मेरा नाम ईशा है मैं दिल्ली की रहने वाली हूं अभी मैं 20 साल की हूं मेरा भाई मुझसे अपनी ख्वाहिश पूरी करने का सपना देखता था उसकी नजर हमेशा मुझ पर होती थी उसे बस मौका मिलने का इंतजार रहता जब भी मैं मां से बोलती तो वह कहती नहीं तेरा भाई ऐसा नहीं है वह ऐसा गिरा हुआ काम नहीं कर सकता मगर एक दिन जब मैं घर पर अकेली थी तब मेरा भाई मुझे रूम के अंदर बोला लिया और फिर उसने मेरे साथ ल लगातार दो घंटे तक कहा जाता है कि जिंदगी एक जुआ है
जो खेलने वाले को भी नहीं पता होता है कि किसकी हार होगी और किसकी जीत और कुछ ऐसा कि मेरे साथ भी हो रहा था दुनिया को लगता था कि मैं बहुत खुश हूं और सभी मेरी खुशी से जला करते थे लेकिन वक्त गुजरता गया और वक्त ने मुझे मेरी बदकिस्मती दिखा गया आज शायद मेरे मुंह पर वह थप्पड़ लग गया था जिसके बाद दुनिया को भी मालूम हो गया और जो मुझसे जलते हैं शायद उनको भी जवाब मिल गया दरवाजे की घंटी लगातार बज रही थी और मैं यह सोचकर सोचकर परेशान हो रही थी
कि मां घर पर नहीं है तो मैं कैसे दरवाजा खोलूं क्योंकि अगर मैं दरवाजे के पास जाकर पूछती तो फिर मुझे दरवाजा खोलना पड़ता क्योंकि दरवाजे पर तो मेरा भाई ही होगा घर में मां नहीं है मैं भाई को घर में नहीं लेना चाहती थी शायद मैं सबसे बदकिस्मत लड़की हूं जो अपने भाई के डर के खौफ में रहती थी लेकिन दिल ही दिल में ऊपर वाले का नाम लेकर दरवाजा खोला और दरवाजे पर मेरा भाई ही था उसने मुझसे पूछा कि दरवाजा खोलने में इतनी देर क्यों हुई मैं उसको क्या जवाब देती मैं दरवाजा
बंद करके उसके पीछे पीछे सर झुकाए चल रही थी और दिल ही दिल में प्रार्थना कर रही थी कि मां के बारे में ना पूछे मगर सारी प्रार्थनाएं ऐसे ही अचानक स्वीकार नहीं होती तभी मेरे भाई ने पूछा कि मां कहां है मां से बोलो कि वह मेरे लिए खाना लेकर आए मैंने कोई जवाब नहीं दिया और किचन की तरफ चली गई वह रोज की तरह अपने टेबल पर बैठ गए फिर मैंने खाना लाकर उसके सामने रखा दिया मेरे भाई ने पूछा कि तुम खाना क्यों लाई हो मैं उनके सामने ज्यादा देर रुकना नहीं चाहती
थी इसलिए उनके सामने खाना रखते ही अपने कमरे में चली गई और दरवाजा बंद कर लिया मैं बहुत डरी हुई थी और दिल ही दिल में सोच रही थी कि वह खाना खाकर जल्दी से चले जाएं या फिर मान आ जाए लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ और कुछ देर बाद ही मुझे दरवाजा खोलने की आवाज सुनाई दी जब मैंने पलट कर देखा तो मेरे पांव से जमीन खिसक गई उसके बाद मुझे कुछ होश भी नहीं रहा मेरी मां बहुत धार्मिक महिला थी वह अपने माता-पिता की इकलौती औलाद थी इसलिए वह बहुत लाड़ प्यार में
पली थी और शादी के बाद जब मैं पैदा हुई तो मेरे पैदा होने के 5 साल बाद में मेरे पापा की मौत हो गई पापा के कोई रिश्तेदार पापा से रिश्ता नहीं रखते क्योंकि मेरे पापा ने मेरी मां से अपनी पसंद से शादी की थी इसलिए मेरी मां अपने मां-बाप के पास वापस आ गई मैं अपनी मामी के घर में ही पली थी लेकिन जब 8 साल की हुई तो मेरी मां की एक आदमी से शादी करवा दी क्योंकि मेरे मामा भी इस दुनिया में नहीं थे और मेरी मामी की भी तबीयत ठीक नहीं रहती
