अगर मैं तुमसे कहूं कि सिर्फ पांच स्किल्स सीख कर तुम किसी भी फील्ड में पैसा कमा सकते हो तो क्या तुम मानोगे? शायद नहीं। क्योंकि हमें बचपन से यही सिखाया गया है कि अच्छी डिग्री लो, अच्छी जॉब करो और जिंदगी सेट हो जाएगी। लेकिन असली दुनिया इससे बिल्कुल अलग है। यहां ना डिग्री गारंटी देती है ना ही पैसा गारंटी देता है। यहां सिर्फ एक चीज काम करती है और वो है स्किल्स। सच्चाई यह है कि 90% लोग इसलिए फेल होते हैं क्योंकि उनके पास सही स्किल्स नहीं होती। वो कोशिश करते हैं, मेहनत भी करते हैं
लेकिन सही डायरेक्शन में नहीं। कोई बिजनेस शुरू करता है लेकिन बेच नहीं पाता। कोई मेहनत करता है लेकिन कंसिस्टेंट नहीं रह पाता। कोई आईडिया लाता है लेकिन उसे एग्जीक्यूट नहीं कर पाता। और फिर वो सोचता है कि शायद उसकी किस्मत खराब है। लेकिन असल में प्रॉब्लम किस्मत की नहीं होती। प्रॉब्लम स्किल्स की होती है। ना पैसा मैटर करता है ना डिग्री मैटर करती है। अगर स्किल्स हैं तो तुम जीरो से भी शुरू करके ऊपर जा सकते हो। और अगर स्किल्स नहीं है तो लाखों होने के बाद भी तुम कुछ बड़ा नहीं कर पाओगे। इसीलिए आज
मैं तुम्हें वो पांच पावरफुल स्किल्स बताने वाला हूं जो तुम्हारी जिंदगी पूरी तरह बदल सकती हैं। यह वो स्किल्स हैं जो तुम्हें भीड़ से अलग बनाती हैं जो तुम्हें एवरेज से एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी बनाती हैं। और अगर तुमने इन्हें सही से समझ लिया और अपने अंदर अप्लाई कर लिया तो यकीन मानो तुम्हें टॉप 1% में जाने से कोई नहीं रोक सकता। स्किल एक कम्युनिकेशन। पहली स्किल। कम्युनिकेशन स्किल। अगर तुम अपनी बात सही से नहीं रख सकते तो सच सुन लो। तुम कभी बड़ा पैसा नहीं कमा पाओगे। चाहे तुम्हारा प्रोडक्ट कितना भी अच्छा क्यों ना हो, चाहे
तुम्हारे पास कितना भी यूनिक आईडिया क्यों ना हो। अगर तुम उसे लोगों तक सही तरीके से नहीं पहुंचा पाए तो वह सिर्फ तुम्हारे दिमाग में ही दबा रह जाएगा। बिजनेस की दुनिया में सिर्फ वही जीतता है जो अपनी बात को क्लियर, सिंपल और पावरफुल तरीके से रख सकता है। क्योंकि यहां लॉजिक से ज्यादा परसेप्शन बिकता है और परसेप्शन कम्युनिकेशन से बनता है। अब एक बात ध्यान से समझो। कम्युनिकेशन का मतलब सिर्फ बोलना नहीं होता। कम्युनिकेशन का मतलब होता है कनेक्शन। तुम सामने वाले से कितना कनेक्ट कर पा रहे हो। यही तय करता है कि वह
तुमसे खरीदेगा या नहीं। ज्यादातर लोग क्या करते हैं? [संगीत] बस बोलते रहते हैं लेकिन सुनते नहीं हैं और यही उनकी सबसे बड़ी गलती होती है क्योंकि जब तक तुम सामने वाले को समझोगे नहीं तब तक तुम उसे कन्विंस नहीं कर सकते। कस्टमर क्या चाहता है? उसकी प्रॉब्लम क्या है? वो किस चीज से परेशान है? अगर तुम यह समझ गए तो सेलिंग अपने आप हो जाएगी। याद रखो लोग प्रोडक्ट नहीं खरीदते। वो अपनी प्रॉब्लम का सॉल्यूशन खरीदते हैं [संगीत] और सॉल्यूशन तभी दिखेगा जब तुम उसे उसकी लैंग्वेज में समझाओगे। सिंपल, क्लियर और रिलेटेबल तरीके से। कम्युनिकेशन
