अस्सलाम वालेकुम और मजदूरी पैसा नवाज़ से उनकी शादी हो गई थी जैसे-तैसे वह गुजर बसर कर ही रही थी की अचानक फूफा की मौत ने अहमद नवाज़ को तन्हा कर दिया था मेरे वालिद बहन dafanane के बाद दो दिन वहां रुके और उनको 4 साल अहमद को अपने साथ ले आए अहमद के आने पर अगर से मम्मी ने chujna की थी लेकिन पापा जान के घर में चलती थी तो मम्मी उनकी सुनने पर मजबूर हो गई अहमद नवाज़ हमारे दरमियां रहता था उसका एडमिशन बाबा ने हमारे साथ ही करवाया था अच्छे स्कूल में वह हमारे
साथ ही पढ़ता था और उसको सब सन लिया दी थी लेकिन अगर कुछ ना दिया करती थी हवा के जाने के बाद अहमद नवाज़ से naukaron जैसा शुरू करती थी लेकिन अहमद नवाज़ ने भी बहुत mushtadi से उसके कम संभल लिए द लॉन्ड्री से कपड़े लाना हो या फिर आता घूमना हो घर का सौदा सौदा ना हो या फिर घरेलू झाड़ पूछ करनी हो वह सब कम करता था वो घर का हर कम करने के बावजूद भी मेरे भाई से हमेशा फर्स्ट पोजीशन पर रहा था khastaur पर उसे वक्त मेरे भाई को बहुत बुरा लगा
जब उसने पहला इनाम हासिल किया उसने पूरे कॉलेज में टॉप किया था और मेरे बाबा जान ने उसे गाड़ी की थी मम्मी ने पूरे घर में बवाल मचा दिया था पापा जान कहां सुनते द किसी की खुश तो मैं भी बहुत थी इसलिए उसके लिए चाय बना कर उसके कमरे में चली गई अभी कमरे की दहलीज पर कदम रखा था की अंदर से आवाज़ ए रही थी की फर मुझे बार-बार तंग मत करो जब मैं फारूख हूं तो तुमसे मिलने ए जाऊंगा मेरे जैसे की तरफ आज खोला तो अहमद नवाज़ सोफे पर बैठा था और
टीवी ऑन था टीवी में यह सब वहां से ए रही थी मैं बहुत शर्मसार हुई मैं बहुत कम उसके कमरे में जाती थी जैसे वह मुझे देखकर उठकर खड़ा हो गया मैं यह चाय देने आई थी आपको मैंने चाय के कप उसके हवाले किए उसने मुझे देखा और फिर कप को देखा था तुम्हारा रिजल्ट आया है ना तुम इतनी कंजूस हो की मुझे mithaai भी नहीं खिलाई इसलिए मैंने सोचा मैं ही तुम्हें चाय पीला डन मेरे यूं छोड़ करने पर वो शर्मसार होकर बोला ये सब कुछ आप लोगों की भी दौलत ही हुआ है मैं
इसकी बात काट कर बोली प्लीज अहमद आज के दिन कोई dialog नहीं सुनना चाहती हूं मैं खुश हूं की तुमने टॉप किया है मैं चाहती हूं तुम आगे भी पढ़ो बहुत आगे जाओ मैं अभी कुछ और बोलना चाहती थी लेकिन नौकर मुझे बुलाने ए गया मम्मी मुझे बुला रही थी जारी तैयार हो जाना शाम को कुछ लोग तुम्हें देखने ए रहे हैं एक दिन मम्मी ने मुझे कुछ लोगों के आने की अदा दी थी मैं जो इतना से कॉलेज जाने की taiyariyan करते ही थी इस खबर को सुनकर बुरी तरह से गुस्सा ए गया था
