दोस्तों मणिपुर में पिछले साल मई के महीने से शुरू हुई हिंसा रुकने का नाम नहीं ले रही बीच में कुछ महीनों के लिए शांति तो थी मगर सितंबर के बाद से वहां लगातार हिंसा हो रही है कुछ लोग इस हिंसा के लिए मैत और कुकी दोनों समुदायों को रिस्पांसिबल मानते हैं कुछ लोग इसमें म्यानमार और बांग्लादेश में बैठे टेररिस्ट ग्रुप्स का हाथ देखते हैं कुछ को अमेरिका पर भी शक है लोग ये भी सवाल कर रहे हैं कि आखिर क्या वजह है कि भारत सरकार डेढ़ साल बाद भी मणिपुर में सिचुएशन नॉर्मल क्यों नहीं कर
पाई लोग हैरान होते हैं जब केंद्र सरकार कश्मीर जैसे कॉम्प्लेक्टेड में रातों-रात 370 हटाकर वहां सिचुएशन नॉर्मल कर सकती है चुनाव भी करा सकती है तो क्या वजह है कि वह मणिपुर को काबू नहीं कर पा रही तो आज के इस वीडियो में हमने कोशिश की है कि इस बात को गहराई से समझा जाए कि आखिर मणिपुर की प्रॉब्लम में ऐसा क्या है कि वो सॉल्व होने का नाम ही नहीं ले रही है क्यों डेढ़ साल से भी ज्यादा का टाइम हो गया कि वहां हिंसा नहीं रुक रही है किसी का किसी पर भरोसा क्यों
नहीं रह गया लोग मंत्रियों और विधायकों के घरों पर हमले कर रहे हैं और 75000 सैनिक होने के बावजूद राज्य में सिचुएशन नॉर्मल क्यों नहीं हो पा रही तो आज की वीडियो में हमने इसी कॉम्प्लेक्शन की पड़ताल की है ताकि आप भी ये समझ पाएं कि आखिर इतने दिनों के बाद भी मणिपुर शांत क्यों नहीं हो पा रहा है इसलिए वीडियो पूरी देखिएगा और य वीडियो सही लगे तो इसे अपने हर एक दोस्त से शेयर जरूर करिएगा नमस्कार दोस्तों मैं हूं रौनक जो लोग नहीं जानते उन्हें सबसे पहले यह बता देते हैं कि मणिपुर में
रिसेंट वायलेंस का दौर आखिर शुरू कैसे हुआ देखिए मणिपुर में सिचुएशन तो पिछले साल मई महीने से ही खराब है उस वक्त से ही मणिपुर की मेहत और कुकी कम्युनिटी आमने-सामने उस वक्त से ही मणिपुर में वायलेंस हो रही है मगर बीच में चीजें कुछ-कुछ कम हो गई थी मगर इस महीने की 7 तारीख को यानी 7 नवंबर को जिरी बाम डिस्ट्रिक्ट में उग्रवादियों ने कुकी कम्युनिटी की एक औरत को गोली मारने के बाद उसके घर में आग लगा दी कुकी लोगों का कहना है कि इस वारदात के लिए लिए मैते कम्युनिटी से जुड़े उग्रवादी
जिम्मेदार हैं फिर 11 नवंबर को दो घटनाएं एक साथ होती हैं कुकी उग्रवादियों का आमना-सामना सीआरपीएफ से हो जाता है ठीक उसी टाइम कुकी उग्रवादी मैत समाज से जुड़े छह लोगों को किडनैप कर लेते हैं सीआरपीएफ से एनकाउंटर में 10 कुकी उग्रवादी मारे जाते हैं इससे कुकी समाज के लोग भड़क जाते हैं क्योंकि समाज कहता है कि मरने वाले उग्रवादी नहीं थे बल्कि वो तो फॉरेस्ट वॉलेटर थे उन्हें जबरदस्ती मार दिया गया दूसरी तरफ मैथ कम्युनिटी के जिन छह लोगों का कुकी उग्रवादियों ने अपहरण किया था पाच दिन बाद उनकी डेड बॉडीज जिरी मुख गांव
के पास एक नदी में मिल जाती है मरने वालों में तीन महिलाएं थी और तीन बच्चे इनमें से एक बच्चा तो ढाई महीने का था यह बात पता लगते ही पूरी मैत कम्युनिटी उबल पड़ती है इस तरह मेहत और कुकी दोनों ही कम्युनिटीज सिस्टम से भारी नाराज हो जाती हैं क्यूकी लोगों को लग रहा है कि सीआरपीएफ वालों ने उनके लोगों का फेक एनकाउंटर कर दिया मैते ही लोगों को लग रहा है कि पुलिस और सिक्योरिटी फोर्सेस की लापरवाही की वजह से उनके लोग मारे जा रहे हैं ना तो सरकार उन्हें प्रोटेक्शन दे पा रही
