अजय को कि अ [संगीत] ओम नारायण नारायण नारायण नारायण [संगीत] कि आज बांके बिहारी लाल की की जीवनलीला हम सुनाएंगे बांके बिहारी लाल के जीवन में ये कैसी कैसी घटनाएं घटी अभी ऐसा नहीं सोचना कि हम भगवान के रास्ते जाते हैं तो दिखाते हैं जी हां यहां दुख ना आए ऐसा कौन सा रखता है मैं यहां दुख ना आए ऐसा कोई जगह नहीं है लेकिन दुख की बात करना हो ऐसी जगह घृत है आज दोपहर विज्ञान तो भगवान कृष्ण के जीवन में पद पद पर आए हैं हैं जिनके जन्म उन्हें के भय से माता-पिता कुछ
जैगवार थे रिंग के जन्म से ही पराए घर लाए गए थे कि हर है उतना आए थे पांच-छह दिन के बाद उतरना है उतना बना हुआ था यह वास्तव में का विष बड़े-बड़े भक्तों को बड़े-बड़े जप और तप ओं को मार गिराता है उतना आए सुराया धन का सूराया पूतना का विषपान करने के बाद भी वासना रूपी विष का पान करने के बाद भी श्रीकृष्ण अपने मधुमय अपने आनंद में अपने ज्ञान में स्वभाव से चलित नहीं हुए यह भगवान का भागवत 53 है है 17 साल की उम्र तक पूरी कृष्ण निहत्थे होते हुए भी और
दैत्यों से के आश्रमों से और मामा कंस के साथ जिससे भेजते रहे हैं है और ऐसा नहीं कि श्रीकृष्ण के जीवन में मक्खन में श्री आई थी श्री कृष्ण के जीवन में पद-पद पर भी * * है लेकिन विभिन्न बाधाओं को सत्य मानकर जो आदमी दब जाता है वह संसार संग्राम में हार जाता है इन विघ्न-बाधाओं को आने जाने वाला मानकर जैसे का लेना है विशुद्ध संसार पैसे निकालिए सर्फ सर्फ डंक मार दो आदमी मर ऐसे संसार का राघवेंद्र कुमार प्रथम आदमी है कि महाराष्ट्र जी का संसार रूपी सर्प से के डंक से बचना हो
तो संसार रूपी सर्प के सिर पर नृत्य करो सुभे यह विवाद जुखाम सही होगी प्रमुखता संसारिक कोई भी बात आई तो यह आई वह आए उसको देखने वाला मैं निकलूं ऐसा श्री कृष्ण जानते थे आप भी इस प्रकार की समझ बढ़ाओ यह अनिवार्य हुआ वह वह कि मिटने वाला होगा हमने कि मैं स्वरूप चैतन्य का कुछ नहीं बिगड़ता ऐसी सूझबूझ के धनी श्री कृष्ण सदैव बंसी बजाते रहते सदा माधुर्य है कि प्रेम का दान करते रहते और प्रेम रस का नित्य नवीन दास का पान करते और कराते रहते थे जन्माष्टमी का उत्सव श्रीकृष्ण की जीवन-लीलाओं
की स्मृति घटाते हुए आप भी अपने कर्म और जन्म को दिव्य ना दें ऐसी सुंदर व्यवस्था है तो कंस काल और अज्ञान के दुख देता है गुना शोषक बने न सूचित हूं ना काल के चक्र में का प्रदोष काल में शुद्ध काल की चक्कर में आए ना दूसरे खुला है अध्ययन अपना बढ़ने ना दे और दूसरे के जीवन में भी आज्ञा मिटाने का प्रयत्न करें इसलिए कृष्ण का प्रागट्य हैं और श्रीकृष्ण का प्राकट्य यशोदा और नंद बाबा के यहां होता है नंद घर आनंद भयो जय यशोदा हर परिस्थिति में by श्रद्धेय भगवान को वह प्रभु