लड़कियों के घरों में मेहमान क्यों आते हैं देखने ए रहे हैं उन्होंने नॉर्मल से अंदाज़ में कहा मम्मी मैं पढ़ रही हूं अभी प्लीज वो कुछ मत सोचे जो मुझे अच्छा नहीं लगता तुम्हारे बाबा जान जाते हैं तुम्हारा रिश्ता तय कर दिया जाए बेशक शादी कर देंगे वो का कर जा चुकी थी जबकि मेरा दिल पत्ते की तरह लड़ रहा था की अहमद नवाज़ के हवाले से अम्मी से कैसे बात करूं अहमद नवाज़ का नाम सुनते ही मम्मी तो आग को बोला हो जाएंगी और फिर लड़के वाले आए और मुझे पसंद करके गए और कुछ
ही दिनों बाद मेरी मांगनी हो गई लेकिन मैं दिल ही दिल में मैन सुबह बना लेने लगी की अगर अहमद नवाज़ हुसैन मोहब्बत करता है तो मैं मांगनी तोड़ दूंगी अहमद नवाज़ ने भी यह कर लिया था लेकिन मुझमें पर नजर डालना तो क्या वह मुझे देखना भी गुनाह समझता था उसकी यह लड़का लड़की ने मुझे कर दिया उसको अपनी जान अब राघव करने के कितने ही मंसूबे बनाती लेकिन मेरा हर मंसूबा नाकाम होता जा रहा था पता नहीं वह पत्थर का इंसान था या उसके साइन में दिल नहीं था वह मेरी जानी देखता ही
नहीं था इन्हीं दिनों अहमद नवाज़ को खबर मिली की उसका बाप हमारे शहर छोड़ कर गांव में जा रहा है बाबा जान ने उसको रोकना चाहा था लेकिन उसने यह का कर बात खत्म कर दी की उसका बाप कब से उसकी रह देख रहा था उसको वापस जाना होगा मम्मी के लिए तो अहमद नमाज के जाने की खबर खुशी की उम्मीद थी और मैं जो उसके जाने की खबर सुनकर आदमी हो गई थी और खुद के भी खबर नहीं रही थी एक दिन मैंने अहमद नवाज़ से इकरार है मोहब्बत करने का सोच लिया था मैंने
एक वीर खत लिखा jismein मैंने अपने सारे हालत और अपने दिल का हाल लिखकर बयान कर दिया मैंने बहुत उसकी टेबल पर रख दिया और उसके जो आप आने का इंतजार करने लगी आज अहमद नवाज़ को गए छाता दिन था की मैं हर रोज उसका इंतजार करती थी शायद उसके खत का जवाब ए जाए लेकिन उसका कोई जवाब ना आया मैं वे कल ही में अहमद नवाज़ कमरे में चली गई दिल में कितनी ही बार में उसके कमरे में जाती और उसके अंदर चक्कर लगाते हैं लेकिन उसका कोई खत्म मौजूद नहीं था मैंने जब उसकी
राइटिंग टेबल पर देखा तो usmein सफेद लफाफे में एक खत पड़ा हुआ था मैंने जब देखा तो वह मेरा ही खत था और मैं यह देखकर हैरान रह गई की उसने मेरा खत पढ़ा भी नहीं था और मैं befijul उसकी यादों में उसका इंतजार कर रही हूं उसने कभी मेरे दिल के हवाले से आगाही हासिल नहीं की मैंने वहीं पर जारों का तार रोना शुरू कर दिया मैं इंतजार में थी वो ला हासिल था बेबस था और आज जब मेरा एक साल के बाद मेरी शादी हो रही है तो मैं किस कदर अहमद नवाज़ को
भूलने के लिए कामयाब हो गई हूं वक्त बहुत बड़ा उस्ताद होता है जो हर गुजरते दिन के साथ-साथ लखनऊ पर मरहम रखता चला जाता है घर में शादी आने बजाने लगे शादी का माहौल भी था नौकर ने मुझे चिट्ठी लाकर पकड़े मैं पहले उसे चिट्ठी को देखती रही और मैं तमाम दोस्तों तो शादी पर ए रही हैं फिर कौन दोस्त है जिसने मुझे चिट्ठी लिखी थी मैंने चिट्ठी को ओल्ड कर देखा और जूही कर मैंने चिट्ठी nikaali यकीन मानो मेरे पैरों तले से जमीन निकल गई थी प्यारी मुझे चौंका दिया था मेरी नजर बेताबी से
