देखिए वर्ल्ड वॉर टू के बाद से अमेरिका सारे देशों को कहता हुआ आ रहा है कि देखिए भाई हम कोई एंपायर वगैरह नहीं है। हम तो बस डेमोक्रेसी चाहते हैं, पीस चाहते हैं। जब भी किसी को इनवेट करते हैं तो पीस और डेमोक्रेसी के लिए करते हैं। लेकिन लगता है 2026 में अमेरिका ने ये बहाना बनाना बंद कर दिया है। दे शूटिंग यहां तक ट्रंप ने यह भी कह दिया है कि अब अमेरिका वेनेजुएला को चलाएगा वी आर गोइंग टू रन द कंट्रीि सच टाइम वी कैन डू अ सेफ प्रॉपर एनजीस ट्रिशन तो बेसिकली अमेरिका
2026 में इमर्ज किया है दुनिया को यह बताने के लिए कि आज भी दुनिया को सिर्फ अमेरिका चलाता है। तो अमेरिका ने वेनेजुएला में जो सरप्राइजिंग एक्शन लिया है उसमें दो-तीन बहुत इंपॉर्टेंट चीजें हैं जो हमें इस वीडियो में डिस्कस करनी जरूरी है। पहला है कि अमेरिका किस तरह से ग्लोबल ऑर्डर को वापस अपनी तरफ शिफ्ट कर रहा है। दूसरा चाइना का रिस्पांस इसमें कैसा रहा है और तीसरा भारत पर इसका क्या इफेक्ट पड़ता है। आइए इन तीनों चीजों के बारे में आज जानते हैं। हेलो हेलो श्याम शर्मा शो के इस एपिसोड में आपका बहुत-बहुत
स्वागत है। मैं हूं सेकुलरिज्म का सीईओ श्याम शर्मा और आप सबको एक सेकंड प्रणाम। आज की इस चेंज होती दुनिया में एआई एक पावरफुल टूल बन चुका है। एi भारत के लिए एक नया डिफेंस बन सकता है। नया ऑफेंस बन सकता है और सबसे बड़ा सर्वाइवल स्किल नॉट जस्ट फॉर डिफेंस बट फॉर करियर्स, बिनेसेस एंड डेली लाइफ। अगर मैं कहूं कि आप एi को सिर्फ एक वीकेंड में बिना कोडिंग के मास्टर कर सकते हैं। और अपने लिए एक नया अर्निंग पाथ क्रिएट कर सकते हैं। डजंट दैट साउंड ग्रेट? इसीलिए मैं आपको इनवाइट करना चाहता हूं
एक कंप्लीटली फ्री टू डे एआई ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए जिसका वैल्यू है अराउंड ₹10,000 लेकिन श्याम शर्मा शो के सेकुलर व्यूअर्स के लिए यह सेशन बिल्कुल फ्री है और यह पॉसिबल हुआ है हमारे इस वीडियो के अमेजिंग पार्टनर आउटस्किल के थ्रू। यह कोई नॉर्मल ट्रेनिंग नहीं है। यह दुनिया का सबसे पहला एआई फोकस्ड एजुकेशन प्लेटफार्म है जिसे टॉप एआई इन्वेस्टर्स और पाइनियर्स सपोर्ट कर रहे हैं। 16 आवर्स का यह लाइव सेशन सैटरडे और संडे को सुबह 11:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक होगा। इसका लिंक डिस्क्रिप्शन बॉक्स में और पिन कमेंट में भी आपको अवेलेबल
रहेगा। यहां पर आपको 20 प्लस पावरफुल एआई टूल्स जो आपके टूलकिट में ऐड होंगे। ग्रेट थुनबर्ग वाले नहीं प्रोफेशनल टूलकिट में। प्र्प इंजीनियरिंग फॉर बेटर एंड फास्ट रिजल्ट्स। डाटा एनालिसिस विदाउट कोडिंग। एi और एक्सेल के यूज से प्रोफेशनल प्रेजेंटेशंस बनाना। नो कोड टूल्स के थ्रू अपने खुद के एi एप्स और टूल्स बनाना। एआई जनरेटेड इमेजेस और वीडियोस जो लिटरली माइंड ब्लोइंग होंगे। पावरफुल एआई एजेंट्स डेवलप करना, अपने डेली टास्क्स को ऑटोमेट करना और मैक्सिमम एफिशिएंसी जैसे स्किल्स सीखने को मिलेंगे। और यह तो सिर्फ शुरुआत है यार। अंदर और भी बहुत कुछ है। यह ट्रेनिंग हर
किसी के लिए चाहे आप टेक हो या नॉन टेक जैसे सेल्स, मार्केटिंग, एचआर, ऑपरेशंस या अपना खुद का बिजनेस चलाते हो। ऑलरेडी 40 प्लस कंट्रीज के प्रोफेशनल्स इस ट्रेनिंग को ज्वाइन कर चुके हैं और उनका रिस्पांस भी बेहतरीन रहा है। इनफैक्ट मैं अपनी पूरी टीम को यह कोर्स करवा रहा हूं और आपको भी स्ट्रांगली रेकमेंड करता हूं कि आप इस चांस को बिल्कुल भी मिस मत कीजिए। बट रिमेंबर सीटें बहुत जल्दी भर रही हैं और हम यह सेशन अनलिमिटेड टाइम के लिए ही फ्री दे रहे हैं। तो इसका बेनिफिट लेना जल्दी से जल्दी बिल्कुल भी
