ट्स इंटरेस्टिंग आप यही कहने वाले हो क्योंकि इस वीडियो में आप बहुत सारे अमेजिंग फैक्ट्स को जानोगे जो कि आपको अमेज कर देगी मैं हूं राजेश और स्वागत है आपका फैक्टिस अमेजिंग फैक्ट शो में भाई एक मजेदार सी बात बताऊं वर्ल्ड मैप में भारत से एंटार्कटिका कितनी दूर है जो बर्फीला इलाका है वह कितनी दूर है पर इंडिया ना बहुत अमेजिंग चीजों को एक्सपीरियंस कर चुका है पास्ट में इंडिया कर चुका है मतलब मतलब इंडिया का जो लैंड है मिट्टी उसने बहुत कुछ को अनुभव किया है आप यकीन नहीं करोगे इंडिया और अंटार्कटिका पहले दोस्त
थे फ्रेंड्स थे और हमेशा हाथ मिलाकर चलते थे क्या बोल रहा हूं मैं आप ये सोच रहे होंगे देखो जब इस धरती का फॉर्मेशन हुआ था तब का वर्ल्ड मैप अगर एलियंस के पास आर्काइव में होगा तो वो कुछ ऐसा दिखेगा जिसमें आप देख सकते हो इंडिया यहां पे है दिख रहा है यहां पे छोटा सा और ये अंटार्कटिका से सटा हुआ है और ऑस्ट्रेलिया से भी सटा हुआ है और देखो वक्त ने क्या किया सबको जुदा कर दिया सब्सक्राइब करने के बाद बेल आइकन पे क्लिक करके ये जो ऑल वाला बटन है इसको हमेशा
ऑन रखना ताकि नई वीडियो के नोटिफिकेशन आपको तुरंत मिल जाए फैक्ट नंबर 13 आप लोग सब कोई अपने-अपने फोन के बारे में बोलते होंगे कि मेरा फोन 25 मेगापिक्सल का है और कईयों का 100-100 मेगापिक्सल का होगा मेरे पास भी है 108 वाला पर क्या आपको पता है कि जो वर्ल्ड का पहला कैमरा फोन था कारा vp2 जापान में बना था 199 9 में इसमें जस्ट 0.11 मेगापिक्सल का कैमरा था यानी आप मेरे को देख रहे हो ना तो मैं ऐसा कुछ दिखता विश्व के पहले कैमरे में मतलब यूजलेस एक तरह से लेकिन एक कांसेप्ट
को क्लियर करने के लिए काफी था कि आप फोन से ले सकते हो वीडियो उस टाइम एकदम नोवल कांसेप्ट था ये 1 मेगापिक्सल भी नहीं 0.11 मेगापिक्सल ये क्या है भाई और हां यह बात को तो सबको आप बताते फिरना सबसे बड़ी मिथ जो है कि ज्यादा मेगापिक्सल मतलब अच्छी क्वालिटी वैसा एकदम नहीं है मेरे दोस्त आज से ना आप कभी भी फ्यूचर में फोन लोगे तो ऐसा एकदम मत करना कि मेगापिक्सल देख के ले रहे हो कैमरे का मेगापिक्सल देख के जो लोग फोन लेते हैं वो एक नंबर के छपरी होते हैं क्लियर बोल
दिया अगर lamborghini.com तो वैसे ही फोन में कैमरा अच्छा हो और बाकी सारी टेक्नोलॉजिकल चीजें अच्छी नहीं हो तो कोई फायदा नहीं iphone11 रूम टू रूम थ करते-करते 10 रूम सब रूम आपस में हाथ मिलाकर दोस्ती भरे अंदाज से काम करते हैं अनलाइक अदर फस नहीं तो इस बात को फैक्ट नंबर 12 अभी जो मैं फैक्ट बताने जा रहा हूं इसको ना आप ध्यान से सुनो मैग्नेट में कितने पोल्स होते हैं नॉर्थ पोल साउथ पोल राइट अब अगर मैं आपसे बोलूं क्या कोई ऐसा मैग्नेट हो सकता है जिसका सिर्फ नॉर्थ पोल हो साउथ पोल ना
