दुनिया की कितनी भी सुविधा मिल जाए अंत में जीव को शांति या परम सुख अपने के लिए तो अंतर्मुख होना ही पड़ेगा किसी फकीर की शरण जाना ही पड़ेगा ऐसा कोई मनुष्य नहीं जो पूरा का पूरा हाल किसी दूसरे साथी को बता दें पत्नी होगी तो कुछ ना कुछ पति से छुपा कर रखेगी पति होगा तो कुछ ना कुछ पत्नी से छुपा कर रखेगा चाहे फिर बैंक बैलेंस हो चाहे और किसी की दोस्ती की बात भाई से भी कुछ ना कुछ चपटा है और मित्र मित्र से भी कुछ ना कुछ चपटा है एक संत है
जो अपना करोड़ जनों का धन पाया है मेहनत करके और करोड़ अर्बन रुपया खर्च फिर भी वो आत्म धन नहीं मिल सकता ऐसे धन को निखलता से खुला आम हर व्यक्ति को अपना दिल खोलकर धार देता है यह संत का स्वभाव होता है दूसरे का है शेर के दांत में आया हुआ शिकार तो शायद कहानी फेल हो सकता है लेकिन संत के हृदय में आया हुआ सड़क फेल नहीं हो सकता डर से दे सकता [संगीत] हूं [संगीत] जो तृषा मां पिता ज्योति ज्योतिष मत ज्योति तमसा परम उच्यते नमः भगवान [संगीत] को दूर कब तक खोजोगे
उसे भगवान को करने को देखने के लिए [संगीत] लेकिन बुद्धि हमारी सही है की नहीं है इसको देखने वाला मैं वह आत्मा मैं वो ज्योतिया की ज्योति है अंधकार से पैर है यार चिट्ठी चल रहा है दादा जो जो देखो काका ओ सामने फ्लैट है ना उसके इसके दाएं तरफ वो पेड़ है ना पेड़ की डाली के इधर को वो काली बदली है चंद देखा लेकिन कौन से चंद से देखा आज से देखा नहीं आपको ठीक से नहीं दिखे रहा था मां की एकाग्रता हुई बुद्धि में थोड़ी सूक्ष्मता हुई और तुम्हारा मैं मैं उसमें जुड़ा
चंद ठीक देखा नहीं देखा अंधेरा है बदली का प्रभाव चंद नहीं देखा ना देखने को भी तू देख रहा है और देखने को भी तू देख रहा है सो साहब शुद्ध सदा हजूर अंधा जनता को दूर है मारेंगे फिर किसी लोक में जाएंगे भले जो माना नहीं है लेकिन सारे लोग इसी लोकेश्वर से दिखेंगे यह स्वर्ग है की नहीं यह तुम्हारे को इस ज्ञान स्वरूप आत्मा से दिखेगा यह भगवान है की नहीं भगवान ए गए उसको देखने वाला आत्मा भगवान चाहिए ये संत है पहुंचे हुए की नहीं पहुंचे हुए उसको देखने वाला भी तुम्हारा पहुंच
हुआ आत्मा तो चाहिए भाई मेहनत की कमी नहीं है ज्ञान की कमी है पैसों की कमी नहीं है ज्ञान की कमी सुख की कमी नहीं है ज्ञान की कमी है जब तक ब्रह्मज्ञान की कमी रहेगी तब तक चाहे समाज में कितने ही आविष्कार हो जैन कितनी सुविधा ए जाए फिर भी आदमी तनाव में जिएगा और शांत जिएगा दुख में जिएगा [संगीत] राजा भारत राज वैभव का सुख भोग कर आखिर इस नतीजा पे आए की दुनिया की कितनी भी सुविधा मिल जाए अंत में जीव को शांति या परम सुख अपने के लिए तो अंतर्मुख होना ही
