झाल मैं अपना काम तो पूरे जगत से पार तत्व जो है उस तत्व को म रूप में जानकर उसने आराम पाना ही अपना पुश्त तो साधन से रिड्यूस मिलती लेकिन सतगुरु अगर सूरमा नहीं है शब्द की चोट करके साधनों के साथ की शर्त के साथ कि हम प्रतिबंधों अगर गांव तक भटक कि इष्ट मंत्र गुरु को त्यागकर जो इधर उधर भटकते हैं समझ लो उनके चित्र पर श्रद्धा नहीं है है और श्रद्धा हीन व्यक्ति कहीं भी सफल नहीं हुए कि आत्मज्ञानी महापुरुष विश्व में और हमारा कोई विदेशी हार नहीं है नहीं होना चाहे तो हो
नहीं सकता [संगीत] जय हो ओम ओम ओम ओम e-mitra गधा क्रोधा मन्मया मामुपासते ताहा हमारा घाघरा एक रुत व्यतीत हो जाए भय राख रोज व्यतीत होने पर भी अ कि पूर्णता नहीं का मन माया है कि मामु पाशविकता कि बैरागी उद्यत हो गए लेकिन परीक्षण था दूर नहीं होगी मैं निर्भर हूं एक अंतागढ़ सुपरहिट में हो जाएगा कि मैं निर्भय हूं मुझे क्रोध नहीं है है तो भय राग क्रोध से अंतःकरण मलिन हो जाता है और दीव विचारा जन्म-मरण का भाग्य अवतार भैरव क्रोध मिटने पर फिर भी जीव को साधनों में मैं बुद्धि मौजूद रहती
है अब हकीकत में भैरव क्रोध आदि होते हैं मन बुद्धि में मन बुद्धि साधन है तो हम साधनों की शुद्धि साधक को देखने के लिए करे वह तो ठीक है लेकिन साधनों को मैं मानते रहे तो शायद ठीक से नहीं देख पाए ईश्वर हमेशा सिद्ध तत्व है सिद्ध वस्तु इश्वर अगर इंद्रियों का विषय होता साधनों के द्वारा दिखने का विषय होता तो गाय भैंस कौओं के घोड़े घोड़े को इश्वर दिख जाता है मैं इश्वर इंद्रियों का विषय नहीं है इश्वर तो यह सब इंद्रियों को नेती नेती करने के बाद जो स्वत सिद्ध तत्व है वह
शहर हैं अ है तो वह से शहर में मन माया होना चाहिए अ कि सत्कर्म करने के लिए धन आदि का उपयोग गैस ईश्वर प्राप्ति के लिए साधनों का अवलंबन है और सत्कर्म करने के लिए बुद्धि का अवलंबन को दूध लेने वाले व्यक्ति से भी जो मामू पास रहता है इश्वर के मां के नजदीक बैठता है वह जल्दी पहुंचता है इस ज्ञान से सुनने हैं है यहां तक कि संग्रह और भोग का त्याग करने का साधन भी उतना तीव्र नहीं पहुंचाता जल्दी नहीं पहुंचाता जितना मामु आश्रिता होने से रोकता है इश्वर का माम उपाधि देता
हु - समीप इश्वर के उपवास ने से उपमा नजदीक बस करना ऐसे ही उपाय श्वेता इस संसार में में कि हम लोग किसी ना किसी का आश्रय लिए बिना नहीं रहते हैं कि किसी में हमारी प्रीति होती है और किसी में हम किसी का हम आश्रय लेते हैं धन मुकुट उम्र में परिवार में मकान में गाड़ी में गहनों में कपड़ों में हमारी प्रीति होती है है और जो बलवान है उनका हम सांस लेते तो पदार्थों में वृद्धि होती है और बलवान उन पदार्थों की रक्षा करने में जो समर्थ है कि उनका हम आज रहते हैं
