हल्दी घाटी के युद्ध के बाद राजपूतों में नई आशा और चुनौतियां दोनों समाहित थी महाराणा प्रताप की सेना फिर से संगठित हो रही थी पर सैनिकों में बीमारियां फैलने के डर ने माहौल को गंभीर बना दिया था एक अनुभवी सिपाही सालार ने उत्सुकता से कहा हमें ऐसे सुरक्षित क्षेत्र की ओर बढ़ना चाहिए जहां रसद मिले और अनुशासन बना रहे पर मानसिंह ने कठोरता से उत्तर दिया हमारा कर्तव्य यहां रुकना है गोगुंदा की रक्षार्थ यही सही समय है महाराणा प्रताप ने मौन में स्थिति को समझते हुए दो दिनों की प्रतीक्षा की जब मुगल सेना की गतिविधियां
थम गई एक ही हल्ले में उन्होंने गोगुंदा पर अधिकार कर लिया जिससे उनकी रणनीति की गहराई साफ दिखाई दी अकबर के पास खबर पहुंचते ही क्रोध भरा आदेश आया और मानसिंह को अजमेर आने का निर्देश दिया हालांकि इस विफलता के बावजूद महाराणा प्रताप की सासिक चाल ने राजपूतों में फिर से उम्मीद जगाई उनका यह संघर्ष वीरता और बलिदान का प्रतीक बनकर इतिहास में अमर हो गया शेयर योर थॉट्स इन द कमेंट बॉक्स