नमस्कार दोस्तों हमारे यूनिवर्स के बारे में शायद सबसे कमाल की बात है इसका साइज कि यह ब्रह्मांड कितना अनइमिनेबली बड़ा है लेकिन यही बात शायद सबसे निराशाजनक भी है खुद ही सोच कर देखो अगर आज हम अपने पावरफुल टेलिस्कोप्स का इस्तेमाल करके धरती जैसा एक और प्लनेट ढूंढ भी लेते हैं किसी गैलेक्सी में जो इंसानों के लिए रहने लायक हो वहां तक पहुंचने में सदियां लग जाएंगी इनफैक्ट किसी भी एक इंडिविजुअल इंसान के लिए यह गैलेक्सी छोड़कर जाना इंपॉसिबल है आप सब जानते हैं कि धरती मिल्की वे गैलेक्सी में है और मिल्की वे के जो सबसे करीब गैलेक्सी है वो है एंड्रोमीडा गैलेक्सी अप्रोक्सिममेटली 2. 5 मिलियन लाइट इयर्स दूर है धरती से तो अगर हम एक स्पेसक्राफ्ट का इस्तेमाल करें वहां तक जाने के लिए यूजुअल स्पीड होती है एक स्पेसक्राफ्ट की 28,000 कि. मी प्रति घंटा इस स्पीड से वहां तक जाने में 94.
5 बिलियन इयर्स लग जाएंगे इतना ही नहीं अगर किसी तरीके से हम टेक्नोलॉजी बना लेते हैं लाइट की स्पीड पर ट्रैवल करने की तो भी वहां पर पहुंचने में 2. 5 मिलियन इयर्स का समय लग जाएगा यह बात सही मायनों में निराश कर देने वाली है आखिर क्या तुक बना यह सारे प्लनेट्स ढूंढने का जब हम वहां पर कभी ट्रैवल ही नहीं कर पाएंगे लेकिन अगर एक शॉर्टकट रास्ता हो गैलेक्सी के बाहर तक ट्रैवल करने का एक ऐसा शॉर्टकट जिसके जरिए हम यह मिलियन लाइट इयर्स का सफर कुछ महीनों में ही तय कर लें तब यह बातें जरूर दिलचस्प बन जाती है यह शॉर्टकट्स हैं दोस्तों वार्म होल्स साल 2014 की फिल्म इंटरस्टेलर मेरी फेवरेट स्पेस फिल्म एक बार फिर से मैं यहां इसका मेंशन करना चाहूंगा इस फिल्म में दिखाया गया है कि कूपर और उनकी टीम जब धरती छोड़कर निकलती है और हैबिटेबल प्लेनेट्स की तलाश में धरती जैसे ही और प्लेनेट्स की खोज में तो वह दूसरी गैलेक्सी में ट्रैवल करते हैं अपनी गैलेक्सी से दूसरी गैलेक्सी में वो पहुंचते हैं एक वार्म होल के जरिए कुछ ही मिनटों के अंदर यह फिल्म का वो सीन है जब कूपर की टीम वार्म होल से गुजरती है फिल्म के अनुसार इस वार्म होल को डिस्कवर किया गया था सैटर्न के ऑर्बिट के पास नासा के द्वारा इसे फिल्म में कई बार मेंशन किया जाता है क्योंकि आगे चलकर यह फिल्म के प्लॉट में एक बड़ा इंपॉर्टेंट रोल निभाता है लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह है कि वार्म होल्स का यह कांसेप्ट कोई साइंस फिक्शन नहीं है बल्कि असल साइंस पर बेस्ड है क्या होते हैं वार्म होल्स एक्जेक्टली और कैसे हम इसका इस्तेमाल कर सकते हैं यह सब समझने से पहले हमें वापस आना पड़ेगा आइंस्टाइन की थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी पर इसकी बात मैंने ब्लैक होल्स वाले वीडियो में भी करी थी और बेसिक कांसेप्ट भी समझा दिया था उस वीडियो में अब थोड़ा और डीप चलते हैं इसके अंदर जब अल्बर्ट आइंस्टाइन ने अपनी थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी लिखी तो इसे एक सेट ऑफ इक्वेशंस में लिखा था इन इक्वेशंस के सेट को आइंस्टाइन फील्ड इक्वेशंस करके पुकारा जाता है पहली बार इन्हें पब्लिकली रिवील किया गया था 25 नवंबर साल 1915 में जब आइंस्टाइन ने अपना पेपर सबमिट किया था टू द प्रशियन एकेडमी ऑफ़ साइंसेस बर्लिन जर्मनी में टोटल में ये फील्ड इक्वेशंस 10 अलग-अलग इक्वेशन से बनती हैं 10 नॉन लीनियर पार्शियल डिफरेंशियल इक्वेशंस लेकिन इन्हें शॉर्ट में एक इक्वेशन से भी रिप्रेजेंट किया जा सकता है और वो एक इक्वेशन कुछ ऐसी दिखती है कैपिटल g म्यू + लैम्ब्डा छोटा g म्यू = 8πg / c द पावर 4 और t मμ चिंता मत कीजिए इस वीडियो में हम मैथमेटिकल डिटेल्स में नहीं जाएंगे क्योंकि इस एक इक्वेशन के अंदर बहुत बहुत ज्यादा कॉम्प्लेक्सिटी है अगर इसे एक्सपैंड करते हो इस एक इक्वेशन को तो देखो कैसी ये स्टेप्स दिखती हैं अगर आप मैथ्स से प्यार भी करते हो तो भी आपका सर चकरा जाएगा यह देखकर मोटे-मोटे तौर पर यह इक्वेशंस हमें बताती हैं कि मैटर और एनर्जी कैसे स्पेस टाइम के कर्वेचर को इन्फ्लुएंस करते हैं अल्बर्ट आइंस्टाइन ने कहा था इस चीज को विजुअलाइज करने के लिए इमेजिन करो एक बड़ा सा मेश है इस मेश के ऊपर जब आप ऑब्जेक्ट्स रखते हो यह वजन से नीचे बेंड डाउन हो जाता है जो स्पेस टाइम का मेश है वो भी कुछ इसी तरीके से बेंड हो जाता है कर्व हो जाता है बड़े-बड़े प्लनेट्स और स्टार्स के वजन से जितना ज्यादा ग्रेविटेशनल फोर्स होगा किसी प्लनेटरी ऑब्जेक्ट का उतना ही ज्यादा यह स्पेस टाइम का मेश कर्व हो जाएगा उनके अराउंड अब इंटरेस्टिंग बात यह है कि अल्बर्ट आइंस्टाइन खुद से अपनी फील्ड इक्वेशंस को पूरी तरीके से सॉल्व नहीं कर पाए थे उन्होंने बस एक अप्रोक्समेट सॉल्यूशन निकाला था अपनी इक्वेशन का एक स्पेसिफिक केस में पहले इंसान जिन्होंने इन फील्ड इक्वेशंस को सॉल्व किया था वो थे कार्ल श्वथ्स चाइल्ड साल 1916 में इन्होंने एग्जैक्टली कैलकुलेट किया कि यह स्पेस टाइम का कर्व कितना बेंड होता है कैसे बेंड होता है एक सिंगल बॉल ऑफ मास के कि केस में यह कार्ल शॉट शाइल्ड का ही सॉल्यूशन था जिसकी मदद से साइंटिस्ट समझ पाए सिंगुलैरिटी के कांसेप्ट को क्या होगा अगर यह मास इनफाइनाइटली डेंस बन जाए स्पेस टाइम का कर्वेचर इसके अराउंड इतनी टाइटली रैप हो जाएगा कि ये जो रीजन है यह बाकी यूनिवर्स से पूरा पिंच ऑफ हो जाएगा