एक बार जरा कंफर्म कीजिए कि क्या मेरी आवाज आप लोगों को सुनाई दे रही है या फिर नहीं दे रही। कन्फर्म कीजिए कि क्या मेरी आवाज आप? हां ऐसा लगता है कि मेरी आवाज आप लोगों को क्लियरली आ रही है। लोगों को सुनाई दे। क्या ही प्रॉब्लम है ये। चलिए एक बार जरा आप लोग कंफर्म कर दीजिए तब भी चलिए तो शुरू करते हैं भाई ऑल क्लियर चलिए नमस्कार बहुत-बहुत स्वागत है आप सभी का अनअकडमी में। मेरा नाम है अतुल जैन और जैसा कि आप लोग जानते हैं रोज सुबह 9:00 बजे आपके सामने लेके आता
हूं आज के दिन का द हिंदू। तो भाई आज है 2 मार्च नए महीने की आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं। हालांकि बड़े अच्छे नोट पर शुरू हुआ नहीं ये महीना। दुनिया में इतने सारे युद्ध चल रहे हैं और मैं बार-बार कहता हूं कि यार मतलब एक समय पे इतने युद्ध काफी हैं जितने चल रहे हैं और नए युद्धों की शुरुआत नहीं होनी चाहिए। लेकिन एक बहुत बड़ा मेरे ख्याल से पिछले कुछ दशकों का सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट युद्ध जो है मतलब अब वो कितना बड़ा होगा, कितना आगे बढ़ेगा, कितना विस्तार लेगा ये तो हमको आने वाले
दिनों में पता चलेगा। लेकिन स्ट्रेटेजिकली रणनीतिक तौर पर ये निश्चित तौर पे पिछले मेरे ख्याल से तीन-चार दशक का सबसे बड़ा युद्ध है जो अब चल रहा है इस समय अमेरिका और ईरान के बीच में अमेरिका ही है इजराइल तो ठीक है मतलब उसको अमेरिका ही कह सकते हैं अमेरिका और ईरान के बीच में ये जो जंग शुरू हो गई है और इसमें जो हुआ है तो आज की हमारी क्लास जो है उसका कम से कम आधा हिस्सा जो है हम इस युद्ध पर बिताएंगे इस युद्ध के बारे में बात करेंगे इसके बारे में चर्चा
करेंगे और इसमें मैं एकदम स्पष्ट कर दूं पहले ही क्लास की शुरुआत में ही कि मेरी नजर में यह युद्ध जो है पूरी तरह से दुनिया में जितने भी अंतरराष्ट्रीय कानून है उन सबका उल्लंघन है। ये मैं पहले ही क्लियर कर दूं ताकि इसको कोई लेके गलतफहमी ना रह जाए। इसको लेके कोई डाउट ना रह जाए किसी के दिमाग में कि दुनिया में जितने अंतरराष्ट्रीय कानून पॉसिबल हैं उन सबका उल्लंघन है यह युद्ध और यह युद्ध ये स्थापित करता है कि अमेरिका जो है अब वो अंतरराष्ट्रीय कानूनों का मजाक उड़ाने पर उतर आया है कि
बेसिकली अंतरराष्ट्रीय कानून जो है उनका कोई मतलब नहीं है। आपकी जिस देश से असहमति है आप उस देश पर आक्रमण करेंगे। वहां के राष्ट्रपति को उठा के ले आएंगे जैसा हमने वेनेजुएला में देखा या फिर आप उस देश पर आक्रमण करेंगे और वहां के सर्वोच्च नेता की हत्या कर देंगे जैसा हमने अब ईरान में देखा है। ठीक है? चलिए तो चर्चा करेंगे इस पर। इसके बारे में बात करेंगे। पहले आज का अखबार देख लेते हैं। 2 मार्च है आज। पहले आज का अखबार देख लेते हैं। आज की आधी से ज्यादा क्लास इसी मामले पर होगी
और बचे हुए क्लास में हम चार आर्टिकल्स हैं आज केवल। एक बड़ा आर्टिकल ये है जो तीन चार आर्टिकल के बराबर है और उसके बाद छोटे-छोटे दो-तीन आर्टिकल्स और करेंगे। तो ईरान के युद्ध के बारे में आपको बता चुका हूं मैं। बहुत ज्यादा दुनिया भर में समस्या आ गई है। आप जानते ही हो। दुनिया के अलग-अलग शहरों में बमबारी हो रही है। लोग फंस गए हैं। एयरपोर्ट बंद हो गए हैं। ठिकाने बंद हो गए हैं। लोगों का आना जाना बंद हो गया है। वगैरह वगैरह ये सारी चीजें इसमें भारत का क्या रवैया है? एक बार
हम उस पर भी चर्चा करेंगे। और क्यों मुझे लगता है कि भारत जो है वो एक जिसको हम कहते हैं ना एक एक चीज होती थी जो मनमोहन सिंह के टाइम में कही जाती थी पॉलिसी पैरालिसिस। मुझे ऐसा लगता है कि भारत की विदेश नीति एक पैरालिसिस में है। एक पॉलिसी पैरालिसिस में है। हम इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय इवेंट्स पर कोई रिएक्शन तक नहीं दे पाते दो-दो दिन तक। तो इसके बारे में बात करूंगा। भारत की जो विदेश नीति है यहां पर हम जो कर रहे हैं इस पूरे मामले में इसको इसको इसके बारे में भी
एक बार बात करने की कोशिश करेंगे। चलिए दो बड़ी घटनाएं हुई है विस्फोटों की। एक नागपुर में और एक आपके काकीनाडा जिले में आंध्र प्रदेश के। एक बार दोबारा यह मामला सेंटर में आ गया है केंद्र में आ गया है चर्चा के कि यार हमारे जो ये खतरनाक उद्योग है द डेंजरस इंडस्ट्रीज जो आपके विस्फोटक पदार्थों के उद्योग उद्योग धंधे हैं उनकी सुरक्षा कैसे मैनेज की जा रही है ये अपने आप में दोबारा एक बार चर्चा में आ गया है। कुल मिला के 38 लोगों की इनमें मौत हुई है दो अलग-अलग घटनाओं में। इनके बारे
में आपको बताऊंगा। ये सब राजनैतिक खबरें हैं। हां ये काकीनाडा वाली घटना है। वो आपकी नागपुर वाली घटना थी महाराष्ट्र में। हां जी और ये सब चलिए अब अरविंद केजरीवाल हर जगह भाषण दे रहे हैं कि हम बहुत अच्छे लोग हैं। वो चल रहा है। हां इजराइल ईरान को लेकर भारत सरकार ने भी एक एडवाइज़री जारी किया है राज्यों को कि भाई ज्यादा विरोध प्रदर्शन वगैरह मत होने दीजिए। नजर रखिए क्या हो रहा है क्या नहीं। श्री रंगराजजन भारत के आरबीआई के पहले आरबीआई के जो है गवर्नर हुआ करते थे। 12वें वित्त आयोग के भी
चेयरमैन थे। उन्होंने 16वें वित्त आयोग के बारे में बात की है कि 16वें वित्त आयोग की जो रिपोर्ट आई है उसमें क्या खास बातें हैं? क्या समस्याएं हैं उनके बारे में बात की है। उसको जल्दी से आपको बताने की कोशिश करेंगे। इसके अलावा एक यहां पर एक आर्टिकल आया है संतोष महलोत्रा और ए सिंह का। ये बताते हैं कि स्किल इंडिया कि भारत में जो कौशल विकास हम करना चाहते हैं उस कौशल विकास में क्या-क्या चुनौतियां आ रही है और एक बड़ा इंटरेस्टिंग मॉडल ये सजेस्ट करते हैं। तो ये बड़ी अच्छी बात है। मुझे ऐसे
आर्टिकल बहुत अच्छे लगते हैं जो खाली शिकायत नहीं करते। कोई समाधान भी बताते हैं। मुझे और आई लव दीज़ आर्टिकल्स। तो ये आर्टिकल ऐसा है ये भारत में जो स्किल डेवलपमेंट में जो चैलेंज आ रहा है उसका एक बड़ा इंटरेस्टिंग समाधान बनाता है बताता है एक मार्केट प्लेस बनाने का वो आपको समझाऊंगा आपको समझ में आ जाएगा बहुत ही सिंपल सी बात है तो बड़ा इंटरेस्टिंग समाधान ये हमको बताता है अब यार ये यूजीसी गाइडलाइंस पर आर्टिकल अब नहीं पढ़ेंगे बीसीयों आर्टिकल पढ़ चुके हैं यार यूजीसी गाइडलाइंस पर अब कब तक पढ़ते रहेंगे वही सेम
चीज पे लिखे जा रहे हैं हिंदू वाले भी यार हां जी और क्या है बाकी तो ठीक है चल ही रहा है कुछ ऐसा है नहीं आज क्योंकि आज हमें हमारे पास बहुत स्कोप ईरान ही छाया हुआ है। हर जगह प्रोटेस्ट प्रोटेस्ट चल रहे हैं। हर जगह ईरान छाया हुआ है। आयातला खमेनी जिनकी हत्या कर दी है। मैं हत्या के अलावा कोई और शब्द यूज़ नहीं करूंगा इसमें। आयात अल्लाह अली खैनी जिनकी हत्या कर दी है अमेरिका ने। उनके ऊपर एक फीचर पूरा दिया है इन्होंने कि भाई कौन थे, क्या करते थे? क्या इनकी खास
बात थी? और कल भाई मतलब अद्भुत मैं संजू सैमसन का बहुत वर्षों से बड़ा प्रशंसक रहा हूं। और है तो ना कोई प्लेयर आपको बड़ा अच्छा लगता है। आपको लगता है कि यार यह क्यों नहीं खेल रहा है यार? ये अच्छा बैटिंग क्यों नहीं कर रहा है? आपने देखा डोमेस्टिक में बहुत अच्छा खेलता है। आप फैन हो उसके और जब भी इंटरनेशनल मौका मिलता है वो उसको खराब कर देता था। लेकिन कल संजू सैमसन ने भाई जो इनिंग्स खेली है वो वर्षों तक याद रखी जाएगी। संकट में था भारत। करीब 200 रन चस करने थे।
अकेले ओपनिंग में आया अंत तक जीता कर गया। ये जिम्मेदारी होती है। बहुत ही बेहतरीन इनिंग्स और कल इंडिया जीत गया फाइनली। तो अब हम सेमीफाइनल में हैं। मुंबई में सेमीफाइनल है। तो भाई देखिए क्या होता है इंग्लैंड के साथ। चलिए साहब तो शुरू करते हैं। 2 मार्च है आज 301वां। 301वां कहना चाहिए कि 300 पहला पता नहीं। एनीवे यह नहीं पता हमको क्या कहना चाहिए। लेकिन 300 फर्स्ट चलिए 301वां हमारा एपिसोड है आज और अगर हम वर्ष के दिनों की बात करें तो आज इस साल के 61 दिन खत्म हो गए हैं और अब
आपके पास 304 दिन बचे हैं। 61 दिनों का मतलब यह है बेटा कि इस वर्ष का 1/6 हिस्सा खत्म हो चुका है। ये याद रखिएगा। 61 दिन का मतलब यह है कि 1/6 साल खत्म हो गया है। साल के छह बराबर टुकड़े करो। एक टुकड़ा खत्म हो गया है। तो इस साल में आपको जितनी पढ़ाई करनी थी उसके भी अगर आप छह बराबर टुकड़े करें। अगर उनमें से एक टुकड़ा आपका खत्म हो गया है तो वेल एंड गुड। कांग्रेचुलेशंस। बहुत-बहुत बधाइयां आपको। अगर नहीं हुआ है तो बड़े संकट में हैं आप। तो बड़ी दिक्कत में
हैं आप। शुरू से ही बैकलॉक कर लोगे तो बहुत दिक्कत आएगी। मैं आपको बार-बार कहता हूं हमारे भारत में क्या होता है? वैसे भी साल का जो सेकंड हाफ होता है वो त्यौहारों से भरा हुआ होता है। तो कोशिश ये कीजिए कि पहले हाफ में ज्यादा तैयारी पढ़ाई वगैरह आप करके रखें। फिर दशहरा, दिवाली, छठ, पूजा ये सब त्यौहार वगैरह इतने सारे एक साथ आ जाते हैं कि फिर थोड़ा माहौल कम बन पाता है। तो कोशिश ये कीजिए कि पहले हाफ को हैवी रखें आप पढ़ाई में। ये जरूरी है। ये मेरा रिक्वेस्ट है। बाकी आपकी
मर्जी है साहब। 82 दिन रह गए हैं हमारे प्रीलिम्स वाले बच्चों के पास। चलिए आज सीधे हमारी चर्चा की शुरुआत करते हैं और आज की पहली खबर है ईरान। बस एक शब्द है ईरान। तो यार ईरान का पश्चिमी देशों यानी कि इजराइल हो गया या फिर अमेरिका हो गया उनके साथ विवाद तो काफी टाइम से चल रहा था। ये हमको पता ही है। मतलब आप जैसे भी देखोगे जब से इजराइल और हमास के बीच में भी युद्ध शुरू हुआ था। तो हमास के पीछे भी ईरान ही था। मतलब हमास को भी जो शक्ति प्रदान करता
