[संगीत] नमस्कार प्रिय दर्शकों एक बार फिर आपका स्वागत है आपके अपने [संगीत] youtube1 कोवा ने बताया कि जो स्त्री अपने मायके से यह चार चीजें लेकर ससुराल जाती है उसके ससुराल में हमेशा लड़ाई झगड़ा लगा रहता है वह कभी सुखी नहीं रहती दर्शकों कहानी शुरू करने से पहले अगर आप हमारे चैनल पर पहली बार आए हैं तो चैनल को सब्सक्राइब करें बेल आइकन ऑन करें अच्छे-अच्छे कमेंट किया करें ताकि हर आने वाले वीडियो का नोटिफिकेशन सबसे पहले आपको मिले और प्रिय दर्शकों आप उसका फायदा उठा सकें तो शुरू करते हैं दर्शकों आज की यह प्यारी
सी कहानी यह प्यारा सा वीडियो प्रिय दर्शकों कुछ समय पहले की बात है किसी नगर में एक साहूकार जी रहा करते थे वह साहूकार बड़े ही धनवान थे उनके घर में किसी चीज की कोई कमी नहीं थी वह जो चाहते थे उन्हें मिल जाया करता था उनका व्यापार पूरे नगर में प्रसिद्ध था सभी लोग साहूकार जी की बड़ी इज्जत करते थे साहूकार की एक पत्नी और उनकी एक पुत्री थी प्रिय दर्शकों साहूकार जी की जो पुत्री थी वह बड़ी ही चंचल स्वभाव की थी वह अपने पिता से बड़ा प्रेम करती थी और प्रिय दर्शकों साहूकार
जी भी अपनी पुत्री से बहुत अधिक प्रेम किया करते थे जिस प्रकार एक पिता अपने बच्चों से प्रेम करता है अपनी पुत्र को लाड करता है उसी प्रकार वह साहूकार जी भी अपनी पुत्री से प्रेम करते थे प्रिय दर्शकों साहूकार जी की जो पुत्री थी वह बड़े ही जिद्दी स्वभाव की थी अक्सर वह अपने पिताजी से नई-नई वस्तुओं की मांग किया करती थी और वह साहूकार अपनी पुत्री की हर मांग को पूरा किया करता था वह पुत्री जो भी मांगती साहूकार जी उसे लाकर दिया करते थे क्योंकि प्र दर्शकों साहूकार जी अपनी पुत्री की किसी
भी इच्छा को मारना नहीं चाहते थे वह चाहते थे कि मेरी पुत्री हमेशा खुश रहे और जो वह चाहती है उसे मिले दर्शकों अब वह पुत्री बड़ी जिद्दी हो चुकी थी वह जो चाहती वह पहनती जहां जाना चाहती जिद करके चली जाती जो खाना चाहती वह खाती मतलब वह अपने माता-पिता की बिल्कुल भी नहीं सुनती उसकी मां जो कहती वह नहीं मानती उसके पिता जिस चीज के लिए रोकते वह उसे ही करती इस बात से अब वह साहूकार और उसकी पत्नी बड़े दुखी हो चुके थे बड़े परेशान हो चुके थे क्योंकि उनकी बेटी अब उनकी
कोई बात नहीं मानती थी प्रिय दर्शकों इस बात से साहूकार जी बड़ी टेंशन में रहते थे बड़े चिंतित रहते थे साहूकार जी के घर के बाहर एक आंगन था जिसमें एक बरगद का वृक्ष लगा हुआ था उस वृक्ष पर एक कोवा कई समय से रहा करता था प्रिय दर्शकों एक दिन की बात है साहूकार जी चिंता में डूबे हुए अपने आंगन में बैठे थे तभी वह कोवा साहूकार जी से कहता है कि आपको क्या चिंता है आप इतने उदास क्यों हैं साहूकार बताता है कि कौवा मेरी पुत्री बहुत जिद्दी हो चुकी है वह मेरी कोई
बात नहीं मानती है और जो वह करना चाहती है वह करके रहती है तब कोवा कहता है कि साहूकार जी लगता है आपने अपनी पुत्री को अधिक प्रेम करके बिगाड़ लिया है आज मैं आपको एक कहानी सुनाता हूं तब आपको पता चलेगा कि जो स्त्री जिद्दी हो जाती है और जो माता-पिता अपने बच्चों की हर इच्छा को पूरा करते हैं उनकी औलाद को आगे चलकर क्या दो उठाने पड़ते हैं प्रिय दर्शकों अब कोवा अपनी कहानी प्रारंभ करता है कोवा कहता है कि साहूकार जी एक समय की बात है किसी नगर में एक बड़े ही धनवान