पड़ेगा किसी फकीर की शरण जाना ही पड़ेगा जय राम जी बोलना पड़ेगा राजा भारत राजपथ छोड़कर फकीरी वेस्ट धरण करके गंदगी नदी के किनारे एक कुटियावांकर ध्यान भजन करते थे गुरु की प्रेरणा के अनुसार तर्पण आदि स्वच्छ वातावरण में रहते थे जहां इंद्रियों के भोग और आकर्षण बहुत है वहां ध्यान भजन में प्रगति करने में बहुत मेहनत होती है लेकिन जहां वातावरण ध्यान भजन का होता है वहां आराम से आदमी का ध्यान भजन उपक होता है ध्यान भजन करते-करते राजा भारत जो भगवान के रास्ते चला है एक समय की बात है राजा भारत गंद की
नदी में स्नान करते समय सूर्य को अरघा दे रहे थे सूर्य को आर्ग देने से शौर्य केंद्र का थोड़ा विकास होता है आरोग्यता और बुद्धि शक्ति में मदद मिलती है बच्चों को याद शक्ति बढ़ाने के लिए भ्रमारिक प्राणायाम करने से उनकी सुमिरन शक्ति बढ़नी है कानों में उंगली ऐसे डेल की ज्यादा दबाव ना हो और बाहर का आवाज ना आए ऐसे दोनों उंगली दाल दे गहरा श्वास ले और फिर नाक से ओंकार का गुंजन करें [संगीत] [संगीत] डर होने के करण उसका बच्चा नदी नहीं गिर पड़ा और वह नदी के उसे किनारे गिर पड़ी और
मा गई भारत राजा को दया है की उसकी मां तो मा गई इस नन्हे मुन्नी बच्चे का और कोई नहीं उसको संभल लिया राजा ने दया करना अच्छा है लेकिन दया के साथ सावधानी नहीं होती तो दया डाकन बन जाति जय राम जी की रन कोलायत श्रीमद् भागवत की कथा है [संगीत] [संगीत] लेकिन आत्मा का जो मजा आता है वह उतार जाता है छठ जाता बंधन उसे भरतरी को आसक्ति ने बंद लिया मैं नहीं होता तो इसका क्या होता जय राम जी तो बोलना पड़ेगा इस बेचारे की मां भी तो मैं हूं आप भी तो
मैं हूं भारत संध्या करते हैं ध्यान करते हैं लेकिन सोते कहानी इसको कुत्ता एन फाड़ दें कहानी जंगली जाए ध्यान उधर खींच गया दया कारी हिरण को ले कोई घाट नहीं लेकिन ध्यान जो जहां देना चाहिए जहां वहां नहीं दिया और संसार तो चला राहत है उधर ही ध्यान लगा दिया भरतरी की आयु से पुरी हुई लेकिन मिल से पुरी हुई चिंतन उसे हिरण का हुआ हिरण के चिंतन चिंतन में भारत राजा दूसरे जन्म में हिरण हुआ ध्यान भजन व्यर्थ नहीं जाता है एकदम दूसरे हिरना से अलग सा राहत है उसके आयुष्य पुरी हो गई
फिर किसी ब्राह्मण के घर जन्म हुआ देव योग से उन ब्राह्मण ने अपने बेटे का नाम भारत रख दिया लेकिन उसको अगले जन्म के राजा होने की शुद्ध ठेके राजपथ छोड़ना है आज सतीश छोड़ना कठिन है अब मैं मिलजुल कर यारी दोस्त तारी बढ़कर अगर कहानी आसक्त हो गया तो फिर फस मारूंगा एक बार हिरण में ए शक्ति होने से हिरण का जन्म मिला तो अभी यारों में ए शक्ति होने से कहानी दूसरे जन्म में है यार की मिसेज ना बानो यार का बेटा ना बन जाऊं प्यार का पोता ना बन्ना पड़े इसलिए वह भारत
ब्राह्मण का पुत्र भारत जड़ जैसा रहने लगा माता पिता ने देखा की कुछ बोलना ही नहीं अंदर से बड़ा सावधान गुरु का उपदेश मिला था वह संस्कार पड़े थे आत्मा अनुसंधान करने लगा श्वास अंदर जाए सो बाहर आए हम जिसकी शक्ति से आंख देखते है कान सुनते हैं जब चक्की वो मैं हूं मां को दुख होता है की सुख होता है उसको देखने वाला मैं हूं सो हम राजा भारत हिरण भारत अब जड़ भारत लेकिन इस समय वो सज्जन है जी हिरण को पाल के पूछते पूछते मा गए थे उसे हिरण को तो बहुत सारे
