एक प्राइवेट स्कूल का कन्वेंशन था बच्चों का एनुअल डे टाइप का जो होता है उस टाइप का उसमें राहुल गांधी जी गए थे। क्यों गए थे पता नहीं तमिलनाडु में था संभवत तो वहां पर गए थे तो तमिलनाडु में चुनाव ना भी है तो हो सकता है कि किसी बहाने और राहुल जी को बोलने के लिए स्टेज चाहिए होता है तो इस कारण वो गए पर राहुल गांधी जी को जब स्टेज मिलता है तो वो कांड ही कर जाते हैं तो अब यहां पे क्या किया वो देखा जाए आराम से आई एम स्टडिंग इन क्लास
एट सी माय क्वेश्चन टू यू इज एंड रोबोटिक्स आर चेंजिंग द फ्यूचर ऑफ़ वर्क सो व्हाट चेंजेस यू वुड लाइक टू टू से अबाउट इंडियास एजुकेशनल सिस्टम। वेल यू नीड टू चेंज मोर देन जस्ट द एजुकेशन सिस्टम। ओके यू नीड टू चेंज द वे वी थिंक अबाउट प्रोडक्शन वी नीड टू थिंक वी नीड टू चेंज द फोकस दैट वी हैव आई बिलीव एंड फोकस मच मोर ऑन प्रोडक्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ओके वी हैव वी हैव डन प्रीटी वेल इन द आईटी स्पेस यू मस्ट हैव हर्ड ऑल द सक्सेस दैट वी हैव हैड इन सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग, Infosys
बट दिस इंडस्ट्री इज़ नाउ गोइंग टू रन इन टू ट्रबल। रीज़न इज़ गोइंग रन इनू ट्रबल इज़ एस यू मेंशंड एआई। राइट? एंड सो, वी हैव टू सर्टेनली इंश्योर दैट वी डू नॉट लूज़ आउट। इन द सर्विसेस सेक्टर, वेयर वी आर डूइंग डिसेंट। बट वी हैव टू नाउ स्टार्ट बिल्डिंग, ए मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर। व्हाट हैपेंड? टुडे इज दैट द चाइनीस हैव डोमिनेटेड मैन्युफैक्चरिंग प्रीटी मच एनीथिंग दैट वी यूज दिस माइक्रोफोन दैट कैमरा दिस थिंग्स ऑल मेड इन चाइना एंड वी वांट देम टू बी मेड इन इंडिया टू डू दैट वी हैव टू चेंज द माइंड सेट
वी हैव टू रेस्पेक्ट द पीपल हु डू वर्क विथ द हैंड्स वी हैव टू रेस्पेक्ट आवर आर्टिजंस वी हैव टू रेस्पेक्ट आवर स्मॉल एंड मीडियम बिज़नेसेस वी हैव टू रेस्पेक्ट पीपल हु वर्क इन द फील्ड्स एंड सो दैट्स अ कल्चर चेंज एआई पे पूछा था बालक ने और फिर राहुल गांधी जी ने वही बोला जो उनको बोलना है चीन की जय जयकार तो बहुत ज्यादा दिन से कर ही रहे हैं तो यहां पे राहुल गांधी जी ने बच्चा है सामने उसने एआई को ले पूछा तो जब आपको पता नहीं हो कि यह है क्या एआई
अब एआई भी तो आईटी का ही एक अंग है ना और आज से तो है नहीं एआई मशीन लर्निंग अब 1015 वर्ष हो गए जब लोग इन्वेस्टेड थे तब तो आप चीन के ही साथ राहुल गांधी जी आपके तो एमओयूस हुआ करते थे आपका तो फोटो भी है उसी समय चीन एआई के बारे में प्लान कर रहा था यूएस जो है एआई को लेकर के इन्वेस्टेड था आपने ऐसी कौन सी पॉलिसी बनाई थी जो नरेंद्र मोदी ने आते ही बंद कर दी कि नहीं एआईआई कुछ नहीं होता ऐसा तो आपने कुछ किया नहीं। तो खैर
बालक को तो एआई पे कुछ जो है बेचारे बता नहीं पाए कि एआई अब आएगा कैसे इंपैक्ट होगा क्योंकि जानकारी नहीं है क्योंकि एआई और रोबोटिक्स जो है वो इंटीग्रेट हो जाएगा तो ये प्रोडक्शन का भी जो है वो भी उन्हीं के हाथ में जाएगा। ह्यूमन धीरे-धीरे जो उसका इंटरवेंशन जैसे तमाम तरह की मशीनें हैं तो उसमें से हटता जा रहा है। व्यक्ति जो हटते जा रहे हैं क्योंकि वो बीमार पड़ते हैं। तीन शिफ्ट में लगातार काम नहीं कर सकते तो धीरे-धीरे मशीन जो है उसका उसकी जगह जो है वो लेते जा रहे हैं। तो
