जिसने प्राणायाम कर लिया उसके का हंकार से भी शेर भाग जाते शेर रीछ आ जाए तो प्राणायाम की सिद्धि वाले एक हो गए थे सिंध में उनका नाम था पारूमल पारूमल की कथा सुनी है किसी ने वोह थानेदार था पारूमल परमल थानेदार था कोई वासरा आया था बाहर से तो थानेदार को बंदोबस्त में जाना होता है तो एक दिन दो दिन तीसरे दिन छुट्टी मिली घर आने की तो जरा सा एक और दूसरा को तीसरा कोर मुंह में आया इतने में आदमी बुलाने आया कि आपको एसपी बुला रहे हैं तो पारूमल को लगा कि जिस
पेट के लिए नौकरी करते वह पेट पेट पूजा भी ट नहीं मिलती है गुलामी को गुस्सा आ गया बोले नौकरी की ऐसी तैसी उसने अपना क्या करा खाकी वर्दी को बगल में डाल दिया और पिस्तौल बस्त धोती पहर ली जैसे साधु पैर ऐसे ऊपर और जाकर एसपी के मुंह पर फेंक दिया बोले ले ले तेरी नौकरी रख दे रिजाइन लिख दे फ अपने कमरे में आकर बैठ गए सत्संग सुना हुआ था थोड़ा प्राणायाम करके स्वासो शवास में शांत गिन तो आनंद आया शांति मिल बस ईश्वर ईश्वर की कृपा का अनुभव होगा तभी उठूंगा ऐसे करके
एक दिन दो दिन तीन दिन चार दिन पाच दिन सात दिन तक बस थोड़ा सा पानी पी लेते व खाना रख के जाते जरा सा खाया स्नान बन करके फिर बैठ जाते किसी से बात नहीं करते तो सात दिन तक लगातार ऐसे बस जप और प्राणा तो घर के लोग नाराज हो गए बड़ा कुटुंब था काके थे काकिया थी बाप था मां थी औरत थी इतनी बढ़िया नौकरी छोड़ के आ गए अपनी दुकाने भी थी सोनार की उने चांदी के और सोने के गहने बनाकर शोकेश में रखते हैं ज्वेलर लोग ऐसे सोने की छोटी मोटी
दुकान भी थी तो काका ने समझाया दूसरों ने दुकान पर ले गया कि नौकरी छोड़ के आया तना थानेदार का पोस्ट था कुछ बोलता नहीं है तू तो ऐसा है उसने क्या करा कि वो जो सुनार की दुकान में जो गहने बहने छोटे मोटे थे ना कहीं पायल है कहीं एयरिंग होते हैं कहीं वाले होते हैं नाक की बुटिया होती है कहीं ठूंठ ठका होता था सिंध में बुद्धि मायो को पता है कहीं एयरिंग होते हैं कहीं कुछ होता है कोई कोई पैर में पहनने का बिछुआ होता है पता है तुमको ना तो ये सब
लेकर हमम दस्ते में कूटने बैठ गए जैसे माहिया धनिया कटती है ना ऐसे कूटने बैठ गए तो फिर बाजार के लोग तो कट्ठे हो गए अरे तुम ऐसा क्यों कर रहा ऐसा है बोले सब लोग मेरे को बोलते पागल है पागल है तो पागल तो ऐसे ही करेगा तो एक मुखी था वो अकल वाला था वो अलग से ले गया बोले पारमल सच बता सब क्या बात है बो बस मैं तो कमरे में प्राणायाम करके चुप जप करता स्वास को देखता 11 15 प्राणायाम का जो नियम है वही करता ज्यादा नहीं लेकिन स्वास उ स्वास
को देखते देखते केवल कुंभक सा लेकिन तुमने यह हमाम दस्ते में सारा गुड़ गोब कर दिया बोले मैं ने नहीं किया है फिर किसने किया बोले किसी ने नहीं किया तो बोले व गहने सारे कूट कूट के तो तुमने चटनी बना दी बोले नहीं ऐसे ही पड़े ऐसे ही पड़े बोले तो यहां शक्ति आई बोले ऐसे ही पड़े तो सारे ऐसे के ऐसे निकले अमाम दस्ते से बाप रे अभी तो अंगूठी को तो हमम दस्ता लग और ऐसी कैसी र अंगूठी रिंग रे ऐसे के ऐसे वाले रहेंगे वो फुली बुली रहेगी ऐसी सब ऐसे कैसे