तेरी लीला हुआ तेरी करूंगा कृपा तो भगवान की कृपा का है कि कभी भी प्रतीक्षा नहीं की जाती है सदैव कृपा बरस रही है हर परिस्थिति में भगवान की कृपा की भी समीक्षा करें कि हमको अनासक्त बनाने के लिए हमको उद्यमी बनाने के लिए हमको धैर्यवान और बुद्धि शक्ति और पराक्रम के धनी बनाने के लिए यह सारी परिस्थितियां भगवान भेजते हैं और भगवान स्वयं भी आते हैं तो नर्वस फूल लेकर आते तो उनके सामने भी ऐसी परिस्थितियां आती है का जन्म जन्म देते ही पड़ा इधर निभाए गए छठे दिन वासना रूपी पूछना जहर खिलाने का
एक महीना हुआ ना हुआ था छठ का सुराग है कभी डैम का सुराग है कि जीवन में ना जाने कितने कितने उतार-चढ़ाव श्री राम के जीवन में श्रीकृष्ण के जीवन में मां पार्वती और शिवजी के जीवन में सत्य और शिव जी के जीवन में आए तो आम आदमी के जीवन में उतार चढ़ाव आएंगे स्वभाविक है लेकिन उतार-चढ़ावों का सदुपयोग करें सत्य को जानने के तरफ नजरिया रखें उतार-चढ़ाव आते जाते और सत्य चित आनंद कृष्ण सदा नित्य है को साकार कृष्ण प्रगट होकर अंतर्धान हो जाते हैं लेकिन अंतर्यामी कृष्ण सर्व व्यापक भी व्यापक सर्वत्र सर्वेंद्रियाणाम् सदा
मे समत्वं न मुक्ति न बंध चिदानंद रूप अश्वों हम शिव मुक्ति और बंधन मन होता है मुझे चैतन्य में मुक्ति भी नहीं बंधन में जैसे आकाश के अंदर घड़ा है घड़े के अंदर पानी पानी के लिए मुक्तिबंधन हो सकता है लेकिन आकाश के लिए मुक्तिबंधन नहीं है खड़ा रहे तो भी आकाश उक्त है और धारा फूट ए तू भी आकाश उत्तर ऐसे आत्मा-परमात्मा हमारा अर्थात हमारा मैं शुद्ध में सदा मुक्त इस प्रकार का ज्ञान प्राप्त करने के लिए मनुष्य जन्म लाल में व्यक्त करते मनुष्य तत्व नष्ट सुरा सुरा है कि सौराष्ट्र उतनी ऊंचाई और अपनी
उन्नति नहीं कर सकते जितनी मनुष्य कर सकता है हर वह ज्ञान के द्वारा प्रेमा भक्ति के द्वारा सत्कर्म सेवा के द्वारा वह अपनी उन्नति कर सकता है अजय को है 17 साल की उम्र तक नियर थे रहे हे ऐसा नहीं कि द्वारकाधीश होकर बैठ गए नी कई बार युद्ध करना पड़ा साधुओं के स्वागत में उनके चरण दिलाना उनकी जूठी पत्तलें उठाना यह इश्वर का आश्वर्य महाभारत के युद्ध और घोर अंगिरा ऋषि के आश्रम में एकांत अज्ञात तेरा तेरा वक्त तरह अपने आत्म-मस्ती 70 से 80 साल की उम्र तक श्री कृष्ण कांता ज्ञात रहे हैं कि
भीड़ भाड़ में बोल-चाल में शक्ति का ह्रास होता है महानरेगा आंत में शक्ति का संचय होता प्राकट्य होता है है तब गौरंग हृषि काश हम तो इस जमाने में मिलना मुश्किल है अपने कुटुंब में अपने घर में एक आधा छोटा सा कमरा या कोई जगह यह जो आश्रम में रहते हैं एक-दो घंटे मान रहे सुबह-शाम मौन रहे हैं माउंटेन शक्ति का संचय होता है जितना इंद्रियों को बहिर्मुख करते हैं उनको बहिर्मुख करते हैं तो इतना ही शक्ति का ह्रास होता जितना जरूरी हो 10 शब्द बोलने तो 64 सब्सक्राइब करें हुआ है है सादा सुविधा जीवन
