ओम श्री परमात्मने नमः ओम श्री परमात्मने नमः ओमकार मंत्र ओमकार मंत्र गायत्री छंद गायत्री छंद परमात्मा ऋषि परमात्मा ऋषि अंतर्यामी देवता अंतर्यामी देवता ईश्वर आनंद प्राप्ति अर्थे ईश्वर आनंद प्राप्ति अर्थे ईश्वर प्रीति प्राप्ति अर्थे ईश्वर प्रीति प्राप्ति अर्थे जपे विनियोग जपे विनियोग हरि ओम ओम ओ ओ ओ ओ ओ ओम ओम ओ ओम ओम ओम ओम ओ ओ ओ ओम ओ ओ ओ ओ ओ ओम ओम ओम ओम ओम ओम [संगीत] ओ हरि ओम ओम ओम ओम ओम ओम ओम ओम ओम ओम ओम ओम ओम ओ ओ ओ ओ हरि ओम ओम ओम ओम ओ
ओम ओम ओम ओम ओम ओम ओम म ओम ओम ओ ओ म म म हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ह हरि ओम हरि ओम हरि ओ हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि
ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम आनंद ह ईश्व बल हमारे साथ ईश्वर का नाम हमारे साथ है ईश्वर की कृपा हमारे साथ है हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि [संगीत] ओम पाप ताप हर लेता है अपनी कृपा और सामर्थ्य भर लेता है रोजी रोटी की फिक्र मत करो मेरा क्या हो फिक्र मत करो बेटे का क्या होगा फिक्र छोड़ दो ईश्वर के चरणों में समर्पित कर दो सारी फिकर हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओ [संगीत] हरि ईश्वर के दरबार में राजा के दरबार में
उस राज दरबार में मौज ही मौज है ह ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम ह हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि [संगीत] [संगीत] ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम ह हरि ओम आनंद है हरि की मस्ती है हरि की हस्ती है लीलाम कर ले सुस्ती हरि नाम की पी ले मस्ती मस्ती का नाम है तंदुरुस्ती भैया हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि हरि हरि हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरे ह आनंद है हरे हरे ह नाम जपत मंगल दिशा दशा
हू नाम जपने से दशो दिशा में मंगल होता है रक्त के कण मंगलमय होते हैं चित् मंगलमय होता है रोजी रोटी की फिक्र मत कर फिकर फेंक कुए में बेटे का क्या होगा नौकरी का क्या होगा तू तो हरि का हो गया हरि जाने उसकी लीला जाने तू तो मस्त हो जा हरि ओम हरि ओम हरि आनंद है माधुर्य [संगीत] है हर रोज खुशी हर दम खुशी हर हाल खुशी जब साधक मस्त प्रभु का हुआ तो फिर क्या दिलगिरी [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] बाबा हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि
ओम हरि ओम ह ह हरि ह हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम प्रभु ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओ हरि ओम हरि ओम हरिओ हरि ओम हरि ओ हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओ हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओ प्रभु ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि आनंद है रग रग पावन हो गई है रक्त का कतरा कतरा हरि नाम से पावन हो रहा है हृदय कमल खिल रहा है हृदयेश्वर
