22 साला दुआ सीढ़ियों पर बैठी सर्दी में ठठर के बावजूद अपने शौहर असल का इंतजार कर रही थी यह रात के तकरीबन एक बजे का वक्त था और कार पोर्च में मुकम्मल अंधेरा छाया हुआ था लेकिन वह सीढ़ियों पर बैठी अपने शौहर की मुंतज थी उसका बस नहीं चल रहा था कि व उसे जाकर रास्ते से ही खेंच कर घर ले आए वर्सल की रूटीन से वाकिफ थी क्योंकि उसका आना जाना शादी से पहले भी खाला के घर लगा रहता था व अक्सर घर देर से आया करता था आज भी खाला नजत ने उ से
समझाते हुए कहा था कि जब तक अरसल घर नहीं आता तुम अपने कमरे में मत जाना शौहर को यह बात अच्छी नहीं लगती कि उनकी बीवियां उनके आने से पहले खाना खाएं या फिर सो जाए सोने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता नजत खाला उसे आए रोज यही बातें समझाती थी कि इन बातों पर अमल करके अपने शौहर का दिल जीतो और वह उन बातों पर मुकम्मल अमल करने की को कोशिश भी कर रही थी हालांकि अभी तो उसकी शादी को सिर्फ एक हफ्ता हुआ था और उसे इन बातों पर अमल करके अपने शौहर
का दिल जीतने की जरूरत पड़ गई बला शबा वह बला की हसीन थी खुदा ने जैसे उसे फुर्सत से बनाया था उसके हुसन में किसी चीज की कमी नहीं थी दराज कद नीली आंखें बेहद सुफैद रंगत कमर तक आते सुनहरे बाल और उस पर खुलती हुई जवानी वह इस कदर हसीन थी कि देखने वाले का ईमान डगमगा से सकती थी महज 22 साल की उम्र में ही उस पर जवानी टूट करर बरसी थी हरन की आवाज आते ही वह सोचो की दुनिया से बाहर आई अरसल की गाड़ी बाहर आ चुकी थी वह जल्दी से उठी
और उठते ही मेन गेट खोलने लगी अरसल गाड़ी से निकलकर मेन गेट खोलने ही वाला था जब उसको गेट खोलते देखकर दोबारा गाड़ी में बैठ गया कार अंदर पार करते ही उसने दुआ को सलाम करने की बजाय अपना मोबाइल खोला और उस पर कुछ टाइप करते हुए अंदर चला गया वह इतनी बेद हानी में अंदर चला गया जैसे उसने वहां पर दुआ की मौजूदगी को महसूस ही ना किया हो या दुआ की मौजूदगी से उसे कोई फर्क ही ना पड़ा हो दुआ एक हफ्ते से उसका यह रवैया महसूस कर रही थी अजीब सी बेचैनी उसके
अंदर फैली हुई थी उसे यूं लगता था जैसे उसके अंदर ही कोई कमी है जो उसका शौहर उस पर तवज्जो नहीं दे रहा वह तो हर मुमकिन कोशिश कर रही थी कि किसी ना किसी तरह उसकी तवज्जो का मरकज बने लेकिन वह शख्स था इस कदर बे मरवत हो रहा था कि उसकी तरफ देखना भी गवारा नहीं करता था हत्ता कि शादी की रात भी उसने इसी तरह का रवैया इख्तियार किया जब वह अरूसी जोड़ा पहने बेड पर उसकी मुंतज थी तो ना जाने उसकी आंखों में किस कदर हसीन ख्वाब उमड़ कर आ रहे थे
लेकिन अरसल ने अंदर आते ही उसे तंजिया नजरों से देखते हुए उठने का इशारा किया और नफरत और ह कात से उसकी तरफ देखते हुए बोला जब मैं आऊ तो मुझे तुम्हारा यह भूतिया मेकअप और तुम्हारा यह लाल ल यहां पर नजर ना आए मुझे इस वक्त बेहद सुकून की जरूरत है और मैं पिछले एक साल से इसी सुकून का आदी हूं अम्मा सिर्फ इसी वजह से मेरे कमरे में अलान को नहीं रखती कि उन्हें अंदाजा है कि मैं किस कदर सुकून पसंद हूं क्योंकि मुझे सुबह हस्पताल जाना उसका लहजा किस कदर सख्त और सफाकदल
करने के बाद यूं नजर फैलाकर चला गया जैसे कुछ कहा ही ना हो और उसके जज बात से उसे कोई फर्क ही नहीं पड़ता हो सुहागरात को पिलाई जाने वाली झाड़ के बाद दुआ ने यह फैसला कर लिया था कि वह अपने शौहर को तंग नहीं करेगी अगर वह इस कदर सुकून का आदी है तो फिर उसे सुकून से ही रहने देगी लेकिन खाला जब भी उसकी असल पर बेद हानी को देखती तो उसे समझाते हुए कहती कि जब तक तुम अपने शौहर पर तवज्जो नहीं दोगी तुम अल्लाह की नजर में भी मकबूल नहीं बन
पाओगी अरसल तुम तुहारा शौहर है और अब तुम पर हक रखता है और इन्हीं बातों के जेरे असर आज वह उस शख्स के इंतजार में इतनी देर तक जागती रही उस वक्त उसकी आंखें नींद से भोजल हो रही थी लेकिन उसके बावजूद उसने किचन में जाकर खाना गर्म किया और उसे सलीके से ट्रे में सजाकर रखा और लाकर अरसल के आगे रख दिया अरसल ने एक नजर खाने को देखा और फिर अपने बाजू सीने पर बांधकर उसे इत्मीनान से देखते हुए बोला मैं तुम्हें कितनी बार समझाऊं दुआ कि मुझे इन चौच की जरूरत नहीं और
ना ही मुझे इन सब की आदत है जब तक मेरी शादी तुम्हारी आपी से थी तब तक मेरी जिंदगी में सुकून था लेकिन जैसे ही तुम मेरी जिंदगी में आई हो मेरी जिंदगी बे सुकून होकर रह गई मेरी जिंदगी का सुकून तुम्हारी आपी के साथ ही रुखसत हो गया और तुम इसमें मजीद बे सुकूनी की वजह बन रही हो मैंने तुम्हें पहले ही रात धुत का दिया तो मैंने तुम्हें इसी बात का एहसास दि ना चाहा था कि मुझे तुम्हारी इन बीवियों वाली आदतों की जरूरत नहीं तुम यहां पर सिर्फ और सिर्फ मेरी मां की
पसंद से आई हो और उन्हीं के साथ वक्त गुजारो मुझे कोई ऐतराज नहीं है या फिर अपने लिए कोई और मुश्किला ढूंढ लो लेकिन मैं तुम्हें यह नहीं कहूंगा कि तुम मुझे वक्त दो और मुझ पर ज्यादा ध्यान देने की कोशिश करो यह सुनकर दुआ को यूं लगा जैसे एकदम से ही उसे शर्मिंदगी ने आन घेरा हो वह एक बीवी से ज्यादा एक खाला जाद होने की हैसियत से ही उसकी तरफ खींची चली आती थी उसे अरसल का गमजदा और बेसक रहना अच्छा नहीं लगता था इसीलिए उसकी दिलज की खातिर वह यह सब कुछ करती
थी लेकिन वह उसे किस तरह दुत्कार देता था और आज तो उसने किस तरह संग दिली से उसकी बेइज्जती की थी वह शख्स जैसे उसे अपनी हैसियत याद दिलाने पर उतर आया था और उसे यहां तक भी कह दिया कि मेरे कमरे से निकल जाओ वह उसी वक्त उल्टे कदमों वापस खाला नुजहत के कमरे में चली गई जो उस वक्त गहरी नींद सो रही थी लेकिन उसके अंदर आते ही वह जाग गई और परेशानी से उसे देखने लगी क्या हुआ है बेटी तुम इस वक्त इस कमरे में क्या कर रही हो उसे देखकर निहायत परेशान
हो गई थी जब वह रोते हुए उनके सीने से जा लगी खाला खुदा के लिए मुझे मजीद आजमाइश में मत डाले मैं और कितना इनके करीब जाने की कोशिश करूं मैं अभी भी इनके लिए खाना लेकर गई थी लेकिन उन्होने मुझे बुरी तरह दुद काते हुए वह बातें की कि मेरा दिल नहीं चाहता कि मैं इनसे दोबारा बात करूं आखिर वह हर बार मेरा दिल तोड़ देते हैं पागल हो गई हो दुआ उन्होंने एकदम से ही उसे सीने से हटाया और उसकी तरफ देखते हुए बोली शोहर का दिल ऐसे ही जीता जाता है दुआ अरसल