हो ये बात बड़ी डीप है सुनने में सिंपल लग रहा है लेकिन फिजिक्स के हिसाब से इस दुनिया में दुनिया क्या इस पूरे ब्रह्मांड में ऐसा कोई मैग्नेट हो ही नहीं सकता है जिसमें सिर्फ एक पोल हो नॉर्थ और साउथ पोल हो ही ना ऐसा पॉसिबल नहीं है अकॉर्डिंग टू रूल्स ऑफ नेचर लेकिन जब वैज्ञानिकों ने क्वांटम मैकेनिक्स और हमारे यूनिवर्स के बारे में डीप चीजों को पता किया तो उन्हें एक पार्टिकल के बारे में मालूम चला जिसे कहते हैं मैग्नेटिक मोनोपोटैशियम [संगीत] एक अच्छा सा फैक्ट है सबसे बड़े दो प्लेनेट कौन से हैं जुपिटर
और सैटर्न ठीक है सैटर्न का रिंग है रिंग प्लेनेट है मस्त सा और वो रिंग ह्यूज है उसका रिंग बहुत बड़ा है लेकिन मैंने आपको बहुत पहले एक फैक्ट में बताया था कि नासा एक प्लेनेट को कंफर्म किया है 100% कि हां वो एजिस्ट करता है उसका नाम रखा गया j1407b और ये पता चला कि उसका जो रिंग है वो सैटर्न के रिंग से 200 गुना बड़ा है अब ऐसा न्यूज़ आर्टिकल में छप के आया तो हमें पता नहीं चलता है कि कितना बड़ा है तो मैं आपको एक सिंपल यट अमेजिंग सा इलस्ट्रेशन दिखा रहा
हूं अभी ये देखो ये जो छुटकू सा डॉट देख रहे हो आप ये है सैटर्न प्लेनेट और ये है j1407b हमारा ब्रह्मांड ऐसा है ना कि हमारे लिए तो कोई चीज ह्यूज है लेकिन उस ह्यूज चीज जैसे कि जुपिटर प्लेनेट उसका भी बाप आगे जाके कहीं ना कहीं ब्रह्मांड में है यानी कि जुपिटर से लाखों गुना बड़े प्लेनेट है और अब जो उसका बाप का हमने बात किया उसका भी बाप कहीं ना कहीं है यूनिवर्स में साइज का कोई लिमिट है ही नहीं एक अमेजिंग चीज को पता करो यूनिवर्स में उससे भी अमेजिंग चीज और
आ चुकी होगी गजब यूनिवर्स है हमारा सही में फैक्ट नंबर 10 अपने महान वैज्ञानिक एल्बर्ट आइंस्टाइन को तो कितनी बार देखा होगा पर क्या आपने कभी उनके बहन को देखा है उनका नाम था माजा आइंस्टाइन और वो बिल्कुल आइंस्टाइन की ही तरह दिखती थी ये देखो एल्बर्ट आइंस्टाइन और उनकी बहन आसपास बैठे हुए हैं हालांकि उनकी बहन का आईक्यू भाई की तरह नहीं था लेकिन वो भी इन चीजों में बहुत इंटरेस्टेड रहती थी इन दोनों का बाल कितना सेम लग रहा है है ना लग ही रहा है कि भाई बहन बैठे हैं फैक्ट नंबर नाइन
ये कोई फैक्ट तो नहीं है लेकिन लोग ऐसे बहुत सारे रील्स देख लिए हैं जिसमें ऐसा कुछ लिखा रहता है कि आपके पास सिर्फ दो मिनट होते हैं जीने के लिए लेकिन जैसे आप सांस लेते हो तो वो टाइमर रिसेट हो जाता है ऐसा इसलिए क्योंकि 2 मिनट सांस ना लो तो खत्म पर क्या ये बात सेंस बनाती है सेंस तो बनाती है क्योंकि अगर कोई सांस ना ले तो वो खत्म पर यह तो आपका सबकॉन्शियस माइंड ऑटोमेटिक ही कर रहा है सांस आपको नहीं लेना पड़ रहा है तो एक बहुत डीप और स्टुपिड सी
