यहूदियों की सबसे आला अदालती और मजहबी मजलिस जिसे सनहिद्रिन कहा जाता था खुफिया तौर पर जमा होना शुरू हुई। सरदार काहनों ने आपस में मशवरे किए कि ईसा अल सलाम से कैसे निजात हासिल की जाए। उन्होंने ईसा अल सलाम पर अल्लाह के खिलाफ गुस्ताखी का इल्जाम लगाया और कहा कि वह मजहबी तरीकों में तब्दीली कर रहे हैं और लोगों को गुमराह कर रहे हैं। शुरू में रूमी हुक्काम इस मामले में मुदाखलत नहीं करना चाहते थे। लेकिन यहूदियों ने इल्जामात बढ़ा दिए। उन्होंने कहा कि हमने उस शख्स को लोगों को गुमराह करते हुए पकड़ा है। वह
कैसर को टैक्स देने से मना करता है और खुद को मसीहा और बादशाह कहता है। इन इल्जामात के जरिए उन्होंने रूमों को ईसा अल सलाम के खिलाफ भड़काया और रूमी हाकिम को यह बावर कराया कि ईसा अल सलाम की दावत रूमी हुकूमत के लिए खतरा है। यूं रूमी हुकाम भी इस साजिश में शामिल हो गए और फैसला सादिर किया गया कि ईसा अल सलाम को सबके सामने कत्ल किया जाए। उन्हें सलीब उठाने पर मजबूर किया गया। उनके सर पर सोने चांदी का नहीं बल्कि कांटों का ताज रखा गया। उन्हें सलीब पर केलों से जोड़ दिया
गया और इसी हालत में मरने के लिए छोड़ दिया गया। ईसा अल सलाम ने फरमाया मैं तुम्हारे पास तुम्हारे रब की तरफ से निशानी लेकर आया हूं। मैं मिट्टी से परिंदे की शक्ल बनाता हूं। फिर उसमें फूंक मारता हूं तो अल्लाह के हुक्म से वह जिंदा परिंदा बन जाता है। मैं पैदाइशी अंधों और कौड़ियों को शिफा देता हूं। और अल्लाह के हुक्म से मुर्दों को जिंदा करता हूं। मैं तुम्हें बताता हूं कि तुम क्या खाते हो और अपने घरों में क्या जमा करते हो। अगर तुम ईमान लाओ तो उन सब में तुम्हारे लिए निशानियां हैं।
मैं तरात की तस्दीक करने वाला हूं जो मुझसे पहले नाजिल की गई और मैं तुम पर बाज वो चीजें हलाल करता हूं जो तुम पर हराम की गई थी। मैं तुम्हारे रब की तरफ से वाज़ दलील लेकर आया हूं। बस अल्लाह से डरो और मेरी इतात करो। बेशक अल्लाह ही मेरा भी रब है और तुम्हारा भी। इसी की इबादत करो। यही सीधा रास्ता है। ए मेरी कौम अल्लाह की तरफ पलट आओ। हक की राह इख्तियार करो और इन बुराइयों से बचो जो तुम्हें लेकिन बनी इसराइल के लोगों को कायल करने के बजाय इन मोजजात ने
उनके दिलों में मजीद हसद और दुश्मनी पैदा कर दी। हकीकत यह थी कि ईसा अल सलाम के मोजात उनकी नबूवत की सच्चाई को मजबूत कर रहे थे और मुआशरे में उनकी ताकत और इख्तियार के लिए खतरा बन गए थे। में लिखा है कि पेशीगोई पूरी होनी चाहिए और हम इसके लिए तैयार हैं। उनकी मौजूदगी और वाज़ पैगाम उनकी नस्लों पर फैली हुई तहरीफ और बदुनवानी को बेनकाब कर रहा था और उनकी हुक्मरानी को खतरे में डाल रहा था। इसीलिए अपनी हैसियत बचाने के लिए उन्होंने वही बहुत तराशी इख्तियार की जो वह पहले नबियों के साथ