ने भले ही तुम्हें कुछ ना कहा हो लेकिन उसके दिल में तुमने जरूर चोट लगाई बस उसी दर्द को गहरा होने दो और फिर वह तुम्हारा हो जाएगा शौहर को अपना बना ने के लिए एक बीवी को बहुत सारे जतन करने पड़ते हैं बेटा हमें ही देख लो मैंने खुद तुम्हारे खालू से मार तक सहकर जिंदगी गुजारी लेकिन अब तुम्हारे खालू मेरी कितनी इज्जत करते हैं दुआ उनके सामने बैठी सख्ती से अपने लबों को कुचल हुए उन लम्हों को ढूंढ रही थी जब खालू ने खाला नुजहत की इज्जत की हो उसे तो लगता था कि
उसका शौहर हुबहू अपने बाप के जैसा है खालू ने आज तक एक बार भी खाला से अच्छे तरीके से बात नहीं की की थी लेकिन वह फिर भी उनके उस रवैए को अच्छा समझ रही थी और अगर यही सलूक मुझे सारी जिंदगी अरसल की जानिब से मिलता रहा तो मेरा क्या बनेगा वह इसी सोच में गुम थी जब खाला ने एक बार फिर उसे पुकारते हुए कहा दुआ मेरी तरफ देखो और मेरी बात सुनो चलो मैं तुम्हें एक और तरीका बताती हूं जिससे तुम अपने शौहर को अपनी जानिब मतवल करने में कामयाब हो जाओगी वह
एक बार फिर अपनी पूरी आंखें खोल खाला की तरफ देखने लगी जो आए रोज उसे नित नए तरीके मुतालिब करवाती जिनको अपनाने के बावजूद भी उसे अरल की जानिब से कोई मजबत जवाब नहीं मिल रहा था तुम ऐसा करो कि तुम ऐसे कपड़े पहनो जो तुम्हारे शौहर को लुभाने में कामयाब हो जाए तुम जवान हो खूबसूरत हो और एक बार अगर वह तुम्हारी कुर्बत का आदी हो गया तो फिर तुमसे दूर नहीं रह पाएगा तुम्हारा लम्स उसे सुकून देने लगेगा तो वह तुम्हारे वजूद से ही सुकून हासिल करना शुरू कर देगा ना कि तुम्हें बे
सुकूनी की वजह समझे और वह बेद हानी से खाला की जानिब देख रही थी ना जाने उस शौहर को अपना बनाने के लिए उसे और कितनी आजमाइश से गुजरना पड़ता तुम ऐसा करो अभी चली जाओ जाकर अपने शौहर के पास सो जाओ ताकि वह तुम्हारा आदि बन जाए तुम उसके कमरे से बाहर निकल जाओगी तो उसकी जिंदगी से भी बाहर निकलती जाओगी जब मियां बीवी एक दूसरे से दूर होकर सोते हैं तो उनके दिलों में भी दूरियां पैदा हो जाती हैं जाओ मेरा बच्चा जाकर अपने शौहर के पास सो जाओ खाला की बात को मानते
हुए वह ना चाहते हुए भी एक बार फिर अपने दिल और अपनी इज्जत नफ्स पर पत्थर रखते हुए उठती और बजल कदमों से अपने कमरे की जानिब चली गई कमरे के सामने वह एक बार फिर खुद को नॉर्मल करने लगी उसका बिल्कुल दिल नहीं चाह रहा था कि वह एक बार फिर उस कमरे के अंदर चली जाए जिस कमरे से वह अभी जलील होकर बाहर निकली लेकिन यह उसकी जिंदगी थी और उसकी जिंदगी की तमाम मुश्किलात को खत्म करना सिर्फ उसी का काम था उसने दरवाजे के हैंडल पर हाथ रखा और दरवाजा खोलकर अंदर चली
गई कमरे में अरसल की भारी सांसें गूंज रही थी उसे अरसल के उन राटो से इतना खौफ आता था कि वह मुंह बसोर कर उसकी जानिब देखने लगी दिल चाहा कि उसे जगाकर कहे कि अपने खराटे बंद कर ले लेकिन इतनी जुर्रत तो व शायद जिंदगी में भी ना कर सकती अजलान भी पुर सुकून नींद सो रहा था वह मुस्कुराहट से उसके चेहरे की तरफ देखती रही एक वही तो उसके सुकून की वजह था और शायद इस घर में रहने के लिए भी उसके पास अजलान के बाद और कोई जवाजा था हो सकता है खाला
भी अच्छे तरीके से बात करती हूं सिर्फ इसीलिए कि वह अजलान को सारा दिन संभालती एक बार फिर इस सोच ने उसके दिमाग के दरवाजों पर दस्तक दे दी और ना जाने कब तक वह यही बातें सोचते हुए नींद की वादी में उतर गई सुबह जैसे ही उसकी आंख खुली तो वह उठकर बैठ गई अरसल जा चुका था और शायद उसे सोते सोते कुछ देर हो गई वह जल्दी से नीचे उतरी और फ्रेश होकर बाहर चली आई खाला शायद अपने कमरे में थी वह खाला के कमरे में गई और अंदर दाखिल होते ही उन्हें सलाम
किया लेकिन वह आस्त कीी से जवाब देकर अपने काम में मशगूल नहीं और उसकी तरफ देखना भी गवारा नहीं किया उसे बेहद हैरत हुई कि ना जाने खाला को क्या हो गया वह किसी बात पर नाराज थी उसे उनके चेहरे की शफकत एकदम से सांस के तेवर में बदल गई वह काफी देर उन्हें हैरत से देखती रही और फिर आस्त कीी से पूछा क्या हुआ है खाला क्या आप नाराज है नहीं मैं क्यों होने लगी नाराज तुमसे उनका रवैया इस कदर सख्त था कि वह एकदम से खामोश हो गई खाला कुछ हुआ है उसके दिल
को अभी भी तसल्ली नहीं हो रही थी कि ना जाने क्या हुआ जब वह एक बार फिर सख्त लहजे में बोली होना क्या था मैंने तुम्हारी अरसल से शादी सिर्फ इसी वजह से की थी कि तुम अरसल का ख्याल रखो मेरा बेटा सुबह बिना नाश्ते के चला गया बस मैंने उसे एक कप चाय बनाकर दी जो उसने पी है बीवी होने की हैसियत से तुम्हारा इतना तो हक बनता है कि तुम सुबह सवेरे उठकर अपने शौहर को नाश्ता बना कर दो या यह वाले आदाब तुमने सीखे ही नहीं है वह कितनी ही देर उन्हें देखती
रही पहले घर में तंज करने के लिए अरसल काफी था जब खाला भी वही तरीका इख्तियार करने लगी हैं एकदम से ही उसे शायद दुख हुआ वह जानती भी थी कि वह रात देर तक अरसल का इंतजार करती रही है और आज मामूल के खिलाफ उसे उठने में देर हो गई तो खाला ने उसे इस कदर जली कटी सुना दी हालांकि वह सारा दिन घर का सारा काम करती है उसने खाला को कभी काम को हाथ तक लगाने नहीं दिया था पूरा घर और अजलान की जिम्मेदारी को उसने एसन तरीके से संभाला हुआ है लेकिन
दिल में वह यह सब कुछ सोचते हुए खामोश हो गई और बाहर जाने लगी जब खाला ने पूछा अब फिर किधर जा रही हो मैं बर्तन धो लेती हूं उसने आस्त कीी से जवाब दिया जब एक बार फिर खाला उसे देखते हुए बोली कि बर्तन बाद में धो लेना पहले इधर आओ मेरे पास बैठो और तवज्जो से मेरी बात सुनो वह एक बार फिर उसको अपने पास बिठाते हुए शफकत भरी मुस्कुराहट चेहरे पर सजाकर बोली मैं जानती हूं तुम अरसल की वजह से परेशान हो मैं यह भी जानती हूं कि बतौर औरत तुम्हारे लिए पहल
