भारत ख्यात देवब मद्रास प्रख्यात एक शक का छोटे एकटी बाचा एलो कुरान शा लाभ करर न्य एसे बोलो हुजुर अपर का कुरान शा ग्रहण करते ई एवं अपर खेद मते निजे के ार करते ई तखन हुजुर खूब अक होए ले ए बच्चा ले बड़द मतो कथा बोल कंठर नेक बड़द मतो ताके जिज्ञासा करले तुमार यस कतो तुम को थे एसे त से बचा लेटी बोलो ु नदी भांग कबले पड़ ड़ी घर सब ह दूर थे एवं यस मात्र सात बर आशा कर आपनी आके अपर कुरान शिक्षा ग्रहण जन्य अनुमति प्रदान करन तखन से हुजुर खब
अक लेन एव ता प्रति प्रच एक आग्रह त हो कारण ताके श ष ग्रहण करले ए सकल बाद मतो से बच्चा लेटी ओ मद्रा पते शुरु करलो प्रत्येक बचा के रात बला खाब देया होलो थार ओ बचा के खाब दे होलो से रा बला खाब समय सकल बद सामने बोलो देखो सब समय ए शाक सब्जी खेते पी ना झ माझे मा ंस खेते इ तखन सकल बरा हासा हासी शुरु करलो तुम एतो राते बला माछ मांस कोय पाब तखन से बाचा बोलो ठीक मा मांस निए आ सई अक होए तालो बाचा लेटी हिरे चले गलो
पाच मिनिट पर से बाचा लेटी नेक मांस निए आलो सकल न एवं सकले मिले मांस खेलो खबर सकल म प्रचार हो लो किंतु के बुझते पलो ना बच्चा लेटी की पा मिनिट म बा थे राना मांस लो एकदा ओ मद्रास शक हुजुर असु होए लेन बद हजम जन तिनी बजम थे मुक्ति पा जन सब समय हिम ब्यबहार करते किंतु ओ दिन तार का हिम लो ना ताई तिनी खूब अस्थ बोध करन एव एक पजय भतर थे चिला चिल्ली शुरू करले आके की के ने देते पब किंतु एतो रात्रि बेला होए जावा कारणे कोन छात्र साहस
करते पलो ना बाहर थे हिम एने दे किंतु ओ छोट बच्चा जे हुजुर का पते एसेलो से बहिरे चले गलो एव कक बस्ता हिम नि आलो तखन हुजूर हिम ब्यबहार करले एव बजम थे नेक मुक्ति पे से बच्चा लेटी के बोलेन तुम के एतो राते हिम को थ नि आले खूब जाना आग्रह तुम की मानुष नाक जीन प्रजाति एकजन हुजूर हम मिराज उद्दीन नामर एकजन जीन अपर का कुरान शिक्षा ग्रहण करते एसे एव अपर जन हिम नि तुम जन हिम नि अस था किंतु एतो हिम रा को निश्चय तुम चुरी नि आ तखन बचार लेटी
कोन जवाब ना दिए बोलो हुजुर आपना के लो बासी ताई अपनार जन हिमने तखन हुजुर बोलेन देखो चुरी हिम नि असार जन तुमा शास्ति भोग करते ह की शास्ति हुजुर शास्ति हो तुमाके खा थ चिरो चले जेते ह नले तुमाके बोतल बंदी रेखे दिब तखन से बचा लेटी बोलो हुजूर ठीक चले जाबो एव हुज कथा बचा नटी विदाय ग्रहण चले गलो दिन चल एक दिन हुजुर खबर पेले ता लाका एक जुती मे हत असु होए गलो ताके डाका होलो तिनी दोआ दर ताबीज कबज माध्यमे ओ जुती मेटी असता लेन सर एक परजय देखले मेटी के
ने धरे एव नटी के ता निजर सामने हाजिर होर जन बोलेन रप नटी के देखे ने फेन तखन हुजुर बोलेन तुमार साहस कतो स्पर्धा कतो तुम आ एखाने एसे तुमाके कठिन शास्ति पते ह तखन से नटी बोललो हुजुर आप का थे ले लो किंतु ओ हिम गु ु करर कारण एकज ष आके बोतल बंदी टी नीचे पते फेले चलो ताप अनेक दिन पर टी नीचे पोता अवस्था लाम किंतु एक प हाल चाश समय फसल साथे माटी भेद ठे जाई ठे ओ जुती मे साथे कमटी कर जाते आपर साथे आ ा लाभ करते पी हुज खूब
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