जन्म लेने थे लेकिन साधु का स्पर्श मिला साधु उसकी भलाई का चिंतन करता था वह हिरण मार्कर दूसरे जन्म में रघुगान राजा हुआ है ऐसे तो बहुत सारे उसको जन्म लेने चाहिए थे हिरण में से सीधा राजा बन्ना संभव बहुत कम होता है स्पर्श वाइब्रेशन उसके सारे कलमास कैट चुका था वो जो हिरण था जो मां चलांग मार्कर गंदगी नदी में अपने गर्भ को गिरा दी थी मां ने वो अनाथ जिसकी हिरण भी मां नहीं रही ऐसा अनाथ हिरण साधु के सॉन्ग से सनात बना है लाखों लोगों का स्वामी बना है राहुगन राजा रघु राजा
को भारत जब हिरण तारा होगा तब भारत का संघ हुआ तो संत के संघ की एक अंदर में जो बात ही लालच थी वो रघु राजा बने पर भी उसे संतो के सॉन्ग आकर्षण बना रहा आयुर्वेद का ग्रंथ चरक संहिता में आता है के मनुष्य पर अपने मां-बाप के अपने दादा दादी के अपने नाना नानी के भी संस्कार पढ़ने हैं और जिसका ज्यादा दिव्या संग स्पर्श है उसका भी संस्कार पढ़ना है जीव पर तो ज्यादा से ज्यादा माता-पिता भी हूं वो भारत थे और साधु संत स्वयं थे तो उसे हिरण पर जो संस्कार पड़े उसे
संस्कार के प्रभाव से वो राघौगन राजा हुआ और रघु राजा साधु संघ में बड़ी प्रीति करता था वैभव भगते हुए भी अंदर से उसकी एक खटक रहती थी कमी रहती थी की परम शांति इन चीजों से नहीं मिलेगी कितना भी खिलाया शरीर को कितना भी घुमाया कितना भी अंत में शरीर दफन दिया जाएगा अग्नि दान दे देंगे उसके पहले कोई संत मिल जाए और मेरे को अपने अनुभव का दान दे दे तो कितना अच्छा होगा [प्रशंसा] इस प्रकार उसके अंदर में यह लगन लगी रहती थी महाराज महात्माओं का संघ निर्मल होता है दुनिया का व्यवहार
जो चला है वो कूटनीति से चला है ऐसा कोई मनुष्य नहीं जो पूरा का पूरा हाल किसी दूसरे साथी को बता दें पत्नी होगी तो कुछ ना कुछ पति से छुपा कर रखेगी पति होगा तो कुछ ना कुछ पत्नी से छुपा कर रखेगा चाहे फिर बैंक बैलेंस हो चाहे और किसी की दोस्ती की बात भाई से भी कुछ एन कुछ चपटा है और मित्र मित्र से भी कुछ एन कुछ चपटा है एक संत है जो अपना करोड़ जनों का धन पाया है मेहनत करके और करोड़ अर्बन रुपया खर्च फिर भी वो आत्म धन नहीं मिल
सकता ऐसे धन को निखालस्ते निखालस्ता से खुला आम हर व्यक्ति को अपना दिल खोलकर धार देता है यह संत का स्वभाव होता है दूसरे का है अमोघ है साधना की सेवा पाव संसार में कोई कितना भी प्रेम दिखाएं लेकिन महाराज पूरा हृदय खोलकर तो नहीं रख सकता है और हृदय खुलेगा तो आज्ञा वाला हृदय होगा लेकिन जिसको ब्रह्मज्ञान हुआ है उसका ज्ञान वाला हृदय तो खुला आम लोगों के आगे खुलना राहत है ऐसे महापुरुषों का असर है दुर्लभ हो महत्वपूर्ण होता है शेर के दांत में आया हुआ शिकार तो शायद कहानी फेल हो सकता है