था। फंडिंग कह लो, हथियार कह लो, समर्थन कह लो, वो ईरान प्रदान करता था। हिजबुल्ला को भी ईरान समर्थन प्रदान करता था। खोती विद्रोही जो थे यमन में उनको भी ईरान समर्थन प्रदान करता था। तो 2023 से इस बात की संभावना बढ़ गई थी कि किसी ना किसी प्रकार से अमेरिका और ईरान के बीच जो एक विवाद है, वो आगे बढ़ सकता है। ऐसा माना गया। हमास के साथ जो युद्ध चल रहा था उसी बीच में हमने देखा कि इजराइल और हमास के युद्ध में हमने देखा कि बीच में ईरान ने माफ़ कीजिएगा इजराइल ने
कुछ दिनों के लिए 101 दिन के लिए ईरान पर हमला किया था। ईरान और इजराइल में थोड़ा बहुत आपस में मिसाइल मिसाइल यहां वहां एक दूसरी जगह पे दागे गए थे। लेकिन वो मामला पूरा कुल मिला के रुक गया था। आज से कुछ महीने पहले ईरान में वहां के लोग सड़कों पर उतर आए थे। ये आपको मैंने बताया था, पढ़ाया था इसी क्लास में कि ईरान में वहां की जो आवाम है, वहां की जो जनता है, सड़कों पर उतर आई थी और वो ये कहने लगी थी कि ईरान के ये जो सर्वोच्च नेता हैं अयातुल्लाह
अली खमे इनके शासन से वो तंग आ चुके हैं। उन्होंने आर्थिक शिकायतें करी कि हम बहुत हमारी आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो गई है और अयातुल्लाह अली खमे को पद से हटाया जाए। ठीक है? ये बात वो करके प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए। इन प्रदर्शनों को अमेरिका और इजराइल ने अपना खुला समर्थन दिया। आपको मैंने बताया था डॉनल्ड ट्रंप खुद बार-बार कह रहे थे कि ईरान वालों तुम संघर्ष करो। हम तुम्हारे साथ हैं। वो ये भी कह रहे थे कि बस हम आ ही रहे हैं। तुम्हारी मदद करने बस आने ही वाले हैं। इजराइल की
खुफिया एजेंसी मोसाद ने तो यहां तक कह दिया था कि ईरान वाले जो है वो सड़कों पर निकलें और इस संघर्ष का हिस्सा बने। मोसाद उनकी ग्राउंड पे हेल्प करेगा। यानी कि वो साफ कह रहे थे कि हम हम इसमें मदद करने वाले हैं आपकी। ईरान सरकार ने काफी सारे विद्रोहियों को पकड़ा। उनको फांसी देने का फैसला किया। लेकिन अमेरिका ने तब ये कहा कि अगर आपने एक भी विद्रोही को फांसी दी तो हम आप पर आक्रमण कर देंगे। तो उसके बाद फिर ईरान ने उनको फांसी नहीं दी। किसी को फांसी इस मामले में नहीं
दी गई। उसके बाद बाद क्या हुआ? कुछ समय तक दोनों पक्षों के जो है भावनाएं थोड़ी सी नीचे गई और दोनों पक्षों में बातचीत शुरू हुई। अब एक बहुत बड़ी हैरानी की बात ये है कि दोनों पक्षों में बातचीत शुरू हुई। ओमान नाम का एक आपका खाड़ी देश है। ओमान इन दोनों पक्षों की मध्यस्थता करा रहा था। ओमान की मध्यस्थता में ईरान और अमेरिका और इजराइल के बीच में बातचीत चल रही थी। एज लेट एस फ्राइडे अभी शुक्रवार की शाम को ओमान का जो मध्यस्थ था उसकी तरफ से बयान आया है कि बातचीत में ठीक-ठाक
तरक्की हो रही है और हमको जल्दी ही समझौता हो जाने की उम्मीद है। सोचिए फ्राइडे आज क्या तारीख है? फ्राइडे को क्या तारीख थी? फ्राइडे वाज़ 27 तारीख। 27 तारीख। फ्राइडे 27 तारीख को ये ये जो है ये न्यूज़ में आया था। आप अगर 27 तारीख के न्यूज़ देखेंगे इंटरनेशनल न्यूज़ तो आपको यह दिखाई देगा कि ओमान ने कहा कि बातचीत चल रही है और हम उसमें अच्छी तरक्की हो रही है। बढ़िया प्रगति हो रही है। हम इसमें जल्दी ही ब्रेक थ्रू हासिल कर लेंगे। जल्दी ही डील हो जाएगी। शनिवार की सुबह मैंने आपको क्लास
कराई। आपको याद होगा। मेरी क्लास खत्म होने के कुछ समय बाद ही न्यूज़ आनी शुरू हो गई कि इजराइल ने जो है ईरान पे मिसाइलों से हमला शुरू कर दिया है। और हमला मतलब हमला ऐसा नहीं कि कहीं आपने सीमावर्ती क्षेत्रों पे कुछ आतंकवादी ठिकानों पर हमला किया। हमला इन्होंने कहां किया? हमला इन्होंने सीधे तेहरान के जो मेन गवर्नमेंट बिल्डिंग्स हैं उन पर हमला शुरू किया। यानी कि ये पहले दिन से पहले पहले मोमेंट से क्लियर था कि निशाना आया अली खमेनी थे। अयात्ल्ला अली खमेनी जो हैं यह भाई यह ईरान के सर्वोच्च नेता हैं।
थे मतलब ईरान के सर्वोच्च नेता थे और 86 वर्ष के थे। पिछले 37 सालों से ईरान में इनका शासन था। इस बात को समझिए कि ईरान में एक निर्वाचित राष्ट्रपति होता है, निर्वाचित सरकार होती है, न्यायपालिका होती है। लेकिन एक धार्मिक नेता अयातुल्लाह जो हैं वो इस इन सबसे ऊपर माने जाते हैं। तो एक तरह से देश का प्रभावी शासन इनके पास होता है और देश की नीति, देश का जो एक ब्रॉड विज़न होता है कि भ देश कैसे काम करेगा, क्या नहीं कैसे नहीं करेगा। ये अयातुल्लाह तय करते हैं। उसके बाद जो एग्जीक्यूटिव ब्रांच
है, संसद है या फिर न्यायपालिका है वो सब काम करती है। लेकिन धार्मिक नेता वहां पर सर्वोच्च माना जाता है। इस्लाम के दो दो पंथ होते हैं। एक शिया और एक सुन्नी। तो ये मतलब मेजरली और भी पंथ हैं लेकिन मेजरली दो पंथ होते हैं। तो शिया जो शिया मुस्लिम होते हैं शिया मुस्लिमों के अयातुल्लाह अली खमैनी जो हैं या अयातुल्लाह जो होते हैं ये एक तरह के वैश्विक धार्मिक गुरु भी माने जाते हैं। तो आपने देखा होगा भारत में भी कई जगह जो शिया मुस्लिम है जो कि भारत में ज्यादा नहीं है। भारत में
सुन्नी ज्यादा हैं। लेकिन आप देखेंगे कि जो शिया मुस्लिम है भारत में भी वो बहुत जगह इनकी मृत्यु का मातम मना रहे हैं। इनकी मृत्यु पर शोक जता रहे हैं। क्योंकि भाई यह उनके भी एक तरह के धार्मिक गुरु थे। एक वैश्विक धार्मिक धार्मिक गुरु का दर्जा इनको होता है। तो खैर इजराइल ने ईरान में तेहरान में हेड क्वार्टर्स पे हमला करना शुरू किया और कुछ ही समय में खबरें आनी शुरू हो गई कि रक्षा मंत्री की मौत हो गई है। कुछ ही समय में खबर आनी शुरू हो गई कि जो रेवोल्यूशनरी गार्ड है वहां
का। वहां की सेना को रेवोल्यूशनरी गार्ड कहते हैं कि रेवोल्यूशनरी गार्ड के अध्यक्ष की मौत हो गई है। अयातुल्ला अली खमेनी को लेकर इजराइल ने संदेह जताना शुरू किया कि इनकी शायद मौत हो गई है। कंफर्म्ड नहीं है। शुरुआत में ईरान ने इसे कंफर्म नहीं किया। किसी को नहीं पता था। लेकिन शनिवार शाम आते-आते शनिवार रात आते-आते ईरान ने भी इसे कंफर्म कर दिया कि इन हमलों में अयातुल्लाह अली खमीनी की मौत हो गई है। ठीक है? खैर चलिए अब ये देखते हैं। तो यह तो भाई यह कहानी है। इसमें देखते हैं आगे क्या है।
तो इजराइल और अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर संयुक्त हमला किया। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली हुसैनी खुमैनी की मृत्यु की पुष्टि कर दी गई है। यानी कि 86 वर्ष की उम्र में अयातुल्लाह अली हुसैनी खुैनी जो है उनकी हत्या अमेरिका और इजराइल ने एक सामूहिक हमले के अंतर कर दी है। इसके अलावा ईरान के रक्षा मंत्री आसिम आमिर नसीरजादेह ये नाम याद करने की आपको कोई जरूरत नहीं है। और रिवोल्यूशनरी गार्ड के अध्यक्ष जो थे मोहम्मद पाकफूर इनकी भी हत्या की पुष्टि कर दी गई है। ठीक है? तो एक तरह
से हमेशा ये माना जाता था कि अमेरिका क्या चाहता है? अमेरिका ईरान में अपनी पसंद की सरकार चाहता है। आप देखिए अमेरिका का असली गेम क्या होता है? वो कहे कुछ भी कि हम लोकतंत्र की रक्षा के लिए आए हैं। हम लोगों को अत्याचार से बचाने आए हैं। कहे कुछ भी। असली गेम उनका ये है कि उनको अपनी पसंद की सरकार चाहिए। असली चीज वो ये चाहते हैं। है ना? जी। तो अब क्या हुआ? अमेरिका ये चाहता था कि अयातुल्लाह अली खमेनी वहां से हटे और ईरान में ऐसी सरकारें आए जो बेसिकली अमेरिका के साथ
सहयोग करें। अमेरिका के कहने पर चलें। एक तरह से आप ये भी कह सकते हैं कि अमेरिका की कठपुतली सरकारें वहां पर बनी रहे। अमेरिका ये चाहता है। तो अयातुल्लाह अली खमेनी की मौत की पुष्टि होने के बाद ऐसा संदेह था कि अमेरिका शायद इस युद्ध को अब रोक सकता है। लेकिन अमेरिका ने इससे इंकार कर दिया। अमेरिका ने अभी उनके बाद भी ट्रंप ने कहा है कि खमेनी की मृत्यु के बावजूद हम ईरान पे हमले जारी रखेंगे। अभी-अभी इस क्लास को शुरू करने के 15 मिनट पहले इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट किया है कि तो
इसलिए वो आज की आज के अखबार में नहीं है। शायद कल के अखबार में आएगा। लेकिन मैं आपको अभी बता देता हूं इस क्लास को शुरू करने के 15-20 मिनट पहले इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट किया है कि डॉनल्ड ट्रंप ने ये कहा है कि अगले तीन से चार हफ्ते तक ये हमले जारी रहेंगे। ईरान के अलग-अलग ठिकानों पर अगले तीन से चार सप्ताह तक अमेरिका और इजराइल साथ मिलकर हमला करते रहेंगे। और बेसिकली ये युद्ध जो है अगले महीने भर तक चलने वाला है। ऐसी संभावना दोनों पक्षों ने कम से कम ईरान और इजराइल माफ
कीजिएगा। इजराइल और अमेरिका ने ये संभावना व्यक्त कर दी है। ठीक है जी। चलिए। तो अब यार देखो क्या होता है कि ईरान कोई कमजोर देश नहीं है। ये मैं कई बार लोग आपको बता भी चुका हूं कि इस रीजन में जो आपका ये मिडिल ईस्ट रीजन जो है या आपके खाड़ी देश जो है यहां इजराइल तो एक अमेरिका का ही आप मान सकते हो उसका ही एक प्रतिनिधि है। इसके अलावा दो देश बड़े मजबूत हैं। एक है सऊदी अरब और एक है आपका ईरान। ये दोनों देश बहुत मजबूत देश हैं। ये दोनों देश ताकतवर
देश हैं। तो निश्चित तौर पे अगर आप इन पर हमला करेंगे तो आपको परिणाम तो थोड़े से भुगतने पड़ेंगे। तो ईरान ने भी इसके बाद जवाई जवाबी हमला किया और इजराइल पर मिसाइलों से हमला किया और इजराइल के साथ-साथ ऐसे बहुत सारे देश और ऐसे बहुत सारे क्षेत्र जो अमेरिका के अमेरिका और इजराइल के मित्र माने जाते हैं या फिर जहां पर अमेरिका के सैन्य अड्डे हैं। आप अगर देखेंगे तो इन खाड़ी देशों में अमेरिका ने जगह-जगह अपने सैन्य अड्डे खोल रखे हैं। तो उन जगहों पर ईरान ने हमला बोला और इसके कारण क्या हुआ?
