आपने अगर कभी किसी भी कम से इंडियन गवर्नमेंट की कोई वेबसाइट विजिट की होगी तो एक फीलिंग जरूर आती है इन वेबसाइट को विजिट करने के बाद की ऐसा लगता है हम 990 से ₹3000 में ए गए हैं 2022 में इंडिया दुनिया का इट हब होने के बावजूद अच्छे गवर्नमेंट वेबसाइट क्यों नहीं बना पता क्या इसके पीछे कोई जेनुइन रीजन है या फिर बस जो हमें जनरली गवर्नमेंट एम्पलाइज के अंदर लॉक ऑफ विल इंग्लिश नजर आता है अच्छा कम करने के लिए वही रीजन बनता है वेबसाइट का डिजाइन खराब होने की पीछे यह क्यों है
इसी के बारे में आज हम जानेंगे दोस्तों ज्यादातर यही मानते हैं की जो unbilingness है जो हमारे यहां पर कहीं ना कहीं पर रिलीज भी नजर आता है वो रीजन है वेबसाइट के डिज़ाइन खराब होने की पीछे लेकिन ये सच बात नहीं है कुछ जेनुइन रीजंस भी निकल कर आते हैं उन सबके डिज़ाइन को खराब बनाते हैं फॉर एग्जांपल जो सारी गवर्नमेंट वेबसाइट से उनको फॉलो करनी पड़ती है जी आई जी डब्लू गाइडलाइंस यानी की गाइडलाइंस फॉर इंडियन गवर्नमेंट वेबसाइट इसको मैं पूरा का पूरा तो वीडियो में एक्सप्लेन नहीं कर सकता लेकिन ये बेसिकली एक
144 पेज का डॉक्यूमेंट है जो हर एक चीज स्पेसिफाई करता है की किसी भी गवर्नमेंट वेबसाइट को किस तरीके से डिज़ाइन किया जाना चाहिए फ्रंट एंड बैक एंड दोनों तरफ से फिर चाहे वो विजुअल ले आउट हो यहां पे ग्राफिक बंटस और आइकंस हो ऑडियो वीडियो एनीमेशन किस तरीके से होना चाहिए प्राइमरी कंटेंट क्या होना चाहिए सेकेंडरी कंटेंट क्या होना चाहिए इसकी अलावा सर्च इंजन ऑप्शन का कैसे किया जाए जो वेबसाइट मैनेजमेंट वो किस तरीके से डाक्यूमेंट्स की आर्क का भी वेबसाइट पे कैसे हो मोबाइल फोन के लिए इनके एक्सेसिबिलिटी कैसी हो उनका होस्टिंग किस
तरीके के सर्वर में किया जाए सारी की सारी इनफॉरमेशन को इस बुक में लिखा गया है और जो भी सरकारी वेबसाइट बनती है उनको यह फॉलो करना जरूरी है अब प्रॉब्लम यह है की ये गाइडलाइंस सही तरीके से बनाई तो गई थी लेकिन समय के साथ इसका हर एक चीज अपडेट होना भी जरूरी था जो इतने अच्छे से नहीं हो पाया है अर्ली 2000 में 2002 वगैरा भी चीज चलती थी लेकिन अभी ये चीज जो है इतनी एप्लीकेशन नहीं बनती नई चीजों का इंट्रोडक्शन उसके जैसी मुश्किल हो जाता है बट फिर भी फॉलो ये गाइडलाइंस
करनी पड़ती है एग्जांपल अगर मैं आपको बताऊं तो आज भी इंडियन गवर्नमेंट वेबसाइट के लिए जरूरी है की तो इंटरनेट एक्सप्लोरर और माइक्रोसॉफ्ट टेक्नोलॉजी फॉर वेब एंड इंटरनेट को ही कंसीडर करके उनकी बेसिक वेबसाइट डिज़ाइन कारी जिसका जैसे आपको कई बार वेबसाइट में नजर भी आता होगा की इंटरनेट एक्सप्लोरर बेस्ट एक्सपीरियंस 2022 की बात करें तो इंटरनेट एक्सप्लोरर डेड हो चुका है खुद माइक्रोसॉफ्ट से आगे के साथ में रिप्लेस कर चुका है और इसके वजह से गाइडलाइंस के अंदर बनी हुई वेबसाइट पुरानी नजर आती है obbviesli इसकी अलावा कई सारे छोटे-मोटे अटरीब्यूट्स होते हैं जो