परमात्मा का आनंद आ रहा है परमात्मा की कृपा और माधुर्य महक रहा है चित्त में बोतल की शराब तू दूर हट ह बोतल वालों को बोतल की शराब मुबारक हो हमें तो हरि नाम की मधुमय प्यारिया ही पावन कर रही है हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम [संगीत] हरि ह ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि हरि ओ हरि ओ हरि हरि ओ हरि हरि ओ हरि आनंद है मस्ती है हरि की हस्ती है कलयुग केवल हरि गुण गाह कलयुग में केवल हरि गुण गाओ गावत नर
पाव भव था हरि गुण गाते ही भव बंधन का थाह किनारा पा लेता है कलयुग केवल नाम आधारा जबत नर उतरी सिंधु पारा हरि ओम हरि ओम हरि ओम न दवे है [संगीत] दीक्षा की चिंता है ना द्वेष ना शिक्षा ना दीक्षा ना राग ना द्वेष बस हरि भले हरि की मस्ती भली प्रभु तेरी जय हो ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि हरि ओम हरि ओ हरि ओ हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि आनंद है दिल की खुशियां पाप मिटने से आती
है हृदय अगर प्रसन्न हो रहा है तो समझ लो पाप मिट गए हैं और प्रभु राजी हो गए हैं ओम हरि ओम प्रभु ओम हरि ओम हरि ओम हरि [संगीत] ओम हरि ओम हरि ओम हरि [संगीत] ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ह हरि हरि हरि ओ हरि हरि हरि हरि हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम ह हरि ओम हरि ओम हरि ओम हरि ओम ह हरि ओम हरि
ओम हरि ओम ओम ओम ओम ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओम ओम हरि ओम [संगीत] हृदय कमल खिल रहा है अंतर्यामी की प्रसन्नता प्राप्त हो रही है हरि ओम ओम ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ ओ हरि ओम ओम ओम ओम ओ [संगीत] आठ द आज की नौकरी की ऐसी तैसी राज्य की ऐसी तैसी ऐसा कुदरत रंग बदल देती आए थे काच का टुकड़ा लेने को लेकिन हीरों की भी ऐसी त आए थे संतों के पास संसार का जरा ऐसा कर दो जरा ऐसा हो जाए जरा बेटे की शादी हो जाए
जरा बेटी की शादी हो जाए जरा दुकान चल जाए जरा यह हो जाए आए थे कंकड़ पत्थर लेने को लेकिन हीरों की भी ऐसी तैसी ऐसा आत्म हीरा मिल जाता [संगीत] है 10 प हजार की नौकरी क्या होती ईश्वर की सत्ता के आगे प्राइम मिनिस्टर पद क्या होता है तुम्हारा धंधा नौकरी क्या होता है मेट कठिन कु अंक भाल के भाग्य के कु अंक भी मिट जाते तो और क्या बात बेटे की शादी हो जाए फिकर फेंक कुए में बेटी की शादी हो जाए फिकर फेंक कुए में है बाबा मेरी बेटी की शादी हो जाए
मेरे बेटे की शादी हो जाए अरे हम तो तुम्हारी शादी कराना चाहते हैं बोले बाबा हमारी शादी तो हो गई हम तो बुड्ढे हो गए अरे शादी हुई शरीरों के साथ हम उसके साथ शादी कराना चाहते शद आबाद कर दे उस परमात्मा के साथ हर रोज खुश हर रोज इबादत बाजी है हर रोज नई एक शादी है हर रोज मुबारक बाजी है हर रोज नई एक शादी है जब आशिक मस्त फकीर हुआ तो फिर क्या दिलगिरी बाबा नई मस्ती नया आनंद जैसे भगवान पुराण पुरुषोत्तम सूर्य बड़े पुराने फिर भी हर रोज नई सुबह है ऐसे