करना किस कदर मुश्किल है लेकिन मेरा यकीन करो अगर तुम पहल करोगी और अरसल से कहोगी कि तुम्हें औलाद चाहिए तो वह जरूर तुम्हें अपने करीब ले आएगा या फिर उसे इतना ही कह दो कि वह तुम्हारे जिज बात की कदर करे और तुम्हें उससे औलाद चाहिए तो फिर भी तुम दोनों के दरमियान एक ताल्लुक कायम हो सकता है जो वक्त के साथ-साथ मजबूत हो जाएगा वह खामोशी से खाला की बात सुनकर नजर झुकाए बैठी रही जब वह एक बार फिर उसके हाथ पर नरमी से अपना हाथ रखते हुए बोली कि अरसल की जिंदगी में
अपनी जगह खुद बनाओ अरसल अभी तक सारा के गम से बाहर नहीं निकला अगर तुम उसे कहोगी कि वह तुम्हारे हुकूक पूरे करें उसके बाद तुम्हें औलाद हो जाएगी तो यकीनन तुम उसके दिल पर राज करने लगोगी सारा का नाम आते ही उसकी आंखों में नमी उतरने लगी वह मुस्कुराते हुए खाला की तरफ देखकर कहने लगी क्या अरसल सारा आपसे बहुत प्यार करते थे हां इस कदर ज्यादा प्यार करता था कि उसने सारा को तो मेरे सर पर बिठाकर रखा हुआ था और सारा की वजह से अपनी मां को नजरअंदाज कर देता था उसको तो
सारा इस कदर प्यारी थी कि उसने बीवी के लिए मां को ही बुला दिया था खाला का रवैया एकदम से बदल गया सारा का नाम लेते ही जिस तरह उनके चेहरे पर सख्ती छ गई थी दुआ को यह सब कुछ देखकर काफी दुख हुआ वह हैरान थी कि इन लोगों ने अभी तक उसकी मरहमा बहन को नहीं माफ किया हालांकि वफात पा जाने वाले इंसान को माफ कर देना चाहिए क्योंकि वह अपने आमाल तक पहुंच चुका और उन्होंने तो कोई ऐसी गलती भी नहीं की थी कि उनका जिक्र इस तरह काबिले नफरत तरीके से लिया
जाता जो लोग मेरी बहन के साथ मुखलिस नहीं है वह मेरे साथ क्या मुखलिस होंगे इसे इन लोगों के दोगले रवैए से अफसोस होने लगा वह जानती है कि जिस घर के लोग एक अरसा उसकी बहन के साथ रहे और उसके बावजूद उसके बारे में अच्छा नहीं सोचते तो वह उसके बारे में क्या अच्छा सोचेंगे लेकिन अब इन बातों का वक्त नहीं था इसलिए वह इन तमाम बातों को दिल में रखते हुए खामोश हो गई वह वहां से उठकर चली आई लेकिन खाला की बातें उसके दिल में अजीब सी सनसनी दौड़ा गई थी वह सोच
भी नहीं सकती थी कि वह लोग उसकी मरहूम बहन के लिए इस तरह की बातें और अल्फाज इस्तेमाल करते होंगे यही सोचते हुए उसने अपने लिए एक कप चाय का बनाया और अपने कमरे में वापस आ गई अर्सल का कमरा बिल्कुल भी नहीं बदला था बिल्कुल वैसा ही था जैसे सारा की मौजूदगी में हुआ करता उसे याद था कि जब वह सिर्फ 10 साल की थी तब उसकी बहन की शादी हो चुकी थी और जब कभी कबार व अपनी बहन को मिलने के लिए आती तो किस कदर अरसल और सारा एक दूसरे के साथ खुश
होते उसने पलकों को छपक छपक कर बेड की तरफ देखा यूं महसूस होता था जैसे उसके सामने ही मुस्कुराते हुए अरसल और सारा एक दूसरे को प्यार भरी नजरों से देख रहे हो मुस्कुराती करती हुई सारा की मौजूदगी का एहसास कमरे की एक एक चीज में था कैसे वह अरसल को तंग करते हुए कहके लगाती थी वह जानती थी कि अरसल और नजत खाला किस कदर खुशी से उसकी बहन को ब्याह कर ले गए थे बिल्कुल यही दिन थे जब वह अपनी बहन के घर रहने के लिए इस घर में आई तो अब यह सब
कुछ उसकी बहन का था और उसकी हैसियत कुछ और थी उसके सामने ही बैठ ब हुए अरसल और सारा एक दूसरे के साथ ढेरों खुश गप्पिस्तान आज इस सब की हैसियत और थी वह यह सब कुछ नहीं चाहती थी लेकिन मुकद्दर ने सब कुछ उसकी बहन से छीनकर उसके हवाले कर दिया कभी-कभी उसे यूं महसूस होता जैसे मुकद्दर ने उसके साथ बहुत बड़ा मजाक किया यह सब कुछ उसके नाम कर दिया लेकिन इस हद तक कि उसकी रसाई मुमकिन ही नहीं की काश इस सब में उसे कुछ भी ना मिलता और सब कुछ सारा आप
ही के मुकद्दर में यूं ही लिखा रहता वह ता कयामत तक अपनी खुशियों को खुद ही एंजॉय करती आज भी इन सब खुशियों पर सबसे पहला हक सारा का ही था और वह किस कदर खुश थी अरसल का साथ पाकर लेकिन फिर एक अरसे के बाद उसने सबको बताना छोड़ दिया और वह गुमसुम सी रहने लगी वह हर वक्त हंसती मुस्कुराती सारा जिसे खोकर रह गई ना जाने उसकी जिंदगी में कौन सा व बाल आ गया था कोई पूछता भी तो वह बस मुस्कुरा करर नजरअंदाज कर देती जब कुछ अरसे के बाद उन्हें यह दर्दनाक
खबर सुनने को मिली तो उन्हें यूं लगा जैसे आसमान उनके सर पर गिर पड़ा हो उसकी हस्ती मुस्कुराती जिंदगी से भरपूर बहन सारा अजलान को जन्म देते हुए इस दुनिया से चली गई इन सबको छोड़कर हमेशा हमेशा के लिए अपनी खुशियों को अधूरा छोड़कर और हर चीज में अपनी मौजूदगी का एहसास छोड़कर वह दिन बिल्कुल कयामत की तरह था सारा एक जवान लड़की थी और उसकी जिंदगी में ऐसा कोई मसला नहीं था कि किसी को भी उम्मीद होती कि वह उन्हें यूं अचानक छोड़कर चली जाएगी बेशक मौत बरहक है और मौत का कोई दिन मुकर्रर
नहीं होता लेकिन फिर भी जिन लोगों का यूं अचानक चले जाना धज का लगता है वह इंसान ता उमर नहीं संभल पाता उसकी पूरी दुनिया ही डगमगा जाती एक सवाल उन सबकी आंखों में रह गया कि सब कुछ ठीक होने के बावजूद एक एकदम से ही सारा उन्हें छोड़कर चली गई बच्चा पैदा करते हुए सब कुछ नॉर्मल था लेकिन एकदम से उसकी डेथ हो जाना लेकिन फिर सबने यह कहकर खुद को तसल्ली दे दी कि जो अल्लाह को मंजूर हो वही होता है कितने ही दिन वह लोग संभल ही नहीं पाए थे उसका बाप खालिद
सदीकी हर बार यही कहता था कि वह लोग मेरी बेटी को खा गए लेकिन वह जानती थी कि उसकी मां अपनी बहन पर बेहद यकीन करती और उसे भी लगता था कि खाला उनके साथ कभी भी कुछ भी बुरा नहीं करने दे खालिद साहब रोते हुए यह कह देते कि मेरी बेटी के साथ इन लोगों ने कुछ गलत किए जो व एकदम से ही हमें छोड़कर चली गई लेकिन उसकी मां हमेशा यही कहती थी कि इन लोगों ने सारा को बिल्कुल एक शहजादी की तरह रखा हुआ था मौत और जिंदगी तो खुदा के हाथ में
है और सभी उनकी बात को ना जानते हुए भी तस्लीम कर लेते बेशक खुदा के आगे किसी का बस नहीं चलता वह जानती है कि उसका बाप आज तक इस बात को नहीं मानता कि उस की बेटी की वजह एकदम से ही बच्चे की पैदाइश हो गई लेकिन वह जानती थी कि उसकी मां हर मामले में सबसे पहले अपनी बहन को अव्वन तरजीह देती हैं और उसके बारे में एक लफ्ज भी नहीं सुन सकती लेकिन अब उसे भी एहसास हो रहा था कि बाबा जान ठीक ही कहते हैं हो सकता है कि उन लोगों ने