तो पदार्थों की वृद्धि नश्वर पदार्थों की वृद्धि हमें दुख देती है और आप ध्यान रखती है है और बाहरी या सरे भी हमें भय से बनाए रखता हूं उनका भय बना रहता है सेट का आश्रम शुक्र का आशय किसी न किसी का नेता किसी न किसी का श्रेय लेंगे तो यह जीव हमेशा कोई न कोई आश्रय भीतर थमा हुआ है कि इसकी प्रति और कहीं ना कहीं इसका आशय प्रीति और आठवें जब तक बाहर बना रहेगा तब तक भय क्रोध और राधे का यह पितृ और आश्रय जब तक बाहर रहेगा तब तक भय क्रोध और
राधे क्योंकि जो वस्तु हम चाहते हैं उसमें अगर विघ्न डालता है कोई तो उसके प्रति विरोध होगा अगर हमारे बराबर और हमारे से बढ़ा यह बात तो उसे भय होगा कि अब उसने भी डाला है यह बड़े पहुंचवा उसके उस अभय होगा है तो भय कभी-कभी तो कल्पना करके भूतकाल का चिंतन करके बीच होता है दुख होता है भूतकाल में सुख भोगा है उसकी याद में भी दुख होता है और वह है उसको याद करके दुख होता और भविष्य में का कल्पना करके भी पैदा होता है वर्तमान में हमारी स्मृति में हम जब तक मां
उपस्थित होंगे उपासक से इश्वर के तत्व को समझेंगे उपासक तो इश्वर का मान शुकर मान लो तो तुम्हारा तुम्हारा ईश्वर का है है क्योंकि ईश्वर अंश जीव अविनाशी चेतन अमल सहज सुख रासी सो मायाबस भयउ गोसाईं बंध्यो कीर मरकट की जैसे तो तापमान शरीर को पर बैठता है तो उसकी वजह से अब तक से पकड़ ताकि मेरे को पकड़ा है है अथवा तोमर कट अपनी ही मुट्ठी बांधकर पकड़ा जाता है ऐसे ही हमारी स्मृतियों से ही हम इस नश्वर भोग में नश्वर पदार्थों में नश्वर आश्रयों में बांधे हुए हैं वरना बांधने की संसार में ताकत
नहीं है यह बंधन हमारा स्वनिर्मित है कि यह स्वर्ण निर्मित बंधन को जब तक हम स्वयं नहीं उखाड़ फेंकेंगे तब तक महाराज परम पद का अनुभव ने को तो जो लोग अज्ञान के तिमिर में वह खा रहे तो अज्ञानी और दूसरे शंकाशील भागवत ने पाया कि गौर कदम-कदम पर शंकर को इज्जत लुट जाना जाता है प्रतिदिन रोटी का टुकड़ा उस पर ऐसे जो अज्ञान है और अहंकारी हैं वह अपने परम हितैषी संतों पर भी करते हैं उनके प्रति घंटा सब्सक्राइब अरे भाई श्रद्धा बिना तो तुम भी नहीं कि आप नहीं कर सकते क्योंकि तुमने धारण
कि वह ड्राइवर पिंपल भी रखनी पड़ती 80 आदमी मां धनमाल जान सब एक ड्राइवर के सुदर्शन चक्रपर स्टेरिंग पर भरोसा रखते हुए एक हवाई जहाज मे कहा जाता है हमारा 10,000 की टिकट पहले बैक साइड पर सब्सक्राइब करना चाहिए बनाने वाले पर भी रखते हैं कि गाय भैंस का दूध चाहिए दूध अथवा तो आप इंजेक्शन लगाने वाले सब्सक्राइब कर लें फिर भी लोग इंजेक्शन लगवाते आधे उतरने वाले के पास रूम में जाकर उस पर श्रद्धा रखते अपनी गर्दन दे देते हो जरा यह करता और मस्जिदे करते-करते इधर भी तो हो सकता है लेकिन फिर भी
श्रद्धा से आधे तो यह छोटे-मोटे अभियुक्त श्रद्धा से तो इस तरह से आप कर देते हैं तो जनम जनम की गाड़ी के आगे है है तो श्रीकृष्ण कहते हैं श्रध्दावानं लभते ज्ञानं तत्पर संयतेंद्रिय श्रद्धा के साथ तत्परता हमारी इष्ट में व्याख्याता के वचनों में श्रद्धा है उसको अगर अंदाजा लगाना चाहिए तो उनके बताए हुए मार्ग पर उनके बताए हुए उपधान तप इतने हम अगर उनके बताए हुई नियुक्तियों पर तत्परता है तो हमारी नहीं तोय हुआ था हमारी तत्परता नहीं गुरूजी आपको तुम्हें बहुत मानता हूं लेकिन आपकी बात मैंने स्वीकार करूंगा मैं इस विधि को तुम्हें