थी उस आदमी से शादी करवाने का मकसद यह था कि वह समझदार और अच्छा इंसान होगा वह मुझे अपनी बेटी समझकर पाले और मेरा ख्याल रखे मामी ने जैसा सोचा था वैसा ही हुआ मेरा यह सौतेला बाप मेरा बहुत ख्याल रखता था मेरी हर छोटी-छोटी जरूरत का भी ख्याल रखता था क्योंकि मैं अपना असली बाप को तो खो चुकी थी इसलिए मेरे लिए सब कुछ मेरा यही बाप था वक्त तेजी से गुजरता जा रहा था और मेरे दिमाग में बाप के नाम पर इसी आदमी की शक्ल छाप चुकी थी लेकिन उस आदमी का एक जवान
बेटा भी था उस आदमी का बेटा यानी मेरा भाई अच्छा इंसान नहीं है क्योंकि मुझे उसकी बातें हमेशा ही झूठी लगती थी मैंने कभी मां से इन बातों का जिक्र नहीं किया था वैसे मेरे इस सौतेले भाई ने दसवीं कक्षा पढ़ा था लेकिन अंग्रेजी बहुत अच्छे से जानता था हमारे घर के एक तरफ आंगन में एक छोटा सा कमरा बना हुआ था जहां मेरा सौतेला भाई बच्चों को शाम के समय मैं ट्यूशन पढ़ाता है लेकिन उस कमरे में मुझे या मेरी मां को जाने की अनुमति नहीं थी बचपन में भी मेरा भाई मुझे वहां ले
जाकर नहीं पढ़ाता था बल्कि मुझे अलग कमरे में ले जाकर पढ़ाता था हमेशा उसका बहाना यह होता था कि उन बच्चों के साथ इसलिए नहीं पढ़ाता था कि सबके साथ इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दे सकूंगा मुझे और मेरी मां को तो वह उनकी मोहब्बत ही लगती थी लेकिन एक दिन जब मैं किसी काम के लिए कमरे में गई तो सारे बच्चों की छुट्टी हो गई और सारे बच्चे जा रहे थे लेकिन भाई ने अपने एक स्टूडेंट को रोक रखा था और वह रो रही थी और कह रही थी कि उसे घर जाना है लेकिन
मेरा भाई उसे जाने नहीं दे रहा था उस समय मैं उधर ही खड़े होकर देखने लगी ना जाने किस ताकत ने मुझे वहां छुपकर खड़े होने पर मजबूर किया मेरा भाई उसको पकड़कर दूसरे कमरे में लेकर चला गया मैं भी उसके पीछे-पीछे उस कमरे की ओर चली गई मगर वह कमरे का दरवाजा बंद कर दिया उस बच्चे की रोने की आवाज आ रही थी पर मेरा भाई उसे मनाने की कोशिश कर रहा था यह सब कुछ सुनकर मुझे विश्वास हो गया कि जो कुछ मेरी दोस्त कह रही थी वह शायद सच थी तुम्हारा भाई अच्छा
इंसान नहीं है मेरे दिल में अपने भाई के लिए नफरत होना शुरू हो गई लेकिन मैं यह नफरत जाहिर नहीं कर सकती थी क्योंकि सबके लिए तो मेरा भाई एक अच्छा था खास करके मेरी मां के लिए तो वह बहुत ही अच्छा था क्योंकि एक तो वह उनका बेटा था और दूसरा उन्होंने मुझे अपनी बहन की तरह समझ रहा था इसलिए मेरी मां अपने बेटे के खिलाफ एक शब्द भी नहीं सुन सकती थी लेकिन अब मैंने चुपके से अपने भाई पर नजर रखना शुरू कर दी अब वह हर दो-तीन दिन बाद किसी ना किसी बच्चे
को रोक कर रखता था लेकिन उसमें एक बात सोचने वाली थी छुट्टी के बाद वह हमेशा लड़कियों को ही रोकता था लड़कों को नहीं एक दिन लड़ की रोती हुई कमरे से बाहर निकली तो मेरा शक यकीन में बदल गया जो पहले हर वक्त अपने भाई के आगे पीछे फिरती रहती थी और उससे तरह-तरह की फरमाइश और प्यार करती रहती थी लेकिन उस दिन यह सब देखने के बाद मैंने उसके सामने जाना और उससे कोई फरमाइश करना भी छोड़ दिया था उसे तो शायद मेरे बदलते व्यवहार का एहसास नहीं हुआ था लेकिन मेरी मां को