ये भी एक आस्पेक्ट है। वो भी एआई और रोबोटिक्स के ही कारण जो है वो हो रहा है। तो जो व्यक्ति कभी जीवन में इस तरह की जगहों पर गया नहीं या उस उन सब चीजों को अपने सेंसेज में उसने समझा नहीं तो वो इसी तरह से वो बच्चे को बरगला देगा कि यू नो वी नीड टू फोकस एंड आवर फोकस हैज़ टू बी ऑन प्रोडक्शन एंड वी नीड टू यू नो चेंज दिस द कल्चर ऑफ लुकिंग डाउन अपॉन द पीपल हु आर डूइंग जॉब्स विथ देयर बेयर हेड्स एंड वर्क इन फील्ड्स एंड दिस एंड
दैट। तो भाई यह तो तुम्हारा लाया हुआ है ना। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर क्यों नहीं तुमने स्ट्रांग कर दिया? चार से 14 तुम्हारी सरकार थी। तुमने कितने मैन्युफैक्चरिंग के मतलब पॉलिसीज ले आए। इफेक्टिवली तुम लोगों ने यह कर दिया था कि हम बनी बनाई चीजें चीन से लें। जीरो जो है हमें मतलब सपोर्ट किया था इन्होंने गुजरातल की सरकार को। कि फिनिश प्रोडक्ट पर जीरो इंपोर्ट ड्यूटी हो और उसी प्रोडक्ट को भारत में बनाना है तो आपको अत्यधिक जो है वह ड्यूटी देनी पड़ेगी। तो मैन्युफैक्चरिंग को तो तुमने पर्पसफुली तुमने और तुम्हारे साथ के लोगों ने पर्पसफुली
किल किया है। 414 में ऐसी कोई पॉलिसी नहीं है। आप पूरी तरह से फोकस्ड थे कि हम जो है केवल और केवल बाहर से हम इंपोर्ट कर सकें। और बाहर से इंपोर्ट में आप जानते हैं कि देयर आर किक बैक्स घोटाले होते हैं। फिर लाख करोड़, डेढ़ लाख करोड़, पौने दो लाख करोड़, 2 लाख करोड़ इस लेवल के घोटाले जो आपने किया तो ये क्या बात कर रहे हो? चाइनीज़ डोमिनेट कर रहे हैं। हां, चाइनीज़ डोमिनेट कर रहे हैं। लिबरलाइजेशन हुआ उसके बाद आपका मार्केट खुलता है तो आपने जो है वो कॉल सेंटर और इसको
सोचा कि अरे बाप ये तो गर्दा मतलब गजब की चीज हम लोग बना रहे हैं। नहीं वो वाहियात चीज थी। वो सबसे सस्ती और बेकार टाइप की चीज थी जो हम हम कर रहे थे। वह कोई स्किल नहीं है। अंग्रेजी बोलना मात्र कोई स्किल नहीं है। यूएस के एक एक्सेंट में। वो स्किल सेट आपको बहुत ज्यादा दूर तक नहीं ले जाएगा। आपको स्किल्स जो डेवलप करना था आप छोटे-छोटे मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स लगवाते। जो अभी है एमएसएमई पे कि यू नो वी नीड टू फोकस ऑन मीडियम एंड स्माल सेक्टर। तो भाई यह किया क्यों नहीं? तुम्हारा फोकस
था मनरेगा ₹150 दे दें क्या? कुदाल चलाएगा बहुत बढ़िया रहेगा। भाई उसी व्यक्ति को मुद्रा लोन टाइप की कोई व्यवस्था कर देते। उसको बोलते कि भाई बैटरी बनाओ। ये छोटा-छोटा नट बोल्ट बनाओ, मास्क बनाओ, बैग बनाओ, जैकेट बनाओ। कुछ तो यह सारा कुछ हालांकि चलिए टेक्सटाइल में तो हम लोग ठीक-ठाक कर रहे हैं। बट उसके बियों्ड आप इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स कुछ नहीं डंडा वेल्डिंग ये सब भी हम नहीं कर पा रहे थे। हम ई रिक्शा का चस्सी तक ये सब जो हम चीन से मंगवा रहे थे। ये तो स्थिति है हमारी और ये तुम्हारी दी हुई