लेकिन संत के हृदय में आया हुआ सड़क फेल नहीं हो सकता डर साबिर सफल हिरण इतना सफल हो सकता है तो फिर सिंधी साइंस सफल हो जाए तो क्या भारी बात है [संगीत] [संगीत] भगते हुए भी अंदर की कोई कमी महसूस कर रहे थे मूर्ख आदमी कब मृत्यु का झटका तेरा सर्वस्व छन ले बोलना है नो प्रॉब्लम आई हैव तू तू मेंस तू फैक्ट्री बॉयज तू बेबीस आई एम वेरी हैप्पी वेरी लकी अरे लकी क्या इन चीजों को प्रकार तू लकी समझना है ये कब चीज छठ जाए और चीजों का हां गर्व करने वाला शरीर
छठ जाए कोई पता नहीं यार तू लकी तो तब है जब महापुरुष के अनुभव को अपना अनुभव बना दे ब्रह्म ज्ञानी के गुरु के ज्ञान को अपना ज्ञान बना ले रब का हृदय में साक्षात्कार कर ले तू तो लकी और तेरी निगाहें पड़े हुए भी लकी हो जाएंगे यार ब्रह्म ज्ञानी की दृष्टि अमृत वर्ष की ब्रह्मज्ञानी मुक्त जगत का डाटा ब्रह्म ज्ञानी पूर्ण पुरुष विधाता ब्रह्म ज्ञानी की मत कौन लकी नहीं तो बेवकूफी से लकी मां ले तो मां ले बाकी कुछ भी नहीं जैसे बच्चा मुन्ना कहता है चॉकलेट मिल गया लॉलीपॉप मिल गया बेवकूफ
कौन है की जिसको बेवकूफी का पता ना चले जय राम जी की एक बेवकूफ था उसकी औरत भाग गई औरत को खुद से किसी गांव में पहुंच सुबह 5:00 बजे भाग था 7:00 बजे किसी पड़ोस के गांव में पहुंच मेरी औरत यहां तो नहीं आएगी उसको बाथरूम करना था सिटी मारना था एक को करूंगा सलवार ऊंची करके पनघट के सामने पिचकारी करने लगा जहां माहिया पानी बरसे एक बुद्धि मेन कहा के ए भैया तेरा नाम क्या है बोले बेवकूफ बोले इस गांव में तेरे को हम पहले बार देखते हूं और ऐसे सलवार ऊपर करके पिचकारी
मार रहा है खड़े-खड़े महिलाएं पानी भर रही है तेरा नाम क्या बोले बेवकूफ तो क्यों आया इस गांव में बोले मेरी औरत को खोजना पाया औरत का नाम क्या है मैं खूब हंसी अरे बेवकूफ तू फजती को खोजना आया है तू तो जहां जाएगा वहां तेरी फजेटी होगी तेरा व्यवहारी ऐसा है की तेरी फजिती हो जाएगी तो जब तक आत्मज्ञान नहीं हुआ तब तक मां इन चीजों को प्रकार अपने को सुखी मानता ही उसकी बेवकूफी है और उसकी फजिती होती रहती है मृत्यु आता है झटका मार देता है सब यहां पड़ा र जाता है रावण
हो गया ये फजिती नहीं तो क्या है फिर दूसरे जन्म में पिता की शीश ना से पसार हुआ माता के गर्भ में गुस्सा मासिक धर्म का खून किया और अंदर पड़ा रहना मैंने पछता रहा अगर भागने में ये फज्जती नहीं तो क्या है जब तक बेवकूफी रहेगी तब तक फज्जती तो साथ आएगी मैं बेवकूफी मिटाने के लिए महात्माओं के शरण जाऊं सत्पुरुषों का सॉन्ग अमोघ होता है वह महापुरुषों का संघ पसंद करते थे कपिल देव उसे समय महापुरुष प्रसिद्ध महापुरुष थे उनके आश्रम में जान के लिए राजा राघोगढ़ डोली में बैठकर कपिल देव के चरणों
में सत्संग करने के लिए जा रहे थे डोली उठाकर चल रहे थे उसमें से एक का हर डोली उठाने वाला बीमा पद गया है तो वही जड़ भारत ब्राह्मण अटैक सोहन की मस्ती में जंगलों में विचारण करने वाले मिल गए पकड़ कर ले का हर जड़ भारत को जोत दिया डोली उठाने में राजा बना बैठा है और यह जड़ भारत कहारों के साथ जुड़ गए हैं देखो कर्म की गति कैसे ऊपर और नीचे शरीर का संबंध बना देती है लेकिन समझ अभी भी उनकी [संगीत] तीन का हर तो ठीक चलते थे लेकिन यह चौथ जो
