यह कहानी एक खूबसूरत लड़की की है जो सरकश और जिद्दी थी वह एक मजहबी खानदान से ताल्लुक रखती थी लेकिन बहुत कोशिशों के बावजूद भी उसका दिल दीन की बातों में नहीं लगता था उसे ऊंची आवाज में म्यूजिक सुनना बेहद पसंद था यहां तक कि इबादत के वक्त भी उसे म्यूजिक बंद करने का ख्याल नहीं रहता वह म्यूजिक सुनती और उस पर झूमती रहती उसकी मां उसे बार-बार समझाती बेटा इबादत का एहतराम किया करो इबादत के वक्त खामोश हो जाया करो और म्यूजिक बंद कर दिया करो लेकिन वह अपनी ही दुनिया में मस्त रहती वह
थोड़ी देर के लिए म्यूजिक बंद करती लेकिन फिर दोबारा चला लेती उसकी मां उसे समझाती कि शाम के वक्त छत पर मत जाया करो क्योंकि इस वक्त शैतानों का गुजर होता है लेकिन शायद जैनब को शैतानों के होने पर यकीन ही नहीं था वह इन बातों को बस किस्सा कहानी ही मानती थी और मां की बातों को टाल देती थी मां के मना करने के बावजूद वह अक्सर मगरिब के वक्त छत पर डूबता सूरज देखने जाया करती थी उसे लगता था कि उसकी मां उसे जरूरत से ज्यादा ही टोक रहती है इसलिए वह उनकी बातों
को अनसुना कर देती थी उसकी मां हमेशा उसे दीन के करीब रहने की ताकीद करती थी लेकिन वह लड़की एक भी बात नहीं सुनती थी एक दिन जब वह ट्यूशन जाने के लिए घर से निकल रही थी तो उसकी मां ने उससे कहा बेटा आयतुल कुर्सी पढ़कर निकला करो अल्लाह की हिफाजत होती है लेकिन उस लड़की ने मां की बात पर ध्यान ही नहीं दिया और मोबाइल देखते हुए बाहर निकल गई शाम को जब उसकी ट्यूशन से छुट्टी हुई तो वह फिर कानों में हैंड्स फ्री लगाकर म्यूजिक सुनने लगी और घर की तरफ निकल पड़ी
रास्ते में कब एक कब्रिस्तान आया उसे कुछ खबर ही नहीं हुई जैसे ही वह कब्रिस्तान के पास से गुजर रही थी अचानक उस के पास किसी की कॉल आई और जोर से एक गाना बज उठा जो उसकी रिंगटोन थी फोन सुनते ही उसने अचानक एक धुआं महसूस किया जो उसे धीरे-धीरे अपनी लपेट में लेने लगा साथ ही एक बहुत तेज खुशबू ने हवा को महका दिया था उसने फौरन फोन बंद किया यह देखने के लिए कि अचानक क्या हो रहा है यह कैसी खुशबू थी यह कैसा धुआं था जो उसके इर्दगिर्द फैलता जा रहा था
अभी उसके जहन में यह सब सवाल पैदा हो ही रहे थे कि अचानक किसी ने उसका नाम पुकारा जैनब उसने पीछे मुड़कर देखा लेकिन उसे धुए में कुछ नजर नहीं आया उसने इसे अपना वहम समझकर टाल दिया और आगे बढ़ गई कुछ कदम और चलते ही उसे फिर से आवाज आई जैनब इस बार जैनब सच में चौक गई यह मेरा वहम नहीं हो सकता किसी ने वाकई मेरा नाम पुकारा है इस बार उसने पीछे मुड़कर देखने के बजाय तुरंत भागना शुरू कर दिया जैसे ही वह भागी वह धुआं उसका पीछा करने लगा यहां तक कि
