दोस्तों अगर आज भी आप महीने के आखिरी 5 दिन गिनते हुए निकालते हैं। अगर सैलरी आते ही अकाउंट खाली होने लगता है। अगर कभी रात को नींद नहीं आई क्योंकि दिमाग में सिर्फ एक सवाल था। कल खर्च कैसे चलेगा? तो [संगीत] यह वीडियो आपके लिए है। सच सुनोगे। आप गरीब कम सैलरी की वजह से नहीं हो। आप गरीब उस सैलरी को मैनेज ना करने की वजह से हो। आज मैं आपको 12 ऐसे स्टेप्स बताऊंगा जो आपकी सैलरी नहीं बदलेंगे लेकिन आपकी सोच बदल देंगे और याद रखो पैसा पहले दिमाग में अमीर बनता है फिर जेब
में आता है। स्टेप एक सी योर मनी पैसे को देखना सीखो। 90% लोग मेहनत बहुत करते हैं। सुबह से शाम तक काम, ठकान, जिम्मेदारियां, सपने लेकिन फिर [संगीत] भी पैसा उनके कंट्रोल में नहीं आता। क्यों? क्योंकि उन्होंने कभी अपने पैसे को साफसाफ देखा ही नहीं। हम सबको लगता है कि हमें पता है पैसा कहां खर्च होता है। हम कहते हैं किराया, राशन, बिल, [संगीत] ट्रांसपोर्ट। बस यही तो है। लेकिन सच यह है कि यह सिर्फ ऊपर ऊपर का जवाब है। असल में हमारी सैलरी का एक हिस्सा ऐसे खर्चों में चला जाता है जिन्हें हम खर्च
मानते ही नहीं। 10 की चाय, 50 का स्नैक, 120 की कैब, 200 का ऑनलाइन आर्डर, 300 का अचानक बाहर खाना। यह छोटे खर्च इतने छोटे लगते हैं कि हम इन्हें गिनते ही नहीं। लेकिन यही छोटे-छोटे रिसाव महीने के अंत में अकाउंट खाली कर देते हैं। एक बहुत बड़ा रूल है। यू कांट मैनेज व्हाट यू कांट सी। यानी जिस चीज को आप साफ नहीं देख सकते उसे आप कभी कंट्रोल नहीं कर सकते। दुनिया के सबसे सफल निवेशकों में से एक वारेन बफेट कहते हैं डू नॉट सेव व्हाट इज लेफ्ट आफ्टर स्पेंडिंग बट स्पेंड व्हाट इज लेफ्ट
आफ्टर सेविंग। लेकिन इस लाइन को सही से समझने के लिए सबसे पहले आपको यह जानना पड़ेगा कि आप खर्च कर कितना रहे हो। इसलिए पहला कदम कोई बड़ा इन्वेस्टमेंट नहीं है। कोई साइड बिजनेस नहीं है। कोई जटिल फाइनेंस फार्मूला नहीं है। पहला कदम है एक महीने तक हर खर्च लिखना। हर खर्च छोटा हो या बड़ा कोई बहाना नहीं। 10 की चाय भी पांच 50 का स्नैक भी 200 का ऑनलाइन आर्डर भी 500 का पेट्रोल भी 1000 का किराना भी पहले सात दिन आपको अजीब लगेगा 10 दिन बाद थोड़ा भारी लगेगा लेकिन 30 दिन बाद जब
आप पूरी लिस्ट देखोगे आपको झटका लगेगा आप सोचते थे कि आप कंट्रोल में हो लेकिन सच्चाई सामने आएगी पैसा पैसा कम नहीं था। नजर कम थी और यही झटका आपकी पहली सेविंग बनेगा। जैसे ही आप खर्च लिखना शुरू करते हो, आपका दिमाग ऑटोमेटिक अलर्ट मोड में चला जाता है। अब आप खर्च करने से पहले सोचते हो, क्या यह सच में जरूरी है? क्या यह लिखने लायक है? और बस यही सवाल आपकी जिंदगी बदलना शुरू कर देता है। बिना सैलरी बढ़ाए, बिना एक्स्ट्रा इनकम के, बिना किसी बड़े बदलाव के। खर्च लिखना आपकी इनकम नहीं बढ़ाता। लेकिन
आपकी समझ कई गुना बढ़ा देता है। और याद रखो समझ ही वो चीज है जो अमीर और गरीब के बीच सबसे बड़ा फर्क बनाती है। स्टेप नऊ रियलिस्टिक बजट बजट बनाना आसान है। बजट चलाना मुश्किल है। हर साल लोग नया बजट बनाते हैं। डायरी में लिखते हैं मोबाइल में नोट बनाते हैं। कुछ दिन तक सब सही चलता है। फिर असली जिंदगी शुरू होती है। अचानक खर्च, घर की जरूरत। दोस्तों का प्रोग्राम, मेडिकल इमरजेंसी और बजट टूट जाता है। समस्या बजट में नहीं होती। समस्या यह होती है कि बजट हमारी रियल लाइफ के हिसाब से बना
