कौन सी स्त्री जवानी में ही विधवा हो जाति है दोस्तों कहते हैं जोड़ियां ऊपर वाला ही बनाता है जिसके जैसे कर्म होते हैं उसके आधार पर ही उसे पत्नी पुत्र पिता भाई बहन रिश्तेदार और पड़ोसी मिलते हैं पूर्व में उसने जिसके साथ जैसा किया होता है वो अपना बदला लेने के लिए उसका संबंध हेतु रिश्तेदार बंता है यह कर्म की खेती है यहां हमें काटने को वही मिलता है जो हम बोलते हैं यदि किसी को स्त्री से दुख मिल रहा है या कोई स्त्री पति से दुखी है किसी का पुत्र निकम्मा है या कोई पिता
बच्चों को कष्ट देने वाला है ये हमारे जीवन में तभी घटित होता है जब हमारा कोई पूर्व का अपराध होता है हमने देखा है की किसी की जोड़ी विधाता ऐसी मिला देता है जो भी पूरे जीवन में एक दूसरे से कष्ट पाते हैं कभी उनमें बंटी नहीं है एक दूसरे को अपने शब्दों से अपने कर्मों से चोट पहुंचने रहते हैं पूरे जीवन भर दुख और घुटन में पड़े रहते हैं बहुत सी ऐसी घटनाएं देखने में आई है किसी स्त्री का पति उसे छोड़कर चला गया कोई स्त्री जवानी में ही विधवा हो जाति है किसी पुरुष
की स्त्री उसे छोड़कर चली जाति है या उसका देहांत हो जाता है बहुत से बच्चों के मां-बाप ही उन्हें अनाथ करके चले जाते हैं ये सब होता तो विधाता की मर्जी से है पर इसमें स्वयं के कर्मों का ही सहारा खेल होता है कहते हैं हमारे जीवन की अच्छी बुरी घटनाओं में हमारे इस जन्म के पूर्व के कर्म शामिल होते हैं अगर कोई निर्दोष होकर भी दुख का रहा है तो समझ लेना उसका कोई पूर्व का कर्म खराब है अगर कोई दोषी होकर दंड का रहा है तो वो इसी जन्म में किया अपराध का दंड
भोग रहा है भगवान ना करें किसी के साथ ऐसा हो की किसी बहन का पति उसे जीवन भर अकेला रहने को मजबूर कर जाए या किसी की स्त्रियों से जवानी में छोड़कर चली जाए भगवान ना करें की किसी के बच्चे बिन मां आप के जीवन चाहिए बहुत दुख होता है जब कोई अपना उसे आधार में ही छोड़ कर चला जाता है एक स्त्री का जीवन बिना पति के जीना कितना कठिन हो जाता है यह तो बेचारी वो बहन ही बता शक्ति है जिसका पति इस संसार से उसे छोड़कर चला गया है किसी के ना रहने
पर किसी का जीवन तो नहीं रुक जाता पर उसे उसकी ना होने की कमी बहुत खलती है जीवन में बहुत कुछ देखना पड़ता है बहुत कुछ झेलना पड़ता है जिसकी उसने कभी उम्मीद भी नहीं की होती है दोस्तों एक बार की बात है किसी राजा के राज्य में एक सैनिक नौकरी करता था उसे सैनिक के मां-बाप तो थे नहीं बच्चे भी नहीं थे एक सुंदर सी पत्नी थी वो अपनी पत्नी से बड़ा प्रेम करता था सैनिक जब जब छुट्टियां पर अपने घर आता था तो अपनी स्त्री के लिए देर साड़ी उपहार लेकर आता था उसकी
पत्नी भी उससे बहुत प्रेम करती थी एक दिन की बात जब सैनिक छुट्टी लेकर घर आया तो उसकी दोस्ती एक सेहत के नौजवान लड़की से हो गई सेठ के बेटे ने कहा मित्र बड़ा ना मानो तो मैं तुम्हें एक सुझाव डन तुम्हारे पास जो पैसा पड़ा है वो खाली यूं ही पड़ा है उसे किसी कम में क्यों नहीं लगती तुम तो हर समय ड्यूटी पर रहते हो तुम अपना पैसा मेरे साथ व्यापार में क्यों नहीं लगा देती व्यापार मैं करता रहूंगा और व्यापार से जो आए होगी हम दोनों से आपस में बांट लेंगे तुम अपनी