से स्वास्थ्य की रक्षा होती हो तो ठाठ-बाट का जीवन और क्रेडिट कार्ड ने तो सत्यानाश कर मॉल क्रेडिट कार्ड मोबाइल फोन और कि यह फिल्मी दुनिया के नाच गांव हिस्से जीवन की शक्तियों का ह्रास तेजी से होता है है तो आप भी इन चीजों से बच्चे और अपने बच्चों को परिवार वालों को ही मिलता है कि वे के सत्संग में कहा था कि जो एक्स्ट्रा मंद हो तो इस सीजन में खानपान पचता नहीं ऐश्वर्या ली और शहद मिलाकर लेने से भूख लगती खाना पचता है ऐसे भोजन पचने से स्वास्थ्य की रक्षा होती ऐसे ज्ञान पचने
से स्वस्थ सुरक्षित होता है स्वर्णा जो अमर आत्मा चैतन्य स्वभाव है हमारा उस सुरक्षित होता है नहीं तो हमारे ऊपर परिस्थितियों का प्रभाव बढ़ जाता है परिस्थितियों का प्रभाव जिस पर पड़ता है वास्तविक में वह हम नहीं है वह हमारा मन है बुद्धि श्रीकृष्ण के जो दिव्य गुण बताए थे श्रीकृष्ण सुंदर रंग वाले हैं शुभ लक्षणों वाले अतिशय रूचि है कि हो जाए उनको देखने में और पांचवा खून है तेज जो मैं और 658 है श्री कृष्णा तन से भी बलवान है मन से भी बलवान है मोदी से भी बलवान है तो आप तन से
बलवान बनने के लिए सूर्य किरणों में स्नान करें प्राणायाम करें सात्विक भोजन करें शरीर को शुगर डकैत मन को बलवान बनाने के लिए एकाग्रता का आश्रय ले आंख की पुतली ऊपर-नीचे दाएं-बाएं घुमाएं एक जगह पर है मन बलवान हो जाएगा दूश चरित्रों से बचें सच्चाई और सदाचार रखने से मन बलवान है एक बुड्ढे को बलवान करना हो तो विवेक का विकास करें बिनु संत्संग विवेक ना हो गई राम कृपा बिनु सुलभ न थू-थू भगवान की कृपा होती है तब सत्संग मिलता है और सत्संग से विवेक बढ़ता व्याकरण है सातवां हिस्सा बुद्धि बंधी कि कहीं पर
नौवां हिस्सा भी कहा गया है सूची इतना आत्मा आत्मा का हृदय रोग नाशक लिखने को बहुत से उसका सातवां हिस्सा बनती है और बुद्धि को परिस्थितियों यह प्रभाव से बचाए रखना हो तो उस समय तो योग का आश्रय लेने समत्वयोग नाश रही है कि कुछ भी आ जाए चित्र को भी वर्णन करो जैसे चॉकलेट देकर बच्चा आकर्षित हो गए और चार पैसे की चीजों को बच्चा दुखी हो जाता है ऐसे जरा-जरा बात में दुख और जरा-जरा बात में सुख जरा-जरा बात में प्रभाव नहीं यह मिल गया तो आखिर क्या यह बिछड़ गया तो बिछड़ने वाला
था तो फंडा सेट भारतीय नौकरानी इस सेठ जी नौ लाख लोहार हो गया है और माता जी ढूंढ के साथ गई हो गया है इसे जी क्या बोले भला हुआ अच्छा हो 1 घंटे के बाद उन्नति हुई बावरी सी आई के सेठ जी सेठ जी को यार मिल गया और तिजोरी चोर खाने में रखा मिल गया सीट निकाल अच्छा हुआ भला संबंधी ने पूछा हो गया तब बोला अच्छा हुआ भला हुआ मिल गया हुआ को गया तो मैंने देखा कि एक चीज गई मन की शांति समता समता संदेश अभियुक्त संभोग विचार करेंगे तो ठीक है