है। नरेंद्र मोदी को तो झटका लगा कि आया तो यहां पे तो कुछ है ही नहीं भाई। हमें तो बहुत कुछ करना पड़ेगा। तुमने सड़कें तक नहीं बनाई थी। तुम मैन्युफैक्चरिंग की बात कैसे कर रहे हो? कितने लेन की सड़कें हुआ करती थी? कैसे मैन्युफैक्चर गुड तो हो जाएगा उसको लाने ले जाने में उसमें समस्या नहीं कितने वाटर पोर्ट और यह सारा कुछ तुमने बनवा दिया कितने एयरपोर्ट्स तुमने फंक्शनल बनवाए नहीं बनवा पाए ना तो अभी इसीलिए चीन का गुणगान जो है वो करना पड़ रहा है तुम्हें कम फ्रॉम गुडूर व्हिच इज़ आल्सो अ हिल्ली
रीजन व्हिच इज प्रोन टू सच इकोलॉजिकल रिस्क जस्ट लाइक अराइवलीज एंड सो सर माय माय क्वेश्चन इज़ डैट व्हाट इज योर टेक ऑन दैट पर्टिकुलर स्टेटमेंट प्रपोज्ड बाय दी सुप्रीम कोर्ट एंड हाउ वुड यू प्रोटेक्ट सच सेंसिटिव हिल रीजंस व्हाइल आल्सो एड्रेसिंग दी कंसर्न्स ऑफ़ टुडेस यूथ? सी आई कैन नॉट आय कन नॉट कमेंट ऑन व्हाट द सुप्रीम कोर्ट हैज़ सेड बिकॉज़ दैट्स दैट्स द कोर्ट्स ओपिनियन एंड देअर जुरिसडिक्शन। सर बट आई डू फील दैट इट्स वेरी इम्पोर्टेंट। दैट वी डोंट सैक्रिफाइस आवर एनवायरमेंट। यस सर। फॉर डेवलपमेंट। सर। वी नीड टू थिंक अबाउट डेवेलपमेंट ऑलमोस्ट
इन पार्टनरशिप विद आवर एनवायरनमेंट। बिकॉज़ इफ वी डिस्ट्रॉय आवर एनवायरनमेंट, वी कैन नॉट हैव डेवलपमेंट। राइट? सो वी हैव टू बी सेंसिटिव टू आवर एनवायरमेंट। वी हैव टू बी सेंसिटिव टू दीज़ ब्यूटीफुल हिल्स। वी हैव टू बी सेंसिटिव टू दी इकोलॉजी। वी हैव टू बी सेंसिटिव। अह टू द वाटर। इफ वी एक्चुअली वांट टू डेवलप। दिस व्हाट इज़ हैप्पेनिंग इन यू नो द अरावलीज एंड दिस टाइप ऑफ़ स्टफ इज़ जस्ट कंप्लीट अनलीच्ड ग्रीड। यस सर। पीपल आर जस्ट बीइंग शॉर्ट साइटेड सर एंड ग्रीडी एंड देन दे आर डिस्ट्रइंग द एनवायरमेंट आई थिंक वी नीड बैलेंस
एंड वी नीड टू बी वैरी सेंसिटिव टू आवर एनवायरमेंट बिकॉज़ दिस दिस डस नॉट बिलोंग टू यू एंड मी इट बिलोंग्स टू द फ्यूचर ऑफ़ आवर कंट्री इट बिलोंग्स टू पीपल हु कम आफ्टर अस सो वी हैव टू बी सेंसिटिव टू दैट अब राहुल गांधी जी यहां पे सबसे अच्छी बात आपने एक बात जो गौर करने वाली थी कि राहुल गांधी को किसी भी स्टेज पे भगवान राम की मूर्ति दी जा रही हो, अंबेडकर की भी कहीं पे दी गई है या कुछ भी मिलता है या शॉल ही दिया जाता है। तुरंत उतार के रख
देते हैं। लेकिन रेवरेंड ने जो शॉल दिया उसको जो है ओढ़े रहे। बढ़िया बात है। कम से कम ईसाइयों का तो सम्मान हो रहा है। तो वो मुझे अच्छा लगा। दूसरी बात जो यहां पे जो है वो सेंसिटिव और टू वाटर और ये सारा कुछ कह रहे हैं और बोल रहे हैं कि ग्रीड जो है वहां पे काम कर रहे हो तो सही बात है अशोक गहलोत जी पे मतलब ऐसे वेल्ड अटैक नहीं करना चाहिए मतलब कितना 1000 संभता लीज़ पे वो चल रहा था क्रशर और ये सारे प्रोजेक्ट वहां पे उसमें 700 तो मतलब