ही नहीं होता। इसलिए आपको परफेक्ट बजट नहीं चाहिए। आपको रियलिस्टिक बजट चाहिए। और इसके लिए सिंपल फार्मूला है 50 20 20 10 रूल 50% नीड्स यह वो खर्च हैं जिनसे आप बच नहीं सकते। किराया, खाना, बिजली, पानी, ट्रांसपोर्ट, मोबाइल, इंटरनेट, बेसिक दवाइयां सबसे पहले यह हिस्सा अलग करो। क्योंकि जब जरूरी चीजें सुरक्षित होती हैं तभी दिमाग शांत रहता है। अगर यह खर्च क्लियर नहीं होंगे तो पूरी फाइनेंशियल प्लानिंग हिल जाएगी। 20% सेविंग्स यह आपका सेफ्टी नेट है। इमरजेंसी फंड वह पैसा जो अचानक मेडिकल बिल, जॉब लॉस या घर की इमरजेंसी में काम आए। जिन लोगों
के पास सेविंग नहीं होती, वे हर छोटी मुसीबत में उधार लेने पर मजबूर हो जाते हैं और उधार आपकी आजादी छीन लेता है। इसलिए सेविंग कोई ऑप्शन नहीं है। यह आपकी सुरक्षा है। 20% इन्वेस्टमेंट सिर्फ पैसा बचाना काफी नहीं है। सेविंग पैसा रोकती है। इन्वेस्टमेंट पैसा बढ़ाता है। सिप हो सकती है। म्यूचुअल फंड हो सकता है। आरडी हो सकती है, रकम छोटी हो सकती है, लेकिन नियमित होना जरूरी है। यही हिस्सा आपकी सैलरी को समय के साथ बड़ा बनाता है। यहीं से कंपाउंडिंग का खेल शुरू होता है। 10% स्किल यह सबसे अंडर रेटेड हिस्सा है।
अगर आप 15 शून्य कमाते हो तो एक [संगीत] 500 अपने ऊपर लगाओ। कोई कोर्स, कोई ट्रेनिंग, कोई नई स्किल। क्योंकि स्किल ही आपकी फ्यूचर इनकम है। आज की सैलरी आपकी वर्तमान पहचान है। लेकिन आपकी स्किल आपका भविष्य तय करती है। अब सबसे बड़ा सवाल मेरी सैलरी कम है। मैं यह सब कैसे करूं? यही जगह है जहां ज्यादातर लोग रुक जाते हैं। वे रकम देखकर डर जाते हैं। लेकिन याद रखो आपको रकम से नहीं प्रतिशत से सोचना है। अगर आपकी सैलरी 10 है तो 20% मतलब 2 0 अगर 20 शून्य है तो चार शून्य रकम बदलती
रहेगी लेकिन आदत नहीं बदलनी चाहिए। शुरुआत में यह मुश्किल लगेगा। हो सकता है पहले महीने पूरा 20% ना बचा पाओ लेकिन 5% से शुरू करो फिर 10% करो धीरेधीरे [संगीत] बढ़ाओ बजट सैलरी की वजह से नहीं बनता बजट प्राथमिकताओं की वजह से बनता है अगर आपने अपनी लाइफ में सेविंग और इन्वेस्टमेंट के लिए जगह ही नहीं बनाई तो पैसा कभी जगह नहीं बनाएगा। याद रखो पहले अपने पैसों को दिशा दो वरना पैसा अपनी दिशा खुद चुन लेगा और जब पैसा बिना दिशा के चलता है तो वह कभी आपकी जिंदगी को मजबूत नहीं बनाता लेकिन जब
आप प्रतिशत से शुरुआत करते हो तो छोटी सैलरी भी धीरे-धीरे मजबूत फाइनेंशियल सिस्टम में बदल जाती है। यही फर्क है प्लान वाले इंसान [संगीत] और बिना प्लान वाले इंसान में। दोनों की इनकम बराबर हो सकती है लेकिन भविष्य कभी बराबर नहीं होता। स्टेप तीन स्मॉल हैबिट्स, बिग डैमेज। ज्यादातर लोग सोचते हैं कि पैसा तब खत्म होता है जब हम कोई बड़ी चीज खरीदते हैं। मोबाइल, बाइक, टीवी, कपड़े। लेकिन सच्चाई बिल्कुल अलग है। आपकी फाइनेंशियल लाइफ बड़ी खरीदारी से नहीं। छोटी-छोटी रोज की आदतों से बर्बाद होती है। और सबसे खतरनाक बात आपको पता भी नहीं चलता।
सोचो अगर आप रोज सिर्फ 30 रोख 40 खर्च करते हो। चाय स्नैक कोल्ड ड्रिंक छोटा सा ट्रीट रोज का खर्च छोटा लगता है। बस इतना ही तो है। लेकिन जब वही 40 रोज का 30 दिन में [संगीत] जोड़ो ₹1200 साल में जोड़ो। 14400 और अगर ऐसी दो-तीन आदतें हैं तो 3000 4000 साल के यानी आपकी एक महीने की सैलरी सिर्फ छोटी आदतों में उड़ जाती है। अब समझो असली खेल क्या है? समस्या यह नहीं है कि आप खर्च कर रहे हो। समस्या यह है कि आप बिना सोचे खर्च कर रहे हो और सबसे बड़ी गलती
लोग यहां करते हैं। वे सोचते हैं कि अब मुझे सब कुछ छोड़ देना चाहिए। नहीं। पैसा बचाने का मतलब जिंदगी की खुशी खत्म करना नहीं है। पैसा बचाने का मतलब है समझदारी से चुनना। इसलिए रूल है रिमूव मत करो। रिप्लेस करो। 300 के बाहर कॉफी बेस की घर की [संगीत] कॉफी। 200 का ऑनलाइन स्नैक 60 का घर का बना नाश्ता हर छोटी दूरी पर बाइक थोड़ा वॉक हर वीकेंड बाहर खाना महीने में एक बार प्लान करके खाना आप लाइफस्ट डाउनग्रेड नहीं कर रहे आप उसे स्मार्ट बना रहे हो और यहां एक और बड़ी सच्चाई है