सुनार रहा करते थे वह सुनार नगर में अपनी दुकान चलाया करते थे उनकी एक पुत्री थी वह पुत्री अब शादी के योग्य हो चुकी थी सुनार जी अपनी पुत्री के लिए एक अच्छे वर की तलाश में थे प्रिय दर्शकों सुनार जी की जो पुत्री थी वह बड़ी जिद्दी थी सुनार जी ने अपनी पुत्री की हर इच्छा को पूरा किया था वह जो मांगती सुनार जी उसे लाकर देते जो पहनना चाहती सुनार जी उसे अनुमति दे दिया करते पूरे लाड से सुनार जी ने अपनी पुत्री को बड़ा किया था परंतु अब उसके विवाह का समय आ
चुका था कुछ दिनों तक खोजने के बाद सुनार जी को एक बहुत अच्छा घर मिलता है अब सुनार जी अपनी पुत्री के विवाह के लिए उस घर में बात चलाते हैं रिश्ता पक्का होने के बाद अब सुनार की बेटी और उस लड़के का विवाह हो जाता है प्रिय दर्शकों कौवा आगे कहता है कि साहूकार जी वह लड़की बड़ी जिद्दी थी सुनार ने अपनी पुत्री की हार जिद को पूरा किया था बचपन से ही वह जो मांगती थी सुनार उसे लाकर दिया करता था सुनार इस बात को भूल चुका था कि उसकी इस बेटी को एक
दिन अपने ससुराल जाना है और ससुराल में अगर वह ऐसा व्यवहार करेगी तो वह जीवन भर दुखी रहेगी प्रिय दर शको अब विवाह हो जाता है और वह पुत्री अपने ससुराल चली जाती है इधर सुनार बड़ा प्रसन्न था वह सोच रहा था कि अब बेटी के विवाह का बोझ मेरे सर से हट चुका है मेरी बेटी का मैंने बहुत अच्छे घर में विवाह किया है उसके ससुराल वाले बड़े ही अच्छे हैं सास ससुर जेठ देवर सभी बहुत अच्छे हैं मेरी पुत्री को उसके ससुराल में अब किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होगी ऐसा सोचकर वह
सुनार अपने घर में आराम से बैठ जाता है सुनार और उसकी पत्नी बड़े प्रसन्न थे सुनार का पुत्र और सुनार की पुत्रवधू भी बड़े प्रसन्न थे प्रिय दर्शकों कोवा आगे कहता है कि साहूकार अब सुनार की पुत्री अपने ससुराल जाती है ससुराल वाले अपनी पुत्रवधू का बड़ा ध्यान रखते हैं उसका पति उससे बड़ा प्रेम करता है उसके सास ससुर उससे बड़े प्यार से बात करते हैं परंतु वह सुनार की बेटी कुछ जिद्दी स्वभाव की थी ससुराल में वह अपना स्वभाव नहीं बदलता है सुबह 10 बजे बजे सोकर उठती है भोजन के लिए कोई तैयारी नहीं
करती है रसोई में कदम तक नहीं रखती है कोई अगर उससे कुछ कहता तो वह पलट कर दो जवाब देती अपने सास ससुर की कोई इज्जत नहीं करती जो चाहती वह कपड़े पहनती किसी से कोई लाज शर्म नहीं करती अपने जेठ और अपनी नन से सारा दिन झगड़ा करती है क्योंकि प्रिय दर्शकों किसी की बात सुनने की उसकी आदत नहीं थी मायके में उसके माता-पिता ने बड़े लाड से उसको पाला था उसकी हर इच्छा को पूरा किया था अब उसकी ऐसी ही आदत बन चुकी थी धीरे-धीरे सुनार जी की बेटी अपने ससुराल में सभी से
झगड़ा करने लगती है ससुराल में आप कोई भी उसे पसंद नहीं करता था वह जिसके पास जाती वही उससे बात करना नहीं चाहता था प्रिय दर्शकों अब सुनार जी की बेटी के विवाह को दो महीने हो चुके थे और दो महीने में उसने अपने ससुराल में सभी से झगड़ा कर लिया था उसकी किसी से नहीं बनती थी अब सभी से परेशान होकर वह अपने पिता को फोन करती है और अपने पिताजी को फोन करके वह कहती है कि पिताजी मुझे तुरंत लेने के लिए मेरे ससुराल आ जाओ मैं यहां और नहीं रह सकती रोते हुए