क्रिएटिव और जो मॉडर्न आज के स्टैंडर्ड से वेबसाइट्स की उनको पीछे धकेल देती है फॉर एग्जांपल टेक्स्ट ज्वाइन वेबसाइट पे होगा वो इस तरीके से होना ही चाहिए जो प्रिंट फॉर्मेट में और डिजिटल फॉर्मेट में से लिखे A4 पेपर के साइज के हिसाब से इस वजह से टेक्स्ट के अंदर ज्यादा खिलवाड़ नहीं हो सकती वेबसाइट जो है ये अगर लोड पुरी डिग्री से हो ना जाए यानी अगर गलती से इंटरनेट बंद चालू हो जाए वेबसाइट तक हो जाए तो भी ये स्विच ऑफ नहीं होनी चाहिए ऑटो रीलोड नहीं होनी चाहिए फंक्शनैलिटी जो पुरी की पुरी
वेबसाइट है इसे बिना माउस की ऑपरेट करना भी पॉसिबल होना ही चाहिए जो आज के कई सारे वेबसाइट पर बिना माउस के अपडेट कर नहीं सकते लेकिन गवर्नमेंट और मेजर्ली यही बिगेस्ट रीजन बन के आता है की के गवर्नमेंट वेबसाइट जो है इतनी अच्छी डिज़ाइन नहीं हो पाती है शॉर्ट में इंक्लूजन अगर कहे तो कुछ ऐसे गाइडलाइंस को फॉलो करना पड़ता है जो खुद पस्त मिनट की है उनको इतने अच्छे से अपडेट नहीं किया गया है और उनको फॉलो करने की वजह से इंडियन वेबसाइट पीछे हो जाती है प्राइवेट कंपटीशन से लेकिन कई सारे नॉन
जेनुइन रीजंस भी है जो इंडियन वेबसाइट के रीजन को पूरा बनाता है सबसे पहले उसके अंदर निकल के जाता है गवर्नमेंट इन लोगों से अपनी वेबसाइट banvaati है गवर्नमेंट टेंडर्स के अंदर जनरली 10 शेयर्स से ज्यादा इट एक्सपीरियंस वाली कंपनी को इन वेबसाइट के अंदर कम करने के लिए बुलाया जाता है जो प्रोग्राम्स होते हैं वो फाइव प्लस थ्री प्लस तू प्लस लेवल सर्टिफिकेट वाले होते हैं लेकिन जनरली जो एजेंसी होती है ये लोअर टायर टायर 3 एजेंसीज होती है जिसके वजह से उनके अंदर इतनी अच्छी नहीं होती इसकी अलावा की सी एस आई जो
नेशनल इनफॉर्मेटिक्स सेंटर सर्विसेज है ये जो में बजट होता है इन वेबसाइट को बनाने के लिए उनमें से कुछ चार्जेस वगैरा लेने के आदमी अगली जो एजेंसी उनको पैसे देती है जिसके वजह से होता यह है की जो ये कंपनी डिजाइन कर रही है उनके बस में ज्यादा मॉनिटरी बेनिफिट नहीं है इन वेबसाइट को डिज़ाइन करने के लिए और इसके लिए जितना हो सके उतना वो फटाफट के और इजी तरीके डिज़ाइन करने दे रहे हैं इसके अलावा सेकंड रीजन निकल के आता है मल्टीपल ऑफिसर्स डिसाइडिंग ऑन वेबसाइट जनरली छोटे से छोटे गवर्नमेंट वेबसाइट के अंदर
कोई डिसीजन लेने के लिए मल्टीपल ऑफिसर से डिस्कशन लिए जाते हैं और इसके जैसे होता है की नया मटेरियल नहीं लेंगे वेबसाइट के अंदर ऐड होती रहती है और कोई एक सिंपल गाइडलाइन फॉलो होती नहीं है अगर हम बात करें कंटेंट की हिसाब से जिसके वजह से इनको डिजाइन करना डिफिकल्ट बन जाता है इसके बाद में गवर्नमेंट को वेबसाइट डिज़ाइन करना होता है इस तरीके से की इसके अलावा जो गवर्नमेंट वेबसाइट होती है वो एचटीएमएल में ही बनाई जाती है और स्टैटिक पेज की थ्रू ही बनी होती है इसका मतलब ये है की जो हर
