सोचो अगर आज से ठीक 1 साल बाद भी तुम्हारी जिंदगी बिल्कुल वैसी ही हो जैसी आज है। वही पैसे की टेंशन, वही मोबाइल स्क्रॉल वही कल से शुरू करेंगे वाला बहाना। डर लगता है ना? लेकिन सच्चाई यह है ज्यादातर लोग इसी डर को इग्नोर करके रोज अपना सबसे कीमती एसेट टाइम बर्बाद कर देते हैं। अगर तुम यह वीडियो देख रहे हो तो यकीन मानो यह सिर्फ वीडियो नहीं है। यह एक वार्निंग सिग्नल है। आज मैं तुम्हें बताने वाला हूं आठ ऐसे स्टेप्स जो अमीर लोग रोज फॉलो करते हैं और वही आठ गलतियां जो आम इंसान
पूरी जिंदगी करता रहता है। स्टेप एक माइंडसेट रिसेट सोच बदलेगी तभी जिंदगी बदलेगी। दोस्तों सबसे पहले एक कड़वा सच समझ लो। गरीबी सिर्फ पैसे की समस्या नहीं होती। गरीबी सोच की बीमारी होती है। अगर पैसा ही सब कुछ होता तो दुनिया में कोई भी मेहनती इंसान गरीब नहीं होता। लेकिन हकीकत यह है कि लाखों लोग दिन रात मेहनत करते हैं। फिर भी जिंदगी भर वहीं के वहीं फंसे रहते हैं। क्यों? क्योंकि उनका माइंडसेट वही रहता है। गरीब सोच हर सुबह यही सवाल पूछती है। मेरे पास क्या नहीं है? मेरे पास पैसा नहीं है। मेरे पास
कनेक्शन नहीं है। मेरे पास टाइम नहीं है। मेरे पास लक नहीं है। और जब इंसान दिन की शुरुआत ही कमी की सोच से करता है तो उसका दिमाग पूरा दिन सिर्फ बहाने ढूंढता है। लेकिन अमीर सोच बिल्कुल अलग सवाल पूछती है। अमीर सोच कहती है जो नहीं है उसे बनाने का सिस्टम क्या है? अगर पैसा नहीं है तो पैसा बनाने का तरीका क्या है? अगर स्किल नहीं है तो सीखने का रास्ता क्या है? अगर मौका नहीं मिल रहा तो मौका क्रिएट कैसे किया जाए? यही फर्क है। सवाल बदलते ही दिमाग की दिशा बदल जाती है।
अब जरा ईलॉन मस्क को देखो। आज लोग उन्हें जीनियस कहते हैं, विज़नरी कहते हैं। लेकिन उनकी कहानी कभी आसान नहीं रही। PayPal बेचने के बाद वह आराम से लग्जरी लाइफ जी सकते थे। लेकिन उन्होंने अपना पूरा पैसा टेस्ला और स्पेस एक्स में झोंक दिया। रॉकेट फेल हुए। कंपनी दिवालिया होने के कगार पर पहुंच गई। लोगों ने मजाक उड़ाया। मीडिया ने कहा यह आदमी पागल है लेकिन ईलॉन मस्क ने एक बात कभी नहीं बदली। उनका माइंडसेट। उनके लिए फेलियर का मतलब था गेम ओवर नहीं। फेलियर का मतलब था डाटा मिल गया। अब अगला अटेम्प्ट और बेहतर
होगा। यही होता है ग्रोथ माइंडसेट। अमीर लोग असफलता से डरते नहीं। वो उसे टीचर की तरह इस्तेमाल करते हैं। अब सवाल यह है क्या सिर्फ यह सब जान लेने से तुम्हारा माइंडसेट बदल जाएगा? नहीं। माइंडसेट कोई स्विच नहीं है जो एक दिन में ऑन हो जाए। माइंडसेट एक मसल है जो रोज ट्रेन होता है। इसीलिए एक सिंपल लेकिन पावरफुल एक्सरसाइज ही है। हर दिन खुद से यह तीन लाइन बोलो। मैं सीख सकता हूं। मैं बदल सकता हूं। मैं अमीर बन सकता हूं। शुरुआत में तुम्हारा दिमाग खुद ही हंसेगा। कहेगा अरे छोड़ यह सब फेक बातें