है और ना ही कुकी उग्रवादियों के खिलाफ कोई वो एक्शन ले पा रही है इसी गुस्से में मैत ही लोग सड़कों पर आ गए उन्होंने कैबिनेट मंत्रियों के घर फूंकने की कोशिश की विधायकों के घरों से सामान निकाल करर तोड़ दिया और सरकार को धमकी दी है कि अगर उसने जल्द कोई एक्शन नहीं लिया तो फिर जो भी होगा उसकी जिम्मेदार सरकार ही होगी कुल मिलाकर मणिपुर में हालात इतने खराब हैं कि राज्य में इनफिट कर्फ्यू लगाया गया है इंटरनेट भी बंद है सरकार ने अर्ध सैनिक बलों के 5000 एक्स्ट्रा जवान वहां पर और भी
भेज दिए हैं मगर लोगों में अब भी बहुत गुस्सा है अब इससे पहले कि मैं इस पॉइंट पर आऊं कि आखिर क्यों सिक्योरिटी फोर्सेस और सरकार मेहत और कुकी समुदाय के बीच चल रही इस लड़ाई को सुलझा नहीं पा रही उससे पहले हम ये समझ लेते हैं कि आखिर इन दोनों कम्युनिटीज में लड़ाई है किस बात की और लास्ट ईयर ये लड़ाई शुरू किस बात पर हुई थी तो दोस्तों आपको बता दें कि मणिपुर स्टेट में बेसिकली तीन मेन जातियां हैं एक तरफ मैते हैं जो हिंदू हैं जिनकी आबादी 55 से 60 फीदी है जिन्हें
आजादी के बाद अनुसूचित जाति यानी शेड्यूल कास्ट का स्टेटस दिया गया मैती हिंदुओं की आबादी तो 50-60 पर है मगर ये लोग मेनली मणिपुर के 10 पर के मैदानी इलाकों में ही रहते हैं दूसरी तरफ कुकी और नागा जाती हैं जिनकी आबादी में हिस्सेदारी तो 40 है मगर ये लोग मणिपुर के 90 पर हिली एरियाज में रहते हैं जो कि मेनली क्रिश्चियन माने जाते हैं अब मैती जाति की हमेशा से शिकायत ये थी कि लैंड रिफॉर्म एक्ट की वजह से ये लोग पहाड़ी इलाकों में जमीन नहीं खरीद सकते जबकि राज्य में सबसे ज्यादा आबादी इनकी
ही है इन लोगों की मांग थी कि इन्हें भी जनजाति यानी शेड्यूल ट्राइब का दर्जा दिया जाए ताकि ये लोग भी पहाड़ों पर जमीन खरीद सके इसी को लेकर मैती ट्राइब यूनियन जो था वो पिछले कई सालों से मैती समुदाय को आदिवासी दर्जा देने की मांग कर रही थी मगर कुकी और बाकी जनजातियों को यह बात कभी पसंद नहीं आई अब पिछले साल 19 अप्रैल को जब ये मामला हाई कोर्ट पहुंचा तो मणिपुर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को मैते समुदाय को जनजाति का दर्जा देने के लिए कह दिया जिसके बाद कुकी और बाकी ट्राइब्स
भड़क गई कुकी लोगों का कहना था कि मैत समाज का पहले ही नौकरियों में दबदबा है राज्य में 60 में से 40 विधायक भी उसी समाज से आते हैं ऐसे में अगर उन्हें जनजाति का दर्जा भी दे दिया गया तो ये लोग पहाड़ों पर जमीन खरीदना शुरू कर देंगे और कुकी समाज हाशिए पर चला जाएगा इसी को लेकर पिछले 3 मई को एक रैली निकाली गई देखते देख देखते ये रैली हिंसक हो गई क्योंकी लोगों ने मैती समाज के लोगों पर हमला किया जिसके बाद मेते लोगों ने भी कुकी को निशाना बनाना शुरू कर दिया