अब जैनब को सांस लेने में भी दिक्कत होने लगी अब उसे किसी आदमी की जोर-जोर से हंसने की आवाज सुनाई दी जैसे वह उसे परेशान करके खुश हो रहा हो जैनब को ऐसा लगने लगा कि आज उसका घर बहुत दूर हो गया है और शायद वह कभी वहां तक नहीं पहुंच पाएगी उसकी हिम्मत जवाब देने लगी और वह जोर जोर से रोने लगी लेकिन वह मर्दाना हंसी अब भी ऊंची और डरावनी होती जा रही थी भागते भागते जैनब पूरी तरह थक चुकी थी लेकिन घर जैसे उससे दूर ही होता जा रहा था हिम्मत जुटाकर उसने
उस हंसती हुई आवाज से पूछ ही लिया कौन हो तुम और मुझे क्यों परेशान कर रहे हो यह कहते ही अचानक जैनब मुंह के बल जमीन पर गिर पड़ी जैसे किसी ने उसके पैर खींच कर उसे जमीन पर पटक दिया हो अगले ही पल उसने खुद को कीचड़ में लत पत पाया उसके कपड़े बैग सब कीचड़ में डूब चुके थे उसे समझ नहीं आ रहा था कि उसके साथ आखिर हो क्या रहा है रात और यह रास्ता दोनों उसके लिए खत्म ही नहीं हो रहे थे और अब वह मर्दाना आवाज पहले से भी ज्यादा तेज
होकर हंस रही थी जैसे उसे इस खेल में बहुत मजा आ रहा हो जैनब के साथ यह सब पहली बार हो रहा था उसे कभी भी इन चीजों पर यकीन नहीं था लेकिन आज जो उसके साथ हो रहा था वह बेहद अजीब और डरावना था अब जैनब मदद के लिए जोर-जोर से चिल्लाने लगी मगर उसे ऐसा लग रहा था कि उसके आसपास से गुजरने वाले लोग उसे सुन ही नहीं पा रहे जैसे वह किसी बंद कमरे में अकेली चिल्ला रही हो वह धुआं अब भी उसे अपनी गिरफ्त में लिए हुए था जैनब को समझ नहीं
आ रहा था कि अब वह क्या करे जिससे इस कैद से बाहर निकले अचानक उसके कानों में उसकी मां की आवाज गूंजी जैनब घर से आयतुल कुरसी पढ़कर निकला करो अल्लाह की हिफाजत होती है जैनब ने फौरन आयतुल कुरसी पढ़ने की कोशिश की मगर यह क्या वह पढ़ने में कासिर थी उसकी जुबान उसका साथ नहीं दे रही थी यह सब उसके लिए एक भयानक ख्वाब जैसा था जो अब टूटने का नाम ही नहीं ले रहा था फिर एक बार वही आवाज गूंजी जैनब अब उसमें हिम्मत नहीं थी कि वह मुड़कर देखे कि आखिर उसके पीछे
कौन है जो उसका पीछा कर रहा है लेकिन इस बार जैनब ने हिम्मत जुटाकर पीछे देखा पर वहां धुएं के सिवा कुछ भी नहीं था जैसे ही उसने वापस सामने की तरफ मुंह किया वह दंग रह गई धुएं में लिपटा हुआ एक खौफनाक लाल रंग का वजूद उसके सामने खड़ा था उसकी लाल जलती हुई आंखें और खून जैसे लाल बाल जैनब ने इतना भयानक चेहरा पहले कभी नहीं देखा था खौफ से उसकी चीख निकल गई मगर अगले ही पल वह वजूद धुएं में गायब हो गया अब जैनब ने अपनी कांपती हुई आवाज में आऊज बिल्लाह
का वर्ध शुरू कर दिया और बस यही पढ़ती जा रही थी साथ ही तेजी से भागती जा रही थी अगले ही पल उसने महसूस किया कि वह धुआं दूर होता जा रहा है और वह अजीब सी खुशबू भी अब हल्की हो रही है उसे उम्मीद की एक किरण नजर आई जैसे कोई अब उसकी हिफाजत के लिए पहुंच गया हो अब उसके अंदर भागने की ताकत वापस आ चुकी थी अगले ही पल वह अपने घर के सामने खड़ी थी यह नजारा देखने को वह जैसे तरस गई थी वह दौड़कर दरवाजे तक पहुंची और झोर जोर से
