बिस्मिल्लाह रहमान रहीम बोलते कालम के साथ मैं आमिर रजा और सऊदी अरब ने 48 F35 जो है जो कि फिफ्थ जनरेशन के जहाज हैं उनको खरीदने का मोयदा कर लिया है अमेरिका के साथ और अमेरिका ने इस बात की तस्दीक कर दी है तकरीबन 25 बिलियन डॉलर का ये टोटल मोयदा है कहा जा रहा है इसे 243 कह देते हैं जी कि खबर के मुताबिक 243 बिलियन का ये मोयदा है इसमें सिर्फ ये 48 F35 नहीं है बहुत सारा इक्विपमेंट है रडार्स हैं और बाकी चीजें भी इससे मुतलका जो है वो मौजूद हैं। फिफ्थ जनरेशन
का जहाज इस वक्त का इस वक्त तक का दुनिया का सबसे जदीद तरीन जहाज होता है। स्टेल टेक्नोलॉजी है। मिसाइल्स हैं दूर मार एयर टू एयर फाइट के लिए। तो F35 जो है एक कीमती जहाज तो है। इससे इंकार नहीं किया जा सकता। लेकिन क्या किया जाए? मुझे बार-बार मीर का वो शेर याद आता है कि मीर भी क्या सादा है। बीमार हुए जिसके सबब उसी हतार के लौंडे से दवा लेते हैं। ये जो है उसी हतार का जो है मतलब जिनकी वजह से हम बीमार हैं। पूरी मुस्लिम दुनिया इस वक्त आवाज़ार है। तंग है।
क्या वही हमारा हल निकाल सकते हैं। इन्होंने ही 1948 में अरब दुनिया के अंदर इजराइली खंजर घोंपा था। और उन्हीं से हम फिर असला भी खरीदते हैं। और इस असले का क्या फायदा कि अगर इसको हम इजराइल के खिलाफ इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं तो सऊदी अरब को इस तरह की डील करने से पहले बहुत सारी चीजों को सोचना चाहिए था। मैंने पहले भी एक मर्तबा इस बात का जिक्र किया था कि होजीस को इसलिए उठाया जा रहा है। इसलिए उनको सऊदी अरब पर अटैक कराया जा रहा है। इसलिए उनको जदीद असला और नेविगेशन दी
जा रही है। इसलिए अमेरिका ने इंकार किया है सऊदी अरब की मदद करने को ताकि सऊदी अरब को प्रेशराइज किया जाए कि वो अमेरिका और इजराइल की शराय तस्लीम कर ले। अमेरिका अपना असला बेचकर अपने वो अखराजात जो उसने ईरान जंग में झोंक दिए हैं उनकाला करना चाहता है। देखें कि वहां पर जो रिपोर्ट्स आ रही हैं उनमें बिलियंस ऑफ डॉल जो है अब तक जो है खर्च हो चुके हैं। हासिल वसूल टके का नहीं है और उस पे यह भी हुआ कि अरब मुालिक में यह एक सोच बेदार हुई कि अमेरिका हमारा दफा नहीं
कर सकता है। फिर उसके बाद अह देख लें कि अब होज़िस को खड़ा किया गया। सऊदीज़ को डराया गया और सऊदीज़ ने जो है एक मुयदा जो है F35 के हवाले से कर लिया है। हालांकि होना तो ये चाहिए था कि ऐसे जहाज खरीदे जाए जिन पर किसी किस्म की अमेरिकन पाबंदी मौजूद ना हो। लेकिन हमारे हुक्मरान जरा इस बारे में कम सोचते हैं। इस बारे में ज्यादा सोचते हैं कि हमने दुश्मनों को कैसे जेर करना है। तो इस वक्त जो 10 दुश्मन है सऊदी अरब के हवाले से इनको होज़िस नजर आते हैं या उसके
बाद ईरान नजर आता है। तो इसलिए उन्होंने F35 48 के करीब F35 जो है उसका एक स्क्वाडन खरीदने का फैसला किया है। यह कब तक वसूल होगा इस बारे में तो अभी खबर जो है वो नहीं आई है लेकिन यह अकेला मोहदा नहीं है। इसमें और बहुत सारी चीजें मैंने जिस तरह से आपसे कहा कि दफाई साजो समान जो है वो भी मौजूद है जो कि ख्ते में फौजी ताकत के तवाजन को जो है सऊदी अरब के हक में करेगा। बिल्कुल ठीक है ये बात। ये इसमें कोई दो राय मेरी भी नहीं है कि सऊदी
अरब जो है मैं हमेशा कहता हूं एक बड़ी कुत है। एक बड़ी दफाई कुत है। मक्का मोहदे के बाद दो बड़ी मुस्लिम फौजी कुतों का इत्तहाद है। उसको हासिल हो चुका है। और अब उसने मजीद असला अगर लेना है तो उसके उसके लिए स्ट्रेंथन तो होगा। इसमें तो कोई वो दो राय नहीं हो सकती कि सऊदी अरब का स्ट्रेंथन होना हमारा स्ट्रेंथन होना है। मुस्लिम दुनिया का स्ट्रेंथन होना है। लेकिन मैं सिर्फ इस बात पर कि उनको अमेरिका से ये डील नहीं करनी चाहिए थी। अगर डील ही करनी थी तो दुनिया में एक मुल्क ऐसा