मत भूलिए। इसके साथ ही लेटेस्ट अपडेट्स के लिए आप इनका WhatsApp ग्रुप भी ज्वाइन करना ना भूलिए। और याद रखिए फ्राइडे शाम 7:00 बजे इनका एक इंट्रोडक्टरी कॉल भी है। उसको भी जरूर ज्वाइन कीजिए। एंड नाउ बैक टू द वीडियो। तो 3 जनवरी को डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला को न्यू ईयर अटैक करके विश किया और एयर स्ट्राइक्स की जिसमें अभी तक जो कंफर्म नंबर्स आए हैं लोगों की मौत के वो है 115। ट्रंप ने एक सर्जिकल अटैक करके वेनेजुएला के प्रेसिडेंट निकोलस मधुरो और उनकी वाइफ सिलिया फ्लोरस को कैप्चर किया और अमेरिका ले आए हैं।
अमेरिका की अटर्नी जनरल पम बोंडी ने कंफर्म किया कि दोनों वेनेजुएला के प्रेसिडेंट और उनकी वाइफ अमेरिका आ रहे हैं और सदर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ न्यूयॉर्क में उनके ऊपर नार्को टेररिज्म कंस्परेसी, कोकेन इंपोर्टेशन, मशीन गंस और डिस्ट्रक्टिव डिवाइसेस से रिलेटेड केसेस लगे हैं। अब यह जब अटैक हुआ है तो बहुत लोग बहुत सरप्राइज हुए थे। मैं भी बहुत सरप्राइज हुआ था। लेकिन अगर इस अटैक की बैक स्टोरी हम देखें तो ये अटैक एक्चुअली काफी समय से प्लान किया जा रहा था और इसका ढांचा बनाया जा रहा था। मैं आपको एक टाइमलाइन बताता हूं कि कब से
ये अटैक प्लान किया गया था और किस तरह से इसको सिस्टमैटिकली प्लान करके एग्जीक्यूट किया गया है। तो जैसे ही ट्रंप का इनोगेशन हुआ 2025 में तब से यह प्लान शुरू कर दिया गया था। जनवरी 20 2025 में प्रेसिडेंट ट्रंप ने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर साइन किया जिसमें वेनेजुएलन क्रिमिनल ऑर्गेनाइजेशन स्पेसिफिकली ट्रेंड दे अरागुआ को फॉरेन टेररिस्ट ऑर्गेनाइजेशन डिक्लेअर कर दिया गया और नार्को टेररिज्म के अगेंस्ट मिलिट्री एक्शन का रास्ता ओपन कर दिया गया कि भाई अगर हमको जरूरत पड़ी तो हम वेनेजुएला जाके भी इस आतंकी ऑर्गेनाइजेशन के खिलाफ एक्शन ले सकते हैं। अगस्त 1925 में
पेंटागॉन ने कैरेबियन में 1962 क्यूबन मिसाइल क्राइसिस के बाद का सबसे बड़ा यूएस नेवल बिल्ड अप स्टार्ट किया। वॉरशिप्स और एयरक्राफ्ट्स भी डिप्लॉय किए गए और ऑफिशियली गवर्नमेंट ने यह कहा कि यह सब ड्रग ट्रैफिकिंग को कंट्रोल करने के लिए किया जा रहा है। उसके बाद अमेरिका ने ऑपरेशन सदर्न स्पीड ल्च किया जिसमें तीन मिसल गाइडेड डिस्ट्रयर्स, एफीबियस असॉल्ट शिप्स और अप्रोक्सिममेटली 6000 सेलर्स और मरींस कैरेबियन में डिप्लॉय किए गए। सितंबर सेकंड 2025 में अमेरिका ने पहला केनेटिक स्ट्राइक किया एक वेसल के ऊपर जो वेनेजुएला से डिपार्ट कर रहा था। अमेरिका ने क्लेम किया कि
यह एक ड्रग कार्टल ऑपरेटेड वेसल था। फिर अक्टूबर 2025 में आया एस्केलेशन जब ट्रंप ने डिक्लेअ किया कि अमेरिका अब ड्रग कार्टेल्स के साथ आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट में है और कार्टेल टारगेट्स की डेफिनेशन एक्सपेंड करके वेनेजुएला के अंदर की ट्रैफिकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तक इंक्लूड कर दी गई। फिर नवंबर 2025 में यूएसएस जनरल्ड आरफोर्ड कैरियर जो नेवी का सबसे एडवांस्ड एयरक्राफ्ट कैरियर है वो कैरीबियन में डिप्लॉय हुआ और टोटल अमेरिकन मिलिट्री प्रेजेंस कैरीबियन में 15,000 पर्सनल तक पहुंच गई। नवंबर 29 को यूएस ने बिना यूएन ऑथोराइजेशन के वेनेजुएला के ऊपर नो फ्लाई ज़ोन यूनिलैटरली डिक्लेअर कर दिया। बेसिकली