बहुत मानता हूं लेकिन गांधीवाद से मुझे नफरत तो गांधी को क्यों मारा ऐसे ही सब्सक्राइब बटन पर अंधा आदमी को शुक्र पतला है लेकिन भाजपा नेता जो बोलते हैं कि हम सब नहीं रखते तो समझ लो या तो वह अपना इस पृथ्वी पर यह लोग में अपना हितैषी नहीं समझता तो अपने से श्रेष्ठ नहीं समझता तो जो अभिमानी होते हैं वह अपने से श्रेष्ठ दूसरे को नहीं मानते हैं जो होते हैं पशुतुल्य होते हैं उनकी नियुक्ति पशुओं में श्रद्धा ने जिन व्यक्तियों से आक्रांत घृणित व्यक्ति कदम-कदम पर अभी धोते हैं कदम-कदम पर महाराज उनको उदय
होता है कदम-कदम पर उनको होता है रा होता है उस लिए उनका चित्र खंड-खंड हो जाता है तो सुविधाएं होती है लेकिन सूख नहीं होता है सुविधाओं और शुक्र का संबंध इतना नहीं है शांति और सुख का संबंध है चित्र में अगर सुविधाओं के लाल सहित वह सुविधा से सूख की भांति होगी House has लेकिन फिर हां नहीं कि घूमेगी लेकिन चित्र में अगर श्रद्धा है साधन और ज्ञान के बताए मार्ग पर तत्परता है तो आपको अनुकूलता मिलेगी तब भी उसका उपयोग कर लोगे और प्रतिकूलता मिलेगी तब भी आप समझ लो कि नित्य यह गधे
अनित्य आने-जाने वाले सुख-दुख मैंने दोपहर के समय में किया था कि सुइयां 2 घंटे के बाद प्रभुओं का प्रभु सब्सक्राइब 12 वर्ष के बाद तुम्हारा है वह देख का प्रभाव याद नहीं रहता और 10 20 साल के बाद उसको याद दिलाने वाले लोग भी मुलाकात नहीं मिलते वह भी कहीं-कहीं हो जाती है तो जो बहने वाली सरिता में पूर्व भी बेहतरीन खेल भी बह उस समय बड़ा प्रभाव दिखाते हैं लेकिन आप ज्ञान में तत्परता हो आप अपने स्वरूप तरफ वो तो इंसानों को दिखने वाले आपके लिए एक मनोरंजन हो जाए स्वनिर्मित खिलवाड़ हो जाए तो
आपके लिए निर्मित निर्मित समाज निर्मित अगर आपके पास ज्ञान है तो आप स्वर्ण निर्मित विनोद विनोद कुमार जैन मनीष शर्मा विनोद जिसका व्यवहार होता हो प्रतिदिन सुधार किए हैं कि उनके चित्त में देखो तो कभी कर्तृत्व नहीं बड़े-बड़े दुख जिन्होंने साहेब और फिर भी मुस्कुराते रहे प्रसन्न रहे तो उनके चित्त में दुख की रेखा या सुख की रेखा नहीं पड़ी हकीकत में इंद्रियों पर्सन शरीर पर यह व्यवहार में जो दिखाता है या सुख आता है उसका तब तक प्रभाव नहीं पड़ता जब तक बुद्धिपूर्वक हम उससे सहमत नहीं होते हैं कि जब तक हम अपने हस्ताक्षर
नहीं करते तब तक दुख का प्रभाव भय क्रोध और राहु का प्रभाव हम पर नहीं पड़ सकता है तो बंधन स्वनिर्मित बंधन इसलिए कृपा करके स्वर्ण निर्मित बंधन स्व को दूर करना पड़ेगा कोई मुद्दा करार बंद शिकायत में संतोष तुम्हारा दुख दूर कर देगी इस चक्कर में मत पड़ना तुम्हारे हस्ताक्षर है संतोषी मां संतोषी दुख दूर कर देगी और जिससे को महत्व तो सब दुख दूर कर देंगे लेकिन महत्वपूर्ण तत्व और फिर तुमको और तुम इससे पहले कि मामलों सहित कई मामलों को क्यों परेशान कर रहे हो [प्रशंसा] है तो बुद्धि हमारे शंकाशील रहती तो
