[संगीत] स्टडी आईक्यू आईएस अब तैयारी हुई अफोर्डेबल हेलो एवरीवन आई वेलकम यू ल टू द स्टडी आईक्यू एजुकेशन प्लेटफॉर्म तो परसों अमित शाह जी ने एक स्टेटमेंट दी थी कि सेंटर यह कंसीडर करेगा कि हम आसपा को जम्मू कश्मीर से रिबोक कर देंगे इसका बहुत क्रिटिसिजम भी आया पॉलिटिकल पार्टीज द्वारा कि भाई लोकसभा इलेक्शन जो जनरल इलेक्शन आ रहे हैं 2024 के उनको मद्देनजर रखते हुए जम्मू कश्मीर में अपनी एक पॉपुलर के लिए प्रेजेंट सरकार यह कर रही है लेकिन इस सबके कंटेक्सकंपैट शर्स लेक आए थे और ब्रिटिशर्स जब हमारे ऊपर यह कानून लेकर आए
थे वह क्विट इंडिया मूवमेंट को कंट्रोल करने के लिए था और ब्रिटिशर्स जैसी जो तानाशाह पावर हमारे पे थी उनके लिए ऐसा एक्ट लाके भारत में क्विट इंडिया मूवमेंट को कंट्रोल करना कैन बी जस्टिफाइड टू सम एक्सटेंट बट इज इट जस्टिफाइड विद द प्रेजेंट डेमोक्रेटिक गवर्नमेंट इन इंडिया टू हैव सर्टेन लॉज फॉर द सिक्योरिटी ऑफ द नेशन सो इस कंटेक्सचर्स पा नाम का एक्ट है क्या हिस्टोरिकल बैकग्राउंड क्या था क्या इसके पीछे इंटेंशंस थे ब्रिटिशर्स के क्या वही इंटेंशंस आज की भारतीय सरकार के भी हैं मूविंग फॉरवर्ड क्या प्रावधान है इस एक्ट के उनको डिस्कस
करेंगे फिर एक सवाल उठता है आसपा के बारे में कि बहुत सारे लोग बोलते हैं इट इज अ नेसेसरी इवल क्या सच में आसपा नेसेसरी इवल है क्या इसके पॉजिटिव्स हैं क्या नेगेटिव हैं क्या कानून है आसपा को लेकर भारत में कौन आप स्पा लगा सकता है कौन से इसके सेक्शंस हैं आज सबके बारे में विचार में डिस्कस करेंगे सबसे पहले अगर हम इसका हिस्टोरिकल एस्पेक्ट देखें तो 8 अगस्त 1942 में भारत में क्विट इंडिया मूवमेंट आया था और क्विट इंडिया मूवमेंट के तहत हमने अंग्रेजों को बोला था कि भाई आप भारत छोड़ दीजिए इसी
टाइम के ऊपर भारत के जो वॉइस रॉय थे उनका नाम था वॉइस रॉय लॉर्ड लिलिथ गाव और भारत में जो सिक्योरिटी ऑफ द नेशन के हालात बिगड़ते हुए देख के कि भाई भारतीय अभी काबू में नहीं आ रहे हैं राइट और सिक्योरिटी ब्रिटिशर्स को रखनी थी देश की तो इसको क्विट इंडिया मूवमेंट को दबाने के लिए वॉइस रॉय लॉर्ड ललित गाव लेकर आए आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर ऑर्डिनेंस ऑफ 1942 जिसको फेमस हम लोग हिस्ट्री में ये इस एक्ट को इस तरह से डिफाइन करा जाता है कि भाई ये एक वैसा एक्ट था जिसने ब्रिटिश की
आर्म्ड फोर्सेस को एक लाइसेंस दे दिया किसी भी भारतीय को मारने का जो भी उस क्विट इंडिया मूवमेंट में शामिल था और इसका हवाला यह दिया गया कि भाई यह लाइसेंस टू किल इसलिए दिया जा रहा है क्योंकि अगर यह नहीं होगा तो भारत के अंदर इंटरनल डिस्टरबेंस आ जाएगी लेकिन असल में अगर हम इस लॉ का डिजाइन देखें और इसके पीछे की इंटेंशंस देखें तो वो यह थी कि ब्रिटिश के जो भी जितना बड़ा भी साम्राज्य था उसमें जो भारत का स्टेटस था भारत को उस टाइम के ऊपर जूल इन द क्राउन बोला जाता
था एक ताज है ताज के बीच का जो ताज का जो हीरा है है ना तो वह हीरा भारत है ब्रिटिशर्स के लिए और व इसको खोना नहीं चाहते थे और उसके लिए उनको जिस भी हद तक जाना पड़ रहा था चाहे लोगों को मारने का लाइसेंस भी दिया देना पड़ रहा था तो वो सब हथकंडे अपना रहे थे क्योंकि इसके बैकग्राउंड में वर्ल्ड वॉर टू भी चल रही थी तो उनको उसका भी खचा था कि भारतीय इंटरनल डिस्टरबेंस एक्सटर्नल डिस्टरबेंस तो हम ऑलरेडी फेस कर रहे हैं इंटरनल डिस्टरबेंस भी हो गया तो हम भारत
को खो देंगे अगर मैं आपको ओरिजिनल कॉपी दिखाऊ तो यह दाम फोर्स स्पेशल पावर ऑर्डिनेंस 1942 का ओरिजिनल कॉपी है लेकिन अगर हम फिर आजादी की ओर बढ़े तो 1947 में जब हमारा पार्टीशन हुआ तो उस वक्त के ऊपर भी भारत के जो हालात थे वह इंटरनली डिस्टरबेंस भारत में तब भी चल रही थी आपको यह भी पता होगा कि भाई पंजाब वाले एरिया में कोलकाता वाले एरिया में इन सब एरियाज में बहुत ज्यादा दंगे फसाद भी हुए ना भारतीय गवर्नमेंट ने 1947 में अभी तक हमारा संविधान नहीं बना है वो 26 जनवरी 1950 को