वेनेजुएलन एयर स्पेस को इंटरनेशनल ट्रैफिक के लिए बंद कर दिया गया। दिसंबर 2025 में सीआईए ने वेनेजुएलन कोस्ट पर डॉकिंग फैसिलिटीज पर कोवर ड्रोन स्ट्राइक्स की और फिर आता है जनवरी सेकंड 2026 यूएस नेवल एसेट्स स्ट्राइक पोजीशन में मूव कर दिए गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक करास में कम्युनिकेशंस पूरी तरह से जैम कर दिए गए और फाइनली जनवरी थर्ड को करास में प्रिसिजन स्ट्राइक्स किए गए। ला कार्लोता एयरबेस और फोर्ट ट्यूना जो मेन वेनेजुएला का मिलिट्री हेड क्वार्टर है उनको हिट किया गया। यूएस स्पेशल फोर्सेस सोर्सेस के हिसाब से कहा जा रहा है कि ये डेल्टा
फोर्स थे। उन्होंने फोर्ट ट्यूना के अंदर एक फर्टिफाइड रेजिडेंस पर हेलीबॉनड रेड किया। यानी हेलीकॉप्टर से रेड किया। उसके बाद ट्रंप ने ट्रू सोशल पर अनाउंस किया कि अमेरिकन फोर्सेस ने एक लार्ज स्केल स्ट्राइक कंडक्ट किया है वेनेजुएला में और निकोलास मदुरो और उनकी वाइफ सीलिया फ्लोरिस को कैप्चर कर लिया गया है और करंट स्टेटस ये है कि रिपोर्ट्स के मुताबिक मदुरो यूएसएस ईवोजीमा पर है और उसे न्यूयॉर्क ले जाया जा रहा है जहां पर उसके ऊपर नारको टेररिज्म के चार्जेस लगाए गए तो ये स्ट्राइक जो की गई है बहुत इंटरेस्टिंग तरीके से की गई
है बिकॉज़ ये इराक की तरह या अफगानिस्तान की तरह बूट्स ऑन द ग्राउंड नहीं डाले गए हैं। इस स्ट्राइक को एक क्लासिक डिकैपिटेशन स्ट्राइक कहा जा रहा है जिसमें अमेरिका ने ओवरवेल्मिंग एयर सुपीरियरिटी का इस्तेमाल किया है। इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर से वेनेजुएलन एयर डिफेंसेस को जैम किया गया जिससे लो फ्लाइंग एयरक्राफ्ट्स और ड्रोंस लॉयलिस्ट कमांड सेंटर्स को न्यूट्रलाइज कर सके। फिर स्पेशल ऑपरेशंस रेड की गई। एक्चुअल कैप्चर टिए वन ऑपरेटर्स यानी डेलरा फोर्स ने एग्जीक्यूट किया है लाइकली रियल टाइम Intel पे बेस मडरो की एग्जैक्ट लोकेशन के साथ। अब आपके दिमाग में मिलियन डॉलर सवाल यह
उठ रहा होगा कि यह स्ट्राइक क्यों किया गया? अमेरिका इसको वेनेजुएला के खिलाफ वॉर नहीं कह रहा है बल्कि कह रहा है कि भाई हमारी लॉ इनफोर्समेंट का ऑपरेशन है उसके तहत हमको यह स्ट्राइक लेना पड़ा क्योंकि हमारे देश में वेनेजुएला से नारको टेररिज्म हो रहा है। ट्रें एरागवा नाम का एक गैंग जिसके कुछ एफिलिएशन है वेनेजुएला से उनको एक नार्को टेररिस्ट ऑर्गेनाइजेशन डिक्लेअर कर दिया था। फिर ट्रंप ने मडूरों पर एक्यूज़िशन लगाया है कि वो कार्टेल दोस सोलेस यानी कार्टेल ऑफ द सनंस लीड करता है जिसे नवंबर 2025 में एक फॉरेन टेररिस्ट ऑर्गेनाइजेशन डिक्लेअर
कर दिया गया था। अमेरिका ने क्लेम किया है कि वेनेजुएला अमेरिका में आने वाले ड्रग्स का एक मेजर सोर्स है और इसीलिए मिलिट्री एक्शन जरूरी था फेंटेनल और कोकेन से अमेरिकन कम्युनिटीज को प्रोटेक्ट करने के लिए। लेकिन एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि वेनेजुएला कोई मेजर कोकेन प्रोड्यूसर नहीं है। और जो भी वेनेजुएल ड्रग एक्सपोर्ट्स होते हैं उनका बड़ा हिस्सा यूएस के बजाय यूरोप की तरफ जाता है। और कार्टेल दे सोलेस को भी लोग काफी ओवर सिंपलीफाई कर देते हैं। बिकॉज़ एक्चुअली ये ज्यादा एक्यूरेटली वेनेजुएला में मिलिट्री करप्शन के लिए एक कोलोकवियल शॉर्टहड है ना कि
कोई प्रॉपर्ली ऑर्गेनाइज्ड फॉर्मल कार्टेल जैसी ऑर्गेनाइजेशन। देखिए अमेरिका ने जो एक्सप्लेनेशन दिया है वो कुछ और है। लेकिन हम सबको पता है कि जो असली रीजन है वो शायद कुछ और है। बिल्कुल वैसे ही जैसे जब आपको अपने फ्रेंड्स के साथ लंच पे मिलना होता है और वो आपको मैसेज करते हैं कि भाई तू कहां है? हम सब तो पहुंच गए तो आप उनको मैसेज करते हैं कि भाई मैं बस 5 मिनट दूर हूं लेकिन सच्चाई में आप 5 मिनट दूर नहीं होते। आप अभी भी बेड के अंदर हैं। आपके पांच मिनट का मतलब होता