नौकरी भी करते रहोगे और आए भी डबल होती रहेगी सेठ के बेटे की दिमाग में वह सुझाव अच्छी तरह बैक गया इसलिए सैनिक ने उसके साथ व्यापार में 10 लाख रुपए लगा दिए सेठ के बेटे ने उसे फौजी से पैसे लेकर व्यापार में लगा दिए कुछ ही दोनों में उनका कारोबार चमक उठा खूब कमाई होने लगी दिन प्रतिदिन उनका कारोबार बढ़ता चला गया सैनिक तो बड़ी ईमानदारी से अपनी ड्यूटी कर रहा था चाट का बेटा कारोबार संभल रहा था जब कभी साहूकार ज्यादा का आना जाना सैनिक के घर पर होता राहत था इसी दौरान सैनिक
की स्त्री से उसकी भेंट हो गई सैनिक की पत्नी ने सोचा की मेरा पति तो मुझे समय नहीं देता है पर शुक्र ज्यादा तो रोज मेरे घर पर आता है क्यों इस अवसर का फायदा उठाया जाए यही सोच कर उसने सेठ के बेटे से मित्रता कर ली कहते हैं अब तो साहूकार ज्यादा रोजाना उसके घर पर आने जान लगा दिन प्रतिदिन उनके बीच प्रेम संबंध गहरा होता चला गया वही उनके लिए सबसे अधिक प्रिया होता है इस प्रकार दोस्तों उन दोनों की नजदीकियां बढ़नी चली गई एक दिन की बात साहूकार ज्यादा सैनिक के घर में
सोया हुआ था उसे दिन सैनिक को छुट्टी मिलती है और वो अपनी स्त्री को देर सारे उपहार लेकर घर आता है मां में अपनी पत्नी से मिलने की उमंग थी सोच रहा था की जब मैं अपनी स्त्री से मिलेगा तो वो मुझे देखकर एकदम खुश हो जाएगी मगर उसे क्या मालूम था की उसकी स्त्री किसी और को अपना दिल दे बैठी है सैनिक जब अपने घर आता है तो उसके घर के दरवाजे अंदर से लगे हुए थे सैनिक दरवाजा खटखटा हुआ आवाज लगता है पर उसे समय साहूकार ज्यादा उसकी स्त्री के साथ सोया हुआ था
अपनी पति की आवाज सुनकर पत्नी घबरा गई क्योंकि उसकी चोरी पकाने वाली थी सोने लगी यदि मेरे पति ने मुझे साहूकार ज्यादा के साथ देख लिया तो वह मुझे जरूर मार डालेगा यही सोच कर उसने साहूकार के बेटे को तो संदूक में छुपा दिया और समर कर घर का दरवाजा खोल उसे तो पता ही था की उसका पति द्वारा पर खड़ा है इसलिए वो द्वारा पर ही अपने पति की बाहों में लिपट गई वो सैनिक भी उससे मिलकर बहुत खुश हुआ वो अपने पति से सिर्फ दिखावटी प्रेम कर रही थी ताकि उसका ध्यान कहानी और
ना जाए वो दरवाजे से सीधे पति को छठ पर ले गई और वहीं पर चारपाई दाल दी भजन पानी कपड़े सब वहीं पर लाकर देती है अब तो वो दौड़ दौड़ कर पति का प्रिया कार्य करने में लगी थी सैनिक भी अपनी स्त्री के व्यवहार से बड़ा प्रश्न था सोच रहा था मेरी स्त्री मुझे कितना प्यार करती है जब से मैं आया हूं तब से मेरी सेवा में लगी हुई है मित्रों थोड़ी डर के बाद सैनिक को नींद ए जाति है वह उसे अच्छी तरह सलकर अपने आशिक साहूकार ज्यादा के पास जाति है जो काफी
डर से संदूक में बैंड था उसने उसे संदूक से निकाला और दोनों ने उसे सैनिक को करने का षड्यंत्र रैक लिया सैनिक गहरी नींद में सोया हुआ था इसलिए उसने पहले तो उसे रस्सी से बंद लिया उसके बाद तकिया से दम घट कर उसे मार डाला और उसके सब को जलाकर जंगल में फेक दिया दर्शन बंधु इधर साहूकार ज्यादा ने सोचा की अब तो सैनिक का सर पैसा मेरा ही हो गया अब मैं इस पैसे को लेकर प्रदेश चला जाता हूं वहीं रहकर व्यापार करूंगा यही सोचकर वो उसे स्त्री को बिना बताए वहां से चला
गया जब उसे स्त्री ने साहूकार का कोई आता पता नहीं पाया तो वो बहुत दुखी रहने लगे और एक दिन उसने नदी में कूद कर आत्महत्या कर ली साहूकार के रहा का जो काटा था अब वो भी निकाल चुका था यह देखकर साहूकार बड़ा खुश होता है की अब तो सर पैसा इस का हो गया इस पैसे में से किसी को एक फटी कौड़ी भी नहीं देनी है साहूकार ने बड़ी धूमधाम से अपना विवाह रचा लिया और आनंद की जिंदगी जीने लगा अब तो वो अपनी नई दुनिया में मगन था पिछली घटना को वो भूल
