मैंने कहा था ना मैं शादी नहीं कर सकता साथ सलमान गुस्से में फंक उठा था लेकिन सामने बैठी नुसरत बेगम बिल्कुल मुतमइन थी उन्हें साथ के गुस्से भरे अंदाज से कोई फर्क नहीं पड़ रहा था तुम्हें किसने कहा है कि मैं तुम्हें आजादी दे रही हूं कि अपनी पसंद का इजहार करो जो मैंने कह दिया है वही होगा अगर तुम इंग्लैंड से पढ़ लिखकर आ गए हो तो इसका मतलब यह नहीं कि तुम दूसरों को ह कात की नजर से देखो और क्या कमी है हाला में खूबसूरत है जवान है मर्द को बस इन्हीं दो
खूबियों से गर्ज होनी चाहिए नुसरत बेगम हाथ में मौजूद हीरे की अंगूठी घुमाते हुए बड़े सुकून से कह रही थी जबकि साथ का दिल चाहा कि वह सामने खड़े गुलदान से अपना सर टकरा दे अम्मा जान आप समझ क्यों नहीं रही मैं 30 साल का हूं जबकि वह सिर्फ 16 की मैंने उसे आज से कई साल पहले देखा था मुझे तो यह भी नहीं पता कि अब वह दिखती किस तरह की है खाला को कैंसर है उनके घर में कमाने वाला कोई नहीं गुरबत ने उनके घर में डेरे डाल रखे हैं तो इसका मतलब यह
नहीं कि मैं बिल्ली का बकरा बन जाऊं अब चाहती हैं तो मैं उन्हें फाइनेंशली सपोर्ट कर दूंगा लेकिन यह शादी यह मुझसे नहीं होगा साथ की आवाज में कतीयत उभर आई थी नुसरत बेगम की मुस्कुराहट गायब हुई और माथे पर बल पड़ गए वह एक झटके से अपनी कुर्सी से उठी दो रोज बाद शाम को तुम्हारा हाला के साथ निगाह है मुझे सिखाओ कि क्या करना है और क्या नहीं और अगर तुमने मेरी बहन की बेटी से शादी करने से इंकार किया तो मेरा मरा हुआ मुंह देखोगे नुसरत बेगम उसकी आंखों में आंखें डालकर गुरई
थी और अपना हुकम देकर बाहर चली गई साथ एक लमहे के लिए तो साक रह गया और फिर जब उसे अंदाजा हुआ कि अम्मा जान क्या कह गई है तो उसने एक जोरदार ठोकर जमीन पर पड़े हुए गिलास को दे मारी उसका मूड सख्त खराब हो चुका था एक महीना पहले ही तो वह इंग्लैंड से वापस आया था तालीम मुकम्मल करने के फौरन बाद ही वापस आकर उसने बाप का कारोबार संभाल लिया था वह तो अपनी जिंदगी के लिए हजारों ख्वाब सजाकर आया था पुरजोश वजीहा और जिंदगी से भरपूर यह तमाम अल्फाज थे जो साद
सलमान की शख्सियत पर पू उतरते थे लेकिन एक हफ्ता पहले ही नुसरत बेगम को ना जाने क्या हुआ कि उन्होंने बैठे-बैठे साद की शादी का जिक्र छेड़ दिया वह खाने की टेबल पर ही बैठे थे जब अम्मा ने साद के सामने खाना रखते हुए इत्मीनान से कहा भाई तुमने अगर कोई शॉपिंग करनी है तो कर लो एक हफ्ते बाद तुम्हारा निकाह है मेरी बहन की बेटी हाला के साथ साथ जो अपनी प्लेट फुल कर चुका था नुसरत बेगम की की आवाज पर यदम ठहर सा गया एक्सक्यूज मी अम्मी जान आप मजाक कर रही हैं क्या
उसने पूछा लेकिन नुसरत बेगम अपने अजली पुसु अंदाज में मुस्कुरा दी मैंने पहले कभी तुमसे मजाक किया है क्या उनकी आवाज में ठंडक थी साथ सुलमान चुप सा रह गया मेरी बहन बहुत ज्यादा बीमार है कैंसर के आखिरी स्टेज पर है अपनी जवान बेटी की वजह से वह बहुत परेशान रहती है हाला सुघड़ और खूबसूरत है अगरचे वह लोग हमारे स्टेटस के नहीं लेकिन फिर भी तुम्हारे साथ वह खुश रहेगी मैं अपनी बहन को जुबान दे आई हूं बस इसी हफ्ते सादगी से निकाह कर लेते हैं वलीम की तकरीब अगले दिन शानदार कर लेंगे इत्मीनान
से कहते ही उन्होंने सारा प्लान तरतीब दे लिया था साथ तो गुस्से से भड़क ही उठा था आप ऐसा किस तरह कर सकती हैं यह मेरी जिंदगी है मेरी शादी है मैंने जिस लड़की को देखा तक नहीं आप मुझे उसके साथ शादी करने पर मजबूर नहीं कर सकती उनके गुस्से के बावजूद नुसरत बेगम इत्मीनान से बैठी खाना खाती रही सुलेमान साहब भी खामोश बैठे थे सारी जिंदगी वह नुसरत बेगम के सामने कुछ ना बोले थे अब भी खामोश ही रहे साद ने एक मलामत निगाह उन पर डाली और एक झटके से खाना छोड़कर उठ खड़ा
हुआ था उसे पता था नुसरत बेगम किसी की भी जिंदगी का फैसला बड़ी आसानी से कर सकती हैं वह किस स्कूल में पढ़ेगा किस कॉलेज जाएगा किस मुल्क में जाकर पढ़ेगा यह सारे फैसले नुसरत बेगम ने खुद ही किए थे तो फिर साद ने यह कैसे सोच लिया कि शादी जैसा अहम फैसला वह उसे उसकी मर्जी से करने देंगी साथ के जहन पर जूनी का अक्स लहराया उसने जोर से अपना सर झटका वह हमेशा जूनी को अपनी बीवी के रूप में देखता था व जो उसके ऑफिस में काम करती थी शानदार शख्सियत के मालिक हर
वक्त मुस्कुराती हुई फैशनेबल लिबास पहने साथ को उसे देखकर हमेशा अच्छा लगा करता था हालांकि उन दोनों की आपस में अब तक कोई बात नहीं हुई थी लेकिन साथ का इरादा था कि अगर कभी उसे शादी के लिए किसी लड़की का इंतखाब करना पड़ा तो वह यकीनन जूनी होगी और अब यह मिडिल क्लास हाला साद ने गुस्से से अपना सर झटका दो रोज साद सुलमान ने हर तरह से कोशिश कर ली थी कि वह नुसरत बेगम को उनके इरादों से बाज रख सके लेकिन वह नाकाम रहा था आखिरी हद के तौर पर उसके घर छोड़
जाने की धमकी भी दे दी थी जिस पर नुसरत बेगम ने जायदाद के कागजात उसके सामने रखते हुए कहा था वह उनसे दस्त बरदारी का ऐलान करते हुए दस्तखत करें और जहां मर्जी जाना है चला जाए और अगर नहीं जाना चाहता तो हाला से शादी करने के लिए तैयार रहे साथ सुलेमान लब बंजे अपनी सुते मां को यह सब कुछ करते हुए देख रहा था अपनी मां के चेहरे का अक्स कुछ हद तक उसे याद था मगर वह यादें भी अब मिट चुकी थी और जो मां सामने बैठी थी उसने सारी जिंदगी मोहब्बत से ऊपर
हिसाब किताब को रखा था अगर बाप कुछ कहता तो शायद वह अपनी जंग लड़ सकता था लेकिन ना चाहते हुए भी एक औरत के आगे हार मान रहा था ठीक है करवा ले अब मेरी शादी लेकिन शादी के बाद अगर मैंने आप लोगों को नाको चने ना चब वाए तो मेरा नाम भी साद सुलेमान दिल ही दिल में सोचते उसने शादी के लिए हामी भर ली थी नुसरत बेगम भरपूर अंदाज में मुस्कुराई और घर में शादी की तैयारियां शुरू हो गई निकाह के दिन उसने अपनी शानदार शेरवानी को रिजेक्ट कर दिया था सर में पहनने
वाला कुल्ला उसने उठाकर दूर फेंक दिया जिन कपड़ों में मलब था उन्हीं कपड़ों में हाथ मुंह धोकर वह तैयार हो गया मैं ऐसे ही जाऊंगा उसने ऐलान किया मगर फारिस जो उसका बचपन का दोस्त था और उसके इंग्लैंड जाने के बाद भी उसके साथ राबता में रहता था हैरान नजरों से उसे देखने लगा यह क्या कह रहा है यार क्या माना कि यह सूट तुझ पर बहुत अच्छा लगता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि तू इन्हीं कपड़ों में अपनी शादी भी कर लेगा सैकड़ों अफराद आए हुए होंगे वहां पर फारिस की बात पर साद