ये ये युद्ध जो है ये आपका पूरे के पूरे मिडिल ईस्टर्न क्षेत्र में फैल गया। आपने कल देखा होगा कि भई हमारी जो स्टार बैडमिंटन प्लेयर हैं डबल ओलंपिक मेडलिस्ट है पी वी सिंधु वो दुबई में फंसी हुई हैं। तो दुबई का वैसे तो कोई लेना देना नहीं है इन हम लोगों से। लेकिन आप अगर देखेंगे तो दुबई में भाई आप क्योंकि दुबई में भी क्या हुआ? दुबई में भी अमेरिका के ठिकाने हैं। तो इसके कारण आप देखेंगे दोहा जो क़तर की राजधानी है दोहा। यूएई में दुबई। मतलब आप देखेंगे और ये कतर दोबारा क्यों
लिख दिया मैंने? तो खैर एनीवे तो बहुत सारी जगहों पे जॉर्डन कतर हटा देते हैं। जॉर्डन मतलब इन समेत बहुत सारी जगहों पर मिसाइलों और ड्रोंस से हमले किए गए और दुबई एयरपोर्ट जो कि दुनिया का सबसे बिजी एयरपोर्ट है। दुबई यार क्योंकि बीच में पड़ता है तो बहुत सारी फ्लाइट्स वगैरह वहां से जाती हैं। दुबई एयरपोर्ट दुनिया का सबसे बिजी एयरपोर्ट है उसको बंद कर दिया गया पूरी तरह से। ये कहा गया कि जो दुबई में दुनिया की सबसे ऊंची इमारत है बुर्ज खलीफा। उसके आसपास कुछ जो है विस्फोट देखे गए। पहले तो ये
अफवाह उड़ी कि बुर्ज खलीफा पर ही मिसाइल से हमला किया गया है। लेकिन वो सत्य नहीं थी। बुर्ज खलीफा के आसपास कुछ जो है मिसाइल विस्फोट देखे गए। तो बुर्ज खलीफा को भी खाली करा लिया गया है। वहां से भी सभी रहने वाले लोगों को निकाल दिया गया है। इसके अलावा बहुत सारी जगह एक पाम झुमेरा जो वहां का दुबई में अगर आप में से कोई गया है घूमने मैं भी कभी नहीं गया तो वहां की जो सबसे अच्छी जगह मानी जाती है वहां पर भी विस्फोट वगैरह हुए हैं। वहां पर भी काफी जो है
आतंक का माहौल है। दुबई में काफी जान पहचान के लोग रहते हैं यार क्योंकि भाई बहुत बड़ी दुबई बहुत ही विकसित जगह है। वहां पे बहुत बड़ी संख्या में दुनिया भर के लोग रहते हैं। भारतीय बहुत रहते हैं। तो जान पहचान के परिचित मित्र जो रहते हैं वो बता रहे हैं कि वहां पे इमरजेंसी सायरन लगातार बज रहा है। लोगों को धुआं दिखाई दे रहा है। विस्फोटों की आवाज आ रही है। तो माहौल जो है वो तनावपूर्ण वहां पर बना हुआ है। ये ईरान का जवाबी हमला है। ईरान बेसिकली अमेरिका के जहां-जहां सैन्य अड्डे हैं
ईरान भी वहां पर जवाबी कार्यवाही कर रहा है। तो ये सब किया जा रहा है वहां पर। इस पूरे क्षेत्र में ऑब्वियसली हवाई क्षेत्र बंद कर दिया गया है। कोई उड़ान नहीं जा रही है। भारत की तरफ से भी जितने भी एयरलाइंस थी भारत ने उन उन सभी एयरलाइंस ने अपने मिडिल ईस्ट या फिर उसके ऊपर से जाने वाली जितनी भी फ्लाइट्स थी सबको रद्द कर दिया है। सबका मार्ग बदल दिया है। ये इमीडिएटली किया गया है। तो भाई जो लोग जिन लोगों का हवाई यात्रा कोई प्लान था वो उनको दिक्कत हो सकती है। इसमें
कोई डाउट नहीं है। ठीक है? चलिए अब आते हैं ईरान पर कि भाई ईरान के सर्वोच्च नेता की हो गई हत्या। तो ईरान ने ये कहा है कि हम क्या करेंगे? अपने नए सर्वोच्च नेता का चुनाव एकद दिन के अंदर कर लेंगे और तब तक के लिए क्या किया है? उन्होंने एक इंटरिम कमेटी बना दी है। क्योंकि देखिए इस बात को समझिए कि आयात खमे जो थे यार वो एक देश के वर्किंग अध्यक्ष थे। एक देश की सरकार को चलाने वाले नेता थे। है ना? तो अब इनकी हत्या हो गई। इनकी हत्या अगर कर दी
गई तो कुछ और अरेंजमेंट करना पड़ेगा। तो ईरान ने एक अंतरिम समिति बना दी है जिसमें एक वरिष्ठ नेता हैं अली रजा अरफी। इनका नाम भी चल रहा है कि अगले सर्वोच्च नेता शायद इनको ही बनाया जाएगा। अभी कंफर्म नहीं है। लेकिन ये कहा जा रहा है कि अली रजा अरफी जो हैं इनका नाम सबसे ज्यादा चल रहा है कि अगले सर्वोच्च नेता के पद पर इनको बिठाया जाएगा। राष्ट्रपति बजेशकियान जो हैं और वहां के मुख्य न्यायाधीश जो हैं इन तीन लोगों की एक अंतरिम समिति बनाई है कि जब तक नए सर्वोच्च नेता का चुनाव
नहीं होता आपके ईरान में शासन को ये लोग चलाएंगे। यह बात स्पष्ट करी गई है। यह कहा गया है। ठीक है? चलिए। खुमेनी की हत्या के साथ ईरान पर उनका 1989 से चला आ रहा 37 साल का शासन समाप्त हुआ है। 37 साल से 1989 में देखिए ईरान में क्या हुआ था? एक कल्चरल रिवॉल्यूशन हुई थी। 1978 में 1978 में वहां पे एक कल्चरल रिवॉल्यूशन हुई थी। जब एक वहां पे शाह का शासन हुआ करता था। ईरान के शाह का। ईरान का शाह जो था वो बेसिकली अमेरिका का कठपुतली हुआ करता था और बड़ा अत्याचारी
शासक हुआ करता था। अब सडनली लोग कह रहे हैं कि शाह तो बहुत अच्छा था। ऐसा नहीं है। आप अगर ईरान के शाह का भी इतिहास पढ़ेंगे तो वो भी अत्याचारों से भरा हुआ है। तो उनके शासन के खिलाफ जो है विद्रोह किया गया और उनके शासन के खिलाफ विद्रोह करने वालों में एक एक दूसरे आया थे और उनके अंडर ये एक जूनियर नेता थे आया अली खुनी। तो पहले जो आपके एक पूर्व पहले वाले आया जो थे वो 1978 में शासन में आए। 1989 तक वो रहे और उनकी सरकारों में ये मंत्री के पद
पर रहे और धीरे-धीरे अपना राजनैतिक कद बढ़ाते गए और जब उन आया की मृत्यु हुई तो उनके बाद जो है आया अली हुसैनी खुमेनी जो हैं वो यहां के शासक बन गए और पिछले 37 साल से आप ये कह सकते हैं कि इनका निर्बाद शासन वहां पर चला है। कई तरह के राष्ट्रपति आए, कई तरह के राष्ट्रपति गए। लेकिन अयातुल्लाह अली खमैनी की पॉपुलैरिटी जो थी ईरान में उनकी जो पकड़ थी उसको आप ये मान के चलिए कि अभी कुछ महीने पहले जो चुनौती मिली वो मिली। इसके अलावा उनकी पॉपुलैरिटी और उनकी पकड़ को कभी
चुनौती नहीं मिली। अभी कुछ महीने पहले जो ये हिंसा हुई या विद्रोह हुआ ईरान में ये शायद इकलौता ऐसा मौका माना जा सकता है जब ये देखा गया कि ईरान में वो पॉपुलर अब नहीं है। ठीक है? लेकिन अदरवाइज ईरान पे उनकी पकड़ हमेशा बहुत कायम रही। तमाम तरह के संकट जो है किसी देश पर आते हैं। 37 साल से यार यह अपने पद पे थे यार। आप इमेजिन कर सकते हैं। तो 37 साल तो बहुत बड़ा पीरियड आप में से आप में से कोई पैदा नहीं हुआ होगा मेरे ख्याल से जो लोग इस क्लास
को देख रहे हैं। तो भाई तब से ये यहां के शासक थे। इनकी बहुत गहरी पकड़ थी। तो इनकी अब हत्या की गई है। एक बहुत बड़ा इवेंट है मेरे ख्याल से ये और ईरान जो है निश्चित तौर पर इससे अगर देखिए अब क्या है? ईरान के नए शासकों के सामने दो तरीके हैं। दो विकल्प हैं। या तो वह इसका बदला लेने के की प्रक्रिया को जारी रखें कि किसी ना किसी तरह से वो अमेरिका को डैमेज करने की कोशिश करें। अमेरिका को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करें या फिर दूसरा तरीका ये है कि वो
अमेरिका के साथ सलाह जो है एक सुलह संधि करने की तरफ आगे बढ़े। जैसा लगभग वेनेजुएला ने किया। वेनेजुएला में क्या हुआ? जब निकोलस माधुर को अमेरिका उठाकर लाया तो पहले दिन तो वहां के जो नए नेता थे, उपराष्ट्रपति जो थी डेलसी रोड्रीगेस उन्होंने कहा था कि हम बदला लेंगे हम अपने राष्ट्रपति को छुड़ाएंगे। फिर उनको समझ में आ गया यार देखो कोई फायदा है नहीं। तो उन्होंने अमेरिका से बातचीत कर ली। अब डेलसी रिग ही वहां पे कार्यवाहक राष्ट्रपति हैं। वही वहां के राष्ट्रपति बनी हुई है और उनहीं वो अमेरिका के सहयोग से शासन
चला रही हैं। ठीक है? तो ईरान में भी अब क्या है? ये दोनों विकल्प वहां के नेताओं के पास मौजूद हैं। क्योंकि अब देखिए अयातुल्लाह खमेनी अब नहीं रहे। तो अयातुल्लाह खमेनी के बाद ये दोनों विकल्प वहां के नेताओं के पास अवेलेबल हैं कि या तो वो अमेरिका के साथ शत्रुता या फिर युद्ध जो है उसको बनाए रखें या फिर अमेरिका के साथ सहयोग करके समझौता कर लें। अब इनमें से क्या होगा ये अभी हमको पता नहीं है। आने वाले दिनों में पता चलेगा। लेकिन अभी के लिए तो ईरान युद्ध की राह पर ही है।
ईरान पूरी तरह से बदला दे रहा है। रिटाैलिएट करने की कोशिश कर रहा है। ईरान ने होरमूस की खाड़ी को भी बंद करने का निर्णय लिया है। होरमूस की खाड़ी कहां है? यहां है। आप देख सकते हैं। तो भाई अगर आप यहां पर देखें तो ये आपका आप अगर भारत का मानचित्र बचपन से पढ़ते आए हैं तो अरब सागर तो आपको पता होगा ही होगा। तो ये हमारा अरब सागर है। दिख रहा है ये अरेबियन सी है। तो यहां पे आपको मिडिल ईस्ट दिख रहा है। ये आपका ईरान है। ये आपका सऊदी अरब है। ठीक
है? इनके बीच में यहां पर परर्शियन गल्फ है जिसको हम क्या कहते हैं? पारस की खाड़ी कहते हैं। क्या कहते हैं? परशियन गल्फ ही कहते हैं यार। ठीक है? तो ये परर्शियन गल्फ है। तो आपके परर्शियन गल्फ को अरब सागर से जोड़ने वाली ये एक बड़ा संकरा सा एक बड़ा नैरो सा रास्ता है जिसको हम कहते हैं स्टेट ऑफ हॉर्मोस। तो यार क्या होता है देखो अगर आपका पश्चिमी देशों की तरफ से जैसे आप देखोगे अगर मान लो यूरोप से कोई इंडिया की तरफ आना चाहता है तो रास्ता तो यही है ना भाई। समुद्री रास्ता
तो यही है। आप यहां पर देखोगे समुद्री मार्ग जो है वह तो आपका यही हो जाता है। और इस मार्ग में आप देखोगे यह स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस ये जो संकरा सा रास्ता है ये अपने आप में बहुत ज्यादा जरूरी है। क्योंकि आप देखोगे तेल उत्पादक देश है यहां पे आपका इराक हो गया, सऊदी अरब हो गया, ईरान हो गया, यूएई हो गया। तो आपका यार समुद्री रास्ता तो ये बहुत इंपॉर्टेंट है। तो ईरान ने ये कह दिया है कि हम इस ट्रेट ऑफ हॉर्मोंस को क्या कर रहे हैं? हम इस ट्रेट ऑफ हॉर्मोनस को ब्लॉक
कर रहे हैं। ईरान ने यह कह दिया है कि हम इस ट्रेट ऑफ हॉर्मोंस को ब्लॉक कर रहे हैं। और बेटा यहां से इतना ज्यादा व्यापार होता है। यहां से खासतौर पे तेल का व्यापार इतना ज्यादा होता है कि भारत समेत दुनिया के बहुत सारे देशों में एक व्यापारिक संकट जो है वो होने वाला है। इसमें कोई डाउट नहीं है। तो अब जो भाई आप में से जो लोग शेयर मार्केट में इन्वेस्ट करते हैं इसमें कोई डाउट नहीं है कि आज शेयर बाजार ऑन मुंह गिरेगा। इसमें कोई डाउट नहीं है। आज हर कोई तैयार है।
मैं कल एक एक छोटी सी एक बर्थडे पार्टी थी एक बच्चे की उसमें गया। तो भाई वहां पर मेरे को पता चला कि मेरे कई सारे मित्र हैं जो शेयर मार्केट का ही बिज़नेस करते हैं। शेयर मार्केट में ही निवेश करते हैं। तो हर कोई तैयार है कि आज तो भाई बहुत नुकसान होना है। आज जो है आज जब बहुत बुरी तरह से शेयर मार्केट गिरेगा। तो मैं उनको उनसे जो मेरी चर्चा हो रही थी वहां पर ऑब्वियसली मैं यूपीएससी का टीचर हूं तो वो लोग मुझसे पूछने लगते हैं कि तुम्हें क्या लगता है? क्या-क्या
फैक्टर्स हैं? तो भाई यूपीएससी टीचरों को हर कोई पकड़ लेता है। तुम बताओ तुम्हें पता होगा। तो उनको मैं यही समझा रहा था कि बाकी देखो युद्ध जो है वो उससे जो प्रॉब्लम है वो है वो तो होगी ही होगी। मेरी नजर में स्टॉक मार्केट वगैरह के गिरने का सबसे बड़ा कारण ये होगा। ये स्टेट ऑफ हॉर्मोस को लेके जो अनसर्टेनिटी आ गई है इसको लेकर जो अनिश्चितता हो गई है इससे दुनिया भर का व्यापार बहुत ज्यादा प्रभावित होगा। मुझे कोई डाउट नहीं है कि इसके कारण ये मेन डिसाइडिंग फैक्टर है कि जिसके कारण आज
हमारे देश मतलब देश क्या दुनिया के लगभग सभी स्टॉक मार्केट्स में आज आपको भारी गिरावट देखने को मिलने वाली है। इसमें कोई डाउट नहीं है। मेरे ख्याल से 9:00 बजे मार्केट खुल जाता है तो अब तक रिपोर्ट आनी शुरू हो गई होगी कि स्टॉक मार्केट की क्या दुर्दशा आज हो रही होगी। तो लकीली मेरे मैंने अभी स्टॉक्स में पैसे नहीं लगाए। खाली म्यूच्यूल फंड में पैसे हैं। मेरे वो भी सब गिरने वाले हैं आज। पर ठीक है मतलब ठीक है जब पैसा गिर जाए तो खरीदने का टाइम होता है। खैर चलो तो ये एक चीज
है स्टेट ऑफ होर्मस जो है भाई इसको ईरान ने कह दिया है कि हम ब्लॉक कर रहे हैं। तो ये खाड़ी जो है ये खाड़ी आपकी हॉर्मोस की खाड़ी जो है ये तेल और व्यापार के आवागमन के लिए बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर बहुत गंभीरता से नजर आएगा। बहुत ज्यादा व्यापक असर इसका हमको दिखेगा। इसमें कोई डाउट नहीं है। ठीक है जी। अच्छा एक और चीज जो आपको मैंने बताया कि यार ये आक्रमण जो है अब अमेरिका ये कह रहा है कि ये प्रिएटिव आक्रमण है। प्रिएटिव मतलब कि ईरान कुछ करने