चुका था कुछ दिन बाद सेहत के घर में एक लड़का पैदा होता है अब तो साहूकार और भी ज्यादा खुश हुआ की भगवान की बड़ी दया है खूब सर पैसा मेरे पास है कारोबार भी अच्छा खास चल रहा है घर में अब एक बेटा भी ए गया है लेने वाला तो मा चुका था किसी बात की कोई चिंता नहीं थी साहूकार का लड़का धीरे-धीरे बड़ा होने लगा पढ़ने लिखने में काफी होशियार था शेख जी ने उसे खूब पटाया लिखिया जब वह बड़ा हो गया तो एक सुंदर सी लड़की से उसका विवाह करती है सेठ जी
ने सोचा क्या बेटा कारोबार संभल ही लगा मुझे किस बात की चिंता है कई तरह के सपना सेट की आंखों में चल रहे थे तब तक सेठ का वही लड़का बीमा पद जाता है जिसकी अभी कुछ दिन पहले ही शादी हुई थी उसे ऐसा असद रोग बन गया था की सेठ उसे लेकर काफी डॉक्टर के पास जाता कभी वेद के पास जाता कभी हकीम के पास जाता शेख जी ने उसे ठीक करने में एडी छोटी का जोर लगा दिया पर उसे किसी भी औषधि से कोई लाभ नहीं मिल रहा था जो कोई यहां बताता वही
ले जाता था पर परिणाम शून्य राहत बड़े-बड़े महंगे डॉक्टर को दिखा लिया पर किसी का उपचार उसे ठीक नहीं कर पाया उसकी तबीयत और भी ज्यादा बिगड़ी जा रही थी पैसा बर्बाद हो रहा था और बीमारी थकने का नाम नहीं ले रही थी उनका सर धन साड़ी संपत्ति बाईक कर बेटे के इलाज में ग गई अब तो डॉक्टर ने भी हाथ खड़े कर दिए थे डॉक्टर ने उसे लाल आज घोषित कर दिया डॉक्टर ने कहा अब हाथ पर पटकने से कुछ फायदा नहीं आपका बेटा अब बैक नहीं पाएगा दो-चार दिन ही इसकी जिंदगी में शेष
र गए हैं डॉक्टर का जवाब सुनकर सेठ बड़ा निरसा हुआ और होता चिल्लाता अपने बेटे को लेकर घर लोट आया रास्ते में उसे एक आदमी मिला उसने कहा सेठ जी क्या हुआ बड़े दुखी ग रहे हो शेख जी ने अपना दुख उसे आदमी से प्रकट किया कहा भैया हमारा ये एक ही बेटा है सोचा बुढ़ापे में सहारा बनेगा हमने इसका विवाह कर दिया शादी हुए अभी थोड़े ही दिन हुए हैं अचानक से ये बीमा पद गया इसके उपचार में हमने अपना सर धन खाट कर दिया है अपनी साड़ी संपत्ति भेज कर बेटे के इलाज में
लगा दी जिसने जहां बताया हमने इसका इलाज वही कराया पर इसे कहानी भी आराम ना लगा अब तो डॉक्टर ने भी माना कर दिया है की अब ये बचेगा नहीं हम तो बर्बाद हो गए धन भी चला गया और बेटा भी नहीं बचेगा मित्रों उसे आदमी ने कहा अरे सेठ जी दिल छोटा क्यों करते हो हमारे पड़ोस में एक भांजी रहते हैं बहुत ही सस्ती दवा देते हैं सिर्फ दो आने की दवा देते हैं उन्होंने ना जान कितने मर्दों को उठाकर खड़ा कर दिया है तुम भी एक बार उनकी दवा खिलाकर देखो शायद आराम ग
जाए मित्रों अब तो सेठ जी ने बिना समय गवई वेद जी से दुआ आने की दवाई ले ली सोचा शायद भगवान की कृपा हो जाए शेख जी ने वो पुड़िया जैसे ही अपने बेटे को खिलाई वो लड़का पुड़िया खाता ही मा गया अब तो शेख जी और सेठ की पुत्रवधू बुरी तरह से रन चिल्लाने लगी पूरा गांव जमा हो चुका था सब का रहे थे है सेठ के साथ बड़ा बड़ा हुआ सेठ की और बहू रानी की जवानी में ही कमर टूट गई सेठ ने अपनी करनी में कोई कसार नहीं छोड़ी थी अपनी साड़ी धन
दौलत बेटे के इलाज में लगा दी फिर भी भगवान ने उनका बेटा नहीं बचाया सारे लोग शोक माना रहे थे इस समय एक महात्मा जी वहां आते हैं महात्मा जी ने पूछा क्या हुआ किस लिए रोना धोना पड़ा है तब गांव वालों ने बताया महात्मा जी सेठ का इकलौता बेटा था सेठ ने अपनी साड़ी संपत्ति बेचकर उसका इलाज कराया फिर भी वो बच्चा नहीं अब महात्मा जी छठ को समझने के लिए पहुंच गई की है से रोना धोना छोड़ो ये दुनिया तो आनी जानी है आज नहीं कल तो यहां से जाना ही है फिर शौक
