[संगीत] जनाबे अली खुशामदीद कहते हैं आपको शाने रमजान 2024 की उलमा कराम के साथ यह पहली नशत है इब्तिदा गुफ्तगू आज हो रही है इसलिए मैं आपकी खिदमत में अर्ज करूं के जब जुनैद भाई के साथ श्री आदम करते थे जब आगाज किया था आज ये 12वां साल है अल्हम्दुलिल्लाह गोया अगर हमने यह साल यह वाला साल मुकम्मल कर लिया इंशाल्लाह तो एक एक महीना करके पूरा साल इस जट प गुजार दिया इतने तस सुल के साथ अल्हम्दुलिल्लाह फिर जब वो जुनैद भाई जाहिर नशिया कसा ना रहे जब वो करते थे नसरिया तो उलमा के
सेगमेंट को वो लीड करते थे जब वो सिलसिला मुनकता हुआ तो फिर मैंने यह कहा कि भाई अब उलमा का सेगमेंट ना ये ये मैं तो नहीं कर सकता कम से कम क्योंकि अब मैं क्या मैं उलमा से मैं कैसे क्या बात कर सकता हूं तो तय ये पाया था कि चले कुछ दिनों के लिए लिए करके देख लेते हैं अगर आप कर पाए यानी मुझसे कहा गया कि आप कर पाए तो ठीक है वरना हम कुछ और अरेंजमेंट देखेंगे लेकिन उलमा कराम ने इतना ज्यादा मतलब मुझ जैसे एक गुनाहगार इंसान को और एक कमिल
इंसान को उतनी उन्होंने हौसला अफजाई की के बस वो मामला चल पड़ा और मैं खुद ये सेगमेंट बहुत एंजॉय इसलिए करता हूं कि मैं बहुत बहुत ज्यादा सीखता हूं तो बहुत मुझे खुशी है कि उलमा कराम हमारे साथ मौजूद है और इंशाल्लाह हम आपको एक दो दिन में हर साल की तरह इस साल भी चूंकि अभी पहले एक दो दिन है तोरा इदा गुफ्तगू होगी फिर हम आपको एक whatsappwap.in खुशामदीद शान रमजान में मरहबा जजाकल्लाह बहुत शुक्रिया नवाज जनाब किबला मुफती साहब हुजूर एक बार फिर अस्सलाम वालेकुम सलाम रहमतुल्ला व बरका मुफती साहब से इंशाल्लाह
रोजाना वजाइनल कात होगी और फिर यहां और फिर इंशाल्लाह एक मुख्तसर नशिमा कराम के साथ वो निस्बत मुख्तसर होगी वो सहर के दस्तरखान पे भी होगी कोशिश हमारी यह होगी कि इस सेगमेंट में आप लोगों के सवालात फिक सवालात रोजा ऐसे टूटता है ऐसे नहीं टूटता ये कर सकते हैं नहीं कर सकते वो सब ने अपने जाहिर है मकतब फिक्र के हवाले से बता देंगे और फिर कोई एक मौजू अखलाकी ऐतबार से मां-बाप का एहतराम पड़ोसियों के हुकूक रमजान का एहतराम ये इस पर भी आप सजेस्ट कर सकते हैं उस पर एक मुख्तसर लेकिन इंशाल्लाह
जामे गुफ्तगू सहर के दस्तरखान पर होगी इंशाल्लाह मुझे बहुत खुशी है ऑल द वे फ्रॉम ऑस्ट्रेलिया हमारे साथ मौजूद है हमारे अरदल अजज जनाबे किबला मौलाना कुमेल मेहद्वी साहब अस्सलाम वालेकुम वालेक अलाम रहमतुल्लाह ब ठीक ठाक है अल्लाह सुभान ताला का बहुत शुक है पाकिस्तान कब आ आदमी कुछ दिनों से है यहां या कब आ नहीं मैं कल पहुंचा था फिर पंजाब चला गया था कुछ मजाल के लिए और अब आज हाजिर हुआ हूं आप सफर है मुसलसल यानी जी बिल्कुल उर्दू वाला है अल्हम्दुलिल्लाह इंगलिश उर्दू वाले हैं ना अहमदुल्लाह जजाकल्लाह नवाज और हमारे हरदिल
अजीज ए आर वाई क्यू टीवी हो या ए आरवा डिजिटल हो हमारी नसरिया का इंटीग्रल पार्ट और वैसे भी इनसे बहुत रहनुमाई मिलती है बड़ा एक मोहब्बत बड़ा इज्जत का ताल्लुक जनाब किबला मुफ्ती आमिर साहब हुजूर अस्सलाम वालेकुम वालेकुम अस्सलाम खैरियत से हैं ठीक ठाक है शुक्र है अल्लाह का बहुत नवाज सो अगर मुफ्ती साहब आपसे अगर आगाज कर सक आज चके इब्तिदा नौत की गुफ्तगू है मैं चाहता हूं अगर आप मुझे समझा सकें बता सके और हम सब लोगों की रहनुमाई के लिए कि ये अब यह जो सात शुरू हो गई है यह जिन
