इस वीडियो में आप कुछ ऐसी बातों को जानोगे जो कि आपके दिमाग को शॉक कर देगी फैक्ट नंबर फोर याद है मैंने आपको बताया था कि हाईएस्ट टेंपरेचर जो धरती पर रिकॉर्ड हुआ है 5 लाख करोड़ डिग्री सेल्सियस इस धरती के सबसे खतरनाक एक्सपेरिमेंट्स जो कि ऑलमोस्ट ऑलमोस्ट धरती को खत्म कर दिए थे सुनो सूरज के कोर का टेंपरेचर है 1 करोड़ डिग्री सेल्सियस तो क्या है कि जब हमारी धरती पे पहली बार न्यूक्लियर टेस्टिंग की गई थी 1945 में दी ट्रिनिटी न्यूक्लियर टेस्ट उसमें जब यह आग का गोला बड़ा हुआ था तब वहां जो
मिट्टी थी ना उसकी टेंपरेचर पहुंच गई थी 1 करोड़ डिग्री सेल्सियस यानी सूरज के बराबर फिर अमेरिका का कंपीटीटर रूस देश ने कहा कि अभी बताता है मैं फिर 1961 में रूस ने न्यूक्लियर टेस्ट किया और तब टेंपरेचर पहुंचा 10 करोड़ डिग्री सेल्सियस यानी सूरज से भी सात गुना ज्यादा फिर स्विट्जरलैंड ने कहा कि रुक अभी सबको औकात दिखाता हूं मैं और स्विटजरलैंड के सर्न लेबोरेटरी में साल 2012 में दो पार्टी गल्स को लाइट के स्पीड से टकराया गया और तब जो टेंपरेचर निकला वो था 5 लाख करोड़ डिग्री सेल्सियस यानी 360000 सूरज के बराबर
और एक बात आपको पता ही होगा कि साइंटिस्ट गजब गजब एक्सपेरिमेंट करते रहते हैं तो किसी जगह पे वो लोग न्यूक्लियर ब्लास्ट किए और मिट्टी का टेंपरेचर करोड़ डिग्री सेल्सियस पहुंच गया तो एक सवाल है जो आप लोगों ने भर दिया उस वीडियो में कि ऐसा है तो मापा कैसे कौन सा थर्मोमीटर ऐसा है जो कि करोड़ डिग्री सेल्सियस इसको माप लेगा ऐसे थर्मामीटर कहां आ गया मेरे को बता दो मैं भी खरीदूंगा आप लोग कह रहे थे तो देखो बात यह है कि नॉर्मल थर्मामीटर जो आपके घर में है वो तो कुछ डिग्री सेल्सियस
को माप सकता है छोटा-मोटा और साइंटिफिक थर्मामीटर भी होते हैं जो लैब में होते हैं जिनका दाम 5 लाख 8 लाख इतना इतना होता है हम लोग का कोई काम भी नहीं है वैसे प्रैक्टिकली बोले तो उतने प्राइस का लेने का लेकिन वो सब हजारों डिग्री में माप सकते हैं टेंपरेचर को 5000 डिग्र 10000 डिग्र भी माप सकते हैं इलेक्ट्रॉनिक थ थर्मोमीटर्स वई लैब वाले तो इसका मतलब 10000 डिग्री सेल्सियस 20000 डिग्री सेल्सियस तो माप सकते हैं हम लोग लेकिन ये लाखों का क्या हिसाब है यार थर्मामीटर गल नहीं जाएगा तो इसका आंसर यह है
कि जब न्यूक्लियर चीजें की जाती है और उसमें 500 लाख करोड़ 600 लाख करोड़ अरब डिग्री सेल्सियस जो होता है ये सब मैथमेटिकल कैलकुलेशन से होता है मेरे भाई कंफ्यूज मत हो आप मैथमेटिक्स हम बोलते हैं ना कि यार a + b स्क्वा का क्या काम है ये कहां इस्तेमाल होता है स्कूल के बाहर यही सब जगह पे काम आता है मैथमेटिक्स के जरिए पता किया जाता है न्यूक्लियर चीज में कितना टेंपरेचर हो रहा है सूरज का सतह का टेंपरेचर 5000 डिग्री सेल्सियस है तो ऐसे तो हम मान सकते हैं कि चलो कोई सैटेलाइट सूरज
