क्या आपने कभी कोई ऐसा मंदिर देखा है जहां पर कुत्तों की पूजा होती हो और बचपन से लेकर आज तक आपने इस बात को जरूर सुना होगा कि यह दो भाई शायद कुंभ के मेले में बिछड़ गए होंगे और आपने यह भी बात सुना होगा कि कुंभ मेला स्पेस से भी दिखता है यानी जो सेटेलाइट्स हमारे पृथ्वी का चक्कर लगाते हैं वह जब ज़ूम करते हैं तो सारे लोग जो कुंभ मेला में होते हैं वह दिखते हैं पर 92 पर लोगों ने इस व्यू को कभी देख दिखाई नहीं है और एक अजीब सी चीज हुई
है हमारी दुनिया में पास्ट में कई सिंगर्स और कई आर्टिस्ट्स कोइंसिडेंटली 27 के उम्र में मरे हैं बहुत सारे इसे लोग 27 हॉरर के नाम से जानते हैं इसके बारे में कुछ बातें हैं जो कि आपको पता होना चाहिए और एक ऐसा एक्चुअल ग्रह जो कि नासा को नया-नया मिला है जो कि एक आंख की तरह दिखता है ऐसे ही कई अलग-अलग कैटेगरी के रैंडम फैक्ट्स को आज आप इस वीडियो में जानो सब्सक्राइब करके बेल आइकन जरूर ऑन कर लेना अगर आपने अभी तक नहीं किया है तो लेट्स बिगिन फैक्ट नंबर एट मिशल रूप नाम
का एक कैलिफोर्निया कैदी इसने एक नहीं बहुत सारे मर्डर किए थे और इसको सजा के रूप में मौत की सजा मिली यानी वही फांसी और इसको लटकाने के लिए ले जाने का प्लान हो रहा था एज पर सजा पर यह पता चला कि इसका जो वजन है जो कि है ऑलमोस्ट 200 केजी 200 केजी के किसी इंसान को अगर फांसी की सजा मिले तो जब उसके गले में रस्सी जब जाएगा तब उसका वेट इतना होगा पूरे नीचे बॉडी का नीचे वाले पार्ट का कि उसका सर ढर से अलग हो जाएगा शरीर बॉडी से अलग हो
जाएगा वेट के चलते तो जब यह बात पता चली जज को तो फांसी की सजा रोक दी गई तो पब्लिक ये कमेंट करी कि इसको तो मिली है मौत की सजा इसके कारनामों के चलते तो फिर भी सिर्फ शरीर के वजन के चलते इसके सजा को क्यों रोक दिया गया फिर भी जज ने यह कहा कि हम इसको नहीं टांग सकते क्योंकि व जो सीन होगा वेट के चलते सर अलग हो जाना यह हॉरिफिक होगा मतलब डेथ पेनल्टी मिलनी थी बट नॉट दिस वे तो आखिरकार उसको पेनल्टी नहीं मिली उसको जेल में ही रखा गया
आखिरकार यह मरा जेल में कई सालों में लेकिन बीमारी के चलते मरा नेचुरली मरा ऐसे टांग के नहीं मारा गया तो दुनिया भर में ऐसा जब भी होता है कि किसी का वजन हद से ज्यादा हो तो उसको फांसी आज तक धरती की कोई कोट दी ही नहीं है क्योंकि ऐसा जालिम तरह से मारना अलाउड नहीं है कि सर ही धड़ से अलग हो जाए दुनिया के कई पार्ट्स में क्रेजी क्रेजी पनिशमेंट होते हैं वो बात अलग है बाकी नॉर्मल डेमोक्रेटिक देशों की बात हो रही है फैक्ट नंबर सेवन ये है फैक्ट द 27 हॉरर