70% 1000 था या 1000 ही होगा हां तो उसमें 700 तो गहलोत के टाइम का उन्होंने इशू किया हुआ है। तो तुम किस अरावली को बचाने की बात कर रहे हो? और फैक्ट्स जो है वो सब बाहर है कि भाई 98% जो है मतलब 90% तो आउट ऑफ बाउंड्स है कि उसमें तो कुछ कर ही नहीं सकते। और टोटल जो अरावली का रीजन है उसमें केवल मैक्सिमम 2% तक ही एरिया जो है जहां से खनन हो रहा है चाहे गिट्टी के लिए हो या टाइल्स निकालने के लिए स्टोन का और ये सारा कुछ जो है
वो काम चल रहा है और ये मुझे लगता है कि एक सही बैलेंस है और जो डेफिनेशन बोल बोला जा रहा है कि 100 मीटर से नीचे ऊपर ठीक है वो अब इसी सुप्रीम कोर्ट ने बोला था अब वो बोल रहे हैं कि नहीं हम एक एंपावर्ड वर्ल्ड हाई पावर कमेट को हम ठीक है बढ़िया है आप दो कहीं ना कहीं यह बात जो है धीरे-धीरे टल गई अब चुपके से कुछ हो जाएगा हमें पता भी नहीं चलेगा कि अरावली में क्या हो बट वामपंथी यदि किसी भी चीज का विरोध कर रहे हैं तो आप
मान करके चलिए वो चीज अच्छी है वो चीज बढ़िया है और जो लोग इस पे रोने लगते हैं कि नहीं नहीं यार बर्बाद कर देंगे मैं वही जो मैंने कई बार बोला है कि अपना घर जब आपको बनाना होता है आप रूथलेसली पेड़ काट देते हो चाहे दादा जी ने लगाया आम का पेड़ है बगीचा है ना ठीक है हमको बनाना है यार आपको सड़क चाहिए लेकिन वह जिस क्षेत्र से आ रहा है आप चाहते हैं कि नहीं यार गरीब किसानों की जमीन सरकार ले रही है मैं पैसा दे रही है उनको उसी तरह आपको
घर में टाइल चाहिए तो टाइल बनेगा कैसे कहीं तो रिसोर्स मतलब आप जिस बात पे कोई भी ध्यान नहीं देता कि जो भी चीज आप देख रहे आप स्वयं भी हार्ड मांस के जो भी हैं आप या जीव हैं वह भी और यह जो धातु है धातु से बने उपकरण हैं ईंट है, मिट्टी है, कुछ भी है वह बिना भूमि के दोहन के नहीं हो सकता। हम क्या खा रहे हैं? मिट्टी से उपजी हुई चीज हम खा रहे हैं। हमारा शरीर इस भूमि का हिस्सा है। उसी तरह यह जो सामने कैमरा लगा हुआ है, इसमें
ग्लास है। सिलिका कहां से आता है? बालू से आता है। धरती का हिस्सा है। मेटल का रिंग है। हाउसिंग मेटल के कहां से आती है? प्लास्टिक भी इसी धरती का बनाया हुआ मतलब केमिकल से वह आता है। यह लाइट वाइट जो भी चीज है हर एक चीज धरती की है। बाहर से तो कुछ आया नहीं। तो आप दोहन तो कर ही रहे हो। आप सांस ले रहे हो। दोहन हो रहा है। तो ये लाइन हमें कहां खींचनी है? यदि आपको प्रगति करनी है, उन्नति करनी है। ठीक है? हम सस्टेनेबल डेवलपमेंट की बात करते हैं कि
हमें इस क्षेत्र में मेट्रो स्टेशन चाहिए और वह बहुत इजी कर देगा हमारा जीवन। ठीक है? यहां जो जितने पेड़ कटेंगे और 2 साल में मेट्रो स्टेशन बनेगा। हम उसका पांच गुना कहीं और पे उगाएंगे। ये एक सस्टेनेबल डेवलपमेंट है। या फिर हम ऐसे जगह पे डैम ना बना दें। यहां पे बांध ना बना दे जहां से पूरी इकोलॉजी डिस्टर्ब हो जाए और एक प्रजाति ही विलुप्त हो जाए। बाय द वे प्रजातियों के विलुप्त होने पे एक बात बता देता हूं कि जब से धरती बनी है तब से 98% ऑफ स्पीशीज विलुप्त हो चुके हैं।