के सतह पे यानी ऊपर पे गया होगा ठीक है लेकिन अंदर सूरज के कोर में इतना अरब डिग्री सेल्सियस है ये कैसे पता चलेगा ये पता चल ही नहीं सकता इंपॉसिबल है वहां पे मैथमेटिक्स काम आता है यानी हां जो आप में से बहुत डीप लोग हैं वो इस यह सोच रहे होंगे इसका मतलब सूरज का एक्चुअल टेंपरेचर तो हमने कभी मापा ही नहीं है एकदम सही रॉ र बात करूं एकदम कच्चा कच्चा तो यह बात है कि किसी को घंटा नहीं पता कि सूरज के कोर का टेंपरेचर क्या है मैथमेटिक्स से पता किया गया
है यह सब चीजें और पता है मैथमेटिक्स कभी गलत नहीं होती है अब बोलते हैं कि यूनिवर्स का एज इतना है 13 बिलियन इयर्स यूनिवर्स का लास्ट जहां से यूनिवर्स अभी और एक्सपेंड हो रहा है रियल टाइम में वहां तक का डिस्टेंस इतना है ये सब कैसे पता लगा मैथमेटिक्स से पता लगा है सब्सक्राइब करके बेल आइकन पे क्लिक करके ये ऑल वाला बटन जरूर ऑन कर लेना ताकि हर एक नई वीडियो आपके मोबाइल में तुरंत पहुंच जाए फैक्ट नंबर थ्री मैंने आपको बताया था कि पाई ये जो नंबर है इसका एंड पता करने के
लिए साइंटिस्ट ने हद पार कर दिया है नॉर्मल कंप्यूटर को तो भूल जाओ सुपर कंप्यूटर तक को भूल जाओ क्योंकि क्वांटम कंप्यूटर से उन्होंने पता करने का ट्राई किया कि पाई का लास्ट वैल्यू क्या है भाई अपने मैथ्स में वो पाई नंबर तो जरूर सुना होगा 3 प 14 वाला हम सब ने देखा इसको और कहते हैं कि यह अनंत है और इंसान तो इसका अंत पता नहीं लगा सकता पर इंसानों ने सुपर कंप्यूटर्स का सारा ताकत लगा दिया और करोड़ों नहीं अरबों रुपए का बिजली लगाकर यह पता करने का ट्राई किया कि पाई का
अंत कहां पे होता है और उस कंप्यूटर ने थ्री पॉइंट के बाद 100 लाख करोड़ नंबर पता कर लिया और बहुत कुछ रिवील हुआ थोड़ा सा डीप है सुनना ये पाई नंबर इंफिनिट है कंप्यूटर ने जितना पता किया वो 1 पर भी भी नहीं है और 3.14 के बाद जितने नंबर्स हैं ध्यान से सुनो वो इतना रैंडम है कि कहीं ना कहीं आपका मोबाइल नंबर आता है प्रॉपर कहीं ना कहीं मेरा मोबाइल नंबर आता है कहीं ना कहीं आपका डेट ऑफ बर्थ आता है डीओ और दुनिया के सारे लोगों का डीओ उसमें आता है कहीं
ना कहीं और एक फैक्ट इंडिया के सुरेश कुमार ने 3.14 के बाद 70000 डिजिट को याद कर लिया था और मैंने आपको यह बताया था कि ह्यूज बिजली का यूज करके पता किया गया तो आपको पता है यह कारनामा किया था ग कंपनी ने हां वही महाशय कंपनी जो कि आप डेली यूज करते हो तो उन्होंने जो बिजली यूज किया था उसका आपको अंदाजा देने के लिए बताऊं कि एक अमेरिका में फेमस शहर है कैलिफोर्निया सुना होगा हजारों बार आपने नाम कैलिफोर्निया एक महीने में जितना बिजली यूज करती है पूरे एक महीने में उतना यह