घड़ियों में हम दाखिल हो गए हैं चांद नजर आने के बाद से यह यह वाली घड़ियां किस तरह कल की घड़ियों से मुख्तलिफ है ऐसा किस ऐसे कैसे खास टाइम जोन में हम दाखिल हो गए हैं यह किस तरह मेरे लिए बड़े गोल्डन डेज हैं साल के बाकी 335 दिनों को अगर हटा दें ये 30 दिन जो है यह किस तरह बड़ी गोल्डन अपॉर्चुनिटी है य जरा हम आसान अल्फाज में और मुख्तसर अल्फाज में समझा दीजिएगा बिस्मिल्लाह रहमान रहीम सलाह वसल्लम हुजूर जाने आलम सल्लल्लाहु ता वसल्लम ने इरशाद फरमाया जा रमदान फ अबब जन्ना जब
रमदान का महीना आता है जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं आपने कहा ना फर्क जो है यह फर्क यह हो गया कि जैसे ही यह चांद नजर आया है जन्नत के दरवाजे खोल दिए गए आगे फरमाया जनम जहन्नम के दरवाजे ब बंद कर दिए जाते हैं फिर आगे फरमाया सुयान और शया को जकड़ दिया जाता है यानी इंसान के दुश्मन है ना एक दुश्मन शैतान है इब्लीस है और दूसरा दुश्मन नफ्स है अपना तो एक दुश्मन दो दुश्मनों से लड़ना मुश्किल है एक से लड़ना निस्बत आसान है तो अब एक जो बड़ा दुश्मन है
मेन दुश्मन है उसे तो जकड़ दिया गया है अब आपने एक दुश्मन से लड़ना है उसे टैकल करना निस्बत आसान है कंपेरटिवली यह इस सवाल का जवाब भी है जो अक्सर आता है कि जनाब वो शैतान तो बंद फिर बुरा ये वारदात कौन डाल रहा अमारा नफ्स अमारा जो है वो यह वारदात करवा रहा है तो एक तो फर्क यह हो गया दूसरा फर्क य कि हुजूर जाने आलम सल्लल्लाहु ता वसल्लम ने फरमाया कि जब माहे रमजान की पहली रात आती है तो एक मुनादी निदा देता है या बागल री अकल वया बाग श अकसर
खैर के तलबगार आजा आगे बढ़ शर का इरादा करने वाले रुक जा रुक जा बाज आ यानी अब यहां मुद्दीन फरमाते हैं दो मफू है इसके एक मफू तो यह है कि बाकायदा एक फरिश्ता अल्लाह की तरफ से मुकर्रर है जो यह निदा देता है खैर के तलबगार को भी निदा दी जा रही है जो शर का इरादा रखने वाले हैं उनको भी निदा दी जा रही है और बताया जा रहा है रुक जाओ शर के तलबगार हो रुक जाओ शर का इरादा करने वालों रुक जाओ खैर के तलबगार हो आगे बढ़ो नेकियां करो सकत
करो और दूसरा मफू इसका मुहसीन ये बयान करते हैं कि ये किनाया तन फरमाया गया है मकसद इसका यह है कि जहन्नम के दरवाजे बंद कर दिए गए हैं जन्नत के दरवाजे खोल दिए गए तो गोया एक और शयानो बना दिया गया है बरकात का तो गोया वो जो माहौल ये जो क्रिएट किया गया है इस महीने के अंदर तो ये जबाने हाल से गोया यह महीना कह रहा है या बागल खक ऐ खैर के तलबगार आजा आगे बढ़ नेकियां कर जन्नत में दाखिल हो जा जन्नम का दरवाजा बंद है और ऐ शर का इरादा
करने वाले रुक जा जहन्नम का दरवाज के दरवाजे बंद कर दिए गए रुक जा रुक जा बाज आा बाज आा आ और नफल का सवाब फर्ज के बराबर फर्ज का सवाब 70 गुना बढ़ा दिया गया तो यह फर्क है इस माहे रमजान का दीगर महीनों से सबसे बड़ी बात कि अल्लाह का महीना अल्लाह के महबूब का महीना अल्लाह के पाक कलाम का महीना अल्लाह के महबूब की प्यारी उम्मत का महीना जजाकल्लाह बहुत और जनाब कला मुफ्ती आमिर साहब जाहिर है रमजान का महीना यानी रोजे का महीना तो वो एक ख्याल आ रहा होता है बार-बार
ये सवालात के शुर से भी अंदाज होता है कि रोज यानी कुछ खाना पीना नहीं तो बड़ा मुश्किल हो जाएगी अल्हम्दुलिल्लाह जाहिर है अक्स यत रख रही होती है रोज लेकिन वो सवालात से अंदाजा होता है कि कुछ परसेंटेज है वो कितना ज्यादा का मुझे नहीं मालूम जो फिर वो एक तो बीमारी सफर जो शरीयत ने जो एक्स वो दिए हैं साथ में एक्सेप्शन वो तो अलग बात है लेकिन अंदाजा होता है सवालात से कि है एक परसेंटेज जो कि रख सकता है रोजा सेहत इजाजत देती है सफर में नहीं है लेकिन ये नहीं यार