दो ही परसेंट बचे हुए हैं। नए लोग नए स्पीशीज और ये सब जो है एवर इवॉल्विंग एक प्रोसेस है। और यूनिवर्स के या धरती के स्कीम ऑफ थिंग्स में इन मिलियंस एंड बिलियंस ऑफ इयर्स वो धीरे-धीरे चीजें कुछ चीजें हटती जाएंगी। कुछ नई चीजें आती जाएंगी। हमें उसी तरह पर राहुल गांधी के बातों को कितना गंभीरता से जो है वो लिया जाए। उनको पूछना चाहिए गहलोत साहब इतना क्यों जो है वो हनन कर रहे थे। अनफॉगेटेबल मेमोरी फ्रॉम स्कूल आई आई वै नॉट इन स्कूल। आई यूज्ड टू ऑलवेज गेट अप टू सम मिस्टेक फॉर द
अदर अनफॉरगेटेबल मेमोरी वेल आई वाज़ इन अ बोर्डिंग स्कूल। आई वाज़ पुट इन अ बोर्डिंग स्कूल एंड आई वाज़ एक्चुअली क्वाइट हैप्पी इन द स्कूल। बट आई हैड कंविंस्ड माय पेरेंट्स दैट आई वाज़ वैरी अनहैपी बिकॉज़ आई वांटेड देम टू कीप कमिंग। सो, माई पेरेंट्स वुड कीप कमिंग टू सी मी एंड दे थॉट आई वाज़ वैरी अनहैपी एंड आई वाज़ नॉट हैप्पी इन द स्कूल। बट एक्चुअली आई वाज क्वाइट हैप्पी। एंड व्हाट डू यू थिंक इज़ द मोस्ट इम्पोर्टेन्ट थिंग इन इन अ स्टूडेंट? फर्स्टली डिसिप्लिन ओबिडिएंस? आई वाज़ नॉट आई वाज़ नॉट अ ओबिडिएंट स्टूडेंट
एट ऑल। आई वाज़ नॉट आई आई वाज़ डिफिकल्ट फॉर द टीचर्स टू हैंडल बिकॉज़ आई वास ऑलवेज आस्किंग क्वेश्चंस। डू यू आर यू अल्लाउ टू आस्क क्वेश्चन? यस, सर। इज दैटेंट? यस, सर, इट्सेंट। पर व्हाई इज़ डिसिप्लिनेंट? सर वी कैन ग्रो टू अ आइडियल ह्यूमन। नो बट डिसिप्लिन आई मीन डिसिप्लिन इफ यू आर टू डिसिप्लिन इफ यू लिसन टू एवरीथिंग दे से देन यू माइट नॉट थिंक दैट मच। इफ समबडी टेल्स यू स्टैंड हियर एंड यू डोंट आस्क व्हाई। और इफ समबडी टेल्स यू डू दिस एंड यू डोंट आस्क व्हाई। यू माइट नॉट यू माइट
नॉट लर्न। यस सर। बट डिसिप्लिन इम्पोर्टेन्ट बिकॉज़ इफ यू आर अब्सोलुटली इनडिसिप्लिन देन देन इट्स अ प्रॉब्लम। बट यू हैव टू हैव अ लिटिल बैलेंस। आर यू नोटि? नो सर। जब हम बच्चों से बात करते हैं राहुल गांधी जो है वो सीधा मतलब राहुल गांधी इज़ राहुल गांधी। वो अपने स्तर को ऊपर नहीं उठा पाते। नीचे तो अब क्या ही ले जाएंगे। ऊपर उठाना मतलब आपको इवॉल्व करना पड़ता है। अभी मैं आप लोगों से संवाद कर रहा हूं। देन आई विल हैव अ सर्टेन काइंड ऑफ टोन और इस पर मैं थोड़ा सा फ्री विलिंग टाइप
का कर सकता हूं कि मुझे पता है कि 18 वर्ष की आयु से अधिक के लोग हैं। बहुत सारी बातें जो ऑलरेडी जानते हैं तो आई डोंट नीड टू यू नो गिव अ लॉट ऑफ बैकग्राउंड और हो सकता है मेरी भाषाकि हम एक इनफॉर्मल प्लेटफार्म पे है तो मेरी भाषा में जो है हियर एंड देयर एक दो जो है अपशब्द साला या इस तरह से जो आ जाता है या कभी-कभी मैं हो सकता है कि आई माइट बी डूइंग सम जोक्स दैट आर वो एप्रोप्रियट जो है किसी दूसरे सेटअप में नहीं माने जाएंगे बट बट
इसी प्लेटफार्म पे मुझे किसी मिनिस्टर का इंटरव्यू करना होगा। देन आई विल बी माइंडफुल ऑफ द वर्ड्स दैट आई एम चूजिंग। इसी तरह से मुझे कहीं लिटफेस्ट में बुलाया गया है और वहां जो ऑडियंस है मुझे अपने में परिवर्तन लाना पड़ेगा कि मैं किस तरह संवाद कर रहा हूं। फिर मैं 10 लोगों से घिरा हुआ हूं। वहां पे मैं अलग तरह संवाद करूंगा और यदि मुझे किसी विद्यालय में आमंत्रित किया जाएगा वहां मुझे स्वयं को बच्चे जिस बात को जैसे समझ सकते हैं उस तरह की शब्दावली के प्रयोग से बताना होगा। ठीक है? आप बता