है कि आप कम से कम डेढ़ घंटे में वहां पहुंचेंगे। वैसे ही अमेरिका ने वेनेजुएला पे एक्शन का रीजन दिया है कि भाई ह्यूमन राइट्स ड्रग्स की प्रॉब्लम को खत्म करने के लिए असली रीजन है फोर्ट्रेस अमेरिका डॉक्ट्रिन। नवंबर 2025 में नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रेटजी में अमेरिका ने अपने ऑब्जेक्टिव्स का सबसे क्लियर वर्जन दिया था जिसमें उन्होंने मनरो डॉक्ट्रिन को ओपनली इनवोक किया था और कहा था कि वेस्टर्न हेमिस्फयर जो है वो बेसिकली अमेरिका का डोमेन है। तो यह मनरो डॉक्ट्रिन क्या है? है। मनरो डॉक्ट्रिन बेसिकली 19 सेंचुरी का एक अमेरिकन फॉरेन पॉलिसी स्टेटमेंट था जिसको
प्रेसिडेंट जेम्स मनरो ने लागू किया था जिसमें कहा गया था कि वेस्टर्न हेमिस्फयर बंद है। यूरोप को कहा गया कि अब यहां कोई कॉलोनाइजेशन या यूरोपियन पॉलिटिकल इंटरफेरेंस नहीं चलेगी। यूरोप अगर अमेरिकास के नेशंस को कंट्रोल करने की कोशिश करेगा तो यूएस उसको एक हॉस्टाइल एक्ट मानेगा। फिर समय के साथ अमेरिका ने इस डॉक्ट्रिन को अपने वर्जन में अपग्रेड करके लैटिन अमेरिका पे पूरी तरह से डोमिनेंस जस्टिफाई करना शुरू कर दिया। सिंपल लैंग्वेज में अमेरिका कह रहा है कि जो पूरा का पूरा अमेरिकन कॉन्टिनेंट है नॉर्थ अमेरिका, सेंट्रल अमेरिका, साउथ अमेरिका ये अमेरिका का डोमेन
है। कोई भी मेजर पावर चाहे यूरोप हो, रशिया हो, चाइना हो यहां पर सूंघ भी नहीं सकते। फनी बात यह है कि भाई अमेरिका दुनिया में कहीं भी जाकर इंटरफेरेंस कर सकता है। लेकिन कोई दूसरा यहां पर आकर इंटरफेरेंस नहीं कर सकता। तो इस गोल के साथ-साथ जुड़े हुए हैं और भी कई गोल्स। फॉर एग्जांपल वेनेजुएला के पास वर्ल्ड के सबसे लार्जेस्ट प्रूवन ऑयल रिजर्व्स हैं और नोको बेल्ट में हैवी क्रूड का मैसिव स्टॉक है। तो इसको कंट्रोल करने का मतलब कि आप बेसिकली दुनिया में पूरी की पूरी जो ऑयल सप्लाई है उसके एक बहुत
मेजर चंक को कंट्रोल करते हो। वेनेजुएला यूएस के राइवल्स के लिए कैरीबियन में एक स्ट्रेटेजिक बेस बनता जा रहा था। जैसे कि चाइना और रशिया। तो वेनेजुएला में तख्ता पलट करने का मतलब चाइना का वहां से होल्ड पूरी तरह से खत्म। जो वेनेजुएला में पॉलिटिकल क्राइसिस चल रही है, उसकी वजह से नियरली 8 मिलियन वेनेजुएलास अपने देश को छोड़ चुके हैं। यह दुनिया के लार्जेस्ट डिस्प्लेसमेंट क्राइसिस में से एक है। तो अमेरिकन गवर्नमेंट का कैलकुलेशन है कि मदुरों को हटाया जाए तो वहां शायद इंस्टेबिलिटी कम होगी। माइग्रेशन फ्लो कम होगा और अमेरिका की तरफ भी
वहां से माइग्रेशन कम आएगा। और ऑब्वियसली अमेरिका जो है वो सोशलिज्म के बिल्कुल खिलाफ है। कम्युनिज्म के बिल्कुल खिलाफ है। तो कोई भी सोशलिस्ट या कम्युनिस्ट रिजीम है उनके आसपास उसको टोलरेट नहीं किया जाएगा। तो एक बार आपने वेनेजुएला को हटा दिया तो उसके बाद क्यूबा में भी जो कम्युनिस्ट रिजीम है वो कमजोर होगी और उस पर भी फिर प्रेशर बनाया जा सकता है वहां से भी कम्युनिज्म हटाने के लिए। तो ये सब चीजें तो हुई है। लेकिन जो अमेरिका ने एक्शन लिया है वेनेजुएला में उसका सबसे बड़ा टेक अवे मैं अगर आपको बताऊं तो
बेसिकली यह जो रूल्स बेस्ड ऑर्डर का ड्रामा किया जाता है दुनिया में खासकर यूनाइटेड नेशंस में उसकी आज पूरी तरीके से मौत हो चुकी है। ये ऑपरेशन जो है बेसिकली इंटरनेशनल लॉ को सीधा-सीधा मिडिल फिंगर दिखाता है। अमेरिका ने बोला है कि देखिए हम एक एंपायर हैं और हम दुनिया की सबसे पावरफुल एंपायर हैं और हमारी मन में जो आएगा हम करेंगे। आपको घंटा जो करना है आप कर लो। अब लोग इस बात पे बड़े परेशान हो रहे हैं कि रूल्स बेस्ड ऑर्डर का उल्लंघन कर दिया गया है। लेकिन यार लेट्स बी ऑनेस्ट। दुनिया हमेशा