हां हो गया है उसमें दुखी होंगे बीरबल होंगे तो और ज्यादा गलती करेंगे जैसे धागा उलझ जाता है तू शांति से धागे के छह मिल जाते और जल्दी जल्दी करो तो और उलझ जाता है ऐसे जो व्यवहार होता है विषम होता है उसके जीवन में कोई कठिनाई आती और उलझ जाता है तो और विषमता बढ़ती है है इसलिए धैर्य रखिए क्षमता लाए मीका और मैंने अपने मन को समझाया कि एक दिन सब छोड़ जाना पड़ेगा इसलिए अभी हैं भगवान अभ्यास करा रहे थोड़ा-थोड़ा छूट रहा है सागर पर अपनी माटी को मैंने सम किया मैं हर्ष
बोल हम मिल गया हार मानी घुमड़ी गौतम एंड टुब्रो शाहरुख खान की न केवल के सेठानी खुश नौकरानी घुस तो मैं दुखी कैसे हम हर हाल में प्रसन्न रहना चाहिए जो हुआ अच्छा हुआ जो हो रहा है अच्छा है जो होगा अच्छा होगा यह लिए हम पक्का समझना चाहिए अपने तरफ से न करना चाहिए पर स्थिति वातावरण अब क्या करना है बरसात हो गई है गर्मी हो गई सर्दी हो गई उपनिषद में लिखा है थे लोकल निंदित व्रतम् लोगों की निंदा नहीं करूंगा यह व्रत ले लो कि रूपों की निंदा नहीं करूंगा यह रख लेना
पशुओं की निंदा नहीं करूंगा यह व्रत ले लो पक्षियों की निंदा नहीं करूंगा यह व्रत लेंगे दो कि शराब नहीं पीऊंगा यह व्रत ले लो मांस भक्षण नहीं करूंगा यह व्रत ले लो हर कोई भी पर इसे कि यह प्रभावित नहीं होगा यह व्रत लोग फिर फसल पर जैसे आदमी उठ जाता है ऐसे फैसलों तो चिंता की बात नहीं है सावधान हो जाना क्षमता जाएगी और समता आते ही भगवान के अनुभव को आप श्रीकृष्ण के अनुभव को अपना अनुभव श्री राम अनुभव अपना अनुभव पाएंगे भगवान पधारेंगे लीलाशाह बापू अनुभव अनुभव गांव है कि समत्व-योग प्रमुख
चाहते साथियों गले योग नादानुसंधान योग पूर्ण योग कई लोगों को मैंने सुना देखा कि आदमी है लेकिन श्री कृष्ण की गीता का समत्वं योग उच्यते कोई भी परिस्थिति या चित्र की क्षमता बनी रहे स्कूल में डरना नहीं चलना न किसी वस्तु व्यक्ति परिस्थिति का बंधन ही समत्व योग श्रीकृष्ण के जीवन में आ कि महाभारत का युद्ध का सूत्रधार पंडित श्री कृष्ण के हाथ में फिर भी बंसी बजती रही और ऐसा नहीं कि श्रीकृष्ण के जीवन में सफलता ही है कई बार दूसरी कृष्ण को नंगे पैर परिस्थितियों को देखकर भाग जाना पड़ा था है यह वास्तव