कंप्यूटर एक दिन में यूज किया तब जाके पाई का ट्रिलियन 100 लाख करोड़ डिजिट पता चला और पाई ऐसा नंबर है भाई कि ये अंत नहीं होगा मतलब मैं आप को बता दूं जितना बिजली अभी तक पूरे इंसानियत में यूज हुआ है बिजली जब से आया है 2 250 साल पहले से उसके पहले तो नहीं था जब से आया है तब से जितना बिजली यूज हुआ है उन सबको ले लो और एक कंप्यूटर में डाल दो फिर भी पाई का एंड पता नहीं किया जा सकता क्योंकि वो इंफिनिटी है और जितना बिजली का भी हमने
बात किया उसको इंटू 1 लाख कर दो फिर भी नहीं पता किया जा सकता है क्योंकि पाई का कोई अंत है ही नहीं 3.14 के बाद कोई एंड नहीं है देखो इनफिनिटी ये जो कांसेप्ट है ना अनंत का ये एक ऐसी कांसेप्ट है जिसको इंसानी दिमाग समझने के लिए यह बना ही नहीं है ये समझ ही नहीं सकता कि इंफिनिटी क्या है फैक्ट नंबर टू अब इस बात पे बहुत सवाल आ रहा है जो मैंने आपको इंफॉर्मेशन दिया था कि 37 साल कोमा में रहा एक इंसान 37 साल तक कोमा में थी ये एलियन नाम
की लड़की कोमा में होना इस दुनिया का सबसे बड़ा श्राप है और बहुत लोगों को ये लगता है कि कोमा में तो बस इंसान लेटा रहता है उसको क्या पता क्या हो रहा है नहीं दो टाइप का कोमा होता है पहला नॉर्मल कोमा जो हम लोग सब जानते हैं वो तो ठीक है पर दूसरा होता है लॉक्ड इन कोमा जो कि एक ऐसी मेडिकल कंडीशन होती है जिसमें सब कुछ फील होता है बस मानो इंसान एक शरीर में लॉक्ड इन हो गया हो और इसलिए इसका नाम है लॉक्ड इन कोमा मतलब आप सोचो ना कितना
अजीब लगता होगा कि इंसान लेटा है कॉन्शियस है फुल्ली सुनाई दे रहा है फील हो रहा है लेकिन हिल नहीं पा रहा है एक लिविंग हेल सारे कोमा केसेस में से सिर्फ 3 पर ऐसा होता है कोमा का एक रेटिंग स्केल भी होता है ग्लासगो स्केल और ये होता है तीन से 15 तक 15 मतलब चांस है कि ठीक हो जाए थोड़ा सा कोमा है और जितना नंबर कम हो जैसे थ्री मौत के चांसेस 99 पर है तो बहुत लोगों ने पूछा कि जिस तरह मेंें सर्दी खांसी वगैरह होते रहता है बैक्टीरियल वायरल इंफेक्शन होता
है क्या कोमा वाले लोग को वो होता है अमेजिंग बात ये है ना कि कोमा में कोई इंसान है तो वो इंसान हमारे तरह ही होता है यानी या बॉडी का सारा जो पार्ट है वो नॉर्मली काम कर रहा होता है ब्लड फ्लो हो रहा होता है हां अगर कोई बैक्टीरिया वायरस आ गया तो वो भी शरीर को इफेक्ट करता है उसे भी बीमारी होती है तो आपके दिमाग में आ रहा होगा कोमा में किसी को बीमारी हुआ तो दवाई कैसे देंगे तो दवाई उनको पाइप के जरिए दिया जाता है डायरेक्टली ब्लड स्ट्रीम में भेजा