जाके बनेगा तो इस सिचुएशन में भारतीय गवर्नमेंट ने 1947 में चार स्टेट्स में सिमिलर मैकेनिज्म जो 1942 में लॉर्ड लिलिथ गव लेके आए थे सिचुएशन को कंट्रोल करने के लिए बंगाल आसाम ईस्ट बंगाल और यूनाइटेड प्रोविंस में लेके आई लेकिन अभी भी हम इसको मान सकते हैं कि इस वक्त के ऊपर भी जो हमारे गवर्नर जनरल थे वो लॉर्ड माउंटबेटन थे और हमारे पास 26 जनवरी तक अभी भी हमारा स्टेटस ट्रूली इंडिपेंडेंट नहीं था हम अभी भी एक डोमिनियन स्टेटस हमारे जो भारत को दर्जा दिया गया था वो डोमिनियन स्टेटस का दिया गया था कि
अभी भी हम जो हेड ऑफ द स्टेट है वह ब्रिटेन की महारानी को ही मानेंगे लेकिन अगर हम इस बात को जस्टिफाई करते हैं तो पोस्ट इंडिपेंडेंस वाली बात को कैसे जस्टिफाई करेंगे पोस्ट इंडिपेंडेंस में भी कुछ ऐसा ही हुआ तो आजादी के बाद सबसे पहले जो हमें जरूरत पड़ी आसपा की तो वो नॉर्थ ईस्ट में थी अगर हम नॉर्थ ईस्ट की बात करें तो नॉर्थईस्ट में एक ग्रुप था जिसका नाम था नागा नेशनल काउंसिल द नेम वास नागा नेशनल काउंसिल तो 1947 में ही जैसे ही भारत आजाद हुआ तो इनका यह मानना था कि
हमें भारत के साथ नहीं आना और इन्होंने अपनी आजादी डिक्लेयर कर दी हिंदुस्तान के साथ जैसे इन्होंने अपनी आजादी शुरू करी आजादी डिक्लेयर करी तो उतने टाइम में जब हमारा 26 जनवरी 1950 को कांस्टिट्यूशन बनक रेडी हो गया तो हमने भारत में 1951 और 52 में पहले जनरल इलेक्शन करवाने थे और इस इलेक्शंस का इस ग्रुप ने कर दिया बॉयकॉट और इलेक्शंस का बॉयकॉट करने के साथ-साथ इन्होंने अपनी एक सेपरेटिस्ट मूवमेंट भी चला दी और सेपरेटिस्ट मूवमेंट का मतलब यह था कि हमें नागालैंड को भारत से फ्री करवाना है और यही सेपरेटिस्ट मूवमेंट आगे जाकर
कुछ आगे वाले सालों में अर्जेंसी और टेररिज्म का काम भी करने लगी तो जब इस सिक्योरिटी का मुद्दा यह बना तो आसाम गवर्नमेंट को बोला गया कि भाई आप ये चीज कंट्रोल करिए तो आसाम गवर्नमेंट सम हाउ एट दैट पॉइंट ऑफ टाइम क्योंकि नागालैंड अपने आप में स्टेट जाके 1963 में बना है अभी ये असाम के अंदर ही था तो आसाम गवर्नमेंट को असाम गवर्नमेंट बेसिकली फेल्ड टू कंट्रोल द सिनेरियो तो उस सिचुएशन में सबसे पहली बार भारतीय सरकार ने आसपा का जो लॉ था वह भारत में लेके आई एंड उसका नाम रखा गया आर्म्ड
फोर्सेस स्पेशल पावर्स आसाम एंड मणिपुर एक्ट ऑफ़ 1958 तो यह थी बैकग्राउंड स्टोरी पोस्ट इंडिपेंडेंस भारत में पहला आसपा एक्ट आने की अभी अगर हम आगे बढ़े तो दो और भी स्टेट्स हैं पंजाब एंड चंडीगढ़ में भी 1983 में लेके आए आज का जो मुद्दा है द आर्म्ड फोर्सेस जम्मू एंड कश्मीर स्पेशल पावर्स एक्ट 1990 जो जम्मूकश्मीर में लेके आए इसको भी बाद में डिटेल में चर्चा करेंगे लेकिन दिस वाज द फर्स्ट बिगिनिंग ऑफ़ आसपा उसके बाद पहले जम्मूकश्मीर की स्टोरी को समझने से पहले अगर आप इस साल के यूपीएससी प्रीलिम्स की तैयारी कर रहे
हो तो रेजोल्यूशन यूपीएससी प्रिलिम्स टेस्ट सीरीज जो एक प्रिंटेड टेस्ट सीरीज है है ना ये सात दिनों का रोड मैप है आपका इसमें आपको 22 हाई क्वालिटी टेस्ट इस साल के प्रीलिम्स में जो मोस्ट प्रोबेबल क्वेश्चंस होंगे उनके बेसिस के ऊपर आपका टेस्ट लिया जाएगा इसका प्राइस इज 199 और आप अगर इसका डिस्काउंट का फायदा उठाना चाहते हो तो यू कैन अप्लाई द कोड जीएस लाइफ और भी स्टडी आईक्यू के किसी भी कोर्स के ऊपर अगर आपको डिस्काउंट लेना है द मैक्सिमम डिस्काउंट पॉसिबल तो आप नीचे दिया गया कोड इस्तेमाल कर सकते हो दैट इज