छोटी आदतें सिर्फ पैसा नहीं खाती वे आपकी डिसिप्लिन भी खा जाती हैं जब आप रोज बिना सोचे 40 खर्च करते हो तो आपका दिमाग सीखता है। छोटा खर्च मायने नहीं रखता। लेकिन यही सोच बाद में बड़े खर्चों में भी काम करती है। और फिर आप कहते हो पता ही नहीं चला पैसा कहां गया। याद रखो पैसा एक दिन में खत्म नहीं होता। वह रोज थोड़ा-थोड़ा कम होता है। अगर आप सिर्फ अपनी दो-तीन छोटी आदतों को कंट्रोल कर लेते हो तो बिना सैलरी बढ़ाए आप महीने के दो 3000 बचा सकते हो और वही दो 3000 अगर
इन्वेस्ट हुए तो 5 साल बाद वही रकम आपको हैरान कर देगी। गरीब और अमीर की आदतों में फर्क बड़ा नहीं होता। बस रोज की छोटी पसंद अलग होती है। आज से [संगीत] एक काम करो। हर खर्च से पहले खुद से पूछो क्या यह जरूरत है या सिर्फ आदत? बस यह सवाल आपकी तीसरी सेविंग शुरू कर देगा। स्टेप चार पे योरसेल्फ फर्स्ट। सबसे खतरनाक गलती क्या है? [संगीत] स्पेंड फर्स्ट सेव लेटर यानी पहले खर्च करो और [संगीत] जो बचे उसे बचाओ। लेकिन सच्चाई यह है। महीने के अंत में कभी कुछ बचता ही नहीं। सैलरी आती है।
पहले बिल जाते हैं। फिर किराया फिर राशन फिर छोटीछोटी इच्छाएं फिर अचानक कोई खर्च और 25 तारीख आते आते अकाउंट [संगीत] खाली। फिर हम खुद से कहते हैं इस महीने नहीं बचा। अगले महीने से बचाऊंगा। लेकिन अगला महीना भी वही कहानी दोहराता है। [संगीत] क्यों? क्योंकि आपने सेविंग को प्राथमिकता ही नहीं दी। आपने सेविंग को बचा हुआ पैसा समझ लिया। [संगीत] लेकिन सच यह है सेविंग बचा हुआ पैसा नहीं है। [संगीत] सेविंग आपकी पहली जिम्मेदारी है। इसीलिए नियम है पे योरसेल्फ फर्स्ट। जैसे ही सैलरी अकाउंट में आए सबसे पहले अपनी सेविंग और इन्वेस्टमेंट की रकम
[संगीत] अलग अकाउंट में ट्रांसफर करो ना कि महीने के अंत में ना कि जब सब खर्च हो जाए। बल्कि उसी दिन [संगीत] क्यों? क्योंकि जब पैसा अकाउंट में पड़ा रहता है तो दिमाग उसे उपलब्ध मान लेता है और जब दिमाग को फ्री हैंड मिलता है तो वह पैसा संभालता नहीं [संगीत] उड़ाता है। लेकिन जैसे ही आपने 20% या 10% पैसा अलग कर दिया अब आपका दिमाग खुद को उसी [संगीत] बचे हुए पैसे में एडजस्ट करना शुरू कर देता है। यही असली डिसिप्लिन है। आंखों से दूर, खर्च से दूर जब पैसा दिखता नहीं तो खर्च करने
की इच्छा भी [संगीत] कम हो जाती है और यह सिर्फ पैसा बचाने की तकनीक नहीं है। यह माइंडसेट ट्रेनिंग है। आप खुद को यह सिखा रहे हो कि मेरी सेविंग मेरे खर्च के बाद नहीं। मेरे खर्च मेरी सेविंग के बाद शुरू होते हैं। यही छोटी सी प्राथमिकता कुछ साल बाद बड़ा फर्क बनाती है। दो लोग एक ही सैलरी कमाते हैं। एक महीने के अंत में बचाने की कोशिश करता है। [संगीत] दूसरा महीने की शुरुआत में बचाता है। 5 साल बाद उनकी जिंदगी एक जैसी नहीं होती। याद रखो अगर आप खुद को पहले पे नहीं करोगे
तो जिंदगी आपको कभी पे नहीं करेगी। सैलरी आती है। पहले खुद को पे करो फिर दुनिया को। स्टेप [संगीत] पांच पुअर वर्सेस स्मार्ट थिंकिंग। यहीं से असली फर्क शुरू होता है। सैलरी से नहीं सोच [संगीत] से। पुअर थिंकिंग क्या कहती है? मेरे पास कम है। जब ज्यादा आएगा तब बचाऊंगा। [संगीत] अभी क्या फर्क पड़ेगा? स्मार्ट थिंकिंग क्या कहती है? कम है। लेकिन इसे बढ़ाऊं कैसे? छोटा शुरू करूंगा। पर शुरू तो करूंगा। आज की आदत कल का रिजल्ट बनाती है। दोनों लोगों की इनकम एक जैसी हो सकती है। लेकिन उनका भविष्य कभी एक [संगीत] जैसा नहीं