आप ही के साथ भी वैसा ही किया हो जैसा मेरे साथ कर रहे हैं वह शख्स कम से कम इस बात की लाज रख ले कि मैं उसकी खाला जाद और उसकी मरहमा बीवी की बहन हूं लेकिन वो शख्स इस कदर नामुर वत हो चुका कि उसे किसी भी बात का किसी भी रिश्ते का कोई एहसास नहीं और अब खाला उसके जहन में एक बार फिर खाला की बातें गूंजने लगी जो चाहती थी कि वह एक बार फिर उस शख्स की औलाद पैदा करें जो शख्स उससे एक नजर की भी तवज्जो देना गवारा नहीं करता
वह यही सब कुछ सोच रही थी जब एक बार फिर नुजहत बेगम उस कमरे में दाखिल हुई और उन्हें यूं सोचो में गुम देखकर ठक कर उसके पास चली आई उनके हाथ में एक पैकेट था उसने उनकी तरफ देखा और एक बार फिर उनके चेहरे पर फैली हुई मुस्कुराहट को देखकर समझ गई कि वह किसी नई चाल के सिलसिले में उस तक आई हैं कभी-कभी उसे यूं लगता था जैसे खाला उसे एक मोहरा बनाकर उसके साथ खेल रही है या फिर किसी कठपुतली की सूरत में वह उनकी हर बात को मानती चली जा रही क्या
सोच रही हो दुआ उन्होंने अपना हाथ आगे बढ़ाते हुए उसके हाथ पर रखा और उसकी आंखों में देखकर नरमी से बोली मैं जानती हूं कि तुम अभी तक मेरी बातों को सोच रही हो बेटा औलाद का पैदा हो जाना औरत के कदमों को मजबूत कर देता है इसीलिए मैं चाहती हूं कि तुम्हारे कदम इस घर में मजबूत हो जाए यह पैकेट मैं तुम्हारे लिए लेकर आई हूं यह सब कुछ तुम्हारी बहन का है लेकिन अगर तुम इसे इस्तेमाल करोगी तो मैं जानती हूं कि अरसल जरूर तुम्हारी तरफ रागब हो जाएगा उसने झकते हुए खाला के
हाथ से वह पैकेट ले लिया जब वह एक बार फिर उठते हुए बोली कि यह तुम्हारी बहन का लिबास है तुम इसे पहनकर अरसल के करीब जाओगी तो तुम्हारी औलाद की ख्वाहिश पूरी हो जाएगी उसे एकदम से ही खाला की बात पर शदीद गुस्सा आने लगा लेकिन फिर यह सोचकर खामोश हो गई कि अब उसका और अरसल का निकाह हो चुका था और उन लोगों की नजर में निकाह में सब कुछ जायज होता है चाहे उसमें कितनी ही इज्जते नफ्स रोन दी जाए चाहे जो करते रहे बस उसमें अपना फायदा नजर आना वह अब यही
सोच रही थी कि उसे एक बार फिर अरसल को अपने करीब लाने के लिए एक आखिरी कोशिश करनी चाहिए और अगर उसकी कोशिश के बावजूद भी कुछ नहीं हुआ तो फिर उसे अपनी जिंदगी की राहें असल की राहों से जुदा करनी पड़ेंगी क्योंकि यह जिंदगी बिल्कुल कांटों पर गुजरने वाली जिंदगी थी और उसे अपने फूलों भरी मुख्तसर जिंदगी को कांटों की नजर नहीं करना था खाला के बाहर जाते ही वह पुर सोच नजरों से उठी और उस ड्रेस को संभाल कर रख दिया मामूल के मुताबिक वह पूरा दिन कामों में मसरूफ रही और जब शाम
का वक्त हुआ तो खाना खाने के बाद वह फ्रेश हो गई उसने वही नीले रंग के नाइट ड्रेस को पहन लिया शीशे के सामने खड़े होकर वह मुसलसल अपने बालों में कंघी कर रही थी और खुद को आईने में देखकर सोच रही थी कि इसमें किस चीज की कमी है आखिर किस बना पर उसका शौहर इस कदर भाव खाता है वह तो इतनी हसीन है कि एक नजर ही देखने वाला उस पर अपना ईमान नि चावर कर दे लेकिन उसका शौहर उसकी तरफ एक बार भी नजरे कर्म नहीं कर सका नीले रंग के नाइट ड्रेस
में उसकी दूधिया रंगत धमक रही थी उसने हल्का-हल्का मेकअप भी कर रखा था उसके वजूद से उठती खुशबू किसी को भी पागल करने की सलाहियत रखती थी वह पूरे दिल से उसके लिए तैयार हुई थी और उसका इंतजार कर रही थी वह बेड पर लेटने की बजाय बुक लेकर सोफे पर ही बैठ गई ताकि उसे अरसल के आने से पहले नींद ना आ जाए यूं ही इंतजार करते करते तकरीब रात का एक बज गया उसकी आंखें अब नींद से भोजल हो चुकी थी नीली आंखों में अब नींद की सुरखी छाई तो उनका खुमार और भी
जानलेवा हो गया तभी वह दुश्मने जा कमरे में दाखिल हुआ वह अंदर आते ही सबसे पहले उसकी जानिब मतवल हुआ और उसे देखकर ठठ कर रुक गया उसने सर से लेकर पैर तक उसका जायजा लिया और उस पर भरपूर निगाह डालकर आगे चला गया उसकी एक नजर ने उसके हलक तक को खुश कर दिया था खौफ से वह अंदर ही अंदर कांप कर रह गई थी ना जाने उस शख्स ने इसके बारे में क्या सोचा होगा लेकिन उसके बावजूद वह उठी और किचन में चली आई उसके लिए खाना गर्म करके ट्रे में सजाकर रखा और
दोबारा कमरे में चली गई उसने उसके आगे खाना रखा और हैरत अंगेज तौर पर वह खाने को देखकर खामोश हो गया थोड़ी देर के बाद उसने ट्रे अपनी जानिब सिरका ली और खाना खाना शुरू कर दिया खाना खाते हुए उसने एक बार भरपूर नजरों से का जायजा लेते हुए मुस्कुराते हुए उससे पूछा आज अम्मा ने तुम्हें कोई नई तरकीब सिखाई है या अपने ही तजुर्बे को आजमा रही हो व उसकी तंजिया बात सुनकर एकदम से खामोश हो गई और फिर मुस्कुराकर उसकी जानिब देखते हुए बोली मुझे किसी भी तजुर्बे को आजमाने की जरूरत नहीं है
और ना ही किसी भी तरकीब पर अमल करने की जरूरत है आप मेरे शौहर हैं आप मुझ पर हक रखते हैं और बिल्कुल ऐसे ही मैं भी आप पर हक रखती हूं और वैसे भी अब मुझे बेबी चाहिए वह उसकी बात सुनकर हैरत से उसे देखता रह गया उसके सामने खामोश रहने वाली उस लड़की ने अच्छी खासी हिम्मत दिखाई थी उसे खामोश देखकर उसकी हिम्मत कुछ मजीद बड़ी जब उसकी जानिब चलते हुए बिल्कुल उसके सामने आई और अपनी बाहों को उसके गले में डाल दिया ऐसा बिल्कुल भी नहीं करना चाहती थी लेकिन हालात ने उसे
इस कदर मजबूर कर दिया था कि उसके पास एक आखिरी हरबा था जिसे वह आजमाकर शायद अपने घर को बचा लेती या उस शख्स को अपना बना लेती उसका दिल उस वक्त बेतरतीब से अंदाज में धड़क रहा था जैसे अभी पसलियां तोड़कर बाहर आ जाएगा उसके इतना करीब थी कि उसकी सांसों की महक उसे अपने चेहरे पर पड़ती हुई महसूस हो रही थी एक अदा सेव उसकी आंखों में देखते हुए बोली वैसे मुझ में कोई कमी तो नहीं है जो आप मुझसे इतना दूर भागते हैं जब वह कुछ देर उसे देखता रहा और फिर उसके
बाजुओं को सख्ती से खींच करर खुद से अलग किया और उसके सीने पर हाथ रखते हुए उसे दूर धकेल दिया वह इस अचानक इफ्त दद के लिए तैयार नहीं थी इसीलिए लड़खड़ाते हुए दूर जागी और हैरत भरी नजरों से उस शख्स को देखने लगी जिसके अंदर रहम या तहजीब नाम की जरा भी चीज नहीं थी जब वह उसकी जानिब चलता हुआ आया और उसे बाजू से पकड़कर अपने सामने खड़ा करते हुए उसकी आंखों में देखकर चबा चबा कर बोला तुम्हें तमीज नहीं है तुम औरत होकर इस तरह की हरकतें करती हो अगर मुझे तुम में