इसी की वजह से ही साइंटिस्ट ब्लैक होल के कांसेप्ट को थ्योरेटिकली प्रूफ कर पाए और यह चीज आज से 100 साल पहले ही हो गई थी एक्चुअली में कई दशकों बाद जाकर साल 2019 में ही पहली बार था कि साइंटिस्ट ने एक ब्लैक होल की फोटो ली हो तो मोटे-मोटे तौर पर बात मैं यह कहना चाह रहा हूं कि इन फील्ड इक्वेशंस का एक सॉल्यूशन ब्लैक होल्स निकला था थ्योरेटिकली हम ब्लैक होल्स की एकिस्टेंस के बारे में ऑलरेडी जानते थे उनके डिस्कवर होने से करीब 100 साल पहले और बात यह है दोस्तों कि इन्हीं फील्ड इक्वेशंस का एक और सॉल्यूशन है वार्म होल्स आप शायद सोचोगे कि एक इक्वेशन को सॉल्व करके ये दो-दो सॉलशंस कैसे निकल रहे हैं मैं कहूंगा याद करो स्कूल में क्वाड्रेटिक इक्वेशंस पढ़ी थी इस सिंपल सी इक्वेशन के भी दो सॉलशंस हैं x = 2 और x = 3 दोनों फिट बैठते हैं तो आइंस्टाइन की ये फील्ड इक्वेशंस देखो तो ये तो कहीं ज्यादा और कॉम्प्लिकेटेड है इनके एक्चुअल में ढेर सारे सॉलशंस हो सकते हैं वार्म होल एक सॉल्यूशन है और इसका साइंटिफिक नाम है वार्म होल के सॉल्यूशन का आइंस्टाइन रोजन ब्रिज यह नाम आता है अल्बर्ट आइंस्टाइन और उनके असिस्टेंट नेथन रोजन से जिन्होंने साथ में मिलकर इस सॉल्यूशन को निकाला साल 1935 में तो वार्म होल्स को समझना बड़ा आसान है यह बेसिकली एक शॉर्टकट रास्ता है जो स्पेस टाइम के दो पॉइंट्स को कनेक्ट करता हो पहले मैं आपको चीजें टू डायमेंशंस में समझाता हूं ताकि आपके लिए समझना आसान हो इस पेपर को देखिए इस पेपर पर दो पॉइंट्स हैं ए और बी अगर आपको पॉइंट ए से पॉइंट बी तक जाना है सबसे छोटा रास्ता इस्तेमाल करके कौन सा रास्ता हो सकता है वो डायरेक्ट स्ट्रेट लाइन जो A और B को कनेक्ट करती हो है ना टू डायमेंशंस में इससे छोटा रास्ता और कोई नहीं हो सकता एक्सेप्ट ये जो स्ट्रेट लाइन दोनों पॉइंट्स को कनेक्ट कर रही है लेकिन अगर हम इस टू डायमेंशनल मेश को थ्री डायमेंशंस में बेंड कर दें तो अचानक से आप देखोगे कि नए रास्ते निकलते हैं मैंने यहां पर ए और बी को इस तरीके से बेंड कर दिया है कि अब अगर आपको सबसे छोटा रास्ता चूज़ करना है A से B जाने के लिए तो आप डायरेक्टली ये कुछ मिलीमी का जो डिस्टेंस बचा है A और B दोनों के बीच में इस डिस्टेंस को आप यूज कर सकते हैं और यहां अगर मैं एक रास्ता बना दूं इन दोनों के बीच में लिटरली एक पेन डालकर तो एक शॉर्टकट रास्ता निकल गया है ए से बी तक जाने का जो बहुत बहुत छोटा है एस कंपेयर टू ये वाला रास्ता वार्म होल्स भी यही काम कर रहे हैं हमारी थ्री डायमेंशनल दुनिया में हमें लगता है मिल्की वे गैलेक्सी से एंड्रोमीडा गैलेक्सी तक जाने का सबसे छोटा रास्ता है 2.