हर रोज नया आनंद नया ज्ञान नया माधुरी हम तो ऐसी शादी तुम्हारी कराना चाहते बाबा हम तो बुड्ढे बन ग अरे बुड्ढों की शादी होती है जवानों की भी होती है नारायणा हरि नारायण हरि जैसे आंधी से बादल भाग जाते हैं ऐसे दृढ़ मनोबल दृढ भगवत जप ध्यान एक नौकरी धंदा शादी नहीं चाहे तो भी हो जाती हम तो भाग रहे थे नहीं चाहते थे तभी भी हो गई शादी नारायणा हरि नारायण बेटी की शादी नहीं होती आशीर्वाद करो अरे शादी के लिए आशीर्वाद क्या बेटी की शादी हो जाए हम तो तुम्हारी शादी चाहते हैं
बटी की तो अपने आप हो जाएगी बेटे की शादी हो जाए मेरा ये हो जाए मेरा वो हो जाए ये क्या मांग रहे थे कंकड़ पत्थर और हीरे भी तुच्छ हो जाए ऐसा खजाना भगवान और गुरु के द्वार पर पड़ा है तो काहे घबराए काहे शर्म आए पकड़ो हां जी मुंह पर बैठी मक्खी जरा से हाथ के इशारे से उड़ जाती है ऐसे ही चिंता क्लेश दुख मुह प बैठी हुई मक्खी हाथ के इशारे से हाथ मारना नहीं पड़ता यूं कर तो तोड़ जाती है ऐसे ही दुख क्लेश चिंता संतों के सानिध मात्र से यूं
उड़ जाती है काहे चिंता करत हो भैया मुर्दे को प्रभु देता है कपड़ा लकड़ा आग जिंदा नर चिंता करे उसके बड़े अभग चिंता किस बात की है आज तक जो हो गया देख लिया जो हो रहा है व देख रहे जो होगा देखा जाएगा हम भले हमारे राम भले और जो राम का हो गया उसको फिर उसकी रोजी रोटी की चिंता वो काहे करे राम की इज्जत का सवाल है अब तो भगवान की इज्जत का सवाल है हम भगवान के हो गए तो फिर यह सोच नहीं सकते थे कि इतना मिल जाएगा मोटेरा वाले से
भगवान में जीते भगवान में रह सोते भगवान में खाते पीते और भगवान में लीन होने वाले लेकिन जानते नहीं कि यह भगवान है जैसे पक्षी आकाश राशि में रहते हैं मछली जल राशि में जलचर जल राशि में रहते ऐसे ही हम भगवत राशि में रहते शास्त्र में तो ऐसी सी बढ़िया बात आती है कि मेरे को तो इस उम्र में पता चल रहा है य 60 55 साल में पता चल रहा है कि अपने नाभी आकाश में भगवान की पूजा होती रुई से हल्का सा नाभी को साफ कर दे एक दिन दूसरे दिन घी की
बूंद से य वैश्वानर भगवान अग्नि देव है उनको मैं भोग लगा तीसरे दिन त्रिफला से लगा चौथे दिन व जो पाचक तत्व उससे भोग लगा रोग भी मिटेंगे भूख भी खुलेगी और फुर्ती भी आएगी और आकाश की तरफ एक टक देखे जो रस आएगा तो संसार का रस फका हो बाप रे कितनी सरल उ वासना साधना और एक टक आकाश को देखते जा तो मन शांत हो जाएगा फिर मनोवांछित फल भी प्राप्त आपको तो हो जाएगा लेकिन आपके नाम की कोई मनती मानते उनके भी काम होने लगते बोलो आपके अंदर इतना सामर्थ्य भरा है कि
आपके नाम की कोई मनती मानते उनके भी काम होने लगते फिर काहे को घबराए एमए कर लिया एमडी कर दिया मिस कर दिया आखिर क्या बस थोड़ा सा ईश्वर में विवेकानंद बोलते थे कि मुझे अगर फिर से पढ़ने का अवसर मिले तो मैं दो विषय पढ़ूंगा बस एक तो भगवान में एकाग्रता और दूसरा आसक्ति का अभाव स्वार्थ रहित सत्कर्म बस जैसे चादर का एक दो छेड़ा हाथ में आ गया तो पूरी चादर अपनी है अनासक्ति और एकाग्रता दो चीज बस अनासक्ति और एकाग्रता भगवन नाम जपने से हृदय पवित्र हो एकाग्र हो जाए जप करते और