हैं। लेकिन याद रखो तुम्हारा दिमाग वही मानता है जो तुम उसे बार-बार सिखाते हो। अगर सालों से तुमने दिमाग को सिर्फ डर, कमी और बहानों की ट्रेनिंग दी है तो वो एक दिन में कैसे बदलेगा? जिस दिन तुमने मेरे पास टाइम नहीं है कि जगह मैं टाइम कैसे निकालूं? पूछना शुरू कर दिया। उसी दिन माइंडसेट रिसेट होना शुरू हो जाता है। गरीब सोच कहती है यह मेरे बस का नहीं। अमीर सोच कहती है सीखना पड़ेगा और यकीन मानो जिस दिन तुमने बहाने ढूंढना बंद करके सॉल्यूशन ढूंढना शुरू कर दिया उसी दिन से तुम्हारी जिंदगी की
डायरेक्शन बदलने लगती है। याद रखो माइंडसेट रोज ट्रेन होता है। एक दिन में नहीं लेकिन जिस दिन माइंडसेट बदल गया उस दिन के बाद पैसा, स्किल और मौके अपने आप तुम्हारी तरफ खींचने लगते हैं। क्योंकि सोच बड़ी होगी तभी जिंदगी बड़ी बनेगी। स्टेप दो टाइम प्लस एनर्जी मैनेजमेंट वक्त नहीं तुम्हारी एनर्जी तय करती है तुम्हारी औकात। दोस्तों ज्यादातर लोग यही कहते हैं मेरे पास टाइम नहीं है। लेकिन सच्चाई यह है कि टाइम सबके पास बराबर होता है। दिन में 24 घंटे चाहे वो आप हो या दुनिया का सबसे अमीर इंसान। फर्क टाइम का नहीं है।
फर्क इस बात का है कि कौन उस टाइम से क्या पैदा कर रहा है। आज का आम इंसान अपना 3 से 5 घंटे रोज ऐसे कामों में गवा देता है जिनसे ना पैसा बनता है ना स्किल बनती है ना जिंदगी आगे बढ़ती है। मोबाइल स्क्रॉल करना बिना मतलब की बातें। ऐसी वीडियो देखना जो सिर्फ टाइम पास कराती है जिंदगी नहीं बदलती। यह छोटे-छोटे टाइम लीक्स मिलकर आपकी पूरी लाइफ की स्पीड धीमी कर देते हैं। अमीर लोग वक्त को इमोशन से नहीं डाटा से देखते हैं। वह खुद से पूछते हैं मेरा यह एक घंटा ग्रोथ दे
रहा है या पछतावा? और यही सवाल उन्हें 90% लोगों से अलग कर देता है। अब एक जरूरी बात समझो। सिर्फ टाइम मैनेज करना काफी नहीं है। असल गेम है एनर्जी मैनेजमेंट। अगर तुम्हारा दिमाग थका हुआ है तो पूरा दिन फ्री होने के बाद भी कोई काम नहीं होता। अमीर लोग जानते हैं उनका हाई एनर्जी टाइम कौन सा है। जब दिमाग सबसे तेज चलता है जब फोकस सबसे ज्यादा होता है। वही टाइम वो सबसे जरूरी कामों को देते हैं। सीखने के लिए, सोचने के लिए, पैसा बनाने वाले कामों के लिए और फालतू काम सोशल मीडिया, कॉल्स,
मैसेज वो सब लो एनर्जी टाइम में। यही वजह है कि वो कम समय में ज्यादा रिजल्ट निकालते हैं। अब एक बहुत सिंपल लेकिन खतरनाक नियम याद रखो। जो काम पैसा, स्किल या ग्रोथ नहीं दे रहा। चुप वो टाइम वेस्ट है। हर चीज बुरी नहीं होती लेकिन हर चीज जरूरी भी नहीं होती। जिस दिन तुमने यह सीख लिया कि अब हर कॉल उठाना जरूरी नहीं। हर मैसेज का जवाब देना जरूरी नहीं। हर जगह पहुंचना जरूरी नहीं। उसी दिन से तुम्हारा टाइम वापस तुम्हारे कंट्रोल में आने लगता है। एक प्रैक्टिकल एक्सरसाइज सुनो। अगले 7 दिन रात को