वाला था। ईरान हमारे ऊपर कुछ गलत काम करने वाला था। इसलिए हमने आक्रमण कर दिया। लेकिन ये सत्य नहीं है। ईरान जो है पिछले काफी समय से उनके साथ नेगोशिएशन कर रहा था। जैसा आपको मैंने बताया फ्राइडे तक फ्राइडे शाम रात तक नेगोशिएशन चल रहा था। फ्राइडे रात तक नेगोशिएशन में क्या-क्या प्रोग्रेस हुई है उसकी रिपोर्टें आ रही थी और शनिवार को इन्होंने हमला कर दिया। तो ये हमले की जो अप्रत्याशितता है ये बहुत चौंकाने वाली है और ये बहुत ही मैं बार-बार ये कहता हूं ना कि डॉन्ड ट्रंप के अमेरिका में सबसे बड़ी प्रॉब्लम
क्या है कि वो विश्वसनीय नहीं है। मेरा फिर से सवाल यही है कि अब कोई भी देश जो अमेरिका के साथ नेगोशिएशन कर रहा है वो अमेरिका पे कैसे विश्वास करेगा? मतलब मेरा बहुत सीधा-सीधा सवाल ये है कि यार नेगोशिएशन तो ईरान भी कर रहा था। आपके साथ नेगोशिएशन टेबल पर बैठा हुआ था ईरान। ईरान नेगोशिएशन से उठ के नहीं गया था। नेगोशिएशन टूटा नहीं था। धीमे चल रहा था लेकिन चल रहा था। उसी नेगोशिएशन के बीच में अचानक से एक दिन आप ईरान पे आक्रमण कर देते हो। तो यार अमेरिका की तो ये जो
पूरी नेगोशिएशन की जो प्रक्रिया है, चर्चा की जो प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से हम मानते हैं कि दुनिया के विवाद सुलझते हैं उनकी विश्वसनीयता तो खत्म हो गई। उनकी विश्वसनीयता पे तो कुछ बात ही नहीं रहे। वो तो नाम मात्र के रह गए। उनकी विश्वसनीयता। ये बात क्लियर हो गई कि नहीं हो गई? तो ये एक बहुत बड़ी चीज है। शुक्रवार तक ईरान अमेरिका के साथ वार्ता कर रहा था। जिसमें मध्यस्थ ओमान ने अच्छी प्रगति की बात कही थी और शनिवार को इजराइल और अमेरिका ने इन पर आक्रमण कर दिया। तो विश्वसनीयता का जो एक
संकट है वो निश्चित तौर पर निकल के आता है। मैं फिर से दोहरा दूं। यह आक्रमण हर अंतरराष्ट्रीय कानून का पूरी तरह से उल्लंघन है। देखो इसको समझते हैं। कोई भी आप आया खमेनी को आप कितना भी बुरा आदमी क्यों ना मान। वही जो निकोलस माधुर वाला तर्क था यार आपने सुना ही होगा निकोलस मादुर वाला तर्क भी कि यार आया अली खमेनी को आप कितना भी गलत आदमी क्यों ना मान लें। ठीक है? आप यह कह दे कि हां भाई ये तो भाई बहुत ज्यादा अमेरिकियों पर हमले करवाते थे या इस तरह की चीजें
करते थे। यह एक देश के प्रमुख थे। ठीक है? और उस देश के किसी एक देश के अंदर घुस के उसकी मेन सरकारी बिल्डिंग पर आक्रमण करके उसके प्रमुख की हत्या कर देना ये एक राजनैतिक हत्या से ज्यादा कुछ नहीं है। ये बात एकदम स्पष्ट है। इसको दिमाग में एकदम क्लियर रखिए। देखिए अभी क्या है ना ये ईरान है तो हम इसको ऐसे सोच रहे हैं। लेकिन आप एक बार सोच के देखिए अगर ऐसा किसी यूरोपीय देश के साथ हुआ हो तो मैं आपको एक एग्जांपल देता हूं। अभी अमेरिका का ग्रीनलैंड से भी विवाद चल
रहा है। चल रहा है कि नहीं? अमेरिका कह रहा है ग्रीनलैंड हमको दे दो हमको दे दो। इमेजिन कीजिए अगर अमेरिका जो है वो ग्रीनलैंड की संसद पर आक्रमण कर दे और ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री की हत्या कर दे तो क्या आप कहोगे कि ये जस्टिफाइड है ये तो एक राजनैतिक हत्या ही माना जाएगा ना पूरी तरह से बात सही है कि नहीं है लॉजिक समझ रहे हो कि नहीं भारत का बांग्लादेश से विवाद चल रहा था मोहम्मद यूनुस के टाइम पे आपको याद होगा तो भारत क्या करे बांग्लादेश की संसद पे आक्रमण करके मोहम्मद यूनुस
पे बम गिरा दे अरे नहीं कर सकते ना यार आप ये मतलब आप किसी को आप किसी से कितना भी असहमत हो। बात समझ रहे हो कि नहीं? यार ये वहां का उस देश का नेता है। आप ऐसा नहीं कर सकते। आप असहमत हो तो आप बातचीत करो। आप जो है उसके खिलाफ कैंपेन चलाओ। इलेक्शन का वेट करो। अब हम ट्रंप से सहमत नहीं है। तो ट्रंप पे आप ऐसा हमला करवा सकते हो क्या? आप ये बताओ। आप ट्रंप से सहमत नहीं है कि ट्रंप ने इतने सारे युद्ध कर दिए। ट्रंप से आप सहमत नहीं
हो। तो ट्रंप की हत्या कर दी जाए। किस तरह ये क्या चल रहा है? मेरे को समझ में ही नहीं आ रहा कि ये चल क्या रहा है? इंटरनेशनल ऑर्डर कहां चला गया? ये क्या हो रहा है? ना अब तो स्थिति ये हो गई है कि अमेरिका जो है ये एक आक्रामक और दबंग अमेरिका का इकाई के उदय का स्पष्ट प्रतीक है। अब अमेरिका लगभग इस नीति पर आ चुका है कि हम जो कहेंगे वो तुम्हें मानना पड़ेगा। अगर वो तुम नहीं मानोगे तो अब तक क्या होता था? अमेरिका टेरिफ लगाता था। देखो इसको इसमें
आप ट्रंप की तिलमिलाहट भी समझिए। अभी क्या हुआ है? ट्रंप को मिले हैं बहुत सारे सेटबैक। देखिए हर चीज ना आंतरिक राजनीति से प्रेरित होती है। इजराइल को लेकर तो मैं बहुत बार आपको कह चुका कि नेतन याहू ये सब इसलिए कर रहा है क्योंकि वो इस साल इलेक्शन हारने वाला है। और कोई रीज़न नहीं है। ये आप मैं आपको पहले भी कई बार कह चुका हूं कि नेतन याहू इतना उत्तेजित इसलिए है कि वहां के आप इजराइल के कोई भी सर्वे देख लो। इजराइल में नेतन याू बहुत अनपॉपुलर हो चुके हैं। उनका इस साल
इलेक्शन हारना लगभग तय है। इसीलिए युद्ध करके पॉपुलर होना चाहते हैं वो कि भाई किसी तरह से युद्धों में मैं जीत हासिल कर लूं। मैं लोगों को ये बताऊं कि देखो हमने ईरान को हमेशा के लिए पस्त कर दिया वगैरह वगैरह। इस तरह से फायदा मिल जाए तो मिल जाए। नेतन याू का पक्ष तो यही है। अमेरिका में ट्रंप के टेरिफ लगाने की शक्ति पे सुप्रीम कोर्ट ने बैन लगा दिया। तो ट्रंप के हाथ में सबसे बड़ा हथियार क्या था? टेरिफ था। उस पे सुप्रीम कोर्ट ने बैन लगा दिया कि आप नहीं लगा सकते साहब।
ठीक है? एस्टीन फाइल्स सामने आ गई। एस्टीन फाइल्स में धीरे-धीरे धीरे-धीरे अब ट्रंप पे भी शिकंजा कस ही रहा है। बिल क्लिंटन ने जाके गवाही दे दी। हिलरी क्लिंटन ने गवाही दे दी। बिल गेट्स ने जाके बात कर ली। तो धीरे-धीरे धीरे-धीरे आपके अमेरिका पर भी शिकंजा कस रहा है। तो ये एक तरह की ट्रंप की तिलमिलाहट भी है कि वो कुछ ऐसा करना चाहते हैं कि चलो मुझे आप टेरिफ नहीं लगाने दोगे। मेरे ऊपर आप सेक्सुअल मिसकंडक्ट के आरोप लगाओगे तो मैं यह तो कुछ करके दिखाऊंगा। तो एक ऐसे अमेरिका का उदय हो रहा
है जो आक्रामक है और जो दबंग है और भाई जो यह कह रहा है कि अगर तुम मेरी बात नहीं मानोगे तो मैं तुम्हारे यहां हमला कर सकता हूं। तो ये अब तो अमेरिका करने ही लगा है ना सीधा-सीधा कि तुमने क्योंकि इनसे तो बातचीत भी चल रही थी यार। इनसे तो बातचीत चल रही थी। निकोलस माधुरी पे तो कितना फ्रिजस आरोप लगाया कि आप ड्रग्स का बिज़नेस करवा रहे हो। अरे यार ड्रग्स का बिज़नेस करवा रहे हो। तुम अपना तुम अपने बॉर्डर ढंग से सिक्योर करो ना भाई। इसलिए उनको उठा के लेके चले गए।
इनकी हत्या कर दी। तो भाई ये जो है ये बहुत ही चिंताजनक है। अपने 13 महीनों के कार्यकाल में ट्रंप ने ये सातवां हमला किया है। बेटा आज हिंदू रिपोर्ट करता है कि 13 महीनों में सातवीं जगह है जहां पर ट्रंप ने बॉम्बिंग करी है। तो आप देख सकते हैं कि डोनल्ड ट्रंप जो हैं जिनका इलेक्शन में एक ये वादा था जब ये जीत के आए थे तो उनका वादा था कि ये अननेसेसरी वॉर रोकेंगे। ठीक है? अननेसेसरी वॉर रोकने का वादा था उनका। वो वास्तव में कितने बड़े वॉर मॉन्ग नेता बनते जा रहे हैं
कि पिछले 13 महीनों में सात जगह वो बॉम्बिंग करा चुके हैं। वैश्विक तौर पर अपनी बात मानने या फिर अमेरिका का हमला झेलने की परंपरा का ये एक नया उदाहरण है कि तुम अगर अमेरिका की बात नहीं मानोगे तो अब तक तो अमेरिका टेरिफ लगाता था। अब अमेरिका तुम्हारे ऊपर बम भी गिरा सकता है। मतलब ये दुनिया के बाकी देशों को भी चेतावनी है। इस बात को समझिएगा। इसको हल्के में मत लीजिए। आपको ऐसा लग रहा है कि अरे उन पे हुआ है हम पे थोड़ी ना होगा। आप पे भी हो सकता है। इस बात
को समझिए। अब तो अमेरिका का एटीट्यूड ये क्लियर है कि भैया तुम हमारी बात नहीं मानोगे तो हम तुम्हारे यहां बम गिरा देंगे। बात खत्म। तो अगर अब अमेरिका आपसे कहेगा कि एग्रीकल्चर पे हमारी डील साइन करो तो भैया करने के अलावा ज्यादा विकल्प अब बचे नहीं है आपके पास। ये नया वर्ल्ड ऑर्डर समझ रहे हो कि नहीं समझ रहे हो? ये जो एक नया वैश्विक ऑर्डर है इसको समझो कि अमेरिका अब सीधे-सीधे ये कह रहा है संदेश संदेश साफ है पूरी दुनिया को कि जो हम कह रहे हैं उसको मानने के अलावा कोई ज्यादा
विकल्प अब तुम्हारे पास है नहीं| अब अगर एग्रीकल्चर पे आप अमेरिका की बात नहीं मानोगे तो आपको खाली टेरिफ का खतरा नहीं है। आपको मिसाइलों का भी खतरा है। ये बात याद रखिए। ऐसा मत सोच के चलिएगा कि उन पे हो सकता है। हम पे नहीं हो सकता। इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। ये कह देंगे कि आपके यहां भी लोकतंत्र की कमी थी। आपके यहां भी हम लोकतंत्र ला रहे हैं। इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। यह बात याद रखिएगा। इस बात को याद रखिए। ठीक है? वेनेजुएला समेत बात ना मानने वाले देशों की सरकारों को
बदलना अमेरिका का लक्ष्य है। इसको वो कहता है कि हां लोकतंत्र लाएंगे, जनता का शासन लाएंगे। ऐसा कुछ नहीं है। ये सब बहानेबाजी है, बकवास है, ढकोसला है। क्योंकि अमेरिका जो है बहुत सारी तानाशाही सरकारों के साथ उसके संबंध हैं। सऊदी अरब में क्या तानाशाही सरकार नहीं है। मोहम्मद बिन सलमान की जो सरकार है वो तानाशाही सरकार नहीं है भाई। अब यह बताइए मतलब वहां पर मोहम्मद बिन सलमान की सरकार क्या-क्या नहीं करती है सऊदी अरब में आपको पता है पर वो तो बड़े खास दोस्त हैं अमेरिका के मुझे अभी याद है मैं दिसंबर में
लंदन गया तो मैं वहां पर भाई मेरी जो फ्लाइट थी वो जाते हुए जेदा से थी लौटते हुए रियाद में ले ओवर था तो वहां पर मैं बैठा हुआ था मैं अपनी वाइफ को एक्सप्लेन करने लगा कि मोहम्मद बिन सलमान जो है वो किस प्रकार से एक तानाशाही शासक है। फिर मुझे अकर किया कि यार मैं सऊदी अरब में ही बैठा हूं। यहां पर कोई सुन लेगा तो मेरे को पकड़ के ले जाएगा। तो मैं चुप हो गया। मैंने कहा नहीं नहीं मैं फ्लाइट में बताऊंगा यहां पे नहीं यहां तो मुझे मुझे आप आप डर
समझ रहे हो आप डर समझ रहे हो मैं जनरली बताने लगा कि यहां पे जो है मोहम्मद बिन सलमान यहां का भाई वो क्राउन प्रिंस है वही है तानाशाह मैं जमाल खगोशी का एपिसोड बताने लगा फिर मैंने कहा नहीं नहीं नहीं नहीं मुझे बोलते बोलते मेरे को अकर किया कि ये आसपास जो पुलिस वाले घूम रहे होंगे एयरपोर्ट पे कोई सुन लेगा तो तानाशाही सरकारें उठा के ले जाएंगे मिलूंगा भी नहीं मैं तो मैं एकदम चुप हो गया मैंने कहा नहीं मैं बॉम्बे पहुंच के बताऊंगा यहां नहीं बता सकता तो ये ऐसी सरकारों के साथ
ट्रंप की बड़ी खास दोस्ती है बड़ी खास मित्रता है ट्रंप की ऐसी सरकारों के साथ। तो लोकतंत्र के जो प्रणेता बनते हैं ये सब तो बेकार की बात है। ये सब बेकार की चीजें हैं। ठीक है? इस हमले से अंतरराष्ट्रीय राजनीति हमेशा के लिए बदल जाएगी। पश्चिमी एशिया में ईरान अब एक अब तक एक बहुत बड़ी शक्ति था। अब नया नेतृत्व जो आपको मैं बता चुका कि नया नेतृत्व जो आएगा ईरान का वो अमेरिका के साथ सहयोग करेगा, समझौता करेगा या फिर विरोध करेगा, उनसे युद्ध करेगा। ये हमको अभी स्पष्ट नहीं है। तो जब ईरान
का नया नेतृत्व अब सामने आएगा तो पता चलेगा कि पश्चिमी एशिया की राजनीति जो है वो अब किस तरह से आगे बढ़ने वाली है। क्योंकि ईरान में निश्चित तौर पे एक बहुत बड़ा ब्रेकेज तो आ गया है। जो अब तक ईरान की राजनीति चली आ रही थी उससे एक बहुत बड़ा एक अलगाव तो आपको देखने को मिलेगा। इसमें कोई डाउट नहीं है। और ईरान किस तरह का कितना मजबूत किस तरह का ईरान बनता है इसका फर्क पूरे दुनिया पर पड़ेगा। इस कम से कम पूरे वेस्ट एशिया क्षेत्र पर तो पड़ेगा ही पड़ेगा और पूरे दुनिया
पर भी इसका फर्क पड़ सकता है। इसमें कोई डाउट नहीं है। अब आते हैं भारत पे। भारत सरकार ने मैं देखो क्या होता है ना जब मनमोहन सिंह की सरकार हमारे यहां हुआ करती थी तो एक टर्म बहुत चलता था जिसको कहते थे पॉलिसी पैरालिसिस। लिख देता हूं मैं। पॉलिसी पैरालिसिस। पैरालिसिस समझते हो जिसको लकवा मारना कहते हैं कि आप कुछ कर ही नहीं रहे। पॉलिसी पैरालिसिस का मतलब यह था कि मनमोहन सिंह की सरकार पर एक्चुअली भ्रष्टाचार के इतने आरोप लग गए थे कि सारे मंत्री काम करने से डरने लगे थे कि यार हम