जाता है दवाई को और खाना पना वो भी यहां से नहीं होता है वो डायरेक्टली ब्लड स्ट्रीम में भेजा जाता है क्योंकि मुंह चलेगा ही नहीं और कई ब्रेन स्कैंस में तो ये भी पता चला है कि कोमा में कई लोगों को ड्रीम सपना भी आता है कितना अजीब बात है ना कोमा में है और उसे सपने दिख रहे हैं वो तो ऑलरेडी लेटा हुआ है उसमें सपना देखना इंसान कहां है मैं हूं कहां समझ पा रहे हो डीप फीलिंग को कि मैं हूं किधर उसको यही पता नहीं चलेगा कोमा में एक अजीब सा बात
बोल रहा हूं बहुत लोग को अजीब लगेगा मुझे ऐसा लगता है कि कोई अगर कोमा में हो ना तो उसकी जान चली जाए वही ठीक है मतलब आप सोचो कि 10 साल तक बेचारा इंसान तड़पता है जिसके जगने के चांसेस बहुत ज्यादा है उनके लिए तो हां उनका केयर होना चाहिए लेकिन जो 99 पर डेड है और 1 पर के लिए उन उनका सोल आत्मा काइंड ऑफ तड़प रहा है तो ऐसे इंसान का डेथ हो जाए मेरे ख्याल से वही सही है कम से कम उनका आत्मा को तो शांति मिलेगा हां मुझे पता है आत्मा
उत्तमा साइंस नहीं मानती है लेकिन जो बोल रहा हूं बस उसे समझने की कोशिश करो बस फैक्ट नंबर वन मैंने एक एलिमेंट के बारे में बताया था पोलोनियम एक ऐसा एलिमेंट जिसका 1 ग्राम अगर सामने आ जाए तो 5 करोड़ लोग मर जाएंगे लिटरली रिसर्चस में यह पता चला है जिस तरह आपका घर ईंट से बना हुआ है उसी तरह हमारा पूरा ब्रह्मांड 118 एलिमेंट से बना हुआ है पर इन 118 के लिस्ट में जो 87 नंबर पे है ना फेंसियंप्यूट करता है लोहा अरबों किलो है सोना लाखों किलो है सारे एलिमेंट्स बहुत भरे पड़े
हैं फ्रैंसिन सिर्फ 30 ग्राम और इस 118 के लिस्ट में जो 84 वां नंबर है पोलोनियम इसको द मोस्ट डेंजरस एलिमेंट ऑफ दी पीरियोडिक टेबल कहा जाता है इसका 1 मिलीग्राम यानी नमक के दाने जितना 1 ग्राम नहीं 1 मिलीग्राम उतना अमाउंट आपके पास भी पोलोनियम रख दे कोई तो इंसान तुरंत गिर के मर जाएगा और एक बात हमने अभी मिलीग्राम की बात की अगर 1 ग्राम रख दे यहां पे तो देखो रिसर्च ने क्या पाया है कि 1 ग्राम पोलोनियम 5 करोड़ लोगों को मारने के लिए काफी है अब यह सुनके बहुत लोग बोल
रहे हैं कि यह कुछ ज्यादा नहीं हो गया तो भाई ऑफिशियल रिसर्चस जहां पे हुई है उसका आप डाटा खुद ही पढ़ लो तो अब सवाल यह है कि ये कैसे मारता है आदमी को क्या है पहली बात पोलोनियम रेडियोएक्टिव होता है उससे रेडिएशन निकलता है इसलिए उसके सामने इंसान जाएगा तो उसका डीएनए ब्रेक होना शुरू हो जाता है तो रेडियो एक्टिव होना तो पहली बात हो गई दूसरी बात अब समझो इस चीज को ठीक है माइंड खाली करो और अब आप समझो एक बात बोल रहा हूं 1 ग्राम पोलोनियम कुछ ही मिनट्स के अंदर