ने अपना सर झटक दिया कैसी शादी और कौन सी शादी मैंने अभी तक उस लड़की की शक्ल भी नहीं देखी जिससे मेरा निकाह होने वाला है इसलिए मुझे इस शादी में कोई दिलचस्पी नहीं उसके अंदाज में सख्ती थी फारिस बस उसे देखकर ही रह गया वह उन्हीं कपड़ों में शादी हॉल तक गया था यह और बात कि उसकी वजीहा शख्सियत में उसके लिबास के सारे ऐब छुपा लिए थे जिस खामोशी से वह शादी में पहुंचा था उसी खामोशी से उसने निकाह नामे पर दस्तखत भी कर दिए लड़की का निकाह भी हो चुका था थोड़ी देर
के बाद व सहेलियों के हुजूम में सामने से आती दिखाई दी व फारिस के हमराह सोफे पर बैठा था उठकर खड़ा हो जा भाई तेरी दुल्हन आ रही है फारिस ने कहा तो वह ना चाहते हुए भी उठ खड़ा हुआ नुसरत बेगम और सलमान साहब भी आसपास नजर आ रहे थे लड़की दराज कद थी चेहरे पर तो उसने घूंघट गिरा रखा था सहज सहज कर कदम उठाती वह चली आ रही थी लेकिन स्टेज से चंद कदम की दूरी पर ही वह बुरी तरह से लड़खड़ा आई उसने के नीचे हाई हील्स पहनी हुई थी शायद वह
उस लमहे अपना तवाजू बरकरार ना रख पाई और अगले ही लमहे फिसलकर जमीन पर जा गिरी थी उसकी सहेलियां जो उसी की उम्र की थी और शायद के उसी जैसी थी सब के सब खिलखिला करर हंसने लगे पेट पर हाथ रख के हंसते हुए वह सब दोहरी हो रही थी जबकि जमीन पर पड़ी दुल्हन की ऊंची ऊंची हंसने की आवाजें भी सबको सुनाई दे रही थी सभी के हाथ एक दिलचस्प मुश गला आ गया था था जबकि सामने बैठा साद शर्म से पानी पानी हो रहा था उसे अपना सारा स्टैंडर्ड्स सारी क्लास सब खाक में
मिलता दिखाई दे रहा था सामने जमीन पर पड़ी अपनी शादी के दिन गिर जाने वाली लड़की जिस तरह खिल खिलाकर हंस रही थी उसे उसकी जहनी सतह का अंदाजा हो गया था नुसरत बेगम ने लड़कियों को इशारा किया तो उन्होंने आगे बढ़कर हाला को सहारा देकर उठा लिया सही तरीके से चलती हुई स्टेज तक आई साद ने अपना हाथ आगे ना बढ़ाया वह खुद ही बराबर में आकर बैठ गई साद को तो अपना आप किसी मुर्दे की तरह लग रहा था शादी की रस्मी होने लगी और रस्मों के बाद हाला रुखसत होकर साद के साथ
आ गई रुखसती के वक्त भी वह अपनी मां के गले लगकर फूट फूट कर रोती रही थी सब उसे तसल्ली यां दे रहे थे मगर साद का दिल इंतहा बुरा हो रहा था कैसी बचकाना हरकतें हैं उसने दिल ही दिल में सोचा और अब रात के 2 बजे भी वह घर के पिछले लॉन में बैठ मुसलसल सिगरेट फूक रहा था यहां क्या कर रहे हो साद कमरे में जाओ हाला तुम्हारा इंतजार कर रही है रात के 2 बज चुके हैं तुम अभी तक कमरे में क्यों नहीं गए नुसरत बेगम की आवाज पर साद ने सख्ती
से अपनी आंखें मीच ली आपसे मैंने कहा तो था शादी कर रहा हूं शादी के बाद जो कुछ करूंगा उससे आप लोगों का कोई लेनदेन नहीं होना चाहिए बचपना देखा है आपने उस लड़की का आपको लगता है कि यह मेरे साथ चल सक सकती है साद एकदम बिफर गया था जबकि नुसरत बेगम उसे तमक के साथ उसके सामने खड़ी थी उसके साथ कोई भी ज्यादती करने से पहले यह बात कान खोलकर सुन लो साद कि वह मेरी बहन की बेटी है अगर तुमने उसके साथ कोई भी गलत हरकत की तो मैं तुम्हारे साथ क्या करूंगी
इस बात का तुम्हें अंदाजा भी नहीं वह एकदम आगे बढ़ी थी और सात की आंखों में आंखें डालकर बोली और एक लम्हे तक के लिए तो साथ भी चुप हो गया उसे अपना बचपन याद आया जब वह मामूली सी बात पर उसे सजा देकर उसे घंटों के लिए बाथरूम में बंद कर देती जहां वह अंधेरे और खौफ से रोते-रोते बेहोश होने लगता खाने की मेज पर खाना उसके आगे से उठा लिया करती थी तरबियत के नाम पर वह इतनी सख्ती करती थी उनके साथ का बचपन मस्क होता चला गया वह उस वक्त नुसरत बेगम के
सामने बोल तो सकता था लेकिन ना जाने क्यों वह खामोश हो गया सिगरेट को जूते तले मसलकर वह बेजार से उठ खड़ा हुआ उसका रुख अपने कमरे की जानिब था नुसरत बेगम के लबों पर एक मुस्कुराहट सी दौड़ गई कमरे का दरवाजा खोलकर वह अंदर आया इरादा तो यही था कि जाते ही उसे चुटिया से पकड़कर अपने कमरे से बाहर निकाल देगा लेकिन कमरे के बीच में ही वह ठठ कर रुक गया गुलाब की पत्तियों की मशहूर कुन महक ने कमरे को बजल कर रखा था सजी संवरी मुसहरी के दरमियान सुफ फैद बेदाग बेडशीट के
ऊपर वह अपना सुर्ख लहंगा फैलाए बैठी थी मगर इस तरह की उसकी पुश्तैनी की जानिब थी मुसलसल मुंह चलने की आवाज से साद को अंदाजा हुआ कि वह कुछ खा रही है साद को थोड़ी सी हैरानी हुई शादी की पहली रात कोई भी दुल्हन नर्वस होती है जोर जबरदस्ती करने पर भी खाने पीने पर तैयार नहीं होती लेकिन हाला ना सिर्फ बड़े आराम से बैठी थी बल्कि फ्रूट काट करर खा रही थी साद के माथे पर बल पड़ गया एक दफा फिर उसने अपने होने वाली दुल्हन के मयार पर पूरा ना उतरते देखकर उसे वह
शदीद बुरी लगी थी देखो वह कहता हुआ आगे बढ़ा लेकिन उसी पल उसने चौक कर मुड़कर देखा था और साथ सलमान जहां था वहीं खड़ा रह गया माथे पर झूलता छोटा सा टिका कानों के आवेज और नाजुक से ग्लो बन के साथ उसका सुर्ख अरूसी लिबास उसे एक अलवी ही रूप दे रहा था वह हुसन में ता थी बड़ी-बड़ी स्याह आंखें जिन पर तनी पलकों की झालर उसे दूर से भी असली लग रही थी उसे ढूंढने में भी उसके हुसन में कोई ऐब नजर ना आया उसके चेहरे पर हैरानी फैली हुई थी शायद साद सलमान
को इस तरह अंदर आता देखकर वह थोड़ी शर्मिंदा भी हो गई थी हाथ में पकड़ा हुआ सेब का टुकड़ा वापस ट्रे में रखते हुए उसने पहले साद को देखा और फिर कुछ समझ ना आते हुए उसने सेब का टुकड़ा वापस उठाकर मासूमियत से साद के जानिब बढ़ा दिया यह ले आप भी खा लें मैंने तो हॉल में ठीक तरह से खाना नहीं खाया था अभी भूख लग रही थी और आप भी नहीं आ रहे थे तो सोचा कुछ खा लेती हूं हाथ आगे बढ़ाए वह इंतहा मासूमियत से कह रही थी साथ सलमान को एक झटका
सा लगा कम से कम उसकी आवाज में वह जहालत नहीं थी जिसकी वह तवक्कोल में शास्त कीी थी पहनने ओड़ने का सलीका बता रहा था कि वह इतनी भी गई गुजरी नहीं जितना उसने ने उसे समझ रखा है लेकिन इससे पहले कि वह कदम आगे बढ़ाता उसके जहन में उसकी अमेरिका नेशनलिटी उसकी डिग्री और उसके दोस्तों के जुमले गूंज गए जो उसकी होने वाली बीवी के बारे में उसे बताया करते थे यार तेरी बीवी तो शहर की सबसे हसीन लड़की होनी चाहिए इतनी पूर एतमाद हो कि जब वह बात करे तो सारा शहर उसकी बात