जो कदम-कदम पर क्षमता करता है एक तो करेला करेला कड़वा होता है और दूसरा नीम चढ़ा करेला है कि एक का कार्य नोबेल प्राइस लिमिटेड बड़े लोग एक तो करेला और दूसरा नीम तरह करेला एक तो अज्ञानी और दूसरा उनका सिर एक तो अंजाने और दूसरा वाला रहा शरद धुंध पछतावा काला ही कर्म हिम्मत दोस्तों आज धर्म के नाम से एक मंदिर है वह सब्सक्राइब टो हुआ है सानी सानी लेकिन जिस की तत्परता है वह वृद्ध पुरुषों को खोज रहता है ज्ञानियों को खोज लेता गुरु को खोज लेता है अपना मार्गदर्शन खोज लेता है और
अपनी बेवकूफी मिटाते-मिटाते अपने घर में पहुंच जाता है बेवकूफी मिटाने का नाम ही पर भगवान की p.m. बड़ा बेवकूफ है मैं तुमको राज्य करना है तो हम करेंगे बात ठीक हो साहेब हो लेकिन बेवकूफी नहीं मिलती है हम्म मैं आईएस हो गया हूं बैक थिस मैटर इन मिटा दिया मैंने वह इस प्रकार किस को बेवकूफ बोलते हैं कि इंद्रियों को मन को शरीर को इंसानों को मैं मानकर जो हम जीते हैं तो बेवकूफी इन साधनों को साधन मानकर अपने मैं को आप जानते हैं तब अपने को जाना तो आप किसी भी प्रदार्थ से किसी भी
सब्सक्राइब नहीं हुए तो देखा आपने आपको मेरा दिल दीवाना हो गया ना छेड़ो मुझे यारों में खुद पर मस्ताना को अ कि रतिया हसन मित्र संघ के दो है कोई गुच्छों में कुछ जाग गए थे वह लोग नमाज पढ़ने की तैयारी कर रहे थे लेकिन हसन के मन में कुछ कर दिखाए पर्सन अध्यक्ष रवि को कहा चलो अपन वहां बैठकर नमाज पढ़ने व समझने की प्रदक्षिणा करने निकले साधन से हुई चीज में हम प्रत्येक करके अब दूसरों को प्रभावित करना तभी दोस्त बना हुआ है कि चादर बिछा दी पानी पर और उस पर खड़े हो
कर सिद्ध कर लें अ कि रवीना ने उन्हें उन्हीं की भाषा में जवाब देना चाहिए का रवैया ने क्या कहा कि अपनी चदरिया हवा में लहराकर कहां के अब इधर तो लोग देख लेंगे पप्पू पहले जाकर सिद्ध करते हैं ए पर्सन को अपनी भूल समझ में आ गए हैं से हावड़ा के लिए कि आप तो मेरे से बहुत आगे बोले भैया जो मछली कर सकती वह तो कम दिखाया और जो एक चिड़िया फेड कप तक टीम ने कर दिखाया यह कोई अनुसार बात नहीं यह साफ बात तो यह है कि अपने स्वामी टिकट संसार को
अपना मान कर अपने राम में आराम करना ही 24 रात को हवा में चदरिया के का देना था अथवा पानी पी लेना है अपना काम तो पूरे जगत से पांच तत्व तत्व को सब्सक्राइब कर सकते हैं तो से रिड्यूस लेकिन लुटेरों की चोट करके दोनों के साथ ही सब्सक्राइब बटन जाएगा कि मैं भूत शुद्धि का मंत्र लेने गया विपरीत बुद्धि का आमंत्रण गया क्योंकि मेरे जीवन अधिक होना चाहता हूं ना तो अशोक रखा लेकिन सब्सक्राइब अरे तू क्यों बनना चाहता सब्सक्राइब कर चिंता चिंता ही सब्सक्राइब सब्सक्राइब महान् से भी महान् तो अपने आप में हो