सोने से पहले एक चीज जरूर लिखो। आज मैंने अपना पूरा दिन किस-किस चीज में लगाया। यह एक्सरसाइज आरामदेह नहीं होगी। यह तुम्हें खुद के सामने नंगा कर देगी। लेकिन यही सच्चाई तुम्हारी जिंदगी बदलने की शुरुआत बनेगी। याद रखो दोस्तों टाइम पैसा नहीं है। टाइम लाइफ है और जो इंसान अपनी लाइफ को कंट्रोल करना सीख गया उसे अमीर बनने से कोई नहीं रोक सकता। स्टेप तीन रेयर स्किल्स बिल्ड करो। पैसा मेहनत के पीछे नहीं वैल्यू के पीछे भागता है। दोस्तों ये पुअर इस बात को जितनी जल्दी समझ लोगे उतनी जल्दी जिंदगी बदलने लगेगी। दुनिया मेहनती लोगों
से भरी पड़ी है। लोग 10 से 12 घंटे काम कर रहे हैं। दिन रात भाग रहे हैं। फिर भी सालों बाद वहीं के वहीं खड़े हैं। क्यों? क्योंकि मेहनत सब कर रहे हैं। लेकिन सही जगह मेहनत बहुत कम लोग कर रहे हैं। आज के जमाने में ज्यादा काम करना कोई बड़ी बात नहीं है। बड़ी बात है ऐसा काम करना जो बहुत कम लोग कर पाते हैं। यही होता है रेयर स्किल। अगर आपकी स्किल हर दूसरा इंसान कर सकता है तो आपकी वैल्यू कभी ज्यादा नहीं बढ़ेगी। लेकिन जिस दिन आपके पास ऐसी स्किल आ जाती है
जो भीड़ के पास नहीं है उसी दिन से पैसा आपको ढूंढना शुरू कर देता है। अब जरा ईलॉन मस्क, बिल गेट्स और वारेन बफेट को देखो। यह लोग इसलिए अमीर नहीं बने क्योंकि यह सबसे ज्यादा मेहनत करते थे। यह अमीर बने क्योंकि इनकी स्किल्स आम नहीं थी। ईलॉन मस्क को फर्स्ट प्रिंसिपल्स थिंकिंग आती है। वो प्रॉब्लम्स को जड़ से तोड़कर समझते हैं। बिल गेट्स को बहुत कम उम्र में प्रोग्रामिंग की गहरी समझ थी। वारेन बफेट को इन्वेस्टिंग और बिजनेस वैल्यू्यूएशन बाकी लोगों से बेहतर समझ आती है। यह वो स्किल्स हैं जो किताबों में सिर्फ ऊपर
ऊपर लिखी होती हैं लेकिन बहुत कम लोग उन्हें असल में सीखते हैं। और याद रखो जब आप वो कर पाते हो जो भीड़ नहीं कर पाती तो भीड़ आपको फॉलो करती है। अब सवाल आता है रेयर स्किल सीखी कैसे जाए? सबसे पहली बात मार्केट को समझो। इमोशन से नहीं डिमांड से सोचो। आज जिन स्किल्स की सबसे ज्यादा वैल्यू है वो वही हैं जो दिमाग से चलती है। मशीन से नहीं। यही वजह है कि ऐसी स्किल्स आपको रिप्लेस होने से बचाती हैं। दूसरी सबसे बड़ी गलती जो लोग करते हैं सीख सीखने में कंजूसी। गरीब सोच कहती
है रेप पैसा बचाओ रिस्क मत लो। अमीर सोच कहती है पैसा वहीं लगाओ जहां से दिमाग तेज हो। कपड़ों, गैजेट्स और दिखावे पर किया गया खर्च खर्च होता है। लेकिन स्किल्स पर किया गया खर्च इन्वेस्टमेंट होता है जो जिंदगी भर रिटर्न देता है। तीसरी और सबसे जरूरी बात प्रैक्टिस। सिर्फ सीखना आपको स्मार्ट बनाता है लेकिन अप्लाई करना आपको अमीर बनाता है। स्किल तब पावर बनती है जब वो आपकी आदत बन जाए। अगर कम्युनिकेशन सीख रहे हो तो रोज बोलो। गलत बोलो लेकिन बोलो। अगर इन्वेस्टिंग सीख रहे हो तो छोटी रकम से शुरू करो। डर को