सुने क्योंकि वह साथ सलमान की बीवी होगी वह किसी आम इंसान की तो नहीं दोस्त उसे कहते तो व फखरी अंदाज में मुस्कुरा देता लेकिन अपने सामने खड़े उस बमुश्किल 16 साला लड़की से वह क्या तवको रखता जो स्टेज पर चढ़ते हुए अपनी हील से उलझ कर गिर गई थी साथ का दिल बुरा होने लगा उसने सख्ती से सर झटका खुद ही खाओ तुम मुझे नहीं खाना सख्ती से उसे जवाब देते वह खुद वॉशरूम में जा घुसा था जब के हाला उसके रवैए को समझने की कोशिश करते हुए कंधे झटक कर दोबारा से खाने में
मशगूल हो गई थी जब तक वह नहा धोकर वॉशरूम से बाहर निकला हाला ने फ्रूट समेटकर साइड टेबल पर रख दिया था और अब ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़ी अपनी ज्वेलरी उतार रही थी साद ने एक निगाह गलत उस पर डाली मिला शबा व बेहद हसीन थी लेकिन उसकी बचकाना हरकतें साद को बद जन कर रही थी और दूसरा जबरदस्ती की यह शादी साद सलमान किसी तोर अपना दिल उसके हक में साफ नहीं कर पा रहा था खामोशी से कंबल लूटकर वह लेट गया आते हुए लाइट ऑफ कर देना मुझे रोशनी में सोने की आदत
नहीं साद ने सख्ती से कहा उस पर हाला को थोड़ी हैरत सी हुई वह उसका दूल्हा था और शादी की पहली रात इतनी सख्ती से उससे बात कर रहा था साथ ही सोने के लिए भी तैयार था जूलरी तारती उसके हाथ ठठ से गए थोड़ी देर पहले की बे नियाजी जो उस पर तारी थी अब परेशानी में बदल गई लेकिन साद सुलेमान का रवैया इतना खुश्क था कि वह कोई स भी ना कर पाई खामोशी से लाइट ऑफ करके वह लिबास उठाकर वॉशरूम में चली गई कपड़े तब्दील करके वह बाहर निकली तो साथ सलमान सो
चुका था क्योंकि कमरे में गहरी खामोशी थी जीरो पावर की नील गों रोशनी ने कमरे में ख्वाब नाक सा उजाला कर रखा था धीरे-धीरे चलती हुई वह बेड के किनारे आकर खड़ी हो गई एक झक सी आ रही थी एक ऐसे शख्स के पहलू में सोते हुए जिसने उससे ठीक तरह से बात ही ना की थी दिल पहले ही जख्मों से चूर था अगर अम्मा को पता चला कि यहां यह सब हुआ तो ना जाने उनका क्या होगा हाला के दिमाग में एक सोच लहराई मां की आंसू भरी आंखें सामने आई तो एक तलक सी
मुस्कुराहट उसके लबों पर बिखर गई तेरी खाला के मुझ पर बहुत एसा नात है ला तू उन्हें कोई शिकायत का मौका ना देना याद रखना वह जान भी मांगे तो हम दोनों को निकाल कर देनी पड़ेगी क्योंकि जीते जी में उन एहसाना का बदला तो झुका नहीं सकती जो कुछ उसने हमारे लिए किया है तू सुन रही है ना वह दुल्हन बनी सखते में बैठी थी जब उसकी मां ने उसे हिलाकर कहा था बेड के पास खड़ी हाला एकदम चौक सी गई बे इख्तियार ही सर हा में हिल गया मां चाहे जो कुछ हो जाए
मैं हाला को कभी इंकार नहीं करूंगी लफ्ज बे आवाज उसके लबों से अदा हुए वह सात सलमान के साथ सुकड़ सिमट कर लेट गई कंबल अपने ऊपर उड़ते हुए सोने की कोशिश करने लगी मगर जहन था कि माजी के दरी खंगालने जा रहा था वह पाच साल की थी जब उसके बाप का इंतकाल हुआ था जिंदगी आसान तो पहले भी ना थी बाप की मजदूरी से बमुश्किल उनका गुजारा होता था लेकिन अब किराए के घर में मुसीबतें मुंह फाड़े उनका रास्ता देख रही थी बाप के जनाजे की पाती से वह खामोशी से लगी हुई सिसकियां
भर रही थी जबकि उसकी मां नुदरत बेगम सीने को पीटते हुए मुसलसल रो रही थी उन्हें अंदाजा था सुसराल वालों की जानिब से तो पहले ही कोई स्पोर्ट ना थी और मैके में सिवाय एक बहन के और कोई था ही नहीं बहन भी वह जो अमीर कबीर घराने में ब्याह कर गई थी तो उसने कभी पलटकर नुदरत बेगम की शक्ल भी नहीं देखी थी जनाजा उठाया जा चुका था जब छोटे से सेहन में चंद अफराद रह गए थे अचानक ही दरवाजे के बाहर एक शोर सुनाई दिया सभी बच्चे घर से दौड़कर बाहर चले गए हाला
भी उन्हीं बच्चों के साथ थी दरवाजे के बाहर एक बड़ी शानदार सी गाड़ी रुक रही थी हाला की आंखें तहीर से फैल गई उनके घर इतनी बड़ी गाड़ी में कौन आया था और जब गाड़ी से उसकी खाला नुजहत बेगम नीचे उतरी तो हाला को हैरत का एक और झटका लगा जहां उसकी मां हुसन में यकता थी सुफैद रंगत लंबे बाल वही नुजहत बेगम मामूली सी शक्लो सूरत की थी कद काट अच्छा था मगर जिस तकब्बल के साथ व अपनी गाड़ी से नीचे उतर रही थी ख्वा मुखवा ही हाला का दिल उनके रोब में आ गया
उसी तकब्बल से चलती हुई वह अंदर आकर अपनी बहन के पास बैठ गई थी आंखों से ब्रांडेड ग्लासेस उतारते हुए उन्होंने बस मुरव्वत तना ही अपनी आंखें टिशू से साफ की यह उनकी हाला के घर पहली दफा आमद थी लेकिन वह आखिरी दफा हरगिज नहीं थी उसके बाद भी वह अक्सर अपनी बहन से मिलने आती रहती थी जब भी आती पर्स में से चंद नोट निकालकर बड़ी जताती हुई मुस्कुराहट के साथ अपनी बहन के हाथ पर रख देती साथ ही नाक दना निगाहों से घर का जायजा लेती रहती हाला और नुदरत बेगम उनके एहसान तले
दबते चले गए व जब भी कोई एहसान करती 10 लोगों में बैठकर उसे गिनवाला के सर पर हाथ रखती तो कहती क्या फायदा ऐसी हसीन शक्लो सूरत का जब नसीब ही अच्छा ना हो मुझे तो लगता है कि इसका बंदोबस्त भी मुझे ही करना पड़ेगा नुदरत बेगम एक फी सी हंसी हंस कर रह जाती क्या करती है विगी और बुरे हालात नहीं उन्हें किसी का मुकाबला करने के लायक ना छोड़ा था हाला एहसास कमतरी का शिकार होती चली गई हर ख्वाहिश हर जरूरत पूरी करने के लिए उन्हें हफ्तों तक नुसरत बेगम का इंतजार करना पड़ता
वह आती चंद रुपए निकाल कर देती और साथ ही एहसान जता देती और उन्हीं एहसानों का बदला उतारने के लिए उन्होंने अपने बेटे का रिश्ता जब नुदरत के सामने रखा तो वह हैरान रह गई यह कैसे हो सकता है नुदरत आप हाला भी पड़ रही है बच्ची है वह शादी जैसी बड़ी जिम्मेदारी निभा नहीं सकती नुदरत बेगम की बात पर नुसरत के माथे पर बल पड़ गए मैंने तुमसे तुम्हारी सलाह नहीं मांगी हुक्म दे रही हो उसे पूरा करो और वैसे भी तुम्हें कब से मशवरे देने आ गए बैठे बिठाए इतने अच्छे घर का रिश्ता