इसका एहसास हो गया था क्योंकि मेरी मां तो उस भाई को अच्छा मा नती थी एक दिन उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या बात है जो तुम अपने भाई से सीधे मुंह बात भी नहीं करती हो मैंने दबे हुए शब्दों में मां को सारी बात बताई लेकिन वह तो मेरी बात पर यकीन करने को तैयार ही नहीं थी उन्होंने मुझे डांट दिया और कहा कि ईशा तुमने किसी की बात पर कैसे यकीन कर लिया और सुनी सुनाई बात पर यकीन करना गलत बात होती है अगर ऐसी कोई बात होती तो शायद तुम्हारे साथ भी तुम्हारा भाई
गलत करता क्योंकि वह तुम्हारा सगा भाई नहीं है लेकिन फिर भी वह तुम्हारा कितना ख्याल करता है तुम इससे अंदाजा लगाओ कि क्या वह गलत हो सकता है लेकिन वह मंजर भी मेरे सामने चल रहा था इसलिए मैं सच झूठ और गलत सही के बीच में झूल रही थी कभी मुझे लगता कि वह मेरा भाई नहीं है तो कभी लगता कि जो मेरी मां उसके बारे में कह रही है वह ठीक है समय ऐसे ही गुजरता रहा और मेरे दिल में भाई के लिए नफरत बनती रही जब की मां मुझे भाई से प्यार का सबक
घोलकर पिलाती रही अब मैं 22 साल की हो चुकी थी मेरी हाइट की वजह से मैं ज्यादा बड़ी लगती थी इसलिए मां अब मुझे हमेशा दुपट्टा लेने को बोलती थी वैसे भी मैं एक अच्छे घराने से संबंध रखती थी मेरा भाई मंदिर का पुजारी था और मेरी मां भी हाउसवाइफ थी मुझे भी तो उन्हीं की तरह चलना था लेकिन उसके साथ ही मेरी तकलीफें बढ़नी शुरू हो गई क्योंकि जैसे-जैसे मैं जवान हो रही थी वैसे-वैसे मेरे भाई की नजर मुझ पर लगी रहती और अब वह मुझे गंदी नजर से देखने लगा था उससे बचने के
लिए मैं घर में भी दुपट्टा ओड़ने लगी थी फिर उनके सामने जाने से भी डरने लगी थी मैं तो पहले ही बहुत कम उसके सामने जाती थी और बहुत कम बात भी करती थी लेकिन अब मैं तो ज्यादा इस चीज से सावधान हो गई थी कहा जाता है कि औरत नजर भी पहचानती है शायद मेरी मां ने भी अपने बेटे की नजर को पहचान ली थी इसलिए उन्होंने इस मामले में मुझसे कुछ भी नहीं कहा बल्कि वह खुद भी हर वक्त मेरे आसपास ही रहती थी और उनकी कोशिश होती थी कि मैं अपने भाई के
सामने ना जाए अब मां जो मुझे हर वक्त भाई के प्यार और उसकी इज्जत का पाठ पढ़ाती रहती थी अब वह खामोश रहने लगी थी वह मुझसे कुछ नहीं कहती थी क्योंकि शायद उन्हें यह एहसास हो गया था कि मैं जो भी कहती थी वह सब कुछ सच था या आदमी नजर कुछ आता है और हकीकत में कुछ और ही था कहने को तो वह मेरा भाई था लेकिन जब एक बहन अपने भाई के साथ ही खुद को सुरक्षित नहीं है तो फिर ऐसे रिश्ते की जरूरत ही क्या है अब मेरी मां को मेरी देखभाल
भी करनी पड़ती थी जिससे जिंदगी ऐसी ही गुजर रही थी अगर मां को मजबूरन कहीं जाना भी पड़ता तो वह ऐसे वक्त का इंतजार करती थी जब मेरा भाई घर में नहीं होता या फिर मुझे भी साथ लेकर जाती थी क्योंकि मोहल्ले में वह कहीं मुझे छोड़ नहीं सकती थी क्योंकि मोहल्ले वालों के लिए मेरा भाई एक देवता था और वह लोग यही कहते कि मैं खुशकिस्मत लड़की हूं जिसको ऐसा देवता भाई के रूप में मिला है लोगों की नजरों में वह एक सगे भाई से बढ़कर मोहब्बत करता था लेकिन मैं घर में किन मुश्किलों