से ऐसी रही है। अमेरिका हमेशा से ही ऐसा ऑपरेट करता हुआ आया है। जब उनको ऑयल प्राइसेस गिराने होते हैं तो वो इराक को इनवेट कर लेते हैं। जब ईरानियल ऑयल का उनको एक्सेस चाहिए था तो उन्होंने ईरान के इलेक्टेड लीडर को ओवर थ्रो करके वहां पर शाह को बिठा दिया था। सेंट्रल और साउथ अमेरिका में तो वो ऐसे रिजीम टॉपल करते हैं जैसे मैं वीकेंड में बैठ के Netflix पे टीवी शो देखता हूं। अमेरिका डेकेड से ऐसा करता हुआ आ रहा है। इस बार उन्होंने बस कि भाई हम टेररिज्म से लड़ रहे हैं। हम
डेमोक्रेसी लाना चाहते हैं। वह वाले बहाने बनाने बंद कर दिए। ट्रंप ने सीधा बोल दिया है कि मुझे दुनिया की ऑयल सप्लाई पे कंट्रोल चाहिए। उसके लिए मुझे वेनेजुएला पे कंट्रोल चाहिए। इतना ही रीजन है और देखिए इसमें परेशान, दुखी, नाराज होने वाली क्या बात है। यह तो हजारों सालों से दुनिया की स्टोरी रही है। बड़े पावर्स जो चाहते हैं ले लेते हैं और कमजोर देश जो होते हैं उनको बस भुगतना पड़ता है। 46 बीसी में थसिसडीज एक हिस्टोरियन था जिसने ग्रीस के पेपनीजियन वॉर को कवर किया था। उस वॉर में एक बहुत फेमस मोमेंट
को थुसिसडीज ने कवर किया था। एथ्स जो कि एक बहुत पावरफुल सिटी स्टेट था। वो एक छोटे आइलैंड मेलोस को इनवेट करना चाहता था। मेलोस ने कहा कि देखिए देखिए हम आपके साथ नेगोशिएट करना चाहते हैं। लेकिन एथेंस के पास ज्यादा ताकत थी तो एथेंस को नेगोशिएट करने में कोई इंटरेस्ट ही नहीं है। तो एथेंस ने सीधे-सीधे एक अल्टीमेटम दिया मेलोस को और एथेनियन ऑनवॉय ने मेलोस के लोगों से कहा कि देखिए द स्ट्रांग डू व्हाट दे विल एंड द वीक सफर व्हाट दे मस्ट। अब मतलब ताकतवर इंसान हमेशा अपनी ताकत का इस्तेमाल करेगा। और
अगर आप कमजोर हैं तो आपको वो ताकत झेलनी पड़ेगी। यह प्लनेट अर्थ की डिफॉल्ट सेटिंग है। अब कुछ लोग कह रहे हैं कि ट्रंप ने यह एक्शन लिया है वेनेजुएला में तो फिर तो चाइना को भी इससे एक एक्सक्यूज मिल जाता है कि वो ताइवान को इनवेट कर ले। क्योंकि अगर वह ऐसा करता है तो कंप्यूटिंग चिप्स पे एक तरह से मोनोपोली हो जाएगी चाइना को। अब चाइना क्या करेगा? इसके बारे में हम थोड़ी देर में डिस्कस करते हैं। लेकिन अमेरिका ने देखिए बेसिकली पूरी दुनिया को यह मैसेज दिया है इस एक्शन के साथ कि
यह हमारी दुनिया है। इस दुनिया पर हम राज करते हैं और इस दुनिया में जो भी देश रहते हैं वो हमारे एंपायर के सब्जेक्ट्स हैं इंक्लूडिंग रशिया एंड चाइना। अब अमेरिकन गवर्नमेंट ने इतना बड़ा स्टेप लिया है वेनेजुएला में। तो काफी लोग कह रहे हैं कि अब पॉसिबिलिटी यह है कि ईरान में भी यही स्टेप अगला लिया जाएगा। ईरान की गवर्नमेंट को भी टॉपल किया जाएगा। और अमेरिका ने देख लिया है पूरी दुनिया का रिएक्शन। रशिया ने कुछ नहीं किया। चाइना ने कुछ नहीं किया। ईरान बेसिकली एक लास्ट मेजर होल्ड आउट है। जहां ऑयल रिसोर्सेज
पे अमेरिका का फुल कंट्रोल नहीं है। ओपेक कंट्रीज के साथ अमेरिका की डील हो रखी है। अब वेनेजुएला पे भी कब्जा हो गया। तो बचा सिर्फ ईरान है। और आप सोचिए जरा डेनमार्क की कितनी फटी पड़ी होगी। सालों से ट्रंप बोलता हुआ आ रहा है कि वो ग्रीनलैंड लेना चाहता है। अब उसने जाके वेनेजुएला पे तो कब्जा कर लिया। अब अगर कल को अगर ट्रंप बोलेगा डेनमार्क को कि मेरे को ग्रीनलैंड दे दो तो डेनमार्क अमेरिका का क्या उखाड़ लेगा? बस डिपेंड इस बात पे करता है कि अमेरिका कब डिसाइड करता है कि हमको ग्रीनलैंड