रहे हैं कि मैं जो उतना ओबिडिएंट नहीं था, डिसिप्लिन नहीं था, नॉटी था। लुक वेयर यू हैव यू नो कम। आप अपने जीवन में कहां पे हैं? 50 वर्ष में आप अभी तक जो है सफलता नहीं देख पाए। 50 से तो अब तो 55 55 टाइप का हो गया। तो आप सफल नहीं हुए हो। आपकी बातें कोई सुनता नहीं। आप कन्विंस नहीं कर पाते हो। एक सफलता यही नहीं है कि वो प्राइम मिनिस्टर बन जाए। नहीं सफलता यह है कि ठीक है मैं प्राइम मिनिस्टर बनना हो सकता है कि इट इज़ नॉट इन द यू
नो मैथमेटिकल प्रोबेबिलिटी उस तरह से नहीं बने। बट यू कुड लीड योर पार्टी टू विक्ट्री इन मेनी अदर स्टेट्स। वैसा तो हो नहीं पा रहा है आपका। आप जो है स्टेट्स की संख्या भी आपकी घटती जा रही है और आप इस तरह की बातें भी नहीं कर पा रहे हो जो पॉलिटिकली विनिंग स्टेट्समैन एक तरह से कहा जाए कि वो हो। तो यदि आप लाइफ में डिसिप्लिन नहीं हो। डिसिप्लिन होने का मतलब यह नहीं होता है कि यू कैन नॉट क्वेश्चन। स्कूल में डिसिप्लिन होता है। पंकुअलिटी इज अ डिसिप्लिन। सही समय पर आना चाहिए। डिसिप्लिन
इज इफ द टीचर हैज़ सेड दैट यू हैव टू रेज योर हैंड टू यू नो आंसर द क्वेश्चन वेट फॉर योर टर्न। तो आप हाथ उठाओगे। आप यह नहीं कहोगे कि आपने हाथ ही उठाने क्यों बोला? और ये नॉनसेंसिकल क्वेश्चन है। एक बार आप पूछ सकते हो हाथी पैर क्यों नहीं उठाने बोला? राहुल गांधी होते स्कूल में तो मुझे लगता है कि यही वो कर रहे होते। तो डिसिप्लिन जो है ना एक हमारे तो विद्यालयों में लिखा रहता है अनुशासन ही देश को महान बनाता है। तो डिसिप्लिन इज नॉट अबाउट कि आप जो है क्वेश्चन
किसी ने बुलाया आपको कि यहां पे खड़े हो जाओ तो आप क्वेश्चन नहीं पूछूंगा मैं। मैं मुझे यदि एक विद्यालय में रखा गया है और मैं यह क्वेश्चन करने लगूं कि हम यूनिफार्म पहन के क्यों आते हैं? वो पर्पस आपका वहां होने का नहीं है। क्वेश्चन आप विषय पर पूछ सकते हैं कि 2 + 3 5 ही क्यों होता है? फिर आपको जोड़ या घटाव किस तरह से होता है? तब आप आकर के इस तरह की मतलब ऐसे क्वेश्चन जो है वो पूछ सकते हैं। जोड़ घटाओ फिर वो बताएगा। दो फल और तीन फल मिलाकर
कितने होते हैं? इस तरह से आपको रियल लाइफ एग्जाम ये प्रश्न होते हैं। प्रश्न यह नहीं है कि घंटी बजते ही दूसरा टीचर क्यों आता है? यह कोई लॉजिक वाला प्रश्न नहीं है और राहुल गांधी बच्चे को मतलब कि आप फ्री हो जाओगे आप सोच पाओगे बचपन जो है और इस आयु में स्कूल में यूनिफार्म देने का या इस तरह के जीवन जीने का कि टीचर ने आपको बोला आपको ऐसा करना चाहिए। दैट इज फाउंडेशनल। आप मां-बाप को यह नहीं पूछते हो कि मुझे पैदा क्यों किया। अब पता नहीं राहुल गांधी के इस पर क्या