जड़ भारत थे ब्रह्मज्ञानी का हर उन्होंने कभी डोली उठाई नहीं थी और नानी की चल के साथ चलने की कोई प्रैक्टिस नहीं की थी वो अपने ढंग से चलते थे और कई कीड़ी मकोड़े यहां कोई जीव जंतु का भास होता तो वहां उनको बचाने के लिए जरा जंप मार देते और जंप मार देते तो डोली में बैठा हुआ राहुगन का सर टकराता रघुनातने लगे कहारों को दांते दांते रहो गण गुस्से में हो गए तब बहारो ने कहा की राजन हमारे कसूर से आपको चोट नहीं लगती उसको चलना नहीं आता राहु गण राजा ने धमकाया मैं
नगर का सम्राट हूं मेरी सेवा करना नगर वीडियो का कर्तव्य है तू मेरे जंगल में राहत है पागल तुझे आराम से ठीक ढंग से चल चलनी चाहिए लेकिन भारत ने जड़ भारत में कोई उत्तर नहीं दिया फिर कहानी कीड़ी मकोड़ा का बिल आया खुदा फिर रघुवर जड़ भारत को दही की मेरे कंधे पर बैठा है फिर नरक में जाए तो अच्छा नहीं देखो दयालु संत कितने उधर होते हैं राहुगन की माटी में कुछ प्रकाश हो ऐसा सोचकर जड़ भारत बोले की तुम बोलते हो मैं मार डालूंगा मैं नीचे उठेगा खाल खींच दूंगा मार दूंगा मार
दूंगा राजन तुम किस को मारोगे एक मिट्टी का पुतला उसे पर है मिट्टी का पुतला मिट्टी का पुतला मिट्टी के पुतले को मारेगा इसमें मेरा क्या बिगड़ेगा राजा ने देखा की यह तो कोई ब्रह्मा ज्ञानी बोल सके ऐसी बात है शास्त्र संवत अनुभव युक्त वचन है जो चमड़ा उतारने की धमकी दे रहा था हंटर करने की धमकी दे रहा था वह राजा राहु गंजाम कुमार के डोली से नीचे उतरा प्रणाम किया भोग भगवान है प्रभु मुझे बालक की गलती माफ करना आप कोई ब्रह्मज्ञानी संत मालूम होते हैं मैं तो कपिल देव के आश्रम में शांति
अपने के लिए जा रहा था लेकिन आप तो चलते फिरते शांति के पावर हाउस मालूम होते हैं मैंने इतना दांत धमकाया फिर भी आपने करुणा करके मुझे ब्रह्म ज्ञान का उपदेश दिया महाराज आप अपना परिचय दीजिए मेरा परिचय इन आंखों से नहीं दिया जाएगा मेरा परिचय इस वाणी से नहीं मेरा परिचय जो मेरे को जानता है वही मेरा परिचय का सकता है [संगीत] रघु राजा को पक्का अनुभव हुआ की यह कोई ब्रह्मा ज्ञानी महापुरुष है रघु राजा ने अर्थ पद से पूजन किया और सत्संग के लिए प्रार्थना की याचना की गह महापुरुष आप जब बोलते
तो ब्रह्म को छूकर परमात्मा को तो हमने नहीं देखा लेकिन परमात्मा का अनुभव करने वाले ब्रह्म ज्ञानी को तो हम देख रहे हैं ये हमारा सौभाग्य है [प्रशंसा] [संगीत] महाराज इस जनों के लटके हुए अज्ञानी अनाथ राहुगन को आप सनथ बनाया मैं आपका चरणों का दास हूं [संगीत] [प्रशंसा] जड़ भारत ने कहा की राजन जब तक महापुरुष के चरण राज में यह जीव सच्ची श्रद्धा भक्ति से स्नान नहीं करता अपना मैं महापुरुष की मैं के साथ नहीं मिला था तब तक माया का बंधन नहीं कटता है माया की चीज मिलने से वो अपने को बड़ा