में क्लेरिटी सबसे बड़ी पावर होती है। अगर तुम्हारी बात क्लियर है तो सामने वाला खुद अट्रैक्ट होगा। और अगर तुम्हारी बात कंफ्यूजिंग है तो सामने वाला इंटरेस्ट खो देगा। अब एक पावरफुल बात सुनो। एलॉन मस्क ने कहा था इफ यू कैन एक्सप्लेन इट सिंपली यू डोंट अंडरस्टैंड इट वेल इनफ। मतलब अगर तुम किसी चीज को सिंपल तरीके से नहीं समझा सकते तो तुम्हें खुद भी वह पूरी तरह समझ नहीं है। इसलिए कम्युनिकेशन इंप्रूव करने का सबसे बड़ा तरीका है [संगीत] चीजों को सिंपल बनाना। जितना सिंपल उतना पावरफुल। और एक और बात तुम्हारी बॉडी लैंग्वेज, तुम्हारा
टोन, तुम्हारी एनर्जी यह सब मिलकर कम्युनिकेशन बनाते हैं। सिर्फ वर्ड्स नहीं। अगर तुम कॉन्फिडेंट हो तो लोग तुम पर भरोसा करेंगे। और अगर तुम हेसिटेंट हो तो [संगीत] लोग तुमसे दूर रहेंगे। इसलिए बोलने से पहले खुद पर भरोसा बनाओ और हमेशा याद रखो। एक अच्छा कम्युनिकेटर वही होता है जो पहले सुनता है फिर समझता है और फिर बोलता है अगर तुमने यह स्किल मास्टर कर ली तो तुम किसी भी फील्ड में जीत सकते हो। क्योंकि जहां कम्युनिकेशन स्ट्रांग है वहां ओपोरर्चुनिटी खुद चल कर आती है। स्किल दो सेल्स स्किल। दूसरी स्किल सेल्फ स्किल। सच कड़वा
है। अगर तुम बेच नहीं सकते [संगीत] तो तुम कभी अमीर नहीं बन सकते। चाहे तुम्हारे पास कितना भी शानदार प्रोडक्ट हो, चाहे तुम्हारा आईडिया कितना भी यूनिक क्यों ना हो। अगर तुम उसे लोगों तक बेच नहीं पा रहे तो उसकी कोई वैल्यू नहीं है। बिजनेस की दुनिया में टैलेंट नहीं चलता। इमोशन नहीं चलता। सिर्फ एक चीज चलती है और वो है सेल। क्योंकि सेल ही वो प्रोसेस है जहां से पैसा आता है। एक्सपेंस [संगीत] एंड नॉनडी हर बड़ा बिजनेसमैन। पहले एक अच्छा सेल्समैन होता है। वो समझता है कि लोगों को कैसे समझाना है। कैसे ट्रस्ट
बिल्ड करना है। कैसे अपनी बात इस तरह रखनी है कि [संगीत] सामने वाला खुद कहे। मुझे यह चाहिए। अब एक चीज बहुत ध्यान से समझो। सेल्स का मतलब यह नहीं होता कि तुम किसी को फोर्स करके कुछ बेच दो। सेल्स का असली मतलब है वैल्यू को सामने लाना। [संगीत] तुम्हारे प्रोडक्ट में क्या वैल्यू है? वो किसी की जिंदगी को कैसे बेहतर बनाता है? वो किस प्रॉब्लम को सॉल्व करता है? जब यह साफ दिखने लगता है तो सेलिंग आसान हो जाती है क्योंकि लोग प्रोडक्ट नहीं खरीदते। वो अपने प्रॉब्लम का सॉल्यूशन खरीदते हैं। अगर किसी को