के बारे में यह बड़ा ही अजीब सा लग सकता है आपको आपको यह लग सकता है कि ऐसा कोइंसिडेंस कैसे हो सकता है भला इस दुनिया में बहुत सारे आर्टिस्ट्स सेलेब्स और प्रॉमिनेंट फिगर्स 27 के एज में मरे हैं मतलब इत्तफाक होती है बहुत सारी चीजें मानते हैं लेकिन कई इत्तफाक इतनी रिपीटेड होती है कि वो लगता ही नहीं है कि इत्तफाक है 27 की उम्र में बहुत सारे म्यूजिशियंस मरे हैं जैसे कि रॉबर्ट जॉनसन ब्रायन जोनस जेनिस जॉपलिन जिम मॉरिस एमी वाइनहाउस पीट हैम क्रिस बेल रडी लुस और ये लिस्ट बहुत लंबा है जो
थोड़े वेल नोन है वो मैंने आपको बताया और भारत की बात करें इंडिया में तो अमर सिंह चमकीला जो कि एक पंजाबी सिंगर थे उनकी भी मौत 27 के एज में ही हुई थी वैसे इस पूरे केस का कोई तर्क तो नहीं है कि 27 में ही क्यों बट यह होता है और इसलिए इसी चीज को पूरे दुनिया में द 27 हॉरर के नाम से जाना जाता है फैक्ट नंबर सिक्स आप तो अभी तक ये जान चुके होंगे कि इस पूरे ब्रह्मांड में सबसे तेज कुछ है तो वो प्रकाश है यानी लाइट जिसकी स्पीड है
3 लाख किमी प्रति सेकंड बट अगर मैं इस स्टेट को बोलूं कि लाइट असल में बहुत स्लो है तो क्या आप इस बात को मानोगे दुनिया की सबसे तेज चीज आखिर स्लो कैसे हो सकती है कैसे तो असल में लाइट स्लो है इफ वी सी द बिगर पिक्चर असल में इस पूरे ब्रह्मांड का जो विड्थ है इस यूनिवर्स का जो साइज है उसके कंपैरिजन में लाइट बहुत ज्यादा स्लो है जैसे फॉर एग्जांपल सूरज का लाइट जब निकलता है तो बस हमारे सल सोलर सिस्टम हमारे सौरमंडल का जो लास्ट प्लेनेट है नेप्चून वहां तक पहुंचने में
लाइट को 16 घंटे लगते हैं मतलब अगर आप किसी दिव्य व्यू से देख पाते हैं सूरज से लाइट निकल रहा है तो आप ऐसे बस वेट कर रहे होते हैं बस और सूरज से लाइट निकला 16 घंटा आप देखते स्क्रीन को तब जाके नेप्चून तक लाइट पहुंचेगा हमारा जो गैलेक्सी है मिल्की वे गैलेक्सी आकाश गंगा जो कि हमारा घोंसला है इस अनंत ब्रह्मांड में हमारा अपना गैलेक्सी हमारा अपना शहर मान सकते हो इस ब्रह्मांड नामक देश में तो आकाश गंगा के इस पार से उस पार जाने में ही लाइट को 90 हज सालों का वक्त
लगता है यानी पूरा यूनिवर्स मान लो इतना है तो लाइट को यूनिवर्स का इत इतना से बस इतना सजाने में लाखों साल लग जाएंगे यानी इफ वी सी द बिगर पिक्चर देन लाइट असल में बहुत स्लो चीज है यानी लॉजिकली स्पीकिंग एक आइडियल यूनिवर्स में लाइट की स्पीड अच्छी खासी होनी चाहिए ना कि ब्रह्मांड के एक छोर से दूसरे छोर 24 घंटे में ट्रेवल कर लेना चाहिए एक आइडियल ब्रह्मांड में लेकिन ब्रह्मांड ऐसा है कि एक गैलेक्सी को पार करने में 1 लाख साल लग रहे हैं ऑलमोस्ट और यूनिवर्स में 100 बिलियन गैलेक्सी हैं 1