ये कैसे हो गया तो बड़ा मुश्किल काम है यार मतलब कुछ पिए ही नहीं कुछ खाए नहीं और फिर नहीं रखते तो जरा इस मुतालिक कुछ ऐसा बताइएगा कि लोगों की जरा तरकीब हो कि भाई इसका मुझ जैसा आदमी जो है वो अक्सर इंसेंटिव को देख के कोई काम कर लेता है हो सकता है ये कमाल मफत ना हो लेकिन होता है कि अच्छा यार ये इंसेंटिव है च जि मैंने उलमा से सुना कि कहा के अल्लाह ताला ने कहा है कि रोजा मेरे लिए इसका अजर मैं दूंगा अब ये अल्लाह तो फर अपने हिसाब
से अपने लेवल से अजर देगा पता नहीं क्या होगा तो ये जरा समझाएगा कि ताकि जरा तरब हो कि रोजे तो रखने है बमला रहीम शुक्रिया वसीम भाई आज चकि पहली रमजान है आपको नाजरीन को एआर वाई की इंतजाम और मालका को माहे रमजान की मुबारक भी हो और एआर वाई अपनी रिवायत के मुताबिक एक फिर से एक ऐसी मंच जिसमें एक पूरा गुलदस्ता होता है अल्हम्दुलिल्लाह जिसके अंदर एक पीस का इत्तेहाद का यूनिटी का मोहब्बतों का एक पैगाम जाता है माशाल्लाह अल्हम्दुलिल्लाह और आप िया की बात काट रहा हूं यकीन कीजिए के अभी मैं
पिछले दिनों एक कुछ रिकॉर्डिंग में था जिसमें आप लोगों का भी आमद हु आमद हुई थी वहां दीगर उलमा कराम भी जाहिर है आ रहे थे तो सबसे मुलाकात हो रही थी तो सब जाहिर उस वक्त आप लोग मौजूद नहीं थे लेकिन सब यह कह रहे थे आप लोगों को अप्रिशिएट कर रहे थे कि जिस तरीके से इस प्लेटफॉर्म से आप लोग सारे एक पीस हार्मनी भाईचारे को अमलन प्रमोट करते हैं वो सब इसकी बहुत सताश कर रहे हैं अहमदुल्लाह अच्छा वसीम भाई यह आपने बड़ा प्यारा सवाल किया एक रोजे की तरब के हवाले से
हा और मैं यहां पे एक बात भी जिक्र करूंगा क्योंकि आमतौर पे रमज़ान का जिक्र आता है तो हम हवाला देते हैं रोजों का महीना सही हां बाज़ औकात हम हवाला देते हैं वह महीना जिसमें इफ्तालिया होती हैं वह महीना जिसमें सेहरियां होती हैं कुरान ने जब इस महीने को जिक्र किया तो कहा कि रमज़ान का महीना वह है जिसमें कुरान नाज़िल हुआ यानी यह पहचान है उसकी कि यह नुजूल कुरान का महीना है और हम जो रोज़ रखते हैं दरअसल अल्लाह ताला की यह जो नेमत है ना कुरान एक अजीम नेमत है इसका शुकराना
होता है रोजा कि हम रोजा रख के शुक्र अदा करें कि परवरदिगार ने हमें इतनी बड़ी नेमत अता की अब हम बीइंग अ मुस्लिम कुरान पर ईमान रखते हैं कुरान से मोहब्बत रखते हैं और यह जानते हैं कि यह अल्लाह का कलाम है यह हिदायत के लिए हमारी उतरा है यह शिफा के लिए रहमत के लिए उतरा है तो फिर जरूरी है कि रोजों को इस वजह से भी रखें सही कि इसकी जजा बेशक है और अल्लाह ताला देगा और इसके बारे में जितनी फजीलत हैं वो अपनी जगह पे लेकिन सबसे बुनियादी तकाजा क्या था
कि अल्लाह तबारक ताला ने जो नेमत अता की है उस नेमत का हम शुक्र अदा करें रोजा रख के इस बात का इजहार करें कि बारी ताला तूने हमें जो यह कुरान की जो नेमत अता की है हम इसके शुकराने में पूरे महीने रोजा रखेंगे और तेरी इस नेमत का कदर करेंगे तो कुरान की मोहब्बत का तकाजा भी यह है कि हम रोजा रखें सुभान अल्लाह इसी बात को आगे बढ़ाते हुए यानी अगर मैं यूं कहूं तो ठीक है कि अभी मैं पिछले सेगमेंट में मुख्तलिफ नात हजरात को बुला रहा था तो मैं सबका अपने