थोड़ी सी भी दिलचस्पी होती तो मैं खुद तुम्हारे करीब आता इस कदर हद तक अमेज रवैए पर उसकी आंखों से आंसू बहने लगे खजा शर्मिंदगी और बेइज्जती के एहसास से उसका रंग बिल्कुल सुर्ख पड़ चुका था लेकिन उस शख्स को उस पर जरा भी रहम ना आया वह मुसलसल उसे कहर बरसाती नजरों से घूर रहा था और उसे देखते हुए बोला मुझे लगता है तुमसे अपनी जवानी संभाली नहीं जा रही इसीलिए इस तरह की बे बाक हरकतें करती फिर रही हो तुम्हें कुछ ज्यादा ही शौक चढ़ा है इस तरह की हरकतें करने का वह उसके
गुस्से को देखकर थर थर कांप रही थी और उस वक्त को कोस रही थी जब वह खाला की बात मानकर इस हद तक पहुंची अगर उसने यह सब कुछ किया भी था तो क्या गलत था वह उसका शौहर था और उस पर हक रखती थी वह उसकी जानिब अभी भी मुसलसल देख रहा था मैं पहले ही तुम्हारी बहन से कहता था कि तुम्हारी हरकतें ठीक नहीं है बल्कि जब से हम री शादी हुई थी मैं तो तुम्हारी हरकतों को जेरे गौर रखता था यह तुम्हारी बेबाक हरकतें आज से नहीं बल्कि तब से हैं जब से
तुमने जवानी की दहलीज पर कदम रखा है वह उसे हैरत भरी नजरों से देखती रह गई आखिर वह शख्स इतना किस तरह गिर सकता था और वह उस पर किस तरह के इल्जा मात लगा रहा था आखिर आज तक उसने उसके सामने किस तरह की बदका की थी उसे जरा भी एहसास नहीं था कि वह उसकी बीवी थी और उसकी इज्जत थी उसके बारे में ऐसी बातें करते हु उसने अपनी जुबान को लगाम भी नहीं दिया और जो मुंह में आया कहता चला गया यह सब सुनकर दुआ इस कदर दिल बर्दाश्त हो चुकी थी कि
उसका दिल चाहा कि वह फूट फूट कर रोना शुरू कर दे या फिर जमीन फटे और वह उसमें समा जाए कम से कम वह उस शख्स की नजरों से तो खुद को दूर भेज दे ताकि उसके अताप से बच जाए वह सब कुछ बर्दाश्त कर सकती थी लेकिन अपने किरदार पर लगाए हुए उस दाग को कभी भी बर्दाश्त नहीं कर सकती थी इसीलिए हिम्मत करते हुए की जानिब बढ़ी और उसे देखते हुए बोली आप किस बुनियाद पर मुझ पर यह इल्जाम लगा सकते हैं क्या आप मुझे बदचलन समझते हैं वह भी सिर्फ इसलिए कि मैंने
आपसे अपना जायज हक मांगा आप मुझे एक दिन भी साबित करके दिखाएं कि मैंने आपके सामने किस तरह की बद चलनी का मुजाहि किया मैं यह सब कुछ महज इसलिए कर रही हूं कि अपनी बीवी होने का हक कायम कर सकूं और इस घर में आपकी बीवी की हैसियत से ही रहूं लेकिन आप तो मुझे बदचलन ही समझने लगे लेकिन सामने खड़े अरसल को उसकी चलती हुई जुबान उस वक्त जहर से ज्यादा बुरी लग रही थी वो उसके आंसुओं की परवाह किए बगैर उसकी तरफ बढ़ा और सख्ती से उसे पकड़कर बेड पर धकेल दिया वह
बेड पर जागीरी और उससे पहले कि वो उठ जाती उसने उसके बाजुओं को अपनी ग्रिफ्ट में ले लिया और वह फड़फड़ा करर रह गई व उसके इस कदर करीब होकर चिल्ला रहा था कि उसे यूं महसूस हुआ जैसे आज उसका दिमाग फट जाएगा मैं समझ सकता हूं कि तुम किस शौक के लिए बार-बार मेरे करीब आती हो मैं यह भी जानता हूं कि तुमने किस लिए मेरी अम्मी को बहला पुसला करर मुझसे शादी की इसलिए ना कि तुम मेरे करीब आ सको यह कोई नई बात नहीं है आज तक कितनी ही बहनें दूसरी बहनों के
हक पर डाका डाल चुकी हैं तुम्हारी कहानी कोई नई कहानी तो नहीं है उसके करीब आते ही जहर उगल रहा था और वह खौफ और दहशत से उसे आंखें फैलाए देख रही थी वह उसे दूर धकेल से वस की ग्रिफ्ट से खुद को छुड़ाने लगी जब वह एक बार फिर उसे खींच कर अपने करीब करते हुए बोला तुम जैसी लड़कियां कुछ ज्यादा ही ड्रामा जिंदगी गुजारती तुम क्या समझती हो कि यह सब कुछ आसान होता है तो आज मैं तुम्हें तुम्हारी ड्रामा जिंदगी से हकीकत की तरफ लेकर आता हूं तुम्हारे दिल में जितने भी अरमान
भरे हुए हैं ना मैं आज तुम्हारे सारे अरमान निकाल देता हूं ताकि तुम्हें बार-बार मेरे सामने यूं जलील ना होना पड़े और तुम मुझे बार-बार बेसक ना करती रहो एक ही बार में तुम्हारा जवानी का सारा जोश निकल यह कहते ही उसने सख्ती से उसके लबों को अपनी ग्रिफ्ट में लिया उसकी ग्रिफ्ट इस कदर शदीद थी कि उसे यूं महसूस हुआ जैसे उसने आंख का कोई शोला निगल लिया हो जो उसके लबों के साथ-साथ उसके हलक तक जा पहुंचा हो वह अपने एकएक अमल से उसे एहसास दिला रहा था कि वह उसकी बीवी नहीं बल्कि
एक तवायफ या रखेल है जिसे वह वक्ती तौर पर महज वक्त गुजारी के लिए इस्तेमाल कर र और बाद में उसे फेंक कर चला जाएगा वह तो सोच भी नहीं सकती थी कि वह श इस हद तक गिर जाएगा उसे क्या समझती थी और वह क्या निकला वह तो बस यह चाहती थी कि वह उस शख्स के साथ अपनी जिंदगी की शुरुआत करें और अपनी जिंदगी की खूबसूरती हों से लुत्फ अंद दोज हो लेकिन उसकी जिंदगी इस कदर भयानक होगी वह सोच भी नहीं सकती थी और आज की रात उस शख्स ने उसे बावर करवा
दिया था कि वह उसकी जिंदगी में कोई हैसियत नहीं रखती उसने उसके जिस्म के साथ-साथ उसकी रूह पर भी अनगिनत निशान छोड़ दिए थे और उसके साथ वह सलूक किया जैसे कि वह कोई जानवर हो जिस पर वह वी दरिंदों की तरह टूट पड़ा उसे अपनी हैसियत अच्छी तरह बावर कराने के बाद वह खुद पुर सुकून होकर सो गए लेकिन वह ना जाने कितनी ही देर अपनी कम मायकी पर आंसू बहाती रही और बिलख नींद की वादियों में उतर गई सुबह जैसे ही उसकी आंख खुली तो उसके दुखते सर के साथ उठने की कोशिश की
लेकिन उसके जिस्म के साथ-साथ उसकी रूह भी दुख रही थी उसे यूं महसूस हो रहा था जैसे के जिस्म के एक-एक अंग को तोड़कर रख दिया हो या फिर उसे इस कदर शदीद तरीके से मसल दिया गया हो कि वह किसी काबिल ही ना रहे जिल्लत और खजा का एहसास उसके पूरे वजूद में फैल गया वह सोच भी नहीं सकती थी कि वह लोग उसे उस दिन के लिए लेकर आए हैं जब उसकी खाला उसके घर रिश्ता मांगने गई थी तो उसने उसकी मां के सामने दामन फैलाते हुए कहा था कि मुझे बतौर खैरात तुम
अपनी बेटी का रिश्ता दे दो अगर तुम चाहती हो कि मीर अजलान मां की कमी का शिकार ना हो और मेरे अरसल का घर बस जाए तो मुझे दुआ का रिश्ता दे दो जब दुआ की मां आसिया बेगम उनकी बात सुनते ही खामोश हो गई क्योंकि वह जानती थी कि खालिद सदीकी को वह घराना पहले ही जहर की तरह लगता है उसकी खामोशी को भाम हुए एक बार फिर उसकी खाला ने चालबाजी से उसकी मां को देखते हुए कहा कि दुआ अब 22 साल की हो गई आखिर तुम्हें कहीं ना कहीं तो इसकी शादी करनी