जीएस लाइफ अगर आपको किसी भी चीज के रिलेटेड कोई भी डाउट्स है किसी भी चीज कोर्स के रिलेटेड डिस्काउंट आप एक स्टूडेंट हो कुछ भी तो आप मुझे जो भारत में आसपा लगा सकते हैं लेकिन आसपा डायरेक्टली भारत में नहीं लगता आसपा को भारत में लगाने के लिए पहले उस क्षेत्र को एक डिस्टर्ब एरिया घोषित करना पड़ता है और इस किसी भी एरिया को डिस्टर्ब एरिया घोषित करने की पावर हमने भारत में तीन लोगों को दी है या तो सेंटर की सरकार करे या उस स्टेट के गवर्नर उसको डिक्लेयर करें या फिर किसी भी अगर
कोई वो यूटी है तो वहां के एडमिनिस्ट्रेटर उस एरिया को डिस्टर्ब एरिया घोषित करें भाई यह एरिया अभी एक डिस्टर्ब एरिया है मोमेंट इस एरिया को डिस्टर्ब एरिया घोषित कर दिया जाएगा तुरंत उसके बाद सेंटर की सरकार यहां पर आसपा एक्ट ले आएगी एंड मूवमेंट यहां पर आसपा आता है तो जितनी भी आर्म्ड फोर्सेस है आर्म्ड फोर्सेस मतलब भारतीय आर्मी और जितनी भी सिक्योरिटी फोर्सेस है जैसे कि आपका बीएसएफ आसाम राइफल्स हो गए आपके सीआरपीएफ के जवान हो गए उन सबको एक फ्री हैंड पावर मिल जाती है दे गेट फ्री हैंड पावर बट द थिंग
इज कि भाई किसी भी एरिया को अगर आपने डिस्टर्ब एरिया घोषित करना है तो वो कब किया जाएगा क्या ऐसी सिचुएशन इन तीनों को लगेगी महसूस होगी कि भाई वो किसी भी सिचुएशन को डिस्टर्ब एरिया ित कर देंगे एंड किस एरिया को करा जा सकता है ये दो मुख्य क्वेश्चंस है तो आसपा जो एक्ट है उसका सेक्शन नंबर तीन है उसमें लिखा गया है कि भाई अगर भारत के किसी भी स्टेट या यूटी के किसी भी पार्ट में या भारत की किसी भी स्टेट या किसी भी यूटी एस अ होल मतलब सारी की सारी में
हमें लगे कि भाई कुछ डिस्टर्ब कंडीशन आ गई है और डिस्टर्ब कंडीशंस का यहां पर दो मतलब है कि वहां पर या तो इंसर्जनल हो गई है और या वहां पर टेररिज्म के हालात बन गए तो यह तीन उसको डिस्टर्ब एरिया घोषित करके अंडर सेक्शन तीन सेंट्रल गवर्नमेंट वहां पे आसपा ले आएगी क्लियर नाउ अगर वहां पे आसपा आ जाता है तो होता क्या है बेसिकली अगर मैं आपको लॉ की बात बताऊं कि कानून में क्या लिखा गया है कानून में सिंपल स्पष्ट भाषा में लिखा गया है कि भाई इन दो चीजों को क्योंकि आप
एक बार मतलब समझिए आर्म्ड फोर्सेस भारत के पास किस लिए हैं कि कोई भी एक्सटर्नल थ्रेट अगर आता है भार भारत के ऊपर चाइना लेट्स से हमला करता है पाकिस्तान हमला करता है तो इन सिचुएशंस के लिए हमारे पास आमी है और इंटरनल डिस्टरबेंस के लिए भारत में हमारे पास क्या होता है हमारे पास होती है भारतीय पुलिस बट इन सरकमस्टेंसस में यह माना जाता है कि भाई इंटरनल थ्रेट इतना स्ट्रांग हो गया है अभी सिविल अथॉरिटीज जो हमारी स्टेट्स की हैं उनसे हैंडल नहीं हो पाएगा हेंस लॉ टेक्निकल शब्द जो लिखता है कि भाई
इसमें सिविल अथॉरिटीज की एड एड यानी कि मदद के लिए ग्राउंड के ऊपर आर्म्ड फोर्स को उतारा जाएगा यह है इस एक्ट के फीचर्स कि भाई फीचर्स मतलब लॉ लगता कैसे है उसके बाद अगर हम इसका लॉजिक समझे कि भाई इन सबके पीछे लॉजिक क्या है कल को आसपा जैसा कोई और भी कानून भारतीय पार्लियामेंट लेक आएगा और यह सब बोल देगा क्या संविधान इसकी इजाजत देता है क्या तो भारतीय कांस्टिट्यूशन में दे एक देर इ दिस आर्टिकल कॉल्ड ए आर्टिकल नंबर 355 आर्टिकल 355 में ये क्लियर लिखा गया है कि भाई अगर किसी भी
स्टेट गवर्नमेंट को एंड स्पेशली व स्टेट की सरकार जो है व उस स्टेट की सरकार है जो किसी भी कंट्री के साथ बॉर्डर शेयर करती है वहां पर अगर स्टेट सरकार के पास कोई भी प्रॉब्लम आती है और स्टेट की सरकार उसको खुद बखुदा डील नहीं कर पाती तो सेंटर की सरकार को तुरंत उसकी मदद में उतरना चाहिए यह लिखा गया अंदर 355 तो कांस्टीट्यूशनली अगर हम एक जस्टिफिकेशन दे आसपा को लाने की सो दैट विल बी आर्टिकल नंबर 355 ऑफ द कांस्टिट्यूशन चलिए उसके बाद अगर हम अगली बात पे बढ़े कि भाई आसपा के