तौर पर अपने अल्फाज में तारुफ करा रहा था तो अल्लाह ताला ने माहे मुबारक का जो इंट्रोडक्शन करवाने के लिए जो हवाला मुनासिब समझा वो यह कि शहर रमजान उजला फ कुरान ये वो महीना है कुरान य इस इन अल्फाज को अल्लाह ताला ने आइडियल अल्फाज समझा इस बड़े महीने का तारुफ कराने के लिए बिस्मिल्लाह रहमान रहीम यह कहना बजा होगा कि रमजान मुबारक को बाकी महीनों पर वैसी ही फजीलत हासिल है जैसे कुरान करीम को बाकी किताबों पर फलत और रमजान मुबारक को ये हदीस का जुमला है कि वैसी ही फजीलत हासिल है कि
जैसे आले रसूल को उम्मत पर हासिल है और रमजान मुबारक आपने सवाल किया था कि क्या फर्क हो गया वही फर्क हो गया जैसे इंसान किसी आम जगह पर है और काबा शरीफ पहुंच जाए तो क्या फर्क अलाह अल्लाह जमीन आसमान का फर्क जमीन आसमान का फर्क है वह है हरम मकानी है परवरदिगार और रमजान है हरम जमानी है परवरदिगार काबा है बैतुल्लाह हरम मकानी है तो जब हरम में पहुंचते हैं तो हरम के कुछ आदाब होते हैं सही है लेकिन हरम जमानी की खासियत यह है कि हरम मकानी के लिए आपको जाना पड़ता है
हरम जमानी खुद आपके पास चलकर आता है और इस वक्त सारी दुनिया हरम जमानी में है वाह वाह वाह ब एकक वक्त ब एकक वक्त काब उल्लाह में लोग पहुंचते हैं बड़े खुशनसीब होते हैं वो जाके सफर करते हैं तो वो एक लाख होंगे 2 लाख होंगे 10 लाख होंगे 20 लाख होंगे लेकिन हरमे जमानी है परवरदिगार उसमें सारी दुनिया है इस वक्त क्या बात है तो अल्लाह सुभान ताला का सबसे बड़ा एहसान है और शुक्र है कि उसने हमें ये सात फिर से नसीब फरमाई और एक बहुत बड़ा फर्क ये है कि पह पहले
सांस लेना तस्बीह नहीं था अब सांस लेना तस्बी बन चुका है पहले हत्ता हराम से अपने आप को बचाकर सोना इबादत नहीं था कल तक नहीं था आज हो गया है आज हो गया है आज सोना भी इबादत हो गया है वाह वाह वा तो अल्लाह सुभान ताला ने गोया गैर इख्तियार अमल पर भी सवाब देना शुरू कर दिया वाह वाह वाह वाह आप जरा गौर फरमाइए जा सोना तो है मैंने सही हैया आमाल का दार मदार तो नियत पर होता है आप इख्तियार के साथ नियत के साथ नमाज पढ़ते हैं तो उसका लेकिन सांस
लेने में तो कोई नियत नहीं हो वो तो लेनी लेनी लेकिन अल्लाह गैर इख्तियार अमल पर भी सवाब देने को तैयार है नियत और इख्तियार के साथ अमल होगा उसकी मंजिल क्या होगी तो ये इतना बड़ा आज जो सफर शुरू हो रहा है हमारा 30 दिनों का इतना फर्क है अल्ला सुभान ताला की नेमतों में से और अल्लाह सुभान ताला ने रमजान में रोज फर्ज तो किए लेकिन जो तारुफ है अभी जो बात हो रही थी के शहर रमजान अ कुरान तो रमजान का जो तारुफ करवाया व अल्ला ताला ने यह नहीं करवाया कि रमजान
वो कि जिसम रोज फर्ज किए गए रमजान वो कि जिसम कुरान नाजिल किया गया रोजा फर्ज करने की आयत अलग से मुबारक में एक आयत को पढ़ना पूरे कुरान के बराबर है यह भी फर्क हो गया या एक सतर पूरे कुरान के बराबर है तो अल्लाह सुभान ताला इस खातिर है कि हुजूर मुक यह हदीस में कि जैसे रमन मुबारक दाखिल होता था तो हुजूर पाक सलाम के चेहरे अथर का रंग बदल जाता था जलाल रहमत इलाही इस कदर नाजिल हो रही है एक फर्क और भी है व फर्क य है कि हदीस में आया
कि सारा साल बंदा दुआ करता है और मुंतज रहता है कि अल्लाह कबूल करे रमजान में अल्लाह मुंतज रहता है कि बंदा कब दुआ करेला अला ओ तो बंदा मेरी बारगाह में आए तो उसकी दुआ कबूल की जाए तो उस महीने में हम दाखिल हो रहे हैं तो कुरान से अपने आप को जोड़िए हुकूक इबाद की अदायगी पहले से बेहतर कीजिए और हदीस में ये भी आया कि मनरा मन सामा शहर रमजान जो माहे रमजान का रोजा रखे दो शर्तों के साथ फेल इनसा व सुकून जितना हो सके खामोश रहे यानी गलत बात जबान से