का सामना करती थी यह बात कोई भी नहीं जानता था अब तो मैं रात में अपने कमरे को अंदर से बंद करके सोती थी और हल्के से से दरवाजे के खटक पर भी मेरी आंख खुल जाती थी मेरे रोंगटे खड़े हो जाते थे कभी आधी रात को मुझे पानी की जरूरत होती तो मैं कमरे से बाहर नहीं निकलती थी ऐसी जिंदगी गुजारने के बाद जब लोग यह कहते थे कि तुम तो बहुत खुश किस्मत हो मेरा दिल चाहता था कि मैं उनका मुंग तोड़ दूं लेकिन मैं ऐसा कुछ नहीं कर सकती थी इसलिए हमेशा खामोश
हो जाती थी और अब तो मेरी मां भी शायद अपने फैसले पर पछता रही थी क्योंकि मैंने देखा था कि हर गुजरते दिन के साथ मेरी मां पहले से ज्यादा खामोश रहने लगी थी और अक्सर मैं उसे छुपकर रोते हुए भी देखती थी शायद उसे लगता था कि उस वक्त गलत फैसला लिया है लेकिन अब जो फैसला ले लिया था उसको तो निभाना ही था एक दिन हम सबको इस बात पर यकीन की मोहर लग गई जब मोहल्ले की एक औरत ने आकर मेरी मां से शिकायत की और कहा कल से अपनी बेटी को मेरे
भाई के पास पढ़ने नहीं भेजेगी क्योंकि उसकी बेटी के साथ मेरे भाई ने गलत हरकत की थी मेरी मां ने उनको समझाने की कोशिश की और कहा ऐसा नहीं है है बच्ची ने कुछ गलत समझ लिया होगा लेकिन उन्होंने कहा कि अगर मेरी बेटी गलत भी समझी है तब भी मैं उसे नहीं भेजूंगी क्योंकि वह यहां पर सुरक्षित नहीं है मां को यह मालूम था कि वह औरत नहीं मानेगी इसलिए उन्होंने कह दिया कि वह मेरे भाई से बात करके रहेगी तभी मां ने दबे शब्दों में मेरे भाई से बात की वह रात हमारे लिए
कयामत की रात थी जैसे ही मेरी मां ने उससे बात की तभी मेरे भाई ने सफाई देने के बजाय मेरी मां पर हाथ उठा दिया मैं कमरे में छुपकर यह सब कुछ देख रही थी लेकिन मेरी मजबूरी थी कि मैं सामने नहीं आ सकती थी और ना ही मां को बचा सकती थी फिर यह सिलसिला हर दिन का हो गया औरतों को बात कहां पचती है फिर उस औरत ने शायद कुछ और औरतों को यह सब बता दि इस तरह बहुत सी औरतों ने अपनी बेटियों को मेरे भाई के पास भेजना बंद कर दिया इस
बात का गुस्सा मेरा भाई मेरी मां पर निकालता था जब भी कोई खबर मिलती कि आज एक और घर की लड़की उसके पास पढ़ने नहीं आएगी उस रात मेरे भाई को मेरी मां पर बहुत गुस्सा आता था और फिर वह मेरी मां को बहुत मारता था मां चुपचाप उसकी दरिंदगी को सहन कर लेती थी क्योंकि मां इसके अलावा कुछ भी नहीं कर सकती थी पर आज तक मेरे भाई ने मुझे कुछ नहीं कहा था लेकिन वह अब कभी भी मुझ पर हाथ उठा सकता था या फिर दूसरी लड़कियों की तरह मेरे साथ भी गलत सकता
था मजबूरी थी कि मुझे दुनिया के सामने उसे एक भाई की तरह ही रहना था क्योंकि बहुत से लोग यह बात नहीं जानते थे कि वह मेरा सगा भाई नहीं है लेकिन आज के दिन अचानक मां को पड़ोस में जाना पड़ क्योंकि पड़ोस वाली औरत बीमार हो गई और उनके घर में कोई नहीं होता था आज उन्होंने मां को आवाज दी तो मां तुरंत उनके घर चली गई शायद वह चलते हुए गिर गई थी जो कि काफी बूढ़ी थी हम सोचते थे कि उनका ख्याल रखें और यही वक्त था जब मेरे भाई खाना खाने के
लिए आना था मैं प्रार्थना कर रही थी कि मां जल्दी से वापस आ जाए और मां के आने से पहले भाई ना आए लेकिन ऐसा ना हुआ घंटी बजने की आवाज पर मैंने जाकर दरवाजा खोला तो मेरा भाई दरवाजे पर खड़ा था और उसके बाद जब मैं उसे खाना देकर अपने कमरे में गई फिर थोड़ी देर के बाद जब दरवाजे की खटखटाने की आवाज दोबारा सुनाई दी तो उस वक्त भी दरवाजे पर मेरा भाई ही खड़ा था उसे दरवाजे पर देखकर मुझे बहुत डर महसूस हुआ और उसकी सुनी हुई सारी बातें अब मुझे सच लगने