रोते हुए चिल्लाने लगी अम्मी दरवाजा खोलो अम्मी दरवाजा खोलो उसकी अम्मी भाग कर आई और दरवाजे पर जैनब को इस हाल में देखकर बेहद परेशान हो गई क्या हुआ जैनब क्या हुआ है यह सब किसने किया वह यह सब पूछ ही रही थी कि जैनब उनकी बाहों में ही बेहोश होकर गिर पड़ी अमी ने घबराकर जैनब को उठाया दरवाजा बंद किया और उसे बिस्तर पर लिटा दिया फिर उन्होंने उसके चेहरे पर पानी छींटा और उसे होश में लाने की कोशिश की जैसे ही जैनब को होश आया अम्मी ने अल्लाह का शुक्र अदा किया उन्होंने जैनब
को पानी पिलाया और कहा जाओ कपड़ों पर जो कीचड़ लगा है उसे साफ करके बदल लो जैनब ने अपने गीले कीचड़ में सने कपड़े बदले और वापस अम्मी के पास आई अब बताओ हुआ क्या था यह सब किसने किया कौन था और आज तुम ट्यूशन से इतनी जल्दी कैसे आ गई क्या जल्दी जैनब के होश उड़ गए नहीं अम्मी मैं तो आज बहुत देर से आई हूं अम्मी ने झट से घड़ी की तरफ इशारा किया और कहा समय देखो समय देखकर जैनब और भी ज्यादा घबरा गई यह कैसे हो सकता है मैं तो बहुत देर
से आई हूं उसे समझ नहीं आ रहा था कि यह कैसे संभव है वह तो रास्ते में एक खौफनाक वाकई का शिकार हुई थी फिर भी अम्मी के लिए तो जैसे वक्त गुजरा ही नहीं था अम्मी के बार-बार पूछने पर जैनब ने झूठ बोल दिया रास्ते में कुछ कुत्ते मेरे पीछे पड़ गए थे मैं उनसे बचकर भागी और कीचड़ में गिर गई थी उसे लगा कि अगर वह सच बताएगी तो अम्मी बेवजह परेशान हो जाएंगी इसलिए उसने सोचा कि यह सब सिर्फ एक हादसा था जो अब गुजर चुका है अब वह महफूज है लेकिन उसकी
हालत बिल्कुल ऐसी थी जैसे वह कोई जंग लड़कर आई हो वह बुरी तरह थक चुकी थी और थोड़ा आराम करना चाहती थी लेकिन असली डरावनी रात अभी बाकी थी जैसे ही जैनब की आंख लगी उसे वही सब कुछ अपने सपने में दोबारा दिखने लगा जैसे वह अब भी उसी तकलीफ से गुजर रही हो अचानक उसकी आंख खुली लेकिन यह क्या वह खुद को जमीन पर गिरा हुआ पाती है जैसे किसी ने उसे बेड से उठाकर जमीन पर पटक दिया हो वह जोर से चीख पड़ी और रोने लगी और तभी वही डरावनी मर्दाना हंसी उसके कानों
में गूंजने लगी पहले से भी ज्यादा तेज अम्मी घबराकर दौड़ती हुई कमरे में आई उन्होंने देखा जैनब जमीन पर गिरी हुई थी और दर्द से कराह रही थी अम्मी ने घबराकर पूछा जैनब तुम जमीन पर कैसे आई जैनब ने अम्मी की बात काटते हुए कहा अम्मी इसे कहो कि चुप हो जाए मेरे सिर में इसकी हंसी से दर्द हो रहा है अम्मी हैरान होकर बोली कौन कौन हंस रहा है तुम क्या कह रही हो जैनब ने कांपती आवाज में कहा अम्मी आपको इसकी हंसी सुनाई नहीं दे रही अब उसे यकीन हो गया था कि वह