चाहिए। तो मैं क्यों यह सोच रहा हूं कि ईरान कुड बी नेक्स्ट? क्योंकि देखिए अगर अमेरिका ईरान टॉपल कर ले तो ग्लोबल ऑयल पे बेसिकली अमेरिका का पूरी तरह से कंट्रोल हो जाएगा। अमेरिका प्राइस कंट्रोल करके खूब पैसे कमाएगा। और कुछ लोगों ने सजेस्ट किया है कि अमेरिका रशिया को एक ऑलिव ब्रांच देगा। रशिया यूक्रेन के साथ एक पीस डील साइन करने की कोशिश करेगा और रशिया को अपनी तरफ लाने की कोशिश करेगा ताकि रशियन ऑयल पे भी अमेरिका का कंट्रोल आ जाए। और फिर इसका रिजल्ट ये होगा कि दुनिया का कोई भी देश इंक्लूडिंग
इंडिया को अगर ऑयल चाहिए तो आपको अमेरिका के साथ डायरेक्टली नेगोशिएट करना पड़ेगा। बिकॉज़ पूरे दुनिया का ऑयल अब अमेरिका कंट्रोल करता है। अब सवाल लोग उठा रहे हैं कि चलिए अमेरिका वहां चला तो गया उसने तख्ता पलट कर तो दिया। अब वेनेजुएला में क्या होगा? एक पॉसिबिलिटी है कि मरिया कोना मचादो जो 2025 में जिसने नोबेल पीस प्राइज जीता था जो वेनेजुएलन डेमोक्रेसी की एक एडवोकेट है। कई लोग मानते हैं कि उसको अमेरिका से सपोर्ट मिलता है और इमुंदो गोंजालेस उरुतिया जो अपोजिशन कैंडिडेट है 2024 के इलेक्शन से हो सकता है कि यह दोनों
मिलके एक ट्रांजिशनल गवर्नमेंट बना लें। कुछ सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह ट्रांजैक्शन स्ट्रेट फॉरवर्ड नहीं होने वाला क्योंकि मदुर रिजीम जो है वह जुडिशरी कंट्रोल करती है। सुप्रीम कोर्ट मिलिट्री को कंट्रोल करती है और कोलेक्टिवोस नाम के एक आर्म्ड पैरामिलिट्री ग्रुप भी मदुरों को सपोर्ट करता था। तो हो सकता है कि वहां पर डेमोक्रेसी एस्टैब्लिश करना इतना आसान ना हो। वर्स्ट केस सिनेरियो यह हो सकता है कि वहां पे पूरी तरह से स्टेट कोलैप्स कर जाए। सिविल वॉर शुरू हो जाए और कहीं वेनेजुएला साउथ अमेरिका का इराक ना बन जाए। और अगर ऐसा
हुआ और अगर वेनेजुएला में एक्चुअली सिविल वॉर शुरू हो गया तो बेसिकली जो रेफ्यूजी क्राइसिस अभी चल रहा है वो और भी खराब हो जाएगा। तो आइरोनिकली जिस सिचुएशन को सॉल्व करने के लिए अमेरिका ने ये एक्शन लिया है वेनेजुएला में वो सिचुएशन और भी ज्यादा खराब हो सकती है। तो फिर यहां पर सवाल उठता है कि क्या ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन के पास इतनी पेशेंस है? इतने रिसोर्सेज हैं, इतना समय है कि वो इराक की तरह ही जो उन्होंने 20 साल लगाए उतने ही साल वो लगाए वेनेजुएला को भी स्टेबलाइज करने में। ऐसे भी कई पोल्स
आए हैं जिसमें अमेरिका के लोगों में इंटरेस्ट नहीं है इस तरह के फॉरेन वॉर्स को सपोर्ट करने की। तो वेनेजुएला में क्या होगा वो देखा जाएगा। लेकिन एक बड़ी इंटरेस्टिंग चीज रही है और वो है अभी तक का चाइना का रिस्पांस। देखिए वेनेजुएला में जो रिजीम चेंज हुई है उसमें चाइना को लैटिन अमेरिका में अपना सबसे इंपॉर्टेंट पार्टनर खो दिया है चाइना ने। उसके बावजूद चाइना ने कुछ खास स्टेटमेंट नहीं दिया। कुछ बड़ा एक्शन नहीं लिया है। यह बड़ा इंटरेस्टिंग है क्योंकि पिछले 10 सालों से चाइना पूरे दुनिया को बताता हुआ आ रहा है पीआर
करके कि भाई हम एक सुपर पावर हैं। पूरी दुनिया में अब दो पोल बन चुके हैं। एक पोल अमेरिका के पास, एक पोल चाइना के पास और अमेरिका को हमेशा धमकी देते रहते हैं। हमारे इंटरेस्ट में इंटरफेयर मत करो वरना तुम्हारी ईंट से ईंट बजा देंगे। तुम्हारी औकात दिखा देंगे। चाइना अपना पूरी इतनी बड़ी-बड़ी मिलिट्री परेड करता है। पूरी दुनिया को धमकी देता रहता है। लेकिन अब सीन यह है कि अमेरिका ने इतना बड़ा एक्शन ले लिया उसके इतने बड़े एलआई के साथ और चाइना सिर्फ स्टेटमेंट ही दे रहा है। तो अल्टीमेटली चाइना की सच्चाई
यह है कि चाइना अभी भी अमेरिका जैसा सुपर पावर नहीं है। डीप स्टेट को पैसे देके आप अपने लिए पीआर करवा सकते हो। लेकिन व्हेन द रबर मीट्स द रोड जब आपको एक्चुअली एक्शन लेना है अपने एक मेन कंपिटिट के साथ तो आप खाली कड़ी निंदा कर रहे हो। निंदा टर्टल बने हुए हैं। यह चाइना बेसिकली हंगामा के आफताब शिव दसानी या अक्षय खन्ना जैसी बिहेवियर कर रहा है। गर्मी है क्या? तेरे को ऊपर चर्बी है क्या? दिखाऊं क्या? मैं दिखाऊं? दिखा? अबे, चल, तू दिखा, तू दिखा, चल। अबे हाथ लगा के दिखा ना? अबे,