चर्चों में आग लगाई गई वहीं कुकी इलाकों में रहने वाले मैते लोगों पर भी हमले हुए लोग रातों-रात अपने घर छोड़ने पर मजबूर हो गए रात के अंधेरे में गर्भवती महिलाओं को घर छोड़कर भागना पड़ा कई बच्चे पानी में बह गए पिछले डेढ़ साल से चल रही इस हिंसा में अब तक 250 लोग अपनी जान गवा चुके हैं 50000 लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं 250 चर्चों को जलाया गया है पहाड़ी इलाकों में एक भी मंदिर को नहीं छोड़ा गया देखते ही देखते दोनों जातियों में इतना गुस्सा भर गया कि कोई भी मेती कुकी
इलाकों में रहने की हिम्मत नहीं कर पा रहा और ना ही कुख इलाके में मेहत जा पा रहे हैं कुकी और मेहत दोनों का सरकार और पुलिस से भरोसा उठ चुका है उन्हें लग रहा है कि उन्हें अपनी सुरक्षा खुद करनी पड़ेगी और हुआ यह कि लोग एक दूसरे की हिंसा से बचने के लिए खुद हिंसा करने लगे और हालात बिगड़ते बिगड़ते यहां तक आ गए अब पिछले डेढ़ साल से सरकार भी वहां की सिचुएशन नॉर्मल करने की कोशिश कर रही है मगर सिचुएशन इतनी कॉम्प्लेक्शन क्या है वो भी मैं आपको समझा देता हूं एक
टाइम था जब मणिपुर में मेहत समाज के लोग ही रहते थे मेहत लोग मणिपुर की वैली में रहते थे इन लोगों पर बार-बार नागा लोग पहाड़ों से आकर हमला कर देते थे मैते लोगों को बार-बार उन पर ये हमले ना हो इस से बचाने के लिए मैते ही राजा वैली और पहाड़ों के बीच के बफर जोन में कुकी लोगों को बसाने लगे आपको बता दें ज्यादातर कुकी क्रिश्चियन लोग नॉर्थ ईस्ट और म्यानमार से संबंध रखते थे पहले तो नागा लोग कुकी लोगों को भी अपना दुश्मन समझते थे मगर मैते लोगों से लड़ने के लिए ये
एक हो गए अब धीरे-धीरे हुआ ये कि म्यानमार में इसी कुकी समाज से जुड़े लोग म्यानमार के कुछ इलाकों और मणिपुर के कुछ इलाकों को मिलाकर एक कुकी लैंड बनाना चाहते थे सालों तक इन उग्रवादी संगठनों ने भारत के सुरक्षा बलों से इसे लेकर लड़ाई भी लड़ी फिर बाद में भारत सरकार के साथ ऐसे 22 उग्रवादी संगठनों से समझौता कर लिया गया उस समझौते के मुताबिक भारत सरकार ऐसे हर उग्रवादी को हर महीने ₹ 6000 पेंशन देगी और बदले में वह कोई हिंसा की वारदात नहीं करेंगे और उन्हें सेना की निगरानी में रहना होगा लेकिन
बार-बार ऐसी खबरें सामने आई कि इस समझौते के बावजूद यह लोग वायलेंस में शामिल रहते हैं मैती ही लोगों की शिकायत है कि इन कुकी उग्रवादियों ने अपने ठिकाने म्यानमार में भी बना रखे हैं यह लोग मणिपुर में उनके खिलाफ हिंसा करते हैं फिर वहां भाग जाते हैं भारत सरकार भी कुकी उग्रवादियों से डील की है कि वह इनके खिलाफ एक्शन नहीं लेगी इसी के चलते हालात काबू में नहीं आ पा रहे अब जैसे कि मैंने कहा ये प्रॉब्लम बहुत कॉम्प्लेक्शन है मणिपुर के 19 थाना इलाके में सालों से आर्म फोर्सेस स्पेशल पावर एक्ट लागू
था ये एक्ट आर्म फोर्सेस को ये ताकत देता है कि अगर उन्हें किसी भी आदमी पर शक है कि वो उग्रवादी है या उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है तो वो डायरेक्ट उसके खिलाफ एक्शन ले सकते हैं इसके लिए किसी परमिशन की जरूरत नहीं है लेकिन लास्ट अप्रैल में इस स्पेशल एक्ट को हटा दिया गया जिसके बाद वहां के उग्रवादी संगठन फिर से अग्रेसिव हो गए सिचुएशन से निपटने के लिए सरकार ने फिर से छह थाना इलाके में अफ स्पा यानी स्पेशल पावर एक्ट को लागू कर दिया इससे फिर कुछ लोकल लोग नाराज हो गए स्टेट