एक्सक्यूज मत बनाओ। अगर डिजिटल स्किल सीख रहे हो तो रोज कुछ बनाओ। कुछ पोस्ट करो, कुछ टेस्ट करो। हर दिन थोड़ा-थोड़ा आगे बढ़ो। 6 महीने बाद खुद देखोगे। तुम 90% लोगों से आगे हो। क्योंकि ज्यादातर लोग सीखते तो हैं लेकिन डर के कारण अप्लाई नहीं करते। याद रखो दोस्तों स्किल पैसे को पुश नहीं करती। स्किल पैसे को पुल करती है। आपकी इनकम इस बात से तय नहीं होती कि आप कितनी मेहनत करते हो। आपकी इनकम इस बात से तय होती है कि आप कितनी वैल्यू क्रिएट करते हो। गरीब सोच [संगीत] कहती है स्किल सीखने में
टाइम क्यों बर्बाद करूं? अमीर सोच कहती है आज सीखूंगा ताकि कल मेरी जगह कोई और ना ले सके। तो आज फैसला करो। एक स्किल चुनो और अगले 6 महीने पूरी ईमानदारी से उसे दे दो। अगर आपने ऐसा कर लिया तो यकीन मानो आपकी जिंदगी अब पहले जैसी नहीं रहेगी। स्टेप चार फाइनेंशियल इंटेलिजेंस पैसों को समझो वरना पूरी जिंदगी उनके पीछे भागते रहोगे। दोस्तों एक बहुत बड़ा सच समझ लो। अमीर और गरीब के बीच सबसे बड़ा फर्क कमाई का नहीं होता। फर्क होता है पैसों को समझने का। दुनिया में लाखों लोग ऐसे हैं जो ठीक-ठाक पैसा
कमाते हैं। अच्छी सैलरी है फिर भी हर महीने टेंशन में रहते हैं। और कुछ लोग ऐसे भी हैं जो कम कमाकर भी फाइनेंशियली स्ट्रांग होते हैं। क्यों? क्योंकि गरीब इंसान पैसा कमाता है और खर्च कर देता है। लेकिन अमीर इंसान पैसा कमाता है और उसे ऐसे सिस्टम में डाल देता है जहां पैसा उसके लिए काम करता है। यही है फाइनेंसियल इंटेलिजेंस। पैसा कमाने से ज्यादा पैसे को चलाने की कला। अब जरा वारेन बफेट को देखो। वो आज भी महंगे कपड़े नहीं पहनते ना लग्जरी दिखावे में रहते हैं। लेकिन उनकी एक-एक फाइनेंसियल डिसीजन उन्हें और अमीर
बनाती है। क्योंकि वह पैसा इमोशन से नहीं लॉजिक और नंबर से चलाते हैं। यही सोच आम इंसान को अमीर से अलग करती है। अब सबसे पहले खर्च को समझो। जैसे ही पैसा आता है, आम इंसान उसे दिखावे में उड़ा देता है। नया फोन, महंगे कपड़े, पार्टियां यह सब चीजें मोमेंट्री खुशी देती हैं, लेकिन फ्यूचर छीन लेती हैं। अमीर लोग सबसे पहले पैसा लगाते हैं एसेट्स में। ऐसी चीजें जो पैसा पैदा करें ना कि पैसा खाएं। याद रखो यह रूल। पैसा वहीं खर्च करो जहां से पैसा वापस आए। इसी के लिए एक सिंपल फार्मूला अपनाओ। 50%
जरूरी खर्च 30% इन्वेस्टमेंट 20% स्किल और खुद पर काम। अगर आप इस फार्मूला को ईमानदारी से फॉलो कर लेते हो तो आने वाले 5 साल आपकी फाइनेंशियल लाइफ पूरी तरह बदल सकती है। अब दूसरी बड़ी चीज डेप्ट। गरीब सोच कहती है कर्ज बुरा होता है। अमीर सोच कहती है गलत कर्ज बुरा होता है। अमीर लोग लोन लेते हैं इन्वेस्टमेंट के लिए ताकि उस पैसे से और पैसा बने। लेकिन आम इंसान लोन लेता है दिखावे के लिए और फिर सालों तक ईएमआई की जंजीरों में फंसा रहता है। फर्क पैसों का नहीं सोच का है। तीसरी और