तू हाथ लगा के देख ना। मेरी डायलॉग मत मार सुन। तू भी मेरा डायलॉग मत मत मत मत मत मत मत मत समझा। अरे चल ना। अबे यहां से भी चल यहां से। अरे चले जा बोला ना। मैं दिखाऊं क्या? दिखा ना? देख मैं दिखा दूंगा। दिखा ना। बोलते रहेंगे लेकिन हाथ नहीं लगाएंगे। अमेरिका जो है वो चाइना फ्रेंडली रिजीम्स को मनमर्जी खत्म कर रहा है। और चाइना कुछ नहीं कर रहा। सुपर पावर सुपर पावर अपने आप को बोलता है। लेकिन मालदीव्स और श्रीलंका में एक्शन लेने के बजाय अब वहां पर प्रो इंडिया गवर्नमेंट आ
गई है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान भी चाइना के हाथ से निकल गया है और अमेरिका के साथ अलाइन हो गया है। बेसिकली पाकिस्तान अब एक अमेरिकन वेसल स्टेट बन चुका है। पनामा और उसका कैनाल भी चाइनीस कंट्रोल से बाहर निकल चुके हैं। ईरान का रिजीम भी जो चाइना बैक्ट माना जा रहा है वहां पर भी लगता है अभी कुछ समय में अमेरिका एक बड़ा एक्शन लेके रिजीम चेंज करने वाला है। अब अगर उन्होंने वेनेजुएला में कुछ नहीं किया तो ईरान में क्या करेंगे वो? और हो सकता है कि कुछ महीनों में अमेरिका भी रशिया
की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाए और रशिया तुरंत चाइना को ड्रॉप करके अमेरिका के साथ हो ले। उससे फायदा यह होगा कि रशिया के ऊपर सेंशंस लिफ्ट हो जाएंगी। कोई कंपनसेशन देने की जरूरत नहीं। उनके एसेट्स अनफ्रीज हो जाएंगे। हो सकता है जी8 की मेंबरशिप भी उनको मिल जाए। उसके साथ-साथ सोमाली लैंड और साउथ यमेन जैसे नए देश बनाए जा रहे हैं अमेरिका के द्वारा इजराइल की मदद से ताकि रेड सी के थ्रू चाइना के एक्सपोर्ट्स इंपोर्ट्स को ब्लॉक कर लिया जाए। अब लोग कह रहे हैं कि हो सकता है चाइना इस पर बड़ा एक्शन
ले। ताइवान को कैप्चर कर ले। लेकिन अगर चाइना ताइवान को इनवेट करता है तो हमने बताया है कि यूएस ऑलरेडी ऑयल मार्केट को कंट्रोल करने पे आ गया है और अगर वो ऑयल सप्लाई टू चाइना वाया रेड सी मलाका ईरान वेनेजुएला गयाना एटसेट्रा रोक देता है ओपेक देश भी अमेरिका के साथ अलाइंड है अगर वो रशिया को भी अपनी तरफ कर लेता है तो चाइना को तेल कहां से मिलेगा? क्या चाइना के पास इतना तेल इतने रिसोर्सेज हैं कि वो एक फुल स्केल ताइवान का इन्वेशन सस्टेन कर सके। वो ताइवान जिसको अनडाउटेडली वेस्टर्न देशों से
और अमेरिका से मदद मिल रही होगी। रिसोर्सेज रहेंगे चाइना के पास उतने और इंडिया का भी रिस्पांस इसमें काफी इंटरेस्टिंग रहा है अभी तक। जो अटैक अमेरिका ने किया उसके कई घंटों बाद भी इंडिया की तरफ से कोई खास स्टेटमेंट नहीं आया। और देखिए अमेरिका ने जो किया है वो जैसा कि मैंने कहा वो पूरी दुनिया को एक मैसेज भेजा है इंक्लूडिंग इंडिया। वो सिर्फ चाइना को वार्निंग नहीं थी। वो इंडिया जैसे देशों को भी वार्निंग थी। इंडिया का लॉन्ग टर्म स्टांस रहा है स्ट्रेटेजिक ऑटोनमी का। मतलब इंडिया अपने इंटरेस्ट के हिसाब से डिसीजंस लेगा
कि किसी भी मेजर पावर के प्रेशर में आके वो डिसीजन नहीं लेगा। लेकिन ट्रंप ने ओपनली उस पॉलिसी को चैलेंज किया है। ट्रंप का सिग्नल बेसिकली यह है कि अगर कोई भी देश अमेरिका के साथ नहीं चलेगा या अमेरिका की बात नहीं मानेगा तो अमेरिका उस देश की गवर्नमेंट टॉपल करके एक ऐसी गवर्नमेंट इंस्टॉल कर देगा जो अमेरिका की बात मानेगा और हम जानते हैं कि इंडिया और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर अभी काफी सीरियस डिसए्रीमेंट्स चल रहे हैं। दोनों देश अपने लिए फेवरेबल टर्म्स चाहते हैं। ट्रंप ने वेनेजुएला में जो किया है