दर्द है तो वह दवा खरीदता है। अगर किसी को टाइम बचाना है तो वह सुविधा खरीदता है। इसलिए सेलिंग का पहला रूल है कस्टमर की जरूरत को समझना। उसकी सिचुएशन को समझना। उसकी प्रॉब्लम को महसूस करना और फिर उसे ऐसा सॉल्यूशन देना जो उसे सही लगे। यही असली सेल्स है। अब एक पावरफुल बात सुनो। स्टीव जॉब्स ने कहा था, पीपल डोंट नो व्हाट दे वांट अंटिल यू शो इट टू देम। मतलब लोगों को हमेशा खुद नहीं पता होता उन्हें क्या चाहिए। तुम्हारा काम है उन्हें दिखाना, [संगीत] उन्हें समझाना, उन्हें रियलाइज कराना कि तुम्हारा प्रोडक्ट उनकी
जिंदगी में कितना फर्क ला सकता है। जब तुम यह कर लेते हो तो सेलिंग पुश नहीं रहती। पुल बन जाती है। लोग खुद तुम्हारे पास आते हैं। लेकिन इसके लिए तुम्हें ऑनेस्टी चाहिए, क्लेरिटी चाहिए और कॉन्फिडेंस चाहिए। अगर तुम खुद अपने प्रोडक्ट पर भरोसा नहीं करते तो कोई और भी नहीं करेगा। सेल्स सिर्फ शब्दों का खेल नहीं है। यह ट्रस्ट का खेल है और ट्रस्ट बिल्ड होता है। कंसिस्टेंसी [संगीत] से, सच्चाई से और जेन्युइन इंटेंट से। जब सामने वाले को लगेगा कि तुम सिर्फ पैसा कमाने नहीं बल्कि उसकी मदद करने आए हो। तभी वह तुमसे
खरीदेगा। इसीलिए याद रखो सेल्स सीखना ऑप्शनल नहीं है। यह एक ऐसी स्किल है जो तुम्हें हर फील्ड में जीत दिला सकती है। अगर तुम सेल्स सीख गए तो तुम कुछ भी बेच सकते हो। प्रोडक्ट, सर्विस, आइडिया। यहां तक कि खुद को भी और जिस दिन तुमने यह स्किल मास्टर कर ली उस दिन पैसा कमाना मुश्किल नहीं रहेगा बल्कि एक प्रोसेस बन जाएगा। [संगीत] स्किल तीन प्रॉब्लम सॉल्विंग। तीसरी स्किल। प्रॉब्लम सॉल्विंग हर बड़ा बिजनेस एक प्रॉब्लम सॉल्व करता है। यह एक सिंपल लाइन लगती है। लेकिन अगर तुम इसे गहराई से समझ गए तो तुम्हें कभी भी
पैसे की कमी नहीं होगी। दुनिया में जितने भी बड़े-बड़े बिजनेस हैं उन सब की शुरुआत एक प्रॉब्लम से हुई है। लोगों को पेमेंट करने में दिक्कत थी तो Paytm आया और उसने उसे आसान बना दिया। लोगों को शॉपिंग करने में टाइम लगता था। तो Amazon आया और उसने उसे आसान बना दिया। अब सोचो इन दोनों ने क्या किया? उन्होंने कोई जादू नहीं किया। उन्होंने सिर्फ एक प्रॉब्लम को पहचाना और उसका सॉल्यूशन दिया और वही सॉल्यूशन आज उन्हें अरबों का बिजनेस बना चुका है। अब सवाल यह है तुम कौन सी प्रॉब्लम सॉल्व कर रहे हो? यह
सवाल सिंपल है। लेकिन इसका जवाब ही तुम्हारा फ्यूचर डिसाइड करता है। ज्यादातर लोग क्या करते हैं? वो प्रोडक्ट बनाने में लग जाते हैं। आईडिया के पीछे भागते हैं। लेकिन वो यह नहीं सोचते कि [संगीत] क्या यह किसी की असली प्रॉब्लम सॉल्व करता है या नहीं। अगर तुम्हारा काम किसी की प्रॉब्लम सॉल्व नहीं करता तो वह कभी भी लंबे समय तक नहीं चलेगा। लेकिन अगर करता है तो उसे कोई रोक नहीं सकता। क्योंकि प्रॉब्लम जितनी बड़ी होगी सॉल्यूशन की वैल्यू उतनी ज्यादा होगी और जहां वैल्यू ज्यादा होती है वहीं पैसा आता है। इसलिए हमेशा प्रोडक्ट से