लगी थी और इतने सालों का खौफ मेरे सर पर सवार हो गया फिर इसके बाद मुझे कुछ होश ही नहीं रहा मुझे जब होश आया तो मेरी मां मेरे पास बैठी थी उनके चेहरे को देखकर लगा कि शायद उनको आने में देर हो गई फिर मैं उनसे कोई सवाल ना कर सकी उस वक्त मुझे बुखार भी हो गया था फिर मेरा बुखार इतना तेज हो गया था कि लगता था शायद यह बुखार मेरी जान लेकर जाएगा मैंने एक नजर अपनी मां को देखा तो वह छुप छुपा कर रो रही थी लेकिन मेरे भाई को इसकी
कोई परवाह नहीं थी वह अपने रोज के कामों में व्यस्त था उसे लग रहा था जैसे यहां कुछ हुआ ही नहीं है लेकिन दुनिया को दिखाने के लिए मुझे लेकर कभी वैद के पास तो कभी डॉक्टर के पास जाता था उसी की जुबानी सारे मोहल्ले को मालूम हुआ कि मैं बीमार हूं क्योंकि उसने मेरा नाम लेकर लोगों से प्रार्थनाएं करवाई इस तरह बहुत सी औरतें मेरी हालचाल पूछने आती थी और वह मां से सवाल करती वह कहती कि इसको क्या हुआ है लेकिन मेरी मां उनको क्या जवाब देती कि क्या हुआ है मेरी बेटी का
चार दिन बाद बुखार किसी हद तक कम हुआ तो मां मुझसे बहुत अजीब सवाल करती रही मुझे तो यह सवाल अजीब ही लग रहे थे लेकिन उनके हर सवाल का जवाब मैंने पूरी तसल्ली से दिया जिससे मां कुछ परेशान नजर आने लगी मुझे अजीब लगा कि मां इतने अजीब सवाल मुझसे क्यों कर रही है और अब वह इतनी परेशान क्यों नजर आने लगी लेकिन उसके बाद मां ने मेरी दिन रात देखभाल करना शुरू कर दी वह दिन को तो मेरे साथ रहती ही थी लेकिन अब रात को भी मेरे साथ ही सोती थी मैं जो
अकेली रात को सोते हुए डरती थी अब मैं भी बिल्कुल बेफिक्र होकर सोना शुरू कर दी थी इस घटना को तकरीबन 5 महीना गुजर गया था लेकिन इसके बाद मेरे भाई ने ऐसी कोई हरकत नहीं की थी तो फिर किसी हद तक मेरी और मां की परेशानियां कम हो गई जिंदगी ऐसे ही चल रही थी एक बार मेरा भाई रोज की तरह मंदिर के लिए गया और फिर वापस नहीं आया वह छोटा सा गांव था जब अगले दिन मेरा भाई मंदिर में नहीं पहुंचा तो लोग हमारे घर पर पूछने के लिए आए लेकिन हमें तो
खुद ही पता ही नहीं था फिर जल्द ही यह बात पूरे गांव में फैल गई सभी लोग अपने-अपने तौर पर मेरे भाई का पता लगाना शुरू किया लेकिन किसी को कुछ मालूम नहीं हो रहा था और यह बात हैरत में डाल देने वाली थी यं कि वह ऐसे बिना बताए कहीं जाने वाला तो नहीं था क्योंकि उसका कोई रिश्तेदार नहीं था तो फिर वह भला कहां जाएगा और दुश्मन भी उसका कोई नहीं था क्योंकि वह कुछ करता भी था तो मासूम बच्चों के साथ करता था जो उसकी शिकायत दर्ज नहीं करवा सकती थी ऐसे में
उसका गायब हो जाना हैरत में डाल देने वाला था पर यह बात मेरे और मेरी मां के लिए सुकून देने वाली थी क्योंकि उसके होते हुए हम खुद को असुरक्षित महसूस करते थे लेकिन दुनिया को दिखाने को हमें भी उसकी गुमशुदगी पर परेशान नजर आना था लोगों ने अपने तौर पर बहुत पता करने की कोशिश की लेकिन उसका कुछ मालूम नहीं हो रहा था इसलिए इलाके में रहने वालों ने मेरी मां से गुजारिश की कि वह उनको इजाजत दें ताकि वह उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट थाने में दर्ज करवा सके मां चाहती तो नहीं थी कि