आसक्ति रहित परोपकार बस फिर देखो कैसे जिसको उन्नत होना हो चाहे भौतिक जगत में चाहे आदि देविक में चाहे आध्यात्मिक जगत में बस दो सूत्र एकाग्रता और अनासक्ति परोपकार पर सर धर्म नहीं भाई जितना हो सके अपने द्वारा परोपकार परोपकार द्वेष नहीं भोग वासना शरीर को ज्यादा सजाना दजाना शरीर स्वस्थ रहे मन प्रसन्न रहे बाकी परोपकार सतक लोगों को भगवान के रास्ते लगाने में संत और समाज के बीच सेतु बनने का पुण्य तो बहुत भारी ईश्वर और समाज के बीच निमित बनना यह तो बड़ी भारी भारी में भारी चीज हमारे गुरुदेव 80 80 साल के
थे 85 84 86 साल के 90 साल फिर भी देशा रटन करके बांटते थे कृपा तभी तो हम लोगों को मिला अगर वो नहीं विचरण करते उनकी उदारता थोड़ी भी 192 होती तो हम लोगों का क्या हाल होता कैसा गुरु महापुरुष लोग को उन्नत करते हैं सच्चे महापुरुष हमारे साई लीलाशाह जीी ने आहा कितना लोक मांगल्य किया कितना परोपकार मय जीवन था छोटे से छोटे व्यक्ति को भी ऊपर उठाते बड़े से बड़े व्यक्ति को भी ऊपर उठाते उनकी नजर में चाहे कोई भी आ जाए एकांत में रहते तभी भी चुकते नहीं थे सेवा कार्य कोई
भगत आता उसका सामान उठाकर कोई आ गया मजदूर तो मेरे को बापू जी महंत बोलते थे मेरे गुरु जी विनोद अरे महंत को बलाओ महंत महंत इसको बांध लो मैं कहा अभी रसा लाया तो बोला नहीं बाबा नहीं बाबा नहीं तो मैं तो मजूरी के लिए आया इनका सामान उठा के नहीं हम तो उनको बांध देंगे ठहरो तुमको बांधते तो एक दो सेवक दूसरा खड़ा हो जाता था तो तो मजूर डर जाता था इतने में बापू मिठाई कापड़ी काले आते बोले देखो बांधने को आता है या तो मिठाई खा नहीं तो बांध देगा मिठाई खाएगा
कि बांधे वो तो बोले बाबा मिठाई खाऊंगा बोले ले जा लीशा की मिठाई अभी खाके देख थोड़ी घर ले जा शाम को भी खाना रात को भी खाना लाशा की मिठाई मीठी लगे मीठे नहीं तो वापस मजूर को खुश कर देते हैं आनंद दे देते लाशा की मिठाई रात को भी खा के देख मीठी लगेगी अब दो अर्थ होते हैं एक तो जो बाहर के मजदूर समझे का यह मिठाई तो रात को भी मीठी लगेगी अरे बापू की जो सत्संग की मिठाई जो सत मार्ग है जो दर्शन परशन रात को भी महापुरुष का स्मरण करो
तो मधुरता है उनका ज्ञान चाहे कैसी भी जगह पर उनका सानिध्य हो मानसिक माधुर्य है हर रोज खुशी हर दम खुशी हर हाल खुशी जब साधक मस्त गुरु का हुआ तो फिर क्या दिलगिरी बाबा अब दिलगिरी नहीं करना है मां है तो बेटे की चिंता छोड़ दे बाप है तो बेटी की चिंता छोड़ दे तुलसी भरोसे राम के बोलो पक्का कराओ भरोसे राम के तुलसी भरोसे राम के तुलसी भरोसे राम के निश्चिंत होई सोय निश्चिंत होई सोय अन होनी होनी नहीं अन होनी होनी नहीं होनी होए सो होए होनी होए सो होए तुलसी भरोसे राम
के तुलसी भरोसे राम के पक्का करो तुलसी भरोसे राम के तुलसी भरोसे राम के लिख लिया सरल है तुलसी भरोसे राम के तुलसी भरोसे राम के निश्चिंत होई सोय चिंत होई सो अन होनी होनी नहीं अन होनी होनी नहीं होनी होए सो होए होनी होए सो हो कबीर जी का लिखो मेरो चिंत होत नहीं मेरो चिंत होत नहीं हरि चिंत्य सो होए हरि चिंत सो हरि चिंत्य हरि करे हरि चिंत हरि करे मैं रहू निश्चिंत मैं रहू निश्चिंत जीवन के जो महत्त्वपूर्ण काम है वो सब भगवत सत्ता से ही होते रहते आप भोजन पचाने की