लोग बोले भाई यह तो बरा सना करके महापुरुष ग तो पारमल ने सोचा कि तो खाली आठ दिन हम मौन रहे आठ दिन में ऐसा हुआ तो तो छोड़ के ऋषिकेश चले गए ऋषि में जहा भीड़ बड़ाक है वहां नहीं आगे एकांत में किसी गुफा में कोई संत का रा मार्गदर्शन मिला और केवली कुंभक में ध्यान में लगे छ महीने तक बाद में आए तो आए बड़े अंदर से बाहर से तो वैसे ही आदमी दिखेगा अंदर से बड़ी शक्ति फिर तो लोग उनको बोले आशीर्वाद करो ऐसा ऐसा उनका भला हो जाता था तो लोग प्रसाद
लाने लगते इधर भी ले आते ना लोग प्रसाद नहीं लाते तो पारमल को कोई प्रसाद देते तो फिर माट देते तो बच्चों को प्यार करते थे क्योंकि बच्चों बच्चों के तो हृदय शुद्ध होता है ना बचपन में जो जान लेते सीख लेते तो महान बन सकते हैं ना बच्चे तो तो पारमल बच्चों को प्यार करते तो बच्चों ने एक कोई कभी प्रसाद लावे कोई नहीं भी लावे तो पारूमल जा रहे थे बाजार से तो बच्चों ने कहा पार महाराज जी महाराज महाराज सेसा देयो शेशा आयो अब शेशा तो थी नहीं महाराज के पास तो एक
दुकान पर रेवड़ी रेवड़ी की दुकान थी तो वहां से बुक चुल्लू भरा बच्चों को माटे तो दुकान वाले ने कहा थानेदार था तभी भी पुलिस वाला तो हराम का माल खाता था अभी साधु बन के भी मुफत कामा उठाता है आखिर तो थानेदार है आखिर तो पुलिस वाला ही है साधु बना तो भी पुलिस वाले के जैसे है दूसरे का माल उठा लिया तो मार पमल को थोड़ा नाराजी तो दुकान वाले का नाम था धर्म धर्म ना खा ना खाई सिंधी समझ रहे ना थई थिक कथ मतलब थु ना खाया ना खाने दिया बस तो
केवली कुंभक प्राणायाम सिद्ध था तो जो बोले वो हो जाए तो पागल जैसा हो गया वो धर्म जो था ना दुकान वाला सारा दिन बोले धर्म थ व खुद ही बोले ना खा ना खा धरम धर्म ठीक कथाई धर्म ठीक कथाई ग्राहक बोले रेव दो बोले धर्म ठीक क गक भाग जा घर में पत्नी आ क्या है बोले धर्म थ बोले क्या थ थ धम बच्चे बच्चे सभी बाबा क्या बोले थ कोई आए पैसा वैसा मांग वाला पैसा हमारा है तुम शक्कर ले गए थे रेवड़ी बनाने के लिए तिल ले गए थे तिल होते ना
रेवड़ी में दो बुरी शक्कर के पैसे लाओ दो मन तिल ले गए थे बोले देख क नरम नास पैसे दे बोले तो उसको कौन माल देगा कोई देगा क्या गरा कुछ दे बोले तो को तो अपमान लगेगा ना तोत तो थोड़े दिन में पागल होकर मर गया कौन धर्म तो बाजार के लोगों ने इकट्ठा होकर इमरजेंसी मीटिंग बुलाई के पार मलावे कोई भी चीज उठावे तो मना नहीं करना नहीं तो बोलेगा थथ तो अपने भी थथ हो जाएंगे उन्हे एकांत में भारमल ने एकांत में साधना की है जप किया है स्वासो स्वास को देखा है
इसकी प्राण शक्ति मन शक्ति बुद्धि शक्ति आत्म शक्ति विकसित हो गई है गुरु की कृपा है अगर वह संकल्प चलाए तो मुर्दा भी जी पत्थर पे लकीर शलीन तु महाराज तो अपने को चुरा तेरे को बोलेगा तो मरी भी नहीं अब तो पारूमल बाजार से गुजरे तो दुकान वाले नीचे उतरे साई सेसा त बाबा तवा दादा य दुकान आपका है साई आशीर्वाद करो परमल का तो बड़ा नाम हो गया ना तो कई लोग परमल के चेले बन गए तो उस समय मुसलमानों का राज चलता था तो मुल्ला मौल ने देखा कि अगर पारमल मुसलमान हो