करते रहे थे। बनी इसराइल के फासिक और जालिम लोगों ने कहा कि ईसा अल सलाम जादू और जादूगरी करते हैं। सिवाय चंद अफराद के ज्यादातर लोगों ने ईसा अल सलाम की मुखालफत की और उनकी दावत को रद्द कर दिया। वक्त के साथ उनकी दुश्मनी बढ़ती गई। यहां तक कि उन्होंने उन्हें कत्ल करने का मंसूबा बना लिया। जब ईसा अल सलाम को उनकी साजिश और कुफ्र का इल्म हुआ तो उन्होंने फरमाया अल्लाह के रास्ते में मेरे मददगार कौन हैं? हवारियों ने कहा हम अल्लाह के मददगार हैं। उन्होंने कहा क्या तुम अल्लाह पर ईमान रखते हो? और
गवाह रहो कि हम मुसलमान हैं। उन्होंने दुआ की ऐ हमारे रब हम उस पर ईमान लाए जो तूने नाजिल किया और हमने रसूल की पैरवी की। बस हमें हक की गवाही देने वालों में शामिल फरमा। पिछली उम्मतों की तरह एक दिन ईसा अलैहिलाम के हवारियों ने उनसे नबूवत की एक खास निशानी मांगी। बाज रिवायत के मुताबिक यह उस वक्त हुआ जब ईसा अल सलाम ने उन्हें तीन दिन रोजा रखने का हुक्म दिया। रोजे पूरे करने के बाद उन्होंने आसमान से खाने से भरा हुआ दस्तरखान नाजिल होने की दरख्वास्त की ताकि वह उसमें से खाएं और
यकीन कर लें कि अल्लाह ने उनके रोजे कबूल कर लिए हैं और उनकी दुआ सुन ली है। वह चाहते थे कि उस दिन को बनी इसराइल के सब लोगों के लिए अमीर और गरीब सबके लिए ईद मनाया जाए। जब ईसा अल सलाम ने यह सुना तो उन्होंने उन्हें इस मुतालबे पर तबीह की। इसके बावजूद वह अपनी दरखास्त पर कायम रहे और चाहते थे कि ईसा अल सलाम अल्लाह से दुआ करें। हालांकि वह पहले ही ईसा अल सलाम के बहुत से मौजात देख चुके थे। जैसे बीमारों को शिफा देना, पानी पर चलना और मुर्दों को जिंदा
करना। फिर भी उन्होंने मजीद सबूत मांगा। उन्होंने कहा हम चाहते हैं कि हम उसमें से खाएं। हमारे दिल मुतमईन हो जाए। हमें यकीन हो जाए कि आपने हमसे सच कहा है और हम उसके गवाह बन जाए। ऐ अल्लाह हमारे रब हम पर आसमान से खाने से भरा हुआ दस्तरखान नाजिल फरमा ताकि वह हमारे पहले और बाद वालों के लिए ईद बन जाए और तेरी तरफ से एक निशानी हो और हमें रिज़्क अता फरमा और तू सबसे बेहतर रिज़्क देने वाला है। अल्लाह ताला ने फरमाया मैं इसे तुम पर नाजिल करने वाला हूं। लेकिन उसके बाद
जो तुम में से कुफ्र करेगा मैं इसे ऐसा अजाब दूंगा जैसा अज़ाब मैंने तमाम जहानों में किसी को नहीं दिया। फिर अल्लाह ने आसमान से बादलों के दरमियान से खाने से भरा हुआ दस्तरखान नाजिल फरमाया। लोग देख रहे थे कि वह आहिस्ता-आहिस्ता नीचे आ रहा है। ईसा अल सलाम अल्लाह से दुआ करते रहे कि वह उसे बरकत और रहमत बना दे। यहां तक कि वह दस्तरखान आपके सामने आकर ठहर गया। जब ईसा अल सलाम ने दस्तरखान से पर्दा हटाया तो फरमाया अल्लाह के नाम से जो सबसे बेहतर रिज़्क देने वाला है। फिर वाकई आसमान से