लाख करोड़ गैलेक्सी इट्स अनइमेजिनेबल फैक्ट नंबर फाइव रिसेंटली वैज्ञानिकों ने इस प्लेनेट को डिस्कवर किया इसका नाम दिया गया एलएचएस 1140 बी और पहली बार कोई ऐसा ग्रह मिला जिसमें धरती जैसी कंडीशन है यानी इस ग्रह को आप एक बार ध्यान से देखो ये पूरा पार्ट ग्रह के ऊपर जो सादा पार्ट दिख रहा है वो बर्फ है और जो आईबॉल दिख रहा है ब्लू कलर का असल में वो धरती की तरह एरिया है यानी जैसे हमारी धरती नॉर्मली दिखती है समुंद्र पेड़ पौधे जो व्यू दिखता है नीला नीला सा वैसे ही कंडीशन इसके इतने से
पार्ट में मौजूद है जिसके चलते ये एक आंख की तरह दिखता है आई बॉल की तरह इसीलिए इस एलएचएस 114b प्लेनेट को द आई बॉल प्लेनेट भी कहा जाता है फैक्ट नंबर फोर ये एक इंटरेस्टिंग सा सवाल है इसका आंसर देना आप मेरे को आपने रोड पे स्पीड लिमिट हर जगह पे देखा होगा कहीं पे लिखा रहता है ना कि यहां पर 30 स्पीड लिमिट है क्योंकि यहां पे काम चल रहा है और रोड पे अक्सर हम लोग स्पीड लिमिट बार्स को देखते हैं कहीं 40 स्पीड लिमिट होता है कहीं 100 स्पीड लिमिट होता है
तो हर जगह राउंड फिगर में ये होता है 40 ही होगा ना 100 ही होगा ना लेकिन ऐसे जगह जहां पर ऐसा देखो 39 अब ये 39 क्यों लिखा हुआ है यहां पर यहां के कर्मचारी उसको 40 नहीं कर सकते थे उसको राउंड ऑफ करके 40 नहीं कर सकते थे तो ऐसे जगह पे जंगलों और पहाड़ों में 39 स्पीड लिमिट देने का क्या मतलब है इसके पीछे साइकोलॉजी क्या हो सकती है आप सोचो थोड़ा इसका आंसर क्या हो सकता है 39 क्यों 40 क्यों नहीं या फिर 90 का स्पीड लिमिट देना है तो 89 लिख
देगा वियर्ड सा क्यों तो इसका आंसर असल में साइकोलॉजिकल है देखो दुनिया के सबसे खतरनाक रोड्स पे आपको इसी तरह का स्पीड लिमिट देखने को मिलेगा 40 के बदले 39 मिलेगा 80 के बदले 78 मिलेगा इसका आंसर है नोवेल्टी ऐसा इसलिए ताकि ड्राइवर को नोवेल्टी फील हो आंसर है नोवेल्टी ये एक साइकोलॉजिकल टूल होता है ड्राइवर का अटेंशन पाने के लिए हम आम इंसान नॉर्मल स्पीड लिमिट 40 90 100 यह जो राउंड ऑफ में स्पीड लिमिट होता है इसको देख के इतना यूज टू हो गए हैं इतना आदत लग गया है कि अब जब रोड
में ड्राइव करते हैं 40 देखते हैं तो ध्यान जाता ही नहीं देखते हुए भी अटेंशन कैच ही नहीं कर पाता क्योंकि वैसा तो हर जगह रहता है इसलिए खतरनाक पहाड़ों और जंगलों के इलाकों में ऐसा अनयूजुअल स्पीड लिमिट दिया रहता है ताकि ड्राइवर का अटेंशन जाए ऐसे देखे तो फिर से देख फिर दोस्त लोग को बोले कि अरे देख देख 39 लिखा हुआ है 40 नहीं लिखा हुआ है तो इससे कम से कम एडवर्टाइजमेंट तो हो जा रहा है मैसेज तो पहुंच जा रहा है कि यहां गाड़ी स्लो करना है तो इट्स जस्ट अ साइकोलॉजिकल
टूल फैक्ट नंबर थ्री कुंभ मेला दुनिया का इकलौता ऐसा मेला है जो कि स्पेस से भी दिखता है क्योंकि वहां पर करोड़ ऑफ लोग एक साथ रहते हैं पूरे वर्ल्ड में किसी भी इवेंट में ऐसा गैदरिंग नहीं होता जैसा कुंभ मेला में होता है तो स्पेस से कुंभ मेला कुछ ऐसा दिखता है इस इमेज के जो इंडिविजुअल पिक्सल्स आप देख रहे हो इतने छोटे-छोटे ये सारे लोग हैं तो हां यह बात बिल्कुल सही है कि कुंभ मेला इतना बड़ा होता है कि वो स्पेस से भी दिखता है फैक्ट नंबर टू देखो हर कल्चर में अलग-अलग