वह इतनी बात अपने पिता से कहती है अब प्रिय दर्शकों उसके पिता पूछते हैं कि बेटी क्या हो गया क्या तुम्हें अपने ससुराल में कोई तकलीफ है क्या दामाद जी से तुम्हारा झगड़ा हुआ है परंतु प्रिय दर्श को सुनार जी की बेटी कुछ भी नहीं कहती है और फोन रख देती है अब इधर सुनार जी बड़े चिंतित हो जाते हैं वह अपनी पत्नी से कहते हैं कि हमारी बेटी का फोन आया था और उसने हमें लेने बुलाया है इतना कहते ही प्रिय दर्शकों सुनार जी भागते हुए अपनी बेटी के ससुराल जाते हैं क्योंकि एक पिता
के लिए अपनी बेटी की खुशी ही सब कुछ होती है और तो और सुनार जी ने अपनी बेटी को आज तक रोते हुए नहीं देखा था कभी उन्होंने अपनी बेटी की आंखों में आंसू नहीं आने दिए थे अब उनकी बेटी ने रोते हुए फोन किया तो सुनार जी दौड़ते हुए उसके ससुराल पहुंच गए बेटी के ससुराल में जाकर जब उन्होंने घर की बैल बजाई तो उनकी पुत्री की सांस गेट खोलने आई पुत्री की सांस ने गेट खोला तो सुनार जी ने अपनी समधन से नमस्कार किया परंतु पुत्री की सास ने कुछ भी नहीं कहा और
अंदर चली गई सुनार जी ने सोचा कि शायद हमारी बेटी का इनसे झगड़ा हुआ है अब सुनार जी घर के अंदर जा ते हैं और अपनी बेटी के ससुर से नमस्ते करते हैं परंतु प्रिय दर्शकों बेटी के ससुर भी अपने संधी से कोई बात नहीं करते हैं और कहते हैं कि अपनी बेटी को यहां से ले जाओ हम उसे अपने घर में नहीं रखना चाहते आपने जो दहेज दिया है जो धन दिया है वह सब हम आपको लौटा देंगे आपने शादी में जितना भी पैसा लगाया हम आपको ब्याज सहित वापस कर देंगे परंतु बस आप
अपनी बेटी को यहां से ले जाओ उसके साथ हमारा जीना बहुत मुश्किल हो गया है इतना कहकर प्रिय दर्श को सुनार जी के समधी अपने कमरे में चले जाते हैं अब सुनार अपनी बेटी के पास जाता है तो उसकी बेटी अपना बैग बांधकर और तैयार खड़ी थी वह कहती है कि पापा चलिए अब हम यहां नहीं रह सकते सुनार जी कहते हैं कि बेटा पहले अपनी सास से पूछ लो कि तुम हमारे साथ चल रही हो अगर वह अनुमति दे तो तुम चल देना तब सुनार जी की बेटी कहती है कि पिताजी वह तो एक
डायन है वह मुझे किसी बात की इजाजत नहीं देती है उसका तो मैं मुंह भी नहीं देखना चाहती हूं इतना कहकर वह अपने पिता का हाथ पकड़ती है और घर से बाहर आ जाती है प्रिय दर्शकों अब वह अपने पिता के साथ अपने पिहर के लिए चल देती है रास्ते में चलते-चलते सुनार जी अपनी बेटी से पूछते हैं कि बेटा तुम्हारी सांस कैसी है तुम्हारा उससे क्यों झगड़ा हुआ तो वह बेटी कहती है कि पिताजी उसकी तो बात मत करिए वह तो एक डायन है उसके साथ तो एक पल रहना भी मुश्किल है जब देखो
मुझे खाने को दौड़ती है तब सुनार जी पूछ पूछते हैं कि अच्छा बेटा यह बताओ तुम्हारे ससुर कैसे हैं तो उनकी बेटी कहती है कि पिताजी मेरे ससुर की तो बात मत करिए वह तो बहुत आलसी है पूरा दिन घर में पड़े रहते हैं और मुझे काम करने के लिए कहते हैं कभी कहते हैं चाय लाओ कभी कहते हैं खाना बनाओ उनसे तो मेरी बिल्कुल नहीं बनती है सुनार जी पूछते हैं कि बेटा जरा यह बताओ कि तुम्हारे पति कैसे हैं वह तो बड़े अच्छे होंगे तुमसे बड़ा प्रेम करते हैं तब उनकी बेटी कहती है
कि पिताजी मेरे पति तो राक्षस हैं पूरा दिन मेरे ऊपर चिल्लाते रहते हैं कभी मुझसे प्रेम से बात नहीं करते मैं अब उनके साथ नहीं रह सकती आगे सुनार जी पूछते हैं कि बेटा जरा यह बताओ कि तुम्हारे जेठ कैसे हैं तो उनकी बेटी कहती है कि पिताजी मेरा जेठ एक यमराज है ऐसा लगता है कि वह मेरी जान ले लेगा सारा दिन घर में बैठकर आराम करता है और हर बात पर मुझसे लड़ाई झगड़ा करता है सुनार जी पूछते हैं कि बेटा यह बताओ तुम्हारी नंद कैसी है वह तो तुम्हारी बहुत अच्छी सहेली होगी