होता। 500 की एसआईपी बहुत छोटी लगती है। कई लोग कहते हैं इससे क्या होगा? लेकिन सच यह रकम छोटी है। आदत बड़ी है। जब आप हर महीने 500 इन्वेस्ट करते हो तो आप [संगीत] सिर्फ पैसा नहीं लगा रहे होते। आप खुद को डिसिप्लिन सिखा रहे होते हो और असली खेल यहीं से शुरू होता है। कंपाउंडिंग कंपाउंडिंग धीरे काम करती है। शुरुआत में कुछ खास नहीं दिखता। [संगीत] छ महीने एक साल लगता है कुछ बड़ा नहीं हुआ। लेकिन समय के साथ पैसा खुद पैसा बनाना शुरू कर देता है। [संगीत] पहले आप पैसा लगाते हो। फिर पैसा
खुद बढ़ता है। फिर बढ़ा हुआ पैसा और पैसा बनाता है। यही वह प्रक्रिया है जो छोटी रकम को बड़ी ताकत में बदल देती है। फोर थिंकिंग कहती है इतना कम है रहने दो। स्मार्ट थिंकिंग कहती है इतना कम है इसलिए शुरू करो। याद रखो अमीर लोग बड़े अमाउंट से शुरू नहीं करते। वे सही आदत से शुरू करते हैं। आज 500 है। कल ₹1000 [संगीत] होगा। परसों ₹5000 होगा। लेकिन अगर शुरुआत [संगीत] ही नहीं हुई तो रकम कभी बढ़ेगी ही नहीं। पैसा कम होना समस्या नहीं है। सोच छोटी होना समस्या है। आज से सवाल बदलो। मेरे
पास कितना कम है। नहीं। [संगीत] मैं इसे बढ़ाने के लिए क्या कर रहा हूं? यही सोच आपको धीरे [संगीत] धीरे गरीब माइंडसेट से निकालकर स्मार्ट फाइनेंशियल माइंडसेट में [संगीत] ले जाती है। स्टेप्चर स्किल इज रियल वेल्थ। अब एक बहुत कड़वी लेकिन सच्ची बात सुनो। [संगीत] कम सैलरी समस्या नहीं है। सालों तक कम सैलरी रह जाना समस्या है। और ऐसा क्यों होता है? क्योंकि लोग पैसे बचाने पर तो सोचते हैं लेकिन पैसे कमाने की क्षमता बढ़ाने पर नहीं सोचते। ज्यादातर लोग कहते हैं जब ज्यादा कमाऊंगा तब सीखूंगा। लेकिन स्मार्ट लोग कहते हैं जब तक ज्यादा नहीं
कमा रहा तब तक सीखना ही पड़ेगा। यही फर्क है। आप नया फोन लेने के लिए 15,000 20,000 खर्च कर देते हो। लेकिन कोई कोर्स 800 का हो तो सोचते हो। अभी [संगीत] जरूरत नहीं है। फोन 2 साल में पुराना हो जाएगा। लेकिन स्किल अगर सीख ली तो वह 10 साल तक कमाई करवाएगी। याद रखो पैसा आपको अमीर नहीं बनाता। स्किल [संगीत] आपको अमीर बनाती है। मान लो आप 15,000 महीने कमाते हो। [संगीत] अगर आप 1000 महीने अपने ऊपर लगाते हो। डिजिटल मार्केटिंग, वीडियो एडिटिंग, एक्सेल सेल्स, कम्युनिकेशन, ए [संगीत] कोई भी मार्केटेबल स्किल और उसी स्किल
से आपकी इनकम 2000 भी बढ़ गई तो आपने एक महीने में 200% रिटर्न [संगीत] कमा लिया। कोई बैंक यह रिटर्न नहीं देता। कोई एफडी यह रिटर्न नहीं देती। [संगीत] लेकिन ज्यादातर लोग डरते हैं। उन्हें लगता है अगर सीखकर फायदा नहीं हुआ तो सवाल उल्टा [संगीत] पूछो। अगर नहीं सीखा तो 5 साल बाद भी मैं यहीं रहूंगा या [संगीत] नहीं? दुनिया बदल रही है। जॉब्स बदल रही हैं। स्किल्स की कीमत बढ़ रही है। अगर आपकी स्किल वही है जो 5 साल पहले थी तो आपकी सैलरी भी [संगीत] वहीं अटकी रहेगी। लेकिन अगर हर साल आप एक
नई स्किल जोड़ते हो तो आपकी कमाई की छत ऊपर उठती रहती है। कम इनकम वाले इंसान की सबसे बड़ी ताकत क्या है? उसके [संगीत] पास खोने के लिए ज्यादा नहीं होता। लेकिन सीखने के लिए बहुत कुछ होता है। हर महीने 5% 10% अपने ऊपर लगाओ। इसे खर्च मत समझो। इसे इनकम अपग्रेड समझो। क्योंकि सच्चाई यह है आपकी सैलरी [संगीत] आपकी कंपनी तय करती है। लेकिन आपकी स्किल आपकी कीमत तय करती है और जब आपकी कीमत बढ़ती है तो आपकी इनकम अपने आप बढ़ने लगती है। अगर आपने स्किल में निवेश शुरू कर दिया तो आने वाले
