसने रिजल्ट लाइफ पर छोड़ दिया और खुद को सिचुएशन से डिटैच कर लिया कुछ दिनों बाद जैक के अपार्टमेंट के पास ही तीन खाली अपार्टमेंट्स मिल
गए और मंथ एंड से पहले उसने शिफ्ट कर लिया यह स्टोरी भी यही कहती है कि आप राइट एफर्ट्स करो और बाकी लाइफ प छोड़ दो और फिर लाइफ आपकी मदद करेगी जैसे कि लाइफ ने जैक के साथ किया दो रेजिस्टेंस इज लाइव्स एनिमी एंड एक्सेप्टेंस इज इट्स फ्रेंड ये काफी इंपोर्टेंट प्रिंसिपल है जिसे आपको जरूर से समझकर अप्लाई करना है देखो बचपन में आप स्कूल जाते थे बड़े होने के बाद दूसरे शहरों में या देशों में कॉलेज में और यूनिवर्सिटी में पढ़ने गए और फाइनली जॉब के सिलसिले में आप बड़ी सिटीज में शिफ्ट भी
हुए राइट इन सब में एक चीज कॉमन है जो है अपने कंफर्ट जन से बाहर निकलना यहां तक तो सब ठीक है लेकिन असल प्रॉब्लम तब शुरू होती है जब आप अपनी जॉब में कंफर्टेबल हो जाते हो आप अपनी जॉब को कंफर्ट जन बना लेते हो और पूरी तरह से जॉब में डिपेंडेंट हो जाते हो और अपने आप को एक बड़े रिस्क में डाल देते हो अब आप लाइफ में कोई भी मेजर चेंज को रेजिस्ट करते हो जो कि लाइफ के प्रिंसिपल चेंजेज कांस्टेंट के खिलाफ है और फिर लाइफ आपके अगेंस्ट काम करने लगती है
इस रेजिस्टिव मेंटालिटी की वजह से ना आपकी पर्सनल ग्रोथ होती है ना ही कोई बड़ी प्रोफेशनल ग्रोथ होती है तो सिर्फ इंक्रीमेंटल ग्रोथ यानी कि 5 10 पर लेकिन वहीं कुछ लोग अपने लाइफ में बड़े हो जाने के बावजूद भी चेंज को एक्सेप्ट करते हैं और इसी वजह से लाइफ भी उनको सपोर्ट करती है और वो अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में एक्सपो एशियल ग्रोथ करते हैं यानी कि 5x 10x ग्रोथ बुक में ऑथर इस प्रिंसिपल को हाईलाइट करते हुए लैला का एग्जांपल देते हैं लैला को बिजनेस मीटिंग के लिए हांगकांग जाना था इसलिए उसने
टेक्सास से दोहा फिर दोहा से हांगकांग जाने के लिए टिकट बुक किया एयरपोर्ट प 3 घंटे वेट करने के बाद अचानक से अनाउंसमेंट होता है कि दोहा जाने वाली फ्लाइट कैंसिल हो गई है यह सुनके लेला के तो होश ही उड़ गए उसने एयरलाइंस वालों को कोसना शुरू किया और उतने में ही उसका पर्स भी खो गया यह सब बुरे हादसों के बाद उसका रोने का मन होने लगा लेकिन जैसे-तैसे उसने अपने आप को संभाला और अपने आप को कूल किया इसके कुछ देर बाद ही लैला को एयरपोर्ट पर उसकी एक पुरानी दोस्त मिल जाती