जाए तो कई सिंधी भी मुसलमान हो जाएंगे नहीं तो सिंधी विल पावर वाले जल्दी से मानते नहीं डरते नहीं सिंधी हि मतवारा मुसलमान नहीं बनते अपना धर्म नहीं छोड़ते जान दे देते लेकिन धर्म नहीं देते लेकिन ये पारूमल सिंदी है यह अगर मुसलमान बनेगा तो बहुत सिंदी मुसलमान बन जाए तो पारूमल को पटाने लगे कि तुम हमारे पीर बन जाओ मुसलमान बन जाओ य बन जाओ तुम्हारा बड़ा नाम करेंगे बोले नहीं हम तो अपना धर दे देंगे लेकिन धर्म नहीं देते अपना धर्म बदलना चाहिए क्या हिंदू धर्म छोड़ना चाहिए हिंदू धर्म से महान धर्म कोई
है क्या दुनिया में और धर्म में तो लोग मुसलमान बनते हैं कोई बनाए और ईसाई भी कोई बनाए तब बनते हिंदू तो जन्म जात हिंदू भगवान का बनाया हुआ है हिंदू तो बनाया हुआ और मुसलमान तो इंसान का बनाया हुआ सुन्नत करे तब मुसलमान बने ईसाय की विधि करे तब ईसाई बने लेकिन हिंदू तो भगवान का बनाया हुआ जन्मते [संगीत] हिंदू जन्म ते राम राम हरि ओम नमः शिवाय ये सब अपने आप सीख लेता है उसको कहीं मजहब में जाना नहीं पड़ता गिरजा घर में भटकना नहीं पड़ता कहीं भटकना पड़ता है तो पारमल को बहुत
समझाया देखा कि पारमल मानेंगे नहीं तो एक दिन दोपहर को वो जमाने में ऑटो रिक्शा नहीं थी टांगे होते थे टांगे टांगे तो इधर भी है नमूना तो है नहीं टांगे का ठीक है नहीं तो एक दिन पारमल जा रहे थे तो नवाब के कहने से कुछ गुंडे लोगों ने पारूमल के मुंह में कपड़ा डाल के टांगे में डाल दिया टांगा भगाते भगाते पारमल को मस्जिद में ले आए आजम को भी बुलाया मुला मल भी इकट्ठे हो गए सुन्नत करने की को जबरदस्ती मुसलमान बनाने की विधि चालू हो गई तो बोले पारमल मानते नहीं थे
अब तो हम लोग हम लोगों के मस्जिद में आए हो हम तो जबरन तुमको मुसलमान बना देंगे जो होता है विधि काटने का तो हिस्सा कटा हुआ होगा तो तु मुसलमान ही हो परमल शांत बैठे वही अपना ओ का जप शांत और यहां ध्यान तो जो ददा मखोल कर रहा था तैयारी कर रहा था तो पारूमल ने सहते सहते तो जैसे तुम डर गए ना ऐसे वो हिल गया हिल गया तो उसका बाथरूम करने की जो जगह थी गायब तो देखा कुछ चला गया है सारा अंदर गायब हो गया व जमाने में सलवार पहते थे
तो बाथरूम में गया तो देखा अरे ना स्त्री जैसा ना आदमी जैसा ही तो ना स्त्री जाति ना पुरुष जाति ना नान्य तरज की जाति जैसा भी नहीं जाति नंबर फोर उसने जाकर मुल्ला को कहा मुल्ला ने नवाब को खबर भेजी कि तो पारमल तो पहुंचे हुए हैं प्राणायाम और ध्यान से योग शक्ति से बड़े शक्तिमान हो गए करके ही उसको नेशनल हाईवे कर दिया अब नवाब साहब आपके आगे लावे और आपको ह कर दे तो फिर इला तोबा तोबा क्या करिए जख मरी क्या करिए तो घबराए सब फिर पारमल को बोला देखो भाई जो
हो गई गलती अब हम आपको माफी चाहते गुस्ताखी के बदले आज से तुम पारूमल नहीं हमारे भी फकीर पीर आजसे तुम साई पारुष साई पारुष अभी भी साईं पारुष का मंदिर उल्हास नगर में है आश्रम में वही थानेदार प्राणायाम योग साधना करके साई पारुष बन गए जिसको हू करा उसका तो चट उसकी औरत रोने लगी तो मेरे को बच्चे कैसे होंगे संतान कैसे मेरे आदमी तो पारूमल जहां रहते थे वहां रोज सुबह आती बुहारी करती पानी भर के आती घड़े में टकाव कर द उ जैसे शबरी ने मतंग ऋषि का में सेवा किया ना ऐसे