सालों में आपको पैसे बचाने की चिंता कम और पैसे बढ़ाने का भरोसा ज्यादा होगा। [संगीत] यही असली गेम चेंजर है। स्टेप्स आठ वैल्यू माइंडसेट वर्सेस एक्सपेंस माइंडसेट। अब बात करते हैं एक ऐसे माइंडसेट की जो धीरे-धीरे आपकी पूरी फाइनेंशियल लाइफ बदल देता है। इस दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं। पहला एक्सपेंस माइंडसेट वाले। दूसरा वैल्यू माइंडसेट वाले। एक्सपेंस माइंडसेट। एक्सपेंस माइंडसेट। हर चीज को सिर्फ खर्च की नजर से देखता है। यह ₹5,000 का है। [संगीत] यह ₹00 का है। यह बहुत महंगा है। उसका फोकस सिर्फ कीमत पर होता है। वैल्यू माइंडसेट। वैल्यू माइंडसेट
अलग सवाल पूछता है। यह चीज मुझे क्या दे रही है? [संगीत] क्या इससे मेरी लाइफ बेहतर होगी? क्या यह मेरी कमाई बढ़ाने में मदद करेगी? यहीं से फर्क शुरू होता है। मान लो आप नया फोन लेने जा रहे हो। एक्सपेंस माइंडसेट कहेगा [संगीत] ₹0000 बहुत ज्यादा है। वैल्यू माइंडसेट [संगीत] पूछेगा क्या इस फोन से मेरी प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी? क्या मैं इससे कंटेंट बना [संगीत] सकता हूं? क्या इससे मेरी स्किल या इनकम बढ़ेगी? अगर जवाब हां है तो वह खर्च नहीं इन्वेस्टमेंट है। अगर जवाब नहीं है तो चाहे वह 5000 की चीज हो [संगीत] या 500 की
वह सिर्फ एक्सपेंस है। यही सोच [संगीत] धीरे धीरे आपकी जेब बचाती है क्योंकि अब आप हर चीज खरीदने से पहले रुकते [संगीत] हो। आप तुरंत कार्ड स्वाइप नहीं करते। आप पहले दिमाग से पूछते हो यह मेरी वैल्यू बढ़ा रहा है या सिर्फ मेरी खुशी 2 घंटे की बढ़ा रहा है और सच [संगीत] मानो ज्यादातर खर्च 2 घंटे की खुशी के लिए होते हैं लेकिन उनका असर महीने भर तक अकाउंट पर रहता है। वैल्यू माइंडसेट का मतलब कंजूसी नहीं है। [संगीत] इसका मतलब समझदारी है। अमीर लोग कम खर्च नहीं करते। वे सही जगह खर्च करते हैं।
वे दिखावे पर कम खर्च करते हैं। लेकिन सीखने, नेटवर्क, हेल्थ और ग्रोथ पर खुलकर खर्च करते हैं। गरीब माइंडसेट क्या करता है? दिखावे पर पैसा लगाता है। [संगीत] वैल्यू पर बचत करता है। स्मार्ट माइंडसेट क्या करता है? दिखावे को कंट्रोल करता है। वैल्यू में इन्वेस्ट करता है। आज से एक छोटा सा नियम बना लो। कोई भी चीज खरीदने से पहले 10 सेकंड रुकना है। खुद से पूछना है क्या [संगीत] यह मेरी लाइफ की क्वालिटी बढ़ा रही है या सिर्फ मेरा बैंक बैलेंस घटा रही है? बस [संगीत] यह 10 सेकंड का ब्रेक आपको हजारों रुपए बचा
सकता है। पैसा कमाने से ज्यादा जरूरी है पैसे को सही दिशा देना और वैल्यू माइंडसेट आपके पैसे को दिशा देता है। स्टेप [संगीत] आठ इमरजेंसी फंड आपकी फाइनेंशियल ढाल। अब हम उस चीज की बात करते हैं जिसे लोग तब समझते हैं जब बहुत देर हो चुकी होती [संगीत] है। इमरजेंसी कभी बताकर नहीं आती ना मैसेज करती है ना पहले से अपॉइंटमेंट लेती है। अचानक मेडिकल बिल अचानक जॉब का प्रॉब्लम घर में कोई जरूरी खर्च या कोई [संगीत] ऐसी स्थिति जहां तुरंत पैसे की जरूरत पड़ जाए और अगर उस समय आपके पास सेविंग नहीं है तो
क्या होता है? उधार, क्रेडिट कार्ड, दोस्तों से मदद, ईएमआई का बोझ और एक इमरजेंसी आपको 6 महीने पीछे धकेल [संगीत] देती है। यही वजह है कि इमरजेंसी फंड कोई लग्जरी नहीं है। यह आपकी फाइनेंशियल ढाल है। कम से कम 3 महीने का बेसिक खर्च अलग रखो। अगर आपका महीना ₹15,000 में चलता है तो ₹45,000 [संगीत] का टारगेट रखो। शुरुआत में यह बड़ा लगेगा। लेकिन इसे एक साथ मत सोचो। हर महीने थोड़ा थोड़ा जोड़ो। [संगीत] 2000 3000 धीरे-धीरे यह फंड बनता है। और जैसे [संगीत] जैसे यह फंड बढ़ता है, आपका आत्मविश्वास भी बढ़ता है। क्योंकि अब