तब पता चलता है प्ले लिस्ट मंत्र गुरु को त्यागकर जो इधर उधर भटकते हैं समझ लो उनके चित्र पर श्रद्धा नहीं है है और श्रद्धा हीन व्यक्ति कहीं भी सफल नहीं हो सकता है एक कुआं खोदा फिर देखा के पानी नहीं निकला 15 फीट मेहनत की फिर दूसरा खुदा तीसरा पूरा खेत से पानी की बूंदें किया लेकिन अगर हम काम करते पुष्ट होता जाएगा एक हजार अपने स्वरूप का बोध नहीं है है इसलिए शुद्धता का निकाह भी मोड ऑन उपर शांति परिणति ज्ञान चक्षु झाल मैं तुझे अज्ञानतिमिरांधस्य ज्ञानांजनशलाकया चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्री गुरुवे नमः जो
अज्ञान तिमिर को हटाकर ज्ञान की ऐसे गुरु को सब्सक्राइब करें इधर जब तक साधनों से अटैचमेंट नहीं करती तब तक हम घर से यहां कई गाड़ीयां मकान व्यक्ति लेकिन उनकी मूर्ति हैं जिनके प्रति राग तथा उनकी स्मृति है और जिनके प्रति दृश्य था उनकी स्मृति है जिस मकान दुकान व है कल के प्रति राग था कि रास्ते में वह फलानी बदल दे कि प्लानेट चार देखिए हम ऐसे लेने वाली आप अगर कार खरीदते हैं तो जिस प्रकार की कार खरीदने उसी प्रकार अगर रोड से गुजर रही है तो आप चित्र में खड़े जिस प्रकार की
और आपके पास है बेचना चाहते हैं तो कुछ मतलब स्कार आयोग ने चीन को डालेगी अगर आपके मन में अपने स्वरूप का बोध स्वरूप का बोध होने से संसार-बंधन अलग-अलग का योग न चीज के प्रति गैर चीज के प्रति करोड़ मां भी एक सिनेमाघर गंधर्व नगर का भाई तो है और क्या है सिनेमा मैं आपको एक स्त्री दिखी जो भोजन बनाकर तैयार रखिए कह के ले लो लो मेरे भैया मेरे पति मेरे पति और आपको भूख लगे तो खाने में तो मेरे को सब जगत के एक दूसरे को अगर छोड़ जाते हैं तो आप को
सच्चा मान रहे हैं डर के भाग न हो ओम श्री मां पूरी होने के बाद सिनेमा का जो कुछ तुमने देखा उसके प्रति क्या तुम्हारे राग या द्वेष की बुद्धि रहेगी कि नहीं अपनी मां को सिनेमा समझ लिया तो आपने शनिवार ठीक से देखा अपनी मां को सच्चा माना तो फ्रेंड ऐसी लंबी चौड़ी हो जाएगी नोएडा आवारा कट हो जाएगी और चाल-ढाल ऐसी हो जाएंगे उचित में अशांति आ जाएगी क्योंकि सिनेमा देखने से शांति उसका कारण है कि वाले नहीं चाहते कि आप शांति लेकिन नियुक्त स्त्री-पुरुष उनके रहन-सहन घूमना-फिरना और हवाओं और तूफानों झाले दिखाया
जाता है कि युद्ध में कार चलाना और दूसरे तरफ सब्सक्राइब वह दिखाया जाता है एक्टिंग और उनका पाउडर और मेहरा श्रृंगार हरसिंगार है वह किया होता तो नियुक्त और आगे उपयोग ना और आप हसबैंड फिरोजशाह होगा ने और आपकी मिसिसिपी हीरोइन जैसी होगी नहीं तो वह देख कर अगर चित्र में घुस गया तो अपनी मिसेस होते हुए भी चित्र में भिन्नता रहेगी अपना मिस्टर होते हुए भी चित्र में भिन्नता और अपने घर में रहते हुए भी आप अपने घर में नहीं है किसी काल्पनिक घर में गोते खा रहे हैं इससे शांति क्योंकि ऐसा किसी की