मिल रहा है जानती भी हो साथ कहां से पढ़कर आया है क्या माली है है उसकी इस किराय के मकान में तुम्हारी बेटी को ब्याहने के लिए कोई शहजादा तो आने से रहा और जितना पढ़ लिया है काफी है वैसे भी इसने पढ़ लिखकर क्या करना है तुम्हारी तरह घर ही बैठना है नुसरत की आवाज में तकब्बल था नफरत थी और कई बरसों की वह हसद थी जो वह हमेशा अपनी बहन की शक्लो सूरत से महसूस किया करती थी नुदरत ने खामोशी से सर झुकाकर हाला का हाथ उसके हाथ में थमा दिया और यूं 16
बरस के कम उम्र हाला साथ सलमान की दुल्हन बनकर उसके घर आ गई थी आंखें बंद करके वह सोने की कोशिश करने लगी और उसमें कामयाब भी हो गई रात का ना जाने कौन सा पहर था एक जोरदार आवाज से उसकी आंख खुली उसका दिल जोर से धड़कने लगा हड़बड़ा के उसने उठक देखा कमरे में फैली नील गों रोशनी में अब बंद हो चुकी थी कमरे में घुप अंधेरा था कुछ लम्हे तो उसको खुद पर काबू पाने में लग गए उसका सारा वजूद पसीने में भीगा हुआ था इससे पहले कि वह खुद को संभाल पाती
वही जोरदार आवाज एक दफा फिर आई एक घुटी घुटी सी चीख हाला के लबों से निकली यह आवाज बादल गरजने की थी बाहर ताबड़ तोड़ बारिश बरस रही थी शायद यही वजह थी कि बिजली बंद हो चुकी थी और कमरे में घुप अंधेरा फैला हुआ था व जो शुरू से ही बादलों के घनघर से खौफ जदा हो जाया करती थी एकदम खुद में सिमट सी गई अम्मी कहां है आप उसके लबों से निकला बे इख्तियार दो आंसू आंखों से टूटकर उसके गालों पर फैल गए बचपन से लेकर आज तक घर में जब भी तेज बारिश
होती थी वह सारे कामकाज छोड़कर मां के पहलू में दुबक जाया करती थी उसे इस मौसम से शदीद खौफ आता था और आज वह एक ऐसे इंसान के कमरे में मौजूद थी जो खुद भी उस मौसम से कम ना था लेकिन गैर महसूस तौर पर ही हाला सुकड़ करर साद के नजदीक हुई वह शायद खुद को संभालने की कोशिश करती कि एक दफा फिर बादल गरजे और इस बार उनके साथ बिजली भी चमकी थी हालांकि लबों से एक चीख निकली और बे इख्तियार ही वह साथ से लिपट गई वह जो गहरी नींद सो रहा था
इस तरह उसके खुद को लिपट जाने पर हड़बड़ा करर उठ बैठा क्या मुसीबत है एक पल के लिए तो वह खुद भी घबरा गया मगर हाला मौसम से डरती उसके साथ लिपटे जा रही थी और साथ ही साथ उसके लबों से घुटी घुटी सी चीखें भी निकल रही थी साद के हवास बहाल हुए तो हाला को अपने साथ लिपट देखकर वह भुना उठा पीछे हटो किसने हक दिया है तुम्हें इस तरह मेरे साथ चिपकने का इंतहा बेशर्म लड़की हो तुम खबरदार जो मुझे हाथ लगाए थोड़ा सा भी अपनी इज्जते नफ्स का ख्याल है तुम्हें या
नहीं पहले तो मैं तुम्हें सिर्फ बचकाना समझता था लेकिन तुम तो बेशर्म और बद लिहाज लड़की भी हो उसे खुद से छुड़ाकर एक जोरदार धक्का देते हुए साद ने उसे बुरी तरह बेइज्जत किया था वह तो उसके धक्के से ही संभल ना पाई थी उसके अंदाज पर तो शकत रह गई साद मजीद भी कुछ कह रहा था मेरी और तुम्हारी शादी सिर्फ अम्मा जान की जिद का नतीजा है ना जाने क्यों उन्होंने तुम्हारे जैसी बचकाना और बेहया लड़की को मेरे सर पर थोप दिया है लेकिन ना तो तुम मेरे स्टैंडर्ड हो और ना ही मुझे
तुम अपनी बीवी के रूप में कबूल हो इसलिए मुझसे किसी किस्म के हकूक फराइज की तवको मत रखना अगर इंसानों की तरह मेरे साथ सोना है तो सो नहीं तो उठकर कमरे से बाहर निकल जाओ साद के लहजे में गैर मामूली सख्ती थी हाला साक रह गई वह करवट बदलकर लेट चुका था बादिल बाहर अभी भी गर्ज रहे थे बिजली अभी भी चमक रही थी लेकिन हाला के दिल से अब उनका डर निकल चुका था उसकी आंखें खुश्क हो रही थी सामने लेटे उसके शौहर ने उसे जितना बेइज्जत किया था एक लमहे में ही उसका
सारा बचपना रुखसत हो गया आनत के शदीद एहसास से उसकी गाले सुर्ख हो गई खामोशी से तकिए पर सर रख के वह लेटने की कोशिश करने लगी उसने अपने हाथ में अपना दूसरा हाथ मजबूती से पकड़ लिया गो के अब उसे बाहर चमकती बिजली और बादलों से खौफ नहीं आ रहा था खौफ तो उ से अब अपने साथ लेटे साद सलमान से आ रहा था जो कहने को तो उसका शौहर था मगर दरह कीक वह उसका कुछ नहीं लगता था सुबह उसकी आंख खुली तो कमरे में पर्दों से छन छनकर रोशनी अंदर आ रही थी
उजाला फैला हुआ था ऊपर से लिहाफ उतारते हुए उसकी निगाह साथ लेटी हाला पर पड़ी कंबल को अच्छी तरह खुद पर झक वह बेखबर सो रही थी चेहरे पर ऐसे तासु रात थे जैसे रात ना जाने कितने खौफ में गुजरी हो घुंघर आले बाल उसके चेहरे के अतरा में बिखरे हुए थे उस पर निगाह पढ़ते रात वाला वाकया याद आया गुस्से की एक लहर उसके अंदर जागी मगर वह सर झटक कर स्लीपर्स पहनने लगा था फिलहाल तो उसके जहन में आगे का कोई लाहे अमल ना था फ्रेश होकर वह कमरे से बाहर निकला तो सामने
ही मुलाज मा चली आ रही थी साहब दुल्हन बीवी की अम्मा जान उनसे मिलने आई हैं वह आपको भी बुला रही हैं मुलाजिम की तला पर साद के चेहरे पर नागवार का तासुर बिखर गया उसे किसी किस्म का ससुराली रिश्ता नहीं निभाना था लेकिन यह दामाद वाला प्रोटोकॉल उसे उलझाया जा रहा था वह साफ मना करना चाहता था लेकिन ना चाहते हुए भी उसने सर हिला दिया हाथ पर गड़ी बांधते हुए वह सख्त आसु रात के साथ लाउंज में दाखिल हुआ सामने ही एक उमर सदा सी औरत बैठी थी साद उन्हें देखते ही एकदम चौका
वह चेहरे के नकश के लिहाज से नुसरत बेगम से ब बिल्कुल मुख्तलिफ थी बेहद खूबसूरत मगर चेहरे की झुरियां और बालों की सुफैद बता रही थी कि उनकी जिंदगी किस कदर मुसीबत में गुजरी है मामूली सा लिबास और पैरों में सादा सी चप्पल मगर नफासत और शास्त कीी उनके तोरो तवार से झलक रही थी ना जाने क्या सोचकर साद ने उनके सामने अपना सर झुका दिया वह तो निहाल हो उठी साद के सर पर प्यार से हाथ फेरते हुए उन्होंने उसे यूं हसरत भरी निगाहों से देखा कि एक लमहे के लिए तो साद का भी
दिल डूब गया मेरी हमेशा से यह ख्वाहिश थी कि मेरा भी एक बेटा हो जो मेरा सहारा बन जाए आज अल्लाह ने मेरी दुआ कबूल कर ली दामाद के रूप में मुझे तुम्हारे जैसा बेटा मिल गया नुदरत बेगम ने आस्त कीी से कहा तो साद लभ बींज कर रह गया आप यहां क्यों बैठी हैं अम्मा जान कहां है उसने नुसरत बेगम के बारे में सवाल किया तो नुदरत बेगम खामोश हो गई मैं काफी देर से आई हुई हूं मैंने कई बार पैगाम भेजा है लेकिन शायद आप कुछ मसरूफ हैं इसीलिए मैंने तुम्हें बुलाने का कहा