चिंता करते क्या गेहूं उगाने की सब्जी उगाने की उनको विटामिन लेने की कोई चिंता करते क्या सूरज उगाने की बरसात बरसाने की रक्त वाहिनी में रक्त बहाने की चिंता कर करते क्या शवास लेने की चिंता करते हैं क्या जब नाक में कुछ हो जाता है तो मैं करूं ऐसी चिंता करते क्या हो जाता है ऑटोमेटिक जमाई लेने की चिंता करते हैं क्या आ जाते हैं आ करके खाना पचाने की चिंता नहीं करते तो जब इतने सारे काम ईश्वर की सत्ता से होते रहते तो बाकी जरा सी बात में अपने अहम को क्यों बिचारे को एक
नई शादी किया था पहली बार ससुराल जा रहा था पत्नी माय के थी मां ने कहा बेटा बहुरानी के लिए ले जा जरा माजन बाजु ससुराल जा रहा है एक गांव से दूसरे गांव ससुराल होता है पांच सात कोस का रास्ता था सात कोस मतलब 14 मील 25 किलोमीटर मान लो मां ने कुछ सामान दिया और अपना बरी बिस्तर था घोड़े पर जाते जाते उसने सोचा कि गर्मी के दिन मैं भी कितना निर्दय हूं एक तो मैं बैठा हूं फिर घोड़े पर इतना सामान आ व उतरा कहीं थला था सारा सामान उठाया कुछ तो पीछे
बांधा कुछ आगे बांधा कुछ सिर पर रखा और धीरे से चबूतरे से ब घोड़े पर बैठ गया घोड़े का सारा बोजा अपने सिर पे लाद दिया अब चलते चलते तो भाई गर्दन की क्या हालत हुई होगी कल्पना करो पीठ देवी का क्या खबर आ गई होगी और पेट महाराज ने कैसी तौबा पुकारी होगी बतर लटक लटक पट सेथ से करते करते ससुराल के घर तक पहुंचा सर साल ने देखा यह कौन सा रूप है जमाई राज बोले बाद में बात करेंगे खटिया यहां बिछा बोले नहीं अ पताल में बछाव स तो जराज ये क्या कर
लिया है बोले क्या करे बेचारे घोड़े पर मैं तो बैठा इतना सारा भोजा उस पर कैसे लाद सकता हूं सारा अपने पर लाद लिया है फिर भी तो घोड़े पर ही है ऐसे ही सारा का सारा बोझा ईश्वर रूपी घोड़ा ले रहा है तो काय को अपने सिर प इधर उधर माता है जब बेटी बेटे की शादी होने वाली होगी तो छू हो जाएगी नहीं तो तू लाता फिर कभी-कभी आप जो काम के लिए चिंता करते वो नहीं होता जब छोड़ देते तो ऐसे हो जाता अरे ये तो इतना हो गया ऐसा हो गया अरे
माली सीचे स घड़ा ऋतु आए फल होई इसलिए तुलसी भरोसे राम के तुलसी भरोसे राम के निश्चिंत होई सोए निश्चिंत होई सो अन होनी होनी नहीं अन होनी होनी नहीं रावण चाहता था कि ऐसी हो तो हुआ क्या रावण चाहता था ऐसा हो जाए तो अनहोनी तो हुई क्या रावण की सिकंदर चाहता था ऐसा सब हुआ क्या हिटलर चाहता था ऐसा सब हुआ क्या हम जो कुछ चाहते हैं वह सब होता नहीं है और जो कुछ होता है वह सब भाता नहीं और जो भाता है वह टिकता नहीं इसी का नाम दुनिया है बोलो जो