ही है ना तो इसे अपनी मां के हवाले कर दो ताकि इसे तुम्हारी कमी का एहसास ना हो यकीन मानो मैं इसे बिल्कुल मां की तरह ही रखूंगी खालिद साहब ने यहां पर दुआ का रिश्ता करने से साफ इंकार कर दिया था लेकिन नजत बेगम इस कदर बाजी थी कि मजबूरन उन्हें मानना ही पड़ा और उन्होंने निकाह नामे के तौर 50 लाख का हक महर लिखवा लिया इस शर्त पर कि वह लोग उनकी बेटी के साथ किसी किस्म की ज्यादती नहीं करेंगे वह पूरा दिन खामोश रही क्योंकि वह अच्छी तरह जान चुकी थी कि व
असल की जिंदगी में एक बोज से ज्यादा हैसियत नहीं रखती उस शाम व उसके कमरे में गई और उसके आने से पहले ही सो गई क्योंकि वह एक बार फिर उस शख्स का सामना नहीं करना चाहती थी जिसने उसके साथ इस कदर भयानक स्लोक किया था लेकिन ना जाने रात का कौन सा पहर था जब उसे अपने ऊपर एक बार फिर दबाव महसूस हुआ उसने पुट से आंखें खोल दी और अपने करीब अरसल को देखकर एक बार फिर खौफ की शदीद लहर उसके पूरे जिस्म में दौड़ गई जाने वो शख्स अब उससे क्या चाहता था
जब वह एक बार उसे इस तरह जलील कर चुका था फिर क्या हुआ आज तुमने मेरा इंतजार नहीं करना था वह तंजिया मुस्कुराहट से उससे पूछ रहा था और वह खामोशी से उसे अपना हाथ छुड़वाने लगी क्योंकि वह शख्स आज फिर उस पर उसी वहशत से हावी हो रहा था ना जाने वोह उसे किस जुर्म की सजा देता था किस ना करदा गुनाह की सजा भुगत रही थी वह वह एक बार फिर उस पर हावी हो गया और उसकी मुजा हमत के बावजूद उसे जबरदस्ती करने लगा वह मुसलसल उसे खुद से दूर करने की कोशिश
कर रही थी जब वह उसके आंसू देखकर एक बार फिर हंसते हुए बोला कि क्या हुआ अब नहीं चाहिए तुम्हें तुम्हारा हक तुम फिक्र ना करो अब मैं तुम्हें तुम्हारा हक रोज दिया करूंगा और फिर उसे गाली से नवाज हुए बोला तुम जैसी लड़कियां होती हैं जो हम जैसे लड़कों पर ख्वा मुखवा डोरे डालने की कोशिश करती मैं रात को लेट से आता हूं कोई बात नहीं अब जब भी मुझे तुम्हारी ख्वाहिश को पूरा करना हुआ मैं तुम्हारे पास पूरी फुर्सत से आया करूंगा ताकि तुम्हें फिर से गिला ना रहे कि तुम्हारा शौहर तुम्हें वक्त
नहीं देता वह उसे मुसलसल तानों और गालियों से नवाज रहा था और वह सोच भी नहीं सकती थी कि वह शख्स इस हद तक गिरा हुआ होगा अपना जुनून एक बार फिर उस पर निकालने के बाद उसने उसे ऐसे ही छोड़ दिया जब वह रोते हुए उठी और कमरे से बाहर चली आई कितनी ही देर बाहर सोफे पर ब बैठकर रोती रही वह कोई कमसन बच्ची नहीं थी अच्छी तरह जानती थी कि वह सिर्फ खाला के सहारे इस घर पर थी और उसकी खाला का भी रवैया दिन बदन बदल चुका था हत्ता कि अब तो
उसने अपने कमरे को लॉक करके सोना शुरू कर दिया ताकि वह आधी रात को कभी भी उसके पास आकर ना सोए उसने अपने बेटे को मुकम्मल छूट दे रखी थी कि वह चाहे जैसा मर्जी सलूक करता उसे समझाने वाला कोई नहीं था वह कितनी ही देर बाहर सोफे पर बैठकर रोती रही वह शख्स उससे जानवरों जैसा सा सलूक करता था अपनी जुबान अपने हाथ ख्वा मुखवा हर तरह से व उसे यह बावर करा देता कि वह एक बदचलन और बद केदार लड़की है जो उसकी जिंदगी में कोई हैसियत नहीं रखती ना जाने कब वही सोफे
पर बैठे-बैठे उसकी आंख लग गई जब सुबह किसी ने उसका कंधा हिलाया और उसने अपनी आंखों को खोला सामने खड़ी खाला उसे कड़ी नजरों से घूर रही थी क्या हुआ है यहां क्यों सो रही हो अब मैंने तुम्हें अपने कमरे में आने से मना किया तो तुम यहां पर रा गुजार लोगी लेकिन मेरे बेटे के पास नहीं जाओगी वह सुबह ही सुबह बगैर कुछ जाने उस पर बरस रही थी लेकिन वह उनसे बहस करने के मूड में नहीं थी और उठकर जाने लगी जब एक बार फिर खाला ने उसे रोकते हुए कहा मैंने तुम्हें क्या
समझाया था कि तुम अरसल से औलाद की डिमांड करो लेकिन तुम हो कि उससे डर छुपकर इधर उधर सोती हो आखिर तुम्हें मसला क्या है किस कदर ढीठ हो तुम बिल्कुल अपनी बहन की तरह वह हैरत से को देखने लगी आखिर वह लोग अब उसकी बहन का पीछा क्यों नहीं छोड़ देते उसे क्यों नहीं जीने देते सुकून के साथ हर बात पे उसे उसकी बहन के ताने क्यों दिए जाते हैं खाला बड़बड़ा हुई कमरे की तरफ जा रही थी और वह उनकी बड़बड़ा हट को वाजे तौर पर सुन रही थी ना जाने मैंने किस लिए
तरस खाकर इन दोनों बहनों को अपने बेटे के पल्ले बांध दिए एक बहन ने मेरे बेटे पर मुकम्मल कब्जा कर लिया था और एक उससे अपना जायज हक भी वसूल नहीं कर पा रही उसे उस वक्त शदीद गुस्सा आया वह खाला के पीछे चली गई और उसके सामने जाकर खड़ी हो गई खाला हमने तो नहीं कहा था आपको कि आप हम पर र्स खाए और हमें अपने बेटे के पल्ले बांधने उसे इस वक्त शदीद गुस्सा आ रहा था जब उसकी खाला उसको घूरते हुए बोली कि अगर मैं तुम पर र्स ना खाती तो तुम कहां
जाती और वैसे भी मेरे बेटे की दौलत तुम लोगों को सुकून से बैठने नहीं दे रही थी तभी तो तुम्हारे बाप ने हमसे 50 लाख हक लिखवाया आप अभी भी हमारी ही गलती बता रही हैं खाला आपको अपने बेटे की गलतियां नजर नहीं आती वह हर रात मेरे साथ दरिंदों जैसा सलूक करता है व खाला की बात सुनकर फट पड़ी थी जब वह उसकी तरफ देखते हुए बोली कि बीवी तुम कोई मासूम बच्ची नहीं हो जो वह तुम्हारे साथ जबरदस्ती करता है वह शौहर है तुम्हारा और जो भी करता है उसका हक रखता है और
वैसे भी तुम्हारे बाप ने जितने पैसों में तुम्हारा सौदा किया वह तो जो चाहे तुम्हारे साथ कर सकता है वह तो हैरत से खाला के बदलते हुए रंगों को देख रही थी जो एकदम से ही अपने बनावटी खौल से बाहर आ गई गुस्से से इसका रंग बेपनाह सुर्ख हो रहा था और सांस भी फूल रही थी उनकी आंखों में देखते हुए बोली मैं यह रकम तुम लोगों के मुंह पर मारूंगी तुम लोग जो मर्जी करना इससे लेकिन आज के बाद मुझे यह ताना मत देना कि मेरे बाप ने तुम लोगों के हाथों में रा सौदा