बात एक सब्सक्राइबर ने मेरे से पूछा अगर हम सांस को कॉन्शियसली कंट्रोल करने का आदत डाल दिए क्या अब खुद सांस लेने का आदत तो क्या कभी छोड़ें तो ऐसा हो जाएगा कि फिर सांस ही नहीं लिया जाएगा क्योंकि ऑटोमेटिक सांस चलने वाला आदत तो खत्म क्योंकि हम ली कंट्रोल कर रहे हैं क्या ऐसा बॉडी में संभव है तो विज्ञान कहता है ऐसा बॉडी में बिल्कुल संभव नहीं है आप सांस के साथ कितना भी छेड़छाड़ करो ब्रेन जो है यह सांस को हमेशा चलाते रहेगा फैक्ट नंबर एट अभी जब लास्ट टाइम छठ पूजा था तब
ऐसी खबर आ रही थी कि दिल्ली से पेरिस का जो फ्लाइट टिकट का प्राइस था कीमत उससे डबल प्राइस दिल्ली से पटना का था क्योंकि पटना बहुत लोग जाते हैं बिहार में छठ पूजा मनाने तो क्या ऐसा सिनेरियो असली में हुआ था जी हां ऐसा असली में हुआ था और सबसे इंपॉर्टेंट बात जानने की यह है कि ट्रेन का टिकट प्राइस तो रेगुलेटेड है सरकार उसको कम रखती है चाहे रेलवे को लॉस हो फिर भी पता ही होगा आपको लेकिन फ्लाइट का जो प्राइस है ना वो अभी भी कोई फ्रेमवर्क के अंदर नहीं है यानी
थ्योर प्लेन के प्राइस को कोई भी कंपनी कितने भी ऊपर लेके जा सकती है और हम कुछ भी नहीं कर सकते तो वो पोरली डिमांड और सप्लाई के गेम पे चलता है और डिमांड बढ़ा तो दिल्ली से पटना का टिकट 22000 क्या 50000 भी पहुंच सकता है अगर बहुत ज्यादा ऐसा फ्यूचर में हो कि लोगों के पास इतना इनकम होने लगे कि सब कोई फ्लाइट में जा रहे हैं आ रहे हैं ऐसा जब भारत हो जाएगा तब प्राइस उतना भी बढ़ सकता है लेकिन हां तब तक प्राइस कंट्रोल वाला कोई नियम आ चुका होगा फैक्ट
नंबर सेवन देखो आपको ये पता ही होगा कि कुछ ऐसी बीमारियां होती है जिससे धरती का हर एक आदमी डरा हुआ होता है खांसी बुखार हुआ ठीक हो जाएगा लेकिन अगर एचआईवी एड्स हो गया तो ठीक होना इंपॉसिबल है कुछ बातें होती है ना लाइफ में जिसके लिए 1 पर तो चांस होता है कि हां वो बच जाएगा लेकिन एचआईवी एड्स होने पे अगर कोई ट्रीटमेंट ना ले तो उसका मरना पक्का है अकॉर्डिंग टू साइंस तो यहां पर एक फैक्ट है कि एचआईवी एक इंसान को उसी इंसान से आ सकता है जिसको एचआईवी हो रखा
है अगर सामने वाला इंसान हेल्दी है तो कभी भी एचआईवी नहीं आएगा तो यहां पर एक सवाल आता है कि एचआईवी क्रिएट नहीं हो सकता है वो उसी से आ सकता है जिसको हो रखा है तो ऐसा देखें तो दुनिया में पहली बार एचआईवी कैसे हुआ तो आप यकीन नहीं करोगे ये जानवर लोग ना बहुत बदमाश होते हैं जानवरों के चलते पहला एचआईवी का केस आया था और यह बीमारी उस जगह से आई है जहां पे इंसानों का इंट्रोडक्शन हुआ था यानी अफ्रीका अफ्रीका में सूटी मैंगा बे मंकीज यह प्रजाति है बंदर के और विश्व
में पहली बार इस बंदर का ब्लड बंदर का छिल उल गया होगा कुद फाने के चलते तो बंदर का ब्लड क्या हुआ कि किसी इंसान के घाव पे आके टच हो गया और इस तरह पहली बार जानवर से इंसान में आया यह बीमारी और उसके बाद फिर इंसानों से इंसानों में फैला यानी इस दुनिया में अफ्रीका में एक ऐसा इंसान होगा जिसने इस बीमारी की शुरुआत की फैक्ट नंबर सिक्स पिछले फैक्ट में हमने एचआईवी के पहले केस के बारे में बात की अब मैं आपसे पूछता हूं कि इस दुनिया में पहला ऑटोमोबिल एक्सीडेंट किसके साथ