है जिसने उसका खोया हुआ बैग भी ढूंढ दिया और लैला के लिए टेक्सास से हांगकांग के डायरेक्ट फ्लाइट भी बुक करा दी तो देखा आपने जब लेला रेजिस्ट कर रही थी तब उसकी लाइफ में बुरा हो रहा था लेकिन जैसे ही उसने सिचुएशन को एक्सेप्ट किया वैसे ही सब ठीक होने लगा एक बात हमेशा याद रखो रेजिस्टेंस इज लॉक टू सक्सेस वाइल एक्सेप्टेंस इज की टू सक्सेस सो ऑलवेज चूज की ओवरलॉक तीन लाइफ डज गुड टू दोज हु फोकस ऑन पॉजिटिव एस्पेक्ट्स वेर द फोकस गोज द एनर्जी फ्लोज एंड द रिजल्ट शोज ये कोर्ड हाईलाइट
करता है कि आपका फोकस जिस चीज में होगा आपको वही मिलेगी इसलिए कहते हैं ना कि नजरिया बदलना है तो नजर बदलो देखो एक नेगेटिव इंसान आधे भरे ग्लास के खाली पार्ट पे फोकस करता है वहीं एक पॉजिटिव इंसान ग्लास के भरे हुए पार्ट पे फोकस करता है दूसरे शब्दों में नेगेटिव आदमी दूसरों में कमियां ही देखता है लेकिन पॉजिटिव आदमी दूसरों की स्ट्रेंथ भी देखता है ऑथर इस प्रिंसिपल को हाईलाइट करते हुए ट्रेंट और जन का एग्जांपल देते हैं ट्रेंट एक नेगेटिव आदमी था उसकी इस नेगेटिविटी की वजह से एक दिन उसका जॉब चले
गया और फिर दूसरा जॉब ना मिलने से उसकी पूरी सेविंग्स भी खत्म हो गई कुछ दिनों बाद उसका कार एक्सीडेंट भी हो गया और वह करीब एक महीने के लिए हॉस्पिटलाइज्ड हो गया लेकिन जैन एक पॉजिटिव लड़की थी उसने 5 सालों तक बेस्ट लाइफ पार्टनर खोजा लेकिन अनफॉर्चूनेटली उसे कोई नहीं मिला जैसे कि वो पॉजिटिव लड़की थी तो उसने फ्रस्ट्रेट होना छोड़कर लाइफ पर डिसीजन छोड़ दिया जैसे ही जैन ने यह किया उसके कुछ दिनों बाद उसे काफी अच्छे-अच्छे लड़कों के ऑफर आने लग और उनमें से बेस्ट को जन ने अपने लाइफ पार्टनर के रूप
में एक्सेप्ट कर लिया देखो पॉजिटिव एटीट्यूड रखने से आपको चीजों के पीछे भागने की कोई जरूरत नहीं होती बल्कि चीजें आपके पीछे आएंगी सिर्फ आपको अपना होमवर्क यानी कि एफर्ट्स करना है बाकी सब लाइफ प छोड़ना है चार लाइफ ऑफर्स यू व्हाट यू फील अब लॉ ऑफ अट्रैक्शन के बारे में तो जानते ही होंगे लेकिन क्या आप जानते हो कि लॉ ऑफ अट्रैक्शन काम कैसे करता है देखो सबसे पहले हमारे अंदर थॉट्स आते हैं और फिर वो हमारे अंदर इमोशंस के साथ मिक्स हो जाते हैं तब वो हमारी फीलिंग्लेस हमें वो देती है जो हम
फील करते हैं एक्चुअली हमारी फीलिंग्लेस है जो यूनिवर्स में सिग्नल भेजते हैं और यूनिवर्स हमें उस सिमिलर वाइब्रेशन के लोग या सिचुएशंस हमारी जिंदगी में भेजता है यानी कि जब हमारी फीलिंग डिप्रेसिंग रहती है तब यूनिवर्स हमारी लाइफ में नेगेटिव लोग और सिचुएशंस को अट्रैक्ट करता है ऑथर मारिया के एग्जांपल से इस प्रिंसिपल को फोकस में लाते हैं एक दिन की बात है मारिया का दिन शुरू से ही खराब चल रहा था जैसे कि जब वह एयरपोर्ट पहुंची तो उसे लगेज चेकिंग में दिक्कत हुई सिक्योरिटी लाइन से गुजरने से पहले उसे अपना काफी सामान फेंकना