ना कहे है व सुकून और रजाए इलाही पर राजी रहे जो अल्लाह सुभान ताला ने उसके नसीब में लिखा है हलाल से कोशिश करने के बाद राजी रहे यानी सुकू में हो और सुकून में हो वाह वाह वाह तो अल्लाह सुभान ताला उसे मैदान महशर में हजरत इब्राहिम खलीलुल्लाह के पहलू में जगह इनायत फरमा देगा अगर कोई रमजान ऐसे गुजार ले तो ये इतना बड़ा महीना हमारे पास सुभान अल्लाह सुभान अल्लाह क्या कहना है तो किबला मुफती सु साहब अब जाहिर है दुनिया की जब भी कोई मिसाल दी आती है तो कोई कंपेरिजन तो नहीं
है लेकिन अपनी बात मैं जरा अपनी बात अर्ज करने के लिए कि दुनिया में भी अगर मैं किसी आम जगह प जाता हूं किसी दोस्त के अगर दावत में जाता हूं तो बस चले गए ठीक है लेकिन अगर प्रेसिडेंट हाउस से कोई दावत नामा आता है तो तकरीब बोर तो पीछे प्रोटोकॉल्स लिखे होते हैं कि भाई जान यहां आप इस ड्रेस में आएंगे मोबाइल बाहर रख के आएंगे ये नहीं होगा ये होगा तो जितनी बड़ी जगह तो अब ये ये जो इतना बड़ा महीना आया है गोल्डन डेज आ गए अगले 30 दिन तो इसके भी
कुछ यकीनन कुछ प्रोटोकॉल्स कुछ डू एंड डोंट्स तो होंगे कि भाई इसका मैक्सिमम फायदा उठाना है तो यह कर लो और भाई जान यह ना करें वरना क्योंकि इसी तरह किसी आम जगह पर मैं जाऊ और किसी प्रोटोकॉल की खिलाफ वर्जी कर लू तो जरा कम पकड़ होती है दोस्ती और किसी बड़ी जगह प जाता हूं तो भाई आपने यार यहां पे ये कर दिया आपने तो यह भी बताइएगा कि क्या जिस तरीके से इबादत करने का सवाब मल्टीप्लाई हो जाता है किसी प्रोटोकॉल की खिलाफ वर्जी करने का कुछ गुनाह करने प पकड़ भी फिर
और ज्यादा हो जाएगी कि भाई इन दिनों में भी ये किया यार ये क्या किया हैला बिस्मिल्लाह रहमान रहीम सल्लल्लाहु अलैहि वाही वाब व बिक वसल्लम एक तो कुछ लोग ऐसे हैं कोई परवाह नहीं होती हां हां सही है ना तंबाकू खा रहे हैं ई हम रख नहीं सकते बगैर किसी वजह के मेरे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि जिसने रमजान का एक रोजा भी छोड़ दिया हां और उसके बाद जितना भी जितने भी दिन है उसकी जिंदगी के पूरा जमाना वह रोजा रखता रहे उस एक फर्ज रोजे का मदाबा नहीं होगा इतना अजर
सवाब है और इ नी इसकी अहमियत है दूसरी बात यह है कि हमने कुति बलेक सियाम कमा क यहां तक तो गौर कर लिया कि तुम पर रोजे फर्ज किए गए जिस तरह तुमसे पिछली उमत पर फर्ज थे लेकिन लत की तरफ नहीं आते यानी हम देखते हैं हमारे माशे में कि सुब सादिक से लेकर गुरूब आफताब तक तूने आपने जो हलाल चीज थी जायज काम थे छोड़े हुए हैं इसीलिए उलमा फरमाते हैं कि बाकी इबादत अफल बजा लाने का नाम है और यह इबादत ऐसी है कि इसमें चीजों को तर्क करने का नाम है
य तो अब आप देखें कि आपने हलाल अया जायज काम अल्लाह की रिजा की खातिर छोड़े हुए हैं झूठ बोल रहे हैं गीबत चल रही है कारोबार में बिजनेस में झूठ जितना हो सके चल रहा है धोखा दही चल रही है अमानत में बनत चल रही है और इस वक्त आप देखें कि कितनी बदकिस्मती की बात है वसीम भाई कि दुनिया भर में किसी का कोई मजहबी इवेंट होता है वो अपने नर्क कम कर देते हैं कीमतें कम कर देते हैं सेल्स लगा देते हैं लेकिन हमारे यहां पर आप देखें कि जहां रमजान शुरू हुआ