तब सुनार जी की बेटी कहती है कि पिताजी मेरी तो बहुत चुगली करती है जब देखो मेरी चुगली करती है उसे और कोई काम नहीं है पूरा दिन बैठकर अपना मोबाइल चलाती है अब सुनार जी पूछते हैं कि बेटा यह बताओ कि तुम्हारे पड़ोसी कैसे हैं तुम्हारे आसपास रहने वाले लोग कैसे हैं तब सुनार जी की बेटी कहती है कि पिताजी सभी पड़ोसी हमेशा मुझे ताने मारते रहते हैं उनसे मेरी खुशी देखी नहीं जाती मैं जब भी घर से बाहर निकलती हूं तो ताने मारते हैं उल्टी बात करते हैं उनके साथ रहना तो बड़ा ही
मुश्किल है अब मैं कभी यहां लौटकर नहीं आऊंगी प्रिय दर्शको कोवा आगे कहता है कि साहूकार जी अपनी बेटी की सारी बातें सुनने के बाद सुनार जी को समझ में आ जाता है कि एक आदमी गलत हो सकता है दो आदमी गलत हो सकते हैं तीन आदमी गलत हो सकते हैं परंतु इतने सारे लोग गलत नहीं हो सकते ऐसा नहीं हो सकता कि मेरी बेटी सही है और बाकी सभी लोग खराब हैं सुनार जी अब अपने घर पहुंचते हैं घर पर पहुंचकर उनकी बेटी बड़ी प्रसन्न होती है वह घर के अंदर जाती है अपनी मां
से मिलती है और आराम करने लगती है अब सुनार जी की बेटी अपने पीहर में ही रहती है कई महीने बीत जाते हैं अब वह जो भी कार्यक्रम में जाती जिस रिश्तेदार से भी मिलती तो सब यही पूछते कि बेटा तुम्हारे पति कहां हैं तुम अपने ससुराल क्यों नहीं जाती हो अपने पिता के घर में क्यों रहती हो जो भी सहेली अब उससे मिलती तो वह यही पूछती कि बहन जीजा जी कहां है क्या वह तुम्हें लेने नहीं आए आखिर तुम अपने पापा के घर में क्यों रहती हो प्रिय दर्शकों धीरे-धीरे आस पड़ोस के लोग
भी अब उसे ताने देने लगे कहने लगे कि बेटा इस प्रकार अपने पिहर में पड़े रहना सही नहीं है तुम्हें अपने ससुराल जाकर अपने पति की सेवा करनी चाहिए अपने सास ससुर का ध्यान रखना चाहिए ऐसी बातें सुनकर सुनार जी की बेटी बड़ी दुखी थी वह आराम से अपने पिता के घर में रहना चाहती थी क्योंकि वहां उसे कोई काम नहीं करना पड़ता सारा दिन बैठकर टीवी देखती मोबाइल देखती और अपनी सहेलियों के साथ घूमने जाती अपने पिहर में उसे किसी प्रकार की कोई रोक टोक नहीं थी परंतु अब लोगों के ताने और आसपास के
लोगों की बातें सुनकर उसका स्वभाव चिड़चिड़ा होने लगा वह सोचने लगी कि अब तो मैं अपने पिता के घर में भी नहीं रह सकती यहां पर भी मुझे कोई सुख से नहीं रहने देता क्योंकि प्रिय दर्शकों अब उसकी जो भाभी थी वह भी मुंह बनाने लगी थी क्योंकि एक दो दिन तो सब पसंद करते हैं अगर नंद आकर एक दो दिन रहती है कुछ हफ्ते रहती है तो भाभियों को अच्छा लगता है परंतु महीनों महीनों तक अगर नंद पड़ी रहे पहर में ही आराम करती रहे तो कोई भी भाभी मुंह बनाने लगती है अब उसकी
भाभी भी कहने लगी कि तुम काम करो भोजन पकाओ और घर की सफाई करो परंतु प्रिय दर्शकों उसकी तो कोई आदत ही नहीं थी काम करने की वह तो सारा दिन बैठी रहती मित्रों के साथ घूमती और आराम करती यह देखकर सुनार जी भी बड़े चिंतित थे वह सोचते हैं कि मेरी बेटी का भविष्य बहुत अंधकार में है अगर इस प्रकार यह बैठी रही तो यह किसके सहारे रहेगी जब तक हम जीवित हैं तब तक तो हम अपनी पुत्री को पाल लेंगे परंतु हमारे बाद क्या होगा यह सोचकर सुंदर जी बड़े दुखी होते हैं और