अंदर जब मान लीजिए इंप्लीमेंट हो गया तो कौन सी ऐसी स्पेशल पावर्स है जो आमी को मिल जाती है है ना तो सबसे पहले यह बोला जाता है कि भाई आर्मी को अगर यह प्रतीत हो दे प्रिज्यूम इट है ना उनको लगे ऐसा कि भाई कोई भी व्यक्ति लॉज के क कांट्रेरी चल रहा है कि जो भी कानून है उनके अपोजिट में चल रहा है या उनको यह लगे कि भाई वो बंदा आर्म्स कैरी कर हथियार उठा के घूम रहा है तो तुरंत बिना किसी वारंट के किसी भी चीज के आर्म्ड फोर्सेस को यह परमिशन
दी गई है कि भाई आप उसको मार सकते हो यू कैन किल दैट पर्सन और किल ट पर्सन कैसे आप उसके ऊपर फायरिंग भी कर सकते हो आप उसको फोर्स से भी मार सकते हो पहली पावर तो यह है पावर टू किल और लाइसेंस टू किल जो हम पहले इंटेंशन की बात कर रहे थे दूसरी चीज सेकंड पावर जो दी गई है कि भाई अगर आपको लगता है कि भाई यह व्यक्ति एनी इंडिविजुअल उसने कोई भी क्राइम कमिट कर दिया है या आर्म्ड फोर्सेस को यह प्रतीत हो कि भाई वह क्राइम कमिट करेगा इन फ्यूचर
दोनों में से कुछ भी लगता है कि भाई उसने कर दिया या करेगा दोनों सिचुएशंस में विदाउट वारंट आप उसको अरेस्ट कर सकते हो आपको वारंट की जरूरत आर्म्ड फोर्सेस को नहीं है तीसरी चीज आर्म फोर्सेस किसी की पी प्रेमास को विदाउट एनी वारंट कभी भी किसी के भी घर पर जाकर कुछ भी छानबीन कर सकती है जिन स्टेट्स में यह लगा है आप उनके अगर आपके किसी के साथ कांटेक्ट है नॉर्थ ईस्ट में आपका कोई दोस्त है मित्र है जम्मू कश्मीर में या पंजाब में उनसे सिचुएशन पूछिए इट्स वेरी है वक आप इमेजिन कीजिए
आप रात को अपने घर पर सो रहे हो पुलिस इ एंटरिंग र प्रेमास विदाउट एनी वार्निंग आपका सब कपड़े पपड़े इधर उधर करके वो तलाशी करके जा रहे हैं सो एक इसमें जो प्रोविजन है विदाउट एनी वारंट किसी भी प्रीमाइ को सर्च करा जा सकता है एंड सर्च यह भी नहीं पूछता किसी भी हद तक जाके सर्च के परमिशन है इसमें उसके बाद चौथा अगर आर्म्ड फोर्सेस को फिर से यह फील होता है फिर से दे प्रिज्यूम इट कि भाई एक पर्टिकुलर बिल्डिंग है उस बिल्डिंग को टेररिस्ट ने या तो अपना हाइड आउट बनाया हुआ
है या यह पूरे पूरे चांसेस है कि कल को इस बिल्ल्डिंग का इस्तेमाल करके टेररिस्ट इसको हाइड आउट बना सकते हैं इन फ्यूचर तो उस बिल्डिंग को तुरंत वो लोग डिमोलिश कर सकते हैं अभी इन फीचर्स में आप एक चीज कॉमन प्रिज्यूम करें कॉमन चीज जो इन सब में है वो है एक प्रिजंस कि भाई यहां तो ऐसा हो गया या उन्हें लगे कि ऐसा हो सकता है द प्रॉब्लम हियर इज जो प्रिजंस है ना ये एक ह्यूमन का माइंड कर रहा है एंड ह्यूमन माइंड कैन ऑलवेज बी सिबल टू एरर्स वहां पे तो एरर
हो ही सकते हैं क्योंकि यह प्रिज्यूम हो सकता है ये ह्यूमन का दिमाग सोच रहा है दिस इज अ रैशनल व्हिच इज प्लेइंग अ रोल हियर एंड रैशनल 50 पर टाइम्स इट कैन बी करेक्ट बट इट आल्सो कैन बी रंग लेकिन हम अगर हम ओवरऑल भारतीय जस्टिस प्रणाली की बात करें तो भारतीय जस्टिस प्रणाली तो यह बोलती है कि भाई 100 जो जो गुनाहगार लोग हैं वह छूट जाए लेकिन कभी भी एक जो बेगुनाह है उसको ना पकड़ा जाए तो यह तो उसके बिल्कुल कंट्रावेंशन में है तो यह एक चीज इसका बहुत बड़ा क्रिटिसिजम बन
जाती है राइट मूविंग फॉरवर्ड अगर हम आगे की बात करें कि भाई आसपा के अंदर कौन-कौन सी स्पेशल पावर्स दी गई है तो एक स्पेशल पावर है जो इसका सबसे तगड़ा क्रिटिसिजम भी बनती है वो है आसपा एक्ट का सेक्शन नंबर छ आप सबने पिछली साइड के ऊपर पावर्स तो देखी कि भाई कौन-कौन सी पावर्स दी जाती है अब प्रॉब्लम एक और भी है आर्म फोर्सेस आप एक बात समझिए कि भाई आर्म फोर्सेस को आइडली है तो व भी ह्यूमन ही आप एक और भी बात समझिए कि भाई लेटस से आर्म्ड फोर्सेस को किसी व्यक्ति
को मारना पड़ भी रहा है तो उनको अपना कितना मोराल स्ट्रंग करना होगा एक देश की सिक्योरिटी के लिए कितना उन्हें एक मोटिवेशन चाहिए होगी एंड अगर वह इन चारों काम बिकॉज देखो देर इज अ चांस ऑफ लक कई बार हो भी सकता है कि भाई वो किसी जो लेटस से कोई बम ब्लास्ट होने वाला है उसको बचाने के चक्कर में लेट्स से दे हेली टूक अ डिसीजन लेट्स से वो डिसीजन गलत भी हो सकता है नो प्रॉब्लम इन दैट राइट तो जिस टाइम वो डिसीजन गलत होगा उस टाइम अगर हम उनको ट्राई कर ले