कुछ भी करेंगे भ्रष्टाचार का आरोप लग जाएगा तो कोई कुछ कर ही नहीं रहा था। तो मनमोहन सिंह की सरकार में 2011 से 14 तक किसी मंत्री ने कोई काम नहीं किया। ये सच्ची बात है। एकदम फैक्ट है ये कि 2011 से 14 तक कोई मंत्री कुछ नहीं कर रहा था कि यार कुछ भी करेंगे तो भ्रष्टाचार का आरोप लग जाता है। तो भाई चुप बैठते हैं बिल्कुल कुछ नहीं करेंगे। तो ऐसा लगता है कि हमारी विदेश नीति को भी एक ऐसा ही सांप सूंघ गया है। हम यह दावा करते हैं। देखिए समझिएगा और डिस्पैशनेटली
निष्पक्ष होकर सोचिएगा। हम यह दावा करते हैं कि हम दुनिया की बहुत बड़ी शक्ति हैं। हम यह दावा करते हैं कि हमको सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यता मिलनी चाहिए। हम यह दावा करते हैं कि भारत के बिना कोई भी बड़ा वर्ल्ड ग्रुप ठीक नहीं हो सकता। भारत को आपको हर जगह शामिल करना चाहिए। तो यार अगर आपको विश्व में बड़े स्टेज पर टेबल पर बैठना है तो आपका ऐसे मामलों पर ओपिनियन होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए? भारत सरकार ने बेटा ये सैटरडे को वॉर शुरू हुआ है। सैटरडे निकल गया, संडे निकल गया। आज मंडे
शुरू हो चुका है। ठीक है? भारत सरकार ने अभी तक इस युद्ध पर एक लाइन नहीं कही है। भारत के विदेश मंत्रालय ने रिएक्शन तक नहीं दिया है। जो एक कस्टमरी अपील होती है ना कि शांति से मामला सुलझा लो वो भी भारत ने अब तक नहीं करी है। केवल एक चीज भारत सोचो युद्ध किसका है? युद्ध है आपका ईरान और इजराइल का। ईरान इजराइल का युद्ध है। इजराइल कह लो, यूएस कह लो इनका युद्ध है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान द्वारा दुबई पर किए गए हमले की आलोचना करी है। भारत ने प्रधानमंत्री
मोदी ने जो यूएई के राजा हैं उनको फोन करके बोला कि हां आपके यहां जो हमले हो रहे हैं उस उनप हम हम आपकी उनकी निंदा करते हैं। आपके साथ खड़े हैं। अरे भाई वो तो बेचारा ठीक है। वहां तो कुछ टारगेटेड हमले हो रहे हैं। असली युद्ध ये जो है इन पर क्या कहना है भारत का? तो हमारी विदेश नीति जो है उसको हो गया है पॉलिसी पैरालिसिस। वी आर नॉट सेइंग एनीथिंग। तो मतलब यह मेरे विचार में बहुत ही विचित्र बात है। ये बहुत ही विचित्र बात है। भारत क्योंकि सैद्धांतिक तौर पे भारत
सारे युद्धों का विरोध करता आया है। ये बात सत्य है। हमने हमेशा देखा है। भारत कहता रहा है भ युद्ध क्यों करना है यार इन चीजों के लिए? आपको प्रॉब्लम है। बातचीत से सुलझाओ। लेकिन निश्चित तौर पर भारत की विदेश नीति पर अमेरिका का इस हद तक दबाव है। इस हद तक दबाव है कि भारत इस युद्ध की आलोचना भी नहीं कर पा रहा है या फिर इस युद्ध को रोकने की अपील तक नहीं कर पा रहा है। ऐसी एक भी अपील अब तक भारत सरकार ने नहीं करी है कि इस युद्ध को रोक देना
चाहिए कि दोनों पक्ष हथियार डाल दें। किसी का फायदा नहीं होगा। जो जनरल अपील होती है ना शांति बना के रखें वो भी भारत नहीं कह रहा है। तो भारत ने इस पर कुछ भी नहीं बोला है। हमारी विदेश नीति का पॉलिसी पैरालिसिस का इससे बड़ा एग्जांपल नहीं हो सकता। ठीक है? चलिए आगे देखते हैं। खुनी समेत ईरान में मुख्यतः शिया मुस्लिम होते हैं। खुमेनी उनके सबसे बड़े धर्मुरु थे। की ये बात आप जानते हैं। तो उनकी हत्या के कारण भारत के भी कई शहरों में शिया मुस्लिमों ने विरोध प्रदर्शन किए हैं। हालांकि जैसा मैंने
आपको बताया भारत के मुसलमानों में केवल 15% के आसपास जो है वो शिया हैं। 85% मुसलमान जो भारत में रहते हैं वो सुन्नी हैं। लेकिन चूंकि शिया मुस्लिमों के ये खुनी सबसे बड़े धर्मगुरु माने जाते थे वैश्विक तौर पे। तो इसीलिए भारत के अंदर शिया मुस्लिम जो हैं वो इसका विरोध कर रहे हैं। इसके विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। तो भाई अब जैसे जम्मू कश्मीर में विरोध किया गया। जम्मू कश्मीर में स्थिति तनावपूर्ण हो गई है। वहां पर दो दिन के लिए स्कूल बंद करने का भी अनाउंसमेंट किया गया है। लखनऊ में कल कई
सारे प्रोटेस्ट हुए। लखनऊ में काफी बड़ी संख्या में शिया रहते हैं। तो लखनऊ के जो शिया मुस्लिम है वो इसके खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे अमेरिका के खिलाफ। तो भाई जम्मू कश्मीर हो गया आपका लखनऊ हो गया और भी कई जगहों पर इसके खिलाफ प्रदर्शन सामने आए हैं। तो केंद्र सरकार ने राज्यों को सचेत रहने को कहा है। ये कहा है कि भाई ऐसा मौका जब दुनिया में होता है तो कई बार क्या होता है? ऐसे मौके का दुरुपयोग कुछ भड़काऊ तत्व करते हैं। है ना भाई? कुछ आतंकवादी किस्म के तत्व जो हैं वो ऐसे
मौकों का दुरुपयोग करते हैं युवाओं को भड़काने में। जैसे भाई देखो तुम्हारे नेता को मार दिया, धर्म गुरु को मार दिया। ऐसा करके उनको आतंकवाद की तरफ प्रेरित करने के लिए इस समय का उपयोग किया जा सकता है। तो केंद्र सरकार ने राज्यों को कहा है कि आप नजर रखिए। इस तरह के लोगों पर जो भड़काऊ भाषण देते हैं। ऐसे लोगों पर नजर रखिए जिनके संबंध आतंकवाद से रहे हैं। क्योंकि यह समय जो है इसका वो दुरुपयोग कर सकते हैं। तो इसको लेकर सचेत और सतर्क रहने की जरूरत है। ये बात केंद्र सरकार ने कही
है। चलिए साहब तो हो गया हमारा एक लंबा सा। बहुत लंबा सा लेक्चर जो था ये ईरान और इजराइल को लेकर। ये हमारी पहली खबर थी आज की। लेकिन ये तीनचार खबरों के बराबर थी। अभी भी खत्म नहीं हुई है। अभी ये युद्ध चल रहा है और भी होगा तो आपको कल बताऊंगा। लेकिन एक इसका पूरा पृष्ठभूमि जो है वो आपके सामने मैंने प्रस्तुत करी। अब एक बार आपके सवाल देख लेते हैं। फिर हम अपनी आगे की खबरों पर चलेंगे। एक बार ये देख लेते हैं। फिर आगे हम आगे की खबरों पर चलेंगे। चलो। क्या
प्रश्न है भाई? अरे तो लोग लड़ रहे हैं आपस में। चलो वेरी गुड। अब पता नहीं देखो मेरे ख्याल से स्ट्रेट ऑफ़ हॉर्मोस अमेरिका खुलवा लेगा स्ट्रेट अब यार अमेरिका आकर देखो ईरान शक्तिशाली है लेकिन यार अमेरिका की शक्ति से कोई तुलना नहीं है इस बात को समझिए अमेरिका के पास जो ताकत है उससे कोई दुनिया के किसी भी देश की तुलना नहीं है अमेरिका की शक्ति से तो अमेरिका स्टेट ऑफ होर्मस को तो खुलवा देगा ये वाला दिन बंद नहीं रख पाएगा ईरान ये बात तय अब ईरान इसको नेगोशिएशन की तरह यूज़ करेगा या
कैसे यूज़ करेगा ये देखना है। लेकिन हां ये बात सही है कि अमेरिका स्ट्रीट ऑफ हॉर्मोस खुलवाएगा। इसमें इसको बंद नहीं रहने देगा। इसमें कोई डाउट नहीं है। ईरान में इनफ्लेशन कैसे हो गया? ईरान का आर्थिक बॉयकॉट कर दिया गया था। बेटा ईरान का जो है अमेरिका ने काफी समय से आर्थिक बॉयकॉट कर रखा है। दुनिया के देशों को बोल रखा है कि कोई उसके साथ व्यापार नहीं करेगा। अगर ऐसा होता है तो देश की आर्थिक स्थिति तो खराब हो ही जाती है। इसमें कोई डाउट नहीं है। यदि किसी संप्रभु राष्ट्र पर सैन्य हमला सुरक्षा
परिषद के अनुमति के बिना हो तो उसे वैध नहीं माना जा सकता। वो इललीगल है। पूरी तरह से गैरकानूनी है। और यहां पर आप किसी देखो क्या होता है? अगर आप किसी देश के आतंकवादी ठिकाने पे हमला कर रहे हैं तो फिर भी जैसे ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने भी किया। हम पाकिस्तान की सीमा के अंदर गए। लेकिन हमारा हमने बार-बार देखिए आप देखिए ऑपरेशन सिंदूर जब हुआ तो भारत सरकार ने बार-बार क्या कहा कि या आप याद कीजिए भारत सरकार की तरफ से क्या कहा गया हमने ना तो पाकिस्तान की सेना पे हमला किया
ना हमने पाकिस्तान के सिविलियंस पे हमला किया जो हमारी तरफ से दो सेना के अधिकारी आती थी वो क्या कहती थी एक सेना की एक वायु सेना की कि हमने प्रसीजन अटैक किया हमने देखकर केवल जो आतंकवादी कैंप था उसको खत्म किया| हमारा कोई इरादा नहीं था कि हम पाकिस्तान के मिलिट्री बेस पर आक्रमण कर दें| जैसा आज तक वाले कह रहे थे ना कि कर दिया है। आग लगा दी। नहीं हमने कुछ नहीं किया ऐसा और ना ही हमने वहां के सिविलियन ठिकानों पे कोई भी हमला किया। एक मुझे याद है एक वो एक
टीवी चैनल पे आता है। एक वो अजीब सा पांच साल की सेवा करी है उसने सेना में। यानी पांच साल का शॉर्ट सर्विस कमीशन वाला एक आता है वो मेजर कोई और वो चिल्ला चिल्ला के कराची एयरपोर्ट पे आग लगा दो। आग लगा दी। आग लगा दी। क्या बोल रहा था पता नहीं पर भारत ने इंकार किया। देखो तो आप दूसरे देश के अंदर आतंकवादी ठिकानों पर तो हमला कर सकते हैं। पर आप किसी दूसरे देश के राष्ट्रपति पर हमला नहीं कर सकते कर सकते। किसी दूसरे देश के सरकार के हेड क्वार्टर पे आप हमला
नहीं कर सकते। पूरी तरह से इललीगल है। पूरी तरह से गैरकानूनी है। कोई मतलब मैं वही कह रहा हूं जितने अंतरराष्ट्रीय कानून है उन सबका उल्लंघन है ये हमला। मेरे ख्याल से भारत को ऑब्वियसली बहुत ही खुल के ओपनली इसका विरोध करना चाहिए। चलिए कोई प्रश्न दिख रहा है क्या? नहीं मैं ईरान का समर्थन करने की बात नहीं कर रहा। मैंने कभी भी नहीं कहा कि भारत को ईरान का समर्थन करना चाहिए। भारत को इस हमले का दोनों चीजों में फर्क है बेटा इसको समझिए। भारत को इस हमले का विरोध करना चाहिए। भारत को इस
हमले क्योंकि ईरान के साथ भारत के संबंध मधुर रहे हैं। आप अगर इतिहास में देखेंगे तो भारत के ईरान के साथ अच्छे संबंध रहे हैं। ईरान के साथ हमारा कभी कोई खास विवाद नहीं रहा। हां ईरान के पाकिस्तान के साथ ज्यादा अच्छे संबंध रहे हैं। ये बात सही है। लेकिन भारत के साथ भी ईरान की कोई समस्या नहीं रही। हमारा ईरान के जब नए राष्ट्रपति बने थे पिछले वाले की जो हेलीकॉप्टर क्रैश में मौत हो गई थी उसमें शामिल होने के लिए यार हमारे नेता गए थे। हमारी तरफ से सरकार से लोग गए थे। ईरान
के साथ हमारे मित्रवत संबंध रहे हैं। तो यार हमको इस हमले का विरोध करना चाहिए। हम ये नहीं कह रहे कि आपको ईरान का समर्थन करना चाहिए। मतलब यार ये तो एक तरफा अटैक है ना। इसमें समर्थन विरोध की बात ही नहीं है। एक देश पे दूसरा देश हमला कर रहा है। तो जो विक्टिम है आप उसको डिफेंड करोगे ना यार आप उसके आप मतलब इसमें पक्ष विपक्ष की तो बात ही नहीं है। हमले का विरोध होना बहुत जरूरी है। चलो आगे बढ़ते हैं। मेरा क्वेश्चन देख लो भाई अब आपके मित्र लोग जो हैं क्या
है यू अच्छा इजराइल यूएसए वर्सेस ईरान प्रत्यक्ष संघर्ष ने प्रॉक्सी वॉर से डायरेक्ट कंफेशन की ओर शिफ्ट दर्शाया है। हां बिल्कुल सही बात है ना। प्रॉक्सी वॉर क्या होता है कि आप क्या करते हो? एक दूसरे की आलोचनाएं करते रहते हो। छोटे-मोटे हमले करते रहते हो। यहां डायरेक्ट वॉर है। भई ईरान और अमेरिका के बीच का प्रॉक्सी वॉर तो बहुत टाइम से चल रहा था। कि प्रॉक्सी वॉर लगातार चल रहा था कि नहीं चल रहा था कि भई हम जो है होतियों के कुछ ठिकानों पे आक्रमण कर देंगे। ईरान भी होती विद्रोहियों से शिप पे
अटैक करवा रहा था। कुछ-कुछ करवा रहा था। ये प्रॉक्सी वॉर था। अब उन्होंने कहा वंस एंड फॉर ऑल एक डायरेक्ट हमला करके खत्म करते हैं। सीधा उनके सर्वोच्च नेता को ही मार कर खत्म कर दिया। तो एक प्रॉक्सी वॉर से हम कहां चले गए हैं? हम एक डायरेक्ट कंफेशन की तरफ चले गए हैं। सीधे युद्ध की तरफ चले गए हैं। इसका भारत की नीति पर क्या प्रभाव पड़ेगा? जब प्रॉक्सी वॉर होता है तो आप दोनों से मित्रता रख पाते हो। बात समझ रहे हो कि नहीं? क्योंकि प्रॉक्सी वॉर के अंदर जो अंतर्गत जो गतिविधियां होती
हैं उसमें आप क्या करते हो? आप ये कहते हो कि भ ये तो आतंकवादी लोग कर रहे हैं। जैसे मैं आपको एग्जांपल लेता हूं भारतपाकिस्तान से। भारतपाकिस्तान के बीच में प्रॉक्सी वॉर तो देखो रोज होता है। है ना? उनके कुछ आतंकवादी हमारे यहां कुछ करते हैं। हमारी तरफ से जो होता है वो मैं पब्लिक फोरम पे कह नहीं सकता। लेकिन ऐसा नहीं है कि हम भी कुछ नहीं करते। हम भी कुछ-कुछ करते हैं वहां पे। ठीक है? तो ये प्रॉक्सी वॉर तो भारतपाकि बीच में हमेशा चलता ही रहता है। ये बात क्लियर है। है ना?