गहरी सोच में पड़ जाते हैं अब वह एक योजना बनाते हैं और अगले दिन अपनी बेटी को अपने पास बुलाते हैं सुनार जी की बेटी आती है और कहती है कि पिताजी जल्दी कहिए क्या कहना है मैं अपनी सहेली के साथ मेले में घूमने जा रही हूं मेरे पास ज्यादा समय नहीं है तब सुनार जी कहते हैं कि बेटा तुम मेरी बात ध्यान से सुनो प्रिय दर्शकों सुनार जी कहते हैं कि बेटा कल मैं एक साधु महात्मा के पास गया था और मैंने साधु महात्मा से पूछा कि मेरी बेटी बड़ी दुखी है वह अपने ससुराल
में सुखी नहीं है कुछ बताइए कि मेरी बेटी किस प्रकार सुखी रह सकती तब बेटा मुझे साधु महाराज ने बताया कि तुम्हारी पुत्री को एक तपस्या करनी पड़ेगी छ महीने की एक तपस्या करने के बाद तुम्हारा जीवन सुखमय हो जाएगा उसके बाद तुम्हारे जीवन में कोई दुख तकलीफ नहीं आएगी तुम्हें कोई नहीं सताएगा तुम बड़ी प्रसन्न रहोगी और सारा ससुराल तुम्हारी मुट्ठी में होगा सभी लोग तुम्हारी बहुत इज्जत करेंगे तुम्हारा सम्मान करेंगे और कोई तुमसे लड़ाई झगड़ा नहीं करेगा अपने पिताजी की ऐसी बातें सुनकर वह पुत्री कहती है कि बताइए पिताजी मुझे क्या करना होगा
मैं यही तो चाहती हूं कि मेरे ससुराल के सभी लोग मेरे कहे अनुसार चले मेरा सम्मान करें और मुझसे प्रेम से बात करें तब सुनार जी कहते हैं कि बेटा तुम्हें छ महीने तक कुछ भी नहीं कहना है मौन व्रत करना है जो भी तुमसे कुछ कहे तो तुम्हें उसे हंसकर जवाब देना है किसी से लड़ाई झगड़ा नहीं करना है बेफिजूल की बातें नहीं करना है अगर तुम्हारी सास कुछ कहती है तुम्हारे ससुर किसी बात के लिए कहते हैं तो तुम्हें मुस्कुरा करर उनकी बात को मानना है तुम्हारा पति जो कहता है उस मन्ना है
अगर तुम ऐसा करोगी तो छ मही बाद यह सभी लोग तुम्हारे गुलाम बन जाएंगे और उसके बाद तुम जैसा कहोगी यह सब वैसा ही करेंगे पूरा ससुराल तुम्हारे इशारों पर नाचेगा तुम सबकी प्रिय बन जाओगी परंतु छ महीने तक तुम्हें सभी का सम्मान करना है सभी को इज्जत देना है और घर के सारे कार्य पूरे मन से करना है पूरा दिन मुस्कुराते हुए सभी को खुशियां देनी है प्रिय दर्शकों कोवा आगे कहता है कि साहूकार जी अब अपने पिताजी की इतनी बात सुनने के बाद उनकी बेटी बड़ी प्रसन्न होती है वह कहती है कि पिताजी
अगर ऐसी बात है तो मुझे और क्या चाहिए मैं यही तो चाहती हूं कि मेरा पूरा ससुराल वैसा ही करें जैसा मैं कहूं आप मुझे ससुराल लेकर चलिए मैं छ महीने तक किसी से झगड़ा नहीं कर करूंगी किसी को पलटकर जवाब नहीं दूंगी मेरी सासू मां मेरे ससुर जैसा कहेंगे मैं वैसा ही करूंगी अब प्रिय दर्शकों अपनी पुत्री की ऐसी बातें सुनकर सुनार भी बड़ा प्रसन्न था वह अपनी पुत्री का सामान लेकर और अपनी पुत्री के साथ तुरंत उसके ससुराल जाता है ससुराल पहुंचने के बाद वह अपनी पुत्री से एक बार फिर कहता है कि
बेटा मेरी बात याद है ना छ महीने तक सभी का सम्मान करना है सभी से प्रेम से बात करना है उसके बाद यह ससुराल तुम्हारा गुलाम होगा सुनार की पुत्री कहती है कि पिताजी आप चिंता ना करें मुझे पूरी बात याद है अब प्रिय दर्शकों सुनार और उसकी पुत्री ससुराल में पहुंच चुके थे सुनार अपनी पुत्री के ससुराल की घंटी बजाता है तब अंदर से उसके समधी गेट खोलने के लिए आते हैं और जब वह देखते हैं कि अपने पिता के साथ उनकी बहू आई है तो वह कहते हैं कि क्या समधी जी आपने अपनी
