बांग्लादेश की पुलिस और आर्मी स्टूडेंट्स के पीछे पड़ी हुई है कहीं पुलिस वैंस स्टूडेंट्स के ऊपर से गुजरती हुई दिखाई दी तो कहीं हेलीकॉप्टर्स को यूनिवर्सिटी की छतों पर लैंड करते देखा गया हजारों लाखों स्टूडेंट्स सड़कों पर प्रोटेस्ट करते दिखाई दिए कहीं पर रैली निकाली गई तो कहीं प्रोटेस्ट मार्च देखते ही देखते स्टूडेंट्स की तहरीक इतनी फैल गई कि उन्होंने मजबूर होकर रोड्स हाईवेज और रेलवे सिस्टम को भी ब्लॉक कर दिया नौबत यहां तक आ पहुंची कि बांग्लादेश की सरकार ने पुलिस के साथ-साथ आर्मी को भी स्टूडेंट्स के मध्य मुकाबिल ला खड़ा किया लोकल मीडिया
तो वैसे ही कुछ रिपोर्ट नहीं कर रहा था ऊपर से इंटरनेट सोशल मीडिया और सबसे बढ़कर whatsapp2 से ज्यादा निहत्थे स्टूडेंट्स मारे गए कई हजार जख्मी और बेशुमार स्टूडेंट्स को अरेस्ट कर लिया गया इस सब के साथ-साथ इतने दिनों तक मुल्क शटडाउन रहने की वजह से बांग्लादेश को 2 बिलियन डॉलर से ज्यादा का नुकसान हो चुका है इतना सब कुछ होने के बाद सबके जहन में एक ही सवाल मंडला रहा है कि बांग्लादेश में आखिर यह सब क्यों हो रहा है जम टीवी की वीडियोस में एक बार फिर से खुशामदीद नाजरीन इस सब की शुरुआत
5th जून 2024 को हाई कोर्ट के एक फैसले के बाद से हुई जब उन्होंने बांग्लादेश देश सिविल सर्विसेस में कोटा सिस्टम को वापस से बहाल कर दिया शुरुआत में कुछ पीसफुल प्रोटेस्ट देखे गए लेकिन उसके बाद ईद की छुट्टियां आनी थी इसी वजह से मुल्क भर में प्रोटेस्ट पोस्टपोन कर दिए गए ईद के बाद स्टूडेंट्स ने दोबारा से प्रोटेस्ट शुरू किए और इस बार यह कुछ ज्यादा सीरियस थे उन्होंने रोड्स ब्लॉक किए और कोटा सिस्टम को खत्म करने की डिमांड जाहिर की वैसे तो प्रोटेस्ट का मकसद कोटा सिस्टम का खात्मा था लेकिन देखते ही देखते
इसमें और भी कई वजू हात शामिल हो गई बांग्लादेश में आवामी लीग पार्टी की गवर्नमेंट है और इसी पार्टी का एक स्टूडेंट विंक है जिसको छात्रा लीग कहा जाता है छात्रा लीग के मेंबर्स ने प्रोटेस्ट करने वाले स्टूडेंट्स पर कई मकामा पर हमले किए और वो भी पुलिस की सपोर्ट से इस मामले पर स्टूडेंट्स जो पहले सिर्फ कोटा सिस्टम के खिलाफ प्रोटेस्ट कर रहे थे उनमें गुस्से की एक लहर दौड़ गई साथ ही साथ कई मकामा पर आर्मी ने यूएन की गाड़ियों को प्रोटेस्टर्स के खिलाफ इस्तेमाल किया जिससे यह समझा गया कि शायद यूनाइटेड नेशंस
भी इस सब में मुलस है जब यह खबर इंटरनेशनल मीडिया पर चली तो पूरी दुनिया में यूनाइटेड नेशंस का एक बुरा इंप्रेशन गया और यूएन ने बांग्लादेश से ऐसा करने की वजह तलब की मालूम पड़ा कि कुछ गाड़ियां यूएन मिशन को रेंट की गई थी लेकिन उन पर से लोगो नहीं हटाया गया था अभी प्रोटेस्टर्स का गुस्सा थमा ही नहीं था कि 14 जुलाई 2024 को बांग्लादेश की प्राइम मिनिस्टर शेख हसीना ने कुछ रिमार्क्स दिए जिसने मामले को मजीद गंभीर बना दिया उनका कहना था कि फ्रीडम फाइटर्स को अगर जॉब्स में कोटा नहीं दिया जाएगा