कैसा है तब सेठ बोला है महात्मा जी जिसका जवान बेटा मा जाए वो शौक नहीं करेगा तो क्या करेगा महात्मा जी बोले अरे सेठ जी आज तो तुम रो रहे हो पर उसे दिन तो तुम बहुत खुश हो रहे थे महात्मा जी के इतना कहते इस दिन जी दिन वो सैनिक मारा था और उसके पैसे प्रकार तुम बड़े खुशी हुए थे सोचा आप पैसे लौट नहीं पढ़ेंगे सेठ जी बोले हां महाराज 7 महीने उसके साथ बड़ा किया महात्मा जी ने फिर कहा और उसे दिन तो आप बहुत खुश हो रहे थे खूब मिठाइयां बन रही
थी क्षेत्र ने फिर पूछा किस दिन महात्मा जी बोले इस दिन जी दिन तुम्हारे घर बेटा पैदा होता है तो सभी खुश होते हैं मैं क्या अनोखा हुआ था महात्मा जी बोले उसे दिन भी तुम बहुत खुशी थी तुम्हारे पर खुशी में जमीन पर नहीं पढ़ रहे थे शेर ने पूछा किस दिन जवाब दिया इस दिन जब बेटे को ब्याह कर ले थे शेर ने कहा महाराज बेटे की शादी में तो हर पिता खुश होता है मैं भी हुआ था इसमें कौन सी बड़ी बात है महात्मा जी बोले जब इतनी बार खुशी मिल चुकी है
तो जरा सी बात के लिए क्यों रोटी हो शेर ने कहा महाराज ये जरा सी बात आपके लिए होगी मेरे लिए जरा सी बात नहीं है मेरा जवान बेटा गया है महात्मा जी बोले सेठ जी आपका जवान बेटा वही सैनिक है जिसको तुमने अपने हाथों से मारा था वही अपना हिसाब चुकाने के लिए तुम्हारे घर बेटा बनकर आया उसकी पढ़ाई लिखी में उसके खेलने खाने में उसके विवाह में उसके इलाज में जो जो पैसे खर्च हुए वह सब उसने अपना पिछले जन्म का हिसाब पूरा किया कुछ डॉक्टर को दिवा दिया और कुछ स्वयं खर्च कर
लिए दो आने पैसे बच्चे थे वह भी वेद जी को दिवा दिए अब कर्मों का लेना देना पूरा हो चुका है सेठ जी ने कहा चलो हमारे साथ जो हुआ सो हुआ लेकिन वो जवान बहुरानी घर में रो रही है उसने इसका क्या बिगड़ा था जो उसे भी धोखा देकर विधवा बनाकर चला गया महात्मा जी बोले यह वही स्त्री है जिसने तुम्हारे साथ मिलकर अपने पति को मारा था जिसके साथ तुम्हारा अभ्यास रिश्ता था इसने अपने पति को धोखा देकर तुम्हारे साथ प्रेम किया था आज वो इसे जवानी में धोखा देकर चला गया हिसाब बराबर
हो गया तुम दोनों ने जो उसकी हत्या की थी उसका हिसाब तुम्हें अगले जनों में चुकाना पड़ेगा जो स्त्री अपने पति के साथ धोखा करती है और पुरुष के साथ संबंध रखती है उसे अगले जन्म में जवानी में ही पति से विजय हो जाता है दूसरी बात जो स्त्री अपने पूर्व जन्म के पति के साथ अत्याचार करती है उसे जान से मारती है उसे छोड़कर चली जाति है पति से पहले सब कम करती है उसका भी पति के साथ संबंध विच्छेद हो जाता है जो स्त्री अपने पति को सुख से वंचित रखती है उसको भी
अपने पति का वियोग सी पड़ता है ठीक यही हाल पुरुषों का भी होता है जो पुरुष अपनी स्त्री को दुख देता है उसे धोखा देता है उसे पति के सुख से वंचित रखना है पत्नी को छोड़कर परिस्तरी से संबंध रखना है वो भी जवानी में विदुर हो जाता है जीवन भर उसे स्त्री का सानिध्य प्राप्त नहीं होता मित्रों ये तो कर्मों का लेख जोखा है जैसा किया है वैसा भोगना ही पड़ेगा समझ चुका था की उसे उसकी करनी का फल मिल चुका है दोस्तों जीवन में किसी के साथ कभी धोखा नहीं करना चाहिए इसलिए उसे