एक दस्तरखान नाजिल हुआ जिस पर हर किस्म के ऐसे खाने थे जो ना किसी ने पहले देखे थे और ना चखे थे। इसके बावजूद लोग खाने से झिझक रहे थे और कहने लगे कि पहले ईसा अल सलाम खुद इसमें से खाएं। हालांकि वही लोग इस दस्तरखान का मुतालबा करने वाले थे। तब ईसा अल सलाम ने फरमाया कि पहले गरीब, मोहताज, बीमार और माजूर लोग खाएं। वह तकरीबन 1300 थे। जब उन्होंने खाया तो सब अपनी बीमारियों से शिफा पा गए। यह देखकर वह लोग जो नहीं खा सके, पछताने लगे कि शायद वह भी फायदा उठा सकते
थे। कहा जाता है कि वह खाना रोज-बरोज दोबारा आ जाता था और यह भी बयान किया जाता है कि उसने 7000 तक लोगों को सैर किया। फिर यह दस्तरखान अगले 40 दिन तक एक दिन छोड़कर एक दिन नाजिल होता रहा। यह दोपहर से पहले आता। अमीर, गरीब और सब लोग दोपहर के वक्त इसमें से खाते। फिर वह वापस आसमान की तरफ उठ जाता और जमीन पर उसका साया रह जाता। लोगों को हुक्म दिया गया था कि वह धोखा ना करें और अगले दिन के लिए खाना जमा ना करें। लेकिन उन्होंने नाफरमानी की और इजाफी खाना
जमा किया। जिसके नतीजे में उन्हें जानवरों की सूरत में बदल दिया गया। इस मोजजे के जरिए बहुत से लोगों ने इस्लाम कबूल करना शुरू कर दिया और ईसा अल सलाम के पैरोकारों की तादाद बढ़ती चली गई। यह बात मजहबी पेशवाओं के लिए एक बड़ा मसला बन गई क्योंकि उनके मानने वाले कम हो रहे थे और जितनी ज्यादा ईसा अल सलाम की दावत फैलती उतने ही ज्यादा लोग उनके साथ शामिल हो जाते। हालात बिगड़ते चले गए और बनी इसराइल के वह शरीर लोग जो पहले ही बगावत और अपने नबियों को कत्ल करने के लिए मशहूर थे।
उन्होंने फैसला किया कि वह खुद ईसा अल सलाम की जिंदगी खत्म करेंगे। जब ईसा अल सलाम को उनके मंसूबे का इल्म हुआ तो आपने अपने हारियों और पैरोकारों को जमा किया और फरमाया मैं तुमसे सच कहता हूं। मेरा जाना तुम्हारे लिए बेहतर है। अगर मैं ना जाऊं तो मददगार तुम्हारे पास नहीं आएगा। लेकिन अगर मैं जाऊंगा तो उसे तुम्हारी तरफ भेज दूंगा। मैं तुमसे बहुत सी बातें कहना चाहता हूं। मगर तुम अभी उनका बोझ नहीं उठा सकते। लेकिन जब वो यानी सच्चाई की रूह आएगी तो वह तुम्हें पूरी सच्चाई की तरफ रहनुमाई करेगी। वो अपनी
तरफ से कुछ नहीं कहेगी बल्कि वही कहेगी जो उसे सुनाया जाएगा और तुम्हें आने वाली बातों की खबर देगी। इस पर एक पादरी ने पूछा वह मददगार किस नाम से पुकारा जाएगा और उसकी आमद की निशानी क्या होगी? ईसा अल सलाम ने जवाब दिया इस मददगार का नाम काबिले तारीफ है क्योंकि अल्लाह ने खुद इसका नाम रखा जब उसने उसकी रूह को पैदा किया और उसे आसमानी जलाल में रखा। अल्लाह ने फरमाया मैं तुम्हारी खातिर जन्नत दुनिया और बेशुमार मखलूकात पैदा करूंगा और उन्हें तुम्हें अता करूंगा ताकि जो तुम पर दरूद भेजे वो बरकत पाए