आप हर समस्या में घबराते नहीं हो। आप जानते हो मेरे पास बैकअप है। जिन लोगों के पास इमरजेंसी फंड नहीं होता वे हर छोटी मुसीबत में टूट जाते हैं। उनका दिमाग हमेशा तनाव में रहता है। लेकिन जिनके पास तीन छ महीने का बैकअप होता है, वे फैसले मजबूरी में नहीं लेते। वे शांति से सोचते हैं और याद रखो सबसे महंगे फैसले हमेशा मजबूरी में लिए जाते हैं। इमरजेंसी फंड [संगीत] आपको मजबूरी से बचाता है। यह पैसा इन्वेस्टमेंट नहीं है। यह पैसा ग्रोथ के लिए नहीं है। यह पैसा सुरक्षा के लिए है। इसे एसआईपी में मत
डालो। इसे शेयर मार्केट में मत डालो। इसे रिस्क में मत डालो। यह पैसा लिक्विड होना चाहिए। यानी जब जरूरत हो [संगीत] तुरंत उपलब्ध और जैसे ही आपका इमरजेंसी फंड पूरा [संगीत] हो जाए आपकी पूरी फाइनेंशियल लाइफ बदल जाती है क्योंकि अब आप डर के [संगीत] साथ नहीं जीते। आप भरोसे के साथ जीते हो। कम इनकम वाले इंसान के लिए [संगीत] सबसे पहले अमीर बनने की जरूरत नहीं है। सबसे पहले सुरक्षित बनने की जरूरत [संगीत] है। सुरक्षा आती है सेविंग से और सेविंग का सबसे मजबूत रूप है इमरजेंसी [संगीत] फंड। अगर आपने यह बना लिया तो
जिंदगी का आधा तनाव अपने आप खत्म हो जाएगा। स्टेप नाउ डेप्ट कंट्रोल कार्ड्स पर कंट्रोल। अब एक ऐसी चीज की बात करते हैं जो दिखने में छोटी लगती है। [संगीत] लेकिन धीरेधीरे आपकी पूरी कमाई को खा जाती है। [संगीत] कर्ज ईएमआई क्रेडिट कार्ड बिल बाय नाउ [संगीत] पे लेटर पर्सनल लोन। आजकल कर्ज लेना बहुत आसान है। सिर्फ एक क्लिक, सिर्फ एक स्वाइप, सिर्फ एक ओटीपी लेकिन चुकाना वह आसान नहीं होता। समस्या कर्ज लेने में नहीं है। समस्या बेवजह कर्ज लेने में है। [संगीत] जरूरी कर्ज और दिखावे का कर्ज अलग होते हैं। घर के लिए लोन
समझ में आता है। बिजनेस के लिए लोन समझ में आता है। लेकिन मोबाइल, [संगीत] ट्रिप, कपड़े, पार्टी के लिए ईएमआई। यही वह जाल है जिसमें ज्यादातर लोग फंस जाते हैं। क्रेडिट कार्ड आपको अमीर महसूस कराता है। लेकिन असल में वह आपकी फ्यूचर इनकम पहले ही खर्च करवा देता है। आज जो चीज आप ईएमआई पर खरीदते हो, उसका पैसा आप अगले 61 महीनों [संगीत] तक चुकाते हो। यानी आपने अपने आने वाले महीनों की आजादी गिरवी रख दी। और सबसे खतरनाक बात क्या है? मिनिमम पेमेंट का जाल। आप सोचते हो अभी थोड़ा भर देता हूं बाद में
देखेंगे लेकिन ब्याज चुपचाप बढ़ता रहता है और देखते ही देखते 20 शून्य का बिल 30 शून्य बन जाता है याद रखो ईएमआई जितनी ज्यादा [संगीत] फाइनेंशियल फ्रीडम उतनी कम कम इनकम वाले इंसान के लिए सबसे बड़ा हथियार है कम फिक्स्ड बोझ अगर हर महीने आपकी सैलरी आने से पहले ही आधा पैसा ईएमआई [संगीत] में चला जाता है तो आप कभी आराम से सांस नहीं ले पाओगे। इसलिए एक सीधा नियम बना लो। [संगीत] जरूरत और इच्छा में फर्क करो। इच्छा के लिए कभी कर्ज मत लो। अगर आप सच में फाइनेंशियली मजबूत बनना चाहते हो तो पहले
हाई इंटरेस्ट वाले कर्ज खत्म करो। क्रेडिट [संगीत] कार्ड पहले क्लियर पर्सनल लोन जल्दी खत्म। जितना जल्दी कर्ज खत्म होगा उतनी जल्दी आपकी कमाई आपके [संगीत] लिए काम करेगी। कर्ज में जीने वाला इंसान हमेशा तनाव में रहता है। लेकिन बिना कर्ज वाला इंसान कम [संगीत] सैलरी में भी शांत रहता है। फर्क पैसे का नहीं है। फर्क बोझ का है। आज से एक फैसला करो। [संगीत] दिखावे के लिए कभी उधार नहीं। इमोशनल होकर कभी ईएमआई नहीं। [संगीत] क्योंकि असली अमीरी महंगी चीजें खरीदने में नहीं है। असली अमीरी बिना डर के सोने में है। स्टेप [संगीत] 10 ऑटोमेशन