गवर्नमेंट पर प्रेशर बढ़ा तो उसने सेंटर से रिक्वेस्ट करी कि इस स्पेशल पावर एक्ट को वापस ले लो अब सेंटर के सामने चैलेंज ये है कि एक तो सिचुएशन नॉर्मल नहीं हो पा रही उस इलाके की स्थिति भी ऐसी है कि उग्रवादी कब बॉर्डर क्रॉस करके म्यानमार चले जाते हैं ये पता नहीं लगता ऊपर से स्पेशल पावर एक्ट ना होने से सेना के हाथ भी बंदे हैं साथ ही कुकी और मेहत दोनों ही साइड से इस पूरी लड़ाई में औरतों को ढाल बनाकर यूज़ किया जाता है जब भी पुलिस या सीआरपीएफ कोई गिरफ्तारी करने जाती
है तो औरतें आगे आकर खड़ी हो जाती है जिससे सिचुएशन को संभालना और मुश्किल हो जाता है इसके अलावा कुछ और ऐसी चीजें हुई हैं जिसने ने सिचुएशन को और सीरियस बना दिया है अब आप ही सोचिए किसी लोकल जगह पर पहले ही लोगों में आपस में इतनी लड़ाई है इतना मिस्ट्रस्ट है ऊपर से उन हालातों में आग में घी का काम करने के लिए अगर बाहर से भी लोग आ जाए तो कैसा होगा वो इस लड़ाई को भड़काने लगे तो क्या हालत होगी आप सोचिए और मणिपुर में यही सब हुआ है और हो रहा
है बात है इसी साल 2 सितंबर की मणिपुर में 4 महीने से हालात काफी हद तक ठीक थे तभी इंफाल डिस्ट्रिक्ट में एक आतंकी हमला होता है इस हमले में दो औरतें मारी जाती हैं और नौ लोग जख्मी हो जाते हैं उस वक्त पुलिस के भी होश उड़ जाते हैं जब उसे पता चलता है कि ये हमला तो ड्रोन से किया गया है ऐसे ही एक ड्रोन को मार गिराने पर पता लगता है कि वो ड्रोन कोई नॉर्मल ड्रोन नहीं था वो एक हार्ड प्लास्टिक से बना ड्रोन था जिसके डिजाइन को देखकर साफ समझ में
आ रहा था कि वो बाहर का बना हुआ है लोकल टेररिस्ट ग्रुप चाहकर भी वैसा ड्रोन नहीं बना सकते थे सिक्योरिटी एजेंसीज को यह बात समझते देर नहीं लगी कि कुकीज टेररिस्ट ग्रुप्स को बाहर से भी मदद मिल रही है अगस्त में बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार का तख्ता पलट हो चुका था मोहम्मद यून सरकार की भारत विरोधी एलिमेंट से हमदर्दी किसी से छिपी नहीं है इससे पहले भी बांग्लादेश में नॉर्थ ईस्ट के कई टेररिस्ट ग्रुप एक्टिव रहे हैं म्यानमार के चिन सट में भी कुकी आतंकी अपना कब्जा कर चुके मतलब यह क्लियर था
कि लोकल टेररिस्ट को एडवांस ड्रोन और रॉकेट प्रोपेल्ड गन यानी कंधे पर रखकर रॉकेट दागने वाली गन जैसे कई खतरनाक हथियार मिल चुके थे मतलब लड़ाई अब नेक्स्ट लेवल पर जा चुकी है मणिपुर में जो चल रहा है वह सिर्फ मणिपुर की कुछ जातियों के बीच आपस की लड़ाई नहीं बल्कि इसमें एक पूर्व विदेशी षड्यंत्र भी देखा जा सकता है ऐसे लोग भी शामिल हैं जो चाहते हैं कि अगर भारतीय समाज में कोई फॉल्ट लाइन है तो उसे भुनाया जाए यह बात किसी से नहीं छिपी है कि जिस तरह यूरोप से लेकर अमेरिका तक आज