भी है जो दो फिफ्थ जनरेशन के जहाज बनाता है। J35 और J20 माइटी ड्रैगन चाइना चाइना के साथ भी डील की जा सकती थी। लेकिन शायद मुयदात में इस तरह से फंसे हुए हैं कि अभी सर दस्त उसमें से निकलना आसान ना हो। एमबीएस मैं हमेशा उनके विज़न की तारीफ करता हूं। सऊदी अरब के नौजवान जो क्राउन प्रिंस है वो बहुत समझदार आदमी है। उन्होंने बड़ी समझदारी से ही अब तक मामलात को चलाया है। उन्होंने तमाम मुालिक के साथ अपने रवाबत भी कायम रखे हैं और किसी के खिलाफ जो है उन्होंने कारवाई करने से भी
इंकार किया। यानी ईरान के खिलाफ अमेरिका को अपने अड्डे देने से भी इंकार किया और उसके बाद से फौजी को जो है उबारा गया कि वो सऊदी अरब पर हमले करे जो कि अभी तक आज की डेट तक जो है वो जारी है। मक्का पर भी एक ड्रोन आया। एक ताइफ पर गिरा। उसमें एक शहरी भी शहीद हुआ। तो ये सारे मामलात जो है सिर्फ इसलिए उठाए जा रहे हैं कि ज्यादा से ज्यादा साबित किया जा सके कि सऊदी अरब जो है वो उनकी शरायत मान ले और मैंने कल भी यह बात कल भी की
परसों भी की हफ्ते को भी की थी। बिन गौरियान नहर बनाने का सारा मामला है जिसकी बायस होज़ को इक्विप्ड किया जा रहा था। असले पर उनको सारी चीजें दी जा रही थी। कल मैंने इस पर भी बताया कि अमेरिका अमान में मुलाकात की होज़ के साथ और उसके बाद उन्होंने मोहम्मद बिन सलमान को इंकार किया था। लेकिन ये मोहदा खैर ये पुराने मुहदात में से एक मोहदा है लेकिन उसमें से एक चीज निकल कर सामने आई है कि F35 48 के करीब जो है वो सऊदी अरब ने खरीदने का फैसला किया है। चले इस
हवाले से कि सऊदी अरब की का डिफेंस जो है वो मजबूत होगा। हमला हो ना हो लेकिन डिफेंस इसका मजबूत होगा। फिफ्थ जनरेशन जहाज इस्तेमाल करने वाले जो दुनिया के चंद मुलिक है उसमें इसका नाम भी आ जाएगा। इंशा्लाह पाकिस्तान का नाम भी आ जाएगा। तुर्की का भी आ जाएगा। तुर्की क्योंकि अपना कान प्रोजेक्ट जो है फिफ्थ जनरेशन का वो शुरू कर रहा है और पाकिस्तान का हमने बताया था कि चाइना के साथ F35 का मुयदा है जिसके तहत वो F35 जो है कहा जाता है कि पाकिस्तान को भी मिल जाएंगे। तो इस तरह से
मक्का मुयदे के तीनों मुालिक जो है फिफ्थ जनरेशन के जहाज के हामिल हो जाएंगे। तुर्की के पास अपना फिफ्थ जनरेशन का जहाज होगा। पाकिस्तान को J35 और सऊदी अरब को F35 मिल जाएगा। इससे इस मायदे में इस दफाई मोहदे में मौजूद तीनों मुालिक जो है उनका उनका दफा जो है वो मजबूत से मजबूतर होगा जो कि बहुत ही अच्छी बात है और मैं इसको एप्रिशिएट करता हूं। अह लेकिन बस मुझे वह जो मेरी हफगी है या मेरा गुस्सा है वह इस बात पर है कि हमें बहुत ज़्यादा अमेरिका पर इनहसार नहीं करना चाहिए। ईरान अमेरिका
वॉर के अंदर ईरान ने साबित किया कि अमेरिका अपने फौजी अड्डों को भी नहीं बचा पाया। तसवीर भरीभरी है। अगर आप सीबीएस पे देखें, बीबीसी पे देखें। इतनी तसावीर हैं इनके अड्डों की तबाही की कि लगता है कि ये मेरा ख्याल है कि इस दौर में दूसरी जंग अजीम के बाद अमेरिका का इतना बड़ा नुकसान जो है किसी जगह नहीं हुआ होगा जितना नुकसान ईरान जंग में हुआ है। 28 फरवरी से ये जंग शुरू हुई थी और आज 18 सितंबर है। इन पांच छ सात महीनों में ईरान ने ठोक बजाकर हर चीज का जवाब दिया
और अपने ब्लस्टिंग से उड़ा के रख दिया। सऊदी अरब को मुबारक हो F35 की डेल यह एक ऐसा जहाज है जो अभी तक किसी मुस्लिम दुनिया के किसी मुस्लिम मुल्क के पास है नहीं है लेकिन पाक सऊदी अरब ये मिल रहा है तो ये बड़ी खुशहाई बात है भारत भी किसी जमाने में ये लेना चाह रहा था एक तो कीमत इनकी बहुत ज्यादा है दूसरा फिर अमेरिका पीछे हट गया क्योंकि उन्होंने राफेल गिरवा लिए तो उन्होंने कहा कि F35 बिना गिरा गिरा लिए जाए। मोहम्मद बिन सलमान मैं उनके विज़ का वैसे ही कायल हूं कि
वो बहुत अग्रेसिवली बहुत तरक्की के लिए सोचते हैं। तो इसी इस ऐसे लोग जो है वो हमेशा अपने मुल्क के लिए बेहतरी चाह रहे होते हैं। मैं उनके हर एक विज़डम का जो है वो कायल रहा हूं। ये भी F35 अल्लाह करे ये मुस्लिम दुनिया की हिफाजत के लिए काम आए और दुश्मनों को नाचले। तब तक के लिए इतना ही।