वो पार पारु श के निवास पर वो सेवा करती फ व उसको जो ह करके व गायब हो गया था ना एक ही करने व सब फिर धीरे निकल जैसे तैसे हो अभी तो वो तो सिंध की बात थी फिर पार्टीशन हुआ उनके भगत थे तो अभी यहां उल्लास नगर मुंबई के पास है ना उल्लास नगर व कहां पारुष का आश्रम अब कहा एक लड़का थानेदार और कहां संत पारुष य प्राणायाम जप से तो प्राणायाम से कितने लाभ होते लेकिन तुम प्राणायाम करके इतनी शक्ति वाले नहीं होना कि किसी को ह करके नेशनल हाईवे कर
दो ऐसा नहीं आशीर्वाद कर देने का कीर्तन करा के शक्तिपात कर देने का सभा से उ के अपेक्षा तो हरि ओम करना अच्छा है ना करोगे क्या आप तो हरि ओम करवाना करना ठीक है मधुसूदन सरस्वती खंडन खंडन खंडन खाद के अच्छे विद्वान थे तो वह भगवत गीता पर टीका लिखने बैठे तो एक साधु आ गए तो साधु बुड्ढे थे लेकिन साधु के वाणी में बड़ा अधिकार पूर्ण तेज था बोले रे मधु सधन जैसे मैं पंडित जी तो पंडित जी पंडित जी बो हा महाराज क्यों जी तो आपके तो य आचार्य हैं और मेरे लिए
तो उनको मान है तो ऐसे ही मधुसूदन जी को हे मधुसूदन क्या लिख रहे हो बोले महाराज भगवत गीता पर टीका लिखना चाहता बोले गीता का से मिले हो लो ये कृष्ण का मंत्र अनुष्ठान करो कृष्ण प्रकट हो जाए उनसे बातचीत करो उनसे सम्मति आशीर्वाद लो फिर गीता की टीका लिखोगे ना तो लोक उपयोगी हो जाएगी मंत्र लिया अनुष्ठान किया छ महीने पूरे हुए लेकिन कृष्ण प्रकट नहीं हुए देखा कि मेरी कोई ब्रह्म त्या कोई पाप होगा चलो एक अनुष्ठान से महा ब्रह्म हत्या जैसे पाप मिटते मिट गए होंगे दूसरा करते कृष्ण आएंगे दूसरा अनुष्ठान
पूरा हो गया छ महीने हो कृष्ण आए नहीं तो मधुसूदन जी को लगा व आचार्य थे विद्वान थे संस्कृत के मधुसूदन जी को लगा कि कौन से ऐसे साधु के चक्कर में आकर मैंने एक साल गमा दिया कृष्ण कृष्ण श करते करते क्लीम कृष्णाय नमः क्लीम कृष्णाय नमः क्लीम बीज मंत्र है जपते जपते हम तो थक गए तो उनका मन जरा शुद्ध हो गया तो कार्तिक क्षेत्र सिद्धपुर कार्तिक क्षेत्र में अपना चित्त को बहलाने के लिए यात्रा कोए कार्तिक पुण्य तो वहा मोची बैठा था जहां से बस से उतरे तो मोची ने मधुसूदन सरस्वती सन्यासी
थे देखा बोले महाराज बस दो अनुष्ठान करके थक गए तो महाराज सचेत हो गए कि बोले भाई किस बात के दो अनुष्ठान बोले महाराज आपने श्री कृष्ण के कलीम कृष्णाय नमा के दो अनुष्ठान किए लेकिन कृष्ण नहीं आए तो आपका मन विक्षिप्त हो गया इसलिए आप कार्तिक क्षेत्र में मेला में नहाने को आए बोले भाई ये तेरे को कैसे पता चला बोले भाई महाराज मैं तो हूं मोची चप्पल सीता मैं कोई ब्राह्मण नहीं कोई विद्वान नहीं लेकिन मेरे पास बोले बोलो बोलो डरो नहीं बताओ महाराज मलीन विद्या है मैंने भूत और भूतनी वश कर रखी