पूरा 500 लीटर का जो टंकी होता है ना वाटर टैंक जो आपके घर के भी ऊपर होगा उसको गर्म कर देगा सिर्फ 1 ग्राम नमक के दाने जितना पोलोनियम उससे इतना रेडिएशन और हीट निकलता है तो बहुत लोग पूछ रहे थे कि 1 ग्राम से 5 करोड़ लोग मर सकते हैं ये कहां मिलेगा भाई बता दे कहां मिलेगा मैं करोड़ों रुपए देने के लिए तैयार हूं कुछ लोग ऐसा कह रहे थे भाई एक बात बताऊं अगर आप 300 करोड़ भी दे दो 3000 करोड़ भी दे दो या एलोन मस्क अपना पूरा 100 बिलियन डॉलर भी
दे दे किसी डीलर को फिर भी ये नहीं मिलेगा क्योंकि ये धरती पर बहुत रेयर है इसको एक आम इंसान खोज ही नहीं सकता है ये बहुत कम मात्रा में मिला गया है और जितना भी मिला है यह एलिमेंट उसको स्टोरेज सील करके वैज्ञानिकों ने रखा है दुनिया भर के कई जगहों पर और कई लोकेशंस तो डिस्क्लोज किया ही नहीं गया है यानी कुछ-कुछ की पीपल को पता है इस दुनिया में 10 से 20 लोग हैं वैज्ञानिक जिनको एक्चुअली में सच में पता है कि पोलोनियम किधर है तो ये ऐसे मिल ही नहीं सकता मतलब
मिलना नामुमकिन है जिन एलिमेंट्स का कुछ ही ग्राम धरती के क्रस्ट प मौजूद है उसको पाने के बारे में तो भूल जाना ही सही होगा क्योंकि दुनिया में हजारों लोग उसको खोजने में ऑलरेडी लगे हुए हैं और ऐसा थ्योराइज किया गया है कि जितना हाईएस्ट कोड़ा गया है ना 12 किमी आज तक का हाईएस्ट उसके नीचे ये सारी चीजें हैं हो सकती है लेकिन कोई पहुंच ही नहीं सकता है और पैसा क्यों लगाए [संगीत] कोई इंडिया की राजधानी दिल्ली खत्म हो जाती अगर यह छोटे से पेंसिल के बराबर मेटल को पुलिस ग्लव्स पहन के प्लास्टिक
बैग में रख के इसको एटॉमिक पावर स्टेशन ना ले जाती तो दिल्ली के मायापुरी कबाड़ मार्केट में एक चमकता हुआ मेटल मिला यह मेटल रेडिएशन छोड़ता था यानी इसके सामने खड़े हो जाओ और 24 घंटे के अंदर लिवर किडनी गलना शुरू एक बार डीलर राजेंद्र प्रसाद ने तो इस मेटल के टुकड़े को अपने पॉकेट में रख लिया था जिसके चलते इनकी जान चली गई यह है कोबाल्ट 60 मेटल पर एक रेडियो एक्टिव चीज दिल्ली के नॉर्मल स्क्रैप मार्केट में क्या कर रही थी कैसे आया ये हुआ यह था कि 1980 में दिल्ली यूनिवर्सिटी में ये
एक मशीन था गामा रेडिएटर पुरानी होने के चलते इसको नॉर्मल मार्केट में ही बेच दिया गया यूनिवर्सिटी वाले भी और पूरे दली में रेडिएशन फैलना शुरू हो गया आखिरकार गवर्नमेंट ने सारे 16 पीसेज को कै किया और यह अभी भी नरोरा एटॉमिक पावर स्टेशन में बंद है नाउ इस शॉर्ट्स ने तो तहलका मचा दिया था इसके बारे में बदमाश आइकन ने बताया था बहुत अच्छे से पर ये जो घटना है ना ये अपने आप में बहुत यूनिक है इसके बारे में कुछ बातें आपको और जान लेनी चाहिए एक इंटरेस्टिंग फैक्ट आपको बता देता हूं कि