प्रॉक्सी वॉर जो है वो तो हमारा निरंतर चलता है। इसमें कोई डाउट वाली बात है ही नहीं। ये बात तो हमको एकदम क्लियर है कि नहीं है? तो भारत और पाकिस्तान के बीच का एक प्रॉक्सी वॉर जो है वो तो आपको हमेशा देखने को मिलता ही है। है ना? ये बात स्पष्ट है। लेकिन तो इसीलिए क्या है? दुनिया के बहुत सारे देश जो है वो दोनों से मित्रता रखे हुए हैं। भारत से भी दोस्ती है, पाकिस्तान से भी दोस्ती है। प्रॉक्सी वॉर चल रहा है। हां जी आतंकवादियों की हम आलोचना करते हैं। पहलगाम हमले की
आलोचना करते हैं। लेकिन प्रॉक्सी वॉर चल रहा है। लेकिन अगर मान लीजिए भारत पाकिस्तान में सीधा युद्ध हो जाए देन यू विल हैव टू चूज़ अ साइड। अगर भारतपाकिस्तान में सीधा युद्ध हो जाए कि भैया हवाई जहाज एक दूसरे पे बम गिरा रहे हैं तो देशों को एक पक्ष चुनना पड़ सकता है। तो भारत भी अब तक क्या करे हुए था? वेस्ट एशिया में सबके साथ दोस्ती करे हुए था। अब भारत के ऊपर भी यह जिम्मेदारी आएगी। ये एक भारत के ऊपर क्या कहना चाहिए? दबाव आएगा कि आपको अब इसमें साइड चुननी पड़ेगी कि आप
जो है भाई किसी एक किस साइड पे आप हैं वो एक साइड आपको चुननी पड़ेगी। ठीक है? चलो बहुत अच्छा सवाल। इट वास अ वेरी गुड क्वेश्चन। चलिए आगे चलते हैं। खतरनाक उद्योगों की सुरक्षा। गवर्नेंस से जुड़ा आर्टिकल है भाई। यार देखो मैं इसी क्लास में पहले कई बार पढ़ा चुका हूं कि पिछले अगर आप साल भर को देखें तो ऐसी बहुत सारी घटनाएं भारत में हुई हैं जहां पर जो हमारे खतरनाक उद्योग हैं जो हमारी डेंजरस इंडस्ट्रीज हैं उनमें किसी ना किसी तरह के धमाके हुए हैं। आग लगी है। तो अब ऐसी दो घटनाएं
दो दिन में ऐसी दो घटनाएं फिर से हुई हैं। आंध्र प्रदेश के काकीनाडा जिले में एक पटाखों की फैक्ट्री थी। वहां पर धमाका हो गया। 20 लोगों की मौत हो गई। काफी लोग गंभीर रूप से घायल भी हैं। मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। लेकिन 20 लोग मर चुके हैं। यह तय है। 20 लोग वहां पे आंध्र प्रदेश में मारे गए। फिर आज के अखबार में हुआ है। ये ये कब हुआ? ये परसों हुआ। आंध्र वाली घटना परसों हुई। कल को महाराष्ट्र के नागपुर में एक हथियार बनाने की फैक्ट्री में धमाका हुआ और उससे
18 लोगों की मौत हो गई। यहां पर भी 20 से ज्यादा लोग गंभीर तौर पे घायल हैं। यानी कि जो हमारे मरने वालों की संख्या है उसमें और वृद्धि हमको देखने को मिल सकती है। बात समझ में आई? तो ये दो घटनाएं जो है वो क्या एक बार फिर से इस बात को आउटलाइन करती हैं कि यार भारत के अंदर जो औद्योगिक सुरक्षा है वो अभी तक बहुत क्वेश्चनेबल है। उस पर अभी तक बहुत बड़े-बड़े सवालिया निशान लगे हुए हैं और खासतौर पर खतरनाक उद्योगों की सुरक्षा देखो एक तो नॉर्मल उद्योग है। देखो एक्सीडेंट तो
कहीं भी हो सकता है। आप भाई कुछ आप कुछ भी बना रहे हो ना आप इलेक्ट्रिक अप्लायंस बना रहे हो। आग तो वहां भी लग सकती है। शॉर्ट सर्किट वहां भी हो सकता है। लेकिन संभावना जो है वो कम होती है। लेकिन जहां पर आप विस्फोटक पदार्थ बना रहे हो जैसे आपको याद होगा कुछ समय पहले केमिकल फैक्ट्री में धमाका हुआ था। है ना? तो केमिकल फैक्ट्री जैसे आपकी होती है जहां पे आपके विस्फोटक रसायन बनते हैं। आपकी केमिकल फैक्ट्रीज हो गई। आपकी हथियारों की फैक्ट्री हो गई। आपके पटाखों के कारखाने हो गए। यार यहां
पर तो जो प्रोडक्ट बन रहा है वही प्रोडक्टिव विस्फोटक है। तो इनकी सुरक्षा का तो बहुत ज्यादा ऑडिट होना चाहिए ना। इनकी सुरक्षा की तो बहुत ज्यादा जांच होनी चाहिए और मैं आप में से हो सकता है कोई इस तरह के शहरों में रहता हो जहां पर इस तरह के खतरनाक उद्योग हैं। आप जानते हो कि ये ऑडिट कितने होते हैं और किस तरह से होते हैं। मैं आपको सच्ची बात बता रहा हूं। मैं एक इंडस्ट्रियल रिसर्च इंस्टट्यूट में काम करता था आज से बहुत साल पहले। तो वहां पर हम लोग क्या करते थे? इंडस्ट्रियल
लेवल बोईलर खरीदते थे। बोईलर बोईलर जानते हो मतलब उसमें बेटा मतलब गैल्वेनो पानी होता है जो कि उबलता है पूरे टाइम और भयानक दबाव भारी प्रेशर उसमें होता है। ठीक है? तो मैं अपनी आंखों से मैंने वो डील होते हुए देखी है कि बोईलर को हम लीगली नहीं खरीद रहे थे। क्योंकि लीगली खरीदने में क्या होगा? फिर सरकार जो है सरकारी अधिकारी आके उसको चेक करेंगे। उसकी जांच करेंगे और सबका देता था कि अरे रिश्वत देनी पड़ती है ये देना पड़ता है तो उसको हम एक बोईलर की तरह खरीदने की बजाय किसी और नाम से
खरीद रहे थे कि हम टैंक खरीद रहे हैं उसको बनवा रहे जो बनाने वाला था उससे बात कर रहे थे बोईलर बना के देना है यार तुम्हें बात समझ रहे हो कि नहीं तो हमारे यहां डेंजरस जो काम होते हैं उनको लेके नियमन उनको लेके रेगुलेशन जो है वो इतने कम है या अगर रेगुलेशन है तो वो इतने खराब तरीके से फॉलो होते हैं कि इस तरह के इंसिडेंट हमारे यहां बहुत कॉमन हो गए हैं। तो अब आप ये दोबारा कैसे आ गई ये स्लाइड हां तो आप देख सकते हैं ऐसे उद्योगों में सुरक्षा ऑडिट
के स्पष्ट नियम होने बहुत जरूरी है कि एक तो यार आपका आपका सेफ्टी ऑडिट कैसे होगा उसके रूल एकदम क्लियर होने चाहिए उसमें कोई डाउट नहीं होना चाहिए और दूसरा ये कि उनका सख्ती से पालन होना चाहिए। भाई एक आप तो आपके रूल्स क्लियर होने चाहिए और उन रूल्स का जो है आपका पालन बहुत ही सख्ती से होना चाहिए। इसमें कोई डाउट नहीं है। इसमें कोई ऐसा नहीं होना चाहिए कि भाई ये देखो नियम तो हमारे यहां बहुत तरह के होते हैं। लेकिन उनका पालन कैसे होता है आपको पता ही है। तो ये बहुत जरूरी
है। तो पिछले कुछ समय से आपको मैंने बताया आपकी केमिकल फैक्ट्री हो गई, विस्फोटक फैक्ट्री हो गई, पटाखे वगैरह के कारखाने हो गए। इनमें आग लगने और धमाके होने की संख्या में बहुत ज्यादा वृद्धि हुई है। ऐसे मामले बढ़े हैं। इनकी सुरक्षा के लिए केंद्र और राज्य दोनों के स्तरों पर नियम है। लेकिन ऑडिट प्रक्रिया जो है उसकी नियमितता कम है। बहुत सारे फैक्टरों में पिछली बार जब ऐसा एक वारदात हुई थी। भूल गया कहां पर हुई थी? महाराष्ट्र में ही कहीं हुई थी। महाराष्ट्र में ही ऐसी एक वारदात हुई थी। तो पाया गया कि
उस फैक्ट्री का पिछले दो साल से कोई ऑडिट ही नहीं हुआ। जहां पे विस्फोटक जहां पे आपके एक्सप्लोसिव केमिकल बन रहे हैं उसके ऑडिट की कोई रिपोर्ट नहीं है पिछले दो साल की। यार दो-दो साल तक आप ऑडिट नहीं करोगे अगर ऐसी फैक्ट्रियों का कि भाई सेफ्टी प्रिकॉशन ठीक से लिए जा रहे हैं कि नहीं? तो कैसे होगा? फिर तो आप इंतजार ही कर रहे हो ना। अभी क्या होता है? देखो ऐसे हमारे यहां क्या होता है? ऐसे मामले हुए। विस्फोट हो गया। लोग मर गए। अब मुख्यंत्रियों ने जांच कमेटी बना दी है। राज्य की
सारी फैक्ट्रियों की जांच के आदेश दे दिए हैं। अब दे दिए। पर अब तो नुकसान हो गया ना। तो क्या इस तरह का ऑडिट होने के लिए लोगों का मरना जरूरी था? सवाल फिर से वही आता है कि क्या हमारे यहां जब तक कुछ लोग मरते नहीं हम इस तरह की ऑडिट इस तरह की चीजें जो हैं उनको उनको हम पहले नहीं रोक सकते क्या? उनको रोकने के लिए पहले कदम नहीं उठाया जा सकता क्या? तो ऐसी सुरक्षा ऑडिट जो है इनके लिए एक रेगुलैरिटी लानी चाहिए। अच्छा इसके अलावा यार जो लोग इन रेगुलेटरी पोस्ट्स
पे होते हैं वो बड़े अमीर होते हैं। उसका रीज़न क्या है? क्योंकि इनमें बहुत ज्यादा रिश्वत चलती है कि भाई आप रेगुलेटरी पद पे आ गए। आप वहां पर गए। ये बहुत कॉमन है। वहां पे इंस्पेक्टर वगैरह जो पहुंचता है देखने के लिए वो बेसिकली फैक्ट्री से पैसे लेता है। कोई ऑडिट नहीं करता। तो ये भी बहुत जरूरी है कि इस ऑडिट का प्रोसेस जो है एक तो ये ऑडिट की प्रक्रिया की नियमितता सुनिश्चित की जानी चाहिए कि हर 3 महीने में हर छ महीने में जितना भी एक टाइम पीरियड आप फिक्स करो उसमें ऑडिट
होना ही चाहिए। यह ऑडिट की रिपोर्ट जो है सार्वजनिक तौर पर सबके देखने के लिए अवेलेबल होनी चाहिए। भ आपने एक फैक्ट्री का ऑडिट किया उसकी रिपोर्ट पब्लिकली अवेलेबल क्यों नहीं है? उस फैक्ट्री का अगर कोई वेबसाइट है या फिर अगर आपके औद्योगिक सुरक्षा मंत्रालय आपका उद्योग मंत्रालय की वेबसाइट है वहां पर वो ऑडिट रिपोर्ट अवेलेबल होनी चाहिए ताकि हर कोई देख पाए कि ऑडिट हुआ है ठीक से। और दूसरा ये ऑडिट का प्रोसेस जो है इसमें भारी भ्रष्टाचार होता है। इस भ्रष्टाचार को रोकने के लिए क्या करना चाहिए? गैर सरकारी ऑडिट की प्रक्रिया को
भी हमको शुरू करना चाहिए। हमको क्या करना चाहिए? जो कुछ आपके और जैसे सामाजिक ऑडिट कि आप आसपास के लोग हैं उनको भी ऑडिट के प्रोसेस में शामिल करो जो इस प्रोसेस से प्रभावित होंगे। मजदूरों को शामिल करो आप ऑडिट में। आप जो है बाकी और सामान्य लोग हैं उनको भी शामिल करो ताकि जो है वो इस ऑडिट के प्रक्रिया को आगे बढ़ा पाएं। ये बात स्पष्ट हुई कि नहीं? तो इस ऑडिट के प्रोसेस को हमको और मजबूत करना पड़ेगा। वरना इस तरह की अगली घटना फिर होगी। फिर मैं आपको सेम चीज पढ़ाऊंगा। फिर सेम
ज्ञान दूंगा। हम लोग फिर दुख जताएंगे। फिर मुख्यमंत्री जो है मुआवजे की घोषणा कर देंगे। फिर जांच के लिए समिति बन जाएगी और फिर हम दोबारा अगली घटना का इंतजार कर रहे होंगे। तो इसके लिए बेहतर ये है कि इसके प्रोसेस को हम इंप्रूव करें बजाय इसके शोक बजाय इस पर शोक जताने के। ठीक है? चलो चार आर्टिकल्स चार तो नहीं हुए लेकिन दो बचे हैं अब आज के। आज हुए तो दो ही हैं क्योंकि ईरान वाला बहुत लंबा था। तो भाई जो मेरी अपील है आज हम 1000 से काफी ऊपर हैं अभी ऑलरेडी। तो