विचार हैं। बट यू डोंट आस्क दैट क्वेश्चन। आप कॉलेज में जाते हो तो वहां पे आपके पास जितने प्रश्न होते हैं एक नया पूरा वातावरण आपको मिलता है प्रफुट प्रस्फुटित होने के लिए। स्कूल जो है बीजारोपण है। अंकुरण है और वहां पे आपको पानी डाला जाएगा। आपको वहां पर नहीं पता है कि हमें जीवन को कैसे जीना है। इस कारण से डिसिप्लिन जो है और वहां जो डिसिप्लिन आपके लाइफ में आएगा इट इज गोइंग टू यू नो हेल्प यू आउट एवर आफ्टर। तो राहुल गांधी स्वयं मतलब नॉटी और इनओबिडिएंट रहे तो फिर ठीक है। आपको
यू आर नॉट अ गुड रोल मॉडल। आप नोटी और इनबिडिएंट थे तो आपने जीवन में बहुत कुछ अच्छा नहीं किया है। आपकी जो भी अचीवमेंट है वह आपके मां-बाप और पार्टी के कारण है। आपके कारण आपकी कोई उपलब्धि है जो एक बता दीजिए आप। हमें तो पता है कि आप नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में फोर्थ प्लेस लाए थे। बट हमें यह भी पता है कि वो फोर्थ प्लेस कैसे आया था। बीन टॉकिंग अबाउट इज द अटैक ऑन आवर डेमोक्रेटिक फाउंडेशंस यस इंडिया इज़ अ डेमोक्रेटिक कंट्री यस बट टुडे आवर डेमोक्रेटिक सिस्टम इज़ अंडर अटैक डेमोक्रेसी इज़
वॉइस। सो डेमोक्रेसी इज़ द आइडिया दैट यू शुड हैव अ वॉइस। आई शुड हैव अ वॉइस। ऑल दीज पीपल शुड हैव अ वॉइस। ऑल दोज़ चिल्ड्रन इन फ्रंट ऑफ़ अस शुड हैव अ वॉइस। सो डेमोक्रेसी इज़ व्हाट गिव्स इंडिया इट्स वॉइस। एंड आई हैव बीन सेइंग दैट आवर डेमोक्रेटिक स्ट्रक्चर इज़ अंडर अटैक। एंड सो आर वॉइस द वॉइस ऑफ़ आवर पीपल इज़ अंडर अटैक। एंड इट इज़ अंडर अटैक बाय दोज़ इन गवर्नमेंट। बाय द पीपल हु आर एक्चुअली रनिंग द गवर्नमेंट। दे आर अटैकिंग आवर इलेक्शन कमिशन। हम्म। दे आर अटैकिंग आवर डिफरेंट इंस्टीट्यूशंस। दे आर
थ्रेटनिंग पीपल हु डोंट एग्री विद देयर आइडियोलॉजी। सो फॉर दैट वी नीड यंग पीपल लाइक यू हु आर ब्रेव। हु आर कॉन्फिडेंट एंड हु आर नॉट स्केर्ड ऑफ़ आस्किंग क्वेश्चंस। बच्चे को डेमोक्रेसी और उसके फाउंडेशन पर अटैक और मतलब राहुल गांधी कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के कॉलेज की कैंटीन में जो आयोजन होता है वहां पे भी यही बात बोलता है। राहुल गांधी जर्मनी में जाता है। वहां पे भी यही बात बोलता है। कोलंबिया में जा रहा है। पत्रकारों से बात कर रहा है। एग्जैक्टली यही बात बोलेगा और वह 8 वर्ष की बच्ची के सामने भी यही बात
बोल रहा है। यह एक मतलब यह इस तरह के लेवल ऑफ क्लेरिटी जो है वह चाहिए जीवन में कि भाई दुनिया कहीं पर भी चली जाए। मैं तो यही बोलूंगा कि डेमोक्रेसी के वो फाउंडेशन पे बच्ची को पता भी नहीं होगा फाउंडेशन ऑफ डेमोक्रेसी क्या होता है। व्हाट डस ही मीन? यहां पे ये कंप्लीटली एक स्कूल के प्रोग्राम में यह इलेक्ट्रोरल प्रोपगेंडा जो वहां पे चल रहा है और आप जो लोग अभी आरंभ कर रहे हैं जीवन का एक तरह से और दे आर ट्राइंग टू मेक सेंस ऑफ थिंग्स और उनके लिए सबसे बड़ी समस्या
जो है कि परीक्षा में हम कैसे पास करें और कौन से टीचर अच्छे हैं, कौन से टीचर बुरे हैं और यह सब्जेक्ट जो है टफ टफ है यह इजी है। वहां पे जाकर के डेमोक्रेसी का तेल जो है वो स्नेक ऑयल जो है वहां पे बेच रहा है कि नहीं नहीं आप आप देखो कि भाई तुम एक स्टेज पे हो। सबको बोलने की स्वतंत्रता है। तुम बोल रहे हो बच्ची बोल रही है। बच्चे बोल के आए हैं। तो कहां आपको प्रश्न पूछने नहीं दिया जा रहा है। कौन सा डेमोक्रेसी पे वो अटैक हो गया? मुझे