कोई भी न्यूक्लियर घटना होती है ना जैसे कहीं पे रेडिएशन फैल गया कोई रेडियो एक्टिव ऑब्जेक्ट शहर में फैलने लगा लोगों को सिकनेस होने लगी ऐसी जितनी घटनाएं होती है वो सब एक लेवल पे आती है इंटरनेशनल न्यूक्लियर एंड रेडियोलॉजिकल इवेंट स्केल आईईएस एक ऑफिशियल टूल है जिससे यह मापा जाता है लेवल जीरो लेवल वन लेवल टू लेवल थ्री लेवल फोर करते-करते सात लेवल हाईएस्ट होता है जो चरनो बिल में न्यूक्लियर ब्लास्ट हुआ था वो सातवें लेवल पे आता है और कई लोगों को लगा था कि दिल्ली में तो कुछ एक दो लोग ही मरे
थे इस रेडियोएक्टिव घटना से तो ये लेवल वनटू में आती होगी नहीं ये लेवल फोर की घटना थी अकॉर्डिंग टू आई एन ईएस दिल्ली यूनिवर्सिटी ने उस मशीन को गलती से नॉर्मल कबाड़ में बेच दिया क्योंकि देखो अभी रेडियो एक्टिव चीजों के बारे में तो बहुत लोगों को नॉलेज है फिर भी अगर आप गांव के साइड चले जाओ गांव के लोगों से बात करो तो उनको जरा भी नहीं पता है कि रेडियो एक्टिव चीज होती क्या है एक लोहा कैसे किसी को मार सकता है वो भी इनविजिबली तो बात ये है कि 2005 10 में
भी ना इंटरनेट वगैरह उतना था नहीं और चुनिंदा साइंस के लोगों को छोड़ के बाकी लोगों को पता नहीं था तो जो वर्क कर्स दिल्ली यूनिवर्सिटी में काम करते थे उनको भी नहीं पता था अब यूनिवर्सिटी में कोई बड़ी सी लोहे की कोई मशीन सड़ रही है तो वो लोग बेच दिए लेकिन बात यह है कि वहां के जो अपर लेवल पे लोग हैं प्रोफेसर वगैरह उनको तो पता था और अभी की बात करें तो कोई भी ऐसी मशीन जिससे रेडिएशन निकलता हो ऐसा गलती से भी आजकल कोई बाहर डिस्पोज नहीं कर सकता क्योंकि ये
इकलौती घटना है ऐसी घटना और इंडिया में नहीं हुई है इतने 30-40 सालों में जो कि यह बताता है कि ये एक बहुत रेयरेस्ट ऑफ द रेयर केस था और गलती किसकी थी इवेंचर हुए इस केस में न्यूज़ वगैरह आया था इसी से रिलेटेड क्या है ना वो मशीन जो था वो जब बाहर से कवर था और एज अ टोटल मशीन जब वो रखा रहेगा कहीं पे तो कोई रेडिएशन नहीं निकलेगा वो मशीन मशीन है खड़ी है उसको जब खोला गया स्क्रेप मार्केट में स्क्रेप मार्केट कबार मार्केट में तो चीजों को खोलकर बेचा जाता है
उसको खोला गया तब जाके उसका रेडिएशन का असर शुरू हुआ और असर दिख थोड़ी है ना कि हां रेडिएशन तोड़ रहा है डीएनए को नहीं वो सिकनेस हुआ लोगों को अजीब अजीब सिमटम्स आने लगे तब जाके पता चला कि अबे कुछ हो रहा है और तब जाके जांच में यह सब पता चला और पुलिस तुरंत एटॉमिक एनर्जी वाले लोगों को बुलाई 2010 में मैं कितना छोटा था उस टाइम तो मैं सुना भी नहीं था इस केस के बारे में लेकिन ये सही में मेरे हिसाब से भी रेयरेस्ट ऑफ द रेयर केस है तो ये था
आज का इंटरेस्टिंग एनालिसिस वीडियो को लाइक जरूर करना नीचे कमेंट करना कि वीडियो कैसा लगा और सब्सक्राइब करके बेल आइकन जरूर ऑन कर लेना थैंक यू सो मच फॉर वाचिंग मिलते हैं अगली वीडियो में