पहले प्रॉब्लम को समझो। लोग किस चीज से परेशान हैं? कहां टाइम वेस्ट हो रहा है? कहां एफर्ट ज्यादा लग रहा है? कहां कंफ्यूजन है? जब तुम यह सब ऑब्जर्व करोगे। तभी तुम्हें रियल ओपोरर्चुनिटीज दिखेंगी। प्रॉब्लम सॉल्विंग का मतलब सिर्फ सॉल्यूशन देना नहीं होता। इसका मतलब है प्रॉब्लम को सही तरीके से समझना। कई बार लोग सरफेस प्रॉब्लम देखते हैं। लेकिन असली प्रॉब्लम कहीं और होती है। अगर तुम रूट प्रॉब्लम पकड़ लेते हो तो तुम्हारा सॉल्यूशन पावरफुल बन जाता है। अब एक गहरी बात सुनो। अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा था इफ आई हैड वन आवर टू सॉल्व अ
प्रॉब्लम। आई स्पेंड 55 मिनट्स थिंकिंग अबाउट दी प्रॉब्लम एंड 5 मिनट्स थिंकिंग अबाउट सॉलशंस। [संगीत] मतलब सॉल्यूशन से ज्यादा जरूरी है प्रॉब्लम को समझना क्योंकि सही प्रॉब्लम समझ आ गई तो सॉल्यूशन अपने आप क्लियर हो जाता है। यही माइंडसेट तुम्हें अलग बनाता है। तुम हर चीज को एक प्रॉब्लम की तरह देखना शुरू करोगे और ऑटोमेटिकली सॉलशंस ढूंढने लगोगे और यही स्किल तुम्हें रेयर बनाती है। अब इस लाइन को हमेशा याद रखना। अगर तुम्हारा काम किसी की प्रॉब्लम सॉल्व करता है तो पैसा खुद आएगा। तुम्हें पैसा चस करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पैसा तुम्हारे पीछे आएगा
क्योंकि दुनिया उसी को रिवॉर्ड करती है जो दूसरों की जिंदगी आसान बनाता है। इसलिए प्रॉब्लम सॉल्वर बनो। आइडिया चसर मत बनो। जब तुम प्रॉब्लम सॉल्व करना सीख जाओगे तो तुम किसी भी फील्ड में जाओ। तुम्हें ओपोरर्चुनिटी दिखेगी। और जहां ओपोरर्चुनिटी है वहीं ग्रोथ है वहीं पैसा है। स्किल चार कंसिस्टेंसी एंड डिसिप्लिन। चौथी स्किल कंसिस्टेंसी एंड [संगीत] डिसिप्लिन। ज्यादातर लोग टैलेंट से नहीं हारते। वो हारते हैं कंसिस्टेंसी की कमी से। लोग शुरुआत तो बहुत जोश के साथ करते हैं। पहले दिन एनर्जी हाई, दूसरे दिन मोटिवेशन हाई। लेकिन जैसे ही चीजें मुश्किल होने लगती हैं, [संगीत] जैसे
ही रिजल्ट्स तुरंत नहीं आते, वैसे ही उनका फोकस टूट जाता है। यही सबसे बड़ी गलती है। क्योंकि सक्सेस किसी एक दिन की मेहनत से नहीं आती। वो रोज-रोज के छोटे-छोटे एक्शन से बनती है। तुम 10 दिन काम करके 20 दिन आराम करोगे तो कुछ नहीं होने वाला। बिजनेस हो, [संगीत] स्किल हो या पैसा कमाना। यह सब कंसिस्टेंसी का खेल है। हर दिन थोड़ा-थोड़ा आगे बढ़ना। हर दिन खुद को इंप्रूव करना। हर दिन काम करना चाहे मन करे या ना करे यही डिसिप्लिन है और डिसिप्लिन का मतलब होता है जब मोटिवेशन खत्म हो जाए तब भी