बेटी को क्यों लेकर आए हैं यह लड़की इस घर में रहने योग्य नहीं है हम इसके साथ नहीं रह सकते यह तो सारा दिन लड़ाई झगड़ा करती है घर का कोई काम नहीं करती है और हमारा सम्मान भी नहीं करती है आप इसे लेकर जाइए हम इसके साथ नहीं रह सकते प्रिय दर्शकों यह सुनकर सुनार जी की पुत्री को बड़ा क्रोध आता है वह अपने ससुर को दो बात सुनाना चाहती थी परंतु तभी सुनार जी आंखों ही आंखों में अपनी पुत्री को याद दिलाते हैं कि बेटा छ महीने तक सम्मान करना है और तुम्हें अपने
अनुष्ठान को याद रखना है तब सुनार जी की पुत्री को सारी बात याद आती है वह कहती है की ससुर जी मुझे माफ कर दीजिए मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई आप मेरे बड़े हैं मेरे पिता हैं मुझे आपका सम्मान करना चाहिए इतना कहकर वह अपने ससुर के चरणों में गिर जाती है और माफी मांगते हैं प्रिय दर्शकों अपनी बहू का ऐसा स्वभाव देखकर उसके ससुर उसे माफ कर देते हैं और कहते हैं बेटा कोई बात नहीं परंतु आप ध्यान रखना आगे से कोई गलती ना हो हम तो यही चाहते हैं कि तुम खुश रहो
प्रिय दर्शकों अब सुनार अपनी पुत्री को छोड़कर अपने घर चल देता है इधर सुनार की पुत्री अपनी सास के पास जाती है और कहती है कि मां जी मैं आ चुकी हूं इतना कहकर वह अपनी सांस के चरणों में झुक जाती है और कहती है मां मुझे आशीर्वाद दीजिए अपने पुत्रवधू का ऐसा स्वभाव देखकर उसकी सांस भी चकित रह जाती है क्योंकि प्रिय दर शको आज तक कभी उनकी बहू ने उनके पैर नहीं छुए थे आज पहली बार उसका ऐसा स्वरूप देखकर वह बड़ी प्रसन्न होती है वह कहती है कि बेटा खुश रहो अाई हो
तो सबके साथ प्रेम से रहना सभी का सम्मान करना दर्शकों अब अगले ही दिन से सुनार जी की बेटी अपने ससुराल का सारा काम करती है सुबह 5:00 उठकर पूजा करती है सभी के लिए नाश्ता बनाती है घर की सफाई करती है और अपने सास ससुर को दवाई गोली देती है प्रेम से भोजन खिलाती है और उनकी खूब सेवा करती है अपने पति से प्रेम से बात करती है उनके पसंद का भोजन बनाती है उनके कपड़ों को साफ करती है अपनी नंद से बड़े प्रेम से बात करती है अपने जेठ का सम्मान करती है यह
देखकर उसके ससुराल वाले बड़े प्रसन्न होते हैं जब उनके पड़ोसी देखते हैं कि उनकी बहू सुबह जल्दी उठकर पूजा करती है सारे दिन घर का काम करती है तो वह भी उसकी बहुत बढ़ाई करते हैं उसका बड़ा सम्मान करते हैं इस प्रकार प्रिय दर्शकों एक महीने तक वह इसी प्रकार से सभी का सम्मान करती है पूरा काम करती है और सभी से प्रेम से बात करती है उसका ऐसा स्वरूप देखकर उसकी सास घर की तिजोरी की चाबी अपनी बहू को दे देती है और कहती है बेटा तू तो साक्षात लक्ष्मी है इस घर की सारी
जिम्मेदारी तुझे ही उठानी है आज से मैं यह जिम्मेदारी तुझे देती हूं इस प्रकार प्रिय दर्शकों घर की तिजोरी की चाबी अब सुनार जी की पुत्री के हाथ में आ चुकी थी और सभी लोग उससे बड़ा प्रेम करने लगे थे सभी का प्रेम पाने के बाद उसका मन भी बदल जाता है वह सोचती है कि पिताजी ने बिल्कुल सही कहा था अभी तो एक ही महीना हुआ है और यह सब मेरी इतनी इज्जत करते हैं मेरा सम्मान करते हैं मैं जैसा कहती हूं वैसा ही करते हैं सब कुछ कितना आसान था परंतु मैं मूर्ख थी