अब फ्रूट्स के सब्जियों के गोश्त के हर चीज के आप रेट देखें आसमानों पर बात कर रहे हैं आसमानों से बातें कर रहे हैं तो यह हमारी बदनसीबी है नाक की तरफ गौर नहीं है दूसरों की खैर खवाई की तरफ गौर नहीं है तो थोड़ा सा इस बात की तरफ आ जाए नबी सल्लल्लाहु अल वसल्लम ने फरमाया कि जिसने भूख प्यास रखी सही है और झूठ से लग विया से अल्लम गल्लम से नहीं बचा वगैरह वगैरह से नहीं बचा फरमाया कि अल्लाह ताला को कोई परवाह नहीं कि वो भूखा प्यासा है अल्लाह अल्लाह तो जहां
पर रोजा रखा है आपने तो उसके जो उसकी जो प्रिकॉशंस है उसकी जो हिफाजत ता दबीर है तकवा इयार करना आखरी बात में कहूंगा इंसान के ना बाज औकात बाहर के दुश्मन से लड़ लेता है ठीक है लेकिन अंदर का दुश्मन अगर पैदा हो जाए आपकी सराउंडिंग में जो दोस्त नुमा दुश्मन हो आपको अच्छे मशवरे भी दे रहा हो अंदर से काम लगा रहा हो आप उसको नहीं पकड़ सकते बहुत मुश्किल है हमारे लिए गोल्डन अपॉर्चुनिटी है कि जो एक्सटर्नल दुश्मन था वो जंजीरों में कैद है अब जो एक दुश्मन बाकी है नफ्स कशी करें
नफ्स अम्मार को नीचे करें और जितना हो सके इंशाल्लाह माहे रमजान में बड़ा आसान हो जाता है कि दुश्मन को इस दुश्मन को काबू कर लिया जाए सुभान अल्लाह एक एक मिनट मुझे वक्त इजाजत और देता है कि एक एक कमेंट और ले लू किबला यहां से शुरू कीजिएगा अ एक तल हकीकत है इसलिए मैं ये सवाल की सूरत में अर्ज कर रहा हूं कि यह तो बता दिया कि रोजा रखना कितना जरूरी है और ना रखना कितना गलत है कि गोया सारी जिंदगी पर रखता रहे तो उसका उसका बदल नहीं है अगर किसी शरी
उजर के बगैर उ छोड़ एक तो ये रविश लेकिन एक रविश थोड़ी सी और सख्त भी है और वो भी नजर आती है इसलिए मैं पूछ रहा हूं ये कि ना सिर्फ ये कि रोजा ना रखना बल्कि फिर खुलेआम ये उसकी खिलाफ वर्जी का इजहार करना कि पी रहा हूं पानी मैं खा रहा हूं मैंने खुद सुने भी ऐसे अल्फाज के यार अब नहीं रखा है तो अल्लाह से नहीं डर रहा तो फिर यानी अल्लाह माफ करे कि मैं कहाना सुने अल्फाज तो फिर अब ठीक है ना नहीं रखा तो नहीं रखा भाई तो क्या
ये भी है कि भाई अगर नहीं भी रखा जो कि जिसकी कोई जस्टिफिकेशन नहीं है तो ये और खतरनाक मामला है कि कम से कम यार खुलेआम तो खिलाफ वर्जी तो नहीं करें कम सीम भाई यह जलती पर तेल का वाला काम है यह करना यानी दोहरा जुर्म है एक जुर्म तो आपने किया दूसरा मामला यह था कि उस जुर्म को आपने छुपाना था गुनाह करना नहीं चाहिए लेकिन अगर किसी से गुनाह हो जाए ब तकादा बशरी तो अब उस गुनाह को जाहिर नहीं करना होता उसको छुपाना होता है आपने जुर्म किया क्राइम किया गुनाह
किया और उसके बाद अब आप उसको छुपा भी नहीं रहे उसका ऐलान कर रहे हैं और फिर उस परे इतरा रहे हैं और फिर उस परे जो अंदाज इख्तियार कर रहे हैं जो ये जचर है यह जचर तो यह बता रहा है कि आप बगावत की तरफ जा रहे हैं यानी एक होता है बद काम करना बुरा काम करना और एक होता है बगावत करना बगावत की सदा बुरे काम से बढ़कर ही आपको पता ही है पूरी दुनिया का रूल है बगावत की सदा क्या होती है यही वजह है कि बाकायदा यह उसूल है कि
जो इस तरह मुहर माते कतिया हो कतई तौर पर हराम फेल हो और जरूरियत दीन में से हो तो उसे कोई अगर हल्का जाने या उसे हलाल जाने इस्तफा करे उसका तो यह कुफ्र है दायरा इस्लाम से खारिज करने वाला अमर है तो हम यह तो नहीं कह रहे कि कोई अगर पानी पी लेता है तो वह दायरा इस्लाम से खारिज हो जाता है काफिर हो जाता है ये बात हम नहीं कह रहे लेकिन अगर वो इस पर ऐसे कमेंट्स पास करता है कि जिससे इस्तफा जाहिर होता हो ऐसी सूरत में दायरा इस्लाम से खारिज