हाला कैसी है कल रात बहुत तेज बारिश हुई थी वह घबराई तो नहीं वह हमेशा बारिश में बहुत बुरी तरह से डर जाया करती है थोड़ी सी छोटी है ना अभी तुम उसकी किसी आदत पर गुस्सा ना होना मैं उसे जल्द समझा दूंगी नुदरत बेगम दबे दबे से अंदाज में कह रही थी उनके लहजे में फिक्र मंदी थी साद जो यदम चौका कल रात तेज बारिश हुई थी हाला का इस तरह उसके साथ लिपटना जिस तरह वह मुट्टिया में उसकी शर्ट को बीच रही थी साथ को एकदम से सब कुछ याद आ गया और उसी
लमहे उसका दिल उस पर आश का हुआ कि कल रात व उसकी कुर्बत के ख्याल से उसके नजदीक नहीं आई थी बल्कि वह शदीद खौफ जदा थी पछतावे का एक एहसास साद के अंदर जागा लेकिन उसने अपना सर झटक दिया हाला के मुतालिक कोई भी अच्छी सोच वह अपने अंदर पैदा नहीं हो दे सकता था आप बैठिए मैं अम्मा जान को भेजता हूं उसने नुदरत बेगम से चंद बातें करने के बाद कहा और बाहर निकल आया मुलाज मा को तो इत्तला देते हुए वह बाहर निकलता चला गया था अंदर कमरे में मुलाज मा ने नुसरत
बेगम को इत्तला दी तो वह नखत से सर झटक कर रह गई ड्रेसिंग टेबल के सामने बैठी वह नफासत से अपना मेकअप कर रही थी बेड के साथ टेक लगाए सलमान साहब ने उन्हें तहर से देखा मुझे तो अब तक समझ नहीं आई कि सारी जिंदगी तुमने साद को कोई अहमियत नहीं दी लेकिन अब यदम तुमने उसकी शादी कर दी है वह भी अपनी पसंद से और अपनी भांजी से अब घंटा भर हो गया तुम्हारी बहन आकर बैठी हुई है लेकिन तुम उससे मिलने पर तैयार ही नहीं आखिर यह सब क्या है सलमान की बात
पर एक तलक सी मुस्कुराहट नुसरत बेगम के लम्हों पर बिखर गई अंच मेज पर रखते हुए उन्होंने पलटकर एक सर्द निगाह सलमान साहब पर डाली ओह तो आखिर आज आपको घर के मामलात में बोलना याद आ ही गया अच्छा याद दिला दिया आपने मुझे कि मैं कल अपनी बहू को ब्याह कर लाई हूं मैं तो भूल ही गई थी वैसे भी उसकी इतनी हैसियत नहीं कि मैं उसे याद रखूं लेकिन खैर देखती हूं उसका क्या करना है साड़ी का पल्लू कंधे पर दुरुस्त करते हुए वह उठ खड़ी हुई थी सलमान साहब ने हैरत भरी निगाह
उन पर डाली और फिर अपने कंधे झटक कर कमरे से बाहर निकलते चले गए वैसे भी उनकी दिलचस्प बया हमेशा घर से बाहर ही रहती थी नुसरत बेगम ने एक बेबस निगाह उन पर डाली उस मर्द ने कभी उन्हें तवज्जो नहीं दी थी वह आज तक समझ नहीं पाई थी कि आखिर उन्होंने दूसरी शादी की ही क्यों थी जब उन्हें उसकी जरूरत ही ना थी औरतों के साथ ताल्लुकात तो वह बाहर ही बना लेते थे शायद साद की तरबियत और उसका ख्याल रखने के लिए उन्हें एक आया चाहिए थी जबी उन्होंने मुझसे शादी की नफरत
से सर झटक हुए नुसरत बेगम ने पुरानी सोच से पल्लू छुड़ाया चेहरे पर वही मुस्कान सजाई और कमरे से निकल आई अभी भी उनका रुख लाउंज में बैठी नुदरत बेगम के बजाय हाला के कमरे की जानिब था वह जो बेखबर सो रही थी आहट पर चौक कर उठी तो सामने ही नुसरत बेगम सोफे से टेक लगाए बैठी थी उठकर बैठो मुझे तुमसे कुछ बात करनी है नुसरत बेगम के लहजे में इतनी सख्ती थी कि वह घबरा सी गई अस्सलाम वालेकुम खा उसने सलाम किया मगर नुसरत बेगम के चेहरे पर वाजे ना गवारी फैल गई सलाम
दुआ को छोड़ो पहले काम की बात सुनो आज शाम को तुम्हारा वलीमा है शहर भर के सारे मेहमान इकट्ठे होंगे तुम्हारी तो इतनी हैसियत नहीं लेकिन हम लोग बहुत असरो और सूख वाले हैं तुम्हें अंदाजा भी नहीं शाम की तकरीब में कौन-कौन से लोग आएंगे तुम्हें वह सारे एहसाना याद है ना जो मैंने तुम पर और तुम्हारी मां पर किए थे रत बेगम ने अचानक ही टून बदल ली थी खाला के चेहरे पर हैरत ही हैरत फैल गई थी खाला के बात करने का अंदाज बिल्कुल बदला हुआ था और जो कुछ वह कह रही थी
वह तो हालांकि समझ से बाहर था मैं आपकी बात नहीं समझी उसने हैरत से पूछा था नुसरत बेगम झंझरा गई एक तो तुम बिल्कुल ही बचकाना दिमाग रखती हो मुझे ना ज्यादा सवाल जवाब सुनने की आदत नहीं अब गौर से मेरी बात सुनो मैंने तुम्हारी शादी साथ के साथ इसलिए नहीं करवाई कि तुम ठाट से कपड़े जूते पहनकर इस महल नुमा घर में घूमती फिरो सारी जिंदगी भीख मांगती तुम और तुम्हारी मां सड़कों पर आकर मैं हर महीने वह चंद रुपए की मदद ना किया करती तो तुम्हारी जिंदगी तुम्हारे वजूद पर मेरे एहसाना हैं और
आज वक्त आ गया है कि तुम उन एहसाना को झुकाओ हाला सन्नाटे में रगी नुसरत बेगम की आवाज में नफरत ही नफरत थी मगर कुछ पूछने की उसमें हिम्मत ही ना हुई वह खुद ही अपनी बात जारी रखते हुए बोली थी आज रात की तकरीब में जब हॉल मेहमानों से कचाकच भरा होगा और साथ स्टेज पर तुम्हारे बराबर आकर खड़ा होगा मैं चाहती हूं उस वक्त तुम अचानक जोर से चिल्लाकर कहो कि तुम्हें साथ के साथ नहीं रहना क्योंकि वह ना मर्द है वाह किस कदर बेज्जती होगी उसकी उसके चेहरे पर फैलता हुआ वह शिकस्त
का तासुर वह लोगों की मुजेह का खेज निगाहें और उसकी शख्सियत का गरूर कैसे-कैसे पल भर में मट्टी हो जाएगा उस मंजर को देखने के लिए तो मैं सालों से तड़प रही हूं और आज मेरी ख्वाहिश पूरी होगी मुझे तुमसे कोई शिकायत नहीं चाहिए और जो कुछ मैंने तुम्हें समझाया है ठीक ऐसा ही होना चाहिए तुम्हारी आवाज तकरीब में शामिल हर शख्स के कानों तक पहुंचने चाहिए नुसरत बेगम ने बात मुकम्मल की तो हाला को झटका लगा वह बे इख्तियार बेड से नीचे उतर आई यह आप क्या कह रही है मैं ऐसा क्यों करूंगी मैं
साद के खिलाफ इतनी बड़ी बात कैसे कर सकती हूं उसने कहा तो नुसरत बेगम तेजी से पलटी क्यों तुम क्यों बात नहीं कर सकती जहां तक मैं साद को जानती हूं जो चीज उसे पसंद ना हो व उसे हाथ तक नहीं लगाता और तुम्हारा हुलिया बता रहा है कि कल रात तुम लोगों के दरमियान कोई ताल्लुक नहीं बना तो फिर एक रात में तुम्हें उससे इतनी मोहब्बत कैसे हो गई वह तुमसे शदीद नफरत करता है उसे तुम जैसी मिडिल क्लास और बेवकूफ लड़की नहीं पसंद उसे फैशनेबल और अपने स्टैंडर्ड की लड़की चाहिए तुम बिला वजा
उसके पल्लू से लिपट कर क्या करोगी तुम्हें मैंने इस घर में लाया ही सिर्फ इसलिए है कि जो कुछ मैं कहूं तुम खामोशी से करो और फिक्र मत करो मुझे पता है इस रात में ही वह तुम्हें तलाक दे देगा उसके बाद तुम और तुम्हारी मां मुंह बोली रकम मुझसे ले लेना और यहां से दफा हो जाना वैसे भी तुम दोनों को सिवाय पैसों और किसी चीज की जरूरत ही कब है साड़ी के पल्लू को दुरुस्त करती हुई वह जहर खु लहजे में कह रही थी जबकि हाला के ऊपर तो सातों आसमान टूट पड़े थे