भाई जितने लोग लाइव हैं वो लाइक कर दीजिए और कृपया कम से कम एक व्यक्ति को और जोड़िए आप इस क्लास से। यह मैं आपसे आग्रह करूंगा ताकि हम लोग जो है इस परिवार को और बढ़ा पाएं। अभी हम 1000 के आसपास 1000 से थोड़े ऊपर हैं आज हम। लेकिन मैं चाहता हूं कि हम कम से कम 2000 लोग लाइव इस क्लास को रोज देखें। तो भाई वो नंबर तक हम तब पहुंचेंगे जब आप इस क्लास में और लोगों को लेकर आएंगे। यही हमारा मार्केटिंग है। बस एक ही तरह का मार्केटिंग है कि मैं आपसे
ही बोलता हूं आप और बच्चों को बताओ और बड़े लोगों को बताओ। जिसको बताना है बताओ। बस यही मार्केटिंग है और कोई मार्केटिंग नहीं है। चलो अब आते हैं 16वें वित्त आयोग पर। तो भाई बड़ा इंटरेस्टिंग आर्टिकल है। कॉम्प्लिकेटेड है। इकोनॉमिक्स लोगों को समझ में कम आती है तो ध्यान से सुन लेना। है ना? ये क्योंकि यहां पे करंट अफेयर्स से ही आपका पूरा रिपोर्ट खत्म हो जाएगा। यहीं पे आपकी पूरी तैयारी हो जाएगी। कुछ और करने की जरूरत बचेगी नहीं। तो सी रंगराजजन ने एक आर्टिकल लिखा है। आज ये 12वें वित्त आयोग के वो
खुद चेयरमैन थे। आरबीआई के पहले गवर्नर रहे हैं। हां जी। तो इन्होंने क्या कहा कि भारत में क्या होता था? 14वें वित्त आयोग तक। अभी जो वित्त आयोग आपका अरविंद पनागारिया की अध्यक्षता में जिसने अपनी रिपोर्ट दी है वो 16वां वित्त आयोग है। जस्ट फॉर द कॉन्टेक्स्ट बता रहा हूं। हर 5 साल में एक आता है और ये 16वां था तो ताकि आपको टाइमलाइन का अंदाजा रहे। तो 14वां वित्त आयोग जो था उसने राज्यों के राजस्व बंटवारे को बहुत तेजी से बढ़ाया था। तब तक राज्यों को क्या था? कुल टैक्स रेवेन्यू का 32% मिलता था।
14वें वित्त आयोग ने सीधा उसको 42% कर दिया था। ठीक है जी। 14th आपका फाइनेंस कमीशन ने क्या कर दिया कि हम 32 नहीं साहब तुम्हें 42% देंगे। ठीक है? राज्य खुश हो गए। लेकिन तब तक एक और बड़ा बदलाव किया गया था। वो बदलाव क्या था कि तब तक क्या होता था? राज्य अपनी योजना बनाते थे। है ना? ये बात समझ रहे हो कि नहीं? तो राज्य क्योंकि उस टाइम क्या था? योजना आयोग होता था। तो राज्य अपनी योजनाएं बनाते थे और उन योजनाओं के लिए केंद्र से अनुदान मांगते थे। नरेंद्र मोदी की सरकार
आई। उन्होंने योजना आयोग खत्म कर दिया। तो उन्होंने कहा कि ये राज्यों को जो हम अनुदान देते हैं योजनाओं के लिए इसको खत्म कर देंगे। तो एक तरह से 32 से 42 किया गया नो डाउट लेकिन राज्यों को जो योजना के लिए अनुदान मिलता था ग्रांट मिलता था वो खत्म कर दिया गया तो तकरीबन उतना ही रह गया लेकिन तब भी फर्क पड़ा आप देखेंगे उस टाइम जो ग्रॉस बटता था 28 28% से बढ़ के वो 37 38% तक चला गया ठीक है उसके बाद हां जी तो क्या हुआ राज्यों की योजनाओं के लिए मिलने
वाला अनुदान जो है उसको बंद कर दिया कि यार अब हम राज्यों के हम हम योजना आयोग में विश्वास ही नहीं करते। उसको खत्म कर रहे हैं। तो ये अनुदान को बंद कर दिया गया। बाद में फिर क्या हुआ? जेएन के राज्य नहीं रहा। एक राज्य कम हो गया हमारे यहां। जम्मू कश्मीर राज्य होता था उसको हमने नीचे ले आए। उसका स्तर उसको केंद्र शासित बना दिया। है ना? तो इसीलिए 42 से इसको घटा के 41 कर दिया गया। भाई जब एक राज्य कम हो गया तो जितना तुमको शेयर मिलता था राज्यों को वो भी
तो कम होगा। लॉजिकल बात है। है ना? तो जेएन के एक राज्य हमने कम किया तो हमने 42 से घटा के केंद्र और राज्य के बीच का बंटवारा जो है वो 41 कर दिया। ठीक है जी। अब क्या हुआ? अब इसमें क्या हुआ? केंद्र सरकार जो है इससे खुश नहीं थी। रंगराजन कहते हैं कि केंद्र सरकार को ऐसा लगता था कि यार राज्यों को हम ज्यादा पैसा दे रहे हैं। हमको इतना पैसा नहीं देना चाहिए और केंद्र सरकार अपने पास ज्यादा पैसा रखना चाहती थी। तो इस एक विचार के साथ केंद्र सरकार ने क्या किया?
सेस और सरचार्ज को बढ़ा दिया। सेस और सरचार्ज क्या होता है? जो आपके टैक्स पर टैक्स लगता है। और आपको पहले भी कई बार बता चुका हूं कि सेस और सरचार्ज जो होता है वो कंप्लीटली सेंटर के पास रहता है। साहब सेस और सरचार्ज का कोई बंटवारा नहीं होता। वो किसी भी तरह से राज्य के पास नहीं जाता। सेस और सरचार्ज जो है वो कंप्लीटली केंद्र सरकार के ही पास रहता है। ठीक है जी। सेस सरचार्ज जो है पूरी तरह से केंद्र के पास होता है। तो इनको केंद्र सरकार ने बढ़ा दिया कि सेस और
सरचार्ज हम बना के रखेंगे। ठीक है? तो अब क्या हुआ? वित्त आयोग से इस बार जो अरविंद पानागारिया की अध्यक्षता में वित्त आयोग था सारी की सारी राज्य सरकारें यह डिमांड कर रही थी कुछ एक तो बीजेपी की भी राज्य सरकारें डिमांड कर रही थी कि सर सेस और सरचार्ज को भी हमारे से बांटना चाहिए सर ये तो गलत बात है। केंद्र सरकार क्या करती है सेस और सरचार्ज इतना बढ़ा देती है कि सारा पैसा वहां उनकी जेब में रह जाता है तो हमारे साथ ज्यादा पैसा बंटता ही नहीं है। लेकिन पानागारिया ने आयोग ने
एक बीच का मार्ग निकालने की सलाह दी। आयोग ने क्या कहा? देखो सेस और सरचार्ज में अगर तुम्हें हिस्सा चाहिए तो ये जो 41% है इसको हमें इसको कम करना पड़ेगा। तो बेसिकली कान यहां से ना पकड़ के यहां से पकड़ लिया। बात वही हो गई। तो इन वित्त आयोग ने कहा कि देखो हम इसको तो हम कह सकते हैं केंद्र सरकार को कि आप से सरचार्ज का भी बंटवारा कीजिए। पर फिर केंद्र सरकार इस 41 को कम करेगी। यहां 41 को हम कम कर देंगे। इसको हम 40 या 39 ऐसा कुछ कर देंगे। ये
राज्यों को स्वीकार्य नहीं था। तो ऑब्वियसली इस पर कोई बात हो नहीं पाई। इस पर कोई सहमति बन नहीं पाई। अब देखिए एक इंपॉर्टेंट बात ये डाटा मैं चाहूंगा कि आप लोग अपने उत्तरों के लिए याद रखें कि देखो नियम ये कहता है कि इतने परसेंट बेटेगा उतने परसेंट बेटेगा। लेकिन जैसे फेस और सरचार्ज है। केंद्र सरकार बहुत सारा पैसा वहां से कमा लेती है। उसको नहीं बांटती है। तो इफेक्टिवली कुल मिला के जितना पैसा होता है उसमें से कितना राज्यों को जाता है उसका एक्चुअल डाटा 14वें वित्त आयोग में राज्यों को वास्तविक जो ट्रांसफर
किया गया था वो 35.6% किया गया था। करना कितना था? 42 किया कितना गया? 35.6 15व में 41 करना था। 34.4 किया गया। ठीक है? यानी कि सेस और सरचार्ज को अगर आप जोड़ लें टोटल आपके वॉल्यूम में कि कितना पैसा है तो उसका इतना ही राज्यों को मिल रहा है और 202627 ये जो वर्ष है इसमें केवल 32.7% ही राज्यों को मिल रहा है। यानी कि निश्चित तौर पर राज्यों का जो रेवेन्यू शेयर है राजस्व में जो हिस्सा है वो नीचे आ रहा है। इसमें कोई डाउट नहीं है। और ये बड़े नंबर्स हैं। सिग्निफिकेंट
नंबर है। अगर दो-ती% हिस्सा नीचे आ जाता है तो राज्यों को इससे नुकसान होता है। अब इन्होंने ये भी कहा आगे कि राज्य और राज्य में राज्यों में जो आपसी बंटवारा भी हम कर रहे हैं उसमें जो नए स्टैंडर्ड बनाए हैं उससे कई राज्यों को नुकसान हुआ है। तो हमको ये करना चाहिए था उसके लिए भी एक राजस्व नुकसान सहायता लानी चाहिए थी कि भाई किसी राज्य को अगर मान लो नए स्टैंडर्ड से नुकसान हुआ है तो जितना नुकसान हो रहा है उसकी केंद्र सरकार अगले साल दो साल तक भरपाई कर देगी ताकि राज्य को
इमीडिएटली झटका ना लगे। ऐसा कुछ भी हमने नहीं किया। ये बात यहां पर रंगराजजन साहब कहते हैं। ठीक है जी। सिंपल सा एकदम बेसिक सा आर्टिकल है। चलो आज का आखिरी आर्टिकल है। आप लोगों से जुड़ा हुआ है स्किल डेवलपमेंट से। तो बहुत ही इंपॉर्टेंट है। बहुत ही जरूरी आर्टिकल। मैंने बताया ना एक नया इनोवेटिव सॉल्यूशन भी बताता है। इसको देखेंगे। उसके पहले एक बार सवाल देख लेते हैं। व्हाट कैन इंडिया डू टू इंक्रीस द इंक्रीस द स्टेट कैपेसिटी? आई हैव नो आईडिया बेटा। काश मेरे को पता होता। मैं सोच के बताता हूं। ऐसा मैंने
सोचा नहीं इस पर। लेकिन यह कमी है। चलो कोई सवाल है क्या? जल्दी से यार कुछ चलिए कोई क्या इससे वर्ल्ड वॉर का खतरा है। चल ही रहा है वर्ल्ड वॉर जैसा सही हो गया। मतलब बस मेरे को डर है नाभिकीय हथियारों का। बाकी तो अब बाकी सारे तो अब ट्रंप ने नॉर्मलाइज कर दिए हैं। बाकी हर तरह के युद्ध जो हैं। बस एक नाभिकीय हथियार का खतरा लगता है मेरे को। चलो कोई सवाल नहीं है। आखिरी आर्टिकल पे आते हैं जल्दी से। अच्छा हमारी क्लास लंबी भी हो गई है। कोई बात नहीं। भारत में
कौशल विकास की समस्या पे आते हैं। इकोनॉमिक्स से जुड़ा हुआ आर्टिकल है। देखो हमको पता है भारत के पास एक जनसंख्यिकीय लाभांश है। जनसंख्यिकीय लाभांश का मतलब क्या होता है? युवा आबादी। कि हमारे पास एक बहुत बड़ी संख्या में युवा जनसंख्या है। युवा आबादी है। ये बात हम जानते हैं। ठीक है ना? जी। हमारी जो आबादी है वो बहुत बड़ी संख्या में युवा लोगों से भरी हुई है। इस बात को हम एक बार समझते हैं। ये क्या दब गया मेरे से? हां। तो भारत में जो है एक युवा चलिए इसको बदल देंगे अभी। तो भारत
में क्या है? एक युवा जनसंख्या जो है वो बहुत बड़ी संख्या में है। युवा जनसंख्या का मतलब क्या है? कि हमारे देश की कुल आबादी जो है उसमें युवाओं का जो प्रतिशतता है, युवाओं की जो परसेंटेज है वो बहुत ज्यादा है। और चूंकि हमारे यहां जनसंख्या की वृद्धि बहुत तीव्र गति से हो रही थी। तो हम ये मान सकते हैं कि ये युवा आबादी जो है कि ये युवा लोग जो हैं सही खोल लेते हैं। स्लाइड अच्छा नहीं लगता ऐसे। हां गलती से स्लाइड हो गया ऊपर मेरे से। हां जी। तो ये युवा आबादी जो