लगा थोड़ी देर में वो बोल देगा कि यू सी अ लॉट ऑफ टाइम ईडी एंड सीबीआई आर बीइंग सेंट टू क्वेश्चन द अपोजिशन पार्टी। मुझे लगता है वो तो थोड़ा उधर जो है जाने के मन मन उसका पूरा कर रहा होगा बट किसी तरह उसने जो है अपने आप को रोक लिया वहां जाने से। मतलब डेमोक्रेसी और हद ही है। समझ में नहीं आता ये आदमी। व्हाट स्टेप्स डू यू टेक टू वॉम? प्रोवाइड इक्वल ओपोरर्चुनिटीज टू ऑल स्टूडेंट्स वि बसाइड देयर बैकग्राउंड। यू मीन इन एजुकेशन नो एवरीथिंग एवरीथिंग वेल फर्स्ट ऑफ ऑल यू नीड टू
हैव ए गुड एजुकेशन सिस्टम एंड आई बिलीव दैट एजुकेशन शुड नॉट बी एक्सट्रीमली एक्सपेंसिव। एजुकेशन शुड नॉट बी प्राइवेटाइज्ड। दे कैन बी प्राइवेट। स्कूल्स एंड कॉलेजेस बट देयर इज अ रोल फॉर गुड क्वालिटी गवर्नमेंट एजुकेशन एंड फॉर दैट द गवर्नमेंट हैज़ टू पुट मनी इनू द बजट फॉर एजुकेशन। सो दैट्स द फर्स्ट थिंग। गवर्नमेंट तो दे रही है मनी। और एक प्राइवेट स्कूल के संभवत प्रोग्राम में राहुल गांधी वहां पे बोल रहे कि प्राइवेटाइजेशन जैसे एजुकेशन का नहीं होना चाहिए। और फिर बोले कि नहीं लेकिन चलो कुछ प्राइवेट स्कूल्स और यह सब जो है वो
वो हो सकता है। यहां पे एक बात जो मैं कहना चाहता हूं और बहुत गंभीरता से सुनिएगा। जब तक आपके देश की हायर एजुकेशन प्राइवेटाइज नहीं है और भारत जैसे राष्ट्र में यदि प्राइवेट एंटिटीज एजुकेशन नहीं दे रही हैं आपके यहां पे जो भी हो रहा है जिस भी तरह से हो रहा है वो बर्बाद हो जाएगा। हम जो भी थोड़ा बहुत जो पेटेंट्स फाइल कर रहे हैं या फिर हम जो थोड़ा बहुत हमें लग रहा है कि कहीं पर हम जा रहे हैं दैट वोंट हैपन। एक तो है कि आरक्षण ने बर्बाद कर रखा
है। जो हमारे मतलब आईआईटीस हैं या फिर यूनिवर्सिटीज हैं जो भी लिबरल आर्ट्स वाले और साइंस को लेकर के जो भी हैं वो तो बर्बाद है। उनका स्तर मतलब देश में गिनीचुनी व्यवस्थाएं हैं, कॉलेजेस हैं, यूनिवर्सिटीज हैं जिसको आप कह सकते हैं कि हां यह ठीक है। यह एक एक्सेप्टेबल स्टैंडर्ड का हम मान सकते हैं। क्यों? उनकी हालत ऐसी क्यों है? क्योंकि गवर्नमेंट के पास सबसे पहली प्रायोरिटी है कि यह लोग मर जाएंगे। इनको जीवित रखना है। इनको अनाज दो फ्री में। इनके घर पे छत नहीं है उसका घर बना के दो। बिजली नहीं है
वो बिजली का इंतजाम करके दो। ये पानी नहीं पी पा रहे हैं ढंग का तो वो करके दो। दवाई आपको दो। इंश्योरेंस इनको दो। सब चीज गवर्नमेंट कर रही है जो गवर्नमेंट को नहीं करना चाहिए। लेकिन हां हम उस स्थिति में हैं जहां पर गवर्नमेंट को ही करना पड़ेगा। सहयोग करना चाहते हैं तो इस क्यूआर कोड के माध्यम से कर सकते हैं। नंबर भी आपके स्क्रीन पे है। उस नंबर के माध्यम से Google Pay, Paytm, PhonePe आदि पे कर सकते हैं। यूपीआई आप कर सकते हैं। स्क्रीन पर ही है। विदेश के मित्र Paytm, PayPal के
माध्यम से जुड़ सकते हैं।