उसकी शख्सियत नुसरत बेगम के अल्फाजों ने बुरी तरह मस्क कर दी थी सात के साथ उसका कोई ताल्लुक ना सही लेकिन वह इतनी बड़ी बात कहने का सोच भी नहीं सकती थी उसके लब फड़फड़ा करर रह गए क्योंकि नुसरत बेगम ने आगे बढ़कर उसका मुंह दबोच लिया था किसी किस्म की गलती ना हो समझ जी वरना मैं जितनी अच्छी हूं उतनी ही बुरी भी बन सकती हूं तुम्हारी मां बूढ़ी है मजबूर है मैं 10 लोगों के बीच में अगर उसके ऊपर कीचड़ उछा लूंगी तो हर कोई मेरी बात का यकीन करेगा वह बिचारी तो सह
ही नहीं पाएगी अगर तुमने मेरी बात ना मानी तो मैं वही करूंगी जो मैंने कहा है अंडरस्टैंड उंगली से उसे धमकी देते हुए वह कमरे से बाहर निकलती चली गई थी जबकि हाला का दिल चाहा वह वहीं बैठकर फूट फूट कर रोने लगे उसे अब तक समझ ना आया था कि हाला ने उसकी शादी अपने अमीर और खूबसूरत बेटे से क्यों की है जबकि अब सारी हकीकत खुलकर सामने आ गई थी उसकी निगाहों में साद का लहजा और उसका चेहरा घूम गया शायद वह भी उससे उतनी ही नफरत करता है उस रिश्ते में दाखिल होकर
उसका सिर्फ नुकसान ही हुआ था दोनों हाथ में अपना चेहरा छुपाकर वह फूट-फूट कर रोने लगी घर से निकलते ही साथ सलमान बेद हानी में गाड़ी सड़कों पर धड़ा लगा कल शाम तक तो उसने पक्का अहद कर लिया था कि वह एक डेढ़ हफ्ते के बाद हाला को तलाक दे देगा उसकी जहनी सता किसी भी तरह एक छोटी लड़की से मैच नहीं हो सकती थी लेकिन सुबह नुजहत बेगम से मिलने के बाद ना जाने कि उसका जहन अजीब दोराहे पर आकर खड़ा हो गया था गाड़ी कब्रस्तान के बाहर रोकते वह तगी से बाहर निकल आया
उसके चेहरे पर अब गहरी संजीदगी तारी थी कब्रस्तान के अंदर वैसे ही सन्नाटा था जैसा हम हुआ करता था कब्रों के दरमियान से गुजरता हुआ वह खामोशी से अपनी मां की कब्र के सामने जाकर बैठ गया खाली निगाहों से चंद लमहे तक कुतबे को देखते रहने के बाद उसने दुआ के लिए हाथ उठा दिए फातिहा खवानी करके चेहरे पर हाथ फेरे उसके लबों से गहरी सांस निकली आप क्यों इतनी जल्दी चली गई अम्मी जान जिसको जब मौका मिलता है वह मुझे किसी कठपुतली की तरह इस्तेमाल कर लेता है पहले बाबा जान ने मेरा नाम लेकर
दूसरी शादी की और फिर अब अम्मा जान क्या मेरी अपनी कोई हैसियत मेरी अपनी कोई मर्जी नहीं वह बे आवाज अपनी मां से बातें कर रहा था जिसकी हल्की सी शबी उसके जहन में अभी तक मौजूद थी कुछ देर तक यूं ही उदासी से वह मां की कब के साथ बैठा रहा और फिर उठकर दोबारा गाड़ी में आ बैठा गाड़ी स्टार्ट करके यूं ही दोबारा वह सड़कों पर फिरने लगा घर जाने का दिल नहीं चाह रहा था घर का नाम जहन में आता तो हाला याद आ जाती उसे याद आ जाता कि आज रात तो
उसका वलीमा है हाला के बारे में सोचते ही उसका ध्यान जूनी की तरफ चला गया एक खुशगवार सी मुस्कुराहट उसके लबों पर दौड़ाई बे इख्तियार ही उसका दिल चाहा कि वह जूनी को देखे हाला और उसका भला क्या मुकाबला हाला जहां सहमी हुई सी लड़की थी वहीं जूनी एक शानदार शख्सियत की मालिक थी जदीद फैशन एबल और पुर एतमाद गाड़ी का रुख उसने खुद बखुदा ही अपने ऑफिस की जानिब मोड़ दिया ऑफिस में वह दाखिल हुआ तो सभी लोग चौक कर उसे देखने लगे शादी के अगले दिन ही धुला अगर ऑफिस आ जाए वह भी
वह जो सारी कंपनी का मालिक हो तो सबको हैरत तो होनी ही थी वह बे नियाजी से चलता हुआ ऑफिस के साथ आकर खड़ा हो गया जनी अपनी डेस्क पर बैठी थी उसने खड़े होकर साथ को सलाम किया उसके लबों पर मुस्कुराहट थी जदीद मगरिब लिबास में उसके जिस्म के खदो खाल वाज हो रहे थे बे इख्तियार ही साथ को अजीब सा लगा ऑफिस में कई मर्द मौजूद थे उन तमाम मर्दों की मौजूदगी में जूनी को इस तरह के कपड़े पहनने पर कुछ बुरा नहीं लग रहा था हालांकि मगरिब लिबास पहनने के लिए ऑफिस में
ऐसी कोई शर्त मौजूद ना थी कई लड़कियां मुकम्मल स्कार्फ पहने मुकम्मल लिबास में भी ऑफिस आया करती थी छम से साथ के जहन में हाला का तसव्वुर उभरा आया वह इमेच्योर जरूर लगती थी लेकिन उसकी निगाहों में एक अजीब सी हया थी ऐसी बेबाकी उसकी शख्सियत का हिस्सा ना थी साथ खामोशी से ऑफिस के अंदर चला गया जहन दो हिस्सों में बटा हुआ था वह यूं ही दोनों हाथों में सर टिकाए बैठ गया दरवाजा खटखटा करर जूनी अंदर दाखिल हुई तो साद ने चौंक कर देखा वह इस तरह भरपूर अंदाज में मुस्कुराती हुई अंदर आ
रही थी सर आपको शादी की मुबारक बाद आपको वैसे आज नहीं आना चाहिए था जूनी ने कहा तो साथ बस हल्का सा मुस्कुरा दिया जूनी ने हाथ में पकड़ा हुआ एक कागज साथ के सामने रखा सर यह मेरी छुट्टियों का अप्रूवल है प्लीज इस पर दस्तखत कर दें जूनी ने कहा तो सात चौका छुट्टियां मगर किस सिलसिले में दरख्वास्त पर नजर ड़ते हुए उसने जूनी से पूछा तो वह मुस्कुरा कर रह गई दरअसल सर मेरी शादी फिक्स हो गई है मेरे कजिन के साथ वह अमेरिका से अचानक ही वापस आ गया तो बस अचानक शादी
रखनी पड़ी मैं जॉब भी बस एक दो महीने तक ही कंटिन्यू रख सकूंगी जब तक मेरा वीजा मंजूर नहीं हो जाता क्योंकि मुझे मुझे भी शादी के बाद अपने शौहर के पास अमेरिका ही जाना है जूनी ने आम से लहजे में बताया तो साद के सर पर जैसे कोई आसमान टूट पड़ा वह चंद साने तक तो उसे देखता रहा लेकिन ना जाने क्यों उसे दिल में वह गम महसूस नहीं हो रहा था जो होना चाहिए था कुछ देर तक जूनी को देखते रहने के बाद एक गहरी सांस साद के लबों से निकली उसे जूनी की
शादी की खबर से दुख नहीं हुआ था बस हैरत हुई थी कि वह जैसा लाइफ पार्टनर चाहता था और जूनी के मुतालिक अपनी बीवी की हैसियत से सोच रहा था लेकिन उन दोनों के दरमियान तो कभी ऐसी बात ही नहीं हुई थी आंखें बंद करके सर झटक हुए साद ने दरख्वास्त पर दस्तखत कर दिए वह यूं ही मुस्कुराते हुए दरख्वास्त उठाकर ले गई साथ को अंदाजा हो रहा था कि मुस्कुराना और तवज्जो वाली निगाह डालना जूनी की शख्सियत का खासा है वह हर मर्द के साथ ऑफिस में इसी तरह मिलती है साथ ने उसके बारे