किसी बड़ी मुसीबत में फंस चुकी है जो कुछ उसके साथ हो रहा था वह किसी और को नजर नहीं आ रहा था अम्मी ने जैनब को संभालते हुए कहा जाओ वॉशरूम जाकर फ्रेश हो जाओ तुमने जरूर कोई बुरा सपना देखा होगा अब्बू आते ही होंगे फिर सब मिलकर रात का खाना खाएंगे जैनब उठी और वॉशरूम चली गई इसी दौरान दरवाजे पर दस्तक हुई और जैनब के अब्बू घर आ गए अम्मी ने खाना लगाया और दोनों मां-बाप जैनब का इंतजार करने लगे काफी देर इंतजार करने के बाद अम्मी ने वॉशरूम का दरवाजा खटखटाया और बाहर से
आवाज लगाई जैनब कितनी देर और अब्बू को भूख लग रही है जल्दी बाहर आओ लेकिन जैनब ने ना कोई हलचल की की ना ही कोई जवाब दिया और ना ही वह बाहर आई अम्मी को बेचैनी हुई उन्होंने फौरन जाकर अब्बू को बुलाया और कहा जैनब आज बहुत अजीब हरकतें कर रही है वह कुछ बता भी नहीं रही और काफी देर से वॉशरूम में बंद है अचानक वॉशरूम का दरवाजा जोर से खुला और जैनब घबराई हुई बाहर की तरफ दौड़ी अम्मी ने घबराकर पूछा क्या हुआ तुम आज क्या कर रही हो यह सब क्या है इस
बार जैनब झूठ नहीं बोल पा उसने हकीकत बयां कर दी अम्मी जैसे ही मैं वॉशरूम में गई दरवाजा अपने आप बंद हो गया और पूरा वॉशरूम धुए से भर गया फिर किसी के जोर जोर से हंसने की आवाजें आने लगी मैं बहुत चीखी लेकिन आप लोग मेरी मदद के लिए नहीं आए अम्मी और अब्बू हैरान रह गए बाहर तो कोई आवाज ही नहीं आई हम तो यहीं थे इसके बाद जैनब ने आज रास्ते में जो कुछ उसके साथ हुआ था वह भी साफ-साफ बता दिया अब अम्मी सब समझ गई इस लड़की के पीछे कोई काला
साया पड़ चुका था अगली सुबह जब जैनब स्कूल जाने के लिए उठी तो उसका सिर बहुत भारी लग रहा था और उसका शरीर बुरी तरह दर्द कर रहा था जैसे किसी ने उसे बुरी तरह पीटा हो उसने हिम्मत जुटाकर स्कूल जाने का इरादा किया लेकिन जब वह मुंह धोकर आई और बाल बनाने के लिए आईने के सामने खड़ी हुई तो डर के मारे उसकी चीखें निकल गई उसने जब आईने में खुद को इस कदर भयावह हालत में देखा तो उसके होश उड़ गए उसके बाल अजीब तरीके से बिखरे हुए थे और उसका चेहरा बिल्कुल किसी
चुड़ैल जैसा लग रहा था कुछ पलों तक वह स्तब्ध खड़ी रही फिर जब होश आया तो जोर-जोर से रोने लगी उसकी चीख पुकार सुनकर पूरा घर उसके कमरे में इकट्ठा हो गया सब यह दृश्य देखकर दंग रह गए कि जैनब कितनी डरावनी लग रही थी वह अपनी मां से लिपट गई और कहने लगी देखो अम्मी मुझे क्या हो गया है अब मैं कहीं जा भी नहीं सकती क्या मैं उम्र भर ऐसी ही रहूंगी क्या मैं कभी बाहर नहीं जा सकूंगी अम्मी मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा है क्या मुझसे कोई गुनाह हो गया है अम्मी