अगली शत्रु को पड़ने लगी जारी तुम्हारे लिए हैरत अंगेश बात होगी यह सुनकर मैं भी तुम्हें चाहता हूं अहमद नवाज़ के alfaazon ने जारी के सर पर बम फोड़ दिया था वो गिनने के इसे अंदाज़ में सोफे पर बैठ गई लेकिन मैं कभी यह जरूरत नहीं कर सका के तुम्हें बताऊं तुम्हारा खत पढ़ा दिल को तकलीफ हुई की मोहब्बत के ही सफर में मैं अकेला मुसाफिर नहीं हूं लेकिन जारी मैं bujdil था मैं ही जानता हूं मामू जान मुझे भले ही काबुल कर लेते लेकिन तुम्हारे भाई और मामा मुझे नौकर की हैसियत से तो काबुल
कर सकते द लेकिन दामाद की हसीन से कभी काबुल नहीं करेंगे मैं शादी कर रहा हूं अपने पापा की बेटी से वह ना तुम्हारे जितनी हसीन है और ना ही तुम्हारे जितनी पढ़ी लिखी लेकिन सारी वो मुझसे मोहब्बत करती है जितनी मैं तुमसे करता हूं लेकिन मैं उसको काबुल कर रहा हूं यह सोच करके हमारी किस्मत में ही यही लिखा था अब तक बाद मेरी शादी है अगर टाइम मिले तो ए जाना फकत बड़ा अहमद नवाज़ अहमद नवाज़ का इकरारनामा मेरे सामने था मुझे शिकवा था अहमद नवाज़ से की उसने मेरे दिल में bujhati लोगों
को हवा दी थी अब यहां आशिकी के भर जल रहे द जब उसने मंजिल का यकीन कर ही लिया है तो मुझे अपने दिल के जाने वाले रास्ते का पता क्यों बताया मैं जो की आज नया सफर शुरू कर रही थी फिर से वही रास्ते पर आकर खड़ी हो गई उसने मोहब्बत में मुझे बहुत बड़ा धोखा दिया था बहुत दिनों के साथ अपने कीमती राय से जरूर nawajiyega क्योंकि जारी और अहमद नवाज़ की कहानी सच्ची है कहानी का एक-एक क्लब सच है मोहब्बत में इंसान बहुत कुछ कर सकता है लेकिन उसकी अन्ना और उसकी सबसे
बेहतर होती है आज अगर से अहमद नवाज़ और सनी दोनों अपनी जिंदगी में मगन है लेकिन एक कलश दोनों के दिलों में अभी भी मौजूद है जिसको दोनों ने भाया था जारी चुके लड़की थी जो की अपने जज्बात नहीं कर सकती थी और अहमद नवाज़ एक कठोर मठ था जो की ahsaano तले ढाबा हुआ था जिसकी इज्जते नफ़्स उसे यह सब करने पर मजबूर नहीं कर सकती थी उम्मीद है हमारी आज की कहानी आपको पसंद आएगी वीडियो बनाने की शुरुआत में लाइक करते हुए शेयर जरूर kijiega और मेरी तमाम ने आने वाले व्यूवर्स एक तमाशा
है जिन्होंने अभी तक हमारे चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया वो जल्दी से हमारे चैनल को सब्सक्राइब करते हुए बैल नोटिफिकेशन को ऑन कर लें ताकि मुझे आने वाली वीडियो के हवाले से मालूमात हासिल कर सकें मिलते हैं एक और वीडियो के साथ तब तक अपना ख्याल रखिए हमें दीजिए इजाजत अल हाफिज