किए वह खामोशी से अंदर चली गई और ब में अपना सामान पैक किया और बाहर निकल आई लेकिन उसकी खाला उसे रोकने की बजाय कड़ी नजरों से देखते हुए बोली तुम इस गलत फहमी पर जा रही हो कि मैं तुम्हें मनाने आऊंगी मैं तुम्हें मनाने आऊंगी ना मेरा बेटा और ना ही हमारे पास इतना वक्त है वो उनकी बातों को नजरअंदाज करके बाहर निकल आई पूरे रास्ते ही उनके जहन में धमाके हो रहे थे वह शख्स और उसकी मां उसके साथ यह सलूक करते थे तो ना जाने उसकी बहन के साथ क्या किया होगा किस
कदर बनावटी रिश्तेदार थे जो यह भी नहीं जानते थे कि वह उनकी बेटी है बहू है और इज्जत है और वह शख्स जिसके लिए वह अपना सब कुछ छोड़कर आ गई थी वह शख्स भी इस कदर बेपरवाह था कि उसे जरा बराबर तरस नहीं आया उस पर और ना ही वह उससे कोई ताल्लुक कायम करना चाहता था वह तो उसे अजलान की मां की बुनियाद पर भी नहीं रखना चाहता था जो भी था अब अजलान की मां तो वही थी मां ना से ही वह मांस तो थी ना वह अपने घर आ गई और घर
आते ही अपनी मां के गले लगकर खूब रोई वह उसे देखकर सख्त परेशान थी कि ना जाने क्या हुआ लेकिन अभी उसने इस बात को खोलना मुनासिब नहीं समझा और खामोश हो गई उसने सब घर वालों को यह कहा कि मैं कुछ रोज रहने के लिए यहां पर आई हूं लेकिन सब लोग उसे देखकर इस कदर परेशान थे कि ना ही उसके लहजे की उलझा हट और मुस्कुराहट और ना ही उसके चेहरे की वह रौनक कायम थी जो हर वक्त उसके चेहरे की अकासी किए रखती थी उसे रह-रहकर यही ख्यालात आते थे कि इसकी जिंदगी
बर्बाद होकर रह गी घर में सभी उससे पूछते हैं लेकिन वह किसी को भी अभी तक हकीकत से आगाह नहीं करना चाहती थी उसका बाप अपना कारोबार करता था उसकी दुकान में शुरू से ही सायम नामी लड़का काम करता था जो इतना ईमानदार था कि यूं महसूस होता जैसे कि खालिद साहब का अपना बेटा हो खालिद साहब उस पर मुकम्मल एतमाद करते थे और उसी के सहारे पर अपना कारोबार चला रहे थे तकरीबन एक हफ्ता गुजर गया अरसल और ना ही नजा हत खाला ने उसकी खबर ली यहां तक के उन लोगों ने एक कॉल
करके भी ना पूछा कि वह किस हाल में है और इसी तरह करते-करते दिन गुजरे थे जब एक रोज उसकी मां उसके पास आई और उसे कहने लगी दुआ क्या बात है मेरी जान अगर कोई मसला है तो हमसे बयान करो अपनी मां की बात सुनकर उसकी आंखों से आंसू बह निकले वह अब क्या बताती कि उसकी तो सारी जिंदगी एकदम से मसाइल का शिकार हो गई और सुकून नामी चीज तो उसकी जिंदगी से खत्म होकर रह गई उसकी मां उससे पूछ रही थी और वह सारी बात अपनी मां को बताती चली गई और उसके
बाद सुनकर उसकी मां खामोशी से बाहर चली गई वह जानती थी कि उसके वालदैन इस सबसे किस कदर दिल बर्दाश्त होंगे एक बेटी जवानी में ही अल्लाह के पास चली गई और दूसरी बेटी बेसहारा होकर उनके दरवाजे पर आ बैठी शाम को खालिद सदीकी आए तो उसने अपने बाप को भी सब कुछ बता दिया वह जानती थी वैसे भी इसकी मां अब उसके बाप को सारी हकीकत से आगाह कर देगी तो वह सारी बात सुनकर ही बिफर गए और उन लोगों को लान तान करते हुए कहने लगे कि मैं तो पहले ही जानता था कि
वह लोग अच्छे नहीं हैं उन्होंने मेरी बेटी की जिंदगी को बर्बाद कर दिए उसने अपने बाप से कहा आपको वह रकम उनसे नहीं लेनी चाहिए थी अब्बा वह रकम मेरी जिंदगी में एक जहर बनकर रह गई जो हर रोज मेरी नसों में अंडेला जाता है जिसका कमिया मुझे रात दिन भुगतना पड़ता है उसके वालिद खालिद सिद्दीकी उस वक्त इस कदर गुस्से में थे कि उनका जी चाह रहा था कि वो अभी और इसी वक्त उन लोगों को जाकर खत्म कर दें जिन्होंने उनकी बेटी की जिंदगी की खुशियों को खत्म कर दिया आखिर वह लोग इस
कदर बे हिसी कैसे दिखा सकते थे कि अपने होने के बावजूद उन्होंने गैरों सा रवैया इख्तियार किया कहा जाता है कि अपने अपने ही होते हैं अपने अगर मारते भी हैं तो छाव में रखते हैं लेकिन वह यह नहीं समझते थे कि मरे हुए शख्स को इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि वह छाव में पड़ा है या धूप में अगर उसने मर ही है तो वह अपने ही क्या जो उसकी मौत की वजह बन जाए उस शाम खालिद सिद्दीकी साहब ने अरसल को कॉल कि और उसे खरी ही सुना दी वह तो इस बात
पर हैरान था कि उसका बाप बजाए उसे समझा बुझाकर वापस उसकी दहलीज पर भेजे ना कि उसके हक में खड़ा होकर उसके शौहर से लड़ रहा है बाप भी बेटियों की असल सहारे होते हैं अगर यह सहारे भी उनकी जिंदगी से खत्म हो जाए तो फिर तो जिंदगी बेसहारा हो जाती और बेसहारा जिंदगी मौत से बदतर होती है वह लोग यही समझते थे कि चंद ही दिनों के बाद उसका बाप उसे दोबारा वापस भेज देगा और वह एक बार फिर हमारी मुट्ठी में आ जाएगी जो चाहेंगे जैसा चाहेंगे रवैया उसके साथ इख्तियार करेंगे उसके बाप
ने उसे मुकम्मल तसल्ली दी कि वह अब अपने बाप की पनाह में है और उन लोगों के चुंगल से आजाद हो चुकी है उसकी मां ने उसके बाप की राय से इख्तिलाफ करना चाहा और कहा कि बेटी है बेटी का मामला है समझा बुझाकर मामले को सुलझाने की कोशिश कीजिए आप ख्वा मख ही मामले को बिगाड़ रहे क्योंकि अब हमारी बेटी इस घर में नहीं रह सकती खालिद साहब बे यकीनी से अपनी बीवी को देख रहे थे जो बी भी ना जाने किस खदे का शिकार थी इससे पहले कि वह बरहम होकर उस पर भड़क
उठते वह खुद ही उन्हें देखते हुए बोली कि हमारी बेटी पेट से है और यह बच्चा अरसल का है तो अब कैसे आप उसे अपनी दहलीज पर बिठा सकते हैं इन सारे जमील में उसने तो इस बात की फिक्र रखनी ही छोड़ दी थी कि उस की जिंदगी में एक बहुत बड़ी खुशी की आमद हो गई है वह जानती थी कि अभी भी उसकी मां उसकी खाला की मुट्ठी में है और वह अपनी नरम बातों से अपनी बहन को अपनी तरफ किए रखती उसकी बहन ने उसे जरूर बता दिया होगा कि वह दादी बनने वाली
है और इस बात का पता अरसल को भी चल गया होगा लेकिन इस सबके बावजूद उन लोगों ने उसकी खैरियत पूछना भी गवारा नहीं की उसके बाप ने उसकी प्रेगनेंसी के बावजूद उसे मुकम्मल सपोर्ट किया और उन लोगों के हाथ पैगाम भिजवाया कि जल्द से जल्द मेरी बेटी को आजाद कर द अगर मेरी बेटी को इज्जत के साथ दो वक्त की रोटी नहीं दे सकते तो इसे बोझ समझकर इसके साथ गैर मुंसिफ आना सलूक करने से बेहतर है कि आप लोगों से आजाद कर दें निरत बेगम इस बात के हक में नहीं थी वह तो