जो मैंने सभी से झगड़ा किया प्रिय दर्शकों अब सु नार जी की पुत्री छ महीने के बारे में भूल जाती है उसका तो स्वभाव ही ऐसा हो चुका था वह पूरा जीवन इसी प्रकार बिताना चाहती थी सभी का सम्मान करते हुए अपने पति से प्रेम करते हुए सास ससुर की इज्जत करते हुए अब कुछ दिनों बाद सावन का महीना आता है और सावन के महीने में उसका भाई उसे लेने आ जाता है सुनार जी कहते हैं कि बेटा जाओ अपनी बहन को लेकर आओ रक्षाबंधन आने वाला है अब प्रिय दर्श को जब वह भाई अपनी
बहन के घर पहुंचता है तो उसका बड़ा स्वागत होता है सभी लोग उसके सम्मान के लिए खड़े थे उसे नाश्ता कराया जाता है खाना खिलाया जाता है यह देखकर वह बड़ा प्रसन्न होता है सोचता है कि मेरी बहन की तो ससुराल में बहुत इज्जत है अब वह अपनी बह बहन की सास से कहता है कि मां जी मैं अपनी बहन को लेकर जाना चाहता हूं रक्षाबंधन का त्यौहार है तब सुनार जी की बेटी भी अपनी सास से अनुमति लेती है कि मां क्या मैं अपने भाई के साथ जा सकती हूं तब उसकी सास कहती है
कि बेटा तुम बिल्कुल जा सकती हो परंतु जल्दी आ जाना अब तुम्हारे बिना इस घर में मन नहीं लगेगा तुम इस घर की लक्ष्मी हो अगर तुम चली जाओगी तो यह घर बहुत सुना हो जाएगा हम सब तुम्हारे बिना नहीं रह सकते तुम जल्दी यहां आ जाना उसकी सास उसके भाई से भी कहती है कि बेटा रक्षाबंधन के बाद अपनी बहन को वापस छोड़ने जरूर आना अब प्रिय दर्शकों सुनार जी की बेटी अपने भाई के साथ अपने पिहर के लिए चल देती है कुछ ही देर में वह अपने पिहर पहुंच जाती है पीहर में पहुंचते
ही उसके पिताजी उसकी मां और उसकी भाभी उसका बहुत वागत करते हैं क्योंकि बड़े दिनों बाद अब वह पीहर आई थी सावन का महीना था सभी बड़े प्रसन्न थे सुनार अब अपनी बेटी से पूछता है कि बेटा बताओ तुम्हारे ससुराल में सब कैसा है तुम्हारी सांस तो एक डायन थी क्या वह सुधर गई अब कुछ दिनों की बात और है उसके बाद छ महीने पूरे हो जाएंगे सब तुम्हारे गुलाम बन जाएंगे अपने पिताजी की ऐसी बातें सुनकर उनकी बेटी कहती है कि पिताजी आप तो बहुत गलत बोल रहे हैं मेरी सास एक डायन नहीं मेरी
मां है वह तो बहुत अच्छी है मेरा बहुत ध्यान रखती है बड़े प्रेम से बात करती हैं और छ महीने वाली बात तो मैं कब की भूल चुकी हूं मैं तो अपना सारा जीव जीवन इसी प्रकार बिताना चाहती हूं मुझे सबका प्रेम चाहिए सबका साथ चाहिए मुझे किसी को गुलाम नहीं बनाना है तब सुनार जी पूछते हैं कि बेटा तुम्हारे ससुर तो एक राक्षस थे वह तो तुमसे बहुत झगड़ा करते थे अब वह कैसे हैं तब सुनार जी की बेटी कहती है कि पिताजी वह तो बिल्कुल आपके जैसे हैं वह तो मुझे आपसे भी ज्यादा
प्रेम करते हैं मेरा बहुत ध्यान रखते हैं और मेरी बहुत तारीफ भी करते हैं सुनार पूछता है कि बेटा तुम्हारा पति तो बहुत बुरा था वह तो तुमसे प्रेम से बात नहीं करता था क्या वह सही है तो सुनार जी की बेटी कहती है कि पिताजी मेरे पति तो बहुत अच्छे हैं मुझे बहुत प्रेम करते हैं मेरा सम्मान करते हैं और मेरा ध्यान भी रखते हैं अब मुझे किसी से कोई समस्या नहीं है मेरे पड़ोसी मेरी नंद मेरा देवर और मेरे जेठ सब अच्छे हैं मैं इस बात को भूल गई थी कि कमी मुझ में
है परंतु अब मुझे समझ में आ चुका है कि अच्छे स्वभाव वाले इंसान के साथ सभी अच्छा स्वभाव करते हैं मैंने अपनी गलती को सुधार लिया है अब मुझे किसी से कोई शिकायत नहीं है प्रिय दर्शको सा वन के बाद अब सुनार जी की बेटी अपने ससुराल लौट जाती है ससुराल में सभी लोग उसकी प्रतीक्षा कर रहे थे अब वह आगे का जीवन बड़े सुख से सबके प्रेम के साथ बिताती है प्रिय दर्शकों इतनी कहानी वह कोवा साहूकार को सुनाता है वह कहता है कि देखा साहूकार किस रकार एक जिद्दी लड़की एक बिगड़ी हुई लड़की