माने लगता है धन तो बाहर पड़ा र जाता है समझना की मैं धनवान मकान तो बाहर पड़ा है मैं मकान वाला कुर्सी तो बाहर खड़ी है मैं कुर्सी वाला यह मैं कुर्सी वाला में मकान वाला में बेटे वाला में विद्या वाला इसकी माया है हकीकत में यह जीव आत्मा परमात्मा वाला है और परमात्मा जीवात्मा वाला है इसका उसको पता नहीं राजन शरीर भी नश्वर है और संसार की चीज भी नश्वर है बड़े-बड़े प्रलय हो गए बड़े-बड़े युद्ध हो गए बड़े-बड़े आतंकवाद आता है आंधी तूफान चला है बड़ा खतरनाक लगता है लेकिन समय प्रकार आंधी तूफान
शांत हो जाता है और हवामान में शुद्ध ए जाति है ऐसे ही समाज में कई बार दुष्ट लोगों के द्वारा कुछ का कुछ हो जाता है राजा और प्रजा भयभीत और चिंतित हो जाति है फिर समय प्रकार सुख शांति ए जाता है ऐसा समाज में उतार-चढ़ाव सतत होता राहत है जैसे सगरो में तरंग पैदा होकर छल कूद कर है राजा कोई तरंग बना और कोई तरंग मित लेकिन पानी तो वही का वही ऐसे कोई शरीर बना है और कोई शरीर मित लेकिन आत्मा वही का वही उसे आत्मा पर ध्यान नहीं तभी तक भाई राहत है
तभी तक चिंता रहती है तभी तक शो राहत है जीव अगर अपने को आत्मा माने का अभ्यास करें अपने को सोहन माने का अभ्यास करें संसार को मिथ्या और स्वप्न जैसा बदलते हुआ माने का अभ्यास करें तो जीव आत्मा के बहुत सारे कष्ट इस समझ मंत्र से स्वाहा हो जाएंगे राजन तुम शांति अपने के लिए जा रहे हो लेकिन मैं राजा रघुवन हूं और यह कर है रघुवन कौन है बताओ और कर कौन है अभी युद्ध 2000 तुम्हारा राज चला जाए और मैं राजा बन जाऊं तो तुम का हर बन जाओगे मैं राजा बन जाऊंगा
ही तो मां की मान्यता है वास्तविक में मैं कौन हूं और तुम मैं बोलते हो तो तुम्हारा मैं मेरा मैं मैं मैं जहां से उठाता है वह ज्योति स्वरूप मे का साक्षात्कार कर ले तभी सच्चा सम्राट हो जाएगा अन्यथा कल्पना का राजा रहेगा राजन ये राज्य तेरा नहीं राज्य पुण्यो का है तू हिरण के शरीर में था और किसी महात्मा का स्पर्श मिला तेरे को महात्मा का सानिध्य मिला हिरना को तो सैकड़ो जन्म लेने थे बाद में मनुष्य होने वाला था अच्छा सॉन्ग मिल गया इसलिए अच्छी वृत्ति भी हुई तुझे महात्माओं के पास जान की
इच्छा तो रही लेकिन साथ-साथ में राजन राज्य का हम लेकर जाएगा महापुरुषों के पास तो तेरा पूर्ण कल्याण नहीं होगा बालक वक्त जाना चाहिए होमी रोग छोड़कर संत के द्वारा पर जाना चाहिए एक-एक कम सच्चे संत के द्वारा पर दर्शन के लिए चला है आदमी तो एक-एक यज्ञ करने का फल होता है हीरा होगा तो शांति पन चाहता है और तू सच्चा राज्य पन चाहता है तो जिन्होंने सच्चा राज्य पाया है ऐसे महापुरुषों का संघ [संगीत] छोड़कर मनुष्य को टाइम से भजन कर लेना चाहिए हजार कम छोड़कर समय सर स्नान कर लेना चाहिए लाख कम