तो क्या रजाकार को दिया जाएगा प्राइम मिनिस्टर के इस बयान ने तो जैसे आग सी ही लगा दी लेकिन इस बयान की असल वैल्यू आपको तब समझ आएगी जब आपको फ्रीडम फाइटर्स और रजाकार के बारे में इल्म होगा जैसा कि आप जानते हैं कि 1971 से पहले बांग्लादेश पाकिस्तान का हिस्सा हुआ करता था उस वक्त इसको ईस्ट पाकिस्तान जबकि आज के पाकिस्तान को वेस्ट पाकिस्तान कहा जाता था ईस्ट और वेस्ट पाकिस्तान दोनों को इंडिया ने डिवाइड किया हुआ था इन दोनों में फासला भी काफी ज्यादा था और दोनों के बीच रिलीजन को छोड़कर काफी सारे
डिफरेंसेस पाए जाते थे जिसमें लैंग्वेज का फर्क सबसे बड़ा था ईस्ट पाकिस्तान यानी कि बांग्लादेश में शेख मुजीबुर रहमान की आवामी लीग का काफी ज्यादा होल्ड था जबकि वेस्ट पाकिस्तान में मुख्तलिफ पॉलिटिकल पार्टीज मौजूद थी उस वक्त पाकिस्तान में मार्शल लॉ लगा हुआ था और जनरल यया खान जो उस वक्त चीफ मार्शल लॉ एडमिनिस्ट्रेटर थे उनकी जिम्मेदारी थी पाकिस्तान में जनरल इलेक्शंस करवाने की इन इलेक्शंस में ईस्ट पाकिस्तान की आवामी लीग को काफी कामयाबी मिली जिन्होंने ईस्ट पाकिस्तान की 169 सीट्स में से 167 सीट्स को क्लीन स्वीप कर दिया अब पाकिस्तान की नेशनल असेंबली की
टोटल सीट्स ही 300 थी जिनमें से 167 यानी के आधी से भी ज्यादा सीट्स ईस्ट पाकिस्तान तान की आवामी लीग ले चुकी थी जिसका मतलब था कि आवामी लीग नेशनल असेंबली ऑफ पाकिस्तान में अपनी गवर्नमेंट आसानी से बना सकती थी पर उस वक्त की मिलिट्री लीडरशिप ऐसा नहीं चाहती थी जिसके चलते ईस्ट पाकिस्तान में सिविल डिसऑबेडिएंस की तहरीक चल पड़ी 7थ मार्च 1971 को शेख मुजीबुर रहमान ने अपनी स्पीच में पाकिस्तान से अलहदा होने का इशारा दे दिया और 23 मार्च को पहला बांग्लादेशी फ्लैग ईस्ट पाकिस्तान के काफी घरों पर लहराया गया इसका नतीजा यह
हुआ कि ईस्ट पाकिस्तान में एक मिलिट्री ऑपरेशन लॉन्च किया गया जिसका मकसद ईस्ट पाकिस्तान को वेस्ट पाकिस्तान से अलग होने से रोकना था बांग्लादेश की आजादी की यह जंग अगले 9 महीने तक चलती रही जिसमें ईस्ट पाकिस्तान में मिलिट्री की कुछ यूनिट्स ने पाकिस्तान से अलग होकर आजादी पाने के लिए अपनी अलग फोर्स बना ली जिसको बांग्लादेश फोर्सेस मुक्ति वाहिनी या फिर फ्रीडम फाइटर्स भी कहा जाता है दूसरी तरफ बांगला देश में ही मौजूद वह ग्रुप जो वेस्ट पाकिस्तान को सपोर्ट करता था उनको रजाकार कहा जाता है इस जंग के आखिरी दो हफ्तों में बांग्लादेश
को इंडिया की सपोर्ट भी हासिल हो गई और यूं ईस्ट पाकिस्तान वेस्ट से अलग होकर बांग्लादेश बन गया अब क्योंकि फ्रीडम फाइटर्स की मदद से ही बांग्लादेश आजाद हुआ था तभी शेख मुजीबुर रहमान जो कि बांग्लादेश के प्रेसिडेंट बन चुके थे उन्होंने बांग्लादेश सिविल सर्विसेस में फ्रीडम फाइटर्स का अलग से 30 पर कोटा रख दिया 19 97 में यानी कि लिबरेशन वॉर के 26 सालों के बाद बांग्लादेश सिविल सर्विसेस में फ्रीडम फाइटर्स की रिक्रूटमेंट काफी कम हो गई जिसके चलते गवर्नमेंट ने यह कोटा सिर्फ फ्रीडम फाइटर्स नहीं बल्कि उनके बच्चों के लिए भी बढ़ा दिया