अपना जीवन नष्ट कर सक है अपने जीवन को नर्क बना सकती है परंतु अगर किसी मां-बाप ने अपनी पुत्री को सही संस्कार दिए हो उसकी हर बात को मानने के बजाय उसकी सही बात को माना हो और उसे सही रहा दिखाई हो तो ऐसी पुत्रियां अपने ससुराल को स्वर्ग बना देती हैं और खुद साक्षात लक्ष्मी का रूप होती है अब मैं तुम्हें बताता हूं कि स्त्री को यह चार चीज कभी भी अपने मायके से अपने ससुराल लेकर नहीं जाना चाहिए अगर कोई लड़की यह चार चीज लेकर अपने ससुराल जाती है तो उसके ससुराल में लड़ाई
झगड़ा लगा रहता है नंबर एक घमंड अगर कोई स्त्री अपने पिता के धान का घमंड या अपने भाई का घमंड करके ससुराल में ले जाती है तो उसे कोई इज्जत नहीं मिलती वह अपने घमंड में अपना जीवन वन नष्ट कर लेती है नंबर दो अपनी जिद और हट करने की आदत अगर कोई स्त्री बहुत जिद्दी हो हट करती हो और इस आदत के साथ वह अपने ससुराल जाती है तो उसका ससुराल नरक बन जाता है क्योंकि प्रिय दर्श को जिद्दी बहू को पाकर कोई भी घर सुखी नहीं रहता बहू तो जितनी कोमल हो जितना अपने
आप को दूसरी परिस्थितियों में ढाल सके उतना अच्छा होता है अक्सर घर में लड़ाई झगड़े इसीलिए होते हैं क्योंकि बहु जिद्दी और घमंडी होती है ज्यादातर ससुराल तो अच्छे ही होते हैं और वह अपनी बहू को अपनी पुत रव दू को अपनाने के लिए तैयार होते हैं नंबर तीन अधिक धन खर्च करने की आदत अक्सर स्त्रियां अपने पिता के घर में अधिक धन खर्च करती हैं उन्हें कोई नहीं रोकता क्योंकि माता-पिता अपनी पुत्री से बहु बहुत अधिक प्रेम करते हैं परंतु इसी गलती के कारण उनकी पुत्री की आदत हो जाती है कि वह बिना काम
के धन को खर्च करती हैं अपने शौक करती हैं और जब वह अपने ससुराल जाती हैं तो उन्हें इस बात को लेकर बड़ी कठिनाई आती है ससुराल में उनके नखरे कोई भी नहीं उठाना चाहता इसीलिए उनके ससुराल में लड़ाई झगड़े होते हैं नंबर चार मित्रों के साथ घूमने की आदत बाहर जाने की आदत प्रिय दर्शकों अपने माता-पिता के घर में स्त्रियां अपने मित्रों के साथ जाती हैं अपनी सहेलियों के साथ पूरा दिन बाहर घूमती रहती हैं घर का काम नहीं करती परंतु ससुराल में जाते ही अगर कोई स्त्री ऐसा करती है तो उसके ससुराल में
लड़ाई झगड़े होते हैं उसके सास ससुर कहते हैं कि बेटा घर का काम करो घर में रहो पर तु अपनी आदत के कारण स्त्रियां अपने आप को नहीं बदल पाती हैं इसमें अक्सर उनके मां-बाप की गलती होती है जो अपनी पुत्री को कोई काम करना नहीं सिखाते प्रिय दर्शकों इतनी कहानी इतनी बातें वह कोवा साहूकार को सुनाता है और साहूकार को अपनी गलती का एहसास हो जाता है अब वह अपने घर जाता है और अपनी पुत्री को सही संस्कार देता है उसे समझाता है कि बेटा इस प्रकार की जिद नहीं करते और कुछ दिनों में
उसकी पुत्री भी एक संस्कारी कन्या बन जाती है तो प्रिय दर्शकों हमारी आज की यह कहानी यहां समाप्त होती है हम उम्मीद करते हैं कि आपको हमारी आज की यह कहानी पसंद आई होगी और आप इससे ढेर सारी प्रेरणा एं लेंगे मिलते हैं अगली ज्ञान चर्चा के साथ अगले वीडियो में तब तक के लिए नमस्कार धन्यवाद m [संगीत]