काम करना क्योंकि मोटिवेशन टेंपरेरी होता है लेकिन डिसिप्लिन परमानेंट होता है। लोग अक्सर मोटिवेशन के पीछे भागते हैं। लेकिन असली गेम डिसिप्लिन का है। जब तुम बिना मूड के भी काम करना सीख जाते हो तब तुम अनस्टोपेबल बन जाते हो। कंसिस्टेंसी बोरिंग होती है। कोई एक्साइटमेंट नहीं होता। कोई इंस्टेंट रिजल्ट नहीं मिलता। लेकिन यही बोरिंग प्रोसेस एक दिन एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी रिजल्ट देता है। यही वो चीज है जो विनर्स और लूजर्स को अलग करती है। अब एक पावरफुल बात सुनो। एलॉन मस्क ने कहा था वर्क लाइक हेल आई मीन यू जस्ट हैव टू पुट इन अ
सी टू एक्स आवर वीक्स ए्री वीक। मतलब अगर तुम्हें एवरेज रिजल्ट नहीं चाहिए [संगीत] तो तुम्हें एवरेज एफर्ट भी नहीं देना पड़ेगा। तुम्हें लगातार काम करना पड़ेगा। हर दिन हर हाल में क्योंकि दुनिया में कंपटीशन बहुत ज्यादा है और जो कंसिस्टेंट रहेगा वही आगे निकलेगा। [संगीत] डिसिप्लिन तुम्हें कंट्रोल देता है। तुम्हारे टाइम पर, तुम्हारी हैबिट्स पर, तुम्हारे एक्शंस पर। और जब तुम्हारे एकशंस कंट्रोल में होते हैं तो तुम्हारा फ्यूचर भी कंट्रोल में होता है। इसलिए याद रखो कंसिस्टेंसी स्लो हो सकती है लेकिन पावरफुल होती है और डिसिप्लिन कठिन हो सकता है लेकिन वही तुम्हें उस
लेवल तक पहुंचाता है जहां बहुत कम लोग पहुंच पाते हैं। अगर तुमने यह स्किल मास्टर कर ली तो तुम्हें कोई नहीं रोक सकता क्योंकि टैलेंट तुम्हें शुरुआत दिला सकता है। लेकिन कंसिस्टेंसी ही तुम्हें फिनिश लाइन तक पहुंचाती है। स्किल पांचप्टेबिलिटी। दुनिया हर दिन बदल रही है और यह सिर्फ एक लाइन नहीं है। यह एक सच्चाई है जिसे अगर तुमने नजरअंदाज किया तो तुम बहुत पीछे छूट जाओगे। आज जो काम कर रहा है, कल वो काम नहीं करेगा। आज जो स्किल वैल्यूुएबल है, कल उसकी डिमांड खत्म हो सकती है। टेक्नोलॉजी बदल रही है। मार्केट बदल रहा
है। कस्टमर की सोच बदल रही है। सब कुछ तेजी से इवॉल्व हो रहा है। और इस तेजी से बदलती दुनिया में सिर्फ वही लोग टिक पाते हैं जो खुद को बदलना जानते हैं। जो अपनी सोच को अपडेट करते हैं। जो नई चीजें सीखते हैं। जो नए ट्रेंड्स को समझते हैं। अगर तुम वही करते रहोगे जो तुम आज कर रहे हो। तो कुछ समय बाद तुम इररेलेवेंट हो जाओगे। आज एआई आ गया है। कल उससे भी एडवांस टूल्स आएंगे। [संगीत] जो लोग सीखेंगे वो आगे बढ़ेंगे। जो इग्नोर करेंगे वो पीछे छूट जाएंगे। इतिहास इसका सबसे बड़ा
प्रूफ है। Netflix पहले डीवीडी रेंटल बिजनेस में था। लेकिन जैसे ही उसने बदलाव को समझा, उसने खुद को स्ट्रीमिंग प्लेटफार्म में बदल दिया और आज वो इंडस्ट्री लीडर है। वहीं ब्लॉकबस्टर ने बदलाव को इग्नोर किया और आज वो मार्केट से गायब हो चुका है। डिफरेंस सिर्फ एक था। अप्टेबिलिटी। एक ने बदलाव को अपनाया। दूसरे ने उसे नजरअंदाज किया और यही फर्क जीत और हार का कारण बना। अब यह तुम्हारे ऊपर है। तुम किस साइड खड़े होना चाहते हो? अप्टेबिलिटी का मतलब सिर्फ चेंज एक्सेप्ट करना नहीं होता। इसका मतलब होता है एक्टिवली सीखना। खुद को अपग्रेड