और जो तुम पर लानत करे वह खुद लानत जदा हो। अल्लाह ने फरमाया जब मैं तुम्हें दुनिया में भेजूंगा तो तुम्हें निजात के पैगांबर के तौर पर भेजूंगा। तुम्हारा कलाम सच्चा होगा। यहां तक कि अगर आसमान और जमीन खत्म भी हो जाए तो तुम्हारा दीन कभी खत्म नहीं होगा। इसका बाबरकत नाम अहमद होगा। यह सुनकर मजमा ने बुलंद आवाज से कहा, ऐ अल्लाह अपना रसूल हमारे पास भेज। ऐ अहमद 10 जलदा ताकि दुनिया की निजात हो। मजहब की तारीख हमें बताती है कि जब भी अल्लाह ने अपने रसूल दुनिया में भेजे तो अक्सर लोगों ने
उनकी मुखालफत की और उनके पैगाम को खत्म करने की कोशिश की। ईसा अल सलाम भी इससे मुस्तसना नहीं थे। उनका पैगाम मुकम्मल तौर पर अमन और मोहब्बत पर मबनी था। हमें इंतजार करना पड़ेगा। यहां लिखा है कि ताजा अनाज जल्दी करो। लेकिन उस वक्त के यहूदी मजहबी पेशवा ईसा अल सलाम की लाई हुई रूहानी तब्दीली से खौफजदा हो गए थे। खत्म हो गया। वो समझ गए थे कि उनकी तालीमात उनकी अपनी कयादत के लिए बराहेरास्त चैलेंज है। वो अपनी कयादत बचाने के लिए बेचैन हो गए क्योंकि उन्हें डर था कि कहीं अल्लाह की तरफ से
मुकरर करदा रहनुमा उनकी जगह ना ले ले। इसी वजह से वह ईसा अलहिलाम से शदीद नाराज हो गए। अब हम क्या करें? हम क्या करें? और उनसे जान छुड़ाने के लिए उन पर यह इल्जाम लगाने लगे कि वो मजहबी तरीकों में तब्दीली कर रहे हैं और लोगों को गुमराह कर रहे हैं। लोगों हमारी बात सुनो लोगों हमारी बात सुनो। मजीद यह कि वह इस बात पर भी गजबनाक थे कि ईसा अल सलाम अक्सर उनकी मुनाफिकत और उनके बेमानी रस्मो रिवाज पर सख्त तनकीद करते थे। ईसा अल सलाम ने लोगों से फरमाया शरीयत के आलमों से
होशियार रहो जो लंबे चोगे पहनकर चलना पसंद करते हैं। बाजारों में इज्जत के सलाम चाहते हैं। इबादतगाहों में अगली नशस्तें लेते हैं। दावतों में बेहतरीन जगह चाहते हैं। बीवाहों का माल हड़प कर लेते हैं और दिखावे के लिए लंबी दुआएं करते हैं। उनके लिए सख्त अज़ाब है। यहूदियों की सबसे आला अदालती और मजहबी मजलिस सन हेडन ने ईसा अल सलाम के खिलाफ साजिशें शुरू कर दी। मंसूबा कल रत कोई शक ना करे। ठीक है। सरदार काहनों ने खुफिया इजलास किए ताकि ईसा अल सलाम से निजात हासिल करने का कोई तरीका निकाला जाए। उन्होंने उन पर
अल्लाह के खिलाफ गुस्ताखी का इल्जाम लगाया और कहा कि वह मजहबी तरीकों को बदल रहे हैं और लोगों को गुमराह कर रहे हैं। इन बातों से जाहिर होता है कि इस दौर के यहूदी मजहबी रहनुमा यह समझते थे कि गुस्ताखी की सजा मौत है। इस मरहले पर रूमी हुकाम मुदाखलत नहीं करना चाहते थे। उन्होंने कहा कि तुम खुद ही इसे पकड़ो और अपने कानून के मुताबिक फैसला करो। यहूदियों ने जवाब दिया कि हमें किसी को कत्ल करने की इजाजत नहीं है। इसके बाद उन्होंने ईसा अल सलाम पर मजीद इल्जामात लगाए। उन्होंने कहा कि हमने इस