साथ हुआ था अभी आप स्टेटिस्टिक्स जानोगे तो रोज कितने 100 लोग मरते हैं रोड एक्सीडेंट्स में लेकिन आपको एक बात पता है दुनिया में सबसे पहला कोई गाड़ी से ठुक के मरा हो ये चीज जब सबसे पहली बार हुई ना तो इसका शुरुआत ही बहुत अनलकी था क्योंकि पहले एक्सीडेंट में जो मरी थी वो एक माइक्रोस्कोप साइंटिस्ट थी एक एस्ट्रोनॉमिकली हुआ तभी कर्ड हो गया थोड़ा डीप आप देखो तो फैक्ट नंबर फाइव देखो इस धरती में ऐसा कोई जगह नहीं है जहां पे कुत्ते बैंड है आपकी जहां इच्छा है वहां पे आप कुत्तों को लेके
चले जाओ डॉग्स को सिर्फ एक जगह छोड़ के आपका पेट कितना भी प्यारा हो दुलारा हो लेकिन आप कुत्तों को अंटार्कटिका में नहीं ले जा सकते अंटार्कटिका में कुत्ते 1994 से बैंड है क्योंकि अंटार्कटिका में ना बहुत रियर स्पीशीज रहते हैं जानवरों के और वो बहुत वैल्युएबल माने जाते हैं और कु कुत्तों से क्या हो सकता है कुत्तों से बहुत तेजी से बीमारी फैल सकता है उन रेयर जानवरों के अंदर फैक्ट नंबर फोर मैंने सात सात सात के बारे में बहुत सारे फैक्ट्स बताए हैं पास्ट में तो उससे रिलेटेड एक इंसान ने कमेंट किया था
मुझे बड़ा अजीब लगा कौरव भाई ये कह रहे हैं कि क्या ये सच है कि ड्राइवर का सात मर्डर माफ हो जाता है ये क्या है भाई पुलिस को भेजो ये कमेंट कैसा कमेंट है कौन ये सब बातें फैलाता है पता नहीं कि ड्राइवर का साथ मर्डर माफ हो जाता है पगला गए हो फैक्ट नंबर थ्री अ अपना दिमाग थोड़ा शांत कर लो क्योंकि अभी जो फैक्ट बताने वाला हूं वो शायद आपको बहुत घिनौना लगे एक बीमारी है जिसका बहुत सिंपल सा इंग्लिश नाम है ट्री मैन सिंड्रोम जिसका साइंटिफिक नेम यही है कुछ है और
ये स्किन पे होता है जिसमें इंसान के हाथ पैरों में ऐसा कुछ जम जाता है कि देखने प लगता है कि लकड़ी जम गया है और इस केस में इंसान कुछ ऐसा दिखने लगता है भाई सच कहूं ना तो मुझे लगता है कि पहले के जमाने में कर्स का बात करते थे किस इंसान को श्राप मिला था कि यह लकड़ी का बन जाएगा ये सब चीजें जब देखता हूं और वो भी एक बीमारी है जिसे साइंस ने स्टडी भी किया है तो लगता है कि अच्छा यही कर्स हो सकता है जिसमें लिटरली इंसान पेड़ की
तरह दिखने लगे फैक्ट नंबर टू एक बहुत फनी सा फैक्ट है ऑस्ट्रिया और ऑस्ट्रेलिया इन दोनों कंट्रीज का आपस में दूर-दूर तक कोई कनेक्शन नहीं है और आप यकीन नहीं करोगे दर्जनों ऐसे केसेस हो चुके हैं जिसमें लिटरली आपको यकीन होगा ही नहीं इंसान को जाना था ऑस्ट्रेलिया वो जल्दी-जल्दी में टिकट बुक कर लेता है ऑस्ट्रेलिया का सोलो ट्रेवल कर रहा है बैग लेके जमा करेगा एयरपोर्ट में जाएगा बोर्ड करेगा ध्यान नहीं गया उसको कि मैंने ऑस्ट्रेलिया के बदले ऑस्ट्रिया बुक कर दिया और फिर जब वो एयरपोर्ट में उतरते हैं तो उनको लगता है कि