तो क्या अगली बार लेट्स से उनका यह मोराल या मोटिवेशन आएगा कि भाई हम इस चीज को करें जवाब है कुछ हद तक नहीं इसी को टैकल करने के लिए ताकि आर्म्ड फोर्सेस का इन जैसी सिचुएशन में जो मोराल है मोटिवेशन है वह हाई रहे जितने भी हमने पिछले चार पॉइंट्स करें इनके अंदर अगर किसी से कोई भी गलती होती है तो उनको उसके अंदर कंप्लीट इम्युनिटी है कि भाई अगर उनसे कुछ भी गलती होती है कोई कोर्ट उन्हें ट्राई नहीं करेगा जब तक कि सेंट्रल गवर्नमेंट उस कोर्ट को या उस किसी भी व्यक्ति को
उसकी परमिशन ना दे दे तो इनकी कोई भी गलती अंडर दिस एक्ट कैन नॉट बी कॉल्ड इनटू क्वेश्चन अंट्स देम द परमिशन टू डू इट तो यह सेक्शन सिक्स है इसका बट इसके पॉजिटिव्स तो ठीक है मान लिया कि भाई उनका मोटिवेशन हाई रहेगा उनका मोराल बूस्ट होता रहेगा टू सर्व द नेशन बट इसका नेगेटिव भी तो है इससे आप उन चारों चीजों के अंदर उन्होंने जो भी करा उनकी अकाउंटेबिलिटी को कैसे इंश्योर करोगे आल्सो लेट्स से आसपा नामक जो लॉ है वो फाइनली लगाता कौन है सेंटर की सरकार इफ नाउ सेंट्रल गवर्नमेंट इज इंपोजिंग
सम लॉ और उस लॉ के चलते ग्राउंड लेवल के ऊपर कुछ गलत हो गया एंड समवन वांट्स टू क्वेश्चन कि भाई वो गलत क्यों हुआ उस क्वेश्चन करने की पावर के लिए परमिशन कौन देगा वोह तो सेंट्रल की सरकार अपने आप ही दे रही है तो इन डीप ऑफ द डीप सरकमस्टेंसस हाउ कैन यू इमेजिन दैट कि भाई लोग या एनी इंडिविजुअल इन द वर्ल्ड अपनी गलती को ट्राई करने की परमिशन अपने आप ही दे देगा तो यहां पे फिर से प्रॉब्लम आएगी कॉन्फ्लेट ऑफ इंटरेस्ट की देयर विल कम द प्रॉब्लम ऑफ कॉन्फ्लेट ऑफ इंटरेस्ट
तो ये इसका एक बहुत बड़ा चैलेंज है राइट उसके बाद हम बढ़ते हैं कि भाई केस ऑफ जम्मू एंड कश्मीर क्या है तो 1980 में वर्ल्ड ओवर ही ये ट्रेंड था कि भाई सब जगह जो लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिस्म है या इंसर्जनल सेस हैं ये वर्ल्ड ओवर राइज हो र है और यही टाइम था कि भाई जम्मू कश्मीर को भी अपने यहां पे पाकिस्तान का आईएसआई और इवन फॉर दैट मैटर पाकिस्तान आर्मी द्वारा स्पंस जो ग्रुप्स थे हिज्बुल मुजाहिदीन या आप लक्ष लश्करे यबा है ना इनके द्वारा स्पॉन्सर्ड या दोनों का स्पंस करके इनके द्वारा जो
कश्मीर वैली थी वहां पे इनसरजेंसीज को बहुत ज्यादा बढ़ावा दिया गया एंड सिचुएशंस इन कश्मीर बाय द एंड ऑफ 1980 वर वर्स्ट जिसे जिसके मद्देनजर रखते हुए भारतीय गवर्नमेंट ने जम्मू कश्मीर में 1990 में आसपा का इस्तेमाल करा और व अभी तक कंटिन्यूड चलता आ रहा है अभी जो हमारे होम मिनिस्टर हैं अमित शाह जी उन्होंने बोला है कि सेंटर यह रिव करने के बारे में सोच रहा है ठीक है नाउ बिफोर गोइंग कि भाई दिस इज अ गुड डिसीजन और अ बैड डिसीजन हम इसका एक क्रिटिकल एनालिसिस कर लेते हैं कि भाई आसपा के
हमने सब प्रोविजन जान लिए अब देखते इसके पॉजिटिव क्या निकलते हैं और नेगेटिव क्या निकलते हैं राट नाउ इफ व टॉक अबाउट क्रिटिकल एनालिसिस सबसे पहले हम डिस्कस करते हैं कि भाई क्या इसके नेगेटिव रहने वाले हैं क्या नेगेटिव ऑलरेडी है और फिर हम लोग चर्चा करेंगे कि भाई इस एक्ट के पॉजिटिव क्या है ठीक है सबसे पहला जो नेगेटिव है वह हम एक साइकोलॉजिकल पर्सपेक्टिव से देखते हैं साइकोलॉजिकल पर्सपेक्टिव से यह बात होती है कि भाई यह जो एक एक्ट है तो कॉलोनियल लेगस है फॉर एग्जांपल अभी-अभी जैसे जो हमारा आईपीसी ये सब था
इनमें अभी-अभी अमेंडमेंट हुई है और भारतीय गवर्नमेंट नहीं नए प्रावधान लेके आई है इनमें से एक प्रावधान था सेडिशन का और सेडिशन को जब आजाद भारत में जब भी उसको क्रिटिसाइज करा जाता था उसके लिए हमेशा बोला जाता था कि भाई इस एक्ट के अंदर जो ब्रिटिशर्स के टाइम से चलता आ रहा है सेक्शन 124 ए ऑफ आईपीसी इसके अंदर तो हमारे फ्रीडम फाइटर्स जैसे बाल गंगाधर तिलक और गांधी जी को ट्राई करा गया था उनके ऊपर सेडिशन का चार्जेस लगा था और तब हम यह ब्लेम करते थे कि भाई ब्रिटिशर्स हमारे ऊपर राज कर