सबसे ताकतवर बात सिस्टम बनाओ। आपकी मेहनत की एक लिमिट है। आप दिन में कुछ घंटे ही काम कर सकते हो। लेकिन पैसा पैसा बिना थके 24 घंटे काम कर सकता है। यहीं से असली अमीरी शुरू होती है। साइड इनकम बनाओ, इन्वेस्टिंग सीखो। ऐसे सिस्टम्स बनाओ जहां आप सोते वक्त भी पैसा बना रहे हो। याद रखो जब तक आप खुद काम कर रहे हो तब तक इनकम लिमिटेड है। लेकिन जिस दिन पैसा आपके लिए काम करने लगा उसी दिन से फाइनेंशियल फ्रीडम की शुरुआत होती है। पैसा ना अच्छा है ना बुरा। पैसा सिर्फ एक टूल है
और जो इंसान इस टूल को चलाना सीख गया वही असली मायनों में आजाद बनता है। इसलिए अगर आप टाइम वेस्ट करना बंद करना चाहते हो और सच में अमीर बनना चाहते हो तो फाइनेंशियल इंटेलिजेंस को इग्नोर मत करना। क्योंकि पैसा कमाना स्किल है लेकिन पैसे को संभालना विज़डम है। स्टेप पांच नेटवर्किंग पावर सही लोगों से जुड़ो वरना गलत लोग तुम्हें वहीं रोक देंगे। दोस्तों इस सच को जितनी जल्दी समझ लोगे उतनी तेजी से आगे बढ़ोगे। आप वही बनते हो जिनके साथ आप ज्यादा वक्त बिताते हो। अगर आपका ज्यादातर समय उन लोगों के साथ गुजर रहा
है जो हर बात में शिकायत करते हैं। जो रिस्क लेने से डरते हैं जो दूसरों की कामयाबी पर कमेंट करते हैं लेकिन खुद कुछ नहीं करते तो चाहे आप कितने भी टैलेंटेड क्यों ना हो धीरे धीरे आपकी स्पीड भी स्लो [संगीत] हो जाएगी लेकिन अगर आप अपनी सोच को बड़ा करना चाहते हो अमीर माइंडसेट बनाना चाहते हो तो आपको जानबूझकर ऐसे लोगों के बीच रहना होगा जो आपसे आगे हैं आपसे ज्यादा जानते हैं और जिनकी भूख बड़ी है [संगीत] यही है नेटवर्किंग पावर। बहुत से लोग नेटवर्किंग को सिर्फ जान पहचान समझते हैं। लेकिन सच्चाई यह
है नेटवर्किंग ग्रोथ का शॉर्टकट है। सही लोगों से जुड़ना मतलब सही मौके, सही जानकारी, सही दिशा, अकेले मेहनत करने वाला इंसान धीरे धीरे आगे बढ़ता है। लेकिन सही नेटवर्क वाला इंसान छलांग लगाकर आगे निकल जाता है। अब समझते हैं नेटवर्किंग इतनी जरूरी क्यों है? [संगीत] पहली वजह ओपोरर्चुनिटीज। जिंदगी की दिशा एक सही मुलाकात से बदल सकती है। ईलॉन मस्क को देखो। उनकी शुरुआती कंपनियां सिर्फ आइडियाज से नहीं बनी। सही पार्टनर्स, सही इन्वेस्टर्स और सही लोगों की वजह से बनी। जब सही लोग आपको जानते हैं तो मौके खुद चलकर आपके पास आते हैं। दूसरी वजह मेंटोरशिप।
अगर आप उन लोगों से सीखते हो जो वही रास्ता पहले तय कर चुके हैं जहां आप जाना चाहते हो तो आप सालों का समय बचा लेते हो। एक अच्छा मेंटोर आपकी सोच को नई दिशा देता है। आपकी गलतियों को कम करता है और आपकी ग्रोथ को कई गुना तेज कर देता है। जो काम आप 10 साल में सीखते वही सही [संगीत] गाइडेंस से 2 साल में हो सकता है। तीसरी वजह स्टैंडर्ड्स और एनर्जी। जब आप बड़ा सोचने वालों के बीच रहते हो तो छोटा सोचना आपके लिए अनकंफर्टेबल हो जाता है। उनकी बातें उनका डिसिप्लिन उनका