चाहते हैं वह सब कुछ होता नहीं जितना होता है वह सब भाता नहीं और जितना भाता है वह टिकता नहीं है बोलो फिर निश्चिंत हुए बिना झक मार के निश्चिंत का रास्ता लेना पड़े चिंता छोड़नी पड़ेगी चिंता ऐसी डाकिनी लिखो ऐसी डाकिनी चिंता ऐसी चिंता ऐसी डाकिनी काट कलेजा खाए काट कलेजा खा वैद बिचारा क्या करे वैद बिचारा क्या करे कहां तक दवा खिलाए कहां तक दवा खिलाए चिंता ऐसी डाकिनी चिंता ऐसी डाकिनी काट कलेजा खाए काट कलेजा खाए वैद बिचारा क्या करे वैद बिचारा क्या करे कहां तक दवा खिलाए नत दवा ये तो है
कबीर जी की साखी अब मिलावट का जमाना है मैंने थोड़ी मिलावट कर ली चिंता ऐसी डाकिनी चिंता ऐसी डाकिनी काट कलेजा खाए काट कलेजा खाए बाप बिचारा क्या करे बाप बिचारा कहां तक कथा सुनाए कहां तक कथा सुनाए तू भी पढ़ ले अपना नियम पूरो कर ले तो थारा मन रि काड ले भाई ईश्वर में सुख बुद्धि होनी चाहिए संसार से सुख लेने की हमारी जो आदत है वह हमें बुरी तरह दुख में डाल देती है संसार से सुखी होने में जो फंसे हैं वह अपने लिए दुख का कुआ खोद रहे हैं वह पागल है
संसार में और सुखी रहना शादी करके सुखी हो जाऊंगा बेटा करके सुखी हो जाऊंगा बहु लाकर सुखी हो जाऊंगा पैसे इकट्ठे करके सुखी हो जाऊंगा तो जिन्होंने कर लिया कौन से जख मार ली देख लो तुम्हारे सामने है चुनाव लड़कर सुखी हो जाऊंगा जीतक सुखी हो जाऊंगा क्या आज तक जीते हुए में कितना सुख टिका है पूछ के देखो गुजराल से नरसिंहराव से देवे गड़ा से बीपी सिंह से और भी जो है अभी अटल जी से ही पूछ के देखो कितना सुख आपके पास है हमसे कोई पूछे तो हम तो कहेंगे ढेर सुख है मेरे
पास और वो सुख सबके पास छुपा है प्रधानमंत्री बनने में सुख नहीं छुपा परमात्मा में अपनी मैं मिलाने में सुख छुपा है कंगाल बनने में भी सुख नहीं अमीर बनने में भी सुख नहीं विद्वान बनने में भी सुख नहीं और अनपढ बनने में भी सुख नहीं स्वर्ग में भी शाश्वत सुख नहीं अतल में भी सुख नहीं वितल में भी सुख नहीं स्त्री होने में भी सुख नहीं माया क्या हाल है सुखी हो अगर स्त्री होकर रहने में सुख होता घर में तो इधर का कोई पुरुष होने में भी सुख नहीं नान्य तर होने में भी
सुख नहीं कि को जाओ ढोल बजा जाति नंबर थर्ड में भी सुख नहीं पशु होने में भी सुख नहीं पक्षी होने में भी सुख नहीं गंधर्व होने में भी सुख नहीं किन्नर होने में भी सुख नहीं हे राम जी मैं 14 लोकों में घूमा कहीं भी शाश्वत सुख नहीं एक जगह दिखा जहां संत का मन ठहरता है उस अंतर्यामी ईश्वर में सुख है [प्रशंसा] बा तालिया तो बजा ली मतलब जब आप सहमत हो तो फिर इरादा पक्का कर लो कि हम अंतर्यामी में गोता मारा करें पक्की बात है [संगीत] [संगीत] [हंसी] और भैस दौड़ती मजा
आवे थोड़ी देर देखने को लेकिन दौड़ाने की तना अंतर्यामी से श्री कृष्ण ऐसी भाषाएं भाषा 64 कला जानते थे पशु पक्षियों की भाषा जानते थे बोलते लेकिन सारी कलाओं का आधार तुम्हारा अंतर्यामी आत्मा है कोई छह कला जानो कोई 10 जानो कोई 20 जानो कोई 25 जान कोई 30 जानता 64 जानने वाला देख लो वह क्या कहता है वह कहता है मम वान सो जीव लो के जीव भूत सनातन तुम मेरे वंशज सनातन चाहे भाषाए जानो चाहे ना जानो लेकिन तुम्हारा आत्मा मेरा एक ट जागृत इस बात को जानने के लिए खड़े हो जाओ जागो