डिसिप्लिन को सिस्टम बनाओ। अब तक आपने [संगीत] समझ लिया सेविंग जरूरी है। इन्वेस्टमेंट जरूरी है। लेकिन [संगीत] असली समस्या क्या है? कंसिस्टेंसी। लोग दो-ती महीने तक बहुत जोश में रहते हैं। एसआईपी शुरू करते हैं। सेविंग करते हैं। फिर एक महीना मिस फिर दूसरा और धीरे धीरे [संगीत] सब बंद। क्यों? क्योंकि सब कुछ विल पावर पर चल रहा था और विल पावर [संगीत] हमेशा मजबूत नहीं रहती। इसीलिए अगला कदम है ऑटोमेशन। जो काम सिस्टम पर डाल दिया जाता है, वह [संगीत] भावनाओं पर निर्भर नहीं रहता। जैसे ही सैलरी आए आपकी सेविंग ऑटो ट्रांसफर हो जाए एसआईपी
ऑटो कट जाए [संगीत] रिकरिंग डिपॉजिट ऑटो जमा हो जाए अब आपको हर महीने फैसला नहीं [संगीत] लेना पड़ेगा फैसला पहले ही हो चुका है और यही फर्क बनाता है जब सेविंग मैनुअल होती है तो दिमाग बहाने ढूंढता है इस महीने [संगीत] थोड़ा टाइट है अगले महीने से ठीक से करेंगे लेकिन [संगीत] जब सेविंग ऑटोमेटिक होती है तो बहाने की जगह ही नहीं बचती। आपकी फाइनेंशियल ग्रोथ अब मूड [संगीत] पर नहीं सिस्टम पर चलती है। और याद रखो सफल लोग मोटिवेशन पर नहीं चलते। वे सिस्टम पर चलते हैं। ऑटोमेशन आपको अमीर नहीं बनाता एक दिन में।
लेकिन यह आपको डिसिप्लिन बना [संगीत] देता है और डिसिप्लिन प्लस टाइम वेल्थ मान लो आप दो शून्य एसआईपी ऑटो कर देते हो। अब चाहे आप भूल जाओ [संगीत] चाहे आपका मन करे या ना करे हर महीने इन्वेस्टमेंट हो जाएगी। धीरे [संगीत] धीरे यह आदत नहीं। आपकी पहचान बन जाती है। कम इनकम [संगीत] वाले इंसान के लिए ऑटोमेशन सबसे बड़ा हथियार है। क्योंकि जब इनकम [संगीत] छोटी होती है तो गलती की गुंजाइश कम होती है। इसलिए [संगीत] आज ही एक काम करो। कम से कम एक सेविंग और एक इन्वेस्टमेंट को ऑटो पर डाल दो। फिर देखना
आपको हर महीने बचाना है। नहीं सोचना पड़ेगा। आप बस आगे बढ़ते रहोगे। स्टेप 11 [संगीत] इनकम मल्टीप्लायर थिंकिंग। अब तक हमने सीखा पैसा [संगीत] कैसे बचाना है, कैसे संभालना है, कैसे बढ़ाना है, [संगीत] लेकिन एक सच्चाई और है। सिर्फ बचत से जिंदगी नहीं बदलती। आखिरकार इनकम बढ़ानी ही पड़ेगी। यहीं पर ज्यादातर लोग रुक जाते हैं। वे सोचते हैं मेरी नौकरी यही है। [संगीत] मेरी सैलरी फिक्स है। मैं क्या कर सकता हूं? यही पुअर थिंकिंग है। इनकम मल्टीप्लायर थिंकिंग [संगीत] अलग होती है। वह पूछती है, मेरी इनकम का दूसरा सोर्स क्या हो सकता है? मेरी इनकम
[संगीत] का दूसरा सोर्स क्या हो सकता है? मैं अपने टाइम का बेहतर उपयोग कैसे कर सकता हूं? मेरी कौन सी स्किल पैसा बना सकती है? अगर आपकी [संगीत] सिर्फ एक ही इनकम है तो आपकी पूरी जिंदगी उसी एक सोर्स पर टिकी है और अगर वह रुक गया तो सब रुक जाएगा। लेकिन अगर आपके [संगीत] पास दो सोर्स हैं तो रिस्क आधा हो जाता है। तीन सोर्स हैं तो स्ट्रेस और कम हो जाता है। [संगीत] इनकम मल्टीप्लायर का मतलब यह नहीं कि आप पांच बिजनेस शुरू कर दो। मतलब यह है कि धीरे-धीरे [संगीत] अपनी कमाई के
रास्ते बढ़ाओ। जैसे फ्रीलांस काम, वीकेंड प्रोजेक्ट, ऑनलाइन स्किल सर्विस, ट्यूशन, डिजिटल कंटेंट, [संगीत] छोटा सा साइड हसल। शुरुआत में 3000 भी एक्स्ट्रा आए [संगीत] तो फर्क पड़ता है क्योंकि अब आपकी सेविंग बढ़ सकती है। आपकी इन्वेस्टमेंट बढ़ सकती है। आपका कॉन्फिडेंस बढ़ सकता है। सबसे बड़ी बात आपको यह एहसास होता है कि आप सिर्फ सैलरी पर निर्भर [संगीत] नहीं हो। कम इनकम वाले इंसान की सबसे बड़ी ताकत क्या है? उसके पास [संगीत] ग्रोथ की जगह होती है। अगर आज आप 15,000 कमा रहे हो और 2 साल बाद 25,000 कमाने लगो तो [संगीत] यह चमत्कार नहीं