और फिर 2010 में फ्रीडम फाइटर्स का कोटा उनके पोते पतियों के लिए भी एलिजिबल कर दिया गया लेकिन इसके बावजूद भी सिर्फ 10 पर फ्रीडम फाइटर्स की नस्ल यह कोटा ले रही थी और बाकी का कोटा जाया हो जाता पूरे मुल्क में जो लोग मेरिट पर मेहनत करके सिविल सर्विसेस की जॉब हासिल करना चाहते उनका कोटा 44 पर था और व भी अब कम पड़ने लगा तो यह चीज स्टूडेंट्स को काफी खराब लगती कि हम इतनी मेहनत करने के बाद भी मेरिट के 44 पर कोटा में भी नहीं आ सकते जबकि फ्रीडम फाइटर्स का खानदान
कुछ ना करके भी आसानी से गवर्नमेंट जॉब हासिल कर सकता है 8 मार्च 2018 को बांग्लादेश हाई कोर्ट में कोटा सिस्टम के खिलाफ एक पिटीशन फाइल हुई जिसको कोर्ट ने रिजेक्ट कर दिया उस वक्त प्राइम मिनिस्टर शेख हसीना ने कहा कि वह पर्सनली फ्रीडम फाइटर्स के खानदान के लिए कोटा रखना चाहती हैं जिस पर स्टूडेंट्स ने कोटा सिस्टम के खिलाफ भरपूर प्रोटेस्ट किए उनका कहना था कि यहां तो फ्रीडम फाइटर्स के बच जाने वाले कोटा को मेरिट वाले कोटा में मर्ज कर दिया जाए या फिर फ्रीडम फाइटर्स का कोटा कम किया जाए इस पर प्राइम
मिनिस्टर शेख हसीना ने एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी किया और बांग्लादेश सिविल सर्विसेस में से कोटा सिस्टम ही खत्म कर दिया अगले कुछ सालों तक खामोशी रही लेकिन फिर अचानक बांग्लादेश हाई कोर्ट ने 5थ जून 2024 को शेख हसीना का वह एग्जीक्यूटिव ऑर्डर कैंसिल करके कोटा सिस्टम वापस से बहाल कर दिया और यहीं से दोबारा प्रोटेस्ट शुरू हो गए जब हालात हद से ज्यादा बढ़ गए तो 21 जुलाई 2024 को सुप्रीम कोर्ट ऑफ बांग्लादेश ने कोटा सिस्टम में भारी रद्द बदल का ऑर्डर पास किया उस ऑर्डर में 93 पर कोटा मेरिट के लिए दिया गया जो कि
पहले 44 पर था और फ्रीडम फाइटर्स का कोटा जो पहले 30 पर था उसको कम करके 5 पर कर दिया गया 1 पर माइनॉरिटी और 1 पर मजूर लोगों के लिए फिक्स किया गया इस ऑर्डर के बाद स्टूडेंट्स ने सिर्फ इस शर्त पर प्रोटेस्ट खत्म करने का फैसला किया कि उनके अरेस्ट किए गए साथियों को छोड़ा जाए और जिन इलाकों में स्टूडेंट्स को मारा गया वहां के गवर्नमेंट ऑफिशल्स रिजाइन करें फिलहाल जिस वक्त यह वीडियो बन रही है उस वक्त तक स्टूडेंट्स की डिमांड्स पूरी नहीं हुई लेकिन गवर्नमेंट का मानना है कि सिचुएशन काफी हद
तक कंट्रोल में है मोबाइल सर्विस इंटरनेट और सोशल मीडिया दोबारा से खोले जा रहे हैं आपका इस पूरे सिनेरियो के बारे में क्या ख्याल है मुझे कमेंट सेक्शन में जरूर बताइएगा उम्मीद है जम टीवी की यह वीडियो भी आप लोग भरपूर लाइक और शेयर करेंगे मिलते हैं अगली शानदार वीडियो में