एक आर्टिकल होगा हर एक डॉक्यूमेंट होगा हर एक डाउनलोड होगा वो किसी प्रोग्रामर को एक-एक करके जा के अपलोड करना पड़ता है और पिछले कुछ सालों में ऐसा हुआ भी है की जब गवर्नमेंट ट्री की है कुछ वेबसाइट को डायनेमिक बनाने की तो तो ऑफिस के द्वारा सिक्योरिटी रीजंस देते हुए मैनेजमेंट के अंदर चीज बिगड़ने के रीजंस को देते हुए इन चेंज को आने के लिए नहीं दिया गया फिफ्थ रीजन बनता है डेलाइब्रेट अटेम्प्ट अब इसका मतलब क्या है अगर आप देखिए तो गवर्नमेंट वेबसाइट के अंदर जनरली लुक तब जाते हैं जब उनको गवर्नमेंट से
भी कम हो कोई कंप्लेंट रजिस्टर करनी हो कोई सर्विस लेनी हो वहां पे उनको गवर्नमेंट से कुछ चाहिए हो तब वो जाते हैं लेकिन कई बार गवर्नमेंट के अंदर और चाहे वो ऑफिशल्स हो या औरत पूरा का पूरा गवर्नमेंट हो यह इतनी इजीली चीज देना नहीं चाहते क्योंकि वो उनके लिए कम हो सकता है फाइनेंस के अंदर एक एडिशन हो सकता है और इसके लिए कई बार ऐसी वेबसाइट डिलीवरी डिज़ाइन भी की जाती है जहां पर चीजों को ढूंढ पाना डिफिकल्ट हो नेविगेशन डिफिकल्ट हो वेबसाइट स्लोली लोड हो और इन रीजंस की वजह से भी
डिज़ाइन के अंदर चीजों को ज्यादा मुश्किल बनाने के लिए ऐड कर दिया जाता है फॉर एग्जांपल अगर मैं बात करूं प्राइवेट इंडस्ट्री में कहां पर होता है तो आप कभी जो है किसी भी कस्टमर केयर को फोन करेगी किसी नए कंपनी के अंदर आप जब इस रोबोट से बात कर लो उसके बाद में आप 10-15 मिनट रुको तब जाके आपका किसी एक्चुअल इंसान से कॉल कनेक्ट होता है जो आपकी प्रॉब्लम में भी सॉल्व या ना करें बट कंपनी का टाइम पास हो रहा है वहां पर कोई पर्सन ना माइंड चेंज कर लिया अपनी कंप्लीट दे
ही नहीं रिफंड वो मांगे ही नहीं जो की कहीं ना कहीं पर इस लेवल पे भी होता है फाइनली रीजन वही है जो आप सब लोग वैसे समझते ही होंगे गवर्नमेंट वेबसाइट के खराब होने के लिए जो की है लॉक ऑफ बिलिंग नेज जो मैंने कहा गाइडलाइंस को टाइम टुडे अपडेट ना करना मॉडल स्टैंडर्ड के साथ में ना रहे ना चेंज को आने देनी सी रोकना ऐसे चार्जेस एंड फीस को लेवी करना जो की बजट कम कर दे वेबसाइट को बनाने के लिए उन चीजों के वजह से गवर्नमेंट वेबसाइट का डिज़ाइन खराब होता है और
यही चीज आगे जाकर इंडिया को बहुत दिक्कतें दे सकती है क्योंकि एक डिजिटल कंट्री के तौर पर ये चीज इंपॉर्टेंट और अच्छी होना जरूरी है ऐसा नहीं की गवर्नमेंट की अच्छी वेबसाइट नहीं है अगर हम नेशनल फाइव लेंगे वेबसाइट देखते हो कुछ और दूसरी गवर्नमेंट वेबसाइट देखते हो तो आपको वो बहुत सुंदर नजर आएगी लेकिन यहां पर एक और एडिशन में कर देता हूं ये सिर्फ इंडिया की बात नहीं है जहां पर वेबसाइट पुरानी दिखती है आप कोई भी देश की डिवेलप से डिवेलप देश की जाके कोई कम वाली वेबसाइट देखो गवर्नमेंट डाक्यूमेंट्स गवर्नमेंट स्कीम
वाली वेबसाइट वो ऐसी घटिया नजर आती है क्योंकि जनरली सारे देश के अंदर ऐसी ब्यूरोक्रेसी में वो चीज करती है उम्मीद करता हूं आपको वीडियो अच्छी लगी अपने राय मुझे आप कमेंट्स में दे सकते हो मिलेंगे अगले वीडियो में