करना और अपने आप को फ्यूचर के लिए तैयार रखना। तुम्हें हर दिन यह सोचना होगा कि आज मैं क्या नया सीख सकता हूं। कौन सी स्किल मुझे आगे ले जाएगी। कौन सा ट्रेंड आने वाला है? जब तुम यह माइंडसेट डेवलप कर लेते हो, तो तुम कभी आउटडेटेड नहीं होते। तुम हर सिचुएशन में खुद को एडजस्ट कर लेते हो और यही तुम्हें लॉन्ग टर्म सक्सेस देता है। अब एक बात हमेशा याद रखना चार्ल्स डार्विन ने कहा था इट इज नॉट द स्ट्रांगेस्ट ऑफ द स्पीशीज दैट सर्वाइव्स नॉर द मोस्ट इंटेलिजेंट बट द वन मोस्ट रिस्पांसिव टू
चेंज। [संगीत] मतलब ना सबसे ताकतवर टिकता है ना सबसे इंटेलिजेंट। टिकता वही है जो बदलना जानता है। इसलिए अगर तुम आगे बढ़ना चाहते हो तो चेंज से मत डरो। उसे अपनाओ। सीखते रहो। ग्रो करते रहो और खुद को हर दिन बेटर बनाते रहो। क्योंकि इस दुनिया में जो रुक गया वो खत्म हो गया। और जो सीखता रहा वो हमेशा आगे रहा। तो दोस्तों अब तुम खुद सोचो क्या तुम्हें अभी भी लगता है कि पैसा कमाने के लिए सिर्फ लक चाहिए या फिर अब समझ आ गया है कि असली गेम स्किल्स का है। यह पांच स्किल्स
कम्युनिकेशन, सेल्स, प्रॉब्लम सॉल्विंग, [संगीत] कंसिस्टेंसी और अप्टेबिलिटी। यह सिर्फ वर्ड्स नहीं है। यह वो फाउंडेशन है जिस पर हर बड़ा बिजनेस खड़ा होता है। अगर यह स्किल्स तुम्हारे अंदर हैं तो तुम किसी भी फील्ड में जाओ। तुम्हें कोई नहीं रोक सकता। लेकिन अगर यह स्किल्स नहीं है तो चाहे तुम्हारे पास कितना भी पैसा हो, कितनी भी रिसोर्सेज हो, रिजल्ट वही रहेगा। स्लो ग्रोथ, कंफ्यूजन और फ्रस्ट्रेशन। इसीलिए आज से एक डिसीजन लो कि तुम शॉर्टकट्स के पीछे नहीं भागोगे। तुम स्किल्स बिल्ड करोगे। हर दिन थोड़ा-थोड़ा इंप्रूव करोगे। हर दिन खुद को बेहतर बनाओगे। क्योंकि याद रखो
सक्सेस एक दिन में नहीं आती। लेकिन एक दिन जरूर आती हैं उन लोगों के पास जो रोज मेहनत करते हैं। अब चॉइस तुम्हारी है। भीड़ का हिस्सा बनना है या भीड़ से अलग निकलना है। अगर तुम अलग निकलना चाहते हो तो आज से एक्शन लेना शुरू करो। अगर वीडियो से कुछ भी वैल्यू मिली हो [संगीत] तो लाइक जरूर करना। कमेंट में बताओ तुम सबसे पहले कौन सी स्किल पर काम करने वाले हो और ऐसे ही रियल, प्रैक्टिकल और पावरफुल नॉलेज के लिए सब्सक्राइब करो। लेजेंड ऑफ फाइनेंस क्योंकि यहां हम सिर्फ बातें नहीं करते। [संगीत] हम
माइंडसेट बदलते हैं। याद रखो सपने देखने वाले बहुत होते हैं। लेकिन उन्हें पूरा करने वाले बहुत कम। तुम्हें कौन बनना है? यह फैसला आज ही करना होगा। मिलते हैं अगले वीडियो में। धन्यवाद। तो