में है शाम और बलराम पुरुषों के द्वार पर प्रसाद पाकर जीना पर हर विरोधियों और शत्रुओं अहंकारी लोगों ने वहां भी श्रीकृष्ण को नहीं रहने दिया तो किसी पहाड़ी पर अज्ञात जाकर रहेंगे जब पहाड़ी पर पहुंचे तो उन दर्जनों को पता चल गया तो पहाड़ी को आग लगा वैसे भी करके श्रीकृष्ण के जीवन में ऐसा आता है तो तुम्हारे जीवन में तो ऐसा कुछ भी नहीं फिर क्यों करते क्यों अपने को क्यों मोहम्मद पैगंबर को मैं इतना विरोध हुआ इतना विरोध हुआ हिम्मत खर्च छुड़ा दिया विरोधियों और मदीना जाना पड़ा था में मक्का से पलायन
करके मदीना जाने पर श्रीकृष्ण को उस पहाड़ से पलायन करके और जगह जाना हरिद्वार का को भी सुरक्षित रखने के लिए kya-kya और अंत में द्वारिका भी दुग्गी है समुद्र में सामान कि सुशांत अपने मैं के सिवाय अपने आत्मा के सिवाय जो कुछ मिला है और जो मिलेगा वह छूट जाएगा मैं अपने आप को आप नहीं छोड़ सकते जिसको कभी नहीं छोड़ सकते हैं उसको मक्कार का गुंजन करके उसमें विश्व शांति पास ओ कि सत्संग सुनकर उनका ज्ञान भगवान कृष्ण साकार होकर आ जाए तो भी अर्जुन का दुख नहीं मिलता लेकिन यह ज्ञान का आश्रय
लिया तो अर्जुन राजपूत देखा है ओम श्री राम जी साकार थे तो b2b काल लांछन लगाने का दुर्मति नहीं मिट्टी लेकिन श्री राम का ज्ञान पाने वाले हनुमान जी के पास सुमति के सिवा प्यार सत्संग का श्रेय ने श्रेष्ठजनों का आश्रय सत्यवती को बढ़ाया साथ भी खूब रात सात्विक वातावरण का श्रेय उद्देश कुल वस्तुए दो को सावधानी का ह्रास हुआ सूर्य उदय सिंह और सवा 2 घंटे पहले से ब्रह्म मुहूर्त और उसमें उठकर ध्यान भजन करना श्री कृष्ण उठकर खुला कर लेते हैं आप पैर धो लेते और फिर चिंतन करते जो सकता है चेतन है
आनंद है कि वह मेरा वास्तविक स्वरूप है है तो आप भी ऐसी श्री कृष्ण की दिनचर्या अपने जीवन में जाओ कि जो कुछ दिन भर में काम करने होते उसकी योजना प्रभात पुंज डेस्क करने आप जैसा थोड़ा कि थोड़ी देर कुछ भी ना चिंतन का बिना किंचिदपि चिंताएं और कुछ भी चिंतन में कांटों समझ में आ जाते तरह आप भी कुछ भी ना चिंतन करते क्षमता में आने का अभ्यास करो सुबह करो दोपहर करो बात चित्र दूसरे को गुस्सा आया है तो गुस्से गुलाम ना हो गुस्सा आया है उसको देखो तो गुस्से का प्रभाव आपको
बंदर बनाकर नचाएगा ने अगर गुस्सा यार आप असावधान ने तो गुस्सा तुमको मचा देगा और लोभ आया है तो लोग तुम्हें फस जायेगा उठाया तो वही तो मैं फस आएगा लाएगा यह आने-जाने वाले हैं बदमाश हूं इन बदमाशों से आप गहने है कि इन बदमाशों को घर में घुसने नागौर घुस आए तो घर छोड़कर भागो में जय राम जी बोलना पड़ेगा फिर सत्संग कोई साधारण सक्षम ने इसे सत्संग को पाने और समझने के लिए तो राजे-महाराजे राजपाट छोड़कर में ख्याल कर हाथ में झाड़ू वहां यह बर्तन मांजने की सेवाओं को स्वीकार करके गुरुओं को पैसा