में गल अंदाजा लगाया था कुछ देर तक ऑफिस की रिवॉल्व चेयर घुमाने के बाद भी साद के दिल को सुकून ना मिला तो वह खामोशी से वापस आ गया घर में दाखिल होते ही उस पर फिर से अजीब सी कैफियत तारी होने लगी कहां रह गए थे साद टेलर तुम्हारा शाम का ड्रेस लेकर आया है उसे पहनकर एक दफा चेक कर लो कि वह ठीक है या नहीं मैं चाहती हूं कि आज की तकरीब में तुम परफैक्ट लगो आखिर आज का दिन एक खास दिन है नुसरत बेगम सामने से मुस्कुराती हुई आई थी उनकी मुस्कुराहट
में जरूर कुछ खास था साथ चौक सा गया टेलर ने उसके आए हुए कपड़े कमरे में रखवा दिए थे नुसरत बेगम की हिदायत थी कि वह जाते ही उन कपड़ों को पहनकर चेक कर ले बेजार की एक तेज लहर साद के वजूद में जागी अब अपने कमरे में जाते ही हाला से सामना करना होगा जिंदगी एक ही रात में इतनी बदल गई थी कि उसे सब कुछ अजीब लग रहा था ना चाहते हुए भी उसने अपने कमरे की जानिब कदम बढ़ा दिए बुरे दिल के साथ वह कमरे में दाखिल हुआ वह सामने ही बेड से
टेक लगाए बैठी थी उसके चेहरे के तासु आत अजीब से थे साद चौका उस पर नई नवेली दुल्हन वाला कोई असर ना था उसने जोड़ा अलमारी से निकाल कर पहना था जो कीमती और खूबसूरत जरूर था मगर मेकअप के नाम पर उसने कुछ नहीं लगा रखा था सर झटक हुए वह अलमारी खोलकर अपने कपड़ों का जायजा लेने लगा कपड़ों की फिटिंग दुरुस्त थी फिटिंग चेक करके ड्रेस वापस अलमारी में हैंग करके वह पलटा तो व उसे ही देख रही थी मुझे आपसे कुछ कहना है उसकी आवाज में अजीब पुस रायत थी साद ने चौक कर
उसे देखा माथे पर ना गवारी के बल पड़े क्या कहना है फिर से कोई बचकाना बात होगी जहन में उसने सोचा लेकिन वह यदम लपक कर आगे बढ़ी थी उसकी बड़ी-बड़ी आंखों में आंसू भर आए थे आप मुझे तलाक दे दें उसने कहा साथ को एक जोरदार झटका लगा अपने मुंह से वह तलाक मांग रही थी जबकि कल तक वह शादी पर इतनी खुश थी साथ के लब बींज गए पता भी है कि क्या कह रही हो तलाक ही चाहिए थी तो शादी क्यों की बिला वजह अपने साथ मेरी भी जिंदगी बर्बाद की हम दोनों
के दरमियान ना तो कोई जहनी अंडरस्टैंडिंग है और ना ही कभी हो सकती है तो फिर पहले इंकार कर देना चाहिए था ना उसने गुस्से से कहा तो उसकी आंसू भरी आंखें झलक पड़ी मैं और अम्मा इनकार कैसे कर सकते थे खाला की हर बात हमारे लिए हुकम का दर्जा रखती है सारी जिंदगी उनके एहसाना तले हम लोग दबे रहे हैं खाना खाने से लेकर स्कूल की फीस अदा करने तक सारा खर्च तो हमारा खाला उठाया करती थी यह और बात है कि वह चंद रुपए किसी तजब की तरह हमारे वजूद पर गिरते थे लेकिन
जब उन्होंने एहसान का बदला मांगा तो इंकार करने की हिम्मत ना अम्मा में थी और ना ही मुझ में आंसू भरी आंखों को हाथ से साफ करते हुए वह तल्खी से बोली तो साथ नाटे में रह गया वह तो उसे बच्ची समझता था लेकिन उसने जो बात की थी उसकी गहरी शख्सियत का पता दे रही थी वह एक लमहे के लिए चुप सा हो गया यानी जबरदस्ती तो उसके साथ भी हुई थी तो फिर अब तलाक क्यों मांग रही हो क्या कोई और पसंद है मिला इरादा ही वह एक कदम आगे बढ़ा उसके नजदीक हुआ
गहरी निगाहें उसके वजूद का जायजा लेने लगी यह ख्याल कि वह उसकी बीवी है इससे पहले क्यों ना आया था हालांकि उसकी कुर्बत से एक लमहे के लिए घबरा सी गई थी तलाक इसलिए क्योंकि आपकी अम्मी ने मुझे कहा है कि आज शाम तकरीब के दौरान मैं सबको यह कहूं कि आप नामर्द हैं और मैं आपके साथ रहना नहीं चाहती तब आप गुस्से में आकर मुझे तलाक दे देंगे मैं इतना सारा तमाशा नहीं कर सकती बिला वजह किसी इंसान के खिलाफ वह झूठ नहीं बोल सकती जो उसमें है ही नहीं इसीलिए आप पहले ही मुझे
तलाक दे दें मैं आप बड़े लोगों की लड़ाई में नहीं पड़ना चाहती आंसू भ आवाज में वह ब मुश्किल बोल रही थी जबकि सात के ऊपर तो हैर तों के पहाड़ टूट पड़े थे जो कुछ उसने कहा था वह ना काबिले यकीन था चंद लमहे तक उसके अल्फाज को जहन में प्रोसेस करता रहा क्या मतलब मेरी अम्मा जानने कि मैं ना मर्द हूं यह क्या बकवास है उसने गुस्सा किया हालांकि आंखों में खौफ सा उतर आया मैं सच कह रही हूं अभी थोड़ी देर पहले उन्होंने कमरे में आकर यह सब मुझे कहा है और यह
भी कि उन्होंने मेरी शादी आपसे करवाई सिर्फ इसलिए थी ताकि मैं आपकी बेइज्जती करूं और फिर उसके बाद मैं और अम्मा बहुत सी रकम लेकर यहां से चले जाएं वह आपसे बहुत नफरत करती हैं दोनों हाथों में चेहरा छुपाकर वह फूट-फूट कर रो दी थी शायद यह सब चीजें उसके असब पर बहुत भारी पड़ रही थी साद चद लमहे तक लब बंजे उसे देखता रहा नुसरत बेगम उससे नफरत करती थी यह बात किसी को उससे बताने की जरूरत ना थी लेकिन इतनी गहरी चाल सच थी या झूठ उसे अंदाजा नहीं हो हो रहा था सामने
खड़ी हाला पर निगाहें जमाए उसने चबा चबाक एक लफ्ज कहा अगर ऐसा है तो तुम ठीक है वही करना जो अम्मा ने तुम्हें कहा है मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता गुस्से से कहता हुआ वह कमरे से बाहर निकल गया हाला ने बेबस निगाहों से उसे जाते देखा आज की रात कयामत खेज थी किसी ना किसी का तो दिल टूटना ही था वह बेदम सी होकर बेड पर गिर गई कुछ ही देर के बाद ब्यूटी उसे तैयार करने के लिए आ गई थी बारात की तरह वलीम का ड्रेस भी शानदार था म्यूटेशन के महारत से किए
गए मेकअप ने उसके हुसन को दो आशा कर दिया था लेकिन उसकी आंखों में तो परेशानी थी हाला ने मोबाइल उठाकर वकत देखा साथ के हिं से जगमगा रहे थे तभी दरवाजा खोलकर नुसरत बेगम अंदर दाखिल हुई तुम जाओ उन्होंने म्यूटेशन और मुलाज दोनों का एक साथ इशारा किया तो वह सर झुकाकर बाहर निकल गई नुसरत बेगम खड़ी हो गई थी याद है ना मैंने कहा था हाला को दोनों कंधों से थामती हुए उन्होंने सख्त लहजे में कहा हाला ने अपना सर नफी में हिला दिया मुझसे यह नहीं होगा खाला जान मैं भला वह झूठ
कैसे बोलूं जो साद में है ही नहीं आप अगर नहीं चाहती कि मैं साद के साथ रहूं तो वैसे ही उन्हें कह दीजिए कि मुझे तलाक दे दें मगर मैं उन्हें भरी महफिल में ना मर्द नहीं कह सकती अभी उसने इतना कहा ही था कि नुसरत बेगम ने उसका मुंह दबोच लिया ज्यादा नेक बीवी बनने की जरूरत नहीं है अगर तुमने आज भरी महफिल में साद पर नामर्दी का इल्जाम ना लगाया तो जिंदगी भर जितने पैसे मैंने तुम्हें और तुम्हारी मां को दिए हैं वह सारे के सारे वापस करने पड़ेंगे याद रखना दो टके की