तो आपको देखकर मैंने उनसे पूछा करण पिशाच ने तो अपनी विष्ठा कान में लगाकर बैठते हैं फिर करण पिशाच नी को बुलाते मन से तो कान में कह जाते कि आदमी फलाने काम से आया है और इसका ऐसा ऐसा होगा तो करण पिशाच ने मैंने वश की है तो उससे मैंने पूछा है भूत भी वश क्या तो महाराज ने कहा अच्छा भाई देखो कृष्ण तो नहीं आए लेकिन तू तेरा ही मंत्र दे दे वैदिक मंत्र में तो बड़ी साधना है तू तेरा ही मंत्र दे दे तो तेरी भूणिया भूत का तो दर्शन कर दू एक
बार मेरे को भी भूत मिला था मेरे को मिला था भूत लेकिन मैं नहीं डरा वो डर गया बेचारा स्वाभाविक मिला था हमारे मन में बड़ी तस थी कि भूत होते होंगे कि नहीं होते कभी भूत मिल जाए जरा देखें क्या होता है तो एक बार भूत मिला था मेरे को तो महाराज को भी लग गया मौज के भाई तू वही दे दे तेरे भूत को जरा देख लो बोले महाराज ये तो बहुत हल्की आत्मा होती है यह तो जप करते ही आ जाएंगे तीन दिन के अंदर ये मंत्र सिद्ध हो जाएगा आपका तो महाराज
ने जपा एक दिन दो दिन तीन दिन तीन दिन बराबर 72 घंटे तो हो गया महाराज गए बोले 72 क्या 73 घंटे हो गए अभी तक तुम्हारी भूतनी भी नहीं आया भूत भी नहीं आया क्या हम इतने गए बीते हैं क्या ब्राह्मण शरीर मधुसूदन सरस्वती और तेरी जैसी भी लायक नहीं क्या हमारी तो तो जूते सी रहा है तो कम से कम हमको तेरे भूत भूतनी के तो दर्शन करा दे भाई बोले महाराज रुको यहां मैं पूछ के आता हूं आपके आगे वो हल्की आत्मा प्रकट नहीं होग जरा सा गया गली में गली में जा
बाथरूम लेटे ना दियों की स् के फिर आए बोले महाराज उनसे मैंने पूछा उन्होंने कहा कि महाराज ने एक बार ही जप किया तो हम खींचने लगे लेकिन महाराज ने पहले ओमकार का जप किया और श्री कृष्ण मंत्र का जप किया तो इनकी आध्यात्मिक रा जै है उसके आगे हमें हम प्रकट नहीं हो सकते जैसे सूर्य के आगे रात्रि नहीं जा सकती ऐसे जिनके पास ओमकार का जप है उनके आगे नीच आत्मा नहीं जा सकती महा तो आप कम से कम मधुसूदन जी को इतना कह दो कि एक बार वे फिर से श्री कृष्ण का
अनुष्ठान करें प्रसन्न चित होकर कृष्ण तो माधुरी के देवता है प्रसन्नता के देवता है प्रेमा अवतार है तो प्रेम पूर्वक जाप करें तो भगवान का वचन है भजता प्रीति पूर्वक ददा बुद्धि योगम तम यह नमा मु प आंती थ तुम्हारे विद्यार्थियों में से इसका कोई अर्थ बता दे तो मुझे खुशी होगी भजता प्रीति पूर्वक ददा बुद्धि योगम ये नम प्र उपास दे मताम प्रीति पूर्वक जो प्रीति पूर्वक मुझे बसता है ददा म बुद्धि योग उ बु उसे बुद्धि योग देता हू तो प्रीति पूर्वक अनुष्ठान करे महाराज महाराज ने फिर प्रीति पूर्वक प्रम कृष्णाय नम कृष्णाय
नम मधुर कृष्ण कृष्ण कृष्ण श्री कृष्ण प्रकट हुए कृष्ण ने कहा मैं प्रसन्न हो के बहुत दिन के बाद बहुत समय के बाद आए देवता बोले मैं जितना प्रेम से वश होता हूं उतना कला कुशलता से नहीं गीता लिखो अच्छी प्रसिद्ध होगी अभी आपके घर में अगर गीता प्रेस की गीता होगी तो उसमें मधुसूदन टीका होगी हम जब गीता पर प्रवचन करते हैं तो श्लोक तो गीता के होते हैं लेकिन टीका मधुसूदन टीका पर हम व्याख्या करते बहुत प्रसिद्ध हुई मधुसूदन टीका अभी भी अपने हमारे यहां भी वो टीका होगी गीता की मधुसूदन सरस्वती की
ठीक आपने देखी होगी गीता तो मधुसूदन महाराज ने मंत्र जाप तो ऐसे ही वैदिक रचाओ का भी अपना प्रभाव है