कुछ तो कहो लेकिन उसकी मां जैसे सदमे में चली गई थी वह बिल्कुल चुप थी उनकी आंखें पत्थर की तरह स्थिर हो गई थी उनके पास जैनब को दिलासा देने के लिए शब्द ही नहीं थे पूरे घर में सन्नाटा छा गया था सिर्फ जैनब की चीखें और पुकार गूंज रही थी जैनब की मां से उसकी यह हालत देखी नहीं जा रही थी उन्होंने दिल ही दिल में ठान लिया कि वह अपनी बेटी को इस न्न के काले साय से बचाकर ही रहेंगी चाहे इसके लिए उन्हें अपनी जान ही क्यों ना देनी पड़े वह किसी भी
हद तक जाएंगी और अपनी बेटी को वापस लाकर ही दम लेंगी अचानक उन्हें पास वाली मस्जिद के इमाम सा साहब का ख्याल आया जिन्होंने पहले भी एक औरत की मदद की थी जब वह किसी जिन्न के असर में आ गई थी अगले दिन अम्मी ने बड़ी मस्जिद के इमाम साहब को घर खाने पर बुला लिया इमाम साहब बहुत इल्म रखते थे और लोग अक्सर अपने रूहानी मसलों का हल तलाशने उनके पास आया करते थे इमाम साहब से इन लोगों के काफी अच्छे ताल्लुकात थे और वह इनके दूर के रिश्तेदार भी थे जैसे ही इमाम साहब
घर में दाखिल हुए उन्होंने एक अजीब सी बदबू महसूस की यह बदबू कैसी है ऐसी बदबू तो मुर्दा घर से आती है इमाम साहब ने कहा पूरे कमरे में सन्नाटा छा गया इमाम साहब ने पूछा यह सब कब से हो रहा है अम्मी ने बताया दो दिन से इमाम साहब बोले अच्छा तो इन दो दिनों में जो भी हुआ व सब मुझे तफसील से बताओ अम्मी ने उन्हें सारी बात विस्तार से बता दी इमाम साहब का चेहरा गंभीर हो गया और वह परेशानी में पड़ गए इमाम साहब समझ गए थे कि जैनब से अनजाने में
कोई भूल हो गई है और उसने किसी काली ताकत को परेशान कर दिया है जो अब जैनब को तंग कर रही है उन्होंने जैनब को पास बुलाकर समझाया बेटा जब भी कभी कब्रस्तान से गुजरो तो तुरंत आयतुल कुरसी पढ़कर अल्लाह की पनाह में आ जाया करो कब्रिस्तान में बहुत सी दूसरी मखलूक भी आबाद होती हैं इसलिए उनसे अल्लाह की हिफाजत मांगनी चाहिए यह कहकर इमाम साहब ने अगले दिन फिर आने का वादा किया और घर से रुखसत हो गए उस रात का गुजरना पूरे घर वालों के लिए बहुत मुश्किल हो गया जैनब जहां भी जाती
जो भी करती वह शैतानी ताकत उसका पीछा करती डर के मारे जैनब ना सो सकी ना कुछ खा पी सकी पूरे घर वालों ने पूरी रात जागकर जैनब के पास बैठकर कुरान की तिलावत की और सुबह होने का इंतजार करने लगे अगले दिन इमाम साहब के मुताबिक अपने दो शागिर्द के साथ घर तशरीफ लाए अब जैनब की हालत पहले से भी ज्यादा खराब हो चुकी थी और वह बेहोश बिस्तर पर पड़ी थी उसने कई दिनों से कुछ नहीं खाया था इमाम साहब ने घर की सारी खिड़कियां और दरवाजे खोलने को कहा और अपने शागिर्द के