लाइफस्ट धीरे धीरे आपका नॉर्मल बन जाता है और जैसे ही आपका नॉर्मल बदलता है आपकी परफॉर्मेंस अपने आप ऊपर चली जाती है। अब सवाल आता है नेटवर्किंग मजबूत कैसे [संगीत] बनाएं? पहला कदम खुद को सही जगह पर रखो। जहां भी आपके फील्ड के सक्सेसफुल लोग इकट्ठा होते हैं, वहां पहुंचो। बिजनेस इवेंट्स, सेमिनार्स, वर्कशॉप्स घूमने की जगह नहीं है। यह माइंडसेट अपग्रेड की जगह है। दूसरा कदम सोशल मीडिया का स्मार्ट इस्तेमाल Lindin, Twitter, Instagram सिर्फ स्क्रोल करने के लिए नहीं है। यहां आप लीडर्स, मेंटर्स और अचीवर्स तक। डायरेक्ट पहुंच बना सकते हो। उनका कंटेंट देखो, सीखो।
सही सवाल पूछो और धीरे धीरे [संगीत] उनकी दुनिया का हिस्सा बनो। तीसरा और सबसे जरूरी नियम वैल्यू दो। सिर्फ लेने की सोच आपको दूर तक नहीं ले जाएगी। अमीर लोग ऐसे सर्कल बनाते हैं जहां हर इंसान किसी ना किसी रूप में वैल्यू ऐड करता है। गरीब सोच कहती है मैं सब खुद कर लूंगा। अमीर सोच कहती है सही लोगों के साथ मिलकर तेजी से आगे बढूंगा तो आज से एक कॉन्शियस डिसीजन लो अपना सर्कल बदलोगे क्योंकि जिस दिन आपका सर्कल बदलता है उसी दिन आपकी सोच बदलती है और जिस दिन सोच बदलती है उसी दिन
जिंदगी बदलना शुरू हो जाती है। एसटीपी छह कंसिस्टेंसी प्लस डिसिप्लिन रोज थोड़ा करो लेकिन कभी रुकना मत। दोस्तों अगर सफलता का कोई एक सबसे बड़ा राज है तो वह टैलेंट नहीं है, किस्मत नहीं है, कनेक्शंस भी नहीं है। वह है कंसिस्टेंसी। दुनिया में ज्यादातर लोग इसलिए असफल नहीं होते क्योंकि उनमें काबिलियत नहीं होती बल्कि इसलिए होते हैं क्योंकि वह बीच रास्ते में रुक जाते हैं। शुरुआत में हर इंसान जोश से भरा होता है। मोटिवेशन हाई होती है। पहले दिन पहले हफ्ते सब कुछ आसान लगता है। लेकिन जैसे ही थकान आती है, रिजल्ट दिखना बंद होता
है या रास्ता लंबा लगने लगता है। यहीं पर 90% लोग हार मान लेते हैं और यहीं से 10% लोग भीड़ से अलग हो जाते हैं। अमीर और सफल लोग मूड के भरोसे काम नहीं करते। वह डिसिप्लिन के भरोसे चलते हैं। उन्हें फर्क नहीं पड़ता। आज मन है या नहीं। आज अच्छा लग रहा है या नहीं? आज तारीफ मिल रही है या नहीं? काम करना है तो काम करना है। यही डिसिप्लिन है। याद रखो एक दिन की मेहनत जिंदगी नहीं बदलती लेकिन रोज की मेहनत जरूर बदल देती है। अगर आप हर दिन सिर्फ 1% भी बेहतर
बनते हो तो एक साल में आप वहां पहुंच जाते हो जहां ज्यादातर लोग सिर्फ सपना देखते रह जाते हैं। अब सवाल आता है कंसिस्टेंसी बनाए कैसे रखें? पहला नियम छोटे टारगेट। बहुत बड़ा गोल देखकर दिमाग डर जाता है। लेकिन छोटा टारगेट एक्शन में डाल देता है। आज बस इतना करो। आज बस इतना सीखो। आज बस इतना आगे बढ़ो। छोटी-छोटी जीतें आपके अंदर भरोसा पैदा करती हैं। और वही भरोसा आपको लंबे सफर तक ले जाता है। दूसरा नियम रूटीन। जब आपकी सुबह तय है, [संगीत] आपका काम तय है और आपका सीखने का समय तय है तो