रहे हैं हम लोगों का राज नहीं है इस वजह से हमें इस जैसे जो भी हार्श रूल्स हैं उनका सामना करना पड़ रहा है बट व्हाट अबाउट एन इंडिपेंडेंट नेशन यह तो डेमोक्रेसी है गवर्नमेंट ऑफ द पीपल फॉर द पीपल बाय द पीपल क्या इसमें भी ब्रिटिशर्स की इंटेंशन वाले जो लॉज थे वो अभी भी कंटिन्यूड रहेंगे तो पहला क्वेश्चन तो यही आता है कि भाई लॉर्ड लिलिथ ग जिस इंटेंशन से इस लॉ को लाया था क्या भारतीय गवर्नमेंट भी उन्हीं इंटेंशन से इस लॉ को कंटिन्यू रखना चाहती है क्या हम ब्रिटिशर्स की लेगासी को
अभी भी कंटिन्यूड रखना चाह रहे हैं क्या हम अभी भी विक्टोरियन एरा मेंटालिटी में है तो पहला क्रिटिसिजम तो इसका यही है सेकंड अगर हम बात करें तो जितनी भी सिक्योरिटी फोर्सेस हैं टाइम एंड अगेन सिंस 1958 60 है ना इनके ऊपर बहुत ज्यादा ब्लेम्स लगे हैं ह्यूमन राइट्स वायलेशन जैसे कि भाई फेक एनकाउंटर्स करे गए मेमन का रेप करा गया है ना लोगों को टॉर्चर करा गया तो यह तीन ब्लेम इनके ऊपर बहुत बार लगते रहे तो सेकंड इसका रीजन यह हो सकता है नेगेटिव का थर्ड रीजन अगर बात करें हम कि भाई सेक्शन
सिक्स के अंदर आप लोगों ने दे दी है इम्युनिटी एक तो पहले ही जो इसकी जो जो भी इसके प्रावधान है वह एक ह्यूमन रेशनल या प्रेसमन पर बेस्ड है और ग्राउंड लेवल के ऊपर जब एक आदमी को तुरंत डिसीजन लेना है तो ह्यूमन रेशनल तो वैसे भी एक्युरेटली काम नहीं कर पाएगा उसके बाद अगर उनसे कुछ गलती भी होती है तो आप उनको एक ब्लैंकेट इम्युनिटी दे रहे हो और इम्युनिटी की परमिशन भी उससे लेनी है जिसने आप्पा लगवाया था सो दैट इज द अनदर क्रिटिसिजम कि भाई कॉन्फ्लेट ऑफ इंटरेस्ट आ जाएगा उसके बाद
अगर हम अगली बात करें चौथे नंबर पे तो भारतीय कांस्टिट्यूशन में देयर इज आर्टिकल नंबर 21 भारतीय कांस्टिट्यूशन का आर्टिकल नंबर 21 हर एक भारतीय नागरिक को राइट टू लाइफ एंड पनल लिबर्टी देता है लेकिन इस चीज में आप आर्टिकल 21 को भी वायलेट कर रहे हो दूसरा भारतीय कांस्टिट्यूशन में आर्टिकल 22 है जो भारतीय लोगों को अरेस्ट के केसेस में कुछ प्रोटेक्शन देता है एंड इसमें जब वह अरेस्ट करने आ रहे थे वह कैसे था विदाउट वारंट तो यह आर्टिकल 22 को भी वायलेट करता है तो दो तो फंडामेंटल राइट्स वायलेट करता है य
उसके बाद अगर हम आगे बढ़े और हम इंटरनेशनल कम्युनिटी की बात करें वैसे तो बहुत सारी कम्युनिटीज ने भारत के पा के एक्ट को बोला है कि भाई इट शुड बी रिपीट लेकिन अगर मैं आपको दो चुनिंदा नाम लूं संयुक्त राष्ट्र यानी कि यूनाइटेड नेशंस एंड यूनाइटेड नेशंस का ह्यूमन राइट्स काउंसिल इन दोनों ने बोला है कि भारत का आसपा एक्ट तुरंत द भाव से रिपील होना चाहिए दे आर आल्सो नॉट इन सपोर्ट ऑफ दैट बिकॉज ऑफ द ह्यूमन राइट्स वायलेशन जो इस एक्ट के अंदर करी गई उसके बाद अगर मैं पॉजिटिव्स की बात करूं
या हम यह बात करें कि भाई इस एक्ट को हम जस्टिफाई कैसे कर सकते हैं गवर्नमेंट के नजरिए से कि हाउ इट इज जस्टिफाइड या हाउ वी कैन जस्टिफाई इट सबसे पहला तो यही है कि भाई दिस एक्ट इज अ नेसेसरी इवल दिस एक्ट इज अ नेसेसरी इवल एक अगर सरल भाषा में कि बच्चे को छोटे को इंजेक्शन लगता है इंजेक्शन जरूरी है उसको दर्द होती है इंजेक्शन से बट दैट इंजेक्शन इज वेरी मच रिक्वायर्ड है ना उसको उसकी उसी की इम्युनिटी हम लोग स्ट्रांग कर रहे हैं सो एक तो इसका ये हो सकता है