मान्यताएं होती है जैसे नेपाल में कुत्तों को एक पूरा पर्व डेडिकेटेड होता है वैसे ही इंडिया में भी कर्नाटका में जना पटना शहर में एक ऐसा टेंपल है डॉग्स टेंपल जहां पर कुत्तों की पूजा होती है वहां के लोगों का यह मानना है कि डॉग्स इस धरती के सबसे लॉयल क्रिएचर्स होते हैं तो इस लॉयल्टी और सिक्योरिटी की पूजा की जाती है क्योंकि ऐसा मान्यता है कि डॉग्स की जो प्रॉपर्टीज होती है जैसे कि लॉयल्टी सिक्योरिटी ये एक तरह का डिवाइन प्रोटेक्शन है तो इनकी पूजा करने से गुड लक लाइफ में आता है ऐसा इस
जगह पर माना जाता है फैक्ट नंबर वन देखो जब से लोगों में अवेयरनेस बढ है इस बात का कि रेडियम असल में रेडियो एक्टिव होता है तो मेरे कई व्यूवर्स जिन्हें यह याद आया कि वह बचपन में ग्लो इन द डार्क वॉच पहनते थे या फिर अभी भी कई लोगों के पास है तो उनका एक सवाल होता है कि मेरे पापा ने रेडियम वॉचेस लाया था तो क्या यह रेडियो एक्टिव है अब अगर रेडियो एक्टिव हो असल में तो वो तो स्किन को पेनिट्रेट करके डीएनए को डैमेज कर देगा रेडियोएक्टिव चीजों के सामने रहने से
तो कैंसर होता है तो क्या सच्चाई है तो क्या इसको रेडियम वॉच क्यों कहा जाता है तो देखो बात यह है कि जो सो कॉल्ड रेडियम वॉचेस अभी मिलते हैं दुकान में उन्हें कहा तो जाता है रेडियम वॉचेस क्योंकि यही वर्ड 1960 से पॉपुलर है लेकिन उसमें एक्चुअल में रेडियम नहीं होता है क्योंकि 1960 वो दशक था जब ये बात पता चली थी कि रेडियम रेडियो एक्टिव होता है जो भी इस रेडियम सब्सटेंस के पास 10 साल रह जाए उसकी मौत 10-15 साल में हो जाती है तो आखिर वॉचेस में रेडियम यूज करना ग्लोबली बैंड
हो गया बट यह नाम रह गया रेडियम अब रेडियम की खास बात यह थी कि वॉचेस नाइट में ग्लो करते थे बें 10 के ओमनी ट्रिक्स की तरह और काफी कूल लगता था उस टाइम के यूथ को 1960 की बात हो रही है पर जब यह बैन हुआ तो अभी भी तो ऐसे वॉचेस आते हैं जो ज्यादा तो नहीं लेकिन कुछ घंटे ग्लो कर जाते हैं तो क्या उसमें भी ऐसा कोई सब्सटेंस होता है जिससे रेडिएशन निकलता है या फिर कंपलीटली सेफ होता है तो देखो हम जिस तरह की पॉजिटिव बातें करते हैं आप शायद
यह एक्सपेक्ट कर रहे होंगे कि फैक्टस कहेगा कि अभी जो यूज होता है एलिमेंट्स वो सेफ होता है बट यहां यह ट्रू नहीं है मैं आपको बता दूं अभी भी वॉचेस को ग्लो करने के लिए दो टाइप के चीजें यूज होती है एक अभी भी रेडियो एक्टिव है और एक कंप्लीट सेफ है आर्टिफिशियल ग्लोइंग एलिमेंट आज के समय में भी वॉचेस में ट्रीट एम यूज होता है ट्रीट एम एक लो लेवल रेडियो एक्टिव आइसोटोप है हाइड्रोजन का यानी इसमें एक्चुअल रेडिएशन निकलता है लेकिन बहुत कम मात्रा में और यही कारण है कि यह अलाउड है