हो जाता है तो लिहाज इसका एहतियात मलूज रखें बिल्कुल जबान पर ऐसा कोई कलमा ना लाए जिससे मासि अत का अल्लाह की नाफरमानी का हल्का होना जाहिर होता हो जुर्म आपने किया रह गई यह बात के लोगों से अल्लाह से नहीं डरा तो लोगों से क्या डरना लोगों से डरने की बात नहीं असल बात तो यह है कि यह भी अल्लाह ही का हुकम था हा जिसे आपने पामा किया उसके बाद यह भी अल्लाह ही का हुकम था कि उस परे पर्दा डालना था अल्लाह ने पर्दा डाला आप खुद वो पर्दा चाक कर रहे हैं
और उसके बाद आप दूसरों के लिए बुरी मिसाल बन रहे हैं दूसरों के लिए बुरी मिसाल ब ये एक और जुर्म हो गया इसके अंदर किबला ये बताइएगा हम वो कभी होता है ना मैंने लोगों को देखा यार वो डॉक्टर ने कहा कि यार आप बगैर चीनी की चाय पी है पी नहीं जाती तो जी लेकिन मैंने ऐसे लोगों को देखा वो कहते हैं यार 10 दिन जो है ना अपने पर जबर करके पी ली बगैर च अब आदत हो गई है ये एक आइडियल 30 दिन इस हवाले से भी है कि भाई कोई ऐसी
बुरी आदत का अगर मैं शिकार हूं कि नहीं छूट रही जान यार तो अब ये अच्छा मौका है भाई ये इसमें एक माहौल भी है दिल ज्यादा आमादा है कल्ब ज्यादा आमादा है रोजा भी रखा हुआ है तो भाई यह अच्छा मौका है साल के बेहतरीन न है कि इसमें ये इस आदत को डालने का इस आदत से छुटकारा पाने की आदत डाल लो फिर अल्लाह से मद मांगो इंशाल्लाह हो जाएगा फिर काम जी बिल्कुल सही फरमाया माहे रमजान जो है वोह बंदा अगर इसके तमाम तर तकाज को पूरा करता है तो अपनी शख्सियत को
बहुत बुलंद कर लेता है यानी माहे रमजान एक भट्टी है भट्टी में जिस तरीके से आप जो है वो कुंदन उसको डालेंगे ना अ लोहे को तो वह किस तरह चमक के निकलता है बिल्कुल इसी तरह माहे रमजान के अंदर बंदा जो है इसके मामूला को पूरा करें तो इसके बहुत सारे फायदे होंगे उसकी शख्सियत में निखार आ जाएगा उसकी तबीयत में आदतों में जिन चीजों पे कंट्रोल नहीं है तो यह समझ ले पूरा पीरियड है जो बंदे को ट्रेन करता है यह जो आपने अभी बात की ना असल में होता यह है वसीम भाई
कि बाज लोग जो है वह अपने आप के अपने तौर पे अजूम कर लेते हैं कि नहीं यार मैं अगर रोजा रखूंगा तो बहुत मुश्किल हो जाएगी मेरे काम डिस्टर्ब हो जाएंगे आपको पता है रमजान में एक तो कमर्शियल वाइब्रेशन होती है फिर एक्टिविटीज कमर्शियल बढ़ जाती हैं अच्छा यह सारे काम कर किसके लिए होते हैं मतलब बेकर्स वाले होते हैं फूड वाले होते हैं रोजेदारों के लिए मगर खुद नहीं रख रहे होते हैं तो खाना पकाने वाले होते हैं कहते हैं हम रोजेदारों की खिदमत कर रहे हैं तो इस हमारे लिए काफी है मजरत
के साथ हमारी जो टीम होती है बिहाइंड द स्क्रीन बहुत अच्छा काम करती है लेकिन बाज औकात देखा कि इनमें भी कुछ लोग जो है वो यह समझते हैं कि हम तो यह सारा माहौल क्रिएट करते हैं तो हमें जरूरत नहीं है देखिए अल्लाह ताला का और आपका जो मामला है वो बिलकुल इन चीजों से ह हां जब अल्लाह ताला ने फर्ज किया था ना तो अब आप यह अपने तौर पर कोई स्पेक या मफज कायम मत करो कि मेरे लिए जरूरी नहीं है हर फर्द के लिए हर मुसलमान के लिए रोजा जरूरी है और
इसके फवायटी है उसकी बरकतों से बंदा जो है वो मन जाता है किबला बस वक्त क सवाल नहीं करता आप कमेंट करते आप दोनों में हदीस में इस तरह से आया है कि जो तुम्हारे और अल्लाह के दरमियान एक हया का पर्दा है ना उसको चाक ना करो अच्छा हां हां एक हया का पर्दा है उसको चाक नहीं करो इसकी सादा सी मिसाल ये है कि जो सिगरेट नोशी करते हैं वो वालदैन के सामने मैंने देखा है एकदम ब आ व तो क्यों कर रही कर रहे तो आप कर जब मैं अपनी हेल्थ का ख्याल