मिलता है कि हम भी सेवा करते-करते हाथों से कभी-कभी खून बह जाता हूं गोलियों से पथ रिलीज मिट्टी से बटन मार्क्स थे गुरु जी के द्वार की सेवा उन दिनों में हम 10 से 15 तोला सोना रोज खरीद के रख सकते थे इतना कमा लेते हैं सोना भी सकता है कि वो सब छोड़कर अभी 1015 तोला सोना तो डेढ़ लाख का माल ह कि बिरला घाट के जिम्मे रोज कमाना उसको छोड़ कर दूंगी यहां बर्तन मांजने की सिंह व सास तरफ बढ़ने की सेवा शिक्षार्थियों सेवा ट्यून से लेकर आखिरी तक की सारी से उठा दो
कि जो जिम्मेदारी से कतराता है काम करने में लापरवाही करता है या मैं तो भजन कर रहा हूं भजन में भी सफल नहीं होगा काम में भी सफल नहीं हूं काम करो तो तत्परता से करो और फिर भजन भी तत्परता से हो और लापरवाह आदमी ना भजन में सफल हो गाना कामकाज में सब लोग मन लगाया नहीं मन लगाकर काम करें तो मन लगाकर और जितना कार्य जिम्मेदारी से तत्परता से करें उपयोगिता बढ़ेगी जितनी बड़ी बड़ी जिम्मेदारी लेंगे और तत्परता से पूरा करोगे उतना विकास है कि कभी भी पलायनवादी विचार नहीं करना सीताराम सीताराम की
जय श्री कृष्ण की चादर ओढ़कर भगतड़े बन जाना कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन श्रीकृष्ण आत्माराम जी ऐसे भक्तों को नहीं मिलते कि भगवान कृष्ण और राम और भगवान कृष्ण और राम जी का अनुभव भक्तों को मिलता है भक्त वे हैं जो अपने चैतन्य स्वभाव से अपने आत्म स्वभाव से विभक्त न अलग न सावधान भगत जगत को ठगत है भगत को ठगे न कोई एक बार जो भगत अ अ ठंडी हुई है कि जगत में रहते और जग से निराले दुख शुक्ला बहाने जीवन-मृत्यु में रहते हैं लेकिन समझने के लिए इसमें होगा ये कैसा होना
चाहिए ऐसा नहीं होना चाहिए तो खेल देख रहे हैं वाह कभी कुछ हुआ कभी तुझे जानकार है वह फिल्म का मजा लेता है जो अनजान है वह फिल्म देखकर परेशान हो जाए देहाती आदमी फिल्म देखना है और किसी को पकड़ा और उसको मार रहे तो वह परेशान देखने कि हवाई बैलगाड़ी और बैल गाड़ी आ गई दौड़ते-दौड़ते सामने हो तो ₹50 लगी तो डर जाएगा दुर्घटना घटी तो चौंक जाएगा लेकिन समझदार फिल्म की दुर्घटना का भी मजा लेता दुर्घटना का भी मजा लेगा पर्दे पर लगी उपयोग का भी मजा लेता और लहराते दरिया का भी मजा
आता विलम दशक के आनंद के लिए है यह संसार की लीला तुम्हारे आत्मदेव की सेवा के लिए नाम दूंगी खून पसीना ताजा के चांद सोता चल जाएगी तो संसार को सब्सक्राइब तुम भी व्यापक सर्वत्र सर्वेंद्रियाणाम् केंद्र में होते हुए इंद्रियों से परे अपने चैतन्य स्वभाव की मृत्यु नारायण एबी हरी ॐ बचता पेशाब माधव गोविंद इस प्रकार का भगवान के नाम का सुबह उसे जान की स्मृति में वृद्धि इससे भगवत प्रसाद जी बुद्धि हो जाए और भगवत प्रसाद जब बुद्धि से सारे दुखों का अंत हो जाता है नारायण हरि नारायण हरि ओम ओम ओम [संगीत]