जिंदगी अपने आप लाइन में आ जाती है। आदतें अगर कंट्रोल में हैं तो भविष्य भी कंट्रोल में होता है। तीसरा और सबसे खतरनाक दुश्मन डिस्ट्रैक्शन, सोशल मीडिया, बेकार की बातें, नेगेटिव लोग यह सब आपकी एनर्जी धीरे धीरे चूस लेते हैं। याद रखो आपकी फोकस आपकी असली दौलत है। जो इंसान अपनी फोकस बचा लेता है वही इंसान कंसिस्टेंट बन पाता है। कंसिस्टेंसी और डिसिप्लिन वो नीम है जिस पर हर बड़ा एंपायर खड़ा होता है। जो रोज थोड़ा-थोड़ा करता है वही एक दिन वह कर दिखाता है जो दुनिया को असंभव लगता है। और याद रखो आपको परफेक्ट
नहीं बनना है। आपको बस रुकना नहीं है। स्टेप सात विज़ लंबा सोचो दूर देखो सिर्फ अमीर मत बनो। दिशा वाला इंसान बनो। दोस्तों यहां आकर ज्यादातर लोग एक बहुत बड़ी गलती करते हैं। वो सोचते हैं बस पैसा आ जाए, बस सैलरी बढ़ जाए, बस थोड़ी लाइफ आसान हो जाए। लेकिन सच यह है जिस इंसान के पास विज़न नहीं होता उसके पास पैसा आ भी जाए तो वह उसे संभाल नहीं पाता। विज़ का मतलब है आपको साफ पता हो कि आप जिंदगी में कहां जा रहे हो। आज नहीं अगले 5 साल बाद नहीं बल्कि 10 साल
बाद आप खुद को किस जगह देखना चाहते हो। विज़ वो ताकत है जो आपको थकने नहीं देती। विजन वह वजह है जिसके कारण आप बिना ताली, बिना तारीफ फिर भी काम करते रहते हो। जब विज़ छोटा होता है तो छोटी सी परेशानी भी पहाड़ लगने लगती है। और जब विज़ बड़ा होता है तो बड़ा दर्द भी सहने लायक लगने लगता है। यही फर्क होता है। एक आम इंसान और एक लीडरमैन। अब जरा ईलॉन मस्क को देखो। उन्होंने Tes्ला सिर्फ कार बेचने के लिए नहीं बनाई। उन्होंने एक विज़न देखा। एक ऐसा भविष्य जहां दुनिया क्लीन एनर्जी
पर चले। उन्होंने स्पेस एक्स सिर्फ रॉकेट उड़ाने के लिए नहीं बनाई। उनका विज़ था इंसान को मल्टीप्लेनेरी बनाना। यही वजह है कि लोग उन्हें सिर्फ अमीर आदमी नहीं विज़नरी कहते हैं। विज़न लोगों को जोड़ता है। पैसा नहीं। दुनिया प्रोडक्ट खरीदती है लेकिन फॉलो करती है सपनों और विचारों को। जब आपके पास विजन होता है तो आपके फैसले साफ होते हैं। आप जानते हो किस चीज को हां कहना है और किस चीज को बिना गिल्ट के ना कहना है। विज़ आपको डिसिप्लिन देता है। कंसिस्टेंसी देता है और सबसे जरूरी विज़ आपको मीनिंग देता है। अब अपने
आप से एक ईमानदार सवाल पूछो। अगर अगले 10 साल ऐसे ही निकल गए जैसे आज के दिन निकल रहे हैं तो क्या तुम खुद से खुश रहोगे? अगर जवाब नहीं है तो समझ लो विज़ की कमी है। विज़ बनाने के लिए तीन बातें साफ रखो। पहली सिर्फ पैसा मत सोचो। सोचो कि तुम किस समस्या को हल करना चाहते हो। दूसरी विज़ डरावना होना चाहिए। अगर सपना आपको थोड़ा अनकंफर्टेबल नहीं कर रहा तो सपना छोटा है। तीसरी विज़ लिखो। दिमाग में घूमता सपना जल्दी मर जाता है। लिखा हुआ विज़न आपको रोज जिंदा रखता है। याद रखो