मोटर देखकर किसी की नियुक्त किसी का कुछ देखकर अगर अटैचमेंट कर रही है इच्छा कर रही है तो आप सूखा पीड़ित हो जाएगा आपके शांति हो जाएगी और बुद्धि निर्णय शक्ति से कुछ नीचे हकीकत में किसी रूप किसी खिलाड़ी को subscribe करो subscribe our शुक्र दिन का है लेकिन वह सत्ता से जीरा है वह अमर आत्मा तो अभी मेरे पास इतने का उतना है उसको तो पता नहीं लेकिन मेरे को सत्संग के द्वारा पता है तो इसी के रूप में मैं तो बुरा हूं ओम शिवोहम शिवोहम यह तुम्हारे ज्ञान का उपयोग का उपयोग और तत्परता
की निशानी है के किसी राष्ट्रपति और प्रेसिडेंट को देखकर सुप्रो मत और उसको देखकर एक ऐसा मत करो लेकिन अंदर में सोचो के जवाब एड़ियां तो वह विचार आसान करेगा सुख तो हम ले सकते हैं कि प्रेसिडेंट होकर हम बात कर रहे हैं राष्ट्रपति होकर हमें ऐड कर रहे हैं या सैर कर रहे हैं महाराज नेता बने हुए तो हम हैं जनता है तो हमें साकार है तो हम हैं और शहर नजर से उनके सामने नजर तुम अपनी नजर मान उनका टेंशन अपने सिर पर मत लो लेकिन उनकी शादी नजर उन वजह सत्ता से सत्ताधीश
है वह परम सत्ता मुझे आत्मा परमात्मा की है सो हम जो राष्ट्रपति जिस कि सत्ता से उनकी आंखें देखती है जिस सत्ता से उनके कान सुनते हैं जिससे वह बोलते हैं जिससे की यात्रा करते हैं वह सत्य आत्मा है और आत्मा परमात्मा नियुक्त है राष्ट्रपति को जो है वह आप सभी को 7 दे रहा है और वही वास्तविक में मेरा स्वरूप है तो यह सब मेरे स्वरूप अनेक शिवोहम शिवोहम करके आनंद ओं है लेकिन वह बनना और बनना तो फिर महाराज पोस्ट छोटे का यह जब घर जाना तो फिर भी स्वर्णा मैंने सुना कोई चीफ
मिनिस्टर गुजरात के 15 15 साल पहले की बात है कुछ देर सांय जामुन यदि छोड़ी और उनकी गाड़ी दिल्ली दरवाजा पुलिस वाले ने रोक कि ट्रैफिक कंट्रोलर होता है शायद एक-दो दिन पहले तो सायरन बजाकर ढूंढ आ रहा है तो आप पर कंट्रोल दिल्ली दरवाजा करना चाहिए तो उन्होंने अपना पद प्रतिष्ठा लेकर जो अपने को अनुभव करता है तो वह 38 5 वर्ष की सब्सक्राइब नियुक्त तुम्हारी नहीं सकता तो प्रति व्यवहार कि युवक कि तुम्हारी वास्तविकता तो तुम्हारा केंद्र सब्सक्राइब करते रहती है वैवाहिक सत्ता बदलती रहती है खून पसीना बांटा जाता उनके चादर सो ताजा
यह किसी तो हिलती जाएगी तू हंसता जाया होता उन यात्रियों की दयनीय स्थिति महाराज चलती नाव में स्थिर रहना चाहते की जय जय हो में होने यात्रियों की बिलकुल तयार जनक स्थिति है कि बहते पानी में चलती नाव में स्थिर रहना चाहते समय की बहती धारा और व्यवहार की चलती ना और उसको स्थिर करके सुखी रहना चाहते कितनी दयनीय स्थिति तो करें और दूसरा बड़ा कारण है है ऐसे एक तो अज्ञानी और दूसरा श्रद्धा ही अ कि श्रद्धायुक्त कि क्या करेगा मन में जो आएगा ऐसे करेगा और मन में जो मंत्र आया वो जब लिया