अच्छी खासी तिल मिलाकर रह गई और अजलान को भी मां से जुदा कर दिया लेकिन चंद ही दिनों में वह उसे बेजार हो गई और दोबारा यह कहकर उसे दुआ के पास वापस भेज दिया कि दुआ ने उसे बिल्कुल ही बिगाड़ दिया और अपनी आदत डाल दिए ताकि वह इस घर में रह सके लेकिन दुआ अच्छी तरह से जानती थी कि वह लोग अजलान की जिम्मेदारी से दूर भागते हैं इसीलिए वह बहानेबाजी का सहारा लेकर अजलान को दुआ के पास छोड़ जाते हैं और उसने उसे संभाल लिया आखिर वह बचपन से उसी के पास था
और उसे अपनी औलाद जैसा ही लगता था वह जानते थे कि उसका भी दुआ की तरह और कोई नहीं है नुजहत बेगम ने अपना आप मुकम्मल तौर पर वतीर बदल लिया था वह मुक्क अपनाए हुए थी कि खालिद सदीकी साहब लालच में आकर अपनी बेटी की तलाक का मुतालबा कर रहे हैं महज इसीलिए नहीं कि उन्हें 50 लाख जैसी तीर रकम मिल जाए और वह उसे अपनी जिंदगी संवार दे लेकिन उस रात खालिद साहब ने उनको कॉल की और कहा कि आप लोग मेरी बेटी को आजाद कर दें और दूसरे ही रोज निजत बेगम उनके
घर आ गई उसका रवैया देखकर तो उसकी बहन भी बोखला गई थी जिससे वह अपनी मीठी बातों में बहला रखती दुआ उनकी बातें सुनकर शदीद खौफ जदा थी खालिद साहब ने उसे अपनी औकात याद दिलाते हुए कहा हम लोग तुम्हारी तरह हलाल और हराम की परवाह किए बगैर पैसा कमाने के पीछे नहीं लगे हुए हमें पैसे के साथ-साथ रिश्तों की भी परवाह है और हम रिश्ते निभाने से भी अच्छी तरह वाकिफ हैं ना कि हमने अपनी जिंदगी का मकसद महज पैसा कमाना बना लिए उन्होंने उस रोज उस रकम को निजत बेगम के मुंह पर दे
मारा और कहा कि मैं यह रकम कभी भी अपनी बेटी के मुत बादिल नहीं समझता बल्कि यह रकम मैंने तुम लोगों को इंसानियत के दर्जे पर लाने के लिए शर्त रखी थी ताकि तुम लोगों में थोड़ी सी इंसानियत पैदा हो जाए और पैसों के साथ मोहब्बत होने की वजह से मेरी बेटी पर किसी किस्म का जुल्म ना रखो ताकि तुम लोगों के दिल में यह खौफ बाकी रहे कि अगर तुम लोग मेरी बेटी के साथ किसी किस्म की ज्यादती करोगे तो अपने पैसों से हाथ धो बैठोगे लेकिन आज मैं हल्फ देकर इस रकम को तो
लोगों के हवाले करता हूं और यह कहता हूं कि तुम लोग मेरी बेटी की जान छोड़ दो इतने पैसे तो मैं अपनी बेटी का सदका उतार दूं निजत बेगम आगे बढ़ी और कहने लगी कि मैं अपने बेटे की औलाद को तुम लोगों के हवाले नहीं करूंगी लेकिन खालिद साहब अपनी बेटी के साथ किसी मजबूत सहारे की मानिंद खड़े रहे और कहा कि यह औलाद मेरी बेटी की कोक में है जो इसे पैदा करेगी वो उसकी परवरिश भी कर लेगी और खबरदार अगर तुम लोगों ने मेरी बेटी के साथ मजीद किसी तरह की ज्यादती करने के
बारे में सोचा भी तो मैं तुम लोगों पर ऐसा केस दायर करूंगा कि तुम लोग सारी उमर जेल की हवा खाते रह जाओगे वह जानते थे कि ऐसे लोगों की कम जर्फीले पैसा होता है वह अपने रिश्तों को अपना सब कुछ खो सकते हैं लेकिन अपना पैसा नहीं गवा सकते इसीलिए कुछ ही अरसे के बाद अरसल ने दुआ को तलाक दे दी वह कितनी ही देर तलाक के कागजात को अपनी गोद में बैठी रही उसे यकीन ही नहीं आ रहा था कि उसकी जिंदगी का यह सफर इतना मुख्तसर और तकलीफ दे था जिस सफर के
आगाज ने उसे कोई खुशी फराह नहीं की थी इस सफर के इतम ने उसे किसी भी दुख से मुता नहीं करवाया था और वह बस खामोशी से उन कागजात को देखती रहेगी अजलान की तरबियत उसने बेहतरीन तरीके से की थी अल्लाह ने उसे एक और बेटे से नवाजा व चाहती थी कि वह उन्हीं के सहारे अपनी जिंदगी गुजार दे लेकिन खालिद सा का कहना था कि वह अपनी बेटी को यूं घुट घुट कर मरते हुए नहीं देख सकते जिंदगी की खुशियों पर उनकी बेटी का भी हक है इसीलिए वह उस रोज उसके पास आए और
उसे समझाते हुए कहने लगे दुआ मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूं लेकिन बेटा जिंदगी गुजारने के लिए एक हमसफर बहुत जरूरी है अल्लाह ने तुम्हें औलाद से नवाजा है लेकिन जब तक यह बड़े हो जाएंगे तुम्हारी जिंदगी की रौनक और रंग भीख पड़ जाएंगे इसीलिए मैं चाहता हूं कि मैं कोशिश करूं और तुम्हारे लिए एक अा हमसफर ढूंढ दो ताकि मेरी जिंदगी में और मेरे बाद तुम्हें किसी तरह की कोई मोहताज ना रहे और वह अपने बाप की बात सुनकर खामोश हो गई उन सब हसीन बातों से उसे अब डर लगता था क्योंकि उसकी जिंदगी का
एक तजुर्बा इस कदर नाकाम था कि अब उसे अपनी कामयाबी की कोई उम्मीद नहीं थी और एक शाम एक बार फिर खालिद सिद्दीकी के सामने को इसका हाथ मांगने के लिए हाथ फैलाए बैठा था वह बेशक अरसल के साथ इतना अमीर ना सही लेकिन फिर भी वह उसे उसके तमाम तर खामियों समेत कबूल करना चाहता था उसे कोई परवाह नहीं थी कि वह दो बच्चों को साथ लेकर आएगी या फिर अपनी ना मुकम्मल जिंदगी अधूरे ख्वाबों को न जाने कब अपनी आंखों से नोज फेंकने की खालिद साहब ने काफी सोच विचार की और आखिरी फैसला
उसी पर छोड़ दिया और उसने एक बार फिर मुकद्दर को आजमाते हुए अपने वालिद को अपनी मर्जी करने का कह दिया जिंदगी में सब कुछ कर सकते थे लेकिन नाफरमानी नहीं सा उससे शादी करना चाहता था और जायज तरीके से बाइज्जत तौर पर उसका हाथ मांगने आया था खालिद साहब उसकी ईमानदारी और नेक नियती से वाकिफ थे उन्होंने एक अरसा उसके साथ काम किया था और जानते थे कि वह रिश्ते निभाने वाला इंसान है इसीलिए उन्होंने अपनी कीमती बेटी का हाथ उस शख्स के हाथ में दे दिया जिसके पास देने के लिए सिर्फ मोहब्बत थी
ना के पेश बहा दौलत और उस शख्स ने वाकई अपनी मोहब्बत और अपने खुलूस से उसके खाली दामन को खुशियों से भर दिया जिस रोज वह रुखसत हुई वह अपने बाप के गले लगकर खूब रोई और अपने बाप के हाथों पर बोसा देते हुए बोली बाबा आपने बता दिया कि बेटियां रहमत होती हैं बाबा आपने मेरे साथ खड़े होकर मेरे लिए फैसला लिया और मुझे इस बात पर अमल करने से बचा लिया कि जिस घर में मेरी डोली जाए उसी घर से मेरा जनाजा उठे उन्होंने झुककर उसके माथे पर बोसा देते हुए कहा मैं तुम्हारी
जिंदगी के हर फैसले में तुम्हारे साथ खड़ा हूं मेरी जान मेरे घर के दरवाजे तुम्हारे लिए हमेशा खुले हैं लेकिन मेरी दुआ है कि अल्लाह तुम्हें अपने घर में शादो आबाद रखे और फिर उसके बाप की दुआ ने उसकी जिंदगी में वह खुशियां भर दी जिनका उसने कभी तसव्वुर भी नहीं किया था