पड़ा टिकट चेकिंग के दौरान भी उसे मुश्किलों का सामना करना पड़ा इतना ही नहीं प्लेन में वो जो बैग लेकर चढ़ी थी उसे रखने के लिए प्लेन में कंपार्टमेंट ही नहीं था पूरे सफर में वो बैग अपनी गोद में लेकर बैठी रही साथ ही अंदर ही अंदर मारिया इन इंसीडेंट की वजह से नेगेटिव फील कर रही थी और शायद इसीलिए एयरपोर्ट पर लैंड होने के बाद भी उसके साथ बुरा होना बंद नहीं हुआ एयरपोर्ट में एक आदमी के हाथ से कॉफी का गिलास मारिया की नई ड्रेस पर गिर गया और उसका सब्र का बान टूट
गया और चिल्लाकर बोली मेरे साथ ही बुरा क्यों होता है दरअसल उसके साथ एक के बाद एक बुरा होने के पीछे उसकी बुरी फीलिंग्लेस उसकी लाइफ में बुरी सिचुएशंस और लोग अट्रैक्ट हो रहे थे तो सवाल यह है कि पॉजिटिव फील कैसे करें बेसिकली आपको अपने थॉट्स के साथ लव और काइंड जैसे पॉजिटिव इमोशंस को मिक्स करना है ताकि आप पॉजिटिव फील करें और बाय चांस अगर आपके थॉट्स के साथ नेगेटिव इमोशन मिक्स भी हो जाते हैं तो फिर आप रिएक्ट नहीं रिस्पांस करो और उस समय पर शांत रहो ऐसे ही आप नेगेटिव फीलिंग्लेस विद
जनरल गोल्स ओवर स्ट्रिक्टली स्पेसिफिक गोल्स यह लाइफ प्रिंसिपल कंपैरेटिव इंपोर्टेंट इसलिए भी है क्योंकि यह आपको स्ट्रेसफुल होने से बचाता है आप जान जानते हो कि हर साल लाखों बच्चे आईआईटी में जाने के लिए बहुत मेहनत करते हैं और जो स्टूडेंट आईआईटी में जाने से चूक जाते हैं उनमें से कुछ सुसाइड तक कर लेते हैं इसके पीछे एक बड़ा रीजन है स्ट्रिक्टली स्पेसिफाइड गोल इन स्टूडेंट के पास कोई प्लान भी होता ही नहीं है बात बस इन स्टूडेंट्स की नहीं है हम में से ज्यादातर लोग कहीं ना कहीं यह गलती करते हैं देखो स्पेसिफिक गोल
रखना बुरी बात नहीं है लेकिन एगजैक्टली वही चाहिए ना 1 इंच कम ना 1 इंच ज्यादा वाला एटीट्यूड रखना खतरनाक है जो लोगों को डिप्रेसो रखा जा सकता है यानी कि गोल इन सम रेंज इसको हम ऑथर के एग्जांपल से समझते हैं सै का एक स्पेसिफिक गोल था जो कि था एक रेड [संगीत] एक साल बाद कार्ली ने ब्लैक लंबर गिनी खरीद के अपना गोल अचीव कर लिया अब कार्ली अपने कार में रिलैक्स होकर काम पर जाती और पहले से भी ज्यादा खुश रहने लगी आपकी खुशियों के लिए जरूरी है कि आप जनरल गोल सेट
करो और उम्मीद करो कि आपको लाइफ से बेहतर चीजें ही मिलेंगी छह लाइफ गिव्स यू सेम थिंग इफ यू डोंट चेंज अल्बर्ट आइंस्टाइन ने एक बार कहा था डूइंग द सेम थिंग एंड एक्सपेक्टिंग न्यू आउटकम इज फूलिश वैसे ही न्यूटन का फर्स्ट लॉ कहता है कि कोई भी चीज अपना डायरेक्शन तब तक नहीं बदलती जब तक उस पर कोई एक्सटर्नल फोर्स ना लगे यानी कि जो चीज रेस्ट पे है वो रेस्ट में रहेगी जो मोशन में है वो मोशन में रहेगी जब तक कोई एक्सटर्नल फोर्स ना लगाए आइंस्टाइन और न्यूटन की बात मैं आपको क्यों