शख्स को लोगों को गुमराह करते हुए पकड़ा है। यह कैसर को टैक्स देने से मना करता है और खुद को मसीहा और बादशाह कहता है। यूं उन्होंने रोमियो को ईसा अल सलाम के खिलाफ भड़काया और रोमी हाकिम को यह बावर कराया कि ईसा अल सलाम की दावत रोमी हुकूमत के लिए खतरा है। चुनांचे रोमी हुक्काम भी यहूदियों के साथ इस साजिश में शामिल हो गए और हुक्म जारी हुआ कि ईसा अलैहिस्सलाम को सबके सामने कत्ल किया जाए। उन्हें सलीब उठाने पर मजबूर किया जाए। उनके सर पर सोने या चांदी का नहीं बल्कि कांटों का ताज
रखा जाए। उन्हें सलीब पर केलों से जोड़ा जाए और इसी हालत में मरने के लिए छोड़ दिया जाए। इसी दौरान एक इजलास में ईसा अल सलाम के एक हवारी यहूदा असकरती उनके पास आया और बोला अगर मैं उसे तुम्हारे हवाले कर दूं तो मुझे क्या दोगे? उसने उनसे सौदा किया। यहां तक कि वह 30 चांदी के सिक्के देने पर राजी हो गए। यूं ईसा अल सलाम को गिरफ्तार करने और कत्ल करने की साजिश मुकम्मल हो गई। ईसा अल सलाम की जान लेने की कोशिश के बारे में मुख्तलिफ रिवायत बयान की जाती हैं। एक रिवायत के
मुताबिक जब यहूदा असकरयूती ने ईसा अल सलाम से गद्दारी की और उनका ठिकाना बादशाह के सिपाहियों को बता दिया तो अल्लाह ने सजा के तौर पर उसकी शक्ल ईसा अल सलाम जैसी बना दी और वही शख्स गिरफ्तार हुआ और उसी को सलीब दी गई। अल्लाह सुभाना ताला ने फरिश्ता जिब्राइल के जरिए अपने रसूल ईसा अल सलाम को इस वाक्य की खबर दी। इबने अब्बास के मुताबिक ईसा अल सलाम अपने साथियों के पास घर में आए। वहां 12 आदमी मौजूद थे। जिनमें से कुछ उनके हवारी थे। ऐसा लग रहा था जैसे उनके बालों से पानी टपक
रहा हो। गोया उन्होंने अभी गुस्सल किया हो। ईसा अल सलाम ने अपने हवारियों से कहा कि तुम में से कौन मेरी मानिंद हो जाए और मेरी जगह मारा जाए। यह शख्स मेरी मर्तबे में बराबर हो। उस पर एक नौजवान आगे आया जो सबसे कम उम्र था। ईसा अल सलाम ने उसे कहा बैठ जाओ। फिर वह सवाल दोबारा दोहराया और वही नौजवान खड़ा होकर बोला मैं। फिर ईसा अल सलाम की मानिंद शक्ल उस नौजवान पर डाल दी गई और ईसा अल सलाम को उनके घर की ऊपर वाली खिड़की के जरिए आसमान की तरफ उठा दिया गया।
यहूदी ईसा अल सलाम की तलाश में आए। लेकिन नौजवान को देखकर गिरफ्तार कर लिया और उसे कत्ल कर दिया। यकीनी तौर पर ईसा अल सलाम ना मारे गए और ना सलीब पर चढ़ाए गए बल्कि किसी और पर उनकी मानिन बना दी गई। कुरान में भी यह साफ बयान है और हमने मसीह ईसा बिन मरियम अल्लाह के रसूल को कत्ल नहीं किया ना सलीब पर चढ़ाया बल्कि किसी और को उनके लिए उनकी मानिन बनाया गया। जो लोग इस पर इख्तलाफ करते हैं, वह शक में हैं। उन्हें इसका इल्म नहीं बस कयास पर यकीन करते हैं। हकीकत