है ये हमारे यहां बहुत बड़ी संख्या में है और इस युवा आबादी को मतलब हम इसका लाभ उठाना चाहिए। जो युवा है वो काम करेगा। वो एक्टिव रहेगा इकोनॉमिक तरीके से। तो ये हमारे पास अगले 2025 साल का ही विंडो है। इसका हमें फायदा उठाना चाहिए। मैं आपको पहले ही बता चुका हूं कि लेकिन युवा का फायदा आप तब उठा सकते हो जब उसके पास स्किल सेट हो। जब उसके पास कौशल है। अगर उसके पास कौशल ही नहीं है, स्किल सेट ही नहीं है तो कैसे फायदा उठाओगे? अरे बेरोजगार युवा थोड़ी ना किसी काम का
है। बात समझ रहे हो कि नहीं? युवा काम का वो है ना जिसके पास स्किल है जो नौकरियां कर सकता है, काम कर सकता है, आर्थिक उत्पादन कर सकता है। तो यहां पर लेखक ये कहते हैं कि हमारे साथ एक मेजर प्रॉब्लम क्या है कि कौशल पर फोकस करने के लिए हमारी कोई कंसिस्टेंट पॉलिसी है ही नहीं। हमने कोई सतत नीति बनाई ही नहीं। वो कहते हैं बजट में हमने क्या कहा? एक इंटर्नशिप योजना की घोषणा करी। उसमें हमने केवल 5% जो जितना पैसा अलॉट किया था उसका खाली 5% खर्च हुआ। भाई योजना बनाई जितना
पैसा उसके लिए रखा गया था केवल 5% का खर्चा हुआ। इसके अलावा यह कहते हैं कि भारत सरकार का जो अपना जो कैग होता है कैग के ऑडिट में क्या पाया गया? जो भारत की स्किल के क्षेत्र में जो फ्लैगशिप योजना है प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना उसमें भारी गड़बड़ियां पाई गई। 2025 में ऑडिट किया गया था। तो जिन अकाउंट्स में पैसा भेजा गया उनमें से 9.5% बैंक अकाउंट बेटा फर्जी थे। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में जिन अकाउंट्स में पैसा भेजा गया उनमें से 94% अकाउंट फर्जी थे। अब हमारी मीडिया सवाल नहीं पूछती वरना ये भ्रष्टाचार
नहीं है क्या? ये भ्रष्टाचार नहीं है। 94% अकाउंट एक्सिस्ट ही नहीं करते जिनमें पैसा गया है। तो आप बात समझ रहे हैं कि नहीं? तो इस तरह की चीजें हमारे यहां देखी गई। तो अब इसमें यहां पे लेखक ये कहते हैं कि यार भाई अभी कोई पूछा था स्टेट कैपेसिटी कि यार देखो एक तो सरकार एक ऊपर से बैठ के केंद्रीय तरीके से तय कर दे कि भाई ये वाला कौशल का हम विकास करेंगे और ऐसे करेंगे ये नीति अपने आप में ठीक नहीं है। सरकार को क्या करना चाहिए? एक अपनी निर्धारित योजना की बजाय
छात्रों को स्किल लोन दे देने चाहिए। ये बड़ा इंटरेस्टिंग इन्होंने समाधान दिया कि बच्चे को चुनने दो कि उसे कौन सी स्किल चाहिए। आप मत चुन के दो उसको। लेट द स्टूडेंट डिसाइड। आप क्या करो? बच्चे को स्किलिंग के लिए लोन देना शुरू कर दो। तो बच्चा उसके आसपास उसके क्षेत्र में या उसके मार्केट प्लेस में जिस स्किल की डिमांड ज्यादा है, बच्चा उस स्किल पे काम कर लेगा। सीधी-सीधी बात है। तो आप क्या करो? आप लेट द स्टूडेंट चूस। बच्चे को चुनने दो कि उसे कौन सी स्किल की आवश्यकता है। और इसके लिए आप
बच्चे को लोन देना शुरू कर दो। आपको लगता है कि इस पैसे का दुरुपयोग होगा। अब आप में से कुछ लोग पूछने वाले होंगे सर ये तो फिर लोग पैसा ले लेंगे गबन कर देंगे। एक बहुत अच्छा तरीका है। वाउचर तरीका है। आप वाउचर माध्यम का उपयोग कर सकते हो। वाउचर माध्यम का उपयोग क्या है? आप उसे कैश मत दो। आप उसे जैसे क्या कर दो? ₹2000 का वाउचर दे दो। ₹5000 का वाउचर दे दो। वाउचर का मतलब क्या है? यह वाउचर वहीं चलेगा। जैसे होता है ना वाउचर का जैसे आप कभी कहीं जाते हो
तो आपको टोकन मिलता है। आप किसी चाट की दुकान पर गए हो तो चाट की दुकान वाला आपको पैसे लेकर टोकन दे देता है और वो टोकन जो है आप जब उसको दोगे जो आदमी को तो वो आपको चाट देगा। ऐसा होता है कि नहीं होता है? अब वो टोकन लेके आप पास की दुकान से ब्रेड नहीं खरीद सकते। वो टोकन खाली उसी दुकान पे चलेगा। वही वाउचर सिस्टम है। कि सरकार ने क्या किया? आपको ₹5,000 का वाउचर दे दिया। अब यह वाउचर किसी शराब के ठेके पे नहीं चलेगा। यह वाउचर किसी और ट्रेन में
नहीं चलेगा। ये वाउचर खाली किसी स्किलिंग इंस्टट्यूट पे ही चलेगा। खाली स्किलिंग इंस्टट्यूट वाला इस वाउचर को इकट्ठा करेगा। आपको कोर्स दे देगा और फिर इस वाउचर को सरकार से कैश करा देगा। तो आप वाउचर मेथड के माध्यम से भी लोगों को मदद दे दे सकते हो ताकि बच्चे अपना स्किल खुद चूज़ कर पाएं। ठीक है? इसके अलावा अगर हमारे देश में स्किल का लेवल बढ़ता है, कौशल का लेवल बढ़ता है तो सबसे ज्यादा फायदा हमारे इंडस्ट्रीज को होगा। तो देश के जो संगठित उद्योग हैं जो हमारी ऑर्गेनाइज्ड इंडस्ट्री हैं उन पर कौशल सेस लगाया
जा सकता है। आप क्या कर सकते हो एक उन पर स्किल सेस लगा सकते हो कि यार आप जो टैक्स देते हो थोड़ा सा एक्स्ट्रा दो क्योंकि उससे हम लोगों की स्किलिंग करेंगे। स्किलिंग से आपको भी तो फायदा होगा। भाई उद्योग भी तो सफर करते ही हैं इस बात से कि हमको ढंग के लोग नहीं मिलते। आप अगर लोगों को स्किल सेट सिखाओगे तो उद्योगों को फायदा होगा ही होगा। इसमें कोई डाउट नहीं है। तो कौशल विकास में चयन का अधिकार विद्यार्थियों को होना चाहिए और इसका जितना विकेंद्रीकरण आप कर सकते हो उतना बेहतर है।
ये तर्क है इस लेखक का। मैं मतलब मेरे को बढ़िया लगा ये आर्टिकल। एक नया इन्होंने अप्रोच बताया इसीलिए मैंने आपको ये आर्टिकल पढ़ाया। चलिए साहब। अच्छा महाराष्ट्र में मुंबई में होली कल है। मुझे पता है देश में इस बार होली को लेकर बड़ा कंफ्यूजन है। कुछ जगहों पर परसों है। कुछ जगहों पर कल है। लेकिन मेरे यहां जहां मैं रहता हूं मुंबई में होली कल है। तो कल ये क्लास नहीं होगी। ठीक है? कल ये क्लास नहीं होगी। परसों मुझे पता है आप में से ज्यादातर लोग होली मना रहे होंगे। लेकिन परसों मैं ये
क्लास करूंगा। ठीक है? क्योंकि मेरी होली नहीं होगी। तो मेरी मेरी छुट्टी जो है वो मेरे त्यौहार के कारण होगी और ये बड़ा एक इस बार कंफ्यूजिंग है कि होली कब है और कब नहीं है। तो कल मैं ये क्लास नहीं ले पाऊंगा और परसों लूंगा। ठीक है? इन दोनों में से किसी एक दिन हिंदू भी नहीं आएगा। तो जिस दिन का भी हिंदू आएगा वो मैं 4 तारीख को पढ़ाऊंगा। तो अगर 4 तारीख को आप लोग होली का पर्व मना रहे हो तो आप लोग जो है शाम शाम को देख लेना। कोई दिक्कत नहीं
है। रिकॉर्डिंग देख लेना। कल आप लोग जो है कल मैं ये क्लास नहीं कर पाऊंगा। कल होली का पर्व है। तो असंभव है मेरे लिए क्लास कर पाना। सुबह शुरू हो जाती है। होली हमारे यहां बहुत शोर भी होता है तो पॉसिबल नहीं है। ठीक है? तो भाई सबसे पहले तो मैं आपको शुभकामनाएं देना भूल गया कि भाई आप सभी को आपके परिवार जनों को होली की बहुत-बहुत शुभकामनाएं यार। बहुत बढ़िया आपका साल जाए। बहुत अच्छा आपका त्यौहार जाए। किसी भी त्यौहार पे यह बात याद रखिए जो खेलना चाहता है उसके साथ ही खेलिए। जो
नहीं खेलना चाहता उसके साथ मत खेलिए। है ना? त्यौहार जो होते हैं वो हंसी खुशी के लिए होते हैं। सेलिब्रेशन के लिए होते हैं। किसी को परेशान करने के लिए नहीं होते। है ना? खुशी के साथ मनाइए। परिवारों के साथ मनाइए। दोस्तों के साथ मनाइए। है ना? किसी को जबरदस्ती क्यों खिलवा रहे हो यार त्यौहार? है ना? अच्छा सा शांति बनाकर रखो। इस त्यौहार में कई बार आपराधिक तत्व भी आ जाते हैं। तो सुरक्षित भी रहिए। अपने आसपास के लोगों को खास तौर पे महिलाओं को सुरक्षित रखिए। महिलाएं जो है खास तौर पे ध्यान रखें
इस बात का और अच्छे से यार मतलब अच्छे माहौल में त्यौहार मनना चाहिए। है ना? फालतू में अननेसेसरी इललीगलिटी नहीं हो। बहुत ज्यादा जरूरी है। तो आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं होली की और बढ़िया से खेलिए, एंजॉय कीजिए। कोई दिक्कत नहीं है। सुरक्षित रहिए। है ना? थोड़ा सड़कों वड़ों पर ट्रैफिक ज्यादा होता है। समस्याप्रद होता है। तो आप लोग युवा लोग हैं। मैं कई बार देखता हूं कि हर बार कुछ युवाओं को चोट लग जाती है। अप्रिय घटनाएं हो जाती है। मत करो वो सब। कोई फायदा नहीं। जिंदगी बहुत लंबी है। एक भूल एक दुर्घटना
जो होती है वो हाथ पैर खराब कर देती है। लंबे समय के लिए मत करो ऐसा कुछ। है ना? आराम से बढ़िया खुशी के साथ मनाओ यार। त्यौहार खुश रहने का मौका है। ऐसे फालतू में जीवन में संकट लाने का मौका नहीं होता। ठीक है? कल नहीं मिलेंगे। आज रात प्लस क्लास होगी। कल मेरी कोई क्लास नहीं है। परसों मेरी हिंदू होगी। है ना? मैं आपको अभी बता रहा हूं। 3 तारीख को नो क्लास, 4 तारीख को क्लास होगी। ठीक है? तो आपके यहां होली हो सकता है चार को हो तो आप लोग लेकिन उसको
बाद में देख लेना फिर। ठीक है जी। चलो चलिए सत्य कथन की पहचान कीजिए। ईरान में मुख्यतः शिया मुस्लिम रहते हैं। ये बात सही है। ईरान हुरमुस की खाड़ी के किनारे बसा हुआ है। ये बात भी आपकी सही है। दोनों कथन हमारे सही हैं। सी हमारा सही विकल्प हो गया। अह सत्य कथन की पहचान कीजिए। भारत में राज्यों की वित्त में हिस्सेदारी को 14वें वित्त आयोग ने बढ़ाया था। ये बात सही है। 32 से सीधा 42 किया था। ठीक है? सेस और सरचार्ज में राज्यों को हिस्सा नहीं मिलता है। ये भी सही है। तो हमारे
दोनों कथन सही हैं। इसका भी उत्तर हमारा सी हो गया। हमारा आज का सब्जेक्टिव सवाल क्या है? ईरान पर हमला वैश्विक इतिहास की एक बहुत बड़ी घटना है। इसके संभावित प्रभावों की चर्चा कीजिए। बता ही दिया आपको इतने सारे प्रभाव। तो जो आज के डिस आज का डिस्कशन है कि इसके क्या-क्या प्रभाव पड़ सकते हैं? दुनिया की राजनीति को कैसे यह परमानेंटली बदल सकता है ये आपको बताना है। ठीक है? चलिए साहब तो एक बार फिर आप सभी को होली की बहुत-बहुत शुभकामनाएं और प्लस क्लास के बच्चों से रात को 9:00 बजे मुलाकात होगी। बाकी
लोगों से हम लोग अब जो है हिंदू वाले बच्चों से हम परसों मिलेंगे।