उपदेश तिते ज्ञानम ज्ञानी ना तत्व दर्शना जो मुझे तत्व रूप से जानते ऐसे ज्ञानी महापुरुषों की शरण जाओ वे उपदेश देंगे उसी प्रकार तुम मुझसे ऐसे मिलो जैसे लहर सागर से मिल जाती जैसे घड़े का आकाश महाकाश से मिल जाता है तुम जब संसार से सुख लेने की इच्छा करते हो तब दो पैसे के हो जाते हो दो कोड़ी के हो जाते हो संसार से सुख लेने की इच्छा करते हो ना जितनी इच्छाएं ज्यादा उतना आदमी छोटा जितनी इच्छाएं कम उतना आदमी बड़ा और इच्छा नहीं तो भगवान है कुछ चाहिए बहुत चाहिए तो गदाई कुछ
चाहिए तो खुदाई कम चाहिए तो खुदाई कुछ नहीं चाहिए तो आहा शहंशाही तुर्क दुनिया तुर्क को बा तुर्क मौला तुर्क तुर्क अब तो ईश्वर भी नहीं चाहिए लो स्वर्ग तो नहीं चाहिए चलो तो ईश्वर के लिए स्वर्ग को बलि कर दिया लेकिन जब गुरु कृपा हो गई समझ गए तो ईश्वर तो हमारा आत्मा है जाओ अब ईश्वर भी नहीं चाहिए ओ हो शहनशा हो गए कबीरा मन निर्मल भयो जैसे गंगा नीर पीछे पीछे हरि फिरे कहत कबीर कबीर है है कितनी ऊंचाई तक जा सकते होरे आटा दाल की चिंता फेंको बेटी का क्या होगा बेटे
का क्या होगा मेरा क्या होगा फिकर फेंको अ भी जो है उसमें वर्तमान ईश्वर में आ जाओ बस कहे मरो कहे डरो ओम ओम ओम मैं 72 साल का हूं मैं 75 साल का हूं बिल्कुल झूठी बात है यह तो शरीर 72 साल का तू उसके पहले भी था और बाद में भी बोल कितनी उम्र है मैं 60 साल का हूं ये तो शरीर को मैं बालता है तू तो इतने साल का है कि आज तक कोई गणित पैदा नहीं हुआ जो तेरी उम्र बता दे कोई गणित पैदा नहीं हुआ जो तुम्हारी उम्र बता दे
आज जो हमारो शाश्वत सनातन कब से चले सनातन मैं 60 साल का हूं बेवकूफी से मान लिया 80 का हूं मैं 3 का ये तो पागलों की बात है पागलखाने में रहते इसलिए किसी का कसूर भी नहीं है संत भी पागलखाने की भाषा जानते वो भी बोलते मैं भी 60 का हो गया मैं भी 64 का हो गया मैं भी जवान हो गया मैं भी बुढा हो गया वो भी बोल देते पागल खाने की समाज से आते पागलखाने के बीच रहते हैं पागलखाने से पार होकर जान लेते फिर पागलखाने में आके उन दूसरों को ठीक
करने के लिए खुद भी थोड़ा उसी भाषा में रहते बाकी वह जानते कि हमारी उम्र क्या है उम्र ही नहीं है उम्र का सवाल ही गलत है चेतन की कोई उम्र नहीं होती और जड़ की उम्र तो काल्पनिक है तुम्हारे जो 60 साल देवताओं के 60 दिन भी पूरे नहीं हुए और ब्रह्मा जी के तो 60 स्वास भी नहीं तुम्हारा जो एक साल है बैक्टीरिया के लिए तो ओ हो हो हो हजारों पीढ़ियां हो गई उम्र भी अपनी अपनी कल्पना है सबकी तुम्हारा एक सप्ताह होता है इसमें तो मच्छर और मक्खी और बैक्टीरिया की तो
कई पीढ़ियां बाप दादे मर जाते हैं कई धोते पोते पैदा होक मर जाते हैं जैसे कीड़ी बैक्ट जैसे मच्छर और बैक्टीरिया के आगे आप ब्रह्मा जी हो ऐसे ब्रह्मा जी के आगे तुम्हारी हमारी आयुष्य भी मच्छर जैसी है बैक्टीरिया जैसी बोले भगवान सर्वत्र है फिर थूके का भगवान सर्वत्र तो नाक साफ करे तो नीट कहां फेंके सिंगल डबल कहां करें जो भगवान सर्वत्र है अरे बड़े मिया भगवान सर्वत्र है तो जैसे तुम्हारे शरीर में करोड़ों करोड़ों बैक्टीरिया है वो भी डबल सिंगल थूकते हैं फिर भी तुम में है फिर भी तुम नापाक नहीं होते हो
