[संगीत] एकटी कबरे सामने जावा मात्र हजरत मोहम्मद सल्ला अ सलाम चेहरा मोबारक घम देखा दिलो तिनी अस्थिर होए पलेन दुश्चिंता चेहरा कालो होए उलो अल्लाह रासल सला सलम परेशान होए गले एमन अवस्था देखे एकजन साबी तखन बोलेन हे अल्लाह रसूल अपनी तो परेशान केनो हाय हाय तिनी अस्थिर होए बोलेन ओ कब बासिंदर ऊपर भयानक आजब हो एमन शास्ति जा भाषा बोला जाय ना आहा ए व्यक्ति की उपाय बोले तिनी कबरे हात मोबारक रेखे दुआ करले किंतु चेहरा कोन प्रशांति लो ना तिनी बोलेन दोआ कबुल हो ना कोन रहस्यमय कारण साघा दिक बड़ो पाप से करछ
रसूल सलाम अस्थिरता बड़ चलो तिनी बोलेन उम्मत र एमन कठिन शास्ति हो आ बाड़ी गए घुमा तिनी त एकजन साथी के डेके बोलेन जाओ मदीना बाजारे सेखाने आवाज दिए डाको जाद आ कबर खाने रए तरा आसार जन हजरत मोहम्मद सलाम एमन सवाद पे तरा सकले लो तार के नेज निज आर कबरे दाते बला होलो सई दलो किंतु आश्चर्य ओ कबर पाशे के लो ना ना नील हो सलाम अनेक पर एलो एक बुड़ी धीर पाए लाते भर दिए सेही बुड़ी दलो सेही कब पाशे हजरत मोहम्मद सल्ला अ सलाम सस्त निश्वास फेले ताप बृद्धा के जिज्ञासा करले
टा कार कबर बृद्धा बोललो अर ले आपर लेर कबरे भयानक शास्ति हो तखन बुड़ी बोललो या रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अ सल्लम टा की सत्य रसूल सल्लल्लाहु अ सलाम बोलेन स सुने ब बोलो खूब खुश होए रसूल सलाम बोलेन अला माफ कर अनी बोलन मा आप संतान तखन बद्ध बोलो सुन ताले हे अल्ला रास बा जखन पेटे तखन ता बाबा मारा जाय से पृथिवी मुख देखलो ता के लो ना निद कष्ट ता ब तुला ल तील स्त्री के पे भले गलो आके एक दिन ता लो बासर ब काने काने की जन बोलो ले रागे धीर हो मारते
शुरु करलो आके त बत हो गला ज्ञान हराला हश फिरले प्रार्थना करलाम अल्लाह दरबारे दोहा तुले बोलला हे अल्लाह ताके कबरे शास्ति ओ अनंत काल धरे दुनियाते दियो ना ख सामने लेर कष्ट स करते पबना नन खुशी दोआ कबुल होए हुजूर सलाम रता सरल प्राण बृद्ध क शने चोखे पानी चेपे खते पलेन ना नर मुखता मतो त्र ल ब फटा फटा पते लागलो खानि पर निजे के साले नि बोलेन हे बृद्ध मा तुम तुमार ले के क्षमा करो से भयावह शास्ति पा बृद्ध महिला बोलेन हे रसूला सलाम न्य किछु बोल ले केमा करब ना रुपा
होए हुजूर पाक सलाम आकाश दि मुख तुले का बोलेन हे अल्ला बृद्ध के कब शास्ति ओ चोख पलके घटना टलो बृ चोख बस्त होलो से प्राण फटा चित्कार बेश गलो खानि पर जन फिलो बधार थथ का जन र खातर म बो ओ ख क आजब कीमन ष एमन भयानक ले पु शरीर थे ड़ उ ने ताके मगर पेटा हो हे अल्ला रसूल ताके क्षमा करलाम अपनी दोआ करुन से जन मुक्ति पाय हुजूर सला अ वसलाम हात उठाले दोआ शेष उन चेहरा उज्जल प्रकृति आकाश बाता नेलो सुमन समाहित परिश द न मुब गभीर प्रशांति चार दि
शांतिर छया अल्लाह ताला हम सकल पिता माता खमत करर तौफिक दान करुन आमीन प्रियो दर्शक श्रोता आज पंत इस्लाम विभिन्न काहिनी नियमित जानते होले हमद चैनल सब्सक्राइब करु एवं लाइक कमेंट शेयर करु धन्यवाद