बता रहा हूं वो इसलिए क्योंकि न्यूटन के फर्स्ट लॉ की तरह लाइफ भी आपको तब तक कोई नए रिजल्ट्स नहीं देती जब तक आप कोई नए एफर्ट्स या नया काम नहीं करते आइए जैमी और एलेक्स की कहानी देखते हैं जैमी की प्रॉब्लम यह थी कि व चाहे कुछ भी कर ले वो ऑफिस के लिए हमेशा लेट ही हो जाती थी भले ही वो काफी सुबह उठ जाती थी कभी वोह ट्रैफिक में फंस के लेट हो जाती थी कभी अपनी बीमार डेट की केर करने में वो लेट हो जाती थी वैसे ही एलेक्स जितनी कोशिश कर
ले वो कभी भी सेविंग्स नहीं कर पाता था कभी-कभी तो की इनकम महीने के एंड से पहले ही खत्म हो जाती थी और उसे बेसिक जरूरतों के लिए भी स्ट्रगल करना पड़ता था एलेक्स और जेमी के साथ बुरा होने का रीजन उनकी बुरी आदतें थी और वह अपनी बुरी आदतें हर दिन रिपीट कर रहे थे इससे लाइफ भी उन्हें सेम रिजल्ट दिया करती थी अगर आप भी कोई बैड हैबिट में बदल गए हो तो आप अपनी आदत बदलो रिजल्ट अपने आप चेंज हो जाएगा सात पर्पस ऑफ लाइफ इज नॉट सक्सेस बट हैप्पीनेस यह प्रिंसिपल लाइफ
के बड़े मिथ को बस्ट करता है हम सबको बचपन से सिखाया गया है कि सक्सेस अचीव करने के लिए स्कूल और कॉलेज में स्टडी हार्ड करो अपने जॉब में वर्क हार्ड करो हम एक्चुअली हार्ड वर्क करते भी हैं और एक के बाद एक गोल सेट करते हैं और उन्हें अचीव भी करते हैं और कई सालों तक रॉबर्ट की तरह हार्ड वर्क के बाद हम पैसे और पावर अचीव करते हैं लेकिन लाइफ में हैप्पीनेस नहीं रह जाती एक्चुअली क्या है ना कि पैसे और पावर से सक्सेस तो आ जाती है लेकिन ये जरूरी नहीं है कि
हैप्पीनेस भी आ ही जाए और लाइफ का पर्पस सक्सेस नहीं हैप्पीनेस अचीव करना है भले ही से आपको सक्सेस से हैप्पीनेस की फीलिंग आए लेकिन वो टेंपररी है लेकिन जब आप हैप्पी रहते हो तो फिर सक्सेस आपको ढूंढते हुए आ जाती है वो इसलिए क्योंकि हैप्पीनेस का मतलब है गुड फीलिंग और लॉ ऑफ अट्रैक्शन की वजह से आप अपने लाइफ में गुड पीपल और गुड सिचुएशंस को अट्रैक्ट करते हो और यही लोग और सिचुएशन आपको सक्सेसफुल बनाते हैं तो यह प्रूव हो गया कि हैप्पीनेस से परमानेंट सक्सेस आती है और लाइफ का पर्पस भी हैप्पीनेस
ही है सक्सेस नहीं सक्सेस तो एक बाय प्रोडक्ट है तो आपने इन सात लाइफ प्रिंसिपल से सीखा कि जिंदगी कैसे काम करती है और ऐसा क्या करना चाहिए कि जिंदगी आपको लात नहीं मारे बल्कि आपको गले लगाए फाइनली आपने इन प्रिंसिपल्स में एक बात को नोटिस किया होगा कि लाइफ भी उसी का साथ देती है जो मेहनत करता है और फिर रिजल्ट लाइफ पर छोड़ दे है