वह इस घर में आए लेकिन यह बात वह कर नहीं सकती थी और वह जैसा भी था उनका बेटा था इसलिए मां ने रिपोर्ट दर्ज करवाने की इजाजत दे दी फिर सारा इलाका हमारा बहुत ख्याल रखता था और यह सब कुछ उसी इंसान की वजह से था जिससे यह बात करते हुए हुए भी शर्मिंदगी होती थी तकरीबन 20 दिन के बाद मालूम हुआ कि मेरे भाई का पता चल गया है मोहल्ले के कुछ जिम्मेदार लोगों के साथ मैं और मेरी मां भी थाने पहुंच गई लेकिन मेरा भाई वहां जिस हालत में नजर आ रहा था
उसे देखकर सभी हैरत में पड़ गए कहां तो वह हर समय पैट शर्ट पहनकर घूमता था और कहां अब वह धोती कुर्ता पहने हुए था बाल बिखरे हुए और गले में चैन जैसे कोई बड़ा बदमाश हो क्योंकि इस तरह के हुलिए में देखकर किसी को यकीन नहीं आ रहा था कि यह वही पुजारी है पुलिस ने कहा कि यह चोरी करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया है गांव के लोग यह सुनकर हैरान परेशान रह गए वहां मंदिर में पुजारी बना फिरता है और यहां यह चोरी करते हुए पकड़ा गया है यह बात किसी को यकीन
ही नहीं हो रही थी कि यह वही मंदिर का पुजारी है लेकिन पुलिस अपने तरीके से उससे पूछा कि क्या तुम वही पुजारी हो तो उसने कहा कि हां मैं वही हूं फिर वह अपनी पूरी कहानी सुनाने लगा जिसे सुनकर हम सब हैरान रह गए उसने बताया कि वह कोई हकीकत में पंडित या पुजारी नहीं था बल्कि वह तो एक अनाथ है उसका बाप कौन है उसे कुछ मालूम नहीं था लेकिन जहां यह पैदा हुआ था वहां पर लड़कियों की इज्जत और कदर की जाती थी क्योंकि वह पैसे कमा कर देती है वहां लड़कों का
ज्यादा ख्याल नहीं रखा जाता है इसलिए जब 10 साल का हुआ तो उसे वहां से निकाल दिया गया वह यहां-वहां खुद ही घूमता रहा और कचरा बिनता रहा इस तरह वह कई साल गुजार दिया तकरीबन 8 साल का था जब उसने पहली बार चोरी की थी फिर धीरे-धीरे अपने जैसे बहुत से लड़कों को अपने साथ मिलाकर उन्होंने एक ग्रुप बना लिया फिर शुरू में हम लोग छोटी-छोटी चोरी करते थे फिर धीरे-धीरे हम बड़े हाथ मारने लगे थे उन्हीं चोरी के बीच वह एक दफा पकड़ा भी गया और जो दूसरे लड़के थे वह सब तो किसी
ना किसी तरह से छूट गए यह जेल में ही रह गया फिर वहां पर इसने बाकी सबको धोखा देने के लिए एक पंडित बनने की शिक्षा हासिल करने का नाटक शुरू कर दिया क्योंकि जो लोग इस तरह करने लग जाते थे तो फिर उससे काम नहीं कराया जाता था इसलिए काम से बचने के लिए यह धर्म की किताबें पढ़ने लगा 7 साल तक जेल में रहने के बाद जब वह बाहर आया तो उसने दुनिया को दिखाने के लिए जो काम उसने शुरू किया था वह किसी हद तक उस पर असर करना शुरू कर दिया था
इसलिए उसने ने सोचा कि दोबारा वह चोरी के रास्ते पर नहीं जाएगा फिर उसने अलग-अलग पंडितों के साथ रहना शुरू कर दिया इसी तरह वक्त गुजरता रहा कहते हैं कि बुरे कर्म का बुरा ही नतीजा होता है इसलिए उसे सजा तो मिलनी ही थी उसने एक भाई बहन के रिश्ते को कलंकित किया था जो कि एक पवित्र रिश्ता है चाहे मजबूरियां कितनी भी हो लेकिन रिश्ते के बीच दरिंदगी नहीं होनी चाहिए और अगर ऐसा होता है फिर ऐसे लोगों को इस समाज में रहने का भी कोई अधिकार नहीं होना चाहिए दोस्तों कहानी पसंद आई तो
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