यानी गवर्नमेंट इसको अलाउ करती है क्योंकि ऐसा पाया गया है रिसर्च में कि इसका जो रेडिएशन होता है वो इंसानी शरीर को उतना ज्यादा इफेक्ट नहीं करता बट हां ग्लो अच्छा खासा कर लेता है अब रेडियो एक्टिव होगा तो ग्लो तो करेगा ही ऑफकोर्स बट ये ट्रीट अभी भी कई लोग पसंद नहीं करते क्योंकि ठीक है रेडिएशन कम मात्रा में निकलता है ह्यूमंस को उतना प्रभाव नहीं पड़ता है यह रिसर्च में पाया गया है फिर भी एक घड़ी के लिए जिंदगी क्यों रिस्क पे डालना वैसे टेक्निकली कोई रिस्क नहीं है अकॉर्डिंग टू साइंस ये सबकी
अपनी-अपनी चॉइस है टिटमस में यूज होता है दूसरा मटेरियल जो कि नाइट में ग्लो करने के लिए यूज होता है वो है लुमिनो वा लुमिनो वा एक आर्टिफिशियल मटेरियल है जो कि असल में स्टंटमैन पूरी तरह से नॉन रेडियोएक्टिव होता है और उसका केमिकल फार्मूला यह है ये लाइट को अब्जॉर्ब कर लेता है और कुछ घंटों तक ग्लो करने देता है तो टिटमस को ग्लो करने के लिए अभी के समय में यूज होता है यह सोच के दिमाग हैरान हो जाता है सही में कि 1960 के पहले ये ले रेडियम लगा वॉच में और इसको
पैक कर और वो रेडियो एक्टिव जानलेवा रेडियम वॉचेस में यूज होता था इट्स क्रेजी क्रेजी बोनस फैक्ट हमारे स्पेस हमारे यूनिवर्स के अंदर कुछ ऐसी चीजें होती हैं और कुछ ऐसे वर्ड्स हैं जिसके बारे में आपको पता होना ही चाहिए जैसे एक वर्ड है स्टेलर नर्सरी आपको नर्सरी क्लास याद है क्या जैसे धरती पे छोटे बच्चे नर्सरी क्लास में पढ़ते हैं वैसे ही जो इस यूनिवर्स के बच्चे हैं यानी न्यूबॉर्न तारे वो जिस जगह पे एजिस्ट करते हैं नए-नए तारे स्पेस के उसी रीजन को स्टेलर नर्सरी कहा जाता है ये बहुत ज्यादा डेंस एरिया होते
हैं गैस और डस्ट के जहां नए-नए तारे जन्म लेते हैं इनमें से सबसे फेमस जो है वो है द ओरायन नेबुला ये एक ऐसा रीजन है स्पेस का जहां पर हर घंटे अनगिनत तारे बनते हैं किसी भी वैज्ञानिक को तारों की इन्फेंट स्टेज की रिसर्च करनी होती है यानी उनके बचपन की तो वो इसी तरफ टेलिस्कोप घुमाते हैं ओरायन नेबुला और बाकी स्टेलर नर्सरी के तरफ आपको मैं एक अमेजिंग फैक्ट बता दूं कि इस ब्रह्मांड में कभी भी तारा अकेले नहीं फॉर्म होता है तारे हमेशा क्लस्टर्स में फॉर्म होते हैं यानी एक रीजन जहां पर
बहुत सारा रॉ मटेरियल है उस जगह पे हमेशा क्लस्टर्स फॉर्म होते हैं यानी बहुत सारे तारे तो यह थे आज के इतने सारे फैक्ट्स वीडियो को लाइक जरूर करना और और अपनी कोई भी क्वेश्चन नीचे कमेंट करना और अगर आपने अभी तक सब्सक्राइब करके बेल आइकन ऑन नहीं किया है तो जरूर कर लेना थैंक यू सो मच फॉर वाचिंग मिलते हैं अगले वीडियो में