कि इट इज अ नेसेसरी इवल जो हमें भारत की सोनि एंड सिक्योरिटी ऑफ द नेशन को सिक्योर करने के लिए चाहिए दूसरी अगर हम बात करें तो सेंट्रल गवर्नमेंट ने जो यह था सेक्शन छ वाली बात थी इसके अंदर उन्होंने कंपलीटली इस बात को डिनायर है और बोला है कि इस एक्ट के अंदर जो सेक्शन छ है वो इम्युनिटी देता है बट देयर इज नॉट कंप्लीट इम्युनिटी प्रॉपर इम्युनिटी नहीं है और किसी ने पूछ लिया कि भाई कैसे तो सेंट्रल गवर्नमेंट सेड कि भाई एक देर वास दिस प्लेस कॉल्ड ए अंशी पुरा तो अंशी पुरा
में फेक एनकाउंटर हुआ था जम्मू कश्मीर में 2020 में उसके अंदर जिन भी ऑफिसर्स का नाम आया था उन सब के सब को कोर्ट मार्शल किया गया था दे व कोर्ट मार्शल तो कंप्लीट इम्युनिटी नामक कोई चीज नहीं है और इसी का हवाला देके आप यह भी बोल सकते हो कोर्ट मार्शल का हवाला देके कि भाई जो हमने पहले क्रिटिसिजम करा कि किसी की कोई अकाउंटेबिलिटी नहीं रख रहा तो अकाउंटेबिलिटी वाला फैक्टर तो है कुछ हद तक अकाउंटेबिलिटी रखी जा रही है दैट वी कैन एक्सेप्ट उसके बाद सेंट्रल गवर्नमेंट ये बोलती है कि भाई एक्ट
के अंदर यह बात जरूर लिखी गई है कि भाई अगर आपको लगता है कि भाई कोई भी बंदा आर्म कैरी कर रहा है या कोई भी क्राइम कमिट करेगा उसके ऊपर आप फायर खोल सकते हो कब तक टिल हिज डेथ या आप फोर्स का इस्तेमाल कर सकते हो बट हम अगर एक्ट में नहीं भी लिखा गया दिस इज अ क्लियर इंस्ट्रक्शन टू द सिक्योरिटी फोर्सेस कि यह करने से पहले फायर ओपन करने से पहले एक वार्निंग आपको जरूर देनी है सो एक बफर जोन यहां पर भी सेंट्रल गवर्नमेंट ने इस एक्ट को डिफेंड करते हुए
बोला है अगर हम उसके बाद बात करें कि भाई जब भी फोर्सेस काम करती हैं तो दे आर लरे ऑलवेज एक्टिंग इन एड ऑफ सिविल अथॉरिटीज फुल पावर नहीं है सिविल अथॉरिटीज की मदद करने के लिए आर्म्ड फोर्सेस हैं आप ये नहीं बोल सकते कि कंप्लीट लाइसेंस टू किल ही हमने दे दिया है एंड लास्ट जो है वो सेंट्रल गवर्नमेंट ने ये बोला है कि भाई इस एक्ट को अगर हमने किसी भी स्टेट में एक बार लगा दिया है तो हर एक छ महीने बाद हमारी एक कमेटी उसको रिव्यू करती है कि भाई क्या इसको
आगे एक्सटेंड करना चाहिए या नहीं करना चाहिए इफ द कमेटी फील्स द नीड कि भाई 6 महीने बाद भी हमें जरूरत है इसको एक्सटेंड करने की उसी कंडीशन में इसको एक्सटेंड करा जाता है नहीं तो इसको हटा दिया जाता है सो यह इसका हम इसको कुछ पांच छ पॉइंट से जस्टिफाई भी कर सकते हैं मूविंग फॉरवर्ड अगर हम देखें कि भाई भारतीय उच्च न्यायालय जो सुप्रीम कोर्ट है तो उन्होंने अपनी जजमेंट में क्या बोला तो सुप्रीम कोर्ट जजमेंट में देर रिंग स्टंस अगर मैं आपको सुप्रीम कोर्ट जजमेंट की हम लोग बात करें तो हम इनको
मुख्य तौर के ऊपर कुछ तीन भाग में बांट सकते हैं ठीक है सबसे पहले हमारे पास है नागा पीपल्स मूवमेंट नागा पीपल्स मूवमेंट ऑफ ह्यूमन राइट्स वर्सेस यूनियन ऑफ इंडिया और यह आपका केस है 1998 का इसमें सुप्रीम कोर्ट ने क्लीयरली बोला कि भाई यह एक्ट गलत नहीं है इट शुड बी कंटिन्यूड इस में जो भी कुछ है वह आर्बिट्रेरी नहीं है इस एक्ट में जो भी कुछ करा जा रहा है उस करने के पीछे की जो इंटेंशन है वह सरकार की इंटेंशन अनरीजनेबल नहीं है व रीजनेबल इंटेंशन है यह चाहिए भारत की सिक्योरिटी के
लिए दूसरा जो केस आता है वह आता है एक्सट्रा जुडिशल किलिंग्स एक्स्ट्रा जुडिशल किलिंग्स विक्टिम फैमिली कि भाई जिनको एक्स्ट्रा जुडिशियस किलिंग्स में मारा गया उनके जो पीड़ित फैमिलीज हैं उनका एक गठन था और यह क्यों बना था क्योंकि एक रिपोर्ट में पता लगा कि भाई 1960 में लेके मणिपुर में अभी तक 1528 लोगों को बेगुना लोगों को फेक एनकाउंटर्स में मार दिया गया है उसके बाद यह केस हुआ था और यह केस है आपका 2016 का केस दिस वाज आल्सो वर्सेस यूनियन ऑफ इंडिया गवर्नमेंट भारतीय गवर्नमेंट के खिलाफ इसने उन्होंने बोला सुप्रीम कोर्ट का