है। यह सोच का रिजल्ट है। इनकम मल्टीप्लायर [संगीत] थिंकिंग आपको यह सिखाती है कि आप अपनी कमाई को लिमिट मत समझो। उसे बेस समझो। यानी आज की सैलरी आपका अंत नहीं है। यह आपकी शुरुआत है। याद रखो सेविंग आपको सुरक्षित बनाती है। इन्वेस्टमेंट आपको मजबूत बनाती [संगीत] है। लेकिन मल्टीपल इनकम आपको आजाद बनाती है। अगर आपने यह सोच पकड़ [संगीत] ली तो आपकी इनकम धीरे धीरे एक लाइन से बढ़कर एक सिस्टम [संगीत] बन जाएगी और सिस्टम कभी अचानक नहीं टूटता। स्टेप 12 [संगीत] पेशेंस और कंसिस्टेंसी धैर्य और निरंतरता। अब आखिरी और सबसे ताकतवर स्टेप यह
वह चीज है जो सब जानते हैं, [संगीत] लेकिन बहुत कम लोग निभाते हैं। धैर्य, निरंतरता। सच यह है। फाइनेंशियल ग्रोथ जिम जैसी [संगीत] है। पहले दिन जिम जाओगे, कुछ नहीं बदलेगा। एक [संगीत] हफ्ता जाओगे, थोड़ा दर्द होगा। एक महीना जाओगे थोड़ा फर्क दिखेगा लेकिन एकद साल लगातार जाओगे तो लोग पूछेंगे कैसे किया पैसा भी ऐसा ही है पहले 3 महीने सेविंग [संगीत] करोगे कुछ खास नहीं लगेगा 6 महीने बाद थोड़ा बैलेंस दिखेगा एक साल बाद आप खुद [संगीत] हैरान होंगे इतना कैसे जमा हो गया लेकिन यहां लोग गलती करते हैं वे जल्दी रिजल्ट चाहते हैं
जल्दी अमीर बनना चाहते हैं जल्दी जल्दी बड़ा रिटर्न चाहते हैं और जल्दी के चक्कर में [संगीत] गलत इन्वेस्टमेंट कर बैठते हैं या बीच में छोड़ देते हैं। याद रखो वेल्थ एक [संगीत] स्प्रिंट नहीं है। यह मैराथन है। छोटे-छोटे सही फैसले लंबे समय तक 500 एसआईपी छोटी है। 2000 सेविंग छोटी है। [संगीत] 1000 स्किल में निवेश छोटा है। लेकिन 3 साल लगातार वही छोटी चीजें आपकी पहचान बदल देती हैं। कंसिस्टेंसी का मतलब परफेक्ट होना नहीं है। मतलब है रुकना नहीं। कभी कम सेविंग हो गई। ठीक है? जारी रखो। कभी एसआईपी छोटी करनी पड़ी। ठीक है? बंद
मत करो। कभी एक्स्ट्रा खर्च हो गया। सीखो आगे बढ़ो। जिंदगी में उतार चढ़ाव आएंगे। लेकिन जो इंसान अपने सिस्टम को नहीं छोड़ता वही आखिर में जीतता है। अमीर लोग जादू से अमीर नहीं बनते। वे लंबे समय तक सही काम दोहराते रहते हैं [संगीत] और यही असली राज है। अगर आपने यह 12 स्टेप्स समझ लिए और सिर्फ 50% भी लागू कर दिए तो दो-ती साल बाद आपकी फाइनेंशियल लाइफ पहचान में [संगीत] नहीं आएगी। याद रखो कम सैलरी आपकी कहानी की शुरुआत हो सकती है लेकिन उसका अंत नहीं धैर्य रखो निरंतर रहो और अपने [संगीत] पैसों को
दिशा देते रहो क्योंकि समय प्लस सही आदतें हमेशा चमत्कार करती हैं आउट्रो [संगीत] दोस्तों अगर आपने यहां तक वीडियो देखा है तो इसका मतलब है कि आप सच में अपनी जिंदगी बदलना चाहते हो आज हमने कोई जादू की ट्रिक नहीं सीखी कोई जल्दी अमीर बनने वाला फार्मूला नहीं [संगीत] सीखा। हमने सीखा सोच बदलना, आदत बदलना, सिस्टम बनाना। याद रखो कम सैलरी आपकी पहचान नहीं है। बिना प्लान की जिंदगी आपकी पहचान बन जाती है। अगर आप सिर्फ यह चार चीजें आज से शुरू कर दो। हर खर्च लिखना, सैलरी आते ही पहले सेविंग, [संगीत] छोटी एसआईपी या
इन्वेस्टमेंट शुरू करना। हर महीने अपनी स्किल बढ़ाना तो 12 महीने बाद [संगीत] आप वही इंसान नहीं रहोगे। लोग सोचेंगे आपकी किस्मत बदल गई लेकिन आपको पता होगा आपकी आदतें बदली हैं। और जब आदतें [संगीत] बदलती हैं तो रिजल्ट बदलते हैं। याद रखो अमीर लोग अलग काम नहीं करते। [संगीत] वे वही काम अलग तरीके से करते हैं। अगर यह वीडियो आपको सोचने पर मजबूर कर गया तो इसे लाइक जरूर करो। कमेंट में लिखो मैं आज से शुरू कर रहा हूं और अगर आप सच में अपनी फाइनेंशियल लाइफ को कंट्रोल में लेना चाहते हो [संगीत] तो इस
चैनल को सब्सक्राइब कर लो क्योंकि यहां हम सिर्फ पैसे की बात [संगीत] नहीं करते। हम सोच बदलने की बात करते हैं। मिलते हैं अगले वीडियो में। तब तक याद रखो पैसा पहले दिमाग में अमीर बनता है फिर जेब में आता है।