औकात है तुम्हारी मां की मेरे पैसे वह वापस किस तरह करेगी जेल में पढवा दूंगी मैं उसे मैं साथ से इतनी नफरत करती हूं कि तुम्हें उसका अंदाजा भी नहीं आज उसके झुके सर को देखने की हसरत लिए मैं बरसों से जी रही हूं उस लड़के की वजह से मेरी जवानी जाया हुई सलमान ने मुझसे शादी सिर्फ उस लड़के की खातिर की इसलिए आज मैं उसे इंतकाम लेना चाहती हूं और तुम उसमें मेरी मदद जरूर करोगी वरना अंजाम के लिए तैयार रहना राते हुए हाला को हिदायत देकर वह कमरे से निकलती चली गई थी हाला
की आंखों में आंसू भरने लगे कुछ ही देर के बाद मेहमान आना शुरू हो गए हाला को भी गाड़ी में बिठाकर हॉल में भेज दिया गया हॉल की तकरीब चांद दार थी कई मेहमान आए हुए थे दुल्हन बनी हाला को स्टेज पर बिठा दिया गया साद भी संजीदा चेहरे के साथ आकर उसके साथ बैठ गया था हाला ने एक बेबस निगाह उस पर डाली और साद ने भी पलट कर उसे देखा जैसे कह रहा हो कर डालो जो करना है हाला के कदम कपकप रहे थे नुसरत बेगम भी उनके सामने खड़ी उसे घूर रही थी
यूं जैसे इशारा कर रही हूं कि जल्दी कहो हाला ने निगाह उठाकर पूरे हॉल में देखा अमीर कबीर और आला लोग कसरत से आए हुए थे उसकी बूढ़ी मां भी सामने ही बैठी थी सादा से हुलिए में अब अपनी बेटी को सजा सवरा देखकर खुश हो रही थी जल्दी बोलो नुसरत बेगम पास आकर उसके कान में राई और उन्होंने हाथ से पकड़कर हाला को खड़ा कर दिया हाला स्टेज के दरमियान में खड़ी थी मीडिया फोटोग्राफर और सबके मोबाइलों का रुख उसकी जानिब था शायद दुल्हन कुछ कहना चाहती है सभी लोग एक दूसरे से सरगोशियां कर
रहे थे और तभी हॉल की फिजा में लाउड स्पीकर पर एक आवाज गूंजी अगर तुमने आज रात साद को ना मर्द ना कहा तो तुम्हें और तुम्हारी दो टके की मां को सारे पैसे वापस करने पड़ेंगे यह नुसरत बेगम की आवाज थी सारे माहौल पर सन्नाटा चा गया खुद नुसरत बेगम भी साक रह गई आवाज लाउड स्पीकर से आ रही थी ये वही अल्फाज थे जो उन्होंने आज शाम को हाला को कहे थे वह सब का सब किसी रिकॉर्डिंग की सूरत में चल रहा था यह सब झूठ है नुसरत बेगम का रंग सुफैद पड़ गया
साथ भी पथरीली निगाह से उन्हें देख रहा था लेकिन सबसे ज्यादा खौफ तो उन मीडिया रिपोर्टर्स और सारे लोगों से आ रहा था जो धड़ाधड़ उनकी तसवीर बना रहे थे सलमान साहब एक जानिब से निकलकर सामने आ गए थे उन्होंने हाथ से मीडिया को तसवीर लेने से मना कर दिया था मेहमान माहौल की बदमस गी को देखकर एक-एक करके रुखसत होने लगे नुसरत बेगम ने साद की बेइज्जती करने का जो ख्वाब सजाया था वह उल्टी ताबीर लेकर आया था शर्म से पानी पानी होते उन्होंने हाला को देखा मैं तेरी जान ले लूंगी दो कोड़ी की
लड़की वह यदम झपटी थी मगर अचानक ही साद उनके सामने आ गया था तमीज से बात करें बीवी है यह मेरी साद की बात पर हाला जो किसी बर्फ के मुजस्पे की तरह मुंजमपल्ली नुदरत बेगम सामने फटी फटी निगाहों से अपनी बहन को देख रही थी जो उनके मुतालिक ऐसा सोचती थी उन्हें आज मालूम हुआ था मेहमान रुखसत हो चुके थे जब चीखती चिल्लाती नुसरत बेगम के सामने सलमान साहब ने आकर उन्हें एक जोरदार थप्पड़ मारा बस कर दो कितना करोगी आज अगर तुम्हारी असलियत मेरे सामने ना आई होती तो ना जाने तुम और कितना
नुकसान करती उनकी आवाज में नफरत थी साद नुदरत बेगम और जो करीबी लोग रह गए थे सभी चौक कर उनकी जानिब देखने लगे खुद नुसरत बेगम भी गाल पर हाथ रखे फटी फटी निगाहों से उन्हें देख रही थी मुझे तो शायद कभी पता ना चलता वह तो अच्छा हुआ कि मैं साद के कमरे में पैसे उठाने चला गया वह हमें उस पर हाला का मोबाइल पड़ा था जिसमें ताजा की हुई रिकॉर्डिंग मौजूद थी ना चाहते हुए भी मैंने वह रिकॉर्डिंग सुन ली शायद हाला ने अपनी और तुम्हारी गुफ्तगू सात को सुनाने के लिए रिकॉर्ड की
थी मुझे यकीन नहीं आता कि तुम जैसी औरत अपनी बहन और उसकी बेटी को भी डसने से बाज नहीं आई यह सच है कि सारी जिंदगी मेरी दूसरी औरतों में गुजरी लेकिन मैंने तुम्हें एक छत दी मान दिया अपने बेटे की मां बनाया अगर तुम्हें सब कुछ कबूल नहीं था तो तुम मुझे तलाक के लिए कहती लेकिन यह सब करने की क्या जरूरत थी सलमान साहब गोया फट पड़े थे नुसरत बेगम गाल पर हाथ रख के जोर-जोर से चिल्ला रही थी मुझे नफरत है साद से इसकी वजह से मेरी दोबारा कोई औलाद नहीं हुई तुमने
मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी सारी जिंदगी में अपनी बहन से नफरत करती रही क्योंकि वह शक्लो सूरत में मुझसे अच्छी थी मैं उसे भी बर्बाद कर दूंगी हिस्ट्रे हुए वह सीढ़ियों से नीचे उतर रही थी सलमान साहब ने मुलाजिमों को इशारा किया जिन्होंने उन्हें ले जाकर गाड़ी में बिठा दिया सभी अपनी जगह शर्मिंदा थे दो ही दिनों में सब कुछ कितना बदल चुका था साद ने पलटकर हाला की जानिब देखा जो मुजस्सम की तरह बैठी थी आओ चलें साद ने मुस्कुराते हुए उसे देखा हाला चौक उठी शायद अल्लाह ने साद के दिल में उसके लिए
रहम डाल दिया था और खुशियों भरी जिंदगी उसकी मुंतज थी हाला ने मुस्कुराते हुए साथ के हाथ में अपना नाजुक हाथ थमा दिया नुसरत बेगम खामोश बैठी थी सलमान साहब अब जाकर उनसे माजर कर रहे थे मगर वह शाहिस्ता औरत थी उन्होंने मु दबाना अंदाज में सर हिला दिया उन्हें सिर्फ हाला की फिक्र थी सलमान सा साहब ने उन्हें मुकम्मल तसल्ली दी कि वो नुसरत बेगम को हाला को कोई नुकसान नहीं पहुंचाने देंगे मगर उनकी तसल्ली की जरूरत ही नहीं रही थी घर पहुंचते ही सबको अंदाजा हुआ कि नुसरत बेगम को शदीद दिमागी दोरा पड़ा
है शायद अपनी चाल उलट जाने का सदमा उनसे बर्दाश्त ना हुआ उन्हें फौरन ही हस्पताल ले जाया गया साद हाला सलमान साहब नुदरत बेगम सभी परेशान थे उससे एक औरत के लिए जिसने उन सबकी जिंदगियां बर्बाद करने की कोशिश की थी मगर शायद अल्लाह को कुछ और ही मंजूर था नुसरत बेगम घर तो आ गई लेकिन हमेशा के लिए उनकी जुबान बंद हो चुकी थी दिमाग की एक शिरिया दौरे की हालत में मुतासिर होने की वजह से उनका दिमाग मफल ज हो गया था वह बस बिस्तर की होकर रह गई थी सारी जिंदगी हसद और
साजिशों के दरमियान पलते पलते वह एक नफ्स याती मरीजा बन चुकी थी उन्हें खुद को इस बात का पता नहीं था हाला और साद अब साथ में बहुत खुश थे हाला को पाकर साद को सास हुआ था कि वह मोहब्बत के लायक है उन दोनों के खुशियों भरे दिन अब सुकून से गुजर रहे थे