नहीं कर रहा तो इनका तो फिर तो फिर क्यों नहीं कर रहे इसलिए वो अच्छा काम कर रहे हैं अच्छा काम ये कर रहे हैं कि वो जो एक वालदैन के साथ हया का पर्दा है ना उसको महफूज रखते हैं वो वालदैन को पता होता है तब भी वो इग्नोर करते हैं जी जी जी जी जी वो भी उसकी इज्जत को रखते हैं तो क्या अल्लाह सुभान ताला का इतना हक नहीं बनता जितना वालदैन का बनता है तो आप उस हया के पर्दे को चाक ना करें सुभान अल्लाह अगर फर्ज कीजिए कि किसी वजह से
बहरहाल यह गुनाह हो रहा है तो अल्लाह ताला से बल्के दुआ करें कि परवरदिगार मैं यह नहीं रख पा रहा हिशा नफ्स की वजह से किसी और वजह से तो तू मुझे तौफीक दे कि मैं रखना शुरू कर दूं काश यह एक तसव्वुर आ जाए और काश यह ख्याल आ जाए तो शायद कभी तौफीक नसीब हो भी जाएगी तो एक तो यह और दूसरा यह कि अ जो बात थी कि शैतान बंद हो जाता है और फिर भी इंसान गुनाह कर रहा होता है तो नफ्स की वजह से गुनाह कर रहा होता है तो इससे
एक बात यह भी समझ में आती है कि जो सारा साल इंसान गुनाह कर रहा है ना वो शैतान की वजह से नहीं कर रहा हो सकता है 100% शैतान का गेम ना हो उसमें तो ये रमजान हमें समझा रहा होता है कि सारा साल भी जो तुम कर रहे हो उसमें भी शैतान क्योंकि रमजान में तो वो नहीं था जी तब क्यों हो रहा था बारदात तो तुम भी डाल रहे थे तु तो तब क्यों हो रहा था इसका मतलब ये है कि सारा साल भी जो कर रहे थे उसमें भी खुद एहते साबी
की जरूरत है कि शैतान करवा रहा था या मेरा नफ्स अंदर से करवा रहा था सवाल करेंगे गोया नफ्स अमारा को मारा कि नहीं मारा ये देखना किबला आप फाइनल कमेंट मेंा कुछ लोक में उन लोगों से अर्ज करूंगा कि जो कहते हैं कि हमें कुवत नहीं है ताकत नहीं है हम प्यास बर्दाश्त नहीं कर पाते भूख बर्दाश्त ही नहीं होती शर यूज और कुछ भी नहीं होता मेरे जानने वाले हैं उनको मैंने बहुत समझाया ठीक है मुझे किसी ने बताया कि यार ये नहीं लखते उनको समझाया मैंने कहते मुफ्ती साहब कोई चांस ही नहीं
है ठीक है वो बीमार हुए कुछ टेस्ट ऐसा करना पड़ गया कि जिसमें 12 घंटे की फास्टिंग जरूरी थी इलावा पानी की आप कुछ भी नहीं खा भी सकते तो फिर मैंने उनसे कहा अल्लाह रब्बुल आलमीन ने शिफा अता फरमा मैंने कहा डक्ट के कहने पर आप 12 घंटे भूखे रह सकते हैं अपने रब ताला और नबी अ सलाम के कहने पर आप कुछ घंटे बढ़ाकर भूखे प्यासे नहीं रह सकते जिसका फायदा ही फायदा है तो फिर अल्हम्दुलिल्लाह आज वो रोज रख रहे हैं तो अल्लाह रल आलमी ने उसके नबी अल सलाम ने कोई हुकम
ऐसे नहीं रखा हमारे लिए जो हमारी ताकत से बाहर हो वाह वाह वाह सुभान अल्लाह क्या कहना इंशा अल्लाह आज तो ये इब्तिदा नशत थी अभी इंशाल्लाह सर के दस्तरखान प भी होगी लेकिन रोजाना उलमा करम से यह गुफ्तगू का सवालात का सिलसिला जारी रहेगा आप लोगों को हम बाकायदा एक ् नंबर भी फराम कर देंगे जिस पर आप बाकायदा अपने सवालात मैसेज की सूरत में ऑडियो नोट की सूरत में या वीडियोस की सूरत में भेज सकते हैं इसको जरा मुख्तसर और टू द पॉइंट रखिएगा तो मेरे लिए ज्यादा आसानी होगी इंशाल्लाह बहुत शुक्रिया बहुत
नवाजिश अल्हम्दुलिल्लाह एक बफे के बाद हमारा क्विज का सेगमेंट है हम हाजिर होते हैं ब्रेक के बाद शाने इल्म के साथ m