ये तो ऑस्ट्रिया आ गया मैं ऐसा एक्चुअल में केसेस हुए हैं भले ही आपको अनबिलीवर्स करने के लिए इनका मजाक उड़ाने के लिए ऑस्ट्रिया के जो मेन एयरपोर्ट्स है वहां पे कुछ ऐसे स्टीकर आपको देखने को मिलेगा नो कंगारूज इन ऑस्ट्रिया यानी कंगारू फंगूल हो तो ऑस्ट्रेलिया जाओ यहां पे कंगारू नहीं मिलेगा ये सही में ऑस्ट्रिया और ऑस्ट्रेलिया बहुत सेम 90 पर सेम साउंड करता है फैक्ट नंबर वन googleapis.com किया है सब जगहों को और इसमें आप एक चीज नोटिस करो चाइना कितना खाली है चीन का मैप कितना खाली है और इधर नॉर्थ कोरिया का
भी एरिया कितना खाली है जिससे पता चल रहा है कि चीन और नॉर्थ कोरिया जहां पे डेमोक्रेसी नहीं है वहां पर चीजें कितनी रिस्ट्रिक्टेड है बोनस फैक्ट हमने न्यूरोसाइंस के बहुत सारे फैक्ट्स को एक्सप्लोर किया है और हमें पता है कि इंसानी दिमाग कितना अजीब तरह से काम करता है तो क्या है ना कि हमारे रियल वर्ल्ड में ऐसी कई चीजें हैं जो कि दिखती है रियल बट होती नहीं है क्या बोल रहा हूं मैं एगजैक्टली बता रहा हूं देखो वैज्ञानिकों ने जब ब्रेन स्कैन किया तो उनको पता चला कि आप जब भी कोई चीज
को याद करते हो मान लो कि एक लड़का है जिसका ब्रेकअप हो गया था 3 साल पहले किसी बहुत ही चहेती लड़की से तो अब वो उसको मिस करता है ठीक है तो आप ही बताओ ऐसा क्यों होता है कि जब वही लड़की 3 साल बाद उसके पास वापस आएगी तो सामने से देख के वो घृणा करेगा गुस्सा करेगा ये करेगा सामने होना नहीं चाहेगा लेकिन रात को 2 बजे सैड सॉन्ग लगा के जरूर रोएगा तो क्या है ये आखिर मतलब ऐसा क्यों तो विज्ञान ये बताता है कि हम ना इंसान को मिस नहीं करते
बल्कि न्यूरो केमिकल्स को मिस करते हैं जैसे कि आप किसी को भी याद करो आपकी क्रश को याद करो तो एक सेट ऑफ केमिकल आपके दिमाग में हिट करता है आप अपने पेरेंट्स को याद करो वो दूसरा सेट ऑफ केमिकल है तो आप उस केमिकल के एक्सपीरियंस को मिस करते हो ना कि उस इंसान को ऐसा न्यूरोसाइंस बताती है आप शायद अग्री नहीं भी करोगे नॉर्मल बात है लेकिन जो साइकोलॉजी और न्यूरोसाइंस में बड़े-बड़े वैज्ञानिक काम करते हैं वो इसी बात को कहते हैं दिमाग सही में बहुत अजीब सी चीज है इसीलिए कभी-कभी जितना आपको
किसी इंसान के लिए सामने फील होता है उससे ज्यादा फील तब होता है जब आप उसको याद करते हो स्पेशली आप जब अकेले होते हो तब ये काफी डीप सा गहरा सा फीलिंग वाला फैक्ट था तो ये थे आज के सारे अमेजिंग फैक्ट वीडियो को लाइक जरूर करना और नीचे कमेंट जरूर करना और वीडियो को शेयर जरूर करना थैंक यू फॉर वाचिंग मिलते हैं अगली वीडियो में