उससे वो इनडायरेक्टली एक तरह से इंडिया को भी आंख दिखा रहा है। तो सवाल यह उठता है कि क्या इंडिया के पास कोई भी लिवरेज है? या इंडिया के साथ भी कभी भी वेनेजुएला जैसी हालत हो सकती है। लेकिन देखिए हो सकता है एक लेवरेज हो। देखिए अमेरिका ने दुनिया भर में इन्वेजंस किए हैं। लेकिन एक टाइप ऑफ देश को उन्होंने कभी भी इनवेड नहीं किया है। वैसा देश जिसके पास न्यूक्लियर वेपंस हो। इंडिया के पास देखिए मॉडर्न एज का सबसे स्ट्रांग स्ट्रेटेजिक डिटरेंस है यानी न्यूक्लियर वेपंस। इसी वजह से मुझे लगता है कि इंडिया
पर वेनेजुएला जैसा अटैक नहीं होगा। एंड उसके लिए थैंक यू वेरी मच प्राइम मिनिस्टर वाजपेयी। लेकिन अगर आप नोटिस करें तो इंडिया अमेरिका के एक्शंस पर भी काफी क्वाइट रहा है। मुझे लगता है कि इंडिया किसी तरीके से अमेरिका के साथ एक वकेबल मिडिल ग्राउंड निकालने की कोशिश करेगा और इस साल के कोर्स में ट्रेड डील भी साइन कर लेगा। पर अल्टीमेटली अमेरिका ने जो किया है उससे जो इस दुनिया की इमोर्टल सच्चाई है वो फिर से प्रूव हो जाती है। नॉलेज इज पावर सीम पावर पावर दुनिया में सिर्फ एक चीज मैटर करती है और
वो है ताकत। 2026 और आगे का दुनिया काफी वोलेटाइल होने वाली है। अमेरिका फिर से ओपनली अपनी डोमिनेंस दुनिया में असर्ट कर रहा है। चाइना के ब्लफ को कॉल कर रहा है और बाकी देशों को भी सिग्नल दे रहा है। या तो हमारे साथ खड़े हो वरना आपका शायद वेनेजुएला जैसा हाल ना हो जाए। तो इंडिया को भी बहुत स्मार्टली अमेरिका के साथ काम करना पड़ेगा। बिकॉज़ शॉर्ट टर्म में अमेरिका के इंटरेस्ट को इग्नोर करना कॉस्टली हो सकता है। लेकिन इसके साथ-साथ इंडिया को एक चीज पर ऑब्सेसिवली फोकस करना पड़ेगा और वो है अपनी ताकत
को बिल्ड करना। इंडिया का 2026 का प्लेबुक सिंपल होना चाहिए। डिफेंस पेंडिंग को सीरियसली अपग्रेड कीजिए। एयर डिफेंसेस, ड्रोनस, साइबर स्पेस एसेट्स, नेवल एक्सपेंशन यह सब विश लिस्ट नहीं नेसेसिटी है। डिफेंस इंडीजनाइजेशन एक रॉकेट की स्पीड से होना चाहिए। प्रोक्योरमेंट तेजी से हो। आरएडी और टेस्टिंग इकोसिस्टम रोबस्ट बने। प्राइवेट प्लेयर्स को स्केल मिले। एक्सपोर्ट्स को पुश किया जाए और इकोनॉमिक पावर इक्वल स्ट्रेटेजिक पावर। इंडिया को जल्दी से जल्दी 10 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनने का टारगेट करना पड़ेगा। बिकॉज़ मिलिट्री स्ट्रेंथ का फ्यूल इकॉनमी होती है। टेक, मैन्युफैक्चरिंग बेस, एनर्जी सिक्योरिटी, लॉजिस्टिक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर यह सब नेशनल
सिक्योरिटी का हिस्सा है। और स्ट्रेटेजिक ऑटोनोमी का मतलब एंटाई अमेरिका होना या एंटाई वेस्ट होना नहीं होता। ऑटोनमी का मतलब होता है कि हम कोऑपरेट कर सकते हैं आपके साथ जब हमें भी उसका कुछ बेनिफिट मिले। और हम आपको रेजिस्ट कर सकते हैं जब हमारे पास कोई भी बेनिफिट ना हो। और यह ऑप्शंस आपके पास तभी आएंगे जब आपके पास ऐसी पावर होगी जिसको अमेरिका को रिस्पेक्ट करना ही पड़ेगा। इस समय 2026 शुरू होते ही दुनिया की हालत गेम ऑफ थ्रोस जैसी हो रखी है। इस साल हो सकता है कुछ बड़ी-बड़ी चीजें हों दुनिया में।
और आपको क्या लगता है? मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि क्या आपको लगता है कि वेनेजुएला के बाद ईरान की बारी है? और अगर ईरान की बारी है तो कब आएगी वह बारी? नीचे कमेंट सेक्शन में मुझे जरूर बताएं। बाकी आपसे अगले वीडियो में मुलाकात होगी। तब तक के लिए स्वस्थ रहें, सुखी रहें। फिर मिलेंगे और आप सबको।