पैसा एक साधन है। विज़ मंजिल है। जिस इंसान के पास साफ विज़ होता है, वह रास्ते में भटकता नहीं। और जब विज़ साफ होता है तो जिंदगी अपने आप लाइन में आने लगती है। स्टेप आर्ट लेगसी प्लस डिसीजन स्पीड सिर्फ अमीर मत बनो। ऐसा इंसान बनो जिसे दुनिया याद रखे। दोस्तों, यहां आकर असली फर्क शुरू होता है। यह वो [संगीत] स्टेप है जो आपको 95% लोगों से अलग करता है। क्योंकि पैसा कमाना एक अचीवमेंट है। लेकिन लेगसी बनाना एक जिम्मेदारी। दुनिया में बहुत लोग आए जिन्होंने पैसा कमाया, घर, गाड़ी, नाम बनाया और फिर चुपचाप चले
गए। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हुए जो चले गए फिर भी आज जिंदा हैं। अपनी सोच, अपने असर और अपने फैसलों की वजह से। लेगसी का मतलब है आपके जाने के बाद भी आपका असर जिंदा रहे। आपने कितने लोगों की सोच बदली, कितनों की जिंदगी आसान की, कितनों को रास्ता दिखाया। यही लेगसी है। अब लेगसी की पहली ईंट होती है। डिसीजन स्पीड। ज्यादातर लोग जिंदगी में इसलिए पीछे रह जाते हैं क्योंकि वह फैसले नहीं लेते। वह सोचते रहते हैं, प्लान करते रहते हैं। थोड़ा और सीख लूं, थोड़ा सही टाइम आ जाए, थोड़ा डर कम हो
जाए और इसी इंतजार में मौके निकल जाते हैं। लेकिन अमीर और लीडर लोग एक बात जानते हैं परफेक्ट डिसीजन जैसा कुछ नहीं होता। वह जल्दी फैसला लेते हैं और फिर उसे बेहतर बनाते हैं। गरीब सोच कहती है, गलत हो गया तो अमीर सोच कहती है, सीख लेंगे। यही फर्क है। अब जरा स्टीव जॉब्स को याद करो। उन्होंने परफेक्ट प्रोडक्ट का इंतजार नहीं किया। उन्होंने विज़ देखा, डिसीजन लिया और फिर दुनिया को बदल दिया। लेगसी कभी कंफर्ट ज़ोन से नहीं बनती। लेगसी बनती है रिस्क रिस्पांसिबिलिटी और साहस से और लेगसी का दूसरा हिस्सा है पपस सिर्फ
अपने लिए कमाया गया पैसा जल्दी खत्म हो जाता है लेकिन जब आपकी कमाई किसी बड़े मकसद से जुड़ जाती है तो आपकी एनर्जी आपका डिसिप्लिन और आपकी कंसिस्टेंसी अपने आप बढ़ जाती है। आप सिर्फ अपने लिए नहीं एक कॉज के लिए काम कर रहे होते हो। और आखिरी बात लेगसी अकेले नहीं बनती। आपको ऐसे सिस्टम्स बनाने होते हैं जो आपके बिना भी काम करें। ऐसे लोग तैयार करने होते हैं जो आपकी सोच को आगे बढ़ाएं ताकि आपकी सोच आपसे आगे जिंदा रहे। आज खुद से एक आखिरी सवाल पूछो। अगर 10 20 साल बाद लोग तुम्हारा
नाम लें तो किस वजह से लें? सिर्फ इसलिए कि तुम अमीर थे या [संगीत] इसलिए कि तुमने कुछ बदला? याद रखो अमीर बनना एक पड़ाव है। लेकिन लेगसी छोड़ना एक पहचान और जो इंसान अपनी जिंदगी को सिर्फ अपने तक सीमित नहीं रखता वही असली मायनों में महान बनता है। अगर यह वीडियो तुम्हें अनकंफर्टेबल लगी है तो समझ लेना यह तुम्हारे लिए ही थी क्योंकि सच हमेशा चुभता है। अब सवाल यह नहीं है कि तुम समझे या नहीं। सवाल यह है अब करोगे या फिर कल कहकर छोड़ दोगे? याद रखो कल कभी नहीं आता। मिलते हैं
अगले वीडियो में। धन्यवाद।