तो भाई लोग आ गई है कंगना रानावत स्टारर मूवी इमरजेंसी जिसकी हाइप कितनी है आपको तो पता ही है कुछ रीजंस के चलते बहुत बार डिले होने के बाद आज फाइनली यह थिएटर में आ चुकी है मैं देख चुका हूं और कैसा रहा मेरा एक्सपीरियंस आइए जरा बात कर लेते हैं वेल हेलो मेरा नाम है योगी और हमारी मुलाकात बार-बार होगी देखो सबसे पहले बता दूं कि मूवी हमारे इंडिया के एक ऐसे पॉलिटिकल हिस्ट्री को बया करती है जिसके बारे में आज की यंग जनरेशन बहुत कम जानती है और यह हमारे भारत देश के हिस्ट्री
में पॉलिटिकल हिस्ट्री में लिया गया एक बहुत बड़ा स्टेप था अब उस समय इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी क्यों डिक्लेयर करवाई थी और उसके फायदे और नुकसान क्या-क्या हुए क्यों उस समय लगाए गए इमरजेंसी को इंडिया के हिस्ट्री के किताब का काला पन्ना कहा जाता है एंड आज भी उसका इंपैक्ट हमारे देश पर कैसे पड़ रहा है क्या इमरजेंसी लगाना जरूरी था या सोची समझी गद्दी की लालच में की गई साजिश उसे जानने के लिए एंड अगर आप इंटरेस्ट रखते हो पॉलिटिकल ड्रामा देखने में तो आप य मूवी जरूर थिएटर में देख सकते हो लेकिन स्पेशली
स्पीकिंग अबाउट इंदिरा गांधी रोल मैं कहूंगा आज तक जितने भी एक्ट्रेसेस ने इंदिरा जी के रोल को प्ले किया है उन सब में कंगना का कैरेक्टर रोल प्ले एकदम सटीक लगता है ऊपर से इस फिल्म की डायरेक्टर भी वो खुद ही है एंड हमेशा ऐसा होता है कि जब आप अपने ही फिल्म में डायरेक्शन की कमान संभालते हो तब आप अपने किरदार को जितना परफेक्ट हो सके करना चाहते हो फॉर एग्जांपल फतेह मूवी में सोनू सूद ही खुद डायरेक्टर थे एंड वहां उन्होंने क्या कमाल किया था यह मुझे अलग से बताने की जरूरत नहीं है
और वैसा ही कमाल कंगना ने इस फिल्म में भी किया है अब देखो 1970 में कब क्या कैसे हुआ यह तो पर्सनली मुझे भी नहीं पता था आई मीन जाके तो मैंने देखा नहीं टाइम मशीन से जो कुछ भी पता है वो बस बस इसे एज अ मूवी की तरह देखने जिसमें इतने सारे माइंड ब्लोइंग एक्टर्स हैं कंगना रानावत श्रेयस तड़पे अनुपम खेर जी लेट श्री सतीश कौशिक जी लेकिन कंगना रानावत के बाद मेरा ध्यान अगर किसी ने खींचा है तो संजय गांधी के कैरेक्टर को प्ले करने वाले एक्टर ने उनका नाम आई थिंक विशाल
नायर है उन्होंने संजय गांधी का ओवर एंथू सियास्ट एंटी साइड वाला रोल बहुत अच्छे से निभाया है एंड उसके भी ऊपर सबसे सटीक कैरेक्टर लगा शम बहादुर का प्ले बाय मिलिन सोमन उनको बहुत दिनों बाद देखा एंड व्हाट अ पोट्रेयर भाई विकी कौशल वाला सैम बहादुर कैरेक्टर अपनी जगह है एंड मिलिन सोमन वाला चुम्मा भाई साहब क्या रा था ऊपर से इस फिल्म का बीजीएम भी इसके हर एक सीन को एलिवेटर है हां गाने ना भी होते तो भी चल जाता वो तो अच्छा हुआ कि गानों के साथ-साथ स्टोरी लाइन भी आगे बढ़ती है बट
आई डोंट थिंक सो कि इमरजेंसी जैसे मुद्दे पर सिर्फ एक फिल्म में ही बात करना इजी है क्योंकि वो हमारे पॉलिटिकल हिस्ट्री का एक बहुत बड़ा अध्याय है इस पर अगर सीरीज आती किसी ओटीटी प्लेटफार्म पर तो लोगों को डिटेल में पता चलता पर खैर इसी वजह से शायद मूवी मुझे थोड़ी रस्ट फील हुई बट ओवरऑल इट्स अ गुड पॉलिटिकल एंटरटेनर ऐसा मत समझ के चलना कि इसमें आपको मास मसाला एंटरटेनमेंट मिलेगा ना इट्स नॉट पुष्पा इट्स अ बायोग्राफिकल ड्रामा फिल्म जिसके लिए आपको थोड़ा बहुत पॉलिटिकल नॉलेज होना भी जरूरी है जिसमें आपको शायद पॉलिटिकल
नेता पता हो लेकिन इसमें उन सबका पॉलिटिक्स के साथ-साथ एक इमोशनल एंड इवन अग्रेसिव एंगल भी दिखाया गया है एंड हां मूवी 70 के एरा की है तो बैकग्राउंड्स कपड़े उनका रहन-सहन वगैरह बहुत अच्छे से आपको उस एरा का ही फील होगा जो कि एक अच्छी बात है बाकी देखो ओवरऑल देखते हुए एंड पॉलिटिक्स को ध्यान में रखते हुए यह देखने लायक मूवी तो जरूर है इवन नो वल्गर लैंग्वेज एट ऑल हां थोड़े ब्रूटल सींस है इसमें यार एक बच्चे वाला सीन है मार्को से भी खतरनाक वाला भाई रोंगटे खड़े हो गए थे मेरे तो
बच्चों से दूर रखेंगे इस मूवी को तो अच्छा होगा बाकी मेरी तरफ से मूवी को 3.5 आट ऑफ 5 स्टार्स मिलते हैं अगले वीडियो में बाय