तो ऐसे परमात्मा की व्यापकता के आगे तुम्हारा शरीर बैक्टीरिया जैसी भी ताकत नहीं रखता इतने भगवान व्यापक है तो क्या भगवान खराब होते यह सवाल गलत है सही में यह है कि जैसे तुम्हारे शरीर में करोड़ों नहीं कई करोड़ अरबों कह दे अरबों अरबों तुम्हारे शरीर में रहते व भी खाते हैं जीते हैं तो खाते हैं जब खाते हैं तो सिंगल डबल नाक य जो भी उनका मसाला है सब का सब आपकी मैं में है तब भी आप तो मैं के रूप में वही के वही शुद्ध रहते हैं जब इतने सारे बैक्टीरिया आपको अपवित्र नहीं
कर सकते नापाक नहीं करते तो तुम परमेश्वर को नापाक कैसे कर सकते परमेश्वर भी ऐसे व्यापक इसलिए च ही मत करो अरे भगवान सर्वव्यापक है एक ननन ने बस सुन लिया कथा सत्संग गडर भगवान सर्वत्र है सर्वत्र है तो रटते पक्का करते ध्यान करते मगज में बात बैठ गई फिर बाथरूम गई तो देखा कि गॉड इ एनीवे तो वापस आ गई फिर बाथरूम ने जोर मारा फिर गई फिर देखा गॉड से नहीं फिर डबल लगा ऐसे तीन दिन तक उसने संभाल रखा सारा मसाला अब वो मसाला तो अंदर तौबा करेगा आप समझते हैं ना मसाला
सुबह जो रोज छोड़ता है सर मसाला जमा हो गया तीन दिन का फिर तो बात आगे बढ़ गई डॉक्टर आए नर्स आई व्ट इज द मैटर व्ट इज द प्रॉब्लम बात होते होते फिर उससे पूछा किसी दूसरे जानकार तो बोले ऐसे ऐसे कोई समझदार ने कहा कि भाई जब वो एनीवे है सब जगह है तो अंडरवेयर के अंदर भी है ना कच्छे के अंदर भी तो है ना कपड़ों के अंदर भी हैब सर्वत्र है तो बाहर है देख लेगा तो अंदर अंदर नहीं सर्वत्र है जो सर्वत्र सत्ता है वह किसी की बाधा नहीं है वह
सबको सत्ता ही देती जैसे आकाश रत तो बाधा नहीं देता सबको ठोर देता है ऐसे ही उसी की लीला से हो रहा है इसलिए दिल खोल के अपना सिंगल डबल जो भी होता है उसकी लीला में होने दो जैसे तुम्हारे अंदर बैक्टीरिया करते नहीं तुम सर्वत्र हो बॉडी में तो बैक्टीरिया यह चिंता करते क्या तुम सर्वत्र हो तो तुम्हारे से बाहर जाकर वो सिंगल डबल करेंगे क्या और तुम्हारे से बाहर तो वो जा सकते लेकिन तुम ईश्वर से बाहर नहीं जा सकते हा बैक्टीरिया तो तुम्हारे से बाहर जा भी सकते तुम ईश्वर से बाहर नहीं
जा सकते क्योंकि तुम तो परि चिन्न हो और बैक्टीरिया बाहर जा सकते बाहर के आ सकते लेकिन ईश्वर में य गुंजाइश नहीं है कि ईश्वर से बाहर कोई जाए और ईश्वर से के अंदर कोई आए ऐसा नहीं जैसे आकाश से बाहर कोई जा सकता है क्या कितना भी बढ़िया फास्ट रॉकेट बनाओ आकाश को छोड़ के जाएगा सब आकाश में हजारों माइल की गति वाले जहाज भगाओ आकाश को छोड़कर नहीं जा सकते सब आकाश ऐसे ही सब परमेश्वर स आकाश में ऐसे भगवान व्यापक है और वही अंतर्यामी आपके हृदय में वही के वही हृदय इसीलिए उसका
अनुभव करता है इसलिए हृदय की कीमत है मनुष्य जीवन में उसका ज्ञान आप धारण कर सकते इसलिए मनुष्य जीवन सबसे बड़ा कीमती माना