जो वर्डिक्ट था जो इंक्वायरी बना बैठाई गई थी उसने बोला कि भाई जो भी हमें हमने डेथ को इंक्वायर करा है डिस्टर्ब एरिया में मेजॉरिटी ऑफ देम आर विद फेक एनकाउंटर्स मेजॉरिटी ऑफ देम गलत है मेजॉरिटी ऑफ देम एवरी डेथ इन डिस्टर्ब एरिया इज ऑफ फेक एनकाउंटर्स उसके बाद इन्होंने बोला कि भाई जो इस कानून में आपने एब्सलूट इम्युनिटी दी है जो हमने सेक्शन छ करा उसको भी भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने क्रिटिसाइज करा यह है 2016 की जजमेंट और तीसरा अगर हम बात करें तो 2017 में इसी के ऊपर एक पीआईएल भी फाइल करा गया
था और पीआईएल में जो सुप्रीम कोर्ट था उसने बोला कि भाई हां हम यह बात मानते हैं और अब से हम परमिशन देते हैं कि भाई सीबीआई नामक एजेंसी है जो भारत में वो अगर कोई केस मिलता है फेक एनकाउंटर का कोई भी फर्जी किलिंग का केस मिलता है तो अब से सीबीआई उन मुद्दों को इंक्वायर करेगा तो अगर हम इस एक्ट की जस्टिफिकेशन में जाए अभी तो एक पॉइंट यह भी इनकल्केटिंग कोर्ट ऑफ इंडिया का स्टंस मूविंग फॉरवर्ड अगर हम आगे बढ़े तो भारतीय गवर्नमेंट ने भी टाइम टू टाइम कमेटी बनाई है उनमें से
दो फेमस कमेटी है एक आपकी कमेटी है बीपी जीवन रेड्डी कमेटी जिसको 2005 में बनाया गया था एंड सेकंड इज योर संतोष हेगडे कमेटी जिसको भारतीय सरकार ने 2013 में बनाया था अगर हम बीपी जीवन रेडी कमेटी की बात करें तो एक थंजानते व्यक्ति थे जिनको असाम राइफल्स ने मणिपुर में मारा था एंड इट वास ब्लेम कि भाई दिस वास फेक एनकाउंटर एंड ट वान एक्स्ट्रा जुडिशल किलिंग तो इसके ऊपर जब बीपी जीवन रेडी कमेटी बनाई गई तो इस कमेटी ने जब इसके ऊपर तफ्तीश करी उन्होंने बोला कि भाई तुरंत भाव से आसपा एक्ट को
रिपील कर दिया जाना चाहिए इट शुड बी रिपील्ड किसी ने पूछा कि भाई क्यों इट सेड दैट कि भाई दिस लॉ इट सेल्फ इज अ कंट्रोवर्शियल लॉ यह एको यल लॉ है किसी ने फिर से पूछा कि भाई सर कंट्रोवर्शियल लॉ क्यों है दे सेड कि भाई इसमें सिक्योरिटी फोर्सेस को जो दो पावर्स दी गई हैं है ना एक कि भाई उनके ऊपर वो कुछ भी कर सकते हैं देर इज लाइसेंस टू किल एंड लाइसेंस टू किल के पास दे आल्सो बाद दे आल्सो गट इम्युनिटी तो ये दोनों चीजें की दोनों चीजों की वजह से
दिस एक्ट शुड बी रिपील्ड और फिर उन्होंने बोला कि भाई भारत में टेररिज्म या इंसर्जनल करने के लिए ऑलरेडी भारतीय गवर्नमेंट के पास यूएपीए एक्ट है तो आप यूएपीए एक्ट को कुछ इस तरीके से अमेंड करो कि आसपा में कुछ प्रोविजन आप यूएपीए में इनकल्केट्स को रिपील करो और यूएपीए में टेररिज्म को कुछ डील करने के लिए या इंसर्जनल करने के लिए कुछ प्रोविजन लगाओ यह थी बीपीजी वन रेड्डी कमेटी की रिकमेंडेशंस मूविंग फॉरवर्ड अगर हम संतोष हेगडे कमेटी की बात करें तो जो मैंने बताया था 1528 किलिंग्स हुई है ना मणिपुर में सिंस 19
79 से या 1960 से इनमें से इस कमेटी ने छ केसेस की तफ्तीश करी और इस कमेटी ने पाया कि भाई छ में से छ केस र नॉट जेनन एनकाउंटर सब के सब इलीगल एनकाउंटर्स थे जिन भी छ केसेस की कमेटी ने तफ्तीश करी एंड रेस्ट इट सेड ट की भाई यह जो आसपा है इसमें आप सिक्योरिटी फोर्सेस को डिस्प्रोशियम तो यह था गवर्नमेंट कमेटी का स्ट राट तो यह थी सारे के सारे आप स्पा की अंडरस्टैंडिंग है क्लास को एंड करने से पहले एक मेनस का क्वेश्चन मैं आप लोगों को दे रहा हूं आप
कमेंट्स में नीचे मेंशन कीजिएगा ए आपके भी क्या विचार आप को लेके शट बी कंटिन्यू नॉट जस्ट टेल मी आसपा इ ने आसपा इ नेसेसरी इवल इन दिस कांटेक्ट क्रिटिकली एनालाइज द कंटिन्यूएशन ऑफ ब्रिटिश एरा लॉ इन इंडिपेंडेंट इंडिया ऑफ 21 सेंचुरी ठीक है जी सो दिस इज र क्वेश्चन आप एड्रेस करो फिर कमेंट्स में अगर आईल सी आई वि आल्सो रिव्यू र आंसर्स है ना उसके बाद द लास्ट इंफॉर्मेशन स्टडी आईक्यू हैज ब्रॉट ईएमआई ऑप्शंस टिल 31 ऑफ मार्च यू हैव नो कॉस्ट ईएमआई ऑप्शंस ऑन ऑल द अवेलेबल कोर्सेस अगर आपको इनके बारे में
कोई भी इंफॉर्मेशन चाहिए कि कैसे यू हैव यू कैन सब्सक्राइब और यू कैन अवेल दिस बेनिफिट ऑफ जीरो कॉस्ट ईएमआई सो यू कैन कांटेक्ट मी ऑन जीए ग 07 ऑन [संगीत]