छोड़कर सत्कर्म कर लेना चाहिए लेकिन करोड़ कम छोड़कर हरि का ज्ञान और हरि का ज्ञान कर लेना चाहिए जीव का इसी में कल्याण सैम बिहार लक्ष्मी लक्ष्मी [संगीत] बाद में रहेगा नहीं जो शरीर पहले था नहीं बाद में नहीं रहेगा उसे शरीर को पालने पहुंचने के लिए और उन मकान और संपत्ति को संभालने के लिए ऐसा तो आंधी माया में दौड़ता है ऐसा अंधा होके दौड़ता है की आंख होते हुए भी अंदर की आंख होते हुए भी यह जीव बेचारा अंधा र जाता है क्योंकि सत्संग के द्वारा आत्मा सलाहकार लगी नहीं इसलिए जीवात्मा बेचारा सब
कुछ करते हुए भी दुखी का दुखी र जाता है राजन दुख भगवान ने नहीं बनाया दुखमय ने नहीं बनाया दुख बेवकूफी से बंता है और बेवकूफी मिटटी है ज्ञान से और कोई उपाय नहीं है तुलसीदास ने भी ठीक कहा तुलसीदास जी कहते हैं तन सके पिंजर की और तुलसी माइट ना वासना बिना विचारे ज्ञान ज्ञान का विचार करना पड़ेगा जब करो अच्छा है जब करते-करते कुछ मां पवित्र होगा लेकिन ज्ञान संयुक्त जाप नहीं होगा तो जाप में मां भी तो नहीं लगेगा जब में जितने अक्षर कम हो उतना जाप का फायदा ज्यादा हो जैसे इंजन
में जितने डब्बे कम लगे हो अथवा ट्रक में जितना लोड कम हो उतना आराम से चलती [प्रशंसा] [संगीत] राजन यह जीव लकीर का फकीर हो जाता है करोड़ लोग तो पेट लालू कुत्ते जैसे जीते हैं लेकिन कुछ कुछ लाखों लोग ऐसे भी हैं जो गुरु करते हैं लेकिन गुरु कहते हैं तो गुरु का नाम लिया मंत्र लिया और कोलू की बेल के ना ही वही घूमते रहते हैं उसे चक्कर से बाहर नहीं निकलते उनमें कोई वीर्य होते चक्रव्य से बाहर निकालना वाले महापुरुषों को खोजकर आत्मा नतम का विचार करके और सीधी साधना करके आत्म पद
को प्रकार राजन वह लोग भी मुक्त हो जाते हैं और कुटुम का भी कल्याण कर लेते रहो गंज राजा को जड़ भारत ने जब उपदेश दिया वैभव शाश्वत नहीं और मौत हर रोज इस जीव का कर्तव्य के धर्म का संग्रह कर ले साधना के ख़ज़ाने का संग्रह 1923 में अमेरिका में आठ बड़े-बड़े धनाजे लोगों की सर्वे हुई और फिर 1948 में उन आठ लोगों की जांच पड़ताल की गई जो कैश पेमेंट में गैस धन सबसे अधिक रखना था उससे की जांच की 1948 में 25 साल के बाद पोस्टेड लकवा की बीमारी से चिंता चिंता में
बुरी तरह मा गया जिसके हाथ में मार्केट था पूरा सत्ता बाजार का उसने ऐसा सत्ता खेल के दिवालिया हो गया भीख मांग रहा है द्वारा द्वारा पर जिसके हाथ में गेहूं और लटके कमर हो गया पागल खाने में पड़ा है जो टेलीफोन और लाइट का मलिक था अर्बन कर्मन की संपत्ति आदमी की बीमारी से मा गया अनितायनी श्रियानी आदित्यायनी श्री राम अनित्यानी श्रियानी वशिष्ठ विभव नहीं [प्रशंसा] तो मृत्यु कर्तव्य धर्म संग्रह कर्तव्य धर्म सॉन्ग हमारा करते हम आत्म धर्म का आत्मा ज्ञान का आत्मा ज्ञान का धन संग्रह कर ले इस धन का तो कोई पता
नहीं इस धन को तो प्रारंभ से जितना आना है उतना आएगा जितना जाना है उतना जाएगा लेकिन आत्मा धन के लिए पुरुषार्थ करना चाहिए [संगीत]