दुनिया के बहुत सारे हमा देश भारत को चीन के विकल्प के रूप में देख रहे हैं उससे चीन भी खुश नहीं है बांग्लादेश में मोहम्मद यूनिस की सरकार का भारत के लिए क्या स्टैंड है यह भी किसी से छिपा नहीं है इसके अलावा मणिपुर में एक्टिव कुकी आतंकियों को म्यानमार से कैसे मदद मिलती है यह भी कोई राज की बात नहीं है इन सारी बातों ने मिलाकर इस पूरे इशू को बहुत ज्यादा कॉम्प्लेक्शन एमएम नारा ने भी कई बार कह चुके हैं कि म्यानमार में हो रही वायलेंस के पीछे विदेशी ताकतें हो सकती हैं इसी
साल जुलाई के महीने में मणिपुर के सीएम ने कहा था कि मणिपुर में हो रही वायलेंस के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ है मतलब कहानी कुछ-कुछ कश्मीर जैसी ही है कश्मीर में एक वक्त जब कश्मीरी पंडितों पर जुल्म हुए उन्हें मारकर धमकी देकर वहां से भगाया गया तो उसके पीछे भी चिढ़ ये थी कि मुट्ठी भर कश्मीरी पंडित अपनी पढ़ाई लिखाई और इंटेलिजेंस की वजह से हर जगह छाए हुए थे वो नौकरी में बड़े पदों पर थे अच्छे बिजनेसमैन थे और समाज में उनकी ताकत थी इसी बात से एक सेक्शन को तकलीफ थी मणिपुर में
पूरी तरह ना सही लेकिन कुछ लोगों को भी यही िड़ है कि हिंदू मैती समुदाय वो भी पढ़े लिखे हैं बिजनेस चला रहे हैं अगर उन्हें जनजाति का दर्जा दिया गया तो ये लोग पहाड़ी इलाकों में जमीनें खरीद कर वहां भी अपने काम धंदे सेट कर लेंगे यहां भी अपनी धाक जमा लेंगे अब जैसे कश्मीर में पंडितों से नाराज इस्लामिक ग्रुपों को पाकिस्तान ने मदद की और उनकी मदद से कश्मीरी पंडितों को वहां से भगाया गया कुछ-कुछ वैसी कोशिश मेते हिंदुओं को लेकर मणिपुर में भी दिखती है बस फर्क इतना है कि मैते यहां मुट्ठी
भर नहीं है बल्कि 50 पर है लेकिन विदेशी ताकतों की मदद से उन्हें लगातार टारगेट किया गया है अब इन सारी बातों की वजह से ये प्रॉब्लम इतनी कॉम्प्लेक्शन ताकतें भी इसमें घी डालने का काम कर रही है सरकारें भी कुछ एक्शन लेने से पहले अपना वोट बैंक देखती इन्हीं सब के चलते डेढ़ साल के बाद भी मणिपुर के हालात नहीं सुधरे हैं बल्कि और खराब हो गए जरूरत है इस बात की कि दोनों तरफ के लोग ये समझे कि इस लड़ाई में किसी और का नहीं बल्कि उन्हीं लोगों का उन्हीं के बच्चों का और
उन्हीं के भविष्य का नुकसान हो रहा है भारत सरकार यह कर सकती है दोस्तों कि पहले वो उन बाहरी एलिमेंट्स पर लगाम लगाए जो इस हालात का फायदा उठा रहे हैं फिर उन लोगों के खिलाफ सख्त एक्शन ले जो किसी भी तरह के वायलेंस में शामिल हो फिर चाहे वो किसी भी तरफ के क्यों ना हो अगर आप वोट बैंक के डर से भीड़ को फ्री हैंड दोगे तो ये हिंसा कभी नहीं रुकने वाली सरकार को सख्ती दिखानी ही होगी वरना जो हिंसा आज एक ईस्टर्न स्टेट में है वो जल्दी और राज्यों में भी फैल
सकती है हमें तो कम से कम यही लगता है बाकी आप इस बारे में क्या सोचते हैं कमेंट करके बताइएगा वीडियो में कई बातें अगर आपको अच्छी लगी हो तो इस वीडियो को और भी लोगों तक जरूर शेयर करिएगा आपके हिसाब से इस प्रॉब्लम का क्या हल है वो भी अगर आप कुछ सोचते हैं इसके बारे में तो जरूर बताइएगा हम उम्मीद यही करते हैं कि जल्द ही मणिपुर में शांति आए और लोग अपनी-अपनी नॉर्मल लाइफ में जल्दी लौट पाए आज की वीडियो में फिलहाल इतना ही चैनल को सब्सक्राइब करके जाइएगा जल्दी मुलाकात होगी जय
हिंद वंदे मातरम