यह है कि अल्लाह ने उन्हें अपने पास उठा लिया और वह हर लिहाज से बुलंद और हिकमत वाला है। जब ईसा अल सलाम को आसमान में उठाया गया। उनके 12 हवारी तीन गिरोहों में तकसीम हो गए। एक गिरोह याकूबी मानता था कि अल्लाह खुद उनके साथ था और फिर उसे आसमान पर उठा लिया। दूसरा गिरोह नस्तूरी मानता था कि अल्लाह का बेटा उनके साथ था। फिर अल्लाह ने उसे उठा लिया। तीसरा गिरोह मुसलमान मानता था कि ईसा अल सलाम अल्लाह का बंदा और रसूल हैं। फिर अल्लाह ने उन्हें अपने पास उठा लिया। बाद में दोनों
गैर मोमिन गिरोह ने ईमान वाले गिरोह के खिलाफ आकर उन्हें मार डाला। कयामत के दिन अल्लाह सब नबियों को जमा करेगा। जिनमें ईसा अल सलाम भी होंगे। कुरान में इरशाद है कि अल्लाह ईसा से पूछेगा। क्या तुमने लोगों से कहा कि मुझे और मेरी मां को अल्लाह के सिवा इलाह बना लो। ईसा अल सलाम फरमाएंगे पाक है आप मुझे ऐसा कुछ कहने का हक नहीं था मैंने उन्हें कुछ नहीं बताया सिवाय उसके जो आपने मुझे हुक्म दिया उनके रब की इबादत करो और मैं उन पर गवाह था जब तक मैं उनके दरमियान रहा लेकिन जब
आपने मुझे उठा लिया तो आप सब चीजों पर गवाह हैं। उस दिन सिर्फ मोमिन अपने ईमान के फायदा उठाएंगे। उनके लिए ऐसे बागात होंगे जिनके नीचे नदियां बहती हैं और वह हमेशा वहां रहेंगे। अल्लाह उनसे राजी और वह अल्लाह से राजी होंगे। यही हकीकी फतह है। आसमानों और जमीन की बादशाही सिर्फ अल्लाह के लिए है और वह हर चीज पर कादिर है। जब अल्लाह ने ईसा अल सलाम को आसमान पर उठाया। उनके पैरोकार मुख्तलिफ गिरोहों में तकसीम हो गए। यह हालत तकरीबन 300 साल तक रही। फिर एक यूनानी बादशाह कास्टेंटाइन आया और मसीहियत में दाखिल
हुआ। कहा जाता है कि यह दीन को खराब करने की साजिश थी। चाहे वह फलसफी था या जाहिल। किसी तरह उसने ईसा अल सलाम के दीन में तब्दीली की। कुछ शामिल किया और कुछ निकाल दिया। इसी वक्त कास्टेंटाइन के दौर में सूर का गोश्त हलाल कर दिया गया और लोग मशरिक की तरफ नमाज पढ़ने लगे। उन्होंने अपनी गिरजा घरों में तसावीर बनाई, मजारात और खानकाहें कायम की और रोजे में 10 दिन ज्यादा शामिल कर दिए। एक ऐसे गुनाह की वजह से जो उन्होंने किया था। यूं ईसा अल सलाम का दीन कॉन्स्टेंटाइन के दीन में तब्दील
हो गया। उसने उनके लिए 12,000 से ज्यादा गिरजा घर, मजारात और खानकाहें बनाई। एक गिरोह मसीहियों में उसके पीछे चला और वह यहूदियों पर गालिब आ गए। अल्लाह के हुक्म से क्योंकि वह सच के करीब थे। अगरचे वह सब काफिर थे। ईसा अल सलाम ने फरमाया ए बनी इसराइल मैं अल्लाह का रसूल हूं जो तुम्हारे पास भेजा गया ताकि तुम्हारे सामने तरात की तस्दीक करूं और एक ऐसे रसूल की खुशखबरी दूं जो मेरे बाद आएगा जिसका नाम अहमद होगा।