साथ मिलकर ऊंची आवाज में सूरत अल बकरा की तिलावत करने लगे जैसे ही तिलावत शुरू हुई जैनब की हालत और बिगड़ने लगी वह जोर-जोर से चीखने लगी जैसे उसे इस तिलावत से तकलीफ हो रही हो तिलावत शुरू करने से पहले ही इमाम साहब ने घर वालों को समझा दिया था कि चाहे कुछ भी हो जाए कोई भी जैनब के करीब नहीं जाएगा और ना ही उसे छूने की कोशिश करेगा कुछ देर बाद जब तिलावत पूरी हुई तो जैनब बेहोश हो गई इमाम साहब चले गए और जैनब को सुला दिया गया ताकि वह कुछ आराम कर
सके शाम को जब अम्मी ने जैनब के कमरे का दरवाजा खोला तो कमरा खाली था और जैनब गायब थी घर में हड़कंप मच गया सारे घर वाले उसे ढूंढने में लग गए लेकिन वह कहीं नहीं मिली अब्बू ने तुरंत इमाम साहब को फोन किया इमाम साहब ने मशवरा दिया क्यों ना उसे उसी कब्रिस्तान में तलाश किया जाए जहां से उस रात वह गुजरी थी और यह हादसा हुआ था सभी घर वाले तुरंत उसी कब्रिस्तान की तरफ निकल पड़े वहां पहुंचकर जो देखा उसे सबके होश उड़ गए जैनब एक कब्र के पास सोई हुई यह नजारा
सबके लिए बेहद डरावना था जैसे ही जैनब को उठाया गया वह चीख उठी मैं यहां कैसे आई मुझे कुछ भी याद नहीं फौरन उसे घर वापस ले जाया गया अगले दिन तिलावत का वही अमल दोहराया जाना था लेकिन अब जैनब को जंजीरों में बांध कर रखा गया ताकि वह दोबारा कब्रिस्तान ना चली जाए तिलावत का अमल उन्होंने सात दिन तक जारी रखा और जैनब को सुबह शाम आयतुल कुरसी और जतन सूरत अल फलक और सूरत अनास से अपना हसारे के लिए कहा गया इन सात दिनों तक जैनब को घर में ही रखा गया और उसके
नाम का सदका भी दिया गया अब जैनब पहले से काफी बेहतर दिखने लगी लेकिन उसके चेहरे पर अभी भी एक अजीब सी वहशत साफ झलकती थी धीरे-धीरे वह ठीक होने लगी और उसके चेहरे की वहशत भी कम होती गई इमाम साहब ने जैनब को समझाया जब भी घर से बाहर निकलो हम हमेशा आयतुल कुरसी और मुविज तन पढ़कर अपना हंसार बांध लो इससे शैतानी ताकतें तुम्हारे करीब भी नहीं आ सकेंगी आज जैनब को इमाम साहब की कही हर बात सच लग रही थी उसे यकीन हो गया था कि इस दुनिया में इंसानों के अलावा भी
बहुत सी मखलूक आबाद है जिनसे बचने के लिए इंसान को अल्लाह की पनाह में आना होता है इस वाक ने जैनब की जिंदगी को पूरी तरह बदल कर रख दिया अब उसका झुकाव धीरे-धीरे अल्लाह र होने लगा उसे पहली बार अल्लाह की मौजूदगी का गहरा एहसास हुआ और यह एहसास उसके लिए बेहद खूबसूरत था अब वह लंबी सजदे करने लगी और शुक्र अदा करती कि वह उस डरावनी हालत से बाहर आ चुकी है वह घंटों घंटों इबादत में मगन रहती जैसे अल्लाह से मुलाकात कर रही हो हंसार बांधने और इबादत की बरकत से अब जैनब
की हिफाजत होने लगी और वह शैतानी ताकतें उसे छोड़ने पर मजबूर हो गई अब जैनब पूरी तरह उस बुरे जिन्न के असर से आजाद हो चुकी थी और एक नॉर्मल जिंदगी जी रही थी