तो जिस मंत्र की व्याख्या सुनेंगे बढ़िया आज वह दूसरे पुरुष के पास दूसरे मंत्र की स्थिति युद्ध सब्सक्राइब महीने में दूसरे की महिमा सुनो उसका जप तप करने लगे तो बदलते-बदलते महाराज काम नहीं लेकिन आपके जीवन में अज्ञान अज्ञान को नियुक्त कर दें इस मार्ग पर चल रहे हैं उनकी तत्परता से व्यापार मेला रहे हैं तो आप स्वतंत्र सिंहासन पर बैठने के अधिकारी स्वतंत्र सिंहासन है कि जीवन में का प्रसंग का यह अच्छा आएगा भड़काएगा लोग आएगा और आप उसके साथ अटैच मैंने करें गांव क्रोध लोभ भय चिंता दुख यह तब तक प्रभाव रखते हैं
जब तक हम उनके साथ जोड़ते स्लॉटर हाउस कि खूंखार तलवार है तब तक प्रभाव रखती है जब तक उसके साथ करंट चढ़ा सकते हैं तब तक प्रभाव रखती है जब तक इलेक्ट्रिसिटी नियुक्त से जुड़ी ऐसे ही तुम्हारे चित्र में जो आता है तो के साथ जुड़ने का प्रभाव डिसकनेक्ट हो जाएगा जो कि लोग आती है उसके साथ अश्लील करो डिसकनेक्ट हो जाएगा है कि यह बहुत ऊंची साधना है बड़ी ऊंची समझ आ कि आज श्रीकृष्ण के इस लोक से हमें बहुत ऊंची समझ मिल रही है कि मन म आथे ईश्वर तत्व को ख्याल करके उसमें
टिक जाएं अभय राज और क्रोध को छोड़कर अभय राज धो सम्मति कर अपने स्वरूप में समिति तो बहरा और दो तेज प्रभाव जैसे जली रस्सी् बुध और टॉर्च मारकर बिखरा हुआ था चोर वो डर नहीं सकता रस्सी में दिखने वाला सांप और उसका महत्व नहीं रखता ऐसे ही भ्रम विधिवत रूप से दिखने वाला जगत लिए महत्व रखता बंधन रघबीर कि आपके पास देखने ठीक निगाह कि जगत में जो भी दुख है उसका मूल अज्ञान है है और उसके अब बेटा-बेटी ठनका है अहंता-ममता उसका परिवार अज्ञानेनावृतं ज्ञानं तेन मोहंती जन्म तवा अज्ञान से जिनका ज्ञान थक
गया है लोग थोड़ी-थोड़ी बात मोहित हो जाते तो वर्तमान में मोहित हो जाते हैं और भूतकाल में ओर से वीरवार को वर्तमान भूत और भविष्य ही अंतरण उस अंतर अध्ययन जो आत्मा है जो मैं बोल रहे हैं जिसने उसके बंध जाते खोजा तिन पाइया गहरे पानी पैठ टूर्स किनारे है कि मिस्र देश में एक संत हो गई थी हुआ है कि उनके भक्तों का आग्रह के गुरुदेव पधारो सा हुआ है कि अलेक्जेंडर कुवैत सिटी कुवैत जगह होगी वहां लेंगे अब कि वह वे भक्तों के बीच उत्सव में रहे उन्होंने तय किया कि कल आ कि
उन दूर-दूर पहाड़ियों पर अज्ञातवास के लिए जा रहा हूं कल भक्तों ने देखा कि गुरु महाराज की हाजिरी हमारे लिए बड़ी हिम्मत गुरु महाराज के जरिए हमारे लिए बड़ी शांति गुरु महाराज के यहां तक शुक्र प्रेम प्रकट करती आत्मविश्वास शांति और सच्चा जगत में विश्व में आज तक हमारा अगर अभियुक्त को मिला हो करोड़ों जन्मों में अगर कोई परम हितैषी व्यक्ति तो सब्सक्राइब हमारे साधकों करते हैं तो हमारे मित्र परिवार हो सकते हैं लेकिन हमारा सब्सक्राइब करें एक अध्ययन से सुने हमारा परम हितैषी तो कोई ब्रह्मवेत्ता महापुरुष ही हो सकता है दूसरा होना चाहिए तब
भी नहीं हो सकता है और दूसरा हमारे शरीर का हितैषी हो सकता है खान-पान की सुविधा कर दे इज्जत-आबरू अहंकार बढ़ाने में जरा सा कर दे ऐसा हितैषी हो सकता है लेकिन हमें जन्म मरण से छुड़ाकर अपनी गद्दी पर जो बैठा हुआ है वहीं बैठा सकता है जो बैठा है वह ब्रह्मवेता है और वही बैठा सकता है इसीलिए वही हमारा परम हितैषी ये उसे अतिरिक्त और पूरा हितैषी कोई हो नहीं सकता आत्मज्ञानी महापुरुष विश्व में और हमारा कोई नीति नहीं है नहीं होना चाहिए तो हो नहीं सकता है कि विश्व के सब लोग सर्वज्ञानी दिन
आत्मज्ञान नहीं हुआ यह सब लोग मिलकर भी हमें सूखी करना चाहिए सदा के लिए तो उनके बस की बात नहीं है आज भी सारे लाचार हो जाएंगे गांव है और हमें ब्रह्मवेता गुरु की प्रसाद विपक्ष गई है तो विश्व के सब लोग मिलकर हमें सदा दुखी करना चाहे तो उनके बस की बात नहीं क्योंकि हस्ताक्षर हम करेंगे तभी तो खूब देखो कितनी स्वतंत्रता है कितनी आखिरी बात हुआ है है तो ऐसे गुरुओं ने कहा कि बाबा जी की कि आप हमारे बीच रहे आपके रहन-सहन खान-पान आने-जाने गाड़ी मोटर की सब सुविधाएं हम और बढ़िया कर
सकते हैं लेकिन आप की पहाड़ियों में अज्ञात बात मत जाएगी कि उन्होंने कहा कि भाई और तुम्हारा तुम्हारी दुनिया और हमारी दुनिया अलग हम कभी कभी तुम्हारी दुनिया में आते हैं अ के नीचे उतरते हैं साधनों को मैं मानकर उसका उपयोग करके दिखा देते हैं लेकिन हम सिंधु वस्तुओं में अपने प्रियतम में मस्त रहने के लिए एकांतवास हो लघुभोजनादि उद्भव निर्माता करना वरुण चित्र प्रसाद को पाने के लिए एकांत और हम उस प्रियतम मित्र रहेंगे एकांत में अब अखाड़े में ज्यादा नहीं आ है इधर कविराज हो गए वेदांतिक जगत में बहुत लोगों ने जानते हैं
कि गिरिधर कविराय जी ने कहा थोड़े दिन के वास्ते कौन उपाधि करें किस जीवन के वास्ते जग में पश्चिम पश्चिम अरे ड्रा में देश में भय में विरोध में पहुंच रहे हैं ऐसे व्यक्तियों के साथ अगर साफ बसंत भी अधिक समय बने रहेंगे उत्सुक थोड़ा-बहुत थोड़ा बुअर लगती सब्सक्राइब हटाने गांव और और कोहली अकाउंट में जैसा मजा नेताओं को एक पहाड़ी नदी तालाब का किनारा एकांत जंगल झाड़ी यह जिज्ञासुओं के बीच उनको जितना आनंद आता है उतना संसार के बड़े-बड़े रईसों और आडंबर से जीने वाले व्यक्तियों के बीच नहीं आता वह संत चले गए को
एकांत मेरे गुरुदेव भी ताल में दो ढाई महीना नैनीताल के जंगलों में एकांत में निवास करते थे कि वे बात इसलिए कह रहा हूं कि कभी-कभी कृपानाथ आपने जो सुना है उसको मन्नत अधिकतम करने के लिए कभी मौन कभी एकांत तभी पवित्र जगह का अवलंबन लेकर अपनी निष्ठा बनेगी कि रुपया बनाया आपने शरीर बनाया मकान बनाया घर बनाया लेकिन यह सब बहुत कुछ चीजें हैं छोटी सी है कि यह बनाने के लिए आपका अवतार नहीं हुआ है कि आपका जन्म यह कुछ खिलौने बनाने के लिए नहीं हुआ आपका जन्म हुआ है अपनी वृत्ति बनाने के
लिए वृत्ति ऐसी बनाओ के व्रत क्यों से निवृत्त हो जाए जय राम जी कर्म ऐसा करो के कर्तृत्व काला हो जाएं भोग ऐसा भिगो साक्षी भाव से के उपभोक्ता का लो हो जाता है वह राज्य ऐसे दिलाओ कि समझ और समझाने वाला